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19191919 िसत(बिसत(बिसत(बिसत(बरररर 2020202011112222 ((((ईईईई0000)))) भाग-1—िनयु(cid:18)0, पदःथापन, बदली, श(cid:18)0, छु 6ट(cid:15) और अ9य :य(cid:18)0गत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु>म@ के समादेंटाओं के आदेश।
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भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Iाओं के पर(cid:15)Iा-फल, कायKबम, छाऽवृ(cid:18)N ूदान, आOद।
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भाग-1-ग—िशIा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Iाफल आOद ---
भाग-2—(cid:18)बहार-राPयपाल और कायाKQयI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आOद। 3-5 भाग-3—भारत सरकार, पRSम बंगाल सरकार और उUच 9यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राPय गजट@ के उWरण। ---
भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---
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पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Oकये जानेवाले ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक।
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भाग-7—संसद के अिधिनयम Rजनपर रांशपित क^ Pयेंठअनुमित िमल चुक^ है। ---
भाग-8—भारत क^ संसद मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और संसद मZ पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-9—(cid:18)व_ापन
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भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क^ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प`रवहन सूचनाएं, 9यायालय सूचनाएं और सवKसाधारण सूचनाएं इaयाOद। 6-8 पूरक
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पूरक-क
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2 (cid:18)बहार गजट, 19 िसत(बर 2012भागभागभागभाग----1111
िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0िनयु(cid:18)0, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)0श(cid:18)0श(cid:18)0श(cid:18)0, , , , छु 6ट(cid:15) और छु 6ट(cid:15) और छु 6ट(cid:15) और छु 6ट(cid:15) और अ9यअ9यअ9यअ9य वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं वैय(cid:18)0क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
पथ निर्माण विभाग
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6 flrEcj 2012
सं॰ 1/स्था॰-13/2002 (खंड-1)-10017(S)—बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना के आर्टिकल ऑफ एशोसियेशन की आर्टिकल-55 (1) में निहित प्रावधान के अनुसार बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना की सभा में महामहिम राज्यपाल, बिहार के प्रतिनिधि के रूप में श्री श्यामा नन्द चौधरी, अपर सचिव, पथ निर्माण विभाग के सेवा-निवृत्ति के फलस्वरूप उनके स्थान पर श्री विनोद कुमार, विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को महामहिम राज्यपाल, बिहार के प्रतिनिधि के रूप में नामित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम बिहारी राय, संयुक्त सचिव ।
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7 flrEcj 2012
