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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 13 February 2013

Published 13 February 2013

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2013-02-13.7
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 24242424 माघमाघमाघमाघ 1931931931934444 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 07070707 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ———————— 13131313 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2013201320132013 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)1, पदःथापन, बदली, श(cid:18)1, छु 7ट(cid:15) और अ:य ;य(cid:18)1गत सूचनाएं। 2-2 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु?म@ के समादेंटाओं के आदेश।

---

भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Iाओं के पर(cid:15)Iा-फल, कायJबम, छाऽवृ(cid:18)M ूदान, आNद।

---

भाग-1-ग—िशIा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Iाफल आNद ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राOयपाल और कायाJPयI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आNद। 3-4

भाग-3—भारत सरकार, पQRम बंगाल सरकार और उTच :यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राOय गजट@ के उVरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ[त (cid:18)वधान मंडल मY उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Nकये जानेवाले ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और उ[त (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथापन के पूवJ ूकािशत (cid:18)वधेयक।

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भाग-7—संसद के अिधिनयम Qजनपर रांशपित क\ Oयेंठअनुमित िमल चुक\ है। ---

भाग-8—भारत क\ संसद मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय@ के ूितवेदन और संसद मY पुर:ःथापन के पूवJ ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व^ापन

---

भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क\ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प_रवहन सूचनाएं, :यायालय सूचनाएं और सवJसाधारण सूचनाएं इ`याNद। 5-5 पूरक

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पूरक-क 6-162 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013

भागभागभागभाग----1111

िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1, , , , छु 7ट(cid:15) और छु 7ट(cid:15) और छु 7ट(cid:15) और छु 7ट(cid:15) और अ:यअ:यअ:यअ:य वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

उद्योग विभाग ——— अधिसूचनाएं 23 जनवरी 2013 सं॰ 3/उ0स्था0(अवकाश)16/06-346—श्रीमती सरिता चौधरी, संयुक्त उद्योग निदेशक, उद्योग निदेशालय(उद्योग विभाग), बिहार, पटना को बिहार सेवा संहिता के नियम-227 एवं 248 के अन्तर्गत दिनांक 3 सितम्बर 2012 से 19 सितम्बर 2012 तक कुल 17(सत्रह) दिनों के उपार्जित अवकाश की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0)-अस्पष्ट, अवर सचिव।

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23 जनवरी 2013

सं॰ 3/उ0स्था0(पदस्थापन)3/12-347—प्राचार्य, बिहार रेशम एवं वस्त्र संस्थान, नाथनगर, भागलपुर को अपने कार्यों के अतिरिक्त प्रबंधक, पॉलिस्टर एवं सिल्क वस्त्र प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केन्द्र, भागलपुर का अगले आदेश तक प्रभार दिया जाता है।

इस प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0)-अस्पष्ट, अवर सचिव।

———

23 जनवरी 2013

सं॰ 3/उ0स्था0(विविध)30/08-348—श्री चन्द्र मोहन प्रसाद, उप उद्योग निदेशक, उद्योग निदेशालय, बिहार, पटना को अस्वस्थता एवं पारिवारिक कारणों से उनके अनुरोध पर स्वेच्छा सेवानिवृति दिनांक 31 जनवरी 2013 के प्रभाव से स्वीकृति दी जाती है। इस प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0)-अस्पष्ट, अवर सचिव।

———

4 फरवरी 2013

सं॰ 3(स॰)/उ0स्था0(विविध) 39/2008-528—विभागीय अधिसूचना संख्या 1195, दिनांक 07 मार्च 2012 द्वारा श्री अशोक कुमार मल्लिक, विशेष सचिव, उद्योग विभाग, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त निदेशक, तकनीकी विकास निदेशालय, बिहार, पटना का प्रभार दिया गया था परन्तु श्री मल्लिक का स्थानान्तरण होने के फलस्वरूप श्री शैलेश ठाकुर, उद्योग निदेशक, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त निदेशक, तकनीकी विकास निदेशालय, बिहार, पटना के रूप में कार्य करने हेतु प्राधिकृत किया जाता है। 2. इस प्रस्ताव में विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। 3. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0)-अस्पष्ट, अवर सचिव।

ÑÑÑÑ अधीIकअधीIकअधीIकअधीIक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

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भागभागभागभाग----2222

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राOयराOयराOयराOयपाल और कायाJPयपाल और कायाJPयपाल और कायाJPयपाल और कायाJPयI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमI@ (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , ,

िधसूचनाएं और िनयम आNद। अअअअिधसूचनाएं और िनयम आNद। िधसूचनाएं और िनयम आNद। िधसूचनाएं और िनयम आNद।

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पथ निर्माण विभाग

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आदेश

17 अक्तूबर 2012

सं॰ निग/सारा-4(पथ)-24/05(अंश-1) 11325 (एस)—श्री रधुनाथ प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार सम्प्रति अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, पथ अंचल, दरभंगा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अपने निलंबन अवधि दिनांक 6 अगस्त 2008 से दिनांक 31 मार्च 2009 तक के लिए पूर्ण वेतन भुगतान हेतु एक याचिका सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या-2313/2012, रघुनाथ प्रसाद बनाम राज्य सरकार एवं अन्य दायर की गयी थी। उक्त याचिका में माननीय उच्च न्यायालय, पटना ने दिनांक 5 मार्च 2012 एवं दिनांक 21 मार्च 2012 को न्यायादेश पारित करने की कृपा की है, जिसका मुख्य अंश निम्नवत्‌ हैः-

"The suspension therefore stands revoked after seven months as discussed in Paragraph-20 (e) of Gyan Kumar Ram (supra). The petitioner is held entiled to salary. In what manner the period of suspension has to be treated is for the disciplinary authority to decide.

The formal issuance of an order of revocation dated 16th June 2009 for a suspension which stood revoked by operation of law on 5th March 2009 is inconsequential and canot deprive the petitioner of the relief.

Let the arrears of salary be paid to the petitioner within a maximum period of six weeks from the date of receipt/production of a copy of this order.

The Court has made no observations with regard to the pending departmental proceedings which are required to be conculded expeditiously on its own merits in accordance with law.

उक्त न्यायादेश के आलोक में श्री प्रसाद द्वारा अपना अभ्यावेदन दिनांक 17 मार्च 2012 एवं दिनांक 26 मार्च 2012 समर्पित करते हुए दिनांक 6 अगस्त 2008 से दिनांक 31 मार्च 2009 तक पूर्ण वेतन (जीवन निर्वाह भत्ता के समायोजन के उपरांत अवशेष राशि) भुगतान का अनुरोध किया गया।

इस प्रकरण में विधि विभाग से परामर्श प्राप्त किया गया। विधि विभाग से प्राप्त परामर्श एवं माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 5 मार्च 2012 के आलोक में निम्न निर्णय लिया जाता है :-

(i) श्री रघुनाथ प्रसाद के निलंबन तिथि 6 अगस्त 2008 से 7 माह के उपरांत दिनांक 5 मार्च 2009 से दिनांक 31 मार्च 2009 तक पूर्ण वेतन (जीवन निर्वाह भत्ता के समायोजन के उपरांत अवशेष राशि) भुगतान की स्वीकृति दी जाती है।

(ii) दिनांक 6 अगस्त 2008 से दिनांक 4 मार्च 2009 तक की निलंबन अवधि के संबंध में इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर निर्णय लिया जायेगा।

आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।4 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013

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शुद्धि-पत्र

15 अक्तूबर 2012

सं0 निग/सारा-4 (पथ) आरोप-32/2011-11256 (एस) —श्री विजय किशोर सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, सुरसंड, सीतामढ़ी, सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, बेतिया के विरूद्ध निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या 2166 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक 2167 (एस), दिनांक 27 फरवरी 2012 की कंडिका-2 (ii) में अंकित "इनके निलंबन अवधि को कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में विनियमित की जायेगी" के स्थान पर "इनके निलंबन अवधि को कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी" पढ़ा जाए।

2. अधिसूचना संख्या 2166 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-2167 (एस), दिनांक 27 फरवरी 2012 को इस हद तक संशोधित समझा जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

ÑÑÑÑ अधीIकअधीIकअधीIकअधीIक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

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भागभागभागभाग----9999((((खखखख))))

और सवJसाधारण सूचनाएं इ`याऔर सवJसाधारण सूचनाएं इ`याऔर सवJसाधारण सूचनाएं इ`याऔर सवJसाधारण सूचनाएं इ`याNद।Nद।Nद।Nद।

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सूचना

सं0 334—मैं, बीना बसाक, सुपुत्री स्व॰ निर्मल चन्द्र बसाक, पत्नी- सुदीप कुमार साहा, गोपी चन्द्रा भवन, आर्य कुमार रोड, पटना-4, शपथ पत्र संख्या 249, दिनांक 2 फरवरी 2013 द्वारा घोषित करती हूँ कि शादी के बाद मै बीना साहा के नाम से जानी जाऊंगी ।

बीना बसाक ।

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No. 334—I, Beena Basak, D/o-Late Nirmal Chandra Basak, W/o-Sudip Kumar Saha, Gopi Chandra Bhawan, Arya Kumar Road, patna-4 declere vide Afdvt. no. 249, dated 02-02-2013 after marriage my name will be Beena Saha.

