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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 29 August 2012

Published 29 August 2012

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-08-29.35
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 7 7 7 7 भािभािभािभाि 1931931931934444 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 33335555 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ———————— 22229999 अगःतअगःतअगःतअगःत 2020202011112222 ((((ईईईई0000)))) भाग-1—िनयु(cid:18)2, पदःथापन, बदली, श(cid:18)2, छु 7ट(cid:15) और अ9य :य(cid:18)2गत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु>म@ के समादेंटाओं के आदेश।

---

भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Iाओं के पर(cid:15)Iा-फल, कायKबम, छाऽवृ(cid:18)N ूदान, आOद।

---

भाग-1-ग—िशIा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Iाफल आOद ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राPयपाल और कायाKQयI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आOद। ---

भाग-3—भारत सरकार, पRSम बंगाल सरकार और उUच 9यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राPय गजट@ के उWरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ[त (cid:18)वधान मंडल मY उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Oकये जानेवाले ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और उ[त (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक।

---

भाग-7—संसद के अिधिनयम Rजनपर रांशपित क\ Pयेंठअनुमित िमल चुक\ है। ---

भाग-8—भारत क\ संसद मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और संसद मY पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व^ापन

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भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क\ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प_रवहन सूचनाएं, 9यायालय सूचनाएं और सवKसाधारण सूचनाएं इ`याOद। ---

पूरक

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पूरक-क 3-112 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012

भागभागभागभाग----1111

िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)2श(cid:18)2श(cid:18)2श(cid:18)2, , , , छु 7ट(cid:15) और अ9यछु 7ट(cid:15) और अ9यछु 7ट(cid:15) और अ9यछु 7ट(cid:15) और अ9य वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं वैय(cid:18)2क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

निर्वाचन विभाग

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अधिसूचनाएं

17 अगस्त, 2012

सं0 ई2-2-13/2012-31—4399—बिहार निर्वाचन सेवा के निम्नांकित उप निर्वाचन पदाधिकारियों को उप निर्वाचन पदाधिकारी वेतनमान पी॰बी॰-3 रू॰ `15600-39100 एवं ग्रेड पे॰ रू॰ `6600 (अपुनरीक्षित वेतनमान `10000-325-15200 रू॰) से उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वेतनमान पी0 बी0-3, `15600-39100 ग्रेड पे `7600 (अपुनरीक्षित वेतनमान `12000-375-16500 रू0) के पद पर अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से प्रोन्नति दी जाती हैः-

क्रमांक उप निर्वाचन पदाधिकारी का नाम/ वर्तमान पदस्थापन स्थान उप निर्वाचन पदाधिकारी का नाम/ वर्तमान पदस् उप निर्वाचन पदाधिकारी का नाम/ वर्तमान पदस् थापन स्थान वरीयता क्रमांक/गृह जिला
1 श्री मधु रंजन कुमार गुप्ता, उप निर्वाचन पदाधिकारी, मधेपुरा 04/2004/ सारण
2 श्री नन्द किषोर राम, उप निर्वाचन पदाधिकारी, सारण, छपरा। 05/2004/ बलिया (उ0 प्र0)

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आर॰ के॰ प्रसाद, संयुक्त सचिव।

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17 अगस्त 2012

सं0 ई2-2-13/2012-32-4400—निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या ई2-2-13/2012-31 सहपठित ज्ञापांक 4399 दिनांक 17.08.2012 के आलोक में उप निर्वाचन पदाधिकारी से उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर प्रोन्नति के पष्चात्‌ निम्नलिखित नवप्रोन्नत पदाधिकारियों को उनके वर्तमान पदस्थापन कार्यालय से स्थानांतरित करते हुए उनके नाम के समक्ष अंकित कार्यालय में उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर पदस्थपित किया जाता है :-

क्रमक्रमक्रमक्रम सं0सं0सं0सं0 पदाधिकारी का नाम एवं पदनाम कोटि क्रमांक कोटि क्रमांक कोटि क्रमांक कोटि क्रमांक एवं गृह जिला वर्तमान वर्तमान वर्तमान वर्तमान पदस्थापन का पदस्थापन का पदस्थापन का पदस्थापन का कार्यालय स्थानांतरण के उपरांत पदस्थापन का कार्यालय
1 2 3 4 6
1 श्री मधु रंजन कुमार गुप्ता, बि॰नि॰से॰ नवप्रोन्नत उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी 04/2004/ सारण मधेपुरा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार का कार्यालय, निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना।
2 श्री नन्द किषोर राम, बि॰नि॰से॰, नवप्रोन्नत उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी 05/2004/ बलिया (उ0 प्र0) सारण मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार का कार्यालय निर्वाचन विभाग, बिहार, पटना।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, आर॰ के॰ प्रसाद, संयुक्त सचिव।

ÑÑÑÑ अधीIकअधीIकअधीIकअधीIक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 24ÑÑÑÑ571+10----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in3 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000)))) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत

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iFk fuekZ.k foHkkx ——— vf/klwpuk,a 21 twu 2012 सं0 निग/सारा-3 (NH) (S)-26/06-6935 (एस)—श्री चन्देश्वर सिंह यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, बिहारशरीफ सम्प्रति जिला अभियंता, नवादा को राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल में मुख्यालय से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने, मुख्यालय में आवास नहीं रखने, कार्यों में शिथिलता बरतने, सरकारी निदेशों का पालन नहीं करने तथा पानी के तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त एन0एच0-82 के कटाव स्थल पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से ससमय बैरिकेटिंग या सावधानी सूचना पट्‌ट नहीं लगाये जाने जैसी बरती गयी लापरवाही एवं अकर्मण्यता के कारण हुई दुर्घटना में 8 (आठ) लोगों की मृत्यु जैसे आरोपों के लिए निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-1835 (एस) दिनांक 13.02.07 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी, जिसमें प्रमाणित आरोपों के लिए अधिसूचना संख्या-15333 (एस) दिनांक 08.11.10 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया था :-