सं॰ 1/विविध-11/2011-10063(S)—बिहार लोक कार्य संविदा विवाद माध्यस्थम् न्यायाधिकरण अधिनियम-2008 की धारा-3 की उप-धारा-2 के अधीन श्री अरूण कुमार, सेवा-निवृत्त, मुख्य अभियंता (यांत्रिक), झारखंड, कॉग्रेस मैदान, कदमकुंआ, पटना-3 को बिहार लोक कार्य संविदा विवाद माध्यस्थम् न्यायाधिकरण का सदस्य नियुक्त किया जाता है।
2. यह नियुक्ति बिहार लोक कार्य संविदा विवाद माध्यस्थम् न्यायाधिकरण अधिनियम-2008 की धारा-4 उप-धारा 1 के अनुसार पदग्रहण की तिथि से तीन वर्षों तक या 70 (सत्तर) वर्ष की आयु पूरी करने तक (दोनों में जो पहले हो) वैध होगी। 3. सदस्य, बिहार लोक कार्य संविदा विवाद माध्यस्थम् न्यायाधिकरण के सेवा शर्त्त, वेतन एवं भत्ते के संबंध में अलग से आदेश निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम बिहारी राय, संयुक्त सचिव ।
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14 vxLr 2012
सं॰ 1/स्था॰-41/2008-9009 (S)—सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना सख्ंया-12/निजी (क॰) 806/2012-सा॰प्र॰-11415 दिनांक 14 अगस्त 2011 के आलोक में श्री केशव रंजन प्रसाद, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-633/2008), उप-सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को उप-महाप्रबंधक (प्रशासन), बिहार स्टेट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना के पद पर अगले आदेश तक के लिए पदस्थापित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम बिहारी राय, संयुक्त सचिव ।
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पथ निर्माण विभाग
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16 vxLr 2012
सं॰ 1/स्था॰-41/2008-9017(S)—विभागीय अधिसूचना संख्या-9009(S) दिनांक 14 अगस्त 2012 में "अंकित सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-12/निजी(क॰)806/2012-सा॰प्र॰-11415 दिनांक 14 अगस्त 2011" के स्थान पर "सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-12/निजी(क॰)806/2012-सा॰प्र॰-11415 दिनांक 14 अगस्त 2012" पढ़ा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम बिहारी राय, संयुक्त सचिव ।
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वाणिज्य-कर विभाग
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शुद्धि-पत्र
6 सितम्बर 2012 सं॰ 6/गो0-34-03/2012-6261—विभागीय अधिसूचना संख्या-6/गो0-34-03/2012-2403/वा0कर, दिनांक 25 जून 2012 में आंशिक संशोधन करते हुए कहना है कि श्री रसूल गुलाम खातमी, वाणिज्य-कर उपायुक्त के स्थान पर श्री गुलाम रसूल खातमी, वाणिज्य-कर उपायुक्त पढ़ा जाय।
विभागीय अधिसूचना संख्या-6/गो0-34-03/2012-2496/वा0कर, दिनांक 25 जून 2012 में आंशिक संशोधन करते हुए कहना है कि श्री एस0 एस0 इरशाद आरिफ, परीक्ष्यमान वाणिज्य-कर पदाधिकारी के स्थान पर श्री एस0 एम0 इरशाद आरिफ, परीक्ष्यमान वाणिज्य-कर पदाधिकारी पढ़ा जाय।
विभागीय अधिसूचना संख्या-6/गो0-34-03/2012-5276/वा0कर, दिनांक 30 जून 2012 मेंं आंशिक संशोधन करते हुए कहना है कि श्री रंजीत कुमार रजक, परीक्ष्यमान वाणिज्य-कर पदाधिकारी के स्थान पर श्री रणजीत कुमार रजक, परीक्ष्यमान वाणिज्य-कर पदाधिकारी पढ़ा जाय।
विभागीय अधिसूचना संख्या-6/गो0-34-03/2012-5278/वा0कर, दिनांक 30 जून 2012 में आंशिक संशोधन करते हुए कहना है कि श्री ओम प्रकाश सिन्हा, परीक्ष्यमान वाणिज्य-कर पदाधिकारी के स्थान पर श्री ओम कुमार सिन्हा, परीक्ष्यमान वाणिज्य-कर पदाधिकारी पढ़ा जाय।
उपरोक्त अधिसूचनाओं को इस हद तक संशोधित समझा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मो0 शमीम, उप-सचिव ।
