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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 12 October 2012

Published 12 October 2012

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-10-12.554
Languages
English, Hindi

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(ख) अधिसूचित वन भूमि को छोड़कर सभी ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध पथ तट, नहर तट, नदी तटबंध, बाँधों सहित सरकारी भूमि पर किये गये एवं किये जाने वाले सभी सरकारी योजनाओं के तहत वृक्षारोपणों में वृक्ष संरक्षण योजना लागू कर निकटवर्त्ती इच्छुक लोगों को लाभान्वित करना। 3.0 योजना का विस्तार (क) यह योजना राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिसूचित वन भूमि को छोड़कर उपलब्ध पथ तट, नहर तट, नदी तटबंध, बाँधाें सहित सरकारी भूमि पर किये गये एवं किये जाने वाले सभी सरकारी योजनाओं के तहत वृक्षारोपणों (संस्थागत वृक्षारोपण को छोड़कर) पर लागू होगी। (ख) जिन गाँवों में वृक्षारोपण स्थल अवस्थित है उन गाँवों में रहने वाले गरीबी रेखा से नीचे के इच्छुक परिवार इस योजना से लाभान्वित हो सकेंगे। वृक्षारोपण स्थल से दूरी के आधार पर आवेदकों को प्राथमिकता दी जायेगी। आवेदकों के निवास की दूरी समान होने पर, महादलित, अनुसूचित जाति (महादलित छोड़कर)/अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परिवारों को इसी प्राथमिकता क्रम में योजना में शामिल होने के लिए वरीयता दी जायेगी। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 अ,तूबर 2012 (ग) यह योजना वर्ष 2005-06 एवं उसके बाद किये गये सभी वृक्षरोपण पर लागू होगी जो कंडिका-(क) में अंकित स्थलों से आच्छादित है।

(घ) इस योजना में वैसे वृक्षारोपण शामिल होंगे जिनकी तीन वर्षों की संपोषण अवधि समाप्त हो चुकी हो अथवा जो वृक्षारोपण अभी संपोषण अवधि के अंतर्गत है।

4.0 योजना का विवरण (क) वृक्ष संरक्षण योजना के लाभुक परिवार के मुखिया को वृक्षपाल के नाम से जाना जायेगा। (ख) वृक्षपाल को इस योजना का लाभ लेने हेतु किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा। (ग) वृक्ष के अंतिम विदोहन के पूर्व प्राप्त होने वाले लाभ इस प्रकार प्राप्त किये जायेंगे जिससे वृक्ष की बढ़त और उसके उत्तरजीवित्ता पर कुप्रभाव न पड़े।

(घ) जिस भूमि पर अवस्थित वृक्षों के सुरक्षा एवं संरक्षण का दायित्व वृक्षपाल को दिया गया हो, उस भूमि पर वृक्षपाल द्वारा स्वामित्व का कोई दावा नहीं किया जायेगा। स्वामित्व सरकार का ही बना रहेगा। (ड़) प्रत्येक ईकाई के लिए प्रजातियों का रोस्टर बनाया जायेगा एवं तद्‌नुसार ही पर्यावरण एवं वन विभाग सहित सभी एजेंसियों द्वारा वृक्षारोपण किया जायेगा। प्रत्येक ईकाई में सामान्यतः 20 पौधे होंगे, जिसे आवश्यकतानुसार कम/अधिक किया जा सकता है। रोस्टर की बाध्यता, वर्ष 2012-13 एवं इसके बाद किये गये वृक्षारोपण पर ही लागू होगी।

5.0 वृक्षपाल की पात्रता (क) वृक्षपाल का चयन उसी ग्राम के इच्छुक गरीबी रेखा से नीचे के निवासियों से किया जायेगा जहाँ वृक्षारोपण स्थल अवस्थित है।

