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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 28 April 2014

Published 28 April 2014

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-04-28.388
Languages
English, Hindi

िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40 (cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार गजटगजटगजटगजट

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सं0 07/नि॰ (विधि-05) रा॰स॰स॰-07/नि॰ (विधि-05) रा॰स॰स॰-07/नि॰ (विधि-05) रा॰स॰स॰-07/नि॰ (विधि-05) रा॰स॰स॰-01/20101/20101/20101/2014444----2165216521652165—अधिसूचना संख्या-7/नि॰ (विधि-05) रा॰स॰स॰-01/ 2014/बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 के अधीन बिहार राज्य भूतपूर्व सैनिक सहकारिता विकास निगम लिमिटेड (The Bihar State Eservice men Co-operative Development Corporation Limited) का निबंधन वर्ष 2004 में हुआ, जिसका निबंधन संख्या-24/एच॰क्यू॰आर॰/ 2004 दिनांक 19.05.2004 है। इसका गठन भूतपूर्व सैनिकों के कल्याणार्थ एक शीर्ष सहकारी संस्था के रूप में की गई थी।

उक्त निगम की निबंधित उपविधियाँ हेतु निम्नवत्‌ संस्था/व्यक्ति अर्हक हैं :-

(क) बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 के अधीन निबंधित जिलास्तरीय भूतपूर्व सैनिक सहकारी समितियाँ।

(ख) उक्त अधिनियम के अधीन निबंधित केवल भूतपूर्व सैनिकों की अन्य सहकारी समितियाँ। (ग) भूतपूर्व सैनिकों के लिए कार्यरत सहकारी समिति के अतिरिक्त अन्य संगठन और संस्थान। (घ) पदाधिकारी रैंक से नीचे के भूतपूर्व सैनिक (नोमिनल मेम्बर)। (ङ) भूतपूर्व सैनिक की विधवा, उनके वयस्क आश्रित पुत्र और अविवाहित पुत्री।

उपर्युक्त से स्पष्ट है कि भूतपूर्व सैनिक और उनसे सम्बन्धित सहकारी समिति, संस्था अथवा आश्रित ही इसके सदस्यता के पात्र हैं।

उक्त निगम की निबंधित उपविधियाँ के उप-नियम 26 में निगम के निदेषक पर्षद के निम्नवत्‌ गठन का प्रावधान है -

(i) आमसभा द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष (ii) आमसभा द्वारा निर्वाचित उपाध्यक्ष (iii) निगम से सम्बद्ध समितियों के प्रतिनिधियों के द्वारा निर्वाचित 14 सदस्य (iv) सचिव - पदेन सदस्य।

उपर्युक्त से स्पष्ट है कि निगम के 17 सदस्यीय निदेषक मंडल में 16 का निर्वाचन निगम से सम्बद्ध समितियों के प्रतिनिधियों के द्वारा किया जाना है।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अूील 2014 अधोहस्ताक्षरी के संज्ञान में यह तथ्य लाया गया कि उक्त निगम के तथाकथित सचिव द्वारा समाचार पत्रों में बिहार सरकार, सहकारिता विभाग के नाम पर अवैध तरीके से नियुक्ति संबंधी विज्ञापन प्रकाषित कराया गया है। तद्‌नुसार बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 की धारा-35 के अधीन इस कार्यालय के आदेष संख्या 7172 दिनांक 31.01.2014 के द्वारा श्री नागेन्द्र प्रसाद, उप निबंधक (न्या॰), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना को सोसाइटी के कामकाज की जाँच हेतु प्राधिकृत किया गया।

जाँचोपरान्त श्री नागेन्द्र प्रसाद, उप निबंधक (न्या॰), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना ने प्रतिवेदित किया है कि निगम द्वारा अवैध तरीके से बिहार सरकार के लोगो (Logo) का प्रयोग एवं बिहार सरकार, सहकारिता विभाग के नाम पर विज्ञापन प्रकाषित किया है। निगम द्वारा कम्प्यूटर संबंधी जो प्रषिक्षण की कार्य योजना बनायी गयी है, वह निगम के निबंधित उपविधि में निहित प्रावधानों के प्रतिकूल है। निगम प्रषिक्षण से सम्बन्धित कोई भी संव्यवहार अपने सदस्यों के साथ ही कर सकती है। ऐसी स्थिति में निगम द्वारा गैर सदस्यों को ग्रामीण साक्षरता मिषन के तहत्‌ कम्प्यूटर प्रषिक्षण की कार्य योजना तैयार कर विभिन्न पदो ंके लिए नियुक्ति संबंधी विज्ञापन के माध्यम से आवेदकों से आवेदन प्राप्त कर निःसंदेह नौजवान युवक/युवतियों को ठगने का प्रयास किया गया है। उन्होंने यह भी प्रतिवेदित किया है कि निगम के निबंधित उपविधि के अवलोकन से विदित है कि निगम से सम्बद्ध समितियाँ इसकी सदस्य होंगी। परन्तु 31. 03.2009 तक प्रषासक द्वारा तैयार की गई मतदाता सूची से स्पष्ट है कि वर्त्तमान में निगम में एक भी सहकारी समिति सम्बद्ध नहीं है तथा सदस्य के रूप में मात्र व्यक्तिगत सदस्य हैं। ज्ञातव्य है कि निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना के पत्रांक 2658 दिनांक 17.08.09 द्वारा निगम का निर्वाचन आरम्भ कराया गया परन्तु समितियाँ सम्बद्ध नहीं रहने के कारण और नियमानुसार नामांकन हेतु पात्र सम्बद्ध समिति के प्रतिनिधियों के अभाव में निगम में निर्वाचन कराना संभव नहीं हो सका।

