िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 18181818 चैऽचैऽचैऽचैऽ 1111935935935935 ((((शशशश0000))))
((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 277277277277) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, सोमसोमसोमसोमवारवारवारवार,,,, 8888 अूीलअूीलअूीलअूील 2013201320132013 ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=äÑéçâóX=
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áòeââàÜ=äÑéç=^=
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=2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संषोधन) विधेयक, 2013 बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संषोधन) विधेयक, 2013 बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संषोधन) विधेयक, 2013 बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संषोधन) विधेयक, 2013 [Ñç∫ä∫Ñç∫CNO]OMNP⁄ बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 का संषोधन करने के लिए विधेयक। बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 का संषोधन करने के लिए विधेयक। बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 का संषोधन करने के लिए विधेयक। बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 का संषोधन करने के लिए विधेयक। प्रस्तावनाःप्रस्तावनाःप्रस्तावनाःप्रस्तावनाः - - - - चूँकि, सहकारी समितियों का स्वैच्छिक संस्था के रूप में गठन के साथ सदस्यों के सामाजिक एवं आर्थिक बेहतरी के लिए सदस्यों की आर्थिक सहभागिता, सदस्यों के जनतांत्रिक नियंत्रण एवं स्वायत्त कार्यकलाप से समितियाँ अपने सदस्यों के हित में और अधिक सार्थक रुप में कार्य कर सकेंगी;
और, चूँकि, राज्य सरकार का यह दायित्व है कि वह राज्य में सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यकलाप, जनतांत्रिक नियंत्रण एवं व्यावसायिक प्रबन्धन को प्रोत्साहित करे एवं उसका उन्नयन करे और इस ओर ऐसे कदम उठाये जिनकी आवष्यकता हो;
और, चूँकि, संविधान (संतानवे संषोधन) अधिनियम, 2011 के अनुषरण में बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 में उपर्युक्त संषोधन के अनुकूल रखने हेतु कई संषोधन अनिवार्य है;
भारत गणराज्य के चौसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान-मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः- 1111.... संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ। -संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ। -संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ। -संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ। - (1) यह अधिनियम बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संषोधन) अधिनियम, 2013 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा।
(3) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा।
बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 (बिहार अधिनियम 2, 1997) की धारा-2 का संषोधन। -धन। -धन। -धन। - 2222.... बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 (बिहार अधिनियम 2, 1997) की धारा-2 का संषो बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 (बिहार अधिनियम 2, 1997) की धारा-2 का संषो बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 (बिहार अधिनियम 2, 1997) की धारा-2 का संषो बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 (बिहार अधिनियम 2, 1997) (इसमें आगे उक्त अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट) की धारा-2 में निम्नलिखित संषोधन की जायेगीः- ((((i) ) ) ) उप-धारा (ख) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी; यथा:-
