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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 12 December 2012

Published 12 December 2012

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-12-12.660
Languages
English, Hindi

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त्र त्र2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 बिहार शहरी आयोजना तथा विकास विधेयक, 2012 [foŒlŒfoŒ&16@2012] बिहार राज्य में शहरी क्षेत्रों और वैसे ग्रामीण क्षेत्रों जो शहरीकरण की क्षमता रखता हो, की योजनाबद्ध अभिवृद्धि और विकास तथा भूमि-उपयोग के विनियमन और संवर्द्धन के लिए विधेयक। भारत गणराज्य तिरसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधानमण्डल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

अध्याय-I

1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ ।-(1) यह अधिनियम बिहार शहरी आयोजना तथा विकास अधिनियम, 2012 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित सम्पूर्ण बिहार राज्य अथवा इसके किसी भाग में होगा। (3) यह उस तारीख को प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे तथा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग तारीख नियत की जा सकेगी।

2. परिभाषाएँ ।- इस अधिनियम में जब तक कोई बात विषय अथवा संदर्भ के विरुद्ध न हो,

(I) ''कृषि'' के अन्तर्गत बागवानी, फसलों, फल, सब्जियाँ, घास, चारा, वृ़क्ष लगाना अथवा किसी अन्य प्रकार की खेती, घोड़ा, गदहा, खच्चर, सूअर, मछली, कुक्कुट और मधुमक्खी सहित पशुधन का प्रजनन एवं पालन-पोषण तथा किसी ऐसे प्रयोजन के लिए भूमि का उपयोग, जो भूमि पर खेती अथवा इसके संवर्धन अथवा किसी अन्य कृषि प्रयोजनों के आनुषंगिक हो, किन्तु इसके अंतर्गत बगीचे के प्रयोजनार्थ भवन से सटी ऐसी भूमि का उपयोग नहीं आता है जो ऐसे भवन के बगल में उपयोग में लायी जाए और अभिव्यक्ति "—षीय" का अर्थ तद्‌्‌नुसार समझा जाएगा ; (II) ''सुख-सुविधाएँ'' के अंतर्गत विद्यमान/विहित मानकों के अनुसार निवास करने वाली जनसंख्या को सहारा देने वाले क्रिया कलाप, यथा-सड़कें और गलियाँ, खुले स्थान, जल और विद्युत आपूर्ति, स्ट्रीट लाइटिंग, मलवहन, जल निकास, नर्सरी, शिशुकक्ष, प्राथमिक विद्यालय, संयुक्त विद्यालय, औषधालय, पॉलिक्लिनिक, सामुदायिक हॉल, पुस्तकालय, दुकानदारी, (शॉपिंग) सुविधा, खेल क्षेत्र, पार्क और खेल मैदान, हरित क्षेत्र, थाने, सार्वजनिक पड़ाव, बस स्टेशन, अग्निशमन केन्द्र, डाकघर, निवास करनेवाली जनसंख्या के लिए अनिवार्य, इ0डब्लू0एस आवास, अनौपचारिक क्षेत्र के लिए स्थान, वरिष्ठ नागरिकों और शारीरिक निःशक्त लोगों के लिए बाधामुक्त पहुँच को सुकर (सुगम) बनाने हेतु सभी आवश्यक घटक तथा अन्य उपयोगिताएँ, सेवाएँ और सुविधाएँ जो विहित किए जायें ; (III) ''क्षेत्र'' से अभिप्रेत है क्षेत्र विकास स्कीम तैयार करने के प्रयोजनार्थ विभक्त सबसे छोटी इकाई ; (IV) "क्षेत्र विकास स्कीम" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन तैयार की गई क्षेत्र विकास स्कीम; (V) ''खराब अभिन्यास अथवा अप्रचलित विकास का क्षेत्र" से अभिप्रेत है ऐसा क्षेत्र जो उससे सटी हुई या पाश्र्वस्थ अन्य भूमि के साथ खराब ढंग से अभिन्यस्त हो अथवा जिसका अप्रचलित विकास हुआ हो जिसे विकास आयोजना द्वारा खराब अभिन्यास अथवा अप्रचलित विकास के क्षेत्र के रूप में परिभाषित हो, (VI) आयोजना क्षेत्र के सम्बन्ध में "उपयुक्त प्राधिकार'' से अभिप्रेत है सरकार द्वारा उस क्षेत्र के लिए स्थापित योजना प्राधिकार या बिहार शहरी योजना एवं विकास समिति या कोई अन्य प्राधिकार जो सरकार द्वारा उस क्षेत्र के लिए स्थापित या अधिसूचित हो लेकिन यह जिला योजना समिति ; महानगर योजना समिति और संबंधित स्थानीय प्राधिकार तक सीमित नहीं है। (VII) ''बोर्ड'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन गठित राज्य शहरी आयोजना तथा विकास बोर्ड ; (VIII) ''भवन'' में कोई संरचना अथवा संरचना का कोई भाग जो आवासीय, औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा अन्य प्रयोजनों में प्रयुक्त होने के लिए आशयित हो, चाहे उसका वास्तविक उपयोग होता हो अथवा नहीं और इसमें चहारदीवारी अथवा इसकी घेराबंदी सम्मिलित है ; (IX) ''भवन परिचालन'' में सम्मिलित है : (क) भवन अथवा इसके किसी भाग का निर्माण अथवा पुनर्निर्माण, (ख) भवन के किसी भाग अथवा खुली जगह पर छत डालना, फिर से छत डालना, (ग) किसी भवन का कोई भौतिक परिवर्तन अथवा विस्तार, (घ) किसी भवन का ऐसा कोई परिवर्तन जो उसके जल निकास अथवा सफाई व्यवस्था के परिवर्तन को प्रभावित करने वाला हो अथवा भौतिक रूप से इसकी सुरक्षा को प्रभावित करता हो, (ड.) भू-स्वामी से असम्बद्ध किसी पथ अथवा भूमि पर दरवाजा खोलने के लिए निर्माण ; (X) ''कंपनी'' से अभिप्रेत है, कंपनी अधिनियम, 1956 के अध्यधीन रजिस्ट्रीकृत निगमित निकाय ; (XI) ''वाणिज्य'' से अभिप्रेत है, कोई व्यापार, कारोबार अथवा वृत्ति करना, किसी प्रकार के माल की बिक्री अथवा विनिमय करना और इसमें लाभ की दृष्टि से अस्पताल, परिचर्या गृह (नर्सिंग होम), रूग्णावास, शैक्षिक संस्थाएँ सम्मिलित है और तद्‌नुसार इसमें होटल, रेस्तराँ, किसी शैक्षिक संस्था से विलग बोर्डिंग हाउस, सराय, दावतखाना, विवाह भवन, अतिथि गृह, कोचिंग संस्था, प्रशिक्षण केन्द्र, कॉल सेन्टर भी सम्मिलित समझे जायेंगे और अभिव्यक्ति ''वाणिज्यिक'' का अर्थ तद्‌नुसार समझा जाएगा;

3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012

(XII) ''वाणिज्यिक उपयोग'' के अंतर्गत वाणिज्य के परिभाषित प्रयोजनों अथवा माल के भंडारण अथवा कार्यालय चाहे उद्योग अथवा अन्यथा से संलग्न हो, के लिए किसी भूमि अथवा भवन अथवा उसके किसी भाग का उपयोग आता है ; (XIII) ''संपरिवर्तन'' से अभिप्रेत है, किसी भी रीति से अधिभोग अथवा संस्थापन में परिवर्तन अथवा भूमि के उपयोग में परिवर्तन; (XIV) ''न्यायालय'' जो आरम्भिक अधिकारिता वाला प्रधान व्यवहार न्यायालय हो और इसके अन्तर्गत कोई अन्य व्यवहार न्यायालय हो से अभिप्रेत है इसकी अधिकारिता की स्थानीय और धन संबंधी सीमाओं के अंतर्गत इस अधिनियम के अध्यधीन न्यायालय के कृत्यों को करने के लिए सरकार द्वारा सशक्त न्यायालय ; (XV) अपने सभी व्याकरणिक रूप भेद के साथ ''विकास'' से अभिप्रेत है भूमि के अन्दर भूमि पर अथवा ऊपर कोई भवन, अभियांत्रिकी, खनन अथवा अन्य कार्य करना अथवा किसी भवन या भूमि या किसी भवन या भूमि के किसी उपयोग में कोई भौतिक परिवर्तन करना और इसमें किसी भूमि का अभिन्यास और उपखंड सम्मिलित है। (XVI) ''विकास योजना'' से अभिप्रेत है, किसी आयोजना प्राधिकार की अधिकारिता के अन्तर्गत विकास अथवा पुनर्विकास के लिए योजना अथवा किसी क्षेत्र का विकास और इसके अन्तर्गत क्षेत्रीय विकास योजना, महानगर विकास योजना, क्षेत्र विकास योजना, मास्टर योजना, नगर विकास योजना, जोन योजना, जिला विकास योजना अथवा कोई अन्य आयोजना अथवा स्कीम, आदि इस प्रकार की योजनाएँ चाहे जिस किसी नाम से जाना जाए, इस अधिनियम के अन्तर्गत तैयार किया गया हो; (XVII) ''जिला'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य का कोई जिला ; (XVIII) ''फर्श क्षेत्रफल अनुपात (एफ॰ए॰आर)'' से अभिप्रेत है फर्श के सकल क्षेत्रफल में भूखंड के कुल क्षेत्रफल का भागफल अथवा अनुपात, अर्थात

फर्श क्षेत्रफल अनुपात =

सभी फर्शों का आच्छादित क्षेत्रफल का योग भूखंड का क्षेत्रफल

(XIX) ''फर्श जगह सूचकांक (एफ॰एस॰आई॰)'' से अभिप्रेत है फर्श के सकल क्षेत्रफल में भूखंड के कुल क्षेत्रफल का भागफल अथवा अनुपात का सौ गुणा अर्थात्‌

सभी फर्शों का आच्छादित क्षेत्रफल का योग

X 100 फर्श जगह सूचकांक =

भूखंड का क्षेत्रफल (XX) ''सरकार'' से अभिप्रेत है राज्य सरकार ; (XXI) ''विरासत भवन'' से अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत है एक अथवा एक से अधिक परिसरों का कोई भवन अथवा उसका कोई भाग अथवा ऐतिहासिक या स्थापत्य या कला या शिल्प या सौन्दर्य या सांस्कृतिक या पर्यावरणीय या पारिस्थिति प्रयोजन के लिए संरक्षण अथवा परिरक्षण की अपेक्षा रखने वाली संरचना अथवा आर्टिफैक्ट और इसके अंतर्गत है ऐसे भवन अथवा उसके भाग से लगे भूमि का ऐसा भाग जो बाड़ लगाने या घेरने अथवा ऐसे भवन के ऐतिहासिक या स्थापत्य या सांस्कृतिक या पर्यावरणीय मूल्य को परिरक्षित करने के लिए अपेक्षित हो, (XXII) ''विरासत परिसीमा'' से अभिप्रेत है और उसके अंतर्गत है ऐसी जगह जो ऐतिहासिक या स्थापत्य या सौन्दर्य या सांस्कृतिक या पर्यावरणीय या परिस्थिति प्रयोजन के लिए संरक्षण अथवा परिरक्षण की अपेक्षा रखता हो और किसी विशेष क्षेत्र अथवा जगह अथवा भवन की दीवार अथवा अन्य सीमाएं जो ऐसी जगह को इसके चारो तरफ खींची गई किसी काल्पनिक रेखा अथवा इन मापों के एक अथवा एक से अधिक सम्मिलन द्वारा घेरा गया हो। (XXIII) ''उद्योग'' के अंतर्गत है कारखाना अधिनियम,1948 में यथापरिभाषित विनिर्माण प्रक्रिया को करना और ''औद्योगिक''का तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा। (XXIV) ''आधारभूत संरचना'' से अभिप्रेत है, ऐसी कोई परियोजना, सार्वजनिक सुख-सुविधा अथवा लोकोपयोगिता अथवा सेवा जो विकास क्षेत्र के निर्विघ्न, उत्पादक और दक्षतापूर्ण कार्य संचालन के लिए अपेक्षित हो, यथा जैसे - मुख्य मार्ग की आधारभूत संरचना, निकटस्थ प्रमुख सड़क से पहुँच पथ, पेयजल की प्रचूर आर्पूाि (मुख्य लाइन के साथ भू-पृष्ठ जल और भूगर्भ जल) और ऊर्जा (विद्युत उपकेन्द्र और नेटवर्क) की, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं, परिवहन (प्रमुख सड़कें यथा - राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य उच्चपथ, प्रमुख जिला सड़क, अन्य जिला सड़क अथवा विकास योजना सड़क, पुल, वाह्‌यपथ (बाईपास), आंतरिक पथ, सामान्य वहिस्राव उपचार संयंत्र (सी॰ई॰टी॰पी॰), मल उपचार संयंत्र (एस॰टी॰पी॰), ठोस अपशिष्ट निपटान प्रणाली और पात्र (आधान), संचार नेटवर्क, आंचलिक खरीददारी, बाजार, संस्थागत भवन, मॉल और मल्टीप्लेक्स, सिनेमा, सामुदायिक हॉल, खुला नाट्‌यशाला और उत्तम खेल मैदान, नागरिक और सांस्कृतिक सुविधाएं, सार्वजनिक पार्किंग क्षेत्र आदि तथा कोई अन्य यथा विहित; (XXV) ''भूमि" के अंतर्गत, भूमि से होने वाले लाभ और जमीन से संलग्न वस्तुएं अथवा जमीन से स्थायी रूप से संलग्न किसी वस्तु से स्थायी तौर पर जकड़ी गयी वस्तुएं; (XXVI) ''भूमि उपयोग'' से अभिप्रेत है, ऐसा प्रमुख उपयोग जिसके लिए किसी विनिर्दिष्ट तारीख को भूमि का उपयोग किया जा रहा हो;

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4 (XXVII) ''अभिन्यास'' से अभिप्रेत है, भूमि अथवा भूखंड को सड़कों अथवा गलियों के निर्माण, समतलीकरण, मेटलिंग अथवा ब्लैक टॉपिंग अथवा सड़क, फुटपाथ का खरांजा करना और जलापूर्ति, जल निकास, स्ट्रीट लाइटिंग जैसी सेवाएं, खुली जगह के नक्शे के साथ भवन भूखण्ड में अभिन्यस्त करना और इसके अंतर्गत है ऐसे भूखंडों में भवन के प्रयोजनार्थ भूमि का उप विभाजन ; (XXVIII) ''स्थानीय प्राधिकार'' से अभिप्रेत है बिहार राज्य में प्रवृत्त बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 (बिहार अधिनियम 11, 2007) के अध्यधीन गठित नगरपालिकाएं अथवा बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के अध्यधीन गठित पंचायती राज संस्थाएं ; (XXIX) ''महानगर क्षेत्र'' से अभिप्रेत है दस लाख अथवा उससे अधिक जनसंख्या वाला ऐसा क्षेत्र, जिसमें एक अथवा एक से अधिक जिला समाविष्ट हो तथा जिनमें दो अथवा दो से अधिक नगरपालिकाएं अथवा पंचायतें अथवा अन्य संलग्न क्षेत्र हो, जो इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ महानगर क्षेत्र होने के लिए अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाय ; (XXX) "महानगर आयोजना समिति" से अभिप्रेत है महानगर क्षेत्र के लिए इस अधिनियम के परियोजनार्थ भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 यड॰ के अनुसार सरकार द्वारा गठित समिति; (XXXI) ''प्राकृतिक जोखिम प्रवण क्षेत्र'' से अभिप्रेत है ऐसा क्षेत्र जहाँ निम्नलिखित संभाव्य हो - (क) भूकंप के कारण मध्यम से बहुत अधिक क्षति का खतरा (ख) चक्रवात के कारण मध्यम से बहुत अधिक क्षति का खतरा (ग) महत्वपूर्ण बाढ़ प्रवाह (घ) भूस्खलन, अथवा (ड.) इनमें से कोई एक अथवा एकाधिक जोखिम

(XXXII) ''अधिसूचना'' से अभिप्रेत है राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना ; (XXXIII) ''अधिभोगी'' के अंतर्गत हैं;

(क) किराएदार (ख) भूमि का दखल रखने वाला स्वामी अथवा अन्यथा उपयोग करने वाला (ग) किसी भूमि का किरायामुक्त किराएदार (घ) किसी भूमि/भवन का दखल रखने वाला अनुज्ञप्तिधारी, और (ड.) किसी भूमि अथवा भवन के उपयोग और अधिभोगी के लिए स्वामी को क्षति का भुगतान करने का दायी कोई व्यक्ति

(XXXIV) ''परिचालन निर्माण" से अभिप्रेत है कोई ऐसा निर्माण चाहे स्थायी हो अथवा अस्थायी जो किसी निम्नलिखित सेवाओं के परिचालन, अनुरक्षण, विकास अथवा निष्पादन के लिए आवश्यक हो, यथा --

(क). रेल (ख). राष्ट्रीय राजमार्ग (ग). राष्ट्रीय जलमार्ग (घ). प्रमुख बंदरगाह (ङ). नदी सामने विकास (च). वायुमार्ग और हवाई अड्‌डा (छ). डाक और तार, दूरभाष, बेतार प्रसारण तथा इसी तरह के संचार के अन्य साधन (ज). विद्युत के लिए क्षेत्रीय ग्रिड (झ). यदि सरकार की राय में ऐसी अन्य सेवाओं का विकास अथवा निष्पादन आवश्यक हो तो सरकार इस खंड के प्रयोजनार्थ अधिसूचना द्वारा उन सेवाओं को घोषित कर सकेगी।

स्पष्टीकरण : शंकाओं के निराकरण के लिए एतद्‌द्वारा यह घोषित किया जाता है कि निम्नलिखित का निर्माण - (I) रेलवे की दशा में नये आवासीय भवन (गेट लॉज, सीमित आवश्यक परिचालन स्टाफ और अन्य ऐसे के लिए आवास गृह), रेलवे कॉलनी में सड़क और नाले, होटल, क्लब, संस्थान और विद्यालय, और (II) किसी अन्य सेवा की दशा में नया भवन, नई संरचना अथवा नई संस्थापन अथवा इसका कोई विस्तार इस खंड के अर्थ के अंतर्गत निर्माण नहीं समझे जाएंगे, (XXXV) किसी संपत्ति के संबंध में ''स्वामी'' के अंतर्गत है कोई व्यक्ति जो तत्समय संपत्ति का किराया अथवा लाभ प्राप्त करता हो अथवा प्राप्त करने का हकदार हो चाहे अपनी ओर से अथवा किसी अन्य व्यक्ति के कारण अथवा उसकी ओर से अथवा उसके हित में अथवा अभिकर्त्ता (एजेंट), न्यासी, अभिभावक, प्रबंधक अथवा किसी अन्य व्यक्ति अथवा किसी धार्मिक या पुण्यार्थ संस्था के लिए प्राप्तिकर्त्ता के रूप में और इसमें इसके सकब्जा बंधकदार भी सम्मिलित हैं; (XXXVI) "उपांत क्षेत्र" से अभिप्रेत है, ऐसा क्षेत्र है जिसे राज्य सरकार द्वारा आयोजना क्षेत्र की परिधि में अंकित किया गया हो;

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(XXXVII) ''योजना'' से अभिप्रेत है किसी आयोजना/योजना क्षेत्र में विकास को सुनिश्चित करने, बढ़ावा देने और विनियमित करने के लिए प्रस्तावों, नीतियों और विकास सारों का विवरण और इसके अंतर्गत नक्शा या नक्शे/अथवा दस्तावेजों का सेट शामिल है ; (XXXVIII) ''आयोजना क्षेत्र'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अध्यधीन आयोजना/योजना के प्रयोजनार्थ सरकार द्वारा सीमांकित और घोषित प्रादेशिक इकाई और यह उस नाम से जाना जाएगा जो सरकार विनिश्चित करे ; (XXXIX) ''आयोजना प्राधिकार'' से अभिप्रेत है सरकार द्वारा आयोजना के प्रयोजनार्थ आयोजना क्षेत्र के लिए स्थापित प्राधिकार और इसके अन्तर्गत है क्षेत्रीय आयोजना प्राधिकार, क्षेत्र आयोजना प्राधिकार और कोई अन्य प्राधिकार चाहे जिस किसी नाम से जाना जाता हो तथा आयोजना प्राधिकार एवं क्षेत्र आयोजना प्राधिकार शब्द अदल-बदल कर प्रयुक्त हुआ है ; (XL) ''भूखंड'' से अभिप्रेत है एक के स्वामित्व वाली भूमि और किसी योजना और विकास स्कीम में एक भूखंड के रूप में संख्यांकित तथा दर्शित ; (XLI) ''विहित'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियम और विनियम द्वारा विहित ; (XLII) ''सार्वजनिक स्थान'' से अभिप्रेत है कोई ऐसा स्थान अथवा भवन जो जनता के उपभोग के लिए खुला हो चाहे यह जनता द्वारा वास्तव में प्रयुक्त हो अथवा उपयोग किया जाता हो अथवा नहीं और चाहे प्रवेश किसी परिवर्तन द्वारा विनियमित होता हो अथवा नहीं ; (XLIII) ''प्रकाशन'' से अभिप्रेत है समुचित प्राधिकारी द्वारा राजपत्र, समाचारपत्रों, पत्रिकाओं, वेबसाइट तथा किसी अन्य माध्यमों में प्रकाशित करने का कार्य और प्रक्रिया ; (XLIV) ''परिरक्षण'' से अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत किसी स्थान और संरचना के मौजूदा रूप और बनावट को इसके मौजूदा स्वरूप में बनाए रखना और विकृति को रोकना आता है; (XLV) ''पुनर्निर्माण'' से अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत है किसी स्थान अथवा संरचना को यथाशक्य शीघ्र पुराने ज्ञात अवस्था में वापस लाना और बनावट में सामग्री (नया और पुराना) का सन्निविष्ट कर पहचान करना, इसके अंतर्गत मनोरंजन अथवा अनुमानिक पुनर्निर्माण नहीं होंगे ; (XLVI) ''विनियमावली'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाये गये विनियम और इसमें विकास योजना अथवा नगर विकास स्कीम के हिस्से के रूप में बनाये गये जोन में विभाजन और अन्य विनियम शामिल है; (XLVII) खराब अभिन्यास का कोई क्षेत्र अथवा मलिन बस्ती के पूर्ण विकास के संदर्भ में ''आबादी के पुनस्र्थापन'' से अभिप्रेत है उक्त क्षेत्र में निवास करने वाले अथवा कारोबार या अन्य गतिविधियाँ चलाने वाले व्यक्तियों को उस क्षेत्र में अथवा अन्यत्र आवासीय प्रयोजनों अथवा सुख-सुविधाओं सहित कारोबार या अन्य गतिविधियाँ चलाने के लिए जिन्हें इस प्रकार वास सुविधा दी जाए कि उक्त क्षेत्र समुचित रूप से योजनाबद्ध हो सके; (XLVIII) ''निवास'' के अंतर्गत है किसी भूमि अथवा भवन अथवा उसके किसी भाग का मानव आवास के लिए उपयोग, ऐसी भूमि अथवा भवन से संबद्ध बगीचे, मैदान, गैरेज, अस्तबल और उपगृह यदि कोई हो का उपयोग और अभिव्यक्ति ''आवासीय'' का तदनुसार अर्थ समझा जाएगा ; (XLIX) ''प्रत्यावर्तन'' से अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत है किसी स्थान की मौजूदा बनावट की अनुवृद्धि हटा कर अथवा नई सामग्री को हटाए बिना मौजूदा संघटकों को पुनः जोड़कर पूर्व के ज्ञात स्वरूप में बनाए रखना ; (L) ''नियम'' से अभिप्रेत है सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाया गया नियम ; (LI) ''स्कीम'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनाया गया विकास अथवा योजना स्कीम और इसके अंतर्गत है ऐसे स्कीम से संबंधित योजना अथवा योजनाएँ, नक्शा, साथ ही विवरणात्मक विनियामक विषय यदि कोई हो; (LII) ''अंतरणीय विकास अधिकार (टी॰डी॰आर॰)'' से अभिप्रेत है ऐसे भू-स्वामी, जिसकी भूमि अथवा उसका कोई भाग लोक प्रयोजनों यथा, सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण पार्कों, खेल मैदानों, नागरिक सुख-सुविधाओं, मनोरंजनात्मक प्रयोग, शहरी अवसंरचना, विकास नियंत्रण और जोन विभाजन, विनियमनों का कार्यान्वयन और विरासत स्थलों का संरक्षण अथवा ऐसे सरकार द्वारा यथा अधिसूचित अन्य प्रयोजन के लिए अपेक्षित हो, को उसके द्वारा अभ्यर्पित अथवा छोड़े गये क्षेत्र के बदले में कतिपय अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र उपलब्ध कराना ताकि वह अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र का या तो स्वयं उपयोग कर सके अथवा अन्य प्रतिफल के लिए दूसरे व्यक्ति को अंतरित कर सके ; (LIII) ''अधिकरण'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन सरकार द्वारा गठित अधिकरण ; (LIV) ''उपयोगिता'' से अभिप्रेत है सेवाएँ जैसे सड़के पहुँच सड़के सहित, पुल, वाह्‌यपथ और अंदरूनी पथ, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति प्रणाली, महवहन प्रणाली, तूफानी बारिश का जल निकास प्रणाली, विद्युत नेटवर्क, संचार नेटवर्क, मल उपचार संयंत्र, रिसाव कुआँ, ठोस अपशिष्ट निपटान प्रणाली, औद्योगिक, संस्थागत और शहरी अपशिष्ट का संग्रहण-उपचार-निस्सारण, गैस पाइपलाइन, सामान्य बहिः ाव उपचार संयंत्र, अनौपचारिक सेवाओं के लिए स्थान आदि और कोई अन्य जो विहित की जाय ; (LV) ''जोन'' से अभिप्रेत है कोई प्रादेशिक इकाई अथवा उसका भाग जिसमें इस अधिनियम के अधीन विकास को सुनिश्चित करने, बढ़ावा देने और विनियमित करने के प्रयोजनार्थ किसी आयोजना क्षेत्र को उप विभाजित किया जा सके और अभिव्यक्ति जोन में विभाजित करने वाला ''जोनिंग विनियमन'' का तदनुसार अर्थ समझा जाएगा ;

