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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 21 October 2014

Published 21 October 2014

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2014-10-21.871
Languages
English, Hindi

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सामान्य प्रषासन विभाग

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संकल्प

20 अक्तूबर 2014

, सेवानिवृत्त), तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी, गया के विरुद्ध जिला श्री राम गुलाम (बि.प्र.से., सेवानिवृत्त), तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी, गया के विरुद्ध जिला , सेवानिवृत्त), तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी, गया के विरुद्ध जिला कल्याण पदाधिकारी, गया के पद पर पदस्थापन के दौरान वर्ष 1987- 88 में छात्रवृत्ति भुगतान में अनियमितता कल्याण पदाधिकारी, गया के पद पर पदस्थापन के दौरान वर्ष 1987-88 में छात्रवृत्ति भुगतान में अनियमितता बरतने, छात्रवृत्ति राशि का दुरूपयोग करने तथा षड्‌यंत्र पूर्वक सरकारी राशि 3,06,530 रु0 का गबन करने के बरतने, छात्रवृत्ति राशि का दुरूपयोग करने तथा षड्‌यंत्र पूर्वक सरकारी राशि 3,06,530 रु0 का गबन करने के बरतने, छात्रवृत्ति राशि का दुरूपयोग करने तथा षड्‌यंत्र पूर्वक सरकारी राशि 3,06,530 रु0 का गबन करने के प्रतिवेदित आरोपों एवं दर्ज प्राथमिकियों के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही के आधार पर विभागीय संकल्प प्रतिवेदित आरोपों एवं दर्ज प्राथमिकियों के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही के आधार पर विभागीय संकल्प प्रतिवेदित आरोपों एवं दर्ज प्राथमिकियों के लिए संचालित विभागीय कार्यवाही के आधार पर विभागीय संकल्प 13 के द्वारा शत-प्रतिशत पेंशन जब्त किया गया । उक्त विभागीय संकल्प के द्वारा ज्ञापांक-5750 दिनांक 09.04.13 के द्वारा शत-प्रतिशत पेंशन जब्त किया गया । उक्त विभागीय संकल्प के द्वारा 13 के द्वारा शत-प्रतिशत पेंशन जब्त किया गया । उक्त विभागीय संकल्प के द्वारा शत-प्रतिशत पेंशन रोके जाने एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7018 दिनांक 16.05.2012 के द्वारा दिनांक 16 शत-प्रतिशत पेंशन रोके जाने एवं विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7018 दिनांक 16 2012 के द्वारा दिनांक 16.03.

में माने जाने के आधार 1996 से वार्धक्य सेवानिवृत्ति की तिथि 31.01.2003 तक उन्हें वैचारिक रूप से सेवा में माने जाने के आधार 1996 से वार्धक्य सेवानिवृत्ति की तिथि 31 पर उन्हें देय प्रोन्नति, वेतन वृद्धि एवं बकाया आदि के भुगतान के संबंध में श्री राम गुलाम ने महामहिम पर उन्हें देय प्रोन्नति, वेतन वृद्धि एवं बकाया आदि के भुगतान के संबंध में श्री राम गुलाम ने महामहिम पर उन्हें देय प्रोन्नति, वेतन वृद्धि एवं बकाया आदि के भुगतान के संबंध में श्री राम गुलाम ने महामहिम (Memorial) समर्पित किया गया, जो महामहिम राज्यपाल के प्रधान सचिव के समर्पित किया गया, जो महामहिम राज्यपाल के प्रधान सचिव के राज्यपाल बिहार को ज्ञापन (Memorial) पत्रांक-2754 दिनांक 28.08.14 के द्वारा प्राप्त हुआ