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सं॰ 1/स्था॰-19/2007-9737(S)
पथ निर्माण विभाग
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संकल्प
3 सितम्बर 2012
विषय :- पथ निर्माण विभाग के अभियंत्रण संवर्ग को पथ निर्माण विभाग/भवन निर्माण विभाग एवं ग्रामीण कार्य विभाग/योजना एंव विकास विभाग के बीच विभक्त कर विभागवार संवर्ग का गठन के संबंध में। राज्य प्रशासनिक आयोग के प्रथम प्रतिवेदन में प्रखंड स्तरीय विकास योजनाओं का कार्यान्यवन ग्राम्य अभियंत्रण संगठन (ग्रामीण कार्य विभाग) के माध्यम से कराये जाने तथा उक्त संगठन की आंतरिक संरचना कमजोर होने, मौलिक संवर्ग नहीं रहने के कारण प्रभावकारी ढंग से कार्य नहीं करने आदि के आलोक में ग्राम्य अभियंत्रण संगठन (ग्रामीण कार्य विभाग) के लिए अभियंताओं का अलग स्थायी संवर्ग सृजित करने की अनुशंसा की गई थी। जिस पर मंत्रिपरिषद द्वारा ग्राम्य अभियंत्रण4 (cid:18)बहार गजट, 19 िसत(बर 2012 संगठन (ग्रामीण कार्य विभाग) के अतिरिक्त भवन निर्माण विभाग तथा लधु सिंचाई विभाग के अंतर्गत अभियंताओं के अलग-अलग संवर्ग गठित करने का निर्णय लिये जाने की सूचना देते हुए तद्नुसार अग्रतर कार्रवाई का निदेश कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के पत्रांक-2263, दिनांक 1 मार्च 2007 द्वारा दिया गया है।
2. कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के उक्त निदेश के आलोक में पथ निर्माण विभाग के वर्त्तमान अभियंत्रण संवर्ग को पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण विभाग एवं ग्रामीण कार्य विभाग के बीच विभक्त कर विभागंवार संवर्ग गठन हेतु मंत्रिपरिषद की बैठक दिनांक 6 मई 2008 में स्वीकृति दी गयी है।
3. मंत्रिपरिषद की उक्त बैठक में लिए गये निर्णय तथा विभागीय अधिसूचना संख्या-8356(एस॰), दिनांक 24 जून 2008 के परिपेक्ष्य में मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में दिनांक 18 जुलाई 2012 के बैठक में पथ निर्माण विभाग के अभियंत्रण संवर्ग के विभाजन पर निर्णय लिया गया।
4. तदनुसार राज्य सरकार ने पथ निर्माण विभाग के अभियंत्रण संवर्ग को पथ निर्माण विभाग/भवन निर्माण विभाग/ग्रामीण कार्य विभाग/योजना एवं विकास विभाग के बीच संवर्ग विभाजन के लिए निम्नलिखित निर्णय लिया हैः- (क) पथ निर्माण विभाग के संवर्ग के अभियंताओं को उनके वर्त्तमान में कार्यरत विभाग के आधार पर यथास्थिति के सिद्वांत को अपनाते हुये संवर्ग विभाजन कर दिया जाय अर्थात् बैठक की तिथि 18 जुलाई 2012 को जो अभियंता पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण विभाग एवं ग्रामीण कार्य विभाग में वर्त्तमान में कार्यरत हैं, वे उसी विभाग के संवर्ग के सदस्य माने जायेंगे।
(ख) स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन के लिये योजना एवं विकास विभाग के अधीन अपना अलग संवर्ग होगा और पथ निर्माण विभाग तथा जल संसाधन विभाग से प्रतिनियुक्त अभियंता 18 जुलाई 2012 के प्रभाव से यथास्थिति के आधार पर योजना एवं विकास विभाग के अभियंत्रण संवर्ग के सदस्य माने जायेंगे। (ग) पथ निर्माण विभाग के संयुक्त संवर्ग से नगर विकास विभाग, ग्रामीण विकास विभाग या अन्य विभागों (भवन निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग एवं योजना एवं विकास विभाग को छोड़कर) एवं निगमों/ प्राधिकार में प्रतिनियुक्ति अभियंता तथा उनकी रिक्ति पथ निर्माण विभाग में समाहित मानी जायेगी। (ध) संवर्ग विभाजन के पश्चात् किसी अभियंता को यदि आपत्ति हो तो वे अभ्यावेदन दे सकते हैं। इसके लिये अधिकतम दो महीने की अवधि निर्धारित होगी।
