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असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:26)ारा ूकािशत 12121212 पौषपौषपौषपौष 1111935935935935 ((((शशशश0000))))
((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 6666) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, वृहःपवृहःपवृहःपवृहःपितितितितवारवारवारवार,,,, 2222 जनवर(cid:15)जनवर(cid:15)जनवर(cid:15)जनवर(cid:15) 2014201420142014 जल संसाधन विभाग -------- vf/klwpuk 22 vDrwcj 2013 सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-01/2009/1297—श्री विजय कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता,गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, दीधा, पटना सम्प्रति सेवा से बर्खास्त द्वारा विभागीय दण्डादेश अधिसूचना ज्ञापांक 756 दिनांक 01.7.13 के विरूद्व समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिनांक 01.8.13 के आलोक में मामले की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः- श्री विजय कुमार सिन्हा, (आई0डी0-2271) तत्कालीन सहायक अभियन्ता,गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, दीधा, पटना (प्रतिनियुक्त कुसहा तटबंध) सम्प्रति सहायक अभियन्ता, तिरहुत नहर अवर प्रमण्डल, हाजीपुर जब प्रतिनियुक्ति स्थान से दिनांक 20.2.09 को कार्यपालक अभियन्ता श्री कामेश्वर नाथ सिह के साथ बोलेरो गाड़ी से पटना आ रहे थे तब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना के गठित जॅाचदल द्वारा नन्दलाल छपरा, बाईपास रोड, पटना के पास आरोपी श्री विजय कुमार सिन्हा एवं श्री कामेश्वर नाथ सिंह की तलाशी ली गयी। उसी क्रम में श्री सिन्हा द्वारा काले रंग का बैग अपना बताते हुए निगरानी दस्ता को सुपुर्द किया गया जिसमें 3,12,632 (तीन लाख बारह हजार छः सौ बतीस) रू0 पाये गये। निगरानी दस्ता द्वारा उन्हें तत्काल हिरासत में ले लिया गया एवं निगरानी थाना कांड सं0-15/09 दिनांक 20.2.09 दर्ज किया गया। श्री सिन्हा को उक्त राशि के साथ गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना सं0-115 दिनांक 4.3.09 द्वारा दिनांक 20.2.09 के प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प ज्ञापांक 342 दिनांक 24.4.09 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की ंगयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया कि ''श्री सिन्हा की निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा गठित जॅाच दल की तलाशी के दौरान पाये गये 3,12,632 रू0 की अवैध राशि के साथ दिनांक 20.2.09 केा पकड़े जाने का आरोप विभागीय स्तर पर सामान्य परिस्थिति में वर्तमान में प्रमाणित नहीं माना जा सकता है। मामले की प्राथमिकी माननीय विशेष न्यायाधीश निगरानी, पटना के न्यायालय में दर्ज है। अंतिम रूप से माननीय न्यायालय द्वारा निर्गत आदेश के आधार पर ही आरोप की सत्यता/असत्यता प्रमाणित होगी''। इस प्रतिवेदन को अंतरिम प्रतिवेदन मानते हुए संचालन पदाधिकारी से अंतिम निष्कर्ष की मांग की गई। उक्त के आलोक में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में प्रतिवेदित किया गया कि श्री विजय कुमार सिन्हा पर विभागीय दृष्टिकोण से अवैध राशि रू0 3,12,632 हासिल करने का आरोप प्रमाणित नहीं है। 