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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 20 March 2013

Published 20 March 2013

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2013-03-20.12
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 29292929 फा(cid:31)गुफा(cid:31)गुफा(cid:31)गुफा(cid:31)गुनननन 1931931931934444 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 12121212 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ———————— 20202020 माच)माच)माच)माच) 2013201320132013 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)1, पदःथापन, बदली, श(cid:18)1, छु 7ट(cid:15)

भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मW पुर:ःथा(cid:18)पत

(cid:18)वधेयक, उYत (cid:18)वधान मंडल मW उपःथा(cid:18)पत और अ:य ;य(cid:18)1गत सूचनाएं। 2-5

या उपःथा(cid:18)पत Lकये जानेवाले ूवर भाग-1-क—ःवयंसेवक गु(cid:31)म? के समादेंटाओं के

सिमितय? के ूितवेदन और उYत (cid:18)वधान आदेश।

---

मंडल मW पुर:ःथापन के पूव) ूकािशत भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0,

(cid:18)वधेयक।

---

बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0,

भाग-7—संसद के अिधिनयम Oजनपर रांशपित क[ एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2,

Mयेंठ अनुमित िमल चुक[ है। ---

एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन-

एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Hाओं के

भाग-8—भारत क[ संसद मW पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, पर(cid:15)Hा-फल, काय)बम, छाऽवृ(cid:18)K ूदान,

संसद मW उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितय? के आLद।

---

ूितवेदन और संसद मW उपःथा(cid:18)पत ूवर

सिमितय? के ूितवेदन और संसद मW भाग-1-ग—िशHा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Hाफल आLद ---

पुर:ःथापन के पूव) ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राMयपाल और काया)NयH? (cid:24)ारा

भाग-9—(cid:18)व]ापन

---

िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं

भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क[ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

और िनयम आLद। 6-18

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प^रवहन सूचनाएं, भाग-3—भारत सरकार, पOPम बंगाल सरकार और

:यायालय सूचनाएं और सव)साधारण उRच :यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं

और िनयम, 'भारत गजट' और राMय

सूचनाएं इ_याLद। 19-19 गजट? के उTरण। ---

पूरक

---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पूरक-क 20-212 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013

भागभागभागभाग----1111

िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली,,,, श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1, , , , छु 7ट(cid:15) और अ:यछु 7ट(cid:15) और अ:यछु 7ट(cid:15) और अ:यछु 7ट(cid:15) और अ:य वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

विधि विभाग

——— अधिसूचनाएं

27 फरवरी 2013

एस0ओ0 173, दिनांक 20 मार्च 2013—नोटरीज ऐक्ट, 1952(53, 1952) की धारा-5 (2) के द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल नोटरीज ऐक्ट, 1952 (53, 1952) की धारा-3 और नोटरीज रूल्स, 1956 के नियम-8 के उप-नियम (4) के अधीन विधि विभाग की अधिसूचना संख्या-3592/जे0, दिनांक 01.11.2002 के द्वारा नियुक्त लेख्य प्रमाणक श्री शैलेन्द्र कुमार तिवारी, जिनका नोटरीज पंजी के अनुसार ब्योरा नीचे अंकित है, को दिनांक 01.11.2012 से पुनः अगामी पॉच वर्षो के लिए लेख्य प्रमाणक के रुप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत करते हैं।

लेख्य प्रमाणक के नाम आवासीय एवं व्यवसायिक पता लेख्य प्रमाणक पंजी में नाम अंकित होने की तिथि । अहर्त्ता जिस क्षेत्र में व्यवसाय करने के लिए प्राधिकृत किया गया है । अभ्युक्ति
1 2 3 4 5 6
श्री शैलेन्द्र कुमार तिवारी अधिवक्ता, नोटरी सिविल कोर्ट, औरंगाबाद 01.11.2002 बी0ए0 एल0एल0बी0 औरंगाबाद जिला

(सं0 सं0-ए0/नोट-49/2000/1396/जे0)

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विनोद कुमार सिन्हा, सचिव ।

———

27 फरवरी 2013

एस0ओ0 174, एस0ओ0 173, दिनांक 20 मार्च 2013 का अंग्रेजी में निम्नलिखित अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकारी से इसके द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो भारत संविधान के अनुच्छेद-348 के खंड (3) के अधीन अंग्रेजी भाषा में उसका प्राधिकृत पाठ समझा जायेगा।

(सं0 सं0-ए0/नोट-49/2000/1396/जे0)

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

विनोद कुमार सिन्हा, सचिव ।

————

The 27th February 2013

S.O. 173, dated the 20th March 2013—In exercise of the powers conferred by section-5(2) of the Notaries Act, 1952 (53 of 1952) the Governor of Bihar is pleased to authorise Shri Shailendra Kumar Tiwari and whose detail according to Notary Register is given below the Notary appointed under section-3 of the Notaries, Act, 1952 (1953 of 1952) and sub-rule (4) of Rule-8 of the Notaries Rules, 1956 by the State Government in Law Department Notification No. 3592/J dated 01.11.02 to practice as notary again for the next five years from 01.11.2012.

3 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013
Name of Notary Residental/ professional address Date of which the name of the Notary has been entered in the Register. Qualification Area in which Notary to practice Remarks
1 2 3 4 5 6
Shri Shailendra Kumar Tiwari Advocate, Notary Civil Court Aurangabad 01.11.2002 B.A L.L.B Aurangabad District

(File no.-A/Not-49/2000/1396/J) By order of the Governor of Bihar, VINOD KUMAR SINHA, Secretary.

,

———

27 फरवरी 2013

एस0ओ0 175, दिनांक 20 मार्च 2013—नोटरीज ऐक्ट, 1952(53, 1952) की धारा-5 (2) के द्वारा प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार-राज्यपाल नोटरीज ऐक्ट, 1952 (53, 1952) की धारा-3 और नोटरीज रूल्स, 1956 के नियम-8 के उप-नियम (4) के अधीन विधि विभाग की अधिसूचना संख्या-3639/जे0, दिनांक 07.11.02 के द्वारा नियुक्त लेख्य प्रमाणक श्री प्रभु नारायण शर्मा जिनका नोटरीज पंजी के अनुसार ब्योरा नीचे अंकित है, को दिनांक 07.11.2012 से पुनः अगामी पॉच वर्षो के लिए लेख्य प्रमाणक के रुप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत करते हैं।

लेख्य प्रमाणक के नाम आवासीय एवं व्यवसायिक पता लेख्य प्रमाणक पंजी में नाम अंकित होने की तिथि । अहर्त्ता जिस क्षेत्र में व्यवसाय करने के लिए प्राधिकृत किया गया है । अभ्युक्ति
1 2 3 4 5 6
श्री प्रभु नारायण शर्मा अधिवक्ता, नोटरी सिविल कोर्ट, समस्तीपुर 07.11.2002 बी0ए0 एल0एल0बी0 समस्तीपुर जिला

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

विनोद कुमार सिन्हा, सचिव ।

———

27 फरवरी 2013

एस0ओ0 176, एस0ओ0 175, दिनांक 20 मार्च 2013 का अंग्रेजी में निम्नलिखित अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकारी से इसके द्वारा प्रकाशित किया जाता है, जो भारत संविधान के अनुच्छेद-348 के खंड (3) के अधीन अंग्रेजी भाषा में उसका प्राधिकृत पाठ समझा जायेगा।

(सं0 सं0-ए0/नोट-73/99/1397/जे0) बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

विनोद कुमार सिन्हा, सचिव ।

———

The 27th February 2013

S.O. 175, dated the 20th March 2013—In exercise of the powers conferred by section-5(2) of the Notaries Act, 1952 (53 of 1952) the Governor of Bihar is pleased to authorise Shri Prabhu Narayan Sharma and whose detail according to Notary Register is given below the Notary appointed under section-3 of the Notaries, Act, 1952 (1953 of 1952) and sub-rule (4) of Rule-8 of the Notaries Rules, 1956 by the State Government in Law Department Notification No. 3639/J dated 07.11.02 to practice as notary again for the next five years from 07.11.2012.

4 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013
Name of Notary Residental/ professional address Date of which the name of the Notary has been entered in the Register. Qualification Area in which Notary to practice Remarks
1 2 3 4 5 6
Shri Prabhu Narayan Sharma Advocate, Notary Civil Court Samastipur 07.11.2002 B.A L.L.B Samastipur District

(File no.-A/Not-73/99/1397/J) By order of the Governor of Bihar, VINOD KUMAR SINHA, Secretary.

,

———

विधि विभाग

——— व्यवसाय प्रमाण-पत्र 7 मार्च 2013 la0 ,0@uksV&19@92@1680@ts0—नोटरीज ऐक्ट, 1952 (53, 1952) और इसके अधीन बनाई गयी नोटरीज नियमावली, 1956 (यथा संशोधित) के उपबंधों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा विभागीय अधिसूचना सं0 2129जे0, दिनांक 27.04.94 के द्वारा श्री लक्ष्मीकान्त झा को मुंगेर जिलान्तर्गत हवेली खड़गपुर अनुमंडल हेतु लेख्य प्रमाणक नियुक्त किया गया था तथा उनका लेख्य प्रमाणक व्यवसाय का नवीकरण विभागीय अधिसूचना सं0-2665 दिनांक 05.05.2011 के द्वारा दिनांक 27.04.10 से 26.04.2015 तक किया गया है। राज्य सरकार द्वारा सम्यक विचारोपरान्त, श्री लक्ष्मीकान्त झा, अधिवक्ता के अनुरोध पर उन्हे मुंगेर जिलान्तर्गत तारापुर अनुमंडल क्षेत्र मे भी व्यवसाय करने के लिए प्राधिकृत किया जाता है। यह क्षेत्र विस्तार श्री झा के नोटरी व्यवसाय से संबंंधित मूल अनुज्ञप्ति के साथ जुड़कर तदनुसार प्रभावी रहेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

विनोद कुमार सिन्हा, सचिव ।

——— उद्योग विभाग ——— अधिसूचनाएं 5 मार्च 2013 सं0 6(स0)-विविध/लेदर कार0/आम सभा-91/02.-1036—विभागीय अधिसूचना संख्या-6858 दिनांक 12.011.08 को संशोधित करते हुए श्री संजय कुमार सिंह, उप उद्योग निदेशक, बिहार, पटना को अपने कार्यो के अतिरिक्त परिसमापन अन्तर्गत बिहार राज्य चर्मोद्योग विकास निगम लि0 एवं बिहार फिनिस्ड लेदर्स लि0, पटना के आर्टिकल्स ऑफ एसोसियेशन की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत निदेशक पर्षद में निदेशक के रूप में मनोनित करते हुए परिसमापन अन्तर्गत बिहार राज्य चर्माेद्योग विकास निगम तथा बिहार फिनिस्ड लेदर्स लि0, पटना के प्रबंध निदेशक के पद पर अगले आदेश तक नियुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अवर सचिव ।

