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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 04 March 2014

Published 04 March 2014

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-03-04.240
Languages
English, Hindi

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13131313 फा!गुफा!गुफा!गुफा!गुनननन 1111935935935935 ((((शशशश0000)))) पपपपटनाटनाटनाटना,,,, मंगलमंगलमंगलमंगलवारवारवारवार,,,, 4444 माच*माच*माच*माच* 2014201420142014 सं0 बाढ़ (मो0) सिं0 वि0-60/12—3390 सं0 बाढ़ (मो0) सिं0 वि0-60/12 जल संसाधन विभाग ------ संकल्प 16 दिसम्बर 2013

विषय:—लघु बाँध (जमींदारी बाँध सहित) के जीर्णोद्धार, रख

लघु बाँध (जमींदारी बाँध सहित) के जीर्णोद्धार, रख-रखाव, मरम्मती एवं निर्माण हेतु नीति

निर्माण हेतु नीति। बिहार राज्य प्राचीन काल से ही कृषि प्रधान रहा है एवं प्राकृतिक रूप से अनेक नदी/नालों का क्रीड़ा क्षेत्र भी बिहार राज्य प्राचीन काल से ही कृषि प्रधान रहा है एवं प्राकृतिक रूप से अनेक नदी/नालों का क्रीड़ा क्षेत्र भी बिहार राज्य प्राचीन काल से ही कृषि प्रधान रहा है एवं प्राकृतिक रूप से अनेक नदी/नालों का क्रीड़ा क्षेत्र भी रहा है। फलस्वरूप, यहाँ के निवासी जहाँ एक ओर सिंचाई के स्त्रोतों का अपने अर्जित अनुभवों एवं ज्ञान के अनुसार रहा है। फलस्वरूप, यहाँ के निवासी जहाँ एक ओर सिंचाई के स्त्रोतों का अपने अर्जित अनुभवों एवं ज्ञान के अनुसार रहा है। फलस्वरूप, यहाँ के निवासी जहाँ एक ओर सिंचाई के स्त्रोतों का अपने अर्जित अनुभवों एवं ज्ञान के अनुसार विकसित करने के उपायों पर क्रियाशील रहे, वहीं दूसरी अ ोर मानसून अवधि में बाढ़ कीे विभीषिका से जान-माल की विकसित करने के उपायों पर क्रियाशील रहे, वहीं दूसरी ओर मानसून अवधि में बाढ़ कीे विभीषिका से जान-माल की रक्षा हेतु भी यथासंभव प्रयास करते रहेे। इसी पृष्ठभूमि में पूर्व में स्थानीय जमींदारों द्वारा अथवा जन सहयोग से ग्रामीणों रक्षा हेतु भी यथासंभव प्रयास करते रहेे। इसी पृष्ठभूमि में पूर्व में स्थानीय जमींदारों द्वारा अथवा जन सहयोग से ग्रामीणों रक्षा हेतु भी यथासंभव प्रयास करते रहेे। इसी पृष्ठभूमि में पूर्व में स्थानीय जमींदारों द्वारा अथवा जन सहयोग से ग्रामीणों ध जमींदारी बाँध/महाराजी बाँध द्वारा समय-समय पर बाढ़ से सुरक्षा हेतु बाँधों का निर्माण कराया गया। मुख्यतः ये बाँ द्वारा समय-समय पर बाढ़ से सुरक्षा हेतु बाँधों का निर्माण कराया गया। मुख्यतः ये बाँध जमींदारी बाँध/महाराजी बाँध के नाम से लोकप्रिय हुए एवं बिहार के कई जिलों में बाढ़ सुरक्षा की रीढ़ साबित हुए हैं। के नाम से लोकप्रिय हुए एवं बिहार के कई जिलों में बाढ़ सुरक्षा की रीढ़ साबित हुए हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात्‌ जमींदारी प्रथा के समाप्त होने से इन बॉधों का स्वामित्व तो राज्य सरकार के स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात्‌ जमींदारी प्रथा के समाप्त होने से इन बॉधों का स्वामित्व तो राज्य सरकार के स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात्‌ जमींदारी प्रथा के समाप्त होने से इन बॉधों का स्वामित्व तो राज्य सरकार के अधीन आ गया, परन्तु उनके रख-रखाव के लि ए कोई अन्य कारगर प्रणाली विकसित न हो सकी। फलस्वरूप दिनोंदिन अधीन आ गया, परन्तु उनके रख-रखाव के लिए कोई अन्य कारगर प्रणाली विकसित न हो सकी। फलस्वरूप दिनोंदिन जमींदारी/महाराजी/अन्य बाँध जीर्ण-शीर्ण एवं उपेक्षित होते गए। हालॉकि स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप होने की जमींदारी/महाराजी/अन्य बाँध जीर्ण-शीर्ण एवं उपेक्षित होते गए। हालॉकि स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप होने की जमींदारी/महाराजी/अन्य बाँध जीर्ण-शीर्ण एवं उपेक्षित होते गए। हालॉकि स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप होने की वजह से इनकी उपयोगिता आज भी अक्षुण्ण है।जल संसाधन विभाग द्वारा जमींदारी बॉंधों को अपने विशिष्ट तकनीकी वजह से इनकी उपयोगिता आज भी अक्षुण्ण है।