BEENA BASAK.

ÑÑÑÑ अधीIकअधीIकअधीIकअधीIक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं

3 सितम्बर 2012

सं॰ निग/सारा-1-51/2000-9785 (एस)—श्री मोतीलाल चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता को सहायक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना के पदस्थापन काल में चितकोहरा रेलवे ऊपरी पुल के निर्माण कार्य में लारवाही बरतने, घोर कदाचार करने, विशिष्टता के अनुरूप कार्य नहीं कराने तथा सरकार को वित्तीय क्षति पहुँचाने के आरोपों के लिए अधि0सं0 2235 (एस), दिनांक 31.03.98 द्वारा निलंबित किया गया था तथा संकल्प ज्ञापांक-2239 (एस), दिनांक 31.03.98 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। समादेश याचिका संख्या 3443/2000 में दिनांक 23.02.2001 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री चौधरी को अधि0सं0 2898 (एस), दिनांक 05.05.2001 द्वारा दिनांक 23.02.2001 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया गया। श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में अधि0सं0 6627 (एस), दिनांक 04.09.2002 द्वारा दो वेतन वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोक, निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होने तथा भविष्य में कार्य पद पर पदस्थापित नहीं किये जाने के संसूचित दंड को सी0डब्लू0जे0सी0सं0 11282/2002 में दिनांक 03.03.2009 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में अधि0सं0 4685 (एस), दिनांक 14.05.2009 द्वारा निरस्त करते हुए संकल्प ज्ञापांक-4687 (एस) दिनांक 14.05.2009 द्वारा नये सिरे से विभागीय कार्यवाही संचालित की गई, जिसमें प्रमाणित आरोप के लिए अधि0सं0-17189 (एस) दिनांक 27.12.10 द्वारा पेंशन से 10 (दस) प्रतिशत की कटौती का दंड संसूचित किया गया।

2. महालेखाकार (ले0एवं ह0) का कार्यालय, बिहार, पटना के पत्रांक-736 दिनांक 12.09.2011 द्वारा निलंबन अवधि दिनांक 31.03.98 से 22.02.2001 तक में पूर्ण वेतन भत्ता दिये जाने के संबंध में श्री चौधरी के आवेदन दिनांक 25.07.2011 की छाया प्रति संलग्न करते हुए इसके संबंध में विभागीय निर्णय की अपेक्षा की गई। चूँकि श्री चौधरी को इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में दंड संसूचित किया गया। इस पृष्ठभूमि में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 11 (5) के तहत्‌ निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होने के संबंध में विभागीय पत्रांक-1781 (एस) दिनांक 12.02.12 द्वारा श्री चौधरी से कारण पृच्छा की गयी।

3. श्री चौधरी ने अपने पत्रांक-व्यक्तिगत-28 दिनांक 21.02.2012 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा में मुख्य रूप से बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली की धारा-11 (5) का application उनके मामले में नहीं हो सकने, सी0डब्लू0जे0सी0सं0-11282/2002 में दिनांक 03.09.2009 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विभागीय कार्यवाही निरस्त कर दिये जाने, माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के अन्तर्गत पुनः विभागीय कार्यवाही शुरू किये जाने जिसमें पारित एक पक्षीय आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0 12294/2011 दायर किये जाने, विभाग द्वारा प्रतिशपथ पत्र दायर करने हेतु समय की मांग किये जाने, मामला Sub-Judice होने के कारण न तो कारण पृच्छा की मांग और न ही जवाब देना सही होने इत्यादि का उल्लेख किया गया। श्री चौधरी द्वारा उठाये गये बिन्दुओं के संबंध में तथ्यात्मक स्थिति का उल्लेख करते हुए विभागीय पत्रांक-3747 (एस), दिनांक 02.04.12 द्वारा पुनः कारण पृच्छा समर्पित करने का अनुरोध किया गया। 4. श्री चौधरी ने अपने पत्रांक-व्यक्तिगत-30 दिनांक 27.04.2012 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा में सारतः दिनांक 21.02. 2012 को अपना कारण पृच्छा समर्पित किये जाने, उनके द्वारा दायर सी0डब्लू0जे0सी0सं0 12294/2011 को माननीय उच्च7 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013 न्यायालय द्वारा सुनवाई हेतु स्वीकार किये जाने के आलोक में कारण पृच्छा मांगना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप होने, प्रतिशपथ पत्र दायर किये जाने की गलत सूचना दिये जाने, उच्च न्यायालय के निर्णय तक प्रतीक्षा किये जाने का उल्लेख किया गया। 5. श्री चौधरी द्वारा समर्पित कारण पृच्छा पर विचारोपरांत पाया गया कि सी0डब्लू0जे0सी0सं0-12294/2011 जिसमें विभाग द्वारा शपथ पत्र संख्या-2876, दिनांक 02.12.2011 दायर किया गया है, में विभाग द्वारा कार्रवाई किये जाने पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कोई रोक नहीं लगाया गया है। श्री चौधरी ने अपने कारण पृच्छा उत्तर में विषय वस्तु से संबंधित कोई तथ्यात्मक जवाब नहीं दिया है। अतएव श्री मोतीलाल चौधरी, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के कारण पृच्छा को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक रूप से विचारोपरांत निलंबन अवधि के संबंध में सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया जाता है :- (क) निलंबन अवधि दिनांक 31.03.1998 से 22.02.2001 तक के लिए इन्हें मात्र जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान देय होगा, परन्तु उक्त अवधि पेंशन प्रयोजनार्थ कर्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।

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4 जनवरी 2013

सं॰ निग/सारा-4-(पर्षद) नि0-07/08-73 (एस)—श्री विष्णु राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, क्षेत्रीय विकास प्राधिकार मुजफ्फरपुर सम्प्रति निलम्बित अधीक्षण अभियंता को क्षेत्रीय विकास प्राधिकार मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन में बरती गई अनियमितताओं के लिए अधि0 सं0 8612(S)] दिनांक 01.07.08 द्वारा निलम्बित किया गया था तथा संकल्प ज्ञापांक-1101(S) दिनांक 19.02.09 द्वारा उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।

2. श्री राम द्वारा निलम्बन आदेश अधिसूचना सं0 8612(S) दिनांक 01.07.08 के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-15631/2012 दायर किया गया जिससे दिनांक 30.08.2012 को माननीय उच्च न्यायालय ने विभागीय कार्यवाही में जाँच पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पर न्यायनिर्णय की प्रति प्राप्त होने के 15 दिनाें के अन्दर निर्णय लेने जिसमें असफल रहने पर निलम्बन से मुक्त माने जाने का आदेश दिया गया।

3. श्री राम ने अपने पत्रांक शून्य दिनांक 04.09.12 द्वारा माननीय न्यायालय की प्रति संलग्न करते हुए आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। माननीय न्यायालय के आदेश का ससमय अनुपालन नहीं किए जाने के कारण श्री राम द्वारा एम0जे0सी0 सं0 5997/2012 दायर किया गया जिसमें दिनांक 19.12.2012 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 15631/2012 में दिनांक 30.08.2012 को पारित आदेश का अनुपालन करने अन्यथा सचिव को माननीय न्यायालय में सशरीर उपस्थित होने का आदेश दिया गया। श्री राम के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन सक्षम प्राधिकार का आदेश प्राप्त करने हेतु प्रक्रियाधीन है।

4. सी0डब्लू0जे0सी0 सं0 15631/2012 में दिनांक 30.08.2012 को पारित आदेश तथा एम0जे0सी0 सं0 5997/2012 में दिनांक 19.12.2012 को पारित आदेश के आलोक में श्री विष्णु राम, अधीक्षण अभियंता, सम्प्रति निलम्बित को दिनांक 18.09.2012 के प्रभाव से निेलम्बन से मुक्त किया जाता है।

