िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
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सं0 22/नि0सि0(मुक0)-डा0--19-154/97/1371—श्री बचू लाल चौधरी, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बटाने शीर्ष कार्य प्रमंडल हरिहरगंज सम्प्रति सेवानिवृत्त दिनांक 30.06.97 द्वारा उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि में बटाने स्पीलवे के गैन्ट्री क्रेन की आपूर्ति किये गये समानों को कोई लेखा संधारित नहीं करने, स्टौप लौग गेट के आपूर्ति किये गये समान गायब हो जाने, बटाने स्पीलवे के लिए रेडियल क्रेस्ट गेट के लिए आपूर्ति से संबंधित मामले में कार्य पूरा होने एवं अंतिम विपत्र पारित होने के पूर्व ही सिक्यूरिटी की 75 प्रतिशत राशि लौटा देने आदि से संबंधित प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री चौधरी के विरुद्ध सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 ''ए'' के तहत विभागीय पत्रांक 733 दि0-11.03.97 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया। उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत उक्त आरोप प्रमाणित पाये गये। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय आदेश संख्या 66 दि0 30.06.97 सह पठित ज्ञापांक 2059 दि0 30.06.97 द्वारा इन्हें निम्न दंड संसूचित किया गयाः-
1. देय तिथि से पॉच वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। 2. बराज के गेन्ट्री क्रेन के क्रय में किये गये भुगतान रू0 12,00,000/- (बारह लाख) रूपये की आधी राशि अर्थात् 6,00,000/- (छः लाख) रूपये की वसूली उनके सेवा निवृति के उपरांत देय परिलब्धियों तथा सेवा अवधि में देय पावनाओं से लिया जायगा।
उपरोक्त दंडादेश के विरूद्व श्री चौधरी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में CWJC No. 10237/97 (श्री बचू लाल चौधरी बनाम् बिहार सरकार एवं अन्य) दायर किया गया जिसमें दिनांक 05.03.12 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा न्याय निर्णय पारित करते हुए कहा गया कि दंडादेश से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि वादी श्री चौधरी के स्पष्टीकरण को Consider किया गया है। वादी के स्पष्टीकरण को अस्वीकृत करने के कारणों का भी उल्लेंख नहीं है। उपर्युक्त विचार व्यक्त करते हुए माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 30.06.97 को निर्गत दंडादेश निरस्त कर दिया गया एवं मामले को संबंधित प्राधिकार को वापस करते हुए वादी के स्पष्टीकरण पर विचार करते हुए नियमानुसार तार्किक आदेश पारित करने का न्यायादेश पारित किया गया ।
उपरोक्त न्याय निर्णय के आलोक में श्री चौधरी सेवानिवृत्त द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 24.04.12 विभाग में प्राप्त कराया गया।
न्याय निर्णय के आलोक में श्री चौधरी द्वारा प्राप्त कराये गये स्पष्टीकरण, अभ्यावेदन एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मामले की सम्यक् समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। पाया गया कि श्री बचू लाल चौधरी, तत्कालीन2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2013 कार्यपालक अभियन्ता, बटाने शीर्ष कार्य प्रमंडल हरिहरगंज द्वारा उक्त प्रमंडल में पदस्थापन अवधि (वर्ष 1984-85 से 88-89) में बरती गयी अनियमितताओं की जॉच विभागीय उड़नदस्ता से करायी गयी। उड़नदस्ता से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत इनके विरूद्व मुख्य रूप से निम्नांकित आरोप गठित किये गये
1. बटाने स्पीलवे के लिए गैन्ट्री क्रेन की आपूर्ति के मामले से संबंधित निम्नांकित अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी पाये गयेः-
