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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 07 March 2014

Published 07 March 2014

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-03-07.264
Languages
English, Hindi

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áòeââàÜ=äÑéç=^= áòeââàÜ=äÑéç=^2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 बिहार अग्निशमन सेवा विधेयक, 2014 [Ñç∫ä∫Ñç∫CMR]OMNQ⁄ प्रस्तावना - बिहार राज्य में अग्निशमन के बेहतर विनियमन एवं अग्निशमन उपायों के कार्यान्वन करने, बिहार अग्निशमन सेवा को किसी भवन में अग्नि सुरक्षा लागू करने तथा सभी प्रकार के भवनों, परिसरों और अस्थायी संरचनाओं में प्रभावी अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा लागू करने एवं बिहार अग्निशमन सेवा के आधुनिक संगठनात्मक संरचना हेतु उपबंध करने के लिए विधेयक। भारत गणराज्य के पैसठवें वर्ष में बिहार राज्य विधान मंडल द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :- 1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ। (1) यह अधिनियम बिहार अग्निशमन सेवा अधिनियम, 2014 कहा जा सकेगा।

(2) इसका विस्तार संपूर्ण बिहार राज्य में होगा। (3) यह उस तिथि से किसी क्षेत्र में प्रवृत्त होगा जिसे सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करें और विभिन्न क्षेत्रों के लिए एवं इस अधिनियम के विभिन्न उपबंधों के लिए विभिन्न तिथियाँ नियत की जा सकेंगी।

अध्याय-I प्रारंभिक

2. परिभाषाएँ।-इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-

(क) ''अपीलीय प्राधिकार'' से अभिप्रेत हैं, बिहार राज्य के राज्यपाल द्वारा नियुक्त अग्निशमन सेवा, बिहार सरकार के महानिदेशक;

(ख) ''भवन'' से अभिप्रेत है, कोई भी संरचना चाहे वह राजगीरी ईटों, लकड़ियों, मिट्टी, धातु या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो और जिसमें सीमा दीवाल से अन्यथा भवन, उपभवन, तहखाना, भूमिगत पड़ाव, शौचालय, मूत्रालय, सायबान, झोपड़ी या दीवाल आदि सम्मिलित हैं;

(ग) ''भवन उपविधि'' से अभिप्रेत है, बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के अधीन बनाई गयी उपविधि;

(घ) ''निदेशक'' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम की धारा-8 की उप-धारा (1) के अधीन सरकार द्वारा नियुक्त निदेशक, बिहार अग्निशमन सेवा;

(ङ) ''पंडाल लगाने वालों'' से अभिप्रेत है, ऐसा व्यक्ति या व्यक्तियों का संघ चाहे वह निगमित हो या अन्यथा, जो नियमित या स्थायी आधार पर लोगों के अधिवास के लिए कोई पंडाल या कोई संरचना खड़ा करता या बनाता हो;

(च) ''अग्निशमन खंड'' से अभिप्रेत है, बिहार राज्य में यथाविहित अग्निशमन उपखंड की संख्या जो इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ एक अग्निशमन खंड होना सरकार द्वारा सामान्यतः या विशेषतः घोषित किया गया;

(छ) ''अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा उपाय'' से अभिप्रेत है ऐसे उपाय जो कि अग्नि प्रकोप की स्थिति में और इस निमित्त बनाई गई नियमावली में यथाविनिर्दिष्ट जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और अग्नि के संरोधन, नियंत्रण एवं शमन हेतु भवन उपविधि एवं भारतीय राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुसार आवश्यक हो;

(ज) ''प्रमंडलीय अग्निशमन पदाधिकारी'' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम की धारा-9 के अधीन बिहार सरकार द्वारा नियुक्त पदाधिकारी;

(झ) ''सहायक प्रमंडलीय अग्निशमन पदाधिकारी'' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम की धारा-9 के अधीन महानिदेशक, अग्निशमन सेवा द्वारा नियुक्त पदाधिकारी;

() ''अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी'' से अभिप्रेत है, कतिपय परिसरों एवं भवनों के स्वामियों एवं अधिभोगियों द्वारा, ऐसे परिसरों एवं भवनों में अग्नि निवारण एवं संस्थापित अग्नि सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने हेतु, इस अधिनियम की धारा-29 के अधीन इस निमित्त यथाविनिर्दिष्ट अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी के रूप में नियुक्त व्यक्ति ;

(ट) ''अग्निशमन पदाधिकारी'' से अभिप्रेत है, अग्निशमन सेवा का कार्यचालन पदाधिकारी; (ठ) ''अग्निशमन सेवा'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम की धारा-5 के अधीन गठित बिहार अग्निशमन सेवा;

3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014

(ड) ''दमकल केन्द्र'' से अभिप्रेत है व्यवस्थित किया गया एक ऐसा भवन जिसमें आग बुझाने वाला उपकरण, साधित्र और कर्मचारी हों और जो इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ सरकार द्वारा सामान्यतः या विशेषतः दमकल केन्द्र के रूप में घोषित हो;

(ढ़) ''अग्निशमन उप-खंड'' से अभिप्रेत है राज्य के अग्निशमन खंड के अंतर्गत ऐसा प्रभाग जिसमें यथाविनिर्दिष्ट दमकल केन्द्रों की संख्या समावेशित हों और जो इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ सरकार द्वारा सामान्यतः या विशेष रूप से अग्निशमन उप-खंड के रूप में घोषित हों;

(ण) ''सरकार'' से अभिप्रेत है बिहार सरकार; (त) ''राज्यपाल'' से अभिप्रेत है संविधान के अनुच्छेद 155 के अधीन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त बिहार का राज्यपाल;

(थ) ''सदस्य, अग्निशमन सेवा'' से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन अग्निशमन सेवा में नियुक्त कोई व्यक्ति;

(द) ''बहुमंजिली भवन'' से अभिप्रेत है ऐसा न्यूनतम ऊँचाई वाला भवन जो इस निमित्त नियमावली के अधीन विहित और स्थानीय प्राधिकार द्वारा निदेशक को अधिसूचित किया जाय;

(ध) ''नाम निर्दिष्ट प्राधिकारी'' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ नाम निर्दिष्ट प्राधिकारी के रूप में निदेशक द्वारा नियुक्त दमकल केन्द्र अधिकारी से अन्यून पंक्ति का कोई पदाधिकारीे;

(न) ''अधिभोगी'' से अभिप्रेत है मुख्य अधिभोगी जिसके लिए किसी भवन या भवन को किसी भाग का सहायक अधिभोगों सहित जो उसपर समाहित हो, उपयोग किया जाता हो या उपयोग किए जाने हेतु आशयित हो;

(प) ''अधिभोगी'' में सम्मिलित है-

(i) कोई व्यक्ति, जो तत्समय स्वामी को भूमि या भवन या उसके किसी भाग के किराये का भुगतान कर रहा हो या उसका भुगतान करने का दायी हो और वह भूमि या भवन जिसके संबंध में ऐसे किराये का भुगतान किया गया हो या भुगतेय हो;

(ii)अपनी भूमि या भवन का कोई अधिभोगी स्वामी या अपनी भूमि या भवन का अन्यथा उपयोग करने वाला कोई स्वामी;

(iii) किसी भूमि या भवन का किरायामुक्त किरायेदार; (iv) किसी भूमि या भवन का अधिभोगी अनुज्ञप्तिधारी; और (v) ऐसा कोई व्यक्ति, जो किसी भूमि या भवन के उपयोग और अधिभोग के लिए स्वामी को क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का दायी होगा।

(फ) ''प्रभारी पदाधिकारी'' से अभिप्रेत है दमकल केन्द्र का प्रभारी अग्निशमन पदाधिकारी; (ब) ''अग्निशमन सेवा का कार्यचालन सदस्य'' से अभिप्रेत है अग्निशमन सेवा का कोई सदस्य जो अग्नि स्थल पर अग्निशामक वाहन, अग्निशामक उपकरण एवं साधित्र ले जाने और अग्नि के वास्तविक शमन में भाग लेने हेतु अपेक्षित हो;

(भ) ''स्वामी'' में सम्मिलित है, कोई व्यक्ति जो तत्समय किसी भूमि या भवन का किराया सीधे अपने खाता में या किसी अन्य के खाता के माध्यम से प्राप्त करने का हकदार हो या कोई अभिकर्त्ता, न्यासी, संरक्षक, प्रापक या कोई अन्य व्यक्ति जो किराया प्राप्ति दिखावें या किराया प्राप्ति का हकदार हो यदि भूमि या भवन या उसका कोई भाग किराया पर दिया गया हो, और इसमें सम्मिलित हैं बिहार मकान (पटटा, किराया और बेदखली) नियंत्रण अधिनियम, 1982 एवं नियमावली, 1983 यथासंशोधित और अन्य सुसंगत अधिनियम एवं नियमावली के अधीन निष्क्रांत सम्पत्ति के संबंध में निष्क्रांत सम्पत्ति अभिरक्षक;

(म) 'पंडाल' से अभिप्रेत है एक अस्थायी संरचना, जिसकी छत या दीवारें पुआल, सूखी घास, बड़ी घास, गॉलपट्‌टा, चर्मखाल, चटाई, कैनवास, कपड़ा या स्थायी या निरन्तर अधिभोग हेतु न अपनायी गई इसी तरह का अन्य सामग्री से जो निर्मित हो;

4

(cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 (य) 'परिसर' से अभिप्रेत है, कोई भूमि या भवन या भवन का कोई भाग जिसमें भवन या भवन के किसी भाग से सम्बद्ध वाटिका-स्थल और उपभवन भी यदि कोई हो, सम्मिलित हैं; और कोई भूमि या भवन या उससे संलग्न जो विस्फोटकों, विस्फोटक पदार्थ एवं खतरनाक रूप से ज्वलनशील पदार्थ के भंडारण हेतु प्रयुक्त किए जाते हों;

स्पष्टीकरण- इस खंड में, ''विस्फोटक'', ''विस्फोटक पदार्थ'' और ''खतरनाक रूप से ज्वलनशील पदार्थ'' के अर्थ वहीं होंगे जो ''विस्फोटक अधिनियम, 1884 (1884 का 4), विस्फोटक (पदार्थ) अधिनियम, 1908 (1908 का 6) और ज्वलनशील पदार्थ अधिनियम, 1952 (1952 का 20) में क्रमशः उनके प्रति समनुदेशित किए गये होेें।

(क क) ''विहित'' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के अधीन बनाई गयी नियमावली द्वारा विहित; (क ख) ''विहित प्राधिकार'' से अभिप्रेत है, इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी नियमावली द्वारा विहित प्राधिकार;

(क ग) ''अनुमण्डल दंडाधिकारी'' से अभिप्रेत है, दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का 2) की धारा-20 की उप-धारा (4) के अधीन ''अनुमण्डल दंडाधिकारी'' के रूप में नियुक्त सरकार का एक पदाधिकारी;