"(ख)(ख)(ख)(ख) ''बोर्ड''''बोर्ड''''बोर्ड''''बोर्ड'' से अभिप्रेत है निदेषक बोर्ड अथवा शासी निकाय अथवा प्रबन्ध समिति, जिस नाम से भी उसे अभिहित किया गया हो, जिसके निदेषन एवं नियंत्रण में सहकारी समिति के कामकाज का प्रबन्ध सौंपा गया हो;"
((((ii) ) ) ) उप-धारा-(त) के बाद निम्नलिखित नई उप-धारा-(थ) (द) (ध) एवं (न) जोड़ी जायेगी, यथा:-
"(थ)(थ)(थ)(थ) ''षीर्ष समिति''''षीर्ष समिति''''षीर्ष समिति''''षीर्ष समिति'' से अभिप्रेत है, सहकारी समिति जिसका कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण बिहार राज्य हो अथवा अन्य कोई सहकारी संघ/परिसंघ जिसका कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण बिहार राज्य में हो और जिसे सहकारी समिति के निबन्धक द्वारा शीर्ष समिति के रूप में घोषित किया गया हो। "(द) ''कृत्यकारी निदेषक'' (द) ''कृत्यकारी निदेषक'' (द) ''कृत्यकारी निदेषक'' (द) ''कृत्यकारी निदेषक'' से अभिप्रेत है नियमावली अथवा सहकारी समिति के उप-विधियों में विर्निदिष्ट समिति के कृत्यकारी कार्यपालक निदेषक।" "(ध)(ध)(ध)(ध) ''पिछड़े वर्गों''''पिछड़े वर्गों''''पिछड़े वर्गों''''पिछड़े वर्गों'' से अभिप्रेत है तथा इसमें सम्मिलित है ''बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन-जातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) अधिनियम- 1991'' (बिहार अधिनियम सं0-3, 1992) की अनुसूची-2 में विनिर्दिष्ट पिछड़े वर्गों के नागरिकों की सूची, समय-समय पर यथासंषोधित ;
"(न)(न)(न)(न) ''अति पिछड़े वर्गों'' ''अति पिछड़े वर्गों'' से अभिप्रेत है तथा इसमें सम्मिलित है ''बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में ''अति पिछड़े वर्गों'' ''अति पिछड़े वर्गों'' आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन-जातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) अधिनियम- 1991'' (बिहार अधिनियम सं0-3, 1992) की अनुसूची-1 में विनिर्दिष्ट पिछड़े वर्गों के नागरिकों की सूची, समय-समय पर यथासंषोधित ;
बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-23 में संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-23 में निम्नवत संषोधन किए 3333.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-23 में संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-23 में संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-23 में संषोधन। -
जायेंगे, यथा:- (क)(क)(क)(क) उप-धारा (7) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा, यथा:- "(7) सदस्य के रूप में सम्मिलित किया गया कोई भी व्यक्ति सदस्यता के अधिकारों, जिसमें मताधिकार भी शामिल है, का प्रयोग, सहकारी समिति की उप-विधियों में विहित सहकारी समिति के प्रबन्धन में सहभागिता हेतु बुलाई गई बैठकों में यथा अपेक्षित न्यूनतम उपस्थिति तथा अपेक्षित समिति की न्यूनतम सेवाएँ सुनिष्चित करने के बाद ही कर सकेगा;
परन्तु किसी भी व्यक्ति को मताधिकार का प्रयोग करने का पात्र होने के पूर्व कम से कम एक वर्ष तक सदस्य बने रहना होगाः
परन्तु और कि उपर्युक्त प्रावधान किसी सहकारी समिति के निबन्धन के प्रथम वर्ष में प्रवर्त्तक सदस्य पर लागू नहीं होगा।"
(ख)(ख)(ख)(ख) उप-धारा (7) के बाद निम्नलिखित नई उप-धाराएँ (8), उप-धारा (9) तथा उप-धारा (10) जोड़ी जायेंगी, यथाः-3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 "(8)(8)(8)(8) प्रत्येक सहकारी समिति प्रत्येक सदस्य की, सदस्य के साथ अपनेे कारबार के नियमित संव्यवहार में रखे गये सहकारी समिति की बही, सूचना और लेखा तक, पहुॅच की व्यवस्था करेगी।
