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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 19 December 2012

Published 19 December 2012

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2012-12-19.51
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 28282828 अमहायणअमहायणअमहायणअमहायण 1931931931934444 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 51515151 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ————————

19191919 *दस,ब*दस,ब*दस,ब*दस,बरररर 2020202011112222 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)5, पदःथापन, बदली, श(cid:18)5, छु :ट(cid:15) और अ<य =य(cid:18)5गत सूचनाएं। ---

भाग-1-क—ःवयंसेवक गुAमC के समादेंटाओं के आदेश।

---

भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Lाओं के पर(cid:15)Lा-फल, कायNबम, छाऽवृ(cid:18)Q ूदान, आ*द।

---

भाग-1-ग—िशLा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Lाफल आ*द ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राRयपाल और कायाNSयLC (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आ*द। 2-2 भाग-3—भारत सरकार, पTUम बंगाल सरकार और उWच <यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राRय गजटC के उYरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत *कये जानेवाले ूवर सिमितयC के ूितवेदन और उ\त (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथापन के पूवN ूकािशत (cid:18)वधेयक।

---

भाग-7—संसद के अिधिनयम Tजनपर रांशपित क^ Rयेंठअनुमित िमल चुक^ है। ---

भाग-8—भारत क^ संसद मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयC के ूितवेदन और संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयC के ूितवेदन और संसद मZ पुर:ःथापन के पूवN ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व_ापन

---

भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क^ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प`रवहन सूचनाएं, <यायालय सूचनाएं और सवNसाधारण सूचनाएं इaया*द। 3-5 पूरक

---

पूरक-क 6-132 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 भागभागभागभाग----2222

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राRयराRयराRयराRयपाल और कायाNSयपाल और कायाNSयपाल और कायाNSयपाल और कायाNSयLC (cid:24)ाLC (cid:24)ाLC (cid:24)ाLC (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमरा िनकाले गये (cid:18)विनयमरा िनकाले गये (cid:18)विनयमरा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , , अिधसूचनाएं और िनयम आ*द।अिधसूचनाएं और िनयम आ*द।अिधसूचनाएं और िनयम आ*द।अिधसूचनाएं और िनयम आ*द।

ÑÑÑÑÑ सं॰ टी0 2/नामां0(अप0)-26/2007-2944 श्रम संसाधन विभाग निदेशालय नियोजन एवं प्रषिक्षण, बिहार, पटना ——— संकल्प 26 नवम्बर 2012 विषयः-औ0 प्र0 संस्थान, दीघाघाट (पटना) के लिए ''स्टीयरिंग कमिटी'' का पुनर्गठन। श्रम संसाधन विभाग के संकल्प संख्या-3926, दिनांक 17.11.2008 द्वारा जन-निजी-भागीदारी (पी0पी0पी0) माध्यम से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, दीघाघाट, पटना के आधुनिकीकरण एवं उन्नयन हेतु बी0 आई0 टी0 मेसरा के साथ समझौता पत्र निष्पादन हेतु गठित ''स्टीयरिंग कमिटी'' का कार्यकाल दिनांक 17.11.2011 को समाप्त होने के कारण निम्नलिखित रुप से ''स्टीयरिंग कमिटी'' का पुनर्गठन किया जाता हैः-

1. प्रधान सचिव, श्रम संसाधन विभाग, बिहार, पटना अध्यक्ष
2. औ0 प्र0 संस्थान, दीघाघाट (पटना) के लिए गठित संस्थान प्रबन्धन समिति के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा मनोनित प्रतिनिधि विशेष-आमंत्रित
3. निदेशक, नियोजन एवं प्रशिक्षण, बिहार, पटना सदस्य सचिव
4. अपर वित्त आयुक्त अथवा वित्त विभाग द्वारा मनोनित प्रतिनिधि जो संयुक्त सचिव स्तर से अन्यून हो सदस्य
5. महानिदेशक, डी0जी0ई0टी0, भारत सरकार अथवा उनके मनोनित प्रतिनिधि सदस्य
6. श्री उत्तम सिंह, जाकिर हुसैन संस्थान, पटना (व्यवसायिक प्रशिक्षण के विशेषज्ञ) सदस्य
7. अध्यक्ष/महासचिव, बिहार राज्य इण्डस्ट्रीज ऐसोसिएशन, पटना सदस्य
8. श्री बिनोद हिसारिया, कनिष्का कार्वन्स प्रा0 लि0, चम्पा निवास, मारवाड़ी मुहल्ला, वेगूसराय (उद्योगों के प्रतिनिधि) सदस्य
9. शाखा प्रबंधक, इन्डियन टुबैको इण्डस्ट्रीज, मुंगेर, (उद्योगों के प्रतिनिधि) सदस्य

2. इस समिति का कार्यकाल तीन वर्ष अथवा सरकार द्वारा विघटित/पुनर्गठित किए जाने तक, जो भी पहले घटित हो, होगा। समझौता पत्र के आलोक में सरकार द्वारा समिति को समय-समय पर पुनर्गठित किया जाता रहेगा।

3. इस समिति के बैठक में कम से कम छः सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिसमें समिति के अध्यक्ष, सदस्य-सचिव एवं संस्थान प्रबंधन समिति दीघाघाट (पटना) के अध्यक्ष अथवा उनके मनोनित प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

4. समिति के कार्य एवं दायित्व वही होगें जो सरकार एवं बी0 आई0 टी0, मेसरा के बीच निष्पादित समझौता पत्र में परिभाषित है ।

5. यह आदेश निर्गत की तिथि से प्रभावी होगा।

आदेष- आदेश दिया जाता है कि सर्वसाधारण को सूचनार्थ। सरकारी राजपत्र में इस संकल्प को प्रकाशित किया जाए और सभी संबंधित लोगों को इसकी एक प्रति दी जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

ÑÑÑÑ अधीLकअधीLकअधीLकअधीLक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मु*ित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मु*ित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मु*ित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मु*ित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 40ÑÑÑÑ571+50----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in3 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012

भागभागभागभाग----9999((((खखखख))))

और सवNसाधारण सूचनाएं इaयाऔर सवNसाधारण सूचनाएं इaयाऔर सवNसाधारण सूचनाएं इaयाऔर सवNसाधारण सूचनाएं इaया*द।*द।*द।*द।

ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

सूचनासूचनासूचनासूचना

No. 2076— I,Adil S/o Kalimur Rahman, R/o-Nav Gharwa Sultanganj Patna-6 changed name to Adil Rahman vide Affidavit no. 17223 dated 05-01-2012.

ADIL.

——— अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना । ——— निविदा सूचनानिविदा सूचनानिविदा सूचनानिविदा सूचना सं॰16303—वर्ष 2012-13 में पटना चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल, पटना के अन्र्तवासीय रोगियों को पथ्य आपूर्ति हेतु खाद्य सामग्री/फल एवं सब्जियाँ इत्यादि सामानों के क्रय हेतु निविदा प्रकाशन की तिथि से 21 (एक्कीस) दिनों के अन्दर निबंधित डाक अथवा स्पीड पोस्ट से बिहार वाणिज्य-कर में निबंधित निर्माता/आपूर्तिकर्त्ता/प्राधिकृत विक्रेता से आमंत्रित किया जाता है। इस निविदा से संबंधित सभी जानकारियाँ बिहार सरकार के वेबसाइट सं॰-www.prdbihar.org एवं पी॰एम॰सी॰एच॰ के वेब साइट सं॰-www.pmch.in पर निविदा प्रकाशन के तिथि के पश्चात्‌ प्राप्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त निविदा प्रकाशन के पश्चात्‌ किसी भी कार्य दिवस को क्रय शाखा से निविदा शर्त्त एवं सूची प्राप्त किया जा सकता है।

निविदा शर्त्त एवं सामग्रियों की सूची :-निविदा शर्त्त एवं सामग्रियों की सूची :-निविदा शर्त्त एवं सामग्रियों की सूची :-निविदा शर्त्त एवं सामग्रियों की सूची :- 1. निविदा दो प्रकार की होगी-तकनीकी एवं वित्तीय। दोनों ही निविदा अलग-अलग लिफाफे में टंकित एवं मुहरबन्द होगा। एक लिफाफे में दोनों निविदा देने पर वह स्वतः रद्द समझा जायेगा। तकनीकी एवं वित्तीय लिफाफे पर निविदादाता स्पष्ट रूप से निविदा का विषय अंकित करेंगे।

2. निविदादाता का नाम, पूरा पता एवं दूरभाष संख्या निविदा में अंकित करना होगा। 3. निविदादाता को बिहार वाणिज्य-कर में निबंधित होना चाहिए एवं दर अनुमोदन के पश्चात्‌ वाणिज्य-कर से प्राप्त अद्ययत्तन प्रमाण-पत्र अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय में जमा करना होगा।

4. सभी निविदादाता को फुड लाईसेंस से संबंधित प्रमाण-पत्र एवं अद्यतन संलग्न करना होगा। 5. आपूर्तिकर्त्ता/प्राधिकृत विक्रेता को निर्माता द्वारा निर्गत प्राधिकृत पत्र संलग्न करना होगा एवं निर्माता का फुड लाईसेंस एवं उद्योग विभाग से संबंधित प्रमाण-पत्र एवं अद्यतन भी संलग्न करना होगा।