चूंकि वर्त्तमान समय में निगम अवक्रमित है और जिला सहकारिता पदाधिकारी, पटना इसके प्रषासक हैं। ऐसी स्थिति में प्रषासक में प्रबंधकारिणी की सारी शक्तियाँ निहित होने के कारण निगम के पूर्व पदधारकों (तथाकथित सचिव सहित) द्वारा किये जाने वाले कृत्य अवैधानिक है। उन्होंने यह भी प्रतिवेदित किया है कि आज की तिथि तक निगम से कोई भी समिति सम्बद्ध नहीं हो सकी है, फलस्वरूप निगम में निर्वाचन द्वारा प्रबंधकारिणी का गठन नहीं हो सकता है। उक्त स्थिति में निगम को परिसमापित करने के अलावे और कोई विकल्प नहीं रह गया है।

उक्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में इस कार्यालय का पत्रांक 881 दिनांक 12.02.14 द्वारा श्री अखिलेष कुमार दूबे, तथाकथित सचिव, जो निगम के सचिव के रूप में पत्राचार कर रहे हैं, से यह कारण पृच्छा की गई कि उक्त अनियमितताओं के लिए क्यों नहीं उनके विरूद्ध वैधानिक कार्रवाई करते हुए निगम को परिसमापित कर दिया जाय। श्री दूबे ने निगम के पत्रांक 40 दिनांक 14.02.14 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि -

(1) बिहार सरकार, सहकारिता विभाग का नाम केवल निगम का पंजीयन संख्या दर्षाने हेतु दिया गया है।निगम का अधिक्रमण सरकार द्वारा समय से प्रबंधकारिणी समिति का चुनाव कराने में विफल रहने के फलस्वरूप हुआ है न कि किसी प्र्रकार के कुप्रबंधन से।

(2) निगम में सरकार का कोई आर्थिक हित नहीं है। उनकी नियुक्ति प्रबंधकारिणी समिति के आदेष से निगम के उपविधि संख्या 39 के अनुसार हुई है, इसलिए उन्हें अलग से किसी आदेष या अनुमोदन की आवष्यकता नहीं है। (3) कम्प्यूटर संबंधी जो कार्य योजना बनायी गई है, वह निगम के व्यवसाय का हिस्सा है। सरकार द्वारा सहयोग के अभाव में निगम की आर्थिक स्थिति सृदृढ़ करने हेतु यह कदम उठाया गया है।

(4) निगम को परिसमापित किये जाने संबंधी स्पष्टीकरण में उन्होंने उप निबध्ांक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना के ज्ञापांक 1179 दिनांक 01.12.10 को संदर्भित करते हुए निगम की आम सभा दिनांक 06.10.2010 की सच्ची प्रतिलिपि संलग्न कर कहा है कि निगम को परिसमापित करने का कोई औचित्य नहीं है।

पुनः इस कार्यालय पत्रांक 1592 दिनांक 13.03.14 द्वारा सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के माध्यम से समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रकाषित कर उक्त निगम के सचिव, अध्यक्ष, निदेषकगण तथा अन्य सम्बन्धितों से पन्द्रह दिनों के भीतर कारण बताने को कहा गया कि उनके कार्यकाल में समिति के निबंधित उपविधियाँ के उप नियम-3(a) और 3(b) के आलोक में सहकारी समितियों का गठन/निबंधन क्यों नहीं कराया गया ? चूंकि उक्त कारण से समिति में निर्वाचन संभव नहीं है। अतः क्यों नहीं समिति को विघटित करने हेतु परिसमापन की कार्यवाही की जाय। इस कार्यालय पत्रांक 1594 दिनांक 13.03.14 द्वारा भी सभी सम्बन्धितों से कारण पृच्छा की गई। उक्त पृच्छा के आलोक में मात्र श्री अखिलेष दूबे ने सचिव पदनाम से कारण पृच्छा समर्पित की जो संतोषप्रद नहीं है। इससे यह भी प्रतीत होता है कि श्री अखिलेष कुमार दूबे, तथाकथित सचिव के अतिरिक्त पूर्व अध्यक्ष, पूर्व निदेषकगण एवं सदस्यों की विघटन के संबंध में कुछ कहना नहीं है।

