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सं0 22/नि0सि0(वीर0)-07-06/2004/779—श्री अजीत विक्रम, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, पश्चिमी कोशी तटबंध प्रमण्डल संख्या-2 सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व वर्ष 2001-02 में उक्त प्रमण्डल के पदस्थापन अवधि में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प संख्या-736 दिनांक 13.07.06 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलाई गयी। इनके विरूद्ध निम्न आरोप गठित किये गये।
1. पश्चिमी कोशी तटबंध के कि0मी0 2.25 पर अवस्थित स्पर के प्रभारी सहायक अभियंता द्वारा दिनांक 17.07. 2001 से लगातार स्पर की क्षति होने की सूचना आपको दी गई परंतु आपके द्वारा केवल कुछ ही दिनाें यथा 23.07. 2001, 06.08.01, 10.08.01, 13.08.01 को कुल चार ही दिन स्पर टूटने से पूर्व स्थल का निरीक्षण करने के बावजूद बाढ़ अवधि में स्थल की नाजुकता के मद्देनजर आपके द्वारा समुचित ध्यान नही दिया गया।
2. अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 06.08.01 एवं 07.08.01 को स्थल निरीक्षण पश्चात पंजी में टिप्पणी बाढ़ स्थल पर बाढ़ संघर्षात्मक सामग्री नगण्य है। बोल्डर नेहरू पार्क से ढुलाई कर लाने का आदेश दिया जा चुका है, परंतु अभी तक लाया नही जा सका है। पुनः 07.08.01 को मुख्य अभियंता, वीरपुर द्वारा अंकित टिप्पणी कार्यपालक अभियंता ने अबतक क्यों नहीं यह कार्य किया है। अगर वे अविलम्ब इस कार्रवाई को नहीं करते है तो उनके विरूद्ध कार्रवाई की जायेगी एवं किसी भी क्षति के लिए वे जिम्मेवार होगें।
इनसे स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है कि आपके द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया गया है एवं उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना की गयी, जिसके कारण स्पर क्षतिग्रस्त हुआ।
3. प्रभारी सहायक अभियंता द्वारा लगातार आपको वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया। दिनांक 15.07.01 एवं 09.08.01 तक स्पर का डी/एस नोज कोने में क्षतिग्रस्त हो रहा था। दिनांक 10.08.01 से स्पर का यू/एस भाग क्षतिग्रस्त होने लगा जिसकी सूचना एवं कार्य दिशा हेतु प्रभारी सहायक अभियंता द्वारा लगातार 10.08.01 से स्पर कटने के पूर्व दिनांक 13.08.01 तक दिया गया परंतु आपके द्वारा विषम स्थिति का आकलन ससमय कर समुचित दिशा निर्देश एवं कार्यदिशा नहीं दिया गया।2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 3333 जुलाई जुलाई जुलाई जुलाई 2014201420142014 4. वीरपुर परिक्षेत्र हेतु बाढ़ गश्ती नियमावली वर्ष 2001 की कंडिका-23 में स्पष्ट अंकित है कि कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता के सभी प्रस्तावों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि कार्यपालक अभियंता किसी आकस्मिक दुर्घटना जो सहायक अभियंता के सभी या किसी मद प्रस्ताव के अस्वीकृत करने पर हो सकता है के लिए उतरदायी होगें। ऐसा प्रतीत होता है कि आपके द्वारा सहायक अभियंता के प्रस्तावों के प्रति उदासीनता बरती गयी जिसके कारण स्पर क्षतिग्रस्त हुआ।
5. बाढ़ गश्ती नियमावली 2001 में स्पष्ट उल्लेख है कि अपने-अपने परिक्षेत्राधीन सभी सम्वेदनशील स्थलों पर बाढ़ सामग्रियों की सुनिश्चित व्यवस्था की जिम्मेवारी प्रभारी कार्यपालक अभियंता की होगी जिससे प्रभारी सहायक अभियंता अपना पूर्ण ध्यान बाढ़ संघर्षात्मक कार्यो पर केन्द्रित कर सके।
