िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 14141414 भािभािभािभाि 1931931931934444 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 33336666 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ———————— 5555 िसत(बिसत(बिसत(बिसत(बरररर 2020202011112222 ((((ईईईई0000)))) भाग-1—िनयु(cid:18)1, पदःथापन, बदली, श(cid:18)1, छु 7ट(cid:15) और अ:य ;य(cid:18)1गत सूचनाएं। 2-7 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु?मA के समादेंटाओं के आदेश।
---
भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Jाओं के पर(cid:15)Jा-फल, कायLबम, छाऽवृ(cid:18)O ूदान, आPद।
---
भाग-1-ग—िशJा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Jाफल आPद ---
भाग-2—(cid:18)बहार-राQयपाल और कायाLRयJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आPद। 8-22 भाग-3—भारत सरकार, पSTम बंगाल सरकार और उVच :यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राQय गजटA के उXरण। ---
भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---
(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ
पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Pकये जानेवाले ूवर सिमितयA के ूितवेदन और उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथापन के पूवL ूकािशत (cid:18)वधेयक।
---
भाग-7—संसद के अिधिनयम Sजनपर रांशपित क^ Qयेंठअनुमित िमल चुक^ है। ---
भाग-8—भारत क^ संसद मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के ूितवेदन और संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के ूितवेदन और संसद मZ पुर:ःथापन के पूवL ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-9—(cid:18)व`ापन
---
भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क^ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, पaरवहन सूचनाएं, :यायालय सूचनाएं और सवLसाधारण सूचनाएं इbयाPद। ---
पूरक
---
पूरक-क
---
2 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012भागभागभागभाग----1111
िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1, , , , छु 7ट(cid:15) और छु 7ट(cid:15) और छु 7ट(cid:15) और छु 7ट(cid:15) और अ:यअ:यअ:यअ:य वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
सामान्य प्रशासन विभाग ——— अधिसूचनाएं 28 अगस्त 2012 सं॰ 18/विविधि-06-06/2012-सा॰प्र॰-11986—मुख्य सचिव, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित श्री नवीन कुमार, भा॰प्र॰से॰ (75) को सेवानिवृत्ति के उपरांत महानिदेशक, सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस सोसाइटी के पद पर नियुक्त किया जाता है ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अजय कुमार चौधरी, संयुक्त सचिव ।
———
23 जून 2012
सं॰ 1/पी0-1007/2012-सा0 प्र0- 9052—अनुमंडल पदाधिकारी, चकिया (पूर्वी चम्पारण) के पद पर पदस्थापित श्री रमनदीप चौधरी, भा0प्र0से0 (2008) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्, पश्चिमी चम्पारण (बेतिया) के पद पर पदस्थापित किया जाता है ।
सं॰ 1/पी0-1007/2012-सा0 प्र0-9053—अनुमंडल पदाधिकारी, फारबिसगंज (अररिया) के पद पर पदस्थापित श्री गिरिवर दयाल सिंह , भा0प्र0से0 (2008) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है ।
सं॰ 1/पी0-1007/2012-सा0 प्र0-9054—अनुमंडल पदाधिकारी, दानापुर (पटना) के पद पर पदस्थापित श्री बुद्धाभट्टी कार्तिकेय धनजी, भा0प्र0से0 (2008) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद्, नालंदा (बिहारशरीफ) के पद पर पदस्थापित किया जाता है
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
23 जून 2012
सं॰ 1/पी0-369/2007-सा0 प्र0-9055—श्री एस0के0 नेगी, भा0प्र0से0 (81), आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर अपने कार्यों के अतिरिक्त दिनांक 01.07.2012 के प्रभाव से अगले आदेश तक आयुक्त, दरभंगा प्रमण्डल, दरभंगा के प्रभार में रहेंगे ।
सं॰ 1/पी0-369/2007-सा0 प्र0-9056—श्री संजीवन सिन्हा, IP & TAFS (94), विशेष सचिव, वित्त विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रबंध निदेशक, शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लि0, शिक्षा विभाग, बिहार) को स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक प्रबंध निदेशक, शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लि0, शिक्षा विभाग, बिहार के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
2. श्री संजीवन सिन्हा अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक विशेष सचिव, शिक्षा विभाग, बिहार, पटना के प्रभार में रहेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।3 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012
2 जुलाई 2012
सं॰ 1/पी0-1013/2010-सा0प्र0-9448—श्री गोपाल सिंह, भा0व0से0 (2003), अधिसूचित वन प्रमंडल पदाधिकारी, पटना वन प्रमंडल, पटना अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक विशेष कार्य पदाधिकारी, मुख्यमंत्राी सचिवालय, बिहार, पटना के प्रभार में रहेंगे, जहाँ वे राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकार तथा पर्यावरण एवं वन विभाग से संबंधित मुख्यमंत्राी सचिवालय के कार्यों में सहयोग करेंगे ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
28 जून 2012
सं॰ 1/एल0-31/95 (खंड)-सा0 प्र0-9307—श्री दीपक कुमार, भा0प्र0से0 (84), प्रधान सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना (अतिरिक्त प्रभार-प्रधान सचिव, पर्यटन विभाग एवं प्रधान सचिव, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग) को अखिल भारतीय सेवायें (अवकाश) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 नियमों के अधीन दिनांक 04 जुलाई, 2012 से 12 जुलाई, 2012 तक कुल नौ (9) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है ।
2. श्री कुमार की अवकाश-अवधि में श्री आमिर सुबहानी, भा0प्र0से0 (87), प्रधान सचिव, गृह विभाग अपने कार्यों के अतिरिक्त श्री कुमार द्वारा धारित सभी पदों के प्रभार में रहेंगे ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
9 जुलाई 2012
सं॰ 1/छु0 4-412/2006-सा0 प्र0-9720—श्री अनुपम कुमार, भा0प्र0से0 (2003), जिला पदाधिकारी, रोहतास को अखिल भारतीय सेवायें (अवकाश) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 नियमों के अधीन दिनांक 09 जुलाई, 2012 से 21 जुलाई, 2012 तक कुल तेरह (13) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है ।
2. श्री कुमार की अवकाश-अवधि में श्री अरूण कुमार श्रीवास्तव, उप विकास आयुक्त, रोहतास अपने कार्यों के अतिरिक्त जिला पदाधिकारी, रोहतास के प्रभार में रहेंगे ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
9 जुलाई 2012
सं॰ 1/छु0 4-413/2006-सा0 प्र0-9719—श्रीमती प्रतिमा एस0 वर्मा, भा0प्र0से0 (2002), जिला पदाधिकारी, भोजपुर, आरा को अखिल भारतीय सेवायें (अवकाश) नियमावली, 1955 के नियम-10, 11 एवं 20 नियमों के अधीन दिनांक 09 जुलाई, 2012 से 21 जुलाई, 2012 तक कुल तेरह (13) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है ।
2. श्रीमती वर्मा की अवकाश-अवधि में श्री राजदेव सिंह, अपर समाहर्त्ता, भोजपुर अपने कार्यों के अतिरिक्त जिला पदाधिकारी, भोजपुर के प्रभार में रहेंगे ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।4 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012
11 जुलाई 2012
सं॰ 1/एल0-45/95-सा0 प्र0-9808—श्री ब्रजेश मेहरोत्राा, भा0प्र0से0 (89), आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां को अखिल भारतीय सेवायें (अवकाश) नियमावली, 1955 के नियम- 10, 11 एवं 20 नियमों के अधीन दिनांक 12 जुलाई, 2012 से 25 जुलाई, 2012 तक कुल चौदह (14) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है ।
2. श्री मेहरोत्राा की अवकाश-अवधि में श्री मिन्हाज आलम, भा0प्र0से0 (के0 एल0 ः 96), आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर अपने कार्यों के अतिरिक्त आयुक्त, पूर्णियां प्रमंडल, पूर्णियां के प्रभार में रहेंगे ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
12 जून 2012
सं॰ 1/अ0-419/2007-सा0प्र0-8467—विभागीय अधिसूचना संख्या-219 दिनांक 06 जनवरी, 2012 में आंशिक संशोधन करते हुए श्री एस0एम0 राजू, भा0प्र0से0 (91), तत्कालीन आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, सम्प्रति आयुक्त मुंगेर(प्रमण्डल) को अखिल भारतीय सेवा (अवकाश) नियमावली, 1955 के नियम-10,11 एवं एवं 20 के अधीन दिनांक 08.02.2012 से 01.03.2012 तक कुल तेइस(23) दिनों की उपार्जित छुट्टी की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
22 जून 2012
सं॰ 1/एल0-006/2000-सा0प्र0-9008—श्री अभिताभ वर्मा, भा0प्र0से0 (82), अपर विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवाएॅं (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-13 के अधीन दिनांक 02.04.2012 से 21.05.2012 तक कुल 50 (पचास) दिनों की रूपांतरित अवकाश (100 दिनों के अर्द्धवैतनिक अवकाश के बदले) की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
25 जून 2012
सं॰ 1/छु0-409/2006-सा0प्र0-9094—श्रीमती पलका साहनी, भा0प्र0से0 (04), संयुक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10,11,13, एवं 20 तथा भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के पत्राांक-13018/2/2008- Estt(L) दिनांक 11 सितम्बर,2008 के आलोक में दिनांक 14.04.2012 से 03.07.2012 तक कुल 81 दिनो की उपार्जित छुट्टी तथा दिनांक 04.07.2012 से 07.08.2012 तक कुल 35 दिनों की रूपांतरित छुट्टी (70 दिनों के अर्द्धवैतनीक छुट्टी के बदले में) एवं दिनांक 08.08.2012 से 18.10.2012 तक कुल 72 दिनों के शिशु पालन-पोषण(child care leave)छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।5 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012
17 जुलाई 2012
सं॰ 1/अ0-418/2007-सा0प्र0-10098—पूर्व निर्गत अधिसूचना संख्या-6360 दिनांक 04.05.2012 द्वारा स्वीकृत उपार्जित अवकाश दिनांक 16.05.2012 से 04.06.2012 को संशोधित करते हुए श्री एम0 सरवणन, भा0प्र0से0(02), जिला पदाधिकारी, अररिया को अखिल भारतीय सेवा(छुट्टी) नियमावली, 1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 20.05.2012 से 08.06.2012 तक कुल बीस दिनाें (20) की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
28 जून 2012
सं॰ 1/पी0-1010/2012-सा0प्र0-9289—जिला पदाधिकारी, सारण (छपरा) अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक बन्दोबस्त पदाधिकारी, सारण (छपरा) के प्रभार में रहेंगें।
सं॰ 1/पी0-1010/2012-सा0प्र0- 9290—जिला पदाधिकारी, मुंगेर अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक बन्दोबस्त पदाधिकारी, मुंगेर के प्रभार में रहेंगें।
सं॰ 1/पी0-1010/2012-सा0प्र0-9291—जिला पदाधिकारी, शेखपुरा अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक बन्दोबस्त पदाधिकारी, शेखपुरा के प्रभार मेंं रहेंगें।
सं॰ 1/पी0-1010/2012-सा0प्र0-9292—जिला पदाधिकारी, भोजपुर(आरा) अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक बन्दोबस्त पदाधिकारी, भोजपुर(आरा) के प्रभार मेंं रहेंगें।
सं॰ 1/पी0-1010/2012-सा0प्र0-9293—जिला पदाधिकारी, दरभंगा, अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक बन्दोबस्त पदाधिकारी, दरभंगा के प्रभार मेंं रहेंगें।
सं॰ 1/पी0-1010/2012-सा0प्र0-9294—जिला पदाधिकारी, पटना अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक बन्दोबस्त पदाधिकारी, पटना के प्रभार मेंं रहेंगें।
सं॰ 1/पी0-1010/2012-सा0प्र0-9295—जिला पदाधिकारी, गया अपने कार्यों के अतिरिक्त अगले आदेश तक बन्दोबस्त पदाधिकारी, गया के प्रभार मेंं रहेंगें।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
19 जुलाई 2012
सं॰ 1/ एल0-31/95(खण्ड)-सा0प्र0-10224—पूर्व में निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-9307 दिनांक 28.06.2012 जिसके द्वारा श्री दीपक कुमार, भा0प्र0से0 (84), प्रधान सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार को दिनांक 04.07.2012 से दिनांक 12.07.2012 तक उपार्जित छुट्टी स्वीकृत की गई थी, को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए उन्हें अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली,1955 के नियम -10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 04.07.2012 से 10.07..2012 तक कुल सात दिनाें (07) की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
2. शेष कंडिका यथावत् रहेंगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।6 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012
7 अगस्त 2012
सं॰ 1/एल0-82/95(खंड)-सा0प्र0-11031—श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव, भा0प्र0से0(80),सम्प्रति प्रधान सचिव, संसदीय कार्य विभाग, बिहार, पटना को विभागीय अधिसूचना संख्या 261 दिनांक 14.01.2009 द्वारा लंदन स्कूल ऑॅफ इकोनोमिक्स में शोध हेतु ऑल इंडिया सर्विसेज (लीव) रूल्स, 1955 के नियम-10,11, एवं 20 के अधीन छुटि्टयाँ निम्नवत् स्वीकृत की गयीं थीं-
(i) दिनांक 15.01.2009 से 20.05.2009 तक कुल 126 दिनों का उपार्जित अवकाश। (ii) दिनांक 21.05.2009 से 16.12.2009 तक कुल 210 दिनों का अर्द्ध-वैतनिक अवकाश। (iii) दिनांक 17.12.2009 से 31.03.2011 तक कुल 470 दिनों का असाधारण अवकाश। 2. श्री श्रीवास्तव ने स्वीकृत अवकाश की अवधि के पूर्ण होने के पूर्व दिनांक 23.11.2010 को राज्य संवर्ग में योगदान कर लिया था और 23.11.2010 से 13.12.2010 तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहे थे। विभागीय पत्राांक-1/एल0-82/95(खंड)-सा0प्र0-10625, दिनांक 26.07.2012 द्वारा उनकी दिनांक 23.11.2010 से 13.
