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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 10 September 2014

Published 10 September 2014

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-09-10.37
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 11119999 भािभािभािभाि 1931931931936666 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 37373737 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ————————

10101010 िसत(बिसत(बिसत(बिसत(बरररर 2014201420142014 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)1, पदःथापन, बदली, श(cid:18)1, छु 7ट(cid:15) और अ:य ;य(cid:18)1गत सूचनाएं। 2-3 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु?मA के समादेंटाओं के आदेश।

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भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Jाओं के पर(cid:15)Jा-फल, कायLबम, छाऽवृ(cid:18)O ूदान, आPद।

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भाग-1-ग—िशJा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Jाफल आPद ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राQयपाल और कायाLRयJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आPद। ---

भाग-3—भारत सरकार, पSTम बंगाल सरकार और उVच :यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राQय गजटA के उXरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल म[ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ]त (cid:18)वधान मंडल म[ उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Pकये जानेवाले ूवर सिमितयA के ूितवेदन और उ]त (cid:18)वधान मंडल म[ पुर:ःथापन के पूवL ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अिधिनयम Sजनपर रांशपित क^ Qयेंठ अनुमित िमल चुक^ है। ---

भाग-8—भारत क^ संसद म[ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद म[ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के ूितवेदन और संसद म[ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के ूितवेदन और संसद म[ पुर:ःथापन के पूवL ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व`ापन

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भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क^ नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, पaरवहन सूचनाएं, :यायालय सूचनाएं और सवLसाधारण सूचनाएं इbयाPद। ---

पूरक

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पूरक-क 4-272 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014

भागभागभागभाग----1111

िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1िनयु(cid:18)1, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1श(cid:18)1, , , , छु 7ट(cid:15)छु 7ट(cid:15)छु 7ट(cid:15)छु 7ट(cid:15) और अ:यऔर अ:यऔर अ:यऔर अ:य वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं वैय(cid:18)1क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

उद्योग विभाग ——— अधिसूचनाएं 18 जुलाई 2014 सं॰ 3(स)/उ0स्था0(प्रोन्नति)06/13-2692—श्री प्रकाश टोप्पो, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, नवादा अधिसूचित उप उद्योग निदेषक, उद्योग निदेषालय, बिहार, पटना को बिहार उद्योग सेवा संवर्ग विभागीय परीक्षा नियमावली, 2011 के अन्तर्गत विभागीय परीक्षा उतीर्ण होने की अनिवार्यता से मुक्त किया जाता है।

इसमें मंत्रिपरिषद की स्वीकृृति प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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18 जुलाई 2014

सं॰ 3(स)/उ0स्था0(प्रोन्नति)06/13-2693—श्री प्रकाश टोप्पो, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, नवादा अधिसूचित उप उद्योग निदेषक, उद्योग निदेषालय, बिहार, पटना (वेतनमान पी0बी0-3, 15,600-39,100, ग्रेड पे-7600) को संयुक्त उद्योग निदेशक (वेतनमान पी0बी0-4, 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) के पद पर प्रोन्नति देते हुए संयुक्त उद्योग निदेषक के रिक्त पद पर पदस्थापित किया जाता है।

सं॰ 3(स)/उ0स्था0(प्रोन्नति)06/13-2694—श्री विमल कुमार, महाप्रबंधक अधिसूचित मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, उद्योग मित्र, पटना (वेतनमान पी0बी0-3, 15,600-39,100, ग्रेड पे-7600) को संयुक्त उद्योग निदेशक (वेतनमान पी0बी0-4, 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) के पद पर प्रोन्नति देते हुए संयुक्त उद्योग निदेषक के रिक्त पद पर पदस्थपित किया जाता है।

सं॰ 3(स)/उ0स्था0(प्रोन्नति)06/13-2695—श्री ब्रजनन्दन प्रसाद, उप निदेशक(तक0) (वेतनमान पी0बी0-3, 15,600-39,100, ग्रेड पे-7600) को संयुक्त उद्योग निदेशक (वेतनमान पी0बी0-4, 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) के पद पर प्रोन्नति देते हुए संयुक्त उद्योग निदेषक के रिक्त पद पर पदस्थपित किया जाता है।

सं॰ 3(स)/उ0स्था0(प्रोन्नति)06/13-2696—श्री श्रीपति सिंह, उप निदेशक(तक0) (वेतनमान पी0बी0-3, 15,600-39,100, ग्रेड पे-7600) को संयुक्त उद्योग निदेशक (वेतनमान पी0बी0-4, 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) के पद पर प्रोन्नति देते हुए संयुक्त उद्योग निदेषक के रिक्त पद पर पदस्थपित किया जाता है। सं॰ 3(स)/उ0स्था0(प्रोन्नति)06/13-2697—श्री अनिल कुमार ठाकुर, उप उद्योग निदेशक (वेतनमान पी0बी0-3, 15,600-39,100, ग्रेड पे-7600) को संयुक्त उद्योग निदेशक (वेतनमान पी0बी0-4, 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) के पद पर प्रोन्नति देते हुए संयुक्त उद्योग निदेषक के रिक्त पद पर पदस्थपित किया जाता है।

सं॰ 3(स)/उ0स्था0(प्रोन्नति)06/13-2698—श्री महफूज अंसारी, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, बक्सर (वेतनमान पी0बी0-3, 15,600-39,100, ग्रेड पे-7600) को संयुक्त उद्योग निदेशक (वेतनमान पी0बी0-4, 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) के पद पर प्रोन्नति देते हुए संयुक्त उद्योग निदेषक के रिक्त पद पर पदस्थपित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

——— 18 जुलाई 2014 सं॰ 3(स)/उ0स्था0(प्रोन्नति)06/13-2699—श्रीमती सरिता चौधरी, संयुक्त उद्योग निदेशक, उद्योग निदेषालय, बिहार, पटना (वेतनमान पी0बी0-4, 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) को अपर निदेशक(तकनीकी) (वेतनमान पी0बी0-4, 37,400-67,000, ग्रेड पे-8700) के पद पर प्रोन्नति देते हुए अपर निदेषक (तकनीकी) के रिक्त पद पर पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।3 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 27 अगस्त 2014 सं॰ 3(स)/उ0स्था0(आरोप)06/14-3234—श्री आनन्द कुमार बर्द्धन, उप निदेशक(तक०), तकनीकी विकास निदेशालय, उद्येाग विभाग, बिहार, पटना को अनैतिक कार्य में संलग्न होने के आरोप में विभागीय अधिसूचना ज्ञापांक-3220 दिनांक 26-08-14 द्वारा निलम्बित कर निलम्बन अवधि में इनका मुख्यालय आयुक्त, पटना प्रमंडल का कार्यालय निर्धारित किया गया है।

अतः आदेश दिया जाता है कि श्री बर्द्धन का कार्य श्री श्याम नारायण राम, कार्यकारी प्रबंधक, जो सम्प्रति बिहार राज्य साख एवं विनियोग निगम लिमिटेड(बिसीको), पटना में पदस्थापित हैं, को सौंपा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

——— 28 अगस्त 2014 सं॰ 4तक०/विविध/C/86/2014-3251—बिहार राज्य में निर्यात आयुक्त का दायित्व तदर्थ रूप से प्रधान सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को सौंपा जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

——— 29 अगस्त 2014 सं॰ 3/उ०स्था०(स्थानान्तरण) 06/12-3256—श्री अजय कुमार महतो, प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, गया अगले आदेश तक उप विकास पदाधिकारी (वस्त्र), गया के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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कृषि विभाग

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अधिसूचना

1 सितम्बर 2014

सं0 3/कृ0 वि0 (भा0प्र0से0)- 06/14-4046/कृ0—श्री विनय कुमार, भा0 प्र0 से0 (1999), कृषि निदेषक, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त प्रबंध निदेषक, बिहार राज्य बीज निगम, पटना का प्रभार दिया जाता है।

प्रस्ताव में माननीय मंत्री, कृषि विभाग का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, संजय प्रियदर्षीं, उप-सचिव।

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निगरानी विभाग

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अधिसूचना

27 अगस्त 2014

सं॰ नि॰वि॰स्था॰-19/2005-4498—जल संसाधन विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या 2912 दिनांक 30.06.2014 द्वारा पदस्थापित श्री अशोक कुमार, नव प्रोन्नत कार्यपालक अभियंता (असैनिक) का योगदान उनके योगदान की तिथि 02.07.2014 के पूर्वाह्‌न से स्वीकार करते हुए निगरानी विभाग के अधीन तकनीकी परीक्षक कोषांग, पटना में अगले आदेश तक पदस्थापित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, चन्द्रशेखर नारायण, उप-सचिव।

——— अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

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Website: http://egazette.bih.nic.in

4 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014

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उद्योग विभाग ——— अधिसूचनाएं 4 अगस्त 2014 सं॰ 3(स०)/उ०स्था०(आरोप)02/13-2895—सर्वश्री सिन्हा इंटरप्राइजेज, पुरानी गुडहटी, छपरा के पता पर फोटो कंपोजिंग, पिं्रटिंग एवं फोटो-स्टेट के अकार्यरत इकाई को कार्यरत होने का जाँच प्रतिवेदन महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, सारण, छपरा को दिये जाने संबंधी आरोप पर सर्वप्रथम विभागीय पत्रांक-2039 दिनांक 06-05-13 द्वारा श्री बिजेन्द्र कुमार लाल, परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, सारण, छपरा से स्पष्टीकरण पूछा गया। श्री लाल द्वारा अपने पत्र दिनांक 23-05-13 से लिखित स्पष्टीकरण विभाग को समर्पित किया गया। प्राप्त स्पष्टीकरण को समीक्षोपरांत संतोषप्रद नही पाया गया तथा विभागीय संकल्प संख्या-2840 दिनांक 18-06-13 द्वारा श्री लाल के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। श्रीमती सुजाता चलाना, वरीय संयुक्त निदेशक, खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय, उद्योग विभाग, बिहार को संचालन पदाधिकारी तथा श्री मुरारी मोहन ओझा, प्रशाखा पदाधिकारी, उद्योग विभाग, बिहार को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया। 2. संचालन पदाधिकारी ने पत्रांक-678 दिनांक 16-09-13 द्वारा जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया। जाँच प्रतिवेदन में आरोप को अप्रमाणित पाया गया। 3. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा के उपरांत यह पाया गया कि प्रतिवेदन में भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सदर छपरा के जाँच प्रतिवेदन संबंधी महत्वपूर्ण साक्ष्य की अनदेखी की गई फलस्वरूप संचालन पदाधिकारी को इस साक्ष्य को परीक्षण/प्रतिपरीक्षण हेतु विभागीय पत्रांक-4875 दिनांक 18-11-13 द्वारा प्रतिप्रेषित किया गया। 4. संचालन पदाधिकारी ने पत्रांक-381 दिनांक 23-05-14 द्वारा अंतिम प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया, जिसके अनुसार आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। जाँच प्रतिवेदन में उल्लिखित है कि तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, छपरा द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि उन्होंने स्थल पर जो स्थिति देखी थी उसी का उल्लेख जिला पदाधिकारी को प्रेषित प्रतिवेदन में किया था। तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सदर छपरा द्वारा जिला पदाधिकारी, सारण, छपरा को प्रेषित पत्र संख्या-105 दिनांक 08-02-12 के अनुसार इकाई का स्थल जाँच दो बार दिनांक 23-01-12 तथा 08-02-12 को किया गया था। उन्होंनें इकाई को अकार्यरत पाया था और प्रतिवेदन दिया था कि इकाई कार्यरत नही है। अतः संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक-2144 दिनांक 18-06-14 द्वारा श्री लाल से द्वितीय लिखित अभिकथन की माँग की गयी।

5. श्री लाल ने अपने पत्र दिनांक 02-07-14 द्वारा द्वितीय लिखित अभिकथन विभाग को समर्पित किया जिसके साथ इकाई को चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा निर्गत कार्यादेश की छाया प्रति, कच्चा माल खरीदगी के विपत्र की प्रति, वाणिज्य कर विभाग में निबंधन की प्रति एवं आई0टी0आर0-V की प्रति संलग्न करते हुए अपने उत्तरदायित्व का निर्वह्‌न निष्ठा के साथ करने एवं इकाई की वस्तुस्थिति से महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, छपरा को प्रतिवेदन समर्पित करने का दावा किया गया।5 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 6. उल्लेखनीय है कि जिला पदाधिकारी, बेगूसराय के अनुरोध पर इकाई के कार्यरत होने की जाँच जिला पदाधिकारी, सारण द्वारा भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, छपरा से कराई गई थी, जिसमें दिये गये पता पर फोटो कम्पोजिंग, प्रिटिंग एवं फोटो स्टेट से संबंधित कोई इकाई कार्यरत नहीं पाया गया। इकाई के प्रोपराईटर के स्पष्टीकरण में वर्णित तथ्य की जाँच भी भूमि सुधार उप समाहर्त्ता ने किया था। जाँच प्रतिवेदन दिनांक 08-02-12 में इकाई के प्रोपराईटर द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण को स्वीकार करने योग्य नहीं होने का उल्लेख है। जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख है कि पटना में शादी के कारण छपरा स्थित इकाई में जगह की कमी होने तथा इस तरह मशीन आदि खोलकर रख देने की बात स्वीकार योग्य नहीं है। दिनांक 23-01-12 को स्थल जाँच के क्रम में प्रोपराईटर द्वारा इकाई को सलेमपुर में शिल्पी सिनेमा के बगल में स्थानान्तरित होने तथा कार्यरत होने की बात कही गयी, जबकि भूमि सुधार उप समाहर्त्ता द्वारा उक्त स्थल के निरीक्षण में इनकी बात गलत पाई गयी। उल्लेखनीय है कि भूमि सुधार उप समाहर्त्ता द्वारा दिनांक 23-01-12 एवं 08-02-12 को दो बार स्थल जाँच किया गया था और प्रतिवेदन दिया गया था कि इकाई कार्यरत नही है। इस प्रतिवेदन का ना तो खंडन किया गया और ना ही प्रतिवेदन नही मानने के लिए साक्ष्य ही दिया गया। ऐसी स्थिति में श्री लाल द्वारा समर्पित द्वितीय अभिकथन स्वीकार करने योग्य नही पाया गया।

अतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) (संशोधन) नियमावली-2007 के नियम-14(vi) के तहत श्री बिजेन्द्र कुमार लाल, परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, सारण, छपरा को संचयी प्रभाव के साथ 02(दो) वार्षिक वेतन वृद्धियाँ रोकने की शास्ति अधिरोपित की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

——— 26 अगस्त 2014 सं॰ 3(स०)/उ०स्था०(आरोप)06/14-3220—श्री आनन्द कुमार बर्द्धन, उप निदेशक(तक०), तकनीकी विकास निदेशालय, उद्येाग विभाग, बिहार, पटना को अनैतिक कार्य में संलग्न होने के आरोप में पुलिस द्वारा दिनांक 25-08-2014 को हिरासत में लिया गया। श्री बर्द्धन का यह आचरण अनैतिक होने के साथ ही सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रतिकूल भी है।

2. अतः श्री आनन्द कुमार बर्द्धन, उप निदेशक(तक०), तकनीकी विकास निदेशालय, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को अनैतिक आचरण एवं घोर कदाचार में लिप्त रहने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के भाग-4 के नियम-9(1)(क) के अन्तर्गत निलम्बित किया जाता है। 3. निलम्बन अवधि में इनका मुख्यालय आयुक्त, पटना प्रमंडल का कार्यालय निर्धारित किया जाता है। 4. निलम्बन अवधि में इन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के भाग-4 के नियम-10 एवं बिहार सेवा संहिता के नियम-96 के आलोक में जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

——— 1 सितम्बर 2014 सं॰ 3(स०)/उ०स्था०(आरोप) 01/12-3285—केन्द्रीय परीक्षा समिति, राजस्व पर्षद, बिहार, पटना द्वारा आयोजित राजपत्रित पदाधिकारियों की द्वितीय अर्द्धवार्षिक विभागीय परीक्षा-2011 में शास्त्रीनगर स्थित राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, पटना केन्द्र में दिनांक 02-02-2012 की प्रथम पाली में कदाचार में लिप्त पाये जाने के संबंध में राजस्व पर्षद, बिहार, पटना के पत्रांक-21 दिनांक 03-02-2012 के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-594 दिनांक 06-02-2012 द्वारा श्री अनिल कुमार मंडल, परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, अररिया को सेवा से निलम्बित किया गया। राजस्व पर्षद, बिहार के पत्रांक-170 दिनांक 21-02-2012 द्वारा श्री मंडल के विरूद्ध आरोप-पत्र साक्ष्य सहित उद्योग विभाग को प्राप्त हुआ। विभागीय आदेश संख्या-1153 दिनांक 06-03-2012 द्वारा श्री मंडल के विरूद्ध गठित आरोप पर विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने हेतु श्री मदन मोहन सिंह, उप सचिव, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को संचालन पदाधिकारी तथा श्री मुरारी मोहन ओझा, प्रशाखा पदाधिकारी, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। कालान्तर में विभागीय आदेश ज्ञाप संख्या-1302 दिनांक 18-03-13 द्वारा श्री नवीन कुमार सिंह, उप सचिव, राजस्व पर्षद, बिहार को श्री ओझा के स्थान पर उपस्थापन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। विभागीय कार्यवाही में आरोपी पदाधिकारी द्वारा भाग लिया गया तथा उनके द्वारा अपना पक्ष संचालन पदाधिकारी के समक्ष रखा गया। संचालन पदाधिकारी ने पत्रांक-4653 दिनांक 30-10-13 द्वारा समंतव्य जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित किया। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित पाया गया। विभागीय पत्रांक-5042 दिनांक 28-11-13 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न कर श्री मंडल से बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-18 के अन्तर्गत मंतव्य माँगा गया। श्री मंडल द्वारा अपने आवेदन दिनांक 16-12-13 से लिखित अभिकथन विभाग को प्राप्त हुआ। इनके लिखित अभिकथन में आरोपी पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कथन को दोहराते हुए उल्लेख किया गया कि6 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 प्रासंगिक पुस्तक ''गाईड'' ना तो इनकी थी और ना ही इनके पास से बरामद की गई। संचालन पदाधिकारी को प्रस्तुत स्पष्टीकरण को दोहराते हुए कहा गया कि कदाचार में संलिप्तता से संबंधित पकड़ी गई पुस्तक का मिलान उनकी उत्तरपुस्तिका से की जाय क्योंकि उक्त पुस्तक से चोरी नहीं की गई। इनका यह भी कथन है कि इनके स्पष्टीकरण पर उपस्थापन पदाधिकारी द्वारा कुछ नहीं कहा गया। अभिकथन में यह भी उल्लेख है कि अन्य परीक्षार्थी द्वारा गिरायी गई/फेंकी गई पुस्तक को बरामद कर वीक्षक ने गलतफहमी में इनकी पुस्तक समझ लिया। अभिकथन की कंडिका-6 में उल्लेख है कि इन्हें केन्द्रीय परीक्षा समिति के पूर्व नियम-16(ए) के तहत परीक्षा से निष्कासित किये जाने के पश्चात अन्य विषयों की परीक्षा से वंचित कर शास्ति दी जा चुकी है। इस प्रकार अपने लिखित अभिकथन में संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किये गये कथन को ही दोहराया गया है।