(9)(9)(9)(9) सहकारी समिति के प्रत्येक सदस्य को सहकारी समिति में संधारित अभिलेखों, सूचनाओं तथा व्यवसाय से संबंधित नियमित संव्यवहारों की लेखाओं के सम्बन्ध में सभी जानकारी/कागजात प्राप्त करने का अधिकार होगा। सहकारी समिति के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी/प्रबन्धक सदस्यों को सभी वांछित जानकारी/कागजातों तक पहुँच सुनिष्चित करेगी।
(10)(10)(10)(10) सहकारी समिति के सदस्यों को इस अधिनियम के अधीन बनी नियमावली या उप-विधियों में विहित प्रावधानों के अधीन षिक्षा तथा सहकारिता सम्बन्धी प्रषिक्षण प्राप्त करने का अधिकार होगा।" बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-25 का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-25 में निम्नलिखित संषोधन 4444.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-25 का संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-25 का संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-25 का संषोधन। - किया जायेगा, यथा:- (क) उप-धारा (1) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा, यथा:-
"(1) अधिनियम तथा उप-विधियों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी सहकारी समिति का अंतिम प्राधिकार इसके सामान्य निकाय में निहित होगा। प्रत्येक सहकारी समिति का बोर्ड, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद, छह माह के भीतर वार्षिक आम सभा बुलायेगी, जिसमें बोर्ड के सदस्यों एवं उसके पदाधिकारियों के निर्वाचन को छोड़कर उप-धारा (3) के अधीन सभी अथवा किसी विषय पर विचार किया जायेगा।" (ख) उप-धारा (3) की कंडिका (क) एवं (ख) विलोपित की जायेगी। बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-26 का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-26 की उपधारा-(2) 5555.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-26 का संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-26 का संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-26 का संषोधन। - निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"(2) बोर्ड का आकार, उपविधियों के अनुसार, पदधारियों सहित अधिकतम इक्कीस सदस्यों का होगा। मुख्य कार्यपालक बोर्ड का पदेन सदस्य होगा। बोर्ड बैंकिग, प्रबन्धन, वित्त के क्षेत्र का अनुभव रखने वाले अथवा सहकारी समितियों द्वारा जिम्मा लिए गए उद्देष्यों और कार्यकलापों से संबंधित किसी अन्य क्षेत्र में विषेषज्ञता रखने वाले व्यक्तियों को सदस्य के रुप में सहयोजित करेगाः
परन्तु इस प्रकार सहयोजित सदस्यों की संख्या दो से अधिक नहीं होगी और यह बोर्ड की कुल संख्या के अतिरिक्त होगी:
परन्तु और कि ऐसे सहयोजित सदस्यों को सहकारी समिति के किसी निर्वाचन में ऐसे सदस्यों को अपनी हैसियत में मत देने का अधिकार नहीं होगा और न उन्हें बोर्ड के पदाधिकारी के रुप में निर्वाचित होने के पात्र होने का अधिकार होगा।
परन्तु यह और कि सहकारी समिति के कृत्यकारी निदेषक भी बोर्ड के सदस्य होंगे और ऐसे सदस्य निदेषकों की कुल संख्या की गणना के प्रयोजनार्थ अपवर्जित किये जायेंगेः
परन्तु यह और कि प्रत्येक सहकारी सोसाइटी के बोर्ड में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन-जाति के लिए दो स्थान, पिछड़े वर्गों के लिए दो स्थान और अति पिछड़े वर्गों के लिए दो स्थान आरक्षित होगा :
परन्तु यह और कि उपर्युक्त परन्तुक में यथाविहित स्थानों के आरक्षण के ध्येय से राज्य सरकार, सामान्य अथवा विषेष आदेष के द्वारा, वैसी समितियों अथवा समितियों के वर्ग को जिनमें सदस्यों के रूप में व्यष्टि अन्तर्विष्ट नहीं हैं अथवा जिनमें उपर्युक्त आरक्षण श्रेणियों से सदस्य नहीं हैं, को अपवर्जित कर सकेगी :
परन्तु यह और कि उपर्युक्त के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या कुल स्थानों के पचास प्रतिषत से अनधिक होगा :