———

5 मार्च 2013

सं॰ 3(स०)/उ0स्था0(विविध)39/2008-1063—श्री नरेन्द्र कुमार सिंह (भा0प्र0से0), निदेशक, हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त निदेशक (खाद्य प्रसंस्करण) खाद्य प्रसंस्करण उद्योग निदेशालय (उद्योग विभाग), बिहार, पटना का प्रभार अगले आदेश तक दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, अपर सचिव ।5 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ——— अधिसूचना 17 जनवरी 2013 संं॰ 3/स्था0रा0भू0बि-2003/10-15-(3)/रा0—सामान्य प्रशासन विभाग के अधिसूचना सं0 13032, दिनांक 18.09. 2012 से सेवा प्राप्त श्री सीताराम यादव, बि0प्र0से0 (कोटि क्रमांक-460/11, गृह जिला सीतामढ़ी) निदेशक, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, बेगुसराय को भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, शेरघाटी, गया के पद पर अगले आदेश तक के लिए पदस्थापित किया जाता है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू समझा जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दीपलाल दीपक, अवर सचिव।

———

सूचना प्रावैधिकी विभाग

———

अधिसूचना

12 मार्च 2013

सं॰ सू॰प्रा॰-47/2007-326—बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लि॰, पटना के मेमोरण्डम एण्ड आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की धारा-92(a) के प्रावधान के अनुसार श्री नील कमल, आंतरिक वित्तीय सलाहकार, सूचना प्रावैधिकी विभाग (उप सचिव, विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग, बिहार, पटना) बिहार, पटना को अगले आदेश तक बिहार राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लि॰, पटना के निदेशक पर्षद में निदेशक नियुक्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, दिनेश कुमार, अवर सचिव ।

———

वित्त विभाग

———

अधिसूचना

13 फरवरी 2013

सं॰ 01/स्था॰(अंके॰)-03/2012/1437वि॰—श्री श्याम कुमार झा, उप लेखा नियंत्रक, कोशी प्रमण्डल, सहरसा को कार्यहित में कोशी प्रमण्डल, सहरसा में स्थानांतरित करते हुए अगले आदेश तक के लिए उपलेखा नियंत्रक, भागलपुर प्रमण्डल के रूप में पदस्थापित किया जाता है। श्री झा को प्रभारी वित्त अंकेक्षक कार्यालय, भागलपुर प्रमण्डल, भागलपुर के रूप में नामित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, शशि भूषण पाठक, संयुक्त सचिव ।

ÑÑÑÑ अधीHकअधीHकअधीHकअधीHक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

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भागभागभागभाग----2222

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राMयराMयराMयराMयपाल और काया)Nयपाल और काया)Nयपाल और काया)Nयपाल और काया)NयH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमH? (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , ,

िधसूचनाएं और िनयम आLद। अअअअिधसूचनाएं और िनयम आLद। िधसूचनाएं और िनयम आLद। िधसूचनाएं और िनयम आLद।

ÑÑÑÑÑ बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ——— अधिसूचनाएं 15 अक्तूबर 2012 सं॰ 1411—पटना जिलान्तर्गत बख्तियारपुर अंचल के ग्राम- नरौली स्थित माँ जगदम्बा मन्दिर पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन सं0- 3966/2009 है । इस मन्दिर का निर्माण जन सहयोग से हुआ है और आय का मुख्य स्रोत भक्तों एवं श्रद्धालुओं से प्राप्त दान/चन्दा की राषि है । न्यास की आय में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है । वर्त्तमान में मन्दिर की व्यवस्था स्थानीय लोगों द्वारा की जाती है, जिसमें श्री अरविन्द कुमार, व्यवस्थापक की भूमिका प्रमुख है । श्री अरविन्द कुमार ने न्यास समिति के गठन हेतु सदस्यों का नाम समर्पित किया है । उपर्युक्त परिस्थितियों में माँ जगदम्बा मन्दिर के सुचारू प्रबंधन तथा सम्यक्‌ विकास के लिए अधिनियम की धारा-32 के तहत योजना का निरूपण एवं न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है, ताकि मन्दिर प्रबंधन में जनता की भागीदारी सुनिष्चित किया जा सके । अतः मैं किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास पर्षद, माँ जगदम्बा मंदिर, नरौली, अचंल-बख्तियारपुर, जिला पटना के बेहतर प्रबंधन, सुसंचालन एवं सम्यक्‌ विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा-32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करता हूँ तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है ।

योजनायोजनायोजनायोजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''माँ जगदम्बा मन्दिर न्यास योजना'' होगा और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''माँ जगदम्बा मन्दिर न्यास समिति'' होगी, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा । 2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी ।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकालकर खर्च किया जायेगा ।

4. न्यास के खाते का संचलान दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा । 5. मठ परिसर में जगह-जगह भेंटपात्र रखे जायेंगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी, जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा ।

6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी ।

7. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा । महिला दर्षनार्थियों की सुविधा का विषेष ध्यान रखा जायेगा ।

8. न्यास समिति द्वारा मन्दिर के पुजारी की अर्हता का निर्धारण एवं नियुक्ति की जायेगी एवं उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा ।

9. न्यास समिति यह सुनिष्चित करेगी कि मन्दिर परिसर में भक्तों का शोषण नहीं हो और पूजा के नाम पर उनसे जबरन बसूली नहीं हो ।

10 न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी । 11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेंगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अह्‌र्ता समाप्त हो जायेगी ।

12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी।7 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे । बैठक की अध्यक्षता, अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा ।

14. सचिव, समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे ।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी ।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा । उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अंचलाधिकारी, बख्तियारपुर, पटना अध्यक्ष 2. श्री अरविन्द कुमार, ग्राम- नरौली, करौटा, पटना सचिव 3. मधेष्वर सिंह, ग्राम- नरौली, पो0- करौटा, पटना कोषाध्यक्ष 4. थाना प्रभारी, बख्तियारपुर, पटना सदस्य 5. श्री रामाधार सिंह, ग्राम- नरौली, पो0- करौटा, पटना '' 6. श्री कामाख्या नारायण सिंह, ग्राम- नरौली, पो0- करौटा, पटना '' 7. श्री राजनन्दन रजक, ग्राम- नरौली, पो0- करौटा, पटना '' 8. श्री श्याम नारायण सिंह, ग्राम- नरौली, पो0- करौटा, पटना '' 9. श्री बालेष्वर सिंह, ग्राम- नरौली, पो0- करौटा, पटना '' यह योजना दिनांक 15/10/2012 से लागू होगी और इसका कार्यकाल 05 वर्षों का होगा ।

आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष ।

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30 अक्तूबर 2012

सं॰ 1482—सुपौल जिलान्तर्गत पीपरा अंचल के ग्राम -हरिहर पट्‌टी स्थित संत कबीर कुटी पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4201 है। इस न्यास के संबंध में श्री कमल दास ने दिनांक 25.07.2011 को पर्षद में एक आवेदन दिया जिसमें यह उल्लेख किया कि ग्रामिणों की एक बैठक में श्री कमल दास एवं वैरागी बुधनी दासीन को उक्त कुटी का सेवायत बनाया गया तथा देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गयी। इसके साथ ही श्री दास ने इसे पर्षद में निबंधन का अनुरोध किया। तत्पष्चात्‌ पर्षदीय पत्रांक-957, दिनांक 05.09.2011 द्वारा स्थानीय मुखिया से अनुरोध किया गया कि श्री कमल दास उक्त न्यास से किस प्रकार सं संबंधित हैं, इसका प्रतिवेदन भेजें। श्रीमती कौषल्या देवी, मुखिया, ग्राम-पंचायत पीपरा ने पर्षद को सूचित किया कि महंत दुली दास का निधन 1998 में ही हो गया और पिछले चार साल से श्री कमल दास मठ का देखभाल कर रहे है। इसके बाद पर्षदीय पत्रांक-645, दिनांक 09.07.2012 द्वारा अंचलाधिकारी, पिपरा, सुपौल को न्यास सम्पत्तियों की सुरक्षा के लिए न्यास समिति के गठन हेतु सदस्यों के नाम भेजने का अनुरोध किया गया। अंचलाधिकारी, पिपरा ने अपने पत्रांक-043, दिनांक 16.07.2012 द्वारा सूचित किया कि श्री कमल दास और बुधनी दासीन दोनों संयुक्त रूप से मठ में पुजा-अर्चना एवं देखभाल करते है। साथ ही अंचलाधिकारी द्वारा न्यास समिति के गठन हेतु ग्यारह व्यक्तियों के नाम भी अनुषंसित किये गये। अतः अंचलाधिकारी के प्रतिवेदन के आलोक में इस न्यास के सुचारू प्रबंधन हेतु न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है। अतः मैं किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी, पिपरा, सुपौल की सम्पत्तियों की सुरक्षा, संचालन एवं बेहतर प्रबंधन हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा-32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुए इसे मूर्तरूप देने हेतु एक न्यास समिति गठित की जाती है।

योजनायोजनायोजनायोजना

''संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी न्यास योजना'' 1. अधिनियम की धारा-32 के अन्तर्गत निरूपित इस योजना का नाम ''संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी न्यास योजना'' ''संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी न्यास योजना'' ''संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी न्यास योजना'' होगा तथा इसके कार्यान्वयन के लिए गठित न्यास समिति का नाम ''संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी न्यास समिति'' ''संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी न्यास समिति'' होगी, जिसमें ''संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी न्यास समिति'' ''संत कबीर कुटी, हरिहर पट्‌टी न्यास समिति'' न्यास की सभी चल-अचल सम्पत्तियाँ निहित होगी।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकालकर खर्च किया जायेगा।

4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत्त आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

6. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेगे अथवा आपराधिक पृष्ठभूमि के होंगे तो उनके सदस्य बने रहने की अर्हता समाप्त हो जायेगी। 7. न्यास समिति न्यास के सर्वागीण विकास एवं मंदिर निर्माण में पूर्ण सहयोग करेगी।8 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 8. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेगे। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