(क घ) ''अधीनस्थ कार्यचालन कर्मचारी'' में सम्मिलित हैं- अग्निक/अग्निक चालक, प्रधान अग्निक/ प्रधान अग्निक चालक और कोई अन्य समतुल्य पंक्ति का अग्निशमन सेवा का प्रत्येक सदस्य;

(क ङ) ''दमकल केन्द्र पदाधिकारी'' से अभिप्रेत है, सरकार/महानिदेशक, अग्निशमन सेवा द्वारा दमकल केन्द्र पदाधिकारी के रूप में नियुक्त अग्निशमन सेवा का पदाधिकारी;

(क च) ''अग्निशमन परामर्र्शी और अग्निशमन सलाहकार'' से अभिप्रेत है, कम से कम दस वर्षों का अनुभव वाला अग्निशमन अभियंत्रण स्नातक या एम.आई. अग्निशमन अभियंत्रण या समकक्ष की न्यूनतम तकनीकी अर्हता धारण करने वाला व्यक्ति।

अध्याय-II अग्निशमन सेवा का संगठन, अधीक्षण, नियंत्रण एवं अनुरक्षण 3. पूरे बिहार के लिए एक अग्निशमन सेवा।-पूरें बिहार के लिए एक अग्निशमन सेवा होगी और अग्निशमन सेवा के सभी पदाधिकारी और अधीनस्थ पंक्ति के कर्मचारी बिहार के किसी भी भाग में पदस्थापन के दायी होंगे ;

परन्तु, यह प्रावधान स्वामी या अधिभोगी के विनिर्दिष्ट भवन या उद्योग को अग्नि सुरक्षा कवरेज प्रदान करने वाली अनुरक्षित निजी अग्निशमन सेवाओं पर लागू नहीं होगा।

4. पर्यवेक्षण महानिदेशक, अग्निशमन सेवा में निहित होना।-बिहार भर में अग्निशमन सेवा का अधीक्षण एवं नियंत्रण निदेशक, राज्य अग्निशमन सेवा द्वारा या सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित अन्य पदाधिकारी द्वारा सहायता प्राप्त महानिदेशक, अग्निशमन सेवा में निहित होगा।

5. अग्निशमन सेवा का गठन।-इस अधिनियम के उपबंधों के अध्यधीन,

(क) अग्निशमन सेवा विभिन्न पंक्तियों के पदों की उस संख्या से मिलकर बनी होगी और उसका वैसा संगठन एवं वैसी शक्तियां, कृत्य और कर्त्तव्य होंगे जो सरकार द्वारा सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, विनिश्चित किये जाय, और

(ख) अग्निशमन सेवा में भर्त्ती, अग्निशमन सेवा के सदस्यों के वेतन, भत्ते और सभी अन्य सेवा-शर्त्ते वही होंगी जो विहित की जाय ।

6. अग्निशमन सेवा के पदों का वर्गीकरण।-अग्निशमन सेवा के पदों का वर्गीकरण यथानिम्नवत होगाः (1) ग्रुप 'क' के पद से अभिप्रेत है, कोई भी पद, जो, इसके वेतनमान का घ्यान रखते हुए ऐसा पद राज्य सरकार में रहा हो, और जो सरकार द्वारा, समय-समय पर, निर्गत आदेशों के अनुसार राज्य सरकार के अधीन ग्रुप 'क' के रूप में वर्गीकृत किया गया हो।

(2) ग्रुप 'ख' के पद से अभिप्रेत है, कोई भी पद, जो, इसके वेतनमान एवं परिलब्धियों का घ्यान रखते हुये, ऐसा पद राज्य सरकार में रहा हो, और जो सरकार द्वारा, समय-समय पर, निर्गत आदेशों के अनुसार ग्रुप 'ख' के रूप में वर्गीकृत किया गया हो।5 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 (3) ग्रुप 'ग' के पद से अभिप्रेत है, कोई भी पद जो, इसके वेतनमान एवं परिलब्धियों का घ्यान रखते हुये ऐसा पद राज्य सरकार में रहा हो, और जो सरकार द्वारा, समय-समय पर, निर्गत आदेशों के अनुसार ग्रुप 'ग' के रूप में वर्गीकृत किया गया हो।

(4) ग्रुप 'घ' के पद से अभिप्रेत है, कोई भी पद, जो, इसके वेतनमान एवं परिलब्धियों का घ्यान रखते हुये, ऐसा पद राज्य सरकार में रहा हो और जो सरकार द्वारा, समय-समय पर, निर्गत आदेशों के अनुसार ग्रुप 'घ' के रूप में वर्गीकृत किया गया हो।

7. अग्निशमन सेवा के ग्रुप 'क' एवं ग्रुप 'ख' के पदों पर नियुक्तियाँं।- सरकार बिहार लोक सेवा आयोग के परामर्श के पश्चात्‌ ही या बिहार सरकार के सुसंगत मार्गदर्शन के अनुसार, धारा-6 की क्रमशः उप-धारा (1) और उप-धारा (2) के अर्थ के अंतर्गत, ग्रुप 'क' या ग्रुप 'ख' के पदों पर नियुक्ति करेगी। 8. बिहार अग्निशमन सेवा के निदेशक की नियुक्ति।-(1) बिहार में अग्निशमन सेवा के निदेशों एवं पर्यवेक्षण के लिए, सरकार किसी अग्निशमन पदाधिकारी को निदेशक के रूप में नियुक्त करेगी, जो इस अधिनियम के द्वारा या इसके अधीन यथाविनिर्दिष्ट शक्तियों का प्रयोग एवं कर्त्तव्यों तथा अन्य कृत्यों का अनुपालन करेंगे।

(2) सरकार द्वारा इस संबंध में बनायी गयी नियमावली के अध्यधीन, निदेशक बिहार राज्य अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड या किसी अन्य चयन प्राधिकार, जिसे सरकार, अधिसूचना द्वारा, विहित करें की अनुशंसाओं पर ही इस कोटि के, कार्य संचालन सदस्यों सहित, ग्रुप 'ग' स्तर के अधीनस्थ कर्मचारियों की नियुक्ति, सरकार द्वारा यथानियत मासिक वेतनों एवं भत्तों पर कर सकेंगे।

(3) सरकार द्वारा इस संबंध में बनायी गयी नियमावली के अध्यधीन, निदेशक, इस कोटि के कार्य संचालन सदस्यों सहित ग्रुप 'घ' के कर्मचारियों की नियुक्ति, सरकार द्वारा यथानियत मासिक वेतनों और ऐसे भत्तों पर, कर सकेगी। 9. अग्नि प्रमंडल, अनुमंडल तथा दमकल केन्द्र का गठन।- सरकार (क) बिहार राज्य में अग्नि क्षेत्रों तथा अग्नि प्रमण्डलों का गठन कर सकेगी ; (ख) ऐसे अग्नि क्षेत्रों को अग्नि प्रमण्डलों में तथा अग्नि प्रमण्डलों को अग्नि अनुमण्डलों में विभाजित कर सकेगी और अग्नि प्रमण्डलों, अग्नि अनुमण्डलों तथा दमकल केन्द्रों को क्रमशः अग्नि क्षेत्र, अग्नि प्रमण्डल तथा अग्नि अनुमण्डल में विनिर्दिष्ट कर सकेगी; और

(ग) प्रशासन तथा प्रचालन दक्षता के लिए अग्नि प्रमण्डलों, अग्नि अनुमण्डलों तथा दमकल केन्द्रों की यथावश्यक सीमाओं और विस्तार को परिभाषित कर सकेगी।

10. नियुक्ति दक्षता प्रमाण-पत्र।-(1) उपाधिकारी और उससे नीचे की पंक्ति का प्रत्येक अग्निशमन पदाधिकारी नामांकित होने पर नियुक्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करेगा।

(2) प्रमाण-पत्र उस पदाधिकारी की मुहर के अधीन और उस प्रारूप में निर्गत किया जायेगा जिसे महानिदेशक, अग्निशमन सेवा द्वारा, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा विहित किया जायेगा ।

(3) नियुक्ति प्रमाण-पत्र रद्द हो जाएगा जब उसमें नामनिर्दिष्ट व्यक्ति अग्निशमन सेवा का न रह जाय अथवा जब व्यक्ति अग्निशमन सेवा से निलंबित हो जाता है, कालावधि के दौरान प्रर्वतन में नहीं रहेगा । (4) अग्निशमन सेवा के सदस्य ऐसे सभी नियमों द्वारा शासित होंगे जो सरकारी सेवकों पर, उनकी सेवा के निबंधन और शत्र्तो तथा सभी अन्य सहबद्ध विषयों के संबंध में, लागू हों, मामलों के संबंध में लागू नियमों द्वारा शासित होंगे।

11. अग्निशमन पदाधिकारी के निलंबन का प्रभाव।-अग्निशमन पदाधिकारी में निहित शक्तियाँ, कृत्य तथा विशेषाधिकार स्थगित रहेंगे जब ऐसा अग्निशमन पदाधिकारी के निलंबन के अधीन हो ; परंतु ऐसे निलंबन के होते हुये भी ऐसे व्यक्ति का अग्निशमन पदाधिकारी बना रहना समाप्त नहीं होगा तथा वह उन्हीं प्राधिकारियों के नियंत्रण के अध्यधीन बना रहेगा जिनके अधीन वह बना रहता यदि वह निलंबन के अधीन नहीं रहता।6 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 12. निदेशक की सामान्य शक्तियाँ।-महानिदेशक, अग्निशमन सेवा के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के अध्यधीन रहते हुए निदेशक अग्निशमन के समस्त उपकरणों, मशीनरी और साधित्रों, प्रशिक्षण, व्यक्तियों एवं घटनाओं के पारस्परिक संबंधों का संप्रेक्षण, कार्यों का बँटवारा, विधियों, आदेशों तथा कार्यवाहियों के ढ़ंगों का अध्ययन और कार्यपालिका विवरण के सभी विषयों या उसके अधीन अग्निशमन सेवा के अग्निशमन पदाधिकारियों तथा सदस्यों के कर्तव्यों को पूरा करने तथा अनुशासन बनाए रखने का निदेश देगा तथा उन सभी विषयों को विनियमित करेगा।

अध्याय-III

अग्निशमन सेवा का नियंत्रण और अनुशासन

13. विवरणियों (रिटर्न), प्रतिवेदनों, विवरणों (स्टेटमेण्ट्‌स) आदि की माँग।- सरकार अग्नि रोधन तथा अग्नि सुरक्षा, निदेशक, अग्निशमन पदाधिकारियों, कार्यचालन सदस्यों तथा सदस्य एवं सहायक कार्यचालन कर्मचारियों से संबंधित किसी विषय पर विवरणियों, प्रतिवेदनों और विवरणों की माँग कर सकेगी और इन्हें तत्‌काल भेजा जाएगा।

