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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 07 January 2015

Published 07 January 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-01-07.50
Languages
English, Hindi

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सं0 22/नि0 सि0 (पट0)-03-14/22/नि0 सि0 (पट0)-03-14/2008/1959—श्री अशोक सिंह (आई.डी.-3510) सहायक अभियंता, -3510) सहायक अभियंता, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा अंचल, अनिसाबाद, पटना जब सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण अंचल अवर प्रमण्डल, मोकामा, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा अंचल, अनिसाबाद, पटना जब सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण अंचल अवर प्रमण्डल, मोकामा, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा अंचल, अनिसाबाद, पटना जब सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण अंचल अवर प्रमण्डल, मोकामा, शि0-बख्तियारपुर के पद पर पदस्थापित थे तब उनके द्वारा पटना जिलान्तर्गत पंडारक प्रखण्ड के बरूआ शि0-बख्तियारपुर के पद पर पदस्थापित थे तब उनके द्वारा पटना जिलान्तर्गत पंडारक प्रखण्ड के बरूआने जमींदारी शि0-बख्तियारपुर के पद पर पदस्थापित थे तब उनके द्वारा पटना जिलान्तर्गत पंडारक प्रखण्ड के बरूआ बॅाध से संबंधित कार्य में बरती गयी अनियमितता की जॅाच निगरानी विभाग द्वारा की गयी। निगरानी विभाग से प्राप्त बॅाध से संबंधित कार्य में बरती गयी अनियमितता की जॅाच निगरानी विभाग द्वारा की गयी। निगरानी विभाग से प्राप्त बॅाध से संबंधित कार्य में बरती गयी अनियमितता की जॅाच निगरानी विभाग द्वारा की गयी। निगरानी विभाग से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्व आरोप पत्र प्रपत्र-''क'' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्व आरोप पत्र प्रपत्र-''क'' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक जॅाच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री सिंह के विरूद्व आरोप पत्र प्रपत्र-''क'' गठित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1208 दिनांक 30.10.12 द्वारा बिहार सरक ारी सेवक ( वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील ) नियमावली 2005 के नियम 17 12 द्वारा बिहार सरकारी सेवक ( वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील ) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर के तहत विभागीय कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर री से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन पर की गयी। समीक्षा के क्रम में आरोप सं0-1, 2, 3, 5 एवं 6 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन पर की गयी। समीक्षा के क्रम में आरोप सं0-1, 2, 3, 5 एवं 6 के संदर्भ में संचालन पदाधिका से सहमत होते हुए आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तुं आरोप सं0-4 के समीक्षा के संदर्भ में पाया गया कि मूल से सहमत होते हुए आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तुं आरोप सं0-4 के समीक्षा के संदर्भ में पाया गया कि मूल से सहमत होते हुए आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। परन्तुं आरोप सं0-4 के समीक्षा के संदर्भ में पाया गया कि मूल प्रतिवेदन में लिये गये मापी के आधार पर 21,02,500/- रू0 अतिरेक भुगतान का मामला परिलक्षित हुआ था, जिसे प्रतिवेदन में लिये गये मापी के आधार पर 21,02,500/- रू0 अतिरेक भुगतान का मामला परिलक्षित हुआ था, जिसे प्रतिवेदन में लिये गये मापी के आधार पर 21,02,500/- रू0 अतिरेक भुगतान का मामला परिलक्षित हुआ था, जिसे पुनः निगरानी विभाग द्वारा सुधारते हुए पत्रांक 17 