9. सचिव समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

यह न्यास समिति अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के तहत कार्यरत रहेगी और मंदिर के सर्वागीण विकास तथा भक्तों के हितों का सर्वोपरि कल्याण का कार्य करेगी। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए गठित न्यास समिति में निम्नलिखित पदाधिकारी एवं सदस्य मनोनीत किये जाते हैं :-

1. श्री षिव शंकर सिंह, ग्राम हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा जिला-सुपौल - अध्यक्ष 2. श्री बम मंडल, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला-सूपौल - उपाध्यक्ष 3. श्री बुधेष्वर यादव, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला-सूपौल - सचिव 4. श्री शोभा कामत, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला-सूपौल - सदस्य 5 श्री गोसाई पा0 ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला-सूपौल - सदस्य 6. श्री नागेष्वर राम, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला-सुपौल - सदस्य 7. श्री कदम लाल कामैत, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला- सुपौल - सदस्य 8. श्री रितेष कुमार, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0- पिपरा, जिला-सुपौल - सदस्य 9. श्री बासुदेव राम, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला-सुपौल - सदस्य 10 श्री जगदेव यादव, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला-सुपौल - सदस्य 11. श्री गोणर साह, ग्राम-हरिहर पट्‌टी, पो0-पिपरा, जिला-सुपौल - सदस्य यह योजना दिनांंक 12 अक्टुबर 2012, के प्रभाव से लागू मानी जायेगी और इसका कार्यकाल अगले 05 वर्षाे का होगा।

आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष ।

——— 30 अक्तूबर 2012 सं॰ 1484—मुजफ्फरपुर जिलान्तर्गत थाना सरैया के ग्राम बनियां (वैषाली) स्थित चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 3926 है । यह एक पौराणिक षिवाला है तथा पर्यटन के दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है । स्थानीय लोगों ने एक आम सभा आयोजित कर इस न्यास के सुचारू प्रबंधन के लिए न्यास समिति का गठन कर इसके अनुमोदन के लिए पर्षद से अनुरोध किया है ।

अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा- 32 के अन्तर्गत चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर), बनियां की सुव्यवस्था, सुरक्षा तथा सम्यक संचालन हेतु अग्रलिखित योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने के लिए न्यास समिति गठित की जाती है ।

योजनायोजनायोजनायोजना

चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) न्यास योजना'' होगा तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए 1. इस योजना का नाम ''चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) न्यास योजना चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) न्यास योजना चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) न्यास योजना पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) न्यास सि चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) न्यास समितिमतिमतिमति'' होगा, जिसमेें मठ के समग्र चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) न्यास सि चतुर्मुखी महादेव स्थान (षिव मंदिर) न्यास सि चल-अचल संपत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा ।

2. न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य मंदिर की सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सुचारू प्रबंधन सुनिष्चित करना होगा । साथ ही समिति मठ के परम्परा एवं आचारों के अनुकुल पूजा-अर्चना, राग-भोग, उत्सव-समैया का समुचित व्यवस्था करेगी । 3. न्यास के आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली परख होगी । 4. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकालकर खर्च किया जायेगा।

5. न्यास के खाते का संचालन अध्यक्ष अथवा सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 6. मंदिर परिसर में भेंटपात्र रखे जायेगें जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा। 7. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।

8. मंदिर में आने वाले दर्षनार्थी, भक्तों का विषेष ख्याल रखा जायेगा ताकि उन्हें कोई असुविधा नहीं हों, विषेषकर महिला दर्षनार्थी के लिए विषेष व्यवस्था की जायेगी।

9. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा।

10 मंदिर के पुजारियों की अर्हता का निर्धारण न्यास समिति करेगी तथा उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा। 11. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत्त आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

12. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेगे या आपराधिक पृष्ठभूमि के होगें तो उनकी सदस्य बने रहने की अर्हता समाप्त हो जायेगी।9 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 13. न्यास समिति न्यास के सर्वागीण विकास एवं मंदिर निर्माण में पूर्ण सहयोग करेगी। 14. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेगे। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

15. सचिव समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।

16. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मंदिर के हित में आवष्यक हो तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी।

यह न्यास समिति अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के तहत कार्यरत रहेगी और मंदिर के सर्वागीण विकास तथा भक्तों के हितों का सर्वोपरि कल्याण का कार्य करेगी।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. श्री महेन्द्र राय, ग्राम-मानिकपुर, पो0-चकरमदास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - अध्यक्ष 2. श्री रामनारायण सिंह, ग्राम-बनिया, पो0-चकरमदास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सचिव 3. श्री मुक्तेष्वर प्रसाद सिंह, ग्राम-बनिया,पो0-चकरमदास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - कोषाध्यक्ष 4. श्री जगदीष सहनी, ग्राम-बनिया, पो0-चकरम दास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सदस्य 5. श्री रामदेव साह, ग्राम-बनिया, पो0-चकरमदास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सदस्य 6. श्री भोला महतो, ग्राम-बनिया, पो0-चकरमदास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सदस्य 7. श्री रघुनाथ पासवान, ग्राम-बनिया, पो0-चकरमदास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सदस्य 8. श्री जगन्नाथ सिंह, ग्रामपो0-चकरमदास, (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सदस्य 9. श्री बैद्यनाथ सिंह, ग्राम-विष्णुपुरा, पो0-चकरमदास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सदस्य 10. श्री उमेष प्रसाद गुप्ता ग्राम-अभुचक, पो0-चकरमदास, (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सदस्य 11. श्री शकुनी मांझी, ग्राम-उफरौल, पो0-चकरमदास (वैषाली), मुजफ्फरपुर - सदस्य 2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा। यह योजना दिनांक 10यह योजना दिनांक 10यह योजना दिनांक 10यह योजना दिनांक 10....10101010....2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा। 2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा। 2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा।

आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष ।

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31 अक्तूबर 2012

सं॰ 1497—पटना जिलान्तर्गत बाढ़ अनुमंडल के बाढ़ बाजार स्थित प्राचीन बाबा उमानाथ मंदिर पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 2216 है। इस न्यास के बेहतर प्रबंधन हेतु अधिसूचना ज्ञापांक 1007, दिनांक 11.08.2008 द्वारा गठित न्यास समिति को पर्षदीय पत्रांक 219, दिनांक 10.05.2012 द्वारा बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 की धारा-29(2) के तहत विघटित करते हुए धारा-33 के अन्तर्गत अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ को बाबा उमानाथ मंदिर न्यास का अस्थायी न्यासधारी नियुक्त किया गया है। उत्तर वाहिनी गंगा तट पर होने के कारण इस मंदिर की घार्मिक महत्ता एवं प्रसिद्धि अधिक है। यहाँ सालों भर भक्तों की भीड़ रहती है, विषेषकर पूर्णिमा, वसंत पंचमी, षिव रात्रि, वैषाखी एवं श्रावण मास में हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान एवं षिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। इसके साथ ही शादी-विवाह, मुंडन, यज्ञोपवित आदि भी आयोजित होते हैं। इस तरह इस प्रसिद्ध मंदिर में दान, चढ़ावा एवं धार्मिक आयोजनों से पर्याप्त आमदनी है, किन्तु इसका समुचित प्रबंधन नहीं होने के कारण न्यास का विकास अवरूद्ध है। इस प्रकार इस न्यास के समुचित प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक्‌ विकास के लिए एक योजना का निरूपण आवष्यक है। अतः मैं किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद बाबा उमानाथ मंदिर, बाढ़ के बेहतर प्रबंधन, समग्र विकास तथा परिसम्पत्तियों की सुरक्षा हेतु अधिनियम की धारा-32 के तहत अग्रलिखित योजना का निरूपण करते हुए इसके कार्यान्वयन एवं संचालन के लिए न्यास समिति का गठन करता हूँ । योजनायोजनायोजनायोजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम'' बाबा उमानाथ मंदिर न्यास येाजना '' होगा, तथा इसे मूर्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम '' बाबा उमानाथ मंदिर न्यास समिति, बाढ़ '' होगा, जिसमें न्यास की समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के संघारण, प्रबंधन, संचालन एवं प्रषासन का अधिकार निहित होगा । 2. इस न्यास समिति का प्रमुख दायित्व न्यास सम्पत्तियों की सुरक्षा एवं अतिक्रमित भूमि की वापसी के लिए समुचित कार्रवाई शीघ्र प्रारंभ करना होगा ।

3. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा, कथा-प्रवचन आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक्‌ प्रबंधन एवं संचालन सुनिष्चित करेगी।

4. न्यास परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमे दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर पंजी में प्रविष्टि के बाद बैंक खाता में जमा की जायेगी।

5. न्यास समिति न्यास की समग्र सम्पत्ति तथा आय-व्यय का सही हिसाब रखेगी तथा समग्र लेखा का वार्षिक अंकेक्षण करायेगी जिसकी प्रति पर्षद को भेजी जायेगी।

6. न्यास की समग्र आय समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा ।10 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 7. न्यास समिति अधिनियम की धारा-60 के अनुरूप न्यास का बजट तैयार करेगी तथा स्वीकृति हेतु पर्षद को भेजेगी। 8. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 9. न्यास के विकास या अन्य धार्मिक कार्यो हेतु दाताओ से प्रापत होने वाली राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में इसे दर्ज कर उन्हे बैंक मेें जमा की जायेगी।

10. न्यास परिसर में स्वच्छता, पवित्रता एवं सौंदर्यीकरण का विषेष ख्याल रखा जायेगा तथा इसकी गरिमा के अक्षुण रखा जायेगा।

11. न्यास की निधि का उपयोग निम्नलिखित कार्यो के लिए किया जाएगाः-

(क) सभी प्राणियों के कल्याण के लिए (ख) मन्दिर में सम्यक्‌ पूजा-अर्चना, राग-भोग, धार्मिक उत्सव, कथा-प्रवचन आदि। (ग) मन्दिर का अनुरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं विकास (घ) धर्म एवं संस्कृति का प्रचार-प्रसार (च) सन्त निवास, धर्मषाला आदि का निर्माण (छ) न्यास समिति द्वारा प्रस्तावित एवं पर्षद द्वारा अनुमोदित अन्य जनहित मूलक कार्य करना।

12. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप वधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए न्यास की आय-व्यय विवरणी, बजट, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक्‌ प्रेषण करेगी।

13. न्यास समिति का कोई सदस्य न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास के परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से लाभ उठाते पाये जायेगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अर्हता समाप्त हो जायेगी।

14. न्यास समिति न्यास की आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखेगी। 15. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत से होगा।

16. न्यास समिति के सचिव समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/ निर्णयों को मूर्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होगें और कोषाध्यक्ष लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होगें।

17. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हुआ है और न्यास हित मेें आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी।

18. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोेधन तथा आकस्मिक रिक्तियो की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- 1. अनुमंडल पदाधिकारी, बाढ़ अध्यक्ष 2. महंत निगमानन्द भारती, उमानाथ, बाढ़ उपाध्यक्ष 3. प्रो0 कनक कुमारी, गोला रोड,बाढ़ सचिव 4. प्रो0 मणिन्द्र सिंह, ढ़ेलवा गोसाई, बाढ़ सदस्य 5. श्री सुधीर कुमार, स्टेषन रोड, बाढ़ सदस्य 6. श्री सोम नारायण तिवारी,उमानाथ, बाढ़ सदस्य 7. श्री गिरिजानन्द दास, गोला रोड, बाढ़ सदस्य

यह योजना दिनांक 01.11.2012 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल पांच वर्षों का होगा। अच्छे कार्य करने वाले सदस्य पुनर्मनोनयन के पात्र होंगे ।

आदेश से,, किषोर कुणाल, अध्यक्ष ।

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1 नवम्बर 2012

11 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013

भूषण प्रसाद उस समय सीतामढ़ी के जिलाधिकारी थे और उनके ही दबाब पर उक्त ट्रस्टीनामा का निबंधन हुआ। उनका अनुरोध था कि अवैध रूप से बनी समिति को मान्यता नहीं दिया जाय। तत्पष्चात्‌ पर्षदीय पत्रांक-704, दिनांक 15.07.2010 द्वारा श्री अरूण भूषण प्रसाद, अध्यक्ष, श्री जानकी जन्म भूमि संचालन एवं जीर्णोद्धार समिति, पुनौराधाम, सीतामढ़ी को सूचित किया गया कि बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मंदिर की सारी सम्पत्ति का हस्तान्तरण उन्होंने अपनी संस्था ''श्री जानकी जन्म भूमि संचालन एवं जीर्णोद्धार समिति'' को कराया, यह एकदम अवैध प्रक्रिया है। महंत श्री कौषल किषोर दास के अनुसार उन पर काफी दबाब बनाया गया और उन्हें धोखे में रखकर सोसाइटी रजिस्ट्रेषन एक्ट में यह रजिस्ट्री करायी गयी। उनसे अनुरोध किया गया कि अतीत में जो ट्रस्टनामा लिखाया गया था वह अवैध हैं, और इसको अतिषीघ्र रद्‌द कराने का कष्ट करें। श्री अरूण भूषण प्रसाद की ओर से उक्त पत्र का कोई जबाब पर्षद को प्राप्त नहीं हुआ और पुनः पर्षदीय पत्रांक-99, दिनांक 19.04.2012 द्वारा अधिनियम की धारा-29 और 32 की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करते हुए सूचित किया गया कि धारा-29 के तहत न्यायालय द्वारा भी गठित न्यास समितियों को पर्षद के अधीन कार्यरत होना पड़ता है तथा धारा 32 के तहत धार्मिक न्यासों के बेहतर प्रबंधन के लिए योजना बनाने तथा न्यास समिति के गठन का अधिकार पर्षद में निहित है। उनके द्वारा गठित समिति को पर्षद द्वारा मान्यता प्रदान नहीं की गयी है, अतः इसे कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है और यह औचित्यहीन है। साथ ही इस समिति द्वारा मंदिर के भेंट-पात्र या आय के अन्य स्त्रोत एवं परिसम्पतियों पर जो अधिकार किया गया है, वह भी अवैध एवं धार्मिक न्यास की सम्पत्ति पर अतिक्रमण है। इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया कि क्यों नहीं उक्त समिति को निरस्त कर अनुवत्ती कानूनी कार्रवाई की जाये। श्री अरूण भूषण प्रसाद ने उक्त पर्षदीय पत्र के उत्तर में अपने पत्र दिनांक 21.05.2012 द्वारा सूचित किया कि श्री राम जानकी, पुनौरा धाम, सीतामढ़ी न्यास पर आधिपत्य जमाने का इनका न कभी इरादा था, न आगे ही है। अधिनियम में वर्णित प्रावधानों के आलोक में इस न्यास के विकास एवं सुव्यवस्था हेतु किये गये कार्यो का वे स्वागत करेंगे और इस मामले में सम्यक विचारोपरान्त यथोचित निर्णय लिया जाय। उपर्युक्त परिस्थितियों में स्पष्ट है कि दिनांक 10.12.2004 को महंत कौषल किषोर दास द्वारा '' मां जानकी जन्मभूमि जीर्णोद्धार एवं अन्तराष्ट्रीय स्थल सेवा न्यास, सीतामढ़ी'' ट्रस्टीनामा जिसमें माँ जानकी जन्मभूमि मन्दिर एवं तत्संबंधी सम्पत्ति को इस न्यास के अधीन करने का उल्लेख है, छल के आधार पर निबंधित है तथा बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत और बिना पर्षद की अनुमति प्राप्त किये निबंधित किया गया है, अतः इसे मान्य नहीं ठहराया जा सकता है। साथ ही उक्त ट्रस्टीनामा में उल्लेखित नामों की न्यास समिति महन्त की सहमति तथा धार्मिक न्यास पर्षद की पूर्व अनुमति नहीं लेने के कारण उनकी जानकारी में अवैधानिक है और इसका निबंधन निरस्त होना आवष्यक है। माँ जानकी जन्म भूमि, पुनौराधाम के बेहतर संचालन, सम्यक्‌ विकास तथा इसके व्यापक प्रचार प्रसार के लिए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत योजना का निरूपण आवष्यक है। अतः मैं किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, माँ जानकी जन्म भूमि, पुनौरा धाम के समुचित संचालन एवं सम्यक्‌ विकास के लिए अधिनियम की धारा-32 के अन्तर्गत नीचे लिखित योजना का निरूपण करता हूँ एवं इसे मूर्त रूप देने तथा कार्यान्वित करने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।

योजनायोजनायोजनायोजना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम'' माँ जानकी जन्म भूमि, पुनौरा धाम न्यास समिति '' होगा, तथा इसे मूर्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''माँ जानकी जन्म भूमि, पुनौरा धाम न्यास समिति'' होगा।

2. माँ जानकी जन्म भूमि, पुनौरा धाम एवं इसकी समस्त चल-अचल सम्पत्ति के प्रबंधन, संचालन एवं प्रषासन का अधिकार ''माँ जानकी जन्मभूमि, पुनौरा धाम न्यास समिति'' में निहित होगा।

3. इस न्यास समिति का प्रथम दायित्व होगा कि इस न्यास की सम्पत्ति छल से धार्मिक न्यास पर्षद की अनुमति के बिना अन्यसंक्रमित की गयी है, उसे तत्काल न्यास के नाम करना और जो इसमें असहयोग करेंगे उनकी सदस्य होने की पात्रता निरस्त मानी जायेगी ।

4. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा, कथा-प्रवचन आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक्‌ प्रबंधन एवं संचालन सुनिष्चित करेगी।

5. न्यास परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखे जायेंगे, जिसमे दान एवं चढ़ाने की राषि डाली जायेगी जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर पंजी में प्रविष्टि के बाद बैंक खाता में जमा की जायेगी।

6. न्यास समिति न्यास की समग्र सम्पत्ति तथा आय-व्यय का सही हिसाब रखेगी तथा समग्र लेखा का वार्षिक अंकेक्षण करायेगी जिसकी प्रति पर्षद को भेजी जायेगी।

7. न्यास की समग्र आय समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक मे न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा । 8. न्यास समिति अधिनियम की धारा-60 के अनुरूप न्यास का बजट तैयार करेगी तथा स्वीकृति हेतु पर्षद को भेजेगी। 9. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 10. न्यास के विकास या अन्य धार्मिक कार्यो हेतु दाताओ से प्राप्त होने वाली राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में इसे दर्ज कर उन्हे बैंक मेें जमा की जायेगी।

11. न्यास परिसर में स्वच्छता, पवित्रता एवं सौंदर्यीकरण का विषेष ख्याल रखा जायेगा तथा इसकी गरिमा के अक्षुण रखा जायेगा।12 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 12. न्यास का निधि का उपयोग निम्नलिखित कार्यो के लिए किया जाएगाः-

(क) सभी प्राणियों के लिए कल्याण (ख) मन्दिर में सम्यक्‌ पूजा-अर्चन, राग-भोग, धार्मिक उत्सव, कथा-प्रवचन आदि (ग) मन्दिर का अनुरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं विकास (घ) धर्म एवं संस्कृति का प्रचार-प्रसार (च) सन्त निवास, धर्मषाला आदि का निर्माण (छ) न्यास समिति द्वारा प्रस्तावित एवं पर्षद द्वारा अनुमोदित अन्य जनहित मूलक कार्य करना।

13. न्यास समिति, बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप वधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए न्यास की आय-व्यय विवरणी, बजट, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक्‌ प्रेषण करेगी।

14. न्यास समिति का कोई सदस्य न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास के परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से लाभ उठाते पाये जायेगे अथवा आपराधिक पृष्टभूमि के होगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अर्हता समाप्त हो जायेगी ।

15. न्यास समिति न्यास की आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखेगी। 16. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत से होगा।

17. न्यास समिति के सचिव समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/ निर्णयों को मूर्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होगें और कोषाध्यक्ष लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होगें।

18. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हुआ है और न्यास हित मेें आवष्यक हो, तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी।

19. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन या संषोेधन तथा आकस्मिक रिक्तियो की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यो की न्यास समिति गठित की जाती हैः-

- सचिव (1) श्री मिहिर सिंह, भा0 प्र0 से0, आयुक्त, तिरहुत प्रमण्डल, मुजफ्फरपुर - अध्यक्ष (2) महंत कौषल किषोर दास, पुनौरा धाम, सीतामढ़ी - उपाध्यक्ष (3) श्री अरूण भूषण प्रसाद, भा0 प्र0 से0 (अ0 प्रा0), फ्लैट नं0-202, शोभा अपार्टमेन्ट, बोरिंग रोड, पटना। (4) श्री सज्जन हिसारिया, पुराना एक्सचेंज रोड, सीतामढ़ी - कोषाध्यक्ष (5) श्री रामनाथ महतो, ग्राम पो0-पुनौरा, सीतामढ़ी - सदस्य - सदस्य (6) डा0 टी0 एन0 सिंह, राजोपट्‌टी, सीतामढी (7) श्री अरविन्द कुमार सिंह- ग्राम पो0-पुनौरा, सीतामढ़ी - सदस्य यह योजना दिनांक 12.11.2012 से प्रभावी होगा । न्यास की सम्पत्ति के अन्यसंक्रमण(alienation)-दस्तावेज को निरस्त करने की सफलता पर इसका कार्यकाल निर्धारित होगा। सम्प्रति एक वर्ष के लिए निर्धारित है।

आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष ।

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23 नवम्बर 2012

सं॰ 1565—गया जिलान्तर्गत बोध गया प्रखंड के ग्राम-बकरौर अन्तर्गत बाबा भूतनाथ एवं बाबा अचलनाथ मठ बकरौर पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 273 है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मठ का अतीत वैभवषाली रहा है, किन्तु कालान्तर में समुचित प्रबंधन के अभाव में मठ की मुख्य भवन एवं संतो की समाधि के भग्नावषेष ही बचे है। इस न्यास की सुव्यवस्था हेतु पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-1111, दिनांक 14.08.2009 द्वारा अनुमण्डल पदाधिकारी, गया की अध्यक्षता में एक न्यास समिति गठित की गयी थी, किन्तु अनुमंडल पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-1239, दिनांक 4.12.2009 द्वारा कुछ निर्णयो का उल्लेख कर निर्गत अधिसूचना पर पुनर्विचार का अनुरोध किया । तत्पष्चात्‌ पर्षदीय पत्रांक-1188, दिनांक 21.10.2011 द्वारा उनसे पत्र में वर्णित निर्णयों/आदेषों की प्रतियां पर्षद को उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया ताकि समुचित निर्णय लिय जा सके, किन्तु अनुमंडल पदाधिकारी ने कोई उत्तर नहीं दिया। इस बीच बकरौर मठ से संबंधित मामला एल0 पी0 ए0 नं0 1188/1988 में माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 02.05.2011 को पारित आदेष की प्रति पर्षद को उपलब्ध करायी गयी है, जिसमें अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा उठाये गये बिन्दुओं का समाधान हो जाता है। उक्त आदेष से यह स्पष्ट है कि बकरौर मठ का स्वतंत्र अस्तित्व है और भू-हदबन्दी वाद सं0 68/81-82 में पारित आदेष को निरस्त करते हुए सरकार को पुनः भू-हदबन्दी प्रक्रिया प्रारम्भ करने को कहा गया है। चूंकि पूर्व में निर्गत पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक-1111, दिनांक 14.08.2009 का गजट प्रकाषन नहीं होने के कारण यह न्यास समिति काम नहीं कर सकी, अतएव न्यास के बेहतर प्रबंधन एवम्‌ संचालन हेतु नई न्यास समिति का गठन आवष्यक है। अतः पर्षदीय ज्ञापांक- 1111, दिनांक 14.08.2009 द्वारा निर्गत अधिसूचना को निरस्त करते हुए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 के अन्तर्गत बाबा भूतनाथ एवं बाबा अचलनाथ मठ बकरौर के बेहतर प्रबंधन, संचालन एवं13 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 सम्यक्‌ विकास हेतु अग्रलिखित योजना निरूपित की जाती है और उसे मूर्त्त रूप देने तथा कार्यान्वित करने के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।

योजयोजयोजयोजनानानाना

1. अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''बकरौर मठ न्यास योजना''''बकरौर मठ न्यास योजना''''बकरौर मठ न्यास योजना''''बकरौर मठ न्यास योजना'' होगा तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''बकरौर मठ न्यास समिति''''बकरौर मठ न्यास समिति''''बकरौर मठ न्यास समिति''''बकरौर मठ न्यास समिति'' होगी, जिसमें न्यास के समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संचालन का अधिकार निहित होगा।

2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ रीति-रिवाजों एवं परम्परागत धार्मिक आचारों का सम्यक आयोजन सुनिष्चित करेगी।

3. न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य होगा कि न्यास की चल-अचल सम्पत्तियाँ, जो अवैध अन्तरण, अतिक्रमण या अन्य किसी कारणवष न्यास के कब्जा से बाहर है, उन्हें मठ में वापस लाने के लिए शीघ्र समुचित कार्रवाई प्रारम्भ करेगी। 4. न्यास का भवन, समाधि स्थल के जीर्णोद्धार/पुननिर्माण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर करेगी। 5. न्यास समिति न्यास की गरिमा एवं मूल्यों का पुर्नस्थापन करेंगी और जनहित मूलक कार्य प्रारम्भ कर जन-सहभागिता को प्रोत्साहित करेगी।

''बाबा भूतनाथ एवं बाबा अचलनाथ मठ, बकरौर'' के नाम से होगा। 6. मठ की समग्र भूमि का नामांतरण ''बाबा भूतनाथ एवं बाबा अचलनाथ मठ, बकरौर'' ''बाबा भूतनाथ एवं बाबा अचलनाथ मठ, बकरौर'' ''बाबा भूतनाथ एवं बाबा अचलनाथ मठ, बकरौर'' 7. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक्‌ संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकालकर खर्च किया जायेगा। 8. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 9. मठ परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मठ की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा। 10. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत्त आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेगे अथवा आपराधिक पृष्ठभूमि के होंगे तो उनके सदस्य बने रहने की अर्हता समाप्त हो जायेगी। 12. न्यास की आय-व्यय में आर्थिक शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति की असली कसौटी होगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।

14. सचिव न्यास समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे । न्यास के नेमी (Routine) कार्य करने एवं आकस्मिक स्थिति में, जब समिति की बैठक तुरत नहीं बुलायी जा सकती, तब वे कोई निर्णय न्यास के हित में ले सकते हैं; किन्तु 10 दिनों के अन्दर बैठक आहुत कर उसका अनुमोदन कराना आवष्यक होगा ।

15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हो और मठ के हित में आवष्यक हो तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी।

16. इस योजना में परिवर्तन, परिवर्धन या संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा।

उपर्युक्त योजना को मूर्त्त रूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :-

1. महंत षिव नारायण गिरि, बुढानाथ महादेव मंदिर, भागलपुर - अध्यक्ष 2. डा0 गिरिजा शंकर प्रसाद, विषाल तालाब, गया - उपाध्यक्ष 3. महंत राम औतार गिरि, बकरौर मठ, बोधगया, गया - सचिव 4. श्री उदय कुमार वर्मा, सरस्वती सदन, न्यु एरिया, विषाल तालाब, गया - सदस्य 5. डा0 शारदा सिंह, मानपुर, गया - सदस्य 6. श्री उमाषंकर पाठक, बकरौर ,गया - सदस्य - सदस्य 7. श्री महेष मांझी, बकरौर, गया

यह योजना दिनांक 01.12.12 से लागू होगी और इसका कार्यकाल 05 वर्षो का होगा। महंत राम औतार गिरी मठ में सम्यक्‌ पूजा-अर्चना अदि समस्त धार्मिक कार्याे का सम्पादन सुनिष्चित करेगें। अध्यक्ष की अनुपलब्धता में उपाध्यक्ष न्यास समिति की बैठक आहूत करेगें और उसकी अध्यक्षता करेगें।

आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष ।

——— 7 दिसम्बर 2012 सं॰ 1617—श्री राम जानकी (पछियारी) मंदिर, ग्राम-बेलसंड, जिला-सीतामढ़ी पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-3133 है। इस न्यास के न्यासधारी महंत गंगा राम दास के विरूद्ध न्यास के समुचित संचालन में विफल रहने तथा आय के दुरूपयोग की षिकायत पर्षद को मिली। इसके बाद पर्षदीय पत्रांक-850, दिनांक 12.08.2011 द्वारा महंत गंगा राम दास को मंदिर की सम्पत्ति एवं आय का व्यक्तिगत स्वार्थ में दुरूपयोग करने, मंदिर में पूजा-अर्चना का सम्यक प्रबंध नहीं करने, मंदिर एवं भवन का समुचित रख-रखाव नहीं करने एवं अधिनियम एवं उप-विधि के14 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 अनुसार न्यास की आय-व्यय का 1995-96 से अद्यतन विवरण, बजट, शुल्क आदि दाखिल नहीं करने के कारण कारण-पृच्छा की नोटिस दी गयी थी। साथ ही अंचलाधिकारी, बेलसंड को न्यास की स्थिति के बारे में छानबीन कर प्रतिवेदन देने का आग्रह किया गया था। महंत गंगा राम दास ने कारण-पृच्छा का कोई जवाब दाखिल नहीं किया। अंचलाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि मंदिर जीर्ण-षीर्ण अवस्था में है तथा इसके सुचारू व्यवस्था के लिए कार्रवाई की आवष्यकता है। अतः मं0 गंगा राम दास को अधिनियम की धारा-28(2) (ज) (iii) (v) (vi) के अधीन न्यासधारी के पद से अपसारित किया जाता है। और श्री राम जानकी (पछियारी) मंदिर, बेलसंड के सुचारू प्रबंधन तथा विकास के लिए अधिनियम की धारा-32 के तहत योजना का निरूपण किया जाता है। अतः मैं, किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद श्री राम जानकी (पछियारी) मंदिर, बेलसंड, जिला-सीतामढ़ी के सुचारू प्रबंधन सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सम्यक विकास हेतु बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा 32 के अन्तर्गत नीचे लिखे योजना का निरूपण करता हूँ एवं इसे मूर्त्त रूप देने तथा कार्यान्वित करने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।

योजनायोजनायोजनायोजना

1. अधिनियम की धारा- 32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम '' श्री राम जानकी (पछियारी)मन्दिर, बेलसंड, श्री राम जानकी (पछियारी)मन्दिर, बेलसंड, श्री राम जानकी (पछियारी)मन्दिर, बेलसंड, श्री राम जानकी (पछियारी)मन्दिर, बेलसंड, सीतामढ़ी योजना,सीतामढ़ी योजना,सीतामढ़ी योजना,सीतामढ़ी योजना,"'"'"'"' होगा तथा इसके कार्यान्वयन एवं संचालन हेतु गठित न्यास समिति का नाम ''''''''श्री राम जानकी (पछियारी) श्री राम जानकी (पछियारी) श्री राम जानकी (पछियारी) श्री राम जानकी (पछियारी) मन्दिर न्यास समिति, बेलसंड, सीतामढ़ी मन्दिर न्यास समिति, बेलसंड, सीतामढ़ी,'','','','' होगा, जिसमें न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों के संधारण एवं संरक्षण का मन्दिर न्यास समिति, बेलसंड, सीतामढ़ी मन्दिर न्यास समिति, बेलसंड, सीतामढ़ी अधिकार निहित होगा।

