िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 9999 आ !नआ !नआ !नआ !न 1111935935935935 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 771771771771) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, मंगलमंगलमंगलमंगलवारवारवारवार,,,, 1111 अ,तूअ,तूअ,तूअ,तूबरबरबरबर 2013201320132013 जल संसाधन विभाग --------- vf/klwpuk 02 vxLr 2013 सं0 22/नि0सि0(जम0)-12-08/2005/906—श्री अमरनाथ प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता (यॅात्रिक), लधु वितरणी प्रमण्डल सं0-5, डिमना, जमशेदपुर के विरूद्व स्थानान्तरण आदेश का अनुपालन बहुत विलम्ब से करने, उनके द्वारा प्रभार नहीं सौपे जाने एवं उच्चाधिकारियों के साथ अमर्यादित व्यवहार करने से संबंधित आरोपों के लिए जल संसाधन विभाग, झारखण्ड, रॅाची के संकल्प सं0-2970 दिनांक 19.9.03 द्वारा सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम 55 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गयी। जॅाच पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त जल संसाधन विभाग, झारखण्ड, रॅाची द्वारा श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) के विरूद्व निम्न दण्ड देने के लिए प्रस्तावित किया गयाः- (क) निन्दन वर्ष 1999-2000 (ख) देय तिथि से तीन वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। इस बीच श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) का अंतिम कैडर विभाजन के उपरान्त बिहार राज्य आवंटित हो गया जिसके फलस्वरूप जल संसाधन विभाग, झारखण्ड के पत्रांक 2431 दिनांक 15.6.05 द्वारा अगे्रतर कार्रवाई हेतु संबंधित अभिलेखों की छाया प्रति जल संसाधन विभाग, बिहार को प्राप्त कराया गया। जल संसाधन विभाग, झारखण्ड से प्राप्त अभिलेखों के समीक्षोपरान्त पाया गया जल संसाधन विभाग, झारखण्ड के द्वारा श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) के विरूद्व मुख्यतः निम्न आरोप गठित किए गयेः- (1) मुख्य अभियन्ता, सुवर्ण रेखा बहुदेशिय परियोजना, चांडिल कम्पलेक्स, जमशेदपुर के आदेश सं0-710 दिनांक 30.6.99 द्वारा श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) लधु वितरणी अवर प्रमण्डल सं0-2, डिमना, जमशेदपुर का स्थानान्तरण सुवर्ण रेखा बांध अंचल चांडिल किया गया था, लेकिन श्री प्रसाद द्वारा प्रभार नहीं सौपने के कारण उनके प्रतिस्थानी श्री निरंजन प्रसाद सिंह द्वारा दिनांक 30.7.99 को स्वतः प्रभार ग्रहण किया गया। (2) श्री प्रसाद द्वारा उक्त स्थानान्तरण आदेश का अनुपालन काफी विलम्ब से डेढ़ वर्षो के बाद किया गया। इस प्रकार इनके द्वारा आदेश की अवहेलना किया गया एवं स्वेच्छापूर्ण आचरण किया गया। (3) पूर्व प्रमण्डल के प्रभार सौपने में तत्कालीन मुख्य अभियन्ता के मौखिक आदेश कि संबंधित अभिलेख की सत्यापित प्रति अपने पास रखकर अवर प्रमण्डल सं0-2, डिमना का प्रभार अपने प्रतिस्थानी को सौंप दें के प्रति उत्तर में श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता द्वारा यह कहना है कि माननीय मंत्री जल संसाधन विभाग, बिहार/ झारखण्ड के आदेश के उपरान्त ही प्रभार सौपेगे। उनका यह व्यवहार अमार्यादित एवं सरकारी नियमोंं के विरूद्व है। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 1 अ,तूबर 2013 (4) जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 577 दिनांक 26.5.01 द्वारा श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता को पूर्व प्रमण्डल का प्रभार सौंपने का आदेश हुआ परन्तु उसका भी तुरन्त अनुपालन नहीं किया गया। और कार्यालय की मूल संचिका कार्यालय से हटाकर अपने पास लम्बी अवधि तक रखे रहे। सरकारी कार्य बांधित हुआ। सरकारी अभिलेख कार्यालय की सम्पति होती है इनके द्वारा संचिका अपने पास रखने से उसकी गोपनियता भंग हो सकती है। (5) श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) द्वारा आरोप लगाया गया कि संवेदक श्री रामाशीष के लापरवाही मनमानी आदि के कारण कि0मी0 20.671 एवं 27.317 के संरचना का कार्य पूरा नहीं हो पाया। इनके उक्त आरोप की जॅाच करायी गयी। अधीक्षण अभियन्ता, योजना आयोजन अंचल, रॅाची के पत्रांक 210 दिनांक 19.8.02 द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) द्वारा लगाया गया आरोप अस्पष्ट प्रकृति का है। आरोप विन्दु मूलतः श्री प्रसाद द्वारा अपनी गलती को छुपाने के उद्वेश्य से पे्ररित लगती है। श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक)के पत्रांक 36 दिनांक 19.11.03 द्वारा उक्त आरोपों के संबंध में मुख्य रूप से निम्न बाते कही गयीः- (1) जब मुख्य अभियन्ता, चांडिल कम्पलेक्स को श्री रामाशीष संवेदक से अवैध कमाई करने की भुख जगी तब अल्प अवधि यानि तीन वर्षो के पूर्व दो वर्ष चार माह में उनका स्थानान्तरण कर दिया गया। उक्त स्थानान्तरण के विरूद्व समर्पित उनके अभ्यावेदन को प्रशासन द्वारा जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना भेज दिया गया। जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक 1654 दिनांक 6.12.2000 के आलोक में उनके द्वारा दिनांक 7.12.2000 को योगदान देकर कार्य प्रारम्भ कर दिया। (2) कार्यालय के मूल संचिका अपने पास रखने के संबंध में श्री प्रसाद का कहना है कि तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, श्री नन्द किशोर प्रसाद द्वारा साक्ष्य को कमजोर करने के लिए अनेकों महत्वपूर्ण पत्रों को गायब कर दी थी। इसलिए अनुमंडलीय संचिका भी गायब न हो जाय, कार्य से संबधित अनुमंडलीय संचिका तथा एकरारनामा की सत्यापित प्रति अपने पास लंबित रखी थी। जहॅा तक गोपनीय भंग होने का प्रश्न है, इस संबंध में इनका कहना है कि गोपनीय बेईमानों राजतंत्र तथा तानाशाही सरकार की भाषा है। जॅाच पदाधिकारी द्वारा निम्न मंतव्य दिया गयाः- (1) श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) को अपने मुख्य अभियन्ता द्वारा किये गये स्थानान्तरण आदेश का अनुपालन करने के पश्चात अभ्यावेदन देना चाहिए था। इस प्रकार इनके द्वारा अपने प्रभार नहीं सौपकर स्वेच्छापूर्वक आचरण किया है। (2) श्री प्रसाद कहा कहना है कि अनुमंडलीय संचिका से आवश्यक पत्र गायब न हो जाय तथा भ्रष्ट एवं गैर जिम्मेवार संवेदक को एकरारनामा के शर्त 44.45 के अनुसार लगने वाले दण्ड से मुक्त न हो जाय इसलिए अभिलेखों को अपने पास रखी थी। श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता द्वारा लगाये गये उक्त आरोप की जॅाच उड़नदस्ता द्वारा करायी गयी। उड़नदस्ता ने प्रतिवेदित किया है कि कि0मी0 27.317 पर स्थित संरचना कार्य अधूरा पड़ा है। कार्य पूरा नहीं करने के कारण एकरारनामा के शर्त स0ं-44.45 के अनुसार संवेदक पर दण्ड नहीं लगाने का आरोप उचित नहीं है क्योंकि एकरारनामा के शर्त सं0-32 के अनुसार संवेदक को मासिक भुगतान करना है। इस शर्त को निधि के अभाव में पूरी नहीं की जा सकी। जब विभाग द्वारा संवेदक को भुगतान नहीं किया गया तो ऐसे स्थिति में संवेदक पर दंडात्मक कार्रवाई समीचीन प्रतीत नहीं होता है। इस प्रकार श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता द्वारा लगाये गये आरोप सही नहीं है। श्री प्रसाद सहायक अभियन्ता द्वारा आधारहीन तथ्यों के आधार पर आरोप लगाना अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना सरकारी नियमों के विरूद्व है। श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता द्वारा स्पष्टीकरण में भी अमर्यादित भाषा का प्रयोग अपने उच्चाधिकारियों के लिए की है जो अनुशासनहीनता का द्योतक है। जल संसाधन विभाग से प्राप्त अभिलेखों के समीक्षोपरान्त उक्त वर्णित आरोप प्रमाणित पाया गया। तत्पश्चात जॅाच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक 274 दिनांक 18.3.06 द्वारा श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) से द्वितीय कारण पृच्व्छा की गयी। इनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का