12.2010 तक की प्रभार रहित अवधि को पदस्थापन की अनिवार्य प्रतीक्षा काल के रूप में विनियमित करने की स्वीकृति दी जा चुकी है।
3. कंडिका-2 के आलोक में कंडिका-1(iii) की पूर्व स्वीकृत असाधारण अवकाश अवधि निम्नप्रकारेण संशोधित (लघ्वीकृत) की जाती है-
(i) दिनांक 17.12.2009 से दिनांक 22.11.2010 तक कुल 341 दिन ।
4. विभागीय अधिसूचना संख्या-1/एल0-82/95(खंड)-सा0प्र0-261, दिनांक 14.01.2009 की अन्य स्थितियाँ पूर्ववत् रहेंगी ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
8 अगस्त 2012
सं॰ 1/ एल0-39/2000-सा0प्र0-11160— पूर्व में निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-8661 दिनांक 15.06.2012 को संशोधित करते हुये श्री जे0 आर0 के0 राव, भा0प्र0से0 (85), अध्यक्ष बिहार कर्मचारी चयन आयोग, पटना को अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली,1955 के नियम -10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 18.06.2012 से 20.07.2012 तक कुल बतीस (32) दिनाें की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
9 अगस्त 2012
सं॰ 1/अ0-17/2000-सा0प्र0- 11243—पूर्व में निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-8268 दिनांक 08.06.2012 जिसके द्वारा श्री अशोक कुमार चौहान, भा0प्र0से0 (80), प्रधान सचिव, निगरानी विभाग, बिहार, पटना को अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली,1955 के नियम -10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 11.06. 2012 से 22.06.2012 तक उपार्जित छुट्टी स्वीकृत की गई थी, को संशोधित करते हुए दिनांक 11.06.2012 से 14.06.2012 तक मात्रा चार दिनाें (04) की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।7 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012
17 अगस्त 2012
सं॰ 1/अ0-09/2010-सा0प्र0-11531—श्री जय सिंह, भा0प्र0से0 (2007),जिला पदाधिकारी, कैमूर (भभुआ) को अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली,1955 के नियम-18 बी0 के अधीन दिनांक 16.08.2012 से 30.08.2012 तक कुल 15 दिनों के पितृत्व छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
23 अगस्त 2012
सं॰ 1/अ0-07/2010-सा0प्र0-11787—श्री डी0के0 श्रीवास्तव, आई0आर0एस0(86),निदेशक, पर्यटन, बिहार को अखिल भारतीय सेवा (छुट्टी) नियमावली,1955 के नियम-10,11, एवं 20 के अधीन दिनांक 27.08.2012 से 06.09.2012 तक कुल ग्यारह(11) दिनों की उपार्जित छुट्टी की स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
22 जून 2012
सं॰ 1/अ0-21/2009-सा0प्र0-9033—श्री विनोद सिंह गुजियाल, भा0प्र0से0(2007) तत्कालीन उप विकास आयुक्त, मुजफ्फरपुर, सम्प्रति समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, बक्सर को अखिल भारतीय सेवाएॅं (छुट्टी) नियमावली,1955 के नियम-10,11 एवं 20 के अधीन दिनांक 07.04.2012 से 25.04.2012 तक कुल 19 (उन्नीस) दिनों के उपार्जित अवकाश की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
———
The 16th June 2012
No. 1/P-1034/2011-GAD-8668—In consequence of approval of the Govt. of India for inter- cadre deputation of Shri Asangba Chuba Ao, IAS (BH : 2003) from Bihar Cadre to Nagaland Cadre for three years from date of assumption of charge or until further orders, whichever is earlier, Shri Ao is relived of his duties for joining in the Govt. of Nagaland. (Ref : DOPT's Notification No. 13017/06/2012-AIS (I) dated 05.06.2012)
By order of the Governor of Bihar, ANAND BIHARI PRASAD, Joint Secretary to the Government.
ÑÑÑÑ अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 25ÑÑÑÑ571+100----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in8 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012
भागभागभागभाग----2222
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राQयराQयराQयराQयपाल और कायाLRयपाल और कायाLRयपाल और कायाLRयपाल और कायाLRयJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , , अिधसूचनाएं और िनयम आPद।अिधसूचनाएं और िनयम आPद।अिधसूचनाएं और िनयम आPद।अिधसूचनाएं और िनयम आPद।
ÑÑÑÑÑ
सं0-3ए-3-(या0भ0)-01/2010-9144
वित्त विभागवित्त विभागवित्त विभागवित्त विभाग
———
संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प
31 अगस्त 201231 अगस्त 201231 अगस्त 201231 अगस्त 2012
D.G.C.A.
विषयः- विषयः- विषयः- विषयः- एलएलएलएल....टीटीटीटी....सीसीसीसी.... के प्रयोजन से के प्रयोजन से के प्रयोजन से के प्रयोजन से
द्वारा अधिकृत सरकारी एवं निजी क्षेत्र की विमान कंपनियों द्वारा द्वारा अधिकृत सरकारी एवं निजी क्षेत्र की विमान कंपनियों द्वारा द्वारा अधिकृत सरकारी एवं निजी क्षेत्र की विमान कंपनियों द्वारा द्वारा अधिकृत सरकारी एवं निजी क्षेत्र की विमान कंपनियों द्वारा 97 के प्रभाव से अनुमान्य करने के संबंध में । यात्रा 01यात्रा 01यात्रा 01यात्रा 01....04040404....97 के प्रभाव से अनुमान्य करने के संबंध में । 97 के प्रभाव से अनुमान्य करने के संबंध में । 97 के प्रभाव से अनुमान्य करने के संबंध में ।
वित्त विभाग के पत्रांक- 1-LTC-03/2004-4755 दिनांक 01.09.2005 के द्वारा अखिल भारतीय सेवा के पदाधिकारियों को, जिन्हें वायुयान से एल.टी.सी. की यात्रा अनुमान्य है, निजी कंपनियों यथा सहारा, जेट आदि के विमान से अनुमान्य श्रेणी में यात्रा करने की अनुमति दी गई थी ।
2. वित्त विभाग की अधिसूचना संख्या-3ए-3(या.भ.)-01/2010-9091 दिनांक 30.08.2012 के द्वारा 01.
04.1997 के प्रभाव से DGCA द्वारा अनुमोदित लोक या निजी विमान कंपनियों के द्वारा की गई यात्रा को बिहार यात्रा भत्ता नियमावली, 1949 के नियम 62 में परिवर्तन करते हुए अनुमान्य किया गया है । उक्त क्रम में एल.टी.
सी. के संदर्भ में भी सम्यक् संशोधन सरकार के विचाराधीन था ।
3. सम्यक् विचारोपरांत एल.टी.सी. के लिए उपर्युक्त तिथि (दिनांक 01.04.1997) से ही सरकारी एवं निजी क्षेत्र की विमान कंपनियाें से इकोनॉमी श्रेणी भाड़ा की अधिसीमा में यात्रा को अनुमान्य किया जाता है । इस निर्णय के बावजूद, यदि इस अवधि में भारत सरकार के प्रावधानों के तहत किसी पदाधिकारी द्वारा उच्चतर श्रेणी से यात्रा की गई हो, तो उसकी भी मान्यता होगी ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
मिहिर कुमार सिंह, सचिव वित्त(व्यय) ।
———
वित्त-विभागवित्त-विभागवित्त-विभागवित्त-विभाग
———
अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना
30 अगस्त 201230 अगस्त 201230 अगस्त 201230 अगस्त 2012
सं0 3ए-3-(या0भ0)-01/2010/9091—भारत संविधान के अनुच्छेद 309 के परन्तुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार राज्यपाल एतद् द्वारा बिहार यात्रा भत्ता नियमावली,1949 के नियम-62 को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित करते हैं :-
नियम-62नियम-62नियम-62नियम-62 :-
''इस नियमावली के नियमों के प्रयोजनार्थ, विमान यात्रा से अभिप्रेत है किराये पर नियमित रूप से चलने वाले D.G.C.A. से अनुमोदित मशीनी लोक या निजी विमान परिवहन कंपनियों के विमानों द्वारा की गयी यात्रा। इसमें निजी विमानों अथवा वायु-टैक्सियों द्वारा की गई यात्रा शामिल नहीं है ।''9 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 इस नियम में यह संशोधन 01 अप्रील 1997 के प्रभाव से लागू होगा ।
आदेशः-आदेशः-आदेशः-आदेशः- आदेश आिदेश आिदेश आिदेश दिया जाता है कि इस अधिसूचदया जाता है कि इस अधिसूचदया जाता है कि इस अधिसूचदया जाता है कि इस अधिसूचना को बिहार गजट के आगामी ना को बिहार गजट के आगामी ना को बिहार गजट के आगामी ना को बिहार गजट के आगामी अंक में प्रकाशित किया अंक में प्रकाशित किया अंक में प्रकाशित किया अंक में प्रकाशित किया जाय ।जाय ।जाय ।जाय ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
मिहिर कुमार सिंह, सचिव वित्त(व्यय) ।
The 30th August 2012
No.3ए-3-(या0भ0)-01/2010-9091/F—In exercise of powers conferred by the proviso of Article 309 of the Constitution of India, the Governor of Bihar hereby amend and substitute the rule 62 of the Bihar Travelling Allowances Rules, 1949 as following :—
Rule-62 :
"For purposes of the rules in the subsection travelling by air means journey performed in the machines of DGCA approved public or private air transport company regularly plying for hire. It does not include journeys performed by private aeroplanes or air taxies.
