Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 28 February 2014

Published 28 February 2014

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-02-28.223
Languages
English, Hindi

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((((संसंसंसं0000 पपपपटना टना टना टना 223223223223) ) ) ) पपपपटनाटनाटनाटना

टनाटनाटनाटना,,,, शुबशुबशुबशुबवारवारवारवार,,,, 28282828 फरफरफरफरवर(वर(वर(वर( 2014201420142014 जल संसाधन विभाग -------- vf/klwpuk 21 Qjojh 2014

सं0 22 नि0 सि0(डि0)-14-

सि0(डि0)-14-07/2006/245—श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, द्वारा बरती गई अनियमितताओं यथा- सोन बराज से निसृत पश्चिमी मुख्य नहर के 32.60 द्वारा बरती गई अनियमितताओं यथा- सोन बराज से निसृत पश्चिमी मुख्य नहर के 32 डिहरी प्रमण्डल, डिहरी द्वारा बरती गई अनियमितताओं यथा- सोन बराज से निसृत पश्चिमी मुख्य नहर के 32 0 कि0मी0 तथा 11.20 कि0मी0 पर एवं पश्चिमी मुख्य नहर से निसृत गारा चौबे शाखा नहर के 1.60 कि0मी0, 4.0 कि0मी0 तथा 11 कि0मी0 पर एवं पश्चिमी मुख्य नहर से निसृत गारा चौबे शाखा नहर के 1 ा अभियन्ता, गंगा सोन बाढ़ 06 को उक्त चार बिन्दुओं के टूटान की जॅाच तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, गंगा सोन बाढ़ कि0मी0 पर दिनांक 24.5.06 को उक्त चार बिन्दुओं के टूटान की जॅाच तत्कालीन अधीक्षण् सुरक्षा अंचल, पटना से कराई गई। स्थलीय जॅाच में जॅाच पदाधिकारी द्वारा नहरों में टूटान का मुख्य कारण जरूरत से सुरक्षा अंचल, पटना से कराई गई। स्थलीय जॅाच में जॅाच पदाधिकारी द्वारा नहरों में टूटान का मुख्य कारण जरूरत से सुरक्षा अंचल, पटना से कराई गई। स्थलीय जॅाच में जॅाच पदाधिकारी द्वारा नहरों में टूटान का मुख्य कारण जरूरत से ज्यादा जलस्श्राव नीचे की ओर प्रवाहित होकर जाना तथा उक्त नहर प्रणाली के गेटों की संचालन व्यवस्था में गड़बड़ी ज्यादा जलस्श्राव नीचे की ओर प्रवाहित होकर जाना तथा उक्त नहर प्रणाली के गेटों की संचालन व्यवस्था में गड़बड़ी ज्यादा जलस्श्राव नीचे की ओर प्रवाहित होकर जाना तथा उक्त नहर प्रणाली के गेटों की संचालन व्यवस्था में गड़बड़ी होना पाया गया। उक्त जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त प्राप्त निष्कर्ष के आलोक में प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के उक्त जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त प्राप्त निष्कर्ष के आलोक में प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के उक्त जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त प्राप्त निष्कर्ष के आलोक में प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के 07 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) लिए इनसे विभागीय पत्रांक 415 दिनांक 26 लिए इनसे विभागीय पत्रांक 415 दिनांक 26.4.07 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 के तहत स्पष्टीकरण पूछा गया। नियमावली-2005 के नियम-17 के तहत स्पष्टीकरण पूछा गया।

र्पालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त श्री दास, कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त र्पालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त श्री दास के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-19 के तहत श्री दास के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-19 के तहत श्री दास के विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-19 के तहत ाक 788 दिनांक 11.8.09 विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रांक 788 दिनांक 11 विभागीय कार्यवाही चलाने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में विभागीय पत्रं द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया।

