िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40
(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 9999 आ(cid:30)(cid:31)नआ(cid:30)(cid:31)नआ(cid:30)(cid:31)नआ(cid:30)(cid:31)न 1931931931936666 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 40404040 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ————————
1111 अ)तूअ)तूअ)तूअ)तूबरबरबरबर 2014201420142014 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)3, पदःथापन, बदली, श(cid:18)3, छु 9ट(cid:15) और अ;य <य(cid:18)3गत सूचनाएं। 2-12 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु@मB के समादेंटाओं के आदेश।
---
भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Jाओं के पर(cid:15)Jा-फल, कायLबम, छाऽवृ(cid:18)O ूदान, आPद।
---
भाग-1-ग—िशJा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Jाफल आPद ---
भाग-2—(cid:18)बहार-राQयपाल और कायाLRयJB (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आPद। 13-17 भाग-3—भारत सरकार, प(cid:30)Sम बंगाल सरकार और उUच ;यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राQय गजटB के उWरण। ---
भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---
पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ)त (cid:18)वधान मंडल मZ उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Pकये जानेवाले ूवर सिमितयB के ूितवेदन और उ)त (cid:18)वधान मंडल मZ पुर:ःथापन के पूवL ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-7—संसद के अिधिनयम (cid:30)जनपर रांशपित क] Qयेंठ अनुमित िमल चुक] है। ---
भाग-8—भारत क] संसद मZ पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयB के ूितवेदन और संसद मZ उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयB के ूितवेदन और संसद मZ पुर:ःथापन के पूवL ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---
भाग-9—(cid:18)व_ापन
---
भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क] नीलामी संबंधी सूचनाएं ---
भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प`रवहन सूचनाएं, ;यायालय सूचनाएं और सवLसाधारण सूचनाएं इaयाPद। ---
पूरक
---
पूरक-क 18-632 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014
भागभागभागभाग----1111
िनयु(cid:18)3िनयु(cid:18)3िनयु(cid:18)3िनयु(cid:18)3, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)3श(cid:18)3श(cid:18)3श(cid:18)3, , , , छु 9ट(cid:15)छु 9ट(cid:15)छु 9ट(cid:15)छु 9ट(cid:15) और अ;य और अ;य और अ;य और अ;य वैय(cid:18)3क सूचनाएं वैय(cid:18)3क सूचनाएं वैय(cid:18)3क सूचनाएं वैय(cid:18)3क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
योजना एवं विकास विभाग
———
अधिसूचनाएं
5 सितम्बर 2014
सं॰ यो0स्था01/4-2/12/4003/यो0वि0—योजना एवं विकास विभाग, बिहार, पटना के प्रषासनिक नियंत्रणाधीन विभिन्न जिला योजना कार्यलयों में पदस्थापित निम्नलिखित जिला योजना पदाधिकारी को प्रषासनिक दृष्टिकोण एवं कार्यहित में स्थानांतरित करते हुए कॉलम 4 में अंकित स्थान पर अगले आदेष तक के लिए पदस्थापित किया जाता हैः-
| क्र0 | पदाधिकारी का नाम | वर्त्तमान पदस्थापन स्थान | स्थानांतरण के फलस्वरूप पदस्थापन स्थान/जिला |
| 1 | 2 | 3 | 4 |
| 1 | श्री आषुतोष कुमार सिन्हा | जिला योजना कार्यालय, बेगुसराय | जिला योजना कार्यालय, गया |
| 2 | श्री मुनेष्वर चौधरी | जिला योजना कार्यालय, बक्सर | जिला योजना कार्यालय, सीतामढ़ी |
| 3 | श्री बबन कुमार | जिला योजना कार्यालय, सीतामढ़ी | जिला योजना कार्यालय, बेगुसराय |
| 4 | श्री प्रेम प्रकाष | जिला योजना कार्यालय, गया सम्प्रति प्रतिनियुक्त बिहार राज्य योजना पर्षद, पटना | वरीय अनुसंधान पदाधिकारी, बिहार राज्य योजना पर्षद, पटना |
2. उपर्युक्त स्थानांतरित पदाधिकारी अविलंब पद का प्रभार सौंप कर अधिसूचित पद का प्रभार ग्रहण करेंगे एवं प्रभार प्रतिवेदन अविलंब विभाग को उपलब्ध करायेगें।
3. स्थानांतरित पदाधिकारी माह सितम्बर, 2014 का वेतन नव पदस्थापित स्थान से प्राप्त करेंगे। 4. यह आदेष तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से,
पंकज कुमार, सचिव।
——— 12 सितम्बर 2014 सं॰ यो01/स्था012-55/2012-4174/यो0वि0—ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-13072 दिनांक 25. 08.2011 द्वारा सेवा प्राप्त श्री श्याम किशोर प्रसाद, कार्यपालक अभियंता सम्प्रति स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमण्डल-2, पुपरी, सीतामढ़ी की सेवा प्रशासनिक कारणों से इनके मूल विभाग पथ निर्माण विभाग को वापस की जाती है। 2. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से,
पंकज कुमार, सचिव।
———
वाणिज्य-कर विभाग
———
अधिसूचनाएं
15 सितम्बर 2014
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4134/वा0कर-श्री प्रभात कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी, केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो, पटना सम्प्रति प्रतिनियुक्त कर्मनाषा जॉच चौकी की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4135/वा0कर-श्री राज किषोर साह, वाणिज्य-कर पदाधिकारी, मगध प्रमंडल, अन्वेषण ब्यूरो, गया की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।3 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4136/वा0कर-श्री मकेष्वर शर्मा, वाणिज्य-कर पदाधिकारी, समस्तीपुर अंचल, समस्तीपुर की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4137/वा0कर-श्री सुधीर कुमार पूर्वे, वाणिज्य-कर पदाधिकारी सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुए अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, पटना उत्तरी अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4138/वा0कर-श्री अब्दुल्लाह अंसारी, वाणिज्य-कर पदाधिकारी सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, खगड़िया की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुए अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, बेगुसराय अंचल, बेगुसराय के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4139/वा0कर-श्री संजय कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी मुख्यालय, बिहार, पटना को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, समेकित जॉच चौकी, रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4140/वा0कर-श्री आलोक कुमार पंकज, वाणिज्य-कर पदाधिकारी सीवान अंचल, सीवान को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, समेकित जॉच चौकी, रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4141/वा0कर-श्री वकील प्रसाद यादव, वाणिज्य-कर पदाधिकारी मगध प्रमंडल, अन्वेषण ब्यूरो, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, समेकित जॉच चौकी, दालकोला, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4142/वा0कर-श्री ध्रुव नारायण साहू, वाणिज्य-कर पदाधिकारी पटना उत्तरी अंचल, पटना को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4143/वा0कर-श्री प्रमोद कुमार सुमन, वाणिज्य-कर पदाधिकारी गॉधी मैदान अंचल, पटना को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, समेकित जॉच चौकी, कर्मनाषा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4144/वा0कर-श्री अजीत कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी बेगुसराय अंचल, बेगुसराय को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, समेकित जॉच चौकी, जलालपुर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4145/वा0कर-श्री राम प्रकाष सिन्हा, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, रजौली, नवादा को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, अन्वेषण ब्यूरो, पटना पष्चिमी प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4146/वा0कर-श्री विरेन्द्र कुमार सिंह, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, रजौली, नवादा को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, कदम कुऑ अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4147/वा0कर-श्री मनोज कुमार साह, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, रजौली, नवादा को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, झंझारपुर अंचल, झंझारपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4148/वा0कर-श्री मुस्तर अकरम, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, रजौली, नवादा को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, जमुई अंचल, जमुई के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4149/वा0कर-श्री राजेन्द्र सहनी, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, मोतिहारी अंचल, मोतिहारी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4150/वा0कर-श्री ललित कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, बक्सर अंचल, बक्सर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4151/वा0कर-श्री जफीर आलम, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, सासाराम अंचल, सासाराम के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4152/वा0कर-श्री युगल किषोर भारतीय, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, पटना सिटी पूर्वी अंचल, पटना सिटी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4153/वा0कर-श्री राम प्रवेष सहनी, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, भभुआ अंचल, भभुआ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।4 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4154/वा0कर-श्री नरेन्द्र प्रताप सिंह, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, हाजीपुर अंचल, हाजीपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4155/वा0कर-श्री शषि कान्त चतुर्वेदी, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, गोपालगंज अंचल, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4156/वा0कर-श्री संजय कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, फारबिसगंज अंचल, फारबिसगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4157/वा0कर-श्री सुरेन्द्र प्रसाद, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, लखीसराय अंचल, लखीसराय के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4158/वा0कर-श्री कुमार शैलेन्द्र, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, तेघड़ा अंचल, तेघड़ा के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4159/वा0कर-श्री रवि रंजन आलोक, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, डोभी, गया को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, दानापुर अंचल, दानापुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4160/वा0कर-श्री मनीष कुमार बिहारी, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, जलालपुर, गोपालगंज को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, जहानाबाद अंचल, जहानाबाद के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4161/वा0कर-श्री मजीद अहमद, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, जलालपुर, गोपालगंज को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, गया अंचल, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4162/वा0कर-श्री आमीर नैय्यर, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, जलालपुर, गोपालगंज को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, बाढ़ अंचल, बाढ़ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4163/वा0कर-श्री हरेन्द्र कुमार मांझी, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, जलालपुर, गोपालगंज को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, पटना पूर्वी प्रमंडल, अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4164/वा0कर-श्री अखिलेष कुमार मिश्र, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, दालकोला, पूर्णियॉ को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, सीवान अंचल, सीवान के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4165/वा0कर-श्री निरंजन कुमार सिन्हा, वाणिज्य-कर पदाधिकारी अन्वेषण ब्यूरो, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा सम्प्रति प्रतिनियुक्त समेकित जॉच चौकी, दालकोला, पूर्णियॉ को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, सहरसा अंचल, सहरसा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013- 4166/वा0कर-श्री सुरेन्द्र कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, कर्मनाषा को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, सीवान अंचल, सीवान के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4167/वा0कर-श्री अनिल कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी, अंकेक्षण कार्यालय, भागलपुर सम्प्रति प्रतिनियुक्त समेकित जॉच चौकी, कर्मनाषा को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, सारण अंचल, छपरा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4168/वा0कर-श्रीमती रूबी, वाणिज्य-कर पदाधिकारी, पटना विषेष अंचल, पटना को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, गॉधी मैदान अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं॰ 6/प0प0-30-04/2013- 4169/वा0कर-श्री अमरेन्द्र कुमार पाण्डेय, वाणिज्य-कर पदाधिकारी, मुख्यालय, बिहार, पटना को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, दरभंगा अंचल, दरभंगा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4170/वा0कर-श्री अनुप कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी समेकित जॉच चौकी, दालकोला, पूर्णियॉ को अगले आदेष तक स्वयं के बिमारी के अभ्यावेदन के आधार पर वाणिज्य-कर पदाधिकारी, अंकेक्षण कार्यालय, पटना पष्चिमी प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-04/2013-4171/वा0कर-श्री नरेष कुमार, वाणिज्य-कर पदाधिकारी झंझारपुर अंचल, झंझारपुर को अगले आदेष तक वाणिज्य-कर पदाधिकारी, अंकेक्षण कार्यालय, दरभंगा के पद पर पदस्थापित किया जाता है। 2. पदाधिकारी जिनका स्थानान्तरण/पदस्थापन अभ्यावेदन के आधार पर किया गया है उन्हें स्थानान्तरण भत्ता देय नहीं होगा।
3. यह आदेष तत्काल प्रभाव से लागू होगा।5 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 4. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, जय प्रकाष ठाकुर, अवर सचिव।
———
15 सितम्बर 2014
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4172/वा0कर-श्री ज्योतिन्द्र कुमार, वाणिज्य-कर उपायुक्त, आर्थिक अन्वेषण ईकाई, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (प्रभारी), पटना उत्तरी अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4173/वा0कर-श्री किषोर कुमार सिन्हा, वाणिज्य-कर उपायुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (प्रभारी), पटना मध्य अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4174/वा0कर-श्री नन्द किषोर सिंह, वाणिज्य-कर उपायुक्त, आर्थिक अन्वेषण ईकाई, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (प्रभारी), कटिहार अंचल, कटिहार के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4175/वा0कर-श्री मृणाल कुमार, वाणिज्य-कर उपायुक्त, प्रषिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (प्रभारी), पूर्णियॉ अंचल, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4176/वा0कर-श्री सुनील कुमार सिंह, वाणिज्य-कर उपायुक्त, प्रषिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (प्रभारी), बेगुसराय अंचल, बेगुसराय के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4177/वा0कर-श्री सच्चिदानन्द शर्मा, वाणिज्य-कर उपायुक्त, आर्थिक अन्वेषण ईकाई, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (प्रभारी), बेतिया अंचल, बेतिया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4178/वा0कर-श्री कमलेष कुमार विभूति, वाणिज्य-कर उपायुक्त, प्रषिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (प्रभारी), मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल, मुजफ्फरपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4179/वा0कर-श्री श्यामा कान्त झा, वाणिज्य-कर उपायुक्त, किषनगंज अंचल, किषनगंज को प्रषासनिक कारणों से स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (अंकेक्षण), तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4180/वा0कर-श्री प्रकाष चन्द्र झा, वाणिज्य-कर उपायुक्त, प्रषिक्षण प्रकोष्ठ, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त (प्रभारी), किषनगंज अंचल, किषनगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4181/वा0कर-श्री सुबोध राम, वाणिज्य-कर उपायुक्त-सह मुख्य वित्त पदाधिकारी, बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन परियोजना, बिहार, पटना की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये वाणिज्य-कर उपायुक्त, प्रषिक्षण कोषांग, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-02/2013-4182/वा0कर-श्री मोती लाल, वाणिज्य-कर उपायुक्त, समेकित जॉच चौकी रजौली, नवादा को उनके अभ्यावेदन के आधार पर स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर उपायुक्त, अंकेक्षण, पटना पूर्वी प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
2. पदाधिकारी जिनका स्थानान्तरण/पदस्थापन अभ्यावेदन के आधार पर किया गया है उन्हें स्थानान्तरण भत्ता देय नहीं होगा।
3. यह आदेष तत्काल प्रभाव से लागू होगा। 4. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, जय प्रकाष ठाकुर, अवर सचिव।
———
15 सितम्बर 2014
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4183/वा0कर-श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिंह, वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना अतिरिक्त प्रभार केन्द्रीय प्रमंडल (प्रषासन), बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रषासन), केन्द्रीय प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4184/वा0कर-श्री राजीव कुमार, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, प्रभारी, बेतिया अंचल, बेतिया को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रषासन), पटना पष्चिमी प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।6 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4185/वा0कर-श्री प्रधान नरेष कुमार लाल, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, प्रभारी, पटना मध्य अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रषासन), पूर्णियॉ प्रमंडल, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4186/वा0कर-श्री अयोध्या पासवान, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, प्रभारी, कटिहार अंचल, कटिहार को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (प्रषासन), दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4187/वा0कर-श्री कुमार उदय शंकर श्रीवास्तव, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4188/वा0कर-श्री राजेष कुमार श्रीवास्तव, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, प्रभारी, पूर्णियॉ अंचल, पूर्णियॉ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4189/वा0कर-डा0 रविरंजन सहाय, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, प्रभारी, बेगुसराय अंचल, बेगुसराय को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-419़0/वा0कर-श्री मार्कण्डेय ओझा, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, प्रभारी, मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल, मुजफ्फरपुर को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4191/वा0कर-श्री विष्वनाथ पासवान, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, समेकित जॉच चौकी रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4192/वा0कर-श्री दीपक शरण सिन्हा, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अपील) केन्द्रीय प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4193/वा0कर-श्री विनोद पाठक, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अंकेक्षण) पूर्णियॉ प्रमंडल, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4194/वा0कर-श्री अनिल कुमार दास, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, प्रभारी, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त (अंकेक्षण) दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4195/वा0कर-श्री संजय कुमार मांवडिया, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-01/2013-4196/वा0कर-श्री पाण्डेय संतोष कृष्ण सहाय, नव प्रोन्नत वाणिज्य-कर संयुक्त आयुक्त, सम्प्रति लेखा पदाधिकारी, बिहार भवन, नई दिल्ली की सेवा अगले आदेष तक के लिये लेखा पदाधिकारी, बिहार भवन, नई दिल्ली में पदस्थापन हेतु मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
2. यह आदेष तत्काल प्रभाव से लागू होगा। 3. उक्त में सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, जय प्रकाष ठाकुर, अवर सचिव।
———
15 सितम्बर 2014
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4197/वा0कर-श्री विजय कुमार आजाद, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी, रजौली, नवादा की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4198/वा0कर-श्री मोहम्मद शाहिक, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, हाजीपुर अंचल, हाजीपुर की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4199/वा0कर-श्री देवानन्द शर्मा, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।7 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4200/वा0कर-मो0 असदुज्जमॉ, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, कटिहार अंचल, कटिहार की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4201/वा0कर-श्री क्यामुल हक अंसारी, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी, जलालपुर, गोपालगंज की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4202/वा0कर-श्री संजय कुमार प्रसाद, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, जहानाबाद अंचल, जहानाबाद की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4203/वा0कर-श्री जय शंकर सिंह, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, मुख्यालय, बिहार, पटना सम्प्रति प्रतिनियुक्त समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4204/वा0कर-श्री मोहन कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, भागलपुर अंचल, भागलपुर की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4205/वा0कर-श्री विजय कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पूर्णियॉ अंचल, पूर्णियॉ की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4206/वा0कर-श्री कमल किषोर चौधरी, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, औरंगाबाद अंचल, औरंगाबाद की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4207/वा0कर-श्री प्रमोद कुमार, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, सीतामढ़ी अंचल, सीतामढ़ी की सेवा अगले आदेष तक कोषागार पदाधिकारी अथवा भविष्य निधि पदाधिकारी के पद पर पदस्थापन हेतु वित्त विभाग, बिहार, पटना को सौपी जाती है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4208/वा0कर-श्री सत्येन्द्र कुमार सिन्हा, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, भविष्य निधि निदेषालय, पंत भवन, बिहार, पटना की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना विषेष अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4209/वा0कर-श्री नीरज कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, भविष्य निधि निदेषालय, पंत भवन, बिहार, पटना की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना विषेष अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4210/वा0कर-श्री विरेन्द्र कुमार मंडल, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, पूर्णियॉ की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समस्तीपुर अंचल, समस्तीपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4211/वा0कर-श्री सुबोध कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, सचिवालय कोषागार, विकास भवन, पटना की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना पष्चिमी अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4212/वा0कर-श्री राजेष कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, पटना समाहरणालय, पटना की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, पटना पष्चिमी प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4213/वा0कर-श्री दिवाकर प्रसाद, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, सारण की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना दक्षिणी अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4214/वा0कर-श्री मुद्रिका प्रसाद वर्णवाल, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, भागलपुर की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पूर्णियॉ अंचल, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।8 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4215/वा0कर-श्री सुनील कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, रोहतास की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, किषनगंज अंचल, किषनगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4216/वा0कर-श्रीमती शीला प्रतिमा कुजूर, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति उप-कोषागार पदाधिकारी, पटना सिटी की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अंकेक्षण, पटना पूर्वी प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4217/वा0कर-श्री उदयन मिश्र, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, भविष्य निधि निदेषालय, पंत भवन, बिहार, पटना की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4218/वा0कर-श्रीमती सीमा भारती, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, सिचाई भवन, पटना की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पाटलीपुत्रा अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4219/वा0कर-डा0 दिनकर प्रसाद, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त सम्प्रति कोषागार पदाधिकारी, निर्माण भवन, पटना की सेवा वित्त विभाग, बिहार, पटना से वापस लेते हुये अगले आदेष तक वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना उत्तरी अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4220/वा0कर-श्री इन्द्र नारायण झा, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, कटिहार अंचल, कटिहार को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, वसूली कोषांग, तिरहुत प्रमंडल के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4221/वा0कर-श्री सुग्रीव महतो, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, भभुआ अंचल, भभुआ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4222/वा0कर-श्री जलेष्वर प्रसाद, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, कदमकुऑ अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4223/वा0कर-श्री संजीव कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पाटलीपुत्र अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4224/वा0कर-श्री मंहथ बैठा, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, गया अंचल, गया को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4225/वा0कर-श्री देवेन्द्र प्रसाद दिनकर, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मोतिहारी अंचल, मोतिहारी को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4226/वा0कर-श्री राजेन्द्र कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना सिटी पष्चिमी अंचल, पटना सिटी को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4227/वा0कर-श्री अमर नाथ चौधरी, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, फारबिसगंज अंचल, फारबिसगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4228/वा0कर-मो0 जाकीर अली अंसारी, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, बक्सर अंचल, बक्सर को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4229/वा0कर-श्री शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, हाजीपुर अंचल, हाजीपुर को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।9 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4230/वा0कर-श्री अनिल कुमार सिंह विधार्थी, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, गॉधी मैदान अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4231/वा0कर-श्री पुर्णेदु कुमार झा, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, बगहा अंचल, बगहा को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4232/वा0कर-श्री नवीन कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, कदमकुऑ अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4233/वा0कर-श्री श्रवण कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, भागलपुर को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4234/वा0कर-श्री निषिथ कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, गोपालगंज अंचल, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4235/वा0कर-श्री शषि भानू, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पूर्णियॉ अंचल, पूर्णियॉ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4236/वा0कर-श्री तेज कुमार कुजूर, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, दरभंगा अंचल, दरभंगा को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4237/वा0कर-श्री चौधरी राम नरेष राय, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मधेपुरा अंचल, मधेपुरा को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4238/वा0कर-श्री रविन्द्र कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना दक्षिणी अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4239/वा0कर-श्री राम बाबू सिंह, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, गया अंचल, गया को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4240/वा0कर-श्री राजेन्द्र कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल, मुजफ्फरपुर को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4241/वा0कर-श्री विनय कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, बेगुसराय अंचल, बेगुसराय को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4242/वा0कर-श्री विनोद कुमार सिंह, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना दक्षिणी अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4243/वा0कर-श्री गोपीचंद सिंह, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पाटलीपुत्रा अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4244/वा0कर-श्री सिरिल बेक, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, गोपालगंज अंचल, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।10 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4245/वा0कर-श्री रष्मि कुमार सिंह, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, हाजीपुर अंचल, हाजीपुर को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4246/वा0कर-श्री राज किषोर प्रसाद, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, दरभंगा अंचल, दरभंगा को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4247/वा0कर-श्री पंकज कुमार सिन्हा, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, गोपालगंज अंचल, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4248/वा0कर-श्री राम किषोर प्रसाद, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, लखीसराय अंचल, लखीसराय को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4249/वा0कर-श्री सौरभ कुमार सिंह, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, भागलपुर अंचल, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4250/वा0कर-श्री रिपुंजय झा, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना मध्य अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4251/वा0कर-श्री रंजीत कुमार सिन्हा, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना दक्षिणी अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4252/वा0कर-श्री शंकर शर्मा, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना सिटी पूर्वी अंचल, पटना सिटी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4253/वा0कर-श्री रविन्द्र कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, हाजीपुर अंचल, हाजीपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4254/वा0कर-श्री संदीप कुमार सिंह, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अंकेक्षण, तिरहुत प्रमंडल के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4255/वा0कर-श्री उमेष कुमार सिंह, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी जलालपुर, गोपालगंज को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त प्रभारी, झंझारपुर अंचल, झंझारपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4256/वा0कर-श्री राधा मोहन राय, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, दरभंगा अन्वेषण ब्यूरो प्रतिनियुक्त समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, सारण अंचल, छपरा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4257/वा0कर-श्री पंकज कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, सासाराम अंचल, सासाराम के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4258/वा0कर-श्री गोपाल कुमार अग्रवाल, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, दरभंगा अंचल, दरभंगा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4259/वा0कर-श्री दुर्गा प्रसाद मंडल, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, भागलपुर अन्वेषण ब्यूरो प्रतिनियुक्त समेकित जॉच चौकी दालकोला, पूर्णियॉ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, शाहाबाद अंचल, आरा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।11 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4260/वा0कर-श्री अषोक चंद श्रीवास्तव, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुजफ्फरपुर पूर्वी अंचल, मुजफ्फरपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4261/वा0कर-मो0 मोइनुद्दीन, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, कटिहार अंचल, कटिहार के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4262 /वा0कर-श्री दीपक राज, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना सिटी पष्चिमी अंचल, पटना सिटी के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4263/वा0कर-श्री कृष्णकान्त यादवेन्दु, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, सीवान अंचल, सीवान के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4264/वा0कर-श्री बिनोद कुमार झा, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4265/वा0कर-श्री अजय कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4266/वा0कर-श्री अषोक कुमार यादव, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी कर्मनाषा, भभुआ को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त (प्रभारी), लखीसराय अंचल, लखीसराय के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4267/वा0कर-श्री रति लाल गणेष, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी रजौली, नवादा को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, गया अंचल, गया के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4268/वा0कर-श्री प्रीतम कुमार सिंह, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, गोपालगंज अंचल, गोपालगंज के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4269/वा0कर-श्री उपेन्द्र प्रसाद, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, भागलपुर अंचल, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4270/वा0कर-श्री चंदन कुमार, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी डोभी, गया को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, भागलपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4271/वा0कर-श्री प्रवीण कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पाटलीपुत्रा अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4272/वा0कर-श्री दीपक कानन, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, सासाराम अंचल, सासाराम को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4273/वा0कर-श्री अजिताभ मिश्र, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पटना सिटी पूर्वी अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4274/वा0कर-श्री अनुप कुमार, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, पाटलीपुत्रा अंचल, पटना को स्थानान्तरित करते हुये अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।12 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4275/वा0कर-श्री अनिल कुमार पाण्डेय, नवप्रोन्नत वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, मुख्यालय, बिहार, पटना को सेवानिवृति छः माह के भीतर होने के कारण अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4276/वा0कर-श्री अभिमन्यु सिंह, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, (पदस्थापन की प्रतिक्षा में) को अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अंकेक्षण, केन्द्रीय प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4277/वा0कर-श्री बृज किषोर सिंह, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त (प्रभारी), झंझारपुर अंचल, झंझारपुर को प्रषासनिक आधार पर अगले आदेष तक के लिये वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, समेकित जॉच चौकी, रजौली, नवादा के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4278/वा0कर-श्रीमती सरिता सिन्हा, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अंकेक्षण, तिरहुत प्रमंडल के अभ्यावेदन के आधार पर वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, कदमकुऑ अंचल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4279/वा0कर-श्री कुमार आन्नद प्रकाष, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, सहरसा अंचल, सहरसा के अभ्यावेदन के आधार पर वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अंकेक्षण, पटना पष्चिमी प्रमंडल, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
