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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 04 February 2015

Published 04 February 2015

Type
Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-02-04.5
Languages
English, Hindi

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िनबंधन सं(cid:8)या पी0ट(cid:15)0-40

(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट(cid:18)बहार गजट

(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत(cid:18)बहार सरकार (cid:24)ारा ूकािशत 15151515 माघमाघमाघमाघ 1931931931936666 ((((शशशश0000)))) सं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)यासं(cid:8)या 05050505 पटनापटनापटनापटना, , , , बुधवारबुधवारबुधवारबुधवार,,,, ———————— 4 4 4 4 फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15)फरवर(cid:15) 2015201520152015 ((((ईईईई0000)))) (cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय(cid:18)वषय----सूचीसूचीसूचीसूची पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-1—िनयु(cid:18)2, पदःथापन, बदली, श(cid:18)2, छु 8ट(cid:15) और अ;य <य(cid:18)2गत सूचनाएं। 2-3 भाग-1-क—ःवयंसेवक गु@मA के समादेंटाओं के आदेश।

---

भाग-1-ख—मैश(cid:15)कु लेशन, आई0ए0, आई0एससी0, बी0ए0, बी0एससी0, एम0ए0, एम0एससी0, लॉ भाग-1 और 2, एम0बी0बी0एस0, बी0एस0ई0, ड(cid:15)प0-इन- एड0, एम0एस0 और मु(cid:8)तार(cid:15) पर(cid:15)Jाओं के पर(cid:15)Jा-फल, कायKबम, छाऽवृ(cid:18)N ूदान, आOद।

---

भाग-1-ग—िशJा संबंधी सूचनाएं, पर(cid:15)Jाफल आOद ---

भाग-2—(cid:18)बहार-राPयपाल और कायाKQयJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम आOद। 4-6 भाग-3—भारत सरकार, पRSम बंगाल सरकार और उUच ;यायालय के आदेश, अिधसूचनाएं और िनयम, 'भारत गजट' और राPय गजटA के उWरण। ---

भाग-4—(cid:18)बहार अिधिनयम ---

पृंठपृंठपृंठपृंठ भाग-5—(cid:18)बहार (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, उ[त (cid:18)वधान मंडल मY उपःथा(cid:18)पत या उपःथा(cid:18)पत Oकये जानेवाले ूवर सिमितयA के ूितवेदन और उ[त (cid:18)वधान मंडल मY पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-7—संसद के अिधिनयम Rजनपर रांशपित क] Pयेंठ अनुमित िमल चुक] है। ---

भाग-8—भारत क] संसद मY पुर:ःथा(cid:18)पत (cid:18)वधेयक, संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के ूितवेदन और संसद मY उपःथा(cid:18)पत ूवर सिमितयA के ूितवेदन और संसद मY पुर:ःथापन के पूवK ूकािशत (cid:18)वधेयक। ---

भाग-9—(cid:18)व_ापन

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भाग-9-क—वन (cid:18)वभाग क] नीलामी संबंधी सूचनाएं ---

भाग-9-ख—िन(cid:18)वदा सूचनाएं, प`रवहन सूचनाएं, ;यायालय सूचनाएं और सवKसाधारण सूचनाएं इaयाOद। ---

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पूरक

पूरक-क 7-252 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015

भागभागभागभाग----1111

िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2िनयु(cid:18)2, , , , पदःथापदःथापदःथापदःथापनपनपनपन, , , , बदलीबदलीबदलीबदली, , , , श(cid:18)2श(cid:18)2श(cid:18)2श(cid:18)2, , , , छु 8ट(cid:15) और अन ् छु 8ट(cid:15) और अन ् छु 8ट(cid:15) और अन ् छु 8ट(cid:15) और अन ्यययय वैय(cid:18)2क सूचनाएंवैय(cid:18)2क सूचनाएंवैय(cid:18)2क सूचनाएंवैय(cid:18)2क सूचनाएं ÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑÑ

गृह विभागगृह विभागगृह विभागगृह विभाग (अभियोजन निदेषालय) (अभियोजन निदेषालय) (अभियोजन निदेषालय) (अभियोजन निदेषालय) ——— अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचना 20 जनवरी 201520 जनवरी 201520 जनवरी 201520 जनवरी 2015

सं0 अ0नि0(01) 30/2014/स्था0.66—बिहार अभियोजन सेवा के निम्नलिखित सहायक अभियोजन पदाधिकारियों को प्रषासनिक एवं चिकित्सीय आधार पर स्थानान्तरित करते हुए उनके नाम के सामने स्तम्भ-4 में अंकित कार्यालय में अगले आदेष तक के लिए पदस्थापित किया जाता हैः-

क्र क्र.... क्र क्र अभियोजन पदाधिकारी अभियोजन पदाधिकारी का नाम/पदनाम वर्तमान पदस्थापन कार्यालय का नाम नव पदस्थापन कार्यालय का नाम
1 2 3 4
1 श्री सत्यजीत सहायक अभियोजन पदाधिकारी जिला अभियोजन कार्यालय, अररिया सिपाही प्रषिक्षण विद्यालय, नाथनगर, भागलपुर
2 श्री घनष्याम शुक्ला सहायक अभियोजन पदाधिकारी जिला अभियोजन कार्यालय, भागलपुर जिला अभियोजन कार्यालय, पटना।