14. अग्निशमन सेवा के कर्मचारियों पर लागू कतिपय राजकीय नियम।-बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 तथा बिहार पेंशन नियमावली 1950, समय-समय पर यथा संशोधित, के उपबंध, यथा आवश्यक परिवर्तनों सहित, बिहार अग्निशमन सेवा के सभी कर्मचारियों, जिसमें अग्निशमन पदाधिकारी, कार्यचालन सदस्य, सदस्य एवं सहायक कार्यचालन कर्मचारी शामिल हैं, पर लागू होंगे।

15. अग्निशमन पदाधिकारी हमेशा काम पर समझे जाएँगे तथा राज्य के किसी भाग में नियोजन हेतु उत्तरदायी होना।-प्रत्येक अग्निशमन पदाधिकारी इस अधिनियम के समस्त प्रयोजनों के लिए हमेशा कत्र्तव्य (ड्‌यूटी) पर समझा जाएगा और राज्य के किसी भाग में कार्य के लिए आवंटित प्रत्येक अग्निशमन पदाधिकारी या अग्निशमन पदाधिकारियों के दल या किसी सदस्य को, यदि निदेशक का ऐसा निदेश हो, बिहार के किसी अन्य भाग में जब तक अग्निशमन पदाधिकारी या अग्निशमन पदाधिकारियों के दल या किसी सदस्य की आवश्यकता रहेगी, राज्य के किसी भाग में किसी भी समय काम पर लगाया जा सकेगा। 16. अग्निशमन सेवा के कर्मचारियों पर मौलिक नियमावली तथा अनुपूरक नियमावली का विस्तार।- मौलिक नियमावली और अनुपूरक नियमावली बिहार सरकार द्वारा समय-समय पर यथा संशोधित, के उपबंध, यथावश्यक परिवर्तनों सहित बिहार अग्निशमन सेवा के सभी कर्मचारियों, जिनमें अग्निशमन पदाधिकारी, कार्यचालन सदस्य एवं अधीनस्थ कार्यचालन कर्मी शामिल हैं, तक विस्तारित होंगे। 17. अग्निशमन सेवा को समुदाय की आवश्यक सेवा घोषित किया जाना।-(1) तत्‌समय लागू विषयक पर किसी अन्य विधि के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अग्निशमन सेवा को समुदाय की आवश्यक सेवा घोषित कर सकेगी।

(2) उप-धारा (1) के अधीन की गयी घोषणा प्रथमतः छः महीने के लिए लागू रहेगी किन्तु इसी प्रकार की अधिसूचना द्वारा समय-समय पर इसे विस्तारित किया जा सकेगा।

(3) उप-धारा (1) के अधीन की गयी घोषणा होने पर और जब तक यह लागू रहेगा तब तक प्रत्येक अग्निशमन पदाधिकारी का, घोषणा में विनिर्दिष्ट सेवा से संबंधित किसी नियोजन के संबंध में किसी वरीय पदाधिकारी के आदेश का पालन करना, कत्र्तव्य होगा।

18. कर्तव्य के अतिक्रमण के लिए शास्ति।- इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन की जा सकनेवाली किसी कार्रवाई के होते हुए भी, अग्निशमन सेवा का कोई सदस्य जो-

(क) इस अधिनियम के किसी उपबंध अथवा इसके अधीन बनाए गये किसी नियम अथवा आदेश का, जानबूझकर भंग करने अथवा अतिक्रमण करने का दोषी पाया जाए; अथवा

(ख) भीरूता का दोषी पाया जाए; अथवा (ग) पन्द्रह दिनों अथवा उससे अधिक का पूर्व नोटिस दिये बिना अथवा अनुमति के बिना अपने पदीय कर्त्तव्य से अनुपस्थित या अलग रहता हो, अथवा7 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 (घ) छुट्टी के कारण अनुपस्थित रहने पर, ऐसी छुट्टी की समाप्ति के बाद युक्तियुक्त कारण के बिना कार्यभार ग्रहण करने में असफल रहता हो;

(ङ) बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के उपबंध के उल्लंघन में कोई नियोजन अथवा पद स्वीकार करता हो अथवा अपने को कारबार में लगाता हो;

कारावास से, जो तीन महीने तक बढ़ाया जा सकेगा अथवा जुर्माना से, जो उस सदस्य के तीन महीने के वेतन से अनधिक राशि तक बढ़ाया जा सकेगा अथवा दोनों से दंडनीय होगा। 19. संघ आदि गठित करने के अधिकार संबंधी प्रतिबंध।-(1) अग्निशमन सेवा का कोई सदस्य सरकार अथवा विहित प्राधिकार की लिखित रूप में पूर्व मंजूरी के बिना-

(क) किसी संघ, श्रमिक संघ, राजनीतिक संघ का सदस्य नहीं होगा अथवा किसी तरह से टे्रड यूनियन, श्रमिक संघ अथवा राजनीतिक संघ से सहयुक्त नहीं होगा;

(ख) किसी सामाजिक संस्था, संघ अथवा संगठन, जो अग्निशमन सेवा के भाग के रूप में मान्यता प्राप्त न हो अथवा जो विशुद्ध रूप से सामाजिक, तकनीकी, मनोरंजक अथवा धार्मिक प्रकृति का न हो, का सदस्य नहीं होगा अथवा उससे सहयुक्त नहीं होगा; अथवा

(ग) कोई पुस्तक, पत्र अथवा अन्य दस्तावेज प्रेस को संसूचित अथवा प्रकाशित करेगा अथवा प्रकाशित नहीं करवाएगा सिवाय जहॉ ऐसी संसूचना अथवा प्रकाशन उसके कर्त्तव्यों के वास्तविक निर्वहन में हो अथवा विशुद्ध रूप से साहित्यिक, कलात्मक अथवा वैज्ञानिक प्रकृति का हो।

स्पष्टीकरण।-(1) यदि कोई प्रश्न उठे कि इस उप-धारा के खंड (ख) के अधीन क्या कोई संघ, सोसाइटी, संस्था, संगठन विशुद्ध रूप से सामाजिक, तकनीकी, मनोरंजक अथवा धार्मिक प्रकृति का है, तो इस पर सरकार का विनिश्चय अंतिम होगा।

(2) अग्निशमन सेवा का कोई भी सदस्य किसी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों द्वारा किसी राजनीतिक प्रयोजन या यथा विहित ऐसे अन्य प्रयोजनों के लिए आयोजित किसी प्रदर्शन में भाग नहीं लेगा अथवा किसी बैठक में न तो भाग लेगा अथवा न उसे संबोधित करेगा।

अध्याय-IV

अग्निशमन कर, फीस और अन्य प्रभारों का उद्‌ग्रहण

20. अग्निशमन कर का उद्‌ग्रहण।-(1) सरकार उन भूमि और भवनों पर अग्निशमन कर उद्‌गृहीत कर सकेगी जो किसी ऐसे क्षेत्र में अवस्थित हों जहाँ यह अधिनियम लागू हो और जिस पर उस क्षेत्र के स्थानीय प्राधिकार द्वारा संपत्ति-कर, चाहे जिस किसी नाम से जाना जाय, उद्‌गृहीत किया जाता हो।

(2) अग्निशमन कर संपत्ति-कर पर अधिभार के रूप में ऐसी दर से ऐसे संपत्ति कर के प्रतिशत के रूप में उद्‌गृहीत किया जाएगा जो सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अवधारित करे। 21. अग्निशमन-कर के निर्धारण, संग्रहण आदि का ढंग।-(1) कर-क्षेत्र की विधि के अधीन प्राधिकृत करनेवाले प्राधिकार के अधीन संपत्ति-कर के भुगतान के निर्धारण, संग्रहण और लागू करने के लिए सशक्त प्राधिकार, सरकार की ओर से और इस अधिनियम के अधीन बनायी गयी किसी नियमावली के अधीन रहते हुये, उसी रीति से भुगतान का निर्धारण, संग्रहण करेगा और लागू करेगा जिस रीति से संपत्ति-कर निर्धारित, संदत्त और संग्रहीत होता हैं और इस प्रयोजनार्थ वे उन शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं जो उन्हें उपर्युक्त विधि द्वारा प्रदत्त हैं तथा ऐसी विधि के उपबंध जिसके अंतर्गत विवरणी, अपील, पुनर्विलोकन, निर्देश और शास्ति से संबंधित उपबंध हैं, तदनुसार लागू होंगे।

(2) अग्निशमन-कर के कुल आगम के ऐसे भाग,जो सरकार अवधारित करे, की कटौती अग्निशमन-कर को संगृहीत करनेवाली लागत को पूरा करने के लिए की जाएगी।

(3) इस अधिनियम के अधीन संगृहीत अग्निशमन-कर के आगमों में से संग्रहण लागत को घटाने के बाद बची राशि सरकार को ऐसी रीति और ऐसे अंतराल पर संदत्त की जाएगी जो विहित किये जाय ।8 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 22. बिहार की सीमा से बाहर अग्निशमन सेवा की तैनाती पर फीस।-(1) जहाँ अग्निशमन सेवा के सदस्य किसी ऐसे क्षेत्र, जहाँ यह अधिनियम प्रवृत है, की सीमा से बाहर किसी राज्य सरकार अथवा स्थानीय निकाय अथवा अग्निशमन सेवा प्राधिकार के अनुरोध पर, सीमा के पड़ोस में आग बुझाने के निमित्त भेजे जाते हैं तो इस निमित्त, समय-समय पर, सरकार द्वारा यथाविहित ऐसी फीस के भुगतान की जिम्मेदारी उनकी होगी।

(2) उप-धारा (1) में निर्दिष्ट फीस निदेशक द्वारा, यथास्थिति राज्य सरकार अथवा स्थानीय निकाय अथवा अग्निशमन सेवा प्राधिकार की माँग की सूचना के तामीला के एक माह के भीतर देय होगा और यदि उस अवधि के भीतर यह संदत्त नहीं किया जाए तो यह भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूलनीय होगा। 23. अन्य अग्निशमन सेवा के साथ पारस्परिक अग्निशमन व्यवस्थाएँ।-महानिदेशक, अग्निशमन सेवा अथवा सरकार की पूर्वस्वीकृति से, निदेशक, अग्निशमन प्रयोजनार्थ कर्मी अथवा उपस्कर अथवा दोनों उपलब्ध कराने हेतु किसी अग्निशमन सेवा अथवा प्राधिकार, जो उस क्षेत्र, जहाँ यह अधिनियम प्रवृत हो, की सीमा से बाहर उक्त अग्निशमन सेवा बनाए रखता हो, के साथ उन निबंधनाेंं पर, जो, लोक हित में पारस्परिक आधार पर उपबंधित किया जाय अथवा करार के अधीन हो ।