(i) सेवानिवृति के वर्ष-2015 तक इनके सभी वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है, (ii) सेवानिवृति की तिथि तक इनको अकार्य पद पर पदस्थापित किया जाए, (iii) निलंबन की अवधि में इन्हें निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु इस अवधि की गणना पेंशन प्रयोजनार्थ की जायेगी।

2. श्री यादव, कार्यपालक अभियंता द्वारा उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-727/2012 दायर किया गया जिसमें दिनांक 07.02.12 को पारित आदेश में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अधिसूचना संख्या-15333 (एस) दिनांक 08.11.10 को निरस्त करते हुए नये सिरे से विभागीय कार्यवाही संचालित करने का आदेश दिया गया।

3. माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में अधिसूचना संख्या-15333 (एस) दिनांक 08.11.10 को निरस्त किया जाता है।

4. श्री यादव के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु अलग से संकल्प निर्गत किया जा रहा है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।

——— 1 vxLr 2012 सं0 निग/सारा-4 (पथ)-आरोप-118/10-8485 (एस)—श्री कामेश्वर प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सुपौल को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के गठित धावा दल के द्वारा ` 40,000.00 (चालीस हजार रूपये) रिश्वत लेते रंगे हाथों दिनांक 05.03.08 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के फलस्वरूप श्री सिन्हा को अधिसूचना संख्या-5312 (एस) दिनांक 16.04.08 द्वारा दिनांक 05.03.08 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया है। श्री सिन्हा द्वारा अपने अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य दिनांक 24.04.12 एवं 20.06.12 द्वारा निलंबन अवधि को 1 वर्ष से ज्यादा हो जाने के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता में बढ़ोतरी का अनुरोध किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं4 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012 अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 (1) में निहित प्रावधान के आलोक में श्री सिन्हा के अभ्यावेदन पर विचारोपरांत श्री कामेश्वर प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति निलंबित, अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के जीवन निर्वाह भत्ता में दिनांक 05.03.09 से 50 (पचास) प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।

——— 17 tqykbZ 2012 सं0 निग/सारा-5 (ग्रा0)-2004/02-7843 (एस)—श्री अवधेश उपाध्याय, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, जहानाबाद सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, अररिया के विरूद्ध कार्य प्रमंडल, जहानाबाद के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के मामले में संचालित विभागीय कार्यवाही के उपरांत अधिसूचना संख्या-3236 (एस) दिनांक 25.03.06 द्वारा उन्हें दण्ड संसूचित किया गया था।

2. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री उपाध्याय द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-7308/2006 में दिनांक 21.10.11 को पारित आदेश के आलोक में अधिसूचना संख्या-1527 (एस) दिनांक 08.02.2012 द्वारा अधिसूचना सं0 3236 (S) दिनांक 25.03.06 को निरस्त किया गया तथा सरकार के आदेशोपरांत विभागीय संकल्प संख्या-1972 (एस) अनु0 दिनांक 21. 02.2012 द्वारा नये सिरे से विभागीय कार्यवाही संचिालित की गई।

3. श्री उपाध्याय द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने के विरूद्ध अवमाननावाद सं0-214/2012 दायर किया गया जिसमें नए सिरे से विभागीय कार्यवाही संचालित किए जाने के विरूद्ध Supplemetary Affidavit दिया गया।

4. श्री उपाध्याय द्वारा अवमाननावाद सं0-214/2012 में दाखिल Supplementary Affidavit के आलोक में संपूर्ण तथ्यों के आलोक में संपूर्ण तथ्यों के समीक्षोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1972(S) दिनांक 21. 02.2012 को निरस्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।

——— 7 vxLr 2012 सं0 निग/सारा-1-102/2001-8795 (एस)—श्री कमालुद्‌दीन खाँ, तत्कालीन कनीय अभियंता, हिसुआ प्रशाखा, पथ प्रमंडल, नवादा सम्प्रति सेवा से बर्खास्त के विरूद्ध हिसुआ प्रशाखा, पथ प्रमंडल, नवादा पदस्थापन काल में उनके प्रभार में 48. 930 मे0टन बिटुमिन एवं 6.7 मे0टन बल्क बिटुमिन की कमी, नियमानुसार Site Account Register संधारित नहीं करने, undated gate pass निर्गत करने जैसी बरती गयी अनियमितताओं के लिए सी0बी0आई0 कांड संख्या-RC 3 (A)/97 pat में सी0बी0आई0 द्वारा वृहद दंड हेतु विभागीय कार्यवाही चलाने की की गयी अनुशंसा के आलोक में कार्यालय आदेश संख्या-15-सहपठित ज्ञापांक-277 (ई) दिनांक 19.01.02 द्वारा संचालित की गयी विभागीय कार्यवाही में प्रमाािण्त आरोपों के लिए कार्यालय आदेश संख्या-70-सहपठित ज्ञापांक-678 (ई) दिनांक 04.03.09 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया गया। 2. श्री खाँ, द्वारा उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में दायर याचिका सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-11887/2009 में दिनांक 10.09.09 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री खाँ द्वारा संसूचित दंड के विरूद्ध समर्पित अपील अभ्यावेदन दिनांक 04.10.09 को सरकार के निर्णयानुसार कार्यालय आदेश संख्या-389-सहपठित ज्ञापांक-4886 (ई) दिनांक 21.12.09 द्वारा अस्वीकृत किया गया। 3. श्री खाँ द्वारा उक्त के विरूद्ध पुनः माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-18933/11 दायर किया गया जिसमें दिनांक 05.04.2012 को पारित आदेश द्वारा माननीय न्यायालय ने श्री खाँ के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत किये जाने संबंधी का0आ0सं0-389 दिनांक 21.12.2009 को निरस्त करते हुए दो माह के अंदर श्री खाँ के अपील अभ्यावेदन को निस्तारित करने का निदेश दिया गया। 4. माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में श्री खाँ के अपील अभ्यावेदन दिनांक 04.10.09 पर माननीय मंत्री, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा विचार किया गया एवं उनके द्वारा पाया गया कि :-

