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सं0 22/नि0सि0(विविध)-21-38/2013/1292—श्री अर्जुन प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर प्रमण्डल, करगहर द्वारा बरती गई अनियमितताओं यथा सोन बराज से निसृत पश्चिमी मुख्य नहर के 32.60 कि0मी0 पर एवं पश्चिमी मुख्य नहर से निसृत गारा चौबे शाखा नहर के 1.60 कि0मी0, 4.0 कि0मी0 तथा 11.20 कि0मी0 पर दिनांक 24.5.06 को उक्त चार बिन्दुओं के टूटान की जॅाच तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा अंचल, पटना से कराई गई। स्थलीय जॅाच में जॅाच पदाधिकारी द्वारा नहरों में टूटान का मुख्य कारण जरूरत से ज्यादा जलश्राव नीचे की ओर प्रवाहित होकर जाना तथा उक्त नहर प्रणाली के गेटों के संचालन व्यवस्था में गड़बड़ी होना पाया गया। उक्त जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त प्राप्त निष्कर्ष के आलोक में प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपेां के लिए इनसे विभागीय पत्रांक 412 दिनांक 26.4.07 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत स्पष्टीकरण पूछा गया।
श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त श्री प्रसाद के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 19 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 558 दिनांक 24.6.09 द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।
श्री अर्जुन प्रसाद, सहायक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण के आलोक में उक्त मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त अकोढ़ीगोला फॅाल स्थल पर ससमय आरा ब्रांच केनाल का गेट खुलने की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करने, 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2014 जयनगर फॅाल स्थल पर दिनांक 23.5.06 एवं 24.5.06 को मिल रहे पानी के अनुपात में ससमय चौसा शाखा नहर एवं बक्सर शाखा नहर के गेट को खोलकर समानुपातिक पानी नहीं देने, पश्चिमी मुख्य नहर के 20.00 कि0मी0 से 30.00 कि0मी0 के बीच बरॅाव माइनर को 23.5.06 एवं 24.5.06 को बन्द रखने, गारा चौबे केनाल के अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम में पश्चिमी मुख्य नहर से निकलने वाली वितरणियों को 23.5.06 को बन्द रखने, गारा चौबे केनाल एवं अन्य स्थलों पर टूट एवं टूट की संरचना ससमय उपलब्ध नहीं कराने के लिए अांशिक रूप से दोषी पाते हुए विभागीय अधिसूचना सं0 1421 दिनांक 24.12.12 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गयाः-
1. ''निन्दन'' वर्ष 2006-07
2. असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि पर रोक।
उक्त संसूचित दण्डादेशों के विरूद्व श्री अर्जुन प्रसाद, सहायक अभियन्ता द्वारा पत्रांक 07 दिनांक 2.2.13 से अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। जिसे पुनर्विचार अभ्यावेदन मानते हुए विचार किया गया।
श्री प्रसाद द्वारा अपने अपील अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्नांकित तथ्य दिया गयाः-
1. श्री प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता का कार्य क्षेत्र पश्चिमी मुख्य नहर के 20.00 कि0मी0 से 34 कि0मी0 गारा चौबे शाखा नहर का 0.00 कि0मी0 से 12.5 कि0मी0 रसूलपुर लघु नहर बलथरी लघु नहर एवं खुरमाबाद लघु नहर था जिसका जलश्राव क्रमशः 1709, 1420, 33 एवं 65 घन सेक है।
2. मुख्य अभियन्ता, डिहरी के पत्रांक 1498 दिनांक 18.5.11 के आदेशानुसार पटबन अवधि में सभी नहरो के फॅाल एवं गेटो का नियंत्रण एवं संचालन कार्यपालक अभियन्ता, आयोजन एवं मोनेटरिंग प्रमण्डल, डिहरी द्वारा किया जाता है।
3. अधीक्षण अभियन्ता एवं कार्यपालक अभियन्ता द्वारा दिए गए अधियाचना के आधार पर सिंचाई नियंत्रण कक्ष के प्रभारी कार्यपालक अभियन्ता द्वारा उपलब्ध जल का बॅटवारा विभिन्न नहर प्रणालियों में किया जाता है।
4. खरीफ पटवन अवधि (मई के अन्तिम सप्ताह) में नहरों में काफी कम मात्रा में जलश्राव प्रवाहित किया जाता है क्योंकि जून के प्रथम सप्ताह में धान का विचरा ही डाला जाता है।
5. गारा चौबे नहर में दिनांक 21.5.06 को सुबह 6.00 बजे 180 घनसेक जलश्राव प्रवाहित हो रहा था जो निर्धारित क्षमता 1420 घनसेक का मात्र 12 प्रतिशत, दिनांक 22.5.06 को 300 घनसेक, दिनांक 23.5.06 को 228 घनसेक जो क्रमशः 21 एवं 16 प्रतिशत के आस पास था।