विभागीय कार्यवाही के दौरान वीक्षक द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर यह कहा गया है कि श्री मंडल के उत्तरपुस्तिका पर ''कदाचार करते पकड़ाये गए'' इनके द्वारा ही लिखा गया है और इनका हस्ताक्षर अंकित है। इनके द्वारा यह भी संपुष्ट किया गया कि पकड़े गये गाईड बुक पर भी इनका ही हस्ताक्षर है। जहाँ तक केन्द्रीय परीक्षा समिति नियमावली के पूर्व नियम-16(ए) के तहत परीक्षा से निष्कासित कर शास्ति दिये जाने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के तहत शास्ति नहीं देने का प्रश्न है, श्री मंडल द्वारा लिखित अभिकथन के साथ केन्द्रीय परीक्षा समिति अधिसूचना संख्या-24-6/89-11A दिनांक 30-03-90 से स्पष्ट है कि परीक्षा में निष्कासन के अतिरिक्त परीक्षा में कदाचार के लिये संबंधित कर्मी पर अनुशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है। उपर्युक्त परिप्रेक्ष्य में श्री मंडल का लिखित अभिकथन स्वीकार करने योग्य नहीं पाया गया। अतः श्री अनिल कुमार मंडल, परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, अररिया को बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) (संशोधन) नियमावली-2007 के नियम-14 (vi) के अधीन संचयी प्रभाव से तीन वेतन वृद्धियाँ रोकने की शास्ति दी जाती है। साथ ही इन्हें निलम्बन अवधि में जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त और कुछ देय नही होगा, लेकिन इस अवधि की गणना पेंशन के निमित्त किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव।

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पथ निर्माण विभाग

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अधिसूचनाएं

2 दिसम्बर 2013

7 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014

से कार्यालय परिसर से बाहर अथवा संवेदक के कम्प्यूटर से ही टंकण कराया गया हो तथा manipulate कर लिया गया हो।

(iv) विभागीय कम्प्यूटर आवास पर स्थापित होने के संबंध में उनके द्वारा उल्लेख किया गया है कि वर्ग-1 पदाधिकारी का सरकारी आवास भी आवासीय कार्यालय के रूप में निरूपित है जहाँ से सरकारी कार्यों का निष्पादन किया जाता है।

(v) एन0आई0टी0 की शर्त्तों के अनुरूप संवेदक का performance वर्ष-वार देना था। विवादित अनुभव प्रमाण पत्र वांछित formte में नहीं होने के कारण पुनः वांछित formate में निर्गत किया गया जिसमें अंकित मात्राऐं बिल्कुल सही है।

3. श्री पाठक द्वारा समर्पित कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत पाया गया कि स्पष्टतः संवेदक के द्वारा तथा कथित प्रमाण पत्र कार्यालय परिसर से बाहर टंकित कराया गया, जिसका कारण सरकारी कम्प्यूटर का कार्यालय में अधिष्ठापित नहीं होना भी है। यह पूर्णतः श्री पाठक के कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं उत्तरदायित्वहीनता का द्योतक है। यद्यपि श्री पाठके के इस कृत्य से प्रत्यक्ष रूप से कोई हानि नही हुई है, परन्तु प्रथम श्रेणी के पदाधिकारी के स्तर पर इस तरह की लापरवाही पूर्णतः निन्दनीय है। अतएव सम्यक रूप से विचारोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में श्री अमर नाथ पाठक, कार्यपालक अभियंता को भविष्य के लिए सचेत करते हुए आरोप वर्ष 2012-13 के लिए निन्दन की सजा संसूचित की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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11 जुलाई 2013

सं॰ निग/सारा-9-2/2002-8633 (एस) श्री अमीर हसन, महाप्रबन्धक, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन लि0, पटना के द्वारा कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल के दौरान उनके क्षेत्र अन्तर्गत ढ़ुलिया नाला पर अवस्थित पुल पर संवेदक द्वारा निर्धारित दर से अधिक टॉल वसूलने की प्राप्त शिकायतों पर श्री हसन द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं प्रतिवेदित किया गया था। टॉल वसूली से संबंधित दायर याचिका संख्या-142/02 में माननीय उच्च न्यायालय से प्राप्त आदेश दिनांक 26.04.2002 के आलोक में तत्कालीन सचिव द्वारा औचक निरीक्षण किये जाने पर यह पाया गया था कि संवेदक द्वारा निर्धारित दर से अधिक दर पर टॉल की वसूली की जा रही है। तदनुसार, निर्धारित मात्रा से अधिक राशि वसूली करने से संबंधित शिकायत के उपरान्त भी किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं करने, मुख्यालय के निर्देशों का उल्लंघन करने एवं दायित्व का निर्वहन नहीं करने के आरोप के लिए प्राप्त स्पष्टीकरण पर विचारोपरांत संकल्प ज्ञापांक-13961 दिनांक 11.12.06 द्वारा श्री हसन के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसमें संकल्प ज्ञापांक-14213 (एस) दिनांक 15.12.06 द्वारा कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ के पदस्थापन के दौरान बिहार वरबीघा पथ के कि0मी0 17, 18 एवं 19 में एकरारनामा संख्या-47 F2 /2000-01 में दायित्व सृजन करने को अनुपूरक आरोप के रूप में सन्निहित किया गया। 2. श्री हसन के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा अनुपूरक आरोप को प्रमाणित तथा मूल आरोप को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। विभागीय समीक्षा में मूल आरोप के संबंध में संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन से असहमत होते हुए इसे प्रमाणित पाया गया तथा असहमति के कारणो को अभिलिखित करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए श्री हसन से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी एवं प्राप्त बचाव बयान के समीक्षोपरांत अधिसूचना संख्या-10596 (एस) दिनांक 24.09.09 द्वारा श्री हसन को निम्न दंड संसूचित किया गया :- (i) निन्दन जिसकी प्रविष्टि इनके गोपनीय चारित्री वर्ष 2001-02 में की जायेगी, (ii) 5 वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है। 3. उपर्युक्त शास्ति के विरूद्ध श्री हसन द्वारा सी0डब्लू0जे0सी0सं0-3311/10 दायर किया गया जिसमें दिनांक 30.08.2011 को पारित आदेश के आलोक में श्री हसन द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया गया, जिस पर विचारोपरांत आदेश ज्ञापांक-3970 (एस) दिनांक 10.04.12 द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन को अस्वीकृत किया गया। 4. श्री हसन द्वारा दंडादेश एवं अस्वीकृत पुनर्विलोकन अभ्यावेदन के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-14697/2012 दायर किया गया जिसमें दिनांक 29.01.13 को पारित आदेश में दंड को निरस्त करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा बचाव बयान के stage से पुनः आगे की कार्रवाई करने का आदेश माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के उपरांत श्री हसन की व्यक्तिगत सुनवाई की गई। 5. श्री हसन द्वारा दिनांक 09.04.09 को समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में मूल आरोप तथा अनुपूरक आरोप तथा व्यक्तिगत सुनवाई में निम्नांकित तथ्यों का उल्लेख किया गया :- (क) मूल आरोप :-

(i) संचालन पदाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालन के दौरान उभय पक्षों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की सम्यक विश्लेषणोपरान्त मूल आरोप को प्रमाणित नहीं बताया गया परन्तु इस प्रतिवेदन के असहमति का जो आधार बताया गया है, उसमें कोई नया तथ्य नहीं है ।8 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 (ii) 17.05.2002 को तत्कालीन सचिव द्वारा किये गये औचक निरीक्षण में टॉल वसूली में पायी गयी अनियमितताओं के आधार पर पूर्व में किये गये औचक निरीक्षण को मात्र खानापुरी कहने का कोई औचित्य नहीं है ।

(iii) कार्यपालक अभियन्ता के नाते अधिकार का उपयोग संवेदक के द्वारा एकरारनामा के शर्त्तो का उलंघन करने का कोई प्रमाणिक साक्ष्य उपलब्ध होने के पश्चात्‌ ही किया जा सकता था । संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई करने की शक्ति सहायक, अधीक्षण एवं मुख्य अभियन्ता को था परन्तु इन पदाधिकारियों द्वारा किये गये निरीक्षण में कोई त्रृटि नहीं पाये जाने के कारण उक्त पदाधिकारियों द्वारा शक्ति का प्रयोग नहीं किया गया । ऐसी स्थिति में केवल कार्यपालक अभियन्ता के नाते मुझे दोषी ठहराने का औचित्य नहीं है । (iv) टॉल वसूली बूूथ के दोनों ओर सूचना पट पर स्पष्ट सूचना अंकित रहने के बावजूद निर्धारित दर से अधिक टॉल वासूली किये जाने पर वाहन चालकों द्वारा कोई लिखित अथवा मौखिक शिकायत नहीं की गयी ।

(v) सचिव द्वारा 17.05.2002 को किये गये गोपनीय निरीक्षण के क्रम में केवल ट्रक ही गुजरा और कोई वाहन नहीं गुजरा, इसे महज संयोग ही कहा जा सकता है परन्तु उनके द्वारा जो रसीद प्राप्त किये गये, उस पर निर्धारित दर ही अंकित था । साथ ही इन रसीदोे में से दो रसीद दिनांक 14.05.2002 को निर्गत किया गया था । निर्धारित दर से अधिक भुगतान का कोई शिकायत नहीं की गयी । सचिव द्वारा न तो ट्रक ड्राइर््रवर से न ही संवेदक से पूछ-ताछ की गयी परन्तु अनियमितता किये जाने का निष्कर्ष कायम कर लिया गया ।

(vi) CWJC संख्या-9805/02 में दिनांक 08.04.2003 को माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश, जिसमें विभाग के एकपक्षीय निर्णय को निरस्त कर दिया गया, जिस कारण विभाग द्वारा संवेदक को कोई दण्ड नहीं दिया जा सका । विभाग द्वारा यह माना गया कि बिना कारण-पृच्छा के एकतरफा निर्णय लिये जाने में प्रक्रियात्मक भूल हुई, अर्थात्‌ संवेदक के पक्ष को जानने के बाद ही कोई निष्कर्ष कायम किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया ।

(ख) अनुपूरक आरोप :-

(i) 04.12.2004 को पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण करने की तिथि से लगभग 3 वर्ष 6 माह पूर्व से ही यह विपत्र प्रमंडलीय कार्यालय में लंबित था, जिसको पारित करने की जबाबदेही तदेन कार्यपालक अभियन्ता की थी । इतनी लम्बी अवधि के बाद कराये गये कार्यो की जाँच कराना संभव नहीं था ।

(ii) अधीक्षण अभियन्ता द्वारा संवेदक का अग्रधन एवं जमानत की राशि के रूप में इस कार्य के विरूद्ध जमा राशि का नियमानुसार वापस कर देने एवं दायित्व प्रतिवेदन तैयार कर समुचित कार्रवाई हेतु समर्पित करने के लिए तदेन कार्यपालक अभियन्ता को निदेश दिया गया था । स्पष्ट है कि यह मामला दायित्व का हो चुका था, जिसके सृजन के लिए मैं दोषी नहीं हूँ । (iii) बिना उच्चस्तरीय आदेश के विपत्र को पारित कर भुगतान कर दिये जाने पर मुझे दोषी करार दिया जाता ।

(iv) दायित्व जाँच समिति की अनुशंसा के आलोक मेंं संवेदक के दावे को अस्वीकार किये जाने के उपरान्त अन्तिम विपत्र को पारित किया जा सका । अतः ऐसे मामले में उच्चस्तरीय आदेश के बिना लंबित विपत्र को पारित करना नियमानुकूल नहीं था ।

(v) संचालन पदाधिकारी जो एक तकनीकी पदाधिकारी भी हैं, के द्वारा इस बात की अनदेखी की गयी ।

(vi) सुनवाई की दौरान श्री हसन द्वारा बताया गया कि मेरे उत्तराधिकारी श्री अवधेश प्रसाद के विरूद्ध भी इस मामले के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आरोप को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया ।

6. श्री हसन द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा में दिये गये तथ्यों एवं व्यक्तिगत सुनवाई में कही गयी बातों के आलोक में अभिलेख का पुनर्अवलोकन किया गया जिसके समीक्षोपरांत पाया गया है कि :-

(क) मूल आरोप को संचालन पदाधिकारी द्वारा अप्रमाणित बताये जाने के तर्काे से असहमत होने का कोई तर्कसंगत आधार अभिलेख मेंं उपलब्ध नहीं पाया गया, परन्तु यह मामला पूर्व से ही विवादास्पद था, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा कई बार हस्तक्षेप किया जा चुका था । कार्यपालक अभियन्ता के नाते प्रमंडल के अधीन की गतिविधियों पर इनका पूर्ण नियंत्रण अपेक्षित था । इन्हें यह insure करना चाहिए था कि निर्धारित दर के अनुरूप ही टॉल टैक्स की वसूली हो। इसके insure करने में श्री हसन द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से लापरवाही बरती गयी ।

(ख) जहाँतक श्री हसन के विरूद्ध लगाये गये अनुपूरक आरोप के संबंध में श्री हसन द्वारा बचाव में दिये गये तथ्यों का संबंध है, अनुपूरक आरोप को संचालन पदाधिकारी द्वारा इस आधार पर प्रमाणित पाया गया था कि दिनांक 07.07.2001 से प्रमंडल में लंबित द्वितीय एवं अन्तिम विपत्र को सहायक अभियन्ता की टिप्पणी9 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 कि कोई अतिरिक्त कार्य नहीं हुआ है एवं पारित प्रथम चालू विपत्र के अनुरूप अन्तिमू विपत्र को पारित किया जा सकता है, के आलोक में दिनांक 04.12.2004 को प्रभार ग्रहण करने के उपरान्त विपत्र पारित करने में श्री हसन को कोई कठिनाई नहीं थी ।

7. श्री हसन को पूर्व में वर्ष-2001-02 के लिए निन्दन एवं 5 वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से अवरूद्ध करने की शास्ति अधिरोपित की गयी थी । उपरोक्त कंडिकाओं में वर्णित स्थिति की पृष्ठभूमि मेेें श्री हसन के लिए अधिरोपित शास्ति असमानुपातिक पाते हुए सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया जाता है :-

(क) सी0डब्लू0जे0सी0सं0-14697/2012 में दिनांक 29.01.13 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में अधिसूचना संख्या-10596 (एस) दिनांक 24.09.09 को निरस्त किया जाता है। (ख) श्री अमीर हसन, महाप्रबन्धक, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन लि0, पटना को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(i) वर्ष-2001-02 के लिए निन्दन, एवं (ii) एक वार्षिक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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19 अगस्त 2013