6. निर्माताओं के लिए उद्योग विभाग का पंजीयन पत्र एवं अद्यतन कार्यरत रहने का प्रमाण-पत्र निविदा के साथ संलग्न करना अनिवार्य है। उन्हें फुड हैन्डलिंग लाइसेंस की छायाप्रति संलग्न करना होगा।

7. अग्रधन के रूप में 20,000/- (बीस हजार) रुपये का बैंक ड्राफ्ट/एन॰एस॰सी॰ जो अधीक्षक, पी॰एम॰सी॰एच॰, पटना के पदनाम से प्रतिभूत होगा तकनीकी निविदा में संलग्न करना होगा। 8. निविदा टंकित एवं मुहरबंद होगा। हस्तलिखित निविदा पर विचार नहीं किया जायेगा। 9. भारत अथवा बिहार सरकार के उपक्रम इस निविदा में भाग लेना चाहेंगे। 10. निविदादाता को सबंधित निविदा के लिए किसी क्रिमिनल केस अथवा किसी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थान के द्वारा दंडित नहीं किये गये हैं, इस आशय का शपथ पत्र (मूल रूप में) कार्यपालक दण्डाधिकारी के माहध्यम से प्राप्त कर निविदा में संलग्न करना होगा।

उपरोक्त सभी कागजात तकनीकी निविदा के साथ संलग्न करना है। 11. वित्तीय निविदा में सामग्री का नाम एवं दर अंकित करना है। इसके अतिरिक्त कुछ नहीं रहेगा। 12. किसी भी विवाद का न्यायिक क्षेत्र पटना होगा। 13. अधोहस्ताक्षरी को बिना कारण बताये किसी भी निविदा को आवश्यकतानुसार आंशिक या पूर्णतः अस्वीकृत करने का पूर्ण अधिकार सुरक्षित होगा।4 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 14. दर अनुमोदित के पश्चात्‌ सामानों की आपूर्ति पथ्य शाखा, पी॰एम॰सी॰एच॰, पटना में करने हेतु अलग से कोई शुल्क देय नहीं होगा और उन्हें रसोई घर में सुबह 7 बजे सामान आपूर्ति करना होगा। 15. निविदा में अनुमोदित आकार एवं गुणवत्ता युक्त सामग्री नहीं पाये जाने पर अधोहस्ताक्षरी द्वारा आर्थिक दण्ड किया जायेगा।

खाद्य सामग्री खाद्य सामग्री, फल एवं सब्जियाँ

1. आलू - प्रति किलो की दर से 2. प्याज - ,, 3. टमाटर - ,, 4. परवल - ,, 5. कद्‌दू - ,, 6. नेनुआ - ,, 7. फूलगोभी - ,, 8. बन्धागोभी - ,, 9. पालक साग - ,, 10. लाल साग - ,, 11. सलजम - ,, 12. भिन्डी - ,, 13. बैंगन - ,, 14. नारंगी - 18 से॰मी॰ से 21 से॰मी॰ गोलाई- प्रति किलो 15. मोसम्मी - 18 से॰मी॰ से 21 से॰मी॰ गोलाई- प्रति किलो 16. सेब कश्मीरी एवं हिमाचल - 18 से॰मी॰ से 21 से॰मी॰ गोलाई- प्रति किलो 17. आम (सिपिया/मालदह) - 18 से॰मी॰ से 21 से॰मी॰ गोलाई- 18. हरा मिर्च - प्रति किलो की दर से 19. आदी - ,, 20. बोरो - ,, 21. सीम - ,, 22. करैला - ,, 23. कच्चा केला - प्रति दर्जन की दर से 24. कागजी नींबू - प्रति दर्जन की दर से 25. केला चीनिया - 8 से 10 से॰मी॰ लम्बाई-प्रति दर्जन 26. हरा छाल केला - 10 से 12 से॰मी॰ लम्बाई-प्रति दर्जन (ह॰)-अस्पष्ट,

स्थान :- पटना दिनांक :- 10 दिसम्बर 2012 अधीक्षक।

——— अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय,अधीक्षक का कार्यालय, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल, पटना । निविदा सूचनानिविदा सूचनानिविदा सूचनानिविदा सूचना सं॰16302—वर्ष 2012-13 में पटना चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल, पटना के प्रयोजनार्थ चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी (पुरूष एवं महिला) एवं चालक के लिए वर्दी एवं चमडे़ का जुता एवं चप्पल के ÿय हेतु बिहार वाणिज्य-कर में निबंधित निर्माता/प्राधिकृत विÿेता/आपूर्तिकर्त्ता से निविदा प्रकाशन की तिथि से 21 (इक्कीस) दिनों के अन्दर निबंधित डाक अथवा स्पीड पोस्ट के द्वारा निविदा आमंत्रित किया जाता है। इस निविदा से संबंधित सभी जानकारियाँ बिहार सरकार के वेबसाइट सं॰-www.prdbihar.gov.in एवं पी॰एम॰सी॰एच॰ के वेबसाइट सं॰- www.pmch.in पर निविदा प्रकाशन के तिथि के पश्चात्‌ प्राप्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त निविदा प्रकाशन के पश्चात्‌ किसी भी कार्य दिवस को क्रय शाखा से निविदा शर्त्त एवं सूची प्राप्त किया जा सकता है। निविदा शर्त्त एवं सामग्रियों की सूची :-निविदा शर्त्त एवं सामग्रियों की सूची :-निविदा शर्त्त एवं सामग्रियों की सूची :-निविदा शर्त्त एवं सामग्रियों की सूची :-

1. निविदा दो प्रकार की होगी-तकनीकी एवं वित्तीय। दोनों निविदा अलग-अलग लिफाफे में टंकित एवं मुहरबन्द होगा। एक लिफाफे में दोनों निविदा देने पर वह स्वतः रद्द समझा जायेगा। तकनीकी एवं वित्तीय लिफाफे पर निविदादाता स्पष्ट रूप से निविदा का विषय अंकित करेंगे।

2. निविदादाता का नाम, पूरा पता एवं दूरभाष संख्या निविदा में अंकित करना होगा। 3. निविदादाता को बिहार वाणिज्य-कर में निबंधित एवं बेडिंग क्लोथिंग से संबंधित कार्यों का बिहार वाणिज्य-कर में निबंधित होना अनिवार्य है, जिसे तकनीकी निविदा के साथ संलग्न करना होगा।5 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 4. निर्माताओं के लिए उद्योग विभाग का पंजीयन पत्र एवं अद्यतन कार्यरत रहने का प्रमाण-पत्र निविदा के साथ संलग्न करना अनिवार्य है।

5. अग्रधन के रूप में 25,000/- (पच्चीस हजार) रुपये का बैंक ड्राफ्ट/एन॰एस॰सी॰ जो अधीक्षक, पी॰एम॰सी॰एच॰, पटना के पदनाम से प्रतिभूत होगा तकनीकी निविदा में संलग्न करना होगा। 6. निविदा टंकित एवं मुहरबंद होगा। हस्तलिखित निविदा पर विचार नहीं किया जायेगा। 7. भारत अथवा बिहार सरकार के उपक्रम इस निविदा में भाग ले सकते है। 8. निविदादाता किसी क्रिमिनल केस अथवा किसी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थान के द्वारा दंडित नहीं किये गये हैं, इस आशय का शपथ पत्र (मूल रूप में) कार्यपालक दण्डाधिकारी के माहध्यम से प्राप्त कर निविदा में संलग्न करना होगा।

उपरोक्त सभी कागजात तकनीकी निविदा के साथ संलग्न करना है। 9. वित्तीय निविदा में सामग्री का नाम एवं दर (अंक एवं अक्षर) अंकित करना है। इसके अतिरिक्त कुछ नहीं रहेगा।

10. किसी भी विवाद का न्यायिक क्षेत्र पटना होगा। 11. अधोहस्ताक्षरी को बिना कारण बताये किसी भी निविदा को अस्वीकृत करने का पूर्ण अधिकार सुरक्षित होगा। 12. बिहार वाणिज्य-कर का अद्ययतन प्रमाण-पत्र निविदा स्वीकृति के पश्चात भुगतान से पूर्व अधोहस्ताक्षरी कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा।

सूचीः-सूचीः-सूचीः-सूचीः- 1. टेरीकौट कपड़ा पैन्ट के लिए 2. पोलिस्टर/टेरीकोटन कपड़ा कमीज के लिए 3. साड़ी 4. ब्लाउज का कपड़ा सुती (उजला) 5. पेटीकोट का कपड़ा सुती (उजला) 6. पुरूष के लिए टोपी 7. चमड़े का चप्पल, सभी साईज (पुरूष एवं महिला) 8. चालकों के लिए सफारी आसमानी रंग का कपड़ा। 9. चमडें का जुता, सभी साईज (पुरूष एवं महिला) 10. उनी मोजा 11. कोट पैन्ट का कपड़ा (उलेन) 12. उलेन स्वेटर (महिला एवं पुरूष कर्मचारी)

स्थान :- पटना दिनांक :- 10 दिसम्बर 2012

(ह॰)-अस्पष्ट, अधीक्षक।

ÑÑÑÑ अधीLकअधीLकअधीLकअधीLक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मु*ित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मु*ित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मु*ित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मु*ित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 40ÑÑÑÑ571+10----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in6 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट काकाकाका पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000)))) ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत

ÑÑÑÑÑ

समाहरणालय, मुंगसमाहरणालय, मुंगसमाहरणालय, मुंगसमाहरणालय, मुंगेरेरेरेर

(जिला स्थापना 'ााखा)