2. इस न्यास समिति का मुख्य कर्त्तव्य न्यास की सम्पत्तियों की सुरक्षा तथा सुव्यवस्था करना होगा। 3. न्यास समिति न्यास के परम्परा के अनुसार धार्मिक आचारों का पालन सुनिष्चित करेगी। 4. न्यास में प्राप्त होनेवाली समग्र आय किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा की जायेगी। बैंक खाता का संचालन सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। व्यय के अनुसार राषि निकालकर काम किया जायेगा। 5. न्यास के लेखा का संधारण सत्यापित पंजी में होगा। आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखना न्यास समिति का प्रमुख दायित्व होगा जिससे कि सिमिति का कार्य परिलक्षित हो सके और जनता का विष्वास बना रहे।

6. न्यास समिति के सचिव द्वारा बैठकों की कार्यवाही पुस्तिका संधारित की जायेगी तथा कोषाध्यक्ष न्यास के लेखा के संधारण के लिए उत्तरदायी होंगे।

7. न्यास समिति अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित सभी नियमों का पालन करते हुए प्रतिवर्ष न्यास के आय-व्यय की विवरणी, बजट, अंकेक्षण प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि सम्यक रूप से पर्षद्‌ को प्रेषित करेगी।

8. कोई नयी योजना न्यास हित में आवष्यक समझे जाने पर, इस हेतु निर्धारित विषेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर पर्षद्‌ की अनुमोदन के लिए भेजेगी।

9. न्यास समिति का कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से यदि न्यास से लाभ उठाता हुआ पाये जायेगें या आपराधिक पृष्टभूमि के होंगे तो न्यास समिति की सदस्य बने रहने की उनकी अर्हता स्वतः समाप्त हो जायेगी।

10. न्यास समिति में कोई पद आकस्मिक दुर्घटना, त्याग-पत्र अथवा अन्य कारणों से रिक्त होने पर उस पर नियुक्ति पर्षद्‌ करेगी।

11. न्यास समिति के कोई सदस्य अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन में विफल रहेंगे या न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे तो समिति के अध्यक्ष या सचिव इसकी सूचना पर्षद्‌ को देंगे ताकि समुचित कार्रवाई की जा सके।

12. न्यास समिति न्यास के किसी भू-खंड का अन्य संक्रमण या किसी भी तरह का हस्तान्तरण नही करेगी। 13. इस योजना में परिवर्त्तन, परिवर्धन अथवा संषोधन का अधिकार पर्षद्‌ में निहित होगा। 14. इस योजना के संचालन एवं कार्यान्वयन के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को न्यास समिति का सदस्य मनोनित किया जाता है :-

1. अंचलाधिकारी, बेलसंड, जिला- सीतामढ़ी - अध्यक्ष ः 2 :ः 2 :ः 2 :ः 2 : 2. युगेष्वर प्रसाद, बेलसंड, सीतामढ़ी - सचिव 3. श्री सुखचन्द्र साह, बेलसंड - कोषाध्यक्ष 4. श्री रामस्वार्थ सहनी, बेलसंड - सदस्य 5. श्री नारायण मिस्त्री, बेलसंड - सदस्य 6. श्री रामप्रवेष झा, बेलसंड - सदस्य 7. श्री महेन्द्र प्रसाद गुप्ता, बेलसंड - सदस्य 8. श्री विजय कुमार जालान, बेलसंड - सदस्य 9. श्री नंद किषोर पासवान, बेलसंड - सदस्य 10. श्री सीताराम मांझी, बेलसंड - सदस्य 11. श्री विलास राय, बेलसंड - सदस्य।

यह योजना दिनांक 15 दिसम्बर, 2012, के प्रभाव से लागू मानी जायेगी और इसका कार्यकाल अगले 05 वर्षाे का होगा।

आदेश से,

किषोर कुणाल, अध्यक्ष ।15 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 14 दिसम्बर 2012 सं॰ 1645—पटना नगर के षिवपुरी मुहल्ला स्थित श्री राधाकृष्ण-सह-साईं मंदिर एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जो राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर, राजापुर, पटना की शाखा है और यह शाखा मंदिर भी धार्मिक न्यास पर्षद में निबंधित है, जिसकी निबंधन संख्या 4168 है।

इस मंदिर के संबंध में पर्षद को सूचना मिली कि श्री नवीन कुमार सिंह, श्री राणा हरिवंष नारायण सिंह, श्री सुदर्षन सिंह मंदिर पर कब्जा कायम कर इसकी आय का दुरूपयोग कर रहें हैं। पर्षदीय पत्रांक 985, दिनांक 24.08.2012 द्वारा उपर्युक्त व्यक्तियाें से स्पष्टीकरण मांगा गया कि किस कानूनी आधार पर इस मंदिर पर कब्जा जमा रखा है, जबकि यह श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर, राजापुर, पटना की शाखा है। इनलाेंगो ने पत्रांक 6, दिनांक 31.08.2012 द्वारा स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जिसमें कहा गया कि इस न्यास की स्थापना दिनांक 06.09.2010 को निबंधित ट्रस्ट डीड द्वारा की गयी है और श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर, राजापुर से इसका कोेई संबंध नहीं है, किन्तु इस न्यास की जमीन पर इनका स्वत्व कैसे बनता है, इस पर प्रकाष नहीं डाला। अतः पर्षदीय पत्रांक 1231, दिनांक 17.09.2012 द्वारा इन्हे निम्नलिखित बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण/साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गयाः-

(क) जिस भूमि (खाता सं0 63, खेसरा नं0 711, रकवा 14 डी0 5/क0) पर श्री राधा कृष्ण-सह-साईं मंदिर, षिवपुरी अवस्थित है, वह श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर की जमीन है और यदि इन्होंने इसका क्रय किया है तो इसका दस्तावेज दे, ताकि उक्त भू-खंड का स्वामित्व प्रमाणित हो सके।

(ख) न्यास के आय-व्यय के लेखा के अंकेक्षण प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि 6 सितम्बर, 2010 से 31 मार्च, 2011 तक 2,88,836.00 रुपये न्यास को दान/चढ़ावा से आय हुयी है और अधिनियम में जनवरी, 2007 मे हुए संषोधन के बाद यदि निजी न्यास को भी दान/चन्दा से आय है तो वह सार्वजनिक माना जायेगा।

(ग) श्री राधाकृष्ण-सह-साई मंदिर विकास ट्रस्ट की स्थापना के लिए पाँच हजार रुपये जमाकर ट्रस्ट की स्थापना दूसरे की जमीन पर अवैध रूप से करना तथा बैंक में कुछ राषि जमा करने एवं उस पर आय-कर देने से उसकी अवैधता एवं आपराधिकता मे कमी नहीं आती है, जबकि मंदिर का निर्माण एवं मूर्त्तियों की स्थापना जनता के आर्थिक सहयोग से हुआ है। (घ) अधिनियम की धारा-28 (2) (प) के तहत न्यास के स्वरूप निर्धारण का अधिकार पर्षद को प्राप्त है। अतः ऐसे सारे दस्तावेज जो इसे निजी प्रमाणित करते हो, दिनांक 30.09.2012 तक पर्षद में प्रस्तुत करें।

पर्षद द्वारा मांगे गये स्पष्टीकरण/साक्ष्य प्रस्तुत करने के बजाय इनलोंगोें ने अपने पत्रांक 8, दिनांक 27.09.2012 द्वारा पर्षद से ही डीड/खतियान की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया और इस प्रकार वांछित आदेषों का अनुपालन नहीं किया। पुनः पर्षदीय पत्रांक 1527, दिनांक 8.11.2012 द्वारा उपर्युक्त तीनों व्यक्तियों को यह सूचित किया गया है कि दिनांक 26.11.2012 तक यदि यह साबित नहीं करते है कि राधेकृष्ण-सह-साई मंदिर की जमीन ट्रस्ट को दान, बिक्री या किसी भी प्रकार के वैध तरीके से प्राप्त हुयी हैै तो इन्हें न्यास की सम्पत्ति का अतिक्रमणकारी मानते हुए अपसारित कर दिया जायेगा और जिसका अधिकार बनता है, उसकी अनुसंषा पर न्यास समिति का गठन किया जायेगा। इस पत्र की प्रतिलिपि श्री राधेकृष्ण-सह- साई मंदिर विकास ट्रस्ट के सभी सदस्यों को प्रमाण प्रस्तुत करने अथवा मंतव्य देने के लिए भेजा गया।

उक्त विकास ट्रस्ट के उप सचिव श्री राणा उपेन्द्र कुमार सिंह तथा सदस्य श्री रामाषंकर पांडेय का मंतव्य प्राप्त हुआ है। श्री पांडेय ने अपने पत्र मे उल्लेख किया है कि इनका मकान मंदिर के बगल में है इसलिए इन्हें सदस्य बनाया गया है। यह जमीन धार्मिक न्यास पर्षद की है और सार्वजनिक न्यास है। वहीं श्री राणा उपेन्द्र कुमार सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि मंदिर के सभी कार्य भक्तों द्वारा किया गया है और इसकी मासिक आय लगभग 50,000 रूपये की है। श्री सिंह ने उल्लेख किया है कि उपर्युक्त तीनो व्यक्तियों द्वारा न्यास के आय-व्यय में गोपनीयता बरती जाती है और विरोध करने वाले को अपमानित किया जाता है और डराया-धमकाया जाता है। इन्होंने भी मंदिर के प्रबंधन में सुधार की आवष्यकता पर बल दिया है।

उपर्युक्त परिस्थियों से स्पष्ट है कि श्री राधेकृष्ण-सह-साई मंदिर, षिवपुरी एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है जो श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर, राजापुर की शाखा है। श्री राधेकृष्ण-सह-साई मंदिर विकास ट्रस्ट के पदाधिकारीगण मंदिर जिस जमीन पर बनी है, उसका स्वामित्व प्रमाणित करने में विफल रहे है, अतः उक्त विकास समिति को अवैध मानते हुए अमान्य किया जाता है।

श्री राधाकृष्ण-सह-साई मंदिर, षिवपुरी यद्यपि श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर, राजापुर की शाखा है, लेकिन इसके सुचारू प्रबंधन एवं सम्यक्‌ विकास हेतु अधिनियम की धारा-32 के अन्तर्गत योजना का निरूपण एवं इसके कार्यान्वयन हेतु पृथक न्यास समिति का गठन आवष्यक है, जो श्री राधाकृष्णा प्रणामी मंदिर न्यास समिति, राजापुर के साथ समन्वय में कार्य करेगी। अतः मैं किषोर कुणाल, अध्यक्ष, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, श्री राधाकृष्णा-सह-साई मंदिर, षिवपुरी, पटना के समुचित संचालन एवं सम्यक्‌ विकास के लिए बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा-32 के अन्तर्गत नीचे लिखित योजना का निरूपण करता हूॅ एवं इसे मूर्त्त रूप देने के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।