संख्या-निग/सारा-1(उच्च पथ)-36/2011-6622 (एस)—श्री अविनाश प्रसाद सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राज्य उच्च पथ प्रमंडल, गया सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन के विरूद्ध भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन (सिविल) कंडिका-4.5.1 वर्ष 2007-08 के आलोक में वर्ष-2006-07 में विधायक/सासंद कोटा के तहत्‌ विभागीय रूप से कराये गये कार्यो में बिहार लोक निर्माण संहिता के नियम-226 में निहित प्रावधान के विपरीत समाग्रियों की आपूर्ति बिना निविदा/कोटेशन आमंत्रित किये प्राप्त करने तथा मजदूरों का भुगतान बिना मास्टर रॉल के हस्त पावती रसीद के माध्यम से किये जाने के आरोप के लिए संकल्प ज्ञापांक-14210 (एस) दिनांक 27.12. 2011 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. श्री सिंह, कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-380 अनु0 दिनांक 19.02.2013 द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदन में उनके विरूद्ध गठित एक मात्र आरोप के आरोप अंश जो मजदूरों का भुगतान मस्टर रॉल के आधार पर न कर हस्त पावती रसीद के माध्यम से किये जाने से संबंधित है को प्रमाणित पाते हुए आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त उक्त अंशतः प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-2440 (एस) दिनांक 21.03.2013 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 3. श्री सिंह कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-544 दिनांक 11.05.2013 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा बचाव में उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया कि लोक निर्माण लेखा संहिता कंडिका-228 जिसमें विशेष परिस्थिति में मस्टर रॉल के माध्यम से भुगतान न कर मेट आदि के माध्यम से कराये गये कार्य का भुगतान किये जाने का प्रावधान है। इस आलोक मेंं गया जिला को अत्यन्त नक्सल प्रभावित क्षेत्र बताते हुए विशेष परिस्थिति के औचित्य को स्थापित करने का प्रयास किया गया था जिसें संचलान पदाधिकारी द्वारा स्वीकार नहीं किया। श्री सिंह ने गया जिला के आलोच्य अंश में अत्याधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र की पृष्ठ भूमि में भुगतान की प्रक्रिया से सहमत होने का अनुरोध किया। 4. श्री सिंह द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा बचाव के समीक्षोपरान्त पाया गया कि यदि मास्टर रॉल के माध्यम से भुगतान करने में उन्हें व्यवहारिक कठिनाई थी तो वरीय पदाधिकारी से मेट के माध्यम से भुगतान करने की पूर्वानुमति प्राप्त कर लेनी चाहिए थी। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने युक्तियुक्त समीक्षा में आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है। अतएव श्री अविनाश प्रसाद सिंह, कार्यपालक अभियंता के द्वितीय कारण पृच्छा को स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए मजदूरी भुगतान में इनके द्वारा की गयी प्रक्रियात्मक भूल के लिए सम्यक रूप से विचारोपरान्त सरकार के निर्णय के आलोक में निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :-

(क) इनकी एक वार्षिक वेतनवृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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19 जून 2013

सं0 निग/सारा-5 (ग्रा0)-2020/02-4898 (एस)—श्री बांके बिहारी गुप्ता, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, चाईबासा तथा ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, चक्रधरपुर के पदस्थापन काल में सघन जवाहर रोजगार योजना एवं सुनिश्चित रोजगार योजना के अधीन योजनाओं के कार्यान्वयन में बरती गयी अनियिमतताओं के आरेाप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-4809 (एस) दिनांक 29.08.95 द्वारा निलंबित किया गया था तथा सी0डब्लू0जे0सी0सं0-4152/1996 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के क्रम में अधिसूचना संख्या-4623 (एस) दिनांक 17.07.97 द्वारा दिनांक 24.03.97 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त किया गया।10 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 2. श्री गुप्ता के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-6053 (एस) दिनांक 12.10.95 द्वारा सदस्य राजस्व पर्षद, बिहार, पटना के संचालन में 9 आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री गुप्ता के दिनांक 30.11.97 को सेवानिवृति के आलोक में संकल्प ज्ञापांक-8068 (एस) दिनांक 11.09.99 द्वारा उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पें"ान नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। कालान्तर में अपरिहार्य स्थिति में श्री गुप्ता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में विभिन्न संकल्पों द्वारा संचालन पदाधिकारी/प्रस्तुतीकरण को परिवर्तित किया गया। इस क्रम में संकल्प ज्ञापांक-8461 (एस) दिनांक 05.11.02 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-665 दिनांक 12.12.04 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री गुप्ता के विरूद्ध गठित कुल 9 आरोपों को साक्ष्य/कागजात के आभाव में प्रमाणित नहीं प्रतिवेदित किया गया। 3. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के विचारोपरांत विभागीय पत्रांक-8264 (एस) दिनांक 03.11.05 द्वारा ग्रामीण विकास विभाग, झारखण्ड, राँची से साक्ष्यों की मांग की गयी जो विभिन्न स्तरों से स्मारित किये जाने एवं कागजात प्राप्त करने हेतु पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति के बावजूद अप्राप्त रहा। तदुपरांत संपूर्ण प्रकरण के समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में इसमें अंकित तथ्य कि आरोपी द्वारा कहीं-कहीं प्रख्यापित नियमों से विचलन किया गया है तथा यह विचलन की कार्रवाई सामान्य परिपाटी के तहत ही की गयी है जिसमें श्री गुप्ता को कोई malafide intention नहीं है के आलोक में सरकार द्वारा श्री बांके बिहारी गुप्ता को आरोप मुक्त करते हुए उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को समाप्त करने का निर्णय लिया जाता है। 4. निलंबन अवधि के लिए श्री गुप्ता को पूर्ण वेतन के साथ-साथ उक्त अवधि को कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में विनियमित करने का निर्णय लिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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3 जनवरी 2014

सं0 निग/सारा-6 द0वि0 (ग्रा0) आरोप-54/2011-117 (एस)—श्री ब्रज किशोर प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, निरूप्ण प्रमंडल-1 (मुख्यालय), ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार पटना को माननीय उच्च न्यायालय, पटना को अंधकार में रखते हुए वर्ष 1991 से वरीयता प्राप्त कर लेने एवं 1991 से सेवा विनियमन कराने, दिनांक 16.11.91 से 25.10.96 तक की अवधि में बिहार राज्य अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम, पटना से वेतन प्राप्त करने एवं इस विभाग से धोखाघड़ी करने जैसे आरोप के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-10033 (एस) दिनांक 06.09.11 द्वारा इन्हें निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-12504 (एस) अनु0 दिनांक 16.11.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही सचांलित की गयी। 2. संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-198 अनु0 दिनांक 07.07.12 में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप में दो अंशों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया। तदआलोक में विभागीय पत्रांक-9635 (एस) अनु0 दिनांक 30.08.12 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री प्रसाद द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक 15.09.12 के समीक्षोपरांत उसे स्वीकार योग्य मानते हुए श्री प्रसाद को निलंबन मुक्त करते हुए उक्त निलंबन अवधि को सभी प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में विनियमित करने का निर्णय लिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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28 नवम्बर 2013

सं0 निग/सारा-आरोप- 71/10-9112 (एस)—श्री विजय कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति पथ प्रमंडल, छपरा से राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में सचिव द्वारा दिनांक 12.07.2010 को एन0एच0-77 के स्थल निरीक्षण के क्रम में कटौंझा पुल के पूर्व जनार गाँव के पास सड़क की भयावह स्थिति तथा मुजफ्फरपुर से सीमामढ़ी के बीच कई जगहों पर पोट्‌स पाये जाने के आलोक में उक्त तिथि में पथ के Defect liability period में होने के बावजूद इनके द्वारा Defect liability period को enforce नहीं कराने तथा अपने अधीनस्थ अभियंताओं पर नियंत्रण नहीं होने जैसे आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-154/गो0 दिनांक 15.07.10 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई। 2. श्री कुमार, कार्यपालक अभियंता से प्राप्त स्पष्टीकरण पत्रांक-918 दिनांक 19.07.10 के समीक्षोपरांत पाया गया कि सड़क की स्थिति भयावह थी (जिसे स्वीकार भी किया गया है) तथा अधीनस्थ अभियंताओं पर इनका नियंत्रण नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि Defect liability period में होने के बाद भी पथ के रख-रखाव की समुचित व्यवस्था इनके द्वारा नहीं की गई। अतएव विभागीय अधिसूचना संख्या-898 (एस) सहपठित ज्ञापांक-899 (एस) दिनांक 21.01.11 द्वारा इनकी दो वेतन वृद्धियाँ असंचयात्मक प्रभाव से रोकी गयी। 3. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कुमार, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-193 (अनु0) दिनांक 01.06.13 द्वारा समर्पित पुनर्विचार अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 25 के तहत अपील/पुनर्विचार आवेदन हेतु परिसीमा काल 45 दिन निर्धारित है, यह आवेदन इस परिसीमा काल से11 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 बाहर है। अतः इस कारण से यह विचारणीय नहीं है। जहाँ तक इस आवेदन के merit का प्रश्न है श्री कुमार ने उन्हीं तथ्यों को पुनः रखा है जिन तथ्यों को इन्होंने अपने स्पष्टीकरण में दिया था। पथ के DLP में होने के बावजूद पथ क्रष्ट का क्षतिग्रस्त होना और सचिव के द्वारा उनके निरीक्षण के समय इसे क्षतिग्रस्त पाया जाना स्पष्ट है कि श्री कुमार ने अपने दायित्वों का निर्वहन समुचित ढंग से नहीं किया। यदि जनार गाँव के पास low land था तथा ग्रामीणों के द्वारा पानी सड़क पर बहाया जाता था तो इन्हें उस क्षेत्र के प्रति ज्यादा जागरूक होना चाहिए था। पथ प्रमंडल अन्तर्गत सभी अभियंताओं का दायित्व सुनिर्धारित एवं सुस्पष्ट है। जहाँ तक सहायक अभियंता को इस आरोप से मुक्त करने का प्रश्न है, जाँच के क्रम में यह स्पष्ट हो गया था कि श्री पाण्डेय, सहायक अभियंता, कार्यपालक अभियंता के आदेश से दूसरे स्थल पर संवेदक से पथ मरम्मति का कार्य करा रहे थे। इस प्रकार श्री कुमार के द्वारा ऐसा कोई नया तथ्य अपने पुनर्विचार अभ्यावेदन में नहीं दिया गया है जिसके आलोक में सुविचारित दी गयी शास्ति पर पुनर्विचार किया जा सके। 4. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री विजय कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, मुजफ्फरपुर सम्प्रति पथ प्रमंडल, छपरा के पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-193 (अनु0) दिनांक 01.06.13 को अस्वीकृत किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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6 फरवरी 2014

सं॰ निग/सारा-2 (परिवाद)-4/2012-990 (एस)—श्री बीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना सम्प्रति निलंबित को अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना के पदस्थापन काल में सचिव के समक्ष गलत बयानी कर भ्रमित करने का प्रयास एवं कार्य के प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारित जैसी बरती गयी अनियमितता के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-2637 (एस) दिनांक 07.03.12 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5731 (एस) अनु0 दिनांक 24.05.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-4209 अनु0 दिनांक 08.08.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में सचिव के समक्ष गलत बयानी कर भ्रमित करने के प्रयास के आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित एवं स्वेच्छाचारित के संबंध में पूर्व में मौखिक चेतावनी दिये जाने का उल्लेख किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलगन करते हुए आंशिक रूप से प्रमाणित/प्रमाणित आरोप के संदर्भ में विभागीय पत्रांक-9226 (एस) अनु0 दिनांक 02.12.13 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। 3. श्री कुमार, निलंबित कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-शून्य (अनु0) दिनांक 12.12.13 द्वारा अपना द्वितीय कारण पृच्छा विभाग में समर्पित किया गया। श्री कुमार के द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव वयान के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार को सरकारी कार्य में लापरवाही एवं विभाग द्वारा निर्गत अनुदेशों की अवहेलना करने जैसी बरती गयी अनियमितता के लिए निलंबित किया गया था। अतएव इनके विरूद्ध सरकारी राशि के दुरूपयोग या गबन का आरोप नहीं है। अतः श्री कुमार द्वारा इस दिशा में ध्यान आकृष्ट करने का कोई औचित्य नहीं है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने समीक्षात्मक प्रतिवेदन में आरोप संख्या-1-'क' को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है और इसी परिपेक्ष्य में श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा एवं निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में कारण पृच्छा की गयी। श्री कुमार के निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही से संबंधित आदेश पर पुनर्विचार हेतु श्री कुमार द्वारा दिया गया अभ्यावेदन एवं स्मार पर विभागीय समीक्षोपरांत विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर निर्णय लिया जाना सुनश्चित किया गया। यह भी तथ्य है कि श्री राज नारायण चौधरी, अधीक्षण अभियंता के निलंबन आदेश को माननीय न्यायालय द्वारा वगैर विभागीय पक्ष जाने हुए stay किया गया। इस आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1183 (एस) दिनांक 14.02.13 द्वारा श्री चौधरी के निलंबन आदेश को स्थगित रखा गया। श्री चौधरी के संबंध में माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश को vacate करने/modification दायर करने के बिन्दु पर विधि विभाग का मंतव्य प्राप्त किया गया और तदनुसार समीक्षोपरांत श्री कुमार के निलंबन आदेश के संबंध में विभागीय कार्यवाही के उपरांत निर्णय लेने का निश्चय किया गया। जहाँ तक श्री कुमार द्वारा दृष्टांत के रूप में यह कहा गया है कि इसकी प्रासंगिकता इस कारण नहीं है कि श्री कुमार को किसी दबाव में निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित नहीं की गयी, बल्कि उनके द्वारा कार्यों में की गयी लापरवाही, सचिव को गलत वयान देने के लिए निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है। सारतः श्री कुमार द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा बचाव बयान में ऐसा कोई तथ्य नहीं दिया गया जो अंशतः प्रमाणित आरोप को क्षान्त करता हो। 4. अतएव श्री बीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना सम्प्रति निलंबित द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा को असंतोषजनक पाते हुए सरकार के निर्णयानुसार श्री कुमार के एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

(ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।12 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014

4 दिसम्बर 2013

सं0 निग/सारा-मुक0-03/2010-9304 (एस)—श्री छठ्‌ठू प्रसाद, तत्कालीन कनीय अभियंता, पथ प्रमंडल, हजारीबाग सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध पथ प्रमंडल, हजारीबाग से संबंधित सी0बी0आई0 कांड संख्या-आर0सी0-8 (ए)/97 डी0 में सी0बी0आई0 से प्राप्त अनुशंसा के आलोक में ट्रांसपोर्टर के चालान पर प्राप्त किये गये 211.380 एम0टी0 बिटुमिन को स्थल लेखा पंजी में तेल कम्पनी के चालान पर प्राप्ति दिखाये जाने, उक्त चालान को उपलब्ध नहीं कराये जाने, स्थल लेखा पंजी मासिक रूप से संधारित नहीं किये जाने तथा 2.3186 एम0टी0 बिटुमिन अधिक/फर्जी निर्गत किये जाने के आरोप के लिए कार्यालय आदेश संख्या-16-सह पठित ज्ञापांक-276 दिनांक 19.01.02 द्वारा संचालित की गयी विभागीय कार्यवाही में अधिसूचना संख्या-9296 (एस) दिनांक 26.08.09 द्वारा दंड संसूचित किया गया, जिसे सी0डब्लू0जे0सी0सं0-17334/09 में दिनांक 31.03.10 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में अधिसूचना संख्या-7406 (एस) दिनांक 19.05.10 द्वारा निरस्त (set aside) करते हुए संकल्प ज्ञापांक-8207 (एस) दिनांक 02. 06.10 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत नये सिरे से श्री प्रसाद के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. श्री प्रसाद द्वारा विभागीय कार्यवाही में सहयोग नहीं किये जाने के उपरांत संचालन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कागजात के आधार पर एकतरफा निर्णय लेते हुए जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवदेन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-3472 (एस) दिनांक 03.05.13 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। 3. द्वितीय कारण पृच्छा के संबंध में श्री प्रसाद द्वारा आवेदन दिनांक 16.05.13 समर्पित किया गया जिसमे उनके द्वारा मूल रूप से यह उल्लेख करते हुए कि वे अस्वस्थ्य हैं, इसलिए संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन एवं विभागीय कार्यवाही में उपस्थिति/अनुपस्थिति एवं अन्य तथ्यों के बारे में कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। अतः उनके मामले में विभाग सोच समझकर निर्णय ले। 4. श्री प्रसाद द्वारा विभागीय कार्यवाही के दौरान कतिपय कागजात की मांग की गयी थी जिसे उपलब्ध कराने का अनुरोध सी0बी0आई0 से किया गया था। द्वितीय कारण पृच्छा पूछने के उपरांत उक्त कागजात विभाग में प्राप्त हुआ। तदोपरांत याचिका संख्या-17334/2009 में पारित आदेश एवं पारदर्शिता के दृष्टिकोण से सी0बी0आई0 द्वारा भेजे गये कागजात श्री प्रसाद को भेजते हुए उन्हें संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन के आलोक में बचाव बयान समर्पित करने का अंतिम अवसर दिया गया। इसके आलोक में श्री प्रसाद द्वारा पुनः एक आवेदन दिनांक 13.06.13 दिया गया जिसमें उनके द्वारा यह बताया गया कि उपलब्ध कराया गया कागजात उनके पदस्थापन काल से संबंधित नहीं है। विभागीय कार्यवाही के दौरान श्री प्रसाद द्वारा बारम्बार हजारी पथ प्रशाखा-1 के सम्पूर्ण स्थल लेखा पंजी को उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया। इस आलोक में सी0बी0आई0 से दो चरणों में प्राप्त कागजात उन्हें उपलब्ध कराया गया जिसके संबंध में उनका यह कथन रहा कि उपलब्ध कराये गये कागजात उनके प्रशखा से संबंधित नहीं है एवं उनके पदस्थापन अवधि के बाद का है। 5. द्वितीय कारण पृच्छा के संबंध में श्री प्रसाद के आवेदन दिनांक 16.05.13 एवं दिनांक 13.06.13 के क्रम में संचिका पर रक्षित अभिलेख के समीक्षोपरांत पाया गया कि सी0बी0आई0 की अनुशंसा के आलोक में सी0बी0आई0 द्वारा उपलब्ध कराये गये कागजात यथा-श्री प्रसाद का बचाव बयान, लेखा पंजी की प्रति से उनके विरूद्ध यह आरेाप स्थापित होता है कि श्री प्रसाद ने 211.380 एम0टी0 बल्क बिटुमिन गलत तरीके से प्राप्त किया है। मासिक लेखा समर्पित नहीं करने के आरेाप अंश के संबंध में पाया गया कि श्री प्रसाद ने प्रारम्भ से अब तक मासिक लेखा समर्पित किये जाने संबंधी कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया है, जबकि प्रथम द्रष्टव्य यह उनका onus है। इसके अतिरिक्त 2.3106 एम0टी0 बल्क बिटुमिन अधिक/जाली निर्गत दिखाये जाने का आरोप है के संबंध में सम्भवतः उन कागजात की relevency हो सकता है जो श्री प्रसाद द्वारा मांग की जा रही थी, परन्तु संचिका पर उपलब्ध पथ प्रमंडल, हजारीबाग के विभिन्न कर्मियों/सहायक अभियंता द्वारा सी0बी0आई0 के समक्ष दर्ज बयान से स्पष्ट होता है कि स्थल लेखा पंजी के आधार पर 2.3106 एम0टी0 बिटुमिन जाली/अधिक निर्गत किया गया। 6. उपर्युक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर श्री प्रसाद के विरूद्ध आरेाप प्रमाणित एवं स्थापित होता है इसके अतिरिक्त उक्त पदस्थापन काल से ही संबंधित सी0बी0आई0 कांड संख्या-आर0सी0 7 (ए)/97 (डी) एवं आर0सी0 10 (ए)/98 (डी) में उनके विरूद्ध स्वीकृत अभियोजन यह स्पष्ट करता है कि श्री प्रसाद का उक्त पदस्थापन काल कदाचारपूर्ण रहा है। इस प्रकार श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रमाणित एवं स्थापित आरेाप के लिए उनके पेंशन से 5 वर्षों के लिए 5 प्रतिशत की कटौती (दंड अधिसूचना निर्गत की तिथि से) की शास्ति पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-7069 (एस) दिनांक 04.09.13 द्वारा बिहार लेाक सेवा आयोग से परामर्श की मांग की गयी। 7. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1830 दिनांक 25.11.13 द्वारा उपलब्ध कराये गये मंतव्य में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर सहमति व्यक्त की गयी। तदआलोक में श्री छठ्‌ठू प्रसाद, सेवानिवृत सहायक अभियंता के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरेाप के लिए उन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) उनके पेंशन से 5 वर्षों के लिए 5 प्रतिशत की कटौती (दंड अधिसूचना निर्गत की तिथि से) की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।13 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 15 जुलाई 2013 सं॰ निग/सारा-1 (मुख्या॰) आरोप-74/2013-5589 (एस)—श्री धीरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध पथ ्रपमंडल, बिहारशरीफ अन्तर्गत बिहारशरीफ-एकंगसराय- तेलहरा पथ के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य में बरती गयी अनियमितताओं के 8 आरोपों के लिए संकल्प ज्ञापांक-8972 (एस) दिनांक 01.08.06 जिसमें संकल्प ज्ञापांक-14214 (एस) दिनांक 15.12.06 द्वारा दायित्व सृजन के तीन अनुपूरक आरोप तथा संकल्प ज्ञापांक-1821 (एस) दिनांक 13.02.07 द्वारा आर0सी0सी0 पुल के निर्माण में अनियिमतता के तीन अतिरिक्त अनुपूरक आरोप संबद्ध कर संचालित की गयी विभागीय कार्यवाही में अधिसूचना संख्या-107 (एस) सहपठित ज्ञापांक-108 (एस) दिनांक 05.01.09 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- (क) इनके पेंशन एवं उपदान से 50-50 प्रतिशत की कटौती की जाती है। (ख) इन्हें निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु यह अवधि अन्य प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य अवधि मानी जायेगी। 2. उक्त संसूचित दंड के विरूद्ध श्री श्रीवास्तव द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-13537/2009 दायर किया गया जिसमें दिनांक 26.08.11 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री श्रीवास्तव ने पत्रांक-शून्य दिनांक 22.09.11 द्वारा पुनर्विलोकन अभ्यावेदन समर्पित किया। इस क्रम में श्री श्रीवास्तव की व्यक्तिगत सुनवाई भी की गयी। श्री श्रीवास्तव द्वारा आरोपों के संबंध में सारतः निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

