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पटनापटनापटनापटना, , , , बुधबुधबुधबुधवारवारवारवार, , , , 7777 जनवर'जनवर'जनवर'जनवर' 2012012012015555 ty lalk/ku foHkkx &&&&&&& vf?klwpuk 22 vDrwcj 2014
सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/
22/नि0सि0(पट0)-03-12/2012/1556—श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल 04 तक) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नौबतपुर के पद पर पदाधिकारी, नौबतपुर सम्प्रति निलंबित जब (26.06.01 से 27.07.04 तक) अवर प्रमंडल पदाधिकारी, नौबतपुर के पद पर पदाधिकारी, नौबतपुर सम्प्रति निलंबित जब (26 पदस्थापित थे तब उनके विरूद्ध जल संसाधन विभाग की बहुमूल्य सरकारी जमी न का फर्जी दस्तावेज तैयार कर पदस्थापित थे तब उनके विरूद्ध जल संसाधन विभाग की बहुमूल्य सरकारी जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन के अतिक्रमण करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्तर्लिप्त रहने, फर्जी सरकारी जमीन के अतिक्रमण करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्तर्लिप्त रहने, फर्जी सरकारी जमीन के अतिक्रमण करने में एवं उक्त जमीन पर बहुमंजिली इमारत निर्माण करने में अन्तर्लिप्त रहने, फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 03-04 तक रसीद काटने के प्रथम दृष्टया दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 03-04 तक रसीद काटने के प्रथम दृष्टया दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि मानकर उक्त जमीन की वर्ष 2002-03 से 03-04 तक रसीद काटने के प्रथम दृष्टया त करते हुए विभागीय प्रमाणित आरोपो के लिए विभागीय अधिसूचना संख्या 1110 दि य अधिसूचना संख्या 1110 दिनांक 11.10.2012 द्वारा उनके निलंबित करते हुए विभागीय 2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम संकल्प 13 दिनांक 07.01.2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 2013 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गयी। 17 के तहत विभागीय कार्यवाही चलायी गयी।
न की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। कि संचालन संचालन पदाधिकरी से प्राप्त जॉच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। कि संचालन संचालन पदाधिकरी से प्राप्त जॉच प्रतिवेद पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मामले की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिस अतिक्रमित पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मामले की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिस अतिक्रमित पदाधिकारी द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तु मामले की विभागीय समीक्षा में पाया गया कि जिस अतिक्रमित भूमि की लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है वह सही लीज है अथवा नहीं इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, भूमि की लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है वह सही लीज है अथवा नहीं इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, भूमि की लीज की रसीद उनके द्वारा काटा गया है वह सही लीज है अथवा नहीं इसकी जानकारी प्राप्त नहीं की गई, वर्तमान में तथाकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर वर्तमान में तथाकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर जबकि वर्तमान में तथाकथित लीज डीड के अवलोकन से स्पष्ट है कि इस पर किसी सक्षम पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है। दस्तावेज में वर्ष का उल्लेख नहीं किया गया है, फिर भी उनके द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के नहीं है। दस्तावेज में वर्ष का उल्लेख नहीं किया गया है, फिर भी उनके द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के नहीं है। दस्तावेज में वर्ष का उल्लेख नहीं किया गया है, फिर भी उनके द्वारा फर्जी दस्तावेज को सच्ची प्रतिलिपि के रूप में ग्राह्य करते हुए रसीद काटी गयीः- रूप में ग्राह्य करते हुए रसीद काटी गयीः-