This amendment in this rule shall be applicable with effect from 1st April 1997.
Order:- Ordered that copy of this Notification be published in the next issue of Gazette
of Bihar.
By order of Governor of Bihar, MIHIR KUMAR SINGH, Secretary (Expenditure).
——— बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ——— अधिसूचनाएं 8 मई 2012
सं॰ 162—माँ बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर, शक्तिधाम, बड़हिया, जिला-लखीसराय पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4159 है । शक्तिधाम, बड़हिया वासियों एवं श्रद्धालु भक्तों द्वारा मंदिर में पूजन-अर्चना की सम्यक् व्यवस्था सुनिष्चित करने तथा श्रीधर सेवा आश्रम निर्माण एवं संचालन हेतु एक न्यास समिति के गठन का निर्णय लिया गया है और एतद् संबंध प्रस्ताव पर्षद को समर्पित किया गया है । अतः मैं, किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना, माँ बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर, शक्तिधाम, बड़हिया के सुचारू प्रबंधन, सम्यक् विकास तथा संचालन हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के अधीन अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुए इसके क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूंः-
योजनायोजनायोजनायोजना
1. इस योजना का नाम ''माँ बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर, शक्तिधाम, बड़हिया न्यास योजना'' होगा तथा इसे मूर्त रूप देने के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''माँ बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर न्यास समिति, शक्तिधाम, बड़हिया'' होगा, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा ।
2. इस न्यास का मुख्य उद्देष्य निम्नलिखित कार्य करना होगा :-
(क) मंदिर में सम्यक् पूजन-अर्चना, धार्मिक उत्सव तथा प्रवचन इत्यादि (ख) मंदिर का अनुरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं विकास (ग) धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक चेतना का विकास (घ) मंदिर के संबंध में सम्यक् प्रचार-प्रसार (ड़) पुस्तकों एवं पत्रिकाओं का मुद्रण, प्रकाषन एवं विक्रय व्यवस्था (च) चिकित्सालय, औषधालय, आरोग्य संस्थान की स्थापना, संचालन एवं विकास (छ) विकलांग, अनाथ, कुष्टरोगी, दरिद्रनारायण आदि की सेवा-सुश्रुषा (ज) विद्वानों एवं महात्माओं का सम्मान एवं प्रवचन तथा मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति (झ) बाढ़, दुर्भिक्ष और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ितों की सहायता (ट) न्यास से संबंधित अनुषांगिक अन्य कार्यों का सम्पादन10 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 (ठ) अन्यान्य जनोपयोगी कार्य जिसे न्यास समिति ने स्वीकृति प्रदान की हो (ड) हिन्दू धर्म एवं अन्य सभी धर्मों के नैतिक मूल्यों की प्रगति एवं प्रचार-प्रसार (ढ़) संत निवास, सेवा आश्रम एवं धर्मषाला का निर्माण ।
3. माँ बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर, भक्त श्रीधर सेवा-आश्रम सहित अन्य अनुषांगिक संस्थाओं के प्रबंधन, प्रषासन एवं संचालन का अधिकार न्यास समिति में निहित होगा ।
4. न्यास समिति न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था करेगी तथा शास्त्रीय मर्यादा के अनुरूप मंदिर में दैनिक पूजन-अर्चना और सामायिक उत्सवों का आयोजन करेगी ।
5. मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालु भक्तों के पूजन-अर्चना की समुचित व्यवस्था करेगी। 6. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना तथा मंदिर के विकास हेतु वित्तीय प्रबंधन एवं बजट तैयार कर पर्षद को भेजेगी ।
7. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में उल्लेखित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षण प्रतिवेदन सम्यक् रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी ।
8. न्यास समिति वर्तमान संचित धन से ''भक्त श्रीधर सेवाश्रम'' का निर्माण करायेगी तथा उसके सम्यक् विकास एवं प्रबंधन हेतु आय-स्रोत में वृद्धि तथा कोष संग्रह करने का प्रयास करेगी ।
9. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे । न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य बुलायी जायेगी और बैठकों की कार्यवृत्त पर्षद को प्रेषित की जायेगी ।
10. साधारण बैठक एक सप्ताह की पूर्व सूचना पर बुलायी जायेगी । विषेष बैठक एक तिहाई सदस्यों के हस्ताक्षर युक्त अधियाचना, जिसमें बैठक की कार्यावाली का उल्लेख होना आवष्यक है, प्राप्त होने पर अध्यक्ष विषेष बैठक आहूत करेंगे । यदि अध्यक्ष ऐसे किसी अधियाचना पत्र की प्राप्ति के 15 दिनों के अंदर बैठक बुलाने में विफल रहेंगे तो अधियाचना पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्य ही न्यास की विषेष बैठक बुला सकेंगे ।
11. बैठक में अध्यक्ष की अनुपस्थिति की अवस्था में उपाध्यक्ष द्वारा अध्यक्षता किया जायेगा । अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्यों में से कोई एक वरीय सदस्य बैठक की अध्यक्षता कर सकते हैं ।
12. बैठक की समस्त कार्यावली, प्रस्तावबद्ध निर्णय बहुमत से होगा । समान मत होने पर अध्यक्ष को निर्णायक मत देने का अधिकार होगा ।
13. बैठक की कार्यवाही सचिव द्वारा उस प्रयोजनार्थपंजी में अंकित किया जायेगा । 14. सचिव न्यास समिति का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी होगा तथा समिति द्वारा लिये गये सभी निर्णयों को कार्यान्वित करने के लिए उत्तरदायी होंगे ।
15. माँ बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर न्यास समिति को अपनी निधियां होंगी, जिनकी आय में भेंट (दान) पात्रों, चढ़ावे, चंदे, दान, उपहार, अर्पण एवं अन्य सभी प्रकार के शुल्कों से प्राप्त राषि तथा अन्य किसी भी स्रोत से आय सम्मिलित होगी।
16. मंदिर परिसर में जगह-जगह दान-पात्र रखें जायेंगे, जिसमें दान, चढ़ावे आदि की समस्त राषि डाली जायेगी और न्यास समिति के दो सदस्यों की उपस्थिति में इसे खोली जायेगी । दान-पात्र की राषि की गणना एवं पंजी में दर्ज करने के पश्चात् इसे न्यास के बैंक खाते में जमा की जायेगी ।
17. न्यास की समग्र आय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा । बैंक खाता का संचालन अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष में से किन्हीं दो के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा । दैनिक व्यय हेतु अधिकतम दस हजार रुपये तक नकद कार्यालय में रखे जा सकेंगे । समस्त आय-व्यय बैंक खातों के माध्यम से किया जायेगा। 18. न्यास के लेखा-संधारण का सम्पूर्ण भार वित्त प्रबंधक/कोषाध्यक्ष का होगा । 19. न्यास के नाम संधारित बैंक खाता में कोई भी राषि न्यास के सम्यक् विकास हेतु जमा कर श्रद्धालु मंदिर से प्राप्ति रसीद ले सकते हैं । उक्त रसीद प्राप्त करने से पूर्व उन्हें यह प्रमाण देना होगा कि उन्होंने राषि बैंक में जमा कर दी है ।
20. न्यास समिति न्यास का वार्षिक बजट, आय-व्यय विवरणी एवं सक्षम अंकेक्षक द्वारा प्रतिवेदित अंकेक्षण प्रतिवेदन प्रतिवर्ष पर्षद को प्रेषित करेगी ।
21. न्यास समिति न्यास के कार्य विषेष के लिए अलग-अलग उप समितियों का गठन करेगी, जिनके सदस्यों की संख्या न्यास समिति निष्चित करेगी ।
22. आमजन/श्रद्धालुजन न्यास की व्यवस्था से संदर्भित कोई और किसी प्रकार का परामर्ष लिखित रूप से कर सकते हैं, जिसके लिए मंदिर में एक परामर्ष पेटिका लगाया जायेगा ।
23. न्यास की सभी अनुषांगिक संस्थाएं न्यास के ही उपयोगार्थ एवं न्यास हित में होगी । किसी भी परिस्थिति में इनका व्यक्तिगत उपयोग नहीं किया जायेगा ।
24. न्यास समिति द्वारा कोई योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद के अनुमोदन के पश्चात् इसे मूर्त रूप देगी ।
25. इस योजना में परिवर्तन, परिबर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। 26. इस न्यास समिति का कार्यकाल आदेष की तिथि से 05 वर्षों की होगी । पर्षद द्वारा निरूपित योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :-
11 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012- अध्यक्ष
- सचिव
- कोषाध्यक्ष
- सदस्य (1) श्री बृजेष्वर प्रसाद सिंह ग्रामपो0-बड़हिया, वार्ड नं0-08, जिला-लखीसराय (2) श्री जयषंकर प्रसाद सिंह ग्रामपो0-बड़हिया, वार्ड नं0-13, जिला-लखीसराय (3) श्री मिथिलेष प्रसाद सिंह ग्रामपो0-बड़हिया, वार्ड नं0-04, जिला-लखीसराय (4) श्री गोपाल प्रसाद खेमका, नर्मदा अपार्टमेंट, पटना - सदस्य (5) डा0 श्री सत्येन्द्र प्रसाद 'अरूण' - सदस्य ग्रामपो0-बड़हिया, वार्ड नं0-05, जिला-लखीसराय (6) श्री सुरेष प्रसाद पंखिया ग्रामपो0-बड़हिया, वार्ड नं0-13, जिला-लखीसराय (7) श्री सुनील चंद्र सिंह, बड़हिया धनराज, जिला-लखीसराय - सदस्य (8) श्री अनिल सिंह, पे0-स्व0 रामनंदन सिंह - सदस्य ग्रामपो0-बड़हिया, वार्ड नं0-14, जिला-लखीसराय (9) श्री सुनील सिंह, पे0- स्व0 अवधेष प्रसाद सिंह - सदस्य ग्रामपो0-बड़हिया, वार्ड नं0-14, जिला-लखीसराय (10) श्री यदु राम, ग्रामपो0-बड़हिया, जिला-लखीसराय - सदस्य (11) श्री विजय कुमार सिंह - सदस्य ग्रामपो0-बड़हिया, वार्ड नं0-01, जिला-लखीसराय
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
———
12 मार्च 2012
सं॰ 2092—श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी वन्देहरा, थाना-पसराहा, जिला-खगड़िया पर्षद के अन्तर्गत एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4167 है। इस न्यास के संबंध में स्थानीय जनता से पर्षद को एक आरोप पत्र दिनांक 06.11.2007 को प्राप्त हुआ जिसमें कहा गया था कि श्री राम जानकी के नाम से 55 बिघा जमीन विभिन्न मौजा के जामाबन्दी में दर्ज है और इस सार्वजनिक ठाकुरबाड़ी की भू-खंडों को सर्व श्री विद्यानन्दन भगत, दयानन्द भगत एवं अनिल भगत द्वारा अवैध रूप से बिक्री किया जा रहा है तथा इसकी आय को व्यक्तिगत उपभोग में लाया जा रहा है। इसके आलोक में पर्षदीय पत्रांक 110 दिनांक 15.04.2009 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, परवत्ता, लखीसराय को जांच कर प्रतिवेदन भेजने का अनुरोध किया गया। तत्पष्चात श्री संजीव कुमार, पूर्व मुखिया का एक पत्र दिनांक 03.03.2011 को प्राप्त हुआ जिसके साथ दिनांक 26.01.2011 को हुई आम सभा का कार्यवृत संलग्न करते हुए निवेदन किया गया कि इस न्यास का निबंधन किया जाए तथा सम्पत्तियों की सुरक्षा के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाए। इसके आलोक में पर्षदीय पत्रांक 106 दिनांक 18. 04.2011 द्वारा सर्व श्री विद्यानंद भगत, नित्यानंद भगत, दयानंद भगत, एवं अनिल भगत को कारण पृच्छा की नोटिस दी गयी कि क्यों नहीं सार्वजनिक न्यास की सम्पत्ति के बिक्री एवं दुरुपयोग के आरोपों में बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत आवष्यक कार्रवाई की जाए। इसमे से श्री विद्यानंद भगत एवं अनिल भगत का पत्र इस अभ्यिुक्ति के साथ वापस हो गया कि अनिष्चितकाल के लिए घर से बाहर है, बिना पता बताये घर से बाहर है। इसके बाद पर्षदीय पत्रांक 1266 दिनांक 29.10.2011 द्वारा पुनः कारण-पृच्छा की नोटिस दी गयी जिसकी प्रतिलिपि श्री संजीव कुमार मुखिया, ग्राम पंचायत राज बन्देहरा को भी भेजी गयी थी। मुखिया ने अपने स्तर से भी इन्हें तामिला का प्रयास किया परन्तु उनके प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि श्री नित्यानंद भगत, विद्यानंद भगत, और अनिल भगत ने पत्र लेने से इंकार किये और दयानंद भगत की दो वर्ष पूर्व देहान्त हो गया है।