(क) क्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों की जॉच नहीं की गयी। इस कारण क्रेन के विशिष्टि के संबंध में अभी तक आश्वस्त नहीं हुआ जा सका।
(ख) काउंटरवेट की आपूर्ति प्राप्त करने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किये गये। (ग) आपूर्ति किये गये समानों का कोई लेखा संधारित नहीं किया गया। इनकी सुरक्षा का पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं की गयी। इसलिए अनेक सामान गायब हो गये हैं।
2. बटाने स्पीलवे के लिए स्टॉप लौग गेट की आपूर्ति किये गये समानों का कोई लेखा संधारित नहीं किया गया। इनकी सुरक्षा की व्यवस्था भी नहीं की गयी। इसलिए अनेक समान गायब हो गये जिसके लिए दोषी है। 3. बटाने स्पीलवे के लिए रेडियल क्रेस्ट गेट की आपूर्ति के मामले में संबंधित निम्नांकित अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी पाये गये हैंः-
(क) रूपांकण एवं इरेक्शन मदों पर संवेदक को बिक्री कर का भुगतान किया गया। इस प्रकार संवेदक को 52,000/- (बावन हजार) रूपये मात्र का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
(ख) संवेदक को स्टील के वेस्टेज के लिए भुगतान किया गया जबकि इसकी स्वीकृति नहीं दी गयी थी। (ग) कार्यान्वयन के दौरान पर्यवेक्षण सही ढ़ंग से नहीं किये जाने के कारण कार्य में कई त्रुटियों रह गयी थी यथा रेडियल गेट के बौटम सील लेवेल को 6'' ऊॅचा करना पड़ा, गेट फिटिंग त्रुटिपूर्ण है, वियर सं0 02 की कंक्रीटींग त्रुटिपूर्ण है।
(घ) कार्य पूरा होने एवं अंतिम विपत्र पारित होने के पूर्व ही संवदेक की सिक्यूरिटी की 75 प्रतिशत की राशि लौटा दी गयी।
(ड़) त्रुटियों के बिना निराकरण कराये ही अंतिम विपत्र पारित कर दिया गया एवं इन मदों का भुगतान कर दिया गया।
4. बटाने बराज के लिए गैन्ट्री क्रेन के मामलों से संबंधित निम्नांकित अनियमितताओं के लिए वे उत्तरदायी पाए गये हैंः-
(क) निविदा स्वीकृति के पश्चात् विभिन्न मदों की दरों की स्वीकृति हेतु क्षेत्रिय दर निर्धारण समिति को लिखने के बाद इन दरों की स्वीकृति प्राप्त करने हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया, जबकि औपबंधिक दरों पर ही संवेदक को एकरारनामा की लगभग 87 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है।
(ख) दिनांक 14.06.84 को आमंत्रित निविदा में क्रेन की प्राक्कलित राशि 5,00,000 (पॉच लाख) रूपये दर्शायी गयी है जबकि दिनांक 25.01.86 को आमंत्रित निविदा में यह राशि 13,00,000 (तेरह लाख) रूपये दर्शायी गयी। इस प्रकार मात्र 19 महिनों की अवधि में प्राक्कलित राशि में 160 प्रतिशत की वृद्वि की गयी एवं इसी आधार पर निविदा स्वीकृत की गयी।
(ग) क्रेन का रूपांकण इस प्रकार किया जाना था कि वह पूर्व में निर्मित ह्वायस्ट गर्डर की भार वहन क्षमता के अनुरूप हो। इसके लिए स्टौप लौग गेट का रूपांकण, इसे एक पीस में न मानकर एक से अधिक पीस मानते हुए किया जाना आवश्यक था एवं तदनुसार आलेख्य स्वीकृत किया जाना चाहिए था, परन्तु रूपांकण की जॉच एवं स्वीकृति में इस विन्दु को नहीं किया गया।
(घ) संवेदक द्वारा रूपांकण एवं नक्शे विलम्ब से समर्पित किये गये। जिसके लिए वे जिम्मेवार थे, परन्तु इसके लिए इनके विरूद्व कोई कार्रवाई नहीं की गयी। बल्कि सहायक अभियन्ता एवं तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा समय वृद्वि की अनुशंसा की गयी एवं अधीक्षण अभियन्ता द्वारा इसकी स्वीकृति दी गयी।
(ड़) मे0 मनीष इन्जीनियरिंग द्वारा किये गये बराज के कार्य में कई त्रुटियों का निराकरण नहीं करवाया गया जबकि उनका अंतिम विपत्र पारित किया जा चुका है एवं सभी कार्यो का भुगतान किया जा चुका है।