सं॰ 6/प0प0-30-03/2013-4280/वा0कर-श्री प्रषान्त कुमार झा, वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, अन्वेषण ब्यूरो, मगध प्रमंडल से प्राप्त अभ्यावेदन के आधार पर वाणिज्य-कर सहायक आयुक्त, मुख्यालय, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
2. पदाधिकारी जिनका स्थानान्तरण/पदस्थापन अभ्यावेदन के आधार पर किया गया है उन्हें स्थानान्तरण भत्ता देय नहीं होगा।
3. यह आदेष तत्काल प्रभाव से लागू होगा। 4. प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, जय प्रकाष ठाकुर, अवर सचिव।
——— अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 28ÑÑÑÑ571+100----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।।
Website: http://egazette.bih.nic.in
13 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014भागभागभागभाग----2222
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राQयराQयराQयराQयपाल और कायाLRयपाल और कायाLRयपाल और कायाLRयपाल और कायाLRयJB (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJB (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJB (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJB (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , , अिधसूचनाएं और िनयम आPद।अिधसूचनाएं और िनयम आPद।अिधसूचनाएं और िनयम आPद।अिधसूचनाएं और िनयम आPद।
ÑÑÑÑÑ मुख्य अभियन्ता (उत्तर) का कार्यालय नलकूप प्रभाग, लघु जल संसाधन-विभाग, मुजफ्फरपुर। ——— कार्यालय आदेष 12 जुलाई 2014 सं॰ स्था0-3, बी-विविध-06/13-562—सरकार के अवर सचिव, लघु सिंचाई विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-1661 दिनांक 02.04.07 में निहित सरकार के आदेष के अनुपालन में स्व0 लाल प्रसाद सिंह भूतपूर्व नलकूप चालक, नलकूप प्रमण्डल, दरभंगा के आश्रित पुत्र श्री संतोश कुमार को नलकूप प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के अन्तर्गत पदचर के रिक्त पद पर अस्थायी रूप से वेतनमान 5200-20200 ग्रेड पे0 1800 रूपये तथा सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अन्य भत्तों के साथ अनुकम्पा के आधार पर औपबधिक रूप से नियुक्त किया जाता है, जिसे बिना कारण बताये रद्द् किया जा सकता है।
2. श्री संतोश कुमार पत्र प्रप्ति के 15 दिनों के अन्दर निष्चित रूप से अपने नव नियुक्त पद पर योगदान देंगे। योगदान के समय इन्हें किसी असैनिक शल्य चिकित्सक/जिला चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा प्रदत्त स्वास्थता प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, विवाह में तिलक दहेज का लेन-देन नहीं करना, न्यायालय में सजा प्राप्ति नहीं होने ,न्यायालय में फौजदारी मुकदमा लम्बित नहीं रहने तथा स्व0 लाल प्रसाद सिंह के परिवार के आश्रित सदस्यों का भरण-पोशण करने संबंधी अद्यतन शपथ-पत्र आदि मूल कागजात कार्यपालक अभियन्ता नलकूप प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाँच कार्यपालक अभियन्ता करेगे तथा इसे सही पाये जाने पर ही योगदान स्वीकृत किया जायेगा।
3. शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र, मृत्यु प्रमाण-पत्र/जिला अनुकम्पा समिति द्वारा अनुषंसित पत्र का सत्यापन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
4. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 का कंडिका-1 (ख) के अनुसार मृत सरकारी सेवक की नियुक्ति स्वीकृति पद के विरूद्ध विधिवत की गई थी, का सत्यापन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
5. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 की कंडिका-7 के अनुसार नियुक्त किये जा रहे व्यक्ति के विरूद्ध यदि मृतक सरकारी सेवक के आश्रित परिवार के भरण-पोशण में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जायेगी तो नियुक्ति पदाधिकारी द्वारा पृच्छा प्राप्त कर इनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। इस संबंध में श्री संतोश कुमार को योगदान के समय वर्णित अनुदेष के अनुरूप एक घोशणा पत्र भी कार्यपालक अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसे कार्यपालक अभियन्ता श्री संतोश कुमार की सेवा पुस्तिका में दर्ज कर सुरक्षित रखेगे।
6. गलत तथ्यों अथवा कागजातों के आधार पर नियुक्ति होने की सूचना अगर बाद में प्राप्त होती है तो किसी भी समय कारण पृच्छा नोटिस देते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी।
7. तिलक दहेज नहीं लेने और न देने संबंधी एक घोशणा पत्र भी नियुक्ति किये जा रहे व्यक्ति कार्यपालक अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
8. यह नियुक्ति रोस्टर व्यवस्था के आरक्षित बिन्दु के विरूद्ध पड़ता है तो उसे अग्रणीत कर लिया जायेगा।
9. योगदान करने हेतु श्री संतोश कुमार को यात्रा भत्ता देय नहीं होगा। 10 वित विभाग के संकल्प सं॰ 1964 दिनांक 31.08.05 में निहित अंषदायी पेंषन योजना संबंधी प्रावधान लागू होगें।
आदेश से, एन0 पासवान, मुख्य अभियन्ता (उत्तर)।14 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 12 जुलाई 2014 सं॰ स्था0-3, बी-विविध-06/14-566—सरकार के अवर सचिव, लघु सिंचाई विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-1661 दिनांक 02.04.07 में निहित सरकार के आदेष के अनुपालन में स्व0 बचनदेव सिंह भूतपूर्व नलकूप चालक, नलकूप प्रमण्डल, बेगुसराय के आश्रित पुत्र श्री मनोज कुमार को नलकूप प्रमंडल, खगडिया के अन्तर्गत पदचर के रिक्त पद पर अस्थायी रूप से वेतनमान 5200-20200 ग्रेड पे0 1800 रूपये तथा सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अन्य भत्तों के साथ अनुकम्पा के आधार पर औपबधिक रूप से नियुक्त किया जाता है, जिसे बिना कारण बताये रद्द् किया जा सकता है।
2. श्री मनोज कुमार पत्र प्रप्ति के 15 दिनों के अन्दर निष्चित रूप से अपने नव नियुक्त पद पर योगदान देंगे। योगदान के समय इन्हें किसी असैनिक शल्य चिकित्सक/जिला चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा प्रदत्त स्वास्थता प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, विवाह में तिलक दहेज का लेन-देन नहीं करना, न्यायालय में सजा प्राप्ति नहीं होने ,न्यायालय में फौजदारी मुकदमा लम्बित नहीं रहने तथा स्व0 बचनदेव सिंह के परिवार के आश्रित सदस्यों का भरण-पोशण करने संबंधी अद्यतन शपथ-पत्र आदि मूल कागजात कार्यपालक अभियन्ता नलकूप प्रमंडल, खगडिया के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाँच कार्यपालक अभियन्ता करेगे तथा इसे सही पाये जाने पर ही योगदान स्वीकृत किया जायेगा।
3. शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र, मृत्यु प्रमाण-पत्र/जिला अनुकम्पा समिति द्वारा अनुषंसित पत्र का सत्यापन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
4. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 का कंडिका-1 (ख) के अनुसार मृत सरकारी सेवक की नियुक्ति स्वीकृति पद के विरूद्ध विधिवत की गई थी, का सत्यापन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
5. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 की कंडिका-7 के अनुसार नियुक्त किये जा रहे व्यक्ति के विरूद्ध यदि मृतक सरकारी सेवक के आश्रित परिवार के भरण-पोशण में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जायेगी तो नियुक्ति पदाधिकारी द्वारा पृच्छा प्राप्त कर इनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। इस संबंध में श्री मनोज कुमार को योगदान के समय वर्णित अनुदेष के अनुरूप एक घोशणा पत्र भी कार्यपालक अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसे कार्यपालक अभियन्ता श्री मनोज कुमार की सेवा पुस्तिका में दर्ज कर सुरक्षित रखेगे।
6. गलत तथ्यों अथवा कागजातों के आधार पर नियुक्ति होने की सूचना अगर बाद में प्राप्त होती है तो किसी भी समय कारण पृच्छा नोटिस देते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी।
7. तिलक दहेज नहीं लेने और न देने संबंधी एक घोशणा पत्र भी नियुक्ति किये जा रहे व्यक्ति कार्यपालक अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
8. यह नियुक्ति रोस्टर व्यवस्था के आरक्षित बिन्दु के विरूद्ध पड़ता है तो उसे अग्रणीत कर लिया जायेगा।
9. योगदान करने हेतु श्री मनोज कुमार को यात्रा भत्ता देय नहीं होगा। 10 वित विभाग के संकल्प सं॰ 1964 दिनांक 31.08.05 में निहित अंषदायी पेंषन योजना संबंधी प्रावधान लागू होगें।
आदेश से, एन0 पासवान, मुख्य अभियन्ता (उत्तर)।
——— 26 जुलाई 2014 सं॰ स्था0-3, बी-21/13-622—सरकार के अवर सचिव, लघु सिंचाई विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-1661 दिनांक 02.04.07 में निहित सरकार के आदेष के अनुपालन में स्व0 रामायण राय भूतपूर्व नलकूप चालक नलकूप प्रमण्डल, मोतिहारी के आश्रित पुत्र श्री अजय कुमार को नलकूप अंचल, पूर्णिया के अन्तर्गत निम्न वर्गीय लिपिक के रिक्त पद पर अस्थायी रूप से वेतनमान 5200-20200, ग्रे0 पे0 1900 रूपये तथा सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अन्य भत्तों के साथ अनुकम्पा के आधार पर औपबधिक रूप से नियुक्त किया जाता है, जिसे बिना कारण बताये रद्द् किया जा सकता है।
2. श्री अजय कुमार पत्र प्रप्ति के 15 दिनों के अन्दर निष्चित रूप से अपने नव नियुक्त पद पर योगदान देंगे। योगदान के समय इन्हें किसी असैनिक शल्य चिकित्सक/जिला चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा प्रदत्त स्वास्थता प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, विवाह में तिलक दहेज का लेन-देन नहीं करना, न्यायालय में सजा प्राप्ति नहीं होने ,न्यायालय में फौजदारी मुकदमा लम्बित नहीं रहने तथा स्व0 रामायण राय के परिवार के आश्रित सदस्यों का भरण-पोशण करने संबंधी अद्यतन शपथ-पत्र आदि मूल कागजात अधीक्षण अभियन्ता नलकूप अंचल, पूर्णिया के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाँच अधीक्षण अभियन्ता करेगे तथा इसे सही पाये जाने पर ही योगदान स्वीकृत किया जायेगा।
3. शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र, मृत्यु प्रमाण-पत्र/जिला अनुकम्पा समिति द्वारा अनुषंसित पत्र का सत्यापन अधीक्षण अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।15 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 4. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 का कंडिका-1 (ख) के अनुसार मृत सरकारी सेवक की नियुक्ति स्वीकृति पद के विरूद्ध विधिवत की गई थी, का सत्यापन अधीक्षण अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
5. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 की कंडिका-7 के अनुसार नियुक्त किये जा रहे व्यक्ति के विरूद्ध यदि मृतक सरकारी सेवक के आश्रित परिवार के भरण-पोशण में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जायेगी तो नियुक्ति पदाधिकारी द्वारा पृच्छा प्राप्त कर इनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। इस संबंध में श्री अजय कुमार को योगदान के समय वर्णित अनुदेष के अनुरूप एक घोशणा पत्र भी अधीक्षण अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसे अधीक्षण अभियन्ता श्री अजय कुमार की सेवा पुस्तिका में दर्ज कर सुरक्षित रखेगे।
6. गलत तथ्यों अथवा कागजातों के आधार पर नियुक्ति होने की सूचना अगर बाद में प्राप्त होती है तो किसी भी समय कारण पृच्छा नोटिस देते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी।
7. तिलक दहेज नहीं लेने और न देने संबंधी एक घोशणा पत्र भी नियुक्ति किये जा रहे व्यक्ति अधीक्षण अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
8. यह नियुक्ति रोस्टर व्यवस्था के आरक्षित बिन्दु के विरूद्ध पड़ता है तो उसे अग्रणीत कर लिया जायेगा।
9. इन्हें छः माह के अन्दर कम्प्युटर टाईपिंग का ज्ञान आवष्यक है अन्यथा इनकी नियुक्ति समाप्ति हेतु कारवाई की जायेगी।
10 योगदान करने हेतु श्री अजय कुमार को यात्रा भत्ता देय नहीं होगा। 11 वित विभाग के संकल्प सं॰ 1964 दिनांक 31.08.05 में निहित अंषदायी पेंषन योजना संबंधी प्रावधान लागू होगें।
आदेश से, एन0 पासवान, मुख्य अभियन्ता (उत्तर)।
——— 26 जुलाई 2014 सं॰ स्था0-3, बी-विविध-01/14-623—सरकार के अवर सचिव, लघु सिंचाई विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-1661 दिनांक 02.04.07 में निहित सरकार के आदेष के अनुपालन में स्व0 अजीत नारायण सिंह भूतपूर्व नलकूप चालक, नलकूप प्रमण्डल, दरभंगा के आश्रित पुत्र श्री रौषन कुमार सिंह को नलकूप प्रमंडल, समस्तीपुर के अन्तर्गत पदचर के रिक्त पद पर अस्थायी रूप से वेतनमान 5200-20200 ग्रेड पे0 1800 रूपये तथा सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अन्य भत्तों के साथ अनुकम्पा के आधार पर औपबधिक रूप से नियुक्त किया जाता है, जिसे बिना कारण बताये रद्द् किया जा सकता है।
2. श्री रौषन कुमार सिंह पत्र प्राप्ति के 15 दिनों के अन्दर निष्चित रूप से अपने नव नियुक्त पद पर योगदान देंगे। योगदान के समय इन्हें किसी असैनिक शल्य चिकित्सक/जिला चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा प्रदत्त स्वास्थता प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, विवाह में तिलक दहेज का लेन-देन नहीं करना , न्यायालय में सजा प्राप्ति नहीं होने ,न्यायालय में फौजदारी मुकदमा लम्बित नहीं रहने तथा स्व0 अजीत नारायण सिंह के परिवार के आश्रित सदस्यों का भरण-पोशण करने संबंधी अद्यतन शपथ-पत्र आदि मूल कागजात कार्यपालक अभियन्ता नलकूप प्रमंडल, समस्तीपुर के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाँच कार्यपालक अभियन्ता करेगे तथा इसे सही पाये जाने पर ही योगदान स्वीकृत किया जायेगा।
3. शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र, मृत्यु प्रमाण-पत्र/जिला अनुकम्पा समिति द्वारा अनुषंसित पत्र का सत्यापन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
4. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 का कंडिका-1 (ख) के अनुसार मृत सरकारी सेवक की नियुक्ति स्वीकृति पद के विरूद्ध विधिवत की गई थी, का सत्यापन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
5. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 की कंडिका-7 के अनुसार नियुक्त किये जा रहे व्यक्ति के विरूद्ध यदि मृतक सरकारी सेवक के आश्रित परिवार के भरण-पोशण में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जायेगी तो नियुक्ति पदाधिकारी द्वारा पृच्छा प्राप्त कर इनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। इस संबंध में श्री रौषन कुमार सिंह को योगदान के समय वर्णित अनुदेष के अनुरूप एक घोशणा पत्र भी कार्यपालक अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसे कार्यपालक अभियन्ता श्री रौषन कुमार सिंह की सेवा पुस्तिका में दर्ज कर सुरक्षित रखेगे।
6. गलत तथ्यों अथवा कागजातों के आधार पर नियुक्ति होने की सूचना अगर बाद में प्राप्त होती है तो किसी भी समय कारण पृच्छा नोटिस देते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी।
7. तिलक दहेज नहीं लेने और न देने संबंधी एक घोशणा पत्र भी नियुक्ति किये जा रहे व्यक्ति कार्यपालक अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।16 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 8. यह नियुक्ति रोस्टर व्यवस्था के आरक्षित बिन्दु के विरूद्ध पड़ता है तो उसे अग्रणीत कर लिया जायेगा।
9. योगदान करने हेतु श्री रौषन कुमार सिंह को यात्रा भत्ता देय नहीं होगा। 10 वित विभाग के संकल्प सं॰ 1964 दिनांक 31.08.05 में निहित अंषदायी पेंषन योजना संबंधी प्रावधान लागू होगें।
आदेश से, एन0 पासवान, मुख्य अभियन्ता (उत्तर)।
——— 18 जून 2014 सं॰ स्था0-3, बी-विविध-21/11-470—सरकार के अवर सचिव, लघु सिंचाई विभाग, बिहार, पटना का पत्रांक-1661 दिनांक 02.04.07 में निहित सरकार के आदेष के अनुपालन में स्व0 सुदर्षन प्रसाद यादव भूतपूर्व आदेषपाल, नलकूप प्रमण्डल, खगडिया के आश्रित पुत्री सुश्री ममता कुमारी को नलकूप प्रमंडल, खगडिया के अन्तर्गत पदचर के रिक्त पद पर अस्थायी रूप से वेतनमान 4440-7440, ग्रेड पे0 1650 रूपये तथा सरकार द्वारा समय-समय पर स्वीकृत अन्य भत्तों के साथ अनुकम्पा के आधार पर औपबधिक रूप से नियुक्त किया जाता है, जिसे बिना कारण बताये रद्द् किया जा सकता है।
2. सुश्री ममता कुमारी पत्र प्रप्ति के 15 दिनों के अन्दर निष्चित रूप से अपने नव नियुक्त पद पर योगदान देंगे। योगदान के समय इन्हें किसी असैनिक शल्य चिकित्सक/जिला चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा प्रदत्त स्वास्थता प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र, विवाह में तिलक दहेज का लेन-देन नहीं करना , न्यायालय में सजा प्राप्ति नहीं होने ,न्यायालय में फौजदारी मुकदमा लम्बित नहीं रहने तथा स्व0 सुदर्षन प्रसाद यादव के परिवार के आश्रित सदस्यों का भरण-पोशण करने संबंधी अद्यतन शपथ-पत्र आदि मूल कागजात कार्यपालक अभियन्ता नलकूप प्रमंडल, खगडिया के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसकी जाँच कार्यपालक अभियन्ता करेगे तथा इसे सही पाये जाने पर ही योगदान स्वीकृत किया जायेगा।
3. शैक्षणिक योग्यता प्रमाण-पत्र, मृत्यु प्रमाण-पत्र/जिला अनुकम्पा समिति द्वारा अनुषंसित पत्र का सत्यापन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
4. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 का कंडिका-1 (ख) के अनुसार मृत सरकारी सेवक की नियुक्ति स्वीकृति पद के विरूद्ध विधिवत की गई थी, का सत्यापन कार्यपालक अभियन्ता द्वारा कर ली जायेगी।
5. कार्मिक एवं प्रषसनिक सुधार विभाग का परिपत्र संख्या-13293 दिनांक 05.10.91 की कंडिका-7 के अनुसार नियुक्त किये जा रहे व्यक्ति के विरूद्ध यदि मृतक सरकारी सेवक के आश्रित परिवार के भरण-पोशण में किसी प्रकार की त्रुटि पाई जायेगी तो नियुक्ति पदाधिकारी द्वारा पृच्छा प्राप्त कर इनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। इस संबंध में सुश्री ममता कुमारी को योगदान के समय वर्णित अनुदेष के अनुरूप एक घोशणा पत्र भी कार्यपालक अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जिसे कार्यपालक अभियन्ता सुश्री ममता कुमारी की सेवा पुस्तिका में दर्ज कर सुरक्षित रखेगे।
6. गलत तथ्यों अथवा कागजातों के आधार पर नियुक्ति होने की सूचना अगर बाद में प्राप्त होती है तो किसी भी समय कारण पृच्छा नोटिस देते हुए उनकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी।
7. तिलक दहेज नहीं लेने और न देने संबंधी एक घोशणा पत्र भी नियुक्ति किये जा रहे व्यक्ति कार्यपालक अभियन्ता के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
8. यह नियुक्ति रोस्टर व्यवस्था के आरक्षित बिन्दु के विरूद्ध पड़ता है तो उसे अग्रणीत कर लिया जायेगा।
9. योगदान करने हेतु सुश्री ममता कुमारी को यात्रा भत्ता देय नहीं होगा। 10 वित विभाग के संकल्प सं॰ 1964 दिनांक 31.08.05 में निहित अंषदायी पेंषन योजना संबंधी प्रावधान लागू होगें।
आदेश से, एन0 पासवान, मुख्य अभियन्ता (उत्तर)।
——— पथ निर्माण विभाग ——— अधिसूचना (शुद्धि पत्र) 18 फरवरी 2014
सं॰ निग/सारा-2 (परिवाद)-4/2012-1365 (एस)—श्री बीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना सम्प्रति निलंबित को अधीक्षण अभियंता के तकनीकी17 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना के पदस्थापन काल में सचिव के समक्ष गलत बयानी कर भ्रमित करने का प्रयास एवं कार्य के प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारित जैसी बरती गयी अनियमितता के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-2637 (एस) दिनांक 07.03.12 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5731 (एस) अनु0 दिनांक 24.05.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत निर्गत विभागीय अधिसूचना संख्या-990 एस) दिनांक 06.02.14 को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए श्री बीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना सम्प्रति निलंबित को निलंबन से मुक्त करते हुए इनकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया जाता है। 2. निलंबन से मुक्त होने के उपरांत इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना का कार्यालय निर्धारित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
3 जुलाई 2014
सं0 निग/सारा-4 (पथ) लोका0-08/07-5945(एस)—पथ निर्माण विभाग के अधिसूचना संख्या-5453 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-5454 (एस) दिनांक 26.06.14 में अंकित विभागीय अधिसूचना संख्या-13317 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-13318 दिनांक 05.02.11 के स्थान पर विभागीय अधिसूचना संख्या-13317 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-13318 (एस) दिनांक 05.12.11 पढ़ा जाय।
2. विभागीय अधिसूचना संख्या-5453 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-5454 (एस) दिनांक 26.06.14 को इस हद तक संशोधित समझा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 10 जुलाई 2014 सं0 निग/सारा-6 (आरोप) द0बि0 (ग्रा0)-41/07 (फोल्डर-1)-6212 (एस)—पथ निर्माण विभाग के अधिसूचना संख्या-5024 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-5025 (एस) दिनांक 18.06.14 में श्री अशोक कुमार सिंह, सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, गोह प्रखंड, औरंगाबाद सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, पूर्व बिहार पथ अंचल, मुजफ्फरपुर के स्थान पर श्री अशोक कुमार सिंह, सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, गोह प्रखंड, औरंगाबाद सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, पूर्व बिहार पथ अंचल, भागलपुर पढ़ा जाय।
2. विभागीय अधिसूचना संख्या-5024 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-5025 (एस), दिनांक 18.06.14 इस हद तक संशोधित समझा जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 28ÑÑÑÑ571+100----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।।
Website: http://egazette.bih.nic.in
18 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट
काकाकाका
पूरकपूरकपूरकपूरक((((अअअअ0000))))
ूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशतूािधकार(cid:15) (cid:24)ारा ूकािशत
ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ
xzkeh.k dk;Z foHkkx
———
अधिसूचनाएं
6 अगस्त 2014
सं0 2/ अ0प्र0-2-50/14-2596—श्री रामचन्द्र शर्मा, तदेन कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-1, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल-1, भोजपुर को आर्थिक अपराध थाना कांड सं॰-14/2013 दिनांक 29.05.2013, धारा 13(2) सह पठित धारा 13(1) (ई) भ्र॰नि॰अधि॰ 1988 के अंतर्गत आय से अधिक सम्पति अर्जित करने के आरोप में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2006 के नियम 9 (i)(ग) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
2. निलंबन अवधि में इनको बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 10(1) के अंतर्गत जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
3. निलंबन के अवधि में इनका मुख्यालय अभियंता प्रमुख का कार्यालय, ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया जाता है।
4. श्री शर्मा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही हेतु आदेष अलग से निर्गत किया जा रहा है। प्रस्ताव पर माननीय मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, काषीनाथ सिंह, विषेष सचिव।
——— 8 अगस्त 2014 सं॰ 3/ अ0प्र0-1-521/14-2657—श्री अषोक कुमार चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, पतरघट प्रखंड, सहरसा को बारह हजार रूपये रिष्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाने के कारण निगरानी थाना कांड सं॰ 130/07 दिनांक 08.12.2007 दर्ज किया गया। उक्त आलोक में श्री चौधरी को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत दिनांक 07.12.2007 से 18.02.2008 तक न्यायिक हिरासत में बितायी गयी अवधि के लिए निलंबित किया गया। जमानत मिलने के उपरान्त श्री चौधरी द्वारा न्यायिक हिरासत से मुक्त होकर दिनांक 19.02.2008 के पूर्वाह्न में उप विकास आयुक्त, सहरसा के कार्यालय में योगदान दिया।
2. योगदान देने के पष्चात विभाग द्वारा श्री चौधरी के विरूद्ध आपराधिक मामला लंबित रहने के कारण बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 9(1)(ग) के तहत अगले आदेष तक निलंबित किया गया।
3. श्री चौधरी के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र 'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही चलाने हेतु पथ निर्माण विभाग (पैतृक विभाग) से अनुरोध किया गया। विधि विभाग के आदेष सं॰ 4979 दिनांक 09.12.2009 द्वारा श्री चौधरी के विरूद्ध अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गयी।19 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 4. पथ निर्माण विभाग के संकल्प सं॰ 2374 दिनांक 18.02.2010 द्वारा श्री चौधरी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चलाने हेतु अधीक्षण अभियंता अनुश्रवण, पथ निर्माण विभाग को संचालन पदाधिकारी नामित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षा के आधार पर पुनः संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन वापस करते हुए विभागीय कार्यवाही का विधिवत संचालन कर आरोपवार मंतव्य देने का निदेष दिया गया। जिसके आलोक में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदन कंडिकावार उपलब्ध न करा कर यह प्रतिवेदित किया गया कि विभागीय कार्यवाही एवं फौजदारी मुकदमा आरोप के स्वभाव पर साथ-साथ चलाया जा सकता है। र्वामान मामला पूर्णरूपेण पुलिस कांड एवं गवाहों पर निर्भर करेगा। अतएव इसमें फौजदारी कांड के फलाफल के पूर्व कोई तथ्य नहीं नजर आ रहा है। मौलिक तथ्य रिष्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने का है, इसके अलावे इस मामलें में कोई तकनीकी contents नहीं है।
5. पथ निर्माण विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षा नहीं करके अभियंताओं के संवर्ग विभाजन के फलस्वरूप श्री चौधरी का पैतृक विभाग ग्रामीण कार्य विभाग होने के कारण संबंधित संचिका ग्रामीण कार्य विभाग को हस्तांतरित कर दी गयी।
6. संचालन पदाधिकारी द्वारा इस मामले को पूर्णतः फौजदारी मामला मानते हुए अपना निष्कर्ष अंकित किया गया, परन्तु इस क्रम में उनके द्वारा निगरानी विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्यों का परीक्षण नहीं किया गया। जिसमें परिवादी का आवेदन, स्वतंत्र गवाह, प्री ट्रैप मेमोरैण्डम एवं पोस्ट ट्रैप मेमोरैण्डम शामिल है। संचालन पदाधिकारी द्वारा इस तथ्य पर भी मंतव्य नहीं दिया गया कि रिष्वत की मांग करना न सिर्फ अपराध है, बल्कि सरकारी सेवक के आचरण के प्रतिकूल भी है। 7. आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध परिवादी श्री अनिल कुमार द्वारा रिष्वत की मांग करने का आरोप लगाते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को षिकायत की गयी, जिसका निगरानी विभाग द्वारा सत्यापन कराने के बाद धावा दल गठित कर आरोपित पदाधिकारी को रिष्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। इस आधार पर भी आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध पथ निर्माण विभाग द्वारा गठित आरोप पत्र प्रपत्र 'क' में लगाया गया आरोप खारिज नहीं किया जा सकता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन एवं उससे असहमति के बिन्दु पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 18 (iii) के तहत अपना पक्ष रखने का निदेष श्री चौधरी को दिया गया, जिसके आलोक में श्री चौधरी द्वारा बचाव बयान प्रस्तुत किया गया एवं अपने को बेगुनाह बताते हुए विभागीय कार्यवाही के निष्पादन को आपराधिक मुकदमा के अन्तिम निर्णय तक रोके रखने का अनुरोध किया गया।
8. बचाव बयान में श्री चौधरी के द्वारा कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया, न ही वो इस तथ्य से इंकार कर सकते हैं कि उन्हें निगरानी धावा दल द्वारा रिष्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। अतएव समीक्षोपरान्त बचाव बयान स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
9. उक्त आलोक में विभागीय पत्रांक 1071 अनु॰ दिनांक 01.04.2014 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना से श्री चौधरी के सेवा से बर्खास्त करने के बिन्दु पर परामर्श/सहमति हेतु अनुरोध किया गया ।
10. बिहार लोक सेवा आयोग, बिहार, पटना के संचिका सं॰-06/प्रो॰-04-02/2014 (420) लो॰से॰आ॰ दिनांक 23.05.2014 द्वारा श्री चौधरी के सेवा से बर्खास्त करने के विभागीय दंड के बिन्दु पर सहमति दी गयी।
11. श्री चौधरी की जन्म तिथि पथ निर्माण विभाग से प्राप्त सूचना के अनुसार 01.01.1958 एवं सेवा निवृति की तिथि 31.12.2017 है।
12. उक्त आलोक में श्री अशोक कुमार चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0 आर0 ई0 पी0, पतरघट प्रखंड,सहरसा सम्प्रति निलंबित,(मु0) अभियंता प्रमुख का कार्यालय, पटना को निलंबन से मुक्त करने के प्रस्ताव एवं प्रमाणित गंभीर आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) संषोधित नियमावली 2007 की कंडिका-14 (XI) के तहत बृहत् दंड सेवा से बर्खास्त करने की शास्ति अधिरोपित करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति प्राप्त है। 13 अतएव श्री अशोक कुमार चौधरी, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0 आर0 ई0 पी0, पतरघट प्रखंड,सहरसा सम्प्रति निलंबित (मुख्यालय), अभियंता प्रमुख का कार्यालय, पटना को निलंबन सेे मुक्त करते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) संषोधित नियमावली 2007 की कंडिका-14 (XI) के तहत बृहत् दंड सेवा से बर्खास्त करने की शास्ति अधिरोपित की जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, काषीनाथ सिंह, विषेष सचिव।
———
19 अगस्त 2014
सं॰ 3/अ0प्र0-1-261/09-2787—श्री नन्द किशोर प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2, पटना सम्प्रति सेवाच्युत के द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनान्तर्गत खजूरी से पनहारा पथ एवं अन्य पथों में कराये गये कार्य में गंभीर अनियमितता बरतने के आरोप में उन्हें विभागीय अधिसूचना सं0 718 सह पठित ज्ञापांक 719 दिनांक 25.01.2011 के द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गयी एवं विभागीय संकल्प सं0 2561 दिनांक 01.03.2011 द्वारा उनके विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं20 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के अधीन विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना को विभागीय कार्यवाही संचालित करने हेतु संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया।
2. संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 278 सी0डी0ई0 दिनांक 03.04.2013 द्वारा विभागीय कार्यवाही संख्या 19/11 में विस्तृत जाँच प्रतिवेदन विभाग को प्राप्त हुआ। जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रसाद के विरूद्ध गठित दो आरोप पत्र प्रपत्र 'क' के आलोक में विस्तृत समीक्षा कर जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। प्रथम आरोप पत्र में कुल 13 आरोप थे जिसमें खंड 'ए' में कुल 6 आरोप, खंड 'बी' में कुल 5 आरोप खंड सी' में कुल 1 आरोप प्रमाणित बताया गया, खंड 'डी' में 1 आरोप प्रमाणित नहीं बताया गया एवं द्वितीय आरोप पत्र में 11 पथों के संबंध में कुल 39 आरोप लगाये गये, जिसमें 22 आरोप प्रमाणित पाये गये, 6 आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाये गये तथा 11 आरोप प्रमाणित नहीं पाये गये। संचालन पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये जाँच प्रतिवेदन में आरोपों का पूर्ण विवरण, आरोपों के समर्थन में उपलब्ध कराये गये साक्ष्यों का विवरण, आरोपों की पृष्ठभूमि तथा प्रत्येक आरोपों के संदर्भ में साक्ष्य, आरोपी पदाधिकारी का स्पष्टीकरण विभागीय जाँच आयुक्त का विश्लेषण एवं उनका निष्कर्ष अंकित है।
3. श्री नंद किशोर प्रसाद तदेन कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध गठित आरोप, उनसे प्राप्त बचाव वयान एवं विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा की गई समीक्षा के आधार पर दिया गया निष्कर्ष तथा विभाग के स्तर पर किया गया विश्लेषण एवं निष्कर्ष निम्नवत् है-
I (A) प्रथम आरोप पत्र के खंड-A में गठित आरोप संख्या-1ः जाँच के क्रम में GSB की मुटाई प्रथम कि॰मी॰ से चौथे कि॰मी॰ तक प्रावधानित मुटाई (300mm) से कम पायी गई। विशेष रूप से प्रथम कि॰मी॰ के एक स्थान पर मुटाई बहुत ही कम (150mm) पायी गई। शेष स्थानों पर इसकी मुटाई प्रावधान के अनुरूप पायी गई लेकिन यह मुटाई मिट्टी के लगभग तीन इंच परत को शामिल करके है, जो अस्वीकार है।
विभाग द्वारा करायी गई जाँच में प्रथम चार कि॰मी॰ में कुल पाँच बिन्दुओं पर मुटाई मापी गई जो क्रमशः 280 mm, 150 mm, 235 mm, 298 mm एवं 247 mm पायी गयी। जाँच के दौरान GSB में सभी जगहों पर मिट्टी का अंश पाया गया। लगभग सभी जगहों पर GSB केे उपर करीब तीन इंच मोटी परत पायी गई जिससे स्पष्ट है कि GSB के उपर मिट्टी दी गयी है, जो स्वीकार योग्य नहीं हेै। आरोपित पदाधिकारी द्वारा अपने बचाव वयान में इस संबंध में मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पत्र का उल्लेख करते हुए स्पष्टीकरण दिया गया कि पथ के परतों की मुटाई इस पत्र में दिये गये निदेश के अनुरूप नहीं की गई है, जिसके अनुसार तीन क्रॉस सेक्सन में मुटाई नापने का प्रावधान है। संचालन पदाधिकारी द्वारा इसकी विस्तृत समीक्षा की गई तथा इस परिपत्र का संदर्भ देना उचित नहीं पाया गया। इसी क्रम में यह उल्लेखनीय है कि विषयांकित पथ PMGSY के तहत बन रहा था। अतएव इसके लिए PMGSY से संबंधित प्रावधान लागू होंगे, जिसमें रोड के विभिन्न बिन्दूओं पर मुटाई नाप कर उसका औसत निकालना है। इस आधार पर GSB की वास्तविक मुटाई पूरे साढ़े सात कि॰मी॰ रोड में मात्र 206 mm आती है, अर्थात् प्रावधानित 300 mm से करीब 94 mm की कमी पूरे रोड के लंबाई में पायी गई। इस प्रकार आरोपित पदाधिकारी का बचाव वयान स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की विस्तृत समीक्षा विभाग द्वारा करायी गई जाँच, गठित आरोप, आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये बचाव वयान एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर की गई तथा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त करते हुए आरोप को प्रमाणित पाया गया।
I (B) प्रथम आरोप पत्र के खंड-A में गठित आरोप संख्या-2ः WBM Grade-II एवं Grade-III की संयुक्त मुटाई प्रावधानित 150mm के बदले तीसरे, चौथे, पॉंचवें कि॰मी॰ के बीच में कम पायी गई। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस आरोप के संदर्भ में अपने बचाव वयान में दिया गया तर्क आरोप संख्या-1 के संदर्भ में दिये गये तर्क के समरूप हैै।
अतएव आरोप संख्या-1 के संदर्भ में विभाग द्वारा किये गये समीक्षा एवं विश्लेषण के आधार पर इसे भी प्रमाणित पाया गया।21 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 I (C) प्रथम आरोप पत्र के खंड-A में गठित आरोप संख्या-3ः पथ के लगभग सभी स्थानों पर GSB, WBM Grade-II एवं Grade-III की संयुक्त मुटाई में मिट्टी का अंश पाया गया जो आपत्तिजनक है।
इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण में उल्लेख किया गया कि कार्य का एकरारनामा उक्त तिथि को चालू अवस्था में था एवं एकरारनामा की शर्त्तो के अनुसार संवेेदक से त्रुटिपूर्ण कार्यो को सही कराने का प्रावधान है। पुनः आरोपित पदाधिकारी द्वारा संचालन पदाधिकारी के समक्ष यह उल्लेख किया गया कि गुण नियंत्रण संबंधी प्रतिवेदन एवं नेशनल लेवल मोनिटर अथवा स्टेट लेवल मोनिटर द्वारा गुणवत्ता के संबंध में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं दी गई। इस प्रकार उनके द्वारा विरोधाभाषी तथ्य प्रस्तुत किया गया। उल्लेखनीय है कि विभाग द्वारा जाँच दल का गठन कर इस योजना की जाँच करायी गई तथा उन्होंने स्पष्ट रूप से यह प्रतिवेदित किया कि पथ के लगभग सभी स्थानों पर GSB, WBM Grade-II एवं Grade-III की संयुक्त मुटाई में मिट्टी का अंश पाया गया। इस प्रकार इस आधार पर संचालन पदाधिकारी द्वारा भी आरोप को प्रमाणित पाया गया।
विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की विस्तृत समीक्षा की गई तथा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त करते हुए आरोप को प्रमाणित पाया गया।
I (D) प्रथम आरोप पत्र के खंड-A में गठित आरोप संख्या-4ः पथ के सतह पर Cracks नजर आ रहें हैं। पथ लगभग सभी स्थानों पर Failed कर गया है जिसके कारण पथ में कई स्थानों पर Settlement हुआ है जिसका कारण Sub grade का Optimum moisture content पर Compaction न किया जाना, परिवर्ती परतों का उचित संपीड़न न होना तथा GSB में निम्न कोटि के बालू का उपयोग तथा GSB के उपर मिट्टी की परत देना आदि माना जा सकता है।
इस संदर्भ में आरोपित पदाधिकारी द्वारा आरोप संख्या-3 में दिये गये तथ्यों के अतिरिक्त संचालन पदाधिकारी के समक्ष यह उल्लेख किया गया कि जाँच प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि पथ निर्माण के क्रम में काटी गई मिट्टी के कारण Drain बन गया जिसमें लंबे समय तक जल जमाव के कारण Black cotton soil की Swelling & Shrinkage Property के कारण पथ का कई स्थान Settlement हुआ। आरोपी पदाधिकारी के स्पष्टीकरण का प्रथम भाग विरोधाभाषी है जबकि दूसरे भाग में उनके द्वारा अपने अनुसार जाँच दल के प्रतिवेदन को सुविधानुसार प्रस्तुत किया गया। पथ बनाने के क्रम में मिट्टी के दोनों तरफ से काटे जाने के कारण बने Drain की स्थिति का तकनीकी निराकरण कार्यपालक अभियंता होने के नाते उन्हीं के स्तर से किया जाना था। इस संबंध में PMGSY के अंतर्गत पथ निर्माण से संबंधित मार्ग दर्शिका के अनुसार मिट्टी जहॉं से निकाला गया उस क्षेत्र को इस ढंग से व्यवस्थित किया जाना था कि वहॉं Natural Drainage हो जिससे जल जमाव की समस्या न हो। यह कार्रवाई आरोपित पदाधिकारी द्वारा नहीं की गई। उनके द्वारा यह भी संभावना व्यक्त की गई कि Settlement का कारण आरोप पत्र में अंकित कारणों से भिन्न हो सकता है। इस संबंध में संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने विश्लेषण में यह उल्लेख किया गया कि जाँच दल में वरीय तकनीकी पदाधिकारी थे और उनके द्वारा दिये गये मंतव्यों को संभावना के आधार पर अस्वीकार नहीं किया जा सकता।
विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की विस्तृत समीक्षा की गई तथा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त करते हुए आरोप को प्रमाणित पाया गया।
I (E) प्रथम आरोप पत्र के खंड-A में गठित आरोप संख्या-5ः पथ के Failed portion में Brick bats से मरम्मति की गई जबकि Failed portion में जिस लेयर में Failure है उसी लेयर के प्रावधानित material से उसकी मरम्मति करायी जानी चाहिए।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में अपना पक्ष रखते हुए उल्लेख किया गया कि संपादित कराये जा रहे कार्यो में उच्चाधिकारी की सतत् निगरानी रहती थी जिसके मार्ग दर्शन में कार्य कराया जाता था। इस संबंध में उल्लेखनीय है कि पथ के Failed portion में पथ परत को काट कर संवेदक द्वारा Brick bats भर कर उसके उपर मेटल देकर Consolidation की कार्रवाई की गईं। उसमें यह भी अंकित है कि Village portion में पथ की स्थिति ठीक है। विभाग द्वारा इस संबंध में कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया। अतः आरोप नहीं बनता। विभाग द्वारा गठित जाँच दल द्वारा यह पाया गया कि Brick bats भर कर उसके उपर मेटल देकर मरम्मति का22 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 कार्य किया गया। यह प्रतिवेदन ही इस तथ्य का साक्ष्य है कि ऐसी कार्यवाही की गई। आरोपित पदाधिकारी का यह कहना कि जाँच दल ने Village portion में पथ की स्थिति ठीक पायी, इससे रोड में जहाँ-जहाँ Village portion से हट कर अन्य जगहों पर Failures हुये और वहाँ मरम्मति में प्राक्कलन के प्रावधान के विपरीत Brick bats का उपयोग हुआ, इस अनियमितता को किसी प्रकार Justify नहीे किया जा सकता है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में प्र्रस्तुत कियेे गये कागजातों से भी इस संबंध में कोई निष्कर्ष संभव नहीं है। विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की विस्तृत समीक्षा विभाग द्वारा की गई एवं जाँच, गठित आरोप, आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये बचाव वयान एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर की गई तथा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त करते हुए आरोप को प्रमाणित पाया गया।
I (F) प्रथम आरोप पत्र के खंड-A में गठित आरोप संख्या-6ः अनेक स्थानों पर Premix उखड़ रहा है जहाँ कहीं भी Premix carpet परत छोड़ रहा है वहाँ Mix का overburnt होना एवं proper rolling नहीं होना उसका सम्मिलित कारण माना जा सकता है। प्रयोगशाला जाँचफल में Premix carpet में प्रयुक्त Bitumen की मात्रा अस्वीकार्य बतलाया गया है। उपर्युक्त तथ्यों से स्थिति यह है कि पथ मौजूदा हालत में मरम्मति कराने पर भी सफल नहीं होगा। इससे यह परिलक्षित होता है कि पथ निर्माण कार्य के लगभग सभी stages में अनियमितता बरती गई है तथा निर्माण कार्य के दौरान आपके द्वारा समुचित पर्यवेक्षण नहीं किया गया है और सड़क की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया जिसके लिए आप प्रथम दृष्ट्या दोषी प्रतीत होते हैं।
आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में तीन कागजात प्रस्तुत करते हुए उल्लेख किया गया कि कार्य संपादन के बाद Bitumen content निकालने की कोई ठोस विधि नहीं है। जहाँ तक Bitumen content का प्रश्न है कार्य संपादित होने के बाद संपादित परत से नमूना एकत्र कर जाँच करने पर Bitumen content के प्रतिशत की कम आने की पूरी संभावना है। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोपी पदाधिकारी के द्वारा प्रस्तुत कागजातों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा विश्लेषणोंपरांत यह निष्कर्ष अंकित किया गया कि आरोपित का यह कहना कि निर्माण हो जाने के बाद Bitumen content निकालने की कोई ठोस विधि नहीं है, स्वीकार करने योग्य नहीं है। इसकी जाँच की स्पष्ट प्रक्रिया PMGSY के लिये लागू Quality Assurance Handbook में प्रावधानित की गई है। आरोपित ने इन सभी तथ्यों को supress करते हुए एक तो ऐसा कागजात प्रस्तुत किया जो सीधे PMGSY के लिये लागू नहीं है और फिर उसमें Selective रूप से तथ्यों को रखा जिससे ऐसा आभास हो कि वाकई Bitumen content निकालने की कोई ठोस विधि नहीं है। वस्तुतः आरोप का मूल अंश यह हैे कि अनेक स्थानों पर Premix उखड़ रहा है जहाँ कहीं भी Premix carpet परत छोड़ रहा है वहाँ Mix का overburnt होना एवं proper rolling नहीं होना उसका सम्मिलित कारण माना जा सकता है। आरोपित ने इस मूल अंश पर अपने बचाव वयान में कुछ नहीं कहा। यह आरोप इस तथ्य पर आधारित नहीं है कि Premix carpet परत उखड़ने का कारण प्रयुक्त Bitumen के content की कमी से है। बल्कि यह आरोप जाँच दल के द्वारा वहाँ की स्थिति देख कर अपने अनुभव के आधार पर दिये गये इस Finding पर आधारित है कि भले ही प्रयुक्त Bitumen के content की मात्रा ठीक रही हो पर Mix के overburnt होने एवं proper rolling नहीं होने से यह प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न हुई। जाँचदल द्वारा स्पष्ट एवं ताकक आधार पर निष्कर्ष निकाला गया था और जाँच निर्धारित प्रावधान के अनुरूप था इसलिए आरोप का अंश प्रमाणित होता है।
विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की विस्तृत समीक्षा विभाग द्वारा की गई जाँच, गठित आरोप, आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये बचाव वयान एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर की गई तथा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त करते हुए आरोप को प्रमाणित पाया गया।
I (G) प्रथम आरोप पत्र के खंड-B में गठित आरोपः प्रथम आरोप पत्र के दूसरे खंड-B में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (missing Link-II) के पैकेज संख्या-BR-26R-016 के अंतर्गत निर्माणाधीन बिहटा-लई PWD पथ से नथुपुर पथ में दिनांकः 12.08.2010 को NQM के द्वारा किये गये निरीक्षण और उनसे प्राप्त निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर निम्नलिखित आरोप गठित किये गये हैंः23 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 1. पथ में Road width एवं carriage way width की चौड़ाई DPR में प्रावधानित चौड़ाई से कम पायी गई है।
2. पथ के अंतिम भाग के 50 मी॰ लंबाई मे बिना WBM Grade-II एवं Grade-III का कार्य किए Direct GSB पर कालीकरण का कार्य कर दिया गया है।
3. पथ में कालीकरण का जो कार्य कराया गया है उसकी मोटाई प्रावधान से कम पायी गई है जो क्रमशः 300m chainage पर 12mm तथा 500m chainage पर 18mm पायी गई। साथ ही premix carpet की सतह असमतल (uneven) तथा उसमें काफी Undulation पाए गए जो स्वीकार्य सीमा के अंदर नहीं है। Permix carpet की चौड़ाई कुछ स्थानों पर कम पायी गई तथा seal coat का कार्य भी संतोषजनक नहीं पाया गया।
4. पथ में shoulders की चौड़ाई बहुत कम पायी गई जिसका proper compaction नहीं किया गया है। Shoulders में rain cuts पाये गये तथा shoulders क्षतिग्रस्त पाये गए।
5. पथ में तीन culverts का कार्य प्रगति में पाया गया है जिसका work quality और workmanship स्वीकार्य योग्य नहीं है।
विभाग द्वारा NQM श्री पी॰ एल॰ भंडारी द्वारा दिये गये प्रतिवेदन के आधार पर उपरोक्त आरोप गठित किये गये, जिसमें आरोपित द्वारा कागजात इत्यादि नहीं मिलने के संबंध में पत्राचार किया गया। विभाग द्वारा कागजात उपलब्ध कराये जाने के बावजूद अपना स्पष्टीकरण लगभग एक वर्ष बाद दिया गया। अपने स्पष्टीकरण में उनके द्वारा कार्य के चालू अवस्था में होने पूर्व में स्पष्टीकरण नहीं पूछने, कागजातों को उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर सुनवाई नहीं किये जाने का अनुरोध संचालन पदाधिकारी से किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपनी समीक्षा में उल्लेख किया गया कि प्रतिवेदन में गंभीर अनियमितायें प्रतिवेदित है तथा कार्य चालू अवस्था में होने और उसमें प्रतिवेदन के अनुसार संवेदक से सुधार कराने की बात बरती गई अनियमिताओं के आरोपों से बचने का कोई तार्किक आधार प्रस्तुत नहीं करती है। उनके द्वारा विभाग से किसी विशिष्ठ कागजात का उल्लेख कर उसे मांगा नहीं गया अतएव विभाग के स्तर से उपलब्ध कराये जाने का कोई प्रश्न ही नहीं है। इसके अतिरिक्त यदि वे चाहते तो अपना स्पष्टीकरण उन्हें भी दे सकते थे। इस प्रकार उपरोक्त वर्णित आरोप प्रमाणित होता है।
विभाग द्वारा संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की विस्तृत समीक्षा NQM श्री पी॰ एल॰ भंडारी द्वारा दिये गये प्रतिवेदन, आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये बचाव वयान एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर की गई तथा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त करते हुए आरोप पत्र के खंड-B में गठित आरोपों को प्रमाणित पाया गया।
I (H) प्रथम आरोप पत्र के खंड-C में गठित आरोपः ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2 पटना के अधीन मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजनान्तर्गत दिनांक 25.02.2010 को प्राप्त निविदाओं के निष्पादन के विलंब के क्रम में आपसे कारण पृच्छा की गयी। इस संबंध में आपके द्वारा अपने स्पष्टीकरण में उल्लेख किया है कि विषयगत निविदाएॅं आपके पत्रांक 1705 दिनांक 13.04.2010 द्वारा अधीक्षण अभियंता, कार्य अंचल-2 पटना को भेजा गया था किन्तु उक्त निविदाओं में यंत्र-संयत्र के भौतिक सत्यापन हेतु अधीक्षण अभियंता के द्वारा निविदा प्रमंडल में लौटा दी गयी। अपने स्पष्टीकरण में आपने स्वीकार किया है कि यंत्र-संयत्र के सत्यापन में कुछ विलंब हुआ है। जैसे संवेदकों द्वारा स्थल मशीनरी आदि को निरीक्षण कराने में बिलंब तथा कुछ प्रक्रियात्मक विलंब हुआ है। फलस्वरूप दिनांक 25.02.2010 को प्राप्त निविदा निष्पादन हेतु मुख्य अभियंता-1 को दिनांक 31.05.2010 एवं 01.06.2010 को प्राप्त हुआ तथा यह विलंब आपके स्तर से हुआ है। इससे परिलक्षित होता है कि विभागीय कार्यो में आपके द्वारा पर्याप्त रूचि नहीं ली जाती है जिससे विकास कार्यों की गतिशीलता प्रभावित होने की पूरी संभावना है तथा इसके लिए आप प्रथम दृष्ट्या दोषी प्रतीत होते हैं।24 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 आरोपित द्वारा अपने बचाव वयान में यह कहा गया कि यंत्र-संयत्र के सत्यापन में कुछ विलंब हुआ है। यह एक प्रक्रियात्मक विलंब हैं। उल्लेखनीय है कि प्रमंडल स्तर पर उक्त समय अनेकों योजनायें चल रही थी जिस पर सतत् निगरानी रहता था। इसके अतिरिक्त मुख्यालय एवं अनेक स्तरों पर बैठकों में भाग लिया जाता है। यंत्र-संयत्र का सत्यापन करने हेतु अधीनस्थ अभियंता को प्राधिकृत किया गया था। संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप एवं बचाव वयान का विस्तृत विश्लेषण किया गया। आरोपित द्वारा बिलंब को बहुत ही सामान्य तरीके से रखा गया जबकि उन्हें इस संबंध में विभाग द्वारा लगातार स्मारित किया गया। उनके द्वारा न तो विभाग के पत्रों का उत्तर दिया गया और न ही विलंब के संबंध में कोई स्पष्टीकरण ही दिया गया। साक्ष्योंं के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि आरोपित द्वारा अपने कर्त्तव्यों को अपेक्षित गंभीरता से न निभाने, विषय वस्तु पर अपेक्षित प्राथमिकता और सजगता न बरतने से ही त्रुटिपूर्ण रूप से दो महीने के बाद भी कार्य किया गया जिससे और लंबा समय लगा। अतः उपरोक्त के आलोक में उनका बचाव वयान स्वीकार योग्य नहीं है।
गठित आरोप, आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये बचाव वयान एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर विभाग द्वारा समीक्षा की गई तथा संचालन पदाधिकारी के निष्कर्षों से सहमति व्यक्त करते हुए आरोप पत्र के खंड-C में गठित आरोपों को प्रमाणित पाया गया।
I (I) प्रथम आरोप पत्र के खंड-D में गठित आरोपः अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-2 पटना को संबोधित आपका पत्रांक 3141 दिनांक 28.07.2010 जो कार्य अंचल-2, पटना के ज्ञापांक 1268 दिनांक 03.08.2010 द्वारा मुख्य अभियंता-1 को प्राप्त हुआ। आपके उक्त आवेदन में दिनांक 31.07.2010 से दिनांक 08.08.2010 तक अवकाश की याचना के साथ निजी कार्य हेतु मुख्यालय छोड़ने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया। उक्त अवकाश अवधि में आप मुख्यालय से बाहर रहें। किन्तु विषयगत अवधि में आप मुख्यालय से बाहर किस स्थान पर रहे इससे विभाग को आपके द्वारा अवगत नहीं कराया गया जो एक गंभीर बात है। इससे विभाग के प्रति आपकी संदिग्ध निष्ठा परिलक्षित होती है तथा इसके लिए आप प्रथम दृष्ट्या दोषी प्रतीत होते हैं।
आरोपी पदाधिकारी द्वारा अपने संक्षिप्त बचाव वयान में उल्लेख किया गया कि ''छुट्टी के आवेदन में मैं मुख्यालय से बाहर कहीं जा रहा हूॅं, उसे भी अंकित करना है, की जानकारी मुझे नहीं थी क्योंकि मैंने पूर्व में या अन्य पदाधिकारियों द्वारा दिये गये आवेदन में यह देखा था कि मुख्यालय के बाहर किस स्थान को जा रहे हैं कि सूचना नहीं थी। अगर उक्त सूचना देनी थी तो उच्चाधिकारी को चाहिए था कि मुझसे यह सूचना प्राप्त कर लेते। संचालन पदाधिकारी द्वारा समीक्षोंपरांत यह पाया गया कि इस प्रकार की सूचना आवेदन में रहनी चाहिए परंतु चूंकि विभाग द्वारा आरोप में निहित बिन्दू के इस आरोपित का विभाग के प्रति संदिग्ध निष्ठा परिलक्षित होती है, विभाग के द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, इस लिए इस आरोप को उसके true spirit में स्थापित मानना उचित नहीं हो सकता।''
विभाग द्वारा गठित आरोप के संदर्भ में पर्याप्त साक्ष्य नहीं रहने तथा आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिये गये बचाव वयान एवं संचालन पदाधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर इस आरोप को आरोपित पदाधिकारी के विरूद्ध अप्रमाणित पाया गया।
II द्वितीय आरोप पत्रः आरोपी पदाधिकारी के विरूद्ध द्वितीय आरोप पत्र में ग्यारह (11) पथों से संबंधित कुल 39 आरोप लगायें गये है, जो विभिन्न पथों के संबंध में Common रूप से गठित है, इसलिए आरोपों का विश्लेषण रोडवार न कर आरोप की प्रकृति के अनुसार यथासंभव एक Common Group बना कर किया गया है, जिससे कि एक ही प्रकृति के और समान रूप से गठित आरोप पर विश्लेषण बार-बार दोहराने की आवश्यकता न हो और आरोप की प्रकृति के अनुसार एक जगह appropriate focus के साथ इनकी जाँच और विश्लेषण संपादित की जा सकें। इसी आधार पर आरोपों को समान प्रकृति के अनुसार कुल 39 आरोपों को 7 Common Group में विभाजित किया गया हैं।
II (A) द्वितीय आरोप पत्र का आरोप संख्या 1ः सूचनापट्ट नहीं पाया जाना।
सभी 11 पथों के संबंध में यह आरोप Common रूप से गठित है। आरोपी द्वारा बचाव में यह उल्लेख किया गया कि ये सभी पथ मरम्मति मद से वर्ष 2009-10 में स्वीकृत प्राक्कलन और संबंधित विभिन्न एकरारनामा जो एफ-2 एकरारनामा के मानक प्रपत्र में किया गया था, के आधार पर कराया जा रहा था। मरम्मति25 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 मद के प्राक्कलन में सूचना पट्ट लगायें जाने का प्रावधान नहीं था, उन्होंने साक्ष्य में प्राक्कलन की छायाप्रति संलग्न की है। विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा आरोपी पदाधिकारी द्वारा दिये गये बचाव बयान एवं प्रशासी विभाग के अभिमत के आधार पर इस आरोप को प्रमाणित नहीं पाया गया।
विभाग द्वारा गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन एवं आरोपित के बचाव बचान के समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त के निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की गयी तथा आरोपों को अप्रमाणित पाया गया। II (B) द्वितीय आरोप पत्र का आरोप संख्या-2ः पथ के क्षतिग्रस्त भाग का विस्तृत प्राक्कलन तैयार नहीं किया जाना तथा प्राक्कलन सक्षम पदाधिकारी द्वारा स्वीकृत नहीं रहना।
यह आरोप 11 पथों में से 6 पथ, यथा पथ संख्या- 1, 2, 3, 4, 5, तथा 6 के संबंध में गठित है। इस आरोप में दो अंश है। पहला अंश यह है कि क्षतिग्रस्त भाग का विस्तृत प्राक्कलन तैयार नहीं किया गया है। दूसरा अंश यह है कि प्राक्कलन सक्षम पदाधिकारी द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया था। आरोपित ने मुख्यतः दूसरे अंश पर करीब समरूप रूप से सब के मामलें में यही लिखा है कि स्वीकृत कार्य मरम्मति मद का था और उसमें पी.डब्लू.डी.
कोड की कंडिका-294 के अनुसार बजट आवंटन की सीमा अंतर्गत तकनीकि स्वीकृति देने की शक्ति कार्यपालक अभियंता को प्रदत है। फिर हर मामलों में उन्होंने प्राप्त आवंटन पत्र का संदर्भ देतें हुए कितना बजट आवंटन प्राप्त हुआ था, यह दिखलाते हुए यह दर्शाया है कि चूंकि तकनीकि स्वीकृति उतनी ही आवंटन की सीमा के अंतर्गत दिया गया था, इसलिये उनके द्वारा कार्यपालक अभियंता के रूप में ऐसा किया जाना नियमों के अनुरूप था।
विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा समीक्षोपरांत पाया गया कि पथ संख्या-1 में प्राक्कलन की समीक्षा किये जाने के उपरांत प्राक्कलन के आइटम-2 (आर.डब्लू.डी./15.5 का विस्तृत प्राक्कलन नहीं है।) को देखने से सहज रूप से स्पष्ट होता है। इस आइटम में रोड में Pot holes आदि को ठीक करने के लिए प्रावधान किया गया था। परंतु Pot holes कहां-कहां और कितना क्षेत्रफल का है- इसकी विस्तृत गणना नहीं है, बल्कि अनुमान से पूरे रोड की लंबाई 1700 मीटर तथा उसकी चौड़ाई 3.5 मीटर का जो क्षेत्रफल 5185 वर्ग मीटर आता है उसके एक तिहाई अर्थात 30 प्रतिशत क्षे़त्रफल में इस कार्य हेतु प्राक्कलन में इस item में प्रावधान किया गया है। नियमतः वैसे तमाम क्षतिग्रस्त भागों का वास्तविक क्षेत्रफल निकालकर और कुल कितना क्षेत्रफल आता है, वह वास्तविक रूप में बनना चाहिए, तभी उचित रूप से detailed estimate बनाया गया माना जा सकता था, जो स्पष्टतया नहीं बनाया गया है। उसी प्रकार रोड संख्या-2 के आइटम-2 और 3 का विस्तृत प्राक्कलन नहीं बनाये जाने का अभिमत है, जो सही है और इसी प्रकार बाकी पथों के प्राक्कलन को भी देखा गया, जिसमें इसी ढंग से ऐसे items के संबंध में detailed estmate नहीं बनाये गये है और आरोपित के द्वारा दिया गया सामान्य बचाव, जिसे उपर संर्दभित किया गया है, मात्र आरोप को evade करने के लिये प्रस्तुत किया गया है, जो स्वीकार्य नहीं है। आरोप के दूसरे अंश के संदर्भ में बचाव बयान पर प्राप्त विभागीय अभिमत में पुनः बिल्कुल स्पष्ट रूप से यह अंकित किया गया है कि बचाव स्वीकार योग्य है, अर्थात आरोपित द्वारा उल्लेखित किया गया नियम और उसके अनुसार कार्यपालक अभियंता को बजट आवंटन की सीमा के अंतर्गत तकनीकि स्वीकृति देने की शक्ति प्रदत है- यह सही है। चूंकि विभाग ने समीक्षा कर यह स्पष्ट प्रतिवेदित किया है, इसलिये बचाव स्वीकार योग्य है। आरोप का पहला अंश ''पथ के क्षतिग्रस्त भाग का विस्तृत प्राक्कलन तैयार नहीं किया जाना ''हर मामलों में प्रमाणित हुआ, जबकि आरोप का दूसरा अंश ''प्राक्कलन सक्षम पदाधिकारी द्वारा स्वीकृत नहीं रहना'' कही भी प्रमाणित नहीं हुआ। उपरोक्त के आलोक में यह स्पष्ट है कि 6 पथाें से संबंधित एकसमान प्रकृति के आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित हुए।
विभाग द्वारा गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन एवं आरोपित के बचाव बयान के समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त के निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की गयी तथा वर्णित आरोपों को आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया।
II (C) द्वितीय आरोप पत्र का आरोप संख्या 3ः पथ के दोनों तरफ फ्लैंक में मिट्टी कार्य एवं उसका compaction प्राक्कलन के अनुसार नहीं पाया गया। इस ढंग के आरोप में निहित अंश का अलग-अलग विश्लेषण निम्नलिखित हैः पथ के दोनों तरफ फ्लैंक में मिट्टी कार्य प्राक्कलन के अनुसार नहीं पाया जाना अथवा फ्लैंक में कार्य ही नही कराना, जिससे रोड के किनारे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। फ्लैंक26 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 में मिट्टी के कार्य में compaction प्राक्कलन के अनुसार नहीं पाया जाना। फ्लैंक में मिट्टी के कार्य क्षतिग्रस्त पाया जाना।
आरोपी द्वारा अपने बचाव के संबंध में मुख्य रूप से उल्लेख किया गया कि निरीक्षण बरसात के मौसम मे था, इसलिए फ्लैंक में कुछ क्षति होना स्वभाविक था। अंतिम भुगतान निरीक्षण की तिथि तक नहीं हुआ था, इसलिए स्थल में पाये गये त्रुटियों का निराकरण करा लिये जाने की अभियुक्ति अधीक्षण अभियंता, उड़दस्ता के द्वारा दर्ज किया गया था। एफ-2 एकरारनामा की कंडिका-7 में यह प्रावधान है कि त्रुटिपूर्ण कार्य को ठीक करने की जवाबदेही संवेदक की है। फ्लैंक में मिट्टी कार्य की आवश्यकता एम.क्यू.एम. के निरीक्षण प्रतिवेदन में बतायी गयी हैं, कार्य चालू अवस्था में था। यह कोई आरोप नहीं है। निरीक्षण प्रतिवेदन में उल्लेखित त्रुटियों का निराकरण किये जाने का प्रावधान हैं। पथ के सोल्डर में मिट्टी कार्य नहीं किये जाने का उल्लेख किया गया है, जिसमें सीमेंट, कंक्रीट पेवमेन्ट के किनारे क्षतिग्रस्त होने की बात बतायी गई है। उस संबंध में उल्लेखनीय है कि सीमेंट, कंक्रीट पेवमेन्ट के निर्माण के बाद ही फ्लैंक में मिट्टी का कार्य कराया जाता है। कार्य चालू अवस्था में था। एकरारनामा की शर्तो के अनुसार इस कार्य को कराये जाने का प्रावधान है। विभागीय जाँच आयुक्त ने इस बचाव के मुख्य अंश, जो उपर उद्धृत किये गये है, उनको देखकर यह स्पष्ट किया है कि वस्तुतः अत्यंत सामान्य और vague रूप से हर मामले में मोटे तौर पर यही कहने का प्रयास किया गया है कि निरीक्षण प्रतिवेदन में वर्णित त्रुटियां कोई त्रुटि नहीं थी, क्योंकि कार्य चालू अवस्था में था, इसलिए जो कमी पायी गयी उसका निराकरण संवेदक के माध्यम से एकरारनामा की शर्तो के अनुरूप करा लिया जाता। इस आरोप के अन्य अंश तो तुलनात्मक रूप से और गंभीर प्रकृति के है, जैसे फ्लैंक में मिट्टी का कार्य पूरे सड़क की लम्बाई में कराया ही नहीं गया, या प्राक्कलन के अनुरूप नहीं कराया गया, और उसपर उचित रूप से compaction नहीं किया गया। फलस्वरूप रोड के c.c. pavement से लेकर अन्य Layer के दोनों तरफ उचित तकनीकी विशिष्टियों के मिट्टी के कार्य से बने फ्लैंक से covered नहीं होने से उनके टूटने और क्षतिग्रस्त होने का गंभीर खतरा है। पुनः आरोपित ने इसपर भी सतही रूप से, जैसा उपर उल्लेखित है, बचाव बयान प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिसमें यह भी कहा कि सीमेंट, कंक्रीट पेवमेंन्ट के निर्माण के बाद ही फ्लैंक में मिट्टी का कार्य कराया जाता, इसलिए कंक्रीट पेवमेन्ट का क्षतिग्रस्त हो जाना सामान्य और स्वभाविक बात है। एक कार्यपालक अभियंता रैंक के पदाधिकारी बचाव में ऐसी बात कहे, यह समझ से परे है। आरोपी द्वारा यह कुछ बताने का प्रयास नहीं किया गया कि किस work sequence, जो तकनीकी रूप से निर्धारित है, कार्य कराये जाने से, और किन तकनीकी विशिष्टियों जिसमें उचित compaction भी शामिल है, फ्लैंक में मिट्टी का कार्य बाद में होने के बाद भी यह कार्य इस ढंग से किया जा सकता है कि पेवमेन्ट में क्षतिग्रस्त का प्रश्न न उठे। इसके आलावा उन्होंने इस आरोप के उन बिन्दुओं पर भी, जिसमें मिट्टी का कार्य कराया ही न जाना यह प्राक्कलन के अनुरूप जितनी मात्रा में कराया जाना एवं न कराया जाना का गंभीर तथ्य सूचित है, उसपर उन्हें क्या कहना है। उन्होंने इन सब गंभीर अनियमितताओं को एक bag में रखकर यथा यह कि कार्य चालू अवस्था में था, इसलिए इन सब का निराकरण कर लिया जाता, इन सब ने उनके द्वारा किये गये omission & commission से बचने का प्रयास किया है, जो स्वीकार्य नहीं है।इस प्रकार से उल्लिखित जाँच विश्लेषण के आलोक में 9 पथों से संबंधित एकसमान प्रकृति के आरोप प्रमाणित माने गये।
विभाग द्वारा गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन एवं आरोपित के बचाव बचान के समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त के निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की गयी तथा आरोपों को प्रमाणित माना गया। II (D) द्वितीय आरोप पत्र का आरोप संख्या 4ः C.C.Pavement में Regular Interval पर expansion/contraction joint विशिष्टि के अनुरूप न होना, Different vibrant का उपयोग विशिष्टि के अनुरूप नहीं किया जाना जिससे पथ में cracks उत्पन्न हो सकता है। C.C.Pavment का उपरी सतह क्षतिग्रस्त हो रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि पी.सी.सी. कार्य में proper mix, side steal form work और vibrator का उपयोग नहीं किया गया है।
इस ढंग का आरोप कुल 5 पथों, यथाः पथ संख्या- 2, 3, 5, 6 तथा 9 के संबंध में गठित किया गया हैं। इस आरोप के अंतर्गत निम्नलिखित अंश सन्निहित है, जिनका बचाव और इसके आलोक में विश्लेषण निम्नवत् है-पहला जिसमें यह आरोप गठित है कि रोड के C.C. Pavement में contraction & expansion joint का काम नहीं किया गया है, और प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि ऐसा नहीं किये जाने से Cracks आ जाने27 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 की संभावना रहेगी, इसलिए इसे करा दिया जाना चाहिए। इस आरोप के दूसरे अंश में यह संसूचित है कि कतिपय पथों में वस्तुतः प्राक्कलन में ऐसा प्रावधान दिया ही नहीं गया। इस संबंध में निरीक्षण प्रतिवेदन में यह स्पष्ट कहा गया है कि यह प्रावधान प्राक्कलन में रहना चाहिए था, और उसे नहीं दिया जाना स्वयं अपने में त्रुटिपूर्ण है (उपर के उल्लिखित मामलों में इसके विपरीत यह प्रावधान प्राक्कन में दिया गया था, परंतु इसका वास्तविक निर्माण नहीं किया गया), क्योंकि यह प्रावधान प्राक्कलन में नहीं रहने की वजह से उसका निर्माण संभव था ही नही, और तब C.C. Pavement में बिना इस प्रावधान के निर्माण रोड के इस परत को क्षतिग्रस्त करने के लिये खतरा उत्पन्न करेगा। बचाव मेें आरोपित ने यह कहना चाहा है कि यह संभावना पर आरोप लगाया गया है कि Cracks संभावित है, और संभावना कोई आरोप का आधार नहीं बनता है। निरीक्षण प्रतिवेदन यह स्पष्ट प्रतिवेदित करता है कि जबकि यह प्राक्कलन में प्रावधान था, यह कार्य नहीं कराया गया है और ऐसा नहीं कराये जाने से आगे cracks उत्पन्न होने का खतरा रहेगा। प्रश्न यह नहीं है कि Cracks उत्पन्न होंगे या नहीं। प्रश्न यह है कि अगर प्राक्कलन में यह प्रावधान था, जिसे आरोपित ने स्वयं जांच कर तकनीकी स्वीकृति दी, तो इस प्रावधान का न कराया जाना स्वयं अपने में आरोप है। आरोपित ने कुछ भी इस संबंध में नहीं कहा है कि यदि प्राक्कलन में प्रावधान तकनीकी रूप से दिया गया था, तो यह कार्य क्यों नहीं कराया गया। चूंकि आरोपित ने अपने बचाव में इसपर कोई प्रकाश नहीं डाला है कि यह कार्य क्यों नहीं कराया गया और चूंकि निरीक्षण प्रतिवेदन में यह स्पष्ट finding है कि ऐसा कार्य जांच में स्थल पर नहीं पाया गया, इसलिये इस अनियमितता के दोषी आरोपित स्पष्ट रूप से है। आरोपित ने आरोप के दूसरे अंश पर अपने बचाव में कुछ नहीं कहा कि जबकि अन्य रोड के मामलों में C.C. Pavement प्राक्कलन का प्रावधान के अंतर्गत contraction & expansion joint का प्रावधान सन्निहित था, क्योंकि इन मामलों में c.c. pavement का आइटम रहने के बावजूद उसमें यह आवश्यक तकनीकी पक्ष contraction & expansion joint अंतर्निहित नहीं किया गया फिर उन्होंने बचाव में उसी misleading और वस्तुतः अतार्किक बचाव का सहारा लेना चाहा है कि यह प्रावधान प्राक्कलन में नहीं दिया गया, इसलिये निर्माण नहीं हुआ, फिर भी इसकी वजह से ये संभावना व्यक्त करना कि भविष्य में रोड में खराबी आयेगी, इस आधार पर आरोप नहीं ठहरता है। आरोपित के द्वारा इस अंश पर दिये गये उपर्युक्त बचाव पर उपर किया गया विश्लेषण से आरोप आच्छादित होता है। निरीक्षी दल का विभिन्न रोड पर इस बिन्दु पर किया गया निरीक्षण और उसके आधार पर प्रस्तुत मंतव्य consistently है, क्योंकि उनके अनुसार यह necessary technical requirement था, इसलिए उन्होंने consistently लिखा कि जहां प्राक्कलन में प्रावधान है, वहां निर्माण होना चाहिए था, और जहॉं नहीं है वहां ये प्रावधान रहना चाहिए था और उसके अनुरूप निर्माण भी होना चाहिये था। बचाव पक्ष से इसपर विवेकपूर्ण और reasoned response नहीं प्रस्तुत किया गया कि ऐसा प्रावधान उनके द्वारा अन्य पथों में जब किया गया, तो क्यों इन पथों में नहीं किया। अतः इस आलोक में 5 पथों से संबंधित समरूप आरोप प्रमाणित माने गये। विभाग द्वारा गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन एवं आरोपित के बचाव बचान के समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त के निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की गयी तथा आरोपों को प्रमाणित माना गया। II (E) द्वितीय आरोप पत्र का आरोप संख्या 5ः पथ में कुछ स्थानों पर pots/patches तथा undulation पाये गये।
इस ढंग का आरोप कुल 5 पथ, यथाः पथ संख्या- 1, 3, 4, 5 तथा 7 के संबंध में गठित किया है। बचाव में आरोपी द्वारा इस आरोप पर कछ भी specific नहीं कहा गया है और उसी समान्य bag of defence जिसमें हर आरोपी के संबंध में यह कहा गया है कि कार्य चालू अवस्था में था, इसलिए त्रुटियों का निराकरण संवेदक के माध्यम से करा लिया जाएगा, में इस आरोप, जो 5 पथाेंं पर विशिष्टि रूप से पाये जाने की वजह से निरीक्षण प्रतिवेदन में अंकित है, पर एक तरह से आरोपित अपने बचाव में मौन रहे है। अतः इस आरोप के साबित होने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। इस प्रकार से जाँच आयुक्त ने 5 पथों से संबंधित समरूप आरोपों को प्रमाणित माना है।
विभाग द्वारा गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन एवं आरोपित के बचाव बचान के समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त के निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की गयी तथा आरोपों को प्रमाणित माना गया।28 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 II (F) द्वितीय आरोप पत्र का आरोप संख्या 6ः WBM Grade-III कार्य की मोटाई एवं Compaction विशिष्टि के अनुरूप नहीं पाया गया। WBM कार्य में Binding material 50 प्रतिशत से अधिक पाया गया। WBM कार्य में प्रयुक्त Metal oversize पाए गए। Soling कार्य के उपर मात्र 50mm-75mm thick GSB कार्य किया गया है। जांच में दो स्थानों पर Road Crust की समेकित मोटाई प्रावधान 475mm के विरूद्ध क्रमशः 210mm तथा 230 mm पाई गई। C.C. Pavement का thickness मध्य में किनारे से कम है। PMC की मोटाई दो स्थानो पर 15mm तथा 20mm पाई गईः इस ढंग का आरोप कुल 3 पथ, यथाः पथ संख्या- 3, 4 तथा 6 के संबंध में गठित किया गया है। इसी आरोप के अंतर्गत निम्नलिखित अंश सन्निहित है, जिनका बचाव और इसके आलोक में विश्लेषण निम्नवत् हैः वस्तुतः इस आरोप में एक अंश पथ की विभिन्न परत यथा WBM Grade-III या Road Crust की समेकित मोटाई निर्धारित प्रावधान से कम पाये जाने से संबंधित है। इस आरोप में दूसरा अंश पथ संख्या-3 में WBM कार्य में Binding material 50 प्रतिशत से अधिक पाया जाना और WBM कार्य में प्रयुक्त Metal oversize पाये जाने से संबंधित है।
आरोपित पदाधिकारी द्वारा इस अंश के संबंध में निगरानी विभाग के परिपत्र मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के पत्रांकः 1389, दिनांक 16.08.94 के आड़ मेें बचाव रखने का प्रयास किया गया है, उसी प्रकार जिस प्रकार उन्होंने प्रथम आरोप पत्र के खंड- 'A' में जी.एस.बी. परत में मोटाई कम पाये जाने के आरोप पर किया था। निगरानी विभाग के परिपत्र की प्रासंगिकता एवं उसके spirit के आलोक में कहां तक आरोपित द्वारा उस परिपत्र की आड़ में प्रस्तुत किया गया बचाव मान्य हो सकता है, इसका विस्तृत विश्लेषण प्रथम आरोप पत्र के आरोप संख्या-1 के संदर्भ में कंडिका-5.1.2.1 में उपर किया जा चुका है। इस विश्लेषण से यह भली-भांति दिखलाया गया है कि आरोपित के द्वारा इस परिपत्र का संदर्भ मात्र यांत्रिक और misleading रूप से रखने का प्रयास किया गया है, जो विषयगत मामले की specific facts and circumstances के परिप्रेक्ष्य में अस्वीकार्य है। वही विश्लेषण यहां भी आरोपित के द्वारा उसी परिपत्र के हवाले से दिये गये बचाव के लिये भली-भांति लागू माना जायेगा, और उसके आलोक में उनका प्रस्तुत बचाव स्वीकार नहीं किया जा सकता है। आरोपित द्वारा दूसरे बिन्दु पर कोई विशिष्ट उत्तर नहीं दिया गया है और किसी ढंग से कोई विचारणीय प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया है। अतः यह अंश स्थापित होता है। इस प्रकार से विभागीय जाँच आयुक्त ने 3 पथों से संबंधित समरूप आरोपों को प्रमाणित माना है।
विभाग द्वारा गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन एवं आरोपित के बचाव बचान के समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त के निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की गयी तथा आरोपों को प्रमाणित माना गया। II (G) द्वितीय आरोप पत्र का आरोप संख्या 7ः सात कालीकरण कार्य में Primer coat का उपयोग नहीं किया गया हैं। Premix carpet की पूरी लंबाई में Seal coat कार्य नहीं पाया गया। पथ के पूरी लंबाई में Seal coat नहीं पाया गया किंतु इसका भुगतान किया गया है। इस प्रकार सरकारी राशि की बड़े पैमाने पर क्षति हुई है।
इस ढंग का आरोप कुल 2 पथ, यथाः पथ संख्या- 3 तथा 4 के संबंध में गठित किया गया है। इन आरोपों पर भी आरोपित के द्वारा अपने बचाव में कुछ भी विशिष्ट रूप से नहीं कहा गया है, सिवाय वही सामान्य बात कि त्रुटियों को बताया गया है, जिनका निराकरण कर लिया जायेगा। परंतु ये त्रुटियां, जिसमें उदाहरण स्वरूप ऐसी गंभीर अनियमितता इंगित है कि Premix carpet की पुरी लंबाई में Seal coat कार्य नहीं पाया गया, आदि क्यों हुई। उसका कोई तार्किक और convincing बचाव आरोपित से प्रस्तुत नहीं है, अतः आरोप स्थापित मानने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। इस प्रकार से विभागीय जाँच आयुक्त ने 3 पथों से संबंधित समरूप आरोपों को प्रमाणित माना है।
विभाग द्वारा गठित आरोप, संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन एवं आरोपित के बचाव बयान के समीक्षोपरांत विभागीय जाँच आयुक्त के निष्कर्ष से सहमति व्यक्त की गयी तथा आरोपों को प्रमाणित पाया गया। 4. निष्कर्षः इस प्रकार प्रथम आरोप पत्र में कुल 13 आरोप थे जिसमें खंड 'ए' में कुल 6 आरोप, खंड 'बी' में कुल 5 आरोप खंड सी' में कुल 1 आरोप प्रमाणित बताया गया, खंड 'डी' में 1 आरोप प्रमाणित नहीं बताया गया एवं द्वितीय आरोप पत्र में 11 पथों के संबंध में कुल 39 आरोप लगाये गये, जिसमें 22 आरोप प्रमाणित पाया गया, 6 आरोप आंशिक रूप से प्रमाणित पाया गया तथा 11 आरोप प्रमाणित नहीं पाये गये।29 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 5. जॉच प्रतिवेदन के आधार पर श्री प्रसाद से विभागीय पत्रांक 1370 दिनांक 09.04.2013 एवं पत्रांक 1374 दिनांक 10.04.2013 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की मांग बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 की कंडिका 18 में किये गये प्रावधान के आलोक में की गयी। श्री प्रसाद से द्वितीय कारण पृच्छा विभाग को उनके पत्रांक 196 दिनांक 06.05.2013 द्वारा प्राप्त हुआ। अपने द्वितीय कारण पृच्छा में उनके द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 की कंडिका 18 की उप कंडिका (3) में उल्लेखित ''अनुशासनिक प्राधिकार जाँच प्रतिवेदन की प्रतिलिपि उप नियम 2 में यथा उपबंधित स्वयं के निष्कर्ष, यदि कोई हो, के साथ सरकारी सेवक को भेजेगा या भेजवायेगा, जो यदि वह ऐसा चाहे, अपना लिखित अभ्यावेदन या निवेदन अनुशासनिक प्राधिकार को 15 दिनों के अंदर समर्पित कर सकेगा।'' का उल्लेख करते हुए उल्लेखित किया है कि संचालन पदाधिकारी के मंतव्य पर विभाग द्वारा किसी प्रकार का स्वयं का निष्कर्ष गठित नहीं किया गया है। विभाग द्वारा मात्र यह अंकित किया गया है कि आरोप प्रमाणित, आंशिक प्रमाणित /प्रमाणित होते हैं।