14 के द्वारा प्राप्त हुआ ।

2. श्री राम गुलाम, बि.प्र , सेवानिवृत्त जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बेतिया के द्वारा जिला कल्याण प्र.से., सेवानिवृत्त जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बेतिया के द्वारा जिला कल्याण पदाधिकारी, गया के पद पर पदस्थापन अवधि में उनके विरुद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं नगर थाना, गया में दर्ज पदाधिकारी, गया के पद पर पदस्थापन अवधि में उनके विरुद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं नगर थाना, गया में दर्ज पदाधिकारी, गया के पद पर पदस्थापन अवधि में उनके विरुद्ध प्रतिवेदित आरोपों एवं नगर थाना, गया में दर्ज के आलोक में जब्त किये गये शत-प्रतिशत प्राथमिकियों के आधार पर संचालित विभागीय कार्यवाही एवं उक्त के आलोक में जब्त किये गये शत-प्रतिशत प्राथमिकियों के आधार पर संचालित विभागीय कार्यवाही एवं उक्त 1996 से 31.01.2003 तक पेंशन राशि जब्त किये जाने, वैचारिक रूप से सेवा में माने गये अवधि दिनांक 16.03.1996 से 31 पेंशन राशि जब्त किये जाने, वैचारिक रूप से सेवा में माने गये अवधि दिनांक 16

का वेतन भुगतान नहीं करने एवं विभागीय कार्यवाही के फलस्वरूप लंबित प्रोन्नतियों एवं भुगतेय वेतनादि के का वेतन भुगतान नहीं करने एवं विभागीय कार्यवाही के फलस्वरूप लंबित प्रोन्नतियों एवं भुगतेय वेतनादि के का वेतन भुगतान नहीं करने एवं विभागीय कार्यवाही के फलस्वरूप लंबित प्रोन्नतियों एवं भुगतेय वेतनादि के 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21212121 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 संबंध में महामहिम राज्यपाल, बिहार को दिनांक 29.06.2014 को समर्पित ज्ञापन (Memorial) में श्री राम गुलाम द्वारा निम्नलिखित तथ्य एवं तर्क दिया गया :-

(i) संचालन पदाधिकारी के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया । आदेश फलक में तथ्यों को record नहीं किया गया है ।

(ii) संचालन पदाधिकारी के द्वारा उन्हें अपना पक्ष रखने हेतु यथोचित अवसर प्रदान नहीं किया गया। संबंधित अभिलेखों/दस्तावेजों को साक्ष्य स्वरूप प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान नहीं किया गया । फलतः बचाव हेतु वे अपना पक्ष नहीं रख सके ।

(iii) संचालन पदाधिकारी के द्वारा श्री राम बहादुर सिंह, प्रारम्भिक जॉंचकर्त्ता का बयान उनके समक्ष नहीं लिया गया ।

(iv) श्री नथुनी सिंह यादव (सेवानिवृत्त), भूतपूर्व नाजिर गवाह नहीं थे । इसके बावजूद उनकी अनुपस्थिति में उनकी गवाही ली गयी । उनके द्वारा श्री नथुनी सिंह यादव, भूतपर्वू नाजिर के द्वारा गबन की गयी 37,500/-रु0 की राशि को श्री यादव की सेवानिवृत्ति के उपरान्त वसूली की गयी थी, जिस कारण श्री यादव के द्वारा उनके विरुद्ध गवाही दी गयी।

(v) उनके द्वारा बार-बार अनुरोध किये जाने के बावजूद भी संचालन पदाधिकारी के द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी, अरवल/प्रखंड कल्याण पदाधिकारी/अधीक्षक एवं शाखा प्रबन्धक, अनुग्रहपुरी कॉलोनी, गया का साक्ष्य नहीं लिया गया ।

(vi) संचालन पदाधिकारी के द्वारा विभागीय जॉंच का कार्य पूर्ण करने एवं आगे की कार्रवाई बन्द किये जाने की सूचना उन्हें नहीं दी गयी । साथ ही पूर्ण की गयी विभागीय कार्यवाही को पढ़कर उन्हें नहीं सुनाया गया। फलतः सम्पूर्ण विभागीय कार्यवाही प्रदूषित है।

