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सं0 22/नि0सि0(दर0)-16-02/2010/1435—श्री नवल किशोर, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, योजना एवं मोनेटरिंग अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा उक्त पदस्थापन अवधि में कोशी नहर प्रमण्डल, खुटौना के निविदा सं0-01/2009-10 के ग्रुप सं0-3 की निविदा में बरती गयी अनियमितता की जॅाच वाद संख्या सी0 डब्लू0 जे0 सी0-906/10 श्री बिन्देश्वर यादव कंस्ट्रशन प्रा0 लि0, ग्राम-हरिराहा जिला- मधुबनी बनाम बिहार सरकार में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में मंत्रिमंडल निगरानी (त0 प0 को0), पटना द्वारा की गयी निगरानी विभाग से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री नवल किशोर, सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता के विरूद्व निम्नांकित आरोप गठित कर विभागीय संकल्प सं0-344 दिनांक 23.3.11 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयीः-
''वाद संख्या सी0 डब्लू0 जे0 सी0-906/10 श्री बिन्देश्वर यादव कंस्ट्रशन प्रा0 लि0, ग्राम-हरिराहा जिला- मधुबनी बनाम बिहार सरकार में माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में कोशी नहर प्रमण्डल, खुटौना के निविदा सं0-01/2009-10 के ग्रुप सं0-3 की निविदा में बरती गयी अनियमितता की जॅाच मंत्रिमंडल निगरानी (त0 प0 को0), पटना द्वारा की गयी। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी जिसमें प्रथम दृष्टया नव निर्माण बिहार कंस्ट्रशन प्रा0 लि0, एकम्मा बसानया जिला मधुबनी के वित्तीय बीड से संबंधित लिफाफों में छेड़छाड़ के आरोप को प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाया गया है। जबकि पूर्व में विभाग में प्राप्त उक्त परिवाद में वर्णित 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2014 अभियन्ता (मो0) के द्वारा जॅाच कर प्रतिवेदन दिया गया। कार्यपालक अभियन्ता (मो0) के द्वारा दिये गये प्रतिवेदन के पश्चात पुनः 22.12.09 को आपके एवं मुख्य अभियन्ता, दरभंगा द्वारा समस्त अभिलेखों के साथ मामले की पुनः जॅाच की गयी एवं डुप्लीकेट लिफाफे में भी अंकित दर को सही पाये जाने से संबंधित प्रतिवेदन दिया गया जो परिवाद के मूल बिन्दु से हटकर है। कार्यपालक अभियन्ता (मो0) के द्वारा लिफाफे से संबंधित दिये गये जॅाच प्रतिवेदन की भी बिना गहन समीक्षा किये ही ''लिफाफा में हेराफेरी का कोई साक्ष्य नहीं मिला'' का मंतव्य संचिका के टिप्पणी भाग में अंकित किया गया। जो आपके कर्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता का द्योतक है। जिसके लिए आप दोषी पाये गये है।'' उक्त विभागीय कार्यवाही में विभागीय जॅाच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित पाया गया। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं जॅाच प्रतिवेदन से सहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 1235 दिनांक 01.11.12 द्वारा श्री नवल किशोर, सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री किशोर द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव समर्पित किया गया जिसके मुख्य विन्दु निम्नवत् हैः-
1. विभागीय पत्रांक 344 दिनांक 23.3.11 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के अन्तर्गत कार्यवाही चलाये जाने के संकल्प में संलग्न आरोप पत्र में सरकार को किसी भी तरह के वित्तीय धाटे/क्षति पहुॅचाने अथवा वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं बनाया गया है। इनके विरूद्व प्रतिवेदित आरोप मात्र प्रशासनिक प्रकृति के है जिसके लिए सेवानिवृति के उपरान्त पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत कार्यवाही अपेक्षित नहीं है। 2. निविदा दस्तावेज से छेड़छाड़ के मामले की जॅाच हेतु श्री पे्रम प्रकाश सिंह, कार्यपालक अभियन्ता (मो0) जो मुख्य अभियन्ता, दरभंगा परिक्षेत्र के प्रभारी अनुश्रवण कार्यपालक अभियन्ता थे, को निदेशित किया गया जिसके अनुपालन में जॅाचोपरान्त जॅाच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। जॅाच प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि निविदा निष्पादन के क्रम में परिवादी द्वारा कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गयी।