24. सहायता करने के लिए व्यवस्थापनाेंं में प्रवेश करने हेतु निदेशक की शक्ति।-महानिदेशक, अग्निशमन सेवा अथवा सरकार की पूर्वस्वीकृति से, निदेशक, किसी व्यक्ति अथवा संगठन में, जो सुरक्षा हेतु अग्निशमन के प्रयोजनार्थ कर्मी अथवा उपस्कर अथवा दोनों रखते हैं, के साथ, भुगतान के संबंध में निबंधनों पर अन्यथा जो व्यवस्थापनाेंं द्वारा अथवा अधीन उपबंधित किया जाए तथा किसी क्षेत्र, जहाँ यह अधिनियम प्रवृत हो, में आग लगने पर निपटाने के प्रयोजनार्थ सहायता के लिए उस व्यक्ति अथवा संगठन से सहायता का प्रावधान हो, प्रवेश कर सकेगा ।

अध्याय-V अग्नि निवारण और स्वयं विनियमन के लिए सामान्य उपाय 25. निवारक उपाय।-(1) सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अधिभोग के किसी वर्ग अथवा पंडालों को जो उसकी राय में आग के खतरे का संभावित कारक हो, घोषित कर सकेगी।

(2) सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, परिसरों अथवा भवनों के स्वामियों अथवा अधिभोगियों अथवा दोनों अथवा उप-धारा (1) के अधीन अधिसूचित पंडालों के लगाने वालों से ऐसे अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा की अपेक्षा कर सकेगा जो विहित किया जाए।

26. पंडालों में अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों का स्वयं विनियामक होना।-(1) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, पंडालों के लगाने वाले धारा-25 की उप-धारा (2) के अधीन विहित अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपाय करने के लिए स्वतः विनियामक समझे जाएँगे। (2) पंडाल लगानेवाला पंडाल के भीतर प्रमुख जगह पर विहित फारम में अपने हस्ताक्षर से इस आशय की घोषणा प्रदर्शित करेगा कि उसने इसमें सभी विहित अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपाय किया है। (3) निदेशक, नामित प्राधिकारी अथवा सरकार या महानिदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य पदाधिकारी के लिए यह विधिसम्मत होगा कि वह उप-धारा (2) के अधीन पंडाल लगानेवाले द्वारा इस प्रकार की की गयी घोषणा की सत्यता के सत्यापन के मद्देनजर पंडाल में प्रवेश कर निरीक्षण करे और कमी को, यदि कोई हो, को विनिर्दिष्ट समय के भीतर दूर करने के निदेश के साथ, उजागर करे। यदि निरीक्षण पदाधिकारी के निदेशों का पालन समय सीमा के भीतर नहीं किया जाए तो निरीक्षण पदाधिकारी पंडाल को सील कर देगा।

(4) पंडाल लगानेवाला, जिसनेे झूठी घोषणा की हो कि उसके द्वारा पंडाल लगाये जाने में अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा के उपायों का पालन किया गया है तो वह इस अधिनियम की धारा-52 के अधीन दंडनीय अपराध करनेवाला समझा जाएगा।

27. अग्निशमन की किसी बाधा अथवा आग के जोखिम के संभावित कारक के रूप में अतिक्रमण अथवा वस्तु अथवा माल का हटाया जाना।-(1) धारा-25 के अधीन जहॉ अधिसूचना निर्गत हो गया हो, वहॉ निदेशक अथवा सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अग्निशमन सेवा के किसी पदाधिकारी के9 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 लिए यह विधिसम्मत होगा कि वह स्थल की सुरक्षा के लिए अग्निशमन की किसी बाधा अथवा आग की जोखिम के संभावित कारक के रूप में अतिक्रमण अथवा वस्तु अथवा माल को हटाने का निदेश दे और, यथास्थिति, स्वामी, अधिभोगी अथवा पंडाल लगानेवाले द्वारा ऐसा करने में चूक करने पर निदेशक अथवा वह पदाधिकारी, यथास्थिति, स्वामी अथवा अधिभोगी अथवा पंडाल लगानेवाले को अभ्यावेदन देने का युक्तियुक्त अवसर देकर, उस अनुमंडल मजिस्ट्रेट को जिसकी क्षेत्रीय अधिकारिता में परिसर अथवा भवन अथवा पंडाल अवस्थित हो परन्तु विषय के बारे में विषय पर न्यायनिर्णय के अनुरोध के साथ प्रतिवेदित करेगा जहाँ निदेशक अतिक्रमण अथवा वस्तु अथवा माल को आग के जोखिम का प्रमुख कारण अथवा अग्निशमन की बाधा समझे वहॉ वह ऐसे परिसर अथवा भवन के स्वामी अथवा अधिभोगी अथवा पंडाल लगानेवाले को अतिक्रमण अथवा वस्तु अथवा माल तुरत हटाने के लिए निदेश दे सकेगा और तदनुसार अनुमंंडल मजिस्ट्रेट को विषय के बारे में प्रतिवेदित करेगा।

(2) उप-धारा (1) के अधीन प्रतिवेदन प्राप्त होने पर, अनुमंडल मजिस्ट्रेट अग्निशमन की किसी बाधा अथवा आग की जोखिम के संभावित कारक के रूप में अतिक्रमण अथवा वस्तु अथवा माल को हटाने के विरूद्ध कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर देनेवाला एक नोटिस का तामीला ऐसी रीति से कराएगा जिसे वह उचित समझे।

(3) उप-धारा (2) के अधीन, यथास्थिति, स्वामी अथवा अधिभोगी अथवा पंडाल लगानेवाले को अभ्यावेदन देने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात्‌, अनुमंडल मजिस्ट्रेट ऐसे अतिक्रमण अथवा वस्तु अथवा माल को अभिग्रहण, निरुद्ध करने अथवा हटाने का आदेश दे सकेगा,

(4) उप-धारा (3) में किये गये आदेश के निष्पादनार्थ प्रभारी व्यक्ति उन वस्तुओं और माल की सूची तुरत बनाएगा जिन्हें वह उस आदेश के अधीन अभिग्रहण करता हो साथ-ही-साथ वह उस व्यक्ति को, जिसके कब्जा में अभिग्रहण के समय वे हों, इस निमित्त यथाविहित एक लिखित नोटिस देगा कि उक्त वस्तुएँ अथवा माल, जो उसमें उल्लिखित है, को बेच दिया जाएगा, यदि उक्त नोटिस में नियत अवधि के भीतर उसका दावा न किया जाए।

(5) अभिग्रहण के समय जिसके कब्जे में वस्तुएँ और माल थे उस व्यक्ति द्वारा उप-धारा (4) के अधीन दिये गये नोटिस के अनुसरण में अभिग्रहण किये गये माल पर दावा करने से चूक जाने पर अनुमंडल मजिस्ट्रेट तदनुसार लोक नीलामी द्वारा उन्हें बेच देगा।

(6) अनुमंडल मजिस्ट्रेट के किसी नोटिस अथवा आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर, अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील कर सकेगाः

परन्तु, अपीलीय प्राधिकार 30 दिनों की उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌ भी अपील ग्रहण कर सकेगा, यदि यह समाधान हो जाए कि उस अवधि के भीतर अपील दाखिल नहीं करने का पर्याप्त कारण था।

(7) अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील उस फारम मेंं की जायेगी तथा नोटिस अथवा आदेश की प्रतिलिपि, जिसके विरूद्ध अपील की गयी है, और वैसी फीस साथ लगी होगी, जो विहित की जाय। (8) उप-धारा (7) के अधीन किसी अपील पर अपीलीय प्राधिकार का आदेश अंतिम होगा।

28. आग लगने और/अथवा बचाव के अवसर पर अग्निशमन सेवा के सदस्यों की शक्तियाँ।-किसी ऐसे क्षेत्र मेंे, जहाँ यह अधिनियम प्रवृत हो, आग से बचाव के अवसर पर अग्निशमन सेवा का कोई सदस्य, जो उस स्थल पर अग्निशमन कार्यचालन का प्रभारी हो-

(क) किसी व्यक्ति को, जिसकी उपस्थिति आग बुझाने के कार्य अथवा जीवन या संपत्ति को बचाने में हस्तक्षेप करे अथवा बाधा डाले, हटा सकेगा अथवा अग्निशमन सेवा के किसी अन्य सदस्य को हटाने का आदेश दे सकेगा;

(ख) जहाँ आग बुझाने का कार्य चल रहा हो और/अथवा बचाव कार्य प्रगति पर हो, वहाँ अथवा उसके नजदीक के मार्ग अथवा गली को बंद कर सकेगा;

(ग) आग बुझाने और बचाव कार्यों को पूरा करने के प्रयोजनार्थ हौज अथवा साधित्रों को ले जाने के लिए कम से कम संभावित क्षति पहुँचा कर किसी परिसर को तोड़कर घुस सकेगा अथवा उनसे होकर प्रवेश10 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 कर सकेगा अथवा उन्हें गिरा सकेगा या उन्हें तुड़वा कर घुसा सकेगा अथवा उनसे होकर प्रवेश करा सकेगा अथवा उसे गिरवा सकेगा;

(घ) जलापूर्ति के प्रभारी प्राधिकारी से उस क्षेत्र में जल के प्रमुख लाइन को विनियमित करने की अपेक्षा कर सकेगा ताकि उस स्थान पर जहाँ आग लगी हो, विनिर्दिष्ट दबाव पर जल उपलब्ध कराया जा सके और ऐसी आग को बुझाने अथवा कम करने और बचाव कार्य को पूरा करने के प्रयोजनार्थ किसी धारा, कुंड, कुँआ अथवा तालाब का जल अथवा जल के किसी उपलब्ध स्रोत चाहे निजी हो, अथवा सार्वजनिक, का उपयोग कर सकेगा;

(़ङ) अग्निशमन कार्यों में बाधा डालनेवाले संभावित व्यक्तियों के जमावड़े को तितर-बितर करने के लिए उन शक्तियों का प्रयोग कर सकेगा मानो वह थाने का प्रभारी पदाधिकारी हो और मानो वह जमावड़ा अवैध जमावड़ा हो और उस स्वतंत्रता और संरक्षण का हकदार होगा जैसा कि ऐसी शक्तियों के प्रयोग के निमित्त ऐसा पदाधिकारी होता है;

(च) उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा जो जानबूझ कर अग्निशमन कर्मियों को अग्निशमन और बचाव कार्योंं में बाधा और अड़चन डालता हो और बिना किसी अपरिहार्य बिलंब के उसे पुलिस पदाधिकारी अथवा नजदीकी थाना को एक संक्षिप्त टिप्पणी, जिसमें समय, तारीख और गिरफ्तारी का कारण हो, के साथ सौंप देगा; और

(छ) साधारणतया उन उपायों को कर सकेगा जो, आग बुझाने अथवा जीवन या संपत्ति या दोनों की सुरक्षा के लिए, उसे आवश्यक प्रतीत हो।

29. अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी की नियुक्ति।-निम्नलिखित कोटियों के भवनों अथवा परिसरों का हरेक स्वामी और अधिभोगी अथवा ऐसे स्वामियों और अधिभोगियों का संघ एक अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्त करेगा जो इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गये नियमों में यथा उपबंधित सभी अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा और इसके प्रभावी कार्यचालन का अनुपालन सुनिश्चित करेगा, यथाः-

(क) 1000 से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता वाला सिनेमाघर और 10,000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल में बने वाणिज्यिक कम्पलेक्स और कुल मिलाकर 1000 या उससे अधिक लोगों के बैठने की क्षमतावाले एक से अधिक सिनेमा को प्रदर्शित करनेवाले भवन चाहे उसमें व्यवसायिक कम्पलेक्स हो अथवा नही;

(ख) 100 और उससे अधिक कमरेवाले होटल;

(ग) भूमिगत विपणन कम्पलेक्स, जिला केन्द्र, उप केन्द्रीय व्यावसायिक जिले जिसमेें 25000 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल में बना तहखाना;

(घ) 50 मीटर से ऊँची बहुमंजिली गैर-आवासीय इमारतें; (ङ) वृहत्‌ तेल और प्राकृतिक गैस प्रतिष्ठापन,- जैसे तेल शोधक कारखाने, एल0पी0जी0 भरने का संयंत्र और इसी तरह की अन्य सुविधाएँ;

(च) 50,000 से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता वाला खुला स्टेडियम और 25000 से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता वाला इन्डोर स्टेडियम;

(छ) 500 से अधिक शय्यावाले अस्पताल और नर्सिंग होम सार्वजनिक और अर्द्धसरकारी भवन जैसे बड़े और छोटे रेलवे स्टेशन, अन्तरराज्यीय बस टर्मिनल, हवाई अड्डे, मनोरंजन पार्क और इस तरह के अन्य भवन;

परन्तु, सरकार, समय-समय पर, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अन्य किसी परिसरों को इसमें शामिल कर सकेगी जहॉ उसकी राय में, अग्नि सुरक्षा पदाधिकारियों की नियुक्ति की आवश्यकता हो।

30. अग्नि सुरक्षा पदाधिकारियों को प्रशिक्षण प्राप्त करना।-अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी सरकार द्वारा इस निमित्त यथा विनिर्दिष्ट ''अग्नि सुरक्षा प्रबंधन अकादमी'' में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे;

11 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014

परन्तु, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो ''राष्ट्रीय अग्नि सेवा महाविद्यालय, नागपुर'' अथवा सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त किसी समकक्ष संस्था से पूर्व में ही ऐसा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका हो, इस प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होगी।

31. अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं करने की चूक की दशा में शास्ति।-(1) यदि किसी भवन अथवा परिसर का स्वामी अथवा अधिभोगी या ऐसे स्वामियों और अधिभोगियों का संघ, यथास्थिति, निदेशक अथवा नामित प्राधिकारी द्वारा इस निमित्त दी गयी नोटिस की प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर, धारा 29 के अधीन अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी की नियुक्ति करने में चूक करता है तो उनमें से प्रत्येक संयुक्त रूप से और अलग-अलग चूक करने वाला समझा जाएगा।

(2) जब ऐसे अग्नि सुरक्षा पदाधिकारी की नियुक्ति का दायी व्यक्ति चूक करनेवाला समझा जाता है, तो उसके स्वामित्व अथवा अधिभोग में स्थित क्षेत्रफल, जिसमें निदेशक द्वारा यथा अवधारित साझे का क्षेत्र भी शामिल है, के लिए उससे प्रति वर्गमीटर दस रूपये से अन्यून और पचास रूपये से अनधिक राशि, उसके प्रत्येक महीने अथवा उसके भाग की चूक के लिए, शास्ति के रूप में वसूली जा सकेगी;

(3) उप-धारा (2) के अधीन शास्ति के रूप में देय राशि भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूलनीय होगी।

अध्याय-VI

बिहार के कतिपय भवनों और परिसरों में अग्नि सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा उपायों के लिए विशेष उपबंध। 32. बहुमंजिली भवन हेतु विशेष उपबंध।-इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी, बहुमंजिली इमारतेें इसके पश्चात्‌, नियत अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों के उपबंधों से शासित होंगी। इस अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा यथा विहित बहुमंजिली इमारतों एवं विशेष परिसरों में अग्नि निवारण उपायों के कार्यान्वयन के लिए सरकार अग्निशमन परामर्शी को पंजीकृत कर सकेगी अथवा अग्निशमन सलाहकार नियुक्त कर सकेगी;

33. भवनों, परिसरों आदि का निरीक्षण।-(1)नामित प्राधिकारी ऐसी ऊँचाई, जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गये नियमों द्वारा यथा विनिर्दिष्ट हो, वाले किसी भवन अथवा परिसर के अधिभोगी अथवा यदि अधिभोगी न हो तो स्वामी को तीन घंटे की नोटिस के पश्चात्‌ उसमें प्रवेश कर उक्त भवन अथवा परिसर का सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच किसी भी समय, निरीक्षण कर सकेगा जहाँ ऐसा निरीक्षण/अग्नि सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा उपायों की अपर्याप्तता अथवा उल्लंघन अभिनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रतीत होः परन्तु, नामित प्राधिकारी जीवन और संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में किसी समय भी किसी भवन अथवा परिसर मेें प्रवेश कर सकेगा और निरीक्षण कर सकेगा, यदि ऐसा करना समीचीन और आवश्यक प्रतीत हो।

(2) नामित प्राधिकारी को उप-धारा (1) के अधीन निरीक्षण कार्य करने के लिए भवन अथवा परिसर के, यथास्थिति, स्वामी अथवा अधिभोगी द्वारा हर संभव सहायता उपलब्ध करायी जाएगी।

(3) जब उप-धारा (1) के अधीन किसी आदमी के निवास के लिए प्रयुक्त भवन अथवा परिसर में प्रवेश किया जाता हो तो अधिभोगियों की सामाजिक और धार्मिक भावना का सम्यक्‌ सम्मान किया जाएगा और किसी महिला के, जो रीति के अनुसार सार्वजनिक तौर पर प्रकट नहीं होती हो, वास्ताविक अधिभोग वाले किसी अपार्टमेन्ट में उपधारा (1) के अधीन प्रवेश किया जाता हो तो उसे नोटिस दी जाएगी कि वह निकल जाने के लिए स्वतंत्र है और निकल जाने के लिए उसे हर युक्तियुक्त सुविधा मुहैया करायी जाएगी।

34. अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा हेतु उपाय।-(1) धारा 33 के अधीन नामित प्राधिकारी भवन अथवा परिसर का निरीक्षण पूरा करने के पश्चात्‌ अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों के संंबंध में भवन उपविधि के उल्लंघन और व्यतिक्रम एवं ऐसे उपायों (इसमें उपबंधित भवन की ऊँचाई और ऐसे भवन और परिसर में किये जा रहे कार्यों की प्रकृति के संदर्भ में) की अपर्याप्तता के संबंध में अपनी राय अभिलिखित करेगा तथा ऐसे भवन और परिसर के स्वामी अथवा अधिभोगी को इस निदेश के साथ नोटिस जारी करेगा कि वह नोटिस में यथाविनिर्दिष्ट उपायों की जिम्मेवारी ले।12 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 (2) नामित प्राधिकारी धारा-33 के अधीन किये गये किसी निरीक्षण का प्रतिवेदन निदेशक को देगा। 35. कतिपय भवनों और परिसरों के संबंध में उपबंध।-(1) तत्‌समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, निदेशक अथवा नामित प्राधिकारी किसी भवन, जिसका निर्माण इस अधिनियम के प्रारम्भ होने के दिन अथवा पूर्व में पूर्ण कर लिया गया हो अथवा किसी भवन, जो उस तारीख को निर्माणाधीन हो, में प्रवेश कर सकेगा और निरीक्षण कर सकेगा यदि ऐसा निरीक्षण ऐसे भवनों में अग्निनिवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों की पर्याप्तता को अभिनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रतीत हो। (2) निदेशक अथवा धारा-33 में दी गयी रीति से नामित प्राधिकारी द्वारा उप-धारा (1) के अधीन प्रवेश और निरीक्षण किया जाएगा।

(3) उप-धारा (1) के अधीन भवन अथवा परिसर के निरीक्षण के पश्चात्‌, यथास्थिति, निदेशक अथवा नामित प्राधिकारी निम्नलिखित पर विचार करने के पश्चात्‌ :-

(i) भवन उपविधि के उपबंध, जिसके अनुसार उक्त भवन अथवा परिसर की योजना स्वीकृत की गयी थी;

(ii) उक्त भवन अथवा परिसर की योजना-स्वीकृति के समय स्थानीय प्राधिकार द्वारा अधिरोपित शर्तें, यदि कोई हो, और

(iii) ऐसे भवन अथवा परिसर के अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों के लिए विनिर्दिष्ट न्यूनतम मानक, जो इस अधिनियम के अधीन बनाए गये नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट किये जाएं, ऐसे भवन अथवा परिसर के स्वामी अथवा अधिभोगी को भवन अथवा परिसर में अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों के संबंध में अपर्याप्तता का उल्लेख किया जायेगा; उक्त के संबंध में एक नोटिस जारी करेगा और स्वामी अथवा अधिभोगी को उस समय सीमा के भीतर, जिसे वह न्याय-संगत और युक्तियुक्त समझे, कथित अपर्याप्तता को सुधारने के लिए ऐसे उपायों की जिम्मेवारी लेने का निदेश देगा ।

(4) नामित प्राधिकारी उप-धारा (1) के अधीन अपने द्वारा किये गये किसी निरीक्षण का प्रतिवेदन भी निदेशक को देगा।

36. अपील।-(1) इस अध्याय के अधीन निदेशक अथवा नामित प्राधिकारी द्वारा जारी नोटिस अथवा दिये गये आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति ऐसी नोटिस अथवा ऐसे आदेश के विरूद्ध, उस नोटिस अथवा आदेश, जिसके विरूद्ध अपील किया जाना है, की तिथि से 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकार के समक्ष अपील कर सकेगाः

परन्तु, अपीलीय प्राधिकार तीस दिनों की उक्त अवधि की समाप्ति के पश्चात्‌ भी अपील ग्रहण सकेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाए कि उस अवधि के भीतर अपील दाखिल नहीं करने का पर्याप्त कारण रहा था ।

(2) अपीलीय प्राधिकार के समक्ष किया जानेवाला अपील, ऐसे फारम में किया जाएगा और उसके साथ उस नोटिस अथवा आदेश की, जिसके विरूद्ध अपील की गयी है, प्रतिलिपि और ऐसी फीस अनुलग्न होगी जो इस अधिनियम द्वारा बनाए गये नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट की जाय।

