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असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 8888 अमहायणअमहायणअमहायणअमहायण 1111935935935935 ((((शशशश0000)))) ((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 875875875875) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, शुबशुबशुबशुबवारवारवारवार,,,, 29292929 नव,बनव,बनव,बनव,बरररर 2013201320132013 सं0 पर्य0यो0(रा0)-33/2012—2835 i;ZVu foHkkx &&&&&&&& ladYi 20 vxLr 2013 विषयः-चिन्हित ग्रामों में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएँ प्रदान करने के निमित्त निजी क्षेत्र में संरचना निर्माण हेतु ग्रामीण पर्यटन विकास नीति, 2013। राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण ग्रामीण उद्योग यथा हस्तकला, मधुबनी चित्रकला, लाह से बनी वस्तुएँ, चूड़ी निर्माण, रेशम से निर्मित वस्त्र, सिक्की कार्य, कालीन निर्माण, शिल्पकला आदि को ध्यान में रखते हुए भी पर्यटक सर्किटों को विकसित किये जाने की नितान्त आवश्यकता है। इस उद्देश्य से संबंधित कला से जुड़े ग्रामों को चिन्हित् करते हुए शिल्पकार/कारीगरों के कार्यस्थल एवं वहाँ पर पर्यटकों के लिये मूलभूत सुविधाओं का विकास किया जाना एक उचित कदम होगा। इससे उक्त ग्राम पर्यटकों के परिदर्शन हेतु आकर्षण का केन्द्र बनेगा, जिससे देशी एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। यदि पर्यटक विशेषकर विदेशी पर्यटक इन कला से जुड़े ग्रामों के कारीगरों के साथ कुछ दिन व्यतीत करते हैं तो इससे न सिर्फ वहाँ के कारीगरों की आमदनी में वृद्धि होगी बल्कि उनके उत्पाद को विदेशों में भी ख्याति प्राप्त हो सकेगी एवं उनके उत्पाद की माँग एवं बिक्री विदेशों में भी सुनिश्चित की जा सकेगी। उपरोक्त कारणों से राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण पर्यटन के विकास की आवश्यकता के मद्देनजर चिन्हि्त ग्रामों के परिदर्शन हेतु कारीगरों के कार्यस्थल परिसर/आस-पास के उपयुक्त भूमि पर पर्यटकों के लिये मूलभूत सुविधाओं के विकास के निमित्त पूंजीगत अनुदान (Capital Subsidy) के तहत् संरचना निर्माण हेतु ग्रामीण पर्यटन विकास नीति, 2013 के निरूपित की जा रही है । इसके अवयव निम्न होंगे :-
2. यह योजना चिन्हि्त ग्रामों में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएँ प्रदान करने के निमित्त निजी क्षेत्र में संरचना निर्माण हेतु ग्रामीण पर्यटन विकास नीति, 2013 के नाम से जानी जायेगी। (cid:1) इस नीति का विस्तार पूरे बिहार राज्य क्षेत्र के अन्तर्गत होगा। (cid:1) इस नीति का उद्देश्य राज्य के शिल्पकारों, कामगारों से जुड़े ग्रामों में ग्रामीणों को अपने निवास स्थानों का उन्नयन करने हेतु उत्प्रेरित करना है, ताकि पर्यटक वहाँ आ कर ठहर सकें तथा उनकी कला के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें, जिससे उनके उत्पादों का प्रचार-प्रसार एवं विपणन हो सकें।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 29 नव,बर 2013 (cid:1) इस हेतु पर्यटन विभाग द्वारा उचित प्रक्रिया के माध्यम से चयनित ग्रामीणों को एक पूँजीगत अनुदान (Capital Subsidy) दिया जाएगा और इसके एवज में इन्हें एक निर्धारित मानक के अनुसार उक्त निवास स्थलों को संधारित करना होगा ।
(cid:1) इस नीति के कार्यान्वयन के लिए निम्न प्रक्रिया अपनाई जाएगी :-
(i) सर्वप्रथम राज्य के महत्वपूर्ण ग्रामीण उद्योग यथा हस्तकला, मधुबनी चित्रकला, लाह से बनी वस्तुएँ, चूड़ी निर्माण, रेशम से निर्मित वस्त्र, सिक्की कार्य, कालीन निर्माण, षिल्पकला आदि से जुड़े कारीगरों/शिल्पकारों आदि के ग्रामों को चिन्हि्त किया जायेगा ।
(ii) चिन्हि्त ग्रामों के परिदर्शन हेतु पर्यटकों के लिये मूलभूत सुविधाओं के विकास के निमित्त संरचना निर्माण हेतु षिल्पकारों/कारीगरों से विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से आवदेन की माँग की जायेगी। यह विज्ञप्ति पर्यटन विभाग द्वारा दी जायेगी, जिसमें उनसे यह अनुरोध किया जायेगा कि वे अपना आवेदन संबंधित जिला पदाधिकारियों के समक्ष समर्पित करेें।
(iii) यदि कोई संस्था/इकाई, जो पर्यटन विभाग द्वारा चिन्हि्त ग्राम में वहाँ के प्रसिद्ध एवं प्रचलित कला उद्योग से जुड़े हैं तथा जिनके पास इस योजना के अन्तर्गत विकास हेतु उपयुक्त भू-खण्ड है एवं वे उस भू-खण्ड पर पर्यटकों हेतु मूलभूत सुविधाओं का विकास करना चाहती है, तो वे भी इसके लिये संबंधित जिला पदाधिकारी के पास आवेदन दे सकते हैं।