6. विभाग द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के इस बिन्दू की समीक्षा किये जाने के उपरांत यह पाया गया कि श्री प्रसाद के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के संबंध में विभागीय जाँच आयुक्त से प्राप्त प्रतिवेदन के निष्कर्षो से पूर्ण सहमति प्रकट की गयी। चॅूंकि विभाग द्वारा किसी भी बिन्दू पर विभागीय जाँच आयुक्त के प्रतिवेदन से असहमति व्यक्त नहीं की गयी, अतः संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन के साथ असहमति के बिन्दू को भेजा जाना अप्रासंगिक है। इस प्रकार श्री प्रसाद द्वारा उल्लेख किये गये इस बिन्दू, कि विभागीय जाँच आयुक्त के प्रतिवेदन के साथ विभागीय असहमति के बिन्दूओं को उपलब्ध नहीं कराया गया, में कोई तथ्य नहीं है। आरोपी पदाधिकारी का यह कथन एक प्रकार से आरोप की स्वीकारोक्ति का घोतक है। इसके अतिरिक्त इस मामले में यह भी पाया गया कि सरकारी राशि की बड़े पैमाने पर क्षति हुई है, जिसका आकलन कर उसकी वसूली श्री प्रसाद से की जानी है।
7. माननीय उच्च न्यायालय में दायर MJC संख्या 2514/2011 में दिनांक 03.04.2013 को पारित आदेश के क्रम में श्री प्रसाद के द्वारा यह उल्लेखित किया गया है कि ''संचालन पदाधिकारी का मंतव्य अब विभाग को प्राप्त हो चुका है, जिस पर निर्णय प्रशासी विभाग के स्तर से लिया जाना है। उल्लेखनीय है कि मेरा प्रशासी विभाग जल संसाधन विभाग है, अतः न्यायादेश के आलोक में जल संसाधन विभाग द्वारा कार्रवाई अपेक्षित है।''
8. ग्रामीण कार्य विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या 1002 दिनांक 22.02.08 में किये गये प्रावधान के अनुसार बृहत दंड देने की शक्ति पैतृक विभाग को प्रदत्त है, अतएव श्री प्रसाद से संबंधित संचिका के पत्राचार/टिप्पण भाग की छाया प्रति उनके पैतृक विभाग अर्थात् जल संसाधन विभाग को विभागीय पत्रांक 2729 अनु0 दिनांक 23.07. 2013 द्वारा अग्रेतर कार्रवाई करने हेतु भेजी गया।
9. जल संसाधन विभाग द्वारा अपने स्तर से कार्रवाई करते हुए उनके विभागीय पत्रांक 171 दिनांक 03.02. 2014 द्वारा उक्त दंड के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान करने का अनुरोध बिहार लोक सेवा आयोग से किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 2523 लो॰से॰आ॰ दिनांक 14.02.2014 द्वारा दंड के प्रस्ताव पर सहमति दी गयी, परंतु वितीय क्षति का आकलन विभागीय स्तर पर ही करने का मंतव्य दिया गया, क्योकि यह विभाग का आंतरिक मामला है एवं इसमें आयोग के परामर्श की आवश्यकता नहीं होती है।
10. जल संसाधन विभाग के पत्रांक 311 अनु॰ दिनांक 12.03.2014 द्वारा इस विभाग को यह सूचित किया गया कि जल संसाधन विभाग के संकल्प ज्ञाप संख्या 160 दिनांक 23.01.2014 द्वारा जल संसाधन संवर्ग के अभियंताओ को उनके वर्तमान कार्यरत विभाग के आधार पर उसी विभाग में आवंटित कर दिया गया है, जिसमें वे कार्यरत है। इसी आधार पर श्री प्रसाद का पैतृक विभाग ग्रामीण कार्य विभाग मानते हुए पुनः उनके विरूद्व कार्रवाई करने हेतु प्रस्ताव इस विभाग को लौटा दिया गया। इस प्रकार श्री प्रसाद का पैतृक विभाग ग्रामीण कार्य विभाग ही है तथा वह श्री प्रसाद के विरूद्ध कार्रवाई हेतु सक्षम विभाग है। श्री प्रसाद द्वारा दिये गये द्वितीय कारण पृच्छा में इस बिन्दू, कि उनके विरूद्ध कार्रवाई का निर्णय प्रशासी विभाग के स्तर से लिया जाना है, भी अप्रासंगिक है तथा इस बिन्दू पर उनका बचाव वयान स्वीकार योग्य नहीं है।
11. श्री प्रसाद द्वारा दियेे गये द्वितीय बचाव वयान में यह भी उल्लेख किया गया कि उनके द्वारा पूर्व में अपना स्पष्टीकरण दिया गया है जिसमें अनेक तकनीकी बिन्दू हैं तथा उस पर विचार आवश्यक है। इस बिन्दू के संदर्भ में उल्लेखनीय है कि विभागीय जाँच आयुक्त द्वारा पूर्ण विश्लेषण कर अपना जाँच प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध30 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 कराया गया तथा विभाग द्वारा समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन से पूर्ण सहमति व्यक्त की गयी। आरोपी पदाधिकारी को द्वितीय बचाव वयान उपलब्ध कराने हेतु संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की प्रति भी उपलब्ध करायी गई। उनके द्वारा दिनांक 06.05.2013 को दिये गये बचाव वयान में किसी विशिष्ट तकनीकी तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया। अतः इस बिन्दू पर भी उनका बचाव वयान स्वीकार योग्य नहीं है।
12. श्री नन्द किशोर प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को प्रमाणित गंभीर आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 की कंडिका-14 (IX) के तहत बृहत् दंड (सेवाच्युति) {Removal from Service} की शास्ति अधिरोपित करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति प्राप्त है। 13. अतः उक्त आलोक में श्री नन्द किशोर प्रसाद, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को प्रमाणित गंभीर आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 की कंडिका-14 (IX) के तहत बृहत् दंड (सेवाच्युति) {Removal from Service} की शास्ति अधिरोपित की जाती है।
14. विभागीय अधिसूचना संख्या 1075 दिनांक 01.04.2014 को इस हद तक संशोधित समझा जाए।
बिहार-राज्यपाल के आदेष से, काषीनाथ सिंह, विषेष सचिव।
———
i'kq ,oa eRL; lalk/ku foHkkx
———
vf/klwpuk
5 flrEcj 2014
सं॰ 5निसं॰ 5निसं॰ 5निसं॰ 5नि....गोगोगोगो....वि(5) 21/14-618 नि॰गो॰वि(5) 21/14-618 नि॰गो॰वि(5) 21/14-618 नि॰गो॰वि(5) 21/14-618 नि॰गो॰—डॉ॰ पूनम प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन परियोजना पदाधिकारी, विदेषी पषु प्रजनन प्रक्षेत्र, पटना को विदेषी पषु प्रजनन प्रक्षेत्र में जमीन उपलब्धता के बावजूद हरा चारा का उत्पादन नहीं कराने, दूध उत्पादन बढ़ाने का प्रयास नहीं करने एवं विसूखी गायों को कृत्रिम गर्भाधान नहीं कराने के आरोप में विभागीय अधिसूचना संख्या-170 नि.गो. दिनांक-20.03.2014 द्वारा तत्कालीक प्रभाव से निलंबित किया गया तथा विभागीय संकल्प 232 नि.गो. दिनांक-11.04.2014 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
2. डॉ. सिन्हा के विरूद्ध कोई वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं रहने के कारण सरकार द्वारा मामले की समीक्षा की गयी एवं समीक्षोपरान्त डॉ. सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करने का निर्णय लिया गया है।
3. अतः उक्त निर्णय के आलोक में डॉ. पूनम प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन परियोजना पदाधिकारी, विदेषी पषु प्रजनन प्रक्षेत्र, पटना को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए क्षेत्रीय निदेषक, पषुपालन उत्तर बिहार क्षेत्र, मुजफ्फरपुर के पद पर पदस्थापित किया जाता है।
4. डॉ. सिन्हा के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित अधिगम के आलोक में निलंबन अवधि के संबंध में अंतिम रूप से निर्णय लिया जाएगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, ब्रजेश्वर पाण्डेय, अवर सचिव।
———
पर्यावरण एवं वन विभाग
———
अधिसूचना
5 सितम्बर 2014
सं॰ बि०व०से० (आ०)-02/2011/2624/प०व०—श्री राम किशोर राम, बि०व०से०, तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी, कैमूर (भभुआ) के विरूद्ध विभागीय ज्ञापांक 2192 दिनांक 03.08.2011 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक-सह-जाँच पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के पत्रांक 419 दिनांक 06.06.2013 द्वारा प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षोपरांत आरोप संख्या-1 के लिए श्री राम द्वारा आवंटन उपलब्ध कराने में अनावश्यक विलंब करने के लिए दोषी पाया गया हैं। अतः श्री राम किशोर राम, बि०व०से०, तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी, कैमूर (भभुआ) सम्प्रति सहायक वन संरक्षक, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को निष्पादन करते हुए लघुशास्ति के रूप में ''निन्दन'' की सजा दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, रत्नेश झा, उप-सचिव।31 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014
सं॰ 08/आरोप-01-44/2014-12693सा॰प्र॰
सामान्य प्रषासन विभाग
———
संकल्प
12 सितम्बर 2014
श्री श्ांभु नाथ सिंहा, बि॰प्र॰से॰, तत्कालीन उपाध्यक्ष, मुजफ्फरपुर, क्षेत्रीय, प्राधिकार सम्प्रति सेवानिवृत्त के विरूद्ध मुजफ्फरपुर क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के उपाध्यक्ष पद पर अपने पदस्थापन काल के दौरान स्वी—त कार्यो को खंडित कर प्राक्कलन की स्वी—ति करने, निविदा का सही प्रकाशन नहीं करने, अग्रिम समायोजन नहीं करने आदि का आरोप प्रपत्र 'क' में नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना द्वारा प्रतिवेदित किया गया। श्री सिंहा के विरूद्ध प्रतिवेदित उक्त आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक-478, दिनांक 11.02.2009 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गई। श्री सिंहा से प्राप्त स्पष्टीकरण पर विभागीय पत्रांक-989, दिनांक 29.01.2010 द्वारा नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना से मंतव्य की माँग की गई। उनके पत्रांक-1474, दिनांक 15.07.2011 द्वारा निगरानी विभाग से सूचना प्राप्त होते ही मंतव्य उपलब्ध कराने का पत्र दिया गया। श्री सिन्हा दिनांक 30.01.2006 को वार्धक्य सेवानिवृत्त हुए। विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6159, दिनांक 01.06.2011 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी॰) के तहत उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने का निर्णय लिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा पत्रांक-697, दिनांक 27.08.2012 से जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित विस्तृत जाँच प्रतिवेदन में विभागीय नियमन एवं माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा सी॰डब्ल्यू॰ जे॰सी॰सं॰-12943/2000 में दिनांक 10.05.2010 को पारित आदेश के आलोक में विभागीय कार्यवाही कालबाधित होने के कारण संचालन योग्य नहीं पाया गया। बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही आरंभ करने की तिथि से 4 वर्ष पहले की घटना के लिए आरोप कालबाधित के श्रेणी में होने के कारण विभागीय कार्यवाही नहीं चलायी जा सकती है, का मंतव्य प्रतिवेदित किया गया। उपर्युक्त परिपेक्ष्य में अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा पूरे मामलें की सम्यक् रूप से समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि प्रतिवेदित आरोप वर्ष 2000-01 से 2004-05 की पदस्थापन अवधि का है एवं विभागीय जाँच हेतु संकल्प दिनांक 01.06.2011 को निर्गत किया गया है। अतएव संचालन पदाधिकारी सह जाँच पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए मामला कालबाधित होने के कारण आरोप संचिकास्त किया जाता है।
आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, अपर सचिव।
———
पथ निर्माण विभाग
——— अधिसूचनाएं 28 जून 2013 सं0 निग/सारा-5 (पथ)-3013/02-5124 (एस)—श्री परमानन्द मिश्र, तत्कालीन कार्यपलक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मुजफ्फरपुर सम्प्रति दिनांक-31.07.02 को सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में बिना स्वीकृत प्राक्कलन के व्यय करने, अस्थायी अग्रिमों का समायोजन नहीं करने आदि आरोपों (आरोप वर्ष-2000-01 एवं 2001-02) के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-11845 दिनांक 14.10.06 द्वारा विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। पुनः उक्त पदस्थापन काल से ही संबंधित निविदा का प्रचार-प्रसार नियमानुकूल नहीं करने आदि आरोपों को अनुपूरक आरोप पत्र के रूप में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10744 (एस) अनु0 दिनांक-21.07.10 द्वारा पूर्व संचालित विभागीय कार्यवाही में समाहित किया गया। 2. विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त के पत्रांक-699 दिनांक 27.08.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप के विभागीय कार्यवाही संस्थित होने के 4 वर्ष से अधिक पूर्व के होने एवं सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रंक-1893 दिनांक 14.06.11 के आलोक में विभागीय कार्यवाही के कालबाधित होने के कारण चलाने योग्य नहीं होने का मंतव्य दिया गया। 3. अतएव समीक्षोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय जाँच आयुक्त के प्रतिवेदन के आलोक में श्री परमानन्द मिश्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही को बन्द करते हुए इन्हें आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।32 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014
6 फरवरी 2014
सं॰ निग/सारा-2 (परिवाद)-4/2012-992 (एस)—श्री बीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना सम्प्रति निलंबित को अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना के पदस्थापन काल में सचिव के समक्ष गलत बयानी कर भ्रमित करने का प्रयास एवं कार्य के प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारित जैसी बरती गयी अनियमितता के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-2637 (एस) दिनांक 07.03.12 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5731 (एस) अनु0 दिनांक 24.05.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-4209 अनु0 दिनांक 08.08.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में सचिव के समक्ष गलत बयानी कर भ्रमित करने के प्रयास के आरोप को आंशिक रूप से प्रमाणित एवं स्वेच्छाचारित के संबंध में पूर्व में मौखिक चेतावनी दिये जाने का उल्लेख किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलगन करते हुए आंशिक रूप से प्रमाणित/प्रमाणित आरोप के संदर्भ में हीं श्री कुमार से निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में विभागीय पत्रांक-9937 (एस) दिनांक 27.12.13 द्वारा कारण पृच्छा की मांग की गयी। 3. श्री कुमार, निलंबित कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-शून्य (अनु0) दिनांक 15.01.14 द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में अपना कारण पृच्छा विभाग में समर्पित किया गया। श्री कुमार के निलंबन अवधि के संबंध में कारण पृच्छा के बचाव वयान के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री कुमार को सरकारी कार्य में लापरवाही एवं विभाग द्वारा निर्गत अनुदेशों की अवहेलना करने जैसी बरती गयी अनियमितता के लिए निलंबित किया गया था। अतएव इनके विरूद्ध सरकारी राशि के दुरूपयोग या गबन का आरोप नहीं है। अतः श्री कुमार द्वारा इस दिशा में ध्यान आकृष्ट करने का कोई औचित्य नहीं है। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने समीक्षात्मक प्रतिवेदन में आरोप संख्या-1-'क' को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया है और इसी परिपेक्ष्य में श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा एवं निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में कारण पृच्छा की गयी। श्री कुमार के निलंबन एवं विभागीय कार्यवाही से संबंधित आदेश पर पुनर्विचार हेतु श्री कुमार द्वारा दिया गया अभ्यावेदन एवं स्मार पर विभागीय समीक्षोपरांत विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर निर्णय लिया जाना सुनश्चित किया गया। यह भी तथ्य है कि श्री राज नारायण चौधरी, अधीक्षण अभियंता के निलंबन आदेश को माननीय न्यायालय द्वारा वगैर विभागीय पक्ष जाने हुए stay किया गया। इस आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-1183 (एस) दिनांक 14.02.13 द्वारा श्री चौधरी के निलंबन आदेश को स्थगित रखा गया। श्री चौधरी के संबंध में माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश को vacate करने/modification दायर करने के बिन्दु पर विधि विभाग का मंतव्य प्राप्त किया गया और तदनुसार समीक्षोपरांत श्री कुमार के निलंबन आदेश के संबंध में विभागीय कार्यवाही के उपरांत निर्णय लेने का निश्चय किया गया। जहाँ तक श्री कुमार द्वारा दृष्टांत के रूप में यह कहा गया है कि इसकी प्रासंगिकता इस कारण नहीं है कि श्री कुमार को किसी दबाव में निलंबित करते हुए उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित नहीं की गयी, बल्कि उनके द्वारा कार्यों में की गयी लापरवाही, सचिव को गलत वयान देने के लिए निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी है। सारतः श्री कुमार द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है।
4. अतएव श्री बीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना सम्प्रति निलंबित द्वारा निलंबन अवधि के संबंध में समर्पित कारण पृच्छा को असंतोषजनक पाते हुए सरकार के निर्णयानुसार श्री कुमार के निलंबन अवधि के लिए मात्र जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान, परन्तु अन्य प्रयोजनार्थ इसे कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में विनियमित करने का आदेश दिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
18 फरवरी 2014
सं॰ निग/सारा-6 (आरोप) द0वि0 (ग्रा0)-145/08-1400 (एस)—श्री विजय कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पदस्थापन की प्रतीक्षा में, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल में इनके द्वारा गलत ढंग से निविदा निकालकर अपने चहेते संवेदकों को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाते हुए श्री कुमार सरोज, ग्रा0पो0-बाराखूर्द, जिला-नालंदा द्वारा माननीय लोकायुक्त कार्यालय में परिवाद पत्र समर्पित किया गया। परिवाद पत्र में लगाए गए आरोपों की जाँच माननीय लोकायुक्त के आदेशोपरांत तकनीकी परीक्षण कोषांग द्वारा की गई। तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा निविदा की कार्रवाई अस्वस्थकर एवं साँठ-गाँठ पूर्ण नहीं पाया गया।
2. इसी बीच एक दूसरे आवेदक श्री शंभू शर्मा ने शपथ पत्र के साथ माननीय लोकायुक्त के समक्ष यह परिवाद दिया कि दिनांक 04.12.04 को "हिन्दुस्तान टाईम्स" में निविदा का प्रकाशन नहीं किया गया। तदोपरांत माननीय लोकायुक्त ने आरोपित पदाधिकारी श्री विजय कुमार, कार्यपालक अभियंता को दिनांक 04.12.04 को प्रकाशित "हिन्दुस्तान टाइम्स" एवं "प्रभात खबर" की प्रति उपलब्ध कराने का निदेश दिया। श्री विजय कुमार ने माननीय लोकायुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर बताया कि दैनिक "प्रभात खबर" एवं "हिन्दुस्तान टाईम्स" की एक-एक प्रति उन्हें श्री संजय कुमार, सहायक अभियंता एवं श्री जगदीश प्रसाद, कनीय अभियंता द्वारा उपलब्ध कराया गया था, जिनमें निविदा संबंधी सूचना प्रकाशित थी। सहायक अभियंता33 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 और कनीय अभियंता ने भी संस्थान में उपस्थित होकर कार्यपालक अभियंता के कथन की पुष्टि की, तदोपरांत माननीय लोकायुक्त ने तकनीकी परीक्षक कोषांग को निविदा प्रकाशन एवं कार्रवाई का सत्यापन का निदेश दिया।
3. तकनीकी परीक्षक कोषांग के कार्यपालक अभियंता ने प्रतिवेदित किया कि सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग से प्राप्त सूचना के अनुसार निविदा प्रकाशन हेतु कार्यपालक अभियंता, बिहारशरीफ द्वारा सूचना एवं जन-सम्पर्क विभाग सेे अनुरोध किया गया था, लेकिन पुनः निविदा स्थगित करने का अनुरोध किये जाने के कारण निविदा प्रकाशन हेतु प्रेस में नहीं दिया गया और तत्संबंधी सूचना कार्यपालक अभियंता को पत्रांक-7133 दिनांक 03.12.04 के द्वारा निबंधित डाक से दे दी गई थी। साथ हीं, संबंधित समाचार पत्रों के कार्यालय में छान-बीन के उपरांत कार्यपालक अभियंता, तकनीकी परीक्षक कोषांग द्वारा अपने निष्कर्ष में प्रकाशित निविदा को जाली करार दिया गया।
4. माननीय लोकायुक्त द्वारा प्रथम द्रष्टया आरोप प्रमाणित पाते हुए श्री कुमार सहित अन्य संबंधितों के विरूद्ध बिहार लोकायुक्त अधिनियम 1973 की घारा-10 (1) (क) के अंतर्गत कार्रवाई के उपरांत बिहार लोकायुक्त अधिनियम 1973 की घारा-12 (3) के तहत इस विषय की वृहद जाँच कर दोषी पाये जाने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित करने का आदेश पारित किया गया, जो लोकायुक्त कार्यालय के पत्रांक-52 दिनांक 01.05.06 द्वारा ग्रामीण विकास विभाग को उपलब्ध कराया गया।
5. ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-8796 दिनांक 31.10.08 द्वारा निविदा से संबंधित निविदा आमंत्रण सूचना दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित कराये बिना समाचार पत्र के जाली पृष्ठों के आधार पर निविदा निष्पादन कर निविदा प्रक्रिया को गंभीर रूप से दूषित करते हुए संवेदक विशेष को अवैध लाभ पहुँचाने के दृष्टिकोण से अपराधिक साँठ-गाँठ एवं कदाचार के आरोप के लिए श्री विजय कुमार सहित अन्य संबंधित अभियंताओं के विरूद्ध आरोप पत्र प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने की अनुशंसा की गई।
6. ग्रामीण कार्य विभाग से अनुशंसा के आलोक में श्री कुमार के विरूद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 17 के अधीन विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3405 (एस) दिनांक 10.03.10 द्वारा दो आरोपों के लिए विभागीय जाँच आयुक्त के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित की गई।
7. विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-53 दिनांक 24.04.12 द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया गया जिसमें श्री कुमार के विरूद्ध लगाए गये दोनों आरोप प्रमाणित प्रतिवेदित किये गये। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते हुए श्री कुमार से प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक-7292 (एस) अनु0 दिनांक 27.06.12 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री कुमार ने अपने पत्रांक-़शून्य दिनांक 10.04.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित किया गया, जिसके समीक्षोपरांत पाया गया कि इनके द्वारा संवेदक विशेष को लाभ पहुंचाने के उद््देश्य से अधीक्षण अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता की मिली भगत से निविदा निष्पादन की प्रक्रिया को गंभीर रूप से दूषित किया गया है तथा कर्तव्यहीनता एवं लापरवाही बरती गई है। यह इस तथ्य से भी प्रमाणित होता है कि इनके द्वारा सहायक अभियंता तथा कनीय अभियंता को दिनांक 02.12.04 से दिनांक 04.12.04 की अवधि के लिए अनाधिकृृत रूप से मुख्यालय से पटना जाने हेतु allow किया गया था,जिस अवधि में दोनों सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता द्वारा पटना जंक्शन से जाली अखबार की प्रति लाकर इन्हें दी गई। इस प्रकार पाया गया कि श्री कुमार अपने विरूद्ध लगाये गये आरोपों के विरूद्ध कोई नया तथ्य नहीं दे पाये, जो उन्हें निर्दोष साबित करता हो।
8. तदोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) (संशोधन) नियमावली, 2007 के नियम 14 (xi) में निहित प्रावधानों के आलोक में श्री विजय कुमार के विरूद्ध प्रमाणित आरोपों के लिए सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया। सरकार के उक्त निर्णय पर पत्रांक-2667 (एस) अनु0 दिनांक 03.04.13 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गई। बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक 908 दिनांक 25.07.2013 द्वारा श्री कुमार को सेवा से बर्खास्त करने संबंधी प्रस्तावित दंड पर सहमति व्यक्त किया गया। तदोपरांत प्रस्तावित दंड पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति प्राप्त की गई।
9. अतएव श्री विजय कुमार, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पदस्थापन की प्रतीक्षा में, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित गंभीर आरोपों के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) (संशोधन) नियमावली, 2007 के नियम 14 (xi) में निहित प्रावधानों के अनुसार सेवा से बर्खास्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
21 फरवरी 2014
सं० निग/सारा -उड़नदस्ता-आरोप-40/2009-1545 (एस)—श्री योगेन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति परियोजना अभियंता, विश्व बैंक परियोजना विशेष प्रमंडल, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना द्वारा पथ प्रमंडल, सुपौल अंतर्गत नारायणपुर चौक एन॰एच॰-57 झिल्ला से करजाईन बाजार तक एवं एन0एच0-106 पथ के विभिन्न पथांशाें में क्रॉस डे्रनेज, पथ बचाव कार्य सहित आई0आर0 क्यू0 पी0 कार्य 2008-09 की निविदा में financial bid खोलने एवं दरों में हेरा-फेरी करने के आरोपों की उड़नदस्ता प्रमंडल सं0-2 द्वारा जाँचोपरांत34 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर इनको बुलाकर सुना गया तथा इनका कोई defence नहीं पाए जाने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-4758 (एस) दिनांक 15.05.09 द्वारा इन्हें निलंबित करते हुए इनके विरूद्ध आरोप प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय पत्रांक-7787 (एस)डब्लू0ई0 दिनांक 15.07.09 द्वारा इनसे बचाव वयान की मांग की गई। श्री कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के आवेदन दिनांक 20.07.09 द्वारा समर्पित बचाव वयान के समीक्षोपरांत इसे स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12102 (एस) दिनांक 29.10.09 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-6286/2010 योगेन्द्र कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 05.08.10 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में श्री कुमार की व्यक्तिगत सुनवाई के उपरांत विभागीय मुखर एवं सकारण आदेश सं0-13706 (एस) दिनांक 15.09.10 द्वारा इन्हें निलंबन से मुक्त किया गया। 3. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अपर विभागीय जाँच आयुक्त) के पत्रांक-248 दिनांक 01.08.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में इनके विरूद्ध गठित कुल 4 (चार) आरोपों में से आरोप सं0-1 से 3 तक को अप्रमाणित तथा आरोप सं0-4 को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पर विचारोपरान्त प्रमाणित पाए गए आरोप के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-11998 (एस)डब्लू0ई0 दिनांक 14.11.12 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। 4. श्री कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के पत्रांक-54 दिनांक 28.11.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर विभागीय तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। विभागीय तकनीकी समिति ने श्री कुमार के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को मान्य नहीं पाया। 5. तदआलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-5302 (एस) दिनांक 05.07.13 द्वारा इन्हें निम्न दंड संसूचित किया गया :- (1) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। (2) इनकी निलंबन की अवधि दिनांक 15.05.09 से 14.09.10 तक के विनियमन के संबंध में इनसे अलग से कारण पृच्छा पूछकर निर्णय लिया जाएगा। 6. श्री कुमार के पत्रांक-41 दिनांक 02.08.13 द्वारा उक्त दंडादेश के विरूद्ध पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया। श्री कुमार द्वारा समर्पित पुनर्विलोकन अर्जी के समीक्षोपरांत पाया गया कि इन्होंने पूर्व के बचाव वयान की बातें ही मूल रूप से कही है तथा सार रूप में अंकित किया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा इनके बचाव वयान को सही संदर्भ में विश्लेषित नहीं किया गया। श्री कुमार के बचाव वयान की तकनीकी समीक्षा कराते हुए तथा इनके बचाव वयान को असंतोषजनक पाते हुए इनके विरूद्ध दंड अधिसूचना निर्गत की गयी, जो सुविचारित है। श्री कुमार ने अपने पुनर्विचार आवेदन में ऐसा कोई नया तथ्य नहीं दिया है जिसके आलोक में अधिसूचित दंड पर पुनर्विचार किया जा सके। 7. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री कुमार के पुनर्विचार आवेदन पत्रांक-41 दिनांक 02.08.13 को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
21 फरवरी 2014
सं० निग/सारा -उड़नदस्ता-आरोप-40/2009-1547 (एस)—श्री योगेन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, सुपौल सम्प्रति परियोजना अभियंता, विश्व बैंक परियोजना विशेष प्रमंडल, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना द्वारा पथ प्रमंडल, सुपौल अंतर्गत नारायणपुर चौक एन॰एच॰-57 झिल्ला से करजाईन बाजार तक एवं एन0एच0-106 पथ के विभिन्न पथांशाें में क्रॉस डे्रनेज, पथ बचाव कार्य सहित आई0आर0 क्यू0 पी0 कार्य 2008-09 की निविदा में financial bid खोलने एवं दरों में हेरा-फेरी करने के आरोपों की उड़नदस्ता प्रमंडल सं0-2 द्वारा जाँचोपरांत समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर इनको बुलाकर सुना गया तथा इनका कोई defence नहीं पाए जाने के फलस्वरूप विभागीय अधिसूचना संख्या-4758 (एस) दिनांक 15.05.09 द्वारा इन्हें निलंबित करते हुए इनके विरूद्ध आरोप प्रपत्र-'क' गठित कर विभागीय पत्रांक-7787 (एस)डब्लू0ई0 दिनांक 15.07.09 द्वारा इनसे बचाव वयान की मांग की गई। श्री कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के आवेदन दिनांक 20.07.09 द्वारा समर्पित बचाव वयान के समीक्षोपरांत इसे स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-12102 (एस) दिनांक 29.10.09 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. सी0डब्लू0जे0सी0 सं0-6286/2010 योगेन्द्र कुमार बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 05.08.10 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में श्री कुमार की व्यक्तिगत सुनवाई के उपरांत विभागीय मुखर एवं सकारण आदेश सं0-13706 (एस) दिनांक 15.09.10 द्वारा इन्हें निलंबन से मुक्त किया गया। 3. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी (अपर विभागीय जाँच आयुक्त) के पत्रांक-248 दिनांक 01.08.12 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में इनके विरूद्ध गठित कुल 4 (चार) आरोपों में से आरोप सं0-1 से 3 तक को अप्रमाणित तथा आरोप सं0-4 को प्रमाणित पाया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पर विचारोपरान्त प्रमाणित पाए गए आरोप के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-11998 (एस)डब्लू0ई0 दिनांक 14.11.12 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई।35 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 4. श्री कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता के पत्रांक-54 दिनांक 28.11.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर विभागीय तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। विभागीय तकनीकी समिति ने श्री कुमार के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को मान्य नहीं पाया। 5. तदआलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-5302 (एस) दिनांक 05.07.13 द्वारा इन्हें निम्न दंड संसूचित किया गयाः- (1) दो वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। (2) इनकी निलंबन की अवधि दिनांक 15.05.09 से 14.09.10 तक के विनियमन के संबंध में इनसे अलग से कारण पृच्छा पूछकर निर्णय लिया जाएगा। 6. श्री कुमार, सहायक अभियंता के निलंबन अवधि दिनांक 15.05.09 से 14.09.10 तक के विनियमन के संबंध में विभागीय पत्रांक-7250 (एस) अनु0 दिनांक 10.09.13 द्वारा कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री कुमार के पत्रांक-53 दिनांक 16. 09.13 द्वारा निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में कारण पृच्छा समर्पित की गयी। श्री कुमार द्वारा समर्पित निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत पाया गया कि इन्होंने पूर्व के बचाव वयान की बातें ही मूल रूप से कही है तथा सार रूप में अंकित किया है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा इनके बचाव वयान को सही संदर्भ में विश्लेषित नहीं किया गया। श्री कुमार के बचाव वयान की तकनीकी समीक्षा कराते हुए तथा इनके बचाव वयान को असंतोषजनक पाते हुए इनके विरूद्ध दंड अधिसूचना निर्गत की गयी, जो सुविचारित है।
यह भी पाया गया कि श्री कुमार ने इस बचाव वयान में भी पूर्व के बचाव वयान एवं पुनर्विचार आवेदन में कही गयी बातों का उल्लेख किया है। फलस्वरूप इनके कारण पृच्छा उत्तर में भी ऐसा कोई तथ्य नहीं पाया गया जिसके आधार पर श्री कुमार को निलंबन अवधि के लिए जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई भुगतान किया जाय। 7. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री कुमार की निलंबन अवधि दिनांक 15.05.09 से 14.09.10 के लिए मात्र जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान करने, परन्तु अन्य प्रयोजनार्थ इसे कर्त्तव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में विनियमित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 13 मार्च 2014 सं० निग/सारा-4 (पथ) आरोप (सी0ए0जी0)-20/12-2255 (एस)—श्री कासिम अंसारी, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर के पदस्थापन काल में अलकतरा प्रकरण में सी0ए0जी0 से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर आरोप पत्र गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5544 (एस) अनु0 दिनांक 22.05.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-3676 अनु0 दिनांक 18.07.13 एवं पत्रांक-4373 अनु0 दिनांक 21.08.13 में श्री अंसारी के विरूद्ध गठित 6 आरोपों में से आरोप संख्या-1, 3, 4 को अप्रमाणित तथा आरोप संख्या-2, 5, 6 को आंशिक रूप से प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक-7845 (एस) अनु0 दिनांक 30.09.13 द्वारा श्री अंसारी से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। श्री अंसारी ने अपने द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर पत्रांक-737 दिनांक 18.11.13 में मूल रूप में निम्न बाते अंकित की यथा-सी0ए0जी0 प्रतिवेदन की विचार अवधि 1990-96 में पथ अवर प्रमंडल, देवरिया में उनका पदस्थापन मात्र 2 महीने की थी, वर्ष 1983 के बाद किसी प्रमंडल में कोई स्टॉक लिमिट नहीं रहने के कारण कार्य विशेष के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री का क्रय सीधे होने लगा। स्टॉक लेखा में हीं वार्षिक/अर्द्ध-वार्षिक लेखा समर्पित किये जाने का प्रावधान है क्योंकि स्टॉक लेखा में सामग्री प्राप्ति एवं सामग्री खर्च का पृथक-पृथक लेखा संधारित होता था जिसे 6 महीने एवं 12 महीने में बंद किया जाता था। स्थल लेखा में प्रतिमाह निर्गत एवं प्राप्ति का संधारण एक ही प्रपत्र में होता है तथा प्रत्येक माह में colsing balance निकाल लिया जाता है। अतः वार्षिक स्टॉक लेखा का समर्पण का कोई प्रश्न नहीं उठता है एवं अवर प्रमंडल, देवरिया अन्तर्गत 3 प्रशाखा थे लेकिन उनका कोई पृथक कार्यालय नहीं था, अपितु तीनों कनीय अभियंता अवर प्रमंडल कार्यालय में ही एक साथ बैठते थे। प्रशाखा का स्वतंत्र अस्तिव नहीं होने के कारण प्रशाखा निरीक्षण की कोई प्रासंगिकता नहीं है। उक्त आधार पर श्री अंसारी द्वारा आरोप मुक्त का अनुरोध किया गया। 2. श्री अंसारी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत यह स्पष्ट हुआ कि उन्हें प्रभार लेते/सौंपते समय लेखाओं का भौतिक सत्यापन करना चाहिए था जो की नहीं किया गया, अवर प्रमंडल से मासिक लेखा कनीय अभियंता से प्राप्त कर समायोजन के पश्चात प्रमंडल कार्यालय को समायोजन हेतु समर्पित करने का प्रावधान एवं वित्तीय वर्ष के समाप्ति के समय पूरे वर्ष के लेखा के समर्पण/समायोजन कर प्रमंडल कार्यालय को प्रतिवेदित करने का प्रावधान है जो कि श्री अंसारी द्वारा ससमय नहीं किया गया। साथ हीं, श्री अंसारी द्वारा अपने अधीनस्थ प्रशाखाओं के पदाधिकारी का निरीक्षण टिप्पणी विहित प्रपत्र में समर्पित नहीं किया गया। इस तरह स्पष्टतः श्री अंसारी द्वारा प्रक्रियात्मक भूल की गयी। 3. तदआलोक में श्री कासिम अंसारी, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल संख्या-1, मुजफ्फरपुर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (क) दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोक।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।36 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 13 मार्च 2014 सं० निग/सारा-1 (एन0एच0)-08/14-2297 (एस)—श्री शम्भु नाथ राम, तत्कालीन सहायक निदेशक, राष्ट्रीय उच्च पथ गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, डेहरी स्थित गया सम्प्रति सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, बक्सर के सहायक निदेशक, राष्ट्रीय उच्च पथ गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, डेहरी स्थित गया के पदस्थापन काल के दौरान राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-110 में कराये गये कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-122 अनु0 दिनांक 16.06.11 द्वारा समर्पित प्रारम्भिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-169 अनु0 दिनांक 19.08.11 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के कि0मी0 52 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य का औसत FDD प्रावधानित क्रमशः 2.30gm/cc तथा 2.20gm/cc के विरूद्ध क्रमशः 2.16gm/cc एवं 2.10gm/cc पाए जाने, बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.87 प्रतिशत पाए जाने तथा डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट के FI+EI का औसत कुल मान प्रावधानित अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध 38.92 प्रतिशत पाये जाने जैसी अनियमितताओं के लिए विभागीय पत्रांक-5946 (ई) दिनांक 15.11.11 द्वारा श्री राम से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री राम, सहायक निदेशक के पत्रांक-381, दिनांक 30.11.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-