(vii) संचालन पदाधिकारी दंड का प्रस्ताव देने हेतु सक्षम नहीं हैं, बल्कि उनके द्वारा आरोपों के प्रमाणित होने अथवा नहीं होने के संबंध में मंतव्य दिया जाना है, लेकिन संचालन पदाधिकारी के द्वारा जॉंच प्रतिवेदन में अंकित निष्कर्ष में उन्हें वृहद्‌ दंड देने की अनुशंसा की गयी । (viii) विभागीय कार्यवाही उनके विरुद्ध दर्ज प्राथमिकियों पर आधारित है, जिसमें से प्राथमिकी सं0-258/87 एवं 259/87 को मा0 उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा निरस्त कर दिया गया है जबकि अन्य दो प्राथमिकियों से संबंधित वाद अभी भी निम्न न्यायालय में लंबित हैं । आठ वर्ष पूर्व ही मा0 उच्च न्यायालय, पटना के द्वारा उन वादों को छः माह में निष्पादित करने का निदेश दिया गया था । उक्त वाद में अनुसंधानकर्त्ता सहित कोई साक्षी उपस्थित नहीं हुए हैं । उन वादों के लम्बित रहते हुए उनकी सेवा से बर्खास्तगी का मामला नहीं बनता है । (ix) माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा CWJC संख्या-1632/1999 में दिनांक 03.11.2009 को प्रासंगिक आदेश में यह निदेश दिया गया है कि याचिकाकत्र्ता के द्वारा स्पष्टीकरण समर्पित किये जाने के बाद यदि अनुशासनिक प्राधिकार संतुष्ट हों कि याचिकाकत्र्ता के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही विधिवत्‌ संचालित नहीं की गयी थी एवं उक्त विभागीय कार्यवाही में याचिकाकत्र्ता को अपना बचाव करने के लिए यथोचित अवसर नहीं दिया गया था तो अनुशासनिक प्राधिकार नया संचालन पदाधिकारी नियुक्त करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित कर सकते हैं । लेकिन अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश में दिये गये निदेश का अनुपालन नहीं किया गया एवं नये संचालन पदाधिकारी को नियुक्त किये बिना एवं उन्हें अपना बचाव करने हेतु यथोचित अवसर प्रदान किये बिना विभागीय संकल्प संख्या-5750 दिनांक 09.04.2013 के द्वारा दण्ड देते हुए उनका शत्‌-प्रतिशत्‌ पेंशन जब्त कर लिया गया ।3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21212121 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 (x) उनके द्वारा दाखिल अभ्यावेदन में अंकित तथ्यों पर अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा विचार नहीं किया गया । अनुशासनिक प्राधिकार के द्वारा निर्गत संकल्प सं0-5750 दिनांक 09.04.13 में शत-प्रतिशत पेंशन को रोके जाने के संबंध में सकारण आदेश पारित नहीं किया गया । (xi) दिनांक 16.03.96 से 31.01.03 तक उन्हें कार्य करने नहीं दिया गया । ऐसी स्थिति में "No Work No Pay" के आधार पर उक्त अवधि का वेतन रोके जाना युक्तिसंगत नहीं है । 3. उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं तर्कों के आलोक में श्री राम गुलाम द्वारा निम्नलिखित अनुरोध किया गयाः-

(i) दिनांक 26.08.1987 से 08.01.1990 तक निलम्बन अवधि को विनियमित करते हुए अन्तर वेतन राशि का भुगतान किया जाय ।

(ii) सेवा से बर्खास्तगी आदेश को मा0 उच्च न्यायालय के द्वारा निरस्त कर दिये जाने के कारण दिनांक 16.03.1996 से 31.01.2003 तक की अवधि का वेतन भुगतान किया जाय । (iii) 01.04.1985 से कनीय प्रवर कोटि की अन्तर वेतन राशि का भुगतान किया जाय। (iv) वर्ष 1991 से देय प्रोन्नतियॉं दी जाय ।

(v) सेवान्त लाभ का भुगतान किया जाय ।

4. श्री राम गुलाम (बि.प्र.से., सेवानिवृत्त) के उपर्युक्त मामले की संक्षिप्त विवरण निम्नवत हैः- (i) श्री राम गुलाम, बि॰प्र॰से॰, सेवानिवृत्त, तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी, गया के द्वारा जिला कल्याण पदाधिकारी, गया के पद पर पदस्थापन अवधि में बरती गई अनियमितता के आलोक में विभागीय संकल्प सं0-11753 दिनांक 10.11.1987 के द्वारा निलम्बित किया गया था एवं विभागीय संकल्प सं0-10120 दिनांक 18.08.1990 के द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी । विभागीय संकल्प ज्ञापांक-14534 दिनांक 30.12.1989 के द्वारा उन्हें निलम्बन मुक्त किया गया । संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या 2850 दिनांक 16.03.1996 के द्वारा सेवा से बर्खास्तगी का दण्ड दिया गया ।