योजनायोजनायोजनायोजना

(1) अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री राधाकृष्ण-सह-साई मंदिर न्यास योजना'' होगा तथा इसे मूर्त्त रूप देने के लिए पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''श्री राधाकृष्ण-सह-साई मंदिर न्यास समिति, षिवपुरी'' होगा।

(2) श्री राधाकृष्ण-सह-साई मंदिर, षिवपुरी एवं इसकी समस्त चल-अचल सम्पत्ति के प्रबंधन, संचालन एवं प्रषासन का अधिकार श्री राधाकृष्ण-सह-साई मंदिर न्यास समिति में निहित होगा।श्

(3) इस न्यास समिति का प्रथम दायित्व होगा कि न्यास की समग्र चल-अचल सम्पत्तियों को अतिक्रमण मुक्त कराकर न्यास के अधीन करना।16 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 (4) न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा, उत्सव-समैया आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक्‌ प्रबंधन एवं संचालन सुनिष्चित करेगी।

(5) मंदिर परिसर में भेंट पात्र रखें जायेगे, जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर पंजी में प्रविष्टि के वाद बैंक खाता में जमा की जायेगी।

(6) न्यास समिति न्यास की समग्र आय-व्यय का सही लेखा-जोखा संधारित करेगी तथा इसका वार्षिक अंकेक्षण करायेगी, जिसकी प्रति पर्षद को भेजी जायेगी।

(7) न्यास की समग्र आय समीप के किसी राष्ट्रीय कृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा। (8) न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। (9) मंदिर के विकास या अन्य धार्मिक कार्यो हेतु दाताओं से प्राप्त होने वाली राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में इसे दर्ज कर बैंक खाता में जमा की जायेगी।

(10) न्यास समिति का कोई सदस्य न्यास हित के प्रतिकुल कार्य करेंगे या न्यास के परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ उठाते पाये जायेगें या आपराधिक पृष्ठभूमि के होगें, तो उनके सदस्य बने रहने की अर्हता समाप्त हो जायेगी। (11) न्यास समिति न्यास की आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखेगी। (12) न्यास समिति अधिनियम एवं उप विधि मे वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए न्यास की आय-व्यय विवरण, बजट, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत आदि का पर्षद को सम्यक्‌ प्रेषण करेगी।

(13) अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही मे बैठक बुलायेगें। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेगें और निर्णय बहुमत से होगा।

(14) इस समिति के सचिव समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयो का मूर्त्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होगें और कोषाध्यक्ष लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होगे।

(15) इस योजना में परिवर्त्तन, परिवर्द्धन अथवा संषोधन तथा आकस्मिक रिक्तियों की पूर्त्ति का अधिकारी पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों की न्यास समिति गठित की जाती हैः-

- सचिव (1) श्री मनीष कुमार, पुलिस उपाधीक्षक, सचिवालय, पटना - अध्यक्ष (2) श्री राणा उपेन्द्र कुमार सिंह उर्फ गोपाल, प्रभावती इन्क्लेब, षिवपुरी, पटना - उपाध्यक्ष (3) श्री राज बल्लभ शर्मा, षिवपुरी, पटना (4) श्री आर0 एन0 बेदी, रामानन्द एपार्टमेन्ट, आनन्दपुरी, पटना - कोषाध्यक्ष (5) श्री कौषलेन्द्र प्रियदर्षी, ए ब्लाक/304, रामराज एमार्टमेंट, राजा बाजार, पटना - सदस्य (6) श्री रोहित कुमार, गौतम कुंज, वेस्ट पटेल नगर, पटना - सदस्य (7) श्री आनंद कुमार अग्रवाल, अधिवक्ता, आनंदपुरी, पटना - सदस्य (8) श्री राजेष्वर प्रसाद सिंह, षिवपुरी, साई मंदिर के बगल में, पटना - सदस्य (9) डा0 मनीषा जायसवाल, षिवपुरी, पटना - सदस्य (10) श्री पारस नाथ सिंह, आनन्दपुरी, बोरिंग कैनाल रोड, पटना - सदस्य (11) श्री चन्द्र किषोर प्रसाद सिंह, प्रणामी भवन, रोड नं0-23, राजीव नगर, पटना - सदस्य यह योजना दिनांक 17.12.2012 से प्रभावी होगी और इसका कार्यकाल 05 वर्षो का होगा।

आदेश से, किषोर कुणाल, अध्यक्ष ।

——— कला संस्कृति एवं युवा विभाग ——— अधिसूचना 6 मार्च 2013

सं0 2/य.1-14/2007 (खण्ड)231—सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, कला संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार, पटना द्वारा प्रदर्श एवं चाक्षुष कला की विभिन्न विधाओं में कलाकारों को विाीय वर्ष 2012-13 में निम्नवत बिहार कला पुरस्कार प्रदान किये जाते हैंः-

क) चाक्षुष कला के क्षेत्र में पुरस्कार

1. राधा मोहन पुरस्कार (समकालीन कला)- वरिष्ठ पुरस्कार- श्री अनिल बिहारी

युवा पुरस्कार- डॉ0 प्रणव प्रकाश

2. कुमुद शर्मा पुरस्कार (महिला कलाकार)- वरिष्ठ पुरस्कार-श्रीमती रागिनी सिन्हा

युवा पुरस्कार - श्रीमती मिनाक्षी झा बनर्जी

3. सीता देवी पुरस्कार (लोक कला)- वरिष्ठ पुरस्कार (मरणोपरांत चित्रकार) स्व0 चक्रवर्ती देवी

युवा पुरस्कार (लोक कला) श्री उाम लाल पासवान 4. दिनकर पुरस्कार (चाक्षुष कला लेखन)- वरिष्ठ पुरस्कार- डॉ ज्योतिष जोशी

युवा पुरस्कार-श्री राहुल देव17 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 ख) प्रदर्श कला के क्षेत्र में पुरस्कार

1. पं. रामचतुर मल्लिक पुरस्कार (शास्त्रीय गायन)- वरिष्ठ पुरस्कार- पं0 गोवर्द्धन मिश्र, गया

युवा पुरस्कार-श्री रजनीश कुमार

2. भिखारी ठाकुर पुरस्कार (रंगमंच)- वरिष्ठ पुरस्कार-श्रीमती प्रेमलता मिश्र और श्रीमती नवनीत शर्मा

युवा पुरस्कार- श्री सौरव कौशिक और श्रीमती शारदा सिंह 3. विंध्वासनी देवी पुरस्कार (लोक गायन)- वरिष्ठ पुरस्कार- श्री ब्रजकिशोर दूबे, पटना

युवा पुरस्कार- सुश्री नीतू कुमारी नूतन 4. रामेश्वर सिंह कश्यप पुरस्कार (प्रदर्श कला लेखन)-वरिष्ठ पुरस्कार- श्री दीनानाथ साहनी

युवा पुरस्कार- श्री आशीष मिश्र

5. विस्मिल्ला खाँ पुरस्कार (वाद्य-वादन)- वरिष्ठ पुरस्कार- पं0 शमशेर बहादुर सिंह

युवा पुरस्कार- श्री विपुल कुमार राय (संतूर)

6. अम्बपाली पुरस्कार (नृत्य)- वरिष्ठ पुरस्कार- श्रीमती नीलम चौधरी

युवा पुरस्कार- सुश्री सुदीपा घोष

ग) प्रदर्श कला के (राष्ट्रीय स्तर)

राष्ट्रीय सम्मान पुरस्कार- पं0 बिरजू महाराज (लखनऊ घराने के ख्यात कथक नर्तक) नई दिल्ली

घ) चाक्षुष कला के लिए (राष्ट्रीय स्तर)

राष्ट्रीय सम्मान पुरस्कार- सैयद हैदर रजा (ख्यात चित्रकार) नई दिल्ली

ड़) लाईफ टाईम एचीवमेंट पुरस्कार (2012-13)

1. वयोवृद्ध कलाकार- श्री आनंदी प्रसाद बादल (चित्रकार) 2. वयोवृद्ध कलाकार- श्री विश्वबंधु (नर्तक) पुरस्कार के रूप में सम्मान राशि के साथ स्मृति चिन्ह, मोमेंटों प्रमाण पत्र अंगवस्त्र आदि प्रदान किये जायेंगे। वरिष्ठ एवं युवा पुरस्कार के लिए राशि क्रमशः रररर 35,000/- रररर 10,000/-रूपये निर्धारित है तथा कंडिका ग, घ, ड़, खंड में अंकित पुरस्कार की राशि प्रति कलाकार रररर 1,00,000/-(एक लाख) रूपये हैं।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, डॉ0 महेश्वर प्रसाद सिंह, संयुक्त सचिव।

———

सं॰ 3ए-9-विविध-14/2013-2484/वि0(2)

वित्त विभाग ——— संकल्प 12 मार्च 2013 विषयः-राजकीय उपक्रमों के अधीन वर्ग- 1 एवं वर्ग-2 स्तर के पदों पर नियुक्ति/प्रोन्नति के संबंध में । विभिन्न अधिनियमों विशेष तथा भारतीय कम्पनी अधिनियम के अन्तर्गत गठित स्वशासी बोर्डाें/निकायों /निगमों/कम्पनियों तथा प्राधिकारों के कार्यकलापों में सुधार लाने हेतु वित्त (लोक उद्यम ब्यूरों) विभाग के संकल्प संख्या 637 दिनांक 10.04.81 द्वारा राजकीय उपक्रमों के लिए एक प्रबंधन पूल गठित करने का निर्णय लिया गया था । उक्त संकल्प की कंडिका-1 में अंकित है कि ''सभी राजकीय उपक्रमों के वर्ग-1 एवं वर्ग-2 स्तर के पदों पर सभी नियुक्तियों प्रबंधन पूल से ही किया जाय ।'' इस संकल्प की कंडिका-2 में अंकित है कि ''राजकीय उपक्रमों में वर्ग-1 एवं वर्ग-2 के पदों पर नियुक्ति हेतु प्रबंधन पूल में प्रविष्टि के लिए उम्मीदवारों का चयन राज्य सरकार द्वारा गठित चयन समिति करेगी तथा इस कार्य के सम्पादन के लिए लोक उद्यम ब्यूरों विभागीय सचिवालय के रूप में कार्य करता रहेगा ।'' 2. प्रश्नगत संकल्प के निर्गत हुए लगभग 32 वर्षाें से अधिक की अवधि बीत चुकी है । लेकिन आज तक 'प्रबंधन पूल' गठित करने हेतु अग्रतर कार्रवाई नहीं की गयी और निगमों का संचालन उनके अपने कर्मियों अथवा प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों के माध्यम से किया जा रहा है । पुराने कई निगम मृतप्राय हो चुके हैं, जिनके परिसमापन हेतु भी कार्रवाई की गयी है । इस बीच कई नये निगमों का सृजन हुआ है और उनकी प्रशासनिक/प्रबंधकीय संरचना भी उनकी आवश्यकतों के हिसाब से सरकार के अनुमोदन से गठित की गयी है । 3. प्रशासनिक सुधार आयोग की अनुशंसा पर विचारोपरान्त राज्य सरकार ने लोक उद्यम ब्यूरों को दिनांक 01.04.2007 के प्रभाव से बंद करने का निर्णय लिया है । लोक उद्यम ब्यूरो के बंद करने के फलस्वरूप अवशेष कार्य के सम्पादन के संदर्भ में वित्त विभागीय पत्रांक 3667 दिनांक 31.05.07 द्वारा निदेश निर्गत किये गये हैं । इस पत्र द्वारा निम्नांकित निर्णय लिये गये हैं :-

