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पटनापटनापटनापटना, , , , मंगलवारमंगलवारमंगलवारमंगलवार, , , , 7777 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 जल संसाधन विभाग -------- अधिसूचना 26 सितम्बर 2014
सं0 22 नि0 सि0 (औ0)-17-03/2014
22 नि0 सि0 (औ0)-17-03/2014/1435—श्री कृष्ण कुमार शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, श्री कृष्ण कुमार शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमण्डल, अरवल सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व जिला परिषद अरवल द्वारा वर्ष 2005-06में कराए ग्रामीण विकास विशेष प्रमण्डल, अरवल सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व जिला परिषद अरवल द्वारा वर्ष 2005-06में कराए ग्रामीण विकास विशेष प्रमण्डल, अरवल सम्प्रति सेवानिवृत के विरूद्व जिला परिषद अरवल द्वारा वर्ष 2005-06में कराए गए कार्य जो बिहार राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत थे, में बरती गई अनियमितता के लिए ग्रामीण कार्य विभाग थे, में बरती गई अनियमितता के लिए ग्रामीण कार्य विभाग गए कार्य जो बिहार राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत 11 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के संकल्प ज्ञापांक 1159 दिनांक 3.2. .11 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 14 एवं 17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई। के नियम 14 एवं 17 में विहित रीति से विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गई।
ार्मा द्वारा अपने बचाव बयान में निम्नांकित तथ्य दिए गएः-
संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री शर्मा द्वारा अपने बचाव बयान में निम्नांकित तथ्य दिए गएः- संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री श् (I) जॅाच दल का गठन कानून सम्मत तरीके से नहीं किया गया है और उनसे भी कनीय पदाधिकारी जॅाच दल का गठन कानून सम्मत तरीके से नहीं किया गया है और उनसे भी कनीय पदाधिकारी जॅाच दल का गठन कानून सम्मत तरीके से नहीं किया गया है और उनसे भी कनीय पदाधिकारी (सहायक अभियन्ता) के द्वारा योजना सं0-11/2005-06 की जॅाच करवाई गई है जो न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है। (सहायक अभियन्ता) के द्वारा योजना सं0-11/2005-06 की जॅाच करवाई गई है जो न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है। (सहायक अभियन्ता) के द्वारा योजना सं0-11/2005-06 की जॅाच करवाई गई है जो न्याय संगत प्रतीत नहीं होता है। (II) जॅाच दल द्वारा स्थल जॅाच की सूचना उन्हें नहीं दी गई और उनके पीछे स्थल की जॅाच कार्य सम्पादन ारा स्थल जॅाच की सूचना उन्हें नहीं दी गई और उनके पीछे स्थल की जॅाच कार्य सम्पादन ारा स्थल जॅाच की सूचना उन्हें नहीं दी गई और उनके पीछे स्थल की जॅाच कार्य सम्पादन के करीब 6(छः) महीने बाद दिनांक 15.11.06 को किया गया जबकि कार्य का सम्पादन 25.5.06 को ही हो गया था और 06 को ही हो गया था और के करीब 6(छः) महीने बाद दिनांक 15 6 बेलखरा से कयाल मोड़ तक तु के बाद जॅाच दल द्वारा स्थल की जॅाच की गई। योजना सं0-11/2005-06 बेलखरा से कयाल मोड़ तक वर्षाऋतु के बाद जॅाच दल द्वारा स्थल की जॅाच की गई। योजना सं0-11/2005-0 तु के पश्चात मापी लेने पर मिट्टी का अपक्षयन होना स्वाभाविक