5. निेलम्बन अवधि का विनियमन विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर किया जाएगा। 6. निलम्बन से मुक्त होने के उपरान्त श्री राम अपना योगदान मुख्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना में समर्पित करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 7 सितम्बर 2012 सं॰ निग/विरा-117/99-10048 (एस)—श्री उमेश कुमार मंडल, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, देवघर सम्प्रति सहायक अभियंता, भवन निरूपण अंचल संख्या-1, भवन निर्माण विभाग, पटना से पथ प्रमंडल, देवघर के पदस्थापन काल में उनके द्वारा बरती गयी अनियिमतताओं के संबंध में मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में स्पष्टीकरण की मांग की गयी। श्री मंडल द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। तत्पश्चात्‌ सरकार के निर्णयानुसार अधिसूचना संख्या-5935 (एस), दिनांक 17.07.94 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया था :- (i) उन्हें "निन्दन" की सजा दी जाती है जिसकी प्रविष्टि वर्ष 1992-93 के चरित्र में अंकित की जायेगी। (ii) संचयात्मक प्रभाव से एक वेतन वृद्धि रोकी जाती है। 2. श्री मंडल द्वारा उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध समर्पित अपील अभ्यावेदन दिनांक 20.10.05 को कालबाधित होने के आधार पर पत्रांक-11070 (एस), दिनांक 19.09.06 द्वारा अस्वीकृत किया गया। 3. श्री मंडल द्वारा उक्त संसूचित दंड एवं अस्वीकृत अपील अभ्यावेदन के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0139/07 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 28.07.2011 को अपील अभ्यावेदन को निरस्त करने से संबंधित पत्रांक-11070 (एस), दिनांक 19.09.06 को रद्‌द करते हुए अपील दायर करने में किये गये विलंब को क्षांत कर अपील अभ्यावेदन पर पुनर्विचार कर नियमानुकूल आदेश पारित करने का आदेश दिया गया। 4. श्री मंडल ने पत्रांक-शून्य दिनांक 26.08.11 द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की प्रति संलग्न करते हुए दंड को विलोपित करने हेतु अग्रतर कार्रवाई का अनुरोध किया जिसके आलोक में श्री मंडल की व्यक्तिगत सुनवाई की गयी।8 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013 5. श्री मंडल के अपील अभ्यावेदन दिनांक 20.10.05, व्यक्तिगत सुनवाई के क्रम में समर्पित बचाव दिनांक 14.10.11 एवं पत्रांक-शून्य दिनांक 15.11.11 में इनके द्वारा मुख्य रूप से स्पष्टीकरण का पत्र उन्हें प्राप्त नहीं होने, कार्य को टुकड़ों में बाँट कर बिना निविदा या कोटेशन के सामग्रियों की आपूर्ति लेकर कार्य कराये जाने से संबंधित आरोप संख्या 1 के संबंध में कनीय अभियंता को कार्य को टुकड़ों में बाँट कर कार्य कराने का अधिकार नहीं होने, उच्चाधिकारियों के आदेश पर कार्य कराये जाने, मापी पुस्तिका में अंकित अभिश्रवों को सहायक अभियंता द्वारा पारित एवं कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किये जाने के बाद अवर प्रमंडलीय लेखा में समायोजित किये जाने, विभागीय रूप से कराये गये कार्य में स्वीकृत प्राक्कलित मात्रा से अधिक कार्य कराये जाने से संबंधित आरेाप संख्या-2 के संबंध में मरम्मति मद में उपलब्ध आवंटन के अन्तर्गत प्राक्कलन/पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति के लिए लोक निर्माण संहिता की कंडिका-294 के अनुसार कार्यपालक अभिंयता सक्षम पदाधिकारी होने तथा इस संबंध में व्यय की अधिकाई का अनुश्रवण एवं नियंत्रण प्रमंडलीय स्तर का कार्य होने, आरोप संख्या-3 जो निगरानी विभाग द्वारा जाँच के समय जाँच स्थल पर उपस्थिति नहीं होने से संबंधित है के संबंध में जाँच की तिथि को अपने बहनोई की पटना में अत्यन्त गंभीर स्थिति में भर्ती होने की जानकारी मिलने पर कार्यपलाक अभियंता से अनुमति प्राप्त कर पटना आने की वाध्यता के कारण उपस्थित नहीं होने का उल्लेख किया गया। 5. श्री मंडल द्वारा समर्पित तथ्यों के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री मंडल के विरूद्ध मुख्यतः तीन आरोप हैं। महत्वूपर्ण आरोप संख्या-2 सरवन-चकाई-जसीडीह-चोपा पथ में विभागीय रूप से कराये गये कार्य में स्वीकृत प्राक्कलित मात्रा से कार्य अधिक कराने के लिए उत्तरदायी पाया गया। इस संदर्भ में श्री मंडल का कहना है कि मरम्मति मद में उपलब्ध आवंटन के अंतर्गत प्राक्कलन/पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति के लिए कार्यपालक अभियंता लोक निर्माण संहिता की कंडिका-294 के अनुसार सक्षम पदाधिकारी हैं। इस बात से स्पष्ट है कि श्री मंडल इस आरोप को स्वीकारते हैं यथा स्वीकृत प्राक्कलन से अधिक कार्य कराया गया जिसके लिए श्री मंडल सक्षम पदाधिकारी नहीं थे। यह बात श्री शालीग्राम कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के स्पष्टीकरण से भी प्रमाणित होता है कि स्वीकृत प्राक्कलन से अधिक कार्य बिना सक्षम पदाधिकारी से अनुमति प्राप्त किये कराया गया। अतएव श्री उमेश कुमार मंडल को अधि0सं0 5935 (एस), दिनांक 17.07.94 द्वारा निर्गत दंड में किसी संशोधन की आवश्यकता प्रतीत नहीं होने के कारण सरकार के निर्णयानुसार इनके अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।

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7 सितम्बर 2012

सं0 निग/सारा-1 (पथ)-63/2012-10067 (एस)—श्री अनिल कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, नवादा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, गंगा पुल परियोजना, पथ निर्माण विभाग, भागलपुर द्वारा पथ प्रमंडल, नवादा के पदस्थापन काल के दौरान वारसलीगंज-पकरीवरावाँ पथ में कराये गये कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-26 अनु0, दिनांक 04.02.2010 द्वारा समर्पित प्रांरम्भिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-131 अनु0, दिनांक 20.05.2010 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के कि0मी0 4 में कराये गये जी0एस0बी0 कार्य की औसत मुटाई प्रावधानित 300 एम0एम0 के विरूद्ध 268.22 एम0एम0 पाये जाने, बी0एम0 कार्य का औसत FDD प्रावधानित 2.20gm/cc के विरूद्ध 2.09gm/cc पाए जाने, बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.44 प्रतिशत पाए जाने जैसी अनियमितताओं के लिए विभागीय पत्रांक-9864 (एस), दिनांक 05.07.10 द्वारा श्री सिन्हा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री सिन्हा, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-शून्य, दिनांक 01.11.10 द्वारा समपर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से जी0एस0बी0 कार्य की औसत मुटाई प्रावधानित 300 एम0एम0 के विरूद्ध 268.22 एम0एम0 पाये जाने की अनियमितता के संबंध में उक्त कार्य उनके पदस्थापन के पूर्व ही सम्पादित कराये जाने, बी0एम0 कार्य का औसत FDD प्रावधानित 2.20gm/cc के विरूद्ध 2.09gm/cc पाए जाने से संबंधित अनियमितता के संबंध में उनके द्वारा MORTH को उद्धृत करते हुए एकरारनामा अथवा स्वीकृत प्राक्कलन में बी0एम0 कार्य में 2.20gm/cc FDD होने का प्रावधान अंकित नहीं होने एवं बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.44 प्रतिशत पाए जाने की अनियमितता के संबंध में MORTH के Table 900-4 का उल्लेख करते हुए उक्त प्रावधान के आलोक में बी0एम0 के कार्य होते समय Hot mix plant से mix गिरने पर उसके bitumen content की जाँच गुण नियंत्रण इकाई से कराये जाने एवं जाँचफल विशिष्टि के अनुरूप प्रतिवेदित किये जाने का उल्लेख किया गया ।

3. श्री सिन्हा द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपंरात पाया गया कि जाँच के क्रम में पथ के 4 थे कि0मी0 में बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 2.44 पाई गई जो प्रावधान से 26.56 प्रतिशत कम है। इस आधार पर श्री सिन्हा के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक्‌ रूप से विचारोपंरात सरकार के निर्णयानुसार निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(क) इनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।9 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013

7 सितम्बर 2012

सं0 निग/सारा-1 (पथ)-63/2012-10069 (एस)—श्री रामचन्द्र पासवान, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, नवादा सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, शेरघाटी द्वारा पथ प्रमंडल, नवादा के पदस्थापन काल के दौरान वारसलीगंज-पकरीवरावाँ पथ में कराये गये कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-26 अनु0, दिनांक 04.02.2010 द्वारा समर्पित प्रांरम्भिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-131 अनु0, दिनांक 20.05. 2010 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के कि0मी0 4 में कराये गये जी0एस0बी0 कार्य की औसत मुटाई प्रावधानित 300 एम0एम0 के विरूद्ध 268.22 एम0एम0 पाये जाने, बी0एम0 कार्य का औसत FDD प्रावधानित 2.20gm/cc के विरूद्ध 2.09gm/cc पाए जाने, बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.44 प्रतिशत पाए जाने जैसी अनियमितताओं के लिए विभागीय पत्रांक-9859 (एस), दिनांक 05.07.10 द्वारा श्री पासवान से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री पासवान, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-शून्य, दिनांक 02.11.10 द्वारा समपर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से जी0एस0बी0 कार्य की औसत मुटाई प्रावधानित 300 एम0एम0 के विरूद्ध 268.22 एम0एम0 पाये जाने की अनियमितता के संबंध में उक्त कार्य उनके पदस्थापन के पूर्व ही सम्पादित कराये जाने, बी0एम0 कार्य का औसत FDD प्रावधानित 2.20gm/cc के विरूद्ध 2.09gm/cc पाए जाने से संबंधित अनियमितता के संबंध में उनके द्वारा MORTH को उद्धृत करते हुए एकरारनामा अथवा स्वीकृत प्राक्कलन में बी0एम0 कार्य में 2.20gm/cc FDD होने का प्रावधान अंकित नहीं होने एवं बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.44 प्रतिशत पाए जाने की अनियमितता के संबंध में MORTH के Table 900-4 का उल्लेख करते हुए उक्त प्रावधान के आलोक में बी0एम0 के कार्य होते समय Hot mix plant से mix गिरने पर उसके bitumen content की जाँच गुण नियंत्रण इकाई से कराये जाने एवं जाँचफल विशिष्टि के अनुरूप प्रतिवेदित किये जाने का उल्लेख किया गया।

