िनबंधन सं(cid:27)या पी0ट/0-40 िनबंधन सं(cid:27)या (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार गजटगजटगजटगजट (cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार(cid:1)बहार
असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक असाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंकअसाधारण अंक (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत (cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत(cid:1)बहार सरकार (cid:13)ारा ूकािशत 15151515 आ!"नआ!"नआ!"नआ!"न 1936 1936 1936 1936 ((((शशशश0000))))
((((संसंसंसं0 0 0 0 पटना पटना पटना पटना 819819819819) ) ) ) पटनापटनापटनापटना
पटनापटनापटनापटना, , , , मंगलवारमंगलवारमंगलवारमंगलवार, , , , 7777 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 जल संसाधन विभाग -------- अधिसूचना 19 अगस्त 2014
सं0 22 नि0 सि0 (मुज0)-06-04/2003/1119
स0 (मुज0)-06-04/2003/1119—श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, जल श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा वर्ष 2001-02 में इनके पदस्थापन अवधि में बागमती विस्तार संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा वर्ष 2001-02 में इनके पदस्थापन अवधि में बागमती विस्तार संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा वर्ष 2001-02 में इनके पदस्थापन अवधि में बागमती विस्तार योजना के बॅाये तटबंध के मिट्टी कार्य में बरती गई अनियमितता की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से की गयी। योजना के बॅाये तटबंध के मिट्टी कार्य में बरती गई अनिय मितता की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से की गयी। उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षोपरान्त प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में श्री सिंह के वि
ॅाच प्रतिवेदन में श्री सिंह के विरूद्ध निम्न आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये गये।
i. बागमती विस्तार योजना के कार्यो को अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर कार्य समर्पित की तिथि जो 25. बागमती विस्तार योजना के कार्यो को अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर कार्य समर्पित की तिथि जो 25 02.02 थी। उसका समय वृद्वि 30.12.02 तक देना जो छः माह से अधिक है।
02 तक देना जो छः माह से अधिक है।
ii . समर्पित कार्यकारी प्राक्कलन का ससमय स्वीकृति नहीं देना तथा इसे कार्यालय में लंबित रखना। त कार्यकारी प्राक्कलन का ससमय स्वीकृति नहीं देना तथा इसे कार्यालय में लंबित रखना। त कार्यकारी प्राक्कलन का ससमय स्वीकृति नहीं देना तथा इसे कार्यालय में लंबित रखना। लिए श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता से विभागीय उक्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता से विभागीय उक्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के 08 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही संकल्प सं0-657 दिनांक 11.08.08 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही 08 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 (बी0) के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।
संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री सिंह के द्वारा अपने बचाव बयान में कहा गया किः- संचालन पदाधिकारी के समक्ष श्री सिंह के द्वारा अपने बचाव बयान में कहा गया किः- 1. श्री सिंह के द्वारा दिनांक 02
फ्फरपुर का प्रभार ग्रहण ह के द्वारा दिनांक 02.02.02 को मुख्य अभियन्ता, जल ससाधन विभाग, मुजफ्फरप किया गया। बागमती विस्तार योजना के कार्यो की समीक्षा के दौरान पाया कि कार्य अभी अधूरा है। जबकि इसे दिनांक किया गया। बागमती विस्तार योजना के कार्यो की समीक्षा के दौरान पाया कि कार्य अभी अधूरा है। जबकि इसे दिनांक किया गया। बागमती विस्तार योजना के कार्यो की समीक्षा के दौरान पाया कि कार्य अभी अधूरा है। जबकि इसे दिनांक 25.02.02 को समाप्त हो जाना चाहिए था। अतः समय वृद्वि देने की
02 को समाप्त हो जाना चाहिए था। अतः समय वृद्वि देने की आवश्यकता थी।
विभागीय नियमानुसार बॅाध एवं नहरों के मिट्टी कार्यो की अंतिम मापी एक बरसात के बाद किया जाता 2. विभागीय नियमानुसार बॅाध एवं नहरों के मिट्टी कार्यो की अंतिम मापी एक बरसात के बाद किया जाता विभागीय नियमानुसार बॅाध एवं नहरों के मिट्टी कार्यो की अंतिम मापी एक बरसात के बाद किया जाता है। ताकि बरसात में हुई क्षति की मरम्मति संवेदक द्वारा एकरारित निधि के अन्तर्गत ही कराया जा सकेे। ऐसी है। ताकि बरसात में हुई क्षति की मरम्मति संवेदक द्वारा एकरारित निधि के अन्तर्गत ही कराया जा सकेे। ऐसी है। ताकि बरसात में हुई क्षति की मरम्मति संवेदक द्वारा एकरारित निधि के अन्तर्गत ही कराया जा सकेे। ऐसी 02 तक समय वृद्वि दी गयी। समय वृद्वि के परिस्थिति में क्षे़त्रीय पदाधिकारी से विचार विमाश् परिस्थिति में क्षे़त्रीय पदाधिकारी से विचार विमार्श के उपरान्त दिनांक 30.12.02 तक समय वृद्वि दी गयी। समय वृद्वि के कारण विभाग को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई एवं उसकी सूचना विभाग को भी दी गयी थी। कारण विभाग को किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई एवं उसकी सूचना विभाग को भी दी गयी थी।
कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व कार्यकारी प्राक्कलन तैयार किया जाता है। जिसकी स्वीकृति के उपरान्त कार्य 3. कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व कार्यकारी प्राक्कलन तैयार किया जाता है। जिसकी स्वीकृति के उपरान्त कार्य कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व कार्यकारी प्राक्कलन तैयार किया जाता है। जिसकी स्वीकृति के उपरान्त कार्य प्रारम्भ किया जाता है। पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति तब दी जाती है। जब स्वीकृत प्राक्कलन की राशि में दस जाता है। पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति तब दी जाती है। जब स्वीकृत प्राक्कलन की राशि में दस जाता है। पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति तब दी जाती है। जब स्वीकृत प्राक्कलन की राशि में दस प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होती है। तत्कालीन मुख्य अभियन्ता के द्वारा स्वीकृत प्राक्कलन की राशि प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होती है। तत्कालीन मुख्य अभियन्ता के द्वारा स्वीकृत प्राक्कलन की राशि प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होती है। तत्कालीन मुख्य अभियन्ता के द्वारा स्वीकृत प्राक्कलन की राशि अतः निगरानी विभाग द्वारा रू0-2,50,39,700/- थी। एवं पुननीक्षित प्राक्कलन की राशि रू0-2,70,80,000/- थी। अतः निगरानी विभाग द्वारा रू0-2,50,39,700/- थी। एवं पुननीक्षित प्राक्कलन की राशि रू0-2,70,80,000/- थी। 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 निर्गत पत्रांक 1/स्थापना-27/83-2347/त0 प0 को दिनांक 31.12.83 के आलोक में स्वीकृत देना नियमानुसार नहीं था।
4. लीड प्लान की स्वीकृति मुख्य अभियन्ता कार्यालय के पत्रांक 83 दिनांक 10.01.03 द्वारा दे दी गयी थी। संचालन पदाधिकारी के द्वारा अपने मंतव्य में कहा गया किः- vkjksi la0&1- आरोपित पदाधिकारी ने अपने बचाव बयान में कहा है कि समयवृद्वि देकर सरकार को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुॅचायी गयी है। बल्कि ससमय तथा परिस्थिति के अनुकूल समयवृद्वि कार्यहित में दी गयी। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा संलग्न विभागीय परिपत्र के अंतिम कंडिका में वर्णित है कि विभागीय स्तर पर आयुक्त एवं सचिव की अध्यक्षता में गठित निविदा समिति द्वारा निष्पादित निविदाओं के लिये समय वृद्वि एवं अवधि विस्तार विभाग के स्तर से पूर्ववत किया जायेगा। उड़नदस्ता के प्रतिवेदन से स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि कार्य विभागीय निविदा समिति द्वारा आवंटित था या मुख्य अभियन्ता के स्तर से। अतः विभाग इस बात सेसुनिश्चित हो लें कि निविदा की स्वीकृति किस स्तर से की गयी थी। उसके उपरान्त ही इस आरोप पर निर्णय होना श्रेयस्कर होगा।
vkjksi la0&2- इस संबंध में आरोपित पदाधिकारी का बचाव बयान स्वीकार करने योग्य है। नियमानुसार पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति हेतु दिया निर्देश निर्गत है। जिसके आलोक में पुनरीक्षित प्राक्कलन की स्वीकृति आवश्यक प्रतित नहीं होती है। क्योंकि उक्त राशि दस प्रतिशत से कम की है। वर्णित परिस्थिति में समर्पित कार्यकारी प्राक्कलन की स्वीकृति नहीं देना एवं लंबित रखने का आरोप लगाना नियमाकुल सही प्रतीत नहीं होता है।
श्री राम विलास सिंह, सेवानिवृत मुख्य अभियन्ता द्वारा समर्पित बचाव बयान एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा दिये गये मंतव्य की विभागीय समीक्षा की गई। समीक्षा में पाया गया किः-
vkjksi la0&1- जॅाच पदाधिकारी द्वारा इस आरोप के लिये स्पष्ट मंतव्य नहीं दिया गया है। आरोपित पदाधिकारी के द्वारा दिनांक 02.02.02 को प्रभार लिया गया जबकि कार्य समाप्ति की तिथि 25.02.02 थी। संवेदक के द्वारा कार्य पूर्ण न किये जाने के फलस्वरूप कार्यहित में दिनांक 30.12.02 तक समयवद्वि दी गयी। समयवृद्वि के कारण विभाग को कोई क्षति न होने का उल्लेख आरोपित पदाधिकारी द्वारा किया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा संलग्न विभागीय परिपत्र दिनांक 09.08.04 को जारी है। जबकि उनके द्वारा इसके पूर्व की तिथि में ही समय वद्वि की स्वीकृति दी गयी। जो विभागीय पत्रांक 96/आई0 सी0, दिनांक 28.05.01 के आलोक में आरोपित पदाधिकारी इसके लिये सक्षम नहीं थे। अतः वे इसके लिये दोषी है। अतः आरोप सं0-1 उन पर प्रमाणित होता है।
vkjksi la0&2- निगरानी विभाग द्वारा निर्गत पत्रांक सं0-1/स्था0-27/83-2347/त0 प0 को दिनांक 31.