(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012

6 (LVI)''जोनल योजना'' से अभिप्रेत है मास्टर प्लान के प्रस्तावों का ब्यौरा देनेवाली और मास्टर प्लान एवं अभिन्यास योजना के बीच सम्पर्क स्थापित करनेवाली एक योजना। इसमें स्थल योजना और भूमि के उपयोग की समीपवर्ती अवस्थिति तथा विस्तार सहित भूमि-उपयोग की योजना समाविष्ट हो सकेगी, जैसे-आवासीय सार्वजनिक और अर्द्ध सार्वजनिक भवन अथवा शहरी और नागरिक कार्य, उपयोगिता, सड़क, आवासन, मनोरंजन, उद्योग, कारबार, बाजार और जोन के विकास से संबंधित अन्य विषय; (LVII) जोन के संबंध में 'जोन में विभाजित करने वाला "जोनिंग विनियमावली'' से अभिप्रेत है भवन के लिए भूमि के उपयोग को नियंत्रित और विनियमित करने और अभिन्यास योजना को लागू करने और विनियामक सिद्धांतों को विहित करने जैसे अनुज्ञेय फर्श क्षेत्र अनुपात, फर्श क्षेत्र सूचक भवन की ऊँचाई, भवन की कतार, पार्किंग के लिए विनियमावली ; टिप्पणी : इस अधिनियम में अपरिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे जो बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007, बिहार अपार्टमेंट स्वामित्व अधिनियम, 2006 जैसा कि समय-समय पर संशोधित हो।

अध्याय-II बिहार शहरी आयोजना तथा विकास बोर्ड 3. बिहार शहरी आयोजना तथा विकास बोर्ड ।-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के पश्चात्‌ सरकार यथाशीघ्र राजपत्र में अधिसूचना द्वारा बिहार शहरी आयोजना तथा विकास बोर्ड, इसमें इसके पश्चात्‌ बोर्ड के रूप में निर्दिष्ट, को इस अधिनियम के अधीन समनुदेशित कृत्यों को करने के लिए निम्नलिखित रूप में गठित और नियुक्त करेगीः- (i) विकास आयुक्त - अध्यक्ष (ii) —षि उत्पादन आयुक्त/प्रधान सचिव/सचिव, कृषि विभाग - सदस्य (iii) प्रधान सचिव/सचिव, स्वास्थ्य विभाग - सदस्य (iv) प्रधान सचिव/सचिव, योजना एवं विकास विभाग - सदस्य (v) प्रधान सचिव/सचिव, पंचायती राज - सदस्य (vi) प्रधान सचिव/सचिव, उद्योग विभाग - सदस्य (vii) प्रधान सचिव/सचिव, वित्त विभाग - सदस्य (viii) प्रधान सचिव/सचिव, ग्रामीण विकास विभाग - सदस्य (ix) प्रधान सचिव/सचिव, शिक्षा विभाग - सदस्य (x) प्रधान सचिव/सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग - सदस्य (xi) प्रधान सचिव/सचिव, जल संसाधन विभाग - सदस्य (xii) प्रधान सचिव/सचिव, पर्यावरण और वन विभाग - सदस्य (xiii) प्रधान सचिव/सचिव, पथ निर्माण विभाग - सदस्य (xiv) प्रधान सचिव/सचिव, भवन निर्माण विभाग - सदस्य (xv) प्रधान सचिव/सचिव, परिवहन विभाग - सदस्य (xvi) प्रधान सचिव/सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग - सदस्य (xvii) प्रधान सचिव/सचिव, आपदा प्रबन्धन विभाग - सदस्य (xviii) सचिव, विधि विभाग - सदस्य (xix) प्रधान सचिव/सचिव, पर्यटन विभाग - सदस्य (xx) प्रधान सचिव/सचिव, युवा कला एवं संस्कृति विभाग - सदस्य (xxi) प्रधान सचिव/सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग - सदस्य (xxii) प्रधान सचिव/सचिव, खाद्य एवं आपूर्ति (नागरिक) विभाग - सदस्य (xxiii) प्रधान सचिव/सचिव, नगर विकास एवं आवास विभाग - सदस्य सचिव (xxiv) सरकार द्वारा मनोनीत नगर एवं क्षेत्रीय योजना के राष्ट्रीय प्रसिद्धि के दो विशेषज्ञ - सदस्य (xxv) महाधिवक्ता द्वारा मनोनीत वरीय विधि पदाधिकारी - सदस्य (xxvi) मुख्य नगर निवेशक, नगर विकास एवं आवास विभाग - सदस्य

(2) बोर्ड अपने कामकाज के लिए शहरी विकास मंत्रालय, आवास एवं गरीबी उन्मूलन मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, रेल मंत्रालय , नागरकि उड्डयन मंत्रालय, भूतल परिवहन उच्च पथ मंत्रालय, भारत सरकार के प्रतिनिधि को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में आमंत्रित कर सकेगा। (3) बोर्ड किसी व्यक्ति/व्यक्तियों को मनोनीत या सहयोजित करने में सक्षम होगा, जिसे/जिन्हें वह बोर्ड के कृत्यों के निर्वहन के लिए यथा आवश्यक्‌ समझ सकेगा।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 (4) इस प्रकार गठित बोर्ड शाश्वत उत्तराधिकार एवं सामान्य मुद्रा वाला निगमित निकाय होगा और उक्त नाम से वाद लायेगा और उस पर वाद लाया जायेगा। 4. बोर्ड के —त्य एवं शक्तियाँ ।-(1)इस अधिनियम के उपबंधों एवं इसके अन्तर्गत बनाई गई नियमावली के अध्यधीन बोर्ड के कृत्य आयोजना एवं विकास एवं राज्य में ग्रामीण एवं शहरी भूमि के उपयोग से संबंधित विषयों में सरकार को परामर्श देना, महानगरीय, नगर एवं क्षेत्र आयोजना प्राधिकारों का मार्गदर्शन करना, उन्हें निर्देश एवं सहायता देना और साथ ही साथ, सरकार द्वारा बोर्ड को समय-समय पर यथा नियत ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना होगा। (2) विशेषकर और पूर्वगामी उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना बोर्ड नियमावली द्वारा यथा विहित निम्नलिखित कार्यों का निर्वहन कर सकेगाः- (क) सुनियोजित विकास के अभिप्राय हेतु आयोजना क्षेत्रों के निरूपण पर सुझाव देना और आयोजना प्राधिकारों द्वारा विकास योजना तैयार करने का निदेश देना; (ख) महानगरीय, क्षेत्र आयोजना प्राधिकारों और अन्य आयोजना प्राधिकारों द्वारा विकास योजनाएँ तैयार करने का निदेश देना और उनके कार्य में आवश्यक मार्गदर्शन, सहायता एवं पर्यवेक्षण करना; (ग) क्षेत्रीय एवं शहरी योजना पर आँकड़ों, बुलेटिनों और विनिबंधों का संग्रहण, संधारण एवं प्रकाशन का उत्तरदायित्व लेना, उनमें सहायता और प्रोत्साहन करना; (घ) एक या एक से अधिक क्षेत्र विकास योजनाएं, क्षेत्र परिवहन योजनाएं, शहर विकास योजनाएं को तैयार करने का निदेश देना; (ङ) एक या एक से अधिक क्षेत्रीय प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण संरक्षण योजनाएँ तैयार करने का निदेश देना; (च) ऐसे किसी अन्य कृत्यों का निर्वहन करना, जो किसी पूर्वाेक्त या विहित किये जाने वाले कृत्यों के आनुषंगिक, अनुपूरक या पारिणामिक हो। (3) बोर्ड जो ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा जो इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजनार्थ से यथा आवश्यक या समीचीन हो; 5. बोर्ड द्वारा समिति की नियुक्ति ।-(1) अपनी ऐसी शक्तियों के प्रयोग करने में, अपने ऐसे कर्त्तव्यों के निष्पादन करने में, और अपने ऐसे कृत्यों के निर्वहन करने में सहायता लेने के प्रयोजन से बोर्ड एक से अधिक समितियों का गठन कर सकेगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन गठित किसी ऐसी समिति या समितियों में बोर्ड द्वारा यथा विनिर्दिष्ट सदस्य होंगे तथा बोर्ड उन सदस्यों में से किसी एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में नामनिर्दिष्ट कर सकेगा। (3) बोर्ड को योजना एवं विकास के विषयों में अनुभव रखनेवाले किसी भी ऐसे व्यक्ति, जो बोर्ड का सदस्य न हो, को उप-धारा (1) के अधीन गठित किसी समिति के सदस्य के रूप में सहयोजित करने की शक्ति होगी। 6. बोर्ड के सदस्यों की पदावधि एवं सेवा शर्तें ।-(1) बोर्ड के सदस्यों एवं कर्मचारियों की पदावधि एवं सेवा शर्तें नियमावली द्वारा यथा विहित होंगी, और वे सरकार द्वारा यथा निर्धारित ऐसे वेतन या भत्ते या दोनों प्राप्त करने के हकदार होंगे। (2) सरकार यदि उचित समझे तो बोर्ड के किसी सदस्य की नियुक्ति किसी भी समय उसके द्वारा किये अवचार के आधार पर समाप्त कर सकेगी। (3) धारा-3(1)-(xxiv),(xxv) के अनुसार नियुक्त बोर्ड का कोई सदस्य सरकार को लिखित सूचना देकर बोर्ड की सदस्यता से त्यागपत्र दे सकेगा एवं सरकार द्वारा त्यागपत्र स्वी—त किये जाने पर वह बोर्ड का सदस्य नहीं रह जायेगा। (4) इस प्रकार हुई रिक्ति सरकार द्वारा भरी जा सकेगी। 7. बोर्ड की बैठकें ।-(1) बोर्ड एक कैलेंडर वर्ष में यथा विहित समयों एवं स्थानों पर कम-से-कम दो बार बैठक आहूत करेगा और ऐसी बैठकों में कार्यों के संव्यवहार के संबंध में यथाविहित प्रक्रियाओं का पालन करेगा। (2) अध्यक्ष या अध्यक्ष की अनुपस्थिति में, सदस्यों द्वारा अपने में से चुने गए कोई सदस्य बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करेगा। 8. बोर्ड का सचिवालय ।-(1) बिहार सरकार के नगर विकास और आवास विभाग में अवस्थित नगर एवं क्षेत्रीय निवेशन संगठन (टी॰सी॰पी॰ओ॰) बोर्ड के सचिवालय के रूप में कार्य करेगा। (2) सरकार बोर्ड और इसके सचिवालय को अपेक्षित कार्यालय, कार्मिक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।

अध्याय-III आयोजना क्षेत्रों की घोषणा और आयोजना प्राधिकारों का गठन 9. आयोजना क्षेत्रों की घोषणा ।-(1)सरकार, राज्य के अन्तर्गत क्षेत्र या प्रक्षेत्र का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करने के प्रयोजनार्थ बोर्ड के परामर्श से अधिसूचना द्वारा और यथा विहित किसी अन्य रीति से, राज्य के किसी ऐसे अंचल या क्षेत्र या किसी ऐसे क्षेत्रा,ें महानगर क्षेत्र तथा नया शहर विकसित करने हेतु क्षेत्र सहित, को आयोजना क्षेत्र, इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ उसे जिस किसी नाम से जाना जाए, घोषित कर सकेगी। (2) प्रत्येक ऐसी अधिसूचना में ऐसे आयोजना क्षेत्र की परिसीमाएं परिभाषित की जाएगी। (3) सरकार आयोजना क्षेत्र के संदर्भ में, उसके आसपास के क्षेत्र, जो कि स्पष्ट या असंदिग्ध रूप से परिभाषित हो, को उपांत क्षेत्र के रूप में घोषित कर सकती है। बशत्र्त ऐसे क्षेत्र का विस्तार इसके सीमा के किसी भी बिंदु से एक किलोमीटर से ज्यादा नहीं होगा।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 8 (4) सरकार बोर्ड से परामर्श कर दो या अधिक आयोजना क्षेत्रों को एक आयोजना क्षेत्र में आमेलन, किसी आयोजना क्षेत्र को विभिन्न आयोजना क्षेत्रों में प्रविभाजन और ऐसे प्रभाजित क्षेत्रों को किसी अन्य आयोजना क्षेत्र में अन्तर्वेषण कर सकेगी। (5) सरकार अधिसूचना द्वारा यह निदेश देगी कि किसी अन्य आयोजना क्षेत्र में तत्समय प्रवृत इस अधिनियम के अध्यधीन बनाई गयी या कोई निर्गत की गयी नियमावली, विनियमावली, दिये गए आदेश और दिशा निर्देश और प्रदत्त शक्तियाँ, सरकार द्वारा यथा आवश्यक समझे जाने वाले ऐसे अपवादों, अनुकूलनों और संशोधनों सहित, इस धारा के अध्यधीन किसी आयोजना क्षेत्र में आमेलित या सम्मिलित क्षेत्र के रूप में घोषित क्षेत्र पर भी लागू होगी और ऐसी नियमावली, विनियमावली, उप-विधि, आदेश, निदेश और शक्तियाँ अगले प्रकाशन के बिना ऐसे आयोजना क्षेत्र में तत्काल लागू होंगी। (6) जब आयोजना क्षेत्रों का आमेलन या प्रविभाजन किया जाता है या ऐसे प्रविभाजित क्षेत्रों को अन्य आयोजना क्षेत्रों में सम्मिलित किया जाता है, तो सरकार बोर्ड से परामर्श कर एक विनिर्धारण स्कीम की रूपरेखा तैयार करेगी कि आयोजना प्राधिकार की अतिशेष निधि का कितना अंश सम्बद्ध आयोजना प्राधिकार या प्राधिकारों में अन्तर्निहित होगा और किस रीति से आयोजना प्राधिकार या प्राधिकारों की सम्पत्ति एवं दायित्व उनके बीच प्रभाजित किये जाएँगे और इस स्कीम की अधिसूचना होने पर निधि, सम्पत्ति और दायित्व तदनुसार अन्तर्निहित होंगे और प्रभाजित किए जाएँगे। (7) सरकार आयोजना क्षेत्र के साथ-साथ उपांत क्षेत्र के अधिसूचना की घोषणा की तारीख या उसके बाद ऐसे, क्षेत्र में शामिल जमीन के लेन देन या किसी प्रकार के उपयोग के लिए ऐसी प्रतिबंध या शर्तें ऐसी अवधि के लिए लगा सकेगी जैसी कि विकास योजना की तैयारी एवं लागू करने के लिए यथा विर्निधारित हो। 10. इस अधिनियम के प्रवर्तन से आयोजना क्षेत्र को अलग करने की शक्ति ।-(1)सरकार अधिसूचना द्वारा, उसके अधीन घोषित किसी आयोजना क्षेत्र को समग्रतः या अंशतः इस अधिनियम के सुसंगत उपबंधों के प्रवर्तन सेे, अलग कर सकेगी, (2) जब किसी आयोजना क्षेत्र की बाबत इस धारा के अधीन जब अधिसूचना निर्गत की जाती हो तब :- (क) इस अधिनियम के सुसंगत उपबंध और इसके अधीन निर्गत, बने या प्रदत्त सभी अधिसूचनाएँ, नियमावली और विनियमावली, आदेश, निदेश और शक्तियाँ उक्त क्षेत्र में लागू नहीं रह जाएंगी। (ख) सरकार, बोर्ड और संबंधित स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों से परामर्श कर, एक विनिर्धारण स्कीम की रूपरेखा तैयार करेगी कि क्षेत्र आयोजना प्राधिकार की अतिशेष निधि का कितना अंश सरकार, और संबंधित स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों में निहित होगा और क्षेत्र आयोजना विकास प्राधिकार की सम्पत्तियों एवं दायित्वों को सरकार और स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों के बीच किस तरह से प्रभाजित किया जायेगा और इस स्कीम की अधिसूचना होने पर क्षेत्र आयोजना प्राधिकार की निधि सम्पत्ति और दायित्व तदनुसार निहित एवं प्रभाजित किए जायेंगे। 11. आयोजना प्राधिकार का गठन ।-(1)धारा-9 के अधीन किसी भी समय आयोजना क्षेत्र की घोषणा के पश्चात्‌ सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन आयोजना क्षेत्र के अभिप्रायार्थ उस आयोजना क्षेत्र का आयोजना प्राधिकार कहे जाने वाले प्राधिकार का गठन कर सकेगी, और वह सरकार द्वारा यथा निर्धारित नाम से जानी जाएगी। (2) उप-धारा (1) के अधीन गठित प्रत्येक आयोजना प्राधिकार पूर्वाेक्त नाम से निगमित निकाय होगा, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और सामान्य मुद्रा होगा, और जिसे चल और अचल दोनों सम्पत्ति के अर्जन, धारण एवं निपटान करने, संविदा करने और उक्त नाम से वाद लाने या वाद में जाने की शक्ति होगी। (3) आयोजना प्राधिकार में एक अध्यक्ष एवं ऐसे सदस्य जो नियमावली द्वारा यथाविहित होंगे। (4) क्षेत्र आयोजना प्राधिकार, सरकार की स्वीकृति से, अपने क्षेत्राधिकार अन्तर्गत स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों को अपना कोई कृत्य प्रत्यायोजित कर सकेगा। (5) क्षेत्र आयोजना प्राधिकार का अपना कार्यालय जो सरकार द्वारा इस निमित यथा विनिर्धारित ऐसे स्थान पर होगा। (6) आयोजन प्राधिकार ऐसी समिति का गठन कर सकता है, जैसा वह अपने किसी भी सौंपी गई या निर्धारित कार्य के निष्पादन के लिए जरूरी समझे। 12. पदावधि ।-(1) पदेन सदस्यों से इतर, आयोजना प्राधिकार के सदस्यों की पदावधि और सेवा शर्त्तें यथा विनिर्दिष्ट होंगी और ये सदस्य सरकार के आदेश द्वारा यथा विनिर्धारित पारिश्रमिक या भत्ते या दोनों प्राप्त करने के हकदार होेंगे। (2) यदि सरकार की राय हो कि आयोजना प्राधिकार का कोई सदस्य अपने कर्त्तव्यों के निष्पादन में कदाचार का दोषी हो या अक्षम हो या सदस्य के रूप में अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ हो गया हो, या उसे किसी अन्य समुचित और पर्याप्त कारणों से हटाया जाना चाहिए, तो सरकार उसे सुनवाई किए जाने का एक अवसर प्रदान करने के पश्चात्‌ पद से हटा सकेगी। (3) पदेन सदस्य से इतर आयोजना प्राधिकार का कोई सदस्य सरकार को अपने हस्ताक्षर सहित त्याग पत्र संबोधित कर और उस पर सरकार की स्वी—ति के पश्चात अपने पद से त्याग पत्र दे सकेगा, ऐसे सदस्य का पद रिक्त हो जायेगा। (4) आयोजना प्राधिकार के किसी सदस्य का पद रिक्त होने की स्थिति में उस रिक्ति को यथास्थिति नामांकन या नियुक्ति से भरी जाएगी, तो इस प्रकार नामित या नियुक्त वह व्यक्ति उतने ही समय तक पद धारण करेगा, जितने9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 समय तक वह व्यक्ति, जिसके स्थान पर नामित या नियुक्त व्यक्ति रिक्ति नहीं होने की स्थिति में अपने पद पर बना रहता। 13. योजना प्राधिकार की बैठकें ।- आयोजना प्राधिकारयथा विनिर्धारित समय और स्थान पर, बैठक करेगा और नियमावली में यथाविहित रीति से अपने काम-काज का संचालन करेगा। 14. आयोजना प्राधिकार के कर्मी ।-(1)आयोजना प्राधिकार इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के दक्षतापूर्ण निर्वहन के लिए यथा आवश्यक पदाधिकारियों एवं अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति सरकार के पूर्व अनुमोदन से कर सकेगा तथा उनका पदनाम एवं कोटि अवधारित कर सकेगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन नियुक्त पदाधिकारी और कर्मचारी नियमावली द्वारा यथा विहित वेतन या भत्ते पाने के हकदार होंगे और यथा विहित सेवा शर्त्तों एवं निर्बंधनों द्वारा शासित होंगे। (3) आयोजना प्राधिकार का सदस्य सचिव और उस प्राधिकार के पदाधिकारी एवं कर्मचारी इसके अध्यक्ष के पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण के अधीन कार्य करेंगे। 15. आयोजना प्राधिकार के रूप में किसी स्थानीय प्राधिकार को अभिहित करने की शक्ति ।-(1) सरकार, किसी आयोजना क्षेत्र के लिए आयोजना प्राधिकार को गठित करने की बजाय, किसी आयोजना क्षेत्र में या उसके किसी अंग में कार्यरत किसी स्थानीय प्राधिकार को उस आयोजना क्षेत्र के लिए आयोजना प्राधिकार के रूप में अभिहित कर सकेगी। (2) उप-धारा (1) के अधीन आयोजना प्राधिकार के रूप में अभिहित स्थानीय प्राधिकार, इस अधिनियम के अधीन आयोजना प्राधिकार को यथा नियत कृत्यों के निर्वहन के लिए ऐसी समितियों का गठन यथा विहित रिति से कर सकती है जैसा यह जरूरी समझे। 16. आयोजना प्राधिकारों के —त्य और शक्तियाँ ।-(1)इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन आयोजना प्राधिकार नियमावली द्वारा यथाविहित —त्यों का निर्वहन और यथाविहित शक्तियों का प्रयोग करेगा। (2) उप-धारा (1) में उल्लिखित अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए आयोजना प्राधिकार अपने आयोजना क्षेत्र का सर्वेक्षण करेगा या करवा सकेगा, और ऐसे सर्वेक्षणों के प्रतिवेदन तैयार कर सकेगा तथा ऐसे अन्य —त्यों को कर सकेगा जो उन कृत्यों के किसी —त्यों का अनुपूरक आनुषंगिक, या पारिणामिक हो जो विहित किया जाए। (3)(क) आयोजना प्राधिकार सरकार की पूर्व स्वीकृति से अपने साथ ऐसे व्यक्तियों को सहबद्ध कर सकेगा, से संपर्क या परामर्श कर सकेगा जिसकी सहायता या परामर्श को यह इस अधिनियम के अधीन अपने किसी कृत्यों के निर्वहन के प्रयोजनार्थ आवश्यक समझे और ऐसे व्यक्तियों को सरकार द्वारा यथा स्वीकृत पारिश्रमिक या फीस का भुगतान आयोजना प्राधिकार द्वारा किया जा सकेगा। (ख) आयोजना प्राधिकार को इस प्रकार सहायता या परामर्श देने वाला व्यक्ति जिस प्रयोजन के लिए वह आयोजना प्राधिकार से सहबद्ध हो या उसका परामर्श लिया जा रहा हो उससे संबंधित सुसंगत प्राधिकार की बैठकों में भाग ले सकेगा, लेकिन प्राधिकार की बैठक में मतदान नहीं करेगा और किसी अन्य प्रयोजन से संबद्ध विषयों की बाबत प्राधिकार की बैठक में भाग लेने का उसे अधिकार नहीं होगा। (ग) आयोजना प्राधिकार अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए राजस्व विभाग के पदाधिकारियों से परामर्श कर सकता है। 17. आयोजना प्राधिकार के व्यय ।-(1)आयोजना प्राधिकार द्वारा अपने —त्यों के निर्वहन में उपगत व्यय का वह अंश सरकार लिखित आदेश द्वारा अवधारित करेगी जिसे उस आयोजना क्षेत्र में कार्यरत स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों द्वारा आदेश में विहित एकमुश्त या किस्तों में भुगतान विनिर्धारित अंशदान के रूप में किया जाएगा तथा व्यय के एक अंश का भुगतान सरकार द्वारा किया जाएगा। (2) स्थानीय प्राधिकार उपधारा (1) के अधीन आदेश की प्राप्ति से 30 दिनों की अनधिक अवधि में सम्बद्ध आयोजना प्राधिकार को आदेश में विनिर्दिष्ट अंशदान की रकम का भुगतान उसमें उपदर्शित रीति से करेगा और स्थानीय प्राधिकार यदि ऐसी रकम का इस प्रकार भुगतान करने में विफल रहता हो तो राज्य सरकार, आयोजना प्राधिकार से आवश्यक प्रज्ञापन प्राप्त होने पर, उसका भुगतान आयोजना प्राधिकार को करेगी और विहित रीति से उसकी वसूली स्थानीय प्राधिकार से करेगी।