श्री दास, कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जॅाच पदाधिकारी के प्रतिवेदन के आलोक में उक्त श्री दास, कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जॅाच पदाधिकारी के प्रतिवेदन के आलोक में उक्त श्री दास, कार्यपालक अभियन्ता से प्राप्त स्पष्टीकरण एवं जॅाच पदाधिकारी के प्रतिवेदन के आलोक में उक्त मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, श्री विनोद कुमार दास को अपने अघीनस्थ मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, श्री विनोद कुमार दास को अपने अघीनस्थ मामले की समीक्षा की गई। समीक्षोपरान्त तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, श्री विनोद कुमार दास को अपने अघीनस्थ को कार्य कराने का निदेश दिए बिना मुख्यालय से बाहर चले जाने के लिए उन्हें दोषी पाते हुए को कार्य कराने का निदेश दिए बिना मुख्यालय से बाहर चले जाने के लिए उन्हें दोषी पाते हुए अभियन्ताओं को कार्य कराने का निदेश दिए बिना मुख्यालय से बाहर चले जाने के लिए उन्हें दोषी पाते हुए अधिसूचना सं0-1419 दिनांक 24.12

12.12 द्वारा निम्नांकित दण्ड अधिरोपित किया गयाः-

असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि पर रोक।

1. ''निन्दन'' वर्ष 2006-07 2. असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि पर रोक। के विरूद्व श्री दास द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। चूॅकि बिहार सरकारी उक्त अधिरोपित दण्ड के विरूद्व श्री दास द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। चूॅकि बिहार सरकारी के विरूद्व श्री दास द्वारा अपील अभ्यावेदन समर्पित किया गया। चूॅकि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 24(2) के अनुसार सरकार के आदेश के विरूद्व सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 24(2) के अनुसार सरकार के आदेश के विरूद्व सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 24(2) के अनुसार सरकार के आदेश के विरूद्व अपील दायर नहीं किया जा सकता है। अतएव श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, डिहर अपील दायर नहीं किया जा सकता है। अतएव श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, डिहरी अपील दायर नहीं किया जा सकता है। अतएव श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, डिहर प्रमण्डल, डिहरी द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन को पुनर्विचार अभ्यावेदन मानते हुए विचार किया गया। प्रमण्डल, डिहरी द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन को पुनर्विचार अभ्यावेदन मानते हुए विचार किया गया। प्रमण्डल, डिहरी द्वारा समर्पित अपील अभ्यावेदन को पुनर्विचार अभ्यावेदन मानते हुए विचार किया गया।2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 28 फरवर( 2014 श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, डिहरी प्रमण्डल, डिहरी द्वारा समर्पित अपील/पुनर्विचार अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्नांकित तथ्य अंकित किया गया हैः-

(1)i. श्री दास द्वारा कहा गया है कि सोन बराज इन्द्रपुरी से निसृत पश्चिमी मुख्य नहर के 32.60 कि0 मी0 एवं पश्चिमी मुख्य नहर से निसृत पश्चिमी मुख्य नहर के 32.60 कि0मी0 एवं पश्चिमी मुख्य नहर से निसृत गारा चौबे नहर के 1.60 कि0मी0, 4.0 कि0मी0 तथा 11.20 कि0मी0 पर दिनांक 24.5.06 को टूटान हुआ। उक्त टूटान की जॅाच तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा अंचल, पटना से कराई गई एवं प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के आधार पर स्पष्टीकरण पूछा गया। स्पष्टीकरण समर्पित करने के बाद पुनः विभागीय पत्रांक 788 दिनांक 11.8.09 से कुल तीन आरोपों के लिए स्पष्टीकरण पूछा गया जिसका जबाव पत्रांक कैम्प, पटना-1, दिनांक 19.10.09 द्वारा समर्पित करते हुए आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया। पुनः कई पत्रो द्वारा मामले के निष्पादन हेतु अनुरोध किया गया एवं अन्ततः विभागीय पत्रांक 1419 दिनांक 24.12.12 द्वारा दंडित किए जाने के फलस्वरूप मुख्य अभियन्ता के पद पर प्रोन्नति से बंचित रह गया।