उपरोक्त परिस्थिति में स्पष्ट है कि इस सार्वजनिक न्यास की सम्पत्तियों का दुरुपयोग हो रहा है, अतः इसकी सुरक्षा एवं समुचित व्यवस्था के लिए अधिनियम की धारा 32 के तहत योजना का निरूपण आवष्यक प्रतीत होता है। अतः मैं, किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास पर्षद श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, बन्देहरा के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा 32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुए इसके क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति गठित करता हूँ।12 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 योजनायोजनायोजनायोजना
1. इस योजना का नाम '' श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी बन्देहरा न्यास योजना'' होगा तथा इसे मूर्त्त रूप देने हेतु पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम '' श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी बन्देहरा न्यास समिति'' होगा, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा। 2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास सम्पत्तियों की सुरक्षा हेतु सभी विधिनुकूल कार्रवाई सुनिष्चित करना तथा ठाकुरबाड़ी के परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-अर्चना, राग-भोग, साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली परख होगी।
4. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, बजट, अंकेक्षण-प्रतिवेदन, कार्यवृत्त आदि सम्यक रूप से पर्षद को प्रेषित करेगी।
5. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष /मनोनित अध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगें। समिति की बैठक साल में कम से कम चार बार अवष्य होगी और निर्णय बहुमत से होगा।
6. न्यास समिति के सचिव कार्यवाही पुस्तिका का संधारण करेगें और समिति के निर्णयों का अनुपालन सुनिष्चित करेंगे । कोषाध्यक्ष न्यास के आय-व्यय संबंधी लेखा का संधारण करेगें और इसमें शुचिता एवं पारदर्षिता सुनिष्चित करेंगे।
7. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन अथवा संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।
8. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाये जायेगे या आपराधिक पृष्टभूमि के होगें तो उनकी सदस्य होने की पात्रता समाप्त हो जायेगी।
9. न्यास समिति के कोई सदस्य अपने कर्तव्य के निवर्हन में विफल रहेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगें , तो समिति के अध्यक्ष या सचिव इसकी सूचना पर्षद को देगें ताकि स्थापनापन्न मनोनयन हो सके।
10. यह योजना आदेष की तिथि से लागू होगी और इसकी अवधि एक वर्ष की होगी। समिति द्वारा अच्छा कार्य करने पर पुनः काल-विस्तार किया जायेगा।
11. इस योजना के संचालन एवं इसे मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को न्यास समिति का सदस्य मनोनित किया जाता है।
(1) श्री नागेष्वर प्रसाद मेहता, ग्रामपो0-महद्वीपुर, जिला-खगड़िया - अध्यक्ष (2) श्री निरंजन यादव, ग्राम-तेहाय, जिला-खगड़िया - उपाध्यक्ष (3) श्री अनिल कुमार यादव(अधिवक्ता), ग्रामपो0-बन्देहरा, जिला-खगड़िया - सचिव (4) श्री रविषचन्द्र सिंह, ग्राम-दीना चकला, जिला-खगड़िया - कोषाध्यक्ष (5. श्री जग्गन मल्लिक, ग्रामपो0-बन्देहरा, जिला-खगड़िया - सदस्य (6) श्री नन्द कुमार प्र0 यादव, ग्रामपो0-बन्देहरा, जिला-खगड़िया - सदस्य (7) श्री अनिल सिंह(पूर्व सरपंच), ग्रामपो0-बन्देहरा, जिला-खगड़िया - सदस्य (8) श्रीमति सीता देवी, ग्रामपो0-बन्देहरा, जिला-खगड़िया - सदस्य (9) श्री दिवाकर शर्मा, ग्रामपो0-झंझरा, जिला-खगड़िया - सदस्य (10) श्री हरदेव प्र0 सिंह, ग्रामपो0-बाबू चकला, जिला-खगड़िया - सदस्य (11) श्री प्रकाष यादव, ग्रामपो0-शेरगढ, जिला-खगड़िया - सदस्य ।
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
———
28 मई 2012
सं॰ 312—पटना जिलान्तर्गत बख्तियारपुर थाना के ग्राम-बाहापुर स्थित श्री राम जानकी मंदिर पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4025 है।
श्रीमती सत्यभामा देवी ने अपने आवेदन पत्र दिनांक-19.10.2009 द्वारा पर्षद को सूचित किया कि श्री राम जानकी मंदिर, बाहापुर एक सार्वजनिक मंदिर है, जिसमें 22 विघा जमीन है और वे इसका प्रबंध कर रही है। उनके आवेदन पत्र के आलोक में पर्षद में इसका निबंधन किया गया। तत्पष्चात् मंदिर के सुचारू प्रबंधन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति के गठन को प्रस्ताव प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। अतएव श्री राम जानकी मंदिर बाहापुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक विकास के लिए न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।13 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 अतः मैं किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, श्री राम जानकी मंदिर बाहापुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा एवं संरक्षण, समुचित संचालन एवं सम्यक विकास के लिए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करता हूँ तथा इसके कार्यान्वयन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया जाता हैः-
योजनायोजनायोजनायोजना
1111 अधिनियम की धारा 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''''''''श्र राम जानकी मंदिर, बाहापुर, न्यास श्र राम जानकी मंदिर, बाहापुर, न्यास श्र राम जानकी मंदिर, बाहापुर, न्यास श्र राम जानकी मंदिर, बाहापुर, न्यास यायायायोजना''ेजना''ेजना''ेजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ''श्री राम जानकी ''श्री राम जानकी ''श्री राम जानकी मंदिर, बाहापुर, न्यास समितिमंदिर, बाहापुर, न्यास समितिमंदिर, बाहापुर, न्यास समितिमंदिर, बाहापुर, न्यास समिति'''''''' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण का अधिकार निहित होगा।
2222.... इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सुव्यवस्था करना होगा। 3333.... न्यास समिति मठ के परम्परा के अनुसार धार्मिक आचारों का पालन सुनिष्चित करेगी। 4444.... मंदिर में प्राप्त होनेवाली समग्र आय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा की जायेगी। बैंक खाता का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। व्यय के अनुसार राषि निकालकर काम किया जायेगा।
5555.... न्यास के लेखा का संधारण सत्यापित पंजी में होगा। आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति का प्रमुख दायित्व होगा जिससे कि सिमिति का कार्य परिलक्षित हो सके और जनता का विष्वास बना रहे।
6666.... न्यास की सभी भू-खंडो का नामांतरण ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, बाहापुर'' के नाम से होगा। 7777.... अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार आवष्य आयोजित की जायेगी।
8888.... न्यास समिति के सचिव द्वारा बैठकों की कार्यवाही पुस्तिका संधारित की जायेगी तथा कोषाध्यक्ष न्यास के लेखा के संधारण के लिए उत्तरदायी होंगे।
9999.... न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, बजट, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी। 10101010.... कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझे जाने पर, इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् की अनुमोदन के लिए भेजेगी।
11111111. न्यास समिति का कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यदि न्यास से लाभ उठाता हुआ पाये जायेगें या आपराधिक पृष्टभूमि का होंगे तो वह न्यास समिति की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जायेगा और उस स्थिति में उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी।
12121212.... न्यास समिति में कोई पद आकस्मिक दुर्घटना, त्याग-पत्र अथवा अन्य कारणों से रिक्त होने पर उस पर नियुक्ति पर्षद् करेगी।
13131313. न्यास समिति के कोई सदस्य अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में विफल रहेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो समिति के अध्यक्ष या सचिव इसकी सूचना पर्षद् को देंगे ताकि समुचित कार्रवाई की जा सके। 14141414.... इस योजना में परिवर्त्तन, परिवर्धन अथवा संषोधन का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 15151515.... इस योजना के संचालन एवं कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को न्यास समिति का सदस्य मनोनित किया जाता है :-
(1) श्रीमती सत्यभामा देवी, पति- स्व0 रवि शंकर प्रसाद सिंह - अध्यक्ष (2) श्री अजीत कुमार, पिता- श्री चन्द्रभूषण सिंह - सचिव (3) श्री राम बालक सिंह, पिता- स्व रामजी सिंह - सदस्य (4) श्री भगवान शर्मा, पिता- स्व0 नरसिंह नारायण सिंह - सदस्य (5) श्री हरिकान्त शर्मा, पिता- स्व0 सुरेन्द्र सिंह - सदस्य (6) श्री राज नारायण शर्मा, पिता- स्व0 राम नारायण शर्मा - सदस्य (7) श्री जयनंदन प्रसाद सिंह, पिता- स्व0 रामजी सिंह - सदस्य सभी सदस्य ग्राम- बाहापुर, पो0- मझौली, थानाअंचल-बख्तियारपुर, जिला-पटना यह योजना दिनांक 07.06.2012 से लागू होगी।
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
———
17 अप्रील 2012
सं॰ 83—पटना जिलान्तर्गत फुलवारी अंचल के ग्राम बोचाचक स्थित श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी (राम लला ठाकुरबाड़ी) पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4169 है।
इस न्यास के संबंध में स्थानीय जनता ने पर्षद को सूचित किया कि न्यास की जमीन निर्माणाधीन एम्स रोड पर होने के कारण करोड़ो की हो गयी है और भू-माफिया द्वारा इस पर अवैध कब्जा का प्रयास किया जा रहा है। तदुपरान्त पर्षद द्वारा इस न्यास का स्थानीय निरीक्षण कराया गया। जाँच अधिकारी ने प्रतिवेदित किया है कि न्यास की सभी जमीन आवासीय होने के कारण काफी कीमती है। ग्रामीणों के सहयोग से भगवान का पूजा-अर्चना तथा पुजारी के पारिश्रमिक का प्रबंध किया14 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 जाता है। इन्होंने न्यास सम्पत्तियों की सुरक्षा और सम्यक संचालन हेतु स्थानीय जनता द्वारा गठित समिति को मान्यता प्रदान करने की अनुषंसा की है।