है जिससे कभी ऋतु के पश्चात मापी लेने पर मिट्टी का अपक्षयन होना स्वाभाविक है जिससे कभी मिट्टी भराई से संबंधित है और वर्षाऋ भी वास्तविक मापी नहीं की जा सकती। इसलिए जॅाच दल के प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय कार्यवाही का संचालन भी वास्तविक मापी नहीं की जा सकती। इसलिए जॅाच दल के प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय कार्यवाही का संचालन भी वास्तविक मापी नहीं की जा सकती। इसलिए जॅाच दल के प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय कार्यवाही का संचालन किया जाना युक्तिसंगत एवं न्याय संगत नहीं है।
ंगत एवं न्याय संगत नहीं है।
(III) जॅाच दल द्वारा स्थल की भौतिक मापी नहीं ली गई। जॅाच प्रतिवेदन में कहीं नहीं उल्लेख किया गया है जॅाच दल द्वारा स्थल की भौतिक मापी नहीं ली गई। जॅाच प्रतिवेदन में कहीं नहीं उल्लेख किया गया है जॅाच दल द्वारा स्थल की भौतिक मापी नहीं ली गई। जॅाच प्रतिवेदन में कहीं नहीं उल्लेख किया गया है कि प्राक्कलन के अनुसार कितनी मिट्टी भराई करनी थी और वास्तव में कितनी मिट्टी की भराई की गई और कितनी कि प्राक्कलन के अनुसार कितनी मिट्टी भराई करनी थी और वास्तव में कितनी मिट्टी की भराई की गई और कितनी कि प्राक्कलन के अनुसार कितनी मिट्टी भराई करनी थी और वास्तव में कितनी मिट्टी की भराई की गई और कितनी प्रकार कार्यवाही प्रारम्भ करने का कोई आधार नहीं बनता है क्योंकि जॅाच दल द्वारा उनके आर्थिक क्षति हुई। इस प्रकार कार्यवाही प्रारम्भ करने का कोई आधार नहीं बनता है क्योंकि जॅाच दल द्वारा उनके प्रकार कार्यवाही प्रारम्भ करने का कोई आधार नहीं बनता है क्योंकि जॅाच दल द्वारा उनके विरूद्व कोई ठोस आरोप स्थापित ही नहीं किया गया है। विरूद्व कोई ठोस आरोप स्थापित ही नहीं किया गया है। 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 (V) मजदूरों की मजदूरी भुगतान के संबंध में श्री शर्मा द्वारा कहा गया कि वे उक्त योजना में भुगतान पदाधिकारी नहीं थे। उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद् अरवल द्वारा सीधे प्रतिनियुक्त श्री भरत प्रसाद, सहायक अभियन्ता, जिला परिषद् अरवल को राशि उपलब्ध कराया गया है। इसलिए उक्त आरोप उनके विरूद्व लगाना उचित प्रतीत नहीं होता है।
(VI) मिट्टी भराई का कार्य बेलखरा से केयाल मोड़ तक करपी भाग-2 रोड का कार्य जिला परिषद् अरवल के अभिकत्र्ता श्री भरत प्रसाद, सहायक अभियन्ता एवं जिला परिषद् के कनीय अभियन्ता श्री बिन्देश्वरी प्रसाद द्वारा करवाया गया। कार्य उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद, अरवल के द्वारा सीधे प्रतिनियुक्त श्री भरत प्रसाद, सहायक अभियन्ता, जिला परिषद् अरवल को दिया गया। उनके द्वारा कार्यान्वयन के पश्चात श्री बिन्देश्वरी प्रसाद, कनीय अभियन्ता के द्वारा योजना में कराए गए कार्य की मापी दिनांक 25.6.06 को लिया गया एवं मापी पुस्त में कार्य दर्ज करते हुए हस्ताक्षर बनाया गया एवं श्री भरत प्रसाद, सहायक अभियन्ता द्वारा जॅाचोपरान्त दिनांक 29.5.06 को हस्ताक्षरित करते हुए उनके (श्री शर्मा) समक्ष प्रस्तुत किया गया जिस पर जॅाचोपरान्त उनके द्वारा दिनांक 31.5.06 को हस्ताक्षरित किया गया। इसके परिपे्रक्ष्य में उनके (श्री शर्मा) द्वारा किसी प्रकार की अनियमितता से इंकार किया गया है।