12.83 में निहित प्रावधानों के आलोक में आरोप सं0-2 प्रमाणित नहीं होता है। क्योंकि पुनरीक्षित प्राक्कलन की राशि दस प्रतिशत से कम थी। संचालन पदाधिकारी के द्वारा भी आरोप को सही नहीं पाया गया है।
3. लीड प्लान की स्वीकृति मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 83 दिनांक 10.01.13 द्वारा प्रदत की गई है। अतः श्री सिंह के विरूद्व आरोप सं0-1 जो बागमती विस्तार योजना के कार्यो का अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य समाप्ति की तिथि में छः माह से अधिक की समय वृद्वि देने से संबंधित है, को प्रमाणित पाया गया एवं प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 1177 दिनांक 18.10.12 से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। श्री राम विलास सिंह, सेवानिवृत मुख्य अभियन्ता द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के आलोक में प्रस्तुत बचाव बयान में निम्न बाते कही गयी है।
आरोप सं0-1 समय वृद्वि देने से संबंधित है। यह कार्य दिनांक 25.02.02 तक समाप्त होना था। परन्तु कार्य समाप्त नहीं हुआ था। कार्य उसी संवेदक से कराया जाय इस हेतु समय वृद्वि देना नितान्त आवश्यक था। छः माह की समयवृद्वि दी जाती तो अगस्त में पड़ता जो बरसात का मुख्य महीना होता है। संवेदक की प्रबल इच्छा थी ताकि कार्य का अंतिम विपत्र बरसात में ही बन जाय ताकि बरसात में होने वाले बॅाध की क्षति की मरम्मति नहीं कराना पड़े। मिट्टी कार्य की अंतिम नापी के संबंध में दिशा निर्देश है कि मिट्टी कार्य की नापी बरसात के बाद ही लिया जाय। ताकि संवेदक अपने खर्च से बॅाध की क्षति की भरपाई करें। संचालन पदाधिकारी द्वारा अपने प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि इस कार्य का निविदा किस स्तर पर निष्पादित है। पूर्व में मुख्य अभियन्ता के स्तर पर निष्पादित कार्य की निविदा का समय वृद्वि मुख्य अभियन्ता द्वारा ही दी जाती थी। समय सीमा की बात नहीं थी। इस कार्य की निविदा का निष्पादन मुख्य अभियन्ता के स्तर से ही किया गया है। इसलिए उनके द्वारा की गई समयवद्वि युक्तिसंगत है। श्री राम विलास सिंह, सेवानिवृत मुख्य अभियन्ता द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया किः-
श्री सिंह द्वारा प्रस्तुत बिन्दु कि ''मिट्टी कार्य की अंतिम मापी के संबंध में दिशा निर्देश है कि उक्त कार्य की नापी बरसात के बाद ही लिया जाय ताकि संवेदक अपने खर्च से बॅाध की क्षति की भरपाई करें'' को स्वीकार करने योग्य माना जा सकता है। कार्य दिनांक 25.2.02 तक समाप्त किया जाना था। परन्तु उक्त तिथि तक कार्य पूरा नहीं हो सका। कार्य उसी संवेदक से कराये जाने हेतु समय वद्वि दिया जाना आवश्यक था। छः माह की समय वृद्वि की जाती तो अंतिम मापी अगस्त माह में ही लिया जाना अनिवार्य हो जाता है। अतः श्री सिंह द्वारा कृत कार्रवाई को विभागीय हित में माना जा सकता है। किन्तु अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाने के पूर्व उक्त विन्दु पर अपने स्तर से विभागीय अनुमोदन प्राप्त किया जाना अपेक्षित था।
संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन एवं तत्पश्चपात विभागीय कार्यवाही में वर्णित तथ्यों एवं श्री सिंह सेवानिवृत मुख्य अभियन्ता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जबाव के समीक्षोपरान्त श्री सिंह को बागमती विस्तार योजना के कार्यो में अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर समयवृद्वि दिये जाने के आरोप को प्रमाणित पाया गया। 3
(cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014
उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह को सरकार द्वारा निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया है। ''पेंशन पर एक वर्ष तक लिए 10 (दस) प्रतिशत की कटौती''। तदनुसार उक्त निर्णय श्री राम विलास सिंह, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता, जल संसाधन विभाग, मुजफ्फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत को संसूचित किया जाता है।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, विशेष कार्य पदाधिकारी ।
—————
अधी1क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु6ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 819-571+10-ड/0ट/0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in