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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 01 October 2013

Published 01 October 2013

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2013-10-01.766
Languages
English, Hindi

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प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-223 दिनांक 01.04.09 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-9 के अन्तर्गत निलंबित करते हुए नियमावली के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गई। विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई एवं समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 786 दिनांक 4.7.11 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न करते हुए उनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री अमन से उक्त द्वितीय कारण पृच्छा के प्रसंग में प्राप्त स्पष्टीकरण की सरकार के स्तर पर सम्यक समीक्षोपरान्त निम्नांकित आरोप प्रमाणित पाए गएः- 1. दानुबिगहा के कचनावा सबदलपुर तक दरधा नदी के बायॅा जमींदारी बॅाध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य प्रशासनिक स्वीकृत्यार्थ प्राक्कलन में दरधा नदी के दाएॅ बॅाध का प्रावधान नहीं रहने के बावजूद इनके द्वारा कार्यकारी प्राक्कलन में दाएॅ बॅाध का समावेश कर बिना केाई औचित्य दर्शाए तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई। 2. जमींदारी बॅाध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य अनुमोदित प्राक्कलन में फारमेशन लेवल एल-272 फीट एवं एफ0 एस0 एल0-269 फीट के विरूद्व स्वीकृत प्राक्कलन में फारमेशन लेवल आर0 एल0-249 फीट ही रखा गया है, लिहाजा बॅाध की उचाई में 23 फीट की कमी की गई है जिसका कोई तकनीकी औचित्य नहीं दर्शाया गया है। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए दोषी पाए जाने के कारण अधिसूचना सं0-1465 दिनांक 25.11.11 द्वारा श्री अमन को निलंबन से मुक्त करते हुए निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गयाः- 1. निन्दन वर्ष 2008-09 2. कालमान वेतन के न्यूनतम प्रक्रम पर अवनति जिसमें वे अगले पॅाच वर्षो तक कोई वेतनवृद्वि अर्जित नहीं करेंगे तथा पॅाच वर्षो के बाद नियमानुसार वेतनवृद्वि देय होगा। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 1 अ-तूबर 2013 3. निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जाएगी। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्व श्री अमन द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-24(2) के आलोक में सरकार के आदेश के विरूद्व अपील नहीं किया जा सकता है। वैसी स्थिति में उक्त अपील अभ्यावेदन को पुनर्विचार अभ्यावेदन मानते हुए विचार किया गया। श्री अमन द्वारा प्रस्तुत अपील अभ्यावेदन में आरोप सं0-1 के संबंध में कहा गया है कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17(3) एवं 17(4) के आलोक में उन्हें अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा साक्ष्य स्वरूप प्राक्कलन पंजी के प्राक्कलन सं0-23 के सत्यापित प्रति आरोप पत्र के साथ उपलब्ध नहीं कराया गया और न ही जॅाच पदाधिकारी द्वारा सुनवाई के क्रम में किसी प्रकार का बचान लिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अन्य माध्यम से प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर आरोप सं0-1 प्रमाणित किया गया है जो उक्त नियम की घारा-17(3) और 17(4) का उल्लंधन है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा आगे बताया गया है कि उनके स्तर से बायॅा जमींदारी बॅाध के प्राक्कलन की स्वीकृति दिए जाने के पश्चात निविदा आमंत्रण सूचना सं0-8/2007 के क्रमांक-5 के माध्यम से कार्यपालक अभियन्ता द्वारा बायॅा बॅाध के कार्यो के लिए निविदा निकाली गई थी एवं कार्य कराने के दौरान कार्यपालक अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता द्वारा सदैव विभाग एवं उच्चाधिकारी को बायॅा जमींदारी बॅाध के कार्य का ही प्रगति प्रतिवेदन भेजा गया था। इस प्रकार कार्यपालक अभियन्ता द्वारा सारी कार्रवाई मात्र बायॅा जमींदारी बॅाध के लिए ही सम्पन्न किया गया है जो स्वतः प्रमाणित करता है कि प्राक्कलन की स्वीकृति मात्र बायॅा जमींदारी बॅाध के लिए ही था। आरोप सं0-2 के संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी का कहना है कि उनके द्वारा प्रशासनिक स्वीकृत्यार्थ प्राक्कलन एवं कार्यकारी प्राक्कलन के formation level में किसी तरह की केाई तब्दीली नहीं की गई थी। फलतः इसके लिए किसी तकनीकी ओचित्य को दर्शाए जाने की कोई प्रासंगिकता नहीं थी। कार्यकारी प्राक्कलन बनाते समय जी0 टी0 एस0 द्वारा निर्धारित बेंच मार्क के आर0 एल0 के