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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 07 October 2014

Published 07 October 2014

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-10-07.825
Languages
English, Hindi

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पटनापटनापटनापटना, , , , मंगलवारमंगलवारमंगलवारमंगलवार, , , , 7777 अ+तूअ+तूअ+तूअ+तूबरबरबरबर 2014201420142014 जल संसाधन विभाग -------- अधिसूचना 11 अगस्त 2014

सं0 22 नि0 सि0 (जम0)-12-

99 की सेवा निवृत्त होने के फलस्वरूप विभागीय आदेश ज्ञापांक 1703 दिनांक 03.08

22 नि0 सि0 (जम0)-12-1039/94(छाया)/1077—श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन कार्यपालक श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन कार्यपालक 65 से 6.03 कि0मी0 के अभियंता, खरकई नहर प्रमंडल, चाईबासा एवं अन्य अभियंताओं द्वारा ईचा दायी मुख्य नहर के 4 अभियंता, खरकई नहर प्रमंडल, चाईबासा एवं अन्य अभियंताओं द्वारा ईचा दायी मुख्य नहर के 4.65 से 6 बीच नहर खुदाई कार्य में ऑडीनरी रॉक के स्थान पर सौफट रॉक बीथ ब्लास्टींग तथा मिट्ट ी के अतिरिक्त लीड के लिए बीच नहर खुदाई कार्य में ऑडीनरी रॉक के स्थान पर सौफट रॉक बीथ ब्लास्टींग तथा मिट्टी के अतिरिक्त लीड के लिए गलत विपत्र तैयार कर सम्वेदक को अनुचित लाभ देने संबंधी आरोप के आलोक में श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन गलत विपत्र तैयार कर सम्वेदक को अनुचित लाभ देने संबंधी आरोप के आलोक में श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन गलत विपत्र तैयार कर सम्वेदक को अनुचित लाभ देने संबंधी आरोप के आलोक में श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता सहित सभी आरोपी के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-20/93 दिनांक 10.07.93 दायर किया कार्यपालक अभियन्ता सहित सभी आरोपी के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-20/93 दिनांक 10 कार्यपालक अभियन्ता सहित सभी आरोपी के विरूद्ध निगरानी थाना कांड संख्या-20/93 दिनांक 10 गया। बाद में अन्य अभियंताओं के साथ-साथ श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को विभागीय ें के साथ-साथ श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को विभागीय ें के साथ-साथ श्री नवल किशोर सिंह, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता को विभागीय 06.97 से सिविल सेवा आदेश सं0 241 दिनांक 02.12.94 द्वारा निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक 1735 दिनांक 04 94 द्वारा निलंबित करते हुए संकल्प ज्ञापांक 1735 दिनांक 04.06 त की गयी। श्री सिंह को (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। श्री सिंह को (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के नियम-55 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालि 08.99 द्वारा दिनांक 30. दिनांक 30.06.99 की सेवा निवृत्त होने के फलस्वरूप विभागीय आदेश ज्ञापांक 1703 दिनांक 03 99 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए मामले को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 "बी" में जारी रखा 06.99 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए मामले को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 "बी" में जारी रखा 99 के प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए मामले को बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 "बी" में जारी रखा गया।

संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी एवं विभागीय पत्रांक 2554 दिनांक से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी एवं विभागीय पत्रांक 2554 दिनांक से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की विभागीय समीक्षा की गयी एवं विभागीय पत्रांक 2554 दिनांक 99 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की 99 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की 20.12.99 द्वारा जॅाच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा की के लिए श्री सिंह को विभागीय आदेश विस्तृत समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री सिंह को विभागीय आदेश विस्तृत समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं समीक्षोपरान्त प्रमाणित आरोपों संख्या-929 सह पठित ज्ञापांक 2225 दिनांक 22.12.01 द्वारा निम्न दंड संसूचित किया गया :- संख्या-929 सह पठित ज्ञापांक 2225 दिनांक 22

(1) बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 "बी" के अन्तर्गत 5 प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक। (1) बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 "बी" के अन्तर्गत 5 प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक। (1) बिहार पेंशन नियमावली के नियम 43 "बी" के अन्तर्गत 5 प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष के लिए रोक। के अतिरिक्त कुछ देय नहीं होगा किन्तु पेंशन के प्रयोजनार्थ (2) दो वर्ष तक निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कुछ देय नहीं होगा किन्तु पेंशन के प्रयोजनार्थ (2) दो वर्ष तक निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता

इस अवधि की गणना की जायेगी एवं वेतनवृद्धि देय होगा। दो वर्ष के बाद निलंबन अवधि कर्त्तव्यरत माना जायेगा। इस अवधि की गणना की जायेगी एवं वेतनवृद्धि देय होगा। दो वर्ष के बाद निलंबन अवधि कर्त्तव्यरत माना जायेगा। इस अवधि की गणना की जायेगी एवं वेतनवृद्धि देय होगा। दो वर्ष के बाद निलंबन अवधि कर्त्तव्यरत माना जायेगा। उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री नवल किशोर सिंह, सेवा निवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा अभ्यावेदन समर्पित उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री नवल किशोर सिंह, सेवा निवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा अभ्यावेदन समर्पित उक्त दण्डादेश के विरूद्व श्री नवल किशोर सिंह, सेवा निवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया गया।

श्री नवल किशोर सिंह, सेवा निवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रधान सचिव जल संसाधन विभाग को समर्पित श्री नवल किशोर सिंह, सेवा निवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रधान सचिव जल संसाधन विभाग को समर्पित श्री नवल किशोर सिंह, सेवा निवृत्त कार्यपालक अभियंता द्वारा प्रधान सचिव जल संसाधन विभाग को समर्पित अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न बातें कही गईः- अभ्यावेदन में मुख्य रूप से निम्न बातें कही गईः-2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 अ+तूअ+तूअ+तूअ+तूबरबरबरबर 2014201420142014 (1) श्री सिंह द्वारा कहा गया है कि 5 प्रतिशत पेंशन पर रोक एवं निलंबन अवधी में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कोई भुगतान नहीं संंबंधी निर्गत आदेश के आलोक में अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नति से वंचित रह गया।

(2) स्वर्णरेखा परियोजना अन्तर्गत वर्ष 1988-89 में चाईबासा में पदस्थापन के दरम्यान दिनांक 07.06.91 को भुगतान में बरती गयी अनियमितता के लिए पूछा गया स्पष्टीकरण संबंध में समर्पित जबाब में कहा था कि उस भुगतान में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्मलित नहीं था क्याेंकि भुगतान, गुणवत्ता एवं मात्रा के संबंध में निविदा समिति द्वारा निर्णय लिया गया था एवं successor द्वारा कर्यान्वित किया गया फिर भी निलंबित कर दिया गया एवं सेवा निवृति के तिथि दिनांक 30.06.99 तक की गयी। संचालन पदाधिकारी द्वारा मेरे (श्री सिंह के) विरूद्ध कोई चार्ज नहीं पाया गया एवं लगाये गये सभी आरोंपो से मुक्त करने हेतु प्रतिवेदन दिया गया।

(3) निगरानी थाना कांड सं0 -20/1993 के फलस्वरूप उनके (श्री सिंह के)े प्रोन्नति संबंधी मामले को सील्ड कभर में रखा गया है। उनसे (श्री सिंह से) कनीय बहुत से अभियंता को अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रोन्नति दी गयी जो बाद में मुख्य अभियंता में भी प्रोन्नति पाये।

श्री सिंह द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रस्तुत मामले से संबंधित तीन कनीय अभियंता, एक सहायक अभियंता एवं अन्य संबंधित अभियंताओं के विरूद्ध भी क्रीमिनल एवं विभागीय कार्यवाही चलायी गयी थी। निगरानी थाना कांड संख्या -20/1993 अभी भी पेन्डिंग है। विभागीय कार्यवाही के दरम्यान संसूचित दंड के विरूद्ध तीनों कनीय अभियंताओं एवं एक सहायक अभियंता द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर विभिन्न मुकदमा में दिये गये न्याय निर्णय के आलोक में सभी को भूतलक्षी प्रभाव से मोनेटरिंग लाभ देते हुए प्रोन्नति भी दी गयी।

श्री सिंह द्वारा यह भी कहा गया है कि मामले में कोई वित्तीय अनियमितता नहीं बरती गयी थी और नहीं भुगतान किया गया था फिर भी दिनांक 22.12.2001 को 5 प्रतिशत पेंशन पर एक वर्ष तक रोक एवं निलंबन अवधि में निलंबन भत्ता के अतिरिक्त कोई भुगतान नहीं होगा संबंधी दंड संसूचित किया गया, जबकि इसी मामले में तीन कनीय अभियंता एवं एक सहायक अभियंता श्री वीर बहादुर सिंह को सभी लाभ दिये गये।

