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ÑÅÖâà=ÑçLâìCäeââ=^=2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 जनवर(cid:15) 2014
बिहार प्रत्यायोजित विधान उपबंध विधेयक, 2013
[foŒlŒfoŒ&23@2013foŒlŒfoŒ&23@2013foŒlŒfoŒ&23@2013foŒlŒfoŒ&23@2013]
बिहार राज्य विधान मंडल के सदनो के समक्ष नियमों तथा अन्य प्रत्यायोजित विधानों को रखने हेतु उपबंध करने के लिए कतिपय अधिनियमों का संशोधन करने के लिए विधेयक।
भारत गणराज्य के चौसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित होः-
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और आरंभ ।- (1) यह अधिनियम बिहार प्रत्यायोजित विधान उपबंध अधिनियम, 2013 कहा जा सकेगा।
(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा।
(3) यह तुरत प्रवृत्त होगा।
2. कतिपय अधिनियमितियों का संशोधन ।- इस अधिनियम की अनुसूची में विनिर्दिष्ट अधिनियमितियाँ एतद् द्वारा उसके तृतीय स्तंभ में उल्लिखित हद तक और रीति से संशोधित की जाती हैं।3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 17 जनवर(cid:15) 2014 अनुसूची (धारा 2 देखें)
| क्र0 | संक्षिप्त नाम | संशोधन |
| 1. | बिहार सहकारी सोसाईटी अधिनियम 1935 (बिहार और उड़ीसा अधिनियम 6, 1935) | उक्त अधिनियम, 1935 की धारा-66 की उप-धारा(4) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(5) जोड़ी जायगी :- "(5) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 2. | बिहार होमगार्ड अधिनियम, 1947 (बिहार अधिनियम 19, 1947) | उक्त अधिनियम, 1947 की धारा-13 की उप-धारा (2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा (3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 3. | बिहार आकस्मिकता निधि अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम 19, 1950) | उक्त अधिनियम की धारा-6 को धारा-6 की उप-धारा(1) के रूप में पुन स ख्याकित की जायगी और तत्पश्चात् निम्नलिखित उप-धारा(2) जोड़ी ं जायगीः- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये |
| जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु | ||
| 4. | बिहार गोशाला अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम 28, 1950) | उक्त अधिनियम, 1950 की धारा-18 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 5. | बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अधिनियम, 1952 (बिहार अधिनियम 7, 1952) | उक्त अधिनियम, 1952 की धारा-16 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 6. | बिहार होमियोपैथी पद्धति एवं मेडिसीन विकास अधिनियम, 1953 (बिहार अधिनियम 24, 1953) | उक्त अधिनियम, 1953 की धारा-53 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 7. | बिहार सरकारी परिसर (किराया वसूली एवं बेदखली) अधिनियम, 1956 (बिहार अधिनियम 20, 1956) | उक्त अधिनियम, 1956 की धारा-14 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 8. | बिहार राज्य विश्व विद्यालय अधिनियम, 1976 (बिहार अधिनियम 23, 1976) | उक्त अधिनियम, 1976 की धारा-40 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की क ल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक ु अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 9. | पटना विश्व विद्यालय अधिनियम, 1976 (बिहार अधिनियम 24, 1976) | उक्त अधिनियम, 1976 की धारा-40 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान म डल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की ं क ल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक ु अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 10. | बिहार देशी चिकित्सा शिक्षा (विनियमन एवं नियंत्रण अधिनियम, 1982) (बिहार अधिनियम 20, 1982) | उक्त अधिनियम, 1982 की धारा-16 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-16 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगीः- "(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 11. | बिहार राज्य अभियंत्रण एवं फार्मेसी शैक्षणिक स स्था (विनियमन एवं ं नियंत्रण) अधिनियम, 1982 (बिहार अधिनियम 63, 1982) | उक्त अधिनियम, 1982 की धारा-16 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-16 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगीः- "(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव क वल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई े |
| उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। | ||
| 12. | बिहार क षि ृ विश्व विद्यालय अधिनियम, 1987 (बिहार अधिनियम 8, 1988) | उक्त अधिनियम, 1987 की धारा-36 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक परिनियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस परिनियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि परिनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, परिनियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस परिनियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। उक्त अधिनियम, 1987 की धारा-37 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक विनियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस विनियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, विनियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस विनियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 13. | नालंदा खुला विश्व विद्यालय अधिनियम, 1995 (बिहार अधिनियम 11, 1995) | उक्त अधिनियम, 1995 की धारा-33 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की क ल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक ु अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस |
| परिनियम, अध्यादेश, विनियम या नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। | ||