——— आदेश

28 अगस्त 2012

सं0 1167—अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्राक 105/दिनांक 23.06.2004 के द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि श्री अजय कुमार लिपिक, अंचल कार्यालय संग्रामपुर दिनांक 21.05.2004 से बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यालय से अनाधिकृत रूप से अनुपिस्थत है। जिस पर इस कार्यालय के ज्ञापांक 785/स्था0 दिनांक 04.09.2004 के द्वारा श्री अजय कुमार को निलंबित करते हुए निलंवन अवधि में इनका मुख्यालय धरहरा प्रखंड कार्यालय निर्धारित किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी, तारापुर के पत्रांक-132 दिनांक 03.05.2005 के द्वारा श्री अजय कुमार लिपिक का प्रपत्र 'क' उपलब्ध कराया गया जिसे अनुमोदित करते हुए इस कार्यालय के आदेष ज्ञापांक-439/स्था0 दिनांक 18.05.2005 के द्वारा श्री दीपक कुमार साहु, कार्यापालक दण्डाधिकारी तारापुर अनुमंडल को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया तथा अंचल अधिकारी संग्रामपुर को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्ति किया गया। पुनः इस कार्यालय के ज्ञापांक-628/स्था0 दिनांक 22.06.2005 के द्वारा दिनांक 31.05.2005 को स्थापना समिति की बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में श्री कुमार, लिपिक को निलंबन से मुक्त करते हुए अंचल कार्यालय सदर मुंगेर में पदस्थापित किया गया। अंचल अधिकारी, सदर मुंगेर के पत्रांक 233 दिनांक 23.08.2008 के द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के ज्ञापांक 139 दिनांक 11.07.2005 के द्वारा श्री कुमार विरमित होकर दिनांक 12.07.2005 को अंचल कार्यालय सदर मुंगेर में अपना योगदान दिया गया योगदान के पश्चात्‌ दिनांक 06.08.2005 से 09.08.2005 तक अवकाष स्वीकृत कराकर लगातार अनुपस्थित होने की सूचना दी गई। तदोपरान्त इस कार्यालय के पत्रांक 979/स्था0 दिनांक 06.09.2005 के द्वारा श्री कुमार लिपिक, के विरूद्ध प्रपत्र 'क' की मांग की गई। अंचल कार्यालय सदर मुंगेर के पत्रांक 520 दिनांक 11.11.2005 के द्वारा श्री अजय कुमार, लिपिक का प्रपत्र-'क' प्राप्त हुआ जिसे अनुमोदन करते हुए विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु इस कार्यालय के पत्रांक 1171/स्था0, दिनांक 06.12.2005 के द्वारा श्री दीपक कुमार साहू, कार्यापालक दण्डाधिकारी-सह-संचालन पदाधिकारी तारापुर को संचालन पदाधिकारी एवं अचंल अधिकारी, सदर मुंगेर को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। इस कार्यालय के पत्रांक 256/स्था0 दिनांक 18.03.2006 के द्वारा श्री दीपक कुमार साहू, कार्यापालक दण्डाधिकारी तारापुर का स्थानान्तरण होने के फलस्वरूप श्री राज किषोर लाल, कार्यापालक दण्डाधिकारी, तारापुर को संचालन पदाधिकारी नियुक्ति किया गया।

पुनः इस कार्यालय के ज्ञापांक-721/स्था0 दिनांक 10.09.2007 के द्वारा श्री राज किषोर लाल, कार्यापालक दण्डाािकारी, तारापुर का स्थानान्तरण होने के फलस्वरूप श्री राधाकान्त कार्यापालक दण्डाधिकारी (तारापुर) को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया।

कार्यापालक दण्डाधिकारी तारापुर-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 1680 दिनांक 29.12.2007 के द्वारा श्री अजय कुमार, लिपिक के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही सम्पन्न कर अभिलेख उपलब्ध कराया गया है। जिसका विवरण निम्न प्रकार हैः-

आरोपी का स्पष्टीकरणः-''आरोपी का स्पष्टीकरणः-''आरोपी का स्पष्टीकरणः-''आरोपी का स्पष्टीकरणः-''यह की मेरे विरूद्ध अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित होने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध मेें कहना है कि मै जान बुझकर कार्यालय से अनुपस्थित नहीं रहा। अपने वृद्ध पिता की ईलाज एवं देख रेख तथा अपना इलाज के क्रम में इतनी लम्बी अवधि तक कार्यालय से अनुपस्थित रहा।''7 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः-संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः-संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः-संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः- ''आरोपी श्री अजय कुमार, लिपिक, के विरूद्ध प्राप्त आरोप पत्र तथा उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण तथा विभागीय कार्यवाही के दौरान प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि श्री कुमार अपने कर्त्तव्य से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित तथा सरकारी कार्यो के प्रति उदासीन है।''

इस कार्यालय के पत्रांक 1038/स्था0 दिनांक 21.12.2009 के द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी परन्तु इसका प्रतिउत्तर श्री कुमार द्वारा नहीं दिया गया, तदोपरान्त पुनः कार्यालय के पत्रांक 610 दिनांक 29.05.2010 द्वारा प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से श्री कुमार को सूचित किया गया कि 15 दिनों के अन्दर अपना कारण पृच्छा समर्पित करें। निर्धारित तिथि तक अगर स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है तो समझा जायेगा कि आरोपों के संबंध में कुछ नहीं कहना है तथा संचालन पदाधिकारी के मंतव्य एवं विभागीय कार्यवाही में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर अंतिम आदेष पारित कर दिया जायेगा। परन्तु श्री कुमार द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में प्रकाषित सूचना के बावजूद भी द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउत्तर समर्पित नहीं किया।

पुनः इस कार्यालय के पत्रांक 739/स्था0, दिनांक 31.05.2012 के द्वारा अंचल अधिकारी सदर मुंगेर से श्री अजय कुमार वर्त्तमान समय में क्या करते है कहाँ रहते है का स्थलीय जाँच प्रतिवेदन की मांग की गई जिसके क्रम में अंचल अधिकारी के पत्रांक 550, दिनांक 02.06.2012 के द्वारा स्थलीय जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा सूचित किया गया कि उनके नव निर्मित मकान में ताला लगने, उनके पड़ोसी श्री बजरंगी यादव, पे0-स्व0 ईष्वरी यादव, मिठु कुमार पिता-कृष्णदेव यादव एवं अन्य के द्वारा बताया गया कि श्री अजय कुमार लिपिक का कोई परिवार वर्त्तमान समय में शरण सिंह टोला नौवागढ़ी, मुंगेर में वर्षो से नही रह रहे एवं उनके पिता स्टील प्लांट बोकारो में कार्यरत होने एवं पिता की मृत्यु के पश्चात्‌ बोकारो में सपिरवार रहकर अपना कार्यवार करने का प्रतिवेदन समर्पित किया गया, तत्तपष्चात्‌ पुनः इस कार्यालय के ज्ञापांक 765/स्था0, दिनांक 05.06.2012 के द्वारा स्थायी पता एवं वर्त्तमान पता पर विषेषदूत भेजकर द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।

वर्त्तमान पता-श्री विष्णुदेव प्रसाद यादव, क्वाटर नं0-01-306-ए.सेक्टर II C, बोकारो स्टील सिटी बोकारो में विषेषदूत दिनांक 14.06. 2012 को पहूँचा जिसमें विषेषदूत द्वारा सूचित किया गया कि अजय कुमार क्वार्टर में उपस्थित नहीं थे, उक्त क्वाटर का मुख्य दरवाजा पष्चिम में है दोनो दरवाजा अन्दर से ताला बन्द पाया अन्दर कोई व्यक्ति नहीं था। श्री कुमार का द्वितीय कारण पृच्छा का नोटिस क्वार्टर नं0 01-306 के दरवाजा में मेरे द्वारा चिपकाया गया नोटिस चिपकाने समय क्वाटर नं0-01-305 के विजय कुमार के पत्नी एवं क्वाटर नं0-01-307 के गुदरी राम उपस्थित थे दोनो पड़ोसी द्वारा ग्वाह पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने एवं पड़ोसी के द्वारा अजय कुमार के बारे में पूछने पर बताया कि श्री कुमार बहन की मृत्यु हो जाने के कारण अपने गांव गये है, स्थायी पता पर भेजे गये विषेषदूत के द्वारा सूचित किया गया कि शरण सिंह टोला नौवागढ़ी गये वहाँ पर अगल-बगल के लोगो से पूछताछ किया एवं उनके चाचा श्री कृष्णदेव यादव जो टेटियाबम्बर प्रखंड में सहायक के पद पर कार्यरत है के द्वारा बताया गया कि अजय कुमार सभी परिवार बोकारो मेंं रहते है उनके मकान दक्षिण मुह का दरवाजा है सामने दिवाल पर नोटिस चिपकाया गया ग्वाह के रूप में कोई हस्ताक्षर करने को तैयार नही हुए।

निष्कर्षः-निष्कर्षः-निष्कर्षः-निष्कर्षः- श्री अजय कुमार, लिपिक, सदर अंचल मुंगेर के विरूद्ध लगाये गये आरोप, उपलब्ध साक्ष्य, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन, द्वितीय कारण-पृच्छा का प्रतिउत्तर समर्पित नहीं किया जाना तथा संचिका में पोषित कागजातों पर सम्य्‌क विचारोपरान्त श्री कुमार लिपिक द्वारा लम्बी अवधि से अनाधिकृत अनुपस्थिति का आरोप प्रमाणित होता है, ऐसी स्थिति में वे सरकारी सेवा में बने रहने योग्य नहीं है तथा इन्हे कठोरतम दण्ड देने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा है।

अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एंव अपील) नियामावली-2005 (यथा संषोधित 2007) के नियम-14 (x) में निहित शास्तियाँ के आलोक में प्रमाणित आरोप के कारण मैं श्री कुलदीप नारायण, भा0प्र0से0 जिला पदाधिकारी, मुंगेर श्री अजय कुमार लिपिक, अंचल कार्यालय सदर मुंगेर को आदेष निर्गत की तिथि से सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismiss) करता हूँ।

श्री अजय कुमार, लिपिक से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्न प्रकार हैः- श्री अजय कुमार, लिपिक से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्न प्रकार हैः- श्री अजय कुमार, लिपिक से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्न प्रकार हैः- श्री अजय कुमार, लिपिक से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्न प्रकार हैः-

1. नामः- श्री अजय कुमार 2. पिता का नामः- श्री विष्णुदेव प्रसाद यादव 3. पदनामः- नि0व0लिपिक 4. जन्म तिथिः- 10.01.1971 5. नियुक्ति तिथिः- 17.02.2004 6. वेतममानः- 5200-202002400 7. स्थायी पताः- ग्राम-षरण सिंह टोला पोस्ट-नौवागढ़ी थाना-मुफसिल जिला-मुंगेर 8. वर्त्तमान पताः- श्री विष्णुदेव यादव, क्वाटर नं0-01,306 ए-सेक्टर-II-सी0 बोकारो स्टील सिटी (झारखण्ड)

आदेश से, (ह0)-अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी, मुंगेर।8 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012

समाहरणालय, मुंगेरसमाहरणालय, मुंगेरसमाहरणालय, मुंगेरसमाहरणालय, मुंगेर

(जिला स्थापना 'ााखा)

——— आदेश

26 सितम्बर 2012

सं0 1384—श्री अजय कुमार झा, राजस्व कर्मचारी के पद पर नियुक्त होकर दिनांक 13.03.1991 से कार्यरत थे। इनका प्रथम पदस्थापन अंचल कार्यालय सदर मुंगेर में था।

अंचल कार्यालय सदर मुंगेर में कार्यरत रहने की अवधि में अंचल अधिकारी, सदर मुंगेर के पत्रांक 710, दिनांक 16.08.1997 द्वारा श्री झा के विरूद्ध निम्नांकित आरोप गठित करते हुए इन्हे निलंबन कार्यवाही हेतु अपर समाहर्त्ता, मुंगेर को प्रस्ताव भेजा गया। आरोप का विवरण नीचे निम्न प्रकार है :-

1. राजस्व संग्रह के प्रति उदासीनता 2. सप्ताहिक बैठक में भाग नही लेना 3. अनाधिकृत अनुस्थिति 4. सरकारी दायित्यों के निष्पादन में उदासीनता एवं कार्य षिथिलता 5. कार्यालय आदेष का उल्लंघन

श्री झा के विरूद्ध बार-बार उक्त आरोपों के कारण समाहर्त्ता, मुंगेर के आदेष ज्ञापांक 1082/स्था0, दिनांक 09.12.1997 द्वारा श्री झा,राजस्व कर्मचारी, को तत्कालिक प्रभाव से निलम्बित किया गया, इस संदर्भ में श्री झा के अभ्यावेदन, दिनांक 18.02.1999 पर विचार करते हुए अपर समाहर्त्ता, मुंगेर के आदेष ज्ञापांक 76/स्था0, दिनांक 20.02.1999 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए उन्हें संग्रामपुर अंचल में पदस्थापित किया गया।

अंचल अधिकारी, सदर मुंगेर के ज्ञापांक 120/दिनांक 09.05.1999 के आलोक में दिनांक 14.05.1999 के अपराह्‌न में विरमित होने के पश्चात्‌ श्री झा द्वारा दिनांक 22.05.1999 को अंचल कार्यालय संग्रामपुर में योगदान दिया गया।

अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के ज्ञापांक 201/दिनांक 24.05.99 द्वारा हल्का का प्रभार लेने हेतु श्री झा को आदेष दिया गया, लेकिन प्रभार ग्रहण नहीं करने तथा सप्ताहिक बैठक में भाग नहीं लेने एवं दिनांक 24.05.99 से 29.05.99 तक सम्पर्क में नहीं रहने के कारण अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के ज्ञापांक 277/दिनांक 29.05.99 द्वारा श्री झा से स्पष्टीकरण की मांग की गई। इसके बाद श्री झा का दिनांक 25.05.99 से 03.06. 1999 तक बिना किसी सूचना के मुख्यालय से बाहर रहने के संबंध में अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्रांक 287, दिनांक 04.06.1999 द्वारा उच्चाधिकारी को संसुचित किया गया। पुनः अंचल अधिकारी, संग्रामपुर पत्रांक 332, दिनांक 19.06.1999 द्वारा श्री झा का दिनांक 25.05.99 से लगातार 19.06.99 तक अनुपस्थित रहने की सूचना प्रतिवेदित की गई।

श्री झा द्वारा दिनांक 21.06.99 को अंचल अधिकारी, संग्रामपुर को एक आवेदन पत्र दिनांक 25.05.99 से लगातार 20.06.99 तक उपार्जित अवकाष स्वीकृत करने हेतु अनुरोध किया गया, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि वयोवृद्ध माँ की बीमारी की सूचना उन्हें दूरभाष पर मिली थी।

प्रभार सूची समर्पित नहीं किये जाने के कारण अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के ज्ञापांक 493, दिनांक 04.08.99 द्वारा दिनांक 05.08.99 तक कार्यालय में प्रभार सूची देने हेतु श्री झा को आदेष दिया गया।

श्री विवेकानन्द मिश्र ,अंचल निरीक्षक, संग्रामपुर द्वारा अंचल अधिकारी, संग्रामपुर को दिनांक 14.08.99 को यह प्रतिवेदित किया गया कि श्री झा बिना कोई आवेदन के दो सप्ताहिक बैठक यथा 07.08.99 एवं 14.08.99 को अनुपस्थित है, जिसके चलते हल्का नं0-3 का राजस्व एवं विविध कार्य ठप्प है। तदनुसार अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्रांक 534/दिनांक 18.08.1999 द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, खड़गपुर को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया।

इसके बाद भी अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्रांक क्रमषः 580/दिनांक 01.09.1999, 700/दिनांक 20.11.1999, 701/दिनांक 20. 11.1999 तथा 731/दिनांक 11.12.1999 द्वारा श्री झा का लगातार अनुपस्थिति के संबंध में सूचित किया जाता रहा तथा पत्रांक 323/दिनांक 14. 09.2000 द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि एक वर्ष पूर्व अंचल में योगदान के पश्चात्‌ दो माह कार्य करने के बाद श्री झा दस माह से गायब है। अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्रांक 253/दिनांक 26.09.2001 द्वारा श्री झा के विरूद्ध गठित प्रपत्र 'क' प्रेषित करते हुए यह प्रतिवेदित किया गया कि श्री झा दिनांक 22.05.1999 को योगदान दिये एवं उसके बाद प्रायः अनुपस्थित रहे। पुनः अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्रांक 106/दिनांक 23.06.2004 द्वारा सूचित किया गया कि श्री झा बिना किसी पूर्व सूचना के कई वर्षो से अनुपस्थित है।

अन्ततः अनुमंडल पदाधिकारी, तारापुर के पत्रांक 931/गो0 दिनांक 06.12.2006 द्वारा यथोचित प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ। उक्त प्रपत्र 'क' पर आधारित आरोप में यह उल्लेख है किः-

1. दिनांक 22.05.1999 को योगदान देने के उपरान्त दिनांक 25.05.99 से 30.06.99 तक बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहे।

2. दिनांक 29.07.99 से 31.07.99 तक आकस्मिक अवकाष पर जाने के उपरान्त दिनांक 28.11.2006 तक बिना किसी सूचना के अनुपस्थित है।

3. इस प्रकार श्री झा लगभग सात वर्षो से भी अधिक अवधि से अनाधिकृत रूप से अनुुपस्थित है। 4. श्री झा का इतने लम्बे समय से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहना उनके आचरण पर भी प्रष्नचिन्ह है।9 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 उपर्युक्त वर्णित वर्ष 1997 में सदर अंचल, मुंगेर मेें तथा वर्ष 1999 से आज तक के आरोपों एवं आचरण का विवेचना करते हुए श्री झा के कृत्यों के अवलोकन के पश्चात्‌ विगत सात वर्षो से भी अधिक समय से अनाधिकृत रूप से अपने कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहने के कारण श्री झा को सेवा से बर्खास्त करने की दिषा में कार्रवाई करने की सूचना श्री झा को घर के पता से पत्र भेजते हुए उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गई जो इस कार्यालय के ज्ञापांकः-462/स्था0,दिनांक 10.07.2007 के द्वारा निर्गत है, जिसके संदर्भ में श्री झा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में यह उल्लेख किया गया कि तत्कालीन अंचल निरीक्षक श्री विवेकानन्द मिश्र के द्वारा स्थापित परम्परा का अनुषरण करते हुए हल्का आवंटित नहीं किया गया और न तो हाजरी अंकित करने हेतु उपस्थिति पंजी में नाम दर्ज किया गया तथा अं0 नि0 के साजिष के कारण कभी भी वेतन नही दिया गया। श्री मिश्र प्रार्थी के साथ पूर्वाग्रह का भाव रखते थे, इत्यादि....................................... उक्त स्पष्टीकरण के भावर्थ से यह परिलक्षित होता है कि श्री झा द्वारा मनगढ़न बातें बनाकर तथा विगत सात वर्ष पूर्व का हावाला देते हुए अपने अधिकारी पर लांछना लगाई गई। यहाँ एक प्रष्न उठता है कि अगर श्री झा को संबंधित अंचल निरीक्षक/अंचल अधिकारी द्वारा प्रताड़ित किया जाता रहा तो वे ससमय इसकी सूचना से अपने उच्चाधिकारी या अधोहस्ताक्षरी को क्यों नहीं अवगत कराया। इससे यह स्पष्ट होता है कि श्री झा द्वारा जान बुझकर बहाना बनाया गया तथा वे अपनी मनमानी करते रहे।

