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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 02 January 2014

Published 02 January 2014

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-01-02.20
Languages
English, Hindi

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सं0 22/नि0सि0(यॅा0)-132/94/1513—श्री श्रीनेत राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत, यॅात्रिक प्रमण्डल, मोहम्मदगंज नया नाम औरंगा निर्माण यांत्रिक प्रमण्डल, पांकी के पदस्थापन अवधि माह अगस्त 1988 से दिसम्बर 89 के बीच की गई अनियमितताओं के लिए उनके सेवाकाल में ही विभागीय संकल्प सं0-1620 दिनांक 28.

7.90 द्वारा विभागीय कार्यवाही चलाई गई, जो उनकी सेवानिवृति तक पुरी नहीं हो सकी। विभागीय कार्यवाही में इन्हें दोषी पाया गया। सरकार द्वारा सम्यक समीक्षोपरान्त श्री राय पर निम्न आरोप प्रमाणित पाये गयेः-

1. 17.52 लाख रूपये (सतरह लाख बाबन हजार) का क्रय श्री राय, कार्यपालक अभियन्ता द्वारा बिना बजट, बिना आवंटन, बिना सक्षम पदाधिकारी की स्वीकृति एवं बिना आवश्यकता के किया गया।

2. 196 अद्‌द सामग्रियों का डी0 जी0 एस0 डी0 से क्रय उनके द्वारा बिना आवश्यकता के किया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 538 दिनांक 15.2.97 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गई तथा उनसे प्राप्त उत्तर की पुर्नसमीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त उपर्युक्त आरोपों के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 बी0 के अन्तर्गत श्री राय को विभागीय आदेश सं0-771 दिनांक 26.8.97 सह पठित ज्ञापांक 2577 दिनांक 26.8.97 द्वारा निम्नांकित दण्ड संसूचित किया गयाः-

''पूर्ण पेंशन पर सदा के लिए रोक''।

उक्त प्रमण्डल के ही यांत्रिक अवर प्रमण्डल सं0-1 मोहम्मदगंज (पलामू) के अधीन अस्थायी अग्रिम की राशि का लेखा संधारित नहीं रहने पर मौन रहने, वित्तीय अनियमितता की जानबूझ कर अनदेखी करने एवं लापरवाही बरतने 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2014 के लिए विभागीय ज्ञापांक 1792 दिनांक 25.8.95 द्वारा ''चेतावनी की सजा'' जिसकी प्रवृष्टि चारित्री वर्ष 1989-90 में दर्ज की जायेगी का अधिसूचना भी निर्गत किया गया।

उक्त दोनों दण्डादेशों के विरूद्व श्री राय द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में याचिका सं.- सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-10101/97 दायर किया गया। दिनांक 17.8.10 को पारित न्यायादेश में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त दोनों दण्डादेशों को रद्व करते हुए मामले को अनुशासनिक प्राधिकार को रीमांड करते हुए यह स्वतंत्रता दी कि विभागीय कार्यवाही में पाये गये तथ्यों से संबंधित संचालन पदाधिकारी के जॅाच प्रतिवेदन से असहमति के विन्दु पर साक्ष्य के साथ याचिकाकत्र्ता को कारण पृच्छा/ सूचना निर्गत की जाय तथा अगर आवेदक द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं हो तो द्वितीय कारण पृच्छा करते हुए निर्णय लिया जाय।

माननीय उच्च न्यायालय के उक्त न्याय निर्णय के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0-1929 दिनांक 22.12. 10 द्वारा उपर्युक्त दोनों दण्डादेशों को इस शत्र्त के साथ निरस्त किया गया कि ''उक्त मामले में श्री राय से असहमति के विन्दु पर की गई कारण पृच्छा की समीक्षा के फलाफल से उक्त विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 1929 दिनांक 22.12. 10 प्रमाणित होगा''।

उक्त के आलोक में श्री राय के विरूद्व आरोपों से संबंधित जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर असहमति के निम्नांकित चार विन्दुओं पर स्पष्टीकरण पूछा गयाः-

1. बिहार सरकार वित्त विभाग के पत्रांक 7154 दिनांक 25.10.84 एवं D G S D Parliament Street New Delhi के पत्रांक 12738 दिनांक 2.6.89 के द्वारा आपको D G S D के तहत D D O घोषित नहीं किया गया था, फिर भी आपके द्वारा D G S D दर संविदा पर आदेश दिये गये जिस हेतु उच्चाधिकारियों की अनुमति भी आपको प्राप्त नहीं थी।