(i) कार्य में संभावित खपत की मात्रा का आकलन किये बिना खपत से अधिक बिटुमेन निर्गत कर संवेदक को वित्तीय लाभ पहुँचाने के आरोप के संबंध में उल्लेख किया गया कि स्टॉक के प्रभारी कनीय अभियंता/सहायक अभियंता होते है जिनके एकरारनामा के अनुरूप संवेदक को उचित हस्त रसीद पर सामग्री उपलब्ध करायी जाती है। संवेदक उक्त सामग्री के कस्टोडियम मात्र रहते हैं तथा व्यवहृत सामग्री के पश्चात अवशेष सामग्री लौटा दी जाती है। चालू विपत्र से उपयोग किये गये बिटुमेन का समायोजन कर कटौती की जाती है। एकरारनामा में चालू विपत्र से सामग्रियों के समायोजन का प्रावधान नहीं है।

(ii) जाँच दल के निरीक्षण के समय पथ की स्थिति दयनीय एवं जर्जर पाये जाने के आरोप के संबंध में उल्लेख किया गया कि उन्होंने दिनांक 30.06.01 को अपना प्रभार अपने प्रतिस्थानी को सौंपा था उस समय पथ निर्माणाधीन और अच्छी स्थ्ािित में था। जाँच ढाई वर्ष बाद की गई। इस अवधि में बिटुमेन से सील करने का दायित्व उनके प्रतिस्थानी को था।

(iii) एकरारनामा की शर्त्तों के अनुरूप समय पर कार्य नहीं करने के लिए संवेदक के विरूद्ध कार्यवाही नहीं करने के आरोप के संबंध में उल्लेख किया गया है कि संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई करने की जबावदेही उनके प्रतिस्थानी की थी।

(iv) अंतिम विपत्र पारित नहीं किये जाने के कारण संवेदक से 5 मे0टन अलकतरा की कटौती नहीं किये जाने के अनुपूरक आरोप के संबंध में उल्लेख किया गया है कि कनीय अभियंता द्वारा उनके प्रभार सौंपने के पश्चात अंतिम विपत्र तैयार किया गया जिसक कारण बिटुमेन की कटौती/समायोजन नहीं की गई।

(v) प्रथम चालू विपत्र को ही अंतिम विपत्र के रूप में पारित नहीं किये जाने के अनुपूरक आरोप के संबंध में उल्लेख किया गया कि प्रथम चालू विपत्र का भुगतान दिनांक 15.03.01 को किया गया तथा कार्य समाप्ति की तिथि 27.05.01 थी।

(vi) आर0सी0सी0 पुल निर्माण के संवेदक के दावा भुगतान की अनुशंसा विलंब से करने के अनुपूरक के संबंध में स्मरण के आधार पर यह उल्लेख किया गया कि स्थल आदेश पंजी जिस दिन प्राप्त हुआ उसी दिन दावा पुस्तिका के साथ अधीक्षण अभियंता को भेजा गया।

(vii) दावे के विपत्र की जाँच निर्धारित प्रतिशत में नहीं किये जाने के अनुपूरक आरोप के संबंध में उल्लेख किया गया कि उनके कार्यकाल में बेड प्लेट सहित उपर का आर0सी0सी0 कार्य उनकी उपस्थिति में किया गया जिसकी मात्रा एवं लोहे की जाँच कर स्थल आदेश पंजी पर अंकित की गयी थी। (viii) मंत्रिमंडल सचिवालय के संकल्प के अनुसार मरम्मति एवं अनुरक्षण शर्त्तों के अन्तर्गत कार्य मदों की मात्रा में किसी प्रकार की बढ़ोतरी अनुमान्य नहीं होने के अनुपूरक आरोप के संबंध में उल्लेख है कि आवश्यकता के अनुसार मदों में कुछ परिवर्तन की गयी जिसकी स्वीकृति सक्षम पदाधिकारी द्वारा दी गयी थी। यह कार्य पूर्णतः नये आर0सी0सी0 पुल के निर्माण का था जिसे मरम्मति एवं अनुरक्षण शीर्ष से स्वीकृत किया गया था।

3. श्री श्रीवास्तव के उपर्युक्त अंकित तथ्यों के समीक्षोपरांत पाया गया कि :-

(i) कार्य में संभावित खपत की मात्रा का आकलन किये बिना खपत से अधिक बिटुमेन निर्गत कर संवेदक को वित्तीय लाभ पहुँचाने के आरोप के संबंध में श्री श्रीवास्तव का यह कथन कि स्टॉक के प्रभारी कनीय अभियंता/सहायक अभियंता होते है मान्य नहीं है क्योंकि कार्यपालक अभियंता प्रमंडल के मुखिया के रूप में कार्यरत रहते हैं एवं प्रमंडल के सभी प्रकार की कार्यों के प्रति उनकी जवाबदेही14 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 रहती है। श्री श्रीवास्तव ने आवश्यकता से अधिक बिटुमेन देकर परोक्ष रूप से संवेदक को लाभ पहुँचाया। संवेदक को अग्रिम आवश्यकतानुसार ही देनी चाहिए। संवेदक को अधिक दिये गये अव्यवहृत बिटुमेन की वसूली भी उनके द्वारा नहीं की गयी इसकी वसूली इनके प्रतिस्थानी द्वारा की गयी। एकरारनामा में चालू विपत्र से सामग्रियों के समायोजन का प्रावधान नहीं होने का उनका तर्क भी मान्य नहीं है। यह सामान्य रूप से मानने योग्य है कि कार्य के अनुपात में ही सामग्रियों का अग्रिम दिया जाना चाहिए।

(ii) जाँच दल के निरीक्षण के समय पथ की स्थिति दयनीय एवं जर्जर पाये जाने के आरोप के संबंध में श्री श्रीवास्तव का कथन कि बिटुमेन से सील करने की जवाबदेही उनके प्रतिस्थनी की थी मान्य नहीं है क्योंकि यह उनका दायित्व था कि अपने कार्यकाल में ही पथ की स्थिति को अच्छी हालत में रखें जिसका निर्वहन उनके द्वारा नहीं किया गया।

(iii) एकरारनामा की शर्त्तों के अनुरूप समय पर कार्य नहीं करने के लिए संवेदक के विरूद्ध कार्यवाही नहीं करने के आरोप के संबंध में उनका कथन कि जवाबदेही उनकी प्रतिस्थानी की थी तर्कसंगत नहीं है क्योंकि उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान ही संवेदक के विरूद्ध कार्रवाई करनी चाहिए थी। ऐसा नहीं कर इन्होनें आपने दयित्व का निर्वहन नहीं किया।

(iv) अंतिम विपत्र पारित नहीं किये जाने के कारण संवेदक से 5 मे0टन अलकतरा की कटौती नहीं किये जाने के अनुपूरक आरोप के संबंध में इनका कथन कि कनीय अभियंता द्वारा उनके प्रभार सौंपने के बाद अंतिम विपत्र तैयार किया गया स्वीकार योग्य नहीं है। इनका दायित्व था कि अपने सेवाकाल के दौरान हीं बिटुमेन का समायोजन अंतिम विपत्र तैयार करा लेते। स्पष्टतः इनके द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया।

(v) प्रथम चालू विपत्र को ही अंतिम विपत्र के रूप में पारित नहीं किये जाने के अनुपूरक आरेाप के संबंध मेंं पाया गया कि कार्य समाप्ति की तिथि 27.05.01 निर्धारित थी। श्री श्रीवास्तव ने अपने अधीनस्थ कनीय अभियंता/सहायक अभियंता को निदेश दिया था, परन्तु उनके कार्यकाल तक अंतिम विपत्र तैयार नहीं हो सका। स्पष्टतः इन्हें अपने अधीनस्थों पर नियंत्रण का आभाव था। इस प्रकार इन्होंने अपने कर्त्तव्य का निर्वहन नहीं किया।

(vi) आर0सी0सी0 पुल निर्माण के संवेदक के दावा भुगतान की अनुशंसा विलंब से करने के अनुपूरक आरोप के संबंध में पाया गया कि स्पष्टतः दावे के भुगतान की अनुशंसा उनके द्वारा विलंब से अधीक्षण अभियंता को समर्पित किया गया।

(vii) दावे के विपत्र की जाँच निर्धारित प्रतिशत में नहीं किये जाने के अनुपूरक आरोप के संबंध में स्पष्ट है कि इन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया है।

(viii) मंत्रिमंडल सचिवालय के संकल्प के अनुसार मरम्मति एवं अनुरक्षण शर्त्तों के अन्तर्गत कार्य मदों की मात्रा में किसी प्रकार की बढ़ोतरी अनुमान्य नहीं होने के अनुपूरक आरोप के संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि आर0सी0सी0 पुल के निर्माण की स्वीकृति योजना मद से किया जाना चाहिए था लेकिन इसकी स्वीकृति मरम्मति एवं अनुरक्षण मद से की गयी है। अतः इनका कथन की मूल कार्य को मानते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय का परिपत्र इस कार्य पर लागू नहीं होगा मान्य नहीं है।

4. इस प्रकार उपर्युक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि बिटुमेन अधिक मात्रा में निर्गत करने एवं इसका समायोजन नहीं करने से निश्चय ही सरकार को क्षति हुई है साथ ही, निर्धारित प्रक्रियाओं का इनके द्वारा किया गया उल्लंघन कदाचार का द्योतक है। साथ हीं, इस प्रकरण में बिहार लोक सेवा आयोग से पूर्व में प्राप्त किये गये परामर्श में उनके इस कृत्य के लिए उनके पेंशन एवं उपादान से क्रमशः 25-25 प्रतिशत की कटौती की अनुशंसा प्राप्त थी। अतएव श्री धीरेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के पुनर्विलोकन अभ्यावेदन पर सम्यक रूप से विचारोपंरात सरकार के निर्णय के आलोक में अधिसूचना संख्या-107 (एस) सहपठित ज्ञापांक-108 (एस) दिनांक 05.01.09 द्वारा अधिरोपित शास्ति को निम्नरूपेण संशोधित किया जाता है :-

(क) इनके पेंशन से स्थायी रूप से 25 (पच्चीस) प्रतिशत तथा उपादान से 25 (पच्चीस) प्रतिशत की कटौती की जाती है।

(ख) निलंबन अवधि के लिए जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।15 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 30 अगस्त 2013 सं॰ निग/सारा-10-आरोप-म0नि0-07/10-6962 (एस) —श्री गंगा शरण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, भवन प्रमंडल गया, सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध भवन प्रमंडल, गया के पदस्थापन काल में बोध गया स्थित मगध विश्वविद्यालय परिसर में अत्यंत पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए 100 शय्‌या वाले छात्रावास निर्माण में बरती गयी अनियमितताओं के लिए तकनीकी परीक्षक कोषांग, मंत्रिमंडल निगरानी विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-4573 (भ0) दिनांक 12.06.08 द्वारा निलंबित करते हुए का0आ0सं0-221-सह-पठित ज्ञापांक-6780 दिनांक 14.08.08 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-810 (नि0) अनु0 दिनांक 22.12.08 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में मात्र आरोप संख्या-3 को आंशिक रूप से प्रमाणित माना जबकि शेष 14 आरोपों को प्रमाणित नहीं माना। परन्तु, भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा संचालन पदाधिकारी के मत से असहमत होते हुए पत्रांक-8550 (भ0) अनु0 दिनांक 06.10.09 द्वारा असहमति के बिन्दु को चिन्हित कर आरेाप संख्या-1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 9, 10, 11, 12, 14 एवं 15 के लिए श्री शरण से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री शरण द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पत्रांक-शून्य दिनांक 09.10.09 के समीक्षोपरांत आरोप को प्रमाणित पाने एवं वित्तीय क्षति का मामला मानते हुए इसे वृहद दंड की कोटि का प्रतीत होने के आलोक में भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना ने अपने पत्रांक-232 (भ0) अनु0 दिनांक 13.01.10 द्वारा अग्रेतर कार्रवाई की अनुशंसा पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना से की। इस बीच भवन निर्माण विभाग की अधिसूचना संख्या-7969 (भ0) दिनांक 12.10.10 द्वारा श्री शरण को निलंबन मुक्त किया गया। 2. पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा विषयांकित मामले की विस्तृत तकनीकी समीक्षा की गयी एवं भवन निर्माण विभाग के मंतव्य से सहमत होते हुए श्री शरण को प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं कराये जाने, अनियमित भुगतान करने, तकनीकी स्वीकृति के बिना राशि का भुगतान करने, मापी की जाँच नहीं करने एवं कार्यों का पर्यवेक्षण सही रूप में नहीं करने के प्रमाणित आरोपों के लिए दोषी मानते हुए अधिसूचना संख्या-9414 (एस) दिनांक 19.08.11 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- (क) इन्हें कार्यपालक अभियंता के कालमान वेतन पर पदावनत किया जाता है। 3. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री शरण द्वारा माननीय न्यायालय में याचिका संख्या-23516/2011 दायर की गयी। माननीय न्यायालय ने अपने पारित आदेश दिनांक 31.01.2012 में भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा किये गये द्वितीय कारण पृच्छा पत्रांक-8550 (भ0) अनु0 दिनांक 06.10.09 एवं पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा निर्गत दंडादेश अधिसूचना संख्या-9414 (एस) दिनांक 19.08.11 को निरस्त करते हुए संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवदेन प्राप्त होने के बाद से नियमानुकूल कार्रवाई करते हुए नये सिरे से इस मामले में तीन माह के अन्दर निर्णय लेने जाने का निदेश अनुशासनिक प्राधिकार को दिया। 4. माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में उक्त दंडादेश को विभागीय अधिसूचना सं0-3834(S) दिनांक 03.04.12 एवं शुद्धि पत्र अधिसूचना सं0-4284(S) दिनांक 18.04.12 तथा भवन निर्माण विभाग द्वारा पूछे गए द्वितीय कारण पृच्छा पत्रांक 8550(भ0) अनु0 दिनांक 06.10.09 को भवन निर्माण विभाग के पत्रांक 8589(भ0) दिनांक 30.10.12 द्वारा निरस्त किया गया। 5. इस प्रकरण में श्री शरण को भवन निर्माण विभाग द्वारा 12.06.08 से निलम्बित किए जाने एवं 11.08.10 के प्रभाव से निलंबन मुक्त किए जाने के बीच की अवधि को भवन निर्माण विभाग द्वारा विनियमित करते हुए इन्हें पूर्ण निलंबन अवधि के लिए कर्त्तव्य वेतन का निर्णय लिया गया था परन्तु महालेखाकार द्वारा पृृच्छा किए जाने के आलोक में उक्त निर्णय पर पथ निर्माण विभाग द्वारा संस्तुति नहीं की गई। 6. माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के विभागीय/तकनीकी समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए श्री शरण के विरूद्ध गठित आरोप संख्या-3, 4, 5, 6, 7 एवं 14 के संबंध में पाया गया कि :-