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2014 संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर श्री सिन्हा द्वारा निलंबन समाप्त करने हेतु माननीय उच्च न्यायालय में सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-17941/10 दायर किया गया। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिन्हा के विरूद्व विभागीय दृष्टिकोण से अवैध राशि रू0 3,12,632 हासिल करने का आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया जबकि पुलिस अधीक्षक सह अनुसंधानकत्र्ता निगरानी अन्वेषण व्यूरो, पटना के पत्रांक 126 दिनांक 30.3.09 द्वारा पे्रषित अनुसंधान प्रतिवेदन में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर श्री सिन्हा द्वारा नाजायज एवं भ्रष्ट तरीके से भारी राशि अर्जित करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। श्री सिन्हा के पटना स्थित आवास से रू0 2,82,500 नगद मिलने तथा बैंकों के पासबुक में अंकित राशि का केाई वैधानिक लेखा प्रस्तुत नहीं करने का उल्लेख किया गया। उक्त पत्र के आधार पर ही श्री सिन्हा के विरूद्व अभियोजन की स्वीकृति सक्षम पदाधिकारी से प्राप्त है। पुलिस अधीक्षक सह अनुसंधानकत्र्ता, निगरानी अन्वेषण व्यूरो, पटना से प्राप्त पत्रांक 126 दिनांक 30.3.09 को साक्ष्य के रूप में संलग्न करते हुए संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन से असहमति के निम्नांकित बिन्दुओं पर विभागीय पत्रांक 562 दिनांक 17.5.11 द्वारा सिन्हा से कारण पृच्छा की गयीः- श्री सिन्हा द्वारा दिनांक 20.2.09 को निगरानी दस्ता को जो काले रंग का वैग अपना बताते हुए सुपुर्द किया उसमें रू0 3,12,632 पाये गये। अनुसंधान के क्रम में यह बात प्रकाश में आयी है कि श्री सिन्हा के पास जो रू0 500 की चार गडि्डया मिली थी उस पर सेन्ट्रल बैंक अॅाफ इंडिया बिड़ला मंदिर रोड का स्टीकर लगा हुआ है जिस पर पदाधिकारी का हस्ताक्षर दिसम्बर 2008 का था। अनुसंधान के क्रम में यह भी प्रकाश में आयी है कि खजांची रोड सेन्ट्रल बैंक अॅाफ इंडिया, पटना में करेंसी चेस्ट नहीं है। और अधिक राशि जमा होने पर कदमकुआ स्थित अपने करेंसी चेस्ट भेज दिया जाता है। और उनकी जानकारी में वहॅा से राशि वीरपुर शाखा को भी भेजी जाती है। अनुसंधान के क्रम में कदमकुॅआ स्थित सेन्ट्रल बैंक अॅाफ इंडिया के शाखा में सत्यापन किया गया और ज्ञात हुआ कि वे लोग जो राशि बिडला मंदिर शाखा या अन्य शाखा से प्राप्त करते है उसे मांग के अनुरूप विभिन्न शाखाओं में भेजा जाता है। यह भी ज्ञात हुआ कि दिनांक 27.1.09 को भारी राशि वीरपुर सेन्ट्रल बैंक की शाखा में भेजा गया था। वीरपुर में सेन्ट्रल बैंक अॅाफ इंडिया ट्रेजरी शाखा है और भारतीय स्टेट बैंक वीरपुर उसी शाखा से रूपया मांग के अनुसार प्राप्त करती है। पश्चिमी नहर प्रमण्डल, खुटौना द्वारा कुसहा तटबंध में कराये गये कार्य के संबंध में दिनांक 13.1.09 तथा 16. 2.09 को क्रमशः 2,09,618 रू0 तथा 89,53,779 रू0 का विपत्र जमा हुआ जो अग्रिम तथा अन्य राशि की कटौती के बाद विपत्र कार्यपालक अभियन्ता श्री कामेश्वर नाथ सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया था। मापीपुस्त पर कार्यपालक अभियन्ता, श्री कामेश्वर नाथ सिंह तथा सहायक अभियन्ता श्री विजय कुमार सिन्हा का हस्ताक्षर है। वर्णित स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि श्री सिन्हा से जो 3,12,632 रू0 निगरानी जॅाच दल को प्राप्त हुआ था वह उनके द्वारा भ्रष्ट तरीके से प्राप्त की गयी राशि थी, जिसे ठिकाना लगाने