अध्याय-IV भूमि उपयोग मानचित्र एवं भूमि उपयोग रजिस्टर की तैयारी 18. भूमि उपयोग मानचित्र तथा भूमि उपयोग रजिस्टर की तैयारी ।-(1)प्रत्येक आयोजना प्राधिकार अपने गठन के दो वर्षों के भीतर या सरकार द्वारा आदेश से अवधारित समय के भीतर यथाविहित रूप में राजस्व विभाग कार्यालय से परामर्श कर वर्त्तमान भूमि उपयोग मानचित्र तथा भूमि उपयोग रजिस्टर तैयार करेगा जिसमें योजना क्षेत्र के प्रत्येक भू-खण्ड के वर्त्तमान उपयोग को दर्शाया जाएगा; परन्तु, यह अवधि सरकार द्वारा प्रत्येक छः माह के लिए दो बार लिखित रूप से कारणों का उल्लेख करते हुए विस्तारित किया जा सकेगा; परन्तु, इस प्रकार तैयार किए गए भूमि उपयोग मानचित्र तथा भूमि उपयोग रजिस्टर में प्रविष्टियों के कारण किसी को कोई हक या अधिकार प्रोद्‌भूत नहीं होगा। (2) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा राज्य में किसी भूमि के संदर्भ में अवधारित किया जाने वाला वर्त्तमान भूमि उपयोग की तिथि विनिर्दिष्ट करेगी और राज्य के विभिन्न इलाकों के लिए विभिन्न तिथियाँ नियत की जा सकेंगी।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 10 परन्तु, उस क्षेत्र में यह अधिनियम लागू होने के पूर्व यदि आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार द्वारा उस क्षेत्र का कोई मानचित्र या रजिस्टर तैयार किया गया हो तो पहले से तैयार किए गए उस मानचित्र या रजिस्टर को यथावश्यक परीक्षण के बाद आयोजना प्राधिकार द्वारा इस धारा के अधीन तैयार किया गया भूमि उपयोग मानचित्र और रजिस्टर माना जाएगा। 19. भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर का प्रकाशन ।-(1) भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर की तैयारी के पश्चात्‌ आयोजना प्राधिकार नोटिस प्रकाशित करेगा जिसमें उस स्थान या स्थानों को विनिर्दिष्ट किया जाएगा जहाँ इनकी प्रतियों का निरीक्षण किया जा सकेगा और किसी व्यक्ति से भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर से संबंधित लिखित आपत्तियाँ, इस सूचना के प्रकाशन की तिथि से तीस दिनों के भीतर, आमंत्रित की जाएगी। (2) उप-धारा (1) में उल्लेखित अवधि के समाप्त होने के पश्चात्‌, आयोजना प्राधिकार का कोई पदाधिकारी या इस प्रयोजनार्थ आयोजना प्राधिकार द्वारा नियुक्त कोई समिति, उन सभी व्यक्तियों, जिन्हाेंने आपत्तियाँ दाखिल की हों, को सुने जाने का समुचित अवसर दिये जाने के पश्चात्‌ तथा यथावश्यक जाँच करने के बाद, आयोजना प्राधिकार को प्रतिवेदन देगा। (3) आयोजना प्राधिकार उप-धारा (2) में यथा समर्पित प्रतिवेदन पर विचार करेगा तथा भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर या दोनों, जैसा उचित समझे, वैसा परिवर्तन करेगा और संकल्प द्वारा मानचित्र एवं रजिस्टर को अंगीकृत करेगा। (4) भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर को अंगीकृत करने के पश्चात्‌, आयोजना प्राधिकार भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर को अंगीकार किए जाने तथा किस स्थान या किन स्थानों पर इनकी प्रतियों का निरीक्षण किया जा सकेगा इसकी सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करेगा और बोर्ड एवं सरकार के पास भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर की प्रतियाँ जमा करेगा। (5) ऐसी सार्वजनिक सूचना की एक प्रति राजपत्र में भी प्रकाशित की जाएगी। राजपत्र में भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर से संबंधित सार्वजनिक सूचना की प्रति का प्रकाशन इस बात का निश्चायक प्रमाण होगा कि भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर को सम्यक्‌ रूप से तैयार तथा अंगीकार कर लिया गया है। 20. भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर तैयार करने में सरकार की शक्ति ।-(1) जब इस अध्याय के पूर्ववर्ती उपबंधों के अनुसार भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर तैयार किया जाना है, तब, (क) यदि विहित अवधि या सरकार द्वारा बढ़ाई गई अवधि के भीतर भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर तैयार नहीं किया गया हो, या (ख) यदि किसी समय सरकार का समाधान हो जाए कि इस अवधि के भीतर ऐसा भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर को तैयार करने के लिए आयोजना प्राधिकार आवश्यक कदम नहीं उठा रहा है, तो सरकार भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर तैयार करने के लिए बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के नगर एवं क्षेत्रीय निवेशन संगठन (टी॰सी॰पी॰ओ॰) को निदेश दे सकेगी । (2) भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर तैयार हो जाने के पश्चात्‌ नगर एवं क्षेत्रीय निवेशन संगठन उसे बोर्ड को प्रस्तुत करेगा और अधिनियम की धारा-19 के अध्यधीन आयोजना प्राधिकार की शक्ति का प्रयोग तथा प्रक्रिया का अनुसरण करेगा। (3) किसी आयोजना प्राधिकार के आयोजना क्षेत्र की बाबत भूमि उपयोग मानचित्र और भूमि उपयोग रजिस्टर तैयार करने के संबंध में इस धारा के अधीन उपगत कोई व्यय का भुगतान संबंधित आयोजना प्राधिकार या सरकार द्वारा किया जाएगा।

अध्याय-V विकास योजनाओं की तैयारी, विषयवस्तु और अनुमोदन 21. विकास योजना की तैयारी ।- (1) आयोजना क्षेत्र की घोषणा के बाद जितना जल्द हो सके, आयोजना प्राधिकार, लेकिन ऐसी घोषणा केे दो साल से अधिक नही या ऐसी अवधि के अंदर जैसा सरकार समय-समय पर निर्धारित करे, बोर्ड के माध्यम से एक योजना (जिसे आगे विकास योजना कहा जाएगा) आयोजना क्षेत्र या उसके किसी भी हिस्से के लिए तैयार कर बीस साल की अवधि के लिए अथवा सरकार द्वारा यथा विर्निदिष्ट विस्तारित अवधि के लिए सरकार को प्रस्तुत करेगा; परन्तु, महानगरीय क्षेत्र की विकास योजना, महानगर योजना समिति के द्वारा बोर्ड के परामर्श से सरकार को प्रस्तुत की जाएगी जो अपना मंतव्य एवं सुझाव योजना के साथ उपाबद्ध कर सकेगी। परन्तु अपना मंतव्य एवं सुझाव के साथ उपाबद्ध करते वक्त महानगर योजना समिति ध्यान रखेगी : (क) महानगर क्षेत्र में नगरपालिकाओं और पंचायतों द्वारा तैयार की गई योजनाएं; (ख) नगरपालिकाओं और पंचायतों के सामान्य हित के विषय जिसके अन्तर्गत उस क्षेत्र की समन्वित स्थानिक योजना, जल तथा अन्य भौतिक और प्राकृतिक संसाधनों में हिस्सा बांटना, अवसंरचना का एकीकृत विकास और पर्यावरण संरक्षण शामिल है; (ग) भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा निश्चित समस्त उद्‌देश्यों और प्राथमिकताएं; (घ) उन विनिधानों की मात्रा और प्रकृति जो भारत सरकार और राज्य सरकार के अभिकरणों द्वारा महानगर क्षेत्र में किए जाने के लिए सम्भाव्य है तथा अन्य उपलब्ध वित्तीय या अन्य संसाधन।11 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 (2) विकास योजना करेगा :

(क) वैसे तरीके का संकेत देगा, जिसके द्वारा आयोजना प्राधिकार उन क्षेत्रों में जमीन के इस्तेमाल का तरीका या परिभाषा या सभी मामलों के लिए यथा प्रदान किये जा सकने या संकेत दिये जा सकने के संबंध में प्रस्तावित करता है;

(ख) उपयोग के लिए भूमि के क्षेत्रों या जोनों का आवंटन :

(i) आवासीय, व्यवसायिक, औद्योगिक एवं कृषि के उद्‌देश्य के लिए (ii) सार्वजनिक और अर्द्ध सार्वजनिक खुली जगह, पार्क और खेल के मैदानों के लिए; और (iii) ऐसे दूसरे उद्‌देश्यों के लिए जिसे आयोजना प्राधिकार सही समझे;

(ग) संकेत, परिभाषित और निम्नलिखित को प्रदान करने के लिए :

(i) मौजूदा एवं प्रस्तावित, राष्ट्रीय उच्च पथों, मुख्य सड़कों रिंग सड़कें और मुख्य रास्तों ; (ii) मौजूदा और प्रस्तावित दूसरे संचार साधनों, रेलवे, हवाई अड्‌डों और नहरों सहित ; (iii) कृषि, सार्वजनिक और अर्द्ध सार्वजनिक, खुली जगहों, पार्कों, खेल के मैदानों, बगीचों और अन्य मनोरंजन के उपयोगों ; ग्रीन बेल्ट और प्राकृतिक संसाधन के लिए आरक्षित क्षेत्र ;

(iv) आवासीय, औद्योगिक, कृषि, धरोहर एवं दूसरे उद्‌देश्यों के क्षेत्रों या जोनों का व्यापक भूमि आवंटन ;

(v) वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए पूर्ण सड़क, सड़क पैटर्न और यातायात परिसंचरण पैटर्न

(vi) प्रमुख सड़क और मार्ग का सुधार (vii) सार्वजनिक भवनों और संस्थानों तथा नए नागरिक विकास के लिए आरक्षित क्षेत्रों ; (viii) भविष्य के विकास और विस्तार के लिए क्षेत्रों और नए आवास के लिए क्षेत्रों ; (ix) सुविधाओं, सेवाओं और उपयोगिताओं, और (x) ऐसे सभी मामलों जैसा कि नियमों द्वारा प्रस्तावित या सरकार द्वारा निर्देशित या बोर्ड को संकेतित, परिभाषित और प्रदान हेतु ;

(घ) प्रत्येक क्षेत्र के भीतर मण्डलीय विनियमावली सहित मण्डल योजना में शामिल करने के लिए, स्थान, जनसंख्या का घनत्व, एफ.ए.आर., उॅचाई, मंजिलों की संख्या, भवनों की संख्या एवं आकार तथा अन्य संरचनाओं, आंगन तथा अन्य खुले स्थान तथा भवनों, संरचनाओं तथा भूमि का उपयोग और अन्य किसी मामलों जैसा आवश्यक हो;

(ङ) प्रत्येक चरण के वित्तीय निहितार्थ के साथ, जो योजना प्रस्ताव पारित किया जाना है उसके प्रत्येक चरण को वित्तीय निहितार्थ के साथ दर्शाया जाएगा ।

(3) विकास योजना में :- (क) उपदर्शित, परिभाषित एवं उपबंध किया जा सकेगा :-

(i) नियोजन मानकों, सकल और शुद्ध घनत्व और मार्गदर्शक सिद्धांत सहित सभी मामलों जैसा आयोजना प्राधिकार विकास योजना में दर्शाने, परिभाषित और प्रदान करने के लिए समीचीन समझे;

(ii) मौजूदा और प्रस्तावित सार्वजनिक और अर्द्ध सार्वजनिक इमारतों ; (iii) आवासीय, खरीदारी केन्द्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और सांस्कृतिक संस्थाओं के लिए विशिष्ट क्षेत्रों का विस्तृत विकास

(iv) आवासीय, खरीदारी केन्द्रों, औद्योगिक क्षेत्रों, नगारिक क्षेत्रों, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थानों तथा अन्य संबंधित उद्‌देश्यों के लिए विशिष्ट क्षेत्रों का विस्तृत पुनर्विकास या नवीकरण

(v) वास्तुशिल्पीय विशेषताओं, उॅचाई और इमारतों और संरचनाओं के मुख्य भाग पर नियंत्रण, और

(vi) उप-धारा (2) (ई) में निर्दिष्ट विभिन्न चरणों के ढांचे के अंदर पॉच साल को विकास कार्यक्रम।

(ख) नामित भूमि को किसी लोक प्रयोजन के लिए तथा खास तौर पर, किन्तु इस उपबंध की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए अधिग्रहण के अध्यधीन के रूप में अभिहित करेगा :- (i) भारत संघ, राज्य तथा स्थानीय प्राधिकार या विधि द्वारा स्थापित कोई अन्य प्राधिकार और लोकोपयोगी प्रतिष्ठान; (ii) किसी भी मामलें में जैसा उप-धारा (2) में निर्दिष्ट हो ; (iii) खराब अभिन्यास या अप्रचलित विकास वाले क्षेत्रों तथा मलिन बस्तियों वाले क्षेत्रों का विकास तथा आबादी के पुनस्र्थापन का उपबंध;

(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012

12 (iv) खुले स्थानों, पार्कों, खेल के मैदानों तथा हरित पयिों/हरित स्थानों का उपबंध; (v) विकास योजना में विनिर्दिष्ट रीति से भूमि का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए; (4) महानगरीय क्षेत्र के मामले में, उपर परिभाषित सभी मामलों के अलावा, विकास योजना निम्नलिखित सभी मामलों या किसी भी मामलों के लिए उपदर्शित परिभाषित, या उपबधित करेगी - (क) महानगरीय सड़क और रेल प्रणाली, जिसमें सड़क, रेल, वायु और पानी के लिए टर्मीनेंल और तीव्र परागमन प्रणाली भी शामिल है ; (ख) पानी की आपूर्ति, जल निकासी और सीवरेज और अपशिष्ट निपटान के लिए महानगरीय प्रणाली (ग) बिजली उत्पादन और वितरण के महानगरीय प्रणाली ; (घ) पार्क, खेल के मैदानों और अन्य मनोरंजन सुविधाओं के महानगरीय प्रणाली, (ङ) गैस के उत्पादन और आपूर्ति के महानगरीय प्रणाली, (च) ऐसी अन्य सुविधाएं जैसा महानगरीय क्षेत्र द्वारा आवश्यक समझा जाए ; और (छ) कोई अन्य विषय जैसा निर्धारित किया जा सके । (5) विकास योजना के रूप और अंतर्वस्तु को विनियमित करने के लिए इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन; ऐसी कोई भी योजना में ऐसे नक्शे या वर्णनात्मक मामले शामिल होगें जो विकास योजना में दिये गये प्रस्ताव को समझाने या वर्णन करने के लिए आवश्यक हों। 22. विकास योजना की विषयवस्तु ।- (1)बीस वर्षों के लिए अथवा सरकार द्वारा यथाविनिर्दिष्ट विस्तारित अवधि के लिए विकास योजना तैयार करते समय आयोजना प्राधिकार भूमि उपयोग, जोनिंग विनियमावली, विकास नियंत्रण विनियमावली, प्राकृतिक आपदा प्रवणता सहित वैसी सूचनाओं एवं विस्तृति जैसा नियमावली में विहित होगा, पर विचार करेगा एवं उसे सम्मिलित कर सकेगा। अपने योजना क्षेत्र का विकास आयोजना तैयार करते समय प्रत्येक आयोजना प्राधिकार निम्नलिखित बिन्दुओं पर विचार और उन्हें सम्मिलित करेगा- (क) आयोजना क्षेत्र का स्थलाकृतिक मानचित्र तैयार करना और कृषि (आदर््र एवं शुष्क) तथा सहबद्ध क्षेत्रों यथा पशुपालन, दुग्धशाला, कुक्कुट पालन, उद्यान, पुष्प बागवानी, वानिकी (सामाजिक वानिकी), शहरी खेती के लिए उपयुक्त जमीनों को और विकास के विभिन्न आयामों के लिए उपयुक्त बंजर भूमि को भी कर्णांकित करना; (ख) ग्राम, प्रखंड, शहर और जिला के स्तर पर सुविधाओं को चिन्हित कर नक्शे पर दर्शाना; (ग) विकास योजना के साकल्यवादी ढ़ाँचा के अन्तर्गत मंडलों और उपमंडलों का अभिज्ञान एवं सीमांकन; (घ) विकेन्द्रिकृत योजना के लिए प्रखंड, शहर और जिला स्तर पर डाटा बेस तैयार करने के लिए प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों पर सूचना और जनसांख्यिकीय रूपरेखा एकत्रित करना, सम्पादित करना और अद्यतन करना; (ङ) विकास के समग्र लक्ष्यों पर विचार करते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पंचवर्षीय या वार्षिक प्रारूप विकास योजनाओं के लिए बनाए गए उद्‌देश्यों तथा रणनीतियों को उपांतरित, संशोधित और समेकित करना; (च) पूरे आयोजना क्षेत्र के लिए योजना तैयार करना और संबंधित क्षेत्र के जिला परिषद, विभिन्न ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों, नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगमों द्वारा तैयार किए गए स्कीमों और योजनाओं को समेकित करना; (2) प्रत्येक विकास योजना में विशिष्टतया एवं उपरलिखित सामान्य प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित सभी या कुछ विषय होंगे- (क) आधारभूत संरचना विकास के लिए स्थिति प्रतिवेदन और प्रस्ताव; (ख) जनोपयोगी सेवाओं के लिए स्थिति प्रतिवेदन और प्रस्ताव; (ग) सिंचाई के लिए जल पर स्थिति प्रतिवेदन और प्रस्ताव; (घ) सार्वजनिक सुख-सुविधाओं और सुसाध्यता के सृजन, उन्नयन और विकास के लिए स्थिति प्रतिवेदन और प्रस्ताव; (ङ) नये शहरों, सेटेलाइट नगरी और समेकित आवासीय परियोजनाओं, इ॰डब्लू॰एस॰ और निम्न आय वाले वर्गों के लिए आवास का प्रस्ताव, स्थावर भू-सम्पदा और भवन परियोजना का प्रस्ताव के लिए नीति, कार्यक्रम एवं स्कीम; (च) स्कीमों, नीतियों और कार्यक्रमों का सूत्रणः- (i) शैक्षिक एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का सृजन/उन्नयन; (ii) अनौपचारिक प्रक्षेत्र का विकास; (iii) पर्यटक केन्द्र, मनोरंजन उद्यान, मनोविनोद सुविधाएँ, उद्यान एवं क्रीड़ा स्थल; (iv) तीर्थयात्रियों के लिए अपेक्षित सुविधा वाले धार्मिक क्षेत्रों का विकास; (v) औद्योगिक पार्काें, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों मॉलों और मल्टीप्लेक्सों के अवस्थान; (vi) रोजगार सृजन के लिए विद्यमान लघु/वृहत औद्यौगिक उद्यानों, आई॰टी॰ पार्क, संभारतंत्र हबों का सृजन और या उन्नयन; (vii) व्यवसाय, वाणिज्य और उद्योग का संवर्द्धन; (viii) कृषि, दुग्धशाला, मात्स्यिकी, और उद्यान कृषि के लिए विकास केन्द्र और बाजार;

13 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012

(ix) किसी विशेष क्षेत्रों का विकास जैसे जनजातिय क्षेत्रों, या आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों ; (x) संवेदनशील क्षेत्रों, जो आपदा प्रवण हैं, का मानचित्रण करना और आपदापूर्व, आपदा प्रशमन और आपदा पश्चात्‌ की आवश्यकताओं के लिए एक ऐसी योजना तैयार करना, जो सामान्य जन जीवन को तेजी से पटरी पर लाने में सहायक हों; (xi) भूमि का अधिक से अधिक उपयोग और कृषि परिरक्षण; (xii) मानव संसाधनों का विकास; (xiii) उत्पादक क्षेत्रों में विकास; (छ) राष्ट्रीय एवं राज्य उद्‌देश्यों के ढ़ाँचा के अन्तर्गत स्थानीय आवश्यकताओं और उद्‌देश्यों को चिन्हित करना; (ज) राज्य सरकार द्वारा यथा नियत या नियमावली द्वारा यथाविहित ऐसे अन्य मामले या विषयवस्तु । 23. इस अधिनियम के लागू होने से पूर्व तैयार की गयी विकास योजना इस अधिनियम के अधीन विकास योजना मानी जाएगी ।-यदि किसी आयोजना क्षेत्र के लिए कोई स्थानीय प्राधिकार अथवा नगर एवं क्षेत्रिय निवेशन संगठन इस अधिनियम के लागू होने के पूर्व आयोजना क्षेत्र के लिए विकास योजना तैयार कर लिया हो तो पहले से ही तैयार विकास योजना को उस क्षेत्र के लिए गठित आयोजना प्राधिकार विकास योजना को संशोधन एवं बिना संशोधन के अंगीकार कर सकेगी और इस विकास योजना को इस अधिनियम के अन्र्तगत तैयार की गयी विकास योजना मानी जाएगी। 24. विकास योजना तैयार करने की सरकार की शक्ति ।-(1) जहाँ इस अधिनियम के पूर्वगामी उपबंधों के आधार पर विकास योजना तैयार की जानेवाली हो, वहाँ - (क) यदि विहित अवधि के भीतर अथवा सरकार द्वारा बढ़ाई गई अवधि के भीतर आयोजना प्राधिकार द्वारा कोई विकास योजना तैयार नहीं की गई हो; अथवा (ख) यदि किसी कारण से किसी समय सरकार को ऐसा करना अत्यावश्यक हो तो वह नगर एवं क्षेत्रीय निवेशन संगठन को विकास योजना तैयार करने का निदेश दे सकेगी। नगर एवं क्षेत्रीय निवेशन संगठन इस प्रयोजनार्थ इस अधिनियम के अधीन आयोजना प्राधिकार की प्रक्रिया का अनुसरण और शक्तियों का प्रयोग करेगा; (2) आयोजना प्राधिकार के आयोजना क्षेत्र के लिए विकास योजना की तैयारी के संबंध में इस धारा के अधीन उपगत कोई व्यय आयोजना प्राधिकार द्वारा भुगतान किया जाएगा। 25. बोर्ड द्वारा विकास योजना का संशोधन ।-बोर्ड को विकास योजना प्रस्तुत करने के पश्चात्‌ यथाशीघ्र किन्तु नियमावली द्वारा विहित समय के पश्चात्‌ बोर्ड सरकार के अनुमोदन से विकास योजना में ऐसा उपांतरण करने का निदेश आयोजना प्राधिकार को दे सकेगा जो बोर्ड उचित समझे और तदुपरांत आयोजना प्राधिकार ऐसे उपांतरण करेगा। 26. विकास योजना तैयार किए जाने की लोक सूचना ।-(1)बोर्ड द्वारा निदेशित उपांतरण, यदि कोई हो, किए जाने के पश्चात्‌ आयोजना प्राधिकार विकास योजना की तैयारी तथा उन स्थान अथवा स्थानों जहाँ इसकी प्रतिलिपि का निरीक्षण किया जा सकेगा के बारे में राजपत्र और एक अथवा एक से अधिक स्थानीय समाचार पत्रों में लोक सूचना प्रकाशित कर दो महीने के भीतर विकास योजना की बाबत किसी व्यक्ति से लिखित में आपत्तियाँ आमंत्रित करेगा। (2) उपर्युक्त उप-धारा (1) में उल्लिखित अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌ आयोजना प्राधिकार उक्त उप-धारा-(1) के अधीन दर्ज आपत्तियों पर विचार करने के लिए एक समिति गठित करेगी तथा आयोजना प्राधिकार द्वारा यथा नियत समय के भीतर उनपर रिपोर्ट करेगी। (3) इस प्रकार नियुक्त की गयी समिति को किसी व्यक्ति को सहयोजित करने की शक्ति होगी और इस प्रकार सहयोजित व्यक्ति को उस प्रयोजन के सुसंगत समिति की चर्चा में भाग लेने का अधिकार होगा, किन्तु उसे बैठक में मत देने का अधिकार नहीं होगा तथा किसी अन्य प्रयोजन के लिए वह सदस्य नहीं होगा। (4) इस प्रकार नियुक्त की गयी समिति सरकारी विभागों या स्थानीय प्राधिकारों के प्रतिनिधियों सहित किसी ऐसे व्यक्ति को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करेगा जिन्होंने कोई आपत्ति दर्ज की हो, और सुने जाने का अनुरोध किया हो । (5) समिति से रिपोर्ट प्राप्त हो जाने के पश्चात्‌, किन्तु नियमावली द्वारा विहित समय के अपश्चात्‌ आयोजना प्राधिकार समिति की रिपोर्ट पर विचार करेगा और विकास योजना में ऐसा उपांतरण कर सकेगा जैसा वह उचित समझे और सरकार को समिति की रिपोर्ट उपांतरण सहित अथवा बिना उपांतरण के विकास योजना समर्पित करेगा। 27. सरकार द्वारा अनुमोदन ।-समिति की रिपोर्ट के साथ विकास योजना प्राप्त होने के बाद, किन्तु नियमावली में विहित समय के अपश्चात्‌ सरकार बोर्ड से परामर्श करने के बाद या तो विकास योजना का अनुमोदन कर सकेगी अथवा ऐसे उपांतरणों के साथ अनुमोदन कर सकेगी जिसे वह आवश्यक समझे अथवा इस निमित्त सरकार द्वारा निर्गत निदेशों के अनुसार योजना को उपांतरित करने अथवा नयी योजना तैयार करने के लिए आयोजना प्राधिकार को विकास योजना लौटा सकेगी।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 14 28. विकास योजना का प्रकाशन ।- (क) सरकार द्वारा विकास योजना का अनुमोदन किये जाने के तत्काल बाद आयोजना प्राधिकार विकास योजना के अनुमोदन के बारे में राजपत्र में और स्थानीय समाचार पत्रों में तथा उस स्थान अथवा उन स्थानों में, जहाँ विकास योजना का निरीक्षण किया जा सके, लोक सूचना प्रकाशित करेगा। (ख) उपर्युक्त नोटिस का राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से विकास योजना प्रवर्तन में आ जाएगा। 29. अतिरिक्त क्षेत्रों हेतु विकास योजना ।-विकास योजना तैयार करने के अपने आशय की घोषणा कर दिए जाने के बाद किसी समय या आयोजना प्राधिकार द्वारा तैयार की गई विकास योजना के अनुमोदन हो जाने के बाद यदि अतिरिक्त क्षेत्र को शामिल कर आयोजना प्राधिकार का क्षेत्राधिकार विस्तारित किया जाता हो तो आयोजना विकास योजना की रूपरेखा के साथ या अपने क्षेत्राधिकार के अधीन पूर्व के क्षेत्र की विकास योजना की रूपरेखा के साथ तैयार कर प्रकाशित कर सकेगा तथा विकास योजना प्रस्तुत किए जाने के लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया का पालन करते हुए उसे सरकार के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत कर सकेगा। परन्तु, जहाँ अतिरिक्त क्षेत्र के लिए विकास योजना के कारण मूल क्षेत्र की विकास योजना में उपान्तरण की अपेक्षा हो, वहाँ आयोजना प्राधिकार जहाँ तक सुसंगत हो विनिर्धारित उपबंधों का पालन करते हुए विकास योजना का पुनरीक्षण करेगा;