3. श्री पासवान द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपंरात पाया गया कि जाँच के क्रम में पथ के 4 थे कि0मी0 में बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 2.44 पाई गई जो प्रावधान से 26.56 प्रतिशत कम है। इस आधार पर श्री पासवान के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक्‌ रूप से विचारोपंरात सरकार के निर्णयानुसार निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (क) इनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है। (ख) वर्ष 2008-09 एवं 2009-10 के लिए निन्दन।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।

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7 सितम्बर 2012

सं॰ निग/विरा-117/99-10071 (एस)—श्री दिगम्बर झा, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, देवघर सम्प्रति सहायक अभियंता, भवन अवर प्रमंडल संख्या-1, भवन प्रमंडल, खगड़िया से पथ प्रमंडल, देवघर के पदस्थापन काल में उनके द्वारा बरती गयी अनियिमतताओं के संबंध में मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी। श्री झा द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित नहीं किया गया। तत्पश्चात्‌ कार्यालय आदेश संख्या 194-सह-पठित ज्ञापांक-7289 (एस), दिनांक 21.08.99 निम्न दंड संसूचित किया गया था :-

(i) श्री झा कनीय अभियंता को "निन्दन" की सजा दी जाती है जिसकी प्रविष्टि उनके वर्ष 1992-93 के चरित्र में अंकित की जायेगी तथा (ii) एक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है। 2. श्री झा द्वारा उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध समर्पित अपील अभ्यावेदन दिनांक 01.10.05 को कालबाधित होने के आधार पर पत्रांक 11071 (एस), दिनांक 19.09.06 द्वारा अस्वीकृत किया गया। 3. श्री झा द्वारा उक्त संसूचित दंड एवं अस्वीकृत अपील अभ्यावेदन के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-134/07 दायर किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 28.07.2011 को अपील अभ्यावेदन को निरस्त करने से संबंधित पत्रांक-11071 (एस), दिनांक 19.09.06 को रद्‌द करते हुए अपील दायर करने में किये गये विलंब को क्षांत कर अपील अभ्यावेदन पर पुनर्विचार कर नियमानुकूल आदेश पारित करने का आदेश दिया गया। 4. श्री झा ने पत्रांक-शून्य, दिनांक 26.08.11 द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की प्रति संलग्न करते हुए दंड को विलोपित करने हेतु अग्रतर कार्रवाई का अनुरोध किया गया, जिसके आलोक में श्री मंडल की व्यक्तिगत सुनवाई की गयी। 5. श्री झा के अपील अभ्यावेदन दिनांक 01.10.05 व्यक्तिगत सुनवाई के क्रम में समर्पित बचाव दिनांक 14.10.11 एवं पत्रांक-शून्य दिनांक 15.11.2011 में इनके द्वारा मुख्य रूप से कार्यपालक अभिंयता के माध्यम से पूर्व में स्पष्टीकरण समर्पित करने, पुनः दिनांक 13.11.2000 को विभाग में स्पष्टीकरण समर्पित करने, आरोप संख्या-1 जो संवेदक को अधिक निर्गत बिटुमिन की कटौती पेनल दर पर नहीं करने तथा लंबी अवधि तक विपत्र नहीं बनने से कार्य नहीं कराया जाना स्पष्ट होने से संबंधित है के संबंध में अवशेष बिटुमिन की पूरी मात्रा की पेनल दर पर संवेदक के अंतिम विपत्र से कटौती किये जाने, आरेाप संख्या-2 जो कार्य आरंभ करने के काफी समय पश्चात्‌ एकरारनामा करने तथा बिना एकरारनामा के संवेदक को बिटुमिन आदि सामग्री निर्गत10 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013 किये जाने से संबंधित है के संबंध में मधुपुर पथ के कि0मी0 1 की विशेष मरम्मति के लिए एकरारनामा के बाद संवेदक को बिटुमिन निर्गत किये जाने, कि0मी0 2 से 6 की मरम्मति कार्य का कार्यादेश कार्यपालक अभियंता द्वारा एकरारनामा के पूर्व निर्गत किये जाने के आलोक में संवेदक को बिटुमिन निर्गत किये जाने, आरोप संख्या-3 जो कार्य को 2000 रूपये की अधिसीमा में टुकड़ों में बाँटकर बिना निविदा या कोटेशन के सामग्रियों की आपूर्ति लेकर कार्य करा भुगतान किये जाने से संबंधित है के संबंध में निविदा/कोटेशन आमंत्रण करने अथवा इसके निष्पादन की शक्ति कनीय अभियंता को प्रदत्त नहीं होने, सहायक अभियंता के माध्यम से कार्यपालक अभियंता द्वारा दिये गये अग्रिम के विरूद्ध विभागीय रूप से कराये गये कार्य के सभी प्रमाणक सहायक अभियंता द्वारा पारित तथा कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित कर अवर प्रमंडलीय लेखा एवं प्रमंडलीय लेखा में समायोजन किये जाने का उल्लेख किया गया। 6. श्री झा द्वारा समर्पित उपर्युक्त तथ्यों के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री दिगम्बर झा के विरूद्ध तीन अनियमितताओं के संबंध में स्पष्टीकरण की मांग की गयी थी जिसमें मुख्यतः आरोप संख्या-1 यह है कि सारठ-मधुपुर पथ के एकरारनामा संख्या-16 एफ0/2 वर्ष 1992-93 के अंतर्गत दिनांक 01.05.1992 तक किये गये कार्य में जितने बिटुमिन की खपत हुई उससे अधिक निर्गत बिटुमिन का पेनल दर पर कटौती करनी चाहिए थी जो नहीं किया गया। इस संदर्भ में श्री झा ने बताया कि अवशेष बिटुमिन की पूरी मात्रा का पेनल दर पर संवेदक के अंतिम विपत्र से कटौती किया जा चुका है। इस संदर्भ में उन्हें संदर्भित मापी पुस्त संख्या-1054 की अभिप्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने का निदेश दिया गया था जिसके संदर्भ में श्री झा ने बताया कि संदर्भित मापी पुस्त बिहार विधान मंडलीय संयुक्त समिति को अलकतरा जाँच समिति के निदेश पर समर्पित किया गया है। अतः इसे उपलब्ध कराने में वे असमर्थ हैं। इस बिन्दु पर किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए इस मामले से संबंधित कार्यपालक अभियंता श्री रामचन्द्र प्रसाद का स्पष्टीकरण का अवलोकन किया गया। तत्कालीन कार्यपालक अभियंता ने इस बिन्दु पर कहा है कि कुछ राशि अनुपातिक पेनल दर पर वसूली की गयी थी एवं बाकी राशि साधारण वसूली दर पर की गयी क्योंकि संवेदक का रूपया अधिक निकलता था। इस बात से यह प्रमाणित होता है कि संपूर्ण अवशेष बिटुमिन को पेनल दर पर कटौती नहीं किया गया है। विपत्र पारित करने का दायित्व मूलतः कार्यपालक अभियंता का होता है, परन्तु विपत्र तैयार कर समर्पित कनीय अभियंता के द्वारा किया जाता है। कार्यपालक अभियंता के स्पष्टीकरण से स्पष्ट है कि कनीय अभियंता के द्वारा पेनल दर पर अवशेष बिटुमिन की राशि की वसूली की कार्रवाई समुचित ढंग से नहीं की गयी है एतद्‌ संबंधी कोई साक्ष्य भी श्री झाा के द्वारा न तो सुनवाई के दौरान दिखाया गया और न ही समर्पित किया गया चूँकि विपत्र पारित करने हेतु मूल रूप से कार्यपालक अभियंता उत्तरदायी होते हैं। फलस्वरूप श्री झा की जिम्मेवारी थोड़ी कम होती है, परन्तु इन्हें इस आरोप से मुक्त नहीं किया जा सकता है। तदनुरूप सरकार द्वारा श्री दिगम्बर झा, सहायक अभियंता के अभ्यावेदन पर निम्न निर्णय लिया जाता है- (क) श्री झा को का0आ0सं0-194 सह-पठित ज्ञापांक-7289 (एस) दिनांक 21.08.99 द्वारा पूर्व के निर्गत दंड में आंशिक संशोधन करते हुए आरोप वर्ष के लिए "निन्दन एवं एक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव" से रोकी जाती है। 7. का0आ0सं0-194 सह-पठित ज्ञापांक-7289 (एस) दिनांक 21.08.99 द्वारा संसूचित दंड इस हद तक संशोधित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।

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18 सितम्बर 2012

सं0 निग/सारा-4 (रा0उ0प0) मुक0-07/08-10392 (एस)—श्री हरिद्वार पाण्डेय, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-30 में अवस्थित पुनपुन नदी पर निर्माणाधीन पुल कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-214 (एस) दिनांक 19.02.87 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरेापों के लिए अधिसूचना संख्या-13027 (एस), दिनांक 12.11.07 द्वारा इनके पेंशन एवं उपादान की राशि से 30-30 प्रतिशत की कटौती का दंड संसूचित किया गया था।