ii . श्री दास द्वारा दिनांक 24.5.06 को हुए टूटान के संदर्भ में पुनः स्पष्ट किया गया कि मुख्य अभियन्ता, डिहरी परिक्षेत्र में पड़ने वाले प्रमुख नहर प्रणालियों का रूपांकित जलस्श्राव अंकित करते हुए कहा गया है कि गारा चौबे नहर जो मुख्य नहर के 30 वें कि0मी0 पर चितौली फॅाल से निसृत होता है एवं उक्त मुख्य नहर के 30 कि0मी0 से नीचे के भाग को अन्त में जलस्श्राव प्राप्त होता है। गारा चौबे शाखा नहर में प्राप्त जलस्श्राव को चितौली फॅाल द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

iii . मुख्य अभियन्ता, डिहरी के निदेशानुसार सभी फॅाल का नियंत्रण एवं संचालन सिंचाई नियंत्रण कक्ष, डिहरी के प्रभारी कार्यपालक अभियन्ता, आयोजन एवं मोनेटरिंग प्रमण्डल, डिहरी के द्वारा किया जाता है। जल का बॅटवारा अधीक्षण अभियन्ता एवं कार्यपालक अभियन्ता द्वारा दी गई अधियाचना के आधार पर नियंत्रण कक्ष के प्रभारी कार्यपालक अभियन्ता द्वारा किया जाता है।

iv . मई के अन्तिम सप्ताह में धान के बिचड़ा हेतु बहुत कम मात्रा में जलस्श्राव प्रवाहित कराया जाता है ताकि नहर के सूखे हुए भाग का दरार भर जाय। जून के अन्तिम सप्ताह में धान की रोपनी हेतु समुचित मात्रा में जलस्श्राव पटवन हेतु दिया जाता है।

v. दिनांक 21.5.06 को प्रातः 6.00 बजे गारा चोबे शाखा नहर में 180 धनसेक जल जो रूपांकित जलस्श्राव 14.20 धनसेक का मात्र 12 प्रतिशत है, दिनांक 22.5.06 को 300 धनसेक तथा दिनांक 23.5.06 को अधिकतम 228 धनसेक जो क्रमशः 21 एवं 16 प्रतिशत के आसपास था, प्रवाहित हो रहा था। जलस्श्राव में वृद्वि के लिए कोई अधियाचना श्री दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा नहीं किया गया था।

vi . जॅाच पदाधिकारी द्वारा कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं की जॅाच नहीं की गई। जॅाच के क्रम में इन्द्रपुरी बराज एवं अन्य स्थलों से निसृत होने वाले नहरों की जॅाच की गई परन्तु सिंचाई नियंत्रण कक्ष, डिहरी का निरीक्षण एवं जॅाच नहीं की गई। टूटान के एक दिन पूर्व 23.5.06 को कार्यपालक अभियन्ता, सोन बराज प्रमण्डल, इन्द्रपुरी द्वारा बराज स्थल के गेज रजिस्टर में दर्ज निदेश ध्यान देने योग्य हैः-'' नदी के अपस्ट्रीम में वर्षा होने की सूचना है फलस्वरूप नदी में जलस्श्राव बढ़ने की संभावना है। ऐसी परिस्थिति में प्राप्त जलस्श्राव को दोनों नहरों में श्रावित कराया जाय। किसी भी परिस्थिति में बराज के नीचे पानी प्रवाहित नहीं होने दिया गया।'' मुख्य नहर से अभिप्राय पूर्वी मुख्य नहर ई0 एल0 सी0 (मुख्य अभियन्ता, औरंगाबाद) एवं पश्चिमी मुख्य नहर डब्लू0 एल0 सी0 (मुख्य अभियन्ता, डिहरी) से है। दिनांक 23.5.06 एवं 24.5.06 की प्रथम पाली में सिंचाई नियंत्रण कक्ष, डिहरी के रजिस्टर में अंकित बातों का उल्लेख किया गया है जिससे स्पष्ट है कि नीचे के पदाधिकारियों के लिए नहरों में जलस्श्राव के नियंत्रण के संबंध में कोई निर्देश दर्ज नहीं है। मुख्य अभियन्ता को जानकारी थी कि अधिकतर लोग चुनाव में लगे हुए है जिससे फाटकों के संचालन में कठिनाई होती है फिर भी डब्लू0 एल0 सी0 में दिनांक 24.5.06 को 4286 के स्थान पर 4286-2000-2286 धनसेक जलस्श्राव से अधिक जलस्श्राव किसके आदेश से प्रवाहित हुआ एवं जलस्श्राव में कमी नहर टूटान के पश्चात ही क्यों किया गया? सिंचाई नियंत्रण कक्ष, डिहरी के गेज रजिस्टर के अवलोकन से स्पष्ट है कि दिनांक 24.5.06 को द्वितीय पाली (दोपहर 21.00 बजे से रात्रि 10.00 बजे तक) बिल्कुल Defunct रहा। ऐसा एक साजिश के तहत किया गया हैं उक्त तथ्यों की जॅाच भी जॅाच पदाधिकारी द्वारा नहीं की गई है।

