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la0 1085—समस्तीपुर जिलान्तर्गत सरायरंजन अंचल के ग्राम मुसापुर स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर पर्षद के अन्तर्गत निबंधित एक सार्वजनिक धार्मिक न्यास है, जिसकी निबंधन संख्या 2399 है। इस न्यास की सम्पत्तियों की सुरक्षा, सुव्यवस्था एवं समुचित विकास हेतु अधिनियम की धारा-32 के अन्तर्गत पर्षदीय अधिसूचना ज्ञापांक 552, दिनांक 22.06.2009 द्वारा योजना का निरूपण एवं इसके संचालन हेतु एक न्यास समिति का गठन किया गया था। उक्त आदेष के विरूद्ध श्री सुखदेव गिरि चेला-स्व0 महंत राम लखन भारती ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में एक सिविल रिट याचिका संख्या-15360/2009 दायर किया। माननीय उच्च न्यायालय ने दिनांक 20.12.2011 को उक्त याचिका का निष्पादन करते हुए एक मिली-जुली (Cohesive) न्यास समिति के गठन का आदेष दिया और पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति को भी निरस्त नहीं किया।
माननीय उच्च न्यायालय के उपर्युक्त आदेष के आलोक में इस मामले में उभय पक्षों की पर्षद में सुनवाई की गयी। साथ ही पर्षदीय पत्रांक 1633-34 दिनांक 12.12.2012 द्वारा क्रमषः जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक, समस्तीपुर से अनुरोध किया गया कि अपने स्तर से इसकी जांच कराकर न्यास के सम्यक् संचालन के लिए स्वच्छ छवि के ग्यारह प्रतिष्ठित व्यक्तियों का नाम, जिसमें समाज के सभी वर्गो का प्रतिनिधित्व हो, पर्षद को भेंजे। पुलिस अधीक्षक का प्रतिवेदन पत्रांक 3959 दिनांक 15.06.2013 द्वारा तथा जिला पदाधिकारी का प्रतिवेदन उनके पत्रांक 403 दिनांक 07.08.2013 द्वारा पर्षद को प्राप्त हुआ हैं उक्त दोनों पत्रों में न्यास समिति के लिए सदस्यों के नाम अनुषंसित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त माननीय उच्च न्यायालय के आदेष के आलोक में पर्षद के निरीक्षक को भी दिनांक 27. 06.2012 को न्यास का स्थानीय जांच कर सभी बिन्दुओं पर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेष दिया गया। निरीक्षक ने न्यास का स्थानीय निरीक्षण दिनांक 18.07.2012 को किया और दिनांक 25.07.2012 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस जांच की सूचना दोनों पक्षों को दी गयी थी और जांच के दौरान घटहो थाना प्रभारी श्री संजीत कुमार भी उपस्थित थे। जांच के समय स्थानीय लोगों की भी अच्छी उपस्थिति थी। जांच पदाधिकारी ने प्रतिवेदित किया है कि यह न्यास प्राचीन काल से विरक्त सन्यासियों द्वारा संचालित होता था जिनकी 12 समाधियां यहाँ स्थापित है। श्री सुखदेव गिरि ने भी स्वीकार किया कि पूर्व के बारह महंत अविवाहित एवं विरक्त थे किन्तु ये गृहस्थ एवं बाल-बच्चेदार हैं। इन्होंने न्यास समिति के सचिव श्री अरविन्द गिरि के साथ हुए मुकदमों का कुछ कागजात दिया जो 2009 से है। जांच से यह भी स्पष्ट हुआ कि न्यास की कुल भूमि श्री सुखदेव गिरि द्वारा भरना एवं ठेका पर दी गयी है। यह बात 2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 6 जनवर(cid:15) 2014 भी प्रकाष में आई कि न्यास की भूमि कृषि कार्य के लिए 500.00 रुपये प्रति कट्ठा की दर से ठेका पर दिया गया है, जिससे न्यास को लगभग दो लाख रुपये की वार्षिक आय है। इस आय की तुलना में न्यास का विकास नगण्य है। श्री सुखदेव गिरि न्यास समिति के गठन से सहमत नहीं हुए। वे अपने बाद अपने पुत्र को महंत बनाना चाहते हैं, और इसे प्राचीन सार्वजनिक मठ को निजी मठ में परिवर्तित करने के प्रयास में लगे हुए हैं।