(ख) जिन गाँवों में वृक्षारोपण स्थल अवस्थित है उन गाँवों में रहने वाले गरीबी रेखा से नीचे के परिवार, जिनका घर वृक्षारोपण स्थल से निकटतम होगा, उन्हें इस योजना में सम्मिलित होने के लिए प्रथम वरीयता दी जायेगी। इसी प्रकार आरोही क्रमानुसार निवास स्थल की वृक्षारोपण स्थल से दूरी के अनुसार वृक्षपालों का चयन किया जायेगा। आवेदकों के निवास की दूरी समान अथवा लगभग सामान होने पर, महादलित, अनुसूचित जाति (महादलित छोड़कर)/अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परिवारों को इसी प्राथमिकता क्रम में योजना में शामिल होने के लिए वरीयता दी जायेगी। (ग) एक परिवार को सामान्य तौर पर वृक्षों की एक ही ईकाई का आवंटन किया जायेगा जिसमें सामान्यतया 20 पौधे होगे, परंतु निर्धारित संख्या के इच्छुक योग्य आवेदनों के नहीं रहने पर एक से ज्यादा (अधिकतम चार इकाई तक) का आवंटन किया जा सकेगा।

6.0 वृक्षपाल के चयन की प्रक्रिया (क) प्रत्येक ग्राम में इस योजना का लाभ देने हेतु वृक्षों की ईकाईयाँ निर्धारित की जायेगी। (ख) ईकाईयों का निर्धारण का कार्य वन विभाग द्वारा पैतृक विभाग एवं वृक्ष मित्रों के सहयोग से किया जायेगा।

(ग) लाभार्थी परिवार के मुखिया एवं उनकी पत्नी को संयुक्त रूप में आवंटित इकाई के वृक्षपाल के रूप में चयन किया जायेगा। पत्नी जीवित नहीं होने की स्थिति में अकेले मुखिया को आवंटित इकाई के वृक्षपाल के रूप में चयन किया जायेगा।

(घ) आवेदन प्राप्त करने हेतु अवधि पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा समेकित रूप से पूरे राज्य के लिए निर्धारित की जायेगी। उक्त अवधि में संबंधित प्रखंड मुख्यालय में आवेदन दिया जा सकेगा। निर्धारित अवधि में पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा नामित कर्मचारी संबंधित प्रखंड मुख्यालय में आवेदन प्राप्त करेंगे।

(ड़) इच्छुक आवेदकों में से पात्रता के अनुसार चयन संबंधित क्षेत्र के वनों के क्षेत्र पदाधिकारी, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, हरियाली मिशन के प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं पैतृक विभाग के कनीय अभियन्ता से अन्यून स्तर के पदाधिकारियों की समिति के द्वारा किया जायेगा। इसका कोरम न्यूनतम तीन पदाधिकारियों का होगा।

(च) चयन में किसी प्रकार की आपत्ति की स्थिति में आपत्ति देने की अवधि एवं निराकरण की अवधि एवं सक्षम स्तर का निर्धारण पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा किया जायेगा।

(छ) उपरोक्त कंडिका-'च' के अधीन आपत्ति संबंधित ग्राम के लाभुक की पात्रता रखने वाले व्यक्तियों द्वारा ही किया जा सकेगा।

(ज) लाभार्थियाें की पंजी के संधारण एवं रख-रखाव की प्रक्रिया का निर्धारण पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा पैतृक विभागों से विमर्श के आधार पर किया जायेगा।

(झ) चयनित लाभार्थियों के बीच ईकाई का वितरण वृक्षारोपण स्थल की आवेदक के घर से दूरी के आधार पर किया जायेगा। प्रथम प्राथमिकता उन योग्य आवेदकों को दी जायेगी जिनके घर की दूरी वृक्षारोपण स्थल से सबसे कम होगी। आवंटित इकाई को अस्वीकार करने की स्थिति में वरीयता क्रम में प्रतीक्षा सूची के लाभार्थियों को वह ईकाई आवंटित होगी। 3