उपर्युक्त परिस्थिति में इस न्यास की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रषासन तथा सम्यक विकास के लिए योजना का निरूपण तथा इसके संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन आवष्यक है।
अतः मैं, किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, बोचाचक के सुप्रबंधन, सम्यक विकास तथा सम्पत्तियों की सुरक्षा हेतु अधिनियम की धारा 32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुए इसके क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति गठित करता हूँ।
योजनायोजनायोजनायोजना
1. अधिनियम की धारा 32 के अधीन निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी, बोचाचक न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन हेतु गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राम जानकी ठाकुरबाड़ी न्यास समिति, बोचाचक'' होगा, जिसमें न्यास की सभी चल-अचल सम्पत्ति के संधारण का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य मंदिर में पूजा-पाठ, राग-भोग आदि का समुचित व्यवस्था करना होगा। 3. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेगें। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार अवष्य आयोजित की जायेगी।
4. सचिव द्वारा बैठकों की कार्यवाही पुस्तिका संधारित की जायेगी तथा कोषाध्यक्ष न्यास के लेखा के संधारण के लिए उत्तरदायी होगें।
5. किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोला जायेगा जिसका संचालन अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष में से किन्हीं दो के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।
6. न्यास समिति में कोई पद, त्याग-पत्र देने या अन्य कारणों से, रिक्त होने पर उस पर नियुक्ति पर्षद करेगी। 7. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित नियमों का पालन सुनिष्चित करेगी। 8. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाये जायेगें या उनकी आपराधिक संंलिप्तता होगी तो वह न्यास समिति की सदस्यता के अयोग्य घोषित किया जायेगा।
9. इस योजना में परिवर्द्धन, परिवर्तन एवं संषोधन का अधिकार पर्षद में निहित होगा। 10. यह योजना दिनांक-.20.04.2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल 05 वर्षो का होगा।
न्यास समिति के निम्नलिखित सदस्य मनोनित किये जाते हैः-
(1) डॉ0 तेजनारायण सिंह, पिता-स्व0 रामजीवन सिंह - अध्यक्ष (2) श्री पिन्टु शर्मा, पिता- श्री रामअवधेष मिस्त्री - उपाध्यक्ष (3) श्री सतीष कुमार, पिता- श्री रामईष्वर सिंह - सचिव (4) श्री राज कुमार सिंह, पिता- स्व0 रामजीवन सिंह - कोषाध्यक्ष (5) श्री भारत भूषण, पिता- श्री कृष्ण मुरारी सिंह - सदस्य (6) श्री संजय कुमार, पिता- श्री कामेष्वर सिंह - सदस्य (7) श्री मनीष कुमार, पिता- स्व0 चन्द्रिका सिंह - सदस्य (8) श्री उपेन्द्र सिंह, पिता- स्व0 राजेष्वर सिंह - सदस्य (9) श्री रामपुकार सिंह, पिता- श्री प्रकाष सिंह - सदस्य (10) श्री शम्भु प्रसाद सिंह, पिता- श्री चन्द्रिका सिंह - सदस्य (11) श्री आषिष कुमार, पिता- श्री अरूण कुमार सिंह - सदस्य
सभी ग्राम- बोचाचक, फुलवारी, जिला- पटना। ह0/-
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
———
20 मार्च 2012
सं॰ 2136—दरभंगा जिलान्तर्गत सिंहवाड़ा प्रखंड के ग्राम रामपुरा स्थित श्री धनेश्वर नाथ मंदिर, (कपूर पट्टी शिवाला) पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-1677 है।
इस न्यास के पर्षद द्वारा मान्यता प्राप्त न्यासधारी म0 राम गिरि थे जिनके देहावसान के पष्चात् षिव शंकर गिरि न्यासधारी हुए। पर्षदीय पत्रांक 4856 दिनांक 10.01.2006 द्वारा षिव शंकर गिरि के निधन के पष्चात् अंचलाधिकारी, सिंहवाड़ा को अधिनियम की धारा-33 के तहत अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया था। तत्पष्चात् दिनांक 22.07.2006 को श्री जनार्दन तिवारी का एक आवेदन पत्र पर्षद को प्राप्त हुआ जिसमें स्थानीय लोगों द्वारा गठित 15 सदस्यीय न्यास समिति को मान्यता देने का अनुरोध किया गया था। दिनांक 26.04.2011 को स्थानीय लोगों ने पर्षद को सूचित किया कि श्री जर्नादन तिवारी एक स्वयं भू न्यास समिति गठित कर न्यास सम्पत्तियों एवं आय का दुरूपयोग कर रहें है तथा मंदिर में पूजा-पाठ, राग-भोग की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके आलोक में पर्षदीय पत्रांक 200 दिनांक 11.05.2011 द्वारा श्री जनार्दन तिवारी को कारण-पृच्छा की नोटिस भेजी गयी तथा अनुमंडल पदाधिकारी, दरभंगा को जांच कर प्रतिवेदन एवं न्यास समिति के लिए सदस्यों का नाम भेजने का अनुरोध किया गया। श्री जनार्दन तिवारी ने दिनांक 04.08.2011 को पर्षद को समर्पित अपने आवेदन पत्र में आरोपों से इंकार करते हुए यह अनुरोध किया कि इसकी व्यवस्था किसी दूसरे व्यक्ति से करायी जाय। तत्पष्चात् पर्षदीय पत्रांक 905 दिनांक 23.08.2011 द्वारा उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करते हुए उन्हें सूचित किया गया कि15 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 पर्षद द्वारा न्यास समिति को औपचारिक मान्यता नहीं दी गयी है, अतः क्यों नहीं इसे भंग कर दी जाय। पुनः इनके विरूद्ध कुछ आपराधिक कांडों में संलिप्तता की शिकायत प्राप्त होने पर पर्षदीय पत्रांक 1370 दिनांक 24.11.2011 द्वारा इनसे इस संबंध में स्पष्टीकरण पूछा गया कि क्यों नहीं इनके विरूद्ध समुचित कार्रवाई की जाय। इसके जवाब में श्री तिवारी ने दिनांक 24.12.2011 को पर्षद को सूचित किया कि इन्होंने पहले ही लिखकर दे दिया है कि यदि इनके कार्यों से सहमत नहीं हैं तो पर्षद अपने स्तर से व्यवस्था करें। इन्होंने अपने विरूद्ध लाये गये आरोपों का कोई उत्तर नहीं दिया।
उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि उक्त न्यास में न तो कोई न्यासधारी है और न ही पर्षद द्वारा विधिवत् मान्यता प्राप्त न्यास समिति है। कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से इसकी सम्पत्तियों एवं आय का दुरूपयोग किया जा रहा है और भगवान का पूजा-अर्चना, राग-भोग, साधु-अभ्यागत् की सेवा का भी समुचित प्रबंध नहीं है। इसलिए इसके समुचित प्रबंधन हेतु योजना की निरूपण एवं इसके सुसंचालन हेतु न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है।
अतः मैं, किशोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, श्री धनेष्वर नाथ मंदिर (कपूर पट्टी षिवाला) रामपुरा के सुचारू प्रबंधन, सम्यक् विकास तथा सम्पत्तियों की सुरक्षा हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा 32 के तहत् अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुए इसके क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ।
योजना
1. इस योजना का नाम ''श्री धनेश्वर नाथ मंदिर (कपूर पट्टी शिवाला) न्यास योजना'' होगा तथा इस योजना को मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम '' श्री धनेष्वर नाथ मंदिर (कपूर पट्टी षिवाला) न्यास समिति'' होगा जिसमें मठ की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा। 2. न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास सम्पत्तियों की सुरक्षा, सुव्यवस्था और मंदिर की परम्परा के अनुकूल पूजा-पाठ, राग-भोग एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3. मठ की आय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली परख होगी। 4. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, बजट, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्यवृत्त आदि पर्षद को सम्यक रूप से प्रेषित करेगी।
5. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेगें। समिति की बैठक साल में कम से कम चार बार अवष्य होगी।
6. न्यास समिति के सचिव समिति की बैठकों में लिए गए निर्णयों के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होगें और कोषाध्यक्ष लेखा का सम्यक संधारण करेगें।
7. न्यास की समग्र आय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा और सचिव तथा कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खाता का संचालन किया जायेगा।
8. न्यास समिति के कोई सदस्य अपने कर्त्तव्यों के निवर्हन में विफल रहेगें या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेगें तो समिति के अध्यक्ष या सचिव इसकी सूचना पर्षद को देगें ताकि इस पर विचार कर समुचित निर्णय लिया जा सके। 9. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से न्यास से लाभ उठाते पाये जायेगें या आपराधिक पृष्ठभूमि के होगें तो समिति के सदस्य होने की उनकी पात्रता समाप्त हो जायेगी।
10. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन एवं संषोधन का अधिकार पर्षद में निहित होगा। 11. न्यास समिति को न्यास की जमीन को किसी भी प्रकार के हस्तान्तरण (बिक्री, रेहन, पट्टा आदि) का अधिकार नहीं होगा।
समिति का सदस्य मनोनित किया जाता हैः-
(1) श्री राजकरण ठाकुर, ग्राम-र्मिजापुर जगनी एवं पो0-रामपुरा, दरभंगा - अध्यक्ष (2) श्री चन्द्रदेव चौधरी ग्राम एवं पो0-रामपुरा, दरभंगा - सचिव (3) श्री राम विनय चौधरी, ग्राम एवं पो0-रामपुरा, दरभंगा - कोषाध्यक्ष (4) श्री राघवेन्द्र पाण्डेय, ग्राम -र्मिजापुर जगनी पो0-रामपुरा, दरभंगा - सदस्य (5) श्री सुनील मिश्र, ग्राम-मिर्जापुर जगनी पो0-रामपुरा, दरभंगा - सदस्य (6) श्री विष्वनाथ चौबेे, ग्राम-मिर्जापुर जगनी पो0-रामपुरा, दरभंग ा- सदस्य (7) श्री हरिष्चन्द्र तिवारी, ग्राम पो0-रामपुरा, दरभंगा - सदस्य (8) श्री नवल किषोर तिवारी, ग्राम पो0-रामपुरा, दरभंगा - सदस्य (9) श्री योगी मंडल, ग्राम पो0-रामपुरा, दरभंगा - सदस्य (10) श्री सुरेष पासवान, ग्राम पो0-रामपुरा, दरभंगा - सदस्य यह योजना 23.03.2012 से लागू होगी और इसका कार्यकाल 05 वर्षों का होगा।
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
———
6 जून 2012