| 14. | बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा अधिनियम, 1995 (बिहार अधिनियम 15, 1995) | उक्त अधिनियम, 1995 की धारा-18 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-18 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगीः- "(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 15. | बिहार स्वावलंबी सहकारी सोसाईटी अधिनियम, 1996 (बिहार अधिनियम 2, 1997) | उक्त अधिनियम, 1996 की धारा-51 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने क पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र े म हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या ं े दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम क अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव े डाले बिना होगा। |
| 16. | बिहार ि स ं चाई ं अधिनियम, 1997 (बिहार अधिनियम 11, 1997) | उक्त अधिनियम, 1997 की धारा-115 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए |
| क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु | ||
| 17. | बिहार कर्मचारी चयन आयोग अधिनियम, 2002 (बिहार अधिनियम 7, 2002) | उक्त अधिनियम, 2002 की धारा-12 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 18. | बिहार मत्स्य जलकर प्रबंधन अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 15, 2006) | उक्त अधिनियम, 2006 की धारा-15 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-15 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगी ः- "(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 19. | बिहार प लिस ु अधिनियम, 2007 (बिहार अधिनियम 7, 2007) | उक्त अधिनियम, 2007 की धारा-55 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-55 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगी ः- "(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का |
| प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु | ||
| 20. | बिहार नैदानिक स्थापन (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2007 (बिहार अधिनियम 14, 2007) | उक्त अधिनियम, 2007 की धारा-21 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-18 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगी ः- "(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 21. | बिहार सचिवालय स वा े अधिनियम, 2007 (बिहार अधिनियम 3, 2007) | उक्त अधिनियम, 2007 की धारा-19 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 22. | बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2010 (बिहार अधिनियम 17, 2010) | उक्त अधिनियम, 2010 की धारा-9 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-9 के उप-धारा(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगी :- "(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु |
| 23. | बिहार क षि ृ विश्व विद्यालय अधिनियम 2010 (बिहार अधिनियम 19, 2010) | उक्त अधिनियम, 2010 की धारा-36 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक परिनियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने क लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि े परिनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, परिनियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस परिनियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 24. | बिहार चिकित्सा सेवा स स्थान और व्यक्ति ं स रक्षा ु अधिनियम, 2011 (बिहार अधिनियम 18, 2011) | उक्त अधिनियम, 2011 की धारा-9 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-9 के उप-धारा(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगी :- "(2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों क सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के े लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए |
| क छ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। ु | ||
| 25. | बिहार विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्ति वासभूमि काश्तकारी अधिनियम, 1947 (बिहार अधिनियम 4, 1948) | उक्त अधिनियम, 1947 की धारा-20 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 26. | बिहार भूदान यज्ञ अधिनियम, 1954 (बिहार अधिनियम 22, 1954) | उक्त अधिनियम, 1954 की धारा-25 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 27. | बिहार भूमि स धार ु अधिनियम, 1950 (बिहार अधिनियम 30, 1950) | उक्त अधिनियम, 1950 की धारा-43 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 28. | बिहार राज्य म ला े प्राधिकार अधिनियम, 2008 (बिहार अधिनियम 20, 2008) | उक्त अधिनियम, 2008 की धारा-26 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-26 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगीः- "(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम एवं विनियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल क प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल े अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम एवं विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम एवं विनियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 29. | बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 (बिहार अधिनियम 4, 2009) | उक्त अधिनियम, 2009 की धारा-17 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के |
| अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। | ||