(i) प्रावधान के विपरीत कम मुटाई के प्लेट्‌स का प्रयोग ग्रील में किये जाने के आरोप संख्या-3 के संबंध में पाया गया कि ग्रील में व्यवहृत M.S. Flat एकरारनामा के विशिष्टि के अनुरूप ही होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि ग्रील का भुगतान वास्तविक वजन के आधार पर किया जाता हैं एकरारनामा में भी ऐसा ही दर है। इस प्रकार अगर यह मान भी लिया जाय कि संवेदक को वजन के अनुसार ही भुगतान हुआ है फिर भी Specification के अनुरूप कार्य नहीं कराने के लिए श्री शरण जिम्मेवार हैं।

(ii) दरवाजो एवं चौखट की प्राक्कलन एवं मापी पुस्त में अंकित परिच्छेदीय मापी कम पाये जाने के आरोप संख्या-4 के संबंध में पाया गया कि एकरारनामा में चौखट के साईज का मापी का प्रावधान विशिष्टि में Supplying/Fitting/Fixing के आधार पर हीं होता है। अतः संचालन पदाधिकारी का मंतव्य स्वीकार योग्य नहीं है।

(iii) प्रथम, द्वितीय एवं चतुर्थ विपत्रों में मापी की जाँच नहीं करने के आरोप संख्या-5 के संबंध में पाया गया कि बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता परिशिष्ट-6 क्रमांक-2 के अनुसार "प्रमंडल पदाधिकारी से अपेक्षा किया जाता है कि वे अपने अधीनस्थों द्वारा किये गये मापों में कम से कम 10 प्रतिशत मापों की पड़ताल करेगा, किन्तु यह जाँच तैयार किये गये बिलों की संख्या में 10 प्रतिशत से कम की नहीं होनी चाहिए"।16 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 इस तरह लोक निर्माण लेखा संहिता में यह प्रावधान है कि प्रमंडल पदाधिकारी को अपने अधीनस्थों द्वारा की गयी मापी को कम से कम 10 प्रतिशत मापी की जाँच करनी है, परन्तु ऐसा नहीं किया गया। इस प्रावधान की आड़ में कि तैयार किये गये बिलों की कुल संख्या से 10 प्रतिशत ही जाँच करनी है, और इसी के आधार पर इस योजना के उपरोक्त मापी की जाँच नहीं की गयी, स्वीकार योग्य नहीं है। इस कारण संचालन पदाधिकारी का मंतव्य स्वीकार योग्य नहीं है।

(iv) प्रथम चालू विपत्र से 9 वें चालू विपत्र तक किसी भी कार्य की जाँच किये वगैर भुगतान किये जाने के आरोप संख्या-6 के संबंध में पाया गया कि बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के परिशिष्ट-6 के क्रमांक-2 के अनुसार प्रमंडल पदाधिकारी को अपने अधीनस्थों द्वारा किये गये मापों में कम से कम 10 प्रतिशत मापी की पड़ताल करना हैं मापी पुस्तिका 2691 के पृ0-6,8,19 एवं 35 पर आंशिक जाँच के आलोक में उनके द्वारा प्रस्तुत इस मापी पुस्तिका की छाया प्रति पर चिन्हित परिशिष्ट 2/21,3/41,3/4,3/5,3/6 पर किसी भी कार्य मापी के जाँचित किये जाने का तथ्य दृष्टिगत नहीं होता है। अतः संचालन पदाधिकारी का मंतव्य स्वीकार योग्य नहीं है।

(v) तकनीकी स्वीकृत राशि से अधिक भुगतान के आरोप संख्या-7 के संबंध में पाया गया कि कार्यपालक अभियंता को मदवार एकरारनामा में प्रावधानित मात्रा से 10 प्रतिशत अधिक ही भुगतान करने की शक्ति दी गयी है। अतः संचालन पदाधिकारी का मंतव्य स्वीकार योग्य नहीं है।

(vi) वैसे मद्‌ जिनकी मापी बाद में संभव नहीं है उन मापियों की जाँच नहीं करने के आरेाप संख्या-14 के संबंध में पाया गया कि लोक निर्माण लेखा संहिता के पृ0-6 (11) पर यह उल्लेख है कि प्रमंडल पदाधिकारी को अपने अधीनस्थ द्वारा की गयी मापी कम से कम 10 प्रतिशत पड़ताल करनी है और यह पड़ताल उस साल में किये गये बिलों की कुल संख्या के 10 प्रतिशत से कम की नहीं होनी चाहिए। निश्चय ही आपके द्वारा इस योजना के वे कार्य जिसकी मापी बाद में संभव नहीं था, के मापों की जाँच नहीं किया गया और वह अवयव भवन निर्माण में छिप गये। यह श्री शरण के लापरवाही का प्रतीक है। यह भी पाया गया कि संचालन पदाधिकारी ने मापी पुस्त संख्या-2691 पृ0-6 अपेन्डिक्स 3/3 पर श्री शरण द्वारा नींव में ढलाई कार्य की जाँच किया गया बतलाया गया है, परन्तु इस मापी पुस्त पर कार्यपालक अभियंता द्वारा किसी भी मद की जाँच कर अपना जाँच से संबंधित कोई अभिमत अंकित नहीं किया गया है। इस प्रकार मापी पुस्त संख्या-2691 के पृ0-6 पर परिशिष्ट-3/3 पर भी किसी मद की जाँच कार्यपालक अभियंता द्वारा किये जाने संबंधी कोई तथ्य अंकित नहीं है और न ही उनका हस्ताक्षर है। अतः संचालन पदाधिकारी का मंतव्य स्वीकार योग्य नहीं है। उपर्युक्त अंकित तथ्यों के आधार पर संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 4816(S) अनु0 दिनांक 17.06.13 द्वारा श्री शरण से द्वितीय कारण पृच्छा की गई साथ ही पत्रांक 5289(S) दिनांक 05.07.13 द्वारा निलम्बन अवधि के संबंध में कारण पृच्छा की गई।

7. श्री शरण के दिनांक 30.06.13 को सेवानिवृृत्त हो जाने के कारण उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को विभागीय संकल्प ज्ञापांक 5290(S) दिनांक 05.07.13 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत्‌ संपरिवर्तित किया गया। 8. श्री शरण ने अपने पत्रांक शून्य दिनांक 01.07.13 द्वारा द्वितीय कारण पृृच्छा उत्तर एवं पत्रांक शून्य दिनांक 10.07. 13 द्वारा निलम्बन अवधि के सम्बन्ध में कारण पृृच्छा उत्तर समर्पित किया जिसमें उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्नांकित बाते कही है :-

(i) संचालन पदाधिकारी द्वारा सिर्फ आरोप संख्या-3 को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया। भवन निर्माण विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन में दिये गये मंतव्य से बिना कारण बताये असहमति तथा संबंधित साक्ष्य के संदर्भ में कारण पृच्छा करने के उपरांत तत्कालीन अभियंता प्रमुख, पथ निर्माण विभाग द्वारा तकनीकी मंतव्य में आरोप प्रमाणित नहीं बताया गया, परन्तु जाँच प्रतिवदेन में सभी आरोपों से मुक्ति के बिन्दु पर जतायी गयी असहमति के आधार पर विभागीय अधिसूचना संख्या-4414 दिनांक 30.08.11 के माध्यम से कार्यपालक अभियंता के कालमान वेतन पर पदावनत किया गया।

(ii) उक्त दंडादेश को सी0डब्लू0जे0सी0सं0-23516/2011 में माननीय न्यायालय ने दिनांक 31.01.12 को पारित आदेश द्वारा दंड अधिसूचना एवं द्वितीय कारण पृच्छा निरस्त करते हुए 3 माह के अंदर निष्पादित करने का निदेश दिया गया। ऐसी स्थिति में विभाग द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा करना न्याय निर्णय के प्रतिकूल है।

(iii) दिनांक 30.06.13 को सेवानिवृत हो चुका हूँ। अतः विभागीय कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जाती है, चूँकि सरकार को कोई वित्तीय क्षति नहीं हुई। अतः बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) उनपर लागू नहीं होता है।

9. श्री शरण से प्राप्त द्वितीय कारण पृृच्छा उत्तर एवं निलम्बन अवधि के संबंध में प्राप्त कारण पृृच्छा उत्तर के विभागीय/तकनीकी समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री शरण द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में विषय-वस्तु से संबंधित कोई तथ्य नहीं दिया गया है। श्री शरण द्वारा प्राक्कलन एवं विशिष्टि के अनुरूप योजना का कार्यान्वयन नहीं किया गया जिसके फलस्वरूप घटिया निर्माण के कारण भवन के प्रथम तल मेें 122 mm का दरार पाया जाना उनके कर्त्तव्यहीनता एवं17 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 घोर कदाचार का परिचायक है, साथ ही गलत मापी कर संवेदक को अधिक भुगतान करने के कारण राज्य सरकार को वित्तीय क्षति हुई। इस तरह श्री शरण द्वारा अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन नहीं किया गया जिसके लिए श्री शरण सीधे रूप से दोषी हैं। अतः उक्त अनियमितता के लिए श्री शरण को दोषी पाते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए इनके पेंशन से दस प्रतिशत स्थायी रूप से कटौती के दंड प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-5884 (एस) अनु0 दिनांक 23. 07.13 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग की गयी। 10. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1200 दिनांक 30.08.13 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर आयोग द्वारा सहमति व्यक्त की गयी। तदआलोक में श्री गंगा शरण, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, गया सम्प्रति सेवानिवृत्त, सी0सी0-56, पी0सी0 कॉलोनी कंकड़बाग, पटना-20 के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (क) इनके पेंशन से 10 प्रतिशत की स्थायी रूप से कटौती। 11. निलम्बन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं परन्तु अन्य प्रयोजनार्थ यह कर्त्तव्य पर बितायी गई अवधि के रूप में विनियमित की जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 7 फरवरी 2014 सं0 निग/सारा-मुक0-03/2010-1044 (एस)—श्री लक्ष्मीकान्त पटेल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमण्डल, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमण्डल मोतिहारी के विरूद्ध नई राजधानी, पथ प्रमण्डल, पटना के पदस्थापन काल के दौरान नई राजधानी पथ प्रमण्डल अन्तर्गत पटना शहर के अन्दर पार्किग, ह्‌यूम पाईप ड्रेन, फुटपाथ एवं एंगल डे्रन, रोड साईनेज आदि मूल प्रकृति के कार्यो के लिए ई-टेन्डर से बचने के निमित जान-बूझ कर विभागीय निदेश के विपरीत एक पथ का एक प्राक्कलन न बनाकर एक पथ को कई टूकड़ों में विभक्त कर अधीक्षण अभियंता की सक्षमता के अधीन योजना की राशि 25.00 लाख से कम रखते हुए 45 योजनाओं का सृजन कर निविदा आमंत्रित करने के आरोप के लिए संकल्प ज्ञापांक-8745 (एस) दिनांक 03.08.11 द्वारा विभागीय कार्रवाई संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में श्री पटेल के विरूद्ध गठित आरोप को अंशतः प्रमाणित माना गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवदेन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-1308 (एस) दिनांक 20.़02.13 द्वारा श्री पटेल से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। 2. श्री पटेल, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-01 (कै0) पटना दिनांक 05.09.2013 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा के बचाव में प्रायः उन्ही बातों का उल्लेख किया गया जो उन्होंने पूर्व के बचाव-बयान एवं संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया था। इनके द्वारा सारतः यह कहा गया है कि सभी 45 योजनाओं का कार्यान्वयन mobility plan के तहत किया गया था। संचालन पदाधिकारी के समीक्षा के मूल अवधारना यह है कि पटना नगर के विभिन्न इलाकों में अवस्थित विभिन्न पथों मे ंकिये जाने वाले विभिन्न मदो के कार्य को समेकित कर एक प्राक्कलन बनाया जाता जो पूर्णतः अव्यवहारिक है। 3. श्री पटेल द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा के समीक्षोपरान्त पाया गया कि संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन पूर्णतः विवेचित है, जिसमें आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित बताया गया है। इस प्रकार स्पष्ट है कि श्री पटेल कार्यपालक अभियंता द्वारा सरकार के निदेश का उल्लघंन करते हुये अपने पद एवं अधिकार का दुरूपयोग किया गया है। श्री पटेल द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा को मान्य नहीं पाते हुये एक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं निंदन की शास्ति पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-9440 (एस) दिनांक 09.12.13 द्वारा बिहार लेाक सेवा आयोग से परामर्श/सहमति की मांग की गयी। 4. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2338 दिनांक 27.01.14 द्वारा उपलब्ध कराये गये मंतव्य में निन्दन की सजा वृहत शास्ति की श्रेणी मेें नहीं आने के कारण विभाग स्तर पर ही निर्णय लिया जाना अपेक्षित होने का मंतब्य देते हुये एक वार्षिक वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोके जाने के दंड पर सहमति व्यक्त की गयी। सरकार द्वार निर्णित दण्ड एवं इसपर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त मन्तव्य के आलोक में श्री लक्ष्मीकान्त पटेल, कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमण्डल मोतिहारी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरेाप के लिए उन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) निन्दन (वर्ष-2010) (ii) एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 30 अगस्त 2013 सं0 निग/सारा-6 (आरोप) द0बि0 (ग्रा0)-69/2008-6957 (एस)—श्री मोख्तार नाथ राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, भभुआ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर को कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, भभूआ के पदस्थापन काल में मुख्यमंत्री सड़क18 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 योजना के अन्तर्गत बारहमासी सड़क सुविधा प्रदान करने हेतु वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए कैमूर जिला हेतु 5 करोड़ रूपये की राशि कर्णांकित की गई थी। इस बजट प्रावधान की तिगुनी राशि 15 करोड़ रूपये की योजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर कार्य प्रारंभ किया जाना था, ताकि 2007-08 तक इसमें अधिकांश योजनाओं को पूर्ण किया जा सके। साथ ही उसके लिए विभाग द्वारा समय सीमा का निर्धारण किया गया था। आपके द्वारा 9 माह बीतने के बावजूद निर्धारित लक्ष्य 15 करोड़ के विरूद्ध मात्र 11.92 करोड़ का ही डी0पी0आर0 समर्पित किया गया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2006-07 में 5 करोड़ रूपये कर्णांकित राशि के विरूद्ध मात्र 5.47 लाख रूपये व्यय किया गया। ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-799 दिनांक 12.07.04 द्वारा आपसे स्पष्टीकरण पूछा गया, परन्तु आपके द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब निर्धारित तिथि तक नहीं देने के फलस्वरूप ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-4168 अनु0 दिनांक 20.06.08 द्वारा पथ निर्माण विभाग से आपके विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही हेतु अनुशंसा की गई। तदआलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-13748 (एस) अनु0 दिनांक 24.10.08 द्वारा विभागीय कार्यवाही सचांलित की गई। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-614 दिनांक 19.07.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप-1 एवं पूरक आरेाप-2 को प्रमाणित नहीं पाया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि एक वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री सड़क योजना में प्राप्त `5.00 करोड़ आवंटन के विरूद्ध समय पर तीन गुणा राशि का डी0पी0आर0 तैयार नहीं करना तथा मात्र `5.47 लाख व्यय करना कर्त्तव्यहीनता तथा लापरवाही को दर्शाता है। संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष एवं श्री राम केे कथन के अनुसार मात्र `1.79 करोड़ की योजनाओं की स्वीकृति को मान भी लिया जाय तो किसी भी दृष्टिकोण से वित्तीय वर्ष में मात्र `5.47 लाख के व्यय को संतोषजनक नहीं माना जा सकता है। अनुपूरक आरोप के संबंध में पाया गया कि कार्यपालक अभियंता को नियमानुसार 10 प्रतिशत योजनाओं की जाँच करनी है। श्री राम द्वारा मंत्रिमंडल निगरानी विभाग द्वारा निर्गत परिपत्र का उल्लंघन किया गया है। उक्त परिपत्र यह नहीं कहता है कि विभागीय रूप से कार्यान्वित योजनाओं की जाँच कार्यपालक अभियंता द्वारा किया जाना आवश्यक नहीं है। योजनाओं का कार्यान्वयन एवं पर्यवेक्षण की जिम्मेवारी कार्यपालक अभियंता की है। इस मामले में श्री राम द्वारा पर्यवेक्षण का अभाव स्पष्ट होता है। जाँच प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक भूल के लिए श्री राम दोषी है। इस प्रकार योजनाओं के कार्यान्वयन में लापरवाही, शिथिलता तथा कर्त्तव्यहीनता के लिए श्री राम को दोषी पाए जाने के आलोक में विभागीय पत्रांक-2037 (एस) दिनांक 13.03.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा पूछा गया। 3. श्री राम द्वारा अपने पत्रांक-295 अनु0 दिनांक 09.04.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। श्री राम द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के बिन्दुओं के आलोक में प्रमाणित पाए गए आरोपों के लिए श्री मोख्तार नाथ राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, भभुआ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध निम्न दंड संसूचित किया जाता हैः- (i) निन्दन एवं (ii) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 26 दिसम्बर 2013 सं0 निग/सारा-6 (आरोप) द0बि0 (ग्रा0)-69/2008-9915 (एस)—श्री मोख्तार नाथ राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, भभुआ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर को कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, भभूआ के पदस्थापन काल में मुख्यमंत्री सड़क योजना के अन्तर्गत बारहमासी सड़क सुविधा प्रदान करने हेतु वित्तीय वर्ष 2006-07 के लिए कैमूर जिला हेतु 5 करोड़ रूपये की राशि कर्णांकित की गई थी। इस बजट प्रावधान की तिगुनी राशि 15 करोड़ रूपये की योजनाओं की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर कार्य प्रारंभ किया जाना था, ताकि 2007-08 तक इसमें अधिकांश योजनाओं को पूर्ण किया जा सके। साथ ही उसके लिए विभाग द्वारा समय सीमा का निर्धारण किया गया था। श्री राम के द्वारा 9 माह बीतने के बावजूद निर्धारित लक्ष्य 15 करोड़ के विरूद्ध मात्र 11.92 करोड़ का ही डी0पी0आर0 समर्पित किया गया। साथ ही वित्तीय वर्ष 2006-07 में 5 करोड़ रूपये कर्णांकित राशि के विरूद्ध मात्र 5.47 लाख रूपये व्यय किया गया। ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-799 दिनांक 12.07.04 द्वारा श्री राम से स्पष्टीकरण पूछा गया, परन्तु उनके द्वारा स्पष्टीकरण का जवाब निर्धारित तिथि तक नहीं देने के फलस्वरूप ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-4168 अनु0 दिनांक 20.06.08 द्वारा पथ निर्माण विभाग से श्री राम के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही हेतु अनुशंसा की गई। तदआलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-13748 (एस) अनु0 दिनांक 24.10.08 द्वारा विभागीय कार्यवाही सचांलित की गई। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-614 दिनांक 19.07.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप-1 एवं पूरक आरेाप-2 को यद्यपि प्रमाणित नहीं पाया गया, परन्तु संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि एक वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री सड़क योजना में प्राप्त `5.00 करोड़ आवंटन के विरूद्ध समय पर तीन गुणा राशि का डी0पी0आर0 तैयार नहीं कराना तथा मात्र `5.47 लाख व्यय करना श्री राय की कर्त्तव्यहीनता तथा लापरवाही को दर्शाता है। संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष एवं श्री राम केे कथन के अनुसार मात्र `1.79 करोड़ की योजनाओं की स्वीकृति को मान भी लिया जाय तो किसी भी दृष्टिकोण से वित्तीय वर्ष में मात्र `5.47 लाख के व्यय को संतोषजनक नहीं माना जा सकता है।19 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 अनुपूरक आरोप के संबंध में पाया गया कि कार्यपालक अभियंता को नियमानुसार 10 प्रतिशत योजनाओं की जाँच करनी है। श्री राम द्वारा मंत्रिमंडल निगरानी विभाग द्वारा निर्गत परिपत्र का उल्लंघन किया गया। उक्त परिपत्र यह नहीं कहता है कि विभागीय रूप से कार्यान्वित योजनाओं की जाँच कार्यपालक अभियंता द्वारा किया जाना आवश्यक नहीं है। योजनाओं का कार्यान्वयन एवं पर्यवेक्षण की जिम्मेवारी कार्यपालक अभियंता की है। इस मामले में श्री राम द्वारा पर्यवेक्षण का अभाव स्पष्ट होता है। जाँच प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक भूल के लिए श्री राम दोषी है। इस प्रकार योजनाओं के कार्यान्वयन में लापरवाही, शिथिलता तथा कर्त्तव्यहीनता के लिए श्री राम को दोषी पाए जाने के आलोक में विभागीय पत्रांक-2037 (एस) दिनांक 13.03. 13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 3. श्री राम द्वारा अपने पत्रांक-295 अनु0 दिनांक 09.04.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर समर्पित किया गया। श्री राम द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष से असहमति के बिन्दुओं के आलोक में प्रमाणित पाए गए आरोपों के लिए श्री मोख्तार नाथ राम, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, भभुआ सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-6957 (एस) दिनांक 30.08.13 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- (i) निन्दन एवं (ii) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। 4. महालेखाकार, बिहार के कार्यालय के पत्रांक-GE-04-PWD-R-V-15-809 दिनांक 29.10.13 द्वारा श्री राम की सेवानिवृति की तिथि-31.12.2014 होने के आलोक में श्री राम का केवल एक ही वार्षिक वेतन वृद्धि जो उन्हें दिनांक 01. 07.2014 को देय होगा, को रोकना संभव होने की सूचना देते हुए इस मामले में अंतिम निर्णय से अवगत कराने का अनुरोध किया गया। तद्‌आलोक में मामले के पुनर्विचारोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-6957 (एस) दिनांक 30.08.13 द्वारा संसूचित दंड को निम्नरूपेण संशोधित किया जाता है :- (i) निन्दन एवं (ii) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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6 जनवरी 2014