(i) बी0एम0 कार्य का औसत FDD प्रावधानित क्रमशः 2.30gm/cc तथा 2.20gm/cc के विरूद्ध क्रमशः 2.16gm/cc एवं 2.10gm/cc पाए जाने से संबंधित अनियमितता के संबंध में उनके द्वारा उल्लेख किया गया कि हॉट मिक्स प्लांट के चिप्स का specific gravity में अंतर होता है। जाँच के क्रम में लगभग हर स्थान पर thickness ज्यादा पाया गया है जो FDD के जाँच को प्रभावित करता है, इसके अलावा मेटेरियल का ग्रेडिंग उसमें उपस्थित fine एग्रीगेट की मात्रा FDD को प्रभावित करता है। (ii) बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.87 प्रतिशत पाए जाने की अनियमितता के संबंध में उल्लेख किया गया है कि बी0एम0 कार्य करने के तुरंत बाद एस0डी0बी0सी0 का कार्य करा देना होता है, परन्तु संवेदक द्वारा ऐसा नहीं किया गया तथा बी0एम0 कार्य के तुरंत बाद वाहनों के आवागमन के लिए खोल दिया गया। फलतः अलकतरा की कुछ मात्रा घर्षण के कारण aliminate हो गया।
(iii) डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट के FI+EI का औसत कुल मान प्रावधानित अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध 38.92 प्रतिशत पाये जाने के संबंध में उल्लेख किया गया कि segragate की स्थिति रहने के कारण FI+EI का मान ज्यादा पाया गया।
3. श्री राम, सहायक निदेशक द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपंरात पाया गया कि एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य के FDD का मान तथा डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट का FI+EI का मान निर्धारित टोलरेन्स के अन्तर्गत होने के कारण इन अनियमितताओं के लिए स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य है, परन्तु बी0एम0 कार्य में पायी गयी अलकतरा की औसत मात्रा 2.87 प्रतिशत, निर्धारित टोलरेन्स 2.94 प्रतिशत से भी कम होने के कारण इस अनियमितता के लिए श्री शम्भु नाथ राम, सहायक निदेशक के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक् रूप से विचारोपंरात सरकार के निर्णयानुसार निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (क) वर्ष 2011-12 के लिए निन्दन।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 13 मार्च 2014 सं० निग/सारा-1 (एन0एच0)-08/14-2299 (एस)—श्री राम सुरेश राय, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गया द्वारा राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-110 में कराये गये कार्य की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-122 अनु0 दिनांक 16.06.11 द्वारा समर्पित प्रारम्भिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-169 अनु0 दिनांक 19.08.11 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के कि0मी0 52 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य का औसत FDD प्रावधानित क्रमशः 2.30gm/cc तथा 2.20gm/cc के विरूद्ध क्रमशः 2.16gm/cc एवं 2.10gm/cc पाए जाने, बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.87 प्रतिशत पाए जाने तथा डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट के FI+EI का औसत कुल मान प्रावधानित अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध 38.92 प्रतिशत पाये जाने जैसी अनियमितताओं के लिए विभागीय पत्रांक-5950 (ई) दिनांक 15.11.11 द्वारा श्री राय से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री राय, सहायक अभियंता के पत्रांक-कैम्प-1, पटना दिनांक 23.07.12 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :-
37 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014(i) बी0एम0 कार्य का औसत FDD प्रावधानित क्रमशः 2.30gm/cc तथा 2.20gm/cc के विरूद्ध क्रमशः 2.16gm/cc एवं 2.10gm/cc पाए जाने से संबंधित अनियमितता के संबंध में उनके द्वारा MORTH में निदेशित प्रक्रिया के अनुरूप बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 परतों की पूरी चपाई किये जाने, एकरारनामा में एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य में 2.30gm/cc तथा 2.29gm/cc FDD होने का प्रावधान अंकित नहीं होने का उल्लेख किया गया।
(ii) बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित न्यूनतम 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.87 प्रतिशत पाए जाने की अनियमितता के संबंध में MORTH के Table 900-4 का उल्लेख करते हुए उक्त प्रावधान के आलोक में बी0एम0 के कार्य होते समय Hot mix plant से mix गिरने पर उसके bitumen content की जाँच गुण नियंत्रण इकाई द्वारा करते हुए जाँचफल विशिष्टि के अनुरूप प्रतिवेदित किये जाने, उड़नदस्ता द्वारा यातायात चालू होने के तीन महीने बाद नमूना एकत्र कर जाँच किये जाने के कारण कालान्तर में bitumen content में कमी होने, उड़नदस्ता द्वारा एक कि0मी0 में केवल एक स्थान के तीन बिन्दु के नमूना का जाँच कर जाँचफल समर्पित किये जाने का उल्लेख किया गया।
(iii) डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट के FI+EI का औसत कुल मान प्रावधानित अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध 38.92 प्रतिशत पाये जाने के संबंध में सम्पादित परत से नमूना एकत्र कर जाँच करने पर जाँचफल में इस तरह का अतिसामान्य विचलन स्वभाविक एवं अवश्यम्भावी होने का उल्लेख किया गया है। 3. श्री राय, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपंरात पाया गया कि एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य के FDD का मान तथा डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट का FI+EI का मान निर्धारित टोलरेन्स के अन्तर्गत होने के कारण इन अनियमितताओं के लिए स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य है, परन्तु बी0एम0 कार्य में पायी गयी अलकतरा की औसत मात्रा 2.87 प्रतिशत, निर्धारित टोलरेन्स 2.94 प्रतिशत से भी कम होने के कारण इस अनियमितता के लिए श्री सुरेश कुमार राय, सहायक अभियंता के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक् रूप से विचारोपंरात सरकार के निर्णयानुसार निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (क) वर्ष-2011-12 के लिए निन्दन।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 28 मार्च 2014 सं० निग/सारा-1 (ग्रा0)-06/06-2658 (एस)—श्री बसंत कुमार दास, तत्कालीन कार्यपलक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, राँची सम्प्रति सेवानिवृत को ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, राँची के पदस्थापन काल में विभिन्न योजनाओं में बरती गयी अनियमितता तथा सरकारी राशि के दुर्विनियोग करने के आरोप के लिए ग्रामीण विकास विभाग से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में अधिसूचना संख्या-3257 (एस) दिनांक 26.05.2000 द्वारा निलंबित किया गया तथा ंसकल्प ज्ञापांक-7489 (एस) दिनांक 24.10.2000 द्वारा श्री झपसी राम, तत्कालीन अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त, भवन निर्माण विभाग, बिहार, पटना के अधीन विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसमें संकल्प ज्ञापांक-1837 (एस) दिनांक 21. 03.14 द्वारा निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय से लगातार अनुपस्थित रहने के आरोप को अनुपूरक आरोप के रूप में सम्बद्ध किया गया। कालान्तर में सी0डब्लू0जे0सी0सं0-11252/2000 में दिनांक 19.12.2000 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री दास को अधिसूचना संख्या-1786 (एस) दिनांक 20.03.2001 द्वारा दिनांक 27.10.2000 के प्रभाव से निलंब से मुक्त किया गया। 2. श्री दास के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में के किसी भी आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा न तो विहित प्रक्रिया को अपनाया गया है और न ही साक्ष्यों की तर्कपूर्ण ढंग से विवेचना की गयी है। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर किसी तथ्यात्मक निष्कर्ष बिन्दु पर पहुँचना संभव नहीं पाते हुए तथा श्री दास की दिनांक 31.10.2001 को सेवानिवृति के आलोक में संकल्प ज्ञापांक-9253 (एस) दिनांक 23.10. 03 द्वारा विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित करते हुए विभागीय जाँच आयुक्त के संचालन में विभागीय कार्यवहाी संचालित की गयी। 3. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-278 दिनांक 17.04.08 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री दास के विरूद्ध आरोप संख्या-1 को अंशतः प्रमाणित तथा अनुपूरक आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-11262 (एस) दिनांक 26.08.2008 द्वारा पेंशन से 5 प्रतिशत की कटौती के दंड तथा निलंबन अवधि के दौरान जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होने के संबंध में श्री दास से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 4. श्री दास के पत्रांक-शून्य दिनांक 17.11.2008 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में उनके द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के संबंध में कुछ भी अंकित न कर कतिपय प्रक्रियात्मक बिन्दुओं का उल्लेख करते हुए बचाव वयान समर्पित करने हेतु38 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन पर समीक्षात्मक टिप्पणी एवं सरकार के आदेश की छाया प्रति, दिनांक 04.12.2001 तक विभागीय कार्यवाही का निष्पादन नहीं किये जाने का कारण, पूर्व संचालन पदाधिकारी को विभागीय कार्यवही वापस नहीं भेजे जाने का कारण तथा विभागीय जाँच आयुक्त के समीक्षात्मक टिप्पणी की छाया प्रति की मांग की गयी। 5. श्री दास द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत पाया गया कि उनके द्वारा जिन कागजातों की मांग की गयी थी वह द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित नहीं है। श्री दास द्वारा प्रमाणित आरोपों के संबंध में कुछ भी अंकित नहीं किया गया है तथा प्रमाणित आरोपों के संबंध में विभागीय जाँच आयुक्त का प्रतिवेदन पूर्णतः विवेचित एवं विश्लेषित है। श्री दास के द्वितीय कारण पृच्छा को संतोषजनक नहीं पाते हुए इनके पेंशन से अगले 5 वर्षों तक 5 प्रतिशत की कटौती करने एवं निलंबन अवधि के लिए मात्र जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान करने, परन्तु पेंशन प्रयोजनार्थ इसे सेवा में टूट नहीं माने जाने पर सरकार के अनुमोदनोपरांत विभागीय पत्रांक-666 (एस) दिनांक 28.01.2014 द्वारा पेंशन से अगले 5 वर्षों तक 5 प्रतिशत की कटौती के अनुमोदित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति/परामर्श की मांग की गयी। 6. बिहार लोक सेवा आयोग के पत्रांक-2753 दिनांक 12.03.2014 द्वारा उपलब्ध कराये गये मंतव्य में श्री दास के पेंशन से अगले 5 वर्षों तक 5 प्रतिशत की कटौती के दंड पर सहमति व्यक्त की गयी। सरकार द्वार निर्णित दण्ड एवं इसपर बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त मन्तव्य के आलोक में श्री बसंत कुमार दास, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, राँची सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरेाप के लिए उन्हें निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) इनकी पेंशन से 5 (पाँच) प्रतिशत की कटौती अगले 5 (पाँच) वर्षों तक की जाय। 7. श्री दास के निलंबन अवधि दिनांक 26.05.2000 से दिनांक 26.10.2000 तक के लिए मात्र जीवन निर्वाह भत्ता का भुगतान करने, परन्तु पेंशन प्रयोजनार्थ इसे सेवा में टूट नहीं माने जाने के रूप में विनियमित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 16 अप्रील 2014 सं० निग/सारा-आरोप (ग्रा0का0वि0) उ0बि0-109/10-3045 (एस)—श्री रमेश बहादूर सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, बेनीपट्टी सम्प्रति पूर्व सहायक अभियंता, संरचना प्रमंडल संख्या-2, भवन निर्माण विभाग, पटना, दिनांक 19.04.13 को मृत के विरूद्ध कनीय अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, बेनीपट्टी के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के लिए ग्रामीण कार्य विभाग के पत्रांक-10612 अनु0 दिनांक 16.09.10 द्वारा प्राप्त अनुशंसा के आलोक में विभागीय कार्यालय आदेश संख्या-136 दिनांक 01.08.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1076 अनु0 दिनांक 28.06.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध गठित कुल 3 आरोपों में से आरोप संख्या-1 एवं 2 को अप्रमाणित तथा आरोप संख्या-3 को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। चूँकि प्राप्त विभागीय कार्यवाही के जाँच प्रतिवेदन में आरोप संख्या-3 के आंशिक भाग को छोड़कर शेष सभी आरोप अप्रमाणित पाये गये तथा इनकी मृत्यु दिनांक 19.04.13 को हो चुकी है, अतः श्री रमेश बहादूर सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, बेनीपट्टी सम्प्रति पूर्व सहायक अभियंता, संरचना प्रमंडल संख्या-2, भवन निर्माण विभाग, पटना, दिनांक 19.04.13 को मृत के विरूद्ध किसी प्रकार का दंडादेश पारित किया जाना उचित नहीं होने का निर्णय लेते हुए प्रस्तुत प्रकरण को स्वर्गीय सिंह के लिए संचिकास्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 24 अप्रील 2014 सं० निग/सारा-1 (पथ) मं0नि0-27/07-3164 (एस)—श्री रघुनन्दन शरण, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन सम्प्रति उप महाप्रबंधक, बिहार हेल्थ प्रोजेक्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, गया के विरूद्ध सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, डेहरी-ऑन-सोन के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के लिए संकल्प ज्ञापांक-4822 (एस) दिनांक 07.05.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1433 (भ) दिनांक 31.01.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री शरण के विरूद्ध किसी भी आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में श्री रघुनन्दन शरण, उप महाप्रबंधक, बिहार हेल्थ प्रोजेक्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, गया को उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।39 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 30 अप्रील 2014 सं० निग/सारा-उ0बि0रा0उ0प0-20/14-3346 (एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-105 में बरती गयी अनियमितता की कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा जाँचोपरांत समर्पित प्रारंभिक एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटियों/अनियमितता के लिए श्री संजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, धमदाहा, पूर्णियाँ से विभागीय पत्रांक-6918 (ई) अनु0 दिनांक 26.12.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी तथा विभागीय पत्रांक-3334 (ई) दिनांक 28.05.12 एवं पत्रांक-6458 (ई) दिनांक 03.10.12 द्वारा स्मारित भी किया गया। 2. श्री कुमार, सहायक अभियंता के पत्रांक-शून्य दिनांक 24.08.12 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-105 के कि0मी0 09 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा विभाग द्वारा निर्धारित टोलरेन्स से कम है। 3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार प्रमाणित पाये गये उक्त त्रुटियों/अनियमितता के लिए विभाग द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुरूप श्री संजय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, धमदाहा, पूर्णियाँ की दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 30 अप्रील 2014 सं० निग/सारा-उ0बि0रा0उ0प0-20/14-3349 (एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-105 में बरती गयी अनियमितता की कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा जाँचोपरांत समर्पित प्रारंभिक एवं गुणवत्ता जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत पायी गयी त्रुटियों/अनियमितता के लिए श्री तुलसी राम, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर से विभागीय पत्रांक-6905 (ई) अनु0 दिनांक 26.12.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री राम, कार्यपालक अभियंता के पत्रांक-96 दिनांक 27.01.12 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-105 के कि0मी0 09 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा विभाग द्वारा निर्धारित टोलरेन्स से कम है। 3. अतएव सरकार के निर्णयानुसार प्रमाणित पाये गये उक्त त्रुटियों/अनियमितता के लिए विभाग द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुरूप श्री तुलसी राम, कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, जयनगर की एक वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयात्मक प्रभाव से रोकी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 7 मई 2014 सं० निग/सारा-1 (पथ) आरोप-66/07-3613 (एस)—श्री विनोद कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, पूर्णियाँ द्वारा पथ प्रमंडल, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल में बिहारशरीफ-एकंगरसराय-तेलपा पथ के सुदृढ़ीकरण/चौड़ीकरण कार्य में बरती गयी अनियमितता के लिए मंत्रिमंडल निगरानी विभाग से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन/अनुशंसा के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-5206 (एस) दिनांक 19.05.06 द्वारा उन्हें निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-8976 (एस) दिनांक 01.08.06 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन/मंतव्य में इनके विरूद्ध आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया गया, परन्तु विभागीय समीक्षा के क्रम में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमत होते हुए आरोप संख्या-2 जो कार्य में अव्यवहृत बिटुमिन की वसूली नहीं करने से संबंधित है तथा आरोप संख्या-3 जो कार्य विशिष्टि के अनुरूप नहीं कराने से संबंधित है को प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के संबंध में असहमति के बिन्दु को स्पष्ट करते हुए विभागीय पत्रांक-7582 (एस) दिनांक 26.06.07 द्वारा श्री कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री कुमार द्वारा पत्रांक-शून्य दिनांक 06.07.07 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा पर समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार तत्कालिक प्रभाव से इन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए विभागीय अधिसूचना संख्या-12074-सहपठित ज्ञापांक-12075 (एस) दिनांक 15.10.07 द्वारा निम्न दंड संसूचित की गयी :- (i) इनकी एक वेतन वृद्धि संचयात्मक प्रभाव से रोकी जाय। (ii) निलंबन अवधि में इन्हें देय जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, परन्तु यह अवधि अन्य प्रयोजनार्थ कर्तव्य अवधि मानी जायेगी। 2. उक्त दंडादेश के विरूद्ध श्री कुमार द्वारा माननीय न्यायालय में याचिका संख्या-3395/2008 दायर की गयी। माननीय न्यायालय ने अपने पारित आदेश दिनांक 29.04.11 में विभागीय निर्गत दंडादेश अधिसूचना संख्या-12074-सहपठित ज्ञापांक-12075 (एस) दिनांक 15.10.07 एवं श्री कुमार से किये गये द्वितीय कारण पृच्छा से संबंधित पत्र पत्रांक-7582 (एस)40 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 दिनांक 26.06.07 को निरस्त करते हुए संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर असहमति के बिन्दु अंकित करते हुए आरोपित पदाधिकारी से द्वितीय कारण पृच्छा कर proceed का निदेश दिया गया। 3. माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में निम्न निर्णय लिया जाता है :-
(i) श्री कुमार के विरूद्ध निर्गत दंडादेश अधिसूचना संख्या-12074-सहपठित ज्ञापांक-12075 (एस) दिनांक 15.10.07 एवं द्वितीय कारण पृच्छा किये जाने से संबंधित पत्रांक-7582 (एस) दिनांक 26.06.07 को निरस्त किया जाता है।
(ii) श्री कुमार के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जाँच प्रतिवदेन के पर पुनः असहमति के बिन्दुओं को विस्तृत रूप से अंकित करते हुए द्वितीय कारण पृच्छा अलग से किया जा रहा है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 7 मई 2014 सं० निग/सारा-1 (ग्रा0)-24/05-3618 (एस)—श्री शिवधर राम, तत्कालीन सहायक अभियंता, पुपरी एवं नानपुर प्रखण्ड (सीतामढ़ी) सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा को पुपरी एवं नानपुर प्रखण्ड के पदस्थापन काल में विकास एवं निर्माण कार्यों में बरती गई अनियमितताओं के संदर्भ में ग्रामीण विकास विभाग के पत्रांक-8783 दिनांक 18.11.05 द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में समीक्षोपरान्त बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमवाली 2005 के नियम-9 के अन्तर्गत निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-3709 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-3710 (एस) दिनांक 03.04.06 द्वारा तत्कालिक प्रभाव से निलम्बित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3438 (एस) अनु0 दिनांक 10.03.10 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं0-14403/10 शिवधर राम बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 09.09.10 को माननीय उच्च न्यायालय, बिहार, पटना द्वारा पारित न्यायादेश के आलोक में समीक्षोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-5390 (एस) दिनांक 10.11.10 द्वारा निम्न निर्णय संसूचित किया गया :-
(क) इन्हें उपर्युक्त न्याय निर्णय की तिथि-09.09.10 के प्रभाव से निलम्बन से मुक्त किया जाता है। (ख) इनके निलंबित अवधि का विनिश्चय इनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के फलाफल पर निर्भर करेगा।
(ग) निलंबन से मुक्ति के उपरांत ये अपना योगदान अभियंता प्रमुख-सह-अपर आयुक्त-सह-विशेष सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के कार्यालय में करेंगे।
3. सी॰डब्ल्यू॰जे॰सी॰ सं0-14403/10 में दिनांक 09.09.10 को पारित न्यायादेश के आलोक में ही समीक्षोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-15390 (एस) दिनांक 10.11.10 को विभागीय अधिसूचना (शुद्धि पत्र) संख्या-3636 (एस) दिनांक 08.05.13 द्वारा निम्नरूपेण अल्प संशोधित किया गया :-
(क) श्री राम के निलंबन संबंधी विभागीय अधिसूचना संख्या-3709 (एस)-सह-पठित ज्ञापांक-3710 (एस) दिनांक 03.04.06 को निरस्त किया जाता है।
(ख) इनके निलंबन अवधि के लिए इन्हें वेतनादि का भुगतान पूर्व में इस मद में भुगतेय राशि को घटाकर किया जायेगा। साथ हीं श्री राम के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में निर्णयोपरांत आदेश अलग से संसूचित किये जाने का आदेश दिया गया।
4. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-256 (गो0) अनु0 दिनांक 23.08.11 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में यद्यपि आरोप संख्या-1, 2 एवं 3 को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया जबकि अनुपूरक आरोप संख्या-1 एवं 2 के लिए संदेह का लाभ देने की अनुशंसा की गयी तथापि संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा में आरोप संख्या-2 के प्रथम अंश एवं अनुपूरक आरोप संख्या-1 एवं 2 को प्रमाणित पाया गया। फलतः प्रमाणित पाये गये आरोप संख्या-2 के प्रथम अंश एवं अनुपूरक आरोप संख्या-1 एवं 2 के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन की प्रति संलग्न करते हुए विभागीय पत्रांक-3752 (एस) अनु0 दिनांक 02.04.12 द्वारा श्री राम से द्वितीय कारण पृच्छा एवं निलंबन अवधि के विनियमन के संबंध में कारण पृच्छा की मांग की गयी। 5. श्री राम, सहायक अभियंता के आवेदन दिनांक 19.06.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत एवं सरकार के निर्णयानुसार इन्हें आरोप मुक्त किया जाता है तथा इनके निलंबन अवधि को कर्तव्य अवधि मानते हुए उस अवधि के लिए वेतन भत्ता आदि का भुगतान करने का आदेश दिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।41 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 9 मई 2014 सं० निग/सारा-6 द0वि0 (मुक0)-36/2012-3662 (एस)—श्री कामेश्वर प्रसाद, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0 जहानाबाद सम्प्रति सहायक अभियंता एन0आर0ई0पी0 कटिहार के विरूद्ध एन0आर0ई0पी0 जहानाबाद के पदस्थापन काल में बरती गई अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-498 (एस) दिनांक 19.01.2002 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई थी। 2. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त सरकार के आदेशानुसार पाई गई त्रुटियों के लिए इन्हें निलम्बन से मुक्त करते हुए अधिसूचना संख्या-9105 (एस) दिनांक 03.08.2006 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया ।
(i) श्री प्रसाद को निन्दन की सजा दी जाती है। (ii) निलम्बन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा लेकिन अन्य सभी प्रयोजनार्थ यह कर्तव्य अवधि मानी जायेगी।
3. श्री प्रसाद सहायक अभियंता द्वारा दंडादेश के विरूद्ध दायर रिट याचिका सं0-सी0डब्लु0जे0सी0 सं0-13331/2006 में दिनांक 13.02.2008 को पारित न्यायादेश के अनुपालन में विभागीय अधिसूचना सं0-6576 (एस) दिनांक 15.05.2008 द्वारा पूर्व में निर्गत दंडादेश को निरस्त किया गया एवं विभागीय पत्रांक-8578 (एस) अनु0 दिनांक 30.06.2008 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गई। दिनांक 08.09.2008 द्वारा श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरान्त यह पाया गया कि :-
(क) कनीय अभियंता द्वारा कराये गये कार्यों के पर्यवेक्षण एवं कराये गये कार्यों के समय-समय कार्यान्वयन पर नियंत्रण रखना सहायक अभियंता का दायित्व है।
(ख) बिहार लोक निर्माण संहिता के नियम-49 में यह स्पष्ट रूप से अंकित है (The division is divided into subdivision in charge of subdivisional officers, who may be Assistant Engineers and overseers of the Subordinate Engineering service and who are responsible to the Execuitive Engineer for the management and execution of works within their subdivisions) जो सहायक अभियंता के दायित्व को पूर्णतः परिभाषित करता है।
(ग) योजनाओं के कार्यान्वयन तत्संबंधी मापी पुस्त, योजनाओं में प्रयुक्त सामग्रियों के बारे में बहुत सारे प्रावधान बिहार लोक निर्माण संहिता/बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता में है। मापी पुस्तिका के बारे में बिहार लोक निर्माण संहिता का नियम 244 विशेष रूप से मापी पुस्तिका को अत्यन्त महत्वपूर्ण अभिलेख मानते हुए सभी तरह के लेखा एवं सामग्रियों को मापी के पश्चात इसमें अंकित करने की बात लिखी गई है। (घ) बिहार लोक निर्माण लेखा संहिता के अध्याय-7 में एवं नियम-109 से 114 में सामग्रियों के अर्जन, अभिरक्षा, वितरण एवं उठाव की प्रक्रिया अंकित है, जिसमें सड़क के निर्माण एवं अन्य निर्माण में प्रयोग होने वाले सामग्रियों का भी उल्लेख है।
(ड़) इसी प्रकार अध्याय-21 के नियम-506 से 511 तक में अनुमंडल पदाधिकारियों द्वारा संधारित की जाने वाली लेखा विवरणी का भी विस्तृत उल्लेख है, जिसमें चालू निर्माण कार्य/कतिपय सही सामग्रियों सहित निर्माण सार का मासिक विवरणी भी अनुमंडल पदाधिकारी के स्तर से दिया जाना शामिल है। (च) इसी प्रकार ली गयी अग्रिम की राशि मापी पुस्तिका एवं योजनाओं के कार्यान्वयन के संबंध में सरकार द्वारा कतिपय निर्देश भी जारी किये गये हैं-पथ निर्माण विभाग का पत्रांक-4053 दिनांक 30.07.92, पत्रांक-2523 दिनांक 01.08.96, पत्रांक-2347 दिनांक 31.12.83, पत्रांक-3557 दिनांक 11.10.80, पत्रांक-975 दिनाक-21.02.83 एवं समय-समय पर निर्गत अन्य प्रावधानों में भी अंकित किया गया है। सहायक अभियंता द्वारा लोक निर्माण लेखा संहिता की कंडिका-231 एवं 232 के अनुरूप सभी स्तर के पदाधिकारियों को मापी पुस्त एवं विषयों की नियमानुसार जाँच कर लें।
4. अतएव उपर्युक्त कंडिका में अंकित तथ्यों के आलोक में श्री प्रसाद से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को अस्वीकृत करते हुए प्रमाणित आरोपों को दृष्टिगत कर सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-8973 (एस) दिनांक 19.08.09 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- (i) निन्दन की सजा जो वर्ष-1999-2000 के लिए मान्य होगा, (ii) असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि पर रोक। साथ ही निलंबन अवधि में उन्हें मात्र जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त कुछ भी देय नहीं होगा, जबकि अन्य प्रयोजनार्थ उसे कर्तव्य पर बितायी गयी अवधि के रूप में परिगणित की जा सकेगी। 5. इसी मामले में श्री प्रसाद द्वारा दायर अवमाननावाद संख्या-4571/2012 में विभाग की ओर से वस्तुस्थिति अंकित करते हुए कारण पृच्छा दायर किया गया जिसे दिनांक 09.04.14 को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अवमाननावाद की श्रेणी में मानते हुए निरस्त कर दिया गया। फलतः पूरे मामले के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री प्रसाद के विरूद्ध निर्गत दंडादेश को42 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 निरस्त किया जाना ही एक मात्र विकल्प है। अतएव सरकार के निर्णयानुसार विभागीय अधिसूचना संख्या-8973 (एस) दिनांक 19.08.09 को निरस्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 20 मई 2014 सं० निग/सारा-2 (आरोप)-उ0बि0 (ग्रा0)-39/07-3928 (एस)—श्री हरि किशोर सिन्हा सम्प्रति निलंबित सहायक अभियंता को एन0आर0ई0पी0, सहरसा के पदस्थापन काल में निगरानी धावा दल द्वारा रंगे हाथ `2,000.00 रिश्वत लेते गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने एवं इनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-35/07 दर्ज किये जाने के आलोक में इन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या-5489 (एस) दिनांक 26.04.07 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9 (2)(क) के तहत निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-12404 (एस) अनु0 दिनांक 26.10. 07 द्वारा विभागीय कार्यवाही बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 के अधीन संचालित की गयी। 2. श्री सिन्हा द्वारा जमानत पर रिहा होने के उपरांत योगदान समर्पित किये जाने के आलोक में इन्हें अधिसूचना संख्या-14578 (एस) दिनांक 14.12.07 द्वारा योगदान की तिथि 15.11.07 से निलंबन मुक्त किया गया। पुनः श्री सिन्हा के विरूद्ध अपराधिक मामला विचाराधीन होने, अभियोजन की स्वीकृति दिये जाने एवं विभागीय कार्यवाही संचालित होने के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-14585 (एस) दिनांक 14.12.07 द्वारा इन्हें अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया। 3. श्री सिन्हा के विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-35/07 में विधि विभाग के आदेश संख्या-1310/जे0 दिनांक 23.02.12 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गयी एवं इस विषय पर पूर्व निर्गत अभियोजन स्वीकृत्यादेश संख्या-3100/जे0 दिनांक 06.07.07 को अधिक्रांत किया गया। इस थाना कांड में श्री सिन्हा के विरूद्ध आरोप पत्र संख्या-76 दिनांक 11.05.07 सक्षम न्यायालय में समर्पित है। 4. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-149/सी (अनु0) दिनांक 17.07.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में न्यायालय के न्याय निर्णय के पूर्व किसी भी प्रकार का अभिमत देना न्यायोचित नहीं होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कारणों का उल्लेख करते हुए एवं अभिलेख वापस लौटाते हुए विभागीय पत्रांक-6922 (एस) अनु0 दिनांक 30.08.13 द्वारा गठित आरोप के संबंध में अभिलेख में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट मंतव्य देने का अनुरोध संचालन पदाधिकारी से किया गया। 5. तत्पश्चात् संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-13/सी (अनु0) दिनांक 23.01.14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति सहित विभागीय पत्रांक-1120 (एस) अनु0 दिनांक 11.02.14 द्वारा श्री सिन्हा, निलंबित सहायक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। श्री सिन्हा के आवेदन दिनांक 24.02.14 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री सिन्हा ने कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया है जिसके आधार पर इनके बचाव वयान को स्वीकार योग्य माना जाय। यह भी पाया गया कि श्री सिन्हा रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गये थे तथा विभागीय कार्यवाही में इनके पक्ष को सुनने के पश्चात संचालन पदाधिकारी द्वारा इन्हें भ्रष्ट आचरण का दोषी पाया गया है। अतः इनका यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली-1976 के नियम-3 (i), (ii) एवं (iii) के विपरीत है। 6. फलतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) (संशोधन) नियमावली-2007 के नियम-14 (xi) में निहित प्रावधानों के आलोक में श्री हरि किशोर सिन्हा के विरूद्ध प्रमाणित आरोप के लिए सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया । 7. सरकार के उक्त निर्णय पर पत्रांक-2242 (एस) अनु0 दिनांक 12.03.14 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गई। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अपने पत्रांक-2831 दिनांक 25.03.14 द्वारा श्री सिन्हा को सेवा से बर्खास्त करने संबंधी प्रस्तावित दंड पर सहमति व्यक्त किया गया। 8. तत्पश्चात् श्री हरि किशोर सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, सहरसा सम्प्रति निलंबित सहायक अभियंता को प्रमाणित गंभीर आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) (संशोधन) नियमावली-2007 के नियम-14 (xi) में निहित प्रावधानों के अनुसार सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति प्राप्त की गई। अतएव श्री हरि किशोर सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, सहरसा सम्प्रति निलंबित सहायक अभियंता को विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) तत्कालिक प्रभाव से सेवा से बर्खास्त।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।43 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 23 मई 2014 सं० प्र0-31/जं0शि0 (मु0मं0सचि0)-04-451/2011-4084 (एस)—माननीय दलाई लामा द्वारा बुद्ध स्मृति पार्क के दिनांक 27.05.10 को निर्धारित उद्घाटन समारोह के आलोक में नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना अन्तर्गत कोतवाली थाना से डाकबंगला चौराहा तक पथांश में कराये गये बी0सी0 कार्य के कार्यान्वयन के क्रम में परिमाण विपत्र एवं प्राक्कलन की स्वीकृति तथा तुलनात्मक विवरणी के अनुमोदन करते हुए कार्य आवंटित करने के पूर्व ही कार्य कराये जाने, पूर्व के एकरारनामा बंद किये वगैर उक्त पथांश में नया एकरारनामा कर बी0सी0 कार्य कराये जाने, उक्त पथ में पूर्व से कोई एकरारनामा चालू स्थिति में नहीं रहने की गलत सूचना देने इत्यादि जैसी अनियमितताओं के लिए पत्रांक-5054 (एस) दिनांक 11.05.12 द्वारा श्री रविन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, दानापुर पथ प्रमंडल, पटना पश्चिम से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री कुमार के पत्रांक-शून्य दिनांक 16.05.12 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया कि आलोच्य कार्य को आपातकालीन स्थिति में सम्पन्न कराने के लिए जिला पदाधिकारी, पटना द्वारा इस संदर्भ में आहूत बैठक में निर्णय लिया गया था जिसकी सूचना उनके ज्ञापांक-4794/गो0 दिनांक 11.05.10 द्वारा दी गयी थी। एकरारनामा संख्या-30 एफ 2/2010-11 के अन्तर्गत कार्य अत्यन्त आपातकालीन स्थिति में कराया गया था। पूर्व एकरारनामा बंद किये वगैर एकरारनामा संख्या-17 एफ 2/2010-11 के तहत बी0सी0 कार्य कराने के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि एकरारनामा संख्या-30 एफ 2/2007-08 के कार्य समाप्ति की तिथि 03.01.08 थी तथा इस तिथि तक मात्र तृतीय चालू विपत्र का भुगतान हुआ जिसके बाद कोई कार्य नहीं हुआ। तत्पश्चात् पंचम एवं अंतिम विपत्र तैयार किया गया जिसमें मापी शून्य अंकित की गयी तथा एकरारनामा का भौतिक अस्तिव एकरारनामा संख्या-17 एफ 2/2010-11 के संदर्भ में कार्य कराने की अनुमति एवं प्राक्कलन गठन आदि गतिविधि प्रारंभ होने के लगभग 2 वर्ष पहले समाप्त हो गया था। भले ही विधिवत बंदीकरण नहीं हो पाया था। दिनांक 21.05.10 एवं दिनांक 23.05.10 को यांत्रक उपभाग से पेभर से कार्य कराने के संबंध में उल्लेख किया गया है कि उक्त तिथियों को चंद घंटो के लिए पेभर भुगतान के आधार पर लिया गया था जिसके अन्तर्गत बेली पथ में एस0बी0डी0 एकरारनामा के तहत कराये गये मजबूतीकरण कार्य में कतिपय सुधार कार्य सम्पन्न कराया गया था जो कोतवाली थाना जंक्शन के पास था। उनके द्वारा स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए मामला को समाप्त करने का अनुरोध किया गया। 