| 30. | बिहार भूमि न्यायाधिकरण अधिनियम, 2009 (बिहार अधिनियम 9, 2009) | उक्त अधिनियम, 2009 की धारा-21 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-21 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प त्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक ्र सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों म समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या ं े उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 31. | बिहार क षि ृ भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए स परिवर्त्तन) ं अधिनियम, 2010 (बिहार अधिनियम 11, 2010) | उक्त अधिनियम, 2010 की धारा-15 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-15 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगीः- "(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 32. | बिहार विशेष सर्वे एवं ब दोबस्ती ं अधिनियम, 2011 (बिहार अधिनियम 24, 2011) | उक्त अधिनियम, 2011 की धारा-28 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के |
| लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। | ||
| 33. | बिहार खादी एवं ग्रामोद्योग अधिनियम, 1956 (बिहार अधिनियम 23, 1956) | उक्त अधिनियम, 1956 की धारा-33 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 34. | बिहार शोध सोसाइटी (अधिग्रहण) अधिनियम, 2007 (बिहार अधिनियम 6,2008) | उक्त अधिनियम, 2007 की धारा-8 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-8 के उप-नियम(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगीः- "(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 35. | बिहार उत्पाद अधिनियम, 1915 (बिहार, उड़ीसा अधिनियम-II 1915) | उक्त अधिनियम, 1915 की धारा-89 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या |
| उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। | ||
| 36. | बिहार छोआ अधिनियम, 1947 (बिहार अधिनियम 6, 1947) | उक्त अधिनियम, 1947 की धारा-13 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 37. | बिहार मनोरंजन कर अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम 25, 1948) | उक्त अधिनियम, 1948 की धारा-21 की उप-धारा(4) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(5) जोड़ी जायगी :- "(5) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 38. | बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम 36, 1948) | उक्त अधिनियम, 1948 की धारा-10 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों |
| में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। | ||
| 39. | बिहार जल पर्षद अधिनियम, 1982 (बिहार अधिनियम 56, 1982) | (1) उक्त अधिनियम, 1982 की धारा-51 की उप-धारा(3) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(4) जोड़ी जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। (2) उक्त अधिनियम, 1982 की धारा-52 उपविधि बनाने की शक्ति क अधीन विद्यमान प्रावधान को धारा-52 के उप-धारा(1) के रूप में े स ख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी ं जायगी :- "(4) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनायी गयी प्रत्येक उपविधि बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस उपविधि में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात क लिए सहमत हों कि उपविधि नहीं बनायी जानी चाहिए तो, तत्पश्चात्, े यथास्थिति, उपविधि का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस उपविधि के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
| 40. | बिहार मकान (पट्टा, किराया और बेदखली) नियंत्रण अधिनियम, | उक्त अधिनियम, 1983 की धारा-33 की उप-धारा(2) के बाद निम्नलिखित नयी उप-धारा(3) जोड़ी जायगी :- "(3) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया |
| 1982 (बिहार अधिनियम 4, 1983) | प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। | |
| 41. | बिहार अपार्टमेन्ट स्वामित्त्व अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम 28, 2006) | उक्त अधिनियम, 2006 की धारा-31 नियम बनाने की शक्ति के अधीन विद्यमान प्रावधान को उप-धारा(1) के रूप में संख्याकित किया जायगा और तत्पश्चात् निम्नलिखित नई उप-धारा(2) जोड़ी जायगी :- "(2) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, चौदह दिनों की कुल अवधि के लिये रखा जायेगा, जो एक सत्र या दो या उससे अधिक अनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के तुरंत बाद वाले सत्र या उपर्युक्त अनुक्रमिक सत्रों के सत्रावसान से पहले दोनों सदन उस नियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हो अथवा दोनों सदन इस बात के लिए सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो, तत्पश्चात्, यथास्थिति, नियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित प्रारूप में होगा अथवा नहीं होगा, फिर भी कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में किये गए कुछ भी की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा। |
उद्देश्य एवं हेतु राज्य में अधिनियमित कतिपय अधिनियमों में नियम बनाने की शक्ति का प्रावधान है, परन्तु उसे विधान मंडल के सत्र में पटल पर रखने का प्रावधान नहीं रहने के कारण राज्य में बने नियमों से जनप्रतिनिधिगण अवगत नहीं हो पा रहे थे।
चतुर्दश बिहार विधान-सभा की प्रत्यायुक्त विधान समिति द्वारा इस पर गंभीरता से विचारोपरान्त अपने प्रतिवेदन में एक ऐसे अधिनियम बनाने की अनुसंशा की है जिसमें यह उपबंध हो कि अधिनियमों के तहत बनायी जानेवाली नियम, विनियम, विधि, उपविधि, परिनियम आदि को विधान मंडल के सदन के पटल पर अनिवार्य रूप से 14 दिनों की अवधि के लिए बिहार विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-272 के अनुरूप रखा जाय। बिहार विधान सभा की प्रत्यायुक्त विधान समिति की उपर्युक्त अनुशंसा के अनुरूप एक विधेयक बनाया जाना ही इसका मुख्य उद्देश्य है तथा इसे अधिनियमित कराना ही बिहार प्रत्यायोजित विधान उपबंध विधेयक, 2013 का मुख्य अभीष्ट है।
(नरेन्द्र नारायण यादव) भार-साधक सदस्य iVuk]
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अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 94-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in