उपर्युक्त कंडिका (ध) के सन्दर्भ में प्राप्त अभ्यावेदनों के निष्पादन हेतु निम्नांकित मार्गदर्शक सिद्वांत निरूपित किया जाता हैः-
(i) समानुपातिक वितरण- पथ निर्माण विभाग के अभियंत्रण संवर्ग के अभियंताओं का वितरण पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग तथा योजना एवं विकास विभाग के बीच इन विभागों के स्वीकृत पदबल के अनुपात में किया जायेगा।
(ii) कोटि विशेष में वरीयता- चूँकि पथ निर्माण विभाग के अभियंत्रण संवर्ग के अभियंताओं को उपर्युक्त विभागों के बीच विभागों के स्वीकृत बल के आलोक में सामान्य एवं आरक्षण कोटि को दृष्टिगत रखते हुये विभक्त किया जाना है, इसलिए यथास्थिति के आधार पर मौलिक विभाजन प्रस्ताव में परिवर्त्तन हेतु जो अभ्यावेदन प्राप्त होंगे, उनकी स्वीकृति अथवा अस्वीकृति के बिन्दु पर निर्णय लेने का प्रथम आधार अभ्यावेदक की कोटि विशेष में वरीयता होगी।
(iii) विभाग विशेष में कार्यानुभव- यदि अभ्यावेदक अपनी सेवाकाल में आधे से अधिक अवधि में किसी विभाग विशेष के अधीन सेवारत रहा हो, और वह उसी विभाग में रहना चाहता हो, तो उसके दावे को वरीयतानुसार यथासंभव मान्यता दी जा सकेगी।
(iv) सेवा-निवृत्ति के बारह माह अथवा कम शेष हो- परिस्थितिवश ऐसे मामलों पर विचार किया जा सकेगा।
(v) विशिष्ट योग्यता- यदि अभ्यावेदक किसी विशिष्ट क्षेत्र में स्नातकोत्तर अथवा डॉक्ट्रेट की उपाधि धारित करता है, तो उस क्षेत्र से प्रमुख रूप से संबंधित विभाग में उसी सेवा आवंटन हेतु दिया गया अभ्यावेदन विचारणीय होगा।
5. संवर्ग विभाजन के संदर्भ में आपत्ति अभ्यावेदन संकल्प निर्गत की तिथि से दो माह तक दी जा सकेगी। 6. प्राप्त आपत्ति अभ्यावेदन का निस्तारण विभागीय अधिसूचना संख्या-8356 (एस॰), दिनांक 24 जून 2008 द्वारा गठित समिति द्वारा किया जायेगा।
7. उपर्युक्त कंडिका में उल्लिखित मार्गदर्शक सिद्वांत के आधार पर प्राप्त अभ्यावेदनों को निस्तारित करते हुये दिनांक 1 अप्रील 2013 के प्रभाव से संवर्ग विभाजन को अंतिम रूप दिया जायेगा।5 (cid:18)बहार गजट, 19 िसत(बर 2012 8. सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा निर्गत मार्गदर्शक सिद्वांत के आलोक में पथ निर्माण विभाग, भवन निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग तथा योजना एवं विकास विभाग अपनी आवश्यकतानुसार कनीय अभियंता की नियुक्ति संविदा के आधार पर नियमों को अनुपालन करते हुये स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के एक विशेषांक में प्रकाशित कराया जाय तथा प्रतिलिपि सभी विभागों/विभागाध्यक्षें एवं महालेखाकार बिहार, वीरचन्द पटेल पटना को अग्रसारित किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, सचिव ।
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(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।
(cid:18)बहार गजट, 27Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।
Website: http://egazette.bih.nic.in
6 (cid:18)बहार गजट, 19 िसत(बर 2012(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000)))) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत
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जल संसाधन विभाग
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अधिसूचनाएं
10 जुलाई 2012