3. श्री कुमार, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि पूर्व के एकरारनामा का अंतिम कार्य दिनांक 05.05.08 को कराया गया था तथा वर्तमान एकरारनामा के अनुरूप कार्य 29.05.10 को कराया गया था अर्थात पूर्व के एकरारनामा के अंतिम कार्य 05.05.08 से लेकर नये एकरारनामा के तहत कराये गये कार्य 29.05.10 के बीच दो वर्षों की अवधि बीत चुकी थी परन्तु यह सत्य है कि नये एकरारनामा किये जाने के पूर्व, पूर्व का एकरारनामा को बंद कर दिया जाना चाहिए था जिसमें संबंधित पदाधिकारियों से चूक हुई है जो एक प्रक्रियात्मक त्रुटि है। तदआलोक में श्री रविन्द्र कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, दानापुर पथ प्रमंडल, पटना पश्चिम को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) "निन्दन" की सजा दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 26 मई 2014 सं० प्र0-31/जं0शि0 (मु0मं0सचि0)-04-451/2011-4112 (एस)—माननीय दलाई लामा द्वारा बुद्ध स्मृति पार्क के दिनांक 27.05.10 को निर्धारित उद्घाटन समारोह के आलोक में नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना अन्तर्गत कोतवाली थाना से डाकबंगला चौराहा तक पथांश में कराये गये बी0सी0 कार्य के कार्यान्वयन के क्रम में परिमाण विपत्र एवं प्राक्कलन की स्वीकृति तथा तुलनात्मक विवरणी के अनुमोदन करते हुए कार्य आवंटित करने के पूर्व ही कार्य कराये जाने, पूर्व के एकरारनामा बंद किये वगैर उक्त पथांश में नया एकरारनामा कर बी0सी0 कार्य कराये जाने, उक्त पथ में पूर्व से कोई एकरारनामा चालू स्थिति में नहीं रहने की गलत सूचना देने इत्यादि जैसी अनियमितताओं के लिए पत्रांक-5053 (एस) दिनांक 11.05.12 द्वारा श्री शिवेन्द्र पासी, तदेन अधीक्षण अभियंता, केन्द्रीय पथ अंचल, पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, डेहरी-ओन-सोन से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री पासी के पत्रांक-शून्य दिनांक 24.05.12 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया कि माननीय दलाई लामा के पूर्वं निर्धारित कार्यक्रम के आलोक में बी0सी0 कार्य कराने का सामुहिक निर्णय लिया गया था तथा पत्रांक-1211 दिनांक 12.05.10 द्वारा सचिव से अनुमति मांगी गयी। कार्यपालक अभियंता द्वारा स्थानीय प्रचार-प्रसार से निविदा आमंत्रित करने की स्वीकृति मांगी गयी जिसे प्रस्तावित यात्रा को देखते हुए अनुमति प्रदान की गयी। पूर्व के एकरारनामा को बन्द किये बिना नया एकरारनामा करने के संबंध में अंकित किया गया है कि पूर्व से चालू एकरारनामा संख्या-30 एफ 2/07-08 के विरूद्ध मई 08 के बाद कोई कार्य नहीं हुआ था और न ही भुगतान हुआ। मात्र एकरारनामा का विधिवत बन्दीकरण नहीं हुआ। इसमें किसी प्रकार की अनियमितता का कोई प्रश्न ही नहीं है। श्री पासी द्वारा स्पष्टीकरण को स्वीकार करने का अनुरोध किया गया।44 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 3. श्री पासी, अधीक्षण अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि पूर्व के एकरारनामा का अंतिम कार्य दिनांक 05.05.08 को कराया गया था तथा वर्तमान एकरारनामा के अनुरूप कार्य 29.05.10 को कराया गया था अर्थात पूर्व के एकरारनामा के अंतिम कार्य 05.05.08 से लेकर नये एकरारनामा के तहत कराये गये कार्य 29.05.10 के बीच दो वर्षों की अवधि बीत चुकी थी परन्तु यह सत्य है कि नये एकरारनामा किये जाने के पूर्व, पूर्व का एकरारनामा को बंद कर दिया जाना चाहिए था जिसमें संबंधित पदाधिकारियों से चूक हुई है जो एक प्रक्रियात्मक त्रुटि है। तदआलोक में श्री शिवेन्द्र पासी, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, केन्द्रीय पथ अचंल, पटना सम्प्रति अधीक्षण अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अंचल, डेहरी-ओन-सोन को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) "निन्दन" की सजा दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 26 मई 2014 सं० प्र0-31/जं0शि0 (मु0मं0सचि0)-04-451/2011-4114 (एस)—माननीय दलाई लामा द्वारा बुद्ध स्मृति पार्क के दिनांक 27.05.10 को निर्धारित उद्घाटन समारोह के आलोक में नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना अन्तर्गत कोतवाली थाना से डाकबंगला चौराहा तक पथांश में कराये गये बी0सी0 कार्य के कार्यान्वयन के क्रम में परिमाण विपत्र एवं प्राक्कलन की स्वीकृति तथा तुलनात्मक विवरणी के अनुमोदन करते हुए कार्य आवंटित करने के पूर्व ही कार्य कराये जाने, पूर्व के एकरारनामा बंद किये वगैर उक्त पथांश में नया एकरारनामा कर बी0सी0 कार्य कराये जाने, उक्त पथ में पूर्व से कोई एकरारनामा चालू स्थिति में नहीं रहने की गलत सूचना देने इत्यादि जैसी अनियमितताओं के लिए पत्रांक-5055 (एस) अनु0 दिनांक 11.05.12 द्वारा श्री लक्ष्मीकांत पटेल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, हिलसा से स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री पटेल के पत्रांक-150 अनु0 दिनांक 18.05.12 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया कि आलोच्य कार्य को आपातकालीन स्थिति में सम्पन्न कराने के लिए जिला पदाधिकारी, पटना द्वारा इस संदर्भ में आहूत बैठक में निर्णय लिया गया था जिसकी सूचना उनके ज्ञापांक-4794/गो0 दिनांक 11.05.10 द्वारा दी गयी थी। एकरारनामा संख्या-30 एफ 2/2010-11 के अन्तर्गत कार्य अत्यन्त आपातकालीन स्थिति में कराया गया था। पूर्व एकरारनामा बंद किये वगैर एकरारनामा संख्या-17 एफ 2/2010-11 के तहत बी0सी0 कार्य कराने के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि एकरारनामा संख्या-30 एफ 2/2007-08 के कार्य समाप्ति की तिथि 03.01.08 थी तथा इस तिथि तक मात्र तृतीय चालू विपत्र का भुगतान हुआ जिसके बाद कोई कार्य नहीं हुआ। तत्पश्चात् पंचम एवं अंतिम विपत्र तैयार किया गया जिसमें मापी शून्य अंकित की गयी तथा एकरारनामा का भौतिक अस्तिव एकरारनामा संख्या-17 एफ 2/2010-11 के संदर्भ में कार्य कराने की अनुमति एवं प्राक्कलन गठन आदि गतिविधि प्रारंभ होने के लगभग 2 वर्ष पहले समाप्त हो गया था। भले ही विधिवत बंदीकरण नहीं हो पाया था। दिनांक 21.05.10 एवं दिनांक 23.05.10 को यांत्रक उपभाग से पेभर से कार्य कराने के संबंध में उल्लेख किया गया है कि उक्त तिथियों को चंद घंटो के लिए पेभर भुगतान के आधार पर लिया गया था जिसके अन्तर्गत बेली पथ में एस0बी0डी0 एकरारनामा के तहत कराये गये मजबूतीकरण कार्य में कतिपय सुधार कार्य सम्पन्न कराया गया था जो कोतवाली थाना जंक्शन के पास था। उनके द्वारा स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए मामला को समाप्त करने का अनुरोध किया गया।
3. श्री पटेल, कार्यपालक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि पूर्व के एकरारनामा का अंतिम कार्य दिनांक 05.05.08 को कराया गया था तथा वर्तमान एकरारनामा के अनुरूप कार्य 29.05.10 को कराया गया था अर्थात पूर्व के एकरारनामा के अंतिम कार्य 05.05.08 से लेकर नये एकरारनामा के तहत कराये गये कार्य 29.05.10 के बीच दो वर्षों की अवधि बीत चुकी थी परन्तु यह सत्य है कि नये एकरारनामा किये जाने के पूर्व, पूर्व का एकरारनामा को बंद कर दिया जाना चाहिए था जिसमें संबंधित पदाधिकारियों से चूक हुई है जो यह एक प्रक्रियात्मक त्रुटि है। तदआलोक में श्री लक्ष्मीकांत पटेल, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, नई राजधानी पथ प्रमंडल, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, हिलसा को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :-
(i) "निन्दन" की सजा दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 26 मई 2014 सं० निग/सारा-1 (एन0एच0)-62/12 (टिप्पणी भाग)-4167 (एस) —श्री अमीर हसन, तदेन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग सम्प्रति महाप्रबंधक, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग अन्तर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-19 के 16 वें कि0मी0 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित 5 प्रतिशत के स्थान पर 3.96 प्रतिशत पाये जाने के एक मात्र आरोप के लिए संकल्प ज्ञापांक-10340 (एस) दिनांक 17.09.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-8144 दिनांक 23.07.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री हसन के विरूद्ध आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में श्री अमीर हसन,45 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 महाप्रबंधक, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, पटना को उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 26 मई 2014 सं० निग/सारा-1 (एन0एच0)-62/12 (टिप्पणी भाग)-4169 (एस) —श्री संजय कुमार, तत्कालीन सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, गुलजारबाग सम्प्रति सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण पथ अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, पटना सिटी के विरूद्ध गुण नियंत्रण, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, गुलजारबाग अन्तर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-19 के 16 वें कि0मी0 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित 5 प्रतिशत के स्थान पर 3.96 प्रतिशत पाये जाने के एक मात्र आरोप के लिए संकल्प ज्ञापांक-10341 (एस) दिनांक 17.09.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-8145 अनु0 दिनांक 23.07.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में श्री संजय कुमार, सहायक निदेशक, गुण नियंत्रण पथ अवर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, पटना सिटी को उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 26 मई 2014 सं० निग/सारा-1 (एन0एच0)-62/12 (टिप्पणी भाग)-4171 (एस) —श्री उत्तम कुमार, तदेन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, आरा के विरूद्ध राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, गुलजारबाग अन्तर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-19 के 16 वें कि0मी0 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित 5 प्रतिशत के स्थान पर 3.96 प्रतिशत पाये जाने के एक मात्र आरोप के लिए संकल्प ज्ञापांक-10339 (एस) दिनांक 17.09.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-8146 दिनांक 23.07.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री कुमार के विरूद्ध आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत सरकार के निर्णय के आलोक में श्री उत्तम कुमार, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, आरा को उनके विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में आरोप मुक्त किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 3 जून 2014 सं० निग/सारा-4 (पथ) आरोप-38/10-4560 (एस)—वित्तीय वर्ष 1998-99 में किशनगंज पथ प्रमंडल, अन्तर्गत अररिया-बहादुरगंज- ठाकुरगंज मार्ग के 25 वें कि0मी0 पर स्थित चरधरिया के पास कनकई नदी से पथ बाँध तक के बचाव कार्य की राशि संवेदक मेसर्स सिंह कन्स्ट्रक्शन, पूर्णिया को भुगतान नहीं किये जाने के कारण संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या-3742/2000 दायर की गयी, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में लंबित भुगतान को 3 माह के अन्दर करने का निदेश दिया गया। पारित न्यायादेश के आलोक में दायित्व समिति से लंबित दायित्व के भुगतान हेतु जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी। दायित्व समिति द्वारा कुल `6608878 भुगतान की अनुशंसा की गयी उक्त मामले की जाँच निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग द्वारा भी की गयी। दायित्व समिति एवं निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षाण कोषांग से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत दायित्व के भुगतान को अस्वीकृत कर दिया गया, साथ हीं विभाग की ओर से उक्त न्यायादेश के विरूद्ध एल0पी0ए0सं0-241/2006 दायर की गयी। 2. एल0पी0ए0सं0-241/2006 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 12.05.10 को पारित आदेश में निगरानी विभाग को संबंधित अभियंताओं के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित किया गया। तदआलोक में निगरानी विभाग द्वारा विषयांकित प्रकरण में अन्य अभियंताओं के साथ श्री अवध शरण सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियंता, उत्तर बिहार उपभाग, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत, तिलक नगर, कंकड़बाग, पटना-20 के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-50/2010 दर्ज की गयी। 3. श्री सिंह के विरूद्ध विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक-7395/जे0 दिनांक 26.09.11 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति दी गयी। माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक 26.02.13 में श्री अवध शरण सिंह को भ0द0वि0 की धारा-468,420,120(बी) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-13(2) के अन्तर्गत दोषी पाते हुए 3 (तीन) वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनायी गयी।46 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 4. निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 अनु0 दिनांक 27.03.09 द्वारा यह संसूचित है कि ऐसे मामले जिसमें सरकारी सेवक को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम-1988 के अधीन दोष सिद्ध ठहराते हुए दंड दिया गया है, पेंशन को अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाय, तद्आलोक में उक्त पत्र की प्रति संलग्न करते हुए श्री अवध शरण सिंह से विभागीय पत्रांक-1897 (एस) अनु0 दिनांक 04.03.14 द्वारा कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिंह के पत्रांक-शून्य दिनांक 18.03.14 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से माननीय विशेष न्यायाधीश निगरानी-2 द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में उनके द्वारा दायर क्रिमिनल अपील संख्या-204/13 लंबित रहने के आधार पर पेंशन को अवरूद्ध नहीं करने का अनुरोध किया गया। श्री सिंह से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विधि विभाग से परामर्श की मांग की गयी। विधि विभाग द्वारा परामर्श दिया गया कि श्री सिंह के विरूद्ध सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किया जा चुका है। अतः बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 5. विधि विभाग से प्राप्त मंतव्य एवं निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 दिनांक 27.03.09 के आलोक में विभागीय समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री अवध शरण सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियंता, उत्तर बिहार उपभाग, दरभंगा सम्प्रति सेवानिवृत तिलकनगर, कंकड़बाग, पटना-20 का पेंशन शून्य करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 3 जून 2014 सं० निग/सारा-4 (पथ) आरोप-38/10-4562 (एस)—वित्तीय वर्ष 1998-99 में किशनगंज पथ प्रमंडल, अन्तर्गत अररिया-बहादुरगंज- ठाकुरगंज मार्ग के 25 वें कि0मी0 पर स्थित चरधरिया के पास कनकई नदी से पथ बाँध तक के बचाव कार्य की राशि संवेदक मेसर्स सिंह कन्स्ट्रक्शन, पूर्णिया को भुगतान नहीं किये जाने के कारण संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या-3742/2000 दायर की गयी, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में लंबित भुगतान को 3 माह के अन्दर करने का निदेश दिया गया। पारित न्यायादेश के आलोक में दायित्व समिति से लंबित दायित्व के भुगतान हेतु जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी। दायित्व समिति द्वारा कुल `6608878 भुगतान की अनुशंसा की गयी उक्त मामले की जाँच निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग द्वारा भी की गयी। दायित्व समिति एवं निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षाण कोषांग से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत दायित्व के भुगतान को अस्वीकृत कर दिया गया, साथ हीं विभाग की ओर से उक्त न्यायादेश के विरूद्ध एल0पी0ए0सं0-241/2006 दायर की गयी। 2. एल0पी0ए0सं0-241/2006 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 12.05.10 को पारित आदेश में निगरानी विभाग को संबंधित अभियंताओं के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित किया गया। तदआलोक में निगरानी विभाग द्वारा विषयांकित प्रकरण में अन्य अभियंताओं के साथ श्री सुधीर कुमार, उर्फ सुधीर प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, सम्प्रति सेवानिवृत, बरहता रोड, लहेरियासराय, दरभंगा के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-50/2010 दर्ज की गयी। 3. श्री कुमार के विरूद्ध विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक-7395/जे0 दिनांक 26.09.11 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति दी गयी। माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक 26.02.13 में श्री सुधीर कुमार, उर्फ सुधीर प्रसाद को भ0द0वि0 की धारा-468,420,120(बी) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-13(2) के अन्तर्गत दोषी पाते हुए 3 (तीन) वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनायी गयी। 4. निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 अनु0 दिनांक 27.03.09 द्वारा यह संसूचित है कि ऐसे मामले जिसमें सरकारी सेवक को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम-1988 के अधीन दोष सिद्ध ठहराते हुए दंड दिया गया है, पेंशन को अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाय, तद्आलोक में उक्त पत्र की प्रति संलग्न करते हुए श्री सुधीर कुमार, उर्फ सुधीर प्रसाद से विभागीय पत्रांक-1899 (एस) अनु0 दिनांक 04.03.14 द्वारा कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री कुमार के पत्रांक-शून्य दिनांक 18.03.14 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से माननीय विशेष न्यायाधीश निगरानी-2 द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में उनके द्वारा दायर क्रिमिनल अपील संख्या-204/13 लंबित रहने के आधार पर पेंशन को अवरूद्ध नहीं करने का अनुरोध किया गया। श्री कुमार से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विधि विभाग से परामर्श की मांग की गयी। विधि विभाग द्वारा परामर्श दिया गया कि श्री कुमार के विरूद्ध सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किया जा चुका है। अतः बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 5. विधि विभाग से प्राप्त मंतव्य एवं निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 दिनांक 27.03.09 के आलोक में विभागीय समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री सुधीर कुमार, उर्फ सुधीर प्रसाद, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल, सम्प्रति सेवानिवृत, बरहता रोड, लहेरियासराय, दरभंगा का पेंशन शून्य करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 3 जून 2014 सं० निग/सारा-4 (पथ) आरोप-38/10-4564 (एस)—वित्तीय वर्ष 1998-99 में किशनगंज पथ प्रमंडल, अन्तर्गत अररिया-बहादुरगंज- ठाकुरगंज मार्ग के 25 वें कि0मी0 पर स्थित चरधरिया के पास कनकई नदी से पथ बाँध तक के बचाव47 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 कार्य की राशि संवेदक मेसर्स सिंह कन्स्ट्रक्शन, पूर्णिया को भुगतान नहीं किये जाने के कारण संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या-3742/2000 दायर की गयी, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में लंबित भुगतान को 3 माह के अन्दर करने का निदेश दिया गया। पारित न्यायादेश के आलोक में दायित्व समिति से लंबित दायित्व के भुगतान हेतु जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी। दायित्व समिति द्वारा कुल `6608878 भुगतान की अनुशंसा की गयी उक्त मामले की जाँच निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग द्वारा भी की गयी। दायित्व समिति एवं निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षाण कोषांग से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत दायित्व के भुगतान को अस्वीकृत कर दिया गया, साथ हीं विभाग की ओर से उक्त न्यायादेश के विरूद्ध एल0पी0ए0सं0-241/2006 दायर की गयी। 2. एल0पी0ए0सं0-241/2006 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 12.05.10 को पारित आदेश में निगरानी विभाग को संबंधित अभियंताओं के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित किया गया। तदआलोक में निगरानी विभाग द्वारा विषयांकित प्रकरण में अन्य अभियंताओं के साथ श्री त्रिभूवन प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत, राजेन्द्र चौक, मधुबनी, थाना-खजाँची हाट, पूर्णियाँ के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-50/2010 दर्ज की गयी। 3. श्री सिन्हा के विरूद्ध विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक-7395/जे0 दिनांक 26.09.11 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति दी गयी। माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक 26.02.13 में श्री त्रिभूवन प्रसाद सिन्हा को भ0द0वि0 की धारा-468,420,120(बी) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-13(2) के अन्तर्गत दोषी पाते हुए 3 (तीन) वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनायी गयी। 4. निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 अनु0 दिनांक 27.03.09 द्वारा यह संसूचित है कि ऐसे मामले जिसमें सरकारी सेवक को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम-1988 के अधीन दोष सिद्ध ठहराते हुए दंड दिया गया है, पेंशन को अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाय, तद्आलोक में उक्त पत्र की प्रति संलग्न करते हुए श्री त्रिभूवन प्रसाद सिन्हा से विभागीय पत्रांक-1896 (एस) अनु0 दिनांक 04.03.14 द्वारा कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिन्हा के पत्रांक-शून्य दिनांक 19.03.14 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से माननीय विशेष न्यायाधीश निगरानी-2 द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में उनके द्वारा दायर क्रिमिनल अपील संख्या-204/13 लंबित रहने के आधार पर पेंशन को अवरूद्ध नहीं करने का अनुरोध किया गया। श्री सिन्हा से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विधि विभाग से परामर्श की मांग की गयी। विधि विभाग द्वारा परामर्श दिया गया कि श्री सिन्हा के विरूद्ध सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किया जा चुका है। अतः बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 5. विधि विभाग से प्राप्त मंतव्य एवं निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 दिनांक 27.03.09 के आलोक में विभागीय समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री त्रिभूवन प्रसाद सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत, राजेन्द्र चौक, मधुबनी, थाना-खजाँची हाट, पूर्णियाँ का पेंशन शून्य करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 3 जून 2014 सं० निग/सारा-4 (पथ) आरोप-38/10-4566 (एस)—वित्तीय वर्ष 1998-99 में किशनगंज पथ प्रमंडल, अन्तर्गत अररिया-बहादुरगंज- ठाकुरगंज मार्ग के 25 वें कि0मी0 पर स्थित चरधरिया के पास कनकई नदी से पथ बाँध तक के बचाव कार्य की राशि संवेदक मेसर्स सिंह कन्स्ट्रक्शन, पूर्णिया को भुगतान नहीं किये जाने के कारण संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या-3742/2000 दायर की गयी, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में लंबित भुगतान को 3 माह के अन्दर करने का निदेश दिया गया। पारित न्यायादेश के आलोक में दायित्व समिति से लंबित दायित्व के भुगतान हेतु जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी। दायित्व समिति द्वारा कुल `6608878 भुगतान की अनुशंसा की गयी उक्त मामले की जाँच निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग द्वारा भी की गयी। दायित्व समिति एवं निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षाण कोषांग से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत दायित्व के भुगतान को अस्वीकृत कर दिया गया, साथ हीं विभाग की ओर से उक्त न्यायादेश के विरूद्ध एल0पी0ए0सं0-241/2006 दायर की गयी। 2. एल0पी0ए0सं0-241/2006 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 12.05.10 को पारित आदेश में निगरानी विभाग को संबंधित अभियंताओं के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित किया गया। तदआलोक में निगरानी विभाग द्वारा विषयांकित प्रकरण में अन्य अभियंताओं के साथ श्री सीतापति शरण, तत्कालीन सहायक अभियंता, अवर पथ प्रमंडल, बहादुरगंज, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत, के0एम0 टैंक, पो0-लहेरियासराय, दरभंगा के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-50/2010 दर्ज की गयी। 3. श्री शरण के विरूद्ध विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक-7395/जे0 दिनांक 26.09.11 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति दी गयी। माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक 26.02.13 में श्री सीतापति शरण को भ0द0वि0 की धारा-468,420,120(बी) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-13(2) के अन्तर्गत दोषी पाते हुए 3 (तीन) वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनायी गयी।48 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 4. निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 अनु0 दिनांक 27.03.09 द्वारा यह संसूचित है कि ऐसे मामले जिसमें सरकारी सेवक को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम-1988 के अधीन दोष सिद्ध ठहराते हुए दंड दिया गया है, पेंशन को अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाय, तद्आलोक में उक्त पत्र की प्रति संलग्न करते हुए श्री सीतापति शरण से विभागीय पत्रांक-1898 (एस) अनु0 दिनांक 04.03.14 द्वारा कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री शरण के पत्रांक-शून्य दिनांक 14.03.14 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से माननीय विशेष न्यायाधीश निगरानी-2 द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में उनके द्वारा दायर क्रिमिनल अपील संख्या-204/13 लंबित रहने के आधार पर पेंशन को अवरूद्ध नहीं करने का अनुरोध किया गया। श्री शरण से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विधि विभाग से परामर्श की मांग की गयी। विधि विभाग द्वारा परामर्श दिया गया कि श्री शरण के विरूद्ध सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किया जा चुका है। अतः बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 5. विधि विभाग से प्राप्त मंतव्य एवं निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 दिनांक 27.03.09 के आलोक में विभागीय समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री सीतापति शरण, तत्कालीन सहायक अभियंता, अवर पथ प्रमंडल, बहादुरगंज, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत, के0एम0 टैंक, पो0-लहेरियासराय, दरभंगा का पेंशन शून्य करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 3 जून 2014 सं० निग/सारा-4 (पथ) आरोप-38/10-4568 (एस)—वित्तीय वर्ष 1998-99 में किशनगंज पथ प्रमंडल, अन्तर्गत अररिया-बहादुरगंज- ठाकुरगंज मार्ग के 25 वें कि0मी0 पर स्थित चरधरिया के पास कनकई नदी से पथ बाँध तक के बचाव कार्य की राशि संवेदक मेसर्स सिंह कन्स्ट्रक्शन, पूर्णिया को भुगतान नहीं किये जाने के कारण संवेदक द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में याचिका संख्या-3742/2000 दायर की गयी, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में लंबित भुगतान को 3 माह के अन्दर करने का निदेश दिया गया। पारित न्यायादेश के आलोक में दायित्व समिति से लंबित दायित्व के भुगतान हेतु जाँच प्रतिवेदन की मांग की गयी। दायित्व समिति द्वारा कुल `6608878 भुगतान की अनुशंसा की गयी उक्त मामले की जाँच निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षण कोषांग द्वारा भी की गयी। दायित्व समिति एवं निगरानी विभाग के तकनीकी परीक्षाण कोषांग से प्राप्त प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत दायित्व के भुगतान को अस्वीकृत कर दिया गया, साथ हीं विभाग की ओर से उक्त न्यायादेश के विरूद्ध एल0पी0ए0सं0-241/2006 दायर की गयी। 2. एल0पी0ए0सं0-241/2006 में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 12.05.10 को पारित आदेश में निगरानी विभाग को संबंधित अभियंताओं के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित किया गया। तदआलोक में निगरानी विभाग द्वारा विषयांकित प्रकरण में अन्य अभियंताओं के साथ श्री शेखर विश्वास, तत्कालीन कनीय अभियंता, अवर पथ प्रमंडल, बहादुरगंज, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता, मो0-कालीबाड़ी, पो0जिला-कटिहार के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-50/2010 दर्ज की गयी। 3. श्री विश्वास के विरूद्ध विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक-7395/जे0 दिनांक 26.09.11 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति दी गयी। माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, पटना द्वारा पारित आदेश दिनांक 26.02.13 में श्री शेखर विश्वास को भ0द0वि0 की धारा-468,420,120(बी) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-13(2) के अन्तर्गत दोषी पाते हुए 3 (तीन) वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनायी गयी। 4. निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 अनु0 दिनांक 27.03.09 द्वारा यह संसूचित है कि ऐसे मामले जिसमें सरकारी सेवक को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम-1988 के अधीन दोष सिद्ध ठहराते हुए दंड दिया गया है, पेंशन को अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाय, तद्आलोक में उक्त पत्र की प्रति संलग्न करते हुए श्री शेखर विश्वास से विभागीय पत्रांक-1895 (एस) अनु0 दिनांक 04.03.14 द्वारा कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री विश्वास के पत्रांक-शून्य दिनांक 14.03.14 द्वारा समर्पित कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से माननीय विशेष न्यायाधीश निगरानी-2 द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में उनके द्वारा दायर क्रिमिनल अपील संख्या-204/13 लंबित रहने के आधार पर पेंशन को अवरूद्ध नहीं करने का अनुरोध किया गया। श्री विश्वास से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत विधि विभाग से परामर्श की मांग की गयी। विधि विभाग द्वारा परामर्श दिया गया कि श्री विश्वास के विरूद्ध सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किया जा चुका है। अतः बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 5. विधि विभाग से प्राप्त मंतव्य एवं निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 दिनांक 27.03.09 के आलोक में विभागीय समीक्षोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री शेखर विश्वास, तत्कालीन कनीय अभियंता, अवर पथ प्रमंडल, बहादुरगंज, किशनगंज सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता, मो0-कालीबाड़ी, पो0जिला-कटिहार का पेंशन शून्य करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।49 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 3 जून 2014 सं० निग/विरा-2-127/97-4558 (एस)—श्री इन्द्रदमन सिंह उर्फ इन्द्रदमन सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता सम्प्रति सेवानिवृत, एल0आई0जी0 53, अनुग्रहपुरी हाउसिंग कॉलोनी, गया के विरूद्ध पथ प्रमंडल, छपरा के पदस्थापन काल में पथ प्रमंडल, छपरा अन्तर्गत छपरा-सोनपुर पथ की मरम्मति कार्य में फर्जी मस्टर रौल के आधार पर किये गये भुगतान के लिए निगरानी विभाग द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या-2/83 दर्ज की गयी। इस मामले में विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक-152 दिनांक 08.04.87 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गयी। 2. निगरानी थाना कांड संख्या-2/83 में माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी ने श्री सिंह उर्फ सिन्हा को धारा-420,468,471,409,120(बी) भा0द0वि0 एवं धारा-13(2)-सहपठित धारा-13(1)(डी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए दो वर्ष की कारावास एवं `10,000.00 अर्थ दंड की सजा सुनायी गयी। उक्त न्यायादेश के आलोक में श्री सिंह उर्फ सिन्हा से विभागीय पत्रांक-6478 दिनांक 21.09.2000 द्वारा उनके पेंशन रोकने हेतु बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (ए) के तहत कारण पृच्छा की मांग की गयी। श्री सिंह उर्फ सिन्हा ने अपने कारण पृच्छा उत्तर में मुख्य रूप से माननीय विशेष न्यायाधीश, निगरानी द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध दायर अपील के आधार पर पेंशन नहीं रोकने का अनुरोध किया गया। श्री सिंह उर्फ सिन्हा से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत माननीय उच्च न्यायालय में अपील दायर रहने के आधार पर अंतिम रूप से निर्णय नहीं लिया गया। 3. श्री सिंह उर्फ सिन्हा द्वारा माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी द्वारा पारित आदेश दिनांक 08.06.99 के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में दायर क्रीमीनल अपील संख्या-145/99 को माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा दिनांक 11.04.11 को पारित न्यायादेश में उक्त अपील को अस्वीकृत किया जा चुका है। इस बीच निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 अनु0 दिनांक 27.03.09 द्वारा यह संसूचित है कि ऐसे मामले जिसमें सरकारी सेवकों को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम के अधीन दोष सिद्ध ठहराते हुए दंड दिया गया है, पेंशन को अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाय। 4. तद्आलोक में सम्यक् विचारोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री इन्द्रदमन सिंह उर्फ इन्द्रदमन सिन्हा, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, सहरसा सम्प्रति सेवानिवृत, एल0आई0जी0 53, अनुग्रहपुरी हाउसिंग कॉलोनी, गया का पेंशन शून्य करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 6 जून 2014 सं० निग/सारा-4 (पथ) आरोप-24/10-4724 (एस)—उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन के आधार पर पथ प्रमंडल, रामनगर के पदस्थापन काल में रामनगर से मेघवल मठिया पथ में बरती गयी अनियमितता के लिए श्री प्रभाकर नारायण सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग के विरूद्ध निम्न आरोप यथा-"उक्त पथ के कि0मी0 9 में कराये गये बी0एम0 कार्य की औसत मुटाई 37.66 मि0मी0 पायी गयी जबकि प्रावधान 50 मि0मी0 का है" के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9188 (एस) अनु0 दिनांक 18.06.10 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त पथ से ही संबंधित प्राप्त गुणवता जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निम्न आरोपों यथा-"पथ के कि0मी0 6 मे कराये गये बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 2.76 प्रतिशत पायी गई है जबकि प्राक्कलन न्यूनतम 3.30 प्रतिशत का है", "पथ के कि0मी0 6 में कराये गये एस0डी0बी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.48 प्रतिशत पायी गयी है जबकि प्रावधान न्यूनतम 5 प्रतिशत का है", "पथ के कि0मी0 9 मे कराये गये बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 2.48 प्रतिशत पायी गई है जबकि प्रावधान न्यूनतम 3.30 प्रतिशत का है" एवं "पथ के कि0मी0 9 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 2.80 प्रतिशत पायी गयी है जबकि प्रावधान न्यूनतम 5 प्रतिशत का है।" के लिए अनुपूरक आरोप गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3221 (एस) अनु0 दिनांक 16.03.11 पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही के साथ सन्निहित किया गया। 2. संचालन पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-1326 अनु0 दिनांक 13.07.11 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध गठित मूल आरोप को अंशतः प्रमाणित तथा अनुपूरक चारों आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक-5745 (एस) अनु0 दिनांक 25.05.12 द्वारा श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री सिंह ने अपने पत्रांक-9 (नि0) दिनांक 14.06.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में मूल रूप से गठित आरोप के लिए निम्न बाते कही यथा-कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा बी0एम0 कार्य की मुटाई मापने में मंत्रिमंडल निगरानी विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग का पत्रांक-1389 दिनांक 16.09.94 में सन्निहित प्रावधान का पालन नहीं किया गया। अनुपूरक आरोप के संबंध में श्री सिंह ने मूल रूप में निम्न बातें कही है यथा-पथ में बिटुमिन की जाँच तीन-तीन पदाधिकारियों द्वारा अलग-अलग समय पर की गयी और तीनों जाँचफल में भिन्नता है। कार्य समाप्ति के दो माह बाद उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 द्वारा जाँच की गयी जबकि उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा कार्य समाप्ति के 15 माह बाद लिये गये सेम्पल के जाँचफल पर आधारित है में बी0एम0 कार्य में कि0मी0 6 में बिटुमिन की मात्रा 2.76 एस0 डी0 बी0 सी0 में 3.48 प्रतिशत कि0 मी0 9 में बी0 एम0 में 2.48 प्रतिशत एस0डी0बी0सी0 में 2.
