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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 12 September 2012

Published 12 September 2012

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-09-12.480
Languages
English, Hindi

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट

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सं0 22/नि0सि0(मुक0)जम0-19-102/96/913—श्री धनेश्वर यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, खरकई नहर प्रमण्डल, आदित्यपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त वर्ष 1988-89 में उक्त कार्यालय में पदस्थापित थे। उनके उक्त प्रमण्डल में पदस्थापन अवधि में खरकई बराज दायॅा मुख्य नहर के निर्माण में बरती गयी अनियमितता की जॅाच उड़नदस्ता से करायी गयी। समीक्षोपरान्त उक्त अनियमितता के लिए श्री धनेश्वर यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता प्रथम द्रष्टया दोषी पाये गये। इनके विरुद्ध निम्न आरोप गठित किये गयेः-

vkjksi-(1) खरकई बराज दायें मुख्य नहर के कि0मी0 17.22 से 22.49 एवं 25.25 से 29.83 कि0मी0 तक कार्य एवं वेड लाइनिंग के एकरारनामा सं0-एल0सी0बी0-07/84-85 की मद सं0-1 में जंगल सफाई एवं 8'' व्यास तक झाड़ी की जड़ों को निकालने का प्रावधान है और इस मद का भी भुगतान किया गया है। एकरारनामा की मद सं0 06 में नहर बांध के तल को जोतकर या कोड़कर पुनः उसी सतह को 95 प्रतिशत कम्पेक्शन इफिसियेन्सी के साथ तैयार करना था और इसका भी भुगतान एकरारनामा की मात्रा से अधिक किया गया। इन दोनों मदों के प्रावधान तथा भुगतान के बाद पुनः स्ट्रीपिंग करने की आवश्यकता नहीं थी। वौरो क्षेत्र के लिए भी स्ट्रीपिंग का अतिरिक्त भुगतान नहीं हो सकता है क्योंकि बौरो क्षेत्र के लिए हर प्रकार के अनुपयुक्त पदार्थ को हटाकर ही नहर बैक में भरने हेतु मिट्‌टी लायी जाती है। इस प्रकार एक ही कार्य के लिए दो कार्य दिखाकर दो बार भुगतान किया गया, जिससे रुपये 3,32,013 का अतिरिक्त भुगतान हुआ, जिसके लिए आप दोषी है।

¼2½ (क). उपरोक्त एकरारनामा में कड़े पत्थर काटने का दर 25 रूपया प्रति घनमीटर है तथा साधारण पत्थर काटने का दर 14 रूपया प्रति घनमीटर है कड़ा पत्थर एवं साधारण पत्थर के बीच साधारण पत्थर ब्लास्टिंग के साथ काटने का एक और दर क्षेत्रीय अनुसूचित दर में शामिल किया गया। तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा तैयार फारमेट के अनुसार ब्लास्टिंग के साथ मुलायम पत्थर काटने हेतु स्पेशल जिलोटिन 2 किलो डिटोनेटर 10 अद्‌द एवं फ्‌यूज क्वायल एक अद्‌द प्रति घनमीटर की आवश्यकता दर्शायी गयी है तथा कड़ा पत्थर के लिए क्रमशः 2.75 कि0ग्रा0 13 अद्‌द एवं 1 क्वायल का 1 घनमीटर के लिए विश्लेषण किया गया है। कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त विवरणी के अनुसार ब्लास्टिंग के साथ मुलायम पत्थर काटने की कुल मात्रा 1,35,777.90 घनमीटर है। विश्लेषण के अनुसार जिस अनुपात में ब्लास्टिंग के साथ साधारण पत्थर की कटाई में कड़े पत्थर से कम लागत होते हुए भी एकरारनामा में 25 रु0 प्रति घनमीटर हार्ड रॅाक की दर से भी अधिक साधारण पत्थर के लिए 34.65 रु0 प्रति घनमीटर की अनुंशसा की गई है। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 िसत*बर 2012 हार्ड रॅाक की खुदायी की मात्रा को कम दिखाते हुए सौफ्‌ट रौक की खुदायी एवं मात्रा को बढाते गये, जिससे सरकार को अनावश्यक आर्थिक बोझ तथा क्षति हुई संवेदक को नाजायज लाभ हुआ।