6. दिनांक 24.5.06 की सुबह लगभग 6.30 बजे गारा चौबे के शीर्ष के गेज रीडर एवं कनीय अभियन्ता द्वारा मोबाईल पर सूचना दी गई कि नहर में पानी बहुत अधिक बढ़ा हुआ है और बढ़ने का सिलसिला जारी है। श्री प्रसाद द्वारा गारा चौबे शीर्ष गेट का ओपनिंग बढ़ाने का निदेश दिया गया एवं लगभग 8.00 बजे स्वयं भी स्थल पर पहुॅच गए। उस समय तक कनीय अभियन्ता भी पहुॅच चुके थें। पानी की अप्रत्याशित वृद्वि को देखते हुए पश्चिमी मुख्य नहर में पड़ने वाले सभी आउटलेटों एवं अपने अधीनस्थ नहरों के गेटों को खुलवाना शुरू किए लेकिन पानी कम नहीं हो रहा था। इस संबंध में मुख्यालय सहायक अभियन्ता को मोबाईल से स्थिति की जानकारी दिए एवं पानी कम करने हेतु अनुरोध किए लेकिन 2.00 बजे के आस पास तक पानी कम नहीं हुआ। उक्त स्थिति में पश्चिमी मुख्य नहर का दोनों बॅाध ओभर टॅापिंग करने लगा एवं 32.6 पर बायॅा बॅाध तथा गारा चौबे नहर तीन स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया। जिसकी सूचना श्री महेन्द्र राम, सहायक अभियन्ता (मुख्यालय) को दी गई।
7. जलश्राव का प्रवाह इन्द्रपुरी बराज से विभिन्न नहरो से होते हुए पश्चिमी मुख्य नहर के 30.5 कि0मी0 पर चितौली शीर्ष से निसृत गारा चौबे शाखा नहर में होता है। पश्यिचमी मुख्य नहर 34.5 कि0मी0 पर अन्तिम छोर के पास गया मुगलसराय गै्रण्ड कॅाड रेलवे लाईन के नीचे निर्मित भेन्ट से होकर बेढ़ाडाक में मिलता है। 3
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2014
8. दिनांक 25.5.06 से 26.5.06 तक सभी क्षतिग्रस्त भागों को मौसमी मजदूरों एवं नहर मेठों के सहयोग से मरम्मत करा दिया गया एवं जलश्रात पुनः पूर्णरूपेण प्रवाहित होने लगा। साक्ष्य के रूप में अधीक्षण अभियन्ता, जल पथ अंचल, भभुआ का पत्रांक 967 दिनांक 22.6.06 का उल्लेख किया गया है।
9. विभागीय पत्रांक 558 दिनांक 24.6.09 द्वारा आरोप गठित कर स्पष्टीकरण पूछा गया था उसके संबंध में पूर्व दिए गए जबाव का उल्लेख किया गया है।
अन्त में पुनर्विचार करते हुए दण्ड से मुक्त करने का अनुरोध किया गया है।
श्री अर्जुन प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर प्रमण्डल, करगहर द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन में वर्णित तथ्यों की समीक्षा की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि श्री प्रसाद द्वारा पुनर्विचार अभ्यावेदन में विभाग द्वारा गठित आरोपों से संबंधित स्पष्टीकरण का उल्लेख करते हुए अधीक्षण अभियन्ता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा अंचल, पटना के जॅाच प्रतिवेदन की भी प्रति संलग्न की गई है। मामला का मुख्य विन्दु दिनांक 24.5.06 को जलश्राव बढ़ने के कारण नहर के टूटने से संबंधित है। अभिलेखों के अवलोकन से विदित होता है कि दिनांक 21.5.06 से नहर में पानी छोड़ा जा रहा था। दिनांक 23.5.06 की सुबह 6.00 बजे से संध्या 6.00 बजे के बीच 5.80 फीट गेज स्तर पर 228 घनसेक जलश्राव प्रवाहित हो रहा था परन्तु दिनांक 24.5.06 की सुबह 6.00 बजे गेज स्तर 13.50 फीट जलश्राव 759 धनसेक प्रवाहित हो रहा था। नहर में जलश्राव बढ़ने की सूचना गेज रीडर द्वारा सहायक अभियन्ता को 24.5.06 को सुबह में प्राप्त हुआ। जलश्राव बढ़ने की सूचना के बाद श्री प्रसाद द्वारा अपने क्षेत्राधीन नहरों को खुलवाकर पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया जबकि श्री प्रसाद को नहर में दिनांक 21.5.06 से जलश्राव प्रवाहित होने की स्थिति में गारा चौबे नहर एवं क्षेत्राधीन मुख्य नहर के आउटलेट को दिनांक 24.5.06 के पूर्व ही खोलवा देना चाहिए था ताकि जलश्राव बढ़ने की स्थिति में भी जलश्राव नियंत्रित रहे जो श्री प्रसाद द्वारा नहीं किया गया। उक्त स्थिति में ही आरोप को अांशिक प्रमाणित पाए जाने के फलस्वरूप लधु शास्ति के अन्तर्गत अधिरोपित होने वाले दण्ड ''(1) निन्दन एवं (2) एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक'' का दण्ड संसूचित किया गया है।
श्री प्रसाद, सहायक अभियन्ता द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है जो विचारणीय बिन्दु के अधीन आते हो।
वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री अर्जुन प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, सोन नहर अवर प्रमण्डल, करगहर के अपील अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
श्याम कुमार सिंह,
सरकार के विशेष सचिव।
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अधी+क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 5-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in