50(cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 8 प्रतिशत बताया गया। इस तरह जाँच में एक साल का अंतर होने के कारण बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 के बिटुमिन कन्टेन्ट में कमी आना स्वभाविक है। उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 द्वारा 2008 में लिये गये नमूनों के जाँचफल पर भी विचार होना चाहिए। उक्त आधार पर आरोप मुक्त का अनुरोध किया गया। 3. श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत पाया गया कि उक्त पथ मे बरती गयी अनियमितता के लिए सभी गठित आरोप उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा की गयी जाँचफल पर आधारित है। कि0मी0 6 में 9 से संबंधित बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा के सेम्पल की जाँच मुख्यालय स्थित टी0टी0आर0आई0 से करायी गयी एवं प्रावधानित मात्रा क्रमशः 3.3 प्रतिशत के स्थान पर 2.7 प्रतिशत तथा 3.30 प्रतिशत के स्थान पर 2.48 प्रतिशत पाया गया जो प्रावधान से काफी कम है। इसी तरह कि0मी0 6 एवं 9 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा भी प्रावधानित मात्रा से कम पाया गया जिसके लिए स्पष्टतः श्री सिंह दोषी हैं। 4. तदआलोक में श्री प्रभाकर नारायण सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, पथ प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, नगर विकास एवं आवास विभाग से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए प्रमाणित आरोप के लिए श्री सिंह को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 6 जून 2014 सं० निग/सारा-4 (पथ) आरोप-24/10-4726 (एस) उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना से प्राप्त प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन के आधार पर पथ प्रमंडल, रामनगर के पदस्थापन काल में रामनगर से मेघवल मठिया पथ में बरती गयी अनियमितता के लिए श्री लाल मोहन प्रजापति, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के विरूद्ध निम्न आरोप यथा-"उक्त पथ के कि0मी0 9 में कराये गये बी0एम0 कार्य की औसत मुटाई 37.66 मि0मी0 पायी गयी जबकि प्रावधान 50 मि0मी0 का है" एवं पथ के कि0मी0 6 में कराये गये डब्लू0बी0एम0 (ग्रेड-II+ग्रेड-III) कार्य की औसत मुटाई 86.33 मि0मी0 पाई गई है जबकि प्रावधान 150 मि0मी0 (75 मि0मी075 मि0मी0) का है। के लिए प्रपत्र-'क' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9189 (एस) अनु0 दिनांक 18.06.10 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त पथ से ही संबंधित प्राप्त गुणवता जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निम्न आरोपों यथा-"पथ के कि0मी0 6 मे कराये गये बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 2.76 प्रतिशत पायी गई है जबकि प्राक्कलन न्यूनतम 3.30 प्रतिशत का है", "पथ के कि0मी0 6 में कराये गये एस0डी0बी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.48 प्रतिशत पायी गयी है जबकि प्रावधान न्यूनतम 5 प्रतिशत का है", "पथ के कि0मी0 9 मे कराये गये बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 2.48 प्रतिशत पायी गई है जबकि प्रावधान न्यूनतम 3.30 प्रतिशत का है" एवं "पथ के कि0मी0 9 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 2.80 प्रतिशत पायी गयी है जबकि प्रावधान न्यूनतम 5 प्रतिशत का है।" के लिए अनुपूरक आरोप गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3223 (एस) अनु0 दिनांक 16.03.11 पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही के साथ सन्निहित किया गया। उक्त के अतिरिक्त उक्त पदस्थापन से ही संबंधित रामनगर बाजार से लौरिया पथ में कराये गये पी0सी0सी0 कार्य में बरती गयी अनियमितता यथा-(1) पथ में बरते गए पी0सी0सी0 कार्य की औसत चौड़ाई 5.36 मीटर पायी गई जबकि प्रावधान 5.50 मीटर का है। अर्थात् 0.14 मीटर अधिक चौड़ाई का भुगतान किया गया है जो स्पष्ट करता है कि संवेदक को जानबूझकर लाभ दिया गया है, जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता है।के लिए प्रपत्र-'क' गठित कर उक्त विभागीय कार्यवाही के साथ अनुपूरक आरोप के रूप में संकल्प ज्ञापांक-799 (एस) दिनांक 20.01.11 द्वारा सन्निहित किया गया। 2. संचालन पदाधिकारी ने अपने पत्रांक-1900 अनु0 दिनांक 19.09.11 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रजापति के विरूद्ध गठित मूल दोनों आरोपों को अंशतः प्रमाणित तथा अनुपूरक चारों आरोपों को प्रमाणित होने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय पत्रांक-5744 (एस) अनु0 दिनांक 25.05.12 द्वारा श्री प्रजापति से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री प्रजापति ने अपने पत्रांक-473 दिनांक 14.06.12 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में मूल रूप से गठित आरोप के लिए निम्न बाते कही यथा-कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा बी0एम0 कार्य की मुटाई मापने में मंत्रिमंडल निगरानी विभाग, तकनीकी परीक्षक कोषांग का पत्रांक-1389 दिनांक 16.09. 94 में सन्निहित प्रावधान का पालन नहीं किया गया। अनुपूरक आरोप के संबंध में श्री प्रजापति ने मूल रूप में निम्न बातें कही है यथा-पथ में बिटुमिन की जाँच तीन-तीन पदाधिकारियों द्वारा अलग-अलग समय पर की गयी और तीनों जाँचफल में भिन्नता है। कार्य समाप्ति के दो माह बाद उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 द्वारा जाँच की गयी जबकि उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा कार्य समाप्ति के 15 माह बाद लिये गये सेम्पल के जाँचफल पर आधारित है में बी0एम0 कार्य में कि0मी0 6 में बिटुमिन की मात्रा 2.76 एस0 डी0 बी0 सी0 में 3.48 प्रतिशत कि0 मी0 9 में बी0 एम0 में 2.48 प्रतिशत एस0डी0बी0सी0 में 2.8 प्रतिशत बताया गया। इस तरह जाँच में एक साल का अंतर होने के कारण बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 के बिटुमिन कन्टेन्ट में कमी आना स्वभाविक है। उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-3 द्वारा 2008 में लिये गये नमूनों के जाँचफल पर भी विचार होना चाहिए। उक्त आधार पर आरोप मुक्त का अनुरोध किया गया।51 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 3. श्री प्रजापति से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरांत पाया गया कि उक्त पथ मे बरती गयी अनियमितता के लिए सभी गठित आरोप उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-4 द्वारा की गयी जाँचफल पर आधारित है। कि0मी0 6 में 9 से संबंधित बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा के सेम्पल की जाँच मुख्यालय स्थित टी0टी0आर0आई0 से करायी गयी एवं प्रावधानित मात्रा क्रमशः 3.3 प्रतिशत के स्थान पर 2.7 प्रतिशत तथा 3.30 प्रतिशत के स्थान पर 2.48 प्रतिशत पाया गया जो प्रावधान से काफी कम है। इसी तरह कि0मी0 6 एवं 9 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा भी प्रावधानित मात्रा से कम पाया गया जिसके लिए स्पष्टतः श्री प्रजापति दोषी हैं। 4. तदआलोक में श्री लाल मोहन प्रजापति, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पथ प्रमंडल, रामनगर सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, मुजफ्फरपुर से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य नहीं मानते हुए प्रमाणित आरोप के लिए श्री प्रजापति को निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक ।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 18 जून 2014 सं० निग/सारा-6 (आरोप) द0बि0 (ग्रा0)-41/07 (फोल्डर-1)-5024 (एस)—श्री अशोक कुमार सिंह, सहायक अभियंता को एन0आर0ई0पी0, गोह प्रखंड, औरंगाबाद के पदस्थापन काल में निगरानी धावा दल द्वारा रंगे हाथ `6,000.00 रिश्वत लेते गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने एवं इनके विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-47/07 दर्ज किये जाने के आलोक में इन्हें विभागीय अधिसूचना संख्या-6087 (एस) दिनांक 15.05.07 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-9 (2)(क) के तहत निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक-11886 (एस) अनु0 दिनांक 09.10.07 द्वारा विभागीय कार्यवाही बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17 के अधीन संचालित की गयी। 2. श्री सिंह द्वारा जमानत पर रिहा होने के उपरांत योगदान समर्पित किये जाने के आलोक में इन्हें अधिसूचना संख्या-10576 (एस) दिनांक 10.09.07 द्वारा योगदान की तिथि 06.06.07 से निलंबन मुक्त किया गया। पुनः श्री सिंह के विरूद्ध अपराधिक मामला का जाँच/विचारण प्रक्रियाधीन होने के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-10625 (एस) दिनांक 10.09.07 द्वारा इन्हें अगले आदेश तक के लिए निलंबित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्याय निदेश के आलोक में विभागीय अधिसूचना संख्या-351 (एस) दिनांक 15.01.13 द्वारा इन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए निलंबन अवधि का विनियमन विभागीय कार्यवाही एवं निगरानी थाना कांड संख्या-47/07 के फलाफल के आधार पर किये जाने का आदेश संसूचित किया गया। 3. श्री सिंह के विरूद्ध दर्ज निगरानी थाना कांड संख्या-47/07 में विधि विभाग के आदेश संख्या-2989/जे0 दिनांक 02.07.07 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गयी। इस थाना कांड में श्री सिंह के विरूद्ध आरोप पत्र संख्या-189 दिनांक 03.08.07 सक्षम न्यायालय में समर्पित है। 4. विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-211 दिनांक 23.01.14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में प्रखंड विकास पदाधिकारी से योजनाओं के अभिलेख, शिकायतकर्त्ता एवं गवाहों की गवाही नहीं होने के कारण विभागीय कार्यवाही की समीक्षा करना उचित नहीं होने का तथ्य देते हुए वगैर निर्णय के विभागीय कार्यवाही का अभिलेख वापस कर दिया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत कारणों का उल्लेख करते हुए एवं अभिलेख वापस लौटाते हुए विभागीय पत्रांक-1133 (एस) अनु0 दिनांक 11.02.14 द्वारा उक्त दृष्टिकोण से समीक्षा कर जाँच प्रतिवेदन समर्पित करने का अनुरोध संचालन पदाधिकारी से किया गया। 5. तत्पश्चात् संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-22 अनु0 दिनांक 17.02.14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप को प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत प्रमाणित पाये गये आरोप के संदर्भ में जाँच प्रतिवेदन की छाया प्रति सहित विभागीय पत्रांक-2014 (एस) अनु0 दिनांक 06.03.14 द्वारा श्री सिंह, सहायक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। निर्धारित अवधि में श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर अप्राप्त रहा। पूरे मामले के समीक्षोपरांत पाया गया कि सिंह से निर्धारित अवधि में द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर अप्राप्त रहना स्पष्ट करता है कि प्रमाणित आरोप के संंदर्भ में इन्हें कुछ नहीं कहना है। 6. फलतः बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) (संशोधन) नियमावली-2007 के नियम-14 (xi) में निहित प्रावधानों के आलोक में श्री अशोक कुमार सिंह के विरूद्ध प्रमाणित आरोप के लिए सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया । 7. इस बीच श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर दिनांक 31.03.14 प्राप्त हुआ जिसे विभागीय समीक्षा में निर्धारित समय सीमा के पश्चात प्राप्त होने के कारण अस्वीकृत किया गया। 8. सरकार के उक्त निर्णय पर पत्रांक-3061 (एस) अनु0 दिनांक 16.04.14 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की अपेक्षा की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा अपने पत्रांक-423 दिनांक 23.05.14 द्वारा श्री सिंह को सेवा से बर्खास्त करने संबंधी प्रस्तावित दंड पर सहमति व्यक्त किया गया।52 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 10. तदोपरांत श्री अशोक कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, गोह प्रखंड, औरंगाबाद सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, पूर्व बिहार पथ अंचल, भागलपुर को प्रमाणित गंभीर आरोप के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) (संशोधन) नियमावली-2007 के नियम-14 (xi) में निहित प्रावधानों के अनुसार सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति प्राप्त की गयी। अतएव श्री अशोक कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, एन0आर0ई0पी0, गोह प्रखंड, औरंगाबाद सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, पूर्व बिहार पथ अंचल, मुजफ्फरपुर को विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित आरोपों के लिए निम्न दंड संसूचित किया जाता है :- (i) तत्कालिक प्रभाव से सेवा से बर्खास्त।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 24 जून 2014 सं० निग/सारा-9 (आरोप)-57/09 (टिप्पणी भाग)-5281 (एस)—श्री फिरोज खाँ, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, कोचस स्थित मोहनिया सम्प्रति सेवानिवृृत्त द्वारा कोचस स्थित मोहनिया के पदस्थापन काल के दौरान राष्ट्रीय उच्च पथ सं0-30 के खण्ड कि0मी0 3 से 10 तथा खण्ड कि0मी0 49 से 67 तक कराये गयेे IRQP कार्य में बरती गई अनियमितताओं की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल-1, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा की गयी। कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल-1 के पत्रांक-160 दिनांक 10.09.07 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन के आधार पर श्री खाँ के विरूद्ध संकल्प ज्ञापांक-3521 (एस) दिनांक 11.03.2010 के द्वारा 11 आरोपों के लिए विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-1427 दिनांक 21.02.14 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री खाँ के विरूद्ध आरोप संख्या-5 को प्रमाणित तथा आरोप संख्या-2,3,8 एवं 9 को आंशिक रूप से प्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-1743 (एस) दिनांक 26.02.14 द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों के लिए श्री खाँ से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। 3. श्री खाँ के पत्रांक-131 अनु0 दिनांक 24.03.14 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में उनके द्वारा मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है कि उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा कि॰मी॰ 7 में बी॰एम॰ परत का कार्य सम्पन्न होने के लगभग सात माह बाद सम्पादित परत से बिटूमिन मिक्स का नमूना एकत्र कर बिटूमिन कंटेन्ट की जाँच की गयी थी जो बिटूमिन कंटेन्ट की जाँच के लिए अब तक निर्गत कोडस् के प्रावैधिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अब तक ISB द्वारा कोई बिटूमिन कंटेन्ट की जाँच के लिए कोई कोर्स निर्गत नहींं है। IRC के SP-2 की App.-5 के क्रमांक-सी पर बिटूकिन कंटेन्ट की जाँच की विधि निर्धारित की गयी है जिसके अनुसार बिटूमिन एक्सट्रक्टर से बिटूमिन कंटेन्ट निकालने का प्रावधान है। इसमें बिटूमिन मिक्स से मोआस्चर कंटेन्ट निकालकर बिटूमिन कंन्टेन्ट की जाँच पर से मोआस्चर कंटेन्ट घटाने का प्रावधान नहीं है जबकि उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा जाँचफल में ऐसे किया गया है कि जिसके कारण बिटूमिन कंन्टेन्ट का जाँचफल लगभग 2.98 प्रतिशत से .231 प्रतिशत कम प्रतिवेदित किया गया है इसी क्रम में MORTH & H के टेबूल 500-13 में निर्धारित बिटूमिन कन्टेन्ट ±.3 का विचलन अनुज्ञप्ति सीमा निर्धारित है। उपरोक्त प्रावधानों के आलोक में आरोप संख्या-2 बिटूमिन कन्टेन्ट की अंकित 2.7 प्रतिशत प्रावधानित बिटूमिन कन्टेन्ट 3.3 से 3.5 के पूर्णतः अनुरूप है। उन्होंंने अपने द्वितीय कारण पृृच्छा में यह भी अंकित किया है कि विभागीय कार्यवाही में उन्हें अपना बचाव पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खेमचन्द बनाम यूनियन ऑफ इंडिया ए0आई0आर0-1958-एस0सी0 300 में पारित आदेश के प्रतिकूल है। इनका यह भी कहना है कि संचालन पदाधिकारी द्वारा कई आरोपों को इनके विरूद्ध अप्रमाणित माना गया है। ऐसी स्थिति में इन्हें सभी आरोपों से मुक्त किया जाय। 4. श्री खाँ द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत पाया गया कि श्री खाँ से पूर्व में प्राप्त कारण पृच्छा/बचाव बयान की तकनीकी समीक्षा में श्री खाँ को दोषी पाया गया। जहाँ तक विभागीय कार्यवाही में इन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिये जाने का प्रश्न है। इनका यह कथन अमान्य किया जा सकता है। क्योंकि इनके विरूद्ध विभागीय अधिसूचना संख्या-3521 (एस) अनु0 दिनांक 11.03.2010 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसका निष्पादन दिनांक 21.02. 2014 को किया गया है। ऐसी परिस्थिति में इन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय दिया गया एवं इनका पक्ष सुनने के पश्चात ही संचालन पदाधिकारी द्वारा अपना अभिमत अंकित किया गया है। 5. श्री फिरोज खाँ, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, कोचस स्थित मोहनिया सम्प्रति सेवानिवृृत्त से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरान्त इसे मान्य नहीं पाते हुए सरकार के निर्णय के आलोक में इन्हें निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- (क) उनको देय तिथि से एक वर्ष तक प्रोन्नति की रोक की सजा दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।53 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 24 जून 2014 सं० निग/सारा-9 (आरोप)-57/09 (टिप्पणी भाग)-5283 (एस)—श्री सैयद मुमताज अहमद, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, कोचस स्थित मोहनिया सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, कंकड़बाग, पटना सिटी, पथ प्रमंंडल, पटना के कोचस स्थित मोहनिया के पदस्थापन काल में राष्ट्रीय उच्च पथ सं0-30 के खण्ड कि0मी0 3 से 10 तथा खण्ड कि0मी0 49 से 67 तक के IRQP कार्य में बरती गई अनियमितताओं की जाँच के लिए संकल्प ज्ञापांक 8717 (एस) दिनांक 12.08.2009 द्वारा संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री अहमद को आरोप संख्या-1 के लिए कम दोषी, आरोप संख्या-2 के लिए संदेह का लाभ, आरोप संख्या-3 के लिए कम दोषी, आरोप संख्या-4,5,6,8,9,10 एवं 11 को अप्रमाणित एवं आरोप संख्या-7 के लिए कम दोषी माना गया है। 2. श्री अहमद के पत्रांक-शून्य दिनांक 18.10.2012 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में श्री अहमद द्वारा सारतः उल्लेख किया है कि अनुशासनिक नियमों के तहत् चलायी जाने वाली विभागीय कार्यवाही में सरकारी सेवक को अपना बचाव प्रमाणित नहीं करना होता है, बल्कि विभाग/सरकार को आरोप प्रमाणित करना होता है। चूँकि इस मामले में संचालन पदाधिकारी द्वारा उनके विरूद्ध आरोप सं0-2, 5, 6, 8 एवं 9 को अप्रमाणित माना गया है तथा अन्य आरोपों में कम दोषी माना गया है इसलिए उनके विरूद्ध गठित आरोपों से उन्हें मुक्त किया जाए। 3. श्री अहमद के द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरान्त पाया गया कि इन आरोपों के सम्बन्ध में उनसे पूर्व में भी कारण पृच्छा की गई थी। प्राप्त कारण पृच्छा की तकनीकी समीक्षा में स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया है। इस आधार पर श्री अहमद का द्वितीय कारण पृच्छा स्वीकार योग्य नहीं पाते हुए सरकार के निर्णय श्री सैयद मुमताज अहमद, तत्कालीन सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, कोचस स्थित मोहनिया सम्प्रति सहायक अभियंता, पथ अवर प्रमंडल, कंकड़बाग, पटना सिटी, पथ प्रमंंडल, पटना से द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत इसे मान्य नहीं पाते हुए सरकार के निर्णय के आलोक में इन्हें निम्न दण्ड संसूचित किया जाता है :- (क) उनको ''दो वार्षिक वेतन वृद्धि'' पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक एवं वर्ष 2007-08 के लिए 'निन्दन' की सजा दी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 2 जुलाई 2014 सं० उ0प्र0-195/2009-5865 (एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद अन्तर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-2 C (डिहरी-तिलौथू एवं तिलौथू-रोहतास) पथ की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-145 अनु0 दिनांक 07.06.10 द्वारा समर्पित प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-229 दिनांक 20.09.10 द्वज्ञरा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के 11 वें कि0मी0 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य का एफ0डी0डी0 प्रावधनित 2.30 gm/cc एवं 2.20 gm/cc के विरूद्ध क्रमशः 2.1 gm/cc एवं 2 gm/cc पाये जाने, पथ के कि0मी0 11,21 एवं 37 में कराये गये डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट का FI+EI का औसत कुल मान अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 36.93 प्रतिशत, 36.42 प्रतिशत एवं 39.68 प्रतिशत पाये जाने एवं पथ के 11 वें कि0मी0 में कराये गये बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मान प्रावधानित 3.30 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 2.45 प्रतिशत तथा 4.19 प्रतिशत पाये जाने, पथ के कि0मी0 21 में बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.49 प्रतिशत पाये जाने, पथ के कि0मी0 37 में कराये गये बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित 3.30 प्रतिशत एवं 5 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 2.41 प्रतिशत तथा 3.87 प्रतिशत पाये जाने के आरोपों के लिए श्री संजय शर्मा, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, अनीसाबाद, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, पटना पश्चिम, पटना से विभागीय पत्रांक-4171 (एस) अनु0 दिनांक 07.04.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री शर्मा, सहायक अभियंता के पत्रांक-22 अनु0, दिनांक 05.05.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में अपना कार्य क्षेत्र 0 से 18 कि0मी0 के बीच बताते हुए उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :- (i) पथ के 11 वें कि0मी0 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्यों का एफ0डी0डी0 प्रावधान से कम पाये जाने के आरोप के संबंध में यह उल्लेख किया गया है कि स्थल जाँच में पथ की स्थिति सही पायी गयी। एकरारनामा में एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य मद के संदर्भ में एफ0डी0डी0 के मान का उल्लेख नहीं है। यह स्थल उपलब्ध सामग्रियों से compection के साधन के आधार पर निर्धारित किया जाता है। कंडिका-20.7 के अनुसार बिटुमिन कन्टेन्ट की जाँच हेतु मिक्सिंग प्लांट के समय, बिटुमिन मिक्सिंग लेइंग के पहले, बिटुमिन मिक्सिंग लेइंग के बाद जाँच किया जाता है। इस संबंध में विभागीय पत्रांक-340 दिनांक 07.01.10 जिसमें अन्य कार्य के संदर्भ में यह अंकित है कि उक्त कार्य के निर्मित हॉट मिक्स प्लांट के बी0सम0 मिक्स गिरने के तुरंत बाद जाँच नहीं किया गया। अतः बाद में कराये गये जाँच के आधार पर किसी ठोस नतीजे पर पहुँचना उचित प्रतित नहीं होता है।54 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 (ii) पथ के कि0मी0 11 में कराये गये बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधान से कम पाये जाने के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि Department of Scienstific and Industrial Reserch के Road Reserch Laboratory के Bituminus Material in Road Construction Publication Chapter-20 की कंडिका-20.8 भी अवलोकनीय है, जिसके अनुसार कलान्तर में बिटुमिन कॉन्टेन्ट की जाँच करने पर बिटुमिन कॉन्टेन्ट का प्रतिशत कम आता है। कंडिका-20.7 के अनुसार बिटुमिन कन्टेन्ट की जाँच हेतु मिक्सिंग प्लांट के समय, बिटुमिन मिक्सिंग लेइंग के पहले, बिटुमिन मिक्सिंग लेइंग के बाद जाँच किया जाता है। इस संबंध में विभागीय पत्रांक-340 दिनांक 07.01.10 जिसमें अन्य कार्य के संदर्भ में यह अंकित है कि उक्त कार्य के निर्मित हॉट मिक्स प्लांट के बी0सम0 मिक्स गिरने के तुरंत बाद जाँच नहीं किया गया। अतः बाद में कराये गये जाँच के आधार पर किसी ठोस नतीजे पर पहुँचना उचित प्रतीत नहीं होता है। (iii) पथ के 11 वें कि0मी0 में डब्लू0एम0एम0 कार्य में एग्रीगेट का FI+EI का औसत कुल मान प्रावधानित अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध 36.93 प्रतिशत पाये जाने के संबंध में उल्लेख किया गया है कि कार्य में व्यवहृत होने वाले निर्माण सामग्रियों का गुण नियंत्रण जाँच प्रतिवेदन प्राप्त करने के उपरांत ही कार्य में लगाया जाता था। इस संबंध में IRC के specification for road and bridge के section 400.10 के अनुसार ये जाँच कार्य सम्पादन के पूर्व किया जाना है। कार्य सम्पादन के बाद चपाई कार्य कराये जाने के कारण एग्रीगेट के ग्रेडिंग में परिवर्तन होना स्वभाविक है। उनके द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि पथ की भौतिक स्थिति सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, औरंगाबाद द्वारा कार्य के दौरान समर्पित जाँच प्रतिवेदन विरोधाभाषी प्रतीत होता है। समय-समय पर अधीक्षण अभियंता द्वारा निरीक्षण में पथ की स्थिति अच्छी पाई गई। 3. श्री शर्मा, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि बी0एम0, डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त FI+EI का औसत कुल मान प्रावधान से कम पाये जाने एवं बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित से कम पाये जाने के कारण इन अनियमितताओं के लिए श्री संजय शर्मा, सहायक अभियंता के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक रूप से विचारोपरांत निम्न दंड संसूचित किया जाता है (i) असंचयात्मक प्रभाव से दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगायी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 2 जुलाई 2014 सं० उ0प्र0-195/2009-5867 (एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद अन्तर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-2 C (डिहरी-तिलौथू एवं तिलौथू-रोहतास) पथ की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-145 अनु0 दिनांक 07.06.10 द्वारा समर्पित प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-229 दिनांक 20.09.10 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के 11 वें कि0मी0 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य का एफ0डी0डी0 प्रावधनित 2.30 gm/cc एवं 2.20 gm/cc के विरूद्ध क्रमशः 2.1 gm/cc एवं 2 gm/cc पाये जाने, पथ के कि0मी0 11,21 एवं 37 में कराये गये डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट का FI+EI का औसत कुल मान अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 36.93 प्रतिशत, 36.42 प्रतिशत एवं 39.68 प्रतिशत पाये जाने एवं पथ के 11 वें कि0मी0 में कराये गये बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मान प्रावधानित 3.30 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 2.45 प्रतिशत तथा 4.19 प्रतिशत पाये जाने, पथ के कि0मी0 21 में बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.49 प्रतिशत पाये जाने, पथ के कि0मी0 37 में कराये गये बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित 3.30 प्रतिशत एवं 5 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 2.41 प्रतिशत तथा 3.87 प्रतिशत पाये जाने के आरोपों के लिए श्री विनय कुमार, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, अरवल, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद से विभागीय पत्रांक-4174 (एस) अनु0 दिनांक 07.04.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री कुमार, सहायक अभियंता के पत्रांक-शून्य दिनांक 16.05.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में अपना कार्य क्षेत्र 19 से 40 कि0मी0 के बीच बताते हुए उनके द्वारा मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :- (i) पथ के कि0मी0 21 तथा 37 में कराये गये बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधान से कम पाये जाने के संदर्भ में उल्लेख किया गया है कि Department of Scienstific and Industrial Reserch के Road Reserch Laboratory के Bituminus Material in Road Construction Publication Chapter-20 की कंडिका-20.8 भी अवलोकनीय है, जिसके अनुसार कलान्तर में बिटुमिन कॉन्टेन्ट की जाँच करने पर बिटुमिन कॉन्टेन्ट का प्रतिशत कम आता है। कंडिका-20.7 के अनुसार बिटुमिन कन्टेन्ट की जाँच हेतु मिक्सिंग प्लांट के समय, बिटुमिन मिक्सिंग लेइंग के पहले, बिटुमिन मिक्सिंग लेइंग के बाद जाँच किया जाता है। इस संबंध में विभागीय पत्रांक-340 दिनांक 07.01.10 जिसमें अन्य कार्य के संदर्भ में यह अंकित है कि उक्त कार्य के निर्मित हॉट मिक्स प्लांट के बी0सम0 मिक्स गिरने के तुरंत बाद जाँच नहीं किया गया। अतः बाद में कराये गये जाँच के आधार पर किसी ठोस नतीजे पर पहुँचना उचित प्रतीत नहीं होता है।55 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 (ii) पथ के 21 एवं 37 वें कि0मी0 में डब्लू0एम0एम0 कार्य में एग्रीगेट का FI+EI का औसत कुल मान प्रावधानित से अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध 36.42 तथा 39.68 प्रतिशत पाये जाने के संबंध में उल्लेख किया गया है कि कार्य में व्यवहृत होने वाले निर्माण सामग्रियों का गुण नियंत्रण जाँच प्रतिवेदन प्राप्त करने के उपरांत ही कार्य में लगाया जाता था। इस संबंध में IRC के specification for road and bridge के section 400.10 के अनुसार ये जाँच कार्य सम्पादन के पूर्व किया जाना है। कार्य सम्पादन के बाद चपाई कार्य कराये जाने के कारण एग्रीगेट के ग्रेडिंग में परिवर्तन होना स्वभाविक है। उनके द्वारा यह भी उल्लेख किया गया है कि पथ की भौतिक स्थिति सहायक अभियंता, गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल, औरंगाबाद द्वारा कार्य के दौरान समर्पित जाँच प्रतिवेदन विरोधाभाषी प्रतीत होता है। समय-समय पर अधीक्षण अभियंता द्वारा निरीक्षण में पथ की स्थिति अच्छी पाई गई। 3. श्री कुमार, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि बी0एम0, डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त FI+EI का औसत कुल मान प्रावधान से कम पाये जाने एवं बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित से कम पाये जाने के कारण इन अनियमितताओं के लिए श्री विनय कुमार, सहायक अभियंता के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक रूप से विचारोपरांत निम्न दंड संसूचित किया जाता है (i) असंचयात्मक प्रभाव से दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगायी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 2 जुलाई 2014 सं० उ0प्र0-195/2009-5869 (एस)—राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद अन्तर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-2 C (डिहरी-तिलौथू एवं तिलौथू-रोहतास) पथ की जाँच कार्यपालक अभियंता, उड़नदस्ता प्रमंडल संख्या-1 द्वारा किया गया तथा पत्रांक-145 अनु0 दिनांक 07.06.10 द्वारा समर्पित प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन एवं पत्रांक-229 दिनांक 20.09.10 द्वारा समर्पित गुणवत्ता प्रतिवेदन के समीक्षोपरांत उक्त पथ के 11 वें कि0मी0 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य का एफ0डी0डी0 प्रावधनित 2.30 gm/cc एवं 2.20 gm/cc के विरूद्ध क्रमशः 2.1 gm/cc एवं 2 gm/cc पाये जाने, पथ के कि0मी0 11,21 एवं 37 में कराये गये डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट का FI+EI का औसत कुल मान अधिकतम 30 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 36.93 प्रतिश5, 36.42 प्रतिशत एवं 39.68 प्रतिशत पाये जाने एवं पथ के 11 वें कि0मी0 में कराये गये बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मान प्रावधानित 3.30 प्रतिशत तथा 5 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 2.45 प्रतिशत तथा 4.19 प्रतिशत पाये जाने, पथ के कि0मी0 21 में बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा 3.30 प्रतिशत के विरूद्ध 2.49 प्रतिशत पाये जाने, पथ के कि0मी0 37 में कराये गये बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित 3.30 प्रतिशत एवं 5 प्रतिशत के विरूद्ध क्रमशः 2.41 प्रतिशत तथा 3.87 प्रतिशत पाये जाने के आरोपों के लिए श्री जगन्नाथ प्रसाद यादव, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद सम्प्रति सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ अवर प्रमंडल, सूर्यगढ़ा, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, लखीसराय एट मुंगेर से विभागीय पत्रांक-4168 (एस) अनु0 दिनांक 07.04.11 द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गयी। 2. श्री यादव, सहायक अभियंता के पत्रांक-शून्य अनु0 दिनांक 20.05.11 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में प्रारंभिक जाँच प्रतिवेदन पत्रांक-145 अनु0 दिनांक 07.06.10 एवं गुणवत्ता प्रतिवेदन पत्रांक-229 अनु0 दिनांक 20.09.10 की छाया प्रति संलग्न करते हुए मुख्य रूप से निम्न तथ्यों का उल्लेख किया गया :- (i) पथ के कि0मी0 11 में कराये गये एस0डी0बी0सी0 एवं बी0एम0 कार्य का एफ0डी0डी0 प्रावधान से कम पाये जाने के आरोप के संबंध में उल्लेख किय गया है कि गुण नियंत्रण अवर प्रमंडल की संबद्धता कार्य के क्रियान्वयन से नहीं होती है जबकि त्रुटि/अनियमितता एस0डी0बी0सी0/बी0एम0 के कार्यान्वयन से संबंधित है। अतः उनके संदर्भ में इसका कोई आधार/औचित्य नहीं है। (ii) पथ के कि0मी0 11, 21 एवं 37 में कराये गये डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त एग्रीगेट का FI+EI का औसत मान अधिकत्तम 30 प्रतिशत से अधिक पाये जाने के आरोप के संबंध में उल्लेख किया गया है कि पथ के कि0मी0 11, 21 एवं 37 में कराये गये डब्लू0एम0एम0 कार्य के सम्पादित परतों से नमूने एकत्र कर FI+EI की जाँच कर जाँचफल प्रतिवेदित किये गये हैं जिसका कोई आधार/औचित्य नहीं है। (iii) पथ के कि0मी0 11, 21 एवं 37 में कराये गये बी0एम0 कार्य में प्रयुक्त अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधान से कम पाये जाने के आरोप के संबंध में उल्लेख किया है कि पथ के पथ के कि0मी0 11, 21 एवं 37 में कराये गये बिटुमिन्स परतों के कार्य होते समय हॉट-मिक्स प्लांट से बिटुमिन्स परतों के लिए तैयार किये गये बिटुमिन्स मिक्स निकलने के तुरंत बाद यथा संभव नमूने एकत्र कर बिटुमिन्स content की जाँच की गयी थी एवं जाँचफल राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल, औरंगाबाद तथा संबंधित अवर प्रमंडल को उपलब्ध करा दिये गये थे। इस आलोक में आरेाप को कोई आधार/औचित्य नहीं है। 3. श्री यादव, सहायक अभियंता द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण के समीक्षोपरांत पाया गया कि बी0एम0, डब्लू0एम0एम0 कार्य में प्रयुक्त FI+EI का औसत कुल मान प्रावधान से कम पाये जाने एवं बी0एम0 एवं एस0डी0बी0सी0 कार्य में प्रयुक्त56 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 अलकतरा की औसत मात्रा प्रावधानित से कम पाये जाने के कारण इन अनियमितताओं के लिए श्री जगन्नाथ प्रसाद यादव, सहायक अभियंता के स्पष्टीकरण को मान्य नहीं पाते हुए सम्यक रूप से विचारोपरांत निम्न दंड संसूचित किया जाता है (i) असंचयात्मक प्रभाव से दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगायी जाती है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
——— 7 जुलाई 2014 सं० निग/सारा-।-(ग्रा0)-24/05-6016(एस)—श्री प्रमोद चन्द्र मुन्नु, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल नरकटियागंज सम्प्रति सहायक अभियंता, जिला शहरी विकास अभिकरण, मुजफ्फरपुर को पुपरी नानपुर प्रखंड सीतामढ़ी के पदस्थापन काल में विकास एवं निर्माण कार्यों में की गयी घोर अनियमितता के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-3711 (एस) दिनांक 03.04.06 द्वारा निलंबित कर विभागीय संकल्प ज्ञापांक-6851 (एस) डब्लू ई0 दिनांक 01.07.06 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। विभागीय कार्यवाही के संचालनोपरांत विभागीय अधिसूचना संख्या-3354 (एस) दिनांक 17.03.11 द्वारा इन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दंड संसूचित किया गया :- (i) दो वार्षिक वेतनवृद्धियों पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। (ii) निलंबन अवधि के लिए जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त और कुछ भी देय नही होगा, किन्तु इस निलंबन अवधि को पेंशन प्रयोजनार्थ कर्त्तव्य पर बिताई गयी अवधि मानी जायेगी। 2. सी0डब्लू0जे0सी0सं0-21446/2012 प्रमोद चन्द्र मुन्नु बनाम बिहार राज्य एवं अन्य में दिनांक 13.02.14 को पारित आदेश के अनुपालन में विभागीय अधिसूचना संख्या-3354 (एस) दिनांक 17.03.11 द्वारा संसूचित दंड कंडिका-(ii) को निरस्त किया जाता है। साथ हीं, उक्त न्यायादेश में दिये गये निदेश के आलोक में श्री मुन्नु से निलंबन की अवधि दिनांक 03.04.06 से 16.03.11 तक के विनियमन के संबंध में अलग से कारण पृच्छा की जायेगी।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