उनके द्वारा बिना किसी छान-बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारीयों के आदेश प्राप्त किये वर्णित स्थिति में उनके द्वारा बिना किसी छान-बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारीयों के आदेश प्राप्त किये उनके द्वारा बिना किसी छान-बीन के और बिना अपने उच्चाधिकारीयों के आदेश प्राप्त किये रसीद काटने एवं अपनी स्वार्थ सिद्धि को पूर्ण करने का आरोप प्रमाणित पाया गया। रसीद काटने एवं अपनी स्वार्थ सिद्धि को पूर्ण करने का आरोप प्रमाणित पाया गया।
14 द्वारा जॉंच प्रतिवेदन से निम्नाकित वर्णित स्थिति में समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 103 दिनांक 20.1.14 द्वारा जॉंच प्रतिवेदन से निम्नाकित वर्णित स्थिति में समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक 103 दिनांक 20
असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा किया गयाः- असहमति के विन्दु पर द्वितीय कारण पृच्छा किया गयाः-
विभागीय भूखण्ड के लीज को प्रमाणिकता की बिना जॉंच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली की गई विभागीय भूखण्ड के लीज को प्रमाणिकता की बिना जॉंच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली की गई विभागीय भूखण्ड के लीज को प्रमाणिकता की बिना जॉंच किये ही आपके द्वारा लीज रेन्ट की वसूली की गई जबकि लीज कागजात फर्जी थे अतएव विभागीय बहुमूल्य भूखण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत ढंग से जबकि लीज कागजात फर्जी थे अतएव विभागीय बहुमूल्य भूखण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत ढंग से जबकि लीज कागजात फर्जी थे अतएव विभागीय बहुमूल्य भूखण्ड का बिना किसी प्रमाण के आधार पर गलत ढंग से र्गत कर विभाग को भूखण्ड से बेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्तता प्रमाणित होती है। र्गत कर विभाग को भूखण्ड से बेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्तता प्रमाणित होती है। रेन्ट रसीद निर्गत कर विभाग को भूखण्ड से बेदखल करने की साजिश में आपकी संलिप्तता प्रमाणित होती है। 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 जनवर' जनवर' जनवर' जनवर' 2015201520152015 मोहिउद्वीन खॅा पिता स्व0 गुलाब खॅा, करबिगहिया, पटना के नाम पर वर्ष 1943-46 से 1946-49 के लीज पर दी गई। इस लीज डीड में अंकित लीज रेन्ट के आधार पर वर्ष 1943 से ही मनी रसीद निर्गत किया जाता रहा है। इससे साबित हो जाता है कि लीज कागजात फर्जी नहीं थे। रेन्ट का मनी रसीद निर्गत कर विभाग का स्वामित्व इस भूखण्ड पर बरकरार रखा गया।
समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा में स्वयं स्वीकार किया गया है कि तथाकथित लीज को समाप्त करने के लिए कार्यपालक अभियन्ता द्वारा वर्ष 2012-13 में वाद दायर किया गया था। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा इस भूमि का लीज पर दिये जाने की कोइ न तो अनुमति दी गई और न ही स्वीकृति दिया गया था। इससे स्पष्ट है कि श्री चौधरी द्वारा अपने द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में कोई नया तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए उक्त अवैध कार्य में इनकी संलिप्ता की पुष्टि होती है। समीक्षोपरान्त श्री चौधरी के विरूद्व उपरोक्त आरोप प्रमाणित पाया गया। वर्णित स्थिति में उन्हें निलंबन से मुक्त करते हुए प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा उन्हें निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गयाः-
1. कालमान वेतन के दो वेतन प्रक्रम से नीचे सदैव के लिए अवनति। 2. निलंबन अवधि की सेवा का निरूपण एवं वेतनभत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 11 (5) के तहत नोटिस निर्गत किये जाने एवं नोटिस के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा।
उपरोक्त वर्णित स्थिति में श्री उपेन्द्र प्रसाद चौधरी, तत्कालीन अवर प्रमण्डल पदाधिकारी, नौबतपुर सम्प्रति निलंबित को तत्काल प्रभाव से निलंबन से मुक्त करते हुए निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः-
1. कालमान वेतन के दो वेतन प्रक्रम से नीचे सदैव के लिए अवनति। 2. निलंबन अवधि की सेवा का निरूपण एवं वेतनभत्ता के संबंध में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 11 (5) के तहत नोटिस निर्गत किये जाने एवं नोटिस के आलोक में प्राप्त अभ्यावेदन के समीक्षोपरान्त निर्णय लिया जायेगा।
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 23-571+10-ड'0ट'0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in