2. श्री पाण्डेय, सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-4397/2008 दायर किया गया जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 26.08.11 को पारित आदेश में उक्त दंडादेश को निरस्त करते हुए श्री पाण्डेय के अंतिम पेंशन एवं उपादान का निर्धारण चार माह के अंदर करने तथा आवेदक को देय लंबित भुगतान का निदेश दिया गया।

3. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश की छाया प्रति संलग्न करते हुए श्री पाण्डेय द्वारा अभ्यावेदन दिनांक 30.09.11 समर्पित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश पर विचारोपरांत एवं विधि विभाग से प्राप्त मंतव्य के आलोक में अधिसूचना संख्या 13027 (एस), दिनांक 12.11.07 द्वारा श्री पाण्डेय को संसूचित दंड को निरस्त करते हुए उन्हें लंबित सभी देय राशि के भुगतान का सरकार द्वारा निर्णय लिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।11 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013

19 सितम्बर 2012

सं0 निग/सारा-4-(पथ)-आरोप -91/10-10453 (एस)— पथ प्रमंडल, रामनगर अन्तर्गत लौरिया-रामनगर पथ के निर्माण कार्य की जाँच मंत्रिमंडल निगरानी विभाग, बिहार, पटना द्वारा की गयी एवं उनसे प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में उक्त कार्य से संबंधित बरती गयी अनियमितता यथा- (i) लौरिया-रामनगर पथ के कि0मी0 3 (अंश) 5 (अंश) 13 वें कि0मी0 में एस0आर0/सतह नवीकरण कार्य वर्ष 2004-05 में एकरारनामा संख्या-8एफ 2/2004-05 में 5th on a/c Bill तक में भुगतान स्वीकृत निविदा दर 0.025 प्रतिशत Below the B.O.Q के बदले B.O.Q पर किया गया (ii) आलोच्य पथ में एकरारनामा सं0-8 एफ. 2/2004-05 में एकरारनामा के अनुसार कार्य समाप्ति की तिथि 25.03.2005 निर्धारित थी परंतु निर्धारित तिथि व्यतीत होने के उपरांत कार्य किये जाने के बावजूद समय वृद्धि की राशि की कटौती नहीं की गयी (iii) आलोच्य पथ में एकरारनामा सं0-8 एफ. 2/2004-05 का 2nd on a/c Bill एकरारनामा संख्या-24 एफ. 2/2004-05 एवं 25 एफ. 2/2004-05 का 1st on a/c Bill का भुगतान सहायक अभियंता के बिना जाँच के किया गया जो लोक निर्माण लेखा संहिता की कंडिका 231 परिशिष्ट 6 अद्यतन का उल्लंघन ै एवं (iv) आलोच्य पथ में एकरारनामा सं0-8 एफ. 2/2004-05 का 2nd on a/c Bill, 24 एफ. 2/2004-05 एवं 25 एफ. 2/2004-05 का 1st on a/c Bill में कार्य की जाँच लोक निर्माण लेखा संहिता की कंडिका 231 परिशिष्ट 6 अद्यतन के अनुसार नहीं की गयी, के लिए आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए श्री अजय कुमार शरण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति सेवानिवृत्त, अधीक्षण अभियंता द्वारा-श्री संतोष कुमार, एडवोकेट, कटही पुल, नया टोला सुग्गा मंदिर, पोलिटेक्निक के पीछे, मुजफ्फरपुर-842001 से विभागीय पत्रांक-5356 (एस) अनु0 दिनांक-13.04.10 द्वारा बचाव बयान/स्पष्टीकरण की मांग की गई।

2. श्री शरण द्वारा समर्पित बचाव बयान पत्रांक-शून्य दिनांक 19.08.10 में उनके द्वारा सारतः 5th on a/c Bill तक में भुगतान स्वीकृत निविदा दर के बदले B.O.Q दर पर किये जाने से संबंधित आरोप संख्या-1 के संबंध में विपत्र के गणितीय परिकलन की जाँच की जवाबदेही लेखा लिपिक एवं लेखापाल की होने, 531.50 स्पये की अधिक भुगतान की राशि संवेदक द्वारा कोषागार में जमा कर दिये जाने एकरारनामा के निर्धारित तिथि के पश्चात कार्य किये जाने के बावजूद समय वृद्धि की राशि की कटौती नहीं करने से संबंधित आरोप संख्या-2 के संबंध में संबंधित एकरारनामे में अंतिम विपत्र का भुगतान उनके द्वारा नहीं किये जाने का विपत्र की त्रुटियों की जाँच का दायित्व लेखा लिपिक एवं लेखापाल की होने, एकरारनामा के अनुरूप संवेदक को समवृद्धि दी जाने के कारण कटौती नहीं करने एकरारनामा सं0-8 एफ. 2/2004-05 का 2nd on a/c Bill एकरारनामा संख्या-24 एफ 2/2004-05 25 एफ 2/2004-05 के 1st on a/c Bill का भुगतान सहायक अभियंता के बिना जाँच के करने से संबंधित आरोप संख्या-3 के संबंध में संवेदक द्वारा कार्य करते समय तथा कनीय अभियंता द्वारा विपत्र बनाते समय सहायक अभियंता का पद रिक्त होने तथा अस्थायी प्रतिनियुक्त सहायक अभियंता का अपने मूल पदस्थापन के कार्यों में व्यस्तता के कारण उच्चाधिकारियों से दूरभाष पर सहमति लेकर विपत्र की जाँच की जाने तथा प्रश्नगत एकरारनामे में कार्य की जाँच लोक निर्माण लेखा संहिता के कंडिका 231 परिशिष्ट 6 के अद्यतन के अनुसार नहीं करने से संबंधित आरोप संख्या-4 के संबंध में कार्यपालक अभियंता से मात्र 10 प्रतिशत की जाँच की अपेक्षा होने का उल्लेख किया गया। 3. श्री शरण द्वारा समर्पित बचाव बयान के समीक्षोपरांत :-

(i) एकरारनामा के अनुसार निर्धारित कार्य समाप्ति की तिथि तक कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण समयवृद्धि की राशि की कटौती नहीं करने से संबंधित आरोप संख्या-1 के संबंध में पाया गया कि समयवृद्धि की स्वीकृति श्री शरण से पूर्व पदस्थापित कार्यपालक अभियंता के स्तर से दी गयी थी जिसके लिए वे सक्षम प्राधिकार नहीं थे। इस कारण श्री शरण को समयवृद्धि की राशि की कटौती कर लेनी चाहिए थी जो इनके द्वारा नहीं किया। (ii) वगैर सहायक अभियंता से जाँच कराये भुगतान किये जाने से संबंधित आरेाप संख्या-3 के संबंध में पाया गया कि कार्यपालक अभियंता को उक्त कार्य की जाँच सहायक अभियंता से 50 प्रतिशत एवं इसके उपरांत 10 प्रतिशत जाँच स्वयं को करनी चाहिये थी जो नहीं किया गया। स्पष्टतः श्री शरण द्वारा अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया।

इस प्रकार श्री शरण द्वारा समर्पित बचाव बयान को मान्य नहीं पाते हुए समयवृद्धि की राशि की कटौती नहीं किये जाने के कारण सरकार को हुए राजस्व क्षति की कुल राशि रुपये 2,14,864.00 (दो लाख चौदह हजार आठ सौ चौसठ रूपये) के लिए दोषी मानते हुए उनके सेवानिवृति को दृष्टिगत कर उक्त राशि की वसूली हेतु बिहार पेंशन नियमावली के नियम 139 के तहत विभागीय पत्रांक-1038 (एस), दिनांक 25.01.12 द्वारा श्री शरण से कारण पृच्छा की गयी। 4. श्री शरण द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य, दिनांक 05.03.12 में उनके द्वारा मुख्य रूप से समयवृद्धि की स्वीकृति पूर्व के कार्यपालक अभियंता द्वारा दिये जाने, वर्णित पथ में सतह नवीरकण कार्य जो वर्ष 2004-05 में स्वीकृत था वर्ष 2005-06 के कार्य प्रोग्राम में spill over के रूप में पुनः स्वीकृत होने से दिनांक 31.03.06 तक स्वतः कार्य कराने की स्वीकृति हो जाने का उल्लेख किया गया। 5. श्री शरण द्वारा समर्पित कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत पाया गया कि विभागीय पत्रांक-1455, दिनांक 19.04.88 के आलोक में वर्णित पथ के समय वृद्धि हेतु पूर्ण शक्ति मुख्य अभियंता में निहित था तथा एकरारनामा के अनुसार ससमय कार्य नहीं होने पर 10 प्रतिशत राशि कटौती की जानी चाहिए थी जब तक कि किसी सक्षम प्राधिकार द्वारा समय सीमा का विस्तार नहीं दिया गया हो। इस आधार पर श्री शरण के कारण पृच्छा को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक्‌ रूप से विचारोपरांत सरकार को हुई वित्तीय क्षति 2,14,864.00 का भी 20 प्रतिशत राशि अर्थात रूपये 42,973.00 के लिए श्री शरण को दोषी पाते हुए सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया गया :-

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(cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013 (क) सरकार को हुई वित्तीय क्षति रूपये 2,14,864.00 (दो लाख चौदह हजार आठ सौ चौसठ रूपये) का 20 प्रतिशत राशि अर्थात रूपये 42,973.00 (ब्यालिस हजार नौ सौ तिहत्तर रूपये) की वसूली श्री अजय कुमार शरण, सेवानिवृत अधीक्षण अभियंता के पेंशन से की जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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30 नवम्बर 2012

