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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 17 October 2013

Published 17 October 2013

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2013-10-17.814
Languages
English, Hindi

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बिहार पी0डब्ल्यू0डी0 कोड के नियम 59 में वर्णित कार्यभारित स्थापना की परिभाषा के अनुसार ये ऐसे कर्मचारी हैं, जो किसी कार्य विशेष या उस कार्य से संबंधित कार्य या परियोजना के कार्यान्वयन, पर्यवेक्षण के लिए नियोजित किए गए हों एवं उनका वेतन उस योजना/कार्य पर आधारित हो । माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कार्यभारित स्थापना को जसवंत सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया {(1979) 4 ए0सी0सी0 440} में परिभाषित किया गया है जो निम्नवत्‌ हैः- "A work-charged establishment broadly means an establishment of which the expenses, including the wages and allowances of the staff, are chargeable to works. The pay and allowances of employees, who are borne of a work-charged establishment, are generally shown as a separate sub-head of estimated cost of the works."

2. कार्य विभाग में कतिपय परियोजनाओं के दीर्धकाल तक कार्यान्वयनाधीन रहने के चलते बहुत से कर्मियों/मजदूरों के कार्यभारित स्थापना में वर्षाें तक रहने के चलते वित्त विभागीय संकल्प संख्या 6394, दिनांक 23/10/1987 द्वारा राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया था कि सक्षम पदाधिकारी के द्वारा नियुक्त अन्यथा योग्य कर्मचारियों, जिन्होंने दिनांक 21/10/1984 तक 5 वर्षों की लगातार संतोषप्रद सेवा पूरी कर ली है, उन्हें विहित शर्त्तों के अधीन नियमित कर दिया जाय । सरकार ने यह निदेश भी उक्त संकल्प द्वारा जारी किया था कि आगे से कार्यभारित स्थापना में कर्मियों की नियुक्ति नहीं की जाय । सरकार के इस निर्णय के बावजूद नियुक्तियाँ की गई ।

3. कार्यभारित स्थापना के संदर्भ में इस बीच निम्नांकित घटनाक्रम उल्लेखनीय है :-

(क) माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कई रिट याचिकाओं/अवमाननावादों में लोक निर्माण विभाग के ज्ञाप सं0 1344, दिनांक 04/02/1949 के आधार पर पारित आदेशों के अनुपालन में बहुत सारे ऐसे कार्यभारित कर्मियों की सेवा नियमित हो गयी है जिनकी नियुक्ति वित्त विभागीय संकल्प सं0 6394, दिनांक 23/10/1987 द्वारा निर्धारित Cut-off date के बाद हुई2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 अ.तूबर 2013 थी । न्यायादेशों के अनुपालन में नियमित किये गए कार्यभारित कर्मियों से पूर्व से नियुक्त कर्मी अभी भी कार्यभारित स्थापना में कार्यरत हैं । (ख) दिनांक 11/12/1990 के पूर्व से दैनिक मजदूरी पर कार्यरत कर्मियों को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के संकल्प सं0 489, दिनांक 10/05/2005 द्वारा नियमित स्थापना में नियुक्त किया जा चुका है । (ग) कतिपय विभागों में कार्यभारित स्थापना के कर्मियों को कार्यभारित स्थापना से हटाकर दैनिक मजदूरी पर रखने का निर्णय लिया गया था, वे कर्मी तद्‌नुसार दैनिक मजदूरी पर कार्यरत हैं ।

4. उपर्युक्त कंडिका-3 में वर्णित तथ्यों के आलोक में कार्यभारित स्थापना में कार्यरत कर्मियों को नियमित स्थापना में लेने हेतु Cut-off date आगे बढ़ाने का मामला राज्य सरकार के विचाराधीन था । सम्यक्‌ विचारोपरांत राज्य सरकार ने कार्यभारित स्थापना में कार्यरत कर्मियों को निम्नांकित शर्त्तों के अधीन नियमित सेवा में लेने का निर्णय लिया हैः- (i) कार्यभारित स्थापना में कार्यरत उन्हीं कर्मियों को नियमित किया जा सकेगा जो दिनांक 11/12/1990 को अथवा उसके पूर्व कार्यभारित स्थापना में नियुक्त हुए हों तथा उनकी सेवा संतोषप्रद रही हो और लगातार हो; (ii) इसका लाभ उन कर्मियों को ही मिलेगा जो इस नीतिगत निर्णय संबंधी संकल्प निर्गत होने के बाद प्रशासी विभाग द्वारा आदेश निर्गत होने की तिथि को सेवा में हों; (iii) वैसे कर्मी जो मूलतः कार्यभारित स्थापना में थे परन्तु जिन्हें बाद में दैनिक मजदूरी पर Convert कर दिया गया था, उन्हें भी नियमितीकरण का लाभ मिलेगा, बशर्ते कि उनकी सेवा लगातार हो और वे आदेश निर्गत होने की तिथि को कार्यरत हों; (iv) जिन कार्यभारित कर्मचारियों के विरूद्ध कोई मुकदमा दायर किया गया हो या जिनके विरूद्ध प्रथम दृष्टया प्रमाणित भ्रष्टाचार के आरोप लंबित हों या जिनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चल रही हो, उनके विरूद्ध उपर्युक्त कार्रवाई समाप्त होने तक वर्त्तमान आदेश के अंतर्गत नियमित स्थापना में नहीं लिया जाएगा । यदि मुकदमा/ विभागीय कार्यवाही के निस्तार के पूर्व कार्यभारित पद पर ही वे सेवानिवृत हो जाते हैं, तो उन्हें नियमित सेवा में आने का लाभ भूतलक्षी प्रभाव से नहीं दिया जा सकेगा; (v) जिस कोटि व पद पर कार्यभारित कर्मी कार्यरत हैं, उस कोटि का पद नियमित स्थापना में उपलब्ध होने पर उस रिक्ति के विरूद्ध नियुक्ति की जायगी; (vi) यदि नियमित स्थापना में पद उपलब्ध न हों तो कार्यभारित कर्मचारियों को नियमित स्थापना में परिणत करने के लिए कार्यभारित स्थापना के संबंधित पद ही नियमित स्थापना में सम्परिवर्तित हो जायेंगे परन्तु ऐसे पदों को संबंधित संवर्गीय बल निर्धारण के निमित सृजित पद नहीं माना जायेगा और संबंधित कर्मी के अवकाश ग्रहण के बाद अथवा सेवाकाल में मृत्यु होने पर वे पद स्वतः समाप्त हो जाएँगे ।

5. नियमित सेवा में आने के पश्चात्‌ इन्हें निम्नलिखित अतिरिक्त सुविधाएँ अनुमान्य होंगी :-

(i) जिन कार्यभारित कर्मियों को पूर्व से सामान्य भविष्य निधि योजना का लाभ मिल रहा है; उनके भविष्य निधि खाता में जमा पूरी राशि सूद के साथ निकासी कर कार्यपालक अभियंता द्वारा भविष्य निधि निदेशालय में नया जी.पी.एफ.खाता खुलवाकर जमा करा दी जायेगी । नया खाता खोलने हेतु प्रस्ताव संयुक्त आयुक्त, लेखा प्रशासन, भविष्य निधि निदेशालय, पंत भवन, पटना को भेजा जाना होगा । (ii) नियमित सेवा में आने के बाद की सेवा अवधि में ये उपार्जित अवकाश अर्जित कर सकेंगे तथा सेवानिवृत्ति के बाद जमा उपार्जित अवकाश के बदले नकदीकरण की सुविधा प्राप्त होगी । (iii) नियमित सेवा में आने के बाद ये संवर्ग में पूर्व से नियुक्त नियमित कर्मियों से कनीय होंगे और नियमित सेवा में आने के बाद की सेवा की ही गणना नियमित प्रोन्नति के लिए की जायेगी । (iv) रूपांतरित सुनिश्चित वृत्ति उन्नयन योजना (MACPS) का लाभ दिये जाने के उद्‌देश्य से इनकी कार्यभारित अवधि की सेवा की गणना की जायेगी । अगर कार्यभारित अवधि में ही इन्हें एक से दूसरे कार्यभारित पद पर नियुक्ति की गयी हो और उसका वेतनमान उच्चतर हो और उसी पद पर नियमित सेवा में लिये जाने का प्रस्ताव हो तो इस प्रकार कार्यभारित सेवावधि में वेतन उन्नयन को एक वित्तीय उन्नयन माना जायेगा । (v) इन कर्मियों पर पुरानी पेंशन योजना लागू होगी ।प्रत्येक पाँच वर्षाें की कार्यभारित सेवा के बदले एक वर्ष की नियमित सेवा की मान्यता देते हुए पेंशन एवं ग्रेच्यूटी लाभ की गणना की जायेगी । इसके बावजूद यदि पुरानी पेंशन योजना के तहत पेंशन स्वीकृित हेतु निर्धारित न्यूनतम पेंशन प्रदायी सेवा 10 वर्ष पूर्ण नहीं हो तो उस हद तक न्यूनतम सेवा जोड़कर पेंशन का लाभ दिया जाएगा । (vi) नियमित सेवा में आने के बाद सेवाकाल में मृत्यु होने पर अनुकंपा के आधार पर आश्रित को नियुक्ति का लाभ संगत नियमों के तहत देय होगा ।

