Servants of Knowledge
Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 30 July 2014

Published 30 July 2014

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-07-30.624
Languages
English, Hindi

click here for IIIF manifest

िनबंधन सं(cid:27)या पी0ट*0-40 िनबंधन सं(cid:27)या

(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार गजटगजटगजटगजट

(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार

असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत 8888 ौावण ौावण ौावण ौावण 1936 1936 1936 1936 ((((शशशश0000))))

((((संसंसंसं0 0 0 0 पटना पटना पटना पटना 624624624624) ) ) ) पटनापटनापटनापटना

पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार, , , , 30303030 जुलाई जुलाई जुलाई जुलाई 2014201420142014 U;k;ky;] fuca/kd lg;ksx lfefr;k¡] fcgkj] iVuk U;k;ky;] fuca/kd lg;ksx lfefr;k¡] fcgkj] iVuk

——— आदेश 6 uoEcj 19996 uoEcj 19996 uoEcj 19996 uoEcj 1999 विविध वाद संख्या-187/97

बिहार सहकारी सोसाइटीज अधिनियम, 1935 की धारा 42 के अन्तर्गत फतुहा-फुलवारीशरीफ ग्राम्य बिहार सहकारी सोसाइटीज अधिनियम, 1935 की धारा 42 के अन्तर्गत फतुहा-फुलवारीशरीफ ग्राम्य बिहार सहकारी सोसाइटीज अधिनियम, 1935 की धारा 42 के अन्तर्गत फतुहा-फुलवारीशरीफ ग्राम्य विद्युत सहकारी समिति लि॰, पटना के विरुद्ध कार्रवाई के संबंध में। विद्युत सहकारी समिति लि॰, पटना के विरुद्ध कार्रवाई के संबंध में।

.1999 ः ऊर्जा विभाग की अधिसूचना, ज्ञापांक 403 दिनांक

सं॰ 342/R.L.—02.11.