सुनवाई के क्रम में दिनांक 26.09.2012 को दोनों पक्षों को निर्देष दिया गया था कि वे लोग अपनी ओर से प्रस्तावित सदस्यों के नाम दिनांक 29.10.2012 तक पर्षद में सौपें। श्री अरविन्द गिरि की ओर से एक आवेदन पत्र दिनांक 29.10.2012 को प्राप्त हुआ, जिसमे वर्तमान समिति के सदस्य श्री संत कुमार प्रसाद सिंह एवं अषोक कुमार के सक्रिय नहीं होने तथा एक शम्भु प्रसाद सिंह के देहान्त के कारण तीन नये सदस्यों का नाम प्रस्तावित किया गया। श्री सुखदेव गिरि की ओर से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ।
उपर्युक्त परिस्थितियों से स्पष्ट है कि इस सार्वजनिक न्यास की परिसम्पत्तियों का दुर्विनियोग एवं आय का दुरूपयोग किया जा रहा है। अतः श्री नीलकंठ महादेव मठ, मुसापुर की सम्पत्तियों की सुरक्षा, सुव्यवस्था एवं सम्यक विकास हेतु एक ऐसी न्यास समिति का गठन आवष्यक प्रतीत होता है, जिसमें सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो और जो न्यास की सुरक्षा एवं सुचारू प्रबंधन के लिए कार्य करें।
अतः बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा-32 में धार्मिक न्यास पर्षद को प्रदत्त अधिकार जो धार्मिक न्यास की उपविधि सं0-43 (द) के तहत अध्यक्ष को प्राप्त है, का प्रयोग करते हुए श्री नीलकंठ महादेव मन्दिर, मुसापुर, जिला-समस्तीपुर के सुचारू प्रबंधन, सम्पत्तियों की सुरक्षा एवं सुव्यवस्था तथा सम्यक् विकास हेतु नीचे लिखे योजना का निरूपण और इसको मूर्त्त रूप देने एवं संचालन के लिए एक न्यास समिति का गठन किया जाता है।
योजनायोजनायोजनायोजना
1. पर्षद द्वारा अधिनियम की धारा-32 के अन्तर्गत निरूपित इस योजना का नाम ''श्री नीलकंठ महादेव ''श्री नीलकंठ महादेव ''श्री नीलकंठ महादेव ''श्री नीलकंठ महादेव मन्दिर न्यास योजना''मन्दिर न्यास योजना''मन्दिर न्यास योजना''मन्दिर न्यास योजना'' होगा तथा इसे मूर्त्त रूप देने हेतु पर्षद द्वारा गठित न्यास समिति का नाम ''श्री नीलकंठ महादेव ''श्री नीलकंठ महादेव ''श्री नीलकंठ महादेव ''श्री नीलकंठ महादेव मन्दिर न्यास समिति मुसापुर समस्तीमन्दिर न्यास समिति मुसापुर समस्तीमन्दिर न्यास समिति मुसापुर समस्तीमन्दिर न्यास समिति मुसापुर समस्तीपुर''पुर''पुर''पुर'' होगा, जिसमें न्यास की सभी चल-अचल सम्पत्ति निहित होगी।
2. न्यास समिति न्यास के सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ पूजा-अर्चना, राग-भोग, अतिथि-सेवा आदि समस्त धार्मिक आचारों का सम्यक संचालन सुनिष्चित करेगी।
3. न्यास की समग्र आय के लेखा का सम्यक् संधारण किया जायेगा और समीप के किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में न्यास के नाम से खाता खोलकर जमा किया जायेगा तथा आवष्यकतानुसार राषि निकालकर खर्च किया जायेगा। 4. न्यास के खाते का संचालन दो सदस्यों के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। 5. मंदिर परिसर में भेंटपात्र रखे जायेगें जिसमें दान एवं चढ़ावे की राषि डाली जायेगी जो निर्धारित तिथि को न्यास समिति द्वारा अधिकृत दो सदस्यों के समक्ष खोली जायेगी और सही गणना कर प्राप्त राषि को बैंक में जमा किया जायेगा।
