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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 07 January 2015

Published 07 January 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-01-07.49
Languages
English, Hindi

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सं0 22/नि॰सि॰(पट॰)-3-12/2010

ागीय अधिसूचना संख्या-302 दिनांक 27.03.2012 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए ि

2012 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली22/नि॰सि॰(पट॰)-3-12/2010/1958—श्री संजय कुमार सिन्हा, अधीक्षण अभियंता, सम्प्रति निलंबित, श्री संजय कुमार सिन्हा, अधीक्षण अभियंता, सम्प्रति निलंबित, जब कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, मोकामा, शिविर-बख्तियारपुर के पद पर पदस्थापित थे तब उनके जब कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, मोकामा, शिविर-बख्तियारपुर के पद पर पदस्थापित थे तब उनके जब कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, मोकामा, शिविर-बख्तियारपुर के पद पर पदस्थापित थे तब उनके ुच पथ के निर्माण कार्य के सिलसिले में विरूद्ध एन॰टी॰पी॰सी॰ बाढ़ के लिये कराये जा रहे सतही नाला एवं पह विरूद्ध एन॰टी॰पी॰सी॰ बाढ़ के लिये कराये जा रहे सतही नाला एवं पहुच पथ के निर्माण कार्य के सिलसिले में 68 लाख रु0 का बैंक गारंटी संबंधित कार्य का एकरारनामा विखंडित करने के पश्चात्‌ संवेदक द्वारा जमा किये गये 55.68 लाख रु0 का बैंक गारंटी संबंधित कार्य का एकरारनामा विखंडित करने के को रिभोक करने की कार्रवाई समय पर नहीं किये जाने के फलस्वरूप बैंक गारंटी की राशि लैप्स हो जाने के कारण को रिभोक करने की कार्रवाई समय पर नहीं किये जाने के फलस्वरूप बैंक गारंटी की राशि लैप्स हो जाने के कारण को रिभोक करने की कार्रवाई समय पर नहीं किये जाने के फलस्वरूप बैंक गारंटी की राशि लैप्स हो जाने के कारण सरकार को 55.68 लाख रु0 की क्षति होने तथा संवेदक को अनुचित लाभ पहुँचाने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के 68 लाख रु0 की क्षति होने तथा संवेदक को अनुचित लाभ पहुँचाने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के 68 लाख रु0 की क्षति होने तथा संवेदक को अनुचित लाभ पहुँचाने के प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के 2012 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प लिए विभागीय अधिसूचना संख्या-302 दिनांक रण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के ज्ञापांक-633 दिनांक 14.06.2012 द्वारा बिहार सरकारी नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। उक्त विभागीय कार्यवाही में विभागीय जाँच आयुक्त, बिहार, पटना संचालन पदाधिकारी नियुक्त थे। पटना संचालन पदाधिकारी नियुक्त थे। संचालन पदाधिकारी (विभागीय जाँच आयुक्त) से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की ी समीक्षा सरकार के स्तर पर की संचालन पदाधिकारी (विभागीय जाँच आयुक्त) से प्राप्त जाँच प्रतिवेदन क ै कि संवेदक का एकरारनामा दिनांक गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि संवेदक का एकरारनामा दिनांक गयी। समीक्षा में पाया गया कि संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया ह 2009 से बैंक गारंटी इनभोक करने की 2009 को विखंडित होने के करीब दो महीने बाद विलम्ब से दिनांक 06.06.2009 से बैंक गारंटी इनभोक करने की 02.04.2009 को विखंडित होने के करी पत के द्वारा शुरू की गयी। दिनांक 06.06.2009 को श्री सिन्हा के द्वारा स्वयं इस महत्वपूर्ण बिन्दु का 2009 को श्री सिन्हा के द्वारा स्वयं इस महत्वपूर्ण बिन्दु का कार्रवाई आरोपित के द्वारा शुरू की गयी। दिनांक ध्यान आने पर कार्रवाई प्रारंभ करने के पश्चात्‌ आगे उनके द्वारा किये गये Conduct में अपेक्षित संभव सजगता की में अपेक्षित संभव सजगता की ध्यान आने पर कार्रवाई प्रारंभ करने के पश्चात्‌ आगे उनके द्वारा किये गये संभव वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित न करने जैसे कमी, विवेक की कमी, अधीनस्थ पर समुचित पर्यवेक्षण का अभाव और संभव वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित न करने जैसे कमी, विवेक की कमी, अधीनस्थ पर समुचित पर्यवेक्षण का अभाव और बरते गये चूक की वजह से बैंक गारंटी की राशि लैप्स हुई। इस चूक के कारण सरकार को क्षति पहुँची और इसका बरते गये चूक की वजह से बैंक गारंटी की राशि लैप्स हुई। इस चूक के कारण सरकार को क्षति पहुँची और इसका बरते गये चूक की वजह से बैंक गारंटी की राशि लैप्स हुई। इस चूक के कारण सरकार को क्षति पहुँची और इसका अप्रत्यक्ष नतीजा, निकला कि संवेदक को अनुचित लाभ प्राप्त हो गया। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच अप्रत्यक्ष नतीजा, निकला कि संवेदक को अनुचित लाभ प्राप्त हो गया। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच अप्रत्यक्ष नतीजा, निकला कि संवेदक को अनुचित लाभ प्राप्त हो गया। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जाँच 2013 द्वारा श्री सिन्हा से द्वितीय कारण हुए विभागीय पत्रांक-1059 दिनांक 05.09.2013 द्वारा श्री सिन्हा से द्वितीय कारण प्रतिवेदन की छायाप्रति संलग्न करते पृच्छा की गयी। श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में पाया गया कि श्री सिन्हा द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में निम्न तथ्य दिया गया है :- गया कि श्री सिन्हा द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब मेरे द्वारा बैंक गारंटी की राशि जप्त करने के लिए दिनांक इस संबंध में प्रमण्डलीय कार्यालय के पत्रांक-665 दिनांक ी राशि जप्त करने के लिए दिनांक 06.06.2009 से ही कार्रवाई प्रारंभ कर दी गयी थी। 2009 से ही कार्रवाई प्रारंभ कर दी गयी थी। 2009 द्वारा बैंक गारंटी इनभोक करने हेतु प्रबंधक, लीय कार्यालय के पत्रांक-665 दिनांक 06.06.2009 द्वारा बैंक गारंटी इनभोक करने हेतु प्रबंधक, 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 जनवर' जनवर' जनवर' जनवर' 2015201520152015 इलाहाबाद बैंक, राँची को पत्र लिखा गया। इसके लिए श्री लालदेव रजक, लेखा लिपिक को प्राधिकृत करते हुए उन्हें स्वयं राँची जाकर पत्र हस्तगत कराने का निदेश दिया गया। परन्तु श्री रजक राँची न जाकर पत्र को दिनांक 08.06. 2009 को स्पीड पोस्ट द्वारा भेज दिया जो बैंक में दिनांक 12.06.2009 को प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त श्री सिन्हा द्वारा यह भी कहा गया है कि मूल बैंक गारंटी के पृ0-4 पर अंकित है कि "This guarantee shall be valid upto 28 days from the date of expiry of the defeat liability period" बैंक ने अपने लिखे पत्र दिनांक 13.06.2009 में स्वीकार किया है कि प्रमण्डल का पत्रांक-665 दिनांक-06.06.2009 उन्हें दिनांक-12.06.2009 को प्राप्त हो गया है। अगर बैंक चाहती तो उक्त बैंक गारंटी की राशि इनभोक हो सकता था। श्री सिन्हा से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा में पाया गया कि इनके इस कथन को मान्य नहीं किया जा सकता कि इनके द्वारा दायित्वों का निर्वहन सही ठंग से किया गया है क्योंकि श्री लालदेव रजक, लेखा लिपिक को पत्र लेकर राँची जाने के लिये प्राधिकृत किया गया परन्तु श्री रजक द्वारा राँची न जाकर स्पीड पोस्ट से पत्र को भेजा गया। श्री सिन्हा द्वारा एक बार जानने का भी प्रयास नहीं किया गया कि श्री रजक उस पत्र को लेकर राँची बैंक में उपलब्ध कराने गये या नहीं। वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री सिन्हा के विरूद्ध अपने दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित सजगता की कमी, विवेक की कमी, अपने अधीनस्थ पर समुचित पर्यवेक्षण का अभाव और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित न करने जैसे बरते गये चूक की वजह से बैंक गारंटी की राशि लैप्स होने का आरोप प्रमाणित है। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा श्री सिन्हा को निलम्बन से मुक्त करते हए निम्न दंड देने का निर्णय लिया गयाः- 1. एक वेतन वृद्धि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक 2. निलंबन अवधि के सेवा का निरूपण एवं वेतन भाा की अनुमान्यता के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के पत्रांक-7876 दिनांक 20.05.2013 के आलोक में नोटिश निर्गत कर निर्णय लिया जायेगा। उक्त निर्णय के आलोक में श्री संजय कुमार सिन्हा, तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमण्डल, मोकामा, शिविर-बख्तियारपुर सम्प्रति अधीक्षण अभियंता (निलंबित) को निलंबन से मुक्त करते हुए उक्त दण्ड दिया/संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश स,े सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।

———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 49-571+10-ड'0ट'0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 07 January 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-01-07.49/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-01-07.49.