वे पटना आ रहे थे। उक्त असहमति के विन्दु पर विभागीय पत्रांक 562 दिनांक 17.5.11 द्वारा श्री सिन्हा से कारण पृच्छा की गयी थी। इस बीच माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सी0 डब्लू0 जे0 सी0 सं0-17941/10 में दिनांक 29.4.11 को न्याय निर्णय पारित करते हुए श्री सिन्हा के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया गया। उक्त न्यायादेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना सं0 666 दिनांक 9.6.11 द्वारा श्री सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त करते हुए निम्न निर्णय लिया गयाः- 1. श्री सिन्हा के हिरासत अवधि के संबंध में निगरानी थाना कांड सं0-15/09 दिनांक 20.2.09 में पारित होने वाले फैसले के आलोक में निर्णय लिया जायेगा। 2. निलंबन अवधि के संबंध में निर्णय विभागीय कार्यवाही के फलाफल पर निर्भर करेगा। श्री सिन्हा से असहमति के विन्दु पर किये गये कारण पृच्छा का जबाव में मुख्य रूप से निम्न तथ्यों को प्रस्तुत किया गयाः- 1. दिनांक 20.2.09 को कार्यपालक अभियन्ता पटना आ रहे थे। मुझे भी अतिआवश्यक निजी कार्यवश पटना आना था इसलिये उनकी अनुमति से ही उनकी गाड़ी में बैठ गया। तलाशी के दौरान दो बैग में कुल 11,32,632 रू0 बरामद हुआ। तलाशी के दौरान पाया गया रूपया एवं वैग मेरा नहीं था और न इसकी मुझे जानकारी थी। 2. असहमति का विन्दु निगरानी पुलिस के जॅाच प्रतिवेदन पर आधारित है तथा विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी को मेरे द्वारा दिये गये साक्ष्य एवं प्रतिवेदन से भिन्न है। 3. गाड़ी में पाये गये नोट के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है क्योंकि गाड़ी में पाया गया राशि मेरा नहीं है। 4. निगरानी व्यूरो की जब्त सूची में यह उल्लेख है कि निगरानी विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि कार्यपालक अभियन्ता श्री कामेश्वर नाथ सिंह भारी राशि लेकर पटना आ रहे थे। उस सूचना में मेरा नाम नहीं था। 5. गाड़ी में पाये गये 3,12,632 रू0 से मेरा केाई संबंध नहीं है। अतएव आरोप तथ्यहीन एवं भ्रामक है। 3
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6. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी ने आरोपों को अप्रमाणित पाया है। फिर भी विभाग द्वारा पूर्णतः निगरानी पुलिस के जॅाच के आधार पर असहमति के विन्दु पर कारण पृच्छा की गयी है जो पूर्णतः औचित्यहीन है क्योंकि उन्हीं तथ्यों के आधार पर फौजदारी मुकदमा सं0-08/09 निगरानी न्यायालय, पटना में विचाराधीन है। 7. दर्ज निगरानी थाना कांड सं0-15/09 में मेरे विरूद्व किसी तरह का रिश्वत लेने या रिश्वत की मांग करने से संबंधित कोई भी आरोप नहीं लगाया गया है, बल्कि जो धारा लगाये गये है वे आय से अधिक सम्पति होने से संबंधित है। 8. संचालन पदाधिकारी ने मेरे विरूद्व आरोपों को अप्रमाणित माना है। ऐसी स्थिति में जॅाच पदाधिकारी के प्रतिवेदन से मत भिन्न का केाई उचित एवं न्याय संगत आधार प्रतीत नहीं होता है। श्री सिन्हा द्वारा समर्पित कारण पृच्छा के समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि इन्होंने निगरानी को मिली गुप्त सूचना में इनका नाम नहीं होना, काले वैग में बरामद 3,12,632 रू0 को अपना होने से इनकार करना तथा संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपों से मुक्त करने के प्रतिवेदन को मुख्य आधार बनाया है परन्तु वास्तविकता इससे