(ख) ब्लास्टिंग के साथ साधारण पत्थर काटने की कुल मात्रा 1,35,777.90 घनमीटर किया गया जिसके लिए तकनीकी परीक्षक कोषांग के विश्लेषण के अनुसार 27.155 मेट्रीक टन जिलोटिन की आवश्यकता होती है। इतनी अधिक मात्रा में जिलोटिन की खपत का कोई भी अभिलेख जॅाच पदाधिकारी के समक्ष नहीं प्रस्तुत किया गया। अतः संदिग्ध बना देता हैं।

साधारण पत्थर से ब्लीास्टिंग के साथ भुगतान करने के पूर्व इस कार्य के लिए आवश्यक एक्सप्लोसिव के खपत पर विचार करना चाहिए था जो ब्लास्टिंग कार्य का प्रमाणिक आधार होता है। परन्तु पदाधिकारियों ने सिर्फ संवेदक के हित का ध्यान रखा। समिति ने भी जिसमें तकनीकी एवं वित्तीय विशेषज्ञ शामिल थे, बिना गहरायी से छानबीन किये ही मुख्य अभियन्ता द्वारा स्वीकृत औपबंधिक निर्णय को सामूहिक उत्तरदायित्व की ओट में एक दूसरे के गलत निर्णय पर पारस्परिक सहयोग कर मात्र स्वीकृति ही नहीं दी वरन औपबंधिक दर को इतना बढ़ा दिया जो कड़ा पत्थर की सीमा से भी अधिक हो गया।

(ग) उड़नदस्ता के जॅाच पदाधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण के क्रम में नहर आरेखन (एलाइमेंट) पर जहॅा कहीं भी कड़ा या मुलायम पत्थर पाया गया उसे छोड़कर ही खनन कार्य किया गया है। काटी गयी मिट्‌टी एवं नहर सेक्सन को देखने से सौफ्‌ट रॅाक विथ ब्लास्टिंग के साथ काटने का कोई भी ऐसा प्रमाण नहीं मिला जिससे इस प्रकार के भुगतान की पुष्टि हो।

(घ) जॅाच पदाधिकारी ने अभिलेखों के सत्यापन के क्रम में पाया गया कि सौफ्‌ट रॅाक विथ ब्लास्टिंग की कटायी के संबंध में दर स्वीकृति की अनुशंसा करते वक्त कार्यपालक अभियन्ता द्वारा दो नक्से संलग्न किये गये थें जिसमें सौफ्‌ट रॅाक वीथ ब्लास्टिंग की परत सीमाए (यानि तायदाद) बतायी गयी थी। ये दोनों नक्शे अनुपलब्ध है। इससे तथ्य को बल मिलता है कि सौफ्‌ट रॅाक की कटायी का एक काल्पनिक भुगतान किया गया हे। जिसके लिए आप दोषी है। (3) एकरारनामा की राशि 1,54,03,375 रुपये के विरूद्व समिति ने सम्पूर्ण कार्य के लिए क्षेत्रीय पदाधिकारी की अनुशंसा पर अतिरिक्त मदों की स्वीकृति देते हुए भुगतान की अधिकतम सीमा 1,99,49,146 रुपये निर्धारित की थी, किन्तु इसके बाद भी संबंधित पदाधिकारियों ने 2,36,66,329 रुपये का भुगतान किया तथा भुगतान के बाद भी 70.00 लाख रुपये का कार्य अवशेष रह गया। इस प्रकार 1,99,49,146 रूपये की जगह 1,07,00,000 रूपये का अतिरिक्त का भुगतान हुआ जो एकरारनामा के आधार पर कराये गये कार्यो की तुलना में 82.90 प्रतिशत अधिक है। इसके लिए समिति के निर्णय के बाद की अवधि में कार्यरत कार्यपालक अभियन्ता उत्तरदायी है।