सं॰ 374—श्री षिवनन्दन नाथ महादेव मन्दिर न्यास, वड़ी बाजार, मुंगेर बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 के तहत पर्षद मे निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या- 4183 है। इस मंदिर न्यास की स्थापना16 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 एवं निर्माण राजा देवकी नन्दन प्रसाद ंिसंह द्वारा की गयी थी। उन्होनें मंदिर की व्यवस्था एवं देखरेख के लिए दिनांक 28. 05.1937 को एक ट्रस्ट डीड निबंधित किया था। उक्त डीड में यह प्रावधान है कि डीड में उल्लेखित सभी ट्रस्टीयों की मृत्यु के पष्चात् माननीय जिला जज, मुंगेर इसीश्षहर के किन्ही तीन सनातन धर्मी हिन्दू पुरूष को ट्रस्टी नियुक्त करेंगे। माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीष, मुंगेंर ने माननीय पटना उच्च न्यायालय के पत्र सं0 10145/Adm.(Misc) /iv-127708(11) दिनांक 4.09.2009 के आलोक मे अपने ज्ञापांक 4188-89 दिनांक 10.9.2009 द्वारा श्री विनय कुमार जायसवाल एवं श्री निताई चन्द्र लाल चौधरी को सूचित किया कि वे अपने आपत्ति के निराकरण हेतु, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद से सम्पर्क करें। तत्पष्चात् श्री विनय कुमार जायसवाल ने दिनांक 29.09.09 को पर्षद में आवेदन देकर उक्त निर्देष के आलोक में कार्रवाई का अनुरोध किया। पर्षद द्वारा विभिन्न तिथियों पर उभय पक्ष की सुनवाई के पष्चात् न्यास के प्रबंधन हेतु ट्रस्टीयों की नियुक्ति के संबंध में निम्नलिखित निर्णय लिए गएः- 1. मुंगेर के जिला न्यायाधीष पदेन अध्यक्ष होंगे। अपनी व्यस्तता की स्थिति में वे किसी अन्य न्यायाधीष को प्रतिनियुक्त कर सकेंगे। 2. श्री आनन्द प्रसाद सिंह, राजवाटी, मुंगेर 3. श्री निताई चन्द्र लाल चौधरी, राजवाटी, मुंगेर उक्त पर्षदीय निर्णय के विरूद्ध श्री दीपक जायसवाल एवं श्री विनय कुमार जायसवाल ने पर्षद को सूचित किया कि श्री आनन्द प्रसाद सिंह मुंगेर शहर में नहीं रहते है, ये बराबर वृन्दावन और विदेषो मे रहा करते हैैं। श्री निताई चन्द्र लाल चौधरी के संबंध मे श्री जायसवाल ने सूचित किया कि मन्दिर की मूर्त्ति चोरी से संबंधित इनके द्वारा दायर प्रथम सूचना रिपोर्ट को पुलिस ने झूठा करार देते हुए श्री चौधरी पर ही धारा 406/120(वी)/34 भा0 द0 वि0 के तहत प्राथ्मिकी दर्ज की है जिसका केष नं0 102/12 है। श्री जायसवाल द्वारा पुलिस प्रतिवेदन एवं प्राथमिकी की कॉपी दाखिल करते हुए अनुरोध किया गया कि ऐसे व्यक्ति को ट्रस्टी नियुक्त करना उचित नहीं होगा। सूचनानुसार इस समिति की बैठक कभी नहीं हुई है और किसी सदस्य ने प्रभार नहीं ग्रहण किया है, अतः वहाँ शून्यता की स्थिति है। उपर्युक्त परिस्थिति में सम्पूर्ण मामले पर विचारोपरन्त पर्षद द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि श्री आनन्द प्रसाद सिंह एवं श्री निताईचन्द्र लाल चौधरी के स्थान पर श्री विनय कुमार जायसवाल एवं श्री दीपक जायसवाल को ट्रस्टी नियुक्त किया जाय। अतः न्यास-पत्र एवं माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा जिला न्यायाधीष, मुंगेर को दिये गये आदेष के आलोक में श्री षिवनन्दन नाथ महादेव मन्दिर न्यास, बड़ी बाजार, मुंगेर के प्रबंधन हेतु अधिनियम की धारा-29(1) के तहत त्रि-सदस्यीय समिति गठित की जाती है जिसमें जिला न्यायाधीष, मुंगेर, अध्यक्ष के अतिरिक्त निम्नलिखित दो सदस्य होगेंः-
| 1 | श्री विनय कुमार जायसवाल, पे0- स्व0 गंगा सागर प्रसाद जायसवाल, सागर कम्पाउण्ड, बेलन बाजार, मु गेर । ं | सचिव। |
| 2 | श्री दीपक जायसवाल , पे0- स्व0 तेजनारायण जायसवाल बड़ी बाजार, मुंगेर । | सदस्य। |
यह समिति संस्थापक द्वारा बनाये गये ट्रस्ट के अन्तिम विकल्प के आलोक मे गठित की जा रही है। समिति न्यास के संचालन के लिए नियमावली बनाकर धार्मिक न्यास पर्षद के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी। तबतक सचिव, अध्यक्ष की अनुमति से बैठक बुलायेंगे और दो की गणपूर्ति निर्णय लेने के लिए मान्य होगी।
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
———
11 मई 2012
सं॰ 228—सहरसा जिलान्तर्गत सिमरी बख्तियारपुर थाना के ग्राम-वसंतपुर स्थित कबीर पंथी मठ पर्षद के तहत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-1761 है।
इस न्यास के न्यासधारी म0 सुखदेव दास ने पत्रांक-52 दिनांक 13.08.2007 द्वारा यह अनुरोध किया था कि उनके स्थान पर श्री राम स्वरूप दास शास्त्री को उनका उत्तराधिकारी बनाया जाये। म0 सुखदेव दास ने श्री शास्त्री के पक्ष में वर्ष 1990 में एक वसीयत भी लिखी थी। इसके आलोक में पर्षदीय पत्रांक-972 दिनांक 21.09.2007 द्वारा उन्हें यह सूचित किया गया था कि श्री राम स्वरूप दास शास्त्री को उत्तराधिकारी बनाने के लिए उनके द्वारा भेजी गयी अनुषंसा को सम्पुष्ट किया जाता है। यह सम्पुष्टि बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा-28 (2) (घ) के तहत की जाती है। इसके पष्चात् श्री राम स्वरूप दास शास्त्री ने न्यास के आय-व्यय की विवरणी, बजट आदि पर्षद में दाखिल किया।
तत्पष्चात् म0 सुखदेव दास ने अपने पत्र दिनांक 25.11.2011 द्वारा पर्षद को सूचित किया कि उन्होनें ब्रह्मानन्द दास को उक्त मठ की समुचित व्यवस्था के लिए अपना उत्तराधिकारी मनोनित किया है। उनका यह प्रस्ताव पर्षदीय पत्रांक-1621 दिनांक 08.012.2011 द्वारा इस कारण अस्वीकृत किया गया कि चूंकि इस मठ के महंत के रूप में श्री17 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 रामस्सवरूप दास षास्त्री को मान्यता पहले दी जा चूकी है और दिनांक 21.09.2007के आदेष से वे महंत के रूप मे कार्यरत हैं, इसलिए उन्हें नया महंत नियुक्त करने का अधिकार नहीं रहा।
महंत सुखदेव दास ने पुनः अपने आवेदन दिनांक-3.01.2012 में पर्षद को सूचित किया कि उन्होने दिनांक 13.08. 2007 का कोई पत्र पर्षद को प्रेषित नही किया है और न तो पर्षदीय पत्रांक-972 दिनांक 21.092007 ही उन्हे प्राप्त हुआ है। उनका निवेदन था कि उक्त तथाकथित पत्र पर या तो उनका हस्ताक्षर जाली है या फिर उन्हें धोखे में रखकर हस्ताक्षर करबाया गया होगा। उन्होंने श्री ब्रह्मनन्द दास के पक्ष में एक वसीयतनामा दिनांक 16.11.2011 को निबंधित किया हैं और कबीर चौरा मूल गद्दी, वाराणसी के आचार्य महंत विवेक दास एवं साधु-संतो की उपस्थिति में समारोहपूर्वक श्री ब्रह्मानंद दास को चादर महंती की औपचारिकता पूरी की गयी। साथ ही श्री ब्रह्मानन्द दास को मठ परम्परानुसार "पंजा" भी बनाकर रजिस्टर्ड कर दिया गया है । इस प्रकार उनका अनुरोध था कि श्री राम स्वरूप दास शास्त्री को उत्तराधिकारी बनाने से संबंधित आदेष को वापस ली जाये तथा छानबीन कर इनके विरूद्ध समुचित कार्रवाई की जाय। उनके आावेदन पत्र दिनांक 03.01.2012 को पर्षद की बैठक दिनांक 27.01.2012 में विचारार्थ प्रस्तुत किया गया। पर्षद की बैठक में पूर्ण विचारोपरान्त सर्वसम्मति से इस मठ के प्रबंधन हेतु समुचित निर्णय लेने के लिए अध्यक्ष को अधिकृत किया ।
इसी बीच संत विवेक दास आचार्य, कबीर चौरा, मूल गादी ट्रस्ट, वाराणसी का पत्र दिनांक 17.03.2012 पर्षद को प्राप्त हुआ है जिसमे कहा गया है कि कबीर मठ, वसंतपुर, थाना- सिमरी वख्तियारपुर, जिला- सहरसा का संबंध कबीर चौरा मठ मूल गादी से गुरूद्वारा की तरह है। इसलिए इस मठ की मान्यता और चादर-महती का प्रमाण-पत्र कबीर चौरा मठ मूल गादी के वर्त्तमान आचार्य महन्त देते हैं, तभी औपचारिक महन्त के रूप में जनता और भक्त महन्ती का पद स्वीकारते हैं। इस पत्र में श्री रामस्वरूप दास के विरूद्ध कतिपय गंभीर टिप्पणी करते हुए यह अनुषंसा की गयी कि श्री रामस्वरूप दास जी यदिं किसी तरह से न्यासी महंत बन गये हैं तो भी इस मठ को नियंत्रित और सुरक्षित रखने के लिए एक संचालन समिति का गठन निहायत आवष्यक है। अपने उक्त पत्र के साथ उन्होंने सात संतों के नामो की एक सूची भी पर्षद को भेजी है। कबीर पंथी मठ वसन्तपुर सहरसा जिला का एक प्रसिद्ध एवं प्रतिष्ठित मठ है, जिसमे अभी भी 50 विघा से अधिक कृषि-भूमि है। अतः इस न्यास के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास के लिए एक योजना का निरूपण आवष्यक प्रतीत होता है ।
अतः मैं, किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, कबीर पंथी मठ, वसंतपुर के सम्यक संचालन तथा विकास के लिए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा 32 (ख) के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुए इसके क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजनायोजनायोजनायोजना
''कबीर पंथी मठ वसंतपुर न्यास योजना'' 1. अधिनियम की धारा-32 (ख) के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''कबीर पंथी मठ वसंतपुर न्यास योजना'' ''कबीर पंथी मठ वसंतपुर न्यास योजना'' ''कबीर पंथी मठ वसंतपुर न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन हेतु गठित न्यास समिति का नाम ''कबीर पंथी मठ, न्या ''कबीर पंथी मठ, न्यास समिति, वसंतपुर ''स समिति, वसंतपुर ''स समिति, वसंतपुर ''स समिति, वसंतपुर '' होगा। जिसमें ''कबीर पंथी मठ, न्या ''कबीर पंथी मठ, न्या न्यास की सभी चल-अचल सम्पत्ति के संधारण का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सुव्यवस्था करना होगा। साथ ही न्यास की जिन भू-खण्डों का अवैध अन्तरण हुआ है, उनका पता लगाकर, उनकी वापसी के लिए विधिनुकुल कार्रवाई की जायेगी। 3. न्यास समिति मठ के परम्परा के अनुसार धार्मिक अधारों का पालन सुनिष्चित करेगी। 4. मठ में प्राप्त होनेवाली समग्र आय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा की जायेगी। बैंक खाता का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। व्यय के अनुसार राषि निकालकर काम किया जायेगा।
5. न्यास के लेखा का संधारण सत्यापित पंजी में होगा। आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति का प्रमुख दायित्व होगा जिससे कि सिमिति का कार्य परिलक्षित हो सके और जनता का विष्वास बना रहे। 6. न्यास की सभी भू-खंडो का नामांतरण ''कबीर पंथी मठ, न्यास समिति, वसंतपुर '' ''कबीर पंथी मठ, न्यास समिति, वसंतपुर '' के नाम से होगा। ''कबीर पंथी मठ, न्यास समिति, वसंतपुर '' ''कबीर पंथी मठ, न्यास समिति, वसंतपुर '' 7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार आवष्य आयोजित की जायेगी।
8. न्यास समिति के सचिव द्वारा बैठकों की कार्यवाही पुस्तिका संधारित की जायेगी तथा कोषाध्यक्ष न्यास के लेखा के संधारण के लिए उत्तरदायी होंगे।
9. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, बजट, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी।
10. कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझे जाने पर, इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् की अनुमोदन के लिए भेजेगी।
11. न्यास समिति का कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यदि न्यास से लाभ उठाता हुआ पाये जायेगें या आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे तो वह न्यास समिति की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जायेगा और उस स्थिति में उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास समिति में कोई पद आकस्मिक दुर्घटना, त्याग-पत्र अथवा अन्य कारणों से रिक्त होने पर उस पर नियुक्ति पर्षद् करेगी।
13. न्यास समिति के कोई सदस्य अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में विफल रहेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो समिति के अध्यक्ष या सचिव इसकी सूचना पर्षद् को देंगे ताकि समुचित कार्रवाई की जा सके।
14. इस योजना में परिवर्त्तन, परिवर्धन अथवा संषोधन का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।18 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 15.श्महंत राम स्वरूप दास शास्त्री मठ के अध्यात्मिक कार्यों का दायित्व सम्भालेंगे। 16. इस योजना के संचालन एवं कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को न्यास समिति का सदस्य मनोनित किया जाता है :-