(ii) उक्त दण्डादेश के विरुद्ध श्री राम गुलाम के द्वारा CWJC संख्या-1632/1999 दाखिल किया गया था, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश दिनांक 03.11.09 के द्वारा उनकी सेवा से बर्खास्तगी संबंधी संकल्प ज्ञापांक-2850 दिनांक 16.05.1996 को निरस्त कर दिया गया । इसी बीच वे दिनांक 31.01.2003 को वार्धक्य सेवानिवृत्ति की आयु पूरी कर चुके थे । फलतः कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-7018 दिनांक 16.05.2012 के द्वारा कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-2850 दिनांक 16.03.1996 के द्वारा निर्गत सेवा से बर्खास्तगी संबंधी दण्डादेश को निरस्त किया गया एवं दिनांक 16.03.1996 से वार्धक्य सेवानिवृत्ति की तिथि 31.01.2003 तक उन्हें वैचारिक रूप से सेवा में माना गया ।

(iii) श्री राम गुलाम के द्वारा समर्पित अभ्यावेदन दिनांक 08.12.2010 की समीक्षा एवं बिहार लोक सेवा आयोग से प्राप्त अभिमत तथा विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प संख्या-5750 दिनांक 09.04.2013 के द्वारा उनकी शत्‌-प्रतिशत पेंशन जब्त की गयी ।

(iv) दिनांक 16.03.1996 से दिनांक 31.01.2003 तक वैचारिक रूप से मानी गयी उनके सेवा अवधि के संबंध में विधि विभाग से प्राप्त परामर्श के आलोक में "No Work No Pay" के4 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21212121 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 सिद्धांत पर वेतन भुगतान नहीं करने संबंधी आदेश सामान्य प्रशासन विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-19375 दिनांक 20.12.2013 के द्वारा निर्गत किया गया ।

5. श्री राम गुलाम के विरुद्ध प्रतिवेदित आरोपों, संचालित विभागीय कार्यवाही में आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया के पत्रांक-110 दिनांक 14.02.92 के द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदन, प्राप्त ज्ञापन (Memorial) एवं संचिका में उपलब्ध अन्य दस्तावेजों के समीक्षोपरांत निम्नवत्‌ स्थिति स्पष्ट होती है :-

(i) संचालन पदाधिकारी के द्वारा विभागीय कार्यवाही के संचालित अभिलेख में दिनांक 11.02.92 को अंकित किया गया है कि "विभागीय कार्यवाही की सुनवाई दिनांक 19.07.91, 07.08.91 एवं 10.10.91 को हुई । गवाह के रूप में सिर्फ श्री राम बहादुर सिंह, उप समाहर्त्ता, तत्कालीन प्रभारी पदाधिकारी, समाहर्त्ता गोपनीय शाखा, गया का बयान लिया गया । इसके अतिरिक्त श्री नथुनी सिंह यादव, सेवानिवृत्त नाजिर, जिला कल्याण कार्यालय, गया से भी पूछताछ की गयी । इसके अतिरिक्त विभागीय कार्यवाही में समाहर्त्ता, गया की ओर से श्री विनय कुमार, जिला कल्याण पदाधिकारी, गया भी उपस्थित हुए । तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, अरवल, श्री ए.पी.गुप्ता का सही पता नहीं रहने के कारण उन्हें नहीं बुलाया जा सका । श्री राम बहादुर सिंह, उप समाहर्त्ता के जॉंच प्रतिवेदन में उल्लिखित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं संबंधित छात्रों को भी गवाह के रूप में नहीं बुलाया जा सका । श्री राम चन्द्र केशरवानी, तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, सदर गया को भी बुलाने की भी आवश्यकता नहीं समझी गयी ।" संचालन पदाधिकारी के द्वारा अंकित उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा श्री राम गुलाम को उनके द्वारा याचित साक्षियों को उक्त विभागीय कार्यवाही में प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान नहीं किया गया ।