(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 अ,तूबर 2012

7.0. वृक्ष ईकाई के आवंटन की अवधि (क) वृक्ष ईकाई के आवंटन की अवधि तीस वर्षों की होगी इसके बाद विहित प्रक्रियानुसार अवधि का नवीकरण उसी परिवार के लिए अगले तीस वर्ष के लिए किया जा सकेगा।

(ख) वृक्षपाल द्वारा आवंटित ईकाई का रख-रखाव संतोषजनक नहीं होने पर अथवा अपने दायित्वों का उल्लंघन करने पर आवंटन अवधि के बीच में ही आवंटन रद्द कर नये लाभार्थी परिवार को ईकाई विहित प्रक्रियानुसार आवंटित की जा सकेगी। इस प्रकार का नया आवंटन पुराने आवंटन की शेष अवधि के लिए होगा।

(ग) वृक्षपाल को ईकाई का किया गया आवंटन हस्तान्तरणीय नहीं होगा, परन्तु उसकी मृत्यु होने पर नामित उत्तराधिकारी को ईकाई हस्तान्तरित की जा सकेगी। नामांकन का प्रावधान आवेदन में ही होगा एवं इसका उल्लेख आवंटन पत्र में किया जायेगा।

(घ) आवंटन की अवधि समाप्त होने के बाद यदि वृक्षपाल द्वारा कर्त्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो आवंटन का नवीकरण नहीं कर, विहित प्रक्रियानुसार ईकाई अन्य व्यक्तियों को आवंटित की जायेगी।

8.0 वृक्षपाल के अधिकार (क) वृक्षपाल को आवंटन अवधि में आवंटित ईकाई के अधीन वृक्षों पर अधिकार होगा। (ख) वृक्ष से प्राप्त होने वाले फल, सूखा जलावन, चारा, फूल इत्यादि उत्पादों (वगैर वृक्ष विदोहन किये) पर वृक्षपालाेंं का अधिकार होगा।

(ग) आवंटित ईकाई में अवस्थित वृक्षों के रोटेशन का निर्धारण प्रारम्भ में ही किया जायेगा। इस अवधि के बाद वृक्षपाल द्वारा स्वतः इन वृक्षों का विदोहन किया जा सकेगा। विदोहन से प्राप्त सम्पूर्ण राशि पर वृक्षपाल का अधिकार होगा। इसकी सूचना वनों के क्षेत्र पदाधिकारी या विभाग द्वारा नामित किसी पदाधिकारी को दी जायेगी।

(घ) परिपक्वता अवधि के पूर्व ही किसी प्राकृतिक आपदा अथवा बिमारी के कारण वृक्षों के सूख जाने अथवा गिरने की स्थिति में, वृक्षों का विदोहन सक्षम स्तर से पूर्वानुमति प्राप्त कर किया जायेगा। विदोहन से प्राप्त संपूर्ण राशि पर वृक्षपाल का अधिकार होगा।

(ड़) आवंटित ईकाई के वृक्षों का उपयोग मधुमक्खी पालन, तसर सिल्क के कीट का पालन, लाह कीट पालन इत्यादि के लिए करने का अधिकार वृक्षपाल को होगा।

9.0 वृक्षपाल के दायित्व (क) आवंटित ईकाई में अवस्थित वृक्षों की सुरक्षा, संरक्षण एवं संवर्द्ध्रन हेतु सभी आवश्यक कार्य वृक्षपाल द्वारा स्वतः किये जायेंगे।

(ख) परिपक्वता अवधि के बाद विदोहन किये गये वृक्ष के स्थान पर नये वृक्ष लगाने की जिम्मेवारी वृक्षपाल की होगी। वृक्षारोपण के लिए पौधा पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा निःशुल्क दिया जायेगा। (ग) परिपक्वता अवधि के पूर्व प्राकृतिक आपदा, बिमारी से पेड़ सूख जाने या गिर जाने पर उसके स्थान पर नया वृक्ष लगाने की जिम्मेवारी वृक्षपाल की होगी। वृक्षारोपण के लिये पौधा पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा निःशुल्क दिया जायेगा।