(4) कार्यो से संबंधित अभिलेखों के निरीक्षण के क्रम में पाया गया कि संवेदक को दिनांक 15.1.85 से कार्य प्रारम्भ कर दिनांक 5.1.87 को कार्य समाप्त करना था किन्तु कार्य हेतु निर्धारित अवधि में संवेदक द्वारा कार्य में रूची नहीं ली गयी एवं नाना प्रकार के बहाना कर कार्य नहीं किया गया। बाद में संवेदक द्वारा अवधि विस्तार के लिए आवेदन दिया गया था और कार्य नहीं होने के लिए विभाग को उत्तरदायी ठहराया गया। किन्तु आश्चर्य की बात है कि संवेदक के पक्ष में ही कनीय अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता द्वारा अनुशंसा भी की गयी तथा कार्यपालक अभियन्ता द्वारा दो किस्तों में अवधि विस्तार दिनांक 31.12.88 तक किया गया। इस अवधि विस्तार का कुपरिणाम यह हुआ कि संवेदक को एस्केलेशन क्लोज के अनुसार प्राइज एडजस्टमेंट के माध्यम से 36.55 लाख रूपये का अधिक भुगतान किया गया, जिसके लिए दोषी है।

उक्त आरोपों के लिए अन्य पदाधिकारियों सहित श्री धनेष्वर यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व सिविल सर्विसेज (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 55 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया लेकिन बाद में समीक्षोपरान्त विभागीय आदेश सं0-1963 दिनांक 4.8.93 द्वारा नियम-55 के तहत संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त कर इनसे स्पष्टीकरण प्राप्त कर निर्णय लेने का आदेश संसूचित किया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री यादव से प्राप्त से स्पष्टीकरण पत्रांक 2634, दिनांक 01.9.93 की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त श्री यादव को स्ट्रीपींग मद में दोहरा भुगतान एवं ब्लास्टिंग के मद में किये गये अतिरेक भुगतान के फलस्वरूप सरकार को कुल रूपये 30,32,013 (तीस लाख बतीस हजार तेरह रूपये) रूपये क्षति के लिए दोषी पाये गये। तदोपरान्त विभागीय आदेश सं0 125 सह पठित ज्ञापांक 767 दिनांक 31.5.95 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः-

(क) निन्दन वर्ष 1988-89 (ख) सात वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। (ग) स्ट्रीपींग मद में दोहरा भुगतान एवं सौफ्‌ट रॅाक विथ ब्लास्टिंग के मद में किये गये अतिरिक्त भुगतान के फलस्वरूप सरकार को हुई क्षति में से 3,03,201 रूपये (तीन लाख तीन हजार दो सौ एक रुपये ) की वसूली, वेतन से 50 प्रतिशत या 3,000 (तीन हजार) रूपये प्रतिमाह दोनों में से जो न्यूनतम हो, की दर से कटौती कर की जायेगी और उनके सेवाकाल में पूरी राशि की वसूली नहीं होती है, तो शेष राशि की वसूली उनके सेवानिवृति के देय पावनाओं से की जायेगी।

