िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 18181818 चैऽचैऽचैऽचैऽ 1111935935935935 ((((शशशश0000))))
((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 279279279279) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, सोमसोमसोमसोमवारवारवारवार,,,, 8888 अूीलअूीलअूीलअूील 2013201320132013 ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=äÑéçâóX=
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î\Xôâz=ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=Çë=îâåëDâ=äëz=
ánïó=[âz=
áòeââàÜ=äÑéç=^=2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 बिहार सहकारी सोसाइटी (संषोधन) विधेयक, 2013 बिहार सहकारी सोसाइटी (संषोधन) विधेयक, 2013 बिहार सहकारी सोसाइटी (संषोधन) विधेयक, 2013 बिहार सहकारी सोसाइटी (संषोधन) विधेयक, 2013 [Ñç∫ä∫Ñç∫CNP]OMNP⁄ बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 में संषोधन हेतु विधेयक। बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 में संषोधन हेतु विधेयक। बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 में संषोधन हेतु विधेयक। बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 में संषोधन हेतु विधेयक। प्रस्तावनाःप्रस्तावनाःप्रस्तावनाःप्रस्तावनाः----चूँकि, स्वैच्छिक संस्था के रूप में गठित सहकारी समितियाँ सदस्यों के सामाजिक एवं आर्थिक बेहतरी के लिए सदस्यों की आर्थिक सहभागिता, सदस्यों के जनतांत्रिक नियंत्रण एवं स्वायत्त कार्यकलाप से अपने सदस्यों के हित में और अधिक सार्थक रुप में कार्य कर सकें;
और, चूँकि, राज्य में सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यकलाप, जनतांत्रिक नियंत्रण एवं व्यावसायिक प्रबन्धन को प्रोत्साहित करना एवं उसका उन्नयन करना और इस प्रयोजनार्थ ऐसे अध्युपाय करना, जो आवष्यक हो, राज्य सरकार का दायित्व है;
और, चूँकि, संविधान (संतानवें संषोधन) अधिनियम, 2011 के अनुषरण में बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 में उपयुक्त संषोधन के अनुकूल रखने हेतु कई संषोधन अनिवार्य है;
भारत गणराज्य के चौसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान-मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1111.... संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ।संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ।संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ।संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ। - (1) यह अधिनियम बिहार सहकारी सोसाइटी (संषोधन) अधिनियम, 2013 कहा जा सकेगा। (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा।
बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 (अधिनियम VI, 1935) की धारा-2 का संषोधन। 2222.... बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 (अधिनियम , 1935) की धारा-2 का संषोधन। - बिहार सहकारी , 1935) की धारा-2 का संषोधन। , 1935) की धारा-2 का संषोधन। बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 (अधिनियम बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 (अधिनियम सोसाइटी अधिनियम, 1935 (अधिनियम VI, 1935) (इसके आगे उक्त अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट) की धारा-2 में निम्नवत संषोधन किया जायेगा, यथा:- (1) उप-धारा (ङ) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगीः-
"(ङ) ''बोर्ड''(ङ) ''बोर्ड''(ङ) ''बोर्ड''(ङ) ''बोर्ड'' से अभिप्रेत है निदेषक बोर्ड अथवा शासी निकाय अथवा प्रबन्ध समिति, चाहे जो भी इसका नाम हो, जिसे सहकारी समिति के कामकाज का प्रबन्धन सौंपा गया हो।"
(2) उप-धारा (छछ) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगीः-
"(छछ)(छछ)(छछ)(छछ) ''पदधारी''''पदधारी''''पदधारी''''पदधारी'' से अभिप्रेत है सहकारी समिति के सभापति, उपसभापति, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव अथवा कोषाध्यक्ष तथा किसी सहकारी समिति के बोर्ड द्वारा निर्वाचित कोई अन्य व्यक्ति।" (3) उप-धारा (त) के बाद निम्नलिखित नई उप-धारा (थ), (द), (ध) एवं (न) जोड़ी जायेगी, यथा:-
"(थ)''सामान्य निकाय'' (थ)''सामान्य निकाय'' से अभिप्रेत है उस सहकारी समिति के सम्मिलित रुप से सभी सदस्य अथवा सभी (थ)''सामान्य निकाय'' (थ)''सामान्य निकाय'' सदस्यों के प्रतिनिधि।" "(द) ''कृत्यकारी निदेषक'' (द) ''कृत्यकारी निदेषक'' से अभिप्रेत है नियमावली अथवा सहकारी समिति के उपविधियों में विर्निदिष्ट (द) ''कृत्यकारी निदेषक'' (द) ''कृत्यकारी निदेषक'' समिति के कृत्यकारी कार्यपालक निदेषक।" "(ध)(ध)(ध)(ध) ''पिछड़े वर्गों''''पिछड़े वर्गों''''पिछड़े वर्गों''''पिछड़े वर्गों'' से अभिप्रेत है तथा इसमें सम्मिलित है ''बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन-जातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) अधिनियम- 1991'' (बिहार अधिनियम सं0-3, 1992) की अनुसूची-2 में विनिर्दिष्ट पिछड़े वर्गों के नागरिकों की सूची, समय-समय पर यथासंषोधित ; "(न)(न)(न)(न) ''अति पिछड़े वर्गों'' ''अति पिछड़े वर्गों'' से अभिप्रेत है तथा इसमें सम्मिलित है ''बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में ''अति पिछड़े वर्गों'' ''अति पिछड़े वर्गों'' आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन-जातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) अधिनियम- 1991'' (बिहार अधिनियम सं0-3, 1992) की अनुसूची-1 में विनिर्दिष्ट पिछड़े वर्गों के नागरिकों की सूची, समय-समय पर यथासंषोधित ;