सं॰ 22/नि0सि0(मुक0)-सम0-19-09/2012/762—श्री राजेन्द्र प्रसाद केशरी, सहायक अभियंता, तत्0 विशेष कार्य पदाधिकारी नगरपालिका समस्तीपुर के पदस्थापन अवधि के दौरान बरती गई अनियमितताओं के संबंध में जिला पदाधिकारी, समस्तीपुर से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन के आलोक में विभागीय संकल्प सं0-1720 दिनांक 09 अगस्त 1999 द्वारा श्री केशरी के विरूद्व सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-1950 के नियम-55 के तहत निम्न आरोप गठित कर विभागीय कार्यवाही चलाई गई :-
(i) समस्तीपुर नगरपालिका में जुलाई 95 के करीब 23.50 लाख रूपये कर्मचारियों के बकाये वेतन भूगतान हेतु उपलब्ध था। इस राशि का पूर्ण रूप से वेतन मद में व्यय नहीं कर आपके द्वारा इसे योजना मद में विचलन कर व्यय किया गया है।
(ii) कर्मचारियों के भविष्य निधि में 5,47,000/- रू0 जमा करने हेतु आदेशित कर मात्र रूपये 3,69,000/- जमा कराया गया एवं शेष राशि अन्यत्र विचलित कर दिया गया।
(iii) 45/- रू0 प्रति के दर पर दैनिक मजदूरी के रूप में 15 कनीय अभियंताओं को बिना पूर्व स्वीकृृति के रखकर उसमें वेतनादि पर भूगतान किया गया। जबकि दो कनीय अभियंता नियमित रूप से नगरपालिका में नियुक्त थे। नियमित कर्मचारियों के वेतनादि भूगतान में जब नगरपालिका पूर्णतः सक्षम नहीं था तो इस तरह दैनिक वेतन पर कर्मचारियों को बिना किसी विज्ञापन समिति की सहमति के बिना रखने का क्या औचित्य था? इनका यह कार्रवाई स्वतः संदेहास्पद है।
(iv) कर वसूली हेतु दो कर्मचारियों (वसूलीकर्त्ता) को भी अनाधिकृत रूप से रखा गया तथा उन्हें वसूली हेतु रसीद की आपूर्ति की गई। यह एक गंभीर मामला है।
(v) विशेष पदाधिकारी के पदस्थापन अवधि में उनके द्वारा नगरपालिका के नाम से अन्य कई बैकों में खाता खोला गया है।
(vi) नगर विकास विभाग द्वारा सेवा वापस लेने के उपरांत विभागीय अधिसूचना सं0-4449 दिनांक 28 दिसम्बर 1996 द्वारा श्री केशरी का पदस्थापन मुख्य अभियंता डालटेनगंज किया गया जिसका अनुपालन अभी तक नहीं किया गया है। मुख्य अभियंता डालटेनगंज के परिक्षेत्र में योगदान नहीं करके विभागीय आदेश की अवहेलना की गई है।
2. विभागीय कार्यवाही में जॉच पदाधिकारी द्वारा जॉच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें आरोप सं0- (iii), (iv) एवं (v) पूर्णतः प्रमाणित पाया गया। जॉच पदाधिकारी से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। सम्यक् समीक्षोपरांत प्रमाणित आरोपों के लिए श्री केशरी से विभागीय पत्रांक-190 दिनांक 7 फरवरी 2001 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री केशरी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के उतर की समीक्षा पुनः सरकार के स्तर पर की गई एवं सम्यक् समीक्षोपरांत श्री केशरी के विरूद्व निम्न आरोप प्रमाणित पाया गया :-
7 (cid:18)बहार गजट, 19 िसत(बर 2012(क) नगर विकास विभाग द्वारा दिनांक 8 जनवरी 1996 को विशेष कार्य पदाधिकारी, नगरपालिका, समस्तीपुर के पद से उनकी सेवा जल संसाधन विभाग को वापस किया जाना एवं जल संसाधन विभाग के अधिसूचना सं0-4449 दिनांक 28 दिसम्बर 1996 द्वारा श्री केशरी की सेवा मुख्य अभियंता, डालटेनगंज को सौंपी गई परंतु वहॉ योगदान नहीं देकर विभागीय आदेशों की अवहेलना करना।
(क) CWJC No- 35/96 दिनांक 3 अक्तूबर 1996 में भी माननीय उच्च न्यायालय द्वारा इस तरह का कोई आदेश नहीं।
(ख) द्वितीय कारण पृच्छा में इनका यह कहना मान्य नहीं कि मुख्य सचिव के पत्रांक-2679 दिनांक 12 अगस्त 1996 द्वारा नगर विकास विभाग की अधिसूचना को अमान्य कर दिया गया क्योंकि साक्ष्य के रूप में इनके द्वारा इसे संलग्न नहीं किया जाना।