उत्तर समर्पित किया गया, जिसकी समीक्षा विभाग द्वारा की गयी। पाया गया कि श्री प्रसाद द्वारा केाई नया तथ्य नहीं दिया गया है बल्कि अपने उत्तर के अंतिम कंडिका में अंकित किया गया कि संक्षिप्त पत्र से संतुष्ट नहीं होने पर विस्तार से स्पष्टीकरण दूॅगा। उनके उत्तर के आलोक में विभागीय पत्रांक 656 दिनांक 24.6.06 द्वारा अंतिम रूप से विस्तृत उत्तर की मांग की गयी। इस संदर्भ में उनके अनुरोध के आलोक में विभाग द्वारा उपलब्ध सभी कागजातों का उन्हें अवलोकन कराया गया। अवलोकनोपरान्त इनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्व्छा का अंतिम रूप से उत्तर नहीं देकर इस संदर्भ में माननीय मुख्य मंत्री बिहार को अभ्यावेदन समर्पित किया गया। तत्पश्चात इनके द्वारा समर्पित उत्तर एवं अन्य अभिलेखों के आलोक में मामले की पूर्ण समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-540 दिनांक 11.7.08 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गया। (क) निन्दन वर्ष 1999-2000 (ख) देय तिथि से तीन वर्षो तक प्रोन्नति पर रोक। उपरोक्त दण्ड के विरूद्व श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) द्वारा माननीय लोकायुक्त बिहार के न्यायालय में अभ्यावेदन समर्पित किया गया। माननीय लोकायुक्त, बिहार महोदय द्वारा दण्डादेश के विरूद्व उचित फोरम में जाने 3
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 1 अ,तूबर 2013
का परामर्श दिया गया। जिसके आलोक में श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) द्वारा माननीय मंत्री, जल संसाधन विभाग के समक्ष पुनर्विचार अभ्यावेदन दिनांक 14.01.13 को समर्पित किया गया। श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) द्वारा अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न तर्क दिया गयाः- (1) स्थानान्तरण आदेश अनुपालन नहीं करने के संबंध में मुख्य रूप से कहा गया कि मेरा अल्पकालिक स्थानान्तरण श्री रामशीष संवेदक को लगने वाले आर्थिक दण्ड से बचाने के लिए किया गया था। मेरा अल्पकालीन स्थानान्तरण अवैध था क्योंकि जल संसाधन विभाग के पत्रांक 515 दिनांक 15.3.2000 द्वारा मुख्य अभियन्ताओं को स्थानान्तरण नहीं करने का निदेश था। (2) स्थानान्तरण के उपरान्त प्रभार नहीं देने के संबंध में कहा गया है कि उक्त संचिका अपने पास नहीं रखता तो संचिका गायब कर दिया जाता। (3) अमर्यादित व्यवहार के संबंध में कहा गया है कि मैंने सदाचारी पदाधिकारी को कु्रछ नहीं कहा। मामले की पूर्ण समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) द्वारा अभ्यावेदन यह कहना कि विभागीय पत्रांक 515 दिनांक 15.3.2000 द्वारा मुख्य अभियन्ताओं को स्थानान्तरण नहीं करने का निदेश था। जबकि इनका स्थानान्तरण उक्त पत्र निर्गत के पूर्व वर्ष 1999 में किया गया था। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा अभ्यावेदन में पूर्व में कहीं गयी बातों को ही दुहरायी गयी है जिसके समीक्षोपरान्त इन्हें दण्ड संसूचित किया गया है। अभ्यावेदन में अन्य कोई नयी बात नहीं कही गयी है और न ही केाई नया तथ्य या साक्ष्य दिया गया है जिसके आधार पर दण्ड को कम किया जा सकें। वर्णित स्थिति में समीक्षोपरान्त सरकार द्वारा श्री प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) का अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है। तदनुसार श्री अमरनाथ प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) का अभ्यावेदन दिनांक 14.01.13 को अस्वीकृत किया जाता है। उक्त आदेश श्री अमरनाथ प्रसाद, सहायक अभियंता (यॅात्रिक) को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम कुमार सिंह, सरकार के विशेष सचिव।
————— अधी/क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु4ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 771-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in