दिनांक 02 09 से 12,76,133/- रू0 किया गया। इसमें 15/- ग द्वारा सुधारते हुए पत्रांक 17 दिनांक 02.01.09 से 12,76,133/- रू0 किया गया। इसमें 15/- रू0 क्यू0 मी0 रॅायल्टी की राशि भी सन्निहित है। तदनुसार अतिरेक भुगतान की राशि 9,03,728/- रू0 होती है। रू0 क्यू0 मी0 रॅायल्टी की राशि भी सन्निहित है। तदनुसार अतिरेक भुगतान की राशि 9,03,728/- रू0 होती है। रू0 क्यू0 मी0 रॅायल्टी की राशि भी सन्निहित है। तदनुसार अतिरेक भुगतान की राशि 9,03,728/- रू0 होती है। ा मामला बनता भी है तो यह संचालन पदाधिकारी द्वारा इस तथ्य को माना गया है कि यदि अधिकाई भुगतान का मामला बनता भी है तो यह संचालन पदाधिकारी द्वारा इस तथ्य को माना गया है कि यदि अधिकाई भुगतान क भुगतान अग्रिम भुगतान के रूप में मान्य है और अगले या अंतिम विपत्र से इसका समायोजन का प्रावधान है। इस भुगतान अग्रिम भुगतान के रूप में मान्य है और अगले या अंतिम विपत्र से इसका समायोजन का प्रावधान है। इस भुगतान अग्रिम भुगतान के रूप में मान्य है और अगले या अंतिम विपत्र से इसका समायोजन का प्रावधान है। इस प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोप प्रमाणित नहीं कहा गया। जबकि समीक्षा में पाया गया कि संचालन प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोप प्रमाणित नहीं कहा गया। जबकि समीक्षा में पाया गया कि संचालन प्रकार संचालन पदाधिकारी द्वारा उक्त आरोप प्रमाणित नहीं कहा गया। जबकि समीक्षा में पाया गया कि संचालन माना जा सकता है क्योंकि पूरी लम्वाई में कार्य कराने के उपरान्त माप पुस्त (एम0 माना जा सकता है क्योंकि पूरी लम्वाई में कार्य कराने के उपरान्त माप पुस्त (एम0 पदाधिकारी के उक्त तर्क को नहीं माना जा सकता है क्योंकि पूरी लम्वाई में कार्य कराने के उपरान्त माप पुस्त (एम0 बी0) पर विस्तृत मापी दर्ज करने के उपरान्त भुगतान किया गया। यदि निगरानी विभाग द्वारा यह जॅाच औचक रूप से बी0) पर विस्तृत मापी दर्ज करने के उपरान्त भुगतान किया गया। यदि निगरानी विभाग द्वारा यह जॅाच औचक रूप से बी0) पर विस्तृत मापी दर्ज करने के उपरान्त भुगतान किया गया। यदि निगरानी विभाग द्वारा यह जॅाच औचक रूप से नहीं किया जाता तो अतिरेक भुगतान का मामला प्रकाश में नहीं आता। वर्णित स्थिति में अतिरेक भुगतान का आरोप ें अतिरेक भुगतान का आरोप नहीं किया जाता तो अतिरेक भुगतान का मामला प्रकाश में नहीं आता। वर्णित स्थिति म प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 1415 दिनांक 23 14 द्वारा आरोप सं0-4 के संदर्भ प्रमाणित पाया गया। उक्त प्रमाणित आरोप के लिए विभागीय पत्रांक 1415 दिनांक 23.9.14 द्वारा आरोप सं0-4 के संदर्भ में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के उक्त विन्दु पर श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के उक्त विन्दु पर श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। में संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से असहमति के उक्त विन्दु पर श्री सिंह से द्वितीय कारण पृच्छा किया गया। श्री सिंह से प्राप्त द्विती य कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। श्री सिंह श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में अपने पूर्व के स्पष्टीकरण की छायाप्रति संलग्न करते हुए कहा गया है कि द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में अपने पूर्व के स्पष्टीकरण की छायाप्रति संलग्न करते हुए कहा गया है कि द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में अपने पूर्व के स्पष्टीकरण की छायाप्रति संलग्न करते हुए कहा गया है कि निगरानी विभाग द्वारा पूर्व में 21,02,500/- रू0 अधिकाई भुगतान को 9,03,728/-रू0 तक संशोधित ि निगरानी विभाग द्वारा पूर्व में 21,02,500/- रू0 अधिकाई भुगतान