(ग) 45/- प्रतिदर पर दैनिक मजदूरी के रूप में कनीय अभियंता को रखना तथा 10,000/- रू0 उसपर खर्च करना। चुकी नगरपालिका सुपरिटेंड थी। अतः इस तरह के भुगतान के पूर्व राज्य सरकार की सहमति आवश्यक थी। जिसकी अवहेलना इनके द्वारा की गई।
(घ) कर वसूली हेतु 2 (दो) कर्मचारी को रखना। इसपर अतिरिक्त खर्च करने के पूर्व राज्य सरकार की सहमति नहीं लेना। चुकी नगरपालिका सुपरिटेंड थी, अतः इस तरह के भुगतान के पूर्व राज्य सरकार की सहमति आवश्यक थी, जिसकी अवहेलना करना।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय दंडादेश-489 दिनांक 10 मई 2001 (ज्ञापांक-924 दिनांक 10 मई 2001) द्वारा श्री केशरी को निम्न दंड संसूचित किया गया :-
(i) निन्दन वर्ष 1996-97 (ii) संचयात्मक प्रभाव से एक वेतन वृद्वि पर रोक। (iii) दिनांक 1 जनवरी 1997 से 5 अप्रील 2000 तक अनाधिकृत अनुपस्थिति के लिए वेतन नहीं। परन्तु उक्त अवधि पेंशन के प्रयोजनार्थ गणना की जायेगी।
3. उक्त दंडादेश के विरूद्व श्री केशरी, सहा0 अभि0 द्वारा CWJC No- 11902/04 दायर किया गया जिसमें दिनांक 6 अगस्त 2010 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित किया गया। न्यायादेश में उक्त दंडादेश की कंडिका (i), (ii) को अक्षुण्ण रखते हुए कंडिका (iii) में अंकित दंड के संबंध में आवेदक को एक अवसर देते हुए विभागीय स्तर पर एक अभ्यावेदन देने तथा दिनांक 1 जनवरी 1997 से 5 अप्रील 2000 तक अनुपस्थिति अवधि को आवेदक को अनुमान्य विभिन्न अवकाशों में समायोजन कर गणना करने एवं यदि अवकाश अनुमान्य नहीं हो तो इसकी सूचना आवेदक को देने का आदेश पारित किया गया।
4. CWJC No- 11902/04 में पारित न्यायादेश के विरूद्व वादी श्री केशरी द्वारा LPA-1482/10 दायर किया गया, जिसमें दिनांक 7 जुलाई 2011 को माननीय न्यायालय द्वारा न्यायादेश पारित करते हुए पूर्व के न्यायादेश में संशोधन करते हुए यह आदेश पारित किया गया कि पदस्थापन की प्रतीक्षा में बितायी गई अवधि, अगर कोई हो तो, उसे अवकाश की अवधि नहीं मानी जाएगी।
LPA में पारित न्याय निर्णय एवं श्री केशरी द्वारा समर्पित अभ्यावेदन के आलोक में मामले की समीक्षा की गई साथ ही इस मामले में अंतिम निर्णय लेने के पूर्व दिनांक 16 अप्रील 2012 को श्री केशरी को उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने हेतु अनुरोध किया गया। जिसके क्रम में श्री केशरी उपस्थित हुए एवं पूर्व के उनके द्वारा दिये गये आवेदन पर ही सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया गया। तदोपरांत मामले की समीक्षा की गई जिससे स्पष्ट होता है कि नगर विकास विभाग द्वारा 8 जनवरी 1996 को श्री केशरी की सेवा जल संसाधन विभाग को सौंपी गई जिसके आलोक में इनके द्वारा दिनांक 14 अक्तूबर 1996 को जल संसाधन विभाग में योगदान दिया गया। तदोपरान्त विभागीय पत्रांक-4449 दिनांक 28 दिसम्बर 1996 द्वारा इन्हें मुख्य अभियंता, डालटेनगंज के अधीन पदस्थापित किया गया, परन्तु श्री केशरी द्वारा विभागीय निदेश की अवहेलना करते हुए वहॉ योगदान नहीं दिया गया। बाद में दिनांक 6 अप्रील 2000 को तत्0 मंत्री श्री रामपदारथ महतो के आप्त सचिव के रूप में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की अधिसूचना सं0-1005 दिनांक 6 अप्रील 2000 द्वारा पदस्थापित किया गया। इस प्रकार श्री केशरी द्वारा दिनांक 14 अक्तूबर 1996 से 31 दिसम्बर 1996 तक विभाग में पदस्थापन की प्रतीक्षा अवधि में बितायी गयी हैं। श्री केशरी दिनांक 1 जनवरी 1997 से 5 अप्रील 2000 तक अनुपस्थित रहे है न कि वे पदस्थापन की प्रतीक्षा में रहे है। तद्नुसार CWJC No-11902/2004 में दिनांक 6 अगस्त 2010 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री केशरी की अनुपस्थिति दिनांक 1 जनवरी 1997 से 5 अप्रील 2000 तक की अवधि को आवेदक को अनुमान्य विभिन्न अवकाशों में सामंजन करने तथा अवकाश अनुमान्य नहीं हो तो इसकी सूचना आवेदक को देने का निर्णय विभाग द्वारा लिया गया है।