उक्त आदेश के बावजूद भी स्थल पर हमेशा बाढ़ सामग्रियों का अभाव बना रहा एवं सामग्री उपलब्ध रहते हुए भी स-समय स्थल पर सामग्री की आपूर्ति नहीं की जा सकी जिसके अभाव में स्पर क्षतिग्रस्त हो गया। इसके लिए आप पूर्णतः जिम्मेवार है।
6. 07.08.01 से 14.08.01 के बीच स्थिति नियंत्रण से बाहर होने की सूचना अगर आपके द्वारा उच्चाधिकारियों को प्रेषित की जाती तो आवश्यकता के अनुरूप अतिरिक्त बल वहाँ भेजकर स्थिति पर काबू पायी जा सकती थी। इसके लिए आप दोषी हैं।
7. आपके द्वारा 07.08.01 से 14.08.01 के बीच स्थिति से निपटने हेतु कोई भी कारगर कार्रवाई नहीं की गयी। अतः स्पर के क्षतिग्रस्त होने के लिए आप पूर्णतः जिम्मेवार है।
विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप सं0-1, 4, 5, 6 एवं 7 प्रमाणित नही पाया गया। लेकिन संचालन पदाधिकारी द्वारा, अधीक्षण अभियंता द्वारा दिनांक 07.08.01 को दिये गये निदेश के आलोक मेें आठ (8) अद्द वोल्डर क्रेटिग के कार्य में अंतर पाये जाने के कारण, आरोपी पदाधिकरी के विरूद्ध पर्यवेक्षण की कमी के लिए अंशतः दोषी पाया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन समीक्षोपरान्त श्री अजीत विक्रम के विरूद्ध अधीक्षण अभियंता के निर्धारित कार्य के स्वरूप के अनुसार सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा सम्पादित कार्य का पर्यवेक्षण नहीं करने के आरोप अंशतः प्रमाणित पाया गया।
समीक्षा के क्रम में श्री अजीत विक्रम, कार्यपालक अभियंता दिनांक 31.12.11 को सेवानिवृत हो गये। तत्पश्चात श्री अजीत विक्रम के विरूद्ध संचालित उक्त विभागीय कार्यवाही को विभागीय आदेश सं0-18 दिनांक 15.02.12 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी॰) के तहत स्वतः समपरिवर्तित मानते हुए विभागीय पत्रांक-12 दिनांक 29.10. 12 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी॰) के तहत उपर्युक्त प्रमाणित आरोपों के लिए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी जिसके संदर्भ में श्री अजीत विक्रम द्वारा जबाब प्राप्त कराया गया। श्री अजीत विक्रम से प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री विक्रम द्वारा पूर्व में कही गयी बातों को ही दुहरायी गयी है। एवं पर्यवेक्षण नही करने के संबंध में उनके द्वारा दिनांक 06.08.01 से 11.08.01 तक बाढ़ के पानी का अन्य स्परो पर काफी दबाव का जिक्र करते हुए सतत निगरानी एवं पर्यवेक्षण का उल्लेख किया गया। जबकि विभागीय समीक्षा में पाया गया कि कोशी तटबंध के बाढ़ सुरक्षा कार्य में लापरवाही एवं समय पर बाढ़ पूर्व तैयारी नहीं करने के कारण कि0मी0 2.25 पर अवस्थित स्पर क्षतिग्रस्त हो गया।
वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री अजीत विक्रम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता कोशी नहर तटबंध, कुनौली सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध पर्यवेक्षण में कमी का आरोप प्रमाणित पाया गया।
प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री विक्रम के विरूद्ध निम्न दंड देने का निर्णय लिया गया :- (1) 10 प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए कटौती उपरोक्त वर्णित स्थिति में श्री अजीत विक्रम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, कोशी नहर तटबंध, कुनौली सम्प्रति सेवानिवृत को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी॰) के तहत निम्न दंड दिया जाता है :-
(1) 10 प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए कटौती
उक्त आदेश श्री अजीत विक्रम, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से,
सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।