सं0 निग/सारा-4 (पथ)-60/03-136 (एस) श्री नवल किशोर प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त, उत्तरी श्री कृष्णापुरी, तिलक मार्ग, 6 बी0/7, बोरिंग रोड, पटना के विरूद्ध पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में स्थानीय स्तर पर प्रचार-प्रसार कर निविदा करने की अनुमति, एक पथ के लिए एक प्राक्कलन तथा निविदा के प्रावधान के विपरीत खंडों में स्वीकृति देने, निविदा अभिलेखों के proper scrutiny के बिना निविदा स्वीकृति के आरोप के लिए बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत्‌ विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9566 (एस) अनु0 दिनांक 12.08.06 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-11 दिनांक 12.01.10 में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित 5 आरोपों में से किसी भी आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया, परन्तु संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उससे असहमत होते हुए असहमति के बिन्दुओं को चिन्हित कर विभागीय पत्रांक-2462 (एस) दिनांक 19.02.10 द्वारा श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री प्रसाद ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-576 दिनांक 02.03.10 में मूल रूप में अंकित किया कि कार्यपालक अभियंता के अनुरोध पर उनके द्वारा स्थानीय प्रचार-प्रसार से निविदा आमंत्रित करने की अनुमति दी गयी।

2. श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय स्तर पर निविदा के प्रचार-प्रसार से निश्चय ही प्रतिस्पर्धा में कमी हुई। अगर अल्पकालीन निविदा समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाती तो प्रतिस्पर्धा होती और योजना की लागत कम हो सकती थी, साथ हीं खंड-खंड में योजनाओं की स्वीकृति भी नियमानुसार सही नहीं है। इस प्रकार श्री प्रसाद को अपने अधिकार का दुरूपयोग कर सरकारी वित्तीय क्षति पहुँचाने एवं नियमों का पालन नहीं करने के कदाचार के प्रमाणित आरोपों के लिए इनके पेंशन से 5 प्रतिशत राशि की कटौती 2 वर्षों के लिए करने के दंड प्रस्ताव पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-2464 (एस) अनु0 दिनांक 21.03.13 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति की मांग की गयी।

3. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-1829 दिनांक 25.11.13 से प्राप्त परामर्श में सरकार द्वारा निर्णित दंड पर आयोग द्वारा असहमति व्यक्त की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्श के आलोक में पुनः समीक्षोपरांत यह स्थापित पाया गया कि स्थानीय स्तर पर निविदा के प्रचार-प्रसार के विपरीत समाचार पत्रों में निविदा प्रकाशन से प्रतिस्पर्धा होती तथा योजना की लागत भी कम हो सकती थी तथा नियम के विपरीत खंड-खंड में योजनाओं की स्वीकृति भी श्री प्रसाद के कदाचार का परिचायक है। इस तरह श्री प्रसाद सरकार को हुई वित्तीय क्षति एवं गंभीर कदाचार के लिए स्पष्टतः दोषी हैं। इस दृष्टिकोण से विभाग द्वारा प्रस्तावित दंड युक्ति-युक्त एवं समानुपातिक पाते हुए, एवं आयोग के सलाह को बाध्यकारी नहीं मानते हुए श्री नवल किशोर प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति20 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 सेवानिवृत्त, उत्तरी श्री कृष्णापुरी, तिलक मार्ग, 6 बी0/7, बोरिंग रोड, पटना के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दंड संसूचित किया जाता है-

(क) इनके पेंशन से 5 प्रतिशत राशि की कटौती अगले 2 वर्ष के लिए की जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 11 फरवरी 2014 सं0 निग/सारा-4 (पथ) आरोप-131/13-1121 (एस)—पथ प्रमडल, छपरा अन्तर्गत रसूलपुर-चैनपुर पथ के निर्माण कार्य में बरती जा रही अनियमितता के संबंध में रसूलपुर के ग्रामीण से प्राप्त परिवाद पत्र के आलोक में उक्त पथ की जाँच उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 द्वारा करायी गयी एवं उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-2 से प्राप्त प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-06 दिनांक 13.01.11 एवं गुणवत्ता प्रतिवेदन पत्रांक-170 दिनांक 15.07.11 के आलोक में निम्न त्रुटियों/ अनियमितताओं यथा-पथ के कि0मी0 5 में कराये गये बी0यू0एस0जी0 कार्य की औसत मोटाई 44 एम0एम0 पायी गयी जबकि प्रावधान 50 एम0एम0 का है, पथ के कि0मी0 5 में कराये गये बी0यू0एस0जी0 कार्य में प्रयुक्त एग्रिगेट औसतन 9.48 प्रतिशत ओभर साईज एवं 13.60 प्रतिशत अन्डर साईज पाया गया, के लिए विभागीय पत्रांक-4866 (ई) अनु0 दिनांक 13.09.11 द्वारा श्री प्रमोद कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता (कार्य)-सह-प्रभारी गुण नियंत्रण, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सहायक अभियंता, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना से स्पष्टीकरण की मांग की गयी।

2. श्री कुमार ने अपने स्पष्टीकरण पत्रांक-शून्य दिनांक 19.09.11 में मूल रूप से निम्न बाते कही यथा-समयान्तराल एवं भारी वाहनों के आवागमन के कारण पथ सतह में सम्पीडन होते रहता है इस कारण मुटाई में कमी आना स्वभाविक है, उक्त योजना की जाँच कार्य समाप्ति के लगभग साढ़े तीन वर्ष बाद भी औसत मुटाई में मात्र 6 एम0एम0 की कमी पायी गयी जो स्वभाविक है, साढ़े तीन वर्ष तक वाहनों के आवागमन होने, सम्पीडन तथा जाँच पदाधिकारी द्वारा नमूना संग्रह हेतु छेनी-हथौड़ी का प्रयोग करने से एग्रीगेट की प्रकृति (ओभर एवं अन्डर साईज आदि) में भिन्नता आना स्वाभाविक है, विषयांकित मामले में ओभर साईज एवं अन्डर साईज 15 प्रतिशत से भी कम है यह भिन्नता आना प्रावैधिक दृष्टिकोण से स्वभाविक है। उक्त आधार पर अपने को आरोप मुक्त करने का अनुरोध श्री कुमार द्वारा किया गया। 3. श्री कुमार से प्राप्त स्पष्टीकरण को तकनीकी समीक्षोपरांत पाया गया कि अनुमोदित मान्यदंड के पुनरीक्षण हेतु गठित समिति द्वारा बी0यू0एस0जी0 कार्य की औसत मुटाई में 3 एम0एम0 की कमी पाये जाने पर टॉलरेन्स के रूप में स्वीकार किया गया है जबकि इस मामले में बी0यू0एस0जी0 कार्य की औसत मुटाई में 6 एम0एम0 की कमी पायी गयी। उसी तरह एग्रीगेट के औसत ग्रेडिंग में 7.50 प्रतिशत तक विचलन पाये जाने पर टॉलरेन्स के रूप में स्वीकार किया गया है जबकि इस मामले में 8.16 प्रतिशत का विचलन पाया गया जो उक्त निर्धारित टॉलरेन्स से अधिक है। 4. उक्त आधार पर श्री प्रमोद कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता (कार्य)-सह-प्रभारी गुण नियंत्रण, पथ प्रमंडल, छपरा सम्प्रति सहायक अभियंता, सेतु निरूपण अंचल, केन्द्रीय निरूपण संगठन, पथ निर्माण विभाग, पटना के प्राप्त स्पष्टीकरण पत्रांक-शून्य दिनांक 19.09.11 को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए सरकार के निर्णय के आलोक में निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 6 जनवरी 2014 सं0 निग/सारा-9 (आरोप)-96/2010-150—श्री राधाकृष्ण प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, हजारीबाग सम्प्रति निलंबित को सी0बी0आई0 कांड संख्या-आर0सी0 13 (ए)/09 (आर0) में विशेष न्यायाधीश सी0बी0आई0 न्यायालय द्वारा न्यायालय में उपस्थित होने हेतु निर्गत सम्मन की अवहेलना के आरोप के लिए अधिसूचना संख्या-4131 (एस) दिनांक 07.04.11 द्वारा निलंबित किया गया तथा श्री प्रसाद सम्प्रति निलंबन में हैं। सी0बी0आई0, राँची के पत्रांक-5900 दिनांक 22.11.13 से प्राप्त सूचना के अनुसार श्री प्रसाद द्वारा न्यायालय में समर्पण नहीं किया गया है। स्पष्टतः श्री प्रसाद द्वारा सी0बी0आई0 न्यायालय के आदेश का अनुपालन अब तक नहीं किया गया है। चूँकि श्री प्रसाद द्वारा माननीय न्यायालय के आदेश का अनुपालन अब तक नहीं किया गया है अतएव निलंबन की लंबी अवधि के लिए श्री प्रसाद स्वयं उत्तरदायी हैं। अस्तु बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 (1)(ii) में निहित प्रावधान के आलोक में सरकार द्वारा श्री राधाकृष्ण प्रसाद, सहायक अभियंता सम्प्रति निलंबित के जीवन निर्वाह भत्ता में 50 प्रतिशत की कटौती का निर्णय लिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।21 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 18 अक्तूबर 2013 सं0 निग/सारा-5 (ग्रा0)-2066/03-8117 (एस)—श्री राजेन्द्र प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, गुमला सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल संख्या-2, बिहारशरीफ को सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, गुमला के पदस्थापन के दौरान वसिया प्रखंड अन्तर्गत निर्मित विभिन्न योजनाओं के ध्वस्त होने के फलस्वरूप अधिसूचना संख्ख्या-10575 (एस) दिनांक 04.12.99 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-3225 (एस) दिनांक 26.05. 2000 द्वारा तीन आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। कालान्तर में श्री प्रसाद को अधिसूचना संख्या-7547 (एस) दिनांक 06.09.03 द्वारा निलंबन से मुक्त करते हुए निलंबन अवधि के वेतन आदि का भुगतान चल रही विभागीय कार्यवाही की फलाफल के आधार पर करने का निर्णय लिया गया। 2. श्री प्रसाद के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोप के लिए अधिसूचना संख्या-12919 (एस) दिनांक 14.12.12 द्वारा आरोप वर्ष 1995 के लिए निन्दन का दंड संसूचित किया गया। श्री प्रसाद के निलंबन अवधि दिनांक 04.12.99 से दिनांक 05.09.2003 के विनियमन के निमित्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-11 (5) के तहत विभागीय पत्रांक-1940 (एस) दिनांक 11.03.13 द्वारा उनसे कारण पृच्छा की गयी। 3. श्री प्रसाद के पत्रांक-शून्य दिनांक 10.04.13 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा में उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को प्रमाणित नहीं माना गया। अतिवृष्टि एवं इसके कारण आई अप्रत्याशित बाढ़ के कारण निर्माण कार्य के 1 से 6 वर्ष के उपरांत योजनाऐं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई थी न कि प्राक्कलन/कार्यान्वयन/पर्यवेक्षण के दोष के कारण। विभागीय कार्यवाही के विभिन्न चरणों को पूरा करने के निमित निर्धारित समय सीमा से संबंधित कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के परिपत्र का उल्लेख करते हुए अंकित किया गया कि उक्त की पृष्ठभूमि में पौने चार वर्ष के निलंबन अवधि में देय जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी भुगतान नहीं करने का प्रस्ताव उक्त परिपत्र का उल्लंघन है। 4. श्री प्रसाद द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा योजनाओं के कार्यान्वयन में अनियमितता एवं लापरवाही बरती गयी थी, फलतः योजनाऐं क्षतिग्रस्त हुई थी। श्री प्रसाद का तर्क की अतिवृष्टि एवं बाढ़ के कारण योजनाऐं क्षतिग्रस्त हुई मान्य नहीं है। इस प्रकार श्री राजेन्द्र प्रसाद, सहायक अभियंता के कारण पृच्छा को मान्य नहीं पाते हुए उनके निलंबन अवधि के संबंध में निम्न निर्णय लिया जाता है :-