अंचल अधिकारी संग्रामपुर को इस कार्यालय के पत्रांक 609/स्था0, दिनांक 06.08.07 द्वारा उक्त स्पष्टीकरण/कारण पृच्छा की छायाप्रति भेजते हुए कंडिका वार प्रतिवेदन मांगा गया, जिसके संदर्भ में अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्रांक 229, दिनांक 04.09.07 द्वारा प्राप्त बिन्दुवार प्रतिवेदन की छायाप्रति श्री झा के घर के पते पर पत्रांक 818/स्था0, दिनांक 03.10.07 द्वारा भेजते हुए इनसे द्वितीय स्पष्टीकरण तथा अंचल अधिकारी संग्रामपुर से साक्ष्य की प्रति मांगी गयी, श्री झा द्वारा जो द्वितीय स्पष्टीकरण दिया गया वह युक्तियुक्त एवं संतोष जनक नहीं है। वस्तुतः अंचल अधिकारी संग्रामपुर के पत्रांक 14 दिनांक 17.01.08 द्वारा प्राप्त साक्ष्य की प्रति एवं श्री झा से प्राप्त स्पष्टीकरण/कारण पृच्छा का तुलनात्मक समीक्षा से यह स्पष्ट हो जाता है कि श्री अजय कुमार झा राजस्व कर्मचारी, कभी भी अपने कार्यो के प्रति जबाबदेह नहीं रहेें तथा अपनी स्थिति से पदाधिकारी को अवगत नहीं कराया। फलतः अकारण ही सरकारी समय एवं कार्यो का हृास हुआ।

श्री झा राजस्व कर्मचारी एवं उनके माँ के द्वारा बार-बार कार्यालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत कर कार्यालय को गुमराह करते है , परंतु अपने कार्य पर योगदान नहीं करते है और लगातार सात वर्षो से अबतक गायब है।

पुनः अनुमंडल पदाधिकारी तारापुर के पत्रांक 931/गो0, दिनांक 06.12.2006 के द्वारा श्री झा, रा0कर्म0 के विरूद्ध प्रपत्र 'क' को अनुमोदन करते हुए इस कार्यालय के ज्ञापांक 1183/स्था0, दिनांक 26.12.2008 के द्वारा श्री एस0एन0झा, अपर समाहर्त्ता मुंगेर को संचालन पदाधिकारी एवं स्थापना उप समाहर्त्ता मुंगेर को उपास्थापन पदाधिकारी नामित किया। तत्कालीन अपर समाहर्त्ता का स्थानान्तरण होने के फलस्वरूप इस कार्यालय के ज्ञापांक 105/स्था0, दिनांक 16.03.2009 के द्वारा श्री सतीष चन्द्र झा, अपर समाहर्त्ता, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी नियुक्ति किया गया पुनः तत्कालीन अपर समाहर्त्ता का स्थानान्तरण होने के फलस्वरूप श्री आषीष नारायण, वरीय उप समाहर्त्ता मुंगेर-सह-प्रभारी पदाधिकारी जिला राजस्व शाखा मुंगेर को इस कार्यालय के ज्ञापांक 1017/स्था0, दिनांक 19.11.2010 के द्वारा संचालन पदाधिकारी नियुक्ति किया गया एवं एक माह में विभागीय कार्यवाही पुर्ण कर विभागीय अभिलेख मंतव्य सहित भेजने का निदेष दिया गया।

श्री आषीष नारायण, बि0प्र0से0, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता मुंगेर-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 619/रा0 दिनांक 12.11.2011 के द्वारा प्राप्त विभागीय कार्यवाही अभिलेख का अवलोकन एवं विचेचना के पश्चात्‌ पाया गया कि श्री अजय कुमार झा, रा0कर्म0 के विरूद्ध आरोप प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि आरोपी के द्वारा अनाधिकृत अनुपस्थिति कार्या/सेवा के प्रति उदासीनता/पदाधिकारियों के आदेष की अवहेलना/अनुषासनहीनता/अकर्मण्यता की पुष्टि की गई है। विभागीय कार्यवाही अभिलेख का विवरण नीचे निम्न प्रकार हैः-ैः-ैः-ैः- विभागीय कार्यवाही अभिलेख का विवरण नीचे निम्न प्रकार ह विभागीय कार्यवाही अभिलेख का विवरण नीचे निम्न प्रकार ह विभागीय कार्यवाही अभिलेख का विवरण नीचे निम्न प्रकार ह

आरोपी का स्पष्टीकरणः-आरोपी का स्पष्टीकरणः-आरोपी का स्पष्टीकरणः-आरोपी का स्पष्टीकरणः- 1. आरोपी ने अपने स्पष्टीकरण में उल्लेखित किया है कि दिनांक 25 एवं 26 मई 1999 के आकास्मिक अवकाष का आवेदन पत्र बड़ा बाबु को दिया एवं सी0आई0 साहेब से मुख्यालय छोड़ने की अनुमति प्राप्त की थी। उक्त अवधि में आरोपी के द्वारा माँ का इलाज कराने का जिक्र करते हुए घर जाने एवं माँ के स्वस्थ होने के बाद दिनांक 21.06.1999 को वापस कार्यालय में योगदान देने एवं दिनांक 25.05.1999 से 20.06.1999 तक उपार्जित का आवेदन देने की बात करते हुए उक्त आरोप का गलत बताया है।

2. आरोपी नेे अपने स्पष्टीकरण में दिनांक 29.07.1999 के पूर्व से ही बीमार रहने के कारण दिनांक 29.07.1999 से 31.07.1999 तक आकास्मिक अवकाष लेने एवं थोड़ा तबीयत ठीक होने पर नियत समय पर योगदान समर्पित करने का जिक्र करते हुए लगाये गये आरोप को बिल्कुल निराधार एवं मनगढत बताया गया है।

3. आरोपी के द्वारा उक्त आरेाप को पूरी तरह मनगढत एवं नाहक दण्डित करने की मंषा में तैयार कर लगाने एवं उक्त आरोप को पूर्णरूपेण असत्य ठहराया गया है।

4. आरोपी श्री झा के द्वारा सूचित किया गया कि अनुपस्थित होते तो वर्ष 1999 के लोक सभा निर्वाचन के दौरान उनका नाम कार्मिक कोषांग को नहीं भेजा जाता। श्री झा ने 10 सितम्बर 1999 को अंचल कार्यालय, संग्रामपुर में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने पुनः श्री झा ने लिखा है कि ''10 मार्च 1999 को चुनाव कार्य का नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के बाद मैंने 22.09.99 को 8ः00 (आठ) बजे जिला स्कूल में योगदान दिया और फिर निर्देषानुसार चुनाव अग्रिम प्राप्त कर धरहरा प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के यहाँ योगदान दिया।''

5. आरोपी का कहना है कि वे सरकारी कार्य के प्रति उदासीन नहीं है। 6. आरोपी का कहना है कि संबंधित आदेष को संषोधित करते हुए अंचल अधिकारी, संग्रामपुर ने ज्ञापांक 277 दिनांक 29.05.99 द्वारा आरोपी को शंभू शरण राय, राजस्व कर्मचारी के साथ घूमने का आदेष दिया गया। पर यह आदेष आरोपी के अनुसार उन्हे उपलब्ध नहीं कराया गया। आरोपी के अनुसार उनकी अनुपस्थिति में स्पष्टीकरण पूछने का कोई औचित्य नहीं है। जबकि स्पष्टीकरण का तामिला डाक या अन्य माध्यम से नहीं कराया गया। आरोपी के अनुसार यदि वे प्रभार लेने हेतु इच्छुक नहीं थे तो श्री शंभू शरण राय राजस्व कर्मचारी इस आषय का आवेदन अंचल अधिकारी को अवष्य दिए होगें। उक्त आवेदन पत्र अंचल कार्यालय संग्रामपुर में सुरक्षित होने एवं उक्त आरोप को बिल्कुल असत्य ठहराया गया है।10 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 7. आरोपी के अनुसार स्पष्टीकरण इन्हे न तो हस्तगत कराया गया और न हीं उनके घर के पता से पे्रषित किया गया। अतः उक्त आरोप को पूर्णतः असत्य बताया गया है।