किया गया है, अतः उन्हें स्थानान्तरण यात्रा भत्ता देय नहीं होगा।

बिहार-राज्यपाल के आदेष से, कृष्ण मुरारी प्रसाद, अवर सचिव।

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पर्यावरण एवं वन विभाग

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अधिसूचना

20 जनवरी 2015

सं॰ वन विक्रय-34/11-201/प०व०—सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या 1368, दिनांक 14.05.08 से वन अंचलों का पुनर्गठन किया गया है तथा ज्ञापांक 3290, दिनांक 12.09.2013 से वन प्रमंडलों का पुनर्गठन करते हुए छः नये वन प्रमंडलों का सृजन किया गया है। जिसके फलस्वरूप नये सिरे से बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम 1990 के तहत्‌ विहित पदाधिकारी घोषित करने की आवश्यकता है।

2. उपर्युक्त परिपेक्ष्य में इस संबंध में पूर्व में निर्गत सभी आदेशों को अवक्रमित करते हुए बिहार काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1990 (बिहार अधिनियम, 19,1990) की धारा 4 की उप-धारा (1) एवं (2) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य के निम्नलिखित वन संरक्षकों को विहित पदाधिकारी घोषित किया जाता है :- क्र०सं० पदाधिकारी का नाम कार्यक्षेत्र

क्र०सं० पदाधिकारी का नाम कार्यक्षेत्र
1 2 3
1 वन संरक्षक, पटना अंचल, पटना पटना, नालंदा एवं भोजपुर वन प्रमंडल।
2 वन संरक्षक, मुजफ्फरपुर अंचल, मुजफ्फरपुर । तिरहुत वन प्रमंडल, मुजफ्फरपुर/मिथिला वन प्रमंडल, दरभंगा/ बेगूसराय वन प्रमंडल/सीतामढ़ी वन प्रमंडल/समस्तीपुर वन प्रमंडल।
3 वन संरक्षक, गया अंचल, गया गया, औरंगाबाद एवं नवादा वन प्रमंडल।
4 वन संरक्षक, सीवान अंचल, सीवान सारण वन प्रमंडल, छपरा/गोपालगंज वन प्रमंडल/मोतीहारी वन प्रमंडल/वैशाली वन प्रमंडल।
5 वन संरक्षक, भागलपुर अंचल, भागलपुर बाँका, भागलपुर एवं जमुई वन प्रमंडल।
6 वन संरक्षक, पूर्णियाँ अंचल, पूर्णियाँ पूर्णियाँ/अररिया/सहरसा एवं सुपौल वन प्रमंडल।
7 वन संरक्षक, वन्यजीव अंचल, पटना रोहतास, कैमूर एवं मु गेर वन प्रमंडल। ं
8 वन संरक्षक-सह-़क्षेत्र निदेशक, वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना अंचल, बेतिया। बेतिया वन प्रमंडल, बाल्मीकि ब्याघ्र परियोजना प्रमंडल I एवं II
3 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, विवेक कुमार सिंह, प्रधान सचिव।

——— उद्योग विभागउद्योग विभागउद्योग विभागउद्योग विभाग ——— अधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाअधिसूचनाएंएंएंएं 7 जनवरी 20157 जनवरी 20157 जनवरी 20157 जनवरी 2015 सं॰ 3/उ०स्था०(जन शिकायत)1/12-77—श्री ब्रजनन्दन प्रसाद, संयुक्त उद्योग निदेशक, तकनीकी विकास निदेशालय, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, पटना के रूप में कार्य करने हेतु अगले आदेश तक प्राधिकृत किया जाता है। 2. विभागीय अधिसूचना संख्या-4162 दिनांक 19-09-13 को विलोपित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव।

——— 9 जनवरी 20159 जनवरी 20159 जनवरी 20159 जनवरी 2015 सं॰ 3(स०)/उ०स्था०(विविध)39/2008-153—श्रीमती सरिता चौधरी, अपर निदेशक(तकनीकी), तकनीकी विकास निदेशालय, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को अपने कार्यों के अतिरिक्त हस्तकरघा एवं रेशम निदेशालय, बिहार, पटना में कार्य करने हेतु प्रतिनियुक्त किया जाता है। 2. प्रस्ताव में विभागीय मंत्री का अनुमोदन प्राप्त है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव।

——— 15151515 जनवरी 2015जनवरी 2015जनवरी 2015जनवरी 2015 सं॰ 3(स०)/उ0स्था0(पदस्थापन)07/14-205 श्री श्याम नारायण राम, प्रभारी उप उद्योग निदेशक, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को उद्योग निदेशालय, बिहार, पटना में पदस्थापित किया जाता है। श्री राम अपने कार्यों के अतिरिक्त बिहार राज्य साख एवं विनियोग निगम लिमिटेड, पटना में आवंटित कार्य का भी निष्पादन करेंगे। श्री राम के वेतनादि का भुगतान उद्योग निदेशालय, बिहार, पटना द्वारा किया जायेगा। सं॰ 3(स०)/उ0स्था0(पदस्थापