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असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 2 2 2 2 काित(cid:31)ककाित(cid:31)ककाित(cid:31)ककाित(cid:31)क 1111935935935935 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 822822822822) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, वृहःपवृहःपवृहःपवृहःपितवारितवारितवारितवार,,,, 24242424 अ+तूअ+तूअ+तूअ+तूबरबरबरबर 2013201320132013 सं0 07/विविध-38/2012—1730 नगर विकास एवं आवास विभागनगर विकास एवं आवास विभागनगर विकास एवं आवास विभागनगर विकास एवं आवास विभाग ------------------------ संकल्पसंकल्पसंकल्पसंकल्प 26 सितम्बर 201326 सितम्बर 201326 सितम्बर 201326 सितम्बर 2013
विषयःविषयःविषयःविषयः—पटना में भारत सपटना में भारत सपटना में भारत सपटना में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा 97 करोड़ अनुदान के साथ स्वीकृत रकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा रररर 10101010....97 करोड़ अनुदान के साथ स्वीकृत 97 करोड़ अनुदान के साथ स्वीकृत 97 करोड़ अनुदान के साथ स्वीकृत रकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा रकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा
के जन-निजी भागीदारी अंतर्गत निर्माण पर राज्य सरकार की स्वीकृति। आधुनिक वधशाला आधुनिक वधशाला आधुनिक वधशाला आधुनिक वधशाला (Abattoir)के जन-निजी भागीदारी अंतर्गत निर्माण पर राज्य सरकार की स्वीकृति। के जन-निजी भागीदारी अंतर्गत निर्माण पर राज्य सरकार की स्वीकृति। के जन-निजी भागीदारी अंतर्गत निर्माण पर राज्य सरकार की स्वीकृति। बिहार राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित रही है। मवेशी पालन, बकरी पालन तथा पोल्ट्री इस अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग रहे है। इस कारण राज्य में मवेशी, बकरों, भेड़ों और पोल्ट्री फार्म के मीट का बड़ा बाजार उपलब्ध है। लेकिन राज्य में मवेशियों के मीट प्रसंस्करण हेतु आधुनिक वधशाला (Abattoir) का पूर्णतः अभाव है। पटना जैसे बड़े शहरों में भी खुले में सड़कों पर मीट प्रसंस्करण व विक्रय का कार्य अवैज्ञानिक तरीके से किया जाता रहा है। इस अस्वास्थ्यकारी व्यवस्था में सुधार हेतु आधुनिक वधशाला की आवश्यकता है।
2. उपर्युक्त आवश्यकता के मद्देनजर भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की 'वधशाला के आधुनिकीकरण की योजना' के अंतर्गत पटना नगर निगम क्षेत्र के लिए वर्ष 2010 में रररर 26.38 करोड़ के जन-निजी भागीदारी आधारित विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डी॰पी॰आर॰) की स्वीकृति दी गई। इसमें भारत सरकार का अनुदान (ग्रांट) रररर 10.97 करोड़ ((((nl djksM+ lUrkuos yk[k :0 ek=½ उपलब्ध है। शेष राशि निजी भागीदार को लगानी है। इसमें राज्य सरकार का कोई ग्रांट उपलब्ध नहीं है। पटना नगर निगम द्वारा परियोजना में 5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 24 अ+तूबर 2013 4. परियोजना की सफलता की शर्तों को ध्यान में रखते हुए बुडको द्वारा जन-निजी भागीदारी आधारित बिड डॉक्यूमेंट व कंसेसन एग्रीमेंट तैयार किया गया है। इन दस्तावेजों में निम्नलिखित मुख्य प्रावधान है :- (क) निजी भागीदार स्वयं भूमि की व्यवस्था करेंगे और भूमि सहित पूरी परियोजना लागत में निवेश करेंगे। इसमें सरकार का निवेश उपलब्ध ग्रांट रू॰ 10.97 करोड़ के रूप में होगा। पटना नगर निगम परियोजना क्षेत्र में निजी भागीदार को आधुनिक वधशाला का कार्य करने हेतु लाइसेंस भी प्रदान करेगा।