(1) महन्त श्री शुकदेवदास जी, षिष्य- श्री जीवूदास जी - अध्यक्ष (2) श्री महन्त ब्रह्यानंद दास जी, षिष्य- शुकदवेदास जी - सचिव (3) स्वामी अरूणानंद जी, षिष्य- जगत्गुरू निष्चलानंद जी महाराज - सदस्य (4) श्री कल्याणदास जी, षिष्य- महन्त श्री शुकदेवदास जी - सदस्य (5) श्री बनारसी दास जी, षिष्य- महन्त श्री शुकदेवदास जी - सदस्य (6) श्री गुरूषरणदास जी, षिष्य- महन्त श्री शुकदेवदास जी - सदस्य (7) श्री नथुनीदास, षिष्य- स्व0 आचार्य श्री राम शर्मा - सदस्य 2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा।का होगा।का होगा।का होगा। यह योजना दिनांक 20यह योजना दिनांक 20यह योजना दिनांक 20यह योजना दिनांक 20....05050505....2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो 2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो 2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
———
9 मई 2012
सं॰ 205—सिवान जिलान्तर्गत थाना- गुठनी के ग्राम भगवानपुर स्थित श्री बाबा भीमनाथ महादेव मठ पर्षद के अंतर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-485 है।
इस न्यास के सुचारू प्रबंधन के लिए पर्षद द्वारा वर्ष 1993 में 11 सदस्यों की एक न्यास समिति का गठन किया गया था। पर्षद की संचिका के अवलोकन से ऐसा लगता है कि न्यास समिति पूर्णतः निष्क्रिय रही और न्यास के आय-व्यय का व्योरा, कार्यवृत्त आदि पर्षद को समर्पित नहीं किया गया। पर्षदीय पत्रांक-3971, दिनांक 12.11.2005 द्वारा न्यास समिति के सदस्यों को अधिनियम की धारा-29 (2) के तहत नोटिस भेजी गयी, जिसके जबाब में इसके सचिव श्री रामायण पाण्डेय ने दिनांक 19.12.2005 को पर्षद को सूचित किया की न्यास की सारी जमीन अवैध रूप से बेच दी गयी है और राग-भोग का इंतजाम चन्दा माँगकर किया जा रहा है। उन्होंनें पुनः दिनांक 30.08.2006 को पर्षद को लिखा कि 11 सदस्यों में से सिर्फ दो सदस्य बचे हुए है और वे भी काफी वृद्ध है, केवल सचिव ही न्यास का प्रबंधन करते है।
यह भी उल्लेखनीय है कि टाईटल सुट नं0-298/1982 में दिनांक 25 जुलाई 1996 को पारित आदेष द्वारा यह न्यास सार्वजनिक न्यास घोषित हो चुका है और इसकी सम्पत्ति सार्वजनिक न्यास की सम्पत्ति मानी गयी है। पर्षद में दिनांक 06.02.2012 को श्री बाल योगेष्वर हरिनामपुरी, पुजारी ने एक आवेदन देकर नई न्यास समिति गठित करने का अनुरोध किया और उसके लिए समिति के सदस्यों की एक सूची भी समर्पित की। उक्त सूची को पर्षदीय पत्रांक-2077 दिनांक 06.03.2012 द्वारा थाना प्रभारी, गुठनी को भेजते हुए उनसे यह अनुरोध किया गया कि आवेदन पत्र में वर्णित नामों का चरित्र सत्यापन कर एक प्रतिवेदन यथाषीघ्र भेंजे। तत्पष्चात् पुलिस अवर निरीक्षक, थाना- गुठनी का एक प्रतिवेदन दिनांक 12.04.2012 को प्राप्त हुआ, जिसमें वषिष्ट राम के संबंध में यह लिखा गया कि वे आरोपित व्यक्ति है, शेष 10 लोगों के बारे में लिखा गया कि उनके विरूद्ध किसी प्रकार की षिकायत दर्ज नहीं है। बाल योगेष्वर हरिनामपुरी ने भी दिनांक 27.04.2012 को एक आवेदन पत्र देकर, सूचित किया कि वषिष्ट राम के बदले श्री रामाचारी गोड़ को सदस्य बनाया जाये।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि न्यास कुप्रबंधन का षिकार है, इसके समग्र भूमि पर अतिक्रमण है और पूर्व गठित न्यास समिति स्वतः ही अस्तित्वविहीन हो चूकी है। अतः इस न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा, सुव्यवस्था एवं समग्र विकास के लिए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा-32 के तहत एक योजना का निरूपण अपरिहार्य है। साथ ही बाल योगेष्वर श्री हरिनामपुरी को मठ के आध्यात्मिक कार्यों के सम्पादन का दायित्व सम्भालेंगे।
अतः मैं किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, बाबा भीम नाथ महादेव मठ, ग्राम-भगवानपुर, जिला- सिवान के सुचारू प्रबंधन, समग्र विकास तथा सम्पत्तियों की सुरक्षा हेतु अधिनियम की धारा-32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करता हूँ और इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है। योजनायोजनायोजनायोजना
1 अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बाबा भीम नाथ महादेव न्यास योजना''बाबा भीम नाथ महादेव न्यास योजना''बाबा भीम नाथ महादेव न्यास योजना''बाबा भीम नाथ महादेव न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''बाबा बाबा बाबा बाबा भीम नाथ महादेव न्यास समितिभीम नाथ महादेव न्यास समितिभीम नाथ महादेव न्यास समितिभीम नाथ महादेव न्यास समिति'''''''' होगी जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण का अधिकार निहित होगा।
2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सुव्यवस्था करना होगा। साथ ही न्यास की जिन भू-खण्डों का अवैध अन्तरण हुआ है, उनका पता लगाकर, उनकी वापसी के लिए विधिनुकुल कार्रवाई की जायेगी।
3. न्यास समिति मठ के परम्परा के अनुसार धार्मिक अधारों का पालन सुनिष्चित करेगी। 4. मठ में प्राप्त होनेवाली समग्र आय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा की जायेगी। बैंक खाता का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। व्यय के अनुसार राषि निकालकर काम किया जायेगा।
5. न्यास के लेखा का संधारण सत्यापित पंजी में होगा। आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति का प्रमुख दायित्व होगा जिससे कि सिमिति का कार्य परिलक्षित हो सके और जनता का विष्वास बना रहे। ''बाबा भीम नाथ महादेव मठ भगवानपुर'' के नाम से होगा। 6. न्यास की सभी भू-खंडो का नामांतरण ''बाबा भीम नाथ महादेव मठ भगवानपुर'' ''बाबा भीम नाथ महादेव मठ भगवानपुर'' ''बाबा भीम नाथ महादेव मठ भगवानपुर''19 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 7. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार आवष्य आयोजित की जायेगी।
8. न्यास समिति के सचिव द्वारा बैठकों की कार्यवाही पुस्तिका संधारित की जायेगी तथा कोषाध्यक्ष न्यास के लेखा के संधारण के लिए उत्तरदायी होंगे।
9. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, बजट, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी।
10. कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझे जाने पर, इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् की अनुमोदन के लिए भेजेगी।
11. न्यास समिति का कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यदि न्यास से लाभ उठाता हुआ पाये जायेगें या आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे तो वह न्यास समिति की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जायेगा और उस स्थिति में उसकी सदस्यता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास समिति में कोई पद आकस्मिक दुर्घटना, त्याग-पत्र अथवा अन्य कारणों से रिक्त होने पर उस पर नियुक्ति पर्षद् करेगी।
13. न्यास समिति के कोई सदस्य अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में विफल रहेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो समिति के अध्यक्ष या सचिव इसकी सूचना पर्षद् को देंगे ताकि समुचित कार्रवाई की जा सके।
14. इस योजना में परिवर्त्तन, परिवर्धन अथवा संषोधन का अधिकार पर्षद् में निहित होगा। 15. इस योजना के संचालन एवं कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को न्यास समिति का सदस्य मनोनित किया जाता है :-
(1) श्री सुधीर कुमार सिन्हा, पे0-स्व0 जयंति लाल श्रीवास्तव, ग्राम-भगवानपुर - अध्यक्ष (2) श्री गिरिजा शंकर सिंह, पे0- राजेन्द्र सिंह, ग्राम-जतौर , सिवान - उपाध्यक्ष (3) श्री मोतीचन्द चौधरी, पे0- स्व0 पूजा चौधरी, ग्राम- भगवानपुर - सचिव (4) बाल जोगेष्वर श्री हरिनामपुरी उर्फ नागाबाबा, पुजारी - सदस्य (5) श्री विजय कुमार सिन्हा, पे0- स्व0 मदन मोहन सहाय, ग्राम-भगवानपुर - कोषाध्यक्ष (6) श्री मुक्तिनाथ पाण्डेय, पे0- स्व0 अवध बिहारी पाण्डेय, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य (7) श्री नकूल पटेल, पे0- स्व0 फतिगण पटेल, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य (8) श्री बाबूलाल गोड़, पे0- स्व0 श्यामलाल गोड़, ग्राम-जतौर - सदस्य (9) श्री अभय यादव, पे0- राजेन्द्र चौधरी, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य (10) श्री सुरेष सिंह, पे0-स्व0 राम लक्ष्मण सिंह, ग्राम-भगवानपुर - सदस्य (11) श्री रामाचारी गोड़ - सदस्य 2012से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा।पाँच वर्षो का होगा।पाँच वर्षो का होगा।पाँच वर्षो का होगा। यह योजना दिनांक 07यह योजना दिनांक 07यह योजना दिनांक 07यह योजना दिनांक 07....05050505....2012से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल 2012से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल 2012से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
———
18 मई 2012
सं॰ 274—श्री हनुमान मंदिर स्टेट बैंक चौक (मौनीया चौक), गोपालगंज जिला-गोपालगंज पर्षद् के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4090 है।
इस न्यास का पर्षद् द्वारा जाँच कराया गया। जाँच प्रतिवेदन से ज्ञात हुआ है कि इस न्यास का संचालन कुछ स्थानीय लोग एक समिति बनाकर करते है, जिसे पर्षद् से मान्यता प्राप्त नहीं है। स्थानीय लोगों ने अनुमंडल पदाधिकारी गोपालगंज को आवेदन के माध्यम से यह अनुरोध किया था कि कार्य कर रही स्थानीय समिति को पर्षद् से मान्यता दिलाने के संबंध में अपनी अनुषंसा पत्र पर्षद् को भेजे। चूँकि न्यास में कोई न्यासधारी नहीं है, और इसका प्रबंध स्थानीय स्तर से गठित न्यास समिति द्वारा होती है, अतएव इसकी सम्पत्तियों की सुरक्षा, सुचारू प्रबंधन तथा विकास के लिए औपचारिक रूप में एक न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है
इस न्यास के सम्यक संचालन हेतु न्यास समिति गठन किये जाने के संबंध में अनुमण्डल पदाधिकारी, गोपालगंज द्वारा पत्रांक-177/गो0 दिनांक 06.02.12 के माध्यम से न्यास समिति के लिये सदस्यों का नाम प्राप्त हुआ है।
अतः मैं, किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास पर्षद्, श्री हनुमान मंदिर, स्टेट बैंक चौक (मौनीया चौक) गोपालगंज के सुचारू प्रबंधन, सम्यक विकास तथा सम्पत्तियों की सुरक्षा हेतु अधिनियम की धारा-32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुये इसके क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन करता हूँ :-
योजनायोजनायोजनायोजना