8. आरोपी का कहना है कि स्थापना उपसमाहर्त्ता के कार्यालय में उनके द्वारा स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया। तथा स्पष्टीकरण की एक प्रति समाहर्त्ता को डाक के माध्यम से भेज दी गई । आरोपी का कहना है कि उनके द्वारा किसी पदाधिकारी पर आरोप नहीं लगाया गया है। 9. आरोपी के अनुसार उन्हें कोई कार्य नहीं सौंपा गया। अतः राजस्व वसूली या हानि नहीं हुई है। 10. आरोपी के अनुसार उनके द्वारा वेतनादि भुगतान हेतु पत्राचार किया गया है। इसमें सरकार के प्रति साजिष की मंषा कतई नहीं है। आवेदक के अनुसार '' क्या अधिकार के लिए मांग पत्र देना अवैधानिक कार्य है।'' अतः उक्त आरोप को गलत एवं असत्य बताया गया है। संचालनसंचालनसंचालनसंचालन पदाधिकारी का मंतव्यपदाधिकारी का मंतव्यपदाधिकारी का मंतव्यपदाधिकारी का मंतव्य

1. उपस्थापन पदाधिकारी द्वारा श्री झा द्वारा प्रस्तुत योगदान आवेदन (दिनांक 22.05.99) को प्रस्तुत किया गया है। आरोपी श्री झा द्वारा दिनांक 25.05.99 के आकस्मिक अवकाष स्वीकृति के संबंध में प्रस्तुत आवेदन की प्रति संलग्न की गयी है। पुनः श्री झा द्वारा उपार्जित अवकाष स्वीकृति संबंधित प्रस्तुत आवेदन (दिनांक 21.06.99) प्रस्तुत किया गया है।

अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्रांक 534 दिनांक 18.08.99 के अवलोकन से स्पष्ट है कि श्री झा 29.07.99 से 31.07.99 तक अवकाष हेतु आवेदन दिए थे पर 16.08.99 तक अनुपस्थित रहे। इस अनुपस्थिति के संबंध में श्री झा द्वारा कोई भी आवेदन पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।

श्री झा द्वारा 25.05.99 को आकस्मिक अवकाष हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। पुनः दिनांक 21.06.99 को श्री झा द्वारा उपार्जित अवकाष स्वीकृति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इस आवेदन को उपस्थापन पदाधिकारी ने साक्ष्य रूप में संलग्न किया है जिससे स्पष्ट है कि श्री झा द्वारा अनुपस्थिति के संबंध में आवेदन दिया गया है। परन्तु यह आवेदन स्वीकृत हुआ या नहीं तथा श्री झा के उपार्जित अवकाष को समायोजित किया गया या नहीं इस विषय में श्री झा ने कोई साक्ष्य पस्तुत नहीं किया है। अवकाष आवेदन प्रस्तुत करने के पश्चात उसकी स्वीकृति भी आवष्यक है। साथ हीं श्री झा पुनः 16.08.99 तक अनुपस्थित रहें।

अतः यह आरोप प्रमाणित होता है।

2. अंचल अधिकारी, संग्रामपुर के पत्रांक 534 दिनांक 18.08.99 जो अनुमंडल पदाधिकारी, खड़गपुर को संबोधित है, के अवलोकन से स्पष्ट है कि श्री झा 29.07.99 से 31.07.99 तक अवकाष हेतु आवेदन दिए थे पर वे दिनांक 16.08.99 तक अनुपस्थित थे। अंचल निरीक्षक, संग्रामपुर के पत्र दिनांक 14.08.99 के अवलोकन से स्पष्ट है कि दिनांक 07.08.99 तथा दिनांक 14.08.99 के साप्ताहिक बैठक में श्री झा अनुपस्थित थे। दिनांक 16.08.99 तक की लगातार अनुपस्थिति उनकी दिनांक 15.08.99 अर्थात स्वतंत्रता दिवस को भी अनुपस्थित सिद्ध करती है, जो अत्यंत खेदजनक है।

श्री झा ने यदि ससमय दिनांक 02.08.99 को योगदान दिया था तो फिर वे साप्ताहिक बैठकों में उपस्थित क्यों नहीं हुए ? श्री झा ने इस विषय पर कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है और न ही इसका जिक्र अपने स्पष्टीकरण में किया है। अर्थात्‌ श्री झा तीन दिनोें से आकस्मिक अवकाष स्वीकृत दिखा कर लगातार 16.08.99 तक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे। यदि श्री झा 02.08.99 को अपना योगदान देते या कार्यालय में उपस्थित होते तो इसकी जानकारी अंचलाधिकारी को अवष्य होती। श्री झा ने इस अवकाष को उपार्जित अवकाष में समायोजित करने का कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया है। अर्थात्‌ श्री झा बिना अनुमति अनुपस्थित रहें।

आरोपी श्री झा दिनांक 29.07.99 से 31.07.99 तक का आकस्मिक अवकाष का आवेदन देकर 16.08.99 तक अनुपस्थित रहे, अर्थात्‌ आरोप सं0- (2) संलग्न साक्ष्यों से प्रमाणित होता है।

3333.... आरोपी श्री झा पर आरोप सं0- (2) उपलब्ध साक्ष्यों से प्रमाणित होता है। अतः स्वतः स्पष्ट है कि बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के अंतर्गत यह Misconduct है।

4. आरोपी श्री झा द्वारा दिनांक 29.09.99 से 31.09.99 तक आकस्मिक अवकाष प्राप्त करने के संबंध में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। गौरतलब है कि श्री झा द्वारा अन्य आकस्मिक अवकाष के लिए प्रस्तुत आवेदन की छायाप्रति प्रस्तुत की गयी है। ज्ञातव्य हो कि नौवाँ माह अर्थात्‌ सितम्बर 30 दिनों का महीना है न कि 31 दिनों का। अर्थात अंचल अधिकारी ने अपने पत्रांक 353 दिनांक 26.09.2001 में गठित प्रपत्र 'क' की कंडिका 'क' में उल्लेख किया है कि ''दिनांक 29.09.99 से 31.09.99 तक C.L लेकर गए परन्तु 16.08.99 तक अनुपस्थित।'' जिससे यह स्पष्ट है कि तिथि उल्लेख करने में गलती हुई है क्योंकि सितम्बर मात्र 30 दिनों का माह है। यदि वे सितम्बर में अवकाष लेते तो 16. 08.99 अर्थात्‌ अगस्त माह तक की अनुपस्थिति का जिक्र नहीं होता। जिससे स्पष्ट है कि आकस्मिक अवकाष की अवधि दरअसल 29.07.99 से 31.07.99 होनी चाहिए थी। जैसा कि अनुमंडल पदाधिकारी, खड़गपुर को संबोधित पत्रांक 534 दिनांक 18.08.99 को 16.08.99 तक की अनुपस्थिति का उल्लेख किया गया है।

ऐसी हीं Slip of Pen श्री झा द्वारा भी की गयी है। जिसमें उन्होंने अपने स्पष्टीकरण में सितम्बर माह के साथ मार्च का भी उल्लेख किया है जब उन्होंने चुनाव हेतु नियुक्ति पत्र प्राप्त किया था। (आरोपी के स्पष्टीकरण में Bold Letters मे अंकित)

अंचल अधिकारी, संग्रामपुर का पत्रांक 304 दिनांक 07.11.2008 के अवलोकन से स्पष्ट है कि तत्कालीन अंचल अधिकारी के प्रभार ग्रहण की तिथि 14.06.2007 से लेकर 07.11.2008 तक श्री झा कार्य पर उपस्थित नहीं हुए।

उपरोक्त विषलेषण से स्पष्ट है कि श्री झा अपने कार्य के प्रति लापरवाह रहे है तथा लगातार कार्यालय से अनुपस्थित रहें। अतः आरोप सं0- (4) प्रमाणित होता है।

5. आरोप सं0-(1) (2) एवं (4) के प्रमाणित होने से यह भी प्रमाणित होता है आरोपी श्री झा सरकारी कार्यो/सेवा के प्रति उदासीन रहे है।11 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 6. दिनांक 24.05.99 को शंभू शरण राय, राजस्व कर्मचारी को अपने हल्का का प्रभार दो दिनों के अंदर आरोपी को सौंपने का आदेष अंचल अधिकारी द्वारा निर्गत किया गया था। पुनः ज्ञापांक 277 दिनांक 29.05.99 द्वारा आरोपी से स्पष्टीकरण पूछा गया कि उनसे सम्पर्क नहीं हो पा रहा है जिससे स्पष्ट है कि वे संग्रामपुर से अन्यत्र चले गए हैं। आरोपी श्री झा द्वारा दिनांक 25.05.99 को तथा 26 मई को आकस्मिक अवकाष लिया गया था जिसके बाद वे लगातार 20.06.99 तक अनुपस्थित रहेें। अर्थात्‌ 24.05.99 के आदेष के पश्चात्‌ आरोपी श्री झा ने प्रभार ग्रहण नहीं किया और अवकाष में चले गए। अंचल अधिकारी के पत्रांक 253 दिनांक 26.09.2001 में उल्लेख है कि ''श्री झा की लगातार अनुपस्थिति के कारण इनका प्रभार दूसरे राजस्व कर्मचारी को दिया गया। इन्हे प्रभार हेतु कई बार आदेष भी दिये पर प्रभार नहीं लिए।'' जिससे स्पष्ट है कि श्री झा ने प्रभार ग्रहण नहीं किया।

अतः आरोप सं0- (6) प्रमाणित होता है।

7. स्पष्टीकरण हस्तगत कराने हेतु साक्ष्य यथा Peon book की प्रति प्रस्तुत नहीं की गयी है और न हीं घर पर डाक द्वारा भेजे जाने का प्रमाण अभिलेख पर उपलब्ध है।