3333.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 , 1935 , 1935 , 1935 की धारा-13ककी धारा-13ककी धारा-13ककी धारा-13क.... में संषोधन।में संषोधन।में संषोधन।में संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-13क. की उप-धारा (1) एवं (2) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:- "(1) राज्य में सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यकलाप, जनतांत्रिक नियंत्रण एवं व्यावसायिक प्रबन्धन को प्रोत्साहित एवं उन्नत करना और इस ओर ऐसे कदम उठाना, जिसकी आवष्यकता हो, राज्य सरकार का दायित्व होगा। (2)(2)(2)(2) उप-धारा (1) के प्रावधानों के अधीन सहकारी समिति के प्रोत्साहन एवं उन्नयन हेतु राज्य सरकार, यदि आवष्यक समझे तो-
(क) (क) (क) (क) किसी सामान्य या निबंधित सहकारी समिति के किसी वर्ग के विकास में सहायता के विचार से सहकारी समिति की हिस्सा-पूँजी में सीधे अंषदान दे सकेगी;
(ख) (ख) (ख) (ख) किसी सहकारी समिति की हिस्सा-पूँजी के निर्माण एवं सम्बर्द्धन के लिए सहायता कर सकेगी;
3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013(ग) (ग) (ग) (ग) सहकारी समिति को ऋण या अग्रिम दे सकेगी या सहकारी समिति के द्वारा निर्गत डिबेंचर पर मूलधन के पुनर्भुगतान और सूद के भुगतान की गारंटी दे सकेगी या किसी सहकारी समिति को दिये गये ऋण या अग्रिम के मूलधन के पुनर्भुगतान और सूद के भुगतान की गारंटी देे सकेगी।"
4444.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 की धारा-14 में संषोधन। , 1935 की धारा-14 में संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-14 में निम्नलिखित संषोधन , 1935 की धारा-14 में संषोधन। , 1935 की धारा-14 में संषोधन।
किये जायेगे, यथा:-
(1) उप-धारा (2) का परन्तुक निम्नलिखित परंतुकों द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगाः-
"परन्तु यह कि प्रत्येक सहकारी सोसाइटी के बोर्ड में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन-जाति के लिए दो स्थान, पिछड़े वर्गों के लिए दो स्थान और अति पिछड़े वर्गों के लिए दो स्थान आरक्षित होगा :
परन्तु और यह कि उपर्युक्त परन्तुक में यथाविहित स्थानों के आरक्षण के ध्येय से राज्य सरकार, सामान्य अथवा विषेष आदेष के द्वारा, वैसी समितियों अथवा समितियों के वर्ग को जिनमें सदस्यों के रूप में व्यष्टि अन्तर्विष्ट नहीं हैं अथवा जिनमें उपर्युक्त आरक्षण श्रेणियों से सदस्य नहीं हैं, को अपवर्जित कर सकेगी;
परन्तु और यह कि उपर्युक्त के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या कुल स्थानों के पचास प्रतिषत से अनधिक होगा :
परन्तु और भी कि उपर्युक्त के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के पचास प्रतिषत के यथाषक्य निकटतम किन्तु इससे अनधिक स्थान यथास्थिति अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जन-जातियों, पिछड़े वर्गों और अति पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षित किये जायेंगे :
परन्तु यह और भी कि अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जन-जातियों, पिछड़े वर्गों एवं अति पिछड़े वर्गों के लिए जो स्थान आरक्षित नहीं किये गये हैं, उनमें से पचास प्रतिषत के यथाषक्य निकटतम किन्तु इससे अनधिक स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किये जायेंगे :
परन्तु यह और भी कि इस प्रकार महिलाओं के लिए आरक्षित कुल स्थानों की संख्या दो से अन्यून होगी :
इस प्रकार आरक्षित स्थान, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जन-जाति के सदस्यों, पिछड़े वर्गाें और अति पिछड़े वर्गों के सदस्यों तथा महिलाओं के बीच से, निर्वाचन या/ और सहयोजन द्वारा भरे जायेंगे। यह प्रावधान प्राथमिक सोसाइटी से शीर्ष सोसाइटी तक की सभी सोसाइटियों पर लागू होगा :
परन्तु और भी कि प्राथमिक समिति तथा शीर्ष समिति तक ऐसा आरक्षण इस प्रयोजनार्थ इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी नियमावली द्वारा शासित होगा।"
(2) उप-धारा (4) को (4) (क) के रूप में पुर्नसंख्याकित की जायेगी। (3) उप-धारा (4) (क) के बाद नई उप-धारा (4) (ख) निम्नवत् जोड़ी जायगी, यथा:-
"(4)(ख) इस अधिनियम के किसी प्रावधान अथवा इसके अधीन बनायी गयी नियमावली अथवा किसी सहकारी समिति की उपविधियों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, समिति के बोर्ड में बैंकिंग, प्रबन्धन, वित्त अथवा समिति के उद्देष्यों और कार्यकलाप के अनुरुप दूसरे क्षेत्रों के विषिष्ट योग्यता प्राप्त व्यक्तियों को सदस्य के रुप में समिति द्वारा सहयोजित किये जा सकेंगेः
परन्तु इस प्रकार सहयोजित सदस्यों की संख्या दो से अधिक नहीं होगी और यह उप-धारा (2) में विनिर्दिष्ट बोर्ड की अधिकतम संख्या के अतिरिक्त होगीः
परन्तु और कि ऐसे सहयोजित सदस्यों को सहकारी समिति के किसी निर्वाचन में ऐसी सदस्यता के अधीन मत देने का अधिकार नहीं होगा और न वे बोर्ड में पदधारी के रुप में निर्वाचित होने के पात्र होंगेः परन्तु और भी कि सहकारी समिति के कृत्यकारी निदेषक भी बोर्ड के सदस्य होंगे और उप-धारा (2) में विनिर्दिष्ट निदेषकों की कुल संख्या की गणना के प्रयोजनार्थ ऐसे सदस्य अपवर्जित किये जायेंगे। (4) उप-धारा (9) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"(9) किसी सहकारी समिति के नियमों या उपविधियाँ में किसी बात के अन्तर्विष्ट होने पर भी, किसी सहकारी समिति की बोर्ड के निर्वाचित सदस्यों एवं पदाधिकारियों की पदावधि निर्वाचन की तिथि से पाँच वर्षो की होगी और पदाधिकारियों की पदावधि बोर्ड के पदावधि के सह-विस्तारी होगी:
परन्तु बोर्ड आकस्मिक रिक्ति को उसी वर्ग के सदस्यों से, मनोनयन द्वारा भर सकेगा, जिससे संबंधित आकस्मिक रिक्ति उत्पन्न हुई हो, यदि बोर्ड की मूल अवधि से आधे से कम की अवधि बाकी हो:
परन्तु यह और यदि बोर्ड की अवधि उसकी मूल अवधि के आधे से अधिक बाकी हो, और यदि सदस्यों अथवा पदाधिकारियों के निर्वाचन के लिए चाहे जिस किसी कारण से कोई भी रिक्ति उत्पन्न होती है तो शेष अवधि के लिए, बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार उपनिर्वाचन कराकर रिक्ति को भरेगा।"
(5) उप-धारा (10) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"(10) बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार किसी सहकारी समिति, जहाँ राज्य सरकार ने हिस्सापूंजी अथवा ऋण अथवा वित्तीय सहायता अथवा कोई सरकारी गारंटी दी हो, में बोर्ड का निर्वाचन संचालित करने में यदि4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 कारणवष असफल हुआ हो तो बोर्ड अवधि की समाप्ति की तिथि से स्वतः अधिक्रमित समझा जायेगा तथा निबन्धक, सहयोग समितियाँ, विधि के अनुसार नये बोर्ड के गठन हेतु छः माह से अनधिक अवधि के लिए किसी व्यक्ति को प्रषासक के रुप नियुक्त करेंगे। इस प्रकार नियुक्त प्रषासक बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार को निर्वाचन के संचालन में हर संभव सहायता करेगा। यह व्यवस्था पूर्णतः अन्तरिम व्यवस्था होगी और प्रषासक, विहित अवधि के भीतर, निर्वाचन के उपरान्त नये बोर्ड को समिति का प्रबन्धन सौप देगा:
परन्तु जहाँ सरकार हिस्सा-पूंजी अथवा ऋण अथवा वित्तीय सहायता अथवा किसी प्रकार की गारंटी नहीं दी हो और जहाँ बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार बोर्ड की अवधि के समाप्ति के पूर्व निर्वाचन संचालित करने में असफल रहता है, तो निबंधक, सहकारी समितियाँ निर्वाचन संचालन करने के प्रयोजनार्थ एक तदर्थ बोर्ड की नियुक्ति के लिए सदस्यों की एक विषेष आम सभा आयोजित करने का आदेष दे सकेंगे:
परन्तु यह और कि निर्वाचन संचालन करने के प्रयोजनार्थ तदर्थ समिति में बोर्ड के वहिर्गामी सदस्य अथवा पदधारी सम्मिलित नहीं किये जायेंगे:
परन्तु और भी कि इस प्रकार नियुक्त तदर्थ बोर्ड की अवधि छः माह से अधिक की नहीं होगी, और, वह तदर्थ बोर्ड बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार को निर्वाचन के संचालन में हर संभव सहायता प्रदान करेगा। यह व्यवस्था पूर्णतः अंतरिम व्यवस्था होगी और इस प्रकार नियुक्त तदर्थ बोर्ड, विहित अवधि के भीतर, निर्वाचन के उपरान्त नये बोर्ड को समिति का प्रबन्धन सौप देगा।" 5555.... अधिनियअधिनियअधिनियअधिनियम म म म VI, 1935 की ध, 1935 की ध, 1935 की ध, 1935 की धारा-27 का प्रतिस्थापन।ारा-27 का प्रतिस्थापन।ारा-27 का प्रतिस्थापन।ारा-27 का प्रतिस्थापन। - उक्त अधिनियम की धारा-27 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:- "27272727.... सदस्य का अधिकार। - (1) सदस्य का अधिकार। - (1) सदस्य का अधिकार। - (1) सदस्य का अधिकार। - (1) सहकारी समिति का कोई भी सदस्य नियमों या समिति की उपविधि में विहित सदस्यता विषयक अदायगी कर देने के बाद समिति के सदस्य के अधिकारों का प्रयोग कर सकेंगे:
परन्तु इस अधिनियम के किसी प्रावधान में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुये भी किसी सहकारी समिति का सदस्य, इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी नियमावली अथवा उपविधियों द्वारा विहित यथा स्थिति, समिति के प्रबंधन में सहभागिता और न्यूनतम अपेक्षित सेवाएँ प्राप्त करने हेतु बुलाई गई बैठकों में यथापेक्षित न्यूनतम उपस्थिति सुनिष्चित करने के बाद ही समिति के बोर्ड के सदस्यों के निर्वाचन में मताधिकार का प्रयोग कर सकता हैः
(2)(2)(2)(2) प्रत्येक सहकारी समिति, प्रत्येक सदस्य की पहुॅच की व्यवस्था, ऐसे सदस्यों अपने कारबार के नियमित संव्यवहार में रखे गये सहकारी समिति की बही, सूचना और लेखा तक, करेगी।
(3)(3)(3)(3) सहकारी समिति के प्रत्येक सदस्य को सहकारी समिति में संधारित अभिलेखों, सूचनाओं तथा व्यवसाय से संबंधित नियमित संव्यवहारों के लेखाओं के संबंध में सभी जानकारी/कागजात प्राप्त करने का अधिकार होगा। सहकारी समिति के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी/प्रबंधक सभी वांछित जानकारी/कागजातों तक सदस्यों की पहुॅच सुनिष्चित करेगा।
(4)(4)(4)(4) सहकारी समिति के सदस्यों को इस अधिनियम, किसी प्रावधान के अधीन बनायी गयी नियमावली तथा उपविधियों के अनुसार सहकारी षिक्षा तथा सहकारिता संबंधी प्रषिक्षण प्राप्त करने का अधिकार होगा।"
6666.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 के अध्याय -, 1935 के अध्याय -, 1935 के अध्याय -, 1935 के अध्याय - IV, के बाद अध्याय , के बाद अध्याय , के बाद अध्याय , के बाद अध्याय IVक का अन्तःस्थापन।क का अन्तःस्थापन।क का अन्तःस्थापन।क का अन्तःस्थापन। - उक्त अधिनियम के अध्याय IV, के बाद निम्नलिखित अध्याय IV क अन्तःस्थापित की जायेगी, यथा:-
"अध्याय अध्याय अध्याय अध्याय IV क।क।क।क। त की वार्षिक आम सभा तथा वार्षिक विवरणी। सहकारी समिसिहकारी समिसिहकारी समिसिहकारी समिति की वार्षिक आम सभा तथा वार्षिक विवरणी। त की वार्षिक आम सभा तथा वार्षिक विवरणी। त की वार्षिक आम सभा तथा वार्षिक विवरणी। 32क32क32क32क.... वार्षिक आम सभा। - (1)वार्षिक आम सभा। - (1)वार्षिक आम सभा। - (1)वार्षिक आम सभा। - (1) प्रत्येक सहकारी समिति का बोर्ड, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद, छह माह के भीतर वार्षिक आम सभा बुलायेगी, जिसमें बोर्ड के सदस्यों एवं उसके पदाधिकारियों के निर्वाचन को छोड़कर, निम्नलिखित सूचीबद्ध विषयों में से सभी अथवा किसी पर चर्चा करेगी :- (क) निबन्धक के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए बोर्ड द्वारा प्रस्तुत की गयी वार्षिक लेखा विवरणी पर विचारण; (ख) बोर्ड द्वारा प्रस्तुत वार्षिक प्रतिवेदन पर विचारण; (ग) सांविधिक अंकेक्षकों एवं आन्तरिक अंकेक्षकों की नियुक्ति एवं हटाया जाना; (घ) अंकेक्षण के रिपोर्ट और निबन्धक को दाखिल की जाने वाली अंकेक्षित लेखा विवरणी का विचारण; (ङ) अंकेक्षण/विषेष अंकेक्षण-अनुपालन प्रतिवेदन का विचारण; (च) जाँच प्रतिवेदन, यदि कोई हो, पर की गई कार्रवाई पर विचारण; (छ) शुद्ध अधिषेष का निपटान;
5 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013(ज) संचालन घाटा, यदि कोई हो, का पुनर्विलोकन; (झ) दीर्घकालीन भावी योजना और वार्षिक परिचालन योजना का अनुमोदन; () वार्षिक बजट का अनुमोदन; (ट) विनिर्दिष्ट आरक्षित एवं अन्य निधियों का सृजन; (ठ) आरक्षित एवं अन्य निधियों की वास्तविक उपयोगिता का पुनर्विलोकन; (ड) अन्य सहकारी समितियों में सहकारी समिति की सदस्यता पर प्रतिवेदन; (ढ) जिस व्यक्ति की सदस्यता के लिए आवेदन अस्वीकृत कर दिया गया हो अथवा जिसकी सदस्यता बोर्ड द्वारा समाप्त कर दी गई हो, व्यक्ति की अपील;
(ण) किसी निदेषक, अंकेक्षक या आन्तरिक अंकेक्षक को उस हैसियत से उसके कर्त्तव्य अथवा संबंधित बैठकों में उसकी उपस्थिति के संबंध में भुगतेय पारिश्रमिक;
(त) संघ/परिसंघ में सहकारी समिति की सदस्यता; (थ) अन्य संगठनों के साथ सहयोग; (द) उपविधियों का संषोधन; (ध) निदेषकों एवं पदधारियों के लिए आचार संहिता बनाना; (न) सदस्यों के नामांकन एवं सदस्यता समाप्ति पर टिप्पणी; (प) सहकारी समिति का विघटन; (फ) ऐसे अन्य कृत्य, जो उपविधियाँ में विनिर्दिष्ट हों।
(2) (2) (2) (2) उप-धारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट कार्यो के लिए प्रावधानों के अनुसार सहकारी समिति की वार्षिक आम सभा, उपविधियों के अनुसार अधिसूचित समय, तिथि तथा स्थान पर होगी और यदि गणपूर्त्ति (कोरम) उपस्थित हो तो सहकारी समिति के अध्यक्ष सभा का सभापतित्व करेंगे:
परन्तु अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष अथवा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों की अनुपस्थिति में, सदस्यों द्वारा अपने बीच से निर्वाचित कोई व्यक्ति सभा का सभापतित्व करेगाः
परन्तु और कि ऐसी किसी समिति की दषा में जहॉ इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन प्रबंध समिति अधिक्रमित हो गयी हो, वहाँ प्रषासक आम सभा का सभापतित्व करेंगे और उनकी अनुपस्थिति में, उनके द्वारा नाम निर्देषित कोई व्यक्ति सभा का सभापति होगा।
(3)(3)(3)(3) सभा का सभापतित्व करने वाला व्यक्ति सभा की कार्यवाही का संचालन उस रीति से करेगा जो कारबार के तीव्रता तथा संतोषजनक निपटारे के लिए हो और सभा में आदेष के सभी बिन्दुओं पर निर्णय लेगा। (4)(4)(4)(4) आम सभा की सूचना निर्गत होने की तिथि को समिति की कुल सदस्य संख्या जो होगी उसका पंचमांष आम सभा की गणपूर्त्ति (कोरम) होगी।
(5)(5)(5)(5) यदि आम सभा के लिए निर्धारित समय से एक घंटा के भीतर गणपूर्त्ति उपस्थित न हो तो सभा ऐसी तिथि के लिए स्थगित कर दी जायेगी जो सात दिनों से पूर्व और इक्कीस दिनों के बाद न हो। (6)(6)(6)(6) स्थगित आम सभा के लिए किसी गणपूर्त्ति की आवष्यकता नहीं होगी। (7)(7)(7)(7) आम सभा में सभी प्रष्नों पर निर्णय बहुमत से किया जायेगा और मतों की समता की स्थिति में, सभा के सभापति निर्णायक मत देंगे।
(8)(8)(8)(8) परोक्षी मत स्वीकृत नहीं किया जायेगा, किन्तु किसी विषिष्ट निबंधित सहकारी समिति अथवा किसी विषिष्ट निबंधित सहकारी समिति के वर्ग के मामले में, निबन्धक ऐसा करने की अनुमति दे सकेंगे। (9)(9)(9)(9) आम सभा में हाथ उठाकर मतदान किया जायेगा और केवल आपवादिक मामले में, यदि निबन्धक स्वप्रेरणा से अथवा संबंधित समिति द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर इस प्रकार का निदेष दे तो, मतपत्र द्वारा मतदान अपनाया जा सकेगा।
(10)(10)(10)(10) आम सभा की कार्यवाहियों का कार्यवृत इस प्रयोजनार्थ रखी गई एक बही में अभिलिखित किया जायेगा और सभा का सभापतित्व करने वाले व्यक्ति द्वारा कार्यवृत हस्ताक्षरित किया जायगा।
(11)(11)(11)(11) किसी आम सभा में अपनायी गई प्रक्रिया संबंधी सभी मामलों में अपील निबन्धक के समक्ष संस्थित होगा और उस पर उसका विनिष्चय अंतिम होगा।
32ख32ख32ख32ख.... वार्षिक विवरणी दाखिल किया जाना। -वार्षिक विवरणी दाखिल किया जाना। -वार्षिक विवरणी दाखिल किया जाना। -वार्षिक विवरणी दाखिल किया जाना। - प्रत्येक सहकारी समिति प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छह माह के भीतर निबन्धक के समक्ष वार्षिक विवरणी दाखिल करेगी जिसमें निम्नलिखित विषय शामिल रहेंगेः-
(क) कार्यकलापों का वार्षिक रिपोर्ट; (ख) लेखाओं का अंकेक्षित विवरण; (ग) सामान्य निकाय द्वारा यथानुमोदित अधिषेष के निपटारे की योजना; (घ) सहकारी समिति की उपविधियों में किये गये संषोधनों की सूची, यदि कोई हो;
6 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013(ङ) सामान्य निकाय की सभा के आयोजन की तारीख तथा निर्वाचन का संचालन, यदि देय हो, से संबंधित घोषणा;
(च) कोई अन्य जानकारी, जो निबन्धक द्वारा अधिसूचित अधिनियम के किसी प्रावधानों के क्रियान्वयन हेतु आवष्यक, हो।"
7777.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 की धारा-33 का प्रतिस्थापन। , 1935 की धारा-33 का प्रतिस्थापन। - उक्त अधिनियम की धारा-33 निम्नलिखित द्वारा , 1935 की धारा-33 का प्रतिस्थापन। , 1935 की धारा-33 का प्रतिस्थापन।
प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:- "33333333.... अंकेक्षण। - (1) अंकेक्षण। - (1) अंकेक्षण। - (1) अंकेक्षण। - (1) सहकारी समिति अपनी लेखाओं का अंकेक्षण प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार, इस हेतु राज्य सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत प्राधिकार द्वारा अनुमोदित नामावली के अंकेक्षक द्वारा कराएगी। ऐसा अंकेक्षक चाटर्ड एकाउन्टेन्ट अधिनियम, 1949 के अर्थान्तर्गत या तो चाटर्ड एकाउन्टेन्ट होगा या निबन्धक के कार्यालय का अंकेक्षक होगा।
(2) (2) (2) (2) राज्य सरकार अथवा राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत प्राधिकार द्वारा अनुमोदित नामावली के अंकेक्षक की न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता किसी मान्यता प्राप्त विष्वविद्यालय से उत्तीर्ण स्नातक (गणित के साथ) अथवा वाणिज्य स्नातक होगी। ऐसे अंकेक्षकों अथवा चाटर्ड एकाउन्टेन्ट फर्म से अंकेक्षण का कम से कम तीन वर्ष के अनुभव की अपेक्षा की जायगी। ऐसे अंकेक्षक अथवा चाटर्ड एकाउन्टेन्ट फर्म ही सहकारी समिति के लेखाओं का अंकेक्षण करने हेतु पात्र होंगे।
(3) (3) (3) (3) प्रत्येक सहकारी समिति के लेखाओं का अंकेक्षण सहकारी समिति के सामान्य निकाय द्वारा नियुक्त, उप-धारा (2) में विनिर्दिष्ट अंकेक्षक अथवा चाटर्ड एकाउन्टेन्ट फर्म द्वारा किया जायगा।
(4) (4) (4) (4) प्रत्येक सहकारी समिति की लेखाओं का अंकेक्षण उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति के छह माह के भीतर करना अनिवार्य होगा, जिस वित्तीय वर्ष से ऐसा लेखा संबंधित हो।
(5(5(5(5) ) ) ) शीर्ष सहकारी समिति, अपनी लेखा-विवरणी के अंकेक्षण के उपरान्त, अंकेक्षक का प्रतिवेदन, सामान्य निकाय के अनुमोदनोपरान्त, तीस दिनों के भीतर निबन्धक को अनिवार्य रुप से प्रेषित करेगी जिसे राज्य सरकार द्वारा, विधान मण्डल के पटल पर इस प्रयोजनार्थ अधिकथित प्रक्रिया के अनुसार रखा जायगा।
(6) (6) (6) (6) सहकारी समिति की लेखाओं पर प्रतिवेदन के अतिरिक्त अंकेक्षक का प्रतिवेदन में बोर्ड की बैठक में निदेषकों की उपस्थिति, निदेषकों द्वारा सहकारी समिति को मंजूर किए गए ऋण एवं अग्रिम या सहकारी समिति के साथ किए गए कारबार, बोर्ड की बैठकों पर हुये व्यय, निदेषकों को भुगतान किए गए पारिश्रमिक, निदेषकों को प्रतिपूर्त्ति किए गए व्यय, सदस्य, स्टाफ, निदेषक तथा अन्य की षिक्षा और प्रषिक्षण पर हुये व्यय भी अन्तर्विष्ट होगें।
(7) (7) (7) (7) यह सुनिष्चित करना बोर्ड का कर्त्तव्य होगा कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पैंतालीस दिनों के भीतर वार्षिक वित्तीय विवरणी को तैयार की जाय और अंकेक्षण हेतु प्रस्तुत कर दी जाय। (8) (8) (8) (8) अंकेक्षक के पारिश्रमिक सहकारी समिति के सामान्य निकाय द्वारा नियत किया जायेगा:
परन्तु यदि अंकेक्षण, निबन्धक के कार्यालय के अंकेक्षक द्वारा किया जाता है तो निबन्धक द्वारा नियत अंकेक्षण फीस का भुगतान सहकारी समिति करेगी।
(9) (9) (9) (9) सामान्य निकाय, उपस्थित सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा किसी अंकेक्षक को पद से हटा सकेगा।
(10) (10) (10) (10) किसी सहकारी समिति के अंकेक्षक की मांग पर, सहकारी समिति के वर्त्तमान या पूर्व पदधारी, बोर्ड के सदस्य, सदस्य या कर्मचारी निम्नलिखित को उपलब्ध करायेंगे :- (क) ऐसी जानकारी और ऐसा स्पष्टीकरण जिसे आवष्यक समझा जाय, तथा (ख) सहकारी समिति के प्रत्येक ऐसे अभिलेखों, दस्तावेजों, बहियों, लेखाओं और भाउचरों को जो, अंकेक्षक की राय में, जाँच करने और प्रतिवेदित करने में उसे समर्थ करने हेतु आवष्यक हो। (11) (11) (11) (11) जहाँ कोई सहकारी समिति समय पर अपने वार्षिक लेखाओं का अंकेक्षण कराने में असफल हो, वहां नियत तारीख से नब्बे दिनों के भीतर निबन्धक, सहकारी समिति के लेखाओं का अंकेक्षण करायेंगे। (12)(12)(12)(12) ऐसे अंकेक्षण संचालन करने का खर्च सहकारी समिति द्वारा वहन किया जायेगा।"
8888.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, , , , 1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा777733 के बाद नई धारा33 के बाद नई धारा33 के बाद नई धारा33 के बाद नई धारा----33333333....क एवं 33क एवं 33क एवं 33क एवं 33....ख का अन्तःस्थापन।ख का अन्तःस्थापन।ख का अन्तःस्थापन।ख का अन्तःस्थापन। - उक्त अधिनियम की धारा - 33 के बाद निम्नलिखित नई धारा - 33.क एवं 33.ख अन्तःस्थापित की जायेगी, यथा:- "33333333....कककक.... विषेष विषेष विषेष विषेष अंकेक्षण। - (1)अंकेक्षण। - (1)अंकेक्षण। - (1)अंकेक्षण। - (1) राज्य सरकार या अन्य सहकारी समिति या अन्य वाह्य व्यक्ति या संस्था से निधियों का संव्यवहार करने वाली किसी सहकारी समिति का विषेष अंकेक्षण, ऋणदाताओं के अनुरोध पर या निबन्धक द्वारा स्वप्रेरणा से ऐसे लिखित विनिर्दिष्ट आदेष/निदेष से आरंभ किये गए विषेष अंकेक्षण के अधीन रहते हुए, होगा।
(2)(2)(2)(2) उप-धारा (1) के अधीन विषेष अंकेक्षण निबन्धक के नियंत्रणाधीन जिला अंकेक्षण पदाधिकारी/वरीय स्तर के अंकेक्षण पदाधिकारी या ऐसे पदाधिकारियों की किसी कमिटी द्वारा किया जायेगा। (3)(3)(3)(3) जहाँ विषेष अंकेक्षण में गम्भीर कुप्रबन्धन का पता चले, वहाँ ऐसे विषेष अंकेक्षण का खर्च सहकारी समिति से या कुप्रबन्धन के लिए उत्तरदायी व्यक्तियों से वसूल किया जा सकेगा।7 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 (4)(4)(4)(4) प्रत्येक विषेष अंकेक्षण आदेष निर्गमन की तारीख से एक सौ बीस दिनों के भीतर पूरा किया जायगा और निबंधक को रिपोर्ट प्रस्तुत किया जायगा।
(5)(5)(5)(5) ऐसे विषेष अंकेक्षण रिपोर्ट में निम्नलिखित का विवरण अन्तर्विष्ट होगा :-
(क) प्रत्येक भुगतान, जो अंकेक्षक को अधिनियम, अथवा अधिनियम के अधीन बनी नियमावली अथवा सहकारी समिति की उपविधियों के प्रतिकूल प्रतीत हो,
(ख) किसी घाटे/बर्वादी अथवा हानि की, जो किसी व्यक्ति की गंभीर उपेक्षा अथवा कदाचार के कारण हुई हो, की राषि;
(ग) प्राप्त कोई रकम, जो लेखा-जोखा में लानी चाहिये थी किन्तु किसी व्यक्ति द्वारा लेखा में नहीं लाई गई हो, एवं
(घ) कोई आस्तियों अथवा धन, जिससे कोई व्यक्ति सहकारी समिति के संगठन अथवा प्रबंधन के साथ संबंधित हो अथवा सहकारी समिति का कोई भूतपूर्व अथवा वर्त्तमान सदस्य समिति की किसी संपत्ति का दुर्विनियोग किया हो अथवा कपटपूर्वक रख लिया हो।
(6)(6)(6)(6) विषेष अंकेक्षण रिपोर्ट की प्राप्ति की तारीख से तीस दिनों के भीतर, निबन्धक उसकी प्रतियाँ निम्नलिखित को प्रेषित कर देगा:- (क) आवेदक ऋणदाता; (ख) सम्बन्धित सहकारी समिति, और (ग) जहाँ धारा-40 के अधीन आवष्यक हो, अधिभार की कार्यवाही की कार्यवाही दाखिल करने हेतु अधिकृत अंकेक्षण पदाधिकारी ।
खाओं तथा अभिलेखों का संधारण। - (1) प्रत्येक सहकारी समिति अपने निबंधित कार्यालय में 33333333....खखखख.... लेलेलेलेखाओं तथा अभिलेखों का संधारण। - (1) खाओं तथा अभिलेखों का संधारण। - (1) खाओं तथा अभिलेखों का संधारण। - (1) निम्नलिखित लेखाओं और अभिलेखों को रखेगी :-
(क) समय-समय पर किए गए संषोधन सहित इस अधिनियम की एक प्रति; (ख) कार्यवृत्त पुस्तक; (ग) निबंधन प्रमाण-पत्र तथा निबंधित उपविधियों की एक प्रति और संषोधन की तारीख के साथ समय-समय पर निबंधित संषोधनों की एक प्रति;
(घ) ऐसे संघ/परिसंघ की, जिसका वह सदस्य हो, तथा अपने प्रत्येक सदस्य सहकारी समिति के लिए अधिप्रमाणित उपविधियों की एक-एक प्रति;
(ङ) सहकारी समिति द्वारा प्राप्त तथा खर्च की गई सभी राषि की लेखा तथा उनका प्रयोजन; (च) सहकारी समिति द्वारा सामानों की सभी खरीद-बिक्री का लेखा;
(छ) सहकारी समिति की आस्तियों तथा दायित्वों का लेखा; (ज) कुल सदस्यता तथा विभिन्न सेवाओं का सदस्यवार उपयोग प्रदर्षित करने वाली पंजी; (झ) वित्तीय वर्ष की समाप्ति के तीस दिनों के भीतर अद्यतन की गई चालू वित्तीय वर्ष के लिए मताधिकार प्राप्त सदस्यों की सूची;
() बोर्ड नीतियों की प्रतियाँ ; (ट) वार्षिक रिपोर्ट, अंकेक्षण प्रतिवेदन, विषेष अंकेक्षण प्रतिवेदन, जाँच प्रतिवेदन और उनका अनुपालन; (ठ) अन्य विधियों तथा विनियमों की प्रतियाँ, जिनके अध्यधीन सहकारी समिति हो; (ड) ऐसे अन्य दस्तावेज, जो सहकारी समिति की क्रियाओं से सुसंगत हो;
परन्तु जहाँ सहकारी समिति का शाखा-कार्यालय हो, वहाँ शाखा-कार्यालयों संबंधी लेखा एवं अभिलेख, वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पचीस दिनों के भीतर किसी अवधि के लिए निबंधित कार्यालय में उपलब्ध रहेगा;
(ढ) नावार्ड, भारतीय रिजर्व बैंक तथा निबन्धक द्वारा समय-समय पर, निर्गत परिपत्रों/प्रावधानों के अनुसार अपेक्षित सभी अन्य दस्तावेज, पंजी तथा परिपत्र आदि।
(2) (2) (2) (2) समर्थनकारी अभिलेखों तथा भाउचरों सहित, प्रत्येक सहकारी समिति की लेखा पुस्तकें ऐसी अवधि के लिए जो तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अध्यधीन, उपविधियों में उपबंधित की गयी हो। 9999.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, , , , 1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा----40 का संषोधन।40 का संषोधन।40 का संषोधन।40 का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-40 की उप-धारा (1) के प्रथम पंक्ति में शब्द एवं अंक "अतः धारा 33 के अधीन अंकेक्षण" के बाद शब्द एवं अंक "तथा धारा - 33.क के अधीन विषेष अंकेक्षण" अन्तःस्थापित किये जायेेंगें।
10101010.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, , , , 1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा----41 का संषोधन।41 का संषोधन।41 का संषोधन।41 का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-41 की उप-धारा (1), (2), (3) एवं (4) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायगी, यथा:-
8(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 ''(1) यदि निबन्धक की राय में किसी सहकारी समिति का बोर्ड, जिसमें राज्य सरकार नेे हिस्सा पूँजी का अंषदान किया हो अथवा राज्य सरकार द्वारा ऋण अथवा वित्तीय सहायता दी गई हो अथवा सरकारी गारंटी पर ऋण दिया गया हो (i) लगातार ऋण अदायगी में चूक की हो, अथवा (ii) इस अधिनियम, नियमावली या उपविधियों द्वारा उसपर अधिरोपित कर्त्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही की हो, या
(iii) सहकारी समिति अथवा उसके सदस्यों के हित के विरुद्ध कार्य किया हो, या (iv) बोर्ड के गठन अथवा कार्यकलाप में गतिरोध हो, तो वह समिति के बोर्ड को अपनी आपत्ति अधिकथित करने का, यदि कोई हो, अवसर प्रदान करने के पश्चात् कारणों सहित लिखित आदेष द्वारा सहकारी समिति के बोर्ड को अधिकतम छह माह के लिए अधिक्रमित कर सकेंगे और आदेष दे सकेंगे कि उसके सभी अथवा कोई सदस्य आदेष में विनिर्दिष्ट होने वाली पाँच वर्ष से अनधिक कालावधि तक के लिए सहकारी समिति के बोर्ड में निर्वाचन के लिए निरर्हित होंगे। निबन्धक इस धारा के अधीन पारित प्रत्येक आदेष को लिखित रुप में अभिलिखित करेंगे और निबंधित डाक से संबंधित सहकारी समिति को सूचित कर देंगे । तब बोर्ड कार्य करना रोक देगाः
परन्तु ऐसी सहकारी समिति के मामले में जो बैंकिंग का कारोबार कर रही हों, बैंकिंग रेगूलेषन एक्ट, 1949 के प्रावधान भी लागू होंगे :
परन्तु और कि बैंकिंग का कारोबार करने वाली ऐसी सहकारी समिति के मामले में, बोर्ड के अधिक्रमण की अवधि अधिकतम एक वर्ष की होगी :
परन्तु और भी कि बैंकिंग प्रचालन वाली सहकारी समिति के बोर्ड का अधिक्रमण भारतीय रिजर्ब बैंक के परामर्ष से किया जायेगा। (2) (2) (2) (2) जहाँ उप-धारा (1) के अधीन कार्यवाही करते समय निबन्धक की राय में निबंधित समिति के हित में बोर्ड का निलंबन आवष्यक हो, तो वे बोर्ड को निलम्बित कर सकेंगे, जो उसके बाद कार्य नहीं करेगा और उप-धारा (1) की कार्यवाही की समाप्ति तक निबंधित समिति के कार्यकलाप के प्रबंधन के लिए ऐसी व्यवस्था करेंगे, जो वे उचित समझेेंः
परन्तु यदि इस प्रकार निलम्बित बोर्ड अधिक्रमित नहीं होता है, तो छह माह के उपरान्त कार्य करने लगेगा और निलंबन में रहने की अवधि की गणना उसकी अवधि में की जायेगी ।
(3)(3)(3)(3) जब कोई सहकारी समिति उप-धारा (1) के अधीन निलंबन के अधीन हो तो निबन्धक सहकारी समिति के कार्य संचालन के लिए प्रषासक नियुक्त करेंगे। नियुक्त प्रषासक उप-धारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर सहकारी समिति के बोर्ड के नव निर्वाचन हेतु सभी आवष्यक कार्रवाई करेंगे तथा नव निर्वाचित बोर्ड को प्रबंधन का कार्यभार सौंप देंगेः
परन्तु निबंधक को अधिक्रमण की अवधि के दौरान प्रषासक को बदलने की षक्ति होगी। (4)(4)(4)(4) उप-धारा (3) के अधीन नियुक्त प्रषासक सहकारी समिति के कार्य संचालन के लिए ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा, जो निबंधक द्वारा यथोचित नियत किया जाय। इस प्रकार नियत पारिश्रमिक सहकारी समिति के खाते से भुगतेय होगाः
परन्तु उप-धारा (3) के अधीन नियुक्त प्रषासक, निबन्धक द्वारा निर्मित सेवा षर्त्तों के अधीन कार्य करेंगें तथा इस अधिनियम, नियमावली एवं समिति की उपविधियों में बोर्ड को प्रदत्त सभी कर्त्तव्यों तथा दायित्वों का निवर्हन करेंगे।"
11. अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 की धारा 42 का प्रतिस्1935 की धारा 42 का प्रतिस्1935 की धारा 42 का प्रतिस्1935 की धारा 42 का प्रतिस्थापन।थापन।थापन।थापन। - उक्त अधिनियम की धारा 42 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथाः- "42424242.... समापनादेष। -समापनादेष। -समापनादेष। -समापनादेष। - निबन्धक अधिसूचना द्वारा किसी निबंधित सहकारी समिति का परिसमापन आदेष दे सकेंगे, यदि - (क) कोई समिति के तीन-चौथाई सदस्यों द्वारा पारित विषेष संकल्प द्वारा समिति के परिसमापन हेतु अनुरोध प्राप्त हुआ हो;
(ख) धारा-35 के अधीन जाँच अथवा धारा-34, धारा-36 अथवा धारा-37 के अधीन निरीक्षण के बाद यदि निबन्धक की राय हो कि सदस्यों के हित में उस सहकारी समिति का परिसमापन आवष्यक हो;
(ग) निबंधन के उपरान्त सहकारी समिति द्वारा कोई कार्य प्रारम्भ नहीं किया है अथवा कार्य करना बन्द कर दिया गया हो;
(घ) निबंधन की शर्त्तों के प्रतिकूल सहकारी समिति के सदस्यों की संख्या कम होकर दस से कम हो गई होः परन्तु ऐसा आदेष, सहकारी समिति के हिस्साधारक सदस्यों तथा हितबद्ध व्यक्तियों/संस्थाओं को कम से कम एक माह का नोटिस देकर उन्हें सुनने के पश्चात् ही, पारित किया जायेगा।"9 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013 12121212.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा----43 का संषोधन।43 का संषोधन।43 का संषोधन।43 का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा - 43 की उप-धारा (1) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"(1) उस सहकारी समिति का कोई सदस्य अथवा हितबद्ध व्यक्ति/संस्था, राजपत्र में धारा-42 के अधीन पारित आदेष के प्रकाषित होने की तिथि से दो माह के भीतर, उस आदेष के विरुद्ध राज्य सरकार के समक्ष अपील कर सकेगा।"
13131313.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा-45 का संषोधन।-45 का संषोधन।-45 का संषोधन।-45 का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-45 निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:-
"45454545.... अपराध और शास्तियाँ ।-(1) अपराध और शास्तियाँ ।-(1) अपराध और शास्तियाँ ।-(1) अपराध और शास्तियाँ ।-(1) इस अधिनियम के अधीन अपराध होगा, यदि- (क) कोई सहकारी समिति, अथवा उसका कोई पदाधिकारी, अथवा सदस्य, जानबूझकर मिथ्या विवरणी बनाये, या मिथ्या जानकारी दे, अथवा इस निमित प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा उससे अपेक्षित कोई जानकारी अथवा इस अधिनियम के प्रावधान के अधीन कोई जानकारी निबंधक को जानबूझकर नहीं दें, अथवा, (ख) कोई व्यक्ति जानबूझकर अथवा बिना किसी युक्तियुक्त कारण के किसी सम्मन, अधियाचना अथवा इस अधिनियम के सुसंगत प्रावधानों के अधीन निर्गत, विधिसम्मत लिखित आदेष की अवज्ञा करे, अथवा, (ग) कोई नियोक्ता जो बिना किसी पर्याप्त कारण के, अपने कार्मिकों से कटौती की गई राषि को कटौती की तिथि से चौदह दिनों के भीतर सहकारी समिति को भुगतान करने में असफल हो, अथवा,
(घ) कोई पदाधिकारी, अथवा अभिरक्षक, जो सहकारी समिति की पंजियों, लेखाओं, दस्तावेजों, अभिलेखों, नकद, प्रतिभूति एवं अन्य परिसम्पत्तियों की अभिरक्षा, जिनका वह पदाधिकारी अथवा अभिरक्षक हो, जानबुझकर अधिकृत व्यक्ति को सौपने में असफल हो, और
(ङ) कोई व्यक्ति, जो सहकारी समिति के बोर्ड के सदस्यों, अथवा पदधारियों के निर्वाचन के पूर्व, निर्वाचन के दौरान, अथवा उसके पश्चात्, भ्रष्ट आचरण में संलिप्त हो।
(2) इस धारा की उप-धारा (1) के अधीन कोई अपराध एक वर्ष तक की अवधि के कारावास से या 2000/-(दो हजार) रु0 तक के जुर्माने से, या दोनों से दण्डनीय होगाः
परन्तु जहाँ कोई व्यक्ति दुविर्नियोजन, कपट, न्यास-भंग, छल या ऐसे अन्य किसी कार्य, जिसमें नैतिक अधमता अन्तगर््रस्त हो, का दोषी हो, जिसके परिणामस्वरूप सहकारी समिति को हानि हुई हो, तो वह भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के सुसंगत प्रावधानों के अधीन भी दण्डनीय होगा।" 14141414.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा----47 का संषोधन।47 का संषोधन।47 का संषोधन।47 का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-47 की उप-धारा (2) निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:- "(2) इस अधिनियम की धारा-45 की उप-धारा (1) (ग) के अधीन अपराध को छोड़कर इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक अपराध दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2, 1974) के प्रयोजनार्थ संज्ञेय माना जाएगा।" 15151515.... अधिनियम अधिनियम अधिनियम अधिनियम VI, 1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा1935 की धारा----66666666....ख का संषोधन।ख का संषोधन।ख का संषोधन।ख का संषोधन। - उक्त अधिनियम की धारा-66.ख निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित की जायेगी, यथा:- "66666666....खखखख.... सहकारी समितियों की कार्मिक नीति। - सहकारी समितियों की कार्मिक नीति। - सहकारी समितियों की कार्मिक नीति। - सहकारी समितियों की कार्मिक नीति। - (1) सहकारी समितियों को, अपनी उपविधियों में उल्लिखित प्रावधानों के अनुसार, समिति के कार्मिकों के पदों के स्वरूप और संख्या तथा कार्मिकों की भर्त्ती की रीति अवधारित करने की स्वायत्तता होगी। इस प्रयोजनार्थ सहकारी समिति अपनी कार्मिक नीति बना सकेगी। सहकारी समितियाँ अपनी उपविधियों के प्रावधानों एवं कार्मिक नीति के अधीन रहते हुए अन्य के बीच निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेगीः- (1) पात्रता, आयु और अनुभव,
(2) वेतनमान और अन्य उपलब्धियाँ,
(3) भर्त्ती की रीति,
(4) सेवा की शर्त्तें, और
(5) अपनाई जानेवाली अनुषासनिक प्रक्रिया।
(2) उपविधियों के प्रावधानों एवं कार्मिक नीति का अतिलंघन में की गई नियुक्ति शून्य समझी जायेगी, मानों ऐसी नियुक्ति कभी विद्यमान नहीं थी एवं वेतन तथा अन्य भत्तों के रूप में किये गये भुगतान की राषि, यदि कोई हो, धारा-40 के अधीन वसूलनीय होगी।10 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8 अूील 2013
उद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतुउद्देश्य एवं हेतु
संविधान (97वें संशोधन) अधिनियम, 2011 की कंडिका-243ZT के आलोक में बिहार राज्य में सम्प्रति प्रवृत्त बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 के वैसे प्रावधानों, जो उक्त संविधान (97वें संशोधन) अधिनियम, 2011 के असंगत है, को तदनुसार संशोधित करते हुए एतदर्थ जनतांत्रिक सदस्य नियंत्रण, सदस्यों की आर्थिक भागीदारी और स्वायत्त क्रियाकलाप संबंधी सिद्धान्तों पर अवधारित सहकारी समितियों के गठन, संचालन और परिसमापन संबंधी प्रावधानों का समावेश करना, एक सहकारी समिति में निदेशकों की अधिकतम संख्या 21 (इक्कीस) से अधिक नहीं होने का प्रावधान का निर्धारण करना, निदेशक मंडल के निर्वाचित निदेशकों का तथा पदधारकों का कार्यकाल निर्वाचन की तिथि से पाँच वर्षों के लिए निर्धारित अवधि (Fixed Term of five years) हेतु प्रावधान करना, साथ ही एक सहकारी समिति के निर्वाचन संचालन हेतु एक प्राधिकार अथवा निकाय के लिए उपबंध करना, एक सहकारी समिति के निदेशक मंडल को अधिकतम छः माह की अवधि के लिए अवक्रमण अथवा निलंबन में रखने संबंधी प्रावधान करना, स्वतंत्र कौशलयुक्त (professional) अंकेक्षण का प्रावधान करना, सहकारी समितियों के सदस्यों को सूचना का अधिकार दिए जाने का प्रावधान करना, सहकारी समितियों के क्रियाकलाप संबंधी सावधिक प्रतिवेदन और लेखा की जानकारी प्राप्त करने हेतु राज्य सरकार को अधिकृत करना, प्रत्येक सहकारी समिति के निदेशक मंडल में समाज के सभी वर्ग यथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन-जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग तथा महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व एवं भागीदारी सुनिश्चित करना इस बिहार सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2013 का उद्देश्य है। इस विधेयक को अधिनियमित कराना ही अभिष्ट है।
(रामाधार सिंह)(रामाधार सिंह)(रामाधार सिंह)(रामाधार सिंह) भार-साधक सदस्य पटना, दिनांक 02 अप्रील, 2013
प्रभारी सचिव बिहार विधान-सभा ।
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अधी/क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 279-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in