उपर्युक्त विभागीय दण्डादेश दिनांक 31.5.95 के विरुद्ध श्री यादव द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0 12235/95 दायर किया गया जिसमें दिनांक 01.10.96 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए उक्त दण्डादेश के आलोक में अगे्रतर कार्रवाई पर रोक लगा दी गई एवं श्री यादव को विभागीय उड़नदस्ता की जॅाच प्रतिवेदन की प्रतिलिपि देते हुए पुनः स्पष्टीकरण करने एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 िसत*बर 2012 समीक्षोपरान्त विभाग को पुनः तार्किक आदेश निर्गत करने का आदेश दिया गया। न्याय निर्णय के अनुपालन में विभागीय पत्रांक 2658 दिनांक 28.11.96 द्वारा उड़नदस्ता का जॅाच प्रतिवेदन भेजते हुए श्री यादव से स्पष्टीकरण की मांग की गई। श्री यादव से प्राप्त जबाव की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त आरोप प्रमाणित पाये गये। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय आदेश सं0 44 सह पठित ज्ञापांक 234 दिनांक 20.1.97 द्वारा पूर्व में संसूचित दण्डादेश दिनांक 31.5.95 को विलोपित करते हुए पूर्व में संसूचित दण्ड को पुनः संसूचित किया गया।

उपर्युक्त दण्डादेश के विरुद्ध श्री यादव द्वारा माननीय उच्च न्यायाालय, पटना में पुनः याचिका सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0 2524/97 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 07.12.98 को माननीय न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए श्री यादव को अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील दायर करने की सलाह दी गयी। उक्त न्यायादेश के आलोक में श्री यादव द्वारा दिनांक 8.01.07 को महामहिम राज्यपाल, बिहार के समक्ष अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसे राज्यपाल सचिवालय द्वारा अगे्रतर कार्रवाई हेतु जल संसाधन विभाग में प्राप्त कराया गया। श्री यादव से प्राप्त अपील अभ्यावेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त कोई नया तथ्य नहीं पाये जाने के कारण विभागीय आदेश सं0 108 सह पठित ज्ञापांक 995 दिनांक 23.10.07 द्वारा इनके अपील अभ्यावेदन को निरस्त कर दिया गया। उक्त पत्र की प्रतिलिपि उप सचिव, राज्यपाल सचिवालय बिहार को दी गयी। राज्यपाल सचिवालय के परामर्श के आलोक में श्री यादव के अपील अभ्यावेदन की अस्वीकृति के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद का अनुमोदन प्राप्त किया गया। तदोपरान्त विभागीय आदेश सं0 37 दिनांक 9.2.10 सह पठित ज्ञापांक 277 दिनांक 15.2.10 द्वारा पूर्व में संसूचित आदेश सं0 108 दिनांक 23.10.07 (ज्ञापांक 995 दिनांक 23.10.07) को संशोधित करने का आदेश निर्गत किया गया। उक्त दण्डादेश दिनांक 20.1.97 के विरुद्ध श्री यादव द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में पुनः याचिका सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0 8098/07 दायर किया गया जिसमें दिनांक 14.03.12 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा न्यायदेश पारित किया गया जिसमें मुख्य रूप से कहा गया कि मेरे विचार से नियम-55''ए'' के तहत विभागीय कार्यवाही चलाकर ''सात वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक'' का दण्ड नहीं दिया जा सकता हैं तदनुसार माननीय न्यायालय द्वारा विभागीय दण्डादेश दिनांक 20.1.97 तथा अपील अभ्यावेदन अस्वीकृति से संबंधित आदेश दिनांक 30.10.07 को निरस्त कर दिया गया तथा प्राधिकार को न्याय निर्णय प्राप्ति के दो माह के अन्दर नियम-55''ए'' के संदर्भ में नया दण्डादेश निर्गत करने का आदेश दिया गया।

उक्त न्याय निर्णय के आलोक में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-12235/95 में दिनांक 01.10.96 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 2658 दिनांक 28.11.96 द्वारा श्री उड़नदस्ता का जॅाच प्रतिवेदन भेजते हुए स्पष्टीकरण किया गया जिसको जबाव श्री यादव द्वारा प्राप्त कराया गया, जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न बाते कही गई।

(1) उनके द्वारा दिनांक 31.12.88 को खरकई नहर प्रमण्डल, आदित्यपुर प्रमण्डल में योगदान दिया। कार्यकाल 1.1. 89 से 1.8.92 है।

