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सं0 22/नि0सि0(वीर0)-07-12/2004/146—श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता के विरूद्व उनके तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन अधीन वर्ष 2006-07 के दौरान दिनांक 7.1.07 को तिरहुत नहर मुख्य नहर के वि0दू0-65.00 बायॅा पर टूटान एवं उसी स्थल पर दिनांक 13.1.07 को नहर में हुए टूटान के संबंध में योजना एवं मोनेटरिंग अंचल, जल संसाधन विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए उनके विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय संकल्प सह ज्ञाप सं0-444 दिनांक 11.3.10 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
उक्त विभागीय कार्यवाही के निष्पादन के पूर्व श्री चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता के दिनांक 31.5.11 को सेवानिवृत्त हो जाने के फलस्वरूप श्री चौधरी के विरूद्व सेवाकाल में नियम 17 के तहत प्रारम्भ की गयी विभागीय कार्यवाही को विभागीय अधिसूचना 677 दिनांक 10.6.11 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत सम्परिवर्तित की गयी। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 5 माच- 2013 आरोप सं0-2 के संबंध में श्री चौधरी द्वारा अपने उतर में टूटान की मरम्मति का कार्य दूसरे सहायक अभियन्ता से कराने का आदेश देने में मुख्य अभियन्ता से थोड़ा विलम्ब होने की बात कही गयी है जबकि नहर टूटान की मरम्मति का कार्य असम्बद्व प्रमण्डल द्वारा कराये जाने के विभागीय निदेश की अवहेलना करते हुए श्री चौधरी के पत्रांक 65 दिनांक 10.1.07 द्वारा मरम्मति का कार्य विभागीय रूप से कराने का प्रस्ताव दिया गया था। अतएव इनके द्वारा अनियमित ठंग से नहर टूटान की मरम्मति कराने के प्रस्ताव से विभागीय पत्रांक 1295 दिनांक 25.8.90 में निहित निदेशों की अवहेलना का आरोप भी उनके विरूद्व प्रमाणित होता है। आरोप सं0-3 के संबंध में श्री चौधरी का यह कथन कि नहर संचालन में स्थानीय लोगों के गलत हस्तक्षेप से पानी को अनियंत्रित कर नुकसान पहुचाया जाता है एवं ऐसी स्थिति सरकारी नियंत्रण से बाहर होती है ग्राहय नहीं होता है। उल्लेखित परिस्थिति में असमाजिक तत्वों के विरूद्व कानूनी कार्रवाई करते हुए संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए थी, जो श्री चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता द्वारा नहीं किया गया। श्री चौधरी, अधीक्षण अभियन्ता द्वारा नहर का संचालन गंभीरतापूर्वक नहीं लिया गया जबकि विभागीय पत्रांक 1256 दिनांक 30.12.06 की कंडिका-11 के अनुसार नहरों मेें प्रवाहित जलश्राव का गहन प्रबोधन अधीक्षण अभियन्ता स्तर पर किया जाना चाहिए था जिसका अनुपालन श्री चौधरी द्वारा नहीं किये जाने के कारण ही मरम्मति के पश्चात पुनः उसी स्थल पर टूटान हुआ जिससे विभाग को वित्तीय क्षति हुई। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार के स्तर पर समीक्षोपरान्त श्री चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता के विरूद्व निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है।
1. ''प्ांाच प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक'' उक्त दण्ड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 1949 दिनांक 6.12.12 द्वारा सहमति प्राप्त है। उपरोक्त वर्णित स्थिति में श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के तहत निम्न दण्ड संसूचित किया जाता हैः- ''प्ांाच प्रतिशत पेंशन पर सदा के लिए रोक'' उक्त आदेश श्री चौधरी को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, भरत झा, सरकार के उप-सचिव।
————— अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 181-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in