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नवप्रवत्तकों के समक्ष उत्पन्न होने वाली वित्तीय कठिनाईयों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नवप्रवर्त्तन प्रोत्साहन योजना की परिकल्पना की गई है। भविष्य में राज्य का अपेक्षित विकास इस तथ्य पर निर्भर होगा कि वैश्विक प्रतियोगिता के इस युग में नवप्रवर्त्तन के आधार पर कितने नवीन विचारों तथा प्रक्रियों को सामाजिक तथा आर्थिक उत्थान के रूप में परिवर्तित किया गया है। समावेशी नवप्रवर्त्तन की विभिन्न गतिविधियों के सफल एवं सुचारू रूप से संचालन हेतु बिहार वित्त नियमावली के अधीन इस योजना का कार्यान्वयन कराया जाएगा। वर्त्तमान में राज्य में नवप्रवर्त्तकों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं है । पारम्परिक वित्तीय संस्थायें यथा बैंक तथा वैंचर कैपटलिस्ट की अभिरूचि सामान्यतया वाणिज्यिक गतिविधियों में अधिक होती है । सामाजिक परिवर्त्तन में संलग्न नवप्रवर्त्तन के प्रति ये उदासीन रहते हैं । इस परिप्रेक्ष्य में राज्य में समावेशी नवप्रवर्त्तन को प्रोत्साहित करने के लिए इस योजना की और अनिवार्यता है ।
राज्य स्तर पर नवप्रवर्त्तन के सभी आयामों पर सम्यक निर्णय लेने हेतु मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य नवप्रवर्त्तन परिषद गठित है । इस परिषद को नवप्रवर्त्तन का रोड़ मैप तैयार कर राज्य के आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति में नवप्रवर्त्तन के मार्ग को प्रशस्त करना है ।
राज्य में यह योजना अपनी तरह की एक सर्वथा अलग वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली योजना होगी जो समावेशी विकास की अवधारण को मूर्तरूप देने में सहयोगी होगी । नवप्रवर्त्तन के आधार पर कार्यान्वित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों के लिए इस योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करना संभव हो सकेगा । 2. योजना का नामः- इस योजना का नाम मुख्यमंत्री नवप्रर्वतन प्रोत्साहन योजना होगा । 3. उद्देश्य
• राज्य में नवप्रवर्त्तन से संबंधित गतिविधयों, कल्पनाशीलता तथा उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करना • समावेशी नवप्रवर्त्तन के सृजन में सार्थक भूमिका निभाना • समावेशी नवप्रवर्त्तन हेतु संस्थागत ढांचा का विकास करना2 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8888 जुलाई जुलाई जुलाई जुलाई 2014201420142014 • शिक्षा के माध्यम से सृजनशीलता एवं नवप्रवर्त्तन की क्षमता का विकास करना
• समाज में वैज्ञानिक सोच को विकसित करना • औद्योगिक नवप्रवर्त्तन समूह के अन्तर्गत नये उत्पादों का सृजन तथा नियोजन के अवसरों को बढ़ाने तथा प्रतियोगिताशीलता में अभिवृद्धि करना ।
4. वित्तीय सहायता किसे दी जा सकती है
• वैसी संस्थायें जो नवप्रर्वतन के कार्यो में संलग्न हैं • नवप्रर्वतन में संलग्न व्यक्ति • नवप्रर्वतन में संलग्न व्यक्तियों के समूह • विभिन्न सरकारी विभाग/स्वायतशासी संस्थाएं/निगम/बोर्ड
5. गतिविधियाँ
इस योजनान्तर्गत राज्य में नवप्रवर्त्तन से संबंधित निम्नांकित गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जायगी ।
| क्रमांक | गतिविधि | वित्तीय सहायता | अनुमान्यता |
| 1 | 2 | 2 | 3 |
| 1 | प्रूफ ऑफ कन्सेप्ट/मॉडल | अधिकत्तम 2.00 लाख रूपये या कुल लागत का 80 प्रतिशत | इनोवेटर/संस्था |