(ख) परियोजना कंसेसन अवधि प्रथमतः 30 वर्ष के लिए होगी। (ग) परियोजना अवधि में निजी भागीदार द्वारा 'वार्षिक लाइसेंस प्रीमियम' (Annual Licence Premium) का भुगतान किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष इस प्रीमियम में 5 प्रतिशत की दर से वृद्धि की जाएगी।
(घ) जो बीडर सर्वाधिक वार्षिक लाइसेंस प्रीमियम की बोली लगाएगा उसे परियोजना अवार्ड किया जाएगा। (ङ) परियोजना समाप्ति पर सभी परिसम्पत्ति सरकार/नगर निगम को हैंड ओवर कर दी जाएगी। यदि सरकार चाहे तो लीज का पुनः नवीकरण भी शर्तों के अधीन कर सकेगी।
5. परियोजना की अन्य निम्नलिखित न्यूनतम तकनीकी विशेषताएं होंगी जिसे निजी भागीदार और बेहतर बना सकने को स्वतंत्र होगाः-
(क) परियोजना में दो स्लॉटर लाईन प्रस्तावित हैं- एक भैंस के लिए और एक बकरे के लिए। (ख) वधशाला में पशुचिकित्सक द्वारा परीक्षण की सुविधा, बीमार पशुओं के लिए अलग व्यवस्था, फ्रीजर, कोल्ड स्टोरेज, क्वालिटी कंट्रोल लेबोरेट्री, जलापूर्ति, ट्रीटमेंट प्लांट, सिवरेज- ड्रेनेज सिस्टम सहित जीरो-डिस्चार्ज सुनिश्चित की जाएगी।
(ग) प्रत्येक दिन 550 पशुओं के स्लॉटर हेतु 167 स्टाफ की न्युनतम आवश्यकता का आकलन किया गया है। (घ) डी॰पी॰आर॰ में प्रतिदिन 350 बकरे व 200 भैंस के प्रसंस्करण का अनुमान है। इसमें 75 प्रतिशत स्वयं का उत्पादन व 25 प्रतिशत स्थानीय कसाईयों को सेवा के रूप में उत्पादन शामिल है। स्वयं उत्पादन का निर्यात भी किया जा सकेगा।
(ङ) परियोजना वित्तीय रूप में सुदृढ़ (financially viable) है। परियोजना का रिटर्न (IRR) लगभग 25 प्रतिशत वार्षिक है जो वर्तमान बाजार दर पर काफी बेहतर है।
6. आधुनिक वधशाला निर्माण की इस परियोजना के कार्यान्वयन से न सिर्फ पटना में स्वास्थ्यकारी (Hygenic) मीट उत्पादों की सुलभता होगी व सड़क किनारे पशुवध में कमी आएगी बल्कि राज्य में निजी निवेश के माध्यम से निर्यातोन्मुखी मीट प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
उपर्युक्त तथ्यों व प्रावधानों के आलोक में तथा बिहार राज्य में मीट प्रसंस्करण की असीम संभावनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सम्यक विचारोपरान्त पटना में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा रररर 10.97 करोड़ ग्रांट के साथ स्वीकृत आधुनिक वधशाला (Abattoir) के जन-निजी भागीदारी अंतर्गत निर्माण पर राज्य सरकार की स्वीकृति प्रदान की गई। आदेशः-आदेशः-आदेशः-आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित किया जाय एवं इसकी प्रति सरकार के सभी विभागों/विभागाध्यक्षों/प्रमण्डलीय आयुक्तों/जिला पदाधिकारियों/नगर निकायों/ महालेखाकार, बिहार, पटना को सूचनार्थ भेजी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, डा0 एस0 सिद्धार्थ, सरकार के सचिव।
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अधी0क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु7ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 822-571+200-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in