6. दाताओं से प्राप्त होने वाले राषि के लिए उन्हें रसीद दी जायेगी और सत्यापित पंजी में दर्ज कर उन्हें बैंक में जमा की जायेगी।
7. मंदिर में आने वाले दर्षनार्थी, भक्तों का विषेष ख्याल रखा जायेगा ताकि उन्हें कोई असुविधा नहीं हों, विषेषकर महिला दर्षनार्थी के लिए विषेष व्यवस्था की जायेगी।
8. मंदिर परिसर में स्वच्छता एवं पवित्रता का विषेष ख्याल रखा जायेगा और मंदिर की गरिमा को अक्षुण रखा जायेगा।
9 मंदिर के पुजारियों की अर्हता का निर्धारण न्यास समिति करेगी तथा उनके वेतन का भुगतान न्यास कोष से होगा।
10. न्यास समिति बिहार हिन्दू धार्मिक न्यास अधिनियम एवं उप-विधि में वर्णित नियमों का अनुपालन करते हुए बजट, आय-व्यय विवरणी, अंकेक्षित प्रतिवेदन, कार्यवृत्त आदि का पर्षद को सम्यक प्रेषण करेगी।
11. न्यास समिति के कोई सदस्य यदि न्यास हित के प्रतिकूल कार्य करेंगे या न्यास की परिसम्पत्तियों से प्रत्यक्ष या परोक्ष लाभ उठाते हुए पाये जायेगे अथवा आपराधिक पृष्ठभूमि के होगें तो उनके सदस्य बने रहने की अर्हता समाप्त हो जायेगी।
12. न्यास समिति न्यास के सर्वागीण विकास एवं मंदिर जीर्णोद्धार में पूर्ण सहयोग करेगी। 13. अध्यक्ष की अनुमति से सचिव प्रत्येक तिमाही में बैठक बुलायेगे। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष करेंगे और निर्णय बहुमत के आधार पर होगा।
14. सचिव समिति द्वारा पारित प्रस्तावों/निर्णयों को मूर्त रूप देने के लिए उत्तरदायी होंगे और कोषाध्यक्ष आय-व्यय के संधारण एवं पर्यवेक्षण के उत्तरदायी होंगे।
15. जिन विषयों का उल्लेख इस योजना में नहीं हुआ है और मंदिर के हित में आवष्यक हो तो उन बिन्दुओं पर न्यास समिति प्रस्ताव पारित कर पर्षद के पास अनुमोदन के लिए भेजेगी।
न्यास समिति के लिए जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक, समस्तीपुर से प्राप्त सूची एवं पर्षद के निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में उल्लेखित नामों में से ग्यारह व्यक्तियों की न्यास समिति गठित की जायेगी।
यह न्यास समिति अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के तहत कार्यरत रहेगी और मंदिर के सर्वागीण विकास तथा भक्तों के हितों के लिए सर्वोपरि कल्याण का कार्य करेगी। 3
(cid:18)बहार गजट (असाधारण), 6 जनवर(cid:15) 2014
उपर्युक्त योजना को मूर्त्तरूप देने के लिए निम्नलिखित सदस्यों की न्यास समिति गठित की जाती है :-
(1) अंचलाधिकारी, सरायरंजन, समस्तीपुर -पादेन अध्यक्ष (2) श्री दयाल शरण गुप्ता - उपाध्यक्ष (3) श्री अरविन्द गिरि - सचिव (4) श्री राजीव रंजन - कोषाध्यक्ष (5) श्री सुखदेव गिरि - सदस्य (6) श्री रामानुज पंडित - सदस्य (7) श्री मधुसूदन चौबे - सदस्य (8) श्री श्यामनन्दन चौधरी - सदस्य (9) श्रीमती मंजू देवी - सदस्य (10) श्री रामनगीना सिंह - सदस्य (11) श्री सुखदेव गिरि के प्रतिनिधि - सदस्य।
यह योजना दिनांक 10.09.2013 से लागू होगी और इसका कार्यकाल पाँच वर्षो का होगा।
आदेश से, किषोर कुणाल,किषोर कुणाल,किषोर कुणाल,किषोर कुणाल, अध्यक्ष।
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अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 39-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in