परन्तु और भी कि उपर्युक्त के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के पचास प्रतिषत के यथाषक्य निकटतम किन्तु इससे अनधिक स्थान यथास्थिति अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जन-जातियों, पिछड़े वर्गों और अति पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षित किये जायेंगे :
परन्तु और भी कि अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जन-जातियों, पिछड़े वर्गों एवं अति पिछड़े वर्गों के लिए जो स्थान आरक्षित नहीं किये गये हैं, उनमें से पचास प्रतिषत के यथाषक्य निकटतम किन्तु इससे अनधिक स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किये जायेंगे :
परन्तु यह और भी कि इस प्रकार महिलाओं के लिए आरक्षित कुल स्थानों की संख्या दो से अन्यून होगीः इस प्रकार आरक्षित स्थान, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन-जाति के सदस्यों, पिछड़े वर्गाें और अति पिछड़े वर्गों के सदस्यों तथा महिलाओं के बीच से, निर्वाचन या/ और सहयोजन द्वारा भरे जायेंगे। यह प्रावधान प्राथमिक सोसाइटी से शीर्ष सोसाइटी तक की सभी सोसाइटियों पर लागू होगा :
परन्तु और भी कि प्राथमिक समिति तथा शीर्ष समिति तक ऐसा आरक्षण इस प्रयोजनार्थ इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी नियमावली द्वारा शासित होगा।" बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-28 का प्रतिस्थापन। - उक्त अधिनियम की धारा-28 निम्नलिखित द्वारा 6666.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-28 का प्रतिस्थापन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-28 का प्रतिस्थापन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-28 का प्रतिस्थापन। - प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:- "28282828.... पदावधि। -पदावधि। -पदावधि। -पदावधि। - बोर्ड के निर्वाचित सदस्यों एवं पदधारियों की पदावधि निर्वाचन की तिथि से पाँच वर्षो की होगी और पदाािकारियोंं की पदावधि बोर्ड की अवधि के साथ का सह-सीमा (को-टर्मिनस) होगीः4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 परन्तु बोर्ड, बोर्ड में किसी आकस्मिक रिक्ति को बोर्ड द्वारा उस वर्ग के सदस्यों से मनोनयन द्वारा भर सकेगा; जिसके संबंध में आकस्मिक रिक्ति उत्पन्न हुई हो, यदि बोर्ड की अवधि इसकी मूल अवधि से आधी से कम बाकी होः
परन्तु यह और कि किसी सहकारी समिति के निर्वाचित बोर्ड में यदि मूल पदावधि से आधे से अधिक की पदावधि बाकी हो, और बोर्ड में किसी कारणवष निर्वाचित सदस्यों एवं पदाधिकारियों का पद रिक्त हो जाय, तो शेष अवधि के लिए बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार द्वारा उपनिर्वाचन से रिक्ति को भरा जायेगा:
परन्तु यह और भी कि प्रथम बोर्ड की अवधि सहकारी समिति के निबन्धन की तारीख से बारह माह से अधिक नहीं होगी।" बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-29 में संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-29 में निम्नवत संषोधन किये 7777.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-29 में संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-29 में संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-29 में संषोधन। - जायेंगे, यथा:- (क)(क)(क)(क) उप-धारा (1) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"(1) सहकारी समिति के बोर्ड के निर्वाचन के संचालन के लिए बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार अधिनियम, 2008 के अधीन गठित बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार जिम्मेवार होगी।"