अध्याय-VI भूमि के विकास और उपयोग पर नियंत्रण 30. विकास योजना के अनुरूप भूमि का उपयोग एवं विकास ।-(1) किसी भी क्षेत्र में किसी भी विकास योजना के संचालन में आने के बाद, उस क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति को विकास योजना से अन्यथा अन्य रूप से किसी भी भूमि का प्रयोग या इस्तेमाल के लिए या कोई भी विकास करने के लिए अनुमति नहीं होगी। परन्तु विकास योजना के संचालन में आने के तारीख तक यदि कोई भी भूमि किसी उद्‌देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो आयोजना प्राधिकार उन शर्तों पर जो इस संबंध में नियमों द्वारा प्रस्तावित हो, भूमि का इस्तेमाल वैसे उद्‌देश्यों के लिए उस अवधि तक करने की अनुमति देगा जो 10 वर्षो से अधिक न हो, 31. विकास शुल्क के भुगतान के बिना और बिना अनुमति के विकास करने पर निषेध ।-(1) किसी भी विकास क्षेत्र में इस अधिनियम के उपयोग में आने के पश्चात्‌ तथा विकास शुल्क से संबंधित और इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अधीन ; उस क्षेत्र में कोई भी विकास या किसी भी भूमि के उपयोग में परिवर्तन नहीं किया जाएगा :- (क) आयोजना प्राधिकार से एक प्रमाण पत्र लिये बिना जो यह प्रमाणित करे की विकास शुल्क के रूप में प्रभार लगाया जा सकता है, और (ख) लिखित रूप में अनुमति लिए बिना जैसा की उप-धारा (2) में प्रावधान है। परन्तु ऐसे किसी अनुमति की आवश्यकता निम्नलिखित के लिए नही होगी- (i) किसी भवन के अनुरक्षण, सुधार अथवा अन्य परिवर्त्तन, जिसमें केवल भवन का आन्तरिक भाग प्रभावित होता हो अथवा जिसमें उसके वाह्य रूप तात्विक रूप से प्रभावित न होते हों, के लिए किए जाने वाले किसी कार्य को करने हेतु; (ii) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन किसी प्राधिकार द्वारा दिए गए आदेश अथवा निदेश के अनुपालन में कोई कार्य करने हेतु; (iii) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करने में किसी प्राधिकार द्वारा कोई कार्य करने के लिए; (iv) केंद्र या राज्य सरकार या किसी भी स्थानीय प्राधिकार के द्वारा किये जाने वाले कोई भी कार्य जो उच्च पथ, सड़क या सार्वजनिक मार्ग के रखरखाव या सुधार के लिए जरूरी है वैसे कार्य होगें जो उच्च पथ, सड़क या सार्वजनिक माग की परिधि के अंदर स्थित जमीन पर किये गये हों। (v) केंद्र या राज्य सरकार या कोई भी स्थानीय निकाय द्वारा नालियों, नालों, मुख्य पाईप, केवल, टेलीफोन या अन्य उपकरणों का निरीक्षण, मरम्मत या नवीकरण या उस उद्‌देश्य के लिए किसी भी सड़क या भूमि को तोड़ने के लिए किये जाने वाला कोई भी कार्य। (vi) किसी खुदाई जिसमें सामान्य कृषि संकार्य के दौरान कुआँ की खुदाई भी सम्मिलित है, के लिए ; (vii) सड़क निर्माण के लिए जो केवल कृषि प्रयोजनों के लिए भूमि तक पहुँच पथ बनाने के लिए आशयित हों; (viii) ऐसी भूमि जो सामान्यतः एक प्रयोजन के लिए प्रयुक्त होती हो, को अस्थायी रूप से अन्य प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किया गया हो ; (ix) ऐसी भूमि जो सामान्यतः एक प्रयोजन के लिए प्रयुक्त होती हो और कभी-कभी किसी अन्य प्रयोजन के लिए प्रयुक्त हो तो इस दशा में कभी-कभी उस अन्य प्रयोजन के लिए भूमि के उपयोग हेतु; (x) मनुष्य के निवास करने के लिए भवन अथवा ऐसे भवन से संलग्न कोई अन्य भवन अथवा भूमि के उपयोग के आनुषंगिक किसी प्रयोजन के लिए उपयोग;

15 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012

(2) आवेदन की प्राप्ति पर आयोजना प्राधिकार तीन महीने के भीतर अनुमति प्रदान कर सकेगा, अस्वीकार कर सकेगा या ऐसी शर्तों या उपान्तरणों के साथ अनुमति दे सकेगा, जैसा उचित समझे; 32. उपान्त क्षेत्र में विकास की अनुमति ।-आयोजना क्षेत्र का उपान्त क्षेत्र घोषित क्षेत्र में किसी भूमि पर और भवन में कोई विकास कार्य करने को आशय रखने वाला व्यक्ति अनुमति के लिए आयोजना प्राधिकार को यथाविहित फारम में और यथाविहित विशिष्टियाँ अंतर्विष्ट करते हुए और यथाविहित दस्तावेज और फीस के साथ लिखित आवेदन करेगा; परन्तु ऐसी अनुमति इस तथ्य को ध्यान में रखकर दी जाएगी कि नियमावली द्वारा यथाविहित रीति से प्र्रस्तावित विकास आयोजना क्षेत्र के भूमि के उपयोग की प्र—ति से एकी—त किया जा सकता हो। 33. विकास की अनुमति ।-(1)विकास योजना की अधिसूचना के बाद हरेक भूमि उपयोग, उपयोग का संस्थापन, भूमि उपयोग में परिवर्तन, हरेक भवन संकार्य और आयोजना क्षेत्र में हरेक विकास विकास योजना के अनुरूप होगा। (2) विकास योजना के अनुरूप किसी भूमि पर कोई विकास करने का आशय रखने वाला कोई व्यक्ति या निकाय (केन्द्र या राज्य सरकार का विभाग या स्थानीय प्राधिकार को छोड़कर) नियमावली द्वारा यथा विहित फारम में यथाविहित दस्तावेज और योजनाओं के साथ अनुमति के लिए आयोजना प्राधिकार को लिखित आवेदन देगा। (3) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाई गई नियमावली या विनियमावली के अधीन उद्‌ग्रहणीय विकास प्रभार तथा अन्य फीस के भुगतान के साथ सम्यक रूप से किए गए ऐसे आवेदन पर :- (क) आयोजना प्राधिकार निम्नलिखित आदेश, विहित समय के अंदर, पारित करेगा :- (i) बिना शर्त अनुमति प्रदान करना; या (ii) यथोचित शर्त के साथ अनुमति प्रदान करना; या (iii) अनुमति देने से इन्कार करना (ख) पूर्वर्वाी खण्ड की व्यापकता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आयोजना प्राधिकार निम्नलिखित र्शों लगा सकेगा :- (i) यह कि प्रदत्त अनुमति मात्र सीमित अवधि के लिए प्रभावी होगा, और यह कि इस अवधि की समाप्ति के बाद भूमि को पूर्व की स्थिति में ला दिया जाएगा या अनुमत भूमि का उपयोग रोक दिया जाएगा। (ii) आवेदक के नियंत्रणाधीन किसी अन्य भूमि का विकास या उपयोग या ऐसी किसी भूमि पर कार्य करने के लिए अनुमत विकास के प्रयोजनार्थ आयोजना प्राधिकार को यथासमीचीन प्रतीत होनेवाले विनियमन हेतु, (4) अनुमति देने या अनुमति अस्वीकार करने या र्शा या र्शाों के साथ अनुमति देने का हरेक आदेश अभिलिखित होगा और विहित रीति से आवेदक को संसूचित किया जाएगा। (5) विकास की अनुमति के आदेश में अन्य शर्त्तोंं के अलावा विकास योजना के सुसंगत उपबंध, सड़क तथा अन्य संपर्क नेटवर्क प्रणाली के लिए आवश्यकता तथा वैसे प्रभावित भूमि और आयोजना प्राधिकार को अभ्यर्पित किए जाने वाले भूमि का क्षेत्रफल जो हस्तांतरणीय विकास अधिकार के लिए हकदार और संगणना के लिए यथाविहित रीति से मान्य होगा। (6) उप-धारा (1) के अधीन अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किसी भूमि पर परिचालनात्मक निर्माण से भिन्न, किसी प्रकार के विकास करने का आशय रखने वाले केन्द्र सरकार या राज्य सरकार के विभाग या स्थानीय प्राधिकार (जहाँ स्थानीय प्राधिकार आयोजना प्राधिकार भी न हो) की दशा में, यथास्थिति, विभाग या स्थानीय प्राधिकार ऐसा करने के अपने आशय को लिखित रूप में आयोजना प्राधिकार को पूर्ण विवरण तथा उसके साथ सरकार द्वारा समय-समय पर यथाविहित दस्तावेज एवं योजनाएं संलग्न करते हुए ऐसे विकास कार्य को शुरू करने के कम-से-कम एक माह पूर्व अधिसूचित करेगा। जहाँ आयोजना प्राधिकार प्रस्तावित विकास पर विकास योजना या तत्‌समय प्रवृत किसी भवन उपविधि के साथ अनुरूपता की बाबत या किसी अन्य तात्विक कारण से कोई आपाि करता हो तो वहाँ, यथास्थिति विभाग या स्थानीय प्राधिकार - (क) आयोजना प्राधिकार द्वारा उठाई गई आपाि का समाधान करने के लिए विकास के प्रस्ताव में आवश्यक उपान्तरण करेगा, या (ख) निर्णय के लिए आयोजना प्राधिकार की आपाियों के साथ विकास का प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत करेगा। जब ऐसे प्रस्ताव तथा आपत्तियाँ सरकार को समर्पित कर दी गई हैं, तब सरकार द्वारा इस विषय पर अंतिम निर्णय लिए जाने तक कोई विकास कार्य प्रारम्भ नहीं किया जाएगा। आयोजना प्राधिकार द्वारा की गई आपाियों के साथ विकास का प्रस्ताव प्राप्त होने पर सरकार नगर एवं क्षेत्रीय निवेशन संगठन के परामर्श से प्रस्ताव बिना किसी उपांतरण के या उपांतरणों सहित अनुमोदन करेगी या, यथास्थिति, विभाग अथवा स्थानीय प्राधिकार को यथावश्यक उपान्तरण करने का निदेश देगी। 34. शर्त्ताें के साथ विकास की अनुमति या अनुमति से इन्कार के विरुद्ध अपील ।-(1) धारा-31,धारा-32 एवं धारा-33 के अधीन किसी पारित आदेश से व्यथित कोई आवेदक नियमावली में यथाविहित संबंधित अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील दायर कर सकेगा। (2) अपीलकर्त्ता एवं संबंधित आयोजना प्राधिकार को सुनने के बाद, अपीलीय प्राधिकार अपील की अस्वीकृति या स्वीकृति संबंधी आदेश पारित करेगा- (क) बिना शर्त्त अनुमति प्रदान करना; या(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 16 (ख) वैसे शर्त्तों के साथ अनुमति प्रदान करना, जिसे वह उपयुक्त समझे, या (ग) उन शर्त्तों, जिनके साथ अनुमति प्रदान की गयी हो, को हटाना, और अन्य शर्त्ताें, यदि कोई हो, जिसे वह उपयुक्त समझे, के प्रभाव के साथ ;