37. अध्याय VI के उपबंधों के उल्लंघन के लिए शास्ति।-जो कोई इस अध्याय के किसी उपबंध का उल्लंघन करता है, वह इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गये नियमों के अधीन, उसके विरूद्ध किसी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, कारावास की सजा से, जो छः महीने तक बढ़ायी जा सकेगी अथवा जुर्माना से, जो पचास हजार रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा अथवा दोनों से दंडनीय होगा और जहाँ ऐसा अपराध जारी रहता है, वहॉ आगे जुर्माना लगाया जाएगा जो, पहले जुर्माने के बाद ऐसे अपराध जारी रहे तो प्रत्येक दिन के लिए तीन हजार रूपये प्रतिदिन तक बढ़ाया जा सकेगा।

अध्याय-VII

प्रकीर्ण

38. अग्निशमन प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना।-(1) उद्योगों, होटलों, बहुमंजिली इमारतों और धारा-29 में यथाविनिर्दिष्ट इसी प्रकार की अन्य सरकारी और गैर-सरकारी स्थापनों के निजी अभ्यर्थी तथा अग्निशमन13 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 सेवा के कर्मियों को अग्नि निवारण और अग्निशमन में प्रशिक्षण का अनुक्रम उपलब्ध कराने हेतु सरकार बिहार में अग्निशमन प्रशिक्षण अकादमी नामक अग्निशमन प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना और रख-रखाव कर सकेगी ।

(2) सरकार उप-धारा (1) के अधीन स्थापित होने वाले अकादमी, स्थानीय निकायों और औद्योगिक उपक्रमों के नियंत्रण के अधीन अग्निशमन सेवाओं के, साथ-साथ अन्य राज्यों के राज्य अग्निशमन सेवा तक यथाविहित प्रभार के भुगतान पर, प्रशिक्षण सेवाओं का विस्तार कर सकेगी।

(3) प्रशिक्षण के संबंध में सरकार के अन्य कर्मचारियों पर लागू साधारण नियमों के पालन के अध्यधीन, अग्निशमन सेवा के सदस्यों को, भारत के भीतर अथवा बाहर किसी संस्थान में, इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन, सरकार के खर्चें पर अग्नि सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा उपायों की वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में और संबंधित विषयों में प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।

(4) एक अग्निशमन पदाधिकारी, जो उप-धारा (3) में यथा उपबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करता हो, यदि उस अग्निशमन सेवा में इस निमित्त उसपर बाध्यकारी अनुबद्ध अवधि तक अपनी सेवा न दे तो वह प्रशिक्षण के दौरान उसे संदत्त वेतन और भत्ते सहित सभी व्ययों और लागतों की प्रतिपूर्ति सरकार को क्षतिपूर्ति करेगा।

39. अन्य क्षेत्र में स्थानातरण।-निदेशक अथवा सरकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अग्निशमन पदाधिकारी, किसी पड़ोसी क्षेत्र, जहाँ यह अधिनियम प्रवृत्त हो, में आग लगने पर अथवा अन्य आपात अवसर पर, अग्निशमन सेवा के सदस्यों को आवश्यक साधित्रों और उपस्करों के साथ ऐसे पड़ोसी क्षेत्र में अग्निशमन कार्यों को पूरा करने के लिए भेजने का आदेश दे सकेगा और तत्‌पश्चात्‌ इस अधिनियम के सभी उपबंधों और उनके अधीन बने नियम अग्नि आपातअग्नि अथवा ऐसी अवधि के दौरान, जो निदेशक, समय-समय पर यथाविहित प्रभारों पर विनिर्दिष्ट करें उन क्षेत्रों पर लागू होंगे ।

40. अन्य कार्यों में लगाना।- सरकार अथवा इस निमित्त सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी पदाधिकारी के लिए किसी बचाव, निस्तार अथवा अन्य कार्यों में, जिसके लिए उसके प्रशिक्षण, साधित्र और उपस्कर के कारण उपयुक्त हो, अग्निशमन सेवा को लगाना विधिसम्मत होगा।

41. भुगतान हेतु संपत्ति-स्वामी का प्रतिकर के दायित्व।-(1) कोई व्यक्ति, जिसकी संपत्ति अपने स्वयं के अथवा उसके एजेण्ट के जानबूझकर किये गये कार्यों अथवा उपेक्षा के कारण आग के हवाले हो जाए, इस अधिनियम की धारा-28 के अधीन अथवा उसमें उल्लिखित पदाधिकारी अथवा उस पदाधिकारी के प्राधिकार के अधीन कार्य करने वाले व्यक्ति द्वारा, किसी प्रकार की गयी कार्रवाई के कारण, किसी अन्य व्यक्ति को उसकी संपत्ति को हुए नुकसान के प्रतिकर भुगतान का दायी होगा।

(2) उप-धारा (1) के अधीन सभी दावे, जब नुकसान हुआ तो उस तिथि से तीस दिनों के भीतर, अपीलीय प्राधिकार के समक्ष दाखिल किये जाएँगे।

(3) अपीलीय प्राधिकार पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात्‌ बकाये प्रतिकर की राशि अवधारित करेगा और उस राशि तथा व्यक्ति, जो उसका दायी हो, का उल्लेख करते हुए, एक आदेश पारित करेगा तथा इस प्रकार पारित आदेश का वही प्रभाव होगा, जो सिविल न्यायालय की डिक्री का होता है।

42. सूचना प्राप्त करने की शक्ति।- निदेशक अथवा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अग्निशमन पदाधिकारी इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों के निर्वहन के प्रयोजनार्थ यथा विनिर्दिष्ट किसी भवन अथवा अन्य संपत्ति के स्वामी अथवा अधिभोगी से यथाविनिर्दिष्ट भवन अथवा अन्य संपत्ति की प्रकृति, उपलब्ध जलापूर्ति और उसमें पहुँच के साधन, किसी भौतिक विशिष्टियों के निमित्त अन्य सूचना उपलब्ध कराने की अपेक्षा करेगा और ऐसा स्वामी, अधिवासी अपने पास उपलब्ध सभी सूचनाएँ उपलब्ध कराएगा।

43. प्रवेश की शक्ति।-(1) नामित प्राधिकारी धारा-25 की उप-धारा (1) के अधीन निर्गत किसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी भी स्थान पर यह अवधारित करने के प्रयोजनार्थ प्रवेश कर सकेगा कि ऐसे स्थान पर आग बुझाने के लिए अपेक्षित निवारक और सुरक्षा उपाय उसी प्रकार कर लिये गये हैं।14 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 (2) नामित प्राधिकारी उप-धारा (1) के अधीन भवन अथवा परिसर का निरीक्षण पूरा करने के पश्चात्‌ अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों के संबंध में धारा-25 की उप-धारा (2) के अधीन निर्गत अधिसूचना के उल्लंघन अथवा व्यतिक्रम और भवन के अधिभोग अथवा ऐसे भवन अथवा परिसर में किये जा रहे कार्यों की प्रकृति के संबंध में उसमेें उपबंधित ऐसे उपायों की अपर्याप्तता पर अपने विचारों को अभिलिखित करेगा और ऐसे भवन अथवा परिसर के स्वामी अथवा अधिभोगी को नोटिस में यथा विनिर्दिष्ट उपायों की जिम्मेवारी लेने हेतु निदेश देने हेतु एक नोटिस जारी करेगा । (3) नामित प्राधिकारी उप-धारा (1) के अधीन स्वयं द्वारा किये गये किसी निरीक्षण का प्रतिवेदन भी निदेशक को देगा।

(4) इस अधिनियम में अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, उप-धारा (1) के अधीन किसी प्रवेश के कारण अपरिहार्य रूप से हुई किसी प्रकार के नुकसान के प्रतिकार के लिए दावा किसी व्यक्ति के विरूद्ध कोई दावा संस्थित नहीं होगा।

44. भवनों अथवा परिसरों को सील करने की शक्ति।-(1) धारा-34 की उप-धारा (2) अथवा धारा-35 की उप-धारा (4) अथवा धारा-43 की उप-धारा (3) के अधीन नामित प्राधिकारी से प्रतिवेदन प्राप्त होने पर अथवा स्वप्रेरणा से निदेशक को जहाँ प्रतीत हो कि किसी भवन अथवा परिसर की स्थिति जीवन अथवा संपत्ति के लिए खतरनाक है, तो वह इस अधिनियम के अधीन किसी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आदेश द्वारा, ऐसे भवन अथवा परिसर पर कब्जा रखने वाले अथवा अधिभोग वाले व्यक्ति से स्वयं को तुरत ऐसे भवन अथवा परिसर से दूर करने की अपेक्षा करेगा। (2) यदि उप-धारा (1) के अधीन निदेशक द्वारा दिये गये आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो निदेशक उस क्षेत्र की अधिकारिता वाले किसी पुलिस पदाधिकारी को भवन अथवा परिसर से ऐसे व्यक्तियों को हटाने हेतु निदेश दे सकेगा और ऐसा पदाधिकारी उस निदेश का अनुपालन करेगा। (3) यथास्थिति, उप-धारा (1) अथवा उप-धारा (2) के अधीन व्यक्तियों को हटाने के पश्चात्‌ निदेशक भवन अथवा परिसर को सील कर देगा।

(4) निदेशक के आदेश के बिना कोई व्यक्ति उस सील को नहीं हटाएगा ।

(5) निदेशक के आदेश के बिना ऐसे सील को हटाने वाला कोई व्यक्ति, ऐसी कारावास की सजा से जो तीन महीने तक बढ़ायी जा सकेगी अथवा जुर्मानों से, जो पच्चीस हजार रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, अथवा दोनों से दंडनीय होगा।

45. जल की क्षतिपूर्ति।-किसी स्थानीय प्राधिकार द्वारा अग्निशमन सेवा द्वारा आग बुझाने के कार्यों में उपयोग किये गये जल के लिए कोई प्रभार नहीं लगाया जाएगा।

46. जलापूर्ति में व्यवधान के लिए कोई प्रतिकर नहीं।- किसी क्षेत्र की जलापूर्ति के प्रभार में रहनेवाला कोई प्राधिकार, धारा-28 के खंड (घ) में विनिर्दिष्ट आवश्यकताओं के अनुपालन के अवसर पर वह प्राधिकारी जलापूर्ति में किसी व्यवधान के कारण नुकसान के लिए प्रतिकर हेतु किसी दावे का दायी नहीं होगा।

47. पुलिस पदाधिकारियों और अन्य द्वारा सहायता किया जाना।-प्रत्येक पुलिस पदाधिकारी, सरकारी और निजी ऐजेंसी अथवा व्यक्ति अग्निशमन सेवा के सदस्यों को, इस अधिनियम के अधीन उनके कर्त्तव्यों के निष्पादन में युक्तियुक्त रूप से मदद की माँंग करने पर सहायता करने के लिए आबद्ध है।

48. जानकारी देने में असफलता।- जो आग लग जाने की स्वयं की जानकारी को, बिना किसी ठीक कारण के, संसूचित करने में असफल रहता है, भारतीय दंड संहिता 1860 (1860 का 45) की धारा-176 के प्रथम भाग के अधीन दंडनीय अपराध करने वाला समझा जायेगा ।