1111.... इस योजना का नाम श्री हनुमान मंदिर स्टेट बैंक चौक (मौनीया चौक), गोपालगंज न्यास योजना होगा तथा इसे मूर्त रूप देने के लिये पर्षद् द्वरा गठित न्यास समिति का नाम ''श्री हनुमान मंदिर, स्''श्री हनुमान मंदिर, स्''श्री हनुमान मंदिर, स्''श्री हनुमान मंदिर, स्टेट बैंक चौक (मौनीया चौक), टेट बैंक चौक (मौनीया चौक), टेट बैंक चौक (मौनीया चौक), टेट बैंक चौक (मौनीया चौक), गोपालगंज न्यास समिति''गोपालगंज न्यास समिति''गोपालगंज न्यास समिति''गोपालगंज न्यास समिति'' होगा, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार होगा।20 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 2222.... इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्ति की सुरक्षा एवं सुसंचालन तथा मंदिर की परम्परा एवं आचारों के अनुकूल पूजा-पाठ एवं साधु-सेवा की समुचित व्यवस्था करना होगा।
3333.... न्यास की समस्त आय न्यास के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से इसका संचालन होगा।
4444.... न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगा। 5555.... न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्य वृत आदि सम्यक रूप से पर्षद् को प्रेषित करेगी।
6666.... अध्यक्ष की अनुमति से सचिव न्यास समिति की बैठक आहूत करेंगे। न्यास समिति की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार आवष्य बुलायी जायेगी और बैठक की कार्यवृत पर्षद् को प्रेषित की जायेगी।
7777.... न्यास समिति द्वारा कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझा जायेगा तो इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद् को अनुमोदन के लिए भेजेगी।
8888.... न्यास समिति न्यास की अतिक्रमित/हस्तांतरित भूमि की वापसी के लिए समुचित वैधानिक कार्रवाई करेगी। 9999.... इस योजना में परिर्वतन, परिबर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद् में निहित होगा।
11110000. न्यास समिति के कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप न्यास से लाभ उठाते पाए जायेंगे या न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे तो इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
11111111.... न्यास समिति के सदस्य की यदि कोई आपराधिक पृष्ठभूमि होगी या वे आपराधिक काण्ड में आरोप-पत्रित होंगे तो उनकी अहर्ता समाप्त हो जायेगी।
12121212. इस न्यास समिति का कार्यकाल दिनांक 22.05.2012 से 05 वर्षो की होगी लेकिन एक वर्ष के बाद न्यास समिति के कार्याे की समीक्षा की जायेगी और कार्य असंतोषप्रद पाये जाने पर समुचित कार्रवाई की जायेगी।
पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मृर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :- पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मृर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :- पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मृर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :- पर्षद् द्वारा निरूपित योजना को मृर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :-
(1) श्री पशुपतिनाथ पाण्डे, मकान न0-182, वार्ड न0-14, राजीव नगर गोपालगंज - अध्यक्ष (2) ज्याति प्रसाद बर्णवाल, वार्ड न0-11 हजियापुर रोड, गोपालगंज - उपाध्यक्ष (3) मुन्ना कुमार तिवारी, मकान नं0-311, वार्ड न0-14 अधिवक्ता नगर गोपालगंज - सचिव (4) मोहनलाल, अग्रवाल टे्रडर्स यादवपुर चौक, गोपालगंज - सह-सचिव (5) बिमल कुमार, वार्ड न0-10 केषव नगर हजियापुर, गोपालगंज - कोषाध्यक्ष (6) प्रेम कुमार केडिया, पोषाक डे्रसेज मेन रोड, गोपालगंज - सदस्य (7) रामा कुअर, वार्ड न0-04, कालीस्थान रोड, गोपालगंज - सदस्य (8) सुषील कुमार, अग्रवाल इम्पोरीयम यादवपुर चौक, गोपालगंज - सदस्य (9) रामषंकर राम, अधिवक्ता, व्यवहार न्यायालय, गोपालगंज - सदस्य (10) राजकुमार बगीड़या, राजू चाय भण्डार, थाना रोड, गोपालगंज - सदस्य (11) बी0 एन0 अग्रवाल, मकान न0-253,वार्ड न0-13, गाँधी कॉलेज के पिछे, गोपालगंज - सदस्य
आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
——— सं॰ वन विक्रय (आरा मिल-विनियर मिल)-14/2012-2563-प०व० पर्यावरण एवं वन विभाग ——— संकल्प 16 अगस्त 2012
माननीय उच्चतम न्यायालय में दायर जनहित याचिका संख्या 202/95 टी0 एन0 गोदावरमन तिरूमलपाद बनाम भारत संघ एवं अन्य में समय-समय पर पारित आदेश तथा केन्द्रीय प्राधिकृत समिति द्वारा किये गये अनुशंसाओं को ध्यान में रखकर विभागीय संकल्प संख्या 2675 दिनांक 30.8.2010 से राज्य के आरा मिलों की संख्या का जिलावार निर्धारण करते हुये इनके आपसी वरीयता निर्धारण हेतु मार्गदर्शन एवं प्रक्रिया का निर्धारण किया गया है। केन्द्रीय प्राधिकृत समिति द्वारा दिनांक 09.03.2012 को माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष समर्पित प्रतिवेदन में किये गये अनुशंसा तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 30.3.2012 को पारित आदेश के आलोक में आरा मिलों के लिये प्रकाशित वरीयता सूचियों में मात्र बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के तहत अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों को सम्मिलित किया जाना है। प्रत्येक जिला के लिये निर्धारित संख्या के21 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012 अनुसार सूची प्रकाशित करने के उपरांत अधिशेष आरा मिलों की एक राज्य स्तरीय वरीयता सूची तैयार की जानी है। जिन जिलों में निर्धारित संख्या से कम अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिल हैं उन जिलों में अधिशेष अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों को वरीयतानुसार रिक्ति के विरूद्ध अपना आरा मिल स्थानान्तरित कर स्थापित करने का मौका दिया जाना है। इस आलोक में विभागीय संकल्प संख्या 2675, दिनांक 30.8.2010 में तद्नुसार संशोधन करते हुये निम्नलिखित निर्णय लिये जाते हैं :-
i. आरा मिलों की वरीयता सूची में जिन आरा मिलों के मालिकों को बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के तहत अनुज्ञप्ति अप्राप्त है उनका नाम वरीयता सूची में शामिल नहीं किया जायेगा। ii. जिन जिलों के लिये सभी अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों की आपसी वरीयता का निर्धारण प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति के द्वारा किया जा चुका है उन जिलों के लिये अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों की वरीयता सूची का प्रकाशन प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार के द्वारा किया जायेगा।
iii. जिन जिलों के लिये सभी अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों की आपसी वरीयता का निर्धारण प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा नहीं किया जा सका है उन जिलों के लिये शेष बचे अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों (जिनका स्थान वरीयता सूची में निर्धारित नहीं किया गया है) की आपसी वरीयता का निर्धारण प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा लिये गये निर्णय तथा प्रमंडलीय अभिलेखों के आधार पर निम्नांकित समिति द्वारा की जायेगी- 1. प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार अध्यक्ष 2. सम्बंधित मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक / निदेशक, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, पटना) सदस्य
3. सम्बंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी सदस्य सचिव
इसके उपरांत प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार के द्वारा इन जिलों के लिये आरा मिलों की वरीयता सूची का प्रकाशन किया जायेगा।
iv. जिलों के लिये प्रकाशित आरा मिलों की वरीयता सूची में से उक्त जिले के लिये आरा मिलों की निर्धारित संख्या के अतिरिक्त शेष आरा मिलों की आपसी वरीयता का निर्धारण राज्य स्तर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार के द्वारा किया जायेगा एवं इनकी वरीयता सूची का प्रकाशन उनके द्वारा किया जायेगा। v. प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार के द्वारा जिलावार आरा मिलों की निर्धारित संख्या तथा जिलावार आरा मिलों की प्रकाशित वरीयता सूची को ध्यान में रखकर उपलब्ध रिक्तियों का प्रकाशन करते हुये अधिशेष अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिलों से इन रिक्तियों के विरूद्ध अपने आरा मिल को स्थानान्तरित कर पुनः स्थापन हेतु निर्धारित अवधि के अन्दर विकल्पों की मांग की जायेगी।
vi. प्राप्त विकल्पों तथा वरीयता को ध्यान में रखकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बिहार के द्वारा आरा मिलों के जिलावार रिक्तियों को भरने हेतु आरा मिलों का चयन करने के उपरांत चयन सूची का प्रकाशन किया जायेगा।
vii. चयन सूची प्रकाशन उपरांत चयनित आरा मिल मालिक को अपने आरा मिल का स्थानान्तरण छः माह के अन्दर सम्बंधित जिले में करना होगा तथा जिनका आरा मिल एक वन प्रमंडल से दूसरे वन प्रमंडल में पुनस्र्थापित किया जाना है उनके द्वारा निर्धारित प्रपत्र में बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के तहत अनुज्ञप्ति हेतु एक निर्धारित अवधि के अन्दर आवेदन समर्पित करना अनिवार्य होगा अन्यथा यह माना जायेगा कि वे अपना आरा मिल का स्थानान्तरण उपरांत पुनस्र्थापन करना नहीं चाहते हैं और उनके स्थान पर अन्य अधिशेष अनुज्ञप्ति प्राप्त आरा मिल को मौका प्रदान किया जायेगा।
viii. आवेदन प्राप्ति के उपरांत सम्बंधित वन प्रमंडल पदाधिकारी के द्वारा नियमानुसार बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन ) अधिनियम 1990 के तहत अनुज्ञप्ति जारी किया जायेगा।
2. माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिनांक 30.3.2012 को पारित आदेश के आलोक में प्रकाशित वरीयता सूची से व्यथित व्यक्ति बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के प्रावधानों के तहत माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर कर सकते हैं।
3. इस सम्बंध में संकल्प संख्या 2675 दिनांक 30.8.2010 के शेष प्रावधान यथावत रहेगें।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, दीपक कुमार सिंह, सचिव।22 (cid:18)बहार गजट, 5 िसत(बर 2012
सामान्य प्रशासन विभाग
——— शुद्धि पत्रा
29 जून 2012
सं॰ 1/पी0-1007/2012-सा0 प्र0-9376—सामान्य प्रशासन विभागीय अधिसूचना संख्या 8331 दिनांक 08.06.2012 में अंकित ''परियोजना निदेशक, बिहार कोसी पुनर्वास एवं पुनर्निमाण सोसायटी, पटना'' परियोजना निदेशक, बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निमाण सोसायटी'' पढ़ा जाय । के स्थान पर ''परियोजना निदेशक, बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निमाण सोसायटी'' परियोजना निदेशक, बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निमाण सोसायटी'' परियोजना निदेशक, बिहार आपदा पुनर्वास एवं पुनर्निमाण सोसायटी''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
आनन्द बिहारी प्रसाद, संयुक्त सचिव ।
ÑÑÑÑ अधीJक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।
(cid:18)बहार गजट, 25Ñ571+100-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।