35. अनुज्ञप्ति की समाप्ति ।-धारा-31, धारा-32 एवं धारा-33 के तहत दी गई प्रत्येक अनुमति प्रदान किए जाने की तारीख से दो वर्षों तक प्रवृत्त रहेगी और उसके बाद वह समाप्त हो जाएगी; परन्तु आयोजना प्राधिकार आवेदन किए जाने पर दी गई अनुमति की अवधि को समय-समय पर बढ़ा सकेगा किन्तु बढाई गई अवधि एक बार में छः माह से अधिक नहीं होगी, परन्तु कि वह विस्तारित अवधि किसी भी स्थिति में कुल मिलाकर तीन वर्षों से अधिक नहीं होगी। परन्तु यह और कि अनुमति की यथापूर्वोक्त समाप्ति के बाद इस अधिनियम के अधीन नई अनुमति के लिए बाद में कोई आवेदन किए जाने पर वर्जन नहीं होगा। 36. अनुमति का प्रतिसंहरण ।-जब कभी यह पाया जाय कि धारा 31, धारा-32 एवं धारा 33 के अधीन जारी विकास की कोई अनुमति किसी मिथ्या कथन या दुव्र्यपदेशन कर या किसी तात्विक तथ्य या नियम को छुपाकर प्राप्त किया गया है तब आयोजना प्राधिकार यथाविहित प्रक्रिया अपनाकर उसे प्रतिसंहरण करेगा। 37. विकास करने की अनुमति का प्रतिसंहरण और उपांतरण की शक्ति ।-(1) यदि किसी समय आयोजना प्राधिकार को यह प्रतीत होता हो कि विकास योजना, जो तैयार कर लिया गया हो या तैयार किए जाने के क्रम में हो, या तैयार किया जाना हो, को ध्यान में रखते हुए और विकास योजना में किसी फेर-फार को ध्यान में रखते हुए और किसी अन्य तात्त्विक कारणों से यह आवश्यक या समीचीन है कि इस अधिनियम या किसी अन्य विधि के अधीन भूमि या भवन का विकास करने के लिए प्रदान की गई किसी अनुमति को प्रतिसंहरित या उपांतरित किया जाना है, तो आयोजना प्राधिकार संबद्ध व्यक्ति को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद आदेश द्वारा अनुमति प्रतिसंहरित कर सकेगा या यथावश्यक हद तक उपान्तरित कर सकेगा। परन्तु कि जहाँ अनुमति संस्थापन या भूमि के उपयोग या किसी भवन के संकार्य या अन्य संकार्य में परिवर्तन से संबंधित हो, वहाँ परिवर्तन हो जाने के बाद ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा। (2) जब उप-धारा (1) के अधीन पारित आदेश से कोई अनुमति प्रतिसंहरित या उपान्तरित की जाती हो और कोई अनुमति प्रदान किए जाने के पश्चात्‌ तथा ऐसी अनुमति के अनुसार किए गए किसी विकास, जो अनुमति वापस लिए जाने या उपान्तरित किए जाने से निष्फल हो गया हो, को करने में उपगत व्यय के लिए कोई स्वामी विहित समय के अंदर और विहित रीति से आयोजना प्राधिकार से प्रतिपूर्ति का दावा करता हो तब आयोजना प्राधिकार स्वामी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर प्रदान कर प्रतिपूर्ति का निर्धारण करेगा और यथोचित प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव स्वामी के समक्ष करेगा। (3) यदि स्वामी प्रतिपूर्ति स्वीकार न करता हो और यथाविहित समय के भीतर प्रतिपूर्ति स्वीकार करने से इन्कार करने की नोटिस देता हो, तो आयोजना प्राधिकार अध्याय-XII के अधीन गठित न्यायाधिकरण या राजस्व पर्षद के समक्ष मामले को इस अधिनियम के अधीन गठित नियमावली के यथाविहित तरीके से निर्दिष्ट करेगा और न्यायाधिकरण या बोर्ड का निर्णय अंतिम तथा स्वामी और आयोजना प्राधिकार के लिए आबद्धकर होगा। 38. विकास के दौरान अथवा ले-आउट कार्य करने में विचलन तथा अप्राधिकृत विकास व निर्माण ।-(1) कोई विकासात्मक कार्य करने के दौरान या ले-आउट कार्य और सिविल कार्य करते समय यदि विकास के लिए दिए गए अनुमति आदेश से उसमें कोई विचलन या अन्तर करना हो तो स्वामी धारा-33 में विनिर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पुनरीक्षित स्वीकृति प्राप्त करेगा। (2) जहाँ स्वामी, भवन निर्माता या विकासकर्त्ता द्वारा किया गया विकास या निर्माण अनुमोदन के बिना, विकास की अनुमति आदेश प्राप्त किए बिना अथवा विकास योजना, मंडलीय विकास योजना या क्षेत्र विकास स्कीम या किसी नियम, विनियम या आदेश का उल्लंघन कर किया गया पाया जाए, वहां आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार स्वयं या संबद्ध आयोजना प्राधिकार की सलाह से अधिनियम या किसी अन्य विधि के उपबंधों के अनुसार उक्त अप्राधिकृत विकास या निर्माण के विरुद्ध तत्काल आवश्यक कदम उठाएगा। 39. केवल अनुज्ञप्त भवनों को जनोपयोगी संयोजन दिया जाना ।-किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, पेयजल, विद्युत, जल-निकास (नाला), मल वहन की सुविधा जैसी जनोपयोगी सेवाएँ या आयोजना क्षेत्र के भवनों या प्रतिष्ठापनों को ऐसी अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेवार स्थानीय निकाय, संगठन या एजेंसी केवल ऐसे भवन को विद्युत तथा जल संयोजन या ऐसी अन्य जन सेवाएं उपलब्ध कराएगी जिसे विधि के अधीन सक्षम प्राधिकार द्वारा अनुमति दी गई हो; परन्तु कि अप्राधिकृत भवनों को संयोजन दिए जाने के मामले में सरकार उन शर्त्तों को विहित करेगी जिनके अधीन ऐसा किया जा सकेगा। 40. कतिपय मामलों में योजनाओं का उपान्तरित हो जाना ।-(1) जहाँ किसी आयोजना क्षेत्र में अवस्थित कोई भूमि किसी विकास योजना या मंडलीय विकास योजना के लिए अपेक्षित खुली जगह या निर्माण रहित भूमि के रूप में रखी जानी हो या ऐसी किसी योजना में अनिवार्य अधिग्रहण के लिए अभिहित की गयी हो, यदि इस योजना के प्रवर्तन की तारीख से अथवा ऐसी योजना को किसी संशोधन द्वारा अभिरहित किया गया हो तब ऐसे संशोधन के प्रवर्तन17 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 की तारीख से दो वर्षों की समाप्ति तक वह भूमि अनिवार्यतः अर्जित न की जाए तो उस भूमि का स्वामी इस प्रकार अर्जित की जाने वाली भूमि में अपने हित की अपेक्षा करने का नोटिस सरकार को तामील करा सकेगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन नोटिस प्राप्त होने की तारीख से छः माह के भीतर यदि सरकार भूमि अर्जित करने में विफल रहती हो तो, यथा स्थिति विकास योजना या मंडलीय विकास योजना उक्त छः माह के अवसान के पश्चात्‌ इस प्रकार प्रभावी होगी मानो अपेक्षित भूमि खुली जगह अथवा निर्माण रहित रखे जाने के लिए अपेक्षित नहीं थी या अनिवार्य अधिग्रहण के रूप में अभिहित नहीं थी। 41. अप्राधिकृत विकास या विकास योजना की अनुरूपता से भिन्न उपयोग के लिए शास्ति ।-(1)स्वप्रेरणा से या किसी अन्य व्यक्ति या निकाय की प्रेरणा से जो कोई व्यक्ति किसी भूमि अथवा भवन के उपयोग के क्रम में किसी विकासात्मक कार्य को प्रारम्भ, कार्यान्वयन या सम्पादन या किसी भूमि या भवन के उपयोग को संस्थित या परिवर्तित; (क) किसी विकास योजना का उल्लंघन कर; (ख) इस अधिनियम के अधीन अपेक्षित आवश्यक अनुमति के बिना; (ग) जिन शर्त्तों के अध्यधीन अनुमति प्रदान की गयी हो वैसे किसी शर्त्तों का उल्लंघन कर; (घ) धारा-41 के अधीन विकास की अनुमति वापस लिये जाने के बाद; या (ङ) धारा-41 के अधीन रूपांतरित अनुमति का उल्लंघन कर करता हो तो वह छः माह तक के साधारण कारावास या एक लाख रुपये तक के जुर्माना या दोनों से दंडनीय होगा और प्रथमतः किये गये अपराध के लिए दंडित किए जाने के बाद भी अपराध जारी रखे जाने की स्थिति में अपराध जारी रखने की अवधि के लिए एक हजार रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना से दंडनीय होगा। (2) कोई व्यक्ति जो धारा-31, धारा-34 एवं धारा-35 के अधीन अनुमति मिले बिना विकास योजना के उपबंधों का उल्लंघन कर किसी भूमि या भवन का उपयोग जारी रखता हो या उसका उपयोग करवाता हो या जहां उपयोग की अनुमत अवधि के बाद भी ऐसा उपयोग जारी रखता है या ऐसे उपयोग जिन अनुबंधों और शर्त्तों के अध्यधीन हो उनका अनुपालन किए बिना ऐसा उपयोग जारी रखता हो तो वह छः माह तक के साधारण कारावास, या पचास हजार रूपये तक के जुर्माना या दोनों से दंडनीय होगा और प्रथमतः किये गये अपराध के लिए दंडित किए जाने के बाद भी अपराध जारी रखे जाने की स्थिति में अपराध जारी रखने की अवधि के लिए प्रतिदिन पाँच सौ रुपये के अतिरिक्त जुर्माना से दंडनीय होगा। 42. अप्राधिकृत विकास हटाये जाने की अपेक्षा करने की शक्ति ।-(1) जहाँ भूमि का कोई विकास धारा-41 में यथावर्णित रूप में किया गया हो या किया जा रहा हो, वहां आयोजना प्राधिकार उस स्वामी को नोटिस तामिल कर उससे अपेक्षा करेगा कि वह, नोटिस तामील किए जाने के बाद, उसमें यथाविनिर्दिष्ट अवधि, जो एक माह से अधिक की नहीं होगी, नोटिस में यथा विनिर्दिष्ट कदम उठाए और वह अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित आदेश भी कर सकेगाः- (क) धारा-41 की उप-धारा (1) के खंड (क), (ख) या (घ) में विनिर्दिष्ट स्थितियों में भूमि को उक्त विकास कार्य किये जाने से पूर्व की स्थिति में लाना ; (ख) धारा-41 की उप धारा (1) के खंड (ग) या (ङ) में यथाविनिर्दिष्ट स्थितियों में यथा उपांतरित अनुमति या शर्त्ताें का अनुपालन सुनिश्चित करना; (2) विशेष तौर पर, उपर्युक्त प्रयोजन हेतु ऐसी नोटिस द्वारा निम्नलिखित की अपेक्षा की जा सकेगीः- (क) किसी भवन या कार्य को विनिष्ट करना या उसमें परिवर्त्तन करना; (ख) भूमि पर या किसी भवन में अन्य प्रकार का कार्य करना; या (ग) भूमि या भवन के किसी उपयोग को बंद करना; परन्तु यदि नोटिस से भूमि या भवन के किसी उपयोग को बंद करने की अपेक्षा की जाती हो तो आयोजना प्राधिकार अधिभोगी को भी नोटिस तामिल करेगा। (3) ऐसी नोटिस से व्यथित कोई व्यक्ति, उक्त अवधि के अंतर्गत और विनिर्दिष्ट रीति से ; (क) भूमि या किसी भवन या कार्य को यथास्थिति रखने के लिए या भूमि के किसी उपयोग को जारी रखने के लिए, जिसके संदर्भ में नोटिस दी गयी हो, इस अधिनियम की धारा-31 या धारा-32 या धारा-33, जो उपयुक्त हो, के अधीन अनुमति हेतु आवेदन कर सकेगा; या (ख) यथा विहित रीति से न्यायाधिकारण के समक्ष अपील कर सकेगा। (4) (क) अपील का अंतिम अवधारण लंबित रहने तक या उसे वापस लिए जाने तक नोटिस का कोई प्रभाव नहीं होगा। (ख) (i) यथावश्यक उपांतरणों सहित ऐसे आवेदन पर धारा-34 के उपबंध लागू होंगे। (ii) यदि उस आवेदन पर यथा पूर्वोक्त ऐसी अनुमति प्रदान की जाती हो तो नोटिस अप्रभावी होगा, या यदि ऐसी अनुमति केवल कुछ भवनों या कार्याें को बनाये रखने के लिए या भूमि के मात्र किसी भाग का उपयोग जारी रखने के लिए प्रदान की जाती हो तो नोटिस ऐसे भवनों या कार्याें या भूमि के ऐसे भाग पर प्रभावी नहीं होगा, लेकिन अन्य भवनों या कार्याें या भूमि के अन्य भागों पर पूर्णतः प्रभावी होगा। (5) न्यायाधिकरण अपील को खारिज या नोटिस को अभिखंडित कर या उसमें फेरबदल कर अपील स्वीकार कर सकेगा, जैसा वह उचित समझे।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 18 (6) यदि नोटिस में विनिर्दिष्ट अवधि के अंतर्गत या उप-धारा (3) के अधीन अनुमति का आवेदन या अपील के निष्पादन या वापस लिये जाने के पश्चात्‌ ऐसी अवधि के अंतर्गत, उस नोटिस या उसका वह भाग जो प्रभाव में बना रहता हो, या अपील में नोटिस में किए गए फेर-फार सहित का अनुपालन नहीं किया जाता हो तो आयोजना प्राधिकार- (क) नोटिस का अनुपालन नहीं करने के लिए उस स्वामी को अभियोजित कर सकेगा और उस स्थिति में जहाँ नोटिस में भूमि के किसी उपयोग को बंद करने की अपेक्षा हो वहां ऐसे अन्य व्यक्ति को भी अभियोजित कर सकेगा जो इस नोटिस का उल्लंघन कर उस भूमि का उपयोग करता या करवाता हो या भूमि का उपयोग किये जाने की अनुमति देता हो; और (ख) (i) किसी भवन या भवन के किन्हीं कार्याें को विखंडित या परिवर्तित करने की अपेक्षा वाले नोटिस की स्थिति में, इसे उस पूर्वावस्था में ला सकेगा जैसा कि वह विकास होने से पूर्व की स्थिति में था और अनुमति या यथाउपान्तरित अनुमति की शर्त्ताें का अनुपालन सुनिश्चित करवा सकेगा तथा किसी भवन या कार्याें को विखंडित करने या उसमें परिवर्तित किये जाने या किसी भवन या अन्य संकार्याें के कार्यान्वयन सहित आयोजना प्राधिकार यथा आवश्यक कदम उठा सकेगा; (ii) उपर्युक्त उप खण्ड (i) के अधीन अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में उपगत किसी व्यय की लागत आयोजना प्राधिकार स्वामी से भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूल कर सकेगा। (7) उप-धारा (6) के खंड (क) के अधीन अभियोजित कोई व्यक्ति छः माह तक के साधारण कारावास, जिसकी अवधि छः माह तक हो सकती है, या जुर्माना जो पचास हजार रूपये तक हो सकता है या दोनों से दंडनीय होगा और प्रथमतः किये गये अपराध के लिए दंडित किए जाने के बाद भी अपराध जारी रखे जाने की स्थिति में अपराध जारी रखने की अवधि के लिए प्रतिदिन पाँच सौ रुपये के अतिरिक्त जुर्माना से दंडनीय होगा। 43. अप्राधिकृत विकास को रोके जाने की शक्ति और पुलिस की अध्यपेक्षा ।-(1) जहाँ धारा-38 में यथावर्णित भूमि या भवन का विकास किया जा रहा हो, लेकिन अभी पूरा नहीं हुआ हो, वहां आयोजना प्राधिकार उस विकास कार्य को कार्यान्वित करने वाले स्वामी और व्यक्ति पर इस अपेक्षा का एक नोटिस तामिल करा सकेगा कि ऐसे नोटिस की तामील किये जाने के समय से भूमि या भवन का विकास कार्य रोक दिया जाय; (2) जहाँ ऐसा नोटिस तामील किया गया हो, वहां धारा-42 की उप धारा (2) और उप धारा (3) के उपबंध यथावश्यक उपांतरणों के साथ लागू होंगे; परन्तु धारा-42 की उपधारा-(4) के खंड (क) के उपबंध लागू नहीं होंगे और धारा 42 की उपधारा (3) में यथा उपबंधित विकास के लिए अनुमति का आवेदन प्रस्तुत करने या अपील दायर करने के बावजूद नोटिस पूर्णतः प्रभाव में बना रहेगा। (3) ऐसी नोटिस तामील किये जाने के पश्चात्‌ स्वयं या भू-स्वामी या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से भूमि और भवन का विकास का कार्य जारी रखने वाला कोई व्यक्ति साधारण कारावास जो छः माह तक हो सकती है या जुर्माना जो पचास हजार रुपये तक हो सकता है या दोनों से दंडनीय होगा और जब अननुपालन जारी रहता हो तब नोटिस तामील किये जाने की तारीख से अनुपालन रखे जाने तक की अवधि के लिए प्रत्येक दिन पांच सौ रुपये के अतिरिक्त जुर्माना से दंडनीय होगा। (4) यदि ऐसी नोटिस का अनुपालन तुरंत नहीं किया जाता हो तो आयोजना प्राधिकार या इस निमित्त प्राधिकृत किया जा सकने वाला आयोजना प्राधिकार का पदाधिकारी, ऐसी नोटिस की तामील किये जाने के पश्चात्‌ किसी समय उस भूमि से ऐसे व्यक्ति और सभी सहायकाें एवं मजदूरों को हटाने की अपेक्षा किसी पुलिस पदाधिकारी से कर सकेगा और ऐसा पुलिस पदाधिकारी अध्यपेक्षा का तद्‌नुसार अनुपालन करेगा। (5) उपधारा-(4) के अधीन अध्यपेक्षा का अनुपालन किये जाने के बाद आयोजना प्राधिकार या इस निमित्त प्राधिकृत किया जा सकने वाला आयोजना प्राधिकार का ऐसा पदाधिकारी, यदि वह उचित समझे, आदेश के द्वारा भूमि या भवन की निगरानी के लिए किसी पुलिस पदाधिकारी या उपयुक्त प्राधिकार के किसी पदाधिकारी या कर्मचारी को, यह सुनिश्चित करने के लिए कि विकास कार्य जारी न रहे, प्रतिनियुक्त कर सकेगा। (6) जहां उस भूमि या भवन की निगरानी के लिए उपधारा (5) के अधीन किसी पुलिस पदाधिकारी या आयोजना प्राधिकार के किसी पदाधिकारी या कर्मचारी की प्रतिनियुक्ति की गई है, वहां ऐसी प्रतिनियुक्ति की लागत खर्च उस व्यक्ति द्वारा भुगतान की जायेगी, जिसके प्रेरणा पर ऐसा विकास जारी रखा जा रहा हो या जिसे उपधारा (1) के अधीन नोटिस दी गई हो और यह ऐसे व्यक्ति से भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूलनीय होगी। 44. भूमि का उपयोग बंद करने तथा भवन हटाए जाने या उसमें फेर-फार करने की अपेक्षा करने की शक्ति ।-(1)यदि आयोजना प्राधिकार को यह प्रतीत होता हो कि तैयार की गयी या तैयार की जा रही या तैयार की जाने वाली विकास योजना को ध्यान में रखते हुए या किसी अन्य तात्विक कारण से समीचीन नागरिक सुविधाओं, आधारभूत संरचना और अन्य सुख-सुविधाओं की व्यवस्था सहित आयोजना क्षेत्र की समुचित योजना बनाने के हित में हैः- (क) कि भूमि के किसी उपयोग को बंद कर दिया जाए; या (ख) कि उसके जारी रखने पर कोई शर्त्त लगायी जाए; या (ग) कि किसी भवन या कार्य को हटा दिया जाए या उसमें फेर-फार किया जाए,19 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 तो आयोजना प्राधिकार, भू-स्वामी को नोटिस तामिल करः- (i) भूमि के उस उपयोग को बंद करने की अपेक्षा कर सकेगा; या (ii) उसको जारी रखने की दशा में नोटिस के द्वारा यथा विनिर्दिष्ट शर्त्तें लगा सकेगा; या (iii) ऐसी नोटिस की तामील के पश्चात्‌ उस नोटिस में यथा विनिर्दिष्ट अवधि, जो एक माह से कम की नहीं होगी, के अन्तर्गत यथास्थिति किन्हीं भवनों या कार्याें को हटाने या उसमें फेर-बदल करने के लिए नोटिस में यथाविनिर्दिष्ट कदम उठाने की अपेक्षा कर सकेगा। (2) ऐसी नोटिस से व्यथित कोई व्यक्ति उक्त अवधि के अन्तर्गत और यथाविहित रीति से न्यायाधिकारण के समक्ष अपील कर सकेगा। (3) यदि उपधारा (2) के अधीन अपील की जाती हो तो धारा-42 की उपधारा (4) के खंड (क) और धारा 42 की उपधारा (5) के उपबंध यथा आवश्यक उपान्तरणों के साथ लागू होंगे। (4) यदि कोई व्यक्ति :- (क) जिसने उस नोटिस के अनुपालन के परिणामस्वरूप, उस भूमि, जिसका कि वह हकदार है, में किसी हित के ह्रास से या उस भूमि के उपयोग में हो रहे विध्न के कारण क्षति उठाया हो; या (ख) जिसने उस नोटिस के अनुपालन में कोई कार्य किया हो अथवा उस नोटिस के अनुपालन के कारण वह भूमि युक्तियुक्त लाभप्रद उपयोग के लायक नहीं रह जाता हो, तो वैसी क्षति अथवा उसके द्वारा नोटिस के अनुपालन में युक्तियुक्त व्यय की प्रतिकर हेतु आयोजना प्राधिकार के समक्ष निर्धारित अवधि के अंदर तथा विहित रीति से दावा करता है, तो आयोजना प्राधिकार किसी पदाधिकारी को आवेदक को सुनने एवं प्रतिवेदन देने के लिए नामित करेगा । आयोजना प्राधिकार उपर्युक्त प्रतिवेदन पर विचार करने के उपरान्त प्रतिकर का निर्धारण करेगा एवं इस अधिनियम के उपबंधों एवं नियमावली के आलोक में आवेदक को यह प्रस्ताव करेगा। (5) यदि स्वामी प्रतिकर स्वीकार न करता हो और यथाविहित समय के भीतर प्रतिकर स्वीकार करने से इन्कार करने की नोटिस देता हो तो आयोजना प्राधिकार न्यायाधिकरण को निर्देश करेगा और न्यायाधिकरण का निर्णय अंतिम होगा तथा स्वामी और आयोजना प्राधिकार के लिए आबद्धकर होगा। 45. विकास योजना तैयार होना लंबित रहने की स्थिति में अंतरिम उपबंध ।-अपने अधीनस्थ किसी क्षेत्र की बाबत अपने कृत्यों एवं शक्तियों के प्रयोग करने में जहां आयोजना प्राधिकार से अपेक्षित है कि किसी विकास योजना के प्रवृत्त होने के पूर्व ऐसी विकास योजना के उपबंधों का ध्यान रखे, वहां आयोजना प्राधिकार उन उपबंधों को ध्यान में रखेगा जो उसकी राय में संबद्ध क्षेत्र की समुचित योजना का निर्माण सुनिश्चित करने के लिए शामिल करना आवश्यक हो।

अध्याय-VII क्षेत्र विकास स्कीम 46. क्षेत्र विकास स्कीमों की तैयारी ।-इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के उपबंधों के अध्यधीन, विकास योजना को सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिए जाने के बाद, विकास योजना में अन्तर्विष्ट प्रस्तावों के कार्यान्वयन के प्रयोजनार्थ आयोजना प्राधिकार छह महीने के भीतर अपनी अधिकारिता वाले क्षेत्र या क्षेत्रों या उसके किसी भाग के लिए यथाशीघ्र एक या एक से अधिक विकास स्कीमें बना सकेगा; स्पष्टीकरण :-

(i) उक्त खंड के प्रयोजनों के लिए योग्य विकासर्काा में निम्नलिखित शामिल होंगे :-

(क) कोई व्यक्ति या भागीदारी फर्म या व्यक्तियों का समूह या व्यक्तियों का एसोसिएशन सहित पंजीकृत सोसायटी या ट्रस्ट ; (ख) कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत बनाई नयी कंपनी ; (ग) उस समय के कोई भी कानून के तहत बनाए गये सरकार के उपक्रम जैसे बोर्ड, निगम, प्राधिकरण या अन्य कोई ईकाई

(ii) यदि, आवश्यक हो तो, सरकार अधिसूचना के माध्यम से योग्य डेवलपर्स के लिएयोग्यता मापदंड प्रस्तावित कर सकती है;

परन्तु कि जब अध्याय V के अधीन विकास योजना बनाने के आशय की घोषणा सरकारी राजपत्र में अधिसूचित कर दी गई हो तब विकास योजना की रूपरेखा या विकास योजना का अनुमोदन लंबित रहने पर भी सरकार आयोजना क्षेत्र के अन्तर्गत अन्तर्विष्ट क्षेत्रों के लिए क्षेत्र विकास स्कीम तैयार करने का निदेश आयोजना प्राधिकार को दे सकेगी; 47. क्षेत्र विकास स्कीम के लिए आवेदन ।-क्षेत्र विकास योजना (ओं) की मंजूरी के लिए योग्य डेवलपर्स को प्रस्तावित प्रपत्र में आयोजना प्राधिकार के समझ एक आवेदन करना होगा,

(i) आवेदन निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ किया जाएगा :-

(क) धारा-48 में वर्णित विवरण को शामिल करके क्षेत्र विकास स्कीम की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट ; (ख) 80 प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति या कुल प्लाट क्षेत्र का 80 प्रतिशत डेवलपर के पक्ष में पंजीकृत शीर्षक दस्तावेजों या पंजीकृत मुख्तारनामा या पंजीकृत विकास समझौते के रूप में।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 20 48. क्षेत्र विकास स्कीम का आयाम एवं विषयवस्तु ।-(1)क्षेत्र विकास स्कीम (इसमें इसके बाद 'स्कीम' कहा गया है) इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार ऐसी किसी भूमि के लिए बनाई जा सकेगी, जो- (क) विकास की प्रक्रिया में है, (ख) भवन के प्रयोजनों सहित किसी विकास के लिए उपयोग में लाए जाने हेतु संभावित हो; या (ग) पहले से ही जिस पर निर्माण हो चुका हो। स्पष्टीकरणः- अभिव्यक्ति ''भवन के प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाए जाने हेतु संभावित भूमि'' में खुले स्थान, सड़क, गलियाँ, पार्क, क्रीड़ा या आमोद-प्रमोद के मैदान, पार्किंग स्थान के रूप में या उनकी व्यवस्था के लिए प्रयोग में लायी जानेवाली भूमि पर अथवा भूमिगत स्कीम के आनुषंगिक कोई कार्य, जो भवन के कार्य की प्रकृति का हो अथवा न हो, निष्पादित करने के उपयोग या प्रयोजन हेतु कोई भूमि शामिल होगी। (2) क्षेत्र विकास स्कीम में निम्नलिखित विषयों में से किसी एक या सभी के लिए उपबंध किए जा सकेंगे, यथाः- (क) स्कीम के तहत आच्छादित सभी प्लौट के क्षेत्रफल, स्वामित्व एवं भूधृति ; (ख) खाली या जिस पर निर्माण हो चुका हो ऐसी भूमि का अभिन्यास या पुनः अभिन्यास करना ; (ग) भूमि की भराई करना या दलदल वाले या अस्वास्थ्यकर भाग का पुनरूद्धार करना या भूमि को समतल करना ; (घ) नये गलियों या सड़कों का अभिन्यास, गलियों, सड़कों और आवागमन का निर्माण, दिशा परिवर्तन, विस्तार, फेरबदल, सुधार करना, बन्द करना और पुनस्र्थापित करना; (ङ) भूखंडों का पुनर्गठन; (च) भवनों, पुलों और अन्य संरचनाओं का निर्माण, फेरबदल और हटाया जाना; (छ) सड़कों, खुले स्थान, बगीचा, आमोद-प्रमोद के मैदान, विद्‌यालय, बाजार, आवासीय प्रयोजनों, औद्योगिक तथा वाणिज्यिक क्रियाकलापों, हरित पट्टियों तथा दुग्धशाला, परिवहन सुविधाएं और सभी प्रकार के लोक प्रयोजनों के लिए भूमि का वह अंश जो अधिगृृहित होगा, हेतु भूमि का आवंटन एवं आरक्षण; (ज) आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवास (ई.डब्लू.एस.) सहित विभिन्न आय वर्गों के लिए आवास स्कीम, वाणिज्यिक क्षेत्रों, औद्योगिक संपदाओं, सामुदायिक सुख-सुविधा जैसे विद्‌यालय, अस्पताल और इसी प्रकार के विकासों के लिए स्कीम का लिया जाना; (झ) जल निकास, मल निकास, जमीन पर या जमीन के नीचे जल निकास तथा मलमूत्र का निपटान ; (ञ) प्रकाश व्यवस्था; (ट) जलापूर्ति; (ठ) ऐतिहासिक महत्त्व वाली वस्तुओं का या नैसर्गिक सौन्दर्य का तथा वस्तुतः धार्मिक प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त भवनों का परिरक्षण एवं संरक्षण; (ड) भवनों के चारों ओर रखे जाने वाले खुले स्थान, किसी भूखंड के भवन क्षेत्र का प्रतिशत, विनिर्दिष्ट क्षेत्र में अनुमत भवनों की संख्या, ऊँचाई एवं उनका स्वरूप, वैसे प्रयोजन जिनके लिए विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में भवन उपयुक्त हो या नहीं हो सकेंगे, भूखंडों का उप-विभाजन, किसी क्षेत्र में भूमि के आपत्तिजनक उपयोग को बंद करने की युक्तियुक्त अवधि, किसी भवन के लिए पार्किंग स्थान तथा लदाई एवं उतराई का स्थान और विज्ञापन पट्टिकाओं और निकले हुए भागों के आकार; (ढ़) ऐसे किसी अधिनियम जिसका संशोधन करने के लिए राज्य विधानमंडल सक्षम हो, के अधीन बनाये गए या जारी किसी नियमावली, उपविधि, विनियमावली, अधिसूचना या आदेश का स्कीम के समुचित कार्यान्वयन के लिए उन हदों तक आवश्यक स्थगन; (ण) क्रय कर, अदल-बदल कर या अन्यथा स्कीम के लिए या उसके निष्पादन के क्रम में आवश्यक या प्रभावित किसी सम्पत्ति का अधिग्रहण; (त) आधारभूत संरचना, पार्कों, आम सुविधाओं, पार्किंग, इत्यादि के विकास के लिए भूमि का आरक्षण स्कीम में शामिल कुल क्षेत्र से होगा, जैसा कि नियमों में प्रस्तावित हो। (थ) वैसे अन्य विषय, जो इस अधिनियम से असंगत न हों, जो सरकार द्वारा यथा निदेशित किए जाएं या नियमावली द्वारा विहित किए जाएं। 49. भूमि मालिक क्षेत्र विकास स्कीम में एक स्थायी हितधारक हो ।-धारा-47 में यथानिर्दिष्ट, एक क्षेत्र विकास स्कीम में प्लांट को पुर्नगठित करते समय डेवलपर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर भूमि मालिक को स्कीम में शामिल उसके भूमि का कम से कम 10 प्रतिशत मिले। 50. क्षेत्र विकास स्कीम की स्वीकृति ।-आयोजना प्राधिकार भूमि मालिकों से प्राप्त होने वाले दिशा निदेशों और आपत्तियों के आलोक में क्षेत्र विकास स्कीम की जांच करेगा और ऐसे सभी इच्छुक व्यक्तियों को सुनवाई का अवसर देगा जिन्होंने आपत्तियां दाखिल की हो और जिन्होंने विहित रीति से सुनवाई का अवसर दिए जाने का अनुरोध किया हो। इसके अलावा, आयोजना प्राधिकार डेवलपर्स को ड्राफ्ट क्षेत्र विकास स्कीम में ऐसा संशोधन करने का निर्देश दे सकता है जैसा वह जरूरी समझे तथा उसे जितना जल्दी हो सके, लेकिन नियमों में निर्धारित समय अवधि के पश्चात्‌ नहीं, क्षेत्र विकास स्कीम का अनुमोदन करना होगा और संशोधन या बिना संशोधन के सरकारी राजपत्र में प्रकाशित करने का आदेश देना होगा और इसे प्राप्त की गई आपत्तियों तथा अपने फैसले की एक प्रतिलिपि प्रदान करनी होगी।21 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 51. आयोजना प्राधिकार से स्कीम बनाने की अपेक्षा करने की सरकार की शक्ति ।-(1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी योजना क्षेत्र की बाबत यथावश्यक जाँच करने के बाद, सरकार अयोजना प्राधिकार को निदेश दे सकेगी कि वह ऐसी किसी भूमि, जिसके लिए विकास स्कीम बनाई जा सके, विहित रीति से स्कीम बनाये और प्रकाशित करे । (2) उपधारा (1) के अधीन निदेश दिए जाने की तारीख से तीन महीने के भीतर यदि आयोजना प्राधिकार स्कीम बनाने में विफल रहता हो, तो सरकार नगर तथा क्षेत्रीय निवेशन संगठन (टी॰सी॰पी॰ओ॰) को निदेश दे सकेगी कि वह स्कीम बनाये और प्रकाशित करे तथा सरकार को प्रस्तुत करे तथा तत्‌पश्चात्‌्‌, जहाँ तक प्रयोज्य हो, इस अधिनियम के उपबंध ऐसी स्कीम के बनाने पर लागू होंगे। 52. नियमावली, उपविधि या विनियमावली को स्थगित करने की सरकार की शक्ति ।- (1) जहाँ धारा-50 के अधीन आयोजना प्राधिकार ने अपने आदेश को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित करके क्षेत्र विकास स्कीम का अनुमोदन कर दिया हो वहाँ सरकार आयोजना प्राधिकार द्वारा आवेदन किए जाने पर सरकारी राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसी किसी विधि, जिसका संशोधन करने के लिए राज्य विधानमंडल सक्षम हो, के अधीन बनाए गए या जारी किए गए किसी नियमावली, उपविधि, विनियमावली, अधिसूचना या आदेश को मात्र उस हद तक स्थगित कर सकेगी जहाँ तक इस स्कीम को कार्यान्वित करने के प्रयोजनार्थ आवश्यक हो। (2) आयोजना प्राधिकार द्वारा स्वंय या सरकार के निदेशाधीन स्कीम वापस लिए जाने पर उपधारा (1) के अधीन जारी किसी आदेश का प्रवर्तन समाप्त हो जाएगा। 53. प्राधिकार द्वारा निर्धारित मामलों के खिलाफ अपील ।-पूर्वगामी उपबंधों से उत्पन्न मामलों में आयोजना प्राधिकार के प्रत्येक निर्णय के विरूद्ध अपील इस अधिनियम के अधीन गठित न्यायाधिकरण के समक्ष एक माह के अन्दर अपील दायार किया जा सकेगा। 54. कतिपय मामलों में प्रतिकर का अपवर्जन या निर्बधन ।-(1)जिस क्षेत्र के लिए ऐसी स्कीम बनाई जाती हो उस क्षेत्र पर तत्‌समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन ऐसे हानिकर प्रभाव के लिए कोई प्रतिकर भुगतेय नहीं हो तो स्कीम में अंतर्विष्ट किसी उपबंध के कारण किसी संपत्ति या निजी अधिकार पर किसी प्रकार का अधिकथित प्रभाव पड़ने की बाबत कोई प्रतिकर भुगतेय नहीं होगा। (2) स्कीम में अंतर्विष्ट किन्हीं उपबंधों के कारण किसी संपत्ति या किसी प्रकार के निजी अधिकार का हानिकारक रूप में प्रभावित होना नहीं माना जाएगा यदि ऐसी स्कीम या उसके किसी भाग में सम्मिलित क्षेत्र की सुविधा प्राप्त करने के लिए धारा-48 की उपधारा (2), खंड (ङ) में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी विषय के संबंध में कोई शर्त्त और निर्बंधन अधिरोपित हो। 55. कतिपय मामलों में आयोजना प्राधिकार का निर्णय अंतिम होना ।-(1) जहां धारा-53 के अधीन कोई अपील नहीं की गयी हो वहां आयोजना प्राधिकार का निर्णय अंतिम होगा और पक्षकारों के लिए बाध्यकर होगा। (2) जहां धारा-53 के अधीन अपील की गयी हो और अपील में पारित निर्णय की प्रति आयोजना प्राधिकार को प्राप्त हो जाए वहाँ वह, जहां आवश्यक हो, ऐसे निर्णय के अनुसार स्कीम में फेर-फार करेगा तथा ऐसी गलतियों या लोपों, यदि कोई हो, जो स्कीम के प्रकाशन के बाद उसके ध्यान में लायी जाए, का सुधार भी करेगा और अपने निर्णयों की प्रति एवं अपील में पारित निर्णयों की प्रति के साथ ऐसी स्कीमों को बोर्ड को अग्रसारित भी करेगा। 56. गलती, अनियमितता या अपरूपिता के आधार पर स्कीम में परिवर्तन करने की शक्ति ।-(1)स्कीम के प्रवृत्त हो जाने के बाद यदि आयोजना प्राधिकार समझता हो कि किसी गलती, अनियमितता या अपरूपिता के कारण स्कीम दोषपूर्ण है या यह कि स्कीम में छोटा-मोटा परिवर्तन या उपान्तरण करने की आवश्यकता ह,ै तो आयोजना प्राधिकार विहित रीति में ऐसे परिवर्तन का प्रारूप तैयार कर एवं सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उसे प्रकाशित करेगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन प्रकाशित परिवर्तन के प्रारूप में स्कीम में किए जाने वाले प्रस्तावित हरेक संशोधन का उल्लेख होगा और यदि ऐसा कोई संशोधन धारा-48 की उपधारा (2) के किसी उपखंड में विनिर्दिष्ट विषय से संबंधित हो तो परिवर्तन के प्रारूप में यथाविहित अन्य विशिष्टियां भी अंतर्विष्ट होंगी। (3) परिवर्तन का प्रारूप एक माह तक कार्यालय अवधि के दौरान आयोजना प्राधिकार के कार्यालय में जनता के निरीक्षण के लिए खुला रखा जाएगा। (4) परिवर्तन के प्रारूप के प्रकाशन की तारीख से एक माह से अनधिक उससे प्रभावित कोई व्यक्ति आयोजना प्राधिकार को अपनी लिखित आपत्तियां संसूचित कर सकेगा। (5) उप-धारा (4) के अधीन आपत्तियां प्राप्त होने के बाद आयोजना प्राधिकार यथोचित जांच कर सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उपान्तरण के साथ या उसके बिना परिवर्तन को अधिसूचित करेगा। (6) उपान्तरण के साथ या उसके बिना परिवर्तन की अधिसूचना की तारीख से ऐसा परिवर्तन इस प्रकार प्रभावी होगा मानो वह स्कीम में ही सम्मिलित था। 57. स्कीम में परिवर्तन करने की शक्ति ।-किसी क्षेत्र विकास स्कीम को इस अधिनियम के अनुसार बनाई गई तथा प्रकाशित उत्तरवर्ती स्कीम के द्वारा किसी भी समय परिवर्तित की जा सकेगी; परन्तु कि जब किसी स्कीम को इस प्रकार परिवर्तित किया जाता हो, तब इस अधिनियम के उपबंध, जहां तक लागू हो, ऐसे परिवर्तन तथा उत्तरवर्ती स्कीम के बनाए जाने पर लागू होंगे तथा परिवर्तित स्कीम के प्रकाशन की तारीख स्कीम के प्रकाशन की तारीख मानी जाएगी।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 22 58. विकासर्काा द्वारा क्षेत्र विकास स्कीम के कार्यों का कार्यावन्यन ।-(1) विकासर्काा विहित अवधि के अन्तर्गत स्कीम में उपबंधित सभी कार्यों को पूरा करेगा; परन्तु, विकासर्काा द्वारा आवेदन किए जाने पर आपवादिक परिस्थितियों में आयोजना प्राधिकार, उन परिस्थितियों को विनिर्दिष्ट करते हुए लिखित आदेश द्वारा, विकासर्काा को इस निमित्त यथोचित समय बढ़ा सकेगी। (2) यदि विकासर्काा विहित अवधि में या उपधारा (1) के अधीन बढ़ाई गई अवधि में काम पूरा करने में विफल रहता हो तो, उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, आयोजना प्राधिकार विकासर्काा से अपेक्षा करेगी कि वह यथा युक्तियुक्त अतिरिक्त अवधि में काम पूरा करे या विकासर्काा की लागत पर ऐसे कार्यों को पूरा करने के लिए अन्य अभिर्काा/अभिर्कााओं की नियुक्त कर सकेगी तथा विकासर्काा पर वैसे दण्ड लगा सकेगी जैसा विहित हों।

अध्याय-VIII विकास प्रभार (चार्ज) का उद्‌ग्रहण, निर्धारण और वसूली 59. विकास प्रभार ।-जहाँ आयोजना क्षेत्र के संपूर्ण या किसी भाग में इस अधिनियम के अध्याय-VI के अधीन किसी भूमि या भवन के उपयोग के संस्थापन या उपयोग में परिवर्तन या उसका विकास करने की अनुमति दी जाती हो और ऐसा परिवर्तन उसके स्वामी को बेहतर आय प्रदान करने वाला हो, वहाँ उपयुक्त प्राधिकार विहित रीति से विकास प्रभार (चार्ज) उद्‌गृहित कर सकेगा। 60. विकास प्रभार का उद्‌ग्रहण ।-(1) इस अधिनियम के अध्यधीन आयोजना प्राधिकार, स्थानीय प्राधिकार सहित, जहाँ ऐसा स्थानीय प्राधिकार आयोजना प्राधिकार हो, भूमि एवं भवन का उपयोग संस्थित किए जाने या उपयोग में परिवर्तन किए जाने पर या आयोजना क्षेत्र के अन्तर्गत भूमि या भवन का ऐसा विकास किए जाने पर जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन अनुमति अपेक्षित हो, सरकार के पूर्व अनुमोदन से अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट दर पर विकास प्रभार का उद्‌ग्रहण करेगा; परन्तु कि आयोजना क्षेत्र के विभिन्न भागों तथा विभिन्न उपयोगों के लिए विकास प्रभार की दरें भिन्न-भिन्न हो सकेंगी। (2) सरकार नियमावली द्वारा, उसमें विनिर्दिष्ट किसी भूमि और भवन के किसी विकास या किसी उपयोग के संस्थापन या उपयोग में परिवर्तन को विकास प्रभार के उद्‌ग्रहण से छूट देने के लिए उपबंध कर सकेगी। (3) (क) भूमि और भवनों पर लगने वाले विकास प्रभार का मूल्यांकन उनके निर्धारित उपयोग और विभिन्न प्रायोजनों के लिए स्थान के संदर्भ में होगा (ख) विकास प्रभार की दर अधिसूचना द्वारा सरकार द्वारा तय किया जाएगा।

स्पष्टीकरण :- आयोजना प्राधिकार द्वारा किसी योजना या स्कीम का प्रकाशन बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन) अधिनियम, 2010 (बिहार अधिनियम 11, 2010) की धारा-1 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में यथा उल्लेखित किसी अन्य तरीके के अर्थ के अन्तर्गत शामिल समझा जाएगा। 61. विकास प्रभार का निर्धारण ।-(1) जो कोई व्यक्ति किसी भूमि या भवन का कोई ऐसा उपयोग संस्थित करना या उपयोग में परिवर्तन करना या कोई विकास करना चाहता हो जिसके लिए इस अधिनियम के अधीन अनुमति अपेक्षित हो तो उसने ऐसी अनुमति का आवेदन किया हो या नहीं किया हो अथवा जिस किसी व्यक्ति ने ऐसा कोई विकास कार्य प्रारंभ कर दिया हो या ऐसा विकास कार्य कर लिया हो या ऐसे किसी उपयोग को संस्थित या परिवर्तित कर लिया हो वह उसकी बाबत भुगतेय विकास प्रभार के निर्धारण के लिए यथाविहित रीति से और यथाविहित समय सीमा के अन्तर्गत उपयुक्त प्राधिकार को आवेदन करेगा। (2) उपधारा (1) के अधीन आवेदन किए जाने पर, या यदि ऐसा कोई आवेदन नहीं किया गया हो तो ऐसे भुगतान का भागी व्यक्ति को लिखित नोटिस तामिल किए जाने के बाद तथा संबद्ध व्यक्ति को सुने जाने का अवसर देने के बाद और प्राधिकार के किसी पदाधिकारी से इस निमित प्रतिवेदन ले लेने के बाद, आयोजना प्राधिकार यह अवधारित करेगा कि ऐसा विकास कार्य करने या उपयोग संस्थित करने या उपयोग में परिवर्तन करने के कारण उस भूमि या भवन की बाबत विकास प्रभार उद्‌ग्रहणीय है या नहीं, यदि उद्‌ग्रहणीय है तो भुगतेय राशि का निर्धारण करेंगा और वह तारीख नियत करेगा जिस तारीख तक राशि का भुगतान किया जाएगा। (3) जो व्यक्ति उपधारा (1) के अधीन आवेदन किया है या जिसे उपधारा (2) के अधीन नोटिस तामील की गई हो उसे आयोजना प्राधिकार सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देगा। (4) उन व्यक्तियों को सुनने के बाद आयोजना प्राधिकार आदेश के द्वारा विकास प्रभार की राशि का निर्धारण करेगा; परन्तु कि - (क) जहाँ कोई विकास कार्य करने के संबंध में आवेदन किया गया हो, वहाँ आयोजना प्राधिकार उसकी बाबत भुगतेय विकास प्रभार का निर्धारण करना अस्वीकार कर सकेगा, बशर्तें उसको समाधान न हो जाए कि आवेदक का उस भूमि में इतना हित है कि ऐसा विकास कार्य करने के लिए समर्थ हो या यह कि आवेदक ऐसा हित प्राप्त करने में समर्थ है और यह कि आवेदक आयोजना प्राधिकार द्वारा उपयुक्त माने जानेवाली अवधि के अन्तर्गत विकास कार्य कर लेगा।23 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 (ख) जहाँॅ आवेदन किसी उपयोग के संस्थापन या परिवर्तन से संबंधित हो वहाँ आयोजना प्राधिकार उसकी बाबत विकास प्रभार की राशि का निर्धारण करना तब तक अस्वीकार कर सकेगा जबतक कि उसका समाधान न हो जाए कि वह उपयोग आयोजना प्राधिकार द्वारा उपयुक्त समझी जाने वाली अवधि में संस्थित कर लिया जाएगा। (5) उपधारा (2) के अधीन उद्‌ग्रहणीय विकास प्रभार का अवधारण हो जाने पर आयोजना प्राधिकार ऐसे प्रभार के भुगतान के भागी व्यक्ति को उसके द्वारा भुगतेय विकास प्रभार की राशि तथा जिस तारीख तक ऐसा भुगतान किया जाएगा की लिखित नोटिस देगा तथा ऐसी नोटिस में यह उल्लेख भी किया जाएगा कि ऐसी तारीख को या उससे पूर्व ऐसा भुगतान करने में विफल रहने की दशा में भुगतान हेतु अवशेष राशि पर ऐसी तारीख से इस अधिनियम के अन्तर्गत नियमावली में यथाविहित दर से ब्याज भुगतेय होगा। (6) (क) किसी भूमि या भवन पर सरकार को देय भू-राजस्व यदि कोई हो, तथा आयोजना प्राधिकार को देय कोई अन्य राशि के पूर्व भुगतान के उपरांत, उस भूमि या भवन की बाबत भुगतेय विकास प्रभार ऐसी भूमि या भवन पर प्रथम प्रभार होगा। (ख) किसी व्यक्ति द्वारा किसी भूमि या भवन की बाबत भुगतेय सभी विकास प्रभार, वसूली की तारीख तक देय ब्याज के साथ, ऐसे व्यक्ति से या ऐसी भूमि या भवन में उसके हित-उतराधिकारी से भू-राजस्व के बकाए के रूप में वसूलनीय होगा। (7) विकास प्रभार के निर्धारण का आदेश अन्तिम होगा और उस पर किसी सिविल न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जाएगा। 62. आधारभूत संरचना और सुख सुविधा प्रभारों का उद्‌ग्रहण ।-(1) यथास्थिति, हरेक स्थानीय प्राधिकार या आयोजना प्राधिकार सुसंगत विधियों के अधीन भवन की स्वी—ति प्रदान करते समय विकास के प्रभाव की पूर्ति तथा यथेष्ट आधारभूत संरचना एवं मूलभूत सुख सुविधाओं की व्यवस्था के लिए यथाअवधारित दरों पर और विहित की जानेवाली प्रक्रिया के अनुसार प्रभारों का उद्‌ग्रहण करेगा जो यथाविहित न्यूनतम से कम और अधिकतम से अधिक नहीं होगा तथा योजना क्षेत्र के विभिन्न भागों एवं भवन के विभिन्न उपयोगों के लिए भिन्न-भिन्न दरें विहित की जा सकेंगी। (2) आधारभूत संरचना और सुख-सुविधा प्रभार वैसे किसी व्यक्ति से उद्‌ग्रहणीय होगा जो ऐसा विकास कार्य का जिम्मा लेता हो या करता हो अथवा भवन का कोई उपयोग संस्थित करता हो या ऐसे किसी उपयोग में परिवर्तन करता हो। (3) आधारभूत संरचना और सुख-सुविधाओं प्रभारों की वसूली यथाविहित रीति से की जाएगी। 63. अपील ।-(1) आयोजना प्राधिकार द्वारा पारित आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति उसे आदेश किए जाने की तारीख से दो माह की अवधि के अन्तर्गत विहित रीति से ऐसे आदेश के विरूद्ध न्यायाधिकरण के समक्ष अपील कर सकेगा; परन्तु कि यदि न्यायाधिकरण को समाधान हो जाए कि उक्त अवधि में अपील नहीं करने के लिए अपीलकर्ता के पास यथेष्ट कारण थे, तो वह उक्त अवधि के अवसान के बाद भी अपील स्वीकार कर सकेगा। (2) अपील विहित रीति से दायर की जाएगी और सत्यापित की जाएगी तथा उसके साथ विहित की जानेवाली फीस दी जाएगी; (3) अपील का निपटान करने में, अपीलकर्ता को अपना अभ्यावेदन करने का अवसर देने तथा जिस आयोजना प्राधिकार के आदेश के विरूद्ध अपील की गई हो उसकी भी सुनवाई के बाद न्यायाधिकरणः- (क) ऐसे निर्धारण को संपुष्ट, घटा या बढ़ा सकेगा या निष्प्रभावी कर सकेगा; (ख) ऐसे निर्धारण को अपास्त कर सकेगा और प्राधिकार को निर्देश दे सकेगा कि यथा निदेशित अतिरिक्त जाँच-पड़ताल कर नए सिरे से निर्धारण करे ; अथवा (ग) यथोचित अन्य आदेश पारित कर सकेगा। (4) न्यायाधिकरण का आदेश अन्तिम और ऐसी अपील के सभी पक्षकारों के लिए बाध्यकारी होगा। (5) उप-धारा (1) के अधीन अपील किए जाने के बावजूद, जिस आदेश या निर्धारण के विरूद्ध अपील की गई हो उसके अनुसार आदेशित या निर्धारित विकास प्रभारों का भुगतान स्थगित नहीं किया जाएगा ; परन्तु न्यायाधिकरण अपने विवेकाधिकार से अपील के निपटान के पूर्व विकास प्रभारों के भुगतान के संबंध में यथोचित निर्देश दे सकेगा यदि अपीलकर्ता ऐसे भुगतान के लिए यथाविहित रीति से और यथाविहित रूप में न्यायाधिकरण को समाधान-परक यथेष्ट प्रतिभूति देता हो। (6) इस अध्याय के उपबंधों के अधीन न्यायाधिकरण द्वारा पारित कोई आदेश यथाविहित प्राधिकार द्वारा यथाविहित रीति से लागू किया जाएगा।

अध्याय-IX भूमि का अधिग्रहण और निपटान 64. भू-अधिग्रहण अधिनियम के अधीन अधिग्रहण की शक्ति ।-(1) किसी विकास योजना और स्कीम में अपेक्षित, सुरक्षित या अभिहित कोई भूमि भू-अधिग्रहण अधिनियम-1894 या तत्‌समय प्रवृत किसी अन्य भू-अधिग्रहण अधिनियम के अर्थ के अन्तर्गत लोक प्रयोजन के लिए आवश्यक भूमि समझी जाएगी और सुसंगत आयोजना प्राधिकार या किसी स्थानीय प्राधिकार के अनुरोध पर उक्त अधिनियम में इस अधिनियम द्वारा यथा उपांतरित उपबंधित रीति से सरकार द्वारा अधिगृहित की जा सकेगी।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 24 (2) जहाँॅं कोई भूमि सरकार द्वारा अधिगृिहत की गई हो वहाँॅ उस भूमि को कब्जा में लिए जाने के बाद, उस अधिनियम के अधीन अधिनिर्णित प्रतिकर और फीस का आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार द्वारा भुगतान किए जाने पर वह भूमि जिस प्रयोजन के लिए अधिगृहित की गई हो उस प्रयोजन के लिए आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार को अंतरित की जा सकेगी। (3) उपधारा (1) के अधीन किया गया आवेदन प्राप्त होने पर, यदि सरकार को समाधान हो जाए कि आवेदन में विनिर्दिष्ट भूमि की आवेदन में विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए आवश्यकता है तो वह इस भूमि की बाबत भू-अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा-6 में उपबंधित रीति से इस आशय की घोषणा राजपत्र में कर सकेगी। इस प्रकार प्रकाशित घोषणा, उक्त अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उक्त अधिनियम की उक्त धारा-6 के अधीन सम्यक रूप से की गई घोषणा मानी जाएगी; (4) ऐसी घोषणा प्रकाशित होने पर, जिसके क्षेत्राधिकार में वह भूमि अवस्थित हो उस जिला का समाहर्ता उक्त अधिनियम के अधीन ऐसी भूमि को लेने के लिए अधिग्रहण आदेश की कार्रवाई करेगा और, जहाँ तक हो सके, उस अधिनियम के उपबंध उक्त भूमि के अधिग्रहण पर जहॉ तक हो सके लागू होंगे, 65. सरकारी भूमि का संबंधित आयोजना प्राधिकार को अन्तरण ।-सरकार आदेश द्वारा तथा सरकार और आयोजना प्राधिकार के बीच यथासम्मत निबंधनों और शर्तों पर, आयोजना प्राधिकार के क्षेत्राधिकार में अवस्थित किसी विकसित या अविकसित सरकारी भूमि या राज्य भूमि बैंक से भूमि इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार विकास के प्रयोजन हेतु आयोजना प्राधिकार के निपटान पर सौंप सकेगी। 66. बातचीत के माध्यम से भूमि का क्रय ।-जहाँ विकास योजना के प्रकाशन के बाद ऐसी आयोजना के लिए किसी भूमि की अपेक्षा की जाती हो, उसे आरक्षित या अभिहित किया जाता हो वहाँ आयोजना प्राधिकार किसी व्यक्ति से क्रय के माध्यम से तथा उसे बातचीत के माध्यम से तय राशि का भुगतान कर उससे अधिग्रहण के लिए करार कर सकेगा; परन्तु उस राशि में बढ़ोतरी भूमि के न्यूनतम सुरक्षित मूल्य, से बोर्ड द्वारा निश्चित और सरकार द्वारा अनुमोदित सीमा से अधिक नहीं होगी। 67. अंतरणीय (ट्रांसफरेबल) विकास अधिकार के माध्यम से भूमि का अधिग्रहण ।-(1) जहाँ किसी आयोजना प्राधिकार के अन्तर्गत लोक प्रयोेजन के लिए किसी क्षेत्र का अधिग्रहण अपेक्षित हो, स्वामी की सहमति से आयोजना प्राधिकार द्वारा देय प्रतिकर के बदले अन्तरणीय विकास प्राधिकार के माध्यम से यथाविहित रीति से की जा सकेगी। स्पष्टीकरणः इस धारा के प्रयोजनार्थ लोक प्रयोजन से अभिपे्रत हैः- (क) विद्‌यमान सड़क का चौड़ीकरण या नई सड़क बनाना। (ख) नागरिक सुख-सुविधाओं और आधारभूत संरचना का सृजन ; (ग) पार्क, खेल के मैदान और खुली जगहों, हरित क्षेत्रों एवं किसी अन्य नागरिक सुख-सुविधाओं की व्यवस्था के लिए; (घ) राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित विरासत वाले भवन या प्रसीमाओं का अनुरक्षण अथवा सुधार; (ङ) विरासत वाले स्थलों का संरक्षण ; (च) विकास नियंत्रण विनियमावली का कार्यान्वयन। (2) इस प्रकार अनुमत अंतरणीय विकास अधिकार का उपयोग अभ्यर्पण के पश्चात्‌ उस क्षेत्र के शेष भाग में अथवा आयोजना क्षेत्र में कहीं भी यथाविहित रूप में स्वयं अथवा किसी अन्य व्यक्ति को अंतरित कर किया जा सकेगा। अभ्यर्पण के बाद शेष बचा क्षेत्र नियमावली या विनियमावली या उपविधि द्वारा विहित यथा अनुज्ञेय निर्मित क्षेत्र होगा। (3) अंतरणीय विकास अधिकार प्रदान करने की प्रक्रिया वही होगी जो सरकार द्वारा नियमावली में विहित की जाए। 68. आवास आरक्षण के माध्यम से भूमि और निर्मित स्थान का अधिग्रहण ।-इस अधिनियम के अधीन बनाई गई नियमावली या विनियमावली के अधीन यथाविहित रूप में संबद्ध आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार को अंतरित आधारभूत संरचना, लोक सुख सुविधा, लोक उपयोगिता एवं सेवाओं के लिए भूमि की लागत और निर्मित स्थान के बदले सुख-सुविधाओं के लिए अपेक्षित निर्मित स्थान के अतिरिक्त समतुल्य निर्मित स्थान की अनुमति देकर विकास योजना में उपदर्शित लोक प्रयोजनों के निमित्त भूमि और निर्मित स्थान का अधिग्रहण स्वामी की सहमति से तथा विहित रीति से आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार कर सकेगा। 69. संबद्ध आयोजना प्राधिकार द्वारा भूमि और अन्य सम्पति का निष्पादन ।-सरकार द्वारा अधिगृहित तथा संबद्ध आयोजना प्राधिकार को अंतरित किसी भूमि, उस पर विकास कार्य के साथ या उसके बिना, या आयोजना प्राधिकार की किसी अन्य अचल संपति का निष्पादन इन प्रयोजनों के निमित्त बनाई गई नियमावली एवं विनियमावली के अनुसार किया जाएगा। 70. विकास भूमि बैंक का सृजन और प्रबंधन ।-संबद्ध आयोजना प्राधिकार एक भूमि बैंक का सृजन एवं संधारण करेगा जिसमें अधिगृहित, आवंटित, क्रय की गई, प्राप्त की गई सभी प्रकार की भूमि का अनुश्रवण (मॉनिटर) और अनुरक्षण किया जाएगा तथा उनकी स्थिति की आवधिक समीक्षा की जाएगी।25 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 अध्याय-X