इसी मामले आरोपित सहायक अभियंता श्री वीर बहादुर सिंह के विरूद्ध भी निगरानी थाना कांड संख्या -20/1993 लंबित है परन्तु उन्हें सभी वित्तीय एवं प्रोन्नति संबंधी लाभ दिये गये परन्तु मुझे (श्री सिंह को), वित्तीय लाभ एवं प्रोन्नति से बंचित रखा गया। जल संसाधन विभाग द्वारा श्री वीर बहादुर सिंह, सहायक अभियंता को सभी वित्तीय एवं प्रोन्नति संबंधी लाभ निगरानी थाना कांड 20/1993 रहते हुए भी दिये जा सकते है तो मुझे (श्री सिंह को) भी देने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

अन्त में श्री सिंह द्वारा कहा गया कि दिनांक 30.06.99 की सेवा निवृत्त हो चुके है। अनुरोध है कि मेरे (श्री सिंह के) मामले में सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए प्रोन्नति देने की —पा की जाय। श्री सिंह द्वारा शिकायत निवारण सेल को दिये गये अभ्यावेदन में भी उपर अंकित तथ्यों को ही मुख्य रूप से रखते हुए अंतिम कंड़िका में विधि विभाग के पत्रांक ए0/ए0जे0/2481/जे0सी0डी0एम0 7654/ओ0सी0पी0/11-20/2010 दिनांक 29.04.11 द्वारा निर्गत राजपत्र की कंड़िका -4 सी को उधृत करते हुए भूतलक्षी प्रभाव से देय प्रोन्नति के साथ सभी वित्तीय लाभ देने का अनुरोध किया गया है।

(1) 4c (i) A good number of cases are from the category of similar cases. Each Government Deptt. Will aim to consider and settle the claim of the represntationist applicant employee/ citizen, if the claim is found coverd by any decision of the court. Many service matters of this nature, can be deposed of at the level of the department itself without compilling the litigant to come to the court. In this manner, the government departments would be actions as efficient litigants.

इनके अभ्यावेदन के आलोक में समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः- (1) श्री सिंह सेवा निवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा दण्डादेश के विरूद्ध लगभग 13 वर्षों के उपरांत अभ्यावेदन दिया गया है।

(2) अभ्यावेदन के बिन्दु 2 में मुख्य रूप से अनियमितता में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्मलित नहीं होने की बात कही गयी है। इस संदर्भ में समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। तत्पाश्चात विभागीय पत्रांक 2554 दिनांक 20.12.99 द्वारा जाँच प्रतिवेदन से असहमति के बिन्दु पर उनसे द्वितीय कारण पृच्छा की गई ।

श्री सिंह सेवा निवृत कार्यपालक अभियंता से द्वितीय कारण पृच्छा का प्राप्त जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। पाया गया कि श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में स्वीकार किया गया है कि पत्रांक 681(ए) दिनांक 10.06.88 द्वारा अधीक्षण अभियंता खरकई नहर अंचल अदित्यपुर को यह सूचित किया गया था कि सॉफ्ट रॉक विथ ब्लास्टिंग का कार्य संवेदक द्वारा कराया जा रहा है उसे माप पुस्त में अंकित किया जा रहा है। श्री सिंह द्वारा यह भी स्वीकार किया गया है कि संचालन पदाधिकारी को दिये गये लिखित बचाव बयान में 50,000 घनमीटर साफ्ट रॉक विथ ब्लास्टिंग के कार्य का उल्लेख किया गया है जो मेरे प्रभार में रहते हुये कार्य करवाया गया था।

श्री सिंह से प्राप्त जवाब के समीक्षोपरांत निम्न तथ्य पाया गया :-

3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 अ+तूअ+तूअ+तूअ+तूबरबरबरबर 2014201420142014

श्री सिंह सेवा निवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अधीक्षण अभियंता को लिखे गये पत्रांक 681/ए चाइबासा दिनांक 10.06.88 में यह अंकित है कि सॉफ्ट रॉक विथ ब्लास्टिंग का कार्य समय -समय पर मापपुस्त में अंकित किया जा रहा है एवं उनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में यह स्वीकार किया गया है कि 50,000 एम3 का सॉफ्ट रॉक विथ ब्लास्टिंग का कार्य कराया गया था एवं मापपुस्त में अंकित किया गया था अर्थात इनके (श्री सिंह) द्वारा सॉफ्ट रॉक विथ ब्लास्टिंग की मात्रा फ्रेजाईल/अस्पष्ट स्थिति में रखा गया जिससे की भविष्य में सॉफ्ट रॉक विथ ब्लास्टिंग की मात्रा को दिखाकर अनियमित भुगतान का मार्ग प्रशस्त हो।