जल संसाधन विभाग द्वारा जमींदारी बॉंधों को अपने वजह से इनकी उपयोगिता आज भी अक्षुण्ण है।जल संसाधन विभाग द्वारा जमींदारी बॉंधों को अपने अनुभव एवं बजटीय उपबंध के तहत रख-रखाव एवं मरम्मती कार्य हेतु राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहर सरकार अनुभव एवं बजटीय उपबंध के तहत रख-रखाव एवं मरम्मती कार्य हेतु राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहर सरकार अनुभव एवं बजटीय उपबंध के तहत रख-रखाव एवं मरम्मती कार्य हेतु राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहर सरकार 06 से निर्गत संकल्प से सभी जमींदारी द्वारा प॰-9/सै - जमींदारी बाँध - 05/06-94(9) रा॰, पटना, दिनांक 02.02.06 से निर्गत संकल्प से सभी जमींदारी द्वारा प॰-9/सै - जमींदारी बाँध - 05/06-94(9) रा॰, पटना, दिनांक 02 ो हस्तान्तरित किया गया परन्तु जमींदारी बॉंधों का स्वामित्व पूर्ववत्‌ राजस्व एवं भूमि बॉंधों को जल संसाधन विभाग को हस्तान्तरित किया गया परन्तु जमींदारी बॉंधों का स्वामित्व पूर्ववत्‌ राजस्व एवं भूमि ो हस्तान्तरित किया गया परन्तु जमींदारी बॉंधों का स्वामित्व पूर्ववत्‌ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का ही रखा गया ।उक्त संकल्प के आलोक में जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में कुल 374 अदद जमींदारी बाँधों की पहचान उक्त संकल्प के आलोक में जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में कुल 374 अदद जमींदारी बाँधों की पहचान उक्त संकल्प के आलोक में जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य में कुल 374 अदद जमींदारी बाँधों की पहचान कर चार चरणों में उनके जीर्णाेद्धार की योजनाओं पर कार्यान्वयन की कार्रवाई की गयी है । बिहार राज्य के सभी पर कार्यान्वयन की कार्रवाई की गयी है । बिहार राज्य के सभी कर चार चरणों में उनके जीर्णाेद्धार की योजनाओं जमींदारी (लघु) बाँधों का 'कोर नेटवर्क' (Core Network) तैयार करते हुये एवं उनकी उपयोगिता के अनुसार उनके जमींदारी (लघु) बाँधों का 'कोर नेटवर्क' ( ) तैयार करते हुये एवं उनकी उपयोगिता के अनुसार उनके जीर्णाेद्धार, रख-रखाव, मरम्मती एवं निर्माण संबंधी एक राज्य स्तरीय नीति पर राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की बैठक में दिनांक जीर्णाेद्धार, रख-रखाव, मरम्मती एवं निर्माण संबंधी एक राज्य स्तरीय नीति पर राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की जीर्णाेद्धार, रख-रखाव, मरम्मती एवं निर्माण संबंधी एक राज्य स्तरीय नीति पर राज्य मंत्रिपरिषद्‌ की ाागीय संलेख ज्ञापांक-2647 दिनांक 29.11.2013 में दिये गये प्रस्ताव को मद संख्या-04 के द्वारा 2013 में दिये गये प्रस्ताव को मद संख्या-04 के द्वारा 10.12.2013 को विभागीय संलेख ज्ञापांक-2647 दिनांक लघु बॉंध नीति की प्रति स्वीकृति प्रदान की गयी है । मंत्रिपरिषद्‌ के उक्त निर्णय के आलोक में बिहार राज्य लघु बॉंध नीति की प्रति स्वीकृति प्रदान की गयी है । मंत्रिपरिषद्‌ के उक्त निर्णय के आलोक में बिहार राज्य परिशिष्ट-1 के रूप में संलग्न है । उक्त नीति के प्रमुख अवयव निम्न हैः- उक्त नीति के प्रमुख अवयव निम्न हैः- 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 4 माच* 2014 1.0 नामकरण :- नदी-नालों पर बने जमींदारी/महाराजी एवं ऐसे अन्य बाँध जो समय-समय पर मुख्यतः बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से ग्रामीणों द्वारा परम्परागत रूप से स्थानीय तौर पर बनाए गए हैं, को अब 'लघु बाँध' के रूप में जाना जाएगा। 2.0 वैसे 374 लघु बाँध, जो सरकार के संकल्प (वर्ष 2006) के अनुपालन के क्रम में जल संसाधन विभाग को चार चरणों में हस्तानान्तरित किए गए थ,े का जीर्णाेद्धार एवं रख-रखाव जल संसाधन विभाग के द्वारा किया जाएगा। इन बॉंधों का जीर्णोद्धार/रख-रखाव/मरम्मति कार्य राज्य योजना मद की निधि से ही किए जायेंगे और इसपर मनरेगा के माध्यम से कार्य नहीं कराया जायेगा (सूची संलग्न, परिशिष्ट-2)।