को 9,03,728/-रू0 तक संशोधित किया गया है। निगरानी विभाग द्वारा पूर्व में 21,02,500/- रू0 अधिकाई भुगतान को 9,03,728/-रू0 तक संशोधित ि निगरानी विभाग के पुनः त्रुटिपूर्ण गणना को मेरे द्वारा उठाये गये तकनीकी विन्दुओं को ध्यान में रखा जायेगा तो कार्य निगरानी विभाग के पुनः त्रुटिपूर्ण गणना को मेरे द्वारा उठाये गये तकनीकी विन्दुओं को ध्यान में रखा जायेगा तो कार्य निगरानी विभाग के पुनः त्रुटिपूर्ण गणना को मेरे द्वारा उठाये गये तकनीकी विन्दुओं को ध्यान में रखा जायेगा तो कार्य 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 जनवर' जनवर' जनवर' जनवर' 2015201520152015 की मात्रा निगरानी विभाग द्वारा प्रतिवेदित मात्रा से अधिक होगी। विभाग द्वारा अपने समीक्षा में अंकित किया गया है कि यदि निगरानी विभाग द्वारा औचक जॅाच नहीं किया जाता तो अतिरेक भुगतान का मामला प्रकाश में नहीं आता। यह तर्क तकनीकी दृष्टिकोण एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य के विपरीत है। संचालन पदाधिकारी द्वारा निगरानी विभाग के द्वारा किये गये मापी को तकनीकी दृष्टिकोण से अमान्य किया गया है एवं मेरे द्वारा जॅाचित मापी जिसमें लेवलींग मशीन से मापी ली भी गई जो कि तकनीकी दृष्टिकोण से मान्य है पर अपनी सहमति दी गई है। उनका यह मत भी है कि अगर अधिकाई भुगतान है तो उसकी वसूली संवेदक से की जा सकती है। इसका यह अर्थ नहीं हुआ कि संचालन पदाधिकारी द्वारा त्रुटिपूर्ण मापी को सही माना गया है। इस तर्क पर विभाग द्वारा समीक्षा नहीं की गयी है। श्री सिंह से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा में पाया गया कि श्री सिंह द्वारा अंकित किया गया है कि मापी पुस्त में अंकित मुख्य बॅाध की कुल मिट्‌टी की मात्रा 2,02,870.00 घन मी0 है जबकि निगरानी विभाग के संशोधित प्रतिवेदन में 2,13,528 घन मी0 प्रतिवेदित है जिसकी पृष्टि मापी पुस्त में अंकित विपत्र से होती है। निगरानी विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण के आधार पर गणित मिट्‌टी की मात्रा पर क्षरण आदि के लिये 20 प्रतिशत अनुमानित लाभ देते हुए 24,827 घन मी0 अतिरेक मिट्‌टी भुगतान के लिये 12,76,133/- रू0 रॅायल्टी सहित अधिकाई भुगतान पाया गया है। आरोपित पदाधिकारी द्वारा निगरानी विभाग के संशोधित गणना को त्रुटिपूर्ण बताते हुए मापी पुस्त में अंकित मुख्य बॅाध के मिट्‌टी के कुल मात्रा पर क्षरण आदि हेतु अनुमानित लाभ 20 प्रतिशत का प्रावधान करते हुए अधिकाई भुगतान को नगण्य/ऋणात्मक प्रमाणित करने का प्रयास किया गया है जो मान्य नहीं किया जा सकता है। श्री सिंह द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में नया तथ्य अंकित नहीं किया गया है वल्कि पुराने तथ्यों को ही पुनः अंकित किया गया है। समीक्षोपरान्त अतिरेक भुगतान का आरोप प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए सरकार द्वारा निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गयाः- (1) निन्दन वर्ष 2008-09 (2) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक। वर्णित स्थिति में श्री अशोक सिंह तत्कालीन सहायक अभियन्ता, बाढ़ नियंत्रण अंचल अवर प्रमण्डल, मोकामा, शि0-बख्तियारपुर सम्प्रति सहायक अभियन्ता, पुनपुन बाढ़ सुरक्षा अंचल, अनिसाबाद, पटना को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- (1) निन्दन वर्ष 2008-09 (2) दो वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, मोहन पासवान, सरकार के अवर सचिव।

———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 50-571+10-ड'0ट'0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 07 January 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-01-07.50/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-01-07.50.