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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 07 January 2015

Published 07 January 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-01-07.59
Languages
English, Hindi

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पटनापटनापटनापटना, , , , बुधबुधबुधबुधवारवारवारवार, , , , 7777 जनवर'जनवर'जनवर'जनवर' 2012012012015555 ty lalk/ku foHkkx &&&&&&& vf?klwpuk 22 fnlEcj 2014

सं0 22/नि0सि0(मुज0)-06-01/2009/2055

नि0सि0(मुज0)-06-01/2009/2055—श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, तिरहुत श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्‌फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा वर्ष 2005-07 में इनके पदस्थापन अवधि में आवास आवंटन समिति नहर अंचल, मुजफ्‌फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा वर्ष 2005-07 में इनके पदस्थापन अवधि में आवास आवंटन समिति नहर अंचल, मुजफ्‌फरपुर सम्प्रति सेवानिवृत के द्वारा वर्ष 2005-07 में इनके पदस्थापन अवधि में आवास आवंटन समिति के अध्यक्ष नहीं रहने के बावजूद उनके द्वारा आवास आवंटन करने एवं रद्‌द करने से संबंधित कार्य को सम्पादित किया के अध्यक्ष नहीं रहने के बावजूद उनके द्वारा आवास आवंटन करने एवं रद्‌द करने से संबंधित कार्य को सम्पादित किया गया। आवास का आवंटन गलत एवं मनमानी ठंग से किये जाने के कारण राजस्व की क्षति पहुॅचाने से संबंधित परिवाद गया। आवास का आवंटन गलत एवं मनमानी ठंग से किये जाने के कारण राजस्व की क्षति पहुॅचाने से संबंधित परिवाद गया। आवास का आवंटन गलत एवं मनमानी ठंग से किये जाने के कारण राजस्व की क्षति पहुॅचाने से संबंधित परिवाद की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से कराई गई। की जॅाच उड़नदस्ता अंचल, पटना से कराई गई।

के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त उड़नदस्ता अंचल, पटना द्वारा समर्पित जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार

प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में श्री चौधरी के विरूद्व निम्न आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये गये। प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में श्री चौधरी के विरूद्व निम्न आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाये गये।

1. आवासों का आवंटन मनमाने ठंग से किया गया। 2. आवासों का आवंटन गलत एवं मनमान

आवासों का आवंटन मनमाने ठंग से किया गया। 7,67,609/- के सरकारी आवासों का आवंटन गलत एवं मनमाने ढ़ंग से किये जाने के फलस्वरूप रू0 7,67,609/- के सरकारी राजस्व की क्षति हुई जिसके लिए श्री चौधरी को जिम्मेवार माना गया।

स्व की क्षति हुई जिसके लिए श्री चौधरी को जिम्मेवार माना गया।

उक्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता के विरूद्व उक्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता के विरूद्व उक्त प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता के विरूद्व 09 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली विभागीय संकल्प सं0-1373 दिनांक 27 विभागीय संकल्प सं0-1373 दिनांक 27.11.09 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी। 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी।

श्री चौधरी के विरूद्ध संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में ही दिनांक 31 11 को सेवानिवृत हो जाने के संचालित विभागीय कार्यवाही के क्रम में ही दिनांक 31.5.11 को सेवानिवृत हो जाने के कारण विभागीय अधिसूचना सं0-936 दिनांक 29 11 द्वारा पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पेंशन कारण विभागीय अधिसूचना सं0-936 दिनांक 29.7.11 द्वारा पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही को बिहार पें नियमावली के नियम 43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा नियमावली के नियम 43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा नियमावली के नियम 43 (बी0) में सम्परिवर्तित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी। समीक्षा में श्री चौधरी के वि

ी। समीक्षा में श्री चौधरी के विरूद्ध निम्न आरोपों को प्रमाणित पाया गया।

निम्न आरोपों को प्रमाणित पाया गया।

दिनांक 28.5.02 से 09.01.07 की अवधि में आवास आवंटन समिति के अध्यक्ष नहीं रहने के बावजूद उनके 07 की अवधि में आवास आवंटन समिति के अध्यक्ष नहीं रहने के बावजूद उनके द्वारा आवास आवंटन करने एवं रद्‌द करने का आदेश दिया गया। जो विभागीय नियमों के प्रतिकूल उनकी कार्यप्रणाली द्वारा आवास आवंटन करने एवं रद्‌द करने का आदेश दिया गया। जो विभागीय नियमों के प्रतिकूल उनकी कार्यप्रणाली द्वारा आवास आवंटन करने एवं रद्‌द करने का आदेश दिया गया। जो विभागीय नियमों के प्रतिकूल उनकी कार्यप्रणाली को प्रमाणित करता है एवं जिसके कारण रू0-7,67,609/- के राजस्व की क्षति हुई जिसके लिए श्री चौधरी जिम्मेवार को प्रमाणित करता है एवं जिसके कारण रू0-7,67,609/- के राजस्व की क्षति हुई जिसके लिए श्री चौधरी जिम्मेवार को प्रमाणित करता है एवं जिसके कारण रू0-7,67,609/- के राजस्व की क्षति हुई जिसके लिए श्री चौधरी जिम्मेवार है।

