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ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=^=2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 जनवर(cid:15) 2014 बंगाल, आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय (बिहार संशोधन) विधेयक, 2013
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बिहार राज्य में लागू करने के लिए बंगाल, आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय अधिनियम, 1887 (1887 का अधिनियम, 12) में संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के चौंसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ।- (1) यह अधिनियम बंगाल, आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2013 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा।
(3) यह राजपत्र में इसके प्रकाशन की तिथि से 30 दिनों के बाद प्रवृत्त होगा।
2. बंगाल, आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय अधिनियम, 1887 (1887 का अधिनियम 12) की धारा-3 का संशोधन।- बंगाल, आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय अधिनियम, 1887 (1887 का अधिनियम 12) (इसमें आगे उक्त अधिनियम के रूप में निर्दिष्ट) की धारा-3 के खण्ड (3) में शब्द ''अवर न्यायाधीश'' को शब्द एवं कोष्ठक ''असैनिक न्यायाधीश (वरीय कोटि)'' तथा खण्ड (4) में शब्द ''मुंसिफ'' को शब्द एवं कोष्ठक ''असैनिक न्यायाधीश'' (कनीय कोटि) द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा।
3. 1887 का अधिनियम 12 का संशोधन।- उक्त अधिनियम में जहाँ कहीं भी शब्द ''अवर न्यायाधीश'' एवं शब्द ''मुंसिफ'' प्रयुक्त है को क्रमशः शब्द एवं कोष्ठक ''असैनिक न्यायाधीश (वरीय कोटि)'' एवं ''असैनिक न्यायाधीश (कनीय कोटि)'' द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा।
4. 1887 का अधिनियम 12 की धारा-19 का संशोधन।- उक्त अधिनियम की धारा-19 में शब्द ''मुंसिफ की अधिकारिता का विस्तार वैसे सभी वादों तक है जिसका मूल्य तीस हजार रूपये से अधिक न हो'' को शब्द और अंक एवं कोष्ठक ''असैनिक न्यायाधीश (कनीय कोटि)'' की अधिकारिता को विस्तार वैसे सभी वादों तक है जिसका मूल्य 1,50,000/- (एक लाख पचास हजार रूपये) से अधिक न हो'' द्वारा प्रतिस्थापित किये जायेगें।
5. 1887 का अधिनियम 12 की धारा-21 का संशोधन।-उक्त अधिनियम की धारा-21 की उप-धारा (1) के खण्ड (क) में शब्द ''दो लाख रूपये'' को अंक, कोष्ठक एवं शब्द ''10,00,000/-(दस लाख रूपये)'' द्वारा प्रतिस्थापित किया जायेगा।
6. व्यावृति।- इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के प्रवृत्त होने की तिथि के पूर्व के मामले (वाद) अप्रभावित रहेंगे।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 जनवर(cid:15) 2014
उद्देश्य एवं हेतु
व्यवहार न्यायालयों में, विभिन्न स्तर के न्यायालयों के अधिकारिता की सीमा बंगाल, आगरा एवं आसाम व्यवहार न्यायालय अधिनियम, 1887 (1887 का अधिनियम संख्या-12) के प्रावधानों के तहत निर्धारित होती है। सम्पत्ति के मूल्यों में वृद्धि एवं ''मुंसिफ'' एवं अधीनस्थ न्यायाधीश के पदनाम में बदलाव के कारण पदनाम एवं धनीय अधिकारिता की सीमा में वृद्धि ही इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य है जिसे अधिनियमित कराना ही बंगाल, आगरा एवं असम व्यवहार न्यायालय (बिहार संशोधन) विधेयक, 2013 का मुख्य अभीष्ठ है।
(नरेन्द्र नारायण यादव)
भार साधक-सदस्य iVuk]
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अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 93-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in