2. सक्षम प्राधिकार के स्तर से विभिन्न मशीनों की मरम्मति के मद में कराये जाने वाले कार्य के रख रखाव का एक मुश्त प्राक्कलन रू0 37,89600/- मात्र का स्वीकृत था, जिसके आधार पर मशीनों के वास्तविक रूप से चलने एवं मरम्मति के विरूद्व वास्तविक रूप से भुगतान किया जाना था। आपके द्वारा वास्तविकता के आधार पर किये गये भुगतान से संबंधित कोई भी साक्ष्य द्वितीय कारण पृच्छा के उत्तर में समर्पित नही किया गया। साथ ही प्राक्कलन की स्वीकृति वास्तविक रूप से कार्य प्रारम्भ के पूर्व का था जो पुरे वर्ष के लिए अनुमानित व्यय पर आधारित था। अतः उक्त प्राक्कलन को कार्यकारी प्राक्कलन नहीं माना जा सकता।

3. मोहम्मदगंज यांत्रिक प्रमण्डल के भंडार में करोड़ों रूपये का स्पेयर पार्ट्‌स पहले से पड़े रहने के बावजूद आपके द्वारा लाखों रूपये का क्रयादेश निर्गत किया गया जबकि पूर्व की सामग्रीयों का उपयोग नहीं हो पा रहा था। आपकी यह कार्रवाई बिहार लोक निर्माण संहिता में निहित प्रावधानों के प्रतिकूल है। अधीनस्थ अभियन्ताओं के स्तर से प्रस्तुत व्यादेश की जॅाच कर ही आपके द्वारा क्रयादेश निर्गत किया जाना चाहिए था।

4. अक्टूबर 1988 से दिसम्बर 89 के बीच आपके द्वारा निर्गत क्रयादेश के लिए आप सक्षम प्राधिकार नहीं थे एवं इस हेतु आपने अपने उच्चाधिकारियों को अंधकार में रखा एवं उनके आदेशों की अवहेलना की गई।

श्री राय से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा की गई। फलस्वरूप पाया गया कि असहमति के बिन्दु 02 एवं 03 में उल्लिखित आरोपों को प्रमाणित पाया गया तथा असहमति के विन्दु 01 एवं 04 में उल्लिखित आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया गया। 3

(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2014

प्रमाणित आरोपों के लिए पारित न्याय निर्णय के अनुपालन में श्री राय से द्वितीय कारण पृच्छा विभागीय पत्रांक 153 दिनांक 5.2.13 द्वारा की गई। द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव श्री राय द्वारा विभाग को समर्पित किया गया जिसकी समीक्षा के क्रम में पाया गया किः-

vlgefr ds foUnq la0&2- विभिन्न मशीनों के रख रखाव हेतु कार्यकारी प्राक्कलन तैयार नहीं करने से संबंधित है। समीक्षोपरान्त पाया गया कि इनके द्वारा वित्तीय वर्ष प्रारम्म होने के उपरान्त अनुमानित व्यय पर आधारित स्वीकृत प्राक्कलन के विरूद्व मशीनों के रख रखाव आदि मद में भुगतान किया गया तथा वास्तविकता पर आधारित प्राक्कलन तैयार करने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

vlgefr ds foUnq la0&3- मोहम्मदगंज यांत्रिक प्रमण्डल के भंडार में करोड़ों रूपये का स्पेयर पाट्‌र्स पूर्व से ही उपलब्ध रहने के बावजूद लाखो रूपये का क्रयादेश निर्गत करने से संबंधित है। अधीनस्थ अभियन्ताओं के स्तर से प्रस्तुत व्यादेश की बिना जॅाच किये ही इनके द्वारा क्रयादेश निर्गत किया गया जिसे बिहार लोक निर्माण संहिता के पत्रांक 3557 दिनांक 11.10.80 एवं पत्रांक 975 दिनांक 21.2.83 में निहित प्रावधानों के प्रतिकूल माना गया। उक्त असहमति के विन्दु पर श्री राय द्वारा कोई नया तथ्य अथवा आधार पर प्रस्तुत नहीं किये जाने के फलस्वरूप आरोपों को प्रमाणित पाया गया। अतः प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राय को निम्न दण्ड देने का निर्णय सक्षम प्राधिकार द्वारा लिया गयाः-

''पेंशन पर 50 (पचास) प्रतिशत की कटौती सदा के लिए''।

इसमें बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति प्राप्त है।

तदनुसार उक्त निर्णय के आलोक में श्री श्रीनेत राय, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है।

''पेंशन पर 50 (पचास) प्रतिशत की कटौती सदा के लिए''।

उक्त आदेश श्री राय को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

गजानन मिश्र,

विशेष कार्य पदाधिकारी।

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अधी+क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 20-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 02 January 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-01-02.20/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-01-02.20.