सं0 निग/सारा-उ0बि0एन0एच0-48/12-12415 (एस)—श्री जितेन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर-III (राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा) सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के पत्रांक-456 दिनांक 28.05.12 द्वारा अपराधिक प्रवृति एवं अनुशासनहीनता के प्रतिवेदित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-7573 (एस) अनु0 दिनांक 09.07.12 द्वारा श्री कुमार, सहायक अभियंता से स्पष्टीकरण की मांग की गई।

2. श्री कुमार, सहायक अभियंता ने अपने आवेदन दिनांक 27.07.12 द्वारा अपना स्पष्टीकरण समर्पित किया। इस बीच अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-714 अनु0, दिनांक 24.07.2012 एवं इसके साथ संलग्न कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा के पत्रांक-534, दिनांक 29.06.12 द्वारा श्री कुमार को आरोप मुक्त करने की अनुशंसा प्राप्त हुई।

3. श्री जितेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण दिनांक 27.07.12 एवं अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर एवं कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा द्वारा की गई अनुशंसा के समीक्षोपरांत यह पाया कि श्री कुमार द्वारा कार्यालय में अपने वरिष्ठ पदाधिकारी के साथ उदण्डतापूर्ण व्यवहार किया गया है।

4. अतएव सरकार के निर्णयानुसार जितेन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर-III (राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, छपरा) सम्प्रति सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ उपभाग, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को भविष्य में उनके द्वारा पुनः इस कृत्य की पुनरावृति नहीं हो, इसके लिए चेतावनी के साथ आरेाप मुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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14 दिसम्बर 2012

सं॰ निग/सारा-3 -NH-20/05-12896 (एस)—श्री रामाशीष पाण्डेय, तत्कालीन प्रभारी अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति दिनांक 31.07.2002 को सेवानिवृत प्रभारी अधीक्षण अभियंता द्वारा प्रभारी अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में निविदा का प्रकाशन समाचार पत्रों में कराये बिना कार्य संबंधी निविदाओं तथा उपलब्ध आवंटन से अधिक के प्राक्कलनों की स्वीकृति देने जैसे आरोपों के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10718 (एस) अनु0 दिनांक 11.09.06 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। 2. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री पाण्डेय के सेवानिवृति एवं घटना के 4 (चार) वर्षों के पश्चात्‌ दिनांक 11.09.2006 को आरोप पत्र जारी किये जाने के कारण बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत आरेाप के कालबाधित होने के आधार पर विभागीय कार्यवाही चलाने योग्य नहीं होने का निष्कर्ष समर्पित किया गया। 3. इस क्रम में समीक्षोपरांत पाया गया कि यह विभागीय कार्यवाही कालबाधित है तथा इस प्रकरण में सरकार को कोई वित्तीय क्षति नहीं हुई है। 4. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री रामाशीष पाण्डेय, तत्कालीन प्रभारी अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति दिनांक 31.07.2002 को सेवानिवृत प्रभारी अधीक्षण अभियंता के विरूद्ध पथ निर्माण विभाग के संकल्प ज्ञापांक-10718 (एस) अनु0 दिनांक 11.09.06 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप सचिव (निगरानी)।

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14 दिसम्बर 2012

सं॰ निग/सारा-5 (ग्रा0)-2066/03-12919 (एस)—श्री राजेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, गुमला सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, बिहारशरीफ को, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-10409, दिनांक 14.10.98 से वसिया प्रखंड अन्तर्गत निर्मित विभिन्न योजनाओं के ध्वस्त होने के फलस्वरूप दोषी पदाधिकारियों को निलंबित करने/विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने की प्राप्त अनुशंसा के आलोक में अधिसूचना संख्या-10575 (एस), दिनांक 04.12.99 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-3225 (एस), दिनांक 26.05.2000 द्वारा तीन आरोपों के लिए विभागीय जाँच आयुक्त के संचालन में विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। कालान्तर में श्री प्रसाद को अधिसूचना संख्या-7547 (एस), दिनांक 06.09.03 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए निलंबन अवधि के वेतन आदि का भुगतान चल रही विभागीय कार्यवाही की फलाफल के आधार पर करने का निर्णय लिया गया।13 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013 2. श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में यद्यपि इनके विरूद्ध किसी भी आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया, परन्तु संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत आरोप संख्या-3 जो पर्यवेक्षण कार्य क्षमता का अभाव तथा दायित्वों के निर्वहन में ईमानदारी तथा विश्वसनीयता के अभाव से संबंधित था को प्रमाणित नहीं माने जाने के संबंध में संचालन पदाधिकारी का मंतव्य कि आरोपित पर्यवेक्षण कार्य में संलग्न थे तथा पर्यवेक्षण प्रभारी के रूप में एम0बी0 पर उनके हस्ताक्षर के बाद कार्यपालक अभियंता द्वारा अनुमोदनोपरांत भुगतान किया गया, को इस आधार पर मान्य नहीं पाया गया कि सहायक अभियंता के रूप में श्री प्रसाद का दायित्व था कि proper verification के पश्चात्‌ एम0वी0 पर हस्ताक्षर किया जाता जो नहीं किया गया। सिर्फ इस आधार पर कि कार्यपालक अभियंता द्वारा एम0बी0 को अनुमोदित किया गया श्री प्रसाद दायित्व से मुक्त नहीं माने जा सकते है। इस आधार पर विभागीय पत्रांक-6423 (एस) दिनांक-07.06.12 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 3. श्री प्रसाद सहायक अभियंता के पत्रांक-शून्य, दिनांक 28.06.2012 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में उनके द्वारा सारतः संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाये जाने, द्वितीय कारण पृच्छा साक्ष्य आधारित नहीं होने और न ही असहमति के कारणों का उल्लेख होने, बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के प्रावधान के अनुरूप अंकित मापी की जाँच के उपरांत विशिष्टि के अनुरूप कार्य पाये जाने पर कार्यपालक अभियंता के स्तर से भुगतान के फलस्वरूप पर्यवेक्षण कार्यक्षमता के अभाव तथा दायित्व के निर्वहन में ईमानदारी विश्वसनीयता का अभाव मानने की प्रासंगिकता नहीं होने का उल्लेख किया गया। 4. श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत पाया गया कि सिर्फ इस आधार पर कि कार्यपालक अभियंता के द्वारा एम0बी0 को अनुमोदित किया गया है, श्री प्रसाद अपने दयित्व से नहीं बच सकते है विशेष कर तब जब प्रस्तुत प्रकरण में कार्यपालक अभिंयता को बिना कोई जाँच पड़ताल के हस्ताक्षर करने के लिए दोषी पाया गया तथा दंड संसूचित किया गया है। इस प्रकार श्री राजेन्द्र प्रसाद, सहायक अभियंता के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए सम्यक्‌ रूप से विचारोपरांत सरकार के निर्णयानुसार निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) आरोप वर्ष 1995 के लिए निन्दन। 5. श्री प्रसाद के निलंबन अवधि दिनांक 04.12.99 से 05.09.03 तक का विनियमन कारण पृच्छा के उपरांत किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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21 दिसम्बर 2012

सं॰ निग/सारा-आरोप- 71/10-13129 (एस)—श्री प्रवीण कुमार पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर संख्या-2 (राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, संख्या-2 मुजफ्फरपुर ) सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, दानापुर से सचिव द्वारा दिनांक 12.07.2010 को एन0एच0-77 के स्थल निरीक्षण के क्रम में कटौंझा पुल के पूर्व मनार गाँव के पास सड़क की भयावह स्थिति तथा मुजफ्फरपुर से सीमामढ़ी के बीच कई जगहों पर पोट्‌स पाये जाने के आलोक में उक्त तिथि में पथ के Defect liability period में होने के बावजूद इनके द्वारा Defect liability period को enforce नहीं कराने तथा अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने जैसे आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-154/गो0, दिनांक 15.07. 10 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई।

2. श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण पत्रांक-52, दिनांक 19.07.10 के समीक्षोपरांत पाया गया कि सड़क की स्थिति भयावह थी (जिसे श्री पाण्डेय द्वारा स्वीकार भी किया गया है) तथा Defect liability period में होने के बाद भी पथ के रख-रखाव की समुचित व्यवस्था इनके द्वारा नहीं की गई। तद्‌नुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-900 (एस), दिनांक 21.01.11 द्वारा इनकी दो वेतन वृद्धियों पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया।

3. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता द्वारा पुर्नविचार अभ्यावेदन दिनांक 30.03.11 समर्पित किया गया। इनके पुनर्विचार आवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि दिनांक 12.07.10 को सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के निरीक्षण के क्रम में स्ट्रेच पर पौट्‌स पाये गये थे जिसके संबंध में सहायक अभियंता के द्वारा न तो अपने मूल स्पष्टीकरण में न ही पुनर्विचार आवेदन में कोई तर्क दिया गया और न ही defect liability period के तहत मरम्मति कार्य नहीं कराने के बारे में कोई तथ्य अंकित किया गया है। श्री पाण्डेय निरीक्षण के दौरान बिना कार्यपालक अभियंता की अनुमति के अनुपस्थित थे जो अपने आप में कर्तव्यहीनता का द्योतक है। तद्‌नुसार श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता के पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 30.03.11 को विभागीय अधिसूचना संख्या-7151 (एस), दिनांक 22.06.12 द्वारा अस्वीकृत किया गया।