10 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-2 (परिवाद)-04/2011-6214 (एस)—श्री राम प्रकाश सिंह, तत्कालीन उप मुख्य अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना सम्प्रति निदेशक (क्रय एवं परिवहन), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना के विरूद्ध बिहार राज्य पुल निर्माण निगम, पटना के पदस्थापन काल में पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत 11 क्षेत्रीय प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए Equipment, supply, installation, commissioning एवं demonstration के E-tender NIQ No. 3159 दिनांक 08.12.10 के निष्पादन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10842 (एस) अनु0 दिनांक 26.09.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवदेन पत्रांक-09 अनु0 दिनांक 20.02.13 में श्री सिंह के विरूद्ध लगाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया, परन्तु संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु को चिन्हित कर श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-6455 (एस) अनु0 दिनांक 08.08.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
2. श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर विभागीय समीक्षोपरांत तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। तकनीकी समिति द्वारा श्री सिंह के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य होने का मंतव्य दिया गया। 3. तदआलोक में श्री राम प्रकाश सिंह, तत्कालीन उप मुख्य अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना सम्प्रति निदेशक (क्रय एवं परिवहन), पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना को उक्त आरोप से मुक्त करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।57 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 10 जुलाई 2014 सं० निग/सारा-2 (परिवाद)-04/2011-6236 (एस)—श्री अमलेन्दु कुमार झा, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्ध बिहार राज्य पुल निर्माण निगम, पटना के पदस्थापन काल में पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत 11 क्षेत्रीय प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए Equipment, supply, installation, commissioning एवं demonstration के E-tender NIQ No. 3159 दिनांक 08.12.10 के निष्पादन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10843 (एस) अनु0 दिनांक 26.09.11 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवदेन पत्रांक-08 अनु0 दिनांक 20.02.13 में श्री झा के विरूद्ध लगाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया, परन्तु संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु को चिन्हित कर श्री झा से विभागीय पत्रांक-6453 (एस) अनु0 दिनांक 08.08.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
2. श्री झा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर विभागीय समीक्षोपरांत तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। तकनीकी समिति द्वारा श्री झा के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य होने का मंतव्य दिया गया। 3. तदआलोक में श्री अमलेन्दु कुमार झा, तत्कालीन प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना सम्प्रति सेवानिवृत, 5 डी0/11, उत्तरी श्रीकृष्णापुरी, बोरिंग रोड, पो0-श्रीकृष्णापुरी, पटना-13 को उक्त आरोप से मुक्त करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
10 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-2 (परिवाद)-04/2011-6238 (एस)—श्री संजय कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता- सह-वरीय परियोजना अभियंता, कार्य प्रमंडल संख्या-1, पटना, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना सम्प्रति वरीय परियोजना अभियंता, कार्य प्रमंडल, गया के विरूद्ध बिहार राज्य पुल निर्माण निगम, पटना के पदस्थापन काल में पथ निर्माण विभाग के अन्तर्गत 11 क्षेत्रीय प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए Equipment, supply, installation, commissioning एवं demonstration के E-tender NIQ No. 3159 दिनांक 08.12.10 के निष्पादन में बरती गयी अनियमितता के लिए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10844 (एस) अनु0 दिनांक 26.09.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। संचालन पदाधिकारी ने अपने जाँच प्रतिवदेन पत्रांक-07 अनु0 दिनांक 20.02.13 में श्री सिंह के विरूद्ध लगाये गये आरोप को प्रमाणित नहीं होने का मंतव्य दिया, परन्तु संचालन पदाधिकारी के जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए असहमति के बिन्दु को चिन्हित कर श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-6454 (एस) अनु0 दिनांक 08.08.13 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी।
2. श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर विभागीय समीक्षोपरांत तकनीकी समिति का मंतव्य प्राप्त किया गया। तकनीकी समिति द्वारा श्री सिंह के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार योग्य होने का मंतव्य दिया गया। 3. तदआलोक में श्री संजय कुमार सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता-सह-वरीय परियोजना अभियंता, कार्य प्रमंडल संख्या-1, पटना, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, पटना सम्प्रति वरीय परियोजना अभियंता, कार्य प्रमंडल, गया को उक्त आरोप से मुक्त करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
10 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-1 (मुख्या0) आरोप-74/2013-6293 (एस) श्री सुरेन्द्र कुमार मेहता, तत्कालीन सहायक अभियंता, मुख्यालय निरूपण अंचल, बिहार, पटना (वस्तुतः सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ निरूपण एवं गुण नियंत्रण अंचल सं0-1, पथ निर्माण विभाग, पटना) की प्रतिनियुक्ति कार्यालय आदेश सं0-121 सह पठित ज्ञापांक 5118(S) दिनांक 26.08.2013 द्वारा संभावित बाढ़ के मददेनजर गठित विभागीय बाढ़ प्रबंधन कोषांग में दिनांक 09.07.13 से 15.07.13 के लिए प्रातः 7ः00 बजे से अपराह्न तक की पाली के लिए किया गया। दिनांक 11.07.13 को प्रातः 8ः45 बजे एवं 9ः15 बजे बाढ़ प्रबंधन कोषांग का किए गए औचक निरीक्षण में श्री मेहता को अनुपस्थित पाए जाने के लिए विभागीय अधिसूचना सं0-5566(S) दिनांक 11.07.13 द्वारा निलम्बित किया गया एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक सं0-6420(S) WE दिनांक 07.08.13 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी के पत्रांक 80 दिनांक 13.12.13 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में आरोप को प्रमाणित नहीं पाए जाने का मंतव्य दिया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन से असहमत होते हुए विभागीय पत्रांक 3664(S) We दिनांक 13.05.14 द्वारा श्री मेहता से द्वितीय कारण पृृच्छा की गई।58 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 2. श्री मेहता के पत्रांक-शून्य दिनांक 03.06.14 द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर के समीक्षोपरान्त श्री मेहता के द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर को स्वीकार करते हुए सरकार के निर्णय के आलोक में इन्हें निलम्बन मुक्त किया जाता है एवं निलंबन अवधि को कर्त्तव्य अवधि मानते हुए पूर्ण वेतन का भुगतान करने का निर्णय लिया जाता है।
3. निलंबन मुक्त होने के पश्चात् श्री मेहता अपना योगदान मुख्यालय, पथ निर्माण विभाग में समर्पित करेंगे।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
11 जुलाई 2014
सं० निग/विरा-2-168/94-6359 (एस)—श्री रणविजय प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, भवन अवर प्रमंडल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता, निर्मल कुंज, प्रभात कॉलोनी, पो0-प्रधान डाकघर, पूर्णियाँ, खजाँची हाट, जिला-पूर्णिया के विरूद्ध भवन प्रमंडल, पूर्णियाँ के पदस्थापन काल में भवन निर्माण सामग्रियों की खरीद में बरती गयी अनियमितताओं के लिए निगरानी विभाग द्वारा निगरानी थाना कांड संख्या-01/83 दर्ज की गयी। इस मामले में विधि विभाग के आदेश ज्ञापांक-1859/जे0 दिनांक 06.05.97 द्वारा अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की गयी।
2. निगरानी थाना कांड संख्या-01/83 में माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी ने श्री सिंह को भारतीय दंड विधान की धारा-420/34, 120 (बी), 477 (ए) एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा-13(1)(डी)-सहपठित धारा-13(2) के अन्तर्गत दोषी पाते हुए तीन वर्ष की सश्रम कारावास एवं `5,000.00 अर्थ दंड की सजा सुनायी गयी। निगरानी विभाग के पत्रांक-1046 अनु0 दिनांक 27.03.09 द्वारा यह संसूचित है कि ऐसे मामले जिसमें सरकारी सेवकों को भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम के अधीन दोष सिद्ध ठहराते हुए दंड दिया गया है, पेंशन को अवरूद्ध करने की कार्रवाई की जाय। उक्त के आलोक में श्री सिंह से विभागीय पत्रांक-3850 (एस) अनु0 दिनांक 19.05.14 द्वारा उनके पेंशन को रोकने हेतु कारण पृच्छा की मांग की गयी।
3. श्री सिंह से प्राप्त कारण पृच्छा उत्तर दिनांक 09.06.14 में मुख्य रूप से कहा है कि विशेष न्यायाधीश (निगरानी) द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, बिहार, पटना में Criminal Appeal No.-1058/10 दाखिल किया गया है, जो अंतिम आदेश के लिए लंबित है। उन्होंने यह भी अंकित किया है कि उनकी सेवानिवृति के पश्चात पेंशन की राशि से 10 प्रतिशत काटकर आज तक पेंशन राशि का भुगतान किया जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में पेंशन रोकना या वापस करने की कार्रवाई करना न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता है। विशेष न्यायाधीश (निगरानी) द्वारा उनके विरूद्ध `5,000.00 अर्थ दंड की सजा सुनाई गई है उसे माननीय उच्च न्यायालय, पटना के आदेश दिनांक 12.10.10 द्वारा अर्थ दंड पर रोक लगा दिया गया है। उन्होंने निष्कर्षतः अपने कारण पृच्छा उत्तर में अंकित किया है कि माननीय उच्च न्यायालय, बिहार, पटना द्वारा अपील के निस्तारण के पूर्व ही पेंशन रोकना उचित नहीं है।
4. श्री सिंह से प्राप्त कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत पाया गया कि माननीय विशेष न्यायाधीश (निगरानी) द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे प्रतीत हो कि उस आदेश के क्रियान्वयन पर सक्षम न्यायालय द्वारा रोक लगायी गयी है, मात्र अपील आवेदन के लंबित रहने के आधार पर पेंशन अवरूद्ध करने की कार्रवाई लंबित नहीं रखी जा सकती है। साथ हीं, विषयगत मामले में माननीय न्यायालय (निगरानी) द्वारा संबंधित पक्षों को सुनने एवं अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किये गये आरोप पत्र एवं उपलब्ध कराये गये साक्ष्य के आधार पर भी दंडादेश पारित किया गया है। अतः श्री सिंह का कारण पृच्छा उत्तर स्वीकार योग्य नहीं है।
5. तद्आलोक में सम्यक् विचारोपरांत सरकार के निर्णयानुसार श्री रणविजय प्रसाद सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता, भवन अवर प्रमंडल, कटिहार सम्प्रति सेवानिवृत सहायक अभियंता का पेंशन शून्य करने का निर्णय लिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
22 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-5 (पथ)-3004/02-6811 (एस)—श्री वैद्यनाथ प्रसाद वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना पश्चिम पथ प्रमंडल, पटना, पथ निर्माण विभाग सम्प्रति सेवानिवृत, मगध कॉलोनी, कुर्जी, भगेड़ा आश्रम के नजदीक कुर्जी, पो0-सदाकत आश्रम, पटना-10 द्वारा पटना पश्चिम पथ प्रमंडल, पटना के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितता के लिए अधिसूचना संख्या-13512 (एस) दिनांक 01.12.06 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :-
(i) इनके पेंशन से 50 प्रतिशत की राशि कटौती का आदेश दिया जाता है। (ii) इनके निलंबन अवधि दिनांक 27.11.98 से 31.01.99 तक की अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त इन्हें कुछ भी देय नहीं होगा।
2. संसूचित दंड के विरूद्ध दायर सी0डब्लू0जे0सी0सं0-6962/2007 से उत्पन्न एल0पी0ए0सं0-459/2012 में दिनांक 16.05.14 को माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में श्री वैद्यनाथ प्रसाद वर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, पटना पश्चिम पथ प्रमंडल, पटना, पथ निर्माण विभाग सम्प्रति सेवानिवृत, मगध कॉलोनी, कुर्जी, भगेड़ा आश्रम के नजदीक कुर्जी, पो0-सदाकत आश्रम, पटना-10 के विरूद्ध निर्गत अधिसूचना संख्या-13512 (एस) दिनांक 01.12.06 को निरस्त किया जाता है।59 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 3. माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में श्री वैद्यनाथ प्रसाद वर्मा, सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता को शत प्रतिशत पेंशन भुगतान करने तथा इस पर अर्जित ब्याज के रूप में `50,000.00 (पचास हजार रूपये) के भुगतान करने एवं निलंबन अवधि के सम्पूर्ण राशि का भुगतान करने का आदेश दिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
23 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-5 (लोका)-3015/02-6866 (एस)—श्री शिव कुमार ठाकुर, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, पटना सम्प्रति दिनांक 31.01.2000 को सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, 2/ए 2, आनन्दपुरी, पश्चिम बोरिंग केनाल रोड, पटना द्वारा ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, पटना के पदस्थापन काल में बरती गयी अनियमितताओं के लिए इनके विरूद्ध ग्रामीण विकास विभाग (ग्राम्य अभियंत्रण संगठन एवं पंचायती राज) के पत्रांक-2092 अनु0 दिनांक 10.07.95 से प्राप्त अनुशंसा के आलोक में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3151 (एस) अनु0 दिनांक 27.04.96 द्वारा इनके सेवाकाल में विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसे इनके दिनांक 31.01.2000 को सेवानिवृत होने के पश्चात विभागीय संकल्प ज्ञापांक-3739 (एस) अनु0 दिनांक 29.05.02 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत सम्परिवर्तित किया गया। 2. विभागीय कार्यवाही में श्री ठाकुर के द्वारा दिनांक 21.11.08 को बचाव वयान बिना साक्ष्य के समर्पित किया गया। संचालन पदाधिकारी के अनेक पत्रों द्वारा सूचित किये जाने के बावजूद श्री ठाकुर विभागीय कार्यवाही में उपस्थित नहीं हुए। 3. संचालन पदाधिकारी के पत्रांक-345 अनु0 दिनांक 05.05.04 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में इनके विरूद्ध गठित सभी 14 (चौदह) आरोप के प्रमाणित पाये जाने का मंतव्य दिया गया। तदोपरांत मामले के समीक्षोपरांत विभागीय पत्रांक-6890 (एस) अनु0 दिनांक 25.06.09 द्वारा इनसे द्वितीय कारण पृच्छा की मांग की गयी तथा पत्रांक-9949 (एस) दिनांक 09.09.09 द्वारा स्मारित किया गया। 4. श्री ठाकुर द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा नहीं देने के कारण सचिव के स्तर पर व्यक्तिगत सुनवाई हेतु विभागीय पत्रांक-10482 (एस) दिनांक 16.07.10, पत्रांक-11011 (एस) दिनांक 28.07.10 एवं पत्रांक-12440 (एस) दिनांक 19.08.10 द्वारा इन्हें तीन बार सुनवाई का अवसर दिया गया । श्री ठाकुर द्वारा हर बार विषय से हट कर नये-नये तथ्यों को अंकित करते हुए इसे टालने का प्रयास किया जाता रहा कि इस विभागीय कार्यवाही के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना मेंं याचिका दायर की है और उसमें फैसले के पश्चात ही वे द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करेंगे। बाध्य होकर विभाग द्वारा प्रेस विज्ञप्ति निर्गत की गयी। श्री ठाकुर ने इस प्रेस विज्ञप्ति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आवेदन दिनांक 09.11.10 द्वारा कहा कि इस मामले में उनके द्वारा किये गये अनुरोध की विभाग अनसुनी कर रहा है। 5. इस परिस्थिति में पूरे मामले के समीक्षोपरांत पाया गया कि विभागीय कार्यवाही एवं न्यायालीय मामला अलग-अलग है। श्री ठाकुर के मामले के निष्पादन में पादर्शिता एवं आरोपी को अपना बचाव बयान एवं पक्ष रखने का भरपूर अवसर दिया जा चुका है। किन्तु श्री ठाकुर द्वारा विषय से हटकर मामले को लगातार टालने का प्रयास किया जाता रहा है। श्री ठाकुर के विरूद्ध गठित आरोप प्रपत्र-'क' में इनसे `4,78,780.00 (चार लाख अठहत्तर हजार सात सौ अस्सी) रूपये की वसूली के आरोप को भी प्रमाणित पाया गया। 6. श्री ठाकुर के विरूद्ध प्रमाणित पाये गये आरेाप के लिए इनके सेवानिवृत की तिथि से लगातार इनके पेंशन से 20 प्रतिशत कटौती का निर्णय लिया गया। तदआलोक में उक्त प्रस्तावित दंड पर विभागीय पत्रांक-2098 (एस) अनु0 दिनांक 10. 03.14 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग से सहमति/परामर्श की मांग की गयी। बिहार लोक सेवा आयोग ने अपने पत्रांक-210 दिनांक 29.04.14 द्वारा प्रस्तावित दंड के अनुपातिक नहीं होने के आलोक में विभागीय दंड प्रस्ताव से असहमति व्यक्त किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त परामर्श के आलोक में मामले की समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि प्रस्तावित दंड पर बिहार लोक सेवा आयोग की सहमति/परामर्श मात्र औपचारिकता है तथा सरकार को इस संबंध में निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त है।
7. अतएव सरकार के निर्णयानुसार श्री शिव कुमार ठाकुर, तत्कालीन सहायक अभियंता, ग्राम्य अभियंत्रण संगठन, कार्य प्रमंडल, पटना सम्प्रति सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता, 2/ए 2, आनन्दपुरी, पश्चिम बोरिंग केनाल रोड, पटना को सेवानिवृत हो जाने एवं इन्हें सेवान्त लाभ का भुगतान हो जाने के कारण प्रमाणित पाये गये आरोप के लिए इनके सेवानिवृत की तिथि से लगातार इनके पेंशन से 20 प्रतिशत की कटौती का आदेश दिया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
24 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-2 (परिवाद)-4/2012-6957 (एस)—श्री वीरेन्द्र कुमार, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना सम्प्रति कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण), पथ अंचल, सहरसा द्वारा अधीक्षण अभियंता के तकनीकी सलाहकार, रूपांकण-सह-यांत्रिक अंचल, गंगा पुल परियोजना, पटना के पदस्थापन काल में सचिव के समक्ष गलत बयानी कर भ्रमित करने का प्रयास एवं कार्य के प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारित60 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 जैसी बरती गयी अनियमितता के लिए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) (क) के तहत विभागीय अधिसूचना संख्या-2637 (एस) दिनांक 07.03.12 द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5731 (एस) अनु0 दिनांक 24.05.12 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी जिसमें अधिसूचना संख्या-990 (एस)-सहपठित ज्ञापांक-991 (एस) दिनांक 06.02.14 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- (i) श्री कुमार के एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया। 2. श्री कुमार, कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण), पथ अंचल, सहरसा के पत्रांक-शून्य (अनु0) दिनांक 28.02.14 द्वारा दंड के विरूद्ध अपना पुनर्विचार अभ्यावेदन समर्पित किया गया जिसमें उनके द्वारा सारतः उल्लेख किया गया कि उनके विरूद्ध गलत बयानी कर भ्रमित करने का प्रयास एवं कार्य की प्रति लापरवाही एवं स्वेच्छाचारिता जैसी साक्ष्य विहीन अनियमितता के लिए संसूचित दंड को समाप्त करने का अनुरोध किया गया। चूकि पूर्व में इनके द्वितीय कारण पृच्छा के समीक्षोपरांत ही दंड संसूचित किया गया था। प्रस्तुत पुनर्विचार आवेदन में इनके द्वारा कोई नया तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया, बल्कि द्वितीय कारण पृच्छा में कही गयी बातों की हीं पुनरावृति की गयी है। 3. अतएव श्री वीरेन्द्र कुमार, कार्यपालक अभियंता (अनुश्रवण), पथ अंचल, सहरसा के पुनर्विचार अभ्यावेदन पत्रांक-शून्य (अनु0) दिनांक 28.02.14 को सरकार के निर्णयानुसार अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
25 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-9 (आरोप)-75/2011-6981 (एस)—श्री यज्ञ नारायण मिश्र, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ सम्प्रति कार्यपालक अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, बगहा-1 को कार्यपालक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल के दौरान सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 29.11.2011 को राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ अंतर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-30 ए का निरीक्षण क्रम में पाये गये अनियमितताओं के लिए श्री मिश्र को अधिसूचना संख्या-13211 (एस) दिनांक 01.12.11 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-14211 (एस) दिनांक 27.12.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। जिसमें अधिसूचना संख्या-5073 (एस) दिनांक 26.06.13 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- (i) इनकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है। 2. श्री यज्ञ नारायण मिश्र द्वारा दंड के विरूद्ध पुनर्विलोकन एवं निलंबन अवधि को विनियमित किये जाने के संबंध में अभ्यावेदन दिया गया, जिसमें श्री मिश्र द्वारा सारतः उल्लेख किया गया कि उनके विरूद्ध गठित आरोप का तृतीय अंश जो नवनिर्मित पुलों के पहुँच पथों के मरम्मति कार्य में धीमी प्रगति से संबंधित है को संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित माना गया तथा विभाग द्वारा उससे सहमत होते हुए द्वितीय कारण पृच्छा की गयी तथ दंड अधिसूचना की कंडिका-5 में अंकित विभागीय समीक्षा को अंकित करते हुए उल्लेख किया गया है कि 6 पुलों का कार्य 4 पृथक-पृथक एकरारनामा दिनांक 23.11. 11 के अन्तर्गत कराया जाना था। कार्य प्रारंभ की तिथि 23.11.11 तथा समाप्ति तिथि 18.12.11 थी। इसके तहत sub-base के उपर WMM, BUSG, BM एवं SDBC परत का निर्माण करना था। दिनांक 29.11.11 तक उक्त चारो एकरारनामा के तहत प्रथम 6 दिनों के भीतर कुल एकरारित राशि का 10 प्रतिशत कार्य कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जिसके विरूद्ध 11.63 प्रतिशत का finished कार्य करा दिया गया था। इसके अतिरिक्त कार्य स्थल एवं प्लांट स्थल पर सम्पूर्ण निर्माण सामग्री भी एकत्रित कर ली गयी थी। इससे स्पष्ट है कि कार्य लक्ष्य से अधिक तेज थी। सभी कार्य अंतिम तिथि तक पुरा भी हो गया था। श्री मिश्र द्वारा lack of supervision एवं lack of proper monitoring के विभागीय निष्कर्ष को आधारहीन एवं औचित्यहीन उल्लेख किया गया। 3. श्री मिश्र के अपील अभ्यावेदन के सम्यक विवेचनोपरांत इन्हें निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता के अतिरिक्त अन्य कोई वेतनादि भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया जा चुका है। प्राप्त अभ्यावेदन में उन्हीं बातों का जिक्र किया गया है, जो द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर में अंकित है।
4. उक्त बिन्दुओं के अवलोकन से स्पष्ट है कि श्री मिश्र ने अपने पुनर्विचार आवेदन में ऐसा कोई तथ्य नहीं दिया है, जिस पर पुनर्विचार किया जा सके। अतएव इनके पुनर्विचार आवेदन को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
25 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-9 (आरोप)-75/2011-6983 (एस)—श्री सुनील कुमार सुमन, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ सम्प्रति सहायक अभियंता, बिहार राज्य पथ विकास निगम, पटना को सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल के दौरान सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 29.11.2011 को राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ अंतर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-30 ए के किये गये निरीक्षण क्रम में पाये गये अनियमितताओं के लिए श्री सुमन को अधिसूचना संख्या-13213 (एस) दिनांक 01.12.11-सह-शुद्धि पत्र अधिसूचना संख्या-14231 (एस) दिनांक 27.12.11 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-14212 (एस) दिनांक61 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 27.12.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। जिसमें अधिसूचना संख्या-3463 (एस) दिनांक 02.05.13 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- (i) इनकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है। 2. श्री सुनील कुमार सुमन द्वारा दंड के विरूद्ध पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिया गया जिसमें श्री सुमन ने निम्न बातों का उल्लेख किया :-
(i) संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को तीन अंशों में विभक्त करते हुए आरोप के एक अंश को यथा, राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-30 (ए) में नव निर्मित 6 पुलों के पहुँच पथ कार्य में धीमी प्रगति को प्रमाणित बताया गया।
(ii) संचालन पदाधिकारी द्वारा यह विचार नहीं किया जा सका कि किसी कार्य के संपादन के प्रथम चरण में कार्य की प्रगति अन्य चरणों की अपेक्षा कम होती है।
(iii) कार्यादेश 23.11.11 को निर्गत किया गया था एवं 29.11.11 को सचिव द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया, जिसमें मरम्मति कार्य में गतिशिलता दृष्टिगत नहीं हुई।
(iv) एफ0 2 एकरारनामा के क्लॉज-6 के अनुसार कार्यपालक अभियंता क्लॉज के संचालन के लिए सक्षम प्राधिकार हैं, जिसमें संवेदक से अपेक्षित दायित्व के विफलता के लिए संवेदक के विरूद्ध समुचित कार्रवाई करते हुए आर्थिक दंड देने का भी प्रावधान है।
(v) एकरारनामा के अनुसार कार्य समाप्ति की तिथि 17.12.11 को कार्य संवेदक द्वारा पुरा कर दिया गया। (vi) दिया गया दंड अभिलेखीय साक्ष्य पर आधारित नहीं है।
3.(i) श्री सुमन के अपील अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी विभाग के वरीयतम तकनीकी पदाधिकारी हैं, जिन्हें अपने कार्यों का पूर्ण अनुभव प्राप्त है। संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन लगाये गये आरोप एवं उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर सम्पूर्ण विचारोपरांत माना है। अतएव इसमें त्रुटि की संभावना प्रतीत नहीं होती है।
(ii) संदर्भित कार्य की स्थिति निरीक्षण की तिथि को स्वयं सचिव द्वारा भयावह पायी गयी थी। सचिव द्वारा लिये गये प्रशासनिक निर्णय एवं उसके उपरांत इस पथ के तहत्व को देखते हुए विभिन्न प्राधिकारों द्वारा किये गये सतत अनुश्रवण के कारण ही निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण हुआ, इसमें श्री सुमन को कोई योगदान नहीं है, क्योंकि श्री सुमन को निलंबित कर दिया गया था एवं अन्य अभियंताओं को उक्त कार्य की देखभाल की जवाबदेही दी गयी थी।
(iii) प्रमंडलों में कार्यपालक अभियंता का कार्य team work होता है, जिसमें सभी स्तर के कर्मचारियों/पदाधिकारियों का active cooperation अपेक्षित होता है। यह पथ अत्यधिक महत्वपूर्ण है। सहायक अभियंता के नाते इन्हें प्रथम चरण में जैसा कि ये बता रहे हैं संवेदकों से त्वरित कार्य कराना चाहिए था। श्री सुमन इस दायित्व के निर्वहन में असफल रहें।
(iv) श्री सुमन के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी और संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में इन्हें अपने आप को निर्दोष प्रमाणित करने का एक अतिरिक्त अवसर द्वितीय कारण पृच्छा के रूप में दिया गया। उनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर समीक्षोपरांत दंड अधिरोपित किया गया। 4. उक्त बिन्दुओं के अवलोकन से स्पष्ट है कि श्री सुनील कुमार सुमन ने अपने पुनर्विचार आवेदन में ऐसा कोई तथ्य नहीं दिया है, जिस पर पुनर्विचार किया जा सके। अतएव इनके पुनर्विचार आवेदन को अस्वीकृत किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
25 जुलाई 2014
सं० निग/सारा-9 (आरोप)-75/2011-6985 (एस)—श्री सुनील कुमार सुमन, तत्कालीन सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ सम्प्रति सहायक अभियंता, बिहार राज्य पथ विकास निगम, पटना को सहायक अभियंता, राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ के पदस्थापन काल के दौरान सचिव, पथ निर्माण विभाग, बिहार, पटना द्वारा दिनांक 29.11.2011 को राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल-1, बिहारशरीफ अंतर्गत राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-30 ए के किये गये निरीक्षण क्रम में पाये गये अनियमितताओं के लिए श्री सुमन को अधिसूचना संख्या-13213 (एस) दिनांक 01.12.11-सह-शुद्धि पत्र अधिसूचना संख्या-14231 (एस) दिनांक 27.12.11 द्वारा निलंबित किया गया तथा संकल्प ज्ञापांक-14212 (एस) दिनांक 27.12.11 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। जिसमें अधिसूचना संख्या-3463 (एस) दिनांक 02.05.13 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- (i) इनकी एक वार्षिक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक लगायी जाती है। 2. श्री सुनील कुमार सुमन द्वारा दंड के विरूद्ध पुनर्विलोकन अभ्यावेदन दिया गया जिसमें श्री सुमन ने निम्न बातों का उल्लेख किया :-
62 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014(i) संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप को तीन अंशों में विभक्त करते हुए आरोप के एक अंश को यथा, राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-30 (ए) में नव निर्मित 6 पुलों के पहुँच पथ कार्य में धीमी प्रगति को प्रमाणित बताया गया।
(ii) संचालन पदाधिकारी द्वारा यह विचार नहीं किया जा सका कि किसी कार्य के संपादन के प्रथम चरण में कार्य की प्रगति अन्य चरणों की अपेक्षा कम होती है।
(iii) कार्यादेश 23.11.11 को निर्गत किया गया था एवं 29.11.11 को सचिव द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया, जिसमें मरम्मति कार्य में गतिशिलता दृष्टिगत नहीं हुई।
(iv) एफ0 2 एकरारनामा के क्लॉज-6 के अनुसार कार्यपालक अभियंता क्लॉज के संचालन के लिए सक्षम प्राधिकार हैं, जिसमें संवेदक से अपेक्षित दायित्व के विफलता के लिए संवेदक के विरूद्ध समुचित कार्रवाई करते हुए आर्थिक दंड देने का भी प्रावधान है।
(v) एकरारनामा के अनुसार कार्य समाप्ति की तिथि 17.12.11 को कार्य संवेदक द्वारा पुरा कर दिया गया। (vi) दिया गया दंड अभिलेखीय साक्ष्य पर आधारित नहीं है।
3.(i) श्री सुमन के अपील अभ्यावेदन के समीक्षोपरांत पाया गया कि विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी विभाग के वरीयतम तकनीकी पदाधिकारी हैं, जिन्हें अपने कार्यों का पूर्ण अनुभव प्राप्त है। संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन लगाये गये आरोप एवं उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर सम्पूर्ण विचारोपरांत माना है। अतएव इसमें त्रुटि की संभावना प्रतीत नहीं होती है।
(ii) संदर्भित कार्य की स्थिति निरीक्षण की तिथि को स्वयं सचिव द्वारा भयावह पायी गयी थी। सचिव द्वारा लिये गये प्रशासनिक निर्णय एवं उसके उपरांत इस पथ के तहत्व को देखते हुए विभिन्न प्राधिकारों द्वारा किये गये सतत अनुश्रवण के कारण ही निर्माण कार्य निर्धारित समयावधि के भीतर पूर्ण हुआ, इसमें श्री सुमन को कोई योगदान नहीं है, क्योंकि श्री सुमन को निलंबित कर दिया गया था एवं अन्य अभियंताओं को उक्त कार्य की देखभाल की जवाबदेही दी गयी थी।
(iii) प्रमंडलों में कार्यपालक अभियंता का कार्य team work होता है, जिसमें सभी स्तर के कर्मचारियों/पदाधिकारियों का active cooperation अपेक्षित होता है। यह पथ अत्यधिक महत्वपूर्ण है। सहायक अभियंता के नाते इन्हें प्रथम चरण में जैसा कि ये बता रहे हैं संवेदकों से त्वरित कार्य कराना चाहिए था। श्री सुमन इस दायित्व के निर्वहन में असफल रहें।
(iv) श्री सुमन के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी और संचालन पदाधिकारी से प्राप्त प्रतिवेदन के आलोक में इन्हें अपने आप को निर्दोष प्रमाणित करने का एक अतिरिक्त अवसर द्वितीय कारण पृच्छा के रूप में दिया गया। उनसे प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा उत्तर पर समीक्षोपरांत दंड अधिरोपित किया गया। 4. उपर्युक्त बिन्दुओं के आलोक में श्री सुनील कुमार सुमन के अभ्यावेदन को मान्य नहीं पाते हुए सरकार द्वारा इनके निलंबन अवधि के विनियमन का अभ्यावेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया जाता है
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰) अस्पष्ट, उप-सचिव (निगरानी)।
———
1 अगःत 2014
सं0 ू.10-उ.(cid:18)व. (NH)-10/06-7196 (एस)—ौी मोहन िस;हा, तaकालीन कनीय अिभयंता, पथ ूमंडल, बेगूसराय तथा पथ ूमंडल, जयनगर (सhूित रांश(cid:15)य उUच पथ ूमंडल, जयनगर) सhूित Pदनांक-31-01-08 को सेवािनवृत सहायक अिभयंता के (cid:18)वiW पथ ूमंडल, बेगूसराय के पदःथापन काल मZ भौितक सaयापन के बम मZ इनके भंडार लेखा मZ 83.768 मे. टन अलकतरा एवं ःथल लेखा मZ 3.103 मे. टन अलकतरा क] कम पाई गई माऽा के मू@य क] वसूली इनसे करने तथा पथ ूमंडल, जयनगर के पदःथापन काल मZ झामा मेटल 373.57 M3 (cid:30)जसका मू@य 646.21 ूित घन मीटर क] दर से ` 2,41,405.00 और ब@क (cid:18)बटुिमन 146.242 मे. टन (cid:30)जसका मू@य 1079.92 ूित मे. टन क] दर से ` 15,78,817.00 अथाLत कु ल ` 18,20,222.00 के झामा मेटल एवं ब@क (cid:18)बटु िमन का ूभार अपने ूितःथानी को कम सmपने के आरोपB के िलए (cid:18)वभागीय अिधसूचना सं(cid:8)या-6089 (एस) Pदनांक-15-05- 07 (cid:24)ारा इ;हZ िनलं(cid:18)बत करते हुए (cid:18)वभागीय संक@प _ापांक-6522 (एस) अनु. Pदनांक-25-05-07 (cid:24)ारा इनके (cid:18)वiW (cid:18)वभागीय कायLवाह(cid:15) संचािलत क] गयी। ौी िस;हा, तaकालीन कनीय अिभयंता Pदनांक-31- 01-08 को िनलंबन क] (cid:30)ःथित मZ ह(cid:15) सेवािनवृत हो गए। ौी िस;हा के सेवािनवृित के फलःवiप63 (cid:18)बहार गजट, 1 अ)तूबर 2014 (cid:18)वभागीय संक@प _ापांक-3376 (एस) Pदनांक-11-03-08 (cid:24)ारा इनके (cid:18)वiW पूवL से संचािलत (cid:18)वभागीय कायLवाह(cid:15) को (cid:18)बहार पZशन िनयमावली के िनयम 43 (बी) के तहत सhप`रवितLत Pकया गया।
2. (cid:18)वभागीय कायLवाह(cid:15) के संचालन के उपरांत (cid:18)वभागीय अिधसूचना सं(cid:8)या-1438 (एस)-सह-पPठत _ापांक-1439 (एस) Pदनांक-22-02-13 क] कं Pडका-8 (cid:24)ारा िनhन दंड संसूिचत Pकया गया :-
(i) ` 15,78,817.00+` 3,47,484= ` 19,26,301.00 क] वसूली इनके सेवािनवृत लाभB से क] जाय।
(ii) इनक] िनलंबन क] अविध Pदनांक-15-05-07 से Pदनांक 31-01-08 तक के (cid:18)विनयमन के संबंध मZ इनसे अलग से कारण पृUछा कर िनणLय िलया जायेगा।
3. तदोपरांत (cid:18)वभागीय अिधसूचना (शु(cid:18)W-पऽ) सं(cid:8)या-3469 (एस) Pदनांक 02-05-13 (cid:24)ारा (cid:18)वभागीय अिधसूचना सं(cid:8)या-1438 (एस)-सह-पPठत _ापांक-1439 (एस) Pदनांक 22-02-13 क] कं Pडका-8 (i) को िनhन iपेण संशोिधत Pकया गया :-
` 14,24,449.00+` 3,47,484.00=` 17,71,933.00 क] वसूली इनके सेवािनवृित लाभB से क] जाय।
(cid:18)वभागीय अिधसूचना सं(cid:8)या-1438 (एस)-सह-पPठत _ापांक-1439 (एस) Pदनांक 22-02-13 क] कं Pडका-8 (ii) यथावत रहेगी।
4. ौी िस;हा, तaकालीन सहायक अिभयंता सhूित सेवािनवृत से (cid:18)वभागीय पऽांक-3617 (एस) अनु. Pदनांक 08-05-13 (cid:24)ारा इनक] िनलंबन क] अविध Pदनांक 15-05-07 से 31-01-08 तक के (cid:18)विनयमन के संबंध मZ कारण पृUछा क] मांग क] गयी।
5. ौी िस;हा के आवेदन Pदनांक 07-03-14 (cid:24)ारा सम(cid:18)पLत कारण पृUछा उaतर के समीJोपरांत पाया गया Pक ौी िस;हा (cid:24)ारा िनलंबन अविध के (cid:18)विनयमन के संबंध मZ कारण पृUछा उaतर कर(cid:15)ब 10 माह बाद सम(cid:18)पLत Pकया गया है जबPक इनसे 15 PदनB के अ;दर उaतर क] मांग क] गयी थी। इनके कारण पृUछा उaतर मZ ऐसा कोई तoय अंPकत नह(cid:15)ं है (cid:30)जसके कारण इ;हZ िनलंबन अविध का सhपूणL भुगतान Pकया जाय। यह भी पाया गया Pक यPद इनका िनलंबन पूणLiपेण अनुिचत होता तो वैसी प`र(cid:30)ःथित मZ ह(cid:15)ं िनलंबन अविध का भुगतान Pकया जाता, Pक;तु इनका िनलंबन औिचaयपूणL था और समीJोपरांत इनसे ` 19,26,301.00 क] वसूली क] अिधसूचना िनगLत क] जा चुक] है। अत: िनलंबन अविध Pदनांक 15-05-07 से 31-01-08 तक के भुगतान से संबंिधत ौी िस;हा के आवेदन Pदनांक 07-03-14 को अःवीकृ त Pकया जाता है तथा उ)त िनलंबन अविध के िलए इ;हZ जीवन िनवाLह भaता के अित`र)त और कु छ भी देय नह(cid:15)ं होगा Pक;तु पZशन ूयोजनाथL इसे कतL<य पर (cid:18)बतायी गयी अविध के iप मZ प`रग(cid:30)णत Pकया जायेगा।
(cid:18)बहार-राQयपाल के आदेश से,
(ह0)-अःपंट, उप सिचव (िनगरानी) ।
——— अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,
(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार, , , , पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित।पटना (cid:24)ारा ूकािशत एवं मुPित। (cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट, , , , 28ÑÑÑÑ571+100----ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)ड(cid:15)0000ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)ट(cid:15)0000पीपीपीपी0000।।।। Website: http://egazette.bih.nic.in