(च) आपूर्ति किये गये सामानों का कोई लेखा संधारित नहीं किया गया। इनकी सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं की गयी। इसलिए अनेक सामान गायब हो गये हैं।
5. बटाने बराज के लिए स्टौप लौग गेट की आपूर्ति से संबंधित निम्नांकित अनियमितताओं के लिए वे उत्तरदायी पाए गये हैंः-
(क) करीब 19 महीनों में प्राक्कलित राशि को बिना उचित आधार के 47 प्रतिशत बढ़ा दिया गया एवं इसी के आधार पर निविदा स्वीकृत की गयी।
(ख) निविदा के सभी मदों के दर गैर अनुसूचित थे। इन्हें स्वीकृति के लिए क्षेत्रिय दर निर्धारिण समिति को भेजे जाने के बाद कोई फौलो-अप कारवाई नहीं की गयी। फलस्वरूप इन दरों की अंतिम रूप से स्वीकृति प्राप्त नहीं हो सकी जबकि औपबंधिक दरों पर ही संवेदक को एकरारनामा का 95 प्रतिशत से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2013 (ग) स्टॉप लौग गेट का रूपांकण इस प्रकार किया जाना चाहिए था कि स्टॉप लौग गेट एवं क्रेन का भार बराज के ह्वायस्ट गर्डर की भार वहन क्षमता के अनुरूप हो। परन्तु रूपांकण की जॉच एवं इसकी स्वीकृति के क्रम में इस विन्दु का कंसीडीरेशन (Consideration) नहीं किया गया।
(घ) संवेदक से काउन्टर वेट की आपूर्ति प्राप्त करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गयी। (ड़) आपूर्ति लिए गये समानों का न तो लेखा संधारित किया गया था, न ही इनकी सुरक्षा के समुचित प्रबंध किये गये। इस कारण अनेक सामान गायब हो गये।
6. बटाने स्पीलवे के अस्थायी इरिगेशन स्लूइश से संबंधित निम्नांकित अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी पाए गये :-
(क) एरेक्शन का कार्य बिना पूरी तरह सम्पन्न किए हुए ही आपूर्ति किये गये समानों का 100 प्रतिशत भुगतान कर दिया गया जबकि एकरारनामा के अनुसार कार्य पूरा होने के पूर्व तक आपूर्ति के लिए 80 प्रतिशत ही भुगतान करना था।
(ख) तीन गेटों के एरेक्शन के लिए भुगतान किये गये हैं जबकि जॉच दल द्वारा स्थल निरीक्षण के दौरान दो ही गेट लगे पाए गये।
(ग) गेटों का एरेक्शन त्रुटिपूर्ण है। उड़नदस्ता से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन के आधार पर गठित उक्त वर्णित आरोप पत्र, संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 733 दि0 11.03.97 द्वारा श्री चौधरी तत्0 कार्य0 अभि0 से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री चौधरी द्वारा स्पष्टीकरण प्राप्त कराया गया ।
श्री चौधरी द्वारा स्पष्टीकरण में मुख्य रूप से निम्न बाते कही गयीः- 1. (क) क्रेन दुर्घटना की जॉच की गयी थी। जॉच में पता चला था कि क्रेन के कम्पोनेंट पार्ट की एसेम्बली के क्रम में मेकनिकल एवं श्रमिक की असावधानी के कारण क्रेन दुर्घटना हुई थी।
(ख) काउन्टरवेट की आपूर्ति हेतु प्रयास किये गये किन्तु काउन्टरवेट का रूपांकण की स्वीकृति रूपांकण अंचल डालटेनगंज द्वारा नहीं दिया गया।
(ग) इस कार्य का रूपांकण एवं आलेख्य इन्सटोलेशन आदि सम्पूर्ण कार्य संवेदक को ही एकरारनामा के अनुसार करना था अतएव संवेदक द्वारा उसके लिए स्थल पर लाये गये समानों को किसी लेखा में लेने का नियमानुकूल औचित्य नहीं था। मेरे पदस्थापन अवधि तक क्रेन का स्थल पर लाये गये सभी सामान सुरक्षित थे। 2. आरोप सं0-2 का उत्तर आरोप सं0-1 के अनुरूप समझा जाय। 3. (क) सरकारी परिपत्र के अनुसार जो एकरारनामा दिनांक 01.04.84 के पूर्व हुआ था उस एकरारनामा के अनुसार विक्री कर की कटौती करनी है।
(ख) स्टील के वेस्टेज के लिए उनके द्वारा कोई भुगतान नहीं किया गया। (ग) कार्यान्वयन के दौरान कराये जा रहे कार्यो का उनके द्वारा पर्यवेक्षण किया गया। परन्तु उनके द्वारा जो भी त्रुटिपूर्ण कार्य किया गया उसका आवश्यक दंड उनसे वसूल करते हुए, किये जाने वाले कार्य का सुधार किया गया।