3.0 उपर्युक्त कंडिका 2.0 में वर्णित बॉंधों को छोड़कर अन्य सभी लघु बॉंधों के जीर्णोद्धार का कार्य ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा के माध्यम से किया जाएगा । जल संसाधन विभाग द्वारा इस कार्य में तकनीकी सहयोग यथा प्राक्कलन तैयार करने तथा पर्यवेक्षण का कार्य किया जाएगा। इस कार्य हेतु जॉंब कार्ड, ई-मास्टर रौल तैयार कर भुगतान करने का कार्य ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जाएगा। जल संसाधन विभाग के क्षेत्रीय अभियंता ग्रामीण विकास विभाग के पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए उनके अनुदेशों का उसी प्रकार अनुपालन करेंगे जैसा कि वे जल संसाधन विभाग के अनुदेशों का अनुपालन करते हैं । मुख्य रूप से बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों हेतु बने लघु बॉंध पर बाढ़ अवधि में बाढ़ संघर्षात्मक कार्य जल संसाधन विभाग द्वारा किया जाएगा ।

पूर्व के निर्मित इन लघु बाँधों का यथासंभव वैज्ञानिक तरीके से तकनीकी मापदण्ड पर उपलब्ध भूमि में ही जीर्णाेद्धार एवं मरम्मती कराया जाएगा।

4.0 सभी लघु बाँधों की पहचान कर कोर-नेटवर्क तैयार किया जाएगा, ताकि समेकित रूप से प्राथमिकता तैयार करते हुए उनका जीर्णाेद्धार, रख-रखाव एवं मरम्मती किया जा सके। इसके लिए राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (NIC) का सहयोग लिया जाएगा।

5.0 भूमि-अधिग्रहण :- लघु बाँधों के लिए भूमि-अधिग्रहण सामान्यतः नहीं किया जाएगा। विशेष परिस्थिति में, अगर अत्यावश्यक हो तो, सरकार से स्वीकृति प्राप्त कर ही भूमि-अधिग्रहण किया जा सकेगा।

6.0 मिट्टी कटाई :- सामान्यतः स्थानीय मिट्टी का ही उपयोग किया जाएगा। मिट्टी नदी/पईन के तल से ही लिया जाएगा, ताकि बाँधों की मरम्मती के साथ-साथ तल के गाद की सफाई भी हो सके। लघु बाँधों की मरम्मती एवं जीर्णोद्धार इस प्रकार से किया जाएगा कि आवश्यक मिट्‌टी नदी-नालों के तल से ही प्राप्त हो जाए। विशेष परिस्थिति में यदि आवश्यक हो तो उक्त बाँध के लिए मिट्‌टी की कटाई अन्य स्थानों से की जाएगी।

6.1 फ्री बोर्ड (Free Board) :- लघुु बाँधों के लिए बाँध का शीर्षतल उच्चतम बाढ़ स्तर से 0.30 से 0.60 मीटर उँचा होगा। स्थानीय ग्रामीणों से पूछ-ताछ/प्रमाणोेंं के आधार पर आकलित उच्चतम जलस्तर को मान्यता दी जायेगी ।

6.2 साइड स्लोप :- बाँध के लिए उपलब्ध भूमि एवं हाइड्रोलिक ग्रेडिएण्ट लाईन पर पर्याप्त मिट्‌टी आच्छादन (cover) को ध्यान में रखते हुए यथोचित साईड स्लोप निर्धारित किया जाएगा।

6.3 आउटलेट/स्लूईस गेट :- आवश्यकतानुसार सिंचाई/जल निकासी के लिए फाटक सहित आउटलेट (Outlet)/इनलेट (Inlet)/ स्लूईस गेट का प्रावधान/निर्माण किया जाएगा।

7.0 लघु बाँध से संबंधित योजनाओं के स्वरूप, उपयोग एवं उनके रख-रखाव पर लाभान्वित ग्रामों, पंचायतों एवं स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधियों की आवश्यकतानुसार भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी।

8.0 इस नीति के अंतर्गत प्रावधानों की व्याख्या एवं इसके अमल के दौरान उत्पन्न समस्याओं के समाधान हेतु जल संसाधन विभाग सक्षम होगा ।

9.0 यह संकल्प निर्गत तिथि से लागू होगा।

आदेषः-आदेष दिया जाता है कि इस संकल्प को बिहार राज्य के असाधारण अंक में तुरत प्रकाषित किया जाय और इसकी प्रति सरकार के सभी विभाग/ विभागाध्यक्षों/सभी प्रमंडलीय आयुक्त/सभी जिला पदाधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवष्यक कार्रवाई हेतु अग्रसारित किया जाय ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से अरूण कुमार ंिसंह, सरकार के प्रधान सचिव।

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अधी.क, सिचवालय मुिणालय,(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 240-571+1000-ड,0ट,0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 04 March 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-03-04.240/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-03-04.240.