(2) खरकई नहर प्रमण्डल, आदित्यपुर के प्राक्कलन में तैयारी, स्वीकृति, निविदा आमंत्रण, एकरारनामा एवं प्रारम्भिक भुगतान उनके कार्यकाल में उनके द्वारा नहीं किया गया। ये सारे कार्य श्री अवधेश कुमार श्रीवास्तव के देख रेख में उनके पूर्ववर्ती कार्यपालक अभियन्ता द्वारा संपादित किया गया जिसे दोषमुक्त कर दिया गया।

(3) निविदा समिति का निर्णय जो मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 410 दिनांक 20.3.89 द्वारा संसूचित किया गया था जिसमें साफ्‌ट रौक विथ ब्लास्टींग का दर 34.65 प्रति घनमीटर एवं मात्रा 1,36,750 घनमीटर तथा स्ट्रीपिंग का दर 11. 25 प्रति घनमीटर एवं मात्रा 50,000 घनमीटर स्वीकृत था। पूर्व में इन मदों में किए गये औपबंधिक भुगतान, मात्रा एवं वर्गीकरण के आधार पर नये स्वीकृति दर से अन्तर का भुगतान उनके कार्य काल में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया गया।

(4) इस आरोप से आरोपित उन व्यक्तियों में से जिनके कार्यवधि में कार्य सम्पादन हुआ उसे आरोप मुक्त कर दिये गये है जबकि उनके कार्यकाल में उनके द्वारा कलर्कियल डियुटी के रूप में किये गये कार्य मात्र की स्थिति में उन्हें आरोपित किया जा रहा है। क्योंकि स्ट्रीपिंग एवं साफ्‌ट रौक विथ ब्लास्टिंग का अन्तर भुगतान मात्र उनके द्वारा किया गया।

समीक्षाः-श्री यादव का कहना है कि जिनके कार्यकाल में कार्य सम्पन्न हुआ उसे दोषमुक्त कर दिया गया, जबकि वस्तुस्थिति यह है कि इस मामले में 24 दोषी अभियन्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई जिसमें से समीक्षोपरान्त 14 अभियन्ताओं को दंडित किया गया। श्री अवधेश कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता के विरुद्ध माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तकनीकी कारणों से याचिका को खारिज करने के कारण कार्रवाई नहीं की जा सकी।

(2) श्री यादव द्वारा निविदा समिति के निर्णय से संबंधित मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, आदित्यपुर, जमशेदपुर का पत्रांक 410 दिनांक 20.3.89 का हवाला देते हुए स्वयं स्वीकार किया गया है कि स्ट्रीपिंग के अतिरिक्त मद में उनके द्वारा भुगतान किया गया।