4. पुनः श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता के अभ्यावेदन दिनांक 01.08.12 द्वारा संसूचित शास्ति के विरूद्ध पुनर्विचार का अनुरोध किया गया। इनके इस पुनर्विचार अभ्यावेदन एवं इसके साथ उपलब्ध कराए गए तथ्य एवं कागजात के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री पाण्डेय के अवर प्रमंडल क्षेत्राधीन कि0मी0 01 से 24 पथांश अन्तर्गत जनार के पास 24 वें कि0मी0 के जर्जर हो जाने तथा अन्य स्थानों पर pots develop हो जाने का संज्ञान इनके द्वारा लिया गया एवं संवेदक को defect liability period में agreement के तहत कार्य कराने हेतु इनके पत्रांक-50, दिनांक 02.07.10 द्वारा direct किया गया जिसके परिणामस्वरूप संवेदक द्वारा वर्षा ऋतु के कारण non bituminous materal से maintain किया गया एवं बाद में bituminous material से मरम्मत किया गया। अनाधिकृत अनुपस्थिति के संबंध में श्री पाण्डेय द्वारा अंकित तथ्य एवं इस14 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013 संबंध में कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर के पत्रांक/ज्ञापांक-438, दिनांक 28.07.12 से स्पष्ट होता है कि श्री पाण्डेय, कार्यपालक अभियंता के आदेश से दूसरे स्थल पर संवेदक से पथ मरम्मति का कार्य करा रहे थे। 5. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री प्रवीण कुमार पाण्डेय, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर संख्या-2 सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, दानापुर के पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 01.08.12 को स्वीकार करते हुए इनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-900 (एस), दिनांक 21.01.11 द्वारा संसूचित शास्ति को निरस्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।

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24 दिसम्बर 2012

सं0 प्र0-10-उ0बि0-एन0एच0-12/06-13160 (एस)—श्री चन्द्र भूषण प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, संरचना अवर प्रमंडल संख्या-2, भवन निर्माण विभाग, पटना द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में एन0एच0-77 के कि0मी0 0 से 1 एवं कि0मी0 3 से 25 (कि0मी0 8 एवं 22 को छोड़कर) में आई0आर0क्यू0पी0 कार्य (जॉब संख्या-77 बी0आर0-05-682) विशिष्ट के अनरूप नहीं कराये जाने, 14 वें कि0मी0 में बिना बी0एम0 कार्य कराये ही इसकी प्रविष्टि मापी पुस्तिका में दर्ज करने तथा मापी पुस्तिका के पृष्ठ 48 के साथ छेड़छाड़ करने जैसे आरोपों के लिये पथ निर्माण विभाग के अधिसूचना संख्या-11541 (एस), दिनांक 07.10. 05 द्वारा इन्हें निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-13605 (एस) अनु0, दिनांक 04.12.05 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-08 विशेष पथ निर्माण विभाग-05/07 दिनांक 24.01.07 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिन्हा तत्कालीन सहायक अभियंता के विरूद्ध गठित छः आरोपों में से आरोप संख्या-1 एवं 6 को आंशिक रूप से प्रमाणित तथा आरोप संख्या-2,3,4,5 को प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित/अंशतः प्रमाणित आरोपों के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन की प्रति सहित विभागीय पत्रांक-301 (एस) अनु0, दिनांक 08.01.08 द्वारा श्री सिन्हा तत्कालीन सहायक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा मांगी गई। श्री सिन्हा द्वारा दिनांक 24.01.08 को समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत इसे असंतोषजनक पाया गया एवं तदनुसार इन्हें सहायक अभियंता के नयूनतम प्रक्रम पर पदावनत करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया। 3. तद्‌आलोक में विभागीय पत्रांक-890 (एस), दिनांक 12.02.09 द्वारा उक्त अनुमोदित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त करने हेतु अनुरोध किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1028, दिनांक 30.07.09 द्वारा प्राप्त सहमति के उपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-8775 (एस), दिनांक 14.08.09 द्वारा श्री सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता को निलंबन मुक्त करते हुए निम्न निर्णय संसूचित किया गया :- (i) इन्हें सहायक अभियंता के वेतनमान के न्यूनतम प्रक्रम पर पदावनत किया जाता है। (ii) निलंबन अवधि में इन्हें देय जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु अन्य प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य अवधि मानी जायेगी। 4. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री सिन्हा, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन दिनांक 12.10.09 के सम्यक्‌ समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके विरूद्ध गठित चार आरोप पूर्ण प्रमाणित एवं दो आरोप अंशतः प्रमाणित पाए गए है। इनसे संबंधित आरोपों की प्रमाणिकता का प्रतिशत कार्यपलक अभियंता के संबंध में आरोप प्रमाणिकता के प्रतिशत से अधिक है। साथ ही, दंड संसूचन के पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग की पूर्णपीठ द्वारा दिनांक 27.07.09 को मामले के सम्यक्‌ समीक्षोपरांत विभागीय दंड प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की गयी है। तद्‌नुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-4022 (एस), दिनांक 18.03.10 द्वारा श्री सिन्हा, सहायक अभियंता के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया गया। 5. पुनः श्री चन्द्र भूषण प्रसाद सिन्हा, सहायक अभियंता के अभ्यावेदन दिनांक 19.10.11 द्वारा अन्य तथ्यों के अतिरिक्त अपने अपील आवेदन दिनांक 12.10.09 एवं 16.10.09 पर पुनर्विचार करने तथा इस प्रकरण में दंडित कनीय अभियंता, मो0 आफताब आलम के पुनर्अपील के प्रदत्त अवसर के आधार पर इनके मामले में भी पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया। श्री सिन्हा के अभ्यावेदन दिनांक 19.10.11 द्वारा किये गए अनुरोध के आलोक में पूरे मामले की समीक्षा की गई एवं पाया गया कि प्रस्तुत प्रकरण में आरोपी कार्यपालक अभियंता, श्री योगेन्द्र प्रसाद सिंह एवं कनीय अभियंता, मो0 आफताव आलम द्वारा दंड के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर वादों में पारित न्यायादेश के अनुपालन में इनके मामले की तकनीकी समीक्षा एंव सचिव, पथ निर्माण विभाग द्वारा इनकी व्यक्तिगत सुनवाई की गई। इन आरोपित अभियंताओं द्वारा व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किये गए तथ्यों एवं इनके अपील आवेदन में दिये गये तथ्यों की विवेचना के उपरांत आरोपित सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता श्री योगेन्द्र प्रसाद सिंह के पेंशन से 10 प्रतिशत की कटौती के दंडादेश को संशोधित करते हुए इनके पेंशन से 10 प्रतिशत की कटौती मात्र 3 वर्ष के लिए करने जबकि आरोपित कनीय अभियंता, मो0 आफताव आलम के कनीय अभियंता के वेतनमान के न्यूनतम प्रक्रम पर पदावनत करने के दंडादेश को संशोधित करते हुए इनकी 3 वेतन वृद्धियाँ संचयात्मक प्रभाव से रोकने का आदेश संसूचित किया गया। 6. उपरोक्त वर्णित स्थिति में सहायक अभियंता के दायित्व को देखते हुए सरकार के निर्णयानुसार श्री चन्द्र भूषण प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सहायक अभियंता, संरचना अवर प्रमंडल संख्या-2, भवन निर्माण विभाग, पटना को विभागीय अधिसूचना संख्या-8775 (एस), दिनांक 14.08.09 द्वारा इन्हें15 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013 सहायक अभियंता के वेतनमान के न्यूनतम प्रक्रम पर पदावनत करने के दंड को संशोधित करते हुए इनकी 3 (तीन) वेतन वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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15 जनवरी 2013

सं॰ निग/सारा-5 (पथ)-119/07-349 (एस)—श्री सुनील कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (प्रभारी), भवन अंचल, धनबाद सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, भवन अंचल, भागलपुर के विरूद्ध भवन अंचल, धनबाद के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितताओं के लिए पथ निर्माण विभाग, झारखण्ड, राँची के पत्रांक-7297 (एस), दिनांक 20.11.07 से विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने की प्राप्त अनुशंसा एवं प्रपत्र-क के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10525 (एस), दिनांक 23.09.09 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त के संचालन में विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-713, दिनांक 30.08.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में इनके विरूद्ध आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री सुनील कुमार, अधीक्षण अभियंता को आरोप मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही को समाप्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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24 जनवरी 2013