(II) विभागीय दंडादेश सं0-489 दिनांक 10 मई 2001 (ज्ञापांक-924 दिनांक 10 मई 2001) द्वारा संसूचित दंड के कडिका-।।। को इस हद तक संशोधित समझा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।8 (cid:18)बहार गजट, 19 िसत(बर 2012
3 अगस्त 2012
सं॰ 22/नि0सि0(सिवान0)-11-18/2012/867—श्री पे्रम चन्द्र प्रसाद, प्राक्कलन पदाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण अंचल, पडरौना को स्वेच्छा से अनुपस्थित रहने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9(1)''क'' के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लिया गया है। 2, उक्त निर्णय के आलोक में श्री प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 3. निलंबन अवधि में श्री प्रसाद का मुख्यालय, मुख्य अभियन्ता का कार्यालय, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया जाता है।
4. निलंबन अवधि में श्री प्रसाद को अनुमान्य जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। 5. विभागीय कार्यवाही से संबंधित संकल्प अलग से निर्गत किया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
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4 जुलाई 2012
सं॰ 22/नि0सि0(गया0)-24-03/2009/740—श्री तौहिद हसन अंसारी (आई0डी0-1756), तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, एकंगरसराय द्वारा उक्त प्रमण्डल के क्षेत्राधीन नालन्दा जिलान्तर्गत भूतही लोकाइन नदी के बॅाया तट पर स्थित लिवड़ी से एरई ग्राम तक जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए परिवादी श्रीमती वीणा देवी, राजद प्रत्याशी, हिलसा विघान सभा क्षेत्र से प्राप्त परिवाद पत्र की जांच उड़नदस्ता अंचल, पटना से करायी गयी। उक्त जांच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त प्रथम द्रष्टया पाये गये प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 130 दिनांक 2 फरवरी 2011 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गई। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की सम्यक समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा के क्रम में कीप बैक मनी रखने का आरोप श्री अंसारी के विरूद्व प्रमाणित नहीं पाया गया, क्योंकि इनके प्रभार ग्रहण करने के पूर्व ही इनके पूर्ववर्ती तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता श्री रामनन्दन शर्मा द्वारा एक लाख रूपये की कटौती की बैक मनी के रूप में किया गया था। वर्णित स्थिति में श्री अंसारी को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया गया।
उक्त निर्णय श्री तौहिद हसन अंसारी, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, एकंगसराय को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, उप-सचिव।
ÑÑÑÑ अधीIक, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुOित।
(cid:18)बहार गजट, 27Ñ571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0।