(i) श्री कमालुद्‌दीन खाँ सेवा से बर्खास्त कनीय अभियंता द्वारा हिसुआ प्रशाखा, पथ प्रमंडल, नवादा नवादा के पदस्थापन काल में 70.25 एम0टी0 पैक्ड बिटुमिन एवं 7.5 एम0टी0 बल्क बिटुमिन श्री रामजतन राम चौकीदार द्वारा बेच दिये जाने की लिखित शिकायत के आलोक में हिसुआ थाना कांड संख्या-94/96 दर्ज किया गया था। सी0डब्लू0जे0सी0सं0-10417/96 में दिनांक 20.02.97 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में सी0बी0आई0 द्वारा उक्त केस को सी0बी0आई0 केस नं0-आर0सी0 3 (ए)/97 पैट के रूप में दर्ज किया गया, जिसमें सी0बी0आई0 द्वारा श्री खाँ के प्रभार में 48.930 MT पैक्ट बिटुमिन एवं 6.7 MT बल्क बिटुमिन की कमी, नियमानुसार Site Account Register संधारित5 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012 नहीं करने, undated gate pass निर्गत करने के आरोप के लिए श्री कमालुद्‌दीन खाँ के विरूद्ध वृहद दंड हेतु विभागीय कार्यवाही चलाने की अनुशंसा की गयी।

(ii) सी0बी0आई0 से प्राप्त अनुशंसा के आलोक में का0आ0सं0-15 दिनांक 19.01.02 द्वारा श्री खाँ, कनीय अभियंता के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसमें विभगाीय जाँच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया, परन्तु विभगाीय जाँच आयुक्त कार्यालय द्वारा कतिपय त्रुटियों के आलोक में इसे बिना प्राप्त किये वापस कर दिया गया, जिसके उपरांत का0आ0सं0-343 दिनांक 04.10.02 द्वारा श्री रमेन्द्र कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव के संचालन में पुनः विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। प्रारंभ में विभागीय कार्यवाही के दौरान श्री खाँ उपस्थित हुए तथा उनके द्वारा सी0बी0आई0 कांड सं0-3 (ए)/97 पैट से संबंधित कतिपय कागजात की मांग की गयी। तत्पश्चात्‌ उनके द्वारा विभागीय कार्यवाही में भाग नहीं लिया गया। संचालन पदाधिकारी के अनुरोध पर सी0बी0आई0 द्वारा कागजात उपलब्ध कराया गया जिसे श्री खाँ को भेजा गया जो उनके अनुपस्थित रहने के कारण वापस लौट गया। (iii) संचालन पदाधिकारी द्वारा बिना किसी सूचना के श्री खाँ की लगातार अनुपस्थिति एवं अपनी आसन्न सेवानिवृति के कारण विभागीय कार्यवाही को वापस कर दिया गया। श्री खाँ की अनाधिकृत अनुपस्थिति को पूरक आरेाप के रूप में गठित करते हुए श्री खाँ के विरूद्ध संचालित विभगाीय कार्यवाही में श्री जयकरण प्रसाद सिंह को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया, परन्तु श्री खाँ के लगातार अनुपस्थित रहने के कारण संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही को वापस कर दिया गया। श्री खाँ के लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उपस्थित होने का उन्हें निदेश दिया गया।

(iv) कालान्तर में श्री खाँ के उपस्थित होने पर श्री ए0पी0 साहा के संचालन में विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही का विधिवत संचालन कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें श्री खाँ के विरूद्ध गठित दोनों आरोप को प्रमाणित माना गया, जिसके लिए संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए सेवा से बर्खास्त किये जाने के प्रस्तावित दंड पर श्री खाँ से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने हेतु श्री खाँ द्वारा कतिपय कागजात की मांग की गयी, जिसके आलोक में श्री खाँ को कार्यालय में आकर कागजात का अवलोकन करने तथा प्रमंडल से संबंधित कागजात का अवलोकन प्रमंडल में कर द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने का निदेश दिया गया, परन्तु श्री खाँ द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित नहीं किया गया तथा उत्तर बिहार (या0) उपभाग में स्थानान्तरण होने के पश्चात्‌ वे पुनः बिना सूचना के अनुपस्थित हो गए। उनकी लगातार अनुपस्थिति के मद्‌देनजर प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से वांछित कागजात प्राप्त कर द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित करने का निदेश श्री खाँ को दिया गया। बावजूद इसके श्री खाँ द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित नहीं किया गया। इस प्रकार समुचित अवसर प्रदान किये जाने के बाद भी श्री खाँ द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित नहीं किया गया। तत्‌पश्चात्‌ का0आ0सं0-70 दिनांक 04.03.09 द्वारा सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह आदेश स्वतः स्पष्ट है।

(v) श्री खाँ द्वारा उक्त संचालित विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध सी0डब्लू0जे0सी0सं0-4914/2007 भी दायर किया गया था जिसे उनके द्वारा दिनांक 15.10.2011 को वापस ले लिया गया।

(vi) श्री खाँ ने अपने अपील अभ्यावेदन दिनांक 04.10.09 जिसे सरकार के निर्णय के उपरांत अस्वीकृत किया