श्री चौधरी के विरूद्ध उक्त प्रमाणित आरोपों के

उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय पत्रांक 183 दिनांक 22

22.02.12 द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा की गयी। द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में श्री चौधरी के द्वारा निम्न बाते कही गयी हैः- कारण पृच्छा की गयी। द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में श्री चौधरी के द्वारा निम्न बाते कही गयी हैः- कारण पृच्छा की गयी। द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब में श्री चौधरी के द्वारा निम्न बाते कही गयी हैः-2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 जनवर' जनवर' जनवर' जनवर' 2015201520152015 1. दिनांक 16.09.04 के पूर्व श्री चौधरी झारखण्ड सरकार में कार्यरत थे। उक्त तिथि के पश्चात दिनांक 16.10. 04 को श्री चौधरी का पदस्थापन रूपांकण अंचल, रतवारा में हुआ। दिनांक 22.8.05 को तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्‌फरपुर का पदभार ग्रहण करने के पश्चात दिनांक 23.5.06 को उनके द्वारा योजना एवं रूपांकण अंचल, रतवारा का प्रभार श्री गंगा चौधरी को सौप दिया गया। तत्पश्चात जून 2007 में स्थानान्तरण के पश्चात ये पूर्णियॅा चले गये। तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्‌फरपुर का प्रभार ग्रहण करने के पश्चात दिनांक 01.09.05 को ये राम दयाल नहर अवस्थित गंडक शिविर में बी0-1 आवास में आवासित हो गये।

2. इनके द्वारा राजस्व गणना की फर्जी तकनीक अपनाकर गलत राशि का आकलन किये जाने हेतु संचालन पदाधिकारी को दोषी ठहराया गया।

श्री चौधरी द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि श्री चौधरी के विरूद्व दिनांक 28.5.02 से दिनांक 09.01.07 के बीच चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों को देय आवास रिक्त रहने तथा इनके कार्यकाल अवधि में दिनांक 6.10.04 से 22.5.06 तक आवास आवंटन करने तथा रद्‌द करने के कारण कुल राजस्व की क्षति रू0-7,67,609/- का आकलन कर आरोप गठित किया गया। लेकिन वस्तुतः आवास के अनियमित आवंटन के लिय श्री चौधरी को मात्र दिनांक 6.10.04 से 23.5.06 तक की अवधि के लिये जिम्मेवार माना गया एवं इस प्रकार राजस्व की क्षति से संबंधित राशि निम्नवत है।

(1) आवास सं0-बी0-1 रिक्त रहने के कारण (दिनांक 14.5.05 से 31.8.05 तक) 4x1925 = 7700.00/- (2) आवास के अनियमित आवंटन के कारण (दिनांक 01.11.04 से 31.5.06 तक) 19x6300= 1,19,700.00 कुलः- 1,27,400.00 संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन तत्पश्चात विभागीय कार्यवाही में वर्णित तथ्यों एवं श्री चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब के समीक्षोपरान्त श्री चौधरी को दिनांक 28.5.02 से दिनांक 09.01.07 की अवधि में आवास आवंटन समिति के अध्यक्ष नहीं रहने के बावजूद उनके द्वारा आवास आवंटन करने एवं रद्‌द करने का आदेश दिया गया। जो विभागीय नियमों के प्रतिकूल उनकी कार्यप्रणाली को प्रमाणित करता है एवं जिसके कारण रू0-1,27,400/- के राजस्व की क्षति हुई। जिसके लिए श्री चौधरी जिम्मेवार है।

उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री चौधरी को विभागीय पत्रांक 891 दिनांक 9.7.14 द्वारा निम्न दण्ड देने का निर्णय लिया गया।

1. 1,27,400/- रू0 का वसूली लंबित सेवान्त लाभो से किया जाय। उक्त निर्णय के विरूद्व श्री चौधरी ने अपने पत्रांक शून्य दिनांक 18.7.14 के द्वारा पूर्णविलोकन अर्जी विभाग में समर्पित किया जिसमें मुख्यतः निम्न बाते कही गयी हैः-

(1) 4x1925 = 7700.00/- (1925/- रूपये क्या है स्पष्ट नहीं है) जबकि एक दिन भी आवास में नहीं रहा। मै दिनांक 28.5.02 में झारखण्ड सरकार में पदस्थापित था। जबकि 29 माह पूर्व से मुजफ्‌फरपुर में कार्यरत बताया गया है। मै दिनांक 16.9.04 को बिहार सरकार में आया हूॅ।

(2) मैं मो0 निजामी से प्रभार लिया इस तरह अध्यक्ष का कार्यभार मेरे जिम्मे आ गया। फिर यह कैसे कहा जा रहा है कि मैं अध्यक्ष नहीं था। मुख्य अभियन्ता का पत्रांक 888 दिनांक 30.3.05 से वरीय अधीक्षण अभियन्ता ही अध्यक्ष एवं संयोजक होते है। जो मैं था।