49. पूर्वावधान बरतने में असफलता।- जो कोई भी धारा-25 की उप-धारा (1) के अधीन निर्गत अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किसी भी आवश्यकता अथवा उस धारा की उपधारा (2) के अधीन निर्गत निदेश का अनुपालन करने में, बिना पर्याप्त कारण के असफल रहे, तो वह उस जुर्माना से, जो एक हजार रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, अथवा कारावास की सजा से, जो तीन महीने तक बढ़ाया जा सकेगा, अथवा दोनों से दंडनीय15 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 होगा, और जहाँ अपराध जारी रहे तो आगे ऐसे जुर्माना से जो, ऐसे अपराध करते रहने के दौरान पहले अपराध के पश्चात प्रत्येक दिन के लिए पाँच सौ रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा।

50. अग्निशमन, बचाव कार्यों में जानबूझ कर बाधा डालने के लिए शास्ति।- कोई व्यक्ति, जो अग्निशमन कार्यों में लगे हुए अग्निशमन सेवा के किसी सदस्य को जानबूझकर बाधा पहुॅचाता हो अथवा हस्तक्षेप करता हो, ऐसी कारावास की सजा से, जिसकी अवधि तीन महीने तक बढ़ाई जा सकेगी अथवा जुर्माना से, जो पाँच हजार रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा।

51. मिथ्या प्रतिवेदन।- कोई भी व्यक्ति, जो किसी विवरण, संदेश अथवा अन्यथा साधनों से प्रतिवेदन को प्राप्त करने हेतु प्राधिकृत किसी व्यक्ति को आग लग जाने के बारे में जानबूझकर मिथ्या प्रतिवेदन देता है अथवा दिलवाता है, ऐसी कारावास से, जिसकी अवधि तीन महीने तक बढ़ाई जा सकेगी अथवा जुर्मानों से, जो एक हजार रूपये तक बढ़ाया जा सकेगा, अथवा दोनों से, दंडनीय होगा।

52. अपराध के दण्ड हेतु सामान्य उपबंध।- जो कोई भी इस अधिनियम के किसी उपबंध या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम या की गयी अधिसूचना का उल्लंघन करता है, इस अधिनियम या उसके अधीन बनायी गयी नियमावली के अधीन, उसके विरूद्ध की गई किसी कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, तीन महीने तक बढ़ायी जा सकने वाली नियत अवधि के कारावास या दस हजार रूपये तक के जुर्माना या दोनों से दण्डनीय होगा और जहाँ ऐसा अपराध जारी रहता हो तो ऐसे जारी रहनेवाले अपराध के प्रथम दिन के पश्चात्‌ प्रत्येक दिन के लिए पाँच सौ रूपये तक का आगे जुर्माना भी किया जा सकेगा। 53. इस अधिनियम के प्रारंभ होने के ठीक पूर्व बिहार में काम कर रही अग्निशमन सेवा को इस अधिनियम के अधीन गठित अग्निशमन सेवा समझा जाना- तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में अंतर्विष्ट उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना- (क) इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व बिहार में काम कर रही अग्निशमन सेवा ''विद्यमान बिहार अग्निशमन सेवा'' इसके प्रवृत्त होने पर, इस अधिनियिम के अधीन गठित अग्निशमन सेवा समझी जायेगी और विद्यमान अग्निशमन सेवा के प्रत्येक पदधारी सदस्य इस अधिनियम के अधीन नियुक्त और पदधारी समझे जायेंगे;

(ख) इस अधिनियम के प्रारंभ होने के ठीक पहले, विद्यमान अग्निशमन सेवा के किसी अग्निशमन पदाधिकारी के समक्ष लम्बित सभी कार्यवाहियाँ उस पदधारी की हैसियत से उसके समक्ष लम्बित समझी जायेंगी, जहाँ वह इस धारा के खण्ड (क) के अधीन नियुक्त समझा जाता है और इसका निपटान तदनुसार किया जायेगा।

54. अपराधों का प्रशमन-(1) इस अधिनियम के प्रारंभ होने या इसके पश्चात्‌ धाराएं-26, 27, 31, 37, 44, 48, 49, 50, 51 और 52 के अधीन या इस अधिनियम के अधीन बनाये गये किसी नियम के अधीन, कोई भी दण्डनीय अपराध अग्निशमन सेवा के ऐसे पदाधिकारियों द्वारा और ऐसी रकम के लिए प्रशमित किया जा सकेगा जो इस निमित्त सरकार द्वारा राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किये जाये ;

परन्तु सरकार या इस अधिनियम के अधीन प्राधिकृत किसी पदाधिकारियों के द्वारा या उनकी ओर से निर्गत सूचना, आदेश या अध्यपेक्षा के अनुपालन असफल रहने के कारण कोई अपराध उस समय तक प्रशमनीय नहीं होगा जबतक कि उसका अनुपालन, जहॉ तक संभव हो, कर न दिया जाय । (2) जहाँ किसी अपराध का प्रशमन उप-धारा (1) के अधीन किया गया हो और अपराधकर्त्ता, यदि हिरासत में हो, तो उसे छोड़ दिया जायेगा और ऐसे अपराध के संबंध मेें उसके विरूद्व कोई कार्यवाही संस्थित या जारी नहीं रहेगी।

55. न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन।- कोई भी न्यायालय, इस अधिनियम के अधीन किसी सूचना या आदेश के संबंध में कोई वाद, अभ्यावेदन या अन्य कार्यवाही ग्रहण नहीं करेगा और कोई ऐसी सूचना या आदेश इस अधिनियम के अधीन अपील के सिवाय अन्यथा प्रश्नगत नहीं किया जायेगा ।

56. अभियोजन का संज्ञान। -कोई भी न्यायालय, निदेशक या इस निमित्त उसके द्वारा प्राधिकृत किसी पदाधिकारी की शिकायत या उनसे प्राप्त इत्तिला को छोड़कर, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के विचारण पर कोई कार्यवाही नहीं करेगा।16 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 57. अधिकारिता। - प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से निम्नतर कोई न्यायालय इस अधिनियम के अधीन दण्डनीय अपराध का विचारण नहीं करेगा।

58. सदभाव में की गई कार्रवाई का संरक्षण।- कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी बात के लिए किसी व्यक्ति के विरूद्ध संस्थित नही होगी जो सद्‌भाव से की गयी हो या इस अधिनियम या इसके अधीन बनायी गई किसी नियमावली के अनुसरण में किये जाने के आशय से की गयी हो । 59. अधीनस्थ कार्यचालन पदाधिकारी की विशेष प्रोन्नति।- जीवन और संपत्ति की रक्षा करने में असाधारण बहादुरी और कर्त्तव्य के प्रति समर्पण दिखाने वाले लक्ष्यबेधियों, विशिष्ट खिलाड़ियों तथा अग्निशमन पदाधिकारियों/कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए, निदेशक, सरकार की पूर्व स्वीकृति से, बिना पारी ऐसे पदाधिकारियों को अगले उच्चतर पद पर प्रोन्नत कर सकेंगे, बशर्तें रिक्तियाँ हों। ऐसी प्रोन्नतियाँ इन पदों के स्वीकृत बल के दस प्रतिशत से अनधिक होगी। वरीयता के प्रयोजनार्थ ऐसे प्रोन्नतिधारियों को उस वर्ष तैयार की गई प्रोन्नति सूची में नीचे स्थान दिया जायेगा।

60. अग्निशमन सेवा के सदस्य की मृत्यु।- अग्निशमन सेवा के सदस्य (राजपत्रित पदाधिकारी से भिन्न) की मृत्यु कर्तव्य-निर्वहन के दौरान हो जाने पर सरकार उसके निकटतम संबंधी को अंत्येष्टि खर्च के रूप में अधिकतम 5000 (पाँच हजार रू0) तक अदा करेगी।

61. अग्निशमन पदाधिकारियों का लोक सेवक होना।- इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन कार्यरत प्रत्येक अग्निशमन पदाधिकारी भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का 45) की धारा-21 के अर्थ के अंतर्गत लोक सेवक समझे जाएँगे।

62. कंपनियों द्वारा किया गया अपराध।- (1) यदि कोई अपराध इस अधिनियम के अधीन किसी कंपनी द्वारा किया गया है तो उस अपराध किए जाने के समय, कंपनी का ऐसा प्रत्येक प्रभारी व्यक्ति, जो कंपनी के कार्य संचालन हेतु कंपनी के प्रति उत्तरदायी हो, इस अपराध के लिए दोषी समझा जाएगा एवं तदनुसार अपने विरूद्ध कार्यवाही के लिए वह दायी एवं दोषी होगा ; परंतु इस उप-धारा में अंतर्विष्ट कोई भी बात ऐसे किसी व्यक्ति को किसी दण्ड का दायी नहीं बनायेगी, यदि वह यह सिद्ध करता है कि यह अपराध उसकी जानकारी में नहीं हुआ है अथवा उसने ऐसे अपराध के घटित न होने देने के लिए सभी सम्यक्‌ सावधनियां बरत ली थीं।

(2) इस धारा की उप-धारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहाँ इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध कंपनी द्वारा किया गया है और यह सिद्ध हो गया है कि वह अपराध उस कंपनी के निदेशक, प्रबंधक, या अन्य पदाधिकारी की ओर से सम्मति, या मौनानुकूलता या किसी उपेक्षा के कारण ही घटित हुआ है; तो ऐसे निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य पदाधिकारी उस अपराध के लिए दोषी समझे जाएँगे एवं उनके विरूद्ध तदनुसार कार्यवाही किए जाने के तथा दण्ड के भागी होंगे।

स्पष्टीकरण- इस धारा के प्रयोजनार्थ

(क) ''कंपनी'' से अभिप्रेत है, निगमित निकाय एवं इसमें एक फर्म या अन्य व्यष्टियों का संगम सम्मिलित है ; तथा

(ख) फर्म के '' निदेशक'' से अभिप्रेत है, उस फर्म का भागीदार ।

63. नियमावली/विनियमावली बनाने की शक्ति।-(1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के उपबंधों के क्रियान्वयन हेतु नियमावली/विनियमावली बना सकेगी।

(2) विशिष्टतया और पूर्वागामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी नियमावली निम्नलिखित के लिए उपबंध कर सकेगी :- (क) धारा-5 के खण्ड (ख) के अधीन बिहार अग्निशमन सेवा के सदस्यों की सेवा में भर्ती, उनका वेतन, भत्तों एवं अन्य सभी सेवा-शर्त्तो ;

(ख) धारा-9 के खण्ड (ख) के अधीन अग्निशमन उपखंडों की ऐसी संख्या को समाविष्ट कर अग्निशमन प्रभाग के गठन ;