| 2 | प्रोटोटाईप | प्रोजेक्ट लागत का अधिकत्तम 80 प्रतिशत, 20 प्रतिशत की राशि इनोवेटर द्वारा लगायी जायगी | इनोवेटर/संस्था |
| 3 | प्रयोग तथा परीक्षण/ प्रौद्योगिकी परामर्श एवं हस्तांतरण/पेटेंट कराना | अधिकत्तम 20.00 लाख रूपये या कुल लागत का 80 प्रतिशत की राशि | इनोवेटर/संस्था |
| 4 | प्रचलित उत्पाद/प्रक्रिया/प्रयोग में सुधार | अधिकत्तम 10 लाख रू0 या कुल लागत का 80 प्रतिशत | इनोवेटर/संस्था |
| 5 | इनक्यूबेशन केन्द्र की स्थापना | प्रोजेक्ट के लागत के अनुरूप | संस्था |
| 6 | प्रौधिगिकी आधारित नवप्रर्वत्तन क े उत्थान तथा उद्यम के निर्माण के लिए प्रौधिगिकी का हस्तांतरण | अधिकत्तम 50.00 लाख रूपये जो प्रोजेक्ट लागत के 50 प्रतिशत की राशि तक सीमित होगी । | संस्था |
| 7 | सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों के समूह के विकास के अध्ययन हेतु | प्रोजेक्ट की लागत के अनुरूप | संस्था |
| 8 | सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों में इनोवेशन को प्रोत्साहित करने हेतु समूह इनोवेशन केन्द्र की स्थापना | अधिकत्तम 20.00 लाख रूपये या कुल लागत का 80 प्रतिशत | संस्था |
| 9 | सेमिनार तथा कार्यशाला आयोजन | वास्तविक व्यय के अनुरूप | संस्था |
| 10 | नवप्रर्वत्तन क े नये प्रयोग/ सफलता/सुझाव/सेमिनार तथा कार्यशाला की कार्यवाही के प्रकाशन हेतु | वास्तविक व्यय के अनुरूप | संस्था |
| 11 | नवप्रवर्त्तन के प्रोत्साहन के लिए किये जाने वाले कार्य यथा 1. स्कौलरशिप 2. जिलों में नवप्रर्वत्तन कोषाांग की स्थापना 3.विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में विषय आधारित प्रयोगशाला की स्थापना 4.स्थानीय इतिहास- पर्यावरण- सांस्कृतिक धरोहर का विद्यालयों द्वारा अध्ययन आदि। | प्रोजेक्ट लागत केे अनुरूप | संस्था |
| 12 | कल्पनाशीलता तथा उद्यमशीलता को प्रेरित करने हेतु प्रतियोगिता एवं पुरस्कार | प्रोजेक्ट लागत केे अनुरूप | संस्था |
| 13 | नवप्रर्वत्तन के प्रोत्साहन हेतु प्रशिक्षण कार्य का आयोजन | प्रोजेक्ट लागत केे अनुरूप | संस्था |
| 14 | नवप्रर्वत्तन संबंधी कार्यशाला /सेमिनार /प्रशिक्षण के लिए यात्रा | वास्तविक व्यय के अनुरूप | इनोवेटर/संस्था |
6. वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया
• राज्य नवप्रर्वत्तन परिषद् अनुदान के रूप में वित्तीय सहायता व्यक्ति या संस्था को उपलब्ध करा सकेगी
• आवेदक से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायगा • सभी आवेदनों को प्रोजेक्ट सैन्कसनीग कमिटी द्वारा योग्यता के आधार पर जाँच कर निर्णय लिया जायगा
(क) व्यक्तिगत नवप्रर्वत्तकों के लिए वित्तीय सहायता
प्रोजेक्ट सैन्कसनीग कमिटी की अनुशंसा पर व्यक्तिगत नवप्रर्वत्तकों को वित्तीय सहायता इस योजना में अनुमान्य गतिविधियों के लिए दी जायगी । प्रोजेक्ट स्क्रीनींग कमिटी का गठन निम्नानुसार किया जायगाः- 1. विकास आयुक्त - अध्यक्ष 2. राज्य नवप्रर्वत्तन परिषद की कार्यकारिणी समिति के सरकारी सदस्यों में से मनोनीत एक सदस्य। - सदस्य 3. प्रधान सचिव, - सदस्य सचिव
योजना एवं विकास विभाग
(ख) संस्था को वित्तीय सहायता
संस्थाओं को वित्तीय सहायता इस योजना में अनुमान्य गतिविधियों के लिए प्रोजेक्ट सैन्कसनीग कमिटी की अनुशंसा पर दी जायगी ।
(ग) राज्य नवप्रर्वत्तन परिषद के सदस्य सचिव अपने विभागीय वित्तीय अधिसीमा तक किसी भी गतिविधि के लिए वित्तीय सहायता देने के लिए प्रोजेक्ट को स्वीकृत कर सकेंगे।