उपर्युक्त तथ्यों, निगम की ओर से तथाकथित सचिव द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण, सन्दर्भित जाँच प्रतिवेदनों और निगम की आम सभा दिनांक 06.10.2010 की सच्ची प्रति के अवलोकन से विदित होता है कि बिहार राज्य भूतपूर्व सैनिक सहकारिता विकास निगम लिमिटेड का निबंधन भूतपूर्व सैनिकों के कल्याणार्थ एक शीर्ष सहकारी संस्था के रूप में हुआ था, किन्तु निबंधन की तिथि 19.05.2004 से 18.05.2009 के बीच निगम के निदेषक मंडल द्वारा निगम की उपविधि के उप नियम-3(ंए), 3(बी) और 3(सी) के आलोक में भूतपूर्व सैनिकों की सहकारी समितियों/संगठन/संस्थान की सदस्य नहीं बना पाने के कारण उपविधियाँ के उप नियम-26 के आलोक में निर्वाचन हेतु समितियों के प्रतिनिधियों3 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 28 अूील 2014 की अनुपलब्धता के फलस्वरूप निर्वाचन नहीं हो पाया और निगम अवक्रमित हो गया। श्री दूबे, तथाकथित सचिव द्वारा समर्पित कारण पृच्छा के साथ संलग्न उप निबध्ांक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमंडल, पटना के जाँच प्रतिवेदन से भी स्पष्ट है कि वर्त्तमान स्वरूप में इसके प्रबंध समिति का निर्वाचन असम्भव प्रतीत होता है। इस परिस्थिति में यह समिति परिसमापन के योग्य है।

चूंकि निगम अपने निबंधित उपविधियाँ में यथावर्णित उद्देष्यों के आलोक में भूतपूर्व सैनिकों के लिए कार्यरत नहीं है और निगम का प्रबंधन अपने कार्यकाल में उपविधियाँ के उप-नियम 3 के आलोक में भूतपूर्व सैनिक सहकारी समितियों/संगठनों/संस्थाओं को सम्बद्ध कर पाने में विफल रही, फलतः उपविधियाँ के उप नियम-26 के आलोक में निदेषक मंडल का गठन असंभव है। साथ ही हाल के दिनों में निगम के पूर्व पदधारकों द्वारा अवैध एवं अनाधिकृत तरीके से बिहार सरकार के लोगो (Logo) का प्रयोग एवं बिहार सरकार, सहकारिता विभाग के नाम पर विज्ञापन प्रकाषित कर नौजवान युवक/युवतियों को ठगने का प्रयास किया जा रहा है। निर्वाचित बोर्ड के अभाव में सचिव के कार्यरत रहने का कोई औचित्य नहीं है। जिला सहकारिता पदाधिकारी, पटना के पत्रांक 346 दिनांक 15.02.14 से पता चलता है कि विज्ञापन प्रकाषन हेतु प्रषासक द्वारा भी तथाकथित सचिव को आदेष नहीं दिया गया है। अतएव तथाकथित सचिव द्वारा उनके पत्रांक 40 दिनांक 14.02.14 और पत्रांक 51 दिनांक 27.03.14 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण असंतोषप्रद होने के कारण स्वीकार योग्य नहीं है।

और चूंकि, बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 की धारा-42 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मैं इस निष्कर्ष पर पहूँचा हूँ कि निगम को विघटित किया जाना वांछित है।

अतः मैं हुकुम सिंह मीणा, निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना बिहार सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1935 की धारा-42 में प्रदत्त शक्तियों के अधीन बिहार राज्य भूतपूर्व सैनिक सहकारी विकास निगम लिमिटेड, निबंधन संख्या-29/एच॰क्यू॰आर॰/04 दिनांक 19.05.2004 को परिसमापित करते हुए श्री नागेन्द्र प्रसाद, उप निबंधक (न्या॰), सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना को उक्त निगम का परिसमापक नियुक्त करते हुए उन्हें निदेष देता हूँ कि वे परिसमापनार्थ नियमानुकूल कार्रवाई करें।

आदेश से, हुकुम सिंह मीणा,हुकुम सिंह मीणा,हुकुम सिंह मीणा,हुकुम सिंह मीणा, निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना।

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अधी-क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 388-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 28 April 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-04-28.388/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-04-28.388.