वित्त, लेखा और अंकेक्षण 71. निधि का गठन ।-इस अधिनियम के अधीन गठित बोडर्, आयोजना प्राधिकार अथवा किसी अन्य प्राधिकार अथवा समिति के प्रशासन एवं कार्यों को अग्रसर करने के प्रयोजनार्थ सरकार निधि का गठन कर सकेगी। 72. आयोजना प्राधिकार की निधियाँ ।-(1) हरेक आयोजना प्राधिकार की अपनी निधि होगी और वह उसका अनुरक्षण करेगी तथा इसमें निम्नलिखित प्राप्तियाँ जमा की जाएंगीः- (क) सरकार से आयोजना प्राधिकार को अनुदान, ऋण, अग्रिम के रूप में या अन्यथा प्राप्त सभी धन ; (ख) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाई गई नियमावली या विनियमावली के अधीन आयोजना प्राधिकार द्वारा प्राप्त सभी विकास प्रभार या अन्य प्रभार या फीस ; (ग) आयोजना प्राधिकार के आयोजना क्षेत्र में शामिल किए गए क्षेत्र के स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों से आयोजना प्राधिकार की निधि में ऐसा अंशदान जो ऐसे स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों की सामान्य निधि की वैसी राशि जो सरकार समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे से अनधिक होगा, और (घ) किसी अन्य स्त्रोत से आयोजना प्राधिकार द्वारा प्राप्त सभी धन। (2) निधि का उपयोगः- (क) इस अधिनियम के प्रशासन तथा प्राधिकार के —त्यों में उपगत व्यय; (ख) विकास के प्रयोजनार्थ आयोजना क्षेत्र में भूमि के अधिग्रहण की लागत ; (ग) आयोजना क्षेत्र में भूमि के किसी विकास के लिए व्यय और (घ) सरकार द्वारा यथानिदेशित अन्य प्रयोजनों के लिए व्यय की पूर्ति के लिए किया जाएगा। (3) हरेक आयोजना प्राधिकार अपनी निधि से नियमावली द्वारा यथाविहित धनराशि किसी अनुसूचित बैंक के चालू खाता में रख सकेगा और उस राशि से अतिरेक कोई धनराशि सरकार द्वारा यथा अनुमोदित रीति से विनिधानित (इनवेस्ट) किया जाएगा। (4) सरकार, इस अधिनियम के अधीन कार्यों के संपादन के लिए यथावश्यक अनुदान, अग्रिम और ऋण किसी आयोजना प्राधिकार को प्रदान कर सकेगी, और सभी अनुदान, अग्रिम एवं ऋण सरकार द्वारा यथाअवधारित निबंधनों तथा शर्तों पर दिए जाएंगे। 73. आयोजना प्राधिकार का बजट ।-हरेक आयोजना प्राधिकार हर वर्ष नियमावली द्वारा यथाविहित फारम एवं यथानिर्धारित समय में अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट तैयार करेगा जिसमें आयोजना प्राधिकार की प्राक्कलित प्राप्तियाँ एवं व्यय दर्शाया जाएगा और सरकार तथा बोर्ड को नियमावली द्वारा यथाविहित संख्या में उसकी प्रतियाँ अग्रसारित करेगा। 74. लेखा और अभिलेख ।-(1)हरेक आयोजना प्राधिकार उचित लेखा एवं अन्य सुसंगत अभिलेख अनुरक्षित करेगा तथा सरकार द्वारा नियमावली में यथाविहित फारम में तुलन पत्र सहित वार्षिक लेखा विवरण तैयार करेगा। (2) हरेक आयोजना प्राधिकार का लेखा राज्य के वित्त (अंकेक्षण) विभाग या नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा सूचीबद्ध किसी चार्टर्ड लेखाकार अथवा सरकार द्वारा यथाविनिश्चित अन्य प्राधिकार द्वारा वार्षिक तौर पर अंकेक्षित किए जाने के अध्यधीन होगा तथा ऐसे अंकेक्षण के सिलसिले में उपगत कोई व्यय आयोजना प्राधिकार द्वारा भुगतेय होगा। (3) वित्त (अंकेक्षण) विभाग या चार्टर्ड लेखाकर या आयोजना प्राधिकार के लेखा के अंकेक्षण के संबंध में सरकार द्वारा नियुक्त किसी प्राधिकार को ऐसे अंकेक्षण के सिलसिले में वही अधिकार, विशेषाधिकार और प्राधिकार होंगे जैसा कि उसे सरकारी लेखा के संबंध में होता है खासतौर पर उसे पुस्तों, लेखा, संबद्ध वाउचर तथा अन्य दस्तावेज और कागजात प्रस्तुत करने की मांग करने एवं आयोजना प्राधिकार के कार्यालय का निरीक्षण करने का अधिकार होगा। (4) हरेक आयोजना प्राधिकार के द्वारा प्रत्येक वर्ष अंकेक्षक द्वारा यथाप्रमाणित लेखा, अंकेक्षण प्रतिवेदन के साथ, सरकार और बोर्ड को अग्रसारित किया जाएगा। 75. वार्षिक प्रतिवेदन ।-(1) बोर्ड हरेक वर्ष उस वर्ष के लिए अपनी गतिविधियों का प्रतिवेदन तैयार करेगा और नियमावली द्वारा यथाविहित रूप में तथा यथाविहित तारीख को या उससे पूर्व सरकार को प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगा। (2) प्रत्येक आयोजना प्राधिकार हरेक वर्ष उस वर्ष के दौरान अपनी गतिविधियों का प्रतिवेदन तैयार करेगा तथा नियमावली द्वारा यथाविहित रूप में यथाविहित तारीख को या उससे पूर्व सरकार और बोर्ड को प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगा। 76. पेंशन और भविष्य निधि ।-(1) बोर्ड एवं आयोजना प्राधिकार अपने वेतनभोगी पूर्णकालिक सदस्यों तथा अपने पदाधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के हितार्थ नियमावली द्वारा यथाविहित रीति से और यथाविहित शर्तों के अध्यधीन यथोचित पेंशन एवं भविष्य निधि का गठन करेगा। (2) जहाँ ऐसा कोई पेंशन या भविष्य निधि का गठन किया गया हो, वहाँ सरकार यह घोषित कर सकेगी कि ऐसी निधि पर बिहार पेंशन नियम 1950, भविष्य निधि अधिनियम,1925 एवं बिहार भविष्य निधि नियमावली, 1948 के उपबंध लागू होंगे, मानो वह सरकारी पेंशन एवं भविष्य निधि हो;

26 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012

अध्याय-XI नगर कला एवं विरासत आयोग 77. राज्य के लिए नगर कला एवं विरासत आयोग का गठन ।-(1) सरकार अधिसूचना द्वारा राज्य के लिए कला और विरासत आयोग का गठन कर सकेगी जो ''बिहार नगर कला एवं विरासत आयोग'' (इसमें इसके बाद आयोग कहा जाएगा) कहलाएगा, जिसमें एक अध्यक्ष तथा अन्य वैसे सदस्य जो अन्य के अलावा, शहरी विन्यास, दृश्यकला, वास्तुकला, भारतीय इतिहास या पुरातत्व विज्ञान, पर्यटन और पर्यावरण विज्ञान का प्रतिनिधित्व करते हों जोे सरकार द्वारा अधिसूचना में यथाविनिर्दिष्ट होंं। (2) आयोग निम्नलिखित बातों पर सरकार को अनुशंसाएं करेगा- (क) आयोजना क्षेत्रों में नगरीय रूपांकण तथा पर्यावरण एवं विरासत वाले स्थलों एवं भवनों का पुनरूद्धार और संरक्षण ; (ख) भावी नगरीय रूपांकण और पर्यावारण से संबंिधत योजना ; (ग) पुरातत्वीय और ऐतिहासिक स्थलों तथा अतिसुन्दर दृश्य वाले स्थलों का पुनरूद्धार एवं संरक्षण। (3) आयोग द्वारा प्रयोग की जानेवाली शक्तियाँ, संपादित किए जानवाले कार्य तथा अपनाई जानेवाली प्रक्रिया वही होगी जो अधिसूचना में यथा विनिर्दिष्ट हो। (4) आयोग की अनुशंसाओं पर विचार करने के बाद तथा संबंधित आयोजना प्राधिकार या संबद्ध प्राधिकार को कोई अभ्यावेदन करने का अवसर दिए जाने के बाद, सरकार संबद्ध आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों को यथोचित निर्देश जारी कर सकेगी और आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार या प्राधिकारों सरकार के ऐसे हरेक निर्देश का अनुपालन करेंगे। 78. सरकार के आदेश का बाध्यकारी होना ।-(1) आयोग के परामर्श से सरकार अधिसूचना द्वारा किसी आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार को यह निर्देश दे सकेगी कि उस आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार के क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत आनेवाले परिक्षेत्र या क्षेत्र विशेष के भवनों में विनिर्दिष्ट रंग एवं डिजाइन स्कीम अपनाए जाएं। (2) किसी अधिनियम, नियमावली, विनियमावली या उपविधि में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन सरकार द्वारा जारी आदेश आयोजना प्राधिकार, स्थानीय प्राधिकार या भवनों के स्वामी के लिए बाध्यकारी होगा।

अध्याय-XII 79. न्यायाधिकरण का गठन ।-इस अधिनियम के अधीन आयोजना प्राधिकार के आदेशों के विरुद्ध अपील की सुनवाई हेतु सरकार यथावश्यक संख्या में अपीलीय न्यायाधिकरण का गठन कर सकेगी और ऐसे विवादों का निर्णय करने में किसी सिविल न्यायालय की अधिकारिता नहीं होगी। (1) अपीलीय न्यायाधिकरण में एक अध्यक्ष और कम से कम दो अन्य सदस्य होंगे। (2) अध्यक्ष वह व्यक्ति होगा जो जिला न्यायाधीश हो या रहा हो और उसकी नियुक्ति/प्रतिनियुक्ति सरकार द्वारा की जाएगी। (3) सदस्य ऐसे योग्य एंव उपयुक्त व्यक्ति होंगे जिसे यथासंभव नगर निवेशन या भूमि के मूल्यांकन या सिविल अभियंत्रण या वास्तुविद्‌ या विधि का ज्ञान एवं अनुभव हो। (4) न्यायाधिकरण के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्य सरकार द्वारा यथाविहित अवधि के लिए नियुक्त होंगे। (5) यदि सरकार उचित समझे तो उपधारा-(4) के अधीन नियुक्त अध्यक्ष एवं किसी सदस्य को अक्षमता या अवचार या किसी अन्य ठोस और यथेष्ट कारण से हटा सकेगी। (6) यदि अध्यक्ष या कोई सदस्य हटा दिया जाता हो या उसकी मृत्यु हो जाती हो या काम करने में उपेक्षा करता हो या काम करने में अक्षम हो जाता हो तो सरकार ऐसे अध्यक्ष या सदस्य का स्थान लेने के लिए तुरंत योग्य और उपयुक्त व्यक्ति की नियुक्ति करेगी। (7) न्यायाधिकरण को किसी अपील को सुनने की बाबत वही शक्तियाँ होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन सिविल न्यायालय में निहित होती हैं। 80. अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों को पारिश्रमिक तथा अनुषंगी व्यय का भुगतान ।-(1) अध्यक्ष और सदस्य, जहां वे सरकारी पदाधिकारी हों सिवाय उनके, मासिक वेतन के रूप में या फीस के रूप में या अंशतः एक माध्यम से या अंशतः अन्य माध्यम से पारिश्रमिक पाने के हकदार होंगे जो सरकार द्वारा समय-समय पर यथानिर्णित हो; परन्तु कि आपवादिक मामलों में जहां स्कीम वृृहत्‌्‌ हो या किया जानेवाला कार्य जटिल हो वहां सरकार अध्यक्ष और सदस्यों को, उनके सरकारी पदाधिकारी होने पर भी, समय-समय पर आदेश द्वारा यथानिर्णित विशेष वेतन या पारिश्रमिक प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत कर सकेगी। (2) जबतक सरकार अन्यथा अवधारित न करे तबतक अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष या सदस्य, जो वेतनभोगी सरकारी पदाधिकारी हाें, को वेतन और इस धारा की उपधारा (1) के अधीन भुगतेय पारिश्रमिक तथा न्यायाधिकरण के कार्य से संबंधित अनुषंगी सभी व्यय आयोजना प्राधिकार की निधियों से विकलित किए जाएंगे और स्कीम की लागत में जोड़े जाएंगे।27 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 अध्याय-XIII

सरकार की शक्तियाँ 81. नियमावली बनाने की शक्ति ।-(1) सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियमावली बना सकेगी। (2) खासतौर पर तथा पूर्ववर्ती शक्ति की व्यापकता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी नियमावली में निम्नलिखित विषयों में से सभी या किसी विषय के लिए उपबंध किया जा सकेगा, यथा; (क) बोर्ड और आयोजना प्राधिकार के कार्य एवं शक्तियाँ ; (ख) बोर्ड और आयोजना प्राधिकार के सदस्यों की पदावधि और सेवाशर्तें ; (ग) बोर्ड और आयोजना प्राधिकार के सदस्य चुने जाने और होने के लिए अर्हता और निरर्हता (घ) बोर्ड की बैठकें आयोजित करने का समय और स्थान तथा उनमें अपनाई जाने वाली प्रक्रिया ; (ङ) नगर तथा क्षेत्रीय निवेशन संगठन (टी.सी.पी.ओ.) के कार्य, शक्तियाँ और कर्तव्य; (च) धारा-11 की उपधारा (3) के अधीन स्थानीय प्राधिकारों के प्रतिनिधियों सहित वैसे सदस्यों के नाम निर्देशन की रीति ; (छ) वह रीति और वह प्रयोजन जिसके लिए कोई आयोजना प्राधिकार इस अधिनियम के अधीन किसी व्यक्ति को अपने साथ सहबद्ध कर सकेगा। (ज) बोर्ड के पदाधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति के संबंध में नियंत्रण और निर्बंधन; (झ) किसी विकास योजना और विकास स्कीम में उपान्तरणों का निदेश देना तथा वह समय-सीमा जिसके अन्तर्गत बोर्ड तथा सरकार को वैसे विकास योजना या विकास स्कीम को अनुमोदन दे देना है ; (ञ) महानगर योजना समिति के गठन, कर्त्तव्य एवं शक्तियों के लिए नियमावली तैयार करना; (ट) विकास योजना का स्वरूप एवं विषय-वस्तु तथा झेत्र विकास स्कीम की तैयारी, प्रस्तुतीकरण और अनुमोदन के संबंध में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तथा ऐसी योजना एवं स्कीम से संबंधित नोटिस के प्रकाशन का स्वरूप एवं रीति; (ठ) विकास योजनाओं का आवधिक संशोधन, वह अवधि जिसके अवसान पर किया जा सकने वाला ऐसा कोई संशोधन और ऐसे संशोधन करने में अपनाई जानेवाली प्रक्रिया ; (ड) वह फारम जिसके द्वारा विकास की अनुमति के लिए आवेदन किया जाएगा, ऐसे आवेदन में दी जाने वाली विशिष्टियाँ तथा ऐसे आवेदन के साथ लगाए जानेवाले दस्तावेज और योजनाएँ ; (ढ़) आवेदन के रजिस्ट्रीकरण का फारम तथा ऐसे रजिस्टर में अंतर्विष्ट की जानेवाली विशिष्टियाँ ; (ण) अपीलों को दायर करने की रीति, उसके लिए अदा की जानेवाली फीस और अपनाई जानेवाली प्रक्रिया ; (त) अधिग्रहण नोटिस तामील करने तथा प्रतिपूर्ति का दावा किए जाने की रीति, वह समय-सीमा जिसके अंतर्गत ऐसा दावा किया जाएगा तथा प्रतिपूर्ति के निर्धारण के लिए अपनाई जानेवाली प्रक्रिया; (थ) विकास प्रभार तथा आधारभूत संरचना और सुख-सुविधा प्रभारों के उद्‌्‌ग्रहण की मात्रा एवं उसकी प्रक्रिया तथा किसी विकास या किसी संस्थापन या किसी भूमि के किसी उपयोग में परिवर्तन किए जाने पर उनसे छूट ; (द) विकास प्रभार के निर्धारण के लिए आवेदन किए जाने की रीति; (ध) चालू खाता में रखी जा सकने वाली धनराशि, (न) आयोजना प्रधिकारों के बजट का फारम, वह तारीख तक या उससे पूर्व उसे तैयार किया जाएगा, उसे तैयार करने की रीति, बोर्ड और सरकार को भेजी जानेवाली प्रतियों की संख्या; (प) वार्षिक लेखा विवरण और तुलन पत्र का फारम, आयोजना प्राधिकारों के वार्षिक लेखा विवरण एवं तुलन पत्र प्रतिवेदन का फारम तथा जिस तारीख को या उससे पूर्व उसे बोर्ड और सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा; (फ) बोर्ड के वार्षिक प्रतिवेदन का फारम तथा जिस तारीख को या उससे पूर्व उसे सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा; (ब) योजना मानक, भवन विनियमावली विहित करना, भवन उपविधि, सेटबैक, विशिष्टताएं, कवरेज, ऊँचाई निर्बधन इत्यादि। (भ) आयोजना प्राधिकारों के पूर्णकालिक वेतनभोगी सदस्यों तथा पदाधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि का गठन तथा वे शर्ते जिनके अध्यधीन ऐसी निधियाँ गठित की जा सकेंगी; (म) वैसे दस्तावेज जिनकी प्रतियाँ दी जा सकेंगी, ऐसी प्रतियों के लिए फीस; और- (य) कोई अन्य विषय जिसे नियमावली द्वारा विहित करना हो या किया जा सके। 82. विनियमावली बनाने की शक्ति ।-(1) इस अधिनियम के प्रयोजन को पूरा करने के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति से, कोई आयोजना प्राधिकार इस अधिनियम तथा इसके अधीन बनाई गई नियमावली के संगत विनियमावली बना सकेगा। (2) इस शक्ति की व्यापकता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी विनियमावली में निम्नलिखित के लिए उपबंध किए जा सकेंगे ;- (क) आयोजना प्राधिकार, इसकी समिति की बैठकें आयोजित करने का समय और स्थान तथा अपनाई जानेवाली प्रक्रिया, उसमें गणपूर्ति (कोरम) के लिए आवश्यक सदस्यों की संख्या ; (ख) आयोजना प्राधिकारों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियाँ एवं कर्तव्य ; (ग) पदाधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन, भत्ते एवं सेवा शर्तें ;

(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012

28 (घ) विकास योजना की अनुरूपता से भिन्न प्रयुक्त किसी भूमि के उपयोग को बनाए रखने के निबंधन और शर्ते; और- (ङ) योजना मानक, भवन विनियमावली विहित करना, भवन उपविधि, सेटबैक, विशिष्टताएं, कवरेज, ऊँचाई निर्बधन इत्यादि। (च) नियमावली द्वारा विहित या विहित किया जानेवाला कोई अन्य विषय । 83. नीतियाँ बनाने की शक्ति ।-सरकारी पहल से और निजी या सार्वजनिक निजी भागीदारी के माध्यम से राज्य में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सामध्यकारी आवास सहित, नए शहरों, बड़े आवासीय कॉलनियों, समाकलित टाउनशिप, अनुषंगी (सेटेलाइट) शहर, हवाई अड्डा, सूचना प्रौद्योगिक पार्क तथा अन्य अचल संपति (रीयल स्टेट) परियोजनाओं का विकास प्रोत्साहित करने हेतु सरकार ऐसी स्कीमों या परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए नीति निर्देशक एवं स्कीम बना सकेगी। 84. राज्य विधानमंडल के समक्ष नियमावली, विनियमावली एवं नीति का रखा जाना ।-इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, विनियम एवं नीति उसके बनाये जाने के पश्चात्‌्‌ यथाशीघ्र, विधान मंडल के सदनों के समक्ष, जब वे सत्र में हों, कुल चौदह दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा। यह अवधि एक सत्र या दो या उससे अधिक लगातार सत्रों को मिलाकर हो सकती है। यदि उपर्युक्त सत्र या उत्तरवर्ती सत्रों के ठीक बाद वाले सत्रावसान से पहले, सदन नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा सदन इस बात के लिए सहमत हो कि यह नियम न बनाया जाय तो तत्पश्चात्‌्‌ नियम यथास्थिति, उस उपांतरित रूप में ही प्रभावी होगा या उसका कोई प्रभाव नहीं होगा, किन्तु ऐसा कोई उपांतरण या बातिलीकरण इस नियम के अधीन पूर्व में की गई किसी बात की विधि-मान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा। 85. योजना प्राधिकारों का विघटन ।-(1) जहाँ सरकार का समाधान हो जाए कि इस अधिनियम के अधीन किसी आयोजना प्राधिकार को जिस प्रयोजन के लिए स्थापित किया गया था उसे सारभूत तौर पर पूरा कर लिया गया है और सरकार की राय में उसे बनाए रखना अनावश्यक है, वहाँ सरकार सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा यह घोषित कर सकेगी कि अधिसूचना में यथाविनिर्दिष्ट तारीख से आयोजना प्राधिकार विघटित कर दिया जाएगा तथा आयोजना प्राधिकार तदनुसार विघटित माना जाएगा। (2) उक्त तारीख से :- (क) आयोजना प्राधिकार में निहित या इसके द्वारा वसूलनीय सभी संपत्ति, निधि और बकाए सरकार में निहित हो जाएंगे या उसके द्वारा वसूलनीय होंगे ; (ख) आयोजना प्राधिकार के विरुद्ध प्रवर्तनीय सभी दायित्व सरकार द्वारा प्रवर्तनीय होंगे; और (ग) खंड (क) में विनिर्दिष्ट संपत्तियों, निधियों और बकायों की वसूली के प्रयोजनार्थ आयोजना प्राधिकार के कार्यों का निर्वहन सरकार द्वारा किया जाएगा। 86. सरकार द्वारा नियंत्रण ।-(1)इस अधिनियम के अधीन अपनी जिम्मेदारियों और कार्यों के कुशल निर्वहन के लिए आयोजना प्राधिकार सरकार द्वारा समय-समय पर उसे दिए गए निर्देशों एवं दिशानिर्देशों का पालन करेगा। (2) इस अधिनियम के अधीन सरकार या बोर्ड या आयोजना प्राधिकार द्वारा अपनी शक्त्तियों, जिम्मेदारियों के प्रयोग तथा अपने कार्यों के निर्वहन में या उसके संबंध में आयोजना प्राधिकार और अन्य प्राधिकार अथवा किसी समिति या स्थानीय प्राधिकार या बोर्ड या सरकार के बीच यदि कोई विवाद उत्पन्न होता हो तो उस विषय का समाधान सरकार द्वारा किया जाएगा और सरकार का विनिश्चय आयोजना प्राधिकार और अन्य प्राधिकार या किसी समिति या स्थानीय प्राधिकार या बोर्ड के लिए अंतिम और बाध्यकारी होगा। (3) सरकार किसी समय, स्वपे्ररणा से या इस निमित्त उसे आवेदन किए जाने पर, आयोजना प्राधिकार द्वारा पारित किसी आदेश या निर्देश की विधिमान्यता या औचित्य या शुद्धता के प्रति अपना समाधान करने के लिए उसके द्वारा निष्पादित किसी मामला या पारित आदेश के अभिलेख की मांग कर सकेगी और उसके संबंध में यथोचित आदेश पारित कर सकेगी या यथोचित निर्देश दे सकेगी ; परन्तु, सरकार किसी व्यक्ति या निकाय पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला आदेश ऐसे व्यक्ति या आयोजना प्राधिकार को सुनवाई का अथवा स्पष्टीकरण देने का अवसर दिए बिना पारित नहीं करेगी। (4) सरकार स्वप्रेरणा से या किसी आयोजना प्राधिकार या भूमि या भवन के किसी स्वामी के आवेदन पर बोर्ड के परामर्श से भूमि के उपयोग में परिवर्तन ला सकेगी। 87. कतिपय मामलों में बोर्ड या किसी आयोजना प्राधिकार के सदस्यों का प्रतिस्थापना ।-सरकार की राय में बोर्ड या किसी आयोजना प्राधिकार का कोई सदस्य यदि जानबूझकर इस अधिनियम या इसके अधीन जारी किसी नियमावली, उपविधि, विनियमावली या विधिपूर्वक आदेशों के उपबंधो की उपेक्षा करता हो या पालन करने से इन्कार करता हो या अवज्ञा करता हो अथवा उसमें निहित अपनी हैसियत या शक्त्तियों का दुरूपयोग करता हो अथवा इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त अधिकार के प्रयोग या तात्पर्यित प्रयोग में या अधिरोपित कार्यों के संपादन या तात्पर्यित संपादन में किसी अवचार का दोषी पाया जाता हो तो सरकार आदेश द्वारा तथा आदेश में विनिर्दिष्ट तारीख के प्रभाव से ऐसे सदस्य या आयोजना प्राधिकार के नियुक्त कर्मचारी का प्रतिस्थापन कर सकेगी और वह इस प्रकार तत्काल प्रभाव से उसे पद से अभिशून्य माना जाएगा ;