vihy vkosnu esa la{ksi esa vafdr dafMdkokj rF; oLrqfLFkfr
1-बर्खास्तगी को रद्‌द करने तथा सभी सेवानिवृत लाभों के भुगतान का अनुरोध किया गया। श्री खाँ का अपील
2-इसमें कनीय अभियंता, हिसुआ प्रशाखा, पथ प्रमंडल, नवादा के पदस्थापन काल के दौरान दिनांक 02.07.96 को हिसुआ प्रशाखा के गोदाम से चोरी की प्राथमिकी कांड संख्या-69/96 दर्ज करने तथा दिनांक 06.07.09 को उनके द्वारा दर्ज प्राथमिकी को 16.07.96 बना दिये जाने का उल्लेख है। प्रत्यक्षतः आरोप से इसका संबंध नहीं दिखता है। उनके द्वारा संलग्न अनुलग्नक से भी यह स्थापित नहीं होता है कि 6 को 16 बनाया गया है। इस प्रकार के manipulation का उल्लेख सी0बी0आई0 के अनुसंधान प्रतिवेदन में भी नहीं है।
3-उक्त दर्ज केस को सी0बी0आई0 द्वारा आर0सी0 3 (ए)/97 पैट के रूप म दर्ज ं े किया गया जिसमें अनुसंधानोपरांत आरोप सत्य नहीं पाया गया तथा सी0बी0आई0 द्वारा अंतिम प्रतिवेदन माननीय न्यायालय में समर्पित किया गया। अनुसंधान के उपरांत सी0बी0आई0 द्वारा द्वारा वृहद दंड हेतु विभागीय कार्यवाही चलाने की अनुशंसा की गयी।
4-सी0बी0आई0 द्वारा अंतिम रिपोर्ट समर्पित करने के उपरांत इनके विरूद्ध ज्ञापांक-343 दिनांक 04.10.02 एवं ज्ञापांक-2889 दिनांक 28.10.03 द्वारा विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी। विभागीय कार्यवाही सर्वप्रथम का0आ0-15 दिनांक-19.01.02 द्वारा शुरू किया गया था जिसे संचालन पदाधिकारी विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा वापस कर दिये जाने के उपरांत का0आ0-343 दिनांक 04.10.02 द्वारा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ किया गया।
5-पत्र दिनांक 28.10.03 के अवलोकन से ज्ञात होता है कि विभागीय कार्यवाही आदेश सं0-343 दिनांक 04.10.02 द्वारा शुरू किया गया, परन्तु उनके द्वारा सहयोग नहीं किया गया, जबकि पूर्ण सहयोग किया गया था तथा संचालन पदाधिकारी के सेवानिवृत होने के कारण वापस कर दिया गया। का0आ0सं0-343 दिनांक-04.10.02 द्वारा संचालित विभगाीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी श्री रमेन्द्र कुमार सिन्हा के पत्रांक-4109 (एस) दिनांक 23.05.03 से स्पष्ट है कि श्री खाँ के अनधिकृत रूप से लगातार अनुपस्थित रहने तथा अपनी सेवानिवृति सन्निकट देखते हुए विभागीय कार्यवाही का अभिलेख उनके द्वारा वापस कर दिया गया। इनकी इस अनधिकृत अनुपस्थिति को बाद में अनुपूरक आरोप के रूप में सम्बद्ध किया गया।
6-आरोप पत्र प्राप्त होने के उपरांत संचालन पदाधिकारी से कारण पृच्छा दायर करने हेतु सी0बी0आई0 द्वारा उपलब्ध कराये गये कागजात की मांग पत्र दिनांक-18.10.02 एवं 17.01.03 द्वारा की गयी जो उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। सी0बी0आई0 के पत्रांक-339 दिनांक 31.01.03 से संचालन पदाधिकारी को प्राप्त श्री खाँ द्वारा याचित कागजात पत्रांक-1359 (एस) दिनांक 22.02.03 द्वारा निबंधित डाक से श्री खाँ को भेजा गया जो लिफाफा पर यह अंकित हो लौट गया कि "बार बार जाने पर भी ऑफिस खुला नहीं पाया"। तत्पश्चात्‌ संचालन पदाधिकारी द्वारा कागजात कार्यापालक अभियंता को श्री खाँ को उपलब्ध कराने हेतु भेजा गया। कार्यपालक अभियंता द्वारा सूचना दी गयी कि श्री खाँ दिनांक 21.03.03 से बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित है तथा कागजात श्री खाँ के सेवापुस्त में अंकित पता पर भेजा जा रहा है। कार्यपालक अभियंता द्वारा दो प्रेस विज्ञप्ति भी निर्गत किया गया जो दिनांक 06.08.03 को आज में तथा 31.12.03 को हिन्दुस्तान में प्रकाशित हुआ।
7-विभगाीय कार्यवाही शुरू होने के समय से ही सी0बी0आई0 द्वारा उपलब्ध कराये गये कागजात की मांग की जाती रही।
8-उनके द्वारा विभगाीय कार्यवाही की जानकारी होने पर संचालन पदाधिकारी श्री ए0पी0साहा को पत्र दिनांक 28.10. 03 के साथ आरोप पत्र एवं संगत कागजात की मांग पत्र दिनांक 08.10.06 द्वारा की गयी। श्री खाँ के लगातार अनुपस्थित रहने पर संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही वापस कर दिये जाने के उपरांत का0आ0-278 दिनांक 28.10.03 द्वारा अनधिकृत अनुपस्थिति को अनुपूरक आरोप के रूप में संबद्ध करते हुए श्री जयकरण प्रसाद सिंह को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। उक्त अनुपूरक आरोप के साक्ष्य के रूप में श्री रमेन्द्र कुमार सिन्हा संयुक्त सचिव का पत्रांक-4109 दिनांक 23.05.03 अंकित है। दिनांक 19.10.06 को सुनवाई के दौरान संचालन पदाधिकारी के आदेश के आलोक में प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा कार्यालय आदेश 278 दिनांक 28.10.03 श्री खाँ को उपलब्ध कराया गया जो श्री खाँ द्वारा विभगाीय कार्यवाही में आदेश फलक पृ0-31 के पार्श्व में प्राप्त किया गया, परन्तु बाद में उनके द्वारा श्री रमेन्द्र कुमार सिन्हा के पत्र दिनांक 23. 05.03 प्राप्त नहीं होने का उल्लेख किया गया।
9-संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके पत्र दिनांक 08.10.06 पर कार्रवाई नहीं करने पर पुनः 16.11.06 द्वारा श्री रमेन्द्र कुमार सिन्हा संयुक्त सचिव के प्रतिवेदन दिनांक 23.05.03 जो आदेश दिनांक 28.10.03 के साथ संलग्न था के साथ-साथ पत्र दिनांक 28.10.03 तथा अन्य संबंधित कागजात की मांग की गयी।
10-शुरू से ही कागजात की मांग की जाती रही ताकि कारण पृच्छा समर्पित कर सके लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। यथा उपयु र्क्त कंडिका-6-7 एवं कंडिका-8-9
11-13.12.06 को संचालन पदाधिकारी को वांछित कागजात उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया तथा उन्हें आशा थी कि वांछित कागजात प्राप्त होगा लेकिन अचानक पत्र दिनांक 05.02.07 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। पत्र दिनांक 13.12.06 में श्री खाँ द्वारा मांगे गए कागजात उपलब्ध नहीं कराये जाने का उल्लेख करते हुए सी0बी0आई0 द्वारा जब्त कागजात को विभागीय कार्यवाही में देखे जाने का निदेश दिया गया। दिनांक 13.12.06 को विभागीय कार्यवाही के दौरान उनके द्वारा दिया गया मौखिक बयान आदेश फलक पृ0-5 पर दर्ज है जिसमें उनके द्वारा कागजात नहीं मिलने का उल्लेख नहीं है।
12-जाँच प्रतिवेदन के साथ पत्र दिनांक 27.02.07 द्वारा कतिपय कागजात की मांग की गयी जो उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। विभागीय पत्रांक-7692 (एस) दिनांक 27.06.07 द्वारा श्री खाँ को निदेश दिया गया कि वे कार्यालय में आकर कागजात का अवलोकन कर लें तथा प्रमंडल से संबंधित कागजात का अवलोकन प्रमंडल में कर द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित करे। इस क्रम में कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, नवादा को भी श्री खाँ को भी कागजात उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया, परन्तु इनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित नहीं किया गया। इसी बीच स्थानान्तरण के कारण दिनांक 13. 07.07 को इन्हें पथ प्रमंडल, नवादा से विरमित कर दिया गया, परन्तु इनके द्वारा नव पदस्थापित स्थान में योगदान नहीं दिया गया। फलस्वरूप पे्रस विज्ञप्ति के माध्यम से भी कागजात प्राप्त कर द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने का निदेश इन्हें दिया गया जो दैनिक आज में दिनांक 11.01.08 को प्रकाशित हुआ। इस प्रकार इन्हें कागजात प्राप्त करने का समुचित अवसर दिया गया लेकिन इनके द्वारा जानबूझ कर इसे प्राप्त नहीं किया गया।