(ग) धारा-9 के खण्ड (ख) के अधीन दमकल केन्द्रों की ऐसी संख्या को समाविष्ट कर अग्निशमन उपप्रभागोें के गठन ;

17 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014

(घ) नियुक्ति के प्रमाण-पत्र का प्ररूप और अग्निशमन पदाधिकारी, जिनकी मुहर से नियुक्ति के ऐसे प्रमाण-पत्र, धारा-10 की उप-धारा (2) के अधीन निर्गत किए जाएँगे ;

(ङ) धारा-19 की उप-धारा (2) के अधीन सभाओं अथवा प्रदर्शनों के अभिप्राय;

(च) धारा-21 के अधीन अग्निशमन कर का निर्धारण, संग्रहण एवं उसके भुगतान के प्रवर्तन के ढं़ग; (छ) धारा-21 के अधीन संगृहीत अग्निशमन कर सरकार को दिए जाने की रीति; (ज) धारा-22 की उप-धारा (1) के अधीन और धारा 39 के अधीन बिहार की परिसीमा से परे अग्निशमन सेवा की तैनाती पर फीस;

(झ) धारा-23 के अधीन अन्य अग्निशमन सेवाओं के साथ पारस्परिक अग्निशमन व्यवस्थाओं हेतु निबंधन;

() धारा-25 की उप-धारा (2), धारा-32 और धारा-35 की उप-धारा (3) के खण्ड (प) के प्रयोजनार्थ अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा उपायों के न्यूनतम मानक;

(ट) धारा-26 की उप-धारा (2) के अधीन घोषणा का प्ररूप; (ठ) धारा-27 की उप-धारा (4) के अधीन सूचना का प्ररूप; (ड) धारा-33 की उप-धारा (1) के अधीन भवन की ऊँचाई; (ढ़) धारा-27 की उप-धारा (7) और धारा-36 की उप-धारा (2) के अधीन अपील और फीस का प्ररूप;

(ण) धारा-38 की उप-धारा (2) के अधीन ''अग्नि सुरक्षा प्रबंधन अकादमी'' में अन्यों के प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार करने के चार्ज;

(त) अग्निशमन सेवा के पदाधिकारी और धारा-54 की उप-धारा (1) के अधीन अपराधों के प्रशमन की रकम;

(थ) अग्निशमन सेवा हेतु उचित समझे जाने वाले साधित्र और उपकरण उपलब्ध कराना ;

(द) उपयोग के लिए उपलब्ध रहने की सुनिश्चितता हेतु जल की पर्याप्त आपूर्त्ति; (घ) दमकल केन्द्रों का निर्माण किया जाना या उपलब्ध कराया जाना या अग्निशमन सेवा के सदस्यों के रहने और अग्निशमन साधित्रों के रखने की जगह हेतु किराये पर जगह लेना ;

(न) ऐसे व्यक्तियों को पुरस्कार देना, जिन्होंने आग लगने की सूचना दी हो और जिन्होंने अग्निकांड के समय अग्निशमन सेवा अपनी कारगर सेवा प्रदान किया हो;

(प) अग्निशमन सेवा के सदस्यों का प्रशिक्षण, अनुशासन और सदाचरण; (फ) अग्नि कांड की किसी संकट घंटी पर अग्निशमन सेवा के सदस्यों का आवश्यक साधित्रों एवं उपस्करों सहित तुरंत उपस्थित हो जाने;

(ब) निदेशक की शक्तियों, कर्तव्यों एवं कृत्यों को विनियमित एवं नियंत्रित करना;

(भ) सामान्यतः कार्य दक्षता की सम्यक्‌ स्थिति में अग्निशमन सेवा का अनुरक्षण;

(म) पंडालों और शामियानों के लगाये जाने को विनियमित करने ; (य) अग्निशमन पदाधिकारियों का गोपनीय प्रतिवेदन लिखने।

(य)(क) अग्निशमन के विवरण एवं मात्रा को विनिश्चित करने और अग्निशमन सेवा को सौपे जाने वाले साधित्र आवरण और अन्य आवश्यक वस्तुओं सहित साधित्रों को बचाने ;

(य)(ख) नीतिगत प्रशासन से सम्बद्ध किसी प्रयोजनार्थ किसी अग्निशमन सेवा निधि का संस्थापन, प्रबंधन और विनियमन;

(य)(ग) सभी स्तरों और कोटियों के अग्निशमन पदाधिकारियों के कर्त्तव्य नियत करना, और विनिर्दिष्ट करना कि किस रीति एवं शर्तों के अध्यधीन वे अपनी संबंधित शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का निर्वहण करेंगे।

(य)(घ) सामान्यतः अग्निशमन सेवा समुचित रूप से प्रदान करने एवं उनके कर्त्तव्यों के दुरूपयोग या अवहेलना को रोकने के प्रयोजनार्थ;

(य)(ङ) और कोई अन्य बात, जो कि नियमावली द्वारा अपेक्षित या उपबंधित हो या हो सकेगी।18 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 64. नियमों और विनियमों का बिहार राज्य विधान मंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाना।- इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम और विनियम, उसके बनाये जाने के पश्चात्‌, यथाशीघ्र, राज्य विधानमण्डल के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल 14 दिन की अवधि के लिए रखा जायेगा, जो एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में समाविष्ट हो सकेगी और यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद वाले सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस नियम या विनियम में कोई उपांतरण करने के लिए सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि वह नियम या विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात्‌ यथास्थिति उस नियम या विनियम का प्रभाव केवल उस उपांतरित रूप मेें होगा अथवा नहीं होगा फिर भी ऐसा कोई उपांतरण अथवा बातिलीकरण उस नियम या विनियम के अधीन पहले किये गए कुछ भी किये गए की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।

65. शक्तियों का प्रत्यायोजन।-(1) सरकार, राजपत्र में अधिसूचना के द्वारा, निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन प्रयोज्य कोई शक्ति, अधिसूचना में यथाविनिर्दिष्ट ऐसी शर्तो, यदि कोई हो, के अध्यधीन, सरकार के पदाधिकारियों में से किसी के द्वारा प्रयोज्य होगी। (2) निदेशक, आदेश द्वारा, निदेश दे सकेगा कि इस अधिनियम के द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त किसी शक्ति का प्रयोग या अधिरोपित कोई कर्त्तव्य का निर्वहन, उस आदेश में यथाविनिर्दिष्ट परिस्थितियों में और शर्तों के अधीन, यदि कोई हो, आदेश में यथाविनिर्दिष्ट अग्निशमन सेवा के किसी पदाधिकारी द्वारा किया जायेगा।

66. निरसन और व्यावृत्ति।- (1) बिहार अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1948 (बिहार अधिनियम, 37, 1948), एतद्‌ द्वारा निरसित किया जाता है। (2) ऐसे निरसन के होते हुए भी, किसी स्थानीय प्राधिकार का निम्नलिखित सामान्य दायित्व परिसीमित, उपान्तरित या अल्पीकृत किया गया नहीं समझा जायेगा :-

(क) अग्निशमन के प्रयोजनार्थ सरकार द्वारा, समय-समय पर, यथानिदेशित जलापूर्त्ति और अग्निशमन-नल का उपलबध कराना एवं उनका अनुरक्षण करना;

(ख) खतरनाक व्यापारों के विनियमन हेतु उपविधि बनाना ; (ग) अग्निशमन में सहायता देने हेतु अग्निशमन सेवा के किसी कर्मचारियों को ऐसा आदेश देना, जब उन्हें युक्तियुक्त रूप से बुलाया जाय ;

(घ) अग्नि की संभावना को कम करने या अग्नि विस्तार को रोकने के उपायों का सामान्य दायित्व लेना। 67. कठिनाईयों के निराकरण की शक्ति।-(1) इस अधिनियम के उपबंधों के क्रियान्वयन में यदि कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, इस अधिनियम के प्रावधानों से संगत ऐसा प्रावधान कर सकेगी जोे उस कठिनाई के निराकरण हेतु आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो ;

परन्तु ऐसा कोई आदेश इस अधिनियम के प्रारम्भ होने से दो वर्षो की समाप्ति के पश्चात्‌ नहीं दिया जायेगा।

(2) इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, निर्गत होते ही, यथा सम्भव शीघ्र बिहार विधान सभा के समक्ष रखा जायेगा।

वित्तीय संलेख

राज्य में अग्निशमन संगठन को प्रभावकारी बनाने हेतु बिहार अग्निशमन सेवा विधेयक 2014 बनाया जा रहा है। बिहार राज्य में सभी प्रकार के भवनों, परिसरों और अस्थायी संरचना में प्रभावी अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा लागू किया जाना है।19 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7 माच, 2014 बिहार अग्निशमन सेवा विधेयक, 2014 की धारा-64 में नियम और विनियम विधि, उपविधि को विधान मंडल के पटल पर रखे जाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित विधेयक की धारा-20 के आलोक में धन विधेयक का मामला है। अग्निशमन सेवा विधेयक, 2014 की धारा-20 में यह उल्लेखित है कि अग्निशाम कर का उदग्रहण किया जायेगा, जो दर अभी निर्धारित नहीं की गयी है। दर का निर्धारण समय-समय पर राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अवधारित होगा।

बिहार अग्शिमन सेवा विधेयक, 2014 के समुचित क्रियान्वयन एवं प्रस्तावित अग्निशाम कर के प्रस्ताव में वित्त विभाग की सहमति प्राप्त है।

(नीतीश कुमार)

भार-साधक सदस्य

उद्‌देश्य एवं हेतु

बिहार राज्य में अग्निशमन उद्देश्यों एवं संगठन के बेहतर विनियमन एवं अग्निशमन उपायों के कार्यान्वयन हेतु राज्य अग्निशमन सेवा के गठन का उपबंध बनाने हेतु बिहार अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1948 में पारित हुआ था, लेकिन राज्य में अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा हेतु कोई अधिनियमिति नहीं थी। इस अधिनियम द्वारा बिहार अग्निशमन सेवा को किसी भवन में अग्नि सुरक्षा उपायों को लागू करने हेतु कोई कानूनी शक्ति भी नहीं प्रदान की गयी थी और न तो यह किसी भवन में अधिवास के पूर्व अग्नि सुरक्षा प्रमाण-पत्र प्राप्त करना आज्ञापक ही है। अतएव, बिहार राज्य में सभी प्रकार के भवनों, परिसरों और अस्थायी संरचना में प्रभावी अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा लागू के उद्देश्य से बिहार अग्निशमन सेवा के आधुनिक संगठनात्मक संरचना हेतु उपबंध करना ही इसका मुख्य उद्‌देश्य है । तथा इस विधेयक को अधिनियमित कराना ही इस विधेयक का अभीष्ट है।

(नीतीश कुमार) भार-साधक सदस्य iVuk] fnukad 21 Qjojh 2014

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अधी0क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु4ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 264-571+10-ड.0ट.0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 07 March 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-03-07.264/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-03-07.264.