(2) दिनांक 24.5.06 को मुख्यालय से प्रस्थान करने के बाद बिना अधियाचना के पश्चिमी मुख्य नहर के 24.

00 कि0मी0 से नीचे एवं गारा चौबे शाखा नहर में एकाएक रूपांकित जलस्श्राव से भी अधिक जलस्श्राव सिंचाई नियंत्रण कक्ष के प्रभारी पदाधिकारियों द्वारा करा दिया गया। श्री महेन्द्र राम, अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, सोन नहर अवर प्रमण्डल, डिहरी द्वारा संख्या 07ः35 बजे सूचना दी गई कि अत्यधिक जलस्श्राव प्रवाहित होने के कारण गारा चौबे शाखा नहर एवं पश्चिमी मुख्य नहर क्षतिग्रस्त हो गया है। मुख्य अभियन्ता से सम्पर्क करने पर अविलम्ब लौटकर क्षतिग्रस्त भाग की मरम्मत करने का निर्देश दिया गया। श्री दास, डिहरी लौट आए एवं दिनांक 25.5.06 को सहायक अभियन्ता एवं कनीय अभियन्ता के टूटान स्थल का कैम्प कर मरम्मत करा दिया गया।

श्री दास द्वारा अपने अपील/पुनर्विचार अभ्यावेदन की कंडिका 10 की उप कंडिका एवं कंडिका-11 में विभाग द्वारा की गई कार्रवाई एवं आरोप पत्र का उल्लेख किया गया है। कंडिका-12 से 15 तक में नियम 19 के तहत लगाए गए आरोपों का जबाव अंकित किया गया है। कंडिका-16 में पूर्व में अंकित बातों को ही कहते हुए आरोपमुक्त करने3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 28 फरवर( 2014 का अनुरोध किया गया है। साक्ष्य स्वरूप अपील/पुनर्विचार अभ्यावेदन में कही गई बातों से संबंधित पत्रों एवं अन्य कागजातों को संलग्न किया गया है।

श्री दास द्वारा अपील/पुनर्विचार अभ्यावेदन में दिए गए तथ्यों एवं अभिलेखों के आलोक में मामले की समीक्षा की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि श्री दास द्वारा पूर्व में विभागीय कार्यवाही एवं स्पष्टीकरण के दरम्यान जो बाते कही गई हैं उन्हीं को पुनः दुहराया गया है। आरोपों को अंकित करते हुए की गई विभागीय कार्यवाही का उल्लेख किया गया है जबकि अपील/पुनर्विचार अभ्यावेदन के साथ नया तथ्य/साक्ष्य दिया जाना चाहिए था। जिस पर विचार कर दण्ड से संबंधित निर्णय लिया जाता परन्तु इस तरह का कोई तथ्य/साक्ष्य दृष्टिगोचर नहीं होता है। अतः श्री दास द्वारा समर्पित अपील/पुनर्विचार अभ्यावेदन किसी नए तथ्य के अभाव में विचारणीय बिन्दु के अधीन नहीं आता है।

अतः सम्यक विचारोपरान्त श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, डिहरी प्रमण्डल, डिहरी के अपील/पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।

वर्णित स्थिति में श्री विनोद कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता डिहरी प्रमण्डल, डिहरी के अपील/पुनर्विचार अभ्यावेदन को अस्वीकृत करते हुए उक्त निर्णय उन्हें संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।

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अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 223-571+10-ड(0ट(0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 28 February 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-02-28.223/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-02-28.223.