13-पत्र दिनांक 27.02.07 पर चप्ुपी साधे जाने के बाद पुनः कागजात उपलब्ध कराने हेतु आवेदन दिया गया, परन्तु कार्रवाई नहीं की गयी।
14-संविधान की धारा 311 (2), बिहार एवं उड़ीसा अवर सेवा नियमावली 2006 एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उन्हें सुनने का समुचित मौका नहीं दिया गया तथा उन्हें उन कागजात, जिसके आधार पर विभागीय कार्यवाही है, आरोपी को उपलब्ध कराया जाना है। इस मामले में शुरू से अब तक न तो मांग की गयी कागजात दिया गया, न ही उनकी सुनवाई की गयी। विभगाीय कार्यवाही के दौरान श्री खाँ कई तिथियों को संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित हुए तथा उनके द्वारा दिये गये मौखिक बयान को भी दर्ज किया गया इसके उपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। उपयु र्क्त कंडिका-6,9,12,13 से स्पष्ट है कि विभागीय कार्यवाही से संबंधित कागजात प्राप्त करने का इन्हें समुचित अवसर दिया गया।
15-विभागीय कार्यवाही क े विरूद्ध इनके द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0सं0-4914/07 दायर किया गया जिसकी प्रति विभाग को दी गयी, परन्तु विभाग द्वारा प्रतिशपथ पत्र दायर न कर याचिका लंबित रहने के दौरान ही उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। विभाग द्वारा प्रतिशपथ पत्र दायर किया गया है जिसका ओथ सं0-27898 दिनांक 06.11.07 है। उक्त वाद में माननीय न्यायालय का किसी प्रकार का आदेश प्रतिवेदित नहीं था, इसलिए दंडादेश निर्गत किया गया। इस तथ्य का उल्लेख का0आ0ंस0-70 दिनांक 04.03.09 द्वारा संसूचित दंड में भी है।
16-आदेश दिनांक 04.03.09 से स्पष्ट होता है कि विभाग द्वारा कागजात उपलब्ध नहीं कराया गया। का0आ0सं0-70 दिनांक 04.03.09 से स्पष्ट है कि कागजात प्राप्त करने के लिए इन्हें समुचित मौका दिया गया, परन्तु जानबूझकर इनके द्वारा प्राप्त नहीं किया गया।
17-प्रस्तावित दंड के साथ द्वितीय कारण पृच्छा उन्हें कभी भी उपलब्ध नहीं कराया गया यहाँ तक कि जाँच प्रतिवेदन भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। कंडिका-11,12 में अंकित तथ्य तथा इनके द्वारा संलग्न एनेक्चर-11,12 एवं 13 से स्वतः ही इनके कथन का खंडन होता है।
18-जब विभागीय कार्यवाही शुरू हुआ इनके द्वारा कतिपय कागजात की मांग की गयी ताकि वे अपना कारण पृच्छा दायर कर सके, परन्तु कभी भी कागजात उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। यहॉ तक कि जाँच प्रतिवेदन भी उन्हें कभी नहीं दिया गया। यथा उपयु र्क्त कंडिका-6-9, 11-12, 13 एवं 17
19-उन्हें सुनने का मौका नहीं दिया गया यहॉ तक कि द्वितीय कारण पृच्छा भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। यथा कंडिका-14,17,18
20-द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने हेतु 'आज' में दिनांक 11.01.08 को प्रकाशित किया गया जो Widely circulated Paper नहीं है। इसे "Hindustan" or "Times of India" मे प्रकाशित कराना चाहिए था जो ं Widely circulated Paper है। 'आज' में प्रकाशित होने के कारण इसकी जानकारी उन्हें नहीं हो सकी। यह भी अंकित है कि सेवा से बर्खास्त संबंधी सूचना दैनिक जागरण में प्रकाशित होने पर उन्हें इसकी जानकारी मिली तथा कार्यालय जाकर उक्त आदेश को प्राप्त किए। विभागीय पत्रांक-7692 (एस) दिनांक 27.06.07 के आलोक में श्री खाँ को चाहिए था कि कार्यालय में आकर वांछित कागजात जिसे प्राप्त करने का समुचित अवसर दिया गया का अवलोकन/प्राप्त कर द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करते न कि इस हेतु समाचार पत्र के माध्यम से निदेश प्राप्त करने की अपेक्षा करनी चाहिए थी। यह स्थिति भी इसलिए उत्पन्न हुई क्योंकि पथ प्रमंडल, नवादा से विरमित होने के उपरांत पथ प्रमंडल, सीतामढ़ी में उनके द्वारा योगदान नहीं दिया गया था। 'आज' स्थानीय समाचार पत्र नहीं है।
21-विभागीय कार्यवाही से संबंधित आर0सी0 3 (ए)/97 पैट में न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है तथा लंबित है ऐसी स्थिति में वृहद दंड देना न्यायोचित नहीं है। यह कंडिका श्री खाँ द्वारा कंडिका-3 में अंकित तथ्यों से विरोधाभाषी है। उक्त केस के अनुसंधानोपरांत सी0बी0आई0 द्वारा वृहद दंड हेतु विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा की गयी थी तथा विधिवत रूप से संचालित विभगीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए दंड संसूचित किया गया।
22-मुख्य रूप से अंकित है कि बर्खास्तगी आदेश के विरूद्ध उनके द्वारा माननीय न्यायालय मे ं सी0डब्लू0जे0सी0सं0-11887/09 दायर किया गया तथा दिनांक 10.09.09 को पारित आदेश के आलोक में यह अपील दायर किया गया। सी0डब्लू0जे0सी0सं0-11887/09 में दिनांक 10.09.09 को पारित आदेश के आलोक में श्री खाँ द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन को विचारोपरांत सरकार क े निर्णयानुसार का0आ0सं0-389 दिनांक-21.12.09 द्वारा अस्वीकृत किया गया था।
23-उन्हें सुनने का मौका नहीं दिया गया जो CCA Rule 2005के नियम 14,17 एवं 18 का उल्लंघन है। उनके कारण पृच्छा पर भी विचार नहीं किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14 शास्तियाँ से संबंधित है। नियम 17 वृहद दंड अधिरोपित करने हेतु प्रक्रिया से संबंधित है। उल्लेखनीय हे कि संचालन पदाधिकारी के समक्ष विभागीय कार्यवाही के दौरान कई तिथियों पर उपस्थ्ति हुए तथा उनकी सुनवाई की गयी है। जिसके उपरांत जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। नियम 18 जाँच प्रतिवेदन पर कार्रवाई से संबंधित है। इसके उप नियम (3) अंकित है "अनुशासनिक प्राधिकार जाँच प्रतिवेदन की प्रतिलिपि, उप नियम (2) में यथा उपबंधित स्वयं के निष्कर्ष यदि कोई हो के साथ सरकारी सेवक को भेजेगा या भेजवायेगा जो यदि वह ऐसा चाहे अपना लिखित अभ्यावेदन या निवेदन अनुशासनिक प्राधिकार को 15 दिनों के अंदर समर्पित कर सकेगा"। नियमों का अनुसरण करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी।
24-30 साल की सेवा के अंत में सेवानिवृति के 4 माह पूर्व उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है जो अत्यन्त कठोर है। श्री खाँ के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही वर्ष 2002 में शुरू की गयी थी, परन्तु इनके द्वारा अनधिकृत रूप से लंबी अवधि तक अनुपस्थित हो जाने के कारण विभागीय कार्यवाही लंबी अवधि तक चली।
25-30 साल की सेवा के दौरान प्रस्तुत आरोप के अतिरिक्त किसी प्रकार की प्रतिकूल प्रविष्टि नहीं है। श्री खाँ के विरूद्ध पथ प्रमंडल, नवादा के पदस्थापन काल में बुद्धिस्ट सर्किट परियोजना अन्तर्गत पथों के निर्माण कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए का0आ0सं0-247 दिनांक 17. 12.05 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। इस मामले में प्रमाणित आरोप के लिए द्वितीय कारण पृच्छा के पूर्व ही इन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
6 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012 7 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012 8 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012