आधार पर लेवल लेकर विभिन्न बिन्दुओं का आर0 एल0 निश्चित किया गया। इस तरह बायॅा जमींदारी बॅाध का क्रॅास सेक्शन तैयार करने में प्रशासनिक स्वीकृत्यार्थ प्राक्कलन एवं कार्यकारी प्राक्कलन में अलग अलग Reference बेंच मार्क के आर0 एल0 के अनुसार विभिन्न बिन्दुओं का आर0 एल0 निर्धारित हुआ। वास्तव में प्रशासनिक स्वीकृत्यार्थ मार्क के आर0 एल0 23 फीट का अन्तर है न कि बॅाध की उचाई में। आगे श्री अमन द्वारा जॅाच प्रतिवेदन की कंडिका-43 को उद्वत किया गया है जिसमें किसी प्रकार की अनियमितता या भुगतान में गड़बड़ी की आशंका व्यक्त नहीं की गई है। साथ ही कंडिका 44 को रेखांकित किया गया है कि इसके कारण केाई क्षति या भुगतान में गड़बड़ी का आरोप पदाधिकारी पर नहीं है। इस प्रकार जॅाच पदाधिकारी द्वारा आरोप के संदर्भ में यह निष्कर्षित किया जाना कि आरोप इस हद तक प्रमाणित है कि उन्होंने कार्यकारी प्राक्कलन में वास्तविक स्थिति का जिक्र किए बिना तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी का तात्पर्य स्पष्ट नहीं हो रहा है कि वस्तुतः इस आरोप के प्रमाणित होने की हद कितना है कि वृहद दण्ड अधिरोपित किया गया। दण्ड-2 के संबंध में आरोपित पदाधिकारी का कथन है कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-18 के उप-नियम (7) के प्रावधानों के आलोक में बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श प्राप्त किए बिना वृहद्‌ दण्ड अधिरोपित कर दिया गया है जो न्याय की दृष्टि से कतई उचित नहीं है। दण्ड-3 के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 की कंडिका-11(5) का हवाला देते हुए कहा गया है कि उकत नियम का अनुपालन किए बिना दण्ड सं0-3 संसूचित किया गया है। अन्त में श्री अमन द्वारा कहा गया है कि अधिरोपित दण्ड समानुपातिक नहीं है क्योंकि सभी आरोपित पदाधिकारियों (कनीय अभियन्ता से अधीक्षण अभियंन्ता तक) को एक समान दण्ड दिया गया है। ं श्री अमन के अपील अभ्यावेदन में निहित तथ्यों की समीक्षा की गई जो निम्नवत्‌ हैः- (1) आरोपित पदाधिकारी का कथन सही नहीं है कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17(3) एवं 17(4) के आलोक में आरोप पत्र के साथ साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है क्योंकि विभागीय पत्रांक 589 दिनांक 19.6.09 द्वारा आरोप के साथ साक्ष्य स्वरूप निगरानी विभाग का पत्रांक 5390 दिनांक 15.9.08 उपलब्ध कराया गया है। यह सही है कि अधीक्षण अभियन्ता श्री अमन द्वारा 63..39 रू0 लाख के स्वीकृत प्राक्कलन में बाएॅ जमींदारी बॅाध का उल्लेख है परन्तु Abstraet Cost तथा विस्तृत प्राक्कलन में बायॅा एवं दायॅा दोनों बॅाध का उल्लेख है। उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा सिर्फ बायॅा जमींदारी बॅाध का प्राक्कलन तैयार कर कार्य कराने की स्वीकृति विभागीय पत्रांक 2685 दिनांक 20.12.07 द्वारा दी गई है। इस प्रकार स्पष्ट है कि सरकार की स्वीकृति के बिना ही प्राक्कलन में दायॅा बॅाध के कार्य का समावेश किया गया है। (2) प्रशासनिक स्वीकृति हेतु प्राक्कलन Assimed फॅारमेशन लेवली के आधार पर तैयार किया गया था। स्वीकृति उपरान्त कार्यकारी प्राक्कलन जी0 टी0 एस0 बेंच मार्क के आधार पर तैयार किया गया। वैसी स्थिति में प्राक्कलन के प्रतिवेदन में वस्तुस्थिति को स्वीकृत करने के पहले अंकित किया जाना/ करा लिया जाना चाहिए था। जो कि नहीं किया गया जिसके भ्रम की स्थिति पैदा हुई जिसके लिए श्री अमर दोषी है। 3

(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 1 अ-तूबर 2013

नियमानुसार प्रस्तुत मामले में बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्श की आवशकता नहीं है। (3) दण्ड सं0-3 के संबंध में भी अमन का कथन स्वीकार योग्य नहीं है कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11(5) के आलोक में ही दण्ड का संसूचन किया गया है चूॅकि इनके विरूद्व आरोप प्रमाणित पाया गया है। वर्णित स्थिति में श्री अमरेन्द्र कुमार अमन, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, जल पथ अंचल, गया द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन विचारणीय बिन्दु के अधीन नहीं आते है अतएव अपील अभ्यावेदन अस्वीकृत किया जाता है। उक्त आदेश श्री अमर को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम कुमार सिंह, सरकार के विशेष सचिव।

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अधी0क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु5ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 766-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 01 October 2013. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2013-10-01.766/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2013-10-01.766.