भिन्न है। श्री सिन्हा ने अपने स्पष्टीकरण की कंडिका-1 में अंकित किया है कि कार्यपालक अभियन्ता श्री कामेश्वर नाथ सिंह दिनांक 20.2.09 को पटना आ रहे थे। मुझे भी अति आवश्यक निजी कार्यवश पटना आना था इसलिए उनके अनुमति से मैं भी उनके गाड़ी में पटना आने के लिए बैठ गया। इस संबंध में वस्तुस्थिति श्री सिन्हा के आकस्मिक अवकाश के आवेदन से स्पष्ट होता है जिसमें इन्होंने दिनांक 19.2.09 को कार्यपालक अभियन्ता से दिनांक 20.2.09 से 22.2.09 तक कार्यस्थल से बाहर जाने के लिए अनुमति की मांग की थी। उक्त आकस्मिक अवकाश आवेदन पर कार्यपालक अभियन्ता द्वारा श्री जैनेन्द्र कुमार, सहायक अभियन्ता को पृष्टांकित किया गया कि ''कृपया पूर्वी कोशी एफलेक्स बॅाध का कार्य श्री सिन्हा एवं अधोहस्ताक्षरी के बाहर रहने के कारण दिनांक 20.2.09 से 22.2.09 तक मुस्तैदी से करेंगे एवं पाली ड्यूटी भी करेंगे।'' इससे स्पष्ट है कि दोनों पदाधिकारी कार्यपालक अभियन्ता, श्री कामेश्वर नाथ सिंह तथा सहायक अभियन्ता श्री विजय कुमार सिन्हा का साथ-साथ आने का कार्यक्रम पूर्व से निर्धारित था। श्री सिन्हा की प्रतिनियुक्ति कुसहा तटबंध पर हो रहे कार्यो के लिए कार्यपालक अभियन्ता के अधीन की गयी थी। वे कार्यपालक अभियन्ता के साथ एक ही वाहन से पटना आ रहे थे। प्राथमिकी के अनुसार श्री सिन्हा द्वारा जॅाच दल को काला वैग अपना बताते हुए प्रस्तुत किया गया जिसमें 3,12,632 रू0 पाये गये। तलाशी एवं जप्ती सूची की एक प्रति उसी तिथि को इन्हें गवाहों के हस्ताक्षर सहित प्राप्त करायी गयी। प्राप्त करते समय इन्होंने यह नहीं कहा कि काला बैग इनका नहीं है। द्वितीय कारण पृच्छा मेंं प्रतिनियुक्त स्थल से इतनी बड़ी राशि लेकर आते हुए पकड़े जाने पर ये इस राशि को अपना नहीं बता रहे है। अभियोजन स्वीकृति में यह भी प्रमाणित है कि जप्त राशि संवेदक को किये गये भुगतान का ही एक अंश था। अतः आरोप प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 1147 दिनांक 9.9.11 द्वारा श्री सिन्हा से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।उक्त के आलेक में श्री सिन्हा द्वारा अपने आवेदन दिनांक 23.9..13 से कतिपय अभिलेख/सूचनाएं एवं तथ्यों की मांग की गयी। विभागीय पत्रांक 30 दिनांक 17.1.12 द्वारा सिन्हा को संचिका में उपलब्ध अभिलेखों को उपलब्ध करा दिया गया। तत्पश्चात श्री सिन्हा द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव नहीं देकर शेष अन्य सूचनायें की मांग अपने आवेदन दिनांक 31.1.12 द्वारा की गयी तथा द्वितीय कारण पृच्छा का जबाव नियत समय तक प्राप्त नहीं कराया गया। पूरे घटनाक्रम में स्पष्ट है कि गाड़ी में कार्यपालक अभियन्ता, श्री कामेश्वर नाथ सिंह तथा सहायक अभियन्ता श्री विजय कुमार सिन्हा दो ही व्यक्ति थे। श्री सिन्हा द्वारा स्पष्ट नहीं किया गया कि काले रंग का वैग इनका नहीं है। प्रतिनियुक्त कार्यालय से वेतन आदि की निकासी नहीं होती है। इनका मूल पदस्थापन कार्यालय, दीधा, पटना तथा इनकी प्रतिनियुक्ति कुसहा तटबंध पर था। वर्तमान व्यवस्था में बिहार सरकार के सभी कर्मियों का सभी प्रकार का भुगतान बैंक के माध्यम से होता है। वर्णित स्थिति में निश्चित रूप से इनके पास से बरामद राशि नाजायज तरीके से प्राप्त की गयी राशि है जिसे पकड़े जाने पर झुठला रहे है। अनैतिक रूप से प्राप्त राशि की जप्ती सूची पर भी इनका लधु हस्ताक्षर प्राप्त है। अपने बचाव बयान में इन्होंने यह कही नहीं