(घ) सदस्य सचिव की विभागीय स्वीकृत वित्तीय अधिसीमा से अधिक के प्रोजेक्ट की स्वीकृति के लिए बिहार वित्तीय नियमावली के प्रावधानों के तहत सदस्य सचिव सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त करेंगे। 7. वित्तीय सहायता संबंधी सामान्य अनुदेश 7.1 संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने की योग्यता संस्थाओं को वित्तीय सहायता हेतु तभी योग्य समझा जायेगा यदि
(क) संस्था सोसाईटी निबंधन अधिनियम, 1860 अथवा भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 अथवा कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 अथवा अन्य अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत हो अथवा विश्वविद्यालय या डीम्ड विश्वविद्यालय से सम्बद्ध या मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान हो ।
(ख) वे तीन वर्षो से कार्यरत हों । परन्तु राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित संस्थाओं पर यह शर्त्त लागू नहीं होगा ।
(ग) उनके पास नवप्रवर्त्तन के कार्यो में दक्ष मानव संसाधन की उपलब्धता हो । (घ) उनके पास नवप्रवर्त्तन कार्यो के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना उपलब्ध हो ।
7.2 संस्थाओं द्वारा समर्पित प्रस्ताव के साथ दिए जाने वाले दस्तावेज (1) निबंधन प्रमाण-पत्र (नवीकरण के मामले में नवीकरण प्रमाण-पत्र) (2) संस्था का उप नियम (बाई-लॉ), (अद्यतन संशोधन सहित) (3) संस्था की कार्यकारी अथवा प्रबंधन समिति के सदस्यों की अद्यतन सूची (4) गत तीन वर्षो का संस्था का वार्षिक प्रतिवेदन (5) विगत तीन वर्षो का आय-व्यय, प्राप्ति-भुगतान से संबंधित लेखा का बैलेंस शीट की अंकेक्षित प्रति (6) आयकर का पैन नं0 तथा 12-ए में निबंधन संबंधी आयकर विभाग का प्रमाण-पत्र अथवा आयकर प्राधिकार को इन दस्तावेजों के लिए भेजे गये अनुरोध पत्र की प्रति (7) संस्था द्वारा किये गये नवप्रवर्त्तन कार्यो का सार
7.3 वित्तीय सहायता की अन्य शर्त्ते
1. सौंपे गये कार्य अनुबंध में अंकित समय-सीमा के अन्दर पूरा किया जाना अनिवार्य होगा । 2. कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा आवंटित कार्य में अपरिहार्य कारणों से हुए विलम्ब के कारण समय सीमा की अवधि विस्तारित की जाएगी बशर्त्ते कि एजेंसी द्वारा यथोचित कारण-पृच्छा समर्पित किया गया हो ।4 (cid:18)बहार गजट (असाधारण), 8888 जुलाई जुलाई जुलाई जुलाई 2014201420142014 3. सक्षम प्राधिकार द्वारा नवप्रवर्त्तन गतिविधि की प्रगति को संतोषप्रद नहीं पाये जाने की स्थिति में अनुदानग्राही संस्था को मिलने वाली वित्तीय सहायता बंद कर दी जाएगी एवं कार्यान्वयन एजेंसी से पूर्व में भुगतान की गई राशि बसूल कर ली जाएगी ।
• मुख्यमंत्री नवप्रवर्त्तन प्रोत्साहन योजना के गठन के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद् का अनुमोदन प्राप्त है । • यह तत्काल प्रभाव से लागू होगा ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, पंकज कुमार, सरकार के सचिव।
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अधी1क, सिचवालय मुिणालय, (cid:18)बहार, पटना (cid:26)ारा ूकािशत एवं मु5ित। (cid:18)बहार गजट (असाधारण) 555577776666-571+10-ड(cid:15)0ट(cid:15)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in