श्री चौधरी द्वारा समर्पित पूर्णविलोकन अर्जी की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त निम्नांकित तथ्य पाये गयेः-

1. मुख्य अभियन्ता, मुजफ्‌्‌फरपुर के पत्रांक 4636 दिनांक 27.11.04 द्वारा कार्यपालक अभियन्ता, जल निस्सरण अनुसंधान प्रमण्डल, रतवारा को अधीक्षण अभियन्ता, योजना एवं रूपांकण अंचल, मुजफ्‌्‌फरपुर के पदनाम से कर्णाकित आवास खाली कराकर आरोपी श्री चौधरी को हस्तगत करने का आदेश दिया गया। आरोपी पदाधिकारी श्री चौधरी अपने पूर्णविलोकन अर्जी में कार्यपालक अभियन्ता, जल निस्सरण प्रमण्डल, मुजफ्‌्‌फरपुर के पत्रांक 705 दिनांक 2.8.05 के आलोक में उद्वित किया है। कि रतवारा स्थित आवास सं0-बी0-2, दिनांक 2.8.05 के खाली होने की सूचना प्राप्त हुई तथा अधीक्षण अभियन्ता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्‌्‌फरपुर को दिनांक 25.8.05 को प्रभार ग्रहण करने के पश्चात रामदयालु स्थित शिविर के आवास सं0-बी0-1 में आवासित हो गया। परन्तु उक्त पत्र में कार्यपालक अभियन्ता, जल निस्सरण अनुसंधान प्रमण्डल, रतवारा द्वारा श्री चौधरी को रतवारा स्थित कर्णाकित आवास सं0-बी0-1 दिनांक 31.3.05 को खाली होने की ही सूचना देते हुए उक्त आवास की कुॅजी भी इनके आदेशपाल को दिया जा चुका था। परन्तु इनके द्वारा Occupetional Report नहीं देने का उल्लेख है। इससे स्पष्ट है कि आरोपी पदाधिकारी श्री चौधरी को आवास खाली होने की सूचना दिनांक 30.3.05 को हो चुकी थी। फिर भी इनके द्वारा उक्त आवास को अधिग्रहण नहीं किया गया तथा विभागीय पत्रांक 3622 दिनांक 12.08.05 के आलोक में श्री चौधरी द्वारा अधीक्षण अभियन्ता, तिरहुत नहर अंचल, मुजफ्‌्‌फरपुर को दिनांक 25.8.05 को प्रभार ग्रहण किया गया एवं वे रामदयालु स्थिति आवास सं0-बी0-1 में आवासित हो गये। इस प्रकार रतवारा स्थित आवास सं0-बी0-1 दिनांक 14.4.05 से 14.8.05 तक आवास खाली रहा जिसके कारण सरकार को कुल 4x1925 = 7700.00/- रू0 की क्षति हुआ।

2. मुख्य अभियन्ता के पत्रांक 57 दिनांक 9.01.07 से स्पष्ट होता है कि मुजफ्‌्‌फरपुर स्थित सभी आवासों के लिए आवास आवंटित समिति का पुनर्गठन करते हुए श्री चौधरी को आवास आवंटन समिति का अध्यक्ष बनाया गया।3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 7777 जनवर' जनवर' जनवर' जनवर' 2015201520152015 इससे परिलक्षित होता है कि श्री चौधरी दिनांक 6.10.04 से 9.01.07 तक आवास आवंटन समिति का अध्यक्ष नहीं थे। इसके बावजूद इनके द्वारा उक्त अवधि में अनियमित ढ़ंग से आवास आवंटन करने एवं रद्‌द करने का आदेश निर्गत किया गया है। जो विभागीय नियमों के प्रतिकूल था। फलस्वरूप इनके द्वारा अनियमित आवास आवंटित करने तथा रद्‌द करने के कारण सरकार को कुल 19x6300= 1,19,700.00/- रूपये का राजस्व की क्षति उठानी पड़ी जिसके लिए श्री चौधरी को दोषी माना गया।

उपरोक्त तथ्यों के आलोक में श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता से प्राप्त पूर्णविलोकन अर्जी को अस्वीकार करते हुए विभागीय अधिसूचना सं0-891 दिनांक 9.7.14 द्वारा निर्गत दण्डादेश के कंडिका (ii) के अंतिम खण्ड में दिनांक 28.5.02 के स्थान पर दिनांक 6.10.04 संशोधित करते हुए इनके विरूद्व पूर्व में अधिरोपित निम्न दण्ड को बरकरार रखने का निर्णय सरकार के द्वारा लिया गया।

1. 1,27,400/- रूपये की वसूली लंबित सेवान्त लाभो से। उक्त निर्णय श्री संजीवन चौधरी, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता सम्प्रति सेवानिवृत संजय गॅाधी नगर ए0/103 रोड नं0-09, हनुमाननगर, पटना-26 को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, विशेष कार्य पदाधिकारी।

———— अधी,क, सिचवालय मुिणालय,

(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु2ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 59-571+10-ड'0ट'0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 07 January 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-01-07.59/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-01-07.59.