6. कार्यभारित स्थापना में कार्यरत कर्मियों को नियमित करने हेतु सक्षम प्राधिकार संबंधित विभागीय प्रधान सचिव/सचिव होंगे। वे निम्नांकित प्रपत्र में आदेश निर्गत करेंगे :-

3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 अ.तूबर 2013
क्रमांक नाम पदनाम जन्म-तिथि कार्यभारित स्थापना में नियुक्ति की तिथि प्रमंडल का नाम प्रोजेक्ट का नाम जिसमें नियुक्त हुए नियुक्ति करने वाले पदाधिकारी का नाम एवं पदनाम अभ्युक्ति
1. 2. 3. 4. 5. 6. 7. 8. 9.

आदेश में भी वे कार्यभारित से नियमित स्थापना में आने वाले कर्मियों को दी जाने वाली अतिरिक्त सुविधाओं का उल्लेख करेंगे जो उपर्युक्त कंडिका-5 में अंकित है । नियमित स्थापना में संगत कोटि का पद उपलब्ध होने की स्थिति में वे तत्काल अधिसूचना निर्गत कर सकेंगे । जिन कोटि के नियमित पद उपलब्ध नहीं है, उनके पद सृजन का प्रस्ताव अवधि के साथ प्रशासी पदवर्ग समिति के समक्ष लाएँगे और सरकार का आदेश प्राप्त कर तब नियमित स्थापना में नियुक्ति संबंधी अधिसूचना निर्गत करेंगे ।

7. कार्यभारित कर्मचारियों को नियमित स्थापना में लेने पर उनके वेतन-भत्ते पर व्यय हेतु संधारण इकाई में उपबंधित राशि नियमित स्थापना के संबंधित बजट शीर्ष में हस्तानान्तरित कर दिए जाएंगे ।

8. दिनांक 11/12/1990 के बाद नियुक्त कार्यभारित कर्मियों की सेवा, नोटिश निर्गत कर, कि जिस परियोजना के लिए उनकी नियुक्ति हुई थी, उसके लिए अब उनकी सेवा की जरूरत नहीं है, समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी जिसके लिए सक्षम प्राधिकार संबंधित नियुक्ति प्राधिकार होंगे । जिन पदाधिकारियों ने उनकी नियुक्ति कार्यभारित स्थापना में की है, उन्हें चिन्हि्‌त कर सरकार के निदेशों का उल्लंघन कर नियुक्ति की कार्रवाई करने के लिए कारणपृच्छा निर्गत कर अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ की जायेगी । उपर्युक्त प्रारंभिक कार्रवाई तीन माहों के अंदर पूर्ण करने की जबावदेही विभागीय प्रधान सचिव/सचिव की होगी ।

9. यह संकल्प आदेश निर्गत करने की तिथि से प्रभावी होगा ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, प्रभात शंकर, सरकार के अपर सचिव ।

————— अधी0क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु7ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 814-571+1000-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

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