विद्युत पर्षद के बकाये रकमों का भुगतान भी नहीं कर पायी।25.04.95 में निहित तथ्यों के आधार पर स्पष्ट होता है कि फतुहा-फुलवारीशरीफ ग्राम्य विद्युत सहकारी समिति लि॰, पटना अपने गठन के तथ्यों के आधार पर स्पष्ट होता है कि फतुहा-फुलवारीशरीफ ग्राम्य विद्युत सहकारी समिति लि॰, पटना अपने गठन के तथ्यों के आधार पर स्पष्ट होता है कि फतुहा-फुलवारीशरीफ ग्राम्य विद्युत सहकारी समिति लि॰, पटना अपने गठन के बाद से ही अपने मुख्य उद्देश्य की पूर्ति में पूर्णतः विफल रही है और उसके असंतोषजनक कार्यकलापों, अक्षम प्रबंधन के बाद से ही अपने मुख्य उद्देश्य की पूर्ति में पूर्णतः विफल रही है और उसके असंतोषजनक कार्यकलापों, अक्षम प्रबंधन के बाद से ही अपने मुख्य उद्देश्य की पूर्ति में पूर्णतः विफल रही है और उसके असंतोषजनक कार्यकलापों, अक्षम प्रबंधन के फलस्वरूप समिति बिहार राज्य विद्युत पर्षद के बकाये रकमों का भुगतान भी नहीं कर पायी। और, चूँकि समिति के कार्यकलापों के संबंध में भारतीय विद्युत अधिनियम 1910 की धारा-4(1) के अन्तर्गत और, चूँकि समिति के कार्यकलापों के संबंध में भारतीय विद्युत अधिनियम 1910 की धारा-4(1) के अन्तर्गत और, चूँकि समिति के कार्यकलापों के संबंध में भारतीय विद्युत अधिनियम 1910 की धारा-4(1) के अन्तर्गत विद्युत वितरण अनुज्ञा रद्द करने के संबंध में ऊर्जा विभाग द्वारा पत्रांक 2337 दिनांक 18 93 द्वारा समिति को दी गई विद्युत वितरण अनुज्ञा रद्द करने के संबंध में ऊर्जा विभाग द्वारा पत्रांक 2337 दिनांक 18.08.93 द्वारा समिति को कारण-पृच्छा नोटिस का समिति से प्राप्त उत्तर समीक्षोपरान्त पूर्णतः असंतोषजनक पाये जाने के कारण ऊर्जा विभाग की कारण-पृच्छा नोटिस का समिति से प्राप्त उत्तर समीक्षोपरान्त पूर्णतः असंतोषजनक पाये जाने के कारण ऊर्जा विभाग की कारण-पृच्छा नोटिस का समिति से प्राप्त उत्तर समीक्षोपरान्त पूर्णतः असंतोषजनक पाये जाने के कारण ऊर्जा विभाग की उक्त अधिसूचना ज्ञापांक 403 दिनांक 25.04.95 द्वारा उक्त समिति को विद्युत-शक्ति की आपूर्ति संबंधी स्वीकृत अनुज्ञा 95 द्वारा उक्त समिति को विद्युत-शक्ति की आपूर्ति संबंधी स्वीकृत अनुज्ञा उक्त अधिसूचना ज्ञापांक 403 दिनांक 25 95 की बैठक में उक्त समिति को निरस्त की जा चुकी है और उक्त अधिसूचना के तहत गठित कमिटि ने दिनांक 18.09.95 की बैठक में उक्त समिति को निरस्त की जा चुकी है और उक्त अधिसूचन परिसमापित करने की अनुशंसा की है। परिसमापित करने की अनुशंसा की है। और, चूँकि उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर अधोहस्ताक्षरी की समाधान हो जाने पर कि उक्त समिति का और, चूँकि उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर अधोहस्ताक्षरी की समाधान हो जाने पर कि उक्त समिति का और, चूँकि उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर अधोहस्ताक्षरी की समाधान हो जाने पर कि उक्त समिति का , उपर्युक्त कारणों के आधार पर, अधोहस्ताक्षरी कार्यकलाप पूर्णतः ठप्प हो गया है, उक्त समिति एवं उसके सदस्यों को, उपर्युक्त कारणों के आधार पर, अधोहस्ताक्षरी कार्यकलाप पूर्णतः ठप्प हो गया है, उक्त समिति एवं उसके सदस्यों को 97 के अंक में प्रकाशित सूचना द्वारा 03.97 तथा दैनिक हिन्दुस्तान के दिनांक 30.03.97 के अंक में प्रकाशित सूचना द्वारा के आदेश ज्ञापांक 2579 दिनांक 22.03 97 तक कारण बतायें कि क्यों नहीं उक्त समिति को विघटित कर दिया यह निदेश दिया गया है कि वे दिनांक 21.04.97 तक कारण बतायें कि क्यों नहीं उक्त समिति को विघटित कर ि यह निदेश दिया गया है कि वे दिनांक 21 जाय। एतदर्थ दिनांक 22.04.97 को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई। किन्तु, न तो समिति द्वारा और न ही उसके 97 को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई। किन्तु, न तो समिति द्वारा और न ही उसके 97 को सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई। किन्तु, न तो समिति द्वारा और न ही उसके किसी सदस्य द्वारा कारण-पृच्छा उत्तर दिया गया है और न ही सुनवाई की उक्त तिथि को वे उपस्थित हुए। केवल किसी सदस्य द्वारा कारण-पृच्छा उत्तर दिया गया है और न ही सुनवाई की उक्त तिथि को वे उपस्थित हुए। केवल किसी सदस्य द्वारा कारण-पृच्छा उत्तर दिया गया है और न ही सुनवाई की उक्त तिथि को वे उपस्थित हुए। केवल कारण-पृच्छा उत्तर दिया गया है। प्रशासक द्वारा कारण-पृच्छा समिति के प्रशासक श्री सर्वेश्वर लाल दास की ओर से कारण-पृच्छा उत्तर दिया गया है। प्रशासक द्वारा कारण-पृच्छा समिति के प्रशासक श्री सर्वेश्वर लाल दास की ओर से उत्तर में कहा गया है कि परिसमापन का निर्णय तत्काल इसलिए घातक होगा क्योंकि, (क) विद्युत बोर्ड द्वारा समिति की उत्तर में कहा गया है कि परिसमापन का निर्णय