(ii) संचालन पदाधिकारी के द्वारा जॉंच प्रतिवेदन में अंकित किया गया है कि "श्री नथुनी सिंह यादव, सेवानिवृत्त नाजिर, जिला कल्याण कार्यालय, गया से पूछताछ की गयी, उनका बयान नहीं लिया गया है ।" संचालन पदाधिकारी के द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनके द्वारा किस आधार पर श्री नथुनी सिंह यादव से पूछताछ की गयी, जबकि वे सेवानिवृत्त नाजिर थे एवं प्रासंगिक मामला में उनकी कहीं कोई सहभागिता प्रतिवेदित नहीं है ।

(iii) श्री राम गुलाम के विरुद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी के द्वारा मात्र श्री राम बहादुर सिंह, उप समाहर्त्ता, प्रभारी समाहर्त्ता, गोपनीय शाखा, गया का बयान लिया गया है । श्री राम बहादुर सिंह के द्वारा ही श्री राम गुलाम के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों/आरोपों की जॉंच की गयी थी एवं उनके द्वारा ही प्राथमिकियॉं दर्ज की गयी थीं। संचालन पदाधिकारी का निष्कर्ष श्री राम बहादुर सिंह के जॉंच प्रतिवेदन एवं बयान पर ही आधारित है । अतः ऐसी स्थिति में संचालन पदाधिकारी को श्री राम गुलाम, आरोपी पदाधिकारी को इस गवाह का प्रतिपरीक्षण का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए था, जो नहीं किया गया है ।

(iv) जिला पदाधिकारी, गया के आदेश के आलोक में श्री राम बहादुर सिंह के द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में वर्णित छात्रावास अधीक्षकों, शाखा प्रबंधकों एवं अन्य कर्मियों का भी बयान लिया जाना चाहिए था, जो नहीं लिया गया है । स्पष्ट है कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा विभागीय कार्यवाही में स्थापित प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया गया है ।

(v) संचालन पदाधिकारी के द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदन में निष्कर्ष स्वरूप अंकित किया गया है कि "इस प्रकार आरोपी पदाधिकारी, श्री राम गुलाम लगाये गये आरोपों के लिए दोषी प्रमाणित होते हैं । आरोपी पदाधिकारी के विरुद्ध सभी आरोप सरकारी राशि के गबन से संबंधित है, जो गम्भीर प्रकृति के हैं । अतः इन आरोपों के लिए आरोपी पदाधिकारी को वृहद्‌ दण्ड दिया जाना चाहिए ।" नियमतः संचालन पदाधिकारी मात्र आरोपों के प्रमाणित होने अथवा प्रमाणित5 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21212121 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 नहीं होने के संबंध में निष्कर्ष देने के लिए सक्षम हैं, दण्ड की अनुशंसा करने हेतु सक्षम नहीं हैं ।

(vi) मा0 उच्च न्यायालय के द्वारा CWJC संख्या-1632/1999 में दिनांक 03.11.09 को पारित आदेश निम्नवत्‌ है :-

On receipt of such show cause reply of the petitioner, if the disciplinary authority is satisfied and also come to the conclusion that the departmental enquiry was not conducted in a proper manner against the petitioner and he had been deprived of an effective reasonable opportunity to defend himself, he may initiate a fresh departmental proceeding appointing a new Enquiry Officer. Such exercise however must be completed by the disciplinary authority within a period of six months from the date of receipt/production of a copy of this order and any financial benefit as a consequence of interfering with the order of punishment would abide by the fresh decision to be taken in this regard by the disciplinary authority.

मा0 उच्च न्यायालय के द्वारा पारित उक्त आदेश के आलोक में विभाग के द्वारा श्री राम गुलाम को अपना बचाव करने हेतु अपना पक्ष रखने हेतु यथोचित अवसर प्रदान नहीं किया गया है बल्कि संचालन पदाधिकारी के द्वारा पूर्व में समर्पित जॉंच प्रतिवेदन के आधार पर समीक्षा करते हुए विभागीय संकल्प सं0-5750 दिनांक 09.04.13 के द्वारा दंड देते हुए शत-प्रतिशत पेंशन जब्त कर लिया गया है जबकि मा0 उच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश के आलोक में श्री राम गुलाम के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित किये जाने की आवश्यकता समझे जाने पर नया संचालन पदाधिकारी नियुक्त करते हुए विभागीय कार्यवाही संचालित करने का निदेश दिया गया था । अतः इस बिन्दु पर मा0 उच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश का अक्षरशः अनुपालन नहीं किया गया है ।