(i) निलंबन अवधि दिनांक 04.12.99 से 05.09.03 तक के लिए उन्हें मात्र जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान किया जायेगा, परन्तु उक्त अवधि को अन्य प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में विनयमित किया जायेगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 7 फरवरी 2014 सं0 निग/सारा-7 (लोका) उ0वि0रा0उ0प0-05/08-1046 (एस)—श्री राजेश्वर प्रसाद सिंह, तत्कालीन प्रभारी अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, शिवपुरी, पटेल नगर पथ संख्या-1, पोस्ट- शास्त्रीनगर, पटना को राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के लिए लोकायुक्त, बिहार के जाँचाधीन मामले में बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) के तहत संकल्प ज्ञापांक-8164 (एस) अनु0 दिनांक 19.07.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-92 (अ0प्र0) अनु0 दिनांक 27.08.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध गठित कुल 5 आरोपों में से 4 आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोपों के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन की प्रति सहित विभागीय पत्रांक-12769 (एस) अनु0 दिनांक 12.12.12 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। 3. श्री सिंह के पत्रांक-08, दिनांक 26.12.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिंह ने बचाव-वयान में जितनी बातें कही है, वे सभी बातें उन्होंने संचालन पदाधिकारी को कही थी, जिसका उल्लेख संचालन पदाधिकारी ने अपने सुविचारित प्रतिवेदन में किया है तथा समीक्षोपरांत श्री सिंह के विरूद्ध लगाये गये 5 आरोपों में से 4 आरोपों को प्रमाणित प्रतिवेदित किया। जहाँ तक सेवानिवृति के 4 वर्षों के बाद विभागीय काार्यवाही चलाने का प्रश्न है, यह मामला माननीय लोकायुक्त के न्यायालय में विचाराधीन था। माननीय लोकायुक्त के न्यायालय में विचाराधीन मामलों में बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी0 के तहत 4 वर्षों की शर्त्त लागू नहीं होती है। अतएव श्री सिंह के विरूद्ध संचािलत विभागीय कार्यवाही नियमानुकूल है। जहाँ तक संचालन पदाधिकारी के व्यक्तिगत विद्वेष से ग्रसित होने का प्रश्न है, इसका न तो कोई कारण स्पष्ट है और न ही इसके लिए कोई साक्ष्य उन्होंने दिया है। निश्चित रूप से चतुर्थ एवं तृतीय वर्ग के स्थापना की जिम्मेवारी अधीक्षण अभियंता को प्रदत्त है परन्तु अधीक्षण अभियंता से यह अपेक्षित है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एवं नियमावली के तहत ही करेंगे। श्री सिंह ने इसका उल्लंघन किया। यदि किसी कर्मचारी यूनियन किसी मांग के लिए संघर्षरत था, तो उस मांग की पूर्ति के लिए अनैतिक/गलत कार्रवाई करने की छूट किसी पदाधिकारी को नहीं मिलती। शान्ति व्यवस्था स्थापित करने का यह तरीका कतई मान्य नहीं हो सकता। निश्चित रूप से प्रोन्नति देकर कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया जा सकता है परन्तु प्रोन्नति देने वाले पदाधिकारी/प्राधिकार से अपेक्षा होती22 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 है कि प्रोन्नति नियमानुकूल हो। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के नियमितीकरण के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा स्पष्ट दिशा निदेश दिये गये थे, जिसका उल्लंघन श्री सिंह द्वारा किया गया। कर्मचारी यूनियन के हड़ताल को रोकने के लिए गलत तरीके से नियमितीकरण करना अनियमितता की श्रेणी में ही आयेगा। जैसा कि इन्होंने कहा है कि इनकी छवि प्रारंभ से ही स्वच्छ रही अतः उनसे अपेक्षा थी कि वे सेवा के अन्त समय तक छवि बरकरार रखते। 4. तदआलोक में प्रमाणित आरोपों के लिए इनके पेंशन से 20 प्रतिशत राशि की कटौती स्थायी रूप से करने के सरकार द्वारा अनुमोदित दंड प्रस्ताव पर नियमानुसार विभागीय पत्रांक-9285 (एस) अनु0 दिनांक 03.12.13 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2339 दिनांक 27.01.14 द्वारा अनुमोदित दंड प्रस्ताव से सहमति व्यक्त की गयी। 5. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री राजेश्वर प्रसाद सिंह, तत्कालीन प्रभारी अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता के पेंशन से 20 (बीस) प्रतिशत राशि की कटौती स्थायी रूप से करने का आदेश दिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 11 नवम्बर 2013 सं0 निग/सारा-1 (रा0उ0प0)-95/2013-8628 (एस)—श्री रवि प्रकाश लोकेश, कार्यपालक अभियंता, गंगा पुल परियोजना प्रमंडल, गुलजारबाग, पटना से कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद के पदस्थापन के दौरान एन0एच0-98 के कि0मी0 130-150 पथांश में कराये गये कार्य के संबंध में उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आलोक में पथ के कि0मी0 153 में कराये गये डब्लू0एम0एम0 एवं जी0एस0बी0 कार्य की औसत मुटाई प्रावधानित 250 एम0एम0 एवं 380 एम0एम0 के विरूद्ध क्रमशः 218 एम0एम0 एवं 360 एम0एम0 पाये जाने तथा डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट के FIEI का औसत मान प्रावधानित अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध 36.32 प्रतिशत पाये जाने के आरोप के लिए पत्रांक-1526 (ई) दिनांक 30.03.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री लोकेश, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-488 दिनांक 03.05.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

(i) डब्लू0एम0एम0 एवं जी0एस0बी0 कार्य की औसत मुटाई प्रावधान से कम पाये जाने के आरोप के संबंध में अंकित किया गया कि मंत्रिमंडल (निगरानी) विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग के परिपत्र 1389 दिनांक 16.09.94 के विपरीत जी0एस0बी0 की मुटाई 2 जगह पर ही ली गई। पथ के मध्य भाग में मुटाई पथ के दोनों किनारों से अधिक होती है तथा मध्य भाग में मुटाई ली जाती तो औसत प्रावधान के अनुरूप आता। डब्लू0एम0एम0 की मुटाई के कमी के संबंध में अंकित किया गया है कि उड़नदस्ता के प्रतिवेदन में पथ के मध्य भाग में मुटाई कम तथा दोनों किनारों पर प्रावधान के अनुरूप पाया गया है जो तकनीकी दृष्टिकोण से सही नही हो सकता, क्योंकि ऐसी स्थिति में पथ का क्रॉस सेक्शन concave नजर आता, परन्तु ऐसा प्रतिवेदित नहीं है।

(ii) डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट के FIEI का औसत मान प्रावधान से अधिक पाये जाने के आरोप के संबंध में अंकित किया गया है कि FIEI की जाँच MOST के विशिष्टि के अनुरूप कार्य के पूर्व किये जाने का प्रावधान है। कार्य सम्पादन के पश्चात एग्रीगेट के भौतिक संरचना में बदलाव स्वभाविक है।

3. श्री लोकेश द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत FIEI का औसत मान प्रावधान से अधिक 36.32 पाये जाने के आरोप के संबंध में पाया गया कि पुनरीक्षित मान्य दंड में FIEI का औसत कुल मान 40 प्रतिशत तक पाये जाने पर इसे सामान्य विचलन मानते हुए टोलरेन्स के रूप में स्वीकार किये जाने के आलोक में इस त्रुटि के लिए श्री लोकेश का स्पष्टीकरण मान्य है, परन्तु डब्लू0एम0एम0 एवं जी0एस0बी0 कार्य की औसत मुटाई प्रावधान से कम पाये जाने के आरोप के संबंध में पाया गया कि प्राक्कलन के अनुसार जी0एस0बी0 का कार्य चौड़ीकरण एवं Raised portion में तथा डब्लू0एम0एम0 का कार्य पूरी चौड़ाई में करने का प्रावधान था। इस कारण जी0एस0बी0 कार्य की मुटाई मध्य भाग में जाँच पदाधिकारी द्वारा अंकित नहीं किया गया है। जी0एस0बी0 एवं डब्लू0एम0एम0 कार्य की औसत मुटाई प्रावधान से काफी कम पाया गया है। इस आलोक में श्री लोकेश, कार्यपालक अभियंता से इस बिन्दु पर प्राप्त स्पष्टीकरण मान्य नहीं है। अतएव सम्यक रूप से विचारोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में श्री रवि प्रकाश लोकेश, कार्यपालक अभियंता को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (ii) असंचयात्मक रूप से एक वार्षिक वेतनवृद्धि पर रोक ।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।23 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 22 नवम्बर 2013 सं0 निग/सारा-2 (बोर्ड)-06/03-8946 (एस) मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार अन्तर्गत कार्यान्वित योजनाओं की जाँच मंत्रिमंडल निगरानी विभाग द्वारा कर उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन के आधार पर नगर विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से प्राप्त आरोप प्रपत्र-'क' एवं अनुशंसा के आलोक में मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (वर्त्तमान में विघटित) अन्तर्गत प्राधिकार (वर्तमान में विघटित) अंतर्गत पीयर से रामपुर दयाल पथ का उन्नयन कार्य भाग-2 एवं रामचंद्रा चौक से मनियारी जाने वाली पथ का उन्नयन कार्य से संबंधित योजना कार्य में बरती गयी निम्न अनियमितताओं यथा-कार्य प्रारंभ करने से पूर्व प्री-सेक्शन की मापी, किये जा रहे एवं किये गए कार्यों की मापी तथा चेकिंग पूरी निष्ठा से नहीं किये जाने, मापी-पुस्त की जाँच नियमानुसार नहीं किये जाने, योजना निर्धारित अवधि में पूर्ण होने के बावजूद किसी भी योजना का अन्तिम विपत्र नहीं बनाने एवं विभागीय कार्य में सामग्रियों का क्रय नियमानुसार निविदा या कोटेशन प्राप्त कर नहीं किये जाने के आरोप के लिए श्री सच्चिदानन्द सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार सम्प्रति सेवानिवृत, ग्राम-ब्रहमपुरा, नाजिर फ्लैट के उत्तर, पो0-एम0आई0टी0, मुजफ्फरपुर से विभागीय पत्रांक-7243 (एस) दिनांक 24. 06.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री सिंह ने अपने स्पष्टीकरण पत्रांक-शून्य दिनांक 12.07.11 में मूल रूप में निम्न बातें कही है यथा- वर्णित दोनों योजनाओं में पूर्व में किये गये ईंट सोलिंग पर मेटलिंग वर्क कराया गया है जिसमें प्री-सेक्शन की मापी लेना संभव नहीं था। किये गये कार्यों की मापी एवं जाँच पूरी निष्ठा से की गयी। तत्पश्चात भुगतान हेतु प्रशासी विभाग को लिखा गया। पूरी निष्ठा से कार्यों की जाँच मापी पुस्त से की जाती थी जाँचोपरांत ही मापी पुस्त में हस्ताक्षर किया जाता था। योजनाओं में कार्य समाप्ति पश्चात अंतिम विपत्र कनीय अभियंता द्वारा समर्पित किया गया, जिसकी जाँच की गयी। जाँचोपरांत कार्यपालक अभियंता के यहाँ भेजा गया। वर्णित दोनों योजनाओं में कार्य संवेदक द्वारा कराया गया है। किसी भी सामग्रियों की आपूर्ति नहीं ली गई थी दोनों की निविदा दिनांक 31.10.99 इंडियन नेशन एवं 05.11.99 दैनिक हिन्दुस्तान द्वारा आमंत्रित किया गया था। उक्त के साथ श्री सिंह ने यह भी अंकित किया है कि विषयांकित मामले में उनके विरूद्ध बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी) प्रभावी नहीं होता है। उक्त आधार पर श्री सिंह द्वारा आरोप मुक्त करने का अनुरोध किया गया। 3.श्री सिंह से प्राप्त स्पष्टीकरण के तकनीकी समीक्षोपरांत तकनीकी पदाधिकारी द्वारा श्री सिंह के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य होने का मंतव्य दिया गया। तदआलोक में श्री सच्चिदानन्द सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार सम्प्रति सेवानिवृत, ग्राम-ब्रहमपुरा, नाजिर फ्लैट के उत्तर, पो0-एम0आई0टी0, मुजफ्फरपुर को विषयांकित प्रकरण में आरोप मुक्त करने का निर्णय लिया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 29 जनवरी 2014 सं0 निग/सारा-4 (पथ) आरोप-67/2013-799 (एस)—श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल खगड़िया सम्प्रति अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, पथ अंचल पूर्णिया-सह-प्रभारी कार्यपालक अभियंता, राज्य उच्च पथ प्रमंडल, पूर्णिया के विरूद्ध आर्थिक अपराध ईकाई, बिहार, पटना के द्वारा आय के ज्ञात स्रोतो से अधिक सम्पत्ति भ्रष्ट क्रियाकलापों के द्वारा अर्जित करने के लिए आर्थिक अपराध थाना कांड सं0-25/13 दिनांक 27.06.2013 धारा 13 (2) सहपठित धारा 13 (1) (ई) भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम दर्ज किया गया। पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध ईकाई-2, बिहार से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार श्री सिंह द्वारा चल एवं अचल सम्पत्ति तथा दायित्वों की विवरणी में कई तथ्यों की सही जानकारी नही देते हुए सम्पत्ति को छिपाने का प्रयास किया गया है। श्री सिंह का यह कृृत्य सरकारी सेवक आचार नियमावली के विरूद्ध कदाचारपूर्ण एवं अस्वच्छ आचरण का द्योतक है, जिसके लिए श्री सत्येन्द्र कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) एवं (ग) के तहत तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया जाता है। 2. निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्तों के तहत इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। 3. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख का कार्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है। 4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु अलग से आरोप पत्र निर्गत किया जा रहा है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से,

(ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 3 अक्तूबर 2013 सं0 निग/विरा-लोका-03/99-7894 (एस)—श्री शंकर प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल गोड्‌डा सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य अंचल, नालन्दा द्वारा पथ प्रमंडल गोड्‌डा के पदस्थापन काल में ललमटिया डायभर्सन के निर्माण में राविस ढुलाई के मद में संवेदक को अतिरेक भुगतान करने जैसी अनियमितता के मामले में लोकायुक्त कार्यालय के पत्रांक-2253 दिनांक 07.08.03 से लोकायुक्त अधिनियम 1974 की धारा 12 (3) के तहत प्राप्त24 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 अनुशंसा पर समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-8461 (एस) अनु0 दि0-31.07.09 द्वारा माननीय लोकायुक्त के जांच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए श्री सिंह से स्पष्टीकरण की मांग की गयी तथा प्राप्त स्पष्टीकरण पर समीक्षोपरांत संवेदक को अतिरिक्त भुगतान करने के आरोप को प्रमाणित मानते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-10642 (एस) दिनांक 29.09.09 द्वारा दंड संसूचित किया गया था जिसे श्री सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर याचिका सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-17889/09 में दि0-10.03.2010 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में अधिसूचना संख्या-8625 (एस) दिनांक 09.06.10 द्वारा निरस्त (set aside) किया गया तथा सम्पूर्ण मामलों के समीक्षोपरांत पाया गया कि :-

(i) श्री सिंह 17 वें चालू विपत्र से सम्बद्ध रहे जिसमें कुल ` 2,14,500.00 का भुगतान हुआ जिसमें से राविस ढुलाई मद में ` 1,00,813.00 का विपत्र प्रविष्ट है। इसके विरूद्ध श्री सिंह के द्वारा ` 60,000.00 की राशि रोके जाने की अनुशंसा के बाद भी प्रमंडलीय कार्यालय द्वारा भुगतान कर दिया गया। इस प्रकार श्री सिंह द्वारा उक्त मद में ` 40,813.00 की भुगतान की अनुशंसा की गयी।