10.0 वृक्षपाल के प्रतिबंध (क) आवंटित ईकाई स्थल पर किसी भी प्रकार का अस्थायी/स्थायी निर्माण प्रतिबंधित होगा। (ख) वृक्षपाल द्वारा आवंटित ईकाई के अधीन भूमि के स्वरूप में कोई परिवर्त्तन नहीं किया जा सकेगा। (ग) वृक्षपाल द्वारा अपने अधिकारों एवं जिम्मेदारी का हस्तान्तरण नहीं किया जा सकेगा। (घ) वृक्षपाल द्वारा पर्यावरण एवं वन विभाग तथा पैत्रिक विभाग के नियमों एवं निर्देशों का उल्लंघन नहीं किया जायेगा। वृक्षों को समय पूर्व काटने तथा अन्य किसी प्रकार से नुकसान पहुँचाने पर वृक्षपाल पर भारतीय दण्ड संहिता की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत कार्रवाई की जायेगी।

11.0 पैतृक विभाग के अधिकार पैतृक विभाग का संबंधित नहर, नदी तटबंध एवं सड़क पर आवश्यक रख-रखाव, सुदृढ़ीकरण, निर्माण का अधिकार रहेगा। इन कार्यों के क्रम में यदि वृक्षों को कोई नुकसान होता है तो वृक्षपाल का किसी प्रकार की क्षतिपूर्त्ति का दावा नहीं होगा। अगर इस क्रम में वृक्षों के पातन की आवश्यकता हो तो पैतृक विभाग द्वारा पातन, वन प्रमंडल पदाधिकारी की पूर्वानुमति, से किया जा सकेगा, परन्तु पातन के बाद सम्पूर्ण वन पदार्थ पर वृक्षपाल का अधिकार होगा।

12.0 आवंटन रद्द करने की प्रक्रिया (क) आवंटन रद्द करने का अधिकार पर्यावरण एवं वन विभाग, द्वारा अधिकृत पदाधिकारी को होगा। (ख) आवंटन रद्द करने से पूर्व वृक्षपाल को एक कारण बताओ नोटिस तीस दिनों की अवधि देते हुए भेजा जायेगा। तत्पश्चात्‌ सुनवाई एवं स्थल निरीक्षण, यदि आवश्यक हो, के बाद समुचित आदेश पारित किया जायेगा। यह आदेश नोटिस अवधि समाप्ति के दो माह के अन्दर करना अनिवार्य होगा। (ग) यदि आवंटन रद्द किया जाता है तो वृक्षपाल को कोई क्षतिपूर्त्ति देय नहीं होगी एवं ईकाई में अवस्थित सभी वृक्षों पर सरकार का स्वामित्व होगा। 4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 अ,तूबर 2012 (घ) आवंटन रद्द होने की स्थिति में आदेश करने वाले अधिकारी से एक स्तर उपर के वन विभाग के पदाधिकारी के पास तीस दिनों के अन्दर अपील दायर की जा सकेगी एवं अपीलीय अधिकारी का निर्णय अंतिम होगा एवं अपीलों का निस्तार, अपील-आवेदन प्राप्ति की तिथि से तीस दिनों के अन्दर अनिवार्य रूप से किया जायेगा।

13.0 योजना का कार्यान्वयन योजना के मूल स्वरूप को परिवर्त्तित किये बिना इसके कार्यान्वयन के लिए आवश्यक अनुदेश प्रपत्र आदि निर्धारित करने हेतु पर्यावरण एवं वन विभाग सक्षम होगा।

आदेशः—आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में सर्वसाधारण की जानकारी हेतु प्रकाशित किया जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, दीपक कुमार सिंह, सरकार के सचिव।

————— अधी.क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु4ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 554-571+500-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 12 October 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-10-12.554/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-10-12.554.