(ख)(ख)(ख)(ख) उप-धारा (2) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"(2) वर्हिगामी निदेषकों की अवधि की समाप्ति के पूर्व, बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार अधिनियम, 2008 तथा उसके अधीन बनी नियमावली तथा बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 तथा उसके अधीन बनी नियमावली के प्रावधानों के अधीन विनिर्दिष्ट रीति से बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार द्वारा निर्वाचन का संचालन किया जायेगा।"
(ग) (ग) (ग) (ग) उप-धारा-(3) विलोपित की जायेगी। बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-33 में संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-33 में निम्नवत संषोधन किये 8888.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-33 में संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-33 में संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-33 में संषोधन। - जायेंगे, यथा:- (क) (क) (क) (क) उप-धारा (1) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायगी :-
"(ं1) सहकारी समिति अपने लेखाओं की लेखा-परीक्षा प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार राज्य सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत प्राधिकार द्वारा अनुमोदित पैनल के लेखा-परीक्षक द्वारा कराएगी। ऐसा लेखा-परीक्षक, चाटर्ड एकाउन्टेंट अधिनियम, 1949 के अर्थान्तर्गत चाटर्ड एकाउन्टेंट होगा या निबन्धक के कार्यालय का होगा। राज्य सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत प्राधिकार द्वारा अनुमोदित पैनल के लेखा-परीक्षक की न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता किसी मान्यता प्राप्त विष्वविधालय से उत्तीर्ण स्नातक (गणित के साथ) अथवा वाणिज्य स्नातक होगी। ऐसा लेखा-परीक्षक अथवा चाटर्ड एकाउन्टेंट फर्म को अंकेक्षण का कम से कम तीन वर्षो का अनुभव अनिवार्य होगा। केवल ऐसा लेखा-परीक्षक अथवा चाटर्ड एकाउन्टेंट फर्म ही सहकारी समिति के लेखाओं का लेखा-परीक्षण करने के पात्र होगा।"
(ख) (ख) (ख) (ख) उप-धारा (4) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"(4) प्रत्येक सहकारी समिति के लेखाओं का अंकेक्षण सहकारी समिति के सामान्य निकाय द्वारा नियुक्त लेखा-परीक्षक अथवा चाटर्ड एकाउन्टेंट फर्म द्वारा उप-धारा (1) में विनिर्दिष्ट रीति से की जायेगी। लेखा परीक्षक के पारिश्रमिक सामान्य निकाय द्वारा नियत किया जायेगा:
परन्तु यदि अंकेक्षण, निबन्धक के कार्यालय के अंकेक्षक द्वारा किया जाता है तो नियत अंकेक्षण फीस का भुगतान समितियों द्वारा किया जायेगा।"
(ग) (ग) (ग) (ग) उप-धारा (10) के बाद निम्नलिखित नई उप-धारा (11) जोड़ी जायेगी, यथा:-
"(11) शीर्ष सहकारी समिति, अपने लेखाओं के विवरण के अंकेक्षण के उपरान्त, अंकेक्षण प्रतिवेदन, समिति के सामान्य निकाय के अनुमोदनोपरान्त, तीस दिनों के भीतर निबन्धक को अनिवार्य रुप से सुपूर्द कर देगा ताकि उस रिपोर्ट को राज्य सरकार के माध्यम से, राज्य सरकार द्वारा अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार विधान मण्डल के पटल पर रखा जा सके।"
बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-35 का प्रतिस्थापन। - उक्त अधिनियम की धारा-35 निम्नलिखित द्वारा 9999.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-35 का प्रतिस्थापन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-35 का प्रतिस्थापन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-35 का प्रतिस्थापन। - प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:- "35. वार्षिक विवरणियाँ दाखिल करना। -वार्षिक विवरणियाँ दाखिल करना। -वार्षिक विवरणियाँ दाखिल करना। -वार्षिक विवरणियाँ दाखिल करना। - प्रत्येक सहकारी समिति, प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छह माह के भीतर, निबन्धक के समक्ष वार्षिक विवरणियाँ दाखिल करेगी जिसमें निम्नलिखित विषय शामिल होंगे :- (क) कार्यकलापों का वार्षिक रिपोर्ट; (ख) लेखाओं का लेखा-परीक्षित विवरण; (ग) सामान्य निकाय द्वारा यथानुमोदित अधिषेष निपटान हेतु योजना; (घ) सहकारी समिति की उप-विधियों में किये गये संषोधनों की सूची, यदि कोई हो;