3. उक्त जॅाच प्रतिवेदन एवं कार्यपालक अभियन्ता के पस्ताव के आलोक में इनके द्वारा अग्रसारण के उपरान्त अभियन्ता प्रमुख (उत्तर) द्वारा दिये गये टिप्पणी के आलोक में प्रधान सचिव महोदय का अनुमोदन प्राप्त हुआ। 4. प्राप्त निदेश के अनुपालन में विभागीय पत्रांक 1912 दिनांक 22.12.09 द्वारा मुख्य अभियन्ता, दरभंगा के अधीक्षण अभियन्ता (मो0) की उपस्थिति में उनके कार्यालय कक्ष में वित्तीय बिड का डुप्लीकेट लिफाफा खोल जॅाचकर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने हेतु निदेशित किया गया। तदोपरान्त मुख्य अभियन्ता द्वारा पस्तुत जॅाच प्रतिवेदन पर उपस्थित रहने के कारण इनके द्वारा हस्ताक्षर कर दिया गया।
5. इनके द्वारा गहन समीक्षा किये बगैर ही ''लिफाफा में हेराफेरी का कोई साक्ष्य नहीं मिला'' का मंतव्य अंकित किया गया है जो पूर्णतः बेबुनियाद एवं गलत है। आरोप लगाते वक्त किसी भी पदाधिकारी के टिप्पणी की पूरी पंक्ति को संज्ञान में नहीं लेने के कारण स्पष्टतः मंत्रिमंडल निगरीनी के जॅाच पदाधिकारी द्वारा भीषण भूल की गयी है। प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त पाया गया कि विभागीय कार्यवाही के संचालन के उपरान्त जॅाच पदाधिकारी द्वारा अंकित किया गया है कि आरोपित पदाधिकारी द्वारा जॅाच प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर करने के पूर्व अपेक्षित गहन समीक्षा नहीं की गयी। फलस्वरूप मामला विवादास्पद हुआ। अतः जॅाच पदाधिकारी द्वारा आरोपित अभियन्ता के विरूद्व कर्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता का आरोप प्रमाणित पाया गया। चूॅकि मामला निविदा दस्तावेज के वित्तीय बिड से छेड़छेड़ से संबंधित है, अतः ऐसे गंभीर मामले में श्री नवल किशोर, सेवानिवृत अधीक्षण अभियन्ता से अपेक्षा की जाती थी कि वे मामले की गहन जॅाच के उपरान्त ही अपने 3
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पृच्छा के क्रम में इनके द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे इनके विरूद्व सम्पुष्ट आरोप को प्रमाणित नहीं माना जाय।
उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में श्री किशोर द्वारा प्रस्तुत द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव को अस्वीकृत करते हुए उनके विरूद्व जॅाच पदाधिकारी के द्वारा प्रस्तुत जॅाच प्रतिवेदन की गहन समीक्षा नहीं करके कर्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के आरोपों को प्रमाणित पाया गया है।
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री नवल किशोर, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, योजना एवं मोनेटरिंग अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड संसूचित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया हैः-
1. तीन प्रतिशत (03 प्रतिशत) पेंशन पर 01(एक) वर्ष के लिए रोक।
सरकार द्वारा लिए गये निर्णय के आलोक में उक्त दण्ड श्री नवल किशोर, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, योजना एवं मोनेटरिंग अंचल-2, जल संसाधन विभाग, पटना सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
नागेश्वर प्रसाद,
सरकार के अवर सचिव।
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अधी+क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 14-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in