सं॰ निग/सारा-उड़नदस्ता-आरोप- 40/2009-606 (एस)—श्री महेन्द्र राम, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, सहरसा सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (अनुश्रवण), पथ अंचल, दरभंगा को पथ अंचल, सहरसा के पदस्थापन काल में नारायणपुर चौक-एन0एच0-57 झिल्ला शाहपुर पृथ्वी पट्‌टी-छिट्‌टी-सतनपट्‌टी-शाहटोला-पंडित टोला जगदीशपुर-करजाईन बाजार (एन0एच0-106) पथ के कि0मी0 1-7, 8 (p), 9 (p), 10-13, 14 (p), 15 (p),16-21 एवं 22 (p) तक कुल 19-92 कि0मी0 में क्रॉस ड्रेनेज एवं पथ बचाव कार्य सहित IRQP कार्य वर्ष 2008-09 की निविदा के वित्तीय बीड को खोलने एवं संवेदक विशेष के पक्ष में दरों में हेर-फेर करने जैसी अनियमितताओं के मामले में कार्यपालक अभियंता, उड़दस्ता प्रमंडल संख्या-2, पथ निर्माण विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर इनको बुलाकर आरोपों के संदर्भ में सुना गया तथा इनका कोई defence नहीं पाये जाने के फलस्वरूप इन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या-4754 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-4755 (एस), दिनांक 15.05.09 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया गया।

2. इनके विरूद्ध उक्त आरोपों के लिए आरोप-पत्र प्रपत्र 'क' गठित कर साक्ष्य सहित विभागीय पत्रांक-7789 (एस) अनु0, दिनांक 15.07.09 द्वारा इनसे बचाव वयान मांगा गया। श्री राम, निलंबित अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-शून्य, दिनांक 20.07.09 द्वारा समर्पित बचाव वयान के समीक्षोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12103 (एस) अनु0, दिनांक 29.10.09 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

3. सी0डब्लू0जे0सी0सं0-16249/10 महेन्द्र राम बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 05.10.10 को पारित न्यायादेश के आलोक में सरकार के निर्णयानुसार तकनीकी आधार पर विभागीय अधिसूचना संख्या-903 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-904 (एस), दिनांक 21.01.11 द्वारा इन्हें तात्कालिक प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया गया।

4. विभागीय कार्यवाही में अपर विभागीय जाँच आयुक्त (संचालन पदाधिकारी) के पत्रांक-500, दिनांक 27.10.11 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। तद्‌नुसार संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-14043 (एस) अनु0, दिनांक 22.12.11 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा तथा इनकी निलंबन की अवधि दिनांक 15.05.09 से दिनांक 20.01.11 तक के लिए कारण पृच्छा की मांग की गयी।

5. श्री राम अधीक्षण अभियंता के आवेदन दिनांक 12.01.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा एवं निलंबन अवधि के विनियमन हेतु कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत पाया गया कि इस प्रकरण में संवेदक को merit के आधार पर दोष मुक्त नहीं किया गया है। संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही में तथ्यों की संपूर्ण विवेचना की गयी है और उनके द्वारा युक्ति-युक्त विचार करके आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया है। श्री राम के इस कथन कि आरोप के लिए विभाग के पास कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, का एक अर्थ यह भी है कि श्री राम यह स्वीकारते हैं कि उनके द्वारा अनियमितता की गयी है, परन्तु इन्होंने इसके लिए कोई साक्ष्य नहीं छोड़ा। तद्‌आलोक में श्री महेन्द्र राम, अधीक्षण अभियंता को विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-5380 (एस), दिनांक 16.05.12 द्वारा इनकी दो वेतन वृद्धियों पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया। साथ ही विभागीय अधिसूचना संख्या-5507 (एस), दिनांक 22.05.12 द्वारा इनकी निलंबन अवधि दिनांक 15.05.09 से दिनांक 20.01.11 तक के लिए मात्र जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किन्तु अन्य प्रयोजन हेतु इसे कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में विनियमित किये जाने का आदेश संसूचित किया गया।

6. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री राम, अधीक्षण अभियंता द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 25.06.12 समर्पित किया गया। इस पुनर्विचार अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि अपर विभागीय जाँच आयुक्त-सह-संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री राम के विरूद्ध लगाये गये आरोप की गहन समीक्षा की गयी । संचालन पदाधिकारी ने अपने प्रतिवेदन के विश्लेषण में आरोपित पदाधिकारी श्री राम के द्वारा स्पष्ट बयान नहीं देने से असमंजस की स्थिति का उल्लेख किया है। संचालन पदाधिकारी ने यह भी कहा है कि आरोपी का दोहरा वक्तव्य संदेहास्पद एवं आपत्तिजनक है। इसकी संपुष्टि इस बात से होती है कि प्रमंडल कार्यालय16 (cid:18)बहार गजट, 13 फरवर(cid:15) 2013 द्वारा दिनांक 14.02.09 को वित्तीय वीड खोला गया जिसे बाद में उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 द्वारा जाँच के क्रम में फोटो-कॉपी पाया गया एवं वित्तीय वीड के लिफाफे पर अधीक्षण अभियंता का हस्ताक्षर नहीं पाया गया। इस प्रकार आरोपित के इस कार्रवई से निविदा कागजात में हेरा-फेरी का अवसर मिला जिसके लिए वे दोषी हैं। संचालन पदाधिकारी ने अपने विश्लेषण में मेसर्स विशाल विल्टेक (ई) प्रा0लि0 को कालीसूची में डालने के विरोध में संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का उल्लेख करते हुए यह भी अंकित किया है कि उच्च न्यायालय ने अपने न्यायादेश में मेसर्स विशाल विल्टेक (ई) प्रा0लि0 के निबंधन को कालीसूची में डालने के आदेश को रद्‌द कर दिया है। इसका उल्लेख श्री राम ने अपने पुनर्विचार आवेदन में भी किया है परन्तु माननीय न्यायालय द्वारा मेसर्स विशाल विल्टेक (ई) प्रा0लि0 के आदेश को मेरिट के आधार पर set aside नहीं किया है एवं संवेदक के blacklisting का आदेश तकनीकी आधार पर लिया गया है। इस प्रकार श्री राम के पुनर्विचार आवेदन में ऐसा कोई नया तथ्य अंकित नहीं किया गया है जिसमें नये सिरे से विचारण की आवश्यकता हो।

7. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री महेन्द्र राम, अधीक्षण अभियंता के पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 25.06.12 को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, विशेष सचिव ।

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24 जनवरी 2013

सं0 उ0प्र0-53/2010-641 (एस)—श्री लक्ष्मीकांत पटेल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, मोतिहारी द्वारा नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना के पदस्थापन काल के दौरान डाकबंगला से पटना हाईकोर्ट होते हुए बोरिंग रोड चौराहा तक पथांश में कराये गये कार्यों की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में पथ के कि0मी0 2 रें में कराये गये DBM कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 4 प्रतिशत के स्थान पर 3.43 प्रतिशत पाये जाने तथा BC कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 5.4 प्रतिशत के स्थान पर 4.15 प्रतिशत पाये जाने जैसी अनियमितता के लिए विभागीय पत्रांक-13166 (एस), दिनांक 03.09.10 द्वारा श्री पटेल से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री पटेल, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-4265, दिनांक 19.10.2010 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत अधिसूचना संख्या-1444 (एस), दिनांक 07.02.12 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया था :- (1) इनकी दो वेतन वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है। 3. श्री पटेल द्वारा उक्त दंड अधिसूचना के विरूद्ध पत्रांक-50, दिनांक 21.02.12 द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसमें मुख्य रूप से गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, नई राजधानी द्वारा बिटुमिन कन्टेन्ट के जाँचफल में बिटुमिन कन्टेन्ट की औसत मात्रा 3.43 प्रतिशत पाये जाने, प्रावधानित 4 प्रतिशत की बिटुमिन कन्टेन्ट की मात्रा में मात्र 0.14 प्रतिशत का पाया गया अंतर पूर्णतः नगण्य होने तथा कार्यालय आदेश संख्या-349, दिनांक 02.12.10 के अनुसार बिटुमिन की कमी की निर्धारित अनुमान्य मात्रा किसी ठोस निर्विवाद प्रावैधिक तथ्य पर आधारित नहीं होने अपितु यह एक पूर्णतः कामचलाऊ निर्णय होने तथा बाद में करायी गयी जाँच के आधार पर किसी ठोस नतीजे पर पहुँचना उचित नहीं होने एवं लोक निर्माण लेखा संहिता के अपेन्डिक्स-6 में कार्यपालक अभियंता से मात्र 10 प्रतिशत की जाँच की अपेक्षा होने का उल्लेख किया गया। 4. श्री पटेल द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि बिटुमिन्स मिक्स से संबंधित कार्यों के लिए वर्त्तमान में परिचालित विभागीय निर्णय यथा, कार्यालय आदेश संख्या-349, दिनांक 02.12.10 ही प्रचलन में है और यदि कालान्तर में बिटुमिन कन्टेन्ट में होने वाले कमी के निर्धारण के लिए कोई अन्य parameter बनता है तो भविष्य में सम्पादित किये जाने वाले कार्य उससे प्रभावित होंगे। लोक निर्माण लेखा संहिता के अपेन्डिक्स-6 में कार्यपालक अभियंता से मात्र 10 प्रतिशत की जाँच की अपेक्षा व्यवहारिक रूप में अधिकतम नहीं है बल्कि न्यूनतम है। इस आधार पर श्री पटेल द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन आवेदन मान्य नहीं पाया गया। इस प्रकार श्री लक्ष्मीकान्त पटेल के अभ्यावेदन को विचारणीय नहीं पाते हुए सरकार के निर्णय के आलोक में पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 21.02.12 को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 13 February 2013. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2013-02-13.7/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2013-02-13.7.