(ध) 75 प्रतिशत प्रतिभूति राशि वापस करने के दिन संवेदक को कोई कार्य करना बाकी नहीं था। 4. दिनांक-14.06.84 से 25.01.86 का बटाने बराज के गेन्ट्री क्रेन के लिए आमंत्रित निविदाओं के प्राक्कलित राशि में वुद्वि का मुख्य कारण दोनों समय के निविदाओं में (क) कार्य मद में अन्तर (ख) निर्माण सामग्री एवं दर में वृद्वि है।
संवेदक द्वारा किये गये कार्यहित के साथ-साथ एकरारनामा के शर्त के अनुसार दर की अंतिम स्वीकृति के अभाव में संवेदक को सक्षम पदाधिकारियों द्वारा स्वीकृत औपबंधिक दर पर भुगतान किया गया। अधीक्षण अभियंता के स्तर पर पूर्ण रूपेण जॉच के बाद ही उनके द्वारा समयवृद्वि की स्वीकृति दी गयी जो नियमानुकूल है।
मे0 मनीष इन्जीनियरिंग को गेट के काम में असमाजिक तत्वों द्वारा व्यवधान पैदा हुआ था। विषम परिस्थिति में मनीष इन्जीनियरिंग द्वारा सही सही कार्य नहीं कराया गया। उनके काम में मामूली त्रुटियों के लिए आवश्यक राशि काट ली गई है।
5. आरोप सं0-5 के उतर में मुख्य रूप से आरोप सं0-4 में उल्लेखित बातों को दुहरायी गयी हैं। 6. आरोप सं0-6 उनसे संबंधित नहीं है। श्री चौधरी, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियन्ता द्वारा अभ्यावेदन दि0 24.04.12 में मुख्य रूप से कहा गयी है कि बराज के गेन्ट्री क्रेन का प्राक्कलित राशि 13,00,000 (तेरह लाख) रूपये है, न कि 5,00,000 (पॉच लाख) रूपये। दि0 04.02.1986 से 07.02.1986 के बीच नई दिल्ली में क्रेन का निरीक्षण किया गया सही पाया गया परन्तु स्थल निरीक्षण के क्रम में पाया गया कि क्रेन का मात्र ढ़ांचा खड़ा है एवं उसका सारा समान गायब है। इस आरोप के संबंध में श्री चौधरी द्वारा कहा गया है कि तत्कालीन माननीय मंत्री जल ससांधन विभाग द्वारा मेरे सेवा निवृति के पश्चात् बैक डेटिंग करते हुए बिलकुल ही आधारहीन सत्यता से परे मनगढ़ंत आरोपों के लिए अन्याय पूर्ण दंड संसूचित किया गया। तत्कालीन माननीय मंत्री जल ससांधन विभाग, बिहार के स्थल निरीक्षण के पश्चात् उनके निर्देश पर उड़नदस्ता अंचल-2 द्वारा वर्ष 1995 में स्थल जॉच किया गया। इनके द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि उनके द्वारा पूर्ण रूपेण जॉच नहीं किया गया क्योंकि दिनांक 31.07.95 को जांच के दरम्यान स्थल पर अवस्थित सभी विभागीय गोदाम वर्कशॉप आदि में क्रेन का सामान रखा हुआ था। मेरे समय में कोई सामान गायब नहीं हुआ था। शेष अन्य बाते पूर्व में4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2013 कही गयी बातों को ही दुहरायी गयी है।अंत में श्री चौधरी द्वारा अपने के 72 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक एवं हदय रोगी बताते हुए उनसे वसूल की गयी 6,00,000/- (छः लाख) रूपये को वापस करने का अनुरोध किया गया है। समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाये गये :- श्री बचू लाल चौधरी, सेवानिवृत्त, अधीक्षण अभियन्ता के स्पष्टीकरण को पूर्णरूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
श्री चौधरी द्वारा अपने स्पष्टीकरण में यह कहा गया है कि दिनांक 25.01.86 द्वारा आमंत्रित निविदाओं में गेन्ट्री क्रेन की प्राक्कलित राशि 13,00,000 (तेहर लाख) रूपये था तथा इसका सामान गोदामों एवं वर्क शॉप में रखा गया था परंतु उड़नदस्ता दल द्वारा इसकी जॉच सही ढ़ंग से नहीं किया गया। श्री चौधरी के उक्त तथ्य को स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि श्री चौधरी द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि बराज के गेन्ट्री क्रेन के लिए दिनांक-14.06.84 को आमंत्रित निविदा में क्रेन की प्राक्कलित राशि 5,00,000 (पॉच लाख) रूपये थी। लेकिन उक्त क्रेन से बेहतर कार्य करनेवाले गेन्ट्री क्रेन के