(VII) योजना सं0-11/2005-06 के अन्य दोषी पदाधिकारी (सहायक अभियन्ता एवं कनीय अभियन्ता) को आरोप मुक्त कर दिया गया जिसके उपर आरोप पत्र के अनुसार मुख्य आरोप बनता है और उनके विरूद्व भेदभाव किया जा रहा है जो युक्ति संगत प्रतीत नहीं होता है।
संचालन पदाधिकारी का मंतव्यः- आरोपित पदाधिकारी द्वारा दिए गए लिखित बचाव बयान, मौखिक बयान एवं जॅाच दल द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा के उपरान्त संचालन पदाधिकारी द्वारा यह मंतव्य दिया गया है कि जॅाच में उल्लेखित तथ्य कि कही कही 50 फीट, 40 फीट एवं 20 फीट बेतरतीव तरीके से मिट्टी दिए जाने के बिन्दु पर वास्तव में कितनी मिट्टी दी गई है, इसकी जॅाच मापीपुस्त के अनुसार करने से स्थल पर बिल्कुल विपरीत स्थिति है। वास्तव में जॅाच दल द्वारा कितनी मिट्टी देना था एवं कितनी मिट्टी दी गई इसकी मापी नहीं की गई। जिससे कितनी आर्थिक क्षति हुई यह प्रमाणित नहीं हो पा रहा है। आरोपित पदाधिकारी श्री शर्मा के कंडिकावार बचाव बयान से सहमत होते हुए संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर मामले की सरकार के स्तर पर समीक्षा की गई। समीक्षा में यह पाया गया कि अरवल जिला के अधीन बेलखर से कयाल मोड़ तक सड़क पर मिट्टी भराई की योजना बिहार राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत 2,76,580/- (दो लाख छिहतर हजार पॅाच सौ अस्सी) रूपए स्वीकृत थी। मापपुस्त में 1,49,600/- (एक लाख उनचास हजार छः सौ) रूपए की मापी दर्ज थी परन्तु 19.11.06 को अनुमंडल पदाधिकारी, अरवल एवं सहायक अभियन्ता, विशेष कार्य प्रमण्डल, अरवल द्वारा जॅाच में यह पाया गया कि स्थल पर कही कही 50 फीट, 40 फीट एवं 20 फीट मिट्टी रखी हुई थी। मिट्टी काटने का पिट (pit) भी भर चुका था साथ ही मजदूरो को 50 (पचास) रूपए की दर से मजदूरी दिया गया और उसका इन्दराज जॅाब कार्ड में नहीं किया गया। संचालन पदाधिकारी द्वारा कार्यपालक अभियन्ता के विरूद्व इस आधार पर आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया कि कराए गए कार्य की मापी नहींं की गई जिससे यह पता चले कि कितनी आर्थिक क्षति हुई है। आठ साल के बाद पुनः जॅाच भी संभव नहीं है। मजदूरी का भुगतान और जॅाब कार्ड में उनके इन्दराज करने की जिम्मेवारी कनीय अभियन्ता की होती है परन्तु कार्य को सही रूप से क्रियान्वित नहीं करने के उपरान्त भी मापीपुस्त में उसके भुगतान की स्वीकृति आरोपित पदाधिकारी श्री शर्मा द्वारा दी गई जिसके लिए वे दोषी है और इस हेतु लघु दण्ड दिया जाना चाहिए परन्तु सेवानिवृति के कारण उसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। अतएव सम्यक विचारोपरान्त श्री कृष्ण कुमार शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमण्डल, अरवल सम्प्रति सेवानिवृत को तकनीकी आधार पर दोषमुक्त करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है।
उक्त निर्णय के आलोक में श्री कृष्ण कुमार शर्मा, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, ग्रामीण विकास विशेष प्रमण्डल, अरवल सम्प्रति सेवानिवृत को तकनीकी आधार पर दोषमुक्त करते हुए उन्हें संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
————— अधी1क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु6ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 801-571+10-ड/0ट/0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in