वर्णित स्थिति में सरकार द्वारा श्री नवल किशोर सिंह सेवा निवृत कार्यपालक अभियंता के विरूद्ध आरोप प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए उपर्युक्त वर्णित दंड संसूचित किया गया।

(3) अभ्यावेदन के बिन्दु 3 में मुख्य रूप से अनुरोध किया गया है कि श्री वीर बहादुर सिंह, सहायक अभियंता को जिस तरह माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये न्याय निर्णय के क्रम में निगरानी थाना कांड संख्या -20/93 रहते हुए प्रोन्नति एवं अन्य सभी दायित्व लाभ दी गयी है उसी तरह उन्हें भी दिया जाय।

इस संदर्भ में वस्तु स्थिति यह है कि श्री वीर बहादुर सिंह, सहायक अभियंता द्वारा संसूचित दंड "सेवा से बर्खास्त" के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में सी0डब्लू0जे0सी0 संख्या- 16528/2004 दायर किया गया। जिसमें दिनांक 24.04.07 को पारित न्याय निर्णय में विभागीय दंडादेश को निरस्त कर दिया गया। उक्त मामलें में एल.पी.ए. दायर करने हेतु विधि विभाग का परामर्श मांगा गया था परन्तु विधि विभाग द्वारा एल0 पी0 ए0 दायर करने का परामर्श नहीं दिया गया है। विधि विभाग से एल०पी०ए० दायर करने का परामर्श नहीं मिलने के फलस्वरूप माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के अनुपालन में विभागीय दंडादेश को अधिसूचना संख्या -1030 दिनांक 11.06.07 द्वारा निरस्त कर दिया गया। श्री वीर बहादुर सिंह, तत्कालीन सहायक अभियंता के सदृश श्री भूपेन्द्र प्रसाद सिंह, श्री विक्रमा सिंह एवं श्री वीरेन्द्र कुमार प्रसाद सिंह, तत्कालीन कनीय अभियंता खरकई नहर प्रमंडल चाईबासा को उक्त आरोप के लिए "सेवा से बर्खास्त" का दंड संसूचित किया गया था जिसके विरूद्ध उक्त अभियंताओं द्वारा माननीय उच्च न्यायालय पटना में दायर याचिकाओं के अनुपालन में उक्त आरोपित अभियंताओं की सेवा वापस लिया गया। जबकि श्री नवल किशोर सिंह सेवा निवृत कार्यपालक अभियंता उक्त वर्णित अभियंताओं द्वारा दायर याचिकाओं में वादी नहीं थे इसलिए उक्त वर्णित अभियंताओं की तरह इनके दण्ड को निरस्त नहीं किया गया।

(4) विधि विभाग के पत्रांक 7654 दिनांक 29.4.11 के कंडिका 4(सी) में "सर्विस मैटर" से संबंधित मामलों को, सदृश मामले में माननीय न्यायालय द्वारा पारित न्याय निर्णय के आलोक में निष्पादित करने का निदेश अंकित है जबकि इनका (श्री सिंह) दंड निरस्त करने से संबंधित मामला अनुशासनिक कार्रवाई से संबंधित है।

वर्णित स्थिति में समीक्षोपरान्त पाया गया कि श्री नवल किशोर सिंह सेवा निवृत कार्यपालक अभियंता द्वारा अपने अभ्यावेदन में कोई नया तथ्य या साक्ष्य नहीं दिया गया है जिसके आधार पर इनके दंड को निरस्त किया जा सके। वर्णित स्थिति में सरकार द्वारा श्री नवल किशोर सिंह सेवा निवृत कार्यपालक अभियंता का अभ्यावेदन अस्वी—त करने का निर्णय लिया गया एवं पूर्व में संसूचित दण्ड को बरकरार रखने का निर्णय लिया गया।

उक्त प्रस्ताव पर माननीय मुख्य मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। वर्णित स्थिति में श्री नवल किशोर सिंह सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता का अभ्यावेदन अस्वी—त किया जाता है एवं पूर्व में संसूचित दण्ड को बरकरार रखा जाता है।

उक्त आदेश श्री सिंह, सेवानिवृत कार्यपालक अभियन्ता को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अवर सचिव। ।

————— अधी1क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु6ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 825-571+10-ड/0ट/0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 07 October 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-10-07.825/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-10-07.825.