तत्काल इसलिए घातक होगा क्योंकि, (क) विद्युत बोर्ड द्वारा समिति की उत्तर में कहा गया है कि परिसमापन का निर्णय तत्काल इसलिए घातक होगा क्योंकि, (क) विद्युत बोर्ड द्वारा समिति की संरचनाओं का उपयोग कर लिए जाने के लिए क्षतिपूर्ति का निर्णय नहीं हुआ है, (ख) समिति में कार्यरत संरचनाओं का उपयोग कर लिए जाने के लिए क्षतिपूर्ति का निर्णय नहीं हुआ है, (ख) समिति में कार्यरत कर्मचारियों का संरचनाओं का उपयोग कर लिए जाने के लिए क्षतिपूर्ति का निर्णय नहीं हुआ है, (ख) समिति में कार्यरत सेवा अकारण परिसमापन से समाप्त हो जायेगी, (ग) समिति अपने कर्मचारियों के बकाये वेतन का भुगतान करने की भी सेवा अकारण परिसमापन से समाप्त हो जायेगी, (ग) समिति अपने कर्मचारियों के बकाये वेतन का भुगतान करने की भी सेवा अकारण परिसमापन से समाप्त हो जायेगी, (ग) समिति अपने कर्मचारियों के बकाये वेतन का भुगतान करने की भी 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 30303030 जुलाई जुलाई जुलाई जुलाई 2014201420142014 स्थिति में नहीं है, इसलिए सहकारिता विभाग द्वारा बकाये वेतनादि के बराबर अनुदान आदि देने की जरूरत होगा, साथ ही विद्युत बोर्ड द्वारा समिति की संरचनाओं के उपयोग कर लिए जाने के एवज में नगद भुगतान की भी जरूरत होगी, (घ) उन्होंने आगे यह भी कहा है कि परिसमापन की कार्रवाई बिहार सहकारी सोसाइटीज अधिनियम, 1935 की धारा-35 के तहत जाँच अथवा धाराएँ-34, 36, 37 के तहत निरीक्षण के आधार पर ही हो सकती है। प्रशासक के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन में उठाये गये तथ्यों पर बिहार राज्य विद्युत बोर्ड एवं ऊर्जा विभाग, बिहार सरकार से प्रतिक्रिया आमंत्रित की गई। विद्युत बोर्ड द्वारा तो जबाव दिया गया परन्तु ऊर्जा विभाग द्वारा कोई जबाव प्राप्त नहीं हुआ। विद्युत बोर्ड द्वारा अपने जबाव में कहा गया कि समति का विघटन न्यायोचित है तथा समिति का अभ्यावेदन रद्द करने योग्य है। बोर्ड द्वारा यह भी बताया गया है कि विद्युत शुल्क के रूप में बोर्ड का समिति पर 24.15 करोड़ रु॰ बकाया है जो अभ्यावेदन में उल्लिखित समिति के सम्पत्ति से बहुत अधिक है। प्रशासक की आपत्तियों के अवलोकन से भी यह स्पष्ट है कि समिति का कार्यकलाप पूर्णतः ठप्प हो गया है चूँकि समिति अपनी विद्युत वितरण अनुज्ञा को पुनर्जीवित करा पाने में अक्षम रही है। चूँकि जहाँ एक ओर आय के साधन समाप्त हो गये हैं वहीं दूसरी ओर स्थापना एवं अन्य दायित्व बढ़ते जा रहे हैं। समिति की स्थिति निरन्तर खराब होती जा रही है। समिति के कर्मचारियों को विगत कई माह से वेतनादि का भुगतान नहीं हुआ है। समिति का वित्तीय घाटा निरन्तर बढ़ता गया है। इस प्रकार अब समिति के अस्तित्व को बनाये रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है। परिसमापन की कार्रवाई नहीं करने से समिति का संकट और अधिक बढ़ सकता है। जहाँ तक धारा-35 के अन्तर्गत जाँच कराने अथवा धारा-34, 36, 37 के अन्तर्गत निरीक्षण कराने का प्रश्न है, धारा 42 में अधोहस्ताक्षरी को यह शक्ति प्रदत्त है कि समिति का कार्यकलाप ठप्प हो जाने से अधोहस्ताक्षरी द्वारा स्वविवेक से भी परिसमापन का आदेश दिया जा सकता है। प्रशासक की अन्य आपत्तियों का निराकरण परिसमापक द्वारा भी परिसमान की कार्यवाही के दौरान विधिसम्मत तरीके से किया जा सकता है। और, चूँकि उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट परिलक्षित होता है कि समति का गठन जिन उद्देश्यों से किया गया उन उद्देश्यों की पूर्ति में यह पूर्णतः विफल रही है तथा इसका कार्यकलाप पूर्णतः ठप्प हो गया है। समिति बने रहने में इसके सदस्यों को कोई अभिरूचि नहीं रह गई है। अतः बिहार सहकारी सोसाइटीज अधिनियम, 1935 की धारा-42 44(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मैं, एन॰एन॰ पाण्डेय, निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, फतुहा-फुलवारीशरीफ ग्राम्य विद्युत सहकारी समिति लि॰, पटना के परिसमापन का आदेश देता हूँ और संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियाँ, पटना प्रमण्डल, पटना को उक्त समिति का परिसमापक नियुक्त करता हूँ। परिसमापक को यह निर्देश दिया जाता है कि वे उक्त अधिनियम एवं उसके तहत बनी नियमावली के प्रावधानों के अनुसार समिति के परिसमापन की कार्रवाई करें।

आदेश से, एन॰एन॰ पाण्डेय, निबंधक, सहयोग समितियाँ, बिहार, पटना।

—————

अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु1ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 624-571+25-ड*0ट*0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 30 July 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-07-30.624/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-07-30.624.