(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 9999 आ !नआ !नआ !नआ !न 1111935935935935 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 767767767767) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, मंगलमंगलमंगलमंगलवारवारवारवार,,,, 1111 अ-तूअ-तूअ-तूअ-तूबरबरबरबर 2013201320132013 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 1 अ-तूबर 2013 उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0 1464 दिनांक 25.11.11 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गयाः- 1. निन्दन वर्ष 2008-09 2. कालमान वेतन के न्यूनतम प्रक्रम पर अवनति जिसमें वे अगले पॅाच वर्षो तक कोई वेतनवृद्वि अर्जित नहीं करेंगे तथा पॅाच वर्षो के बाद वेतनवृद्वि देय होगा। 3. निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा परन्तु उक्त अवधि की गणना पेंशन के प्रयोजनार्थ की जाएगी। उक्त संसूचित दण्ड के विरूद्व श्री जय किशोर सिंह द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-24(2) के आलोक में सरकार के आदेश के विरूद्व अपील नहीं किया जा सकता है। वैसी स्थिति में उक्त अपील अभ्यावेदन को पुनर्विचार अभ्यावेदन मानते हुए विचार किया गया। श्री सिंह द्वारा प्रस्तुत अपील अभ्यावेदन में आरोप सं0-1 के संबंध में कहा गया है संचालन पदाधिकारी द्वारा कार्य के प्राक्कलन में कुछ त्रुटि के आधार पर उन्हें इस आरोप के तहत दोषी पाया गया है एवं उनके स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना दंडित किया गया है। आरोप सं0 2 के संबंध में कहा गया है कि उनके द्वारा उच्चस्तरीय प्राधिकार से प्राप्त स्वीकृति एवं प्राप्त दिशा निर्देश के आलोक में कार्य किया गया है जिसकी सूचना उच्चाधिकारी को दी गई है। उनके द्वारा नियमानुसार मापी जॅाच किया गया जिससे संबंधित अभिलेख जॅाच पदाधिकारी के पास उपलब्ध था परन्तु बिना इस पर विचार किए उन्हें अांशिक रूप से दोषी सिद्व किया गया। आरोप सं0 3 के संबंध में श्री सिंह का कहना है कि दानुबिगहा कचनाहा सबदलपुर तक दरधा नदी के बाए जमींदारी बांध के उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य अनुमोदित प्राक्कलन के अनुसार किया गया है एवं इस संबंध में स्पष्टीकरण के माध्यम से उनके द्वारा स्थिति स्पष्ट की गई थी परन्तु जॅाच पदाधिकारी द्वारा इस पर विचार किए बिना उन्हें दोषी करार दिया गया है। आरोप सं0 4 के संबंध में उनका कथन है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा इस मामले में किसी प्रकार की अनियमितता या क्षति होना नहीं पाया गया है फिर भी उन्हें बिना किसी कारण के दोष सिद्व किया गया है। श्री सिंह के अपील अभ्यावेदन में निहित तथ्यों की समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री ंिसह का कथन मानने योग्य नहीं है क्योंकि संचालन पदाधिकारी द्वारा पूर्व रूपेण विचारोपरान्त ही आरोप सं0-1, 3 एवं 4 के लिए पूर्ण एवं 2 के लिए अांशिक रूप से इन्हें दोषी करार दिया गया है। विभागीय पत्रांक 2685 दिनांक 20.12.07 द्वारा बायॅा जमींदारी बॅाध के संबंध में प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी परन्तु कार्यकारी प्राक्कलन में दायॅा जमींदारी बॅाध का भी समावेश किया गया एवं प्रतिवेदन में इस तथ्य को छुपाया गया। श्री सिंह द्वारा नियमानुसार मापी की भी जॅाच नहीं की गई है एवं बायॅा बॅाध की स्वीकृति के बावजूद बाएॅ एवं दाएॅ बॅाधों का विपत्र अंकित किया गया है। अपील अभ्यावेदन के साथ कोई साक्ष्य संलग्न नहीं किया गया हैं। वर्णित स्थिति में श्री जय किशोर सिंह, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, जल पथ प्रमंडल, जहानाबाद द्वारा समर्पित अभ्यावेदन विचारणीय बिन्दु के अधीन नहीं आते है अतएव अपील अभ्यावेदन अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम कुमार सिंह, सरकार के विशेष सचिव।
————— अधी0क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु5ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 767-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in