अतः आरोप सं0- (7) प्रमाणित नहीं होता है।

8. आरोपी द्वारा निबंधित डाक से पत्र समाहर्त्ता, मुंगेर को भेजा गया है। दिनांक 27.11.08 के पत्र में पत्राचार का पता श्री झा द्वारा भागलपुर लिखा गया है, अर्थात्‌ श्री झा संग्रामपुर में नहीं रहते थे और न हीं कार्यस्थल पर उपस्थित हुए। श्री झा द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण तथा आरोप पत्र के स्पष्टीकरण में अंचल निरीक्षक पर षडयंत्र के आरोप लगाया गया है।

अतः श्री झा पर आरोप सं0- (8) प्रमाणित होता है।

9. श्री झा लगातार अनुपस्थित रहे हैं तथा उन्होंने प्रभार भी ग्रहण नहीं किया है। अतः उनके द्वारा कोई कार्य निष्पादित नहीं किया गया है।

अतः आरोप सं0-(9) प्रमाणित होता है।

10. किसी भी सरकारी सेवक को उनके किए गए कार्य के बदले वेतन भुगतान किया जाता है। श्री झा, जो अपने कर्त्तव्यों के प्रति सजग नहीं है, उनके द्वारा अधिकार की बात किया जाना सुसंगत प्रतीत नहीं होता है। श्री झा अपने पदस्थापन स्थल से लगातार गायब रहे है तथा सरकार के हित में कार्य भी नहीं किया है।

अतः अरोप सं0- (10) स्वतः सिद्ध होता है। पुनः इस कार्यालय के ज्ञापांक 694/स्था0, दिनांक 24.05.2012 के द्वारा श्री अजय कुमार झा, रा0कर्म0 से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई जिसके क्रम में श्री अजय कुमार झा, रा0कर्म0, के द्वारा दिनांक 28.05.2012 को द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया है। उक्त द्वितीय कारण संतोषप्रद एवं युक्तियुक्त प्रतीत नहीं होता है।़़़

निष्कर्षः- निष्कर्षः- निष्कर्षः- निष्कर्षः- श्री अजय कुमार झा, रा0कर्म0, अंचल कार्यालय संग्रामपुर के विरूद्ध लगाये गये आरोप उपलब्ध साक्ष्य, संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन एवं संचिका में पोषित कागजातों पर सम्यक्‌ विचारोपरांत श्री झा, रा0 कर्म0 द्वारा अनाधिकृत अनुपस्थिति, अनुषासनहीनता, कर्त्तव्यहीनता, सरकारी कार्यो के प्रति उदासीनता एवं अनैतिकता का परिचायक होने का आरोप प्रमाणित होता है, श्री झा सरकारी कार्यो में कोई अभिरूचि नहीं रखते है ना ही कर्त्तव्य के प्रति निष्ठा रखते है और न ही सेवा में बने रहने की इनको कोई परवाह है। ऐसी स्थिति में वे सरकारी सेवा में बने रहने योग्य नहीं है तथा इन्हे कठोरतम दण्ड देने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा है। यह श्री झा की सेवा बर्खास्तगी का पर्याप्त आधार है। अतः उक्त वर्णित सभी बिन्दुओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2005) यथा संषोधित 2007 के नियम 14 (X) में निहित शास्तियों के आलोक में प्रमाणित आरोप के कारण मै कुलदीप नारायण, भा0प्र0से0, समाहर्त्ता एवं जिला दण्डाधिकारी, मुंगेर यथा वर्णित आरोपों के कारणों से श्री अजय कुमार झा, राजस्व कर्मचारी संग्रामपुर अंचल जिला-मुंगेर को आदेष निर्गत होने की तिथि से सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismiss) करता हूँ।

श्री अजय कुमार झा, राजस्व कर्मचारी, से संबंधित पूर्ण विवरण निम्नवत है :- 1. नाम - श्री अजय कुमार झा, 2. पिता का नाम - स्व0 परषुराम झा, 3. पदनाम - राजस्व कर्मचारी, 4. पदस्थापित स्थान - अंचल अधिकारी संग्रामपुर, जिला-मुंगेर, 5. जन्म तिथि - 08.01.1966 6. नियुक्ति की तिथि - 13.03.1991 7. वेतनमान्‌ - 5200-20200 (ग्रेड पे0) 2400 8. स्थायी पता :- - मुहल्ला -बड़ी खंजरपुर, पत्रालय-बड़ी खंजरपुर, थाना-बरारी, जिला-भागलपुर (बिहार)

आदेश से, (ह0)-अस्पष्ट, समाहर्त्ता एवं जिला दण्डाधिकारी, मुंगेर।12 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 समाहरणालय, मुंगेर

(जिला स्थापना शाखा)

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आदेश

8 सितम्बर 2012

सं0 1284—प्रखंड विकास पदाधिकारी, धरहरा के पत्रांक 1197/दिनांक 10.09.2007 के द्वारा प्राप्त षिकायत के आधार पर विगत चार माह से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण श्री सुधीर कुमार, उ0व0लिपिक, को इस कार्यालय के आदेष ज्ञापांक 764/स्था0, दिनांक 24.09.2007 के द्वारा निलंबित करते हुए भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सदर मुंगेर को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया, पुनः अधोहस्ताक्षरी के आदेष ज्ञापांक 940/गो0, दिनांक 07.03.2008 के द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सदर मुंगेर -सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांकः-151 दिनांकः-24.06.2009 के द्वारा प्रपत्र-क- उपलब्ध कराया गया।

भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सदर मुंगेर -सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 518/दिनांक 21.12.2010 के द्वारा प्राप्त विभागीय कार्यवाही अभिलेख का अवलोकन एवं विवेचना के पष्चात्‌ यह पाया गया कि श्री सुधीर कुमार के विरूद्ध आरोप प्रमाणित होता है। संचालन पदाधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है कि आरोपी के द्वारा ,पदाधिकारियों के आदेष की अवहेलना,कर्तव्य के प्रति धोर लापरवाही,अनुषासनहीनता, अकर्मण्यता एवं संचालन पदाधिकारी के समक्ष तीन तिथियों के बाद भी उपस्थित नहीं होने और न ही प्रपत्र 'क' का लम्बे समय तक जबाव देने की पुष्टि की गई है।

जिसके क्रम में इस कार्यालय के ज्ञापांक 702/स्था0, दिनांक 24.05.2012 के द्वारा श्री कुमार को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली - 2005 के नियम 14 (IV) के तहत तीन वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकने की सजा अधिरोपित करने, निलंबन अवधि को कर्त्तव्य पर बितायी गई अवधि नहीं मानी जाने एवं बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली - 2005 के नियम 10 (I) के आलोक में निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होने का आदेष निर्गत किया गया। पुनः अनुमंडल पदाधिकारी, तारापुर के पत्रांक 1828 दिनांक 12.11.2011 के द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, तारापुर के द्वारा श्री सुधीर कुमार, लिपिक के विरूद्ध गठित प्रपत्र-'क' उपलब्ध कराया गया जिसमें श्री सुधीर कुमार लिपिक पर प्रखंड नजारत तारापुर के प्रभार में रहने एवं स्थानान्तरण अंचल कार्यालय असरगंज होने के कारण बिना नजारत का प्रभार दिये अंचल कार्यालय असरगंज में योगदान करने, अंचल अधिकारी असरगंज के द्वारा तारापुर प्रखंड नजारत का प्रभार पूर्णरूपेण से सौपने हेतु प्रतिनियुक्त करने के बावजूद प्रभार नही सौपने, प्रभार सौपने में आना-कानी करने के कारण तारापुर प्रखंड के नजारत का पूर्ण प्रभार नहीं सौपने से कार्यालय कार्य पूर्णतः वाधित होने एवं नजारत का प्रभार नहीं होने के कारण राषि गवन की प्रवल सम्भावना प्रतीत होने, अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने, अनुषासनहीनता, कर्त्तव्यहीनता, सरकारी कार्यो के प्रति उदासीनता एवं अनैतिकता का परिचायक होने का आरोप लगाया गया है।