5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013(ङ) निर्वाचन, यदि नियत हो, के संचालन और सामान्य निकाय की सभा के आयोजन की तारीख से संबंधित घोषणा;
(च) निबन्धक द्वारा अधिसूचित कोई अन्य सूचना जो अधिनियम के किसी प्रावधान के पालन हेतु आवष्यक हो।"
बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-41 के बाद एक नई धारा-41 क.... का अन्तःस्थापन। -का अन्तःस्थापन। -का अन्तःस्थापन। -का अन्तःस्थापन। - उक्त अधिनियम की 10101010.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-41 के बाद एक नई धारा-41 क बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-41 के बाद एक नई धारा-41 क बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-41 के बाद एक नई धारा-41 क धारा-41 के बाद निम्नलिखित नई धारा-41क अन्तःस्थापित की जायेगी, यथा:- "41क41क41क41क.... अधिकरण द्वारा बोर्ड का अधिक्रमण। -अधिकरण द्वारा बोर्ड का अधिक्रमण। -अधिकरण द्वारा बोर्ड का अधिक्रमण। -अधिकरण द्वारा बोर्ड का अधिक्रमण। - (1) सहकारी समिति के सदस्य से प्राप्त आवेदन पर, यदि अधिकरण की राय में किसी सहकारी समिति का बोर्ड, जिसे राज्य सरकार द्वारा ऋण अथवा वित्तीय सहायता दी गई हो अथवा ऋण सरकारी गारंटी पर दी गई हो, लगातार ऋण अदायगी में चूक कर रहा हो अथवा इस अधिनियम, नियमावली या उपविधियों द्वारा अधिरोपित कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाह हो अथवा उसके सदस्यों के हित के विरुद्ध आचरण किया हो या बोर्ड के गठन अथवा कार्य करने में गतिरोध हो तो वह, प्रबंध समिति को अपनी आपत्ति, यदि कोई हो, अधिकथित करने हेतु अवसर देने के बाद, सकारण लिखित आदेष द्वारा छह माह से अनधिक अवधि के लिए सहकारी समिति के बोर्ड को अधिक्रमित कर सकेगा। अधिकरण इस धारा के अधीन पारित प्रत्येक आदेष को अभिलिखित करेगा और निबन्धित डाक से सम्बन्धित सहकारी समिति को सूचित करेगाः
परन्तु बैंकिग कारोबार करने वाली सहकारी समिति के मामले में बैंकिग रेगुलेषन एक्ट, 1949 के प्रावधान भी लागू होंगेः
परन्तु और कि बैंकिग का कारोबार करने वाली सहकारी समिति के मामले में बोर्ड के अधिक्रमण की अधिकाधिक अवधि एक वर्ष की होगीः
परन्तु और भी कि बैंकिग का कारोबार करने वाली सहकारी समिति के बोर्ड का अधिक्रमण भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्ष से किया जायेगा।
(2)(2)(2)(2) जब कोई सहकारी समिति उप-धारा (1) के अधीन अधिक्रमण के अधीन हो तो अधिकरण समिति के कार्य संचालन के लिए एक प्रषासक नियुक्त करेगी। इस उप-धारा के अधीन नियुक्त प्रषासक विनिर्धारित अवधि के भीतर सहकारी समिति के बोर्ड के निर्वाचन हेतु आवष्यक कार्रवाई करेगा तथा निर्वाचित बोर्ड को प्रबन्ध का कार्यभार सौंप देगा।
(3)(3)(3)(3) उप-धारा (2) के अधीन नियुक्त प्रषासक अधिकरण द्वारा यथा नियत ऐसा पारिश्रमिक, जिसे वह सहकारी समिति के कारबार के क्रियान्वयन के लिए उचित समझे, प्राप्त करेगा। इस प्रकार नियत पारिश्रमिक सहकारी समिति के खाते से भुगतेय होगा।
(4)(4)(4)(4) उप-धारा (2) के अधीन नियुक्त प्रषासक, अधिकरण द्वारा निर्मित सेवा शर्त्तो के अधीन कार्य करेगा तथा इस अधिनियम, नियमावली एवं समिति की उप-विधियों के अधीन बोर्ड को समनुदेषित सभी कर्तव्यों का पालन तथा दायित्वों का निर्वहन करेगाः