(ii) कनीय अभियंता द्वारा राविस ढुलाई मद में 17 वें चालू विपत्र ` 1,00,813.00 का record मापी की गयी जिससे श्री सिंह संतुष्ट नहीं थे तो अतिरिक्त मापी में कमी कर दी जाती जिससे कार्यपालक अभियंता का कार्यालय मात्र ` 1,54,500.00 का ही विपत्र पारित करता, परन्तु श्री सिंह द्वारा ऐसा नहीं किया गया। इस प्रकार श्री सिंह को राविस ढुलाई मद में `1,00,813.00 के अतिरेक भुगतान के लिए जिम्मेवार पाते हुए विभागीय पत्रांक-12752 (एस) दिनांक 11.12.12 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री सिंह के पत्रांक-40 दिनांक 22.01.13 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा सारतः उल्लेख किया गया कि माननीय लोकायुक्त द्वारा गठित आरोप संख्या-4 इसी बिन्दु से संबंधित था जो `60,000.00 राविस ढुलाई की राशि जिसकी भुगतान के अनुशंसा उनके द्वारा नहीं की गयी, अपितु रोक रखी गयी थी, जिसकी मापी कनीय अभियंता द्वारा मापी पुस्त में अंकित की गयी थी। माननीय लोकायुक्त के प्रतिवेदन की कंडिका-20 में उक्त राशि को रोके जाने के निर्णय को माननीय लोकायुक्त द्वारा सही मानते हुए आरोप संख्या-4 से मुक्त किया गया था। साथ ही उनके द्वारा यह भी उल्लेख किया गया कि विभाग द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण की कंडिका-ख की अवधारणा सही नहीं है। 3. श्री सिंह द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि बिहार सरकार, लोक निर्माण विभाग पत्र संख्या-ए2/नियम-11/77, लो0नि0 19591 दिनांक 03.10.1977 द्वारा कीप बैक की व्यवस्था समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। अतः सहायक अभियंता द्वारा `60,000.00 की राशि राविस ढुलाई मद में कीप बैक करना/रोके रखना उचित नहीं है। यदि सहायक अभियंता राविस ढुलाई मद में अधिक मापी से असंतुष्ट थे तो अतिरिक्त मापी को मापी पुस्तिका में उनके द्वारा मान्य नहीं किया जना चाहिये था। उनके द्वारा प्रमंडलीय कार्यालय में भुगतान हेतु उतनी ही मात्रा का अग्रसारण किया जाना चाहिए था जिससे वे संतुष्ट थे। इससे प्रमंडलीय कार्यालय द्वारा अधिक भुगतान नहीं होता। इस प्रकार श्री सिंह के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए संवेदक को `1,00,813.00 के अतिरेक भुगतान के लिए दोषी पाया गया। तदनुसार सरकार द्वारा निम्न निर्णय लिया जाता है :- (i) इनसे `1,00,813.00 (एक लाख आठ सौ तेरह रूपये) की वसूली की जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 7 फरवरी 2014 सं0 निग/सारा-मुक0-03/2010-1042 (एस)—श्री शिवेन्द्र पासी, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, केन्द्रीय पथ अंचल, पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, डेहरी-ऑन-सोन के विरूद्ध केन्द्रीय पथ अंचल, पटना के पदस्थापन काल के दौरान नई राजधानी पथ प्रमण्डल अन्तर्गत पटना शहर के अन्दर पार्किग, ह्‌यूम पाईप ड्रेन, फुटपाथ एवं एंगल डे्रन रोड साईनेज आदि कार्यो के लिए ई-टेन्डर से बचने के निमित जान-बूझ कर विभागीय निदेश के विपरित एक पथ का एक प्राक्कलन न बनाकर एक पथ को कई टूकड़ों में विभक्त कर योजना की राशि 25.00 लाख रूपये से कम रखते हुए सृजित 45 योजनाओं की स्वीकृति देने के आरोप के लिए संकल्प ज्ञापांक-8746 (एस) दिनांक 03.08.11 द्वारा विभागीय कार्रवाई संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में श्री पासी के विरूद्ध गठित आरोप को अंशतः प्रमाणित माना गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवदेन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-13318 (एस) दिनांक 31.12.12 द्वारा श्री पासी से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। 2. श्री पासी अधीक्षण अभियंता के पत्रांक-शून्य दिनांक 23.01.2013 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा के बचाव में प्रायः उन्ही बातों का उल्लेख किया गया जो उन्होंने पूर्व के बचाव-बयान एवं संचालन पदाधिकारी को उपलब्ध कराया था। इसके अतिरिक्त श्री पासी द्वारा यह कहा गया कि एक पथ के लिए एक प्राक्कलन पथ प्रमण्डल तथा अवर प्रमण्डल के लिए प्राक्कलन संबंधी आदेश प्रभावहीन हो गये है, क्योंकि पथ निर्माण विभाग के संकल्प ज्ञापांक-2676 दिनांक 15.05.2005 के माध्यम से निर्गत लोक निर्माण संहिता के संशाधनोपरान्त पूर्व के निर्गत कार्यपालक आदेश का प्रभाव अगस्त-2005 से समाप्त होने का उल्लेख उक्त संकल्प के कंडिका-6 में है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपनी परिकल्पना के आधार पर बिना किसी ठोस साक्ष्य एवं तथ्य के आधार पर स्वीकृत 45 योजनाओं का regrouping कर उन्हं मात्र 21 योजनओं में सीमित किया गया है।25 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 3. श्री पासी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा के समीक्षोपरान्त पाया गया कि संचालन पदाधिकारी का जाँच प्रतिवेदन पूर्णतः विवेचित है, जिसमें आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित बताया गया है। श्री पासी द्वारा द्वितीय कारण-पृच्छा में अंकित विभागीय संकल्प-2676 दिनांक 15.05.2005 के माध्यम से निर्गत संशोधन के संबंध में पाया गया कि पथ निर्माण विभाग के पत्रांक-3071 दिनांक 22.08.2006 द्वारा निर्गत मार्ग निर्देश की कंडिका-12 (ख) में अंकित है कि ''सभी कार्य निविदा के माध्यम से एक पथ एक प्राक्कलन एवं एक निविदा के तहत किया जाना है।'' इसी प्रकार पथ निर्माण विभाग के पत्रांक-3314 (एस) दिनांक 27.03.06 द्वारा निर्गत मार्ग निदेश की कंडिका-5 में अंकित है कि ''गैर योजना मद में लिये जाने वाले पथ के अन्तर्गत प्रत्येक पथ का एक प्राक्कलन तथा एक निविदा होगा।'' उक्त निदेश दिनांक 15.05.2005 के बाद का है। अतः इसकी मान्यता समाप्त नहीं होती है। इस प्रकार स्पष्ट है कि श्री पासी अधीक्षण अभियंता द्वारा सरकार के निदेश का उल्लघंन करते हुये अपने पद एवं अधिकार का दुरूपयोग किया गया है।

उक्त आधार पर श्री पासी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण-पृच्छा को मान्य नहीं पाते हुये ''एक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक एवं निंदन'' की शास्ति पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-9441 (एस) दिनांक 09.12. 13 द्वारा बिहार लेाक सेवा आयोग से परामर्श/सहमति की मांग की गयी। 4. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2337 दिनांक 27.01.14 द्वारा उपलब्ध कराये गये मंतव्य में निन्दन की सजा वृहत शास्ति की श्रेणी मेें नहीं आने के कारण विभाग स्तर पर ही निर्णय लिया जाना अपेक्षित होने का मंतव्य देते हुए एक वार्षिक वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोके जाने के दंड पर सहमति व्यक्त की गयी। सराकर द्वारा निर्णित दण्ड एवं इसपर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त मन्तव्य के आलोक में श्री शिवेन्द्र पासी, अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, डेहरी-ऑन-सोन के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरेाप के लिए उन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) निन्दन (वर्ष 2010)। (ii) एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर संचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 27 दिसम्बर 2013 सं0 निग/सारा-9 (आरोप)-103/2010-9940 (एस)—श्री सुनील कुमार सिन्हा, सहायक अभियंता (अनुश्रवण), राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मोतिहारी के विरूद्ध सहायक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, सिमडेगा के पदस्थापन काल से संबंधित मामले में दर्ज सी0बी0आई0 कांड संख्या-आर0सी0-16 (ए)/2009 (आर0) में दिनांक 11.02.2013 को उन्हें हिरासत में लिया गया तथा बिरसा मुंडा, केन्द्रीय कारा, राँची भेजा गया। इस संबंध में अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अचंल, मुजफ्फरपुर के पत्र ज्ञापांक-369 दिनांक 04.05.13 से प्राप्त सूचना के अनुसार श्री सिन्हा, सहायक अभियंता दिनांक 11.02.2013 से 15.04.2013 तक काराधीन थे। तद्‌आलोक में सरकार के निर्णयानुसार श्री सुनील कुमार सिन्हा, सहायक अभियंता को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 9 (2)(क) के तहत्‌ काराधीन अवधि दिनांक 11.02.2013 से 15.04.2013 तक के लिए निलंबित किया जाता है। 2. उक्त निलंबन अवधि के लिए श्री सिन्हा, सहायक अभियंता को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम 10 में निहित प्रावधान के तहत्‌ जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 11 जुलाई 2013 सं0 निग/सारा-1 (मुख्या॰) आरोप-74/2013-5566 (एस)—श्री सुरेन्द्र कुमार मेहता, सहायक अभियन्ता, मुख्यालय निरूपण अंचल, बिहार, पटना की प्रतिनियुक्ति कार्यालय आदेश संंख्या-121 सह-पठित ज्ञापांक-5118 (एस0) दिनांक 28.06.2013 द्वारा सम्भावित बाढ़ के मद्‌देनजर गठित विभागीय बाढ़ प्रबन्धन कोषांग में दिनांक 09.07.2013 से 15.07. 2013 तक के लिए प्रातः 7.00 बजे से अपराह्‌न 12.00 बजे तक की पाली के लिए किया गया । दिनांक 11.07.2013 को प्रातः 8.45 बजेेे एवं 9.15 बजे बाढ़ प्रबंधन कोषांग का किये गये औचक निरीक्षण में श्री मेहता अनुपस्थित पाये गये । बाढ़ प्रबन्धन जैसे अति महम्वपूर्ण कार्य हेतु प्रतिनियुक्ति की अनदेखी करते हुए अपने कत्र्तव्य से अनुपस्थित रहने का श्री मेहता का यह कृत्य उनकी घोर लापरवाही एवं कत्र्तव्य के प्रति उदासीनता का द्योतक है जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3 (1) (i) (ii) का स्पष्ट उल्लंधन है, जिसके लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत श्री सुरेन्द्र कुमार मेहता, सहायक अभियन्ता, मुख्यालय निरूपण अंचल, बिहार, पटना को तात्कालिक प्रभाव से निलंबित किया जाता है । 2. निलंबन अवधि के दौरान बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 10 के अध्याधीन शर्तों के तहत इन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।26 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 3. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय कार्यपालक अभियंता का कार्यालय, पथ प्रमंडल किशनगंज निर्धारित किया जाता है। 4. इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु अलग से आरोप पत्र निर्गत किया जा रहा है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 16 दिसम्बर 2013 सं0 निग/सारा-9-71/2001-9629 (एस)—श्री सुरेश रविदास, तत्कालीन कनीय अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, बरही सम्प्रति सहायक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-2, सोनपुर, सारण के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, बरही से संबंधित सी0बी0आई0 कांड संख्या-आर0सी0-9 (ए)/97 डी0 में सी0बी0आई0 से प्राप्त अनुशंसा के आलोक में तेल कम्पनी के चलान के बदले ट्रांसपोर्टर के चालान पर बल्क बिटुमिन प्राप्त किये जाने के आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-1967 (एस) दिनांक 12.03.03 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री रविदास के पत्रांक-शून्य दिनांक 25.04.13 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया कि किसी भी स्तर से उन्हें यह निदेश प्राप्त नहीं था कि बल्क बिटुमिन की प्राप्ति तेल कम्पनी के चलान पर करना है, प्राप्त की गयी वास्तविक बिटुमिन की मात्रा माह जुलाई-1995 के स्थल लेखा में प्रविष्टि की गयी जिसका समायोजन अवर प्रमंडल लेखा तथा प्रमंडल के लेखा में ससमय किया गया। सी0बी0आई0 के प्रतिवेदन में भी किसी प्रकार की गड़बड़ी का उल्लेख नहीं है मात्र बिटुमिन प्राप्ति के बिन्दु पर प्रक्रियात्मक आपत्ति की गयी है। 3. श्री रविदास द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री रविदास ने ट्रांसपोर्टर के चलान पर बिटुमिन प्राप्त किया था जबकि उन्हें आपूर्तिकर्त्ता के चालान पर बिटुमिन प्राप्त करना चाहिए था। स्पष्टतः उनके द्वारा प्रक्रियात्मक अनियमितता बरती गयी है जिसके लिए सम्यक्‌ रूप से विचारोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में श्री सुरेश रविदास, सहायक अभियंता को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

——— 26 जून 2013 सं0 निग/सारा-9 (आरोप)-75/2011-5073 (एस)—श्री यज्ञ नारायण मिश्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ सम्प्रति निलंबित के कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल के दौरान सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 29.11.2011 को राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ अंतर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-30 ए का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के क्रम में पाया गया कि फतुहाँ-दनियावाँ सेक्शन में 0 से 11 किलोमीटर में पथ की स्थिति अच्छी नहीं थी, जबकि उक्त पथ Defect liability period में होने तथा मुख्यालय से लगातार निदेश दिये जाने के बावजूद Defect liability period के शर्त्त का अनुपालन नहीं कराया गया था, किलोमीटर 13 (नबीचक) एवं किलोमीटर 14 (फरीदपुर) के पास 2.1 किलोमीटर के स्ट्रेच में पथ की स्थिति भयावह पायी गयी, इसके अतिरिक्त इस पथ में अवस्थित नव निर्मित पुलों के पहुँच पथ का निर्माण कार्य भी काफी धीमा पाया गया। निरीक्षण क्रम में पाये गये उक्त अनियमितताओं के लिए श्री मिश्र को अधिसूचना संख्या-13211 (एस) दिनांक 01.12.11 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-14211 (एस) दिनांक 27.12.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में गठित आरोप को 3 अंशों में विभक्त करते हुए आरोप अंश जो नव निर्मित पुलों के पहँच पथ का निर्माण कार्य अत्यंत धीमा होने से संबंधित था को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त आंशिक प्रमाणित आरोप के लिए संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-8986 (एस) दिनांक 14.08.12 द्वारा श्री मिश्र से द्वितीय कारण पृच्छा एवं पत्रांक-3455 (एस) दिनांक 02.05.13 द्वारा निलंबन अवधि को, इस अवधि के लिए मात्र जीवन निर्वाह भत्ताा का भुगतान किये जाने के रूप में विनियमित करने के संबंध में अभ्यावेदन की मांग की गयी। 3. श्री मिश्र के पत्रांक-शून्य दिनांक 27.08.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में उनके द्वारा सारतः निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-

(i) एफ0डी0आर0 मद अन्तर्गत उपलब्ध कराए गए आवंटन के आधार पर कार्य को कराने के लिए चार समूहों में प्रमंडल द्वारा अल्पकालीन निविदा निर्गत की गयी थी। दिनांक 23.11.11 को निर्गत औपबंधिक कार्यादेश के विरूद्ध सभी समूहों के संबंधित संवेदकों द्वारा दिनांक 23.11.11 को हीं कार्य प्रारंभ किया गया तथा कार्य समाप्ति की अवधि पच्चीस दिन थी।

(ii) संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने विश्लेषण में कार्य के प्रगति के संदर्भ में इस बिन्दु पर विचार नहीं किया जा सका कि किसी कार्य संपादन में प्रथम चरण में कार्य की प्रगति अन्य चरणों की अपेक्षा कम होती है। कार्य में वास्तविक गति प्रारंभिक चरण में पूर्ण व्यवस्था हो जाने के उपरांत आगामी चरणों में हो पाती है।27 (cid:18)बहार गजट, 10 िसत(बर 2014 (iii) दिनांक 29.11.11 को माननीय मुख्यमंत्री की यात्रा के कारण दोपहर तक कार्य बाधित रहा जिसके कारण उक्त तिथि को प्रगति धीमी रही। सुरक्षा कारणों से स्थानीय पुलिस द्वारा मजदूरों को कार्य से हटा देेने के कारण कम मजदूरों को देखा गया तथा सचिव द्वारा कि0मी0 22 एवं 23 में चल रहे पुल कार्य का निरीक्षण नहीं किया जा सका।

(iv) कार्य को 25 दिनों के अंदर समाप्त करने के लिए चार खण्डों में चरणवद्ध योजना तैयार की गयी थी और तदनुसार दिनांक 17.12.11 तक कार्य ससमय पूरा किया जा सका। दिनांक 29.11.11 तक 75 प्रतिशत non- bituminous कार्य तथा 10 प्रतिशत bituminous कार्य करा लिया गया था। 4. श्री मिश्र के पत्रांक-शून्य दिनांक 10.05.13 द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में समर्पित अभ्यावेदन में उनके द्वारा कमोवेश उन्हीं तथ्यों का उल्लेख किया गया जिसका उल्लेख उनके द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में किया गया। 5. श्री मिश्र द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत पाया गया कि सचिव द्वारा निरीक्षण की तिथि 29.11. 11 के पश्चात 30.11.11 तक किये गये कार्य और उसके विरूद्ध ली गयी मापी में एकरारनामा के अनुसार विभिन्न मदों में निर्धारित मात्रा के विरूद्ध कि0मी0 22 एवं 23 में अवस्थित पुलों के पहुँच पथ में ही डब्लू0एम0एम0 कार्य पूर्ण किया गया था जबकि कि0मी0 3, 5 एवं 8 एवं कि0मी0 9 में डब्लू0एम0एम0 का भी कार्य पूर्ण नहीं किया गया। कि0मी0 3 एवं 5 तथा 8 में Prime coat, BUSG, Tack coat में मात्र किन्चित काम पाया गया। शेष कि0मी0 9, 22 एवं 23 में इन मदों में कोई भी काम किया हुआ नहीं पाया गया। इसके अतिरिक्त किसी भी पुल के पहुँच पथ में बी0एम0 तथा एस0डी0बी0सी0 का कार्य नहीं कराया गया था। यह श्री मिश्र के lack of supervision एवं lack of proper monitoring को दर्शाता है। इस प्रकार श्री यज्ञ नारायण मिश्र, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति निलंबित का द्वितीय कारण पृच्छा एवं अभ्यावेदन मान्य नहीं पाते हुए सम्यक रूप से विचारोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में इन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-

(i) इनकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है। 6. श्री मिश्र को निलंबन अवधि के लिए जीवन यापन भत्ता के अतिरिक्त कोई वेतनादि देय नहीं होगा, परन्तु यह अवधि कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि मानी जायेगी।

7. निलंबन से मुक्त होने के उपरांत श्री मिश्र अपना योगदान मुख्यालय, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना में समर्पित करेंगे।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह0) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 10 September 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-09-10.37/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-09-10.37.