29 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012

परन्तु कि जब सरकार इस धारा के अधीन कार्रवाई करने का प्रस्ताव करती हो तब सरकार संबद्ध व्यक्ति को प्रस्तावित कार्रवाई पर अपना अभ्यावेदन करने का अवसर देगी और जारी आदेश में की गई कार्रवाई के कारणों का विवरण अंतर्विष्ट होगा। 88. विशेष पदाधिकारी नियुक्त करने की सरकार की शक्ति ।-(1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ किसी कारण से इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार आयोजना प्राधिकार के गठन या पुनर्गठन में विलंब होता हो वहाँ सरकार इस अधिनियम के अधीन अधिसूचना द्वारा उस आयोजना प्राधिकार के कार्यकलापों के प्रबंधन के लिए विशेष पदाधिकारी नियुक्त कर सकेगी और यह नियुक्ति की तारीख से एक वर्ष से अनधिक अवधि के लिए होगा; परन्तु कि सरकार समय-समय पर आदेश द्वारा तथा उसमें विनिर्दिष्ट कारणों से विशेष पदाधिकारी की नियुक्ति की उक्त एक वर्ष की अवधि को आगे की अवधि या अवधियों के लिए बढ़ा सकेगी, किन्तु विशेष पदाधिकारी की नियुक्ति कुल मिलाकर दो वर्षों से अधिक अवधि की नहीं होगी। (2) उप-धारा (1) के अधीन आदेश पारित किए जाने पर - (क) उप-धारा(1) के अधीन जारी आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि में संबद्ध आयोजना प्राधिकार की सभी शक्तियों और कार्यों का निष्पादन उस विशेष पदाधिकारी द्वारा प्रयुक्त एवं संपादित होगा; और (ख) आदेश में विनिर्दिष्ट अवधि के दौरान संबद्ध आयोजना प्राधिकार में निहित सभी संपत्ति सरकार में निहित होगी। (3) इस धारा में अधिसूचित अवधि के अवसान के पूर्व सरकार इस अधिनियम में उपबंधित रीति से संबंधित आयोजना प्राधिकार का पुनर्गठन कर सकेगी और ऐसा पुनर्गठन किए जाने पर विशेष पदाधिकारी प्राधिकार के कार्यकलाप का प्रबंधन करना बंद कर देगा।

89. विवरणी और सूचना ।-(1)प्रत्येक आयोजना प्राधिकार सरकार द्वारा समय-समय पर यथापेक्षित प्रतिवेदन, विवरणी अभिलेख एवं अन्य जानकारी सरकार को प्रस्तुत करेगा। (2) सरकार किसी भी आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार या उत्तरदायी लोक एजेंसी से निम्नलिखित के लिए प्रतिवेदन, विवरणी, अभिलेख और अन्य जानकारी मांग सकेगीः- (क) विकास योजना, मंडल (जोनल) विकास योजना, क्षेत्र विकास स्कीम आदि तैयार करना (ख) योजना, नीति, कार्यक्रम या स्कीम का कार्यान्वयन (3) उपर्युक्त पहलुओं के संबंध में सरकार द्वारा दिए जाने वाले निदेशों, दिशा-निर्देशों या अनुदेशों का अनुपालन प्रत्येक आयोजना प्राधिकार करेगा।

अध्याय-XIV अनुपूरक और प्रकीर्ण उपबंध 90. प्रवेश की शक्ति ।-(1) मुख्य नगर निवेशक या कोई नगर निवेशक या सरकार या बोर्ड या कोई आयोजना प्राधिकार के द्वारा प्राधिकृत कोई पदाधिकारी या कोई व्यक्ति, सहायकों या मजदूरों के साथ या इनके बिना, निम्नलिखित प्रयोजनों से किसी भूमि पर या भवन में प्रवेश कर सकेगाः- (क) ऐसी भूमि या भवन की कोई जाँच-पड़ताल, निरीक्षण, मापी या सर्वेक्षण के लिए या उसका तलमापन के लिए; या प्रारूप विकास योजना की तैयारी/ क्षेत्र विकास स्कीम की तैयारी करने और लागू करने के लिए; (ख) सीमांकन करने और आशयित कार्य की रूपरेखा निर्धारित करने के लिए ; (ग) चिह्‌न लगाकर तथा खाई खोद कर ऐेसे तल, सीमाओं और रेखाओं को चिहि्‌नत करने के लिए ; (घ) निर्माणाधीन कार्य का परीक्षण करने तथा मलनाली और नालों का बहाव अभिनिश्चित करने के लिए ; (ङ) अवमृदा (सब-स्वाइल) में खुदाई या छिद्रण करने के लिए; (च) यह सुनिश्चित करने के लिए कि इस अधिनियम या इसके अधीन बनाई गई नियमावली या विनियमावली के किसी उपबंध का उल्लंघन कर किसी भूमि का विकास किया जा रहा है या किया गया है; (छ) इस अधिनियम के कुशल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कोई अन्य कार्य करने के लिए ; परन्तु कि ऐसे प्रवेश की सूचना, समय और परिस्थिति नियमावली में विहित प्रक्रिया के अनुसार होगा। (2) उप-धारा (1) के अधीन मुख्य नगर निवेशक या बोर्ड की शक्ति संपूर्ण राज्य के लिए होगी और उप-धारा (1) के अधीन किसी आयोजना क्षेत्र के नगर निवेशक, या आयोजना प्राधिकार द्वारा प्राधिकृत किसी पदाधिकारी या किसी व्यक्ति की शक्ति उसके अपने आयोजना क्षेत्र तक तथा वैसे अन्य क्षेत्र जिसके लिए सरकार ने निर्देश दिया है। (3) किसी भूमि पर या भवन में प्रवेश करने के लिए इस धारा के अधीन सशक्त या प्राधिकृत व्यक्ति को जो कोई व्यक्ति बाधित करेगा या प्रवेश कर जाने पर ऐसे व्यक्ति को उत्पीड़ित करेगा वह कारावास जिसकी अवधि छः माह तक हो सकती है या जुर्माना जो दस हजार रुपये तक हो सकता है अथवा दोनो से दंडनीय होगा। 91. नोटिस का तामिला ।-(1)किसी व्यक्ति को इस अधिनियम के द्वारा अपेक्षित नोटिस एवं आदेशों सहित सभी दस्तावेज को तामिल करने हेतु निम्न प्रकार सम्यक रूप से तामील समझे जाऐंगेः- (क) जहाँ दस्तावेज किसी सरकारी विभाग, रेलवे, स्थानीय प्राधिकार, सांविधिक प्राधिकार, कंपनी, निगम, सोसाइटी या अन्य निकायों को तामील करना हो और यदि दस्तावेज सरकारी विभाग के प्रधान को, रेलवे के महाप्रबंधक को,(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 30 स्थानीय प्राधिकार, सांविधिक प्राधिकार, कंपनी, निगम, सोसाइटी या किसी अन्य निकाय की प्रधान शाखा के कार्यपालक पदाधिकारी को, यथास्थिति, उसके स्थानीय या रजिस्ट्री—त कार्यालय को- (i) रजिस्ट्री—त डाक से भेजकर ; या (ii) ऐसे कार्यालय में प्राप्त कराया जाता हो (ख) इस अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति अथवा संस्था को अपेक्षित नोटिस एवं आदेशों सहित सभी दस्तावेजों का तामिला नियमावली में विहित प्रक्रिया के अनुसार किया जायेगा। 92. लोक सूचना (नोटिस) का अवगत कराया जाना ।-इस अधिनियम के अधीन दी गई प्रत्येक लोक सूचना (नोटिस) बोर्ड या आयोजना प्राधिकार द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर से लिखित दी जाएगी और उससे प्रभावित इलाके में व्यापक रूप से अवगत कराने के लिए उक्त इलाके के सहजदृश्य सार्वजनिक स्थानों में उसकी प्रतियाँ चिपकाई जाएगी या ढोल पिटवाकर या स्थानीय समाचार पत्र में विज्ञापन देकर और प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा यथोचित समझे जानेवाले अन्य माध्यमों से प्रकाशित करवाया जाएगा। 93. नोटिस के लिए युक्तियुक्त समय ।-जहाँ इस अधिनियम के अधीन जारी की गई किसी नोटिस, आदेश या अन्य दस्तावेज से कुछ करने की अपेक्षा की जाती हो और जिसे करने के लिए इस अधिनियम में कोई समय नियत न हो वहाँ उस नोटिस, आदेश या अन्य दस्तावेज में उसे किए जाने के लिए युक्तियुक्त समय विनिर्दिष्ट किया जाएगा। 94. बोर्ड और आयोजना प्राधिकार के आदेशों एवं दस्तावेज का अधिप्रमाणन ।-बोर्ड और किसी आयोजना प्राधिकार की सभी अनुज्ञा, आदेश, निर्णय, नोटिस और अन्य दस्तावेज इस निमित्त बोर्ड या आयोजना प्राधिकार द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित किए जाएंगे। 95. बोर्ड और आयोजना प्राधिकार के अभिलेखों के प्रमाण का तरीका ।- बोर्ड या किसी आयोजना प्राधिकार के कब्जाधीन किसी रसीद, आवेदन, योजना, नोटिस, आदेश, रजिस्टर में प्रविष्टि या अन्य दस्तावेज की प्रति यदि उसके विधिक रक्षक (कीपर) या इस निमित्त बोर्ड या आयोजना प्राधिकार द्वारा प्राधिकृत अन्य व्यक्ति द्वारा सम्यक रूप से प्रमाणित हो तो उसे प्रविष्टि या दस्तावेज की विद्‌यमानता के प्रथम दृष्ट्‌या साक्ष्य के रूप में प्राप्त किया जाएगा और उसे हर मामले में उन विषयों तथा उनमें अभिलिखित संव्यवहारों के साक्ष्य के रूप में उसी प्रकार एवं उस हद तक स्वीकार किया जाएगा जैसा कि ऐसे विषयों एवं संव्यवहारों के प्रमाण के रूप में मूल प्रविष्टि या दस्तावेज के प्रस्तुत किए जाने पर स्वीकार किया जाता। 96. बोर्ड और आयोजना प्राधिकार के पदाधिकारियों और सेवकों को समन किए जाने पर निर्बंधन ।-बोर्ड या किसी आयोजना प्राधिकार का किसी भी अध्यक्ष, सदस्य या पदाधिकारी या सेवक से किसी ऐसी विधिक कार्यवाही में, जिसमें बोर्ड या आयोजना प्राधिकार पक्षकार न हो, ऐसा कोई रजिस्टर या दस्तावेज जिसकी विषय वस्तु को पूर्ववर्ती धारा के अधीन प्रमाणित प्रति द्वारा सिद्व किया जा सकता हो, को प्रस्तुत करने या उसमें अभिलिखित विषय-वस्तु को साबित करने के साक्षी के रूप में हाजिर होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी, जबतक कि विेशेष कारण से न्यायालय के आदेश द्वारा ऐसा करने के लिए न कहा गया हो। 97. कंपनियों द्वारा अपराध ।-(1) यदि इस अधिनियम के अधीन अपराध करने वाला व्यक्ति कोई कंपनी हो तो अपराध किए जाने के समय कंपनी के कारोबार के संचालन के लिए कंपनी का प्रभारी व्यक्ति तथा उसके लिए जिम्मेवार हरेक व्यक्ति के साथ-साथ कंपनी भी उस अपराध का दोषी माना जाएगा और उसके विरूद्ध कार्यवाही चलाए जाने का भागी होगा तथा तदनुसार दंडित किया जाएगा; परन्तु, यदि ऐसा कोई व्यक्ति यह साबित कर देता हो कि वह अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या यह कि उसने ऐसा अपराध किए जाने से रोकने के लिए सारी तत्परता बरती थी तो इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी उसे इस अधिनियम में उपबंधित किसी दंड का भागी नहीं बनाया जाएगा। (2) उप-धारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया हो और यह साबित हो जाए कि अपराध कंपनी के किसी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य पदाधिकारी की सहमति या मौनानुकूलता से अथवा उसके द्वारा बरती गई किसी उपेक्षा के कारण किया गया है वहाँ ऐसा निदेशक, प्रबंधक सचिव या अन्य पदाधिकारी केे विरूद्ध कार्यवाही चलाए जाने तथा तदनुसार दंडित किए जाने का भागी होगा। स्पष्टीकरणः- इस धारा के प्रयोजनार्थ- (क) ''कंपनी'' से अभिपे्रत है निगमित निकाय और इसमें व्यक्तियों का अन्य संगम शामिल है ; और (ख) फर्म के संदर्भ में ''निदेशक'' से अभिप्रेत है फर्म का भागीदार। 98. संविदाकार को बाधा पहुंचाने या चिह्‌न हटाने के लिए जुर्माना ।- यदि कोई व्यक्ति -(1) बोर्ड या किसी आयोजना प्राधिकार द्वारा रखे गए या नियोजित किसी व्यक्ति या ऐसा किसी व्यक्ति, जिसके साथ बोर्ड या आयोजना प्राधिकार ने संविदा किया हो, को अपने कर्त्तव्य संपादन या निष्पादन में या इस अधिनियम के अधीन जिस बात के लिए वह सशक्त हो या जो करने की उससे अपेक्षा हो उसके करने में बाधा पहुंचाता हो अथवा उसे उत्पीड़ित करता हो, अथवा (2) इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत कार्यों के निष्पादन के लिए आवश्यक कोई तल या निदेश उपदर्शित करने के प्रयोजनार्थ लगाया गया चिन्ह हटाता हो तो वह जुर्माना, जो पाँच हजार रूपये तक हो सकता है या कारावास, जो दो माह की अवधि तक हो सकती है, से दंडनीय होगा।31 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 99. अभियोजन की स्वीकृति ।-(1) बोर्ड या संबद्ध आयोजना प्राधिकार या इस निमित्त बोर्ड या आयोजना प्राधिकार द्वारा प्राधिकृत किसी पदाधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए कोई अभियोजन संस्थित नहीं किया जाएगा। (2) इस अधिनियम के अधीन अपराधों के लिए सभी कार्यवाहियाँ उस थाना में प्राथमिकी दायर कर संस्थित किया जाएगा जहाँ वह अपराध घटित होता हो। 100. अपराधों का शमन किया जाना ।-बोर्ड या संबद्ध आयोजना प्राधिकार या इस निमित्त प्राधिकृत कोई व्यक्ति इस अधिनियम द्वारा या इसके अधीन दंडनीय घोषित किसी अपराध की कार्यवाही चलाए जाने के पूर्व या उसके बाद सामान्य या विशेष आदेश द्वारा शमन कर सकेगा। 101. मान्यता प्राप्त अभिकर्ता के माध्यम से हाजिर होने का अधिकार ।-इस अधिनियम के अधीन गठित न्यायाधिकरण या अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष या बोर्ड या आयोजना प्राधिकार के समक्ष किसी कार्यवाही का हरेक पक्षकार व्यक्तिगत रूप में या इस निमित्त लिखित रूप में प्राधिकृत अभिकर्ता के माध्यम से हाजिर होने का हकदार होगा। 102. साक्षियों की उपस्थिति बाध्य करने की शक्ति।-इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ, बोर्ड या आयोजना प्राधिकार या उनके द्वारा प्राधिकृत पदाधिकारी या व्यक्ति या न्यायाधिकरण या अपीलीय प्राधिकार सिविल न्यायालय के मामले में सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में उपबंधित रीति से हितबद्ध पक्षकारों सहित साक्षियों को या उनमें से किसी को समन कर सकेगा तथा उनकी उपस्थिति प्रवर्तित करा सकेगा और उन्हें साक्ष्य देने के लिए तथा दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बाध्य कर सकेगा। 103. न्यायालयों की अधिकारिता ।-प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट से निम्नतर कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दंडनीय अपराध का विचारण नहीं करेगा। 104. वसूल किया जाने वाला जुर्माना आयोजना प्राधिकार को भुगतान किया जाना ।-इस अधिनियम के अधीन अभियोजन के सिलसिले में वसूल किए गए सभी जुर्माने संबद्ध आयोजना प्राधिकार को भुगतान किए जाएंगे। 105. सदस्यों और पदाधिकारियों का लोक सेवक होना ।-बोर्ड और प्रत्येक आयोजना प्राधिकार का हरेक सदस्य और हरेक पदाधिकारी एवं अन्य कर्मचारी भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के अंतर्गत लोक सेवक माना जाएगा। 106. सद्‌भावपूर्वक की गई कार्रवाई का संरक्षण ।-इस अधिनियम के अधीन सद्‌भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशयित किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं चलेगी। 107. आदेशों की अंतिमता ।-इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से जैसा अन्यथा उपबंधित है के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन सरकार या बोर्ड द्वारा पारित हरेक आदेश या जारी निर्देश अथवा किसी आयोजना प्राधिकार द्वारा पारित आदेश या जारी नोटिस अंतिम होगी और उसे किसी वाद में या अन्य विधिक कार्यवाही में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा। 108. कार्यो अधिनियमों और कार्यवाहियों का विधिमान्यकरण ।-(1) इस अधिनियम के अधीन किए गए किसी कार्य या की गई कार्यवाही को मात्र निम्नलिखित आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगाः- (क) बोर्ड या किसी आयोजना प्राधिकार में किसी रिक्ति की विद्‌यमानता या उसके गठन में कोई दोष ; (ख) किसी व्यक्ति का सदस्य नहीं रह जाना ; (ग) इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन बोर्ड या आयोजना प्राधिकार से संबद्ध किसी व्यक्ति द्वारा उक्त धारा का उल्लंघन कर मत दिया जाना ; अथवा (घ) किसी व्यक्ति को नोटिस तामील करने में विफलता, जहाँ ऐसी विफलता से कोई सारभूत अन्याय न हुआ हो; (ङ) ऐसा कोई लोप, त्रुटि या अनियमितता जो मामले के गुण-दोष को प्रभावित नहीं करता हो। (2) बोर्ड और किसी आयोजना प्राधिकार की हरेक बैठक को सम्यक रूप से बुलाई गई बैठक मानी जाएगी और वह सभी त्रुटियों और अनियमितता से मुक्त होगी। 109. प्रत्यायोजित करने की शक्ति ।-(1)संकल्प द्वारा बोर्ड, सरकार की पूर्वानुमति से, यह निदेश दे सकेगा कि इस अधिनियम के अधीन इसके द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली कोई शक्ति उसमें यथा विनिर्दिष्ट शर्तों; यदि कोई हो, के अध्यधीन, उसमें यथावर्णित आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार की पूर्व सहमति से, किसी आयोजना प्रााधिकार या स्थानीय प्राधिकार, समिति अथवा बोर्ड या सरकार के किसी पदाधिकारी द्वारा भी प्रयोग की जा सकेगी। (2) मुख्य नगर निवेशक, इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली किसी शक्ति को लिखित आदेश से बोर्ड या सरकार या आयोजना प्राधिकार या स्थानीय प्राधिकार के किसी पदाधिकारी को, उसमें यथा विनिर्दिष्ट मामलों में प्रयोग करने के लिए प्रत्यायोजित कर सकेगा। 110. धन उधार लेने की आयोजना प्राधिकार की शक्ति ।-विकास योजना बनाने या विकास स्कीम बनाने और उसका निष्पादन करने के लिए आयोजना प्राधिकार समय-समय पर यथा विहित धन यथा विहित ब्याज दर एवं शर्तों पर यथाविहित अवधि के लिए उधार ले सकेगा। 111. बोर्ड द्वारा नियंत्रण ।-इस अधिनियम के कुशल कार्यान्वयन के लिए बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी किए जानेवाले निदेशों का हरेक आयोजना प्राधिकार पालन करेगा।(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 32 112. कठिनाइयों का निराकरण ।-यदि इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने में कोई कठिनाई उत्पन्न हो तो राज्य सरकार अवसरानुरूप, उस कठिनाई का निराकरण करने के लिए आदेश द्वारा कुछ भी कर सकेगी या करवा सकेगी; परन्तु यह कि इस अधिनियम के आरंभ की तिथि से पाँच वर्षों की अवधि व्यतीत हो जाने पर ऐसा कोई आदेश नहीं किया जायेगा। 113. विधियों का प्रभाव ।-सिवाय यथा उपर्युक्त के, किसी अन्य विधि में उससे असंगत कोई बात होते हुए भी, इस अधिनियम के उपबंध प्रभावी होंगे।

वित्तीय संलेख

विगत कुछ वर्षो में शहरों की तेजी से प्रसार होने के फलस्वरूप एक बड़ी जनसंख्या शहरों में उपलब्ध रोजगार के बेहतर अवसर, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ, उन्न्त शिक्षा केन्द्र तथा अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए शहरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। साथ ही बिहार की अर्थव्यवस्था में विकास से राज्य में महत्वपूर्ण शहरी केन्द्रों में राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाआें की माँग बढ़ी है, जिसके फलस्वरूप उन्न्त आवासीय कॉलोनियों एवं सुढृढ़ परिवहन व्यवस्था व्यवसायिक संरचनाओं तथा एक टिकाऊ आधारभूत संरचनाओं की आवष्यकता महसूस की जा रही है। अतः इस पृष्ठभूमि में शहरों के सर्वांगीण विकास को विनियमित (Regulate) करने के उद्‌देष्य से बिहार शहरी आयोजना तथा विकास विधेयक, 2012 तैयार किया गया है। इस विधेयक के द्वारा बिहार शहरी आयोजना तथा विकास बोर्ड एवं इसके सचिवालय, आयोजना प्राधिकार तथा न्यायाधिकरण का गठन प्रस्तावित है। इसमें कर्मचारी, उपाघ्यक्ष, अघ्यक्ष एवं अन्य पदों का प्रावधान किया गया है, जिसपर राशि खर्च होगी। इसके अतिरिक्त योजना को तैयार करने/कराने पर भी राशि खर्च अवश्य संभावी होगी।

बिहार शहरी आयोजना तथा विकास विधेयक, 2012 के समुचित क्रियान्वयन एवं व्यय भार हेतु प्रस्तावित विधेयक के प्रस्ताव में वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।

(डा॰ पे्रम कुमार) भार-साधक सदस्य33 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 12 )दस+बर 2012 उद्‌देश्य एवं हेतु

बिहार राज्य में शहरीकरण की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से कम रही है। इस कारण राज्य में शहरों का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो सका। लेकिन विगत कुछ वर्षो में शहरों का तेजी से प्रसार हो रहा है। शहरों में उपलब्ध रोजगार के बेहतर अवसर, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ, उन्न्त षिक्षा केन्द्र तथा अन्य नागरिक सुविधाएँ एक बड़ी जनसंख्या को नगर केन्द्रों की ओर आकर्षित कर रहे हैं। पुनः बिहार की अर्थव्यवस्था के अभूतपूर्व विकास से राज्य में महत्वपूर्ण शहरी केन्द्रों में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं की मांग बढ़ी हैं। इसमें उन्नत आवासीय कॉलोनियों, सुदृढ़ परिवहन व्यवस्था, व्यवसायिक संरचनाओं तथा टिकाऊ आधारभूत संरचना (Sustainable infrastructure) की आवष्यकता महसूस की जा रही है। लेकिन सुनियोजित शहरी विकास योजना के अभाव में बड़े शहरों में आवासीय व व्यवसायिक संरचनाओं का बेतरतीब निर्माण हो रहा है। इससे शहरी आधारभूत संरचना तंत्र (Urban Infrastructure system) पर दवाब बढ़ा है।

उपर्युक्त पृष्ठभूमि में बिहार में शहरों के सुनियोजित तथा विनियमित (Regulated) विकास की आवश्यकता है। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए ''बिहार शहरी आयोजना तथा विकास विधेयक, 2012'' का प्रारूप तैयार किया गया है। विधेयक का लक्ष्य राज्य के वर्त्तमान शहरी क्षेत्रों तथा शहरी विकास की क्षमता वाले अन्य क्षेत्रों के योजनाबद्ध विकास का प्रावधान करना है। साथ ही, इन क्षेत्रों में भूमि उपयोग तथा अन्य शहरी विषयों को विनियमित करना भी विधेयक का उद्‌देश्य है। इस विधेयक के प्रभाव में आने से शहरों में योजनाबद्ध आवासीय व व्यवसायिक विकास के साथ-साथ बेहतर नागरिक सुविधाओं यथा चौड़ी सड़कों, सुढृढ़ ड्रेनेज व सिवरेज तंत्र, पार्क, हरित-क्षेत्र, सामुदायिक भवन, विरासत भवनों के बेहतर संरक्षण आदि का प्रावधान करना ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है तथा अधिनियमित करना ही इस विधेयक का अभीष्ट है।

(डा॰ पे्रम कुमार)

भार-साधक सदस्य

लक्ष्मीकान्त झा पटना,

प्रभारी सचिव दिनांक 03 दिसम्बर, 2012

बिहार विधान-सभा।

————— अधी,क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु)ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 660-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 12 December 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-12-12.660/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-12-12.660.