(vii) विभागीय संकल्प ज्ञापांक-14534 दिनांक 30.12.1989 के द्वारा श्री राम गुलाम को उनके द्वारा योगदान दिये जाने की तिथि से निलम्बन मुक्त किया गया है एवं विभागीय कार्यवाही के फलाफल के आधार पर निलम्बन अवधि के वेतनादि का भुगतान किये जाने के संबंध में निर्णय लिया गया है । उक्त के आलोक में श्री राम गुलाम के निलम्बन अवधि को विनियमित किये जाने एवं उक्त अवधि का वेतनादि भुगतान के संबंध में विभाग के द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया है ।

(viii) चूॅंकि विभागीय संकल्प ज्ञापांक-10120 दिनांक 18.08.1990 से श्री राम गुलाम के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संचालित थी एवं जॉंच प्रतिवेदन के आधार पर विभागीय संकल्प सं0-2850 दिनांक 16.03.1996 के द्वारा श्री राम गुलाम को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था, अतः उपरोक्त स्थिति में विभागीय निदेशों के आलोक में 1990 के बाद श्री राम गुलाम को कोई प्रोन्नति नहीं दी गयी है ।

6. राज्य सरकार ने श्री राम गुलाम के द्वारा समर्पित ज्ञापन पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-28 एवं 29 में प्रदत्त शक्ति के आलोक में ज्ञापन की समय-सीमा को शिथिल करते हुए पूर्व के विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5750 दिनांक 09.4.2013 एवं ज्ञापांक 7018 दिनांक 16.5.2012 को पुनरीक्षित करने का निर्णय लिया है । तद्‌नुसार निम्नलिखित आदेश दिए जाते हैंः-

(i) CWJC सं0-1632/1999 में मा0 उच्च न्यायालय के द्वारा पारित आदेश दिनांक 03.11.2009 के आलोक में श्री राम गुलाम के विरुद्ध बिना नये सिरे से विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ करते हुए उन्हें शत-प्रतिशत पेंशन अवरूद्ध करने से संबंधित निर्गत विभागीय संकल्प सं0-57506 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 21212121 अ*तूअ*तूअ*तूअ*तूबरबरबरबर 2014201420142014 दिनांक 09.04.13 को निरस्त करते हुए सभी देय सेवान्त लाभों के भुगतान आदेश दिया जाता है ।

(ii) विभागीय संकल्प ज्ञापांक-5750 दिनांक 09.04.13 को निरस्त किये जाने एवं दंड का प्रभाव स्वतः समाप्त हो जाने की स्थिति में श्री राम गुलाम की दिनांक 26.08.1987 से 08.01.1990 तक की निलम्बन अवधि को विनियमित किया जाता है।

(iii) श्री राम गुलाम को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग, बिहार, पटना के संकल्प ज्ञापांक-2850 दिनांक 16.03.1996 के द्वारा सेवा से बर्खास्त किया गया था, जिसे मा0 उच्च न्यायालय के द्वारा प्रासंगिक न्यायादेश के द्वारा निरस्त कर दिया गया है । विभागीय संकल्प ज्ञापांक-7018 दिनांक 16.05.2012 के द्वारा उन्हें 16.03.1996 से वार्धक्य सेवानिवृत्ति की तिथि दिनांक 31.01.2003 तक वैचारिक रूप से सेवा में माना गया है । उक्त निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए उक्त अवधि को नियमित सेवा एवं कार्य अवधि मानते हुए वेतनादि भुगतान स्वीकृत किये जाने का आदेश दिया जाता है ।

(iv) श्री राम गुलाम, बि.प्र.से. (सेवानिवृत्त) की लम्बित प्रोन्नति के विषय पर विभागीय प्रोन्नति समिति के द्वारा विचार किये जाने के उपरान्त समुचित निर्णय लिया जायेगा ।

आदेशः-आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

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केशव कुमार सिंह,

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अधी0क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु5ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 871-571+10-ड.0ट.0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 21 October 2014. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2014-10-21.871/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2014-10-21.871.