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अधिसूचना
14 फरवरी 2013
सं0 1932—श्री गिरधर गोपाल मंदिर, बरहोग, अंचल-बिन्द, नालंदा पर्षद के तहत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या-4221 है। स्थानीय जनता द्वारा पर्षद को सूचित किया गया कि इस मंदिर का निर्माण श्रीमती बालकेष्वर कुँअर द्वारा वर्ष 1933 में किया गया था तथा पूजा-अर्चना एवं राग-भोग के लिए 22.61 एकड़ जमीन समर्पित की गयी थी। कालान्तर में मंदिर की जमीन को अवैध रूप से बेच दिया गया तथा रख-रखाव के अभाव में मंदिर धराषायी हो गया। इसके उपरान्त स्थानीय श्रद्धालु ने दान/चंदा एकत्र कर 2007 में मंदिर का पुनर्निमाण कराया तथा दान/चंदा की राषि से ही पूजा-अर्चना, राग-भोग का प्रबंध किया जा रहा हे। तत्पष्चात् पर्षदीय पत्रांक-699, दिनांक 25.07.2011 द्वारा ग्रामीणों के आवेदन पत्र पर अंचलाधिकारी, बिन्द को जांच कर प्रतिवेदन भेजने को कहा गया। अंचलाधिकारी ने अपने पत्रांक-126, दिनांक 16.02.2012 द्वारा पर्षद को सूचित किया कि न्यास की जमीन की जमाबन्दी विभिन्न क्रेताओं के नाम पर दर्ज हैं और वर्तमान में ठाकुर गिरिधर गोपाल के नाम पर मात्र 0.73 डी0 जमीन शेष बची है। पुलिस अवर निरीक्षक, बिन्द ने पर्षदीय पत्रांक-1788, दिनांक 09.01.2012 के उत्तर में यह सूचित किया कि मंदिर की जमीन की बिक्री 1981-82 में श्री सत्येन्द्र मोहन प्रसाद, द्वारा की गयी है। इन्होंने भी इस बात की पुष्टि की कि उक्त मंदिर के धराषायी होने के बाद ग्रामीणों द्वारा 2007 में दान/चंदा की राषि से मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया है।
उक्त प्रतिवेदन के आलोक में पर्षदीय पत्रांक-372, दिनांक 06.06.2012 द्वारा श्री सत्येन्द्र मोहन प्रसाद को कारण-पृच्छा की नोटिस दी गयी। निर्धारित समय तक उत्तर अप्राप्त होने के कारण उन्हें पुनः पर्षदीय पत्रांक-881 दिनांक 13.08.2012 द्वारा स्मारित किया गया। यह पत्र डाक की अभियुक्ति ''प्राप्तकर्ता गुजर चुके है'' के साथ वापस आ गया।
स्थानीय जनता द्वारा दिनांक 23.12.2012 को थानाध्यक्ष, विन्द की अध्यक्षता में श्री गिरिधर गोपाल जी मंदिर प्रांगण में एक आम सभा आयोजित की गयी जिसमें 242, लोगों की उपस्थिति दर्ज है। उक्त आम सभा में न्यास के सुचारू प्रबंधन के लिए ग्यारह व्यक्तियों की एक न्यास समिति के गठन का सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया गया जिसे पर्षद के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 24 जुलाई 2013 उपर्युक्त परिस्थिति से यह स्पष्ट है कि न्यास की परिसम्पत्तियों का अवैध अन्तरण हुआ है, इसलिए न्यास के सुचारू प्रबंधन एवं सम्पत्तियो की सुरक्षा तथा सम्यक् विकास के लिए न्यास समिति का गठन आवष्यक है। अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0 43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री गिरधर गोपाल मंदिर बरहोग, जिला-नालन्दा की सम्पत्तियों की सुरक्षा, बेहतर प्रबंधन तथा सम्यक् विकास के लिए नीचे लिखे योजना का निरूपण किया जाता है और इसे मूर्त्त रूप देने तथा संचालन के लिए एक न्यास समिति गठित की जाती है।
योजनायोजनायोजनायोजना
(1)(1)(1)(1) अधिनियम की धारा-32 के तहत निरूपित इस योजना का नामा ''श्री गिरधर गोपाल मंदिर न्यास योजना'' और इसे मूर्त्त रूप देने तथा संचालन हेतु गठित न्यास समिति का नाम ''श्री गिरधर गोपाल मंदिर न्यास समिति '' होगा।
(2)(2)(2)(2) श्री गिरधर गोपाल मंदिर एवं इसकी समस्त चल-अचल सम्पत्तियों के प्रबंधन, प्रषासन एवं संचालन का अधिकार श्री गिरधर गोपाल मंदिर न्यास समिति में निहित होगा।
(3)(3)(3)(3) इस न्यास समिति का प्रमुख कर्त्तव्य मंदिर में पूजा-पाठ, अर्चना व अभिषेक, राग-भोग तथा उत्सव-समैया का सम्यक् संचालन सुनिष्चित करना होगा।
(4)(4)(4)(4) मंदिर में प्राप्त होने वाली समग्र राषि का लेखा संधारण किया जोयगा जिसकी एक प्रति पर्षद को भेजी जायेगी।
(5)(5)(5)(5) न्यास समिति न्यास की समग्र भूमि को अतिक्रमण मुक्त एवं अवैध रूप से बेची गयी जमीन की वापसी हेतु कानूनी कार्रवाई करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
(6)(6)(6)(6) मंदिर परिसर में जगह-जगह भेंट-पात्र रखें जायेगें, जिसमें दान एवं चढावे की राषि डाली जायेगी जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना का सत्यापित पंजी में प्रविष्टि के बाद बैंक खाते में जमा की जायेगी।
(7)(7)(7)(7) न्यास की समग्र आय समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा, जिसका संचालन दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा।
(8)(8)(8)(8) न्यास समिति का कोई सदस्य न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लाभ उठाते पाये जायेंगे या आपराधिक पृष्ठभूमि के होंगे, तो उनके सदस्य बने रहने की अर्हता समाप्त हो जायेगी।
(9)(9)(9)(9) न्यास समिति न्यास की आय-व्यय में शुचिता एवं पारदर्षिता रखेगी।
(10)(10)(10)(10) न्यास समिति अधिनियम एवं उपविधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए न्यास की आय-व्यय विवरणी, बजट, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत्त एवं पर्षद को देय शुल्क की राषि का सम्यक् प्रेषण करेगी।
(11)(11)(11)(11) अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में समिति की बैठक बुलायेंगे। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे तथा निर्णय बहुमत से होगा।
(12)(12)(12)(12) न्यास समिति के सचिव समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त्तरूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष लेखा संधारण एवं पर्यवेक्षण के लिए जबाबदेह होगें।
(13)(13)(13)(13) इस योजना में परिवर्तन, परिवर्द्धन, संषोधन या आकस्मिक रिक्तियों की पूर्ति का अधिकार पर्षद में निहित होगा। उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों की न्यास समिति गठित की जाती हैः- (1) श्री शम्भु प्रसाद, पिता- स्व0 विषेष्वर महतो - अध्यक्ष
(2) श्री राजेन्द्र पाण्डेय, पिता- स्व0 देवकीनंदन पाण्डे - सचिव
(3) श्री दिनेष प्रसाद, पिता- स्व0 रघु प्रसाद - कोषाध्यक्ष
(4) श्री दुर्गा सिंह, पिता- स्व0 गणेष सिंह - सदस्य 3
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 24 जुलाई 2013
(8) श्री षिव वराहिस जी, पिता- स्व0 बंधु महतो - सदस्य
सभी ग्राम- वरहोग, पो0थाना- विन्द, जिला- नालंदा।
(9) श्री षिव बालक रविदास , पिता- स्व0 रामदेव रविदास - सदस्य
(10) श्री सियाराम यादव, पिता- स्व0 सिताव यादव - सदस्य
(11) श्री राजेन्द्र विन्द, पिता- श्री ब्रह्मदेव विन्द - सदस्य
ग्राम- गोविन्दपुर, पो0- वरहोग, जिला- नालन्दा ।
उपर्युक्त योजना दिनांक 25.02.2013 से प्रभावी होगा और इसका कार्यकाल 05 वर्षो का होगा।
आदेश से,
किषोर कुणाल,
अध्यक्ष।
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अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 584-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in