18 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013

(क) लोक उपक्रम के कर्मियों के वेतन पुनरीक्षण का कार्य संबंधित प्रशासी विभागों द्वारा वित्त विभाग का परामर्श प्राप्त कर किया जायेगा । लोक उपक्रम कर्मियों के वेतन निर्धारण का सत्यापन एवं कालबद्ध प्रोन्नति की सम्पुष्टि का कार्य प्रशासी विभाग के स्तर पर किया जायेगा । (ख) लोक उपक्रमों के परिसमापन/पुनर्जीवन तथा लेखा अद्यतन कराने का कार्य प्रशासी विभाग का दायित्व है, इससे संबंधित कार्रवाई प्रशासी विभाग द्वारा की जायेगी ।

(ग) लोक उपक्रमों से संबंधित नीति विषयक एवं रोस्टर क्लीयरेंस प्रशासी विभागों द्वारा संबंधित विभागों से परामर्श प्राप्त कर किये जायेंगे ।

(घ) लोक उपक्रमों के अस्तियों एवं दायित्वों के बंटवारे से संबंधित मामलों का अनुश्रवण विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा की जायेगी ।

(ड़) ब्यूरो में पदस्थापित/कार्यरत पदाधिकारी एवं कर्मचारी स्वीकृत पद बल एवं अस्तियों के साथ वित्त विभाग में यथास्थिति सम्मिलित हो जायेंगे ।

4. बिहार कार्यपालिका नियमावली 1979 यथा संशोधित वर्ष 2007 में वर्णित प्रावधान के अनुसार कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (सम्प्रति सामान्य प्रशासन विभाग) के अधीन जिन विषयों को सम्मिलित किया गया है, उनमें महत्वपूर्ण विषय निम्नलिखित हैं (i) राज्य सेवाओं की जल बल योजना तथा उनके प्रशिक्षण के संबंध में परामर्शी कार्य करना, (ii) कार्मिक विभाग के नियंत्रणाधीन सेवाओं यथा, भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं बिहार प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारियों को प्रोन्नति, सेवा विकास एवं प्रशिक्षण संबंधी सभी मामले, (iii) राज्य स्तरीय सरकारी कार्मिकों के सेवा विकास तथा सेवा संबंधी शर्त्ताें का समन्वय एवं परामर्शी कार्य, (iv) ऊंचे पदों पर पदस्थापन के लिए कार्मिकों का विकास तथा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में सचिव, विशेष सचिव, अपर सचिव, संयुक्त सचिव, उप-सचिव, अवर सचिव तथा सहायक सचिव की नियुक्ति एवं उनका पदस्थापन, (v) कार्मिक प्रशासन संबंधी शोधकार्य, (vi) संगठन एवं पद्धति संबंधी सभी कार्य, (vii) प्रशासनिक सुधार से संबंधित सभी कार्य (शोध एवं अन्वेशण संहिता) बिहार कार्यपालिका नियमावली के तहत प्रदत्त दायित्वों के निर्वहन के क्रम में राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की स्वीकृति प्राप्त कर कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (सम्प्रति सामान्य प्रशासन विभाग) द्वारा कतिपय राजकीय उपक्रमों के कतिपय पदों को राज्य स्तरीय सेवा संवर्ग के विशिष्ट कोटि के पदाधिकारियों के लिए कर्णांकित किया गया है ।

5.(क) उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में विशेषकर तब जबकि 'प्रबंधन पूल' का गठन और कार्यान्वयन किया ही नहीं गया,वित्त (लोक उद्यम ब्यूरो) विभाग द्वारा निर्गत संकल्प संख्या 637 दिनांक 10.04.81 अप्रासंगिक हो गया है । अतः उक्त संकल्प को तत्काल प्रभाव से विलोपित किया जाता है । (ख) प्रशासी विभाग आवश्यकतानुसार, अधीनस्थ गठित स्वायतशासी बोर्डों/निकायों/निगमों/कम्पनियों प्राधिकारों के संचालन हेतु प्रशासनिक/प्रबंधकीय संरचना पर मंत्रिपरिषद्‌ का निर्णय प्राप्त कर अग्रतर कार्रवाई करेंगे ।

आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प के बिहार राजपत्र के अगले अंक में सूचनार्थ प्रकाशित अगले अंक में सूचनार्थ प्रकाशित अगले अंक में सूचनार्थ प्रकाशित अगले अंक में सूचनार्थ प्रकाशित आदेशः- आदेशः- आदेशः- आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प के बिहार राजपत्र के आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प के बिहार राजपत्र के आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प के बिहार राजपत्र के किया जाय ।किया जाय ।किया जाय ।किया जाय ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, प्रभात शंकर, अपर सचिव ।

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सूचना

सं॰ 506—मैं रितु राज, स्व0 चक्रधर तिवारी, गोकुल पथ, पटेल नगर, थाना शास्त्री नगर, पटना शपत्र पत्र सं0 657, दिनांक 11 जनवरी 2013 द्वारा घोषणा करती हूँ कि रितु राज, रितु राज तिवारी एक ही व्यक्ति यानी मेरे ही नाम है और अब से मैं रितु तिवारी के नाम से जानी जाउॅगी।

रितु राज।

No. 678—I ASHISH S/o- Shri Anil Chandra Singh, R/o.-Kunti Kunj, Budh Nagar Road No.3, Chandmari Road, Kankarbagh Patna 20 from today I will be known as Ashish Chandan Singh vide Affidavit no. 1974, dated 29-07-2011.

ASHISH.

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सं॰ 1339 कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय गृह विभाग ——— संकल्प 13 मार्च 2013

कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय का पत्रांक 5572, दिनांक 21 दिसम्बर .2012 द्वारा श्री जयशंकर प्रसाद सिन्हा, अधीक्षक मंडल कारा, सीवान को निदेश दिया गया था कि जनवरी, 2008 से फरवरी, 2009 तक का डी0सी0 विपत्र जो `1,36,09,640/- के लिए है, का डी0सी0 विपत्र फॉर्म संख्या-39 में अलग-अलग विपत्रवार बनाकर सात दिनों के अन्दर भेजा जाय। दिनांक 15.01.2013 को निदेशक, प्रोबेशनचर्या द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि राज्य सरकार द्वारा दिए गए निदेश के आलोक में लम्बित ए.सी. विपत्रों का समायोजन करते हुए डी.सी. विपत्र तैयार कर भेजे जाने की कार्रवाई सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ युद्धस्तर पर की जा रही है। किन्तु अधीक्षक, मंडल कारा, सीवान को कई बार इस संबंध में निदेश दिए जाने के बावजूद भी मंडल कारा, सीवान से लम्बित ए.सी. विपत्रों का डी.सी. विपत्र तैयार कर अबतक नहीं भेजा गया है, जबकि इस संबंध में उन्हें कई बार विभागीय स्तर से निदेश एवं स्मार दिए गए।

2. उक्त आलोक में कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय के पत्रांक 196 दिनांक 11 जनवरी 2013 द्वारा उदासीनता, कर्तव्यहीनता एवं लापरवाही के लिए अधीक्षक, मंडल कारा, सीवान, श्री जयशंकर प्रसाद सिन्हा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी, जिसका कोई संतोषजनक उत्तर उनके द्वारा नहीं दिया गया और न ही कोई डी.सी. विपत्र समायोजन हेतु भेजा गया। वर्णित स्थिति में महानिरीक्षक, कारा एवं सुधार सेवाएँ द्वारा सहायक कारा महानिरीक्षक को मंडल कारा, सीवान में कैम्प करने का निदेश दिया गया जिसके पश्चात मुख्यालय में लंबित ए.सी. विपत्रों के डी.सी. विपत्र प्राप्त होने की कार्रवाई हुई।

3. उपरोक्त के आलोक में समीक्षोपरान्त श्री सिन्हा को बिहार (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के प्रावधानान्तर्गत निरीक्षणालय के पत्रांक 382, दिनांक 21 जनवरी 2013 द्वारा कारण-पृच्छा निर्गत किया गया। कारण-पृच्छा का उत्तर श्री सिन्हा द्वारा मंडल कारा, सीवान के पत्रांक 192, दिनांक 30 जनवरी 2013 द्वारा प्रेषित किया गया। श्री सिन्हा द्वारा प्राप्त कारण-पृच्छा को समीक्षोपरान्त असंतोषजनक पाया गया। इस प्रकार श्री सिन्हा द्वारा लम्बित ए.सी. विपत्रों का समायोजन करते21 (cid:18)बहार गजट, 20 माच) 2013 हुए डी.सी. विपत्र तैयार कर भेजे जाने की कार्रवाई में गंभीर लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता बरती गयी तथा अपने विहित पदीय कर्तव्यों एवं दायित्वों का सम्यक निर्वहन नहीं किया गया।

4. अतः निदेशानुसार श्री जयशंकर प्रसाद सिन्हा, अधीक्षक, मंडल कारा, सीवान द्वारा अपने विहित पदीय कर्तव्यों एवं दायित्वों के निष्पादन में बरती गयी कर्तव्यहीनता, लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता के आलोक में एक वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोके जाने का दंड अधिरोपित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, उमेश कुमार वर्मा, अपर सचिव-सह-निदेशक(प्र.)।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 20 March 2013. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2013-03-20.12/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2013-03-20.12.