लिए दिनांक-25.01.86 को बेहतर स्पेशफिकेशन के क्रेन के लिए निविदा आमंत्रित की गई। जिसका वास्तविक प्राक्कलित राशि 13,00,000 (तेरह लाख) रूपये था एवं जिसके विरूद्ध 12,00,000 (बारह लाख) रूपये का भुगतान किया गया। समीक्षा में पाया गया कि तत्कालीन मंत्री जल संसाधन विभाग, बिहार द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया एवं उनके द्वारा स्थल पर क्रेन का केवल ढ़ांचा देखा गया। उसमें कोई समान नहीं था। क्रेन कभी भी कार्य करने लायक नहीं हुआ। अर्थात् गेन्ट्री क्रेन की स्थापना ही नहीं हुई। श्री चौधरी द्वारा यह नहीं उल्लेख किया गया है कि गेन्ट्री क्रेन की क्यों स्थापना नहीं हुई। अर्थात पॅाच लाख रूपये के स्थान पर बारह लाख रूपये खर्च करने के बावजूद गेन्ट्री क्रेन कार्य करने लायक नहीं हुआ। जिसके लिए श्री चौधरी दोषी है।
श्री चौधरी द्वारा कहा गया है कि बटाने शीर्ष कार्य प्रमंडल हरिहरगंज में उनके पदस्थापन अवधि दिनांक 04.08.85 से 30.05.89 तक में क्रेन के संचालन हेतु आवश्यक भार वहन क्षमता का गर्डर का रूपांकण नहीं होने के कारण क्रेन को बराज के एक किनारे इरेक्ट (खड़ा) कर दिया गया एवं क्रेन के समान को गोदाम/वर्कशॅाप में रखा गया था।
श्री चौधरी के इस कथन से सहमत नहीं हुआ जा सकता है कि गर्डर के रूपांकण नहीं होने के कारण उक्त वर्णित परिस्थिति उत्पन्न हुई। क्रेन आपूर्ति के पूर्व ही क्रेन की उपयोगिता रूपांकण कराकर सुनिश्चित होने के उपरांत इसका क्रय/आपूर्ति किया जाना चाहिए था चूॅकि 13,00,000 (तेरह लाख) रूपये की स्वीकृति अति विशिष्ट क्रेन हेतु ही प्रदान की गयी थी फिर भी 8,00,000 (आठ लाख) रूपये अधिक व्यय कर इसकी उपयोगिता सुनिश्चित नहीं होने हेतु श्री चौधरी जिम्मेवार हैं अतएवं विषयांकित क्रेन पर किया गया कुल 12,00,000 (बारह लाख) रूपये का व्यय व्यर्थ प्रतीत होता है जिसके लिए श्री चौधरी दोषी है।
उपर्युक्त वर्णित स्थिति में समीक्षोपरान्त पाया गया कि गेन्ट्री क्रेन के खरीद में हुई अनियमितता के लिए एवं सरकारी राशि की क्षति के लिए श्री चौधरी, कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व पूर्व में संसूचित दंड सही है। अतः समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री बचू लाल चौधरी को पूर्व में संसूचित दंडादेश सं0-661 सहपठित ज्ञापांक 2059 दिनांक-30.06.97 को CWJC No-10237/97 में पारित न्याय निर्णय के आलोक में निरस्त करते हुए इनके विरूद्व प्रमाणित आरोपों हेतु निम्न दंड संसूचित करने का निर्णय लिया गया :-
1. देय तिथि से पॉच वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। 2- 6,00,000/- (छः लाख) रूपये की वसूली उनके सेवोतर लाभों से करना।
उपरोक्त वर्णित स्थिति में श्री बचू लाल चौधरी तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, बटाने शीर्ष कार्य प्रमंडल हरिहरगंज सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्व पूर्व में दण्ड संसूचन से संबंधित विभागीय आदेशा सं0 661 सह पठित ज्ञापांक 2059 दिनांक 30.06.97 को निरस्त किया जाता है, साथ ही उपरोक्त प्रमाणित आरोपों के लिए इन्हें निम्न दण्ड दिया जाता हैः-
1. देय तिथि से पॉच वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। 2- 6,00,000/- (छः लाख) रूपये की वसूली उनके सेवोतर लाभों से करना। उपर्युक्त आदेश श्री चौधरी सेवानिवृत, अधीक्षण अभियन्ता को संसूचित किया जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, एस0 के0 नेगी, सरकार के प्रधान सचिव।
————— अधी)क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु/ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 33-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in