परन्तु अधिकरण को अधिक्रमण की अवधि के दौरान प्रषासक को बदलने की शक्ति होगी।" बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-42 का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-42 की उप-धारा (1) 11111111.... बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-42 का संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-42 का संषोधन। - बिहार अधिनियम 2, 1997 की धारा-42 का संषोधन। - निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"(1) इस अधिनियम के अधीन अपराध होगा यदि - (क) कोई सहकारी समिति अथवा उसका कोई पदाधिकारी अथवा सदस्य जानबूझकर मिथ्या विवरणी बनाता है या मिथ्या सूचना देता है अथवा राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति अथवा निबन्धक को उससे अपेक्षित जानकारी जानबूझकर नहीं भेजता है;
(ख) कोई व्यक्ति जानबूझकर अथवा बिना किसी युक्तिसंगत सफाई के किसी सम्मन, अधियाचना अथवा इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन निर्गत, विधिसम्मत लिखित आदेष की अवज्ञा करता है;
(ग) कोई नियोक्ता जो बिना किसी युक्तियुक्त कारण के अपने कार्मिकों से कटौती की गई राषि को, कटौती की तिथि से चौदह दिनों के भीतर, सहकारी समिति को भुगतान करने में असफल होता है;
(घ) कोई पदाधिकारी अथवा अभिरक्षक, उस सहकारी समिति की, जिसका वह पदाधिकारी या अभिरक्षक हो, पंजियों, लेखाओं, दस्तावेजों, अभिलेखों, नकद, प्रतिभूति एवं अन्य परिसम्पत्तियों की अभिरक्षा अधिकृत व्यक्ति को सौपने में असफल होता है;
(ङ) कोई व्यक्ति सहकारी समिति के बोर्ड के पदाधिकारियों या सदस्यों के निर्वाचन के पूर्व, या दौरान अथवा पश्चात् भ्रष्ट आचरण में लिप्त होता है।"6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 ेश्य एवं हेतु उद्दउद्दउद्दउद्देश्य एवं हेतु ेश्य एवं हेतु ेश्य एवं हेतु
संविधान (97वें संशोधन) अधिनियम, 2011 की कंडिका-243ZT के आलोक में बिहार राज्य में सम्प्रति प्रवृत्त बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति अधिनियम, 1996 के वैसे प्रावधानों, जो उक्त संविधान (97वें संशोधन) अधिनियम, 2011 के असंगत है, को तदनुसार संशोधित करते हुए एतदर्थ जनतांत्रिक सदस्य नियंत्रण, सदस्यों की आर्थिक भागीदारी और स्वायत्त क्रियाकलाप संबंधी सिद्धान्तों पर अवधारित सहकारी समितियों के गठन, संचालन और परिसमापन संबंधी प्रावधानों का समावेश करना, एक सहकारी समिति में निदेशकों की अधिकतम संख्या 21 (इक्कीस) से अधिक नहीं होने का प्रावधान का निर्धारण करना, निदेशक मंडल के निर्वाचित निदेशकों का तथा पदधारकों का कार्यकाल निर्वाचन की तिथि से पाँच वर्षों के लिए निर्धारित अवधि (Fixed Term of five years) हेतु प्रावधान करना, साथ ही एक सहकारी समिति के निर्वाचन संचालन हेतु एक प्राधिकार अथवा निकाय के लिए उपबंध करना, एक सहकारी समिति के निदेशक मंडल को अधिकतम छः माह की अवधि के लिए अवक्रमण अथवा निलंबन में रखने संबंधी प्रावधान करना, स्वतंत्र कौशलयुक्त (professional) अंकेक्षण का प्रावधान करना, सहकारी समितियों के सदस्यों को सूचना का अधिकार दिए जाने का प्रावधान करना, सहकारी समितियों के क्रियाकलाप संबंधी सावधिक प्रतिवेदन और लेखा की जानकारी प्राप्त करने हेतु राज्य सरकार को अधिकृत करना, प्रत्येक सहकारी समिति के निदेशक मंडल में समाज के सभी वर्ग यथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन-जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व एवं भागीदारी सुनिश्चित करना इस बिहार स्वावलम्बी सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक, 2013 का उद्देश्य है ।
इस विधेयक को अधिनियमित कराना ही अभीष्ट है।
(रामाधार सिंह) भार-साधक सदस्य पटना, दिनांक 02 अप्रील, 2013
प्रभारी सचिव बिहार विधान-सभा।
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अधी/क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 277-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in