अनुमंडल पदाधिकारी, तारापुर से प्रेषित प्रपत्र 'क' के द्वारा श्री कुमार पर लगाये गये आरोपों का अनुमोदन करते हुए विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु इस कार्यालय के आदेष ज्ञापांक-1450/स्था0, दिनांक 02.12.2011 के द्वारा श्री अजय कुमार तिवारी, बि0प्र0से0 वरीय उप समाहर्त्ता, मुंगेर को संचालन पदाधिकारी एवं श्रीमति रेखा कुमारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी तारापुर को उपस्थापन पदाधिकारी नामित करते हुए एक माह की अवधि में विभागीय कार्यवाही सम्पन्न करने का निदेष दिया गया। उपरोक्त के अतिरिक्त जिला पदाधिकारी, मुंगेर के आदेष ज्ञापांक 01/गो0, दिनांक 02.01.2012 के द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी तारापुर के पत्रांक 1431 दिनांक 17.07.2011 एवं तारापुर प्रखंड के रोकड़ एवं लेखा की जाँच हेतु गठित जाँच दल द्वारा पत्रांक 2048 दिनांक 30.11.2011 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के अनुसार तत्कालीन प्रखंड नाजिर तारापुर श्री सुधीर कुमार सम्प्रति लिपिक, अंचल कार्यालय असरगंज के विरूद्ध रोकड़ वही एवं लेखा के संधारण में बरती गई अनियमितता, कन्या विवाह योजनान्तर्गत बिना तिथि के चेक निर्गत करने एवं नजारत में लंबी अवधि तक रखने, बैंक खाता में राषि नहीं होने, के बाबजूद राषि निकासी करने हेतु चेक निर्गत करने, बैंक खाता एवं रोकड़ वही में अंकित राषि को अंतर पाये जाने सहित कई वित्तीय अनियिमतता की प्रथम द्रष्टव्य पुष्टि होती है, जिसके फलस्वरूप श्री सुधीर कुमार, तत्कालीन प्रखंड नाजिर तारापुर वर्त्तमान लिपिक अंचल कार्यालय असरगंज को तत्कालीन प्रभाव से निलंबित किया गया। श्री कुमार के विरूद्ध प्रपत्र 'क' गठन हेतु जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यालय मुंगेर को आदेष दिया गया एवं उक्त आरोप के संचालन हेतु संचालन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी तारापुर एवं उपस्थापन पदाधिकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी तारापुर को नामित किया गया। श्री अजय कुमार तिवारी, बि0प्र0से0 वरीय उप समाहर्त्ता, मुंगेर-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 766/विधि दिनांक 30.05.2012 के द्वारा श्री सुधीर कुमार, लिपिक के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही सम्पन्न कर अभिलेख उपलब्ध कराया गया जिसका विवरण नीचे निम्न प्रकार हैः- अअअआरोपी का स्पष्टीकरणः-ारोपी का स्पष्टीकरणः-ारोपी का स्पष्टीकरणः-ारोपी का स्पष्टीकरणः-श्री सुधीर कुमार, लिपिक द्वारा संचालन पदाधिकारी को समर्पित स्पष्टीकरण में अपने आरोपों के सम्बन्ध में स्पष्टीकरण समर्पित किया है। जो निम्न प्रकार हैः-

आरोप सं0-01ः-आरोप सं0-01ः-आरोप सं0-01ः-आरोप सं0-01ः- उन्होने अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख किया है कि मुझे लेखा का प्रारंभ्भिक ज्ञान नहीं है, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा कैष बुक पर हस्ताक्षर नहीं किये जाने के कारण प्रभार सौपने मे विलम्ब हुआ।

आरोप सं-02ः-आरोप सं-02ः-आरोप सं-02ः-आरोप सं-02ः-आरोप के संबंध में श्री कुमार ने प्रखंड विकास पदाधिकारी के कोपभाजन के कारण बिना किसी सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित अंकित कर दिया गया है।

आरोप सं0-03ः-आरोप सं0-03ः-आरोप सं0-03ः-आरोप सं0-03ः-आरोप के संबंध में श्री कुमार द्वारा असत्य एवं निराधार बताया गया है। आरोप सं0-04ः-आरोप सं0-04ः-आरोप सं0-04ः-आरोप सं0-04ः-आरोप के संबंध में श्री कुमार द्वारा तारापुर प्रखंड के नजारत का पूर्ण प्रभार सौपने के संबंध में बताया गया है कि मेरे द्वारा पूर्ण प्रभार सौंप दिया गया है।

आरोप सं0-05 एवं 06ः-आरोप सं0-05 एवं 06ः-आरोप सं0-05 एवं 06ः-आरोप सं0-05 एवं 06ः-आरोप संख्या 05 एवं 06 को भी श्री कुमार द्वारा अस्वीकार किया गया है। संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः-संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः-संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः-संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः- आरोपी श्री सुधीर कुमार, लिपिक, के विरूद्ध गठित आरोप पत्र तथा उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के आधार पर संचालन पदाधिकारी ने प्रतिवेदित किया है कि आरोप संख्या 1 के संदर्भ में आरोपित लिपिक श्री सुधीर कुमार द्वारा अपने बचाव में13 (cid:18)बहार गजट, 19 *दस,बर 2012 कही गई दोनो बातें स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि कानून की जानकारी नहीं होना किसी भी व्यक्ति या नागरिक द्वारा कृत अपराध से दोषमुक्ति का आधार नहीं बन सकता है। (Ignorance of law is no excuse)

द्वितीयतः तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री कामेष्वर गुप्ता द्वारा हस्ताक्षर नहीं किये जाने के कारण रोकडबही अधतन तैयार नहीं होना भी तर्कसंगत प्रतीत नहीं होता है क्योंकि किसी भी नाजिर के द्वारा पहले रोकडबही लिखा जाता है ततपष्चात प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किया जाता है। अतः प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा हस्ताक्षर नहीं किये जाने के कारण रोकडबही नहीं लिखे जाने का तर्क आरोपित श्री कुमार के दोषमुक्त होने का आधार नहीं बन सकता है।

इसके अलावे सरकारी राषि के व्यय करने एवं व्यय किये गये राषि को संधारित करने के संबंध में सुस्पष्ट प्रावधान बिहार वित्त नियमावली एवं बिहार कोषागार संहिता में अंकित है। इस संबंध में सुस्पष्ट निदेष उपलब्ध है कि सक्षम पदाधिकारी के आदेष के बिना व्यय की गई राषि को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

आरोप संख्या-2 के समर्थन में प्रपत्र 'क' के साथ साक्ष्य के रूप में उपस्थिति पंजी की छायाप्रति के अवलोकन से श्री कुमार का लगातार कार्यालय से अनुपस्थित होना प्रमाणित होता है। इस आरोप के संदर्भ में अपने बचाव में श्री कुमार द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। आरोप सं0-3, 4, 5 एवं 6 के संदर्भ में भी लिपिक श्री सुधीर कुमार अपने बचाव में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकें। इस प्रकार श्री कुमार प्रस्तुत साक्ष्यों द्वारा उनपर लगें आरोपों को निराधार एवं स्वयं को निर्दोष सावित करने में विफल रहें है। दुसरी ओर श्री सुधीर कुमार के विरूद्ध गठित प्रपत्र 'क' में वर्णित आरोपों को उपस्थापन पदाधिकारी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य समर्थित एवं सम्पुष्ट करते है, निष्कर्षतःआरोपो का प्रमाणित होना परिलक्षित होता है।

पुनः इस कार्यालय के ज्ञापांक 921/स्था0 दिनांक 07.07.2012 के द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग एक सप्ताह के अन्दर की गई थी उक्त पत्र श्री कुमार दिनांक 09.07.2012 को स्वयं जिला स्थापना कार्यालय आकर पत्र प्राप्त किये थे परन्तु श्री कुमार द्वारा पत्र प्राप्ति के बाद भी निर्धारित अवधि तक द्वितीय कारण पृच्छा का प्रतिउत्तर नहीं समर्पित किया गया।

निष्कर्षः-निष्कर्षः-निष्कर्षः-निष्कर्षः- श्री सुधीर कुमार, लिपिक (निलंबित) अंचल कार्यालय असरगंज, मुख्यालय अनुमंडल कार्यालय खड़गपुर के विरूद्ध लगाये गये आरोप उपलब्ध साक्ष्य संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन, द्वितीय कारण-पृच्छा का प्रतिउत्तर समर्पित नहीं किया जाना तथा संचिका में पोषित कागजातों पर सम्य्‌क विचारोपरान्त श्री कुमार लिपिक द्वारा अनाधिकृत अनुपस्थित, प्रखंड तारापुर के नजारत का सम्पूर्ण प्रभार नहीं देने के कारण कार्यालय कार्य वाधित होने, राषि गवन की प्रवल सम्भावना प्रतीत होने, अनुषासनहीनता, कर्त्तव्यहीनता, सरकारी कार्यो के प्रति उदासीनता एवं अनैतिकता का परिचायक होने का आरोप प्रमाणित होता है, ऐसी स्थिति में वे सरकारी सेवा में बने रहने योग्य नहीं है तथा इन्हे कठोरतम दण्ड देने के सिवा काई विकल्प नहीं बचा है।

अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एंव अपील) नियामावली-2005 (यथा संषोधित 2007) के नियम-14 (x) में निहित शास्तियाँ के आलोक में प्रमाणित आरोप के कारण मैं श्री कुलदीप नारायण, भा0प्र0से0 जिला पदाधिकारी, मुंगेर श्री सुधीर कुमार, लिपिक (निलंबित) अंचल कार्यालय असरगंज, मुख्यालय अनुमंडल कार्यालय खड़गपुर को आदेष निर्गत की तिथि से सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismiss) करता हूँ। श्री सुधीर कुमार, लिपिक से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्न प्रकार हैः- श्री सुधीर कुमार, लिपिक से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्न प्रकार हैः- श्री सुधीर कुमार, लिपिक से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्न प्रकार हैः- श्री सुधीर कुमार, लिपिक से संबंधित पूर्ण विवरणी निम्न प्रकार हैः- 1. नामः- श्री सुधीर कुमार 2. पिता का नामः- स्व0 मणिकान्त सिंह 3. पदनामः- उ0व0लिपिक 4. जन्म तिथिः- 22.05.1980 5. नियुक्ति तिथिः- 27.12.1999 6. वेतममानः- 5200-202002400 7. स्थायी पताः- ग्राम-खानपुर, पोस्ट-मानिकपुर, थाना-तारापुर, जिला-मुंगेर ।

आदेश से, (ह0)-अस्पष्ट, जिला पदाधिकारी, मुंगेर।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 19 December 2012. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2012-12-19.51/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2012-12-19.51.