समीक्षा में पाया गया कि इस संदर्भ में नियमानुसार निविदा समिति के अनुशंसाओं से एकरारनामा की शर्तो एवं कार्य स्थल की कसौटी पर पुनः जॅाच कर श्री यादव द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए था। लेकिन उनके उत्तर से ज्ञात होता है, कि श्री यादव द्वारा ऐसा नहीं किया गया और स्ट्रीपिंग के मद में 3,32,013 रूपये अतिरिक्त भुगतान किया गया जिसके लिए वे दोषी है।4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 िसत*बर 2012 (3) उनका यह कहना कि निविदा समिति के निर्णय जो संबंधित मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, आदित्यपुर, जमशेदपुर का पत्रांक 410 दिनांक 20.3.89 द्वारा संसूचित है के आलोक में औपबंधिक भुगतान मात्रा एवं वर्गीकरण के आधार पर नये स्वीकृत दर के अन्तर भुगतान उनके कार्यकाल में किया गया को मान्य नहीं किया जा सकता। क्योंकि इस संदर्भ में समीक्षा में पाया गया कि कड़े पत्थर को काटने की दर 25 रूपये प्रति घ0 मी0 और साधारण पत्थर काटने का दर 14 रूपये प्रति घ0 मी0 स्वीकृत था।जबकि निविदा समिति द्वारा विस्फोट के साथ मुलायम पत्थर काटने की दर, अतिरिक्त मद के रूप में शामिल की गई। और वह 34.65 रूपये प्रति घ0 मी0. थी। साधारण पत्थर को विस्फोट द्वारा काटने का दर, कड़े पत्थर के दर से कदापि अधिक नहीं होनी चाहिए थी। श्री यादव द्वारा इन तथ्यों पर विचार किया जाना चाहिए था। तथा अपने उच्चाधिकारियों से आदेश प्राप्त करना चाहिए था, जो श्री यादव द्वारा नहीं किया गया और सौफ्‌ट रॅाक विथ ब्लास्टिंग के मद में अतिरिक्त राशि का भुगतान किया गया जिसके लिए वे दोषी है। समीक्षा में यह भी पाया गया कि सौफ्‌ट रॅाक विथ ब्लास्टिंग के मद में 27,00,000 रूपये (सताईस लाख रूपये मात्र) की प्रत्यक्ष क्षति सरकार को हुई। इस प्रकार सरकार को 03,32,013 - 27,00,000 - 30,32,013 रूपये की प्रत्यक्ष क्षति हुई जिसके लिए अन्य अभियन्ताओं सहित श्री यादव दोषी है, जिसके लिए पूर्व में संसूचित दो दण्ड यथा निन्दन वर्ष 1988-89 एवं 3,03,201 रूपये की वसूली का दण्ड समानुपातिक प्रतीत होता है लेकिन प्रोन्नति पर सात वर्षो तक का रोक का दण्ड समानुपातिक प्रतित नहीं होता है। अतः समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा पूर्व में संसूचित दण्डादेश सं0 44 दिनांक 20.1.97 एवं अपील अभ्यावेदन अस्वीकृति से संबंधित आदेश दिनांक 23.10.07 को निरस्त करते हुए उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गयाः-

(1) निन्दन वर्ष 1988-89 (2) तीन वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। (3) 3,03,201 रूपये (तीन लाख तीन हजार दो सौ एक रूपये मात्र) की वसूली। इस राशि की वसूली उनके वेतन से 50 प्रतिशत या 3,000 (तीन हजार) रूपये प्रतिमाह दोनों में से जो न्यूनतम हो, की दर से कटौती की जायेगी और इनके सेवाकाल में पूरी वसूली नहीं होती है तो शेष राशि की वसूली उनके सेवानिवृति के पश्चात देय पावनाओं से की जायेगी। उपर्युक्त वर्णित स्थिति में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-8098/07 में दिनांक 14.3.12 को पारित न्याय निर्णय का अनुपालन करते हुए श्री धनेश्वर यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, खरकई नहर प्रमण्डल, आदित्यपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त को पूर्व में संसूचित दण्डादेश सं0 44 दिनांक 20.1.97 एवं अपील अभ्यावेदन से संबंधित आदेश दिनांक 23. 10.07 को निरस्त करते हुए उन्हें निम्नांकित दण्ड संसूचित किया जाता हैः-

(1) निन्दन वर्ष 1988-89 (2) तीन वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। (3) 3,03,201 रूपये (तीन लाख तीन हजार दो सौ एक रूपये मात्र) रूपये की वसूली, वेतन से 50 प्रतिशत या 3,000 (तीन हजार) रूपये प्रतिमाह दोनों में से जो न्यूनतम हो, की दर से कटौती कर की जायेगी और उनके सेवाकाल में पूरी राशि की वसूली नहीं होती है, तो शेष राशि की वसूली उनके सेवानिवृति के देय पावनाओं से की जायेगी। उक्त दण्ड श्री यादव, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, खरकई नहर प्रमण्डल, आदित्यपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अफजल अमानुल्लाह, प्रधान सचिव।

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अधी+क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु0ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 480-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 12 September 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-09-12.480/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-09-12.480.