कहा है कि हस्ताक्षर इनके द्वारा किसी के दबाव में किया गया है। जब्त की गयी राशि को अपना होने से इनकार करना यह इनका सेकेन्ड थाउट है। . प्रतिनियुक्ति स्थान से 3,12,632 रू0 लेकर आना सरकारी सेवक के आचरण के विरूद्व है। उक्त के आलोक में विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक 756 दिनांक 01.7.13 द्वारा श्री सिन्हा को ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड संसूचित किया गया। श्री सिन्हा द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न तर्क दिया गया हैः- सी0 सी0 ए0 नियमावली 2005 के नियम 18 (4), 18 (6) तथा संविधान के अनुच्छेद 311(2) के प्रावधानों की अनदेखी कर मात्र संशय, अनुमान एवं सम्भाव्यता (Suspicion Conjecture and Surmises) के आधार पर आरोप को प्रमाणित मानकर दंडित किया गया है। उनका यह भी कहना है कि दिनांक 30.3.09 के पुलिस प्रतिवेदन की सत्यता की जॅाच तलाशी के समय उपस्थित गवाहाें, विशेषकर स्वतंत्र गवाहों की सीधी एवं विश्वसनीय गवाहाें के द्वारा नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त श्री सिन्हा के द्वारा कुलदीप सिंह बनाम पुलिस कमिशनर के मामले में जो (1999) 2 S C C 10 में प्रकाशित है, में पारित न्यायादेश का निम्न अंश उल्लेख किया गया हैः- ''Disciplinary proceedings before a domestic Tribunal are of quasi- judicial character and therefore, it is necessary that the tribunal should arrive at its conclusions on the basis of some evidence, that is to say, such evidence which and 4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 2 जनवर(cid:15) 2014 that too, with some degree of definiteness, points to the guilt of the delinquent and does not leave the matter in a suspicious state as mere suspicion cannot take the place of proof even in domestic enquiries. '' श्री सिन्हा से प्राप्त पुनर्विलोकन अर्जी की समीक्षा में पाया गया कि श्री सिन्हा को मात्र संशय, अनुमान एवं सम्भाव्यता के आधार पर आरोप को प्रमाणित मानकर दंडित नहीं किया गया है बल्कि इनके द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन में जो तथ्य दिया गया है वही तथ्य पूर्व में भी कही गयी थी जिसकी समीक्षा में यह साबित हो चुका है कि जिस वाहन में श्री सिन्हा थे उसमें पाया गया काला रंग का बैग जिसमें 3,12,632 रूपये बरामद हुए उनका ही था। वे यह साबित नहीं कर सके कि वह काला रंग का बैग उनका नहीं बल्कि किसी गैर का है। श्री सिन्हा द्वारा उक्त के अतिरिक्त कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है जो कि विभागीय कार्यवाही के दौरान विचारित नहीं हुआ हो। उपर्युक्त वर्णित स्थिति में सरकार द्वारा श्री विजय कुमार सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमण्डल, दीधा, पटना (प्रतिनियुक्त कुसहा तटबंध) सम्प्रति सेवा से बर्खास्त द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया गया। अतएव श्री सिन्हा से प्राप्त पुनर्विलोकन आवेदन को अस्वीकृत किया जाता है। उक्त आदेश श्री सिन्हा को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, श्याम कुमार सिंह, सरकार के विशेष सचिव।
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अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 6-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in