5. इस प्रकार श्री खाँ के अपील अभ्यावेदन में पुर्नविचार योग्य कोई तथ्य नहीं पाते हुए माननीय मंत्री द्वारा इसे अस्वीकृत किया गयाा। 6. अतएव माननीय मंत्री, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के आदेश के आलोक में श्री खाँ के अपील अभ्यावेदन दिनांक 04.10.09 को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।

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1 vxLr 2012

संं॰ निग/सारा-4 (पथ)-लोका-08/07-8483 (एस)—श्री नईम अख्तर रहमानी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, किशनगंज को पथ प्रमंडल, किशनगंज के पदस्थापन काल में सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के कार्यालय कक्ष में दिनांक 07.12.10 को आहूत मासिक समीक्षात्मक बैठक में नशे की हालत में उपस्थित होने के आरोप के लिए अधिसूचना संख्या-16819 (एस) दिनांक 16.12.10 द्वारा निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-1017 (एस) अनु0 दिनांक 28.01.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन पत्रांक-4972 दिनांक 16.09.11 में यद्यपि उनके विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित नहीं माने जाने का मंतव्य दिया गया, परन्तु विभागीय समीक्षोपरांत पाया गया कि यह निर्विवादित है कि श्री रहमानी बैठक में आने के पूर्व शराब पी रखी थी एवं नशे की हालत में थे। वर्णित स्थिति में संचालन9 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012 पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु को अंकित कर श्री रहमानी से विभागीय पत्रांक-12288 (एस) अनु0 दिनांक 11.11.11 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।

2. श्री रहमानी ने अपने पत्रांक-शून्य दिनांक 23.01.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में स्वीकार किया कि इन्होंने शराब पी रखी थी। हॉलाकि उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि वे इतने नशे में नहीं थे कि कार्य प्रभावित हो सके। स्पष्ट है कि श्री रहमानी ने शराब पी कर मासिक समीक्षात्मक बैठक में भाग लिया। समीक्षात्मक बैठक में वे अपने पूर्ण होशोहवास में नहीं थे। उनका यह आचरण सरकारी कर्मी के स्थापित आचरण के प्रतिकूल है। फलस्वरूप श्री रहमानी के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को अस्वीकार योग्य मानते हुए इन्हें उक्त प्रमाणित आरोप के लिए "कार्यपालक अभियंता के न्यूनतम प्रक्रम पर अवक्रमित करने" के दंड प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-4021 (एस) अनु0 दिनांक 11.04.12 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी।

3. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-560 दिनांक 11.06.12 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णीत दंड पर आयोग द्वारा सहमति व्यक्त की गयी। तद्‌आलोक में श्री नईम अख्तर रहमानी, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, किशनगंज सम्प्रति निलंबित को तत्कालिक प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए निम्न दंड संसूचित किया जाता हैः-

(क) इन्हें कार्यपालक अभियंता के न्यूनतम प्रक्रम पर आदेश निर्गत की तिथि से अवक्रमित किया जाता है। 4. निलंबन मुक्ति के उपरांत श्री रहमानी पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना में योगदान देकर पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहेंगे।

5. निलंबन अवधि के संबंध में अलग से कारण पृच्छा प्राप्त कर निर्णय लिया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।

——— 22 twu 2012 सं0 निग/सारा-आरोप- 71/10-7151 (एस)—श्री प्रवीण कुमार पाण्डेय, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर (राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, संख्या-2 मुजफ्फरपुर ) से सचिव द्वारा दिनांक 12.07.2010 को एन0एच0-77 के स्थल निरीक्षण के क्रम में कटौंझा पुल के पूर्व मनार गाँव के पास सड़क की भयावह स्थिति तथा मुजफ्फरपुर से सीमामढ़ी के बीच कई जगहों पर पोट्‌स पाये जाने के आलोक में उक्त तिथि में पथ के Defect liability period में होने के बावजूद इनके द्वारा Defect liability period को enforce नहीं कराने तथा अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने जैसे आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-154/गो0 दिनांक 15.07.10 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। 2. श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण पत्रांक-52 दिनांक 19.07.10 के समीक्षोपरांत पाया गया कि सड़क की स्थिति भयावह थी (जिसे श्री पाण्डेय द्वारा स्वीकार भी किया गया है) तथा Defect liability period में होने के बाद भी पथ के रख-रखाव की समुचित व्यवस्था इनके द्वारा नहीं की गई। 3. अत्‌एव सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-900 (एस) दिनांक 21.01.11 द्वारा इनकी दो वेतन वृद्धियों पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया।

4. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता द्वारा पुर्नविचार अभ्यावेदन दिनांक 30.03.11 समर्पित किया गया। इनके पुनर्विचार आवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि दिनांक 12.07.10 को सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के निरीक्षण के क्रम में स्ट्रेच पर पौट्‌स पाये गये थे जिसके संबंध में सहायक अभियंता के द्वारा न तो अपने मूल स्पष्टीकरण में न ही पुनर्विचार आवेदन में कोई तर्क दिया गया और न ही defect liability period के तहत मरम्मति कार्य नहीं कराने के बारे में कोई तथ्य अंकित किया गया है। श्री पाण्डेय निरीक्षण के दौरान बिना कार्यपालक अभियंता की अनुमति के अनुपस्थित थे जो अपने आप में कर्तव्यहीनता का द्योतक है।

5. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता के पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 30.03.11 को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।

——— 30 tqykbZ 2012 सं0 निग/विरा-3 (NH)-07/03-8395 (एस)—श्री राधे बैठा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी सम्प्रति दिनांक 30.06.08 को सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी के पदस्थापन काल में विभिन्न योजनाओं में अलग-अलग बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10719 (एस) अनु0 दिनांक 11.09.06, संकल्प ज्ञापांक-11225 (एस) अनु0 दिनांक 23.09.06 तथा संकल्प ज्ञापांक-13769 (एस) अनु0 दिनांक 07.12.06 द्वारा तीन अलग-अलग विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। 2. विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10719 (एस) अनु0 दिनांक 11.09.06 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री बैठा के विरूद्ध गठित कुल 4 आरोपों में से आरोप संख्या-1,2 एवं 4 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-3 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति10 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012 संलग्न करते हुए प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-9165 (एस) अनु0 दिनांक 24.08.09 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री बैठा के आवेदन दिनांक 04.09.09 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। इस बीच श्री बैठा के दिनांक 30.06.08 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9168 (एस) अनु0 दिनांक 24.08.09 द्वारा इस विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। 3. विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11225 (एस) अनु0 दिनांक 23.09.06 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री बैठा के विरूद्ध गठित कुल 11 आरोपों में से आरोप संख्या-4 एवं 5 को अप्रमाणित, आरोप संख्या-2 को आंशिक रूप से प्रमाणित तथा शेष 8 आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के लिए विभगाीय पत्रांक-11755 (एस) अनु0 दिनांक 21.10.09 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री बैठा के अभ्यावेदन दिनांक 21.12.10 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। इस बीच श्री बैठा के दिनांक 30.06.08 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11292 (एस) दिनांक 09.10.09 द्वारा इस विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। 4. विभागीय संकल्प ज्ञापांक-13769 (एस) अनु0 दिनांक 07.12.06 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को श्री बैठा के दिनांक 30.06.08 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11754 (एस) अनु0 दिनांक 21.10.09 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। इस विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री बैठा के विरूद्ध गठित कुल 2 आरोपों में से आरोप संख्या-2 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-1 को अंशतः प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। उक्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न करते हुए प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-5012 दिनांक 24.04.11 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री बैठा के अभ्यावेदन दिनांक 06.05.11 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। 5. श्री बैठा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित उपर्युक्त अंकित तीनों ही विभागीय कार्यवाहियों में इनके द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत यह पाया गया है कि आरोप की गंभीरता एवं इसे प्रमाािण्त पाये जाने की स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि श्री बैठा का सेवा काल घोर कदाचार का काल रहा है। साथ ही इनके द्वितीय कारण पृच्छा उत्तरों को असंतोषजनक एवं अपर्याप्त पाया गया है। इनके बचाव वयानों में ऐसा कोई तथ्य नहीं दिया गया है जो इनके ऊपर लगाये गये आरोपों, जो विभागीय कार्यवाही के दौरान प्रमाणित पाये गये है, को क्षान्त करता हो। 6. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री राधे बैठा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंंडल, मोतिहारी सम्प्रति सेवनिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध

(i) सरकार को हुए कुल वित्तीय क्षति की राशि ` 4,22,236 का 50 प्रतिशत अर्थात ` 2,11,118 (दो लाख ग्यारह हजार एक सौ अठारह) की वसूली इन्हें देय पेंशन लाभों यथा उपादान अथवा अर्जित अवकाश के बदले देय नगद राशि से करन,े तथा

(ii) इनके पेंशन से 20 प्रतिशत की कटौती करने का आदेश संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।

——— 2 tqykbZ 2012 सं0 निग/विरा-2-02/98-7414 (एस)—श्री रामाकान्त साह, तत्कालीन कनीय अभिय ंता, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल संख्या-1, बेतिया (पथ प्रमंडल, बेतिया) द्वारा पथ प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में टाउन हॉल थाना चौक पर जे0पी0 टावर के कराये गये निर्माण कार्य के जाँचोपरांत मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग के पत्रांक-396 दिनांक 07.02.98 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन में उक्त विभागीय कार्य के दो-दो हजार रूपये के कम टुकड़े कर भाउचर पर कार्य कराकर अनियमित भुगतान करने तथा इस कार्य में संवेदक को लाभ सहित अधिक दर से भाउचर पर कार्य का अनियमित भुगतान करने जैसी पायी गयी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-4274 (ई) अनु0 दिनांक-25.06.99 द्वारा इनसे स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री साह, तत्कालीन कनीय अभियंता सम्प्रति सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण दिनांक 30.04.2006 के भली भाँति समीक्षोपरांत इनके विरूद्ध आरोप को प्रमाणित पाया गया। अतएव सरकार के निर्णयानुसार इन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) इनके वेतन से ` 6,161 की वसूली,

(ii) निन्दन (आरोप वर्ष-1996-97 के लिए)।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।11 (cid:18)बहार गजट, 29 अगःत 2012

29 twu 2012

सं0 निग/सारा-9 (आरोप)-37/2009-7398 (एस)—श्री अवधेश कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति निलंबित को उप महाप्रबंधक (तकनीकी)-सह-परियोजना निदेशक (पी॰आई॰यू॰), धनबाद, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पदस्थापन काल में रिश्वत लेते सी॰बी॰आई॰ द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार कर हिरासत में लिये जाने एवं तद्‌जन्य आपराधिक मुकदमा दर्ज किये जाने के आलोक में अधिसूचना संख्या 6163 (एस), दिनांक 10.06.2009 द्वारा हिरासत में लिये जाने के तिथि से अगले आदेश के लिये निलंबित किया गया है। विभागीय अधिसूचना संख्या-3797 (एस दिनांक 02.04.2012 द्वारा श्री सिंह के जीवन निर्वाह भत्ता में दिनांक 01.07.2011 से 50 (पच्चास) प्रतिशत की बढ़ोतरी की गयी । 2. श्री सिंह ने अपने अभ्यावेदन पत्रांक-4, दिनांक 10.04.2012 द्वारा दिनांक 10.06.2009 को निलंबित किये जाने का उललेख करते हुये निलंबन की अवधी के 1 वर्ष के उपरांत दिनांक 01.05.2010 से जीवन निर्वाह भत्ता में बढ़ोतरी का अनुरोध किया । श्री सिंह के आवेदन के विचारोपरांत अधिसूचना संख्या 3797 (एस) दिनांक 02.04.2012 को आंशिक रूप से संशोधित करते हुये बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10(1) में निहित प्रावधान के तहत श्री सिंह, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति निलंबित के जीवन निर्वाह भत्ता में दिनांक 10 जून 2010 के प्रवाह से 50 (पच्चास) प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सरकार के उप-सचिव (निगरानी)।

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वाणिज्य-कर विभाग

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अधिसूचना

21 अगस्त 2012

सं॰ कौन/भी-612/07-83/वा0क0—श्री सुबीर कुमार भट्‌टाचार्य, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त (निलंबित) को देवघर कोषागार के पदस्थापनकाल में पशुपालन घोटाले से संबंधित दर्ज सी॰ बी॰ आई॰ कांड संख्या-64(A)/96 में सक्षम न्यायालय द्वारा न्यायिक हिरासत में लिये जाने के कारण विभागीय अधिसूचना संख्या-118 दिनांक 15.02.06 के द्वारा दिनांक 02. 07.05 के प्रभाव से अगले आदेश तक के लिये निलंबित किया गया था। जमानत पर न्यायिक हिरासत से रिहा होने के पश्चात्‌ श्री भट्‌टाचार्य द्वारा दिनांक 15.09.06 को योगदान समर्पित किये जाने के फलस्वरूप इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील), नियमावली, 2005 के नियम 9(3) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-790 दिनांक 15.12.06 के द्वारा दिनांक 15.09.06 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया गया। चूँकि इनके विरूद्ध पशुपालन घोटाले से संबंधित आपराधिक मामला न्यायिक जाँच एवं विचारण के अधीन है, अतएव उक्त नियमावली के नियम 9 (1) (ग) के तहत श्री भट्‌टाचार्य को विभागीय अधिसूचना संख्या-791 दिनांक 16.12.06 के द्वारा तत्कालीक प्रभाव से अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया था। 2. श्री भट्‌टाचार्य द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No.-84796/12 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 04.05.12 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में इन्हें तत्कालिक प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया जाता है। 3. इनके निलंबन अविध के विनियमन के संबंध में निर्णय इनके विरूद्ध दर्ज अपराधिक मामले के न्यायालय द्वारा अंतिम निष्पादन के उपरान्त उसके फलाफल के आधार पर लिया जायेगा।

4. श्री भट्‌टाचार्य को निलंबन से मुक्त होने के पश्चात्‌ वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, वाणिज्य-कर आयुक्त-सह-प्रधान सचिव।

ÑÑÑÑ अधीIक, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।

(cid:18)बहार गजट, 24Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 29 August 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-08-29.35/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-08-29.35.