(iv) प्राप्त आवेदनों की समीक्षा हेतु एक स्थायी समिति जिला पदाधिकारी के अधीन होगी, जिसका गठन पर्यटन विभाग द्वारा किया जाएगा ।
(v) संबंधित जिला की उक्त स्थायी समिति प्राप्त आवेदनों/प्रस्ताव के अहर्त्ता संबंधी सभी पहलुओं पर विचारोपरान्त सूचीबद्ध करते हुए अपनी अनुशंसा के साथ पर्यटन विभाग को समर्पित करेंगे। (vi) सूचीबद्ध करने के लिए निम्न तथ्यों को प्राथमिकता देते समय दृष्टिपथ में रखा जाएगा :-
(क) स्वामित्व वाले मकान/कार्यस्थल के वैसे इच्छुक कारीगर/षिल्पकार जो अपने मकान/कार्यस्थल को पर्यटकों हेतु आवासन के दृष्टिकोण से उन्नयन एवं विकसित करना चाहते हैं, को प्राथमिकता दी जायेगी।
(ख) वैसे शिल्पकार/कारीगर जो अपने मकान/कार्यस्थल को उन्नयन/विकसित नहीं कर सकते हैं, किन्तु उनके मकान/ कार्यस्थल के आस-पास उनके स्वामित्व की भूमि उपलब्ध हो, जो संरचना निर्माण हेतु उपयुक्त हो तो वे शिल्पकार/कारीगर भी इस योजनान्तर्गत अपना आवेदन संबंधित जिला पदाधिकारी को समर्पित कर सकते हैं।
(ग) इसके अतिरिक्त प्रस्तावित स्थल की उपयुक्तता, भूमि का रकवा एवं सम्पर्क पथ की उपलब्धता अतिरिक्त अर्हता मानी जायेगी।
(Vii) समिति की अनुशंसा के आधार पर आवेदकों का चयन करते हुए चयनित ग्रामों में संरचना विकास हेतु परियोजना प्रतिवेदन के निर्माण के लिये पर्यटन विभाग, बिहार के स्तर से वास्तुविदों की प्रतिनियुक्ति की जायेगी।
(Viii) प्रतिनियुक्त वास्तुविद् द्वारा निर्मित परियोजना प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित शिल्पकारों/कारीगरों/संस्था द्वारा अपने स्तर से अनुदान के अलावा राशि की व्यवस्था कर अथवा किसी वित्तीय एजेन्सी से ऋण प्राप्त कर परियोजना का कार्यान्वयन किया जायेगा।
(iX) परियोजना के कार्यान्वयन एवं संचालन के उपरान्त पर्यटन विभाग द्वारा परियोजना की कुल राशि का 50% अथवा चार लाख रूपये, जो भी कम हो, उसे पूंजीगत अनुदान ¼Capital Subsidy) के रूप में संबंधित शिल्पकारों/कारीगरों/संस्था को दिया जायेगा। उक्त राशि का 80% कार्य समापन होने पर एवं अवशेष 20% izR;sd o"kZ 5% dh दर से चार किस्तों में संंबंधित शिल्पकारों/कारीगरों/संस्था को सरकार द्वारा चयनित स्वतंत्र परामर्शी अथवा विभागीय पदाधिकारी का निरीक्षण प्रतिवेदन संतोषजनक पाये जाने के उपरान्त समान किस्तों में अनुदान स्वरूप उपलब्ध कराया जायेगा। 'अनुदान देने के पूर्व सभी लाभार्थियों से इस आशय का एकरारनामा करा लिया जायेगा कि यदि योजना के उद्देश्यों का अनुपालन नहीं किया गया तो सम्पूर्ण राशि नीलाम पत्र वाद के माध्यम से लाभार्थी से वसूल कर ली जायेगी। अनुदान देने की प्रक्रिया विभाग द्वारा निर्धारित की जायेगी, ताकि पर्यटकों को सुविधा देने के उद्देश्य की पूर्त्ति हो सके'।
(X) निर्मित संरचना में देय सुविधाओं/मापदण्डों के निरीक्षण हेतु विभाग द्वारा चयनित एक स्वतन्त्र परामर्शी एवं विभाग के पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की जायेगी। निरीक्षण हेतु कैलेण्डर का निर्माण किया जायेगा, जिसमें न्यूनतम 3 (तीन) महीनाें के अन्तराल पर निरीक्षण का कार्य अनिवार्य होगा। उक्त गठित समिति द्वारा परिसर की साफ-सफाई/गुणवत्ता/स्वच्छता आदि की जाँच की जायेगी।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 29 नव,बर 2013 (Xi) पर्यटन विभाग उपर्युक्त अनुसार चयनित एवं संधारित निवास स्थलों के लिए एक मानक का निर्धारण करेगा, जिसमें निम्न बातों पर विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा :-
(क) उक्त निवास स्थल में दी जाने वाली सुविधाएँ (ख) साफ-सफाई एवं स्वच्छता की व्यवस्था (ग) पेयजल की सुविधा (घ) विभाग द्वारा समय-समय पर निर्धारित अन्य बुनियादी सुविधायें।
गठित समिति के निरीक्षण के दौरान प्राप्त सुझावाें के अनुरूप प्रत्येक इकाई को कार्य करना होगा तथा सुझाव के अनुरूप कार्य नहीं करने पर अनुमान्य/देय अनुदान बन्द कर दिया जायेगा।
vkns'k%—आदेश दिया जाता है कि संकल्प की एक प्रति बिहार गजट के विशेष अंक, सुविख्यात पत्रिकाओं और समाचार-पत्रों में प्रकाशित की जाय और सरकार के सभी विभागों/विभागाध्यक्षों और अधीनस्थ पदाधिकारियों के बीच परिचालित की जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मिहिर कुमार सिंह, सरकार के सचिव।
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अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 875-571+500-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in