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सं0 5/आर0एल0-40-03/2008 श्र0सं0-2641—श्री शशिकान्त उपाध्याय, श्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी (वरीयता क्रमांक-708), श्रमायुक्त कार्यालय, बिहार, पटना सम्प्रति तत्कालीन श्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी, बिहारशरीफ (नालन्दा) के विरूद्ध उनके पदस्थापनकाल में जून, 96 से दिनांक 03.04.97 तथा 05.04.97 से 30.12.07 तक लगातार अपने कर्त्तव्यों से अनुपस्थित रहने तथा अंचलाधिकारी, बिहारशरीफ के सूचनानुसार दिनांक 18.05.96 तक अंचलाधिकारी के न्यायालय में एक भी दावा पत्र नहीं दिये जाने, अप्रील, 96 में 13 दावा पत्र दायर किये जाने की भ्रामक सूचना देने तथा जिला प्रशासन द्वारा सौंपे गये विधि व्यवस्था से संबंधित कार्यों से अनपुस्थित रहने के संदर्भ में आरोप पत्र गठित किया गया था। 2- विभागीय कार्यालय आदेश संख्या-29-सह-पठित ज्ञापांक-5/आर0एल0-40-03/08-2828 दिनांक 10.08.09 द्वारा श्री उपाध्याय के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निर्णय लेते हुए श्री अशोक कुमार सिन्हा, मुख्य निरीक्षी पदाधिकारी, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा श्रम अधीक्षक, (कृ0श्र0), नालन्दा को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। संचालन पदाधिकारी से यह अनुरोध किया गया था कि विभागीय कार्यवाही का निष्पादन तीन माह के अन्दर करते हुए जाँच प्रतिवेदन श्रमायुक्त को समर्पित किया जाय। 3- संचालन पदाधिकारी से प्राप्त अनुरोध पत्र (पत्रांक-50 दिनांक 04.03.10) के आलोक में पूर्व के आदेश को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए डा0 अमरकान्त सिंह, उप श्रमायुक्त, पटना प्रमंडल, पटना को आदेश सं0-18-सह-पठित ज्ञापांक-2724 दिनांक 26.06.10 द्वारा संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था। विभिन्न तिथियों2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 24 िसत-बर 2013 को विभागीय कार्यवाही में सुनवाई करते हुए आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिनांक 25.09.11 को समर्पित लिखित बचाव बयान की समीक्षा करते हुए संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1584 दिनांक 30.06.2011 द्वारा जाँच प्रतिवेदन श्रमायुक्त महोदय को समर्पित किया गया। 4- संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री उपाध्याय के विरूद्ध गठित निम्न आरोपों के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया :-
(i) दिनांक 04.12.93 को बिहारशरीफ अंचल में योगदान देने के बाद अनेक स्मार के वाबजूद अंचल का पदभार ग्रहण नहीं करना।
(ii) विभागीय मासिक बैठक में अनुपस्थित रहना एवं प्रतिवेदन समय पर नहीं देना।
(iii) अंचलाधिकारी, बिहारशरीफ की सूचनानुसार दिनांक 18.05.96 तक अंचलाधिकारी न्यायालय में एक भी दावा पत्र दायर नहीं किया जाना एवं अप्रील, 96 में 13 दावापत्र दायर किये जाने की भ्रामक सूचना देना।
(iv) जिला प्रशासन द्वारा सौंपे गये विधि व्यवस्था संबंधी कार्य (29.07.96 से 06.08.96 तक) से अनुपस्थिति। (v) बिना किसी सूचना/आवेदन अथवा पूर्वानुमति के माह जून, 96 से 03.04.97 तक लगभग 10 माह एवं पुनः दिनांक 05.04.97 से 20.12.07 तक 10 वर्ष, 08 माह लगातार अपने कर्त्तव्य से अनुपस्थित रहना जबकि बिहार सेवा संहिता के नियम-76 के अनुसार सरकारी सेवक छुट्टी के साथ या बिना छुट्टी के कर्त्तव्य से पाँच वर्षों तक लगातार अनुपस्थिति के बाद सरकारी नियोजन में नहीं रह जाता है।
उपर्युक्त पाँच आरोप में से आरोप सं0-(iii) एवं आरोप सं0-(v) को प्रमाणित पाया गया।
विदित हो कि आरोप सं0-(iii) अंचलाधिकारी, बिहारशरीफ की सूचनानुसार दि0-18.05.96 तक अंचलाधिकारी न्यायालय में एक भी दावा पत्र दायर नहीं किया जाना, जबकि अप्रैल,96 में 13 दावा पत्र दायर किये जाने की भ्रामक सूचना देना तथा (v) इनकी दिनांक जून, 96 से 03.04.97 तथा दिनांक 05.04.97 से दिनांक 20.12.07 तक लगभग 10 वर्ष, 8 माह तक लगातार बिना किसी सूचना के अपने कर्त्तव्यों से अनपुस्थित रहने से संबंधित है।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की व्यापक स्तर पर गहन समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई तथा इस निष्कर्ष पर पहुँचने के यथेष्ट कारण है कि श्री उपाध्याय के विरूद्ध प्रमाणित आरोप सं0-(iii) एवं (v) गंभीर प्रकृति के हैं तथा सरकारी लोक सेवक के कर्त्तव्यों के विपरीत हैं। इसके लिये इन्हें वृहत् दंड अधिरोपित किया जा सकता है। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 में किये गये प्रावधान के आलोक में श्री उपाध्याय से पत्रांक-1841 दिनांक 21.06.13 द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा की मांग की गई। उक्त संदर्भ में श्री उपाध्याय द्वारा दिनांक 15.07.13 को द्वितीय कारण-पृच्छा के संदर्भ में अपना बचाव बयान समर्पित किया गया। श्री उपाध्याय द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के आलोक में उन्हें व्यक्तिगत रूप से सुनने के लिये पत्रांक-2330 दिनांक 25.07.13 द्वारा समय दिया गया। श्री उपाध्याय निर्धारित तिथि को स्वयं उपस्थित हुए तथा इनके द्वारा एक लिखित आवेदन भी दिया गया। सुनवाई के दौरान श्री उपाध्याय दो स्थितियों को स्पष्ट करने में सक्षम नहीं हो पाये -
(i) जब वे श्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी, बिहारशरीफ, नालन्दा के पद पर कार्यरत थे तथा वहीं से लगातार रूप से लगभग 10 वर्ष, 8 माह तक अपने कर्त्तव्य से अनुपस्थित थे तो अचानक दिनांक 20.12.07 को मुख्यालय में किस परिस्थति में योगदान समर्पित किया गया ?
3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 24 िसत-बर 2013(ii) लम्बी अनुपस्थिति के संदर्भ में आवेदन समर्पित किये जाने के संबंध में कोई भी ठोस विश्वसनीय साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर सके।
उपर्युक्त समीक्षाओं के आलोक में यह स्पष्टतः प्रमाणित होता है कि आरोपित सेवक श्री शशिकान्त उपाध्याय, तत्कालीन श्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी, बिहारशरीफ, नालंदा के विरूद्ध प्रमाणित आरोप सं0-(iii) एवं (v) सरकारी लोक सेवक के कर्त्तव्य में उठायी गई घोर लापरवाही एवं उदासीनता का द्योतक है तथा प्रमाणित आरोप सं0-(v) तो बिहार सेवा संहिता के नियम-76 में किये गये प्रावधानों के विपरीत है।
अतएव बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-14, 17, 18, 20, 21 में अंतर्निहित प्रावधानों के आलोक में सम्यक् समीक्षा के उपरान्त श्री शशिकान्त उपाध्याय, श्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी (अराजपत्रित) को आदेश निर्गत होने की तिथि से सरकारी सेवा से बर्खास्त (Dismiss) किया जाता है।
श्री उपाध्याय के संबंध में पूर्ण विवरण निम्नवत है -
1. नाम - श्री शशिकान्त उपाध्याय
2. पदनाम - श्रम प्रवर्त्तन पदाधिकारी (अराजपत्रित)
3. श्रेणी - वर्ग-3
4. वरीयता क्रमांक - 708
5. आरक्षण कोटि - 1
6. गृह जिला - रोहतास
7. जन्म तिथि - 02.12.1956
8. योगदान की तिथि - 22.12.1989
9. वेतनमान् - रू0 5500-175-9000/-
10. स्थायी पता - ग्राम-सूरजपुरा, पो0-नुआँव, थाना-रामगढ़, जिला-कैमूर (भभुआ)।
11. पत्राचार पता - श्री शशिकान्त उपाध्याय, सावित्री, चरित्रवन, बक्सर, वीरकुँअर सिंह कॉलोनी, जिला-बक्सर।
आदेश :- आदेश दिया जाता है कि इस पारित आदेश को संबंधितों को उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित किया जाय।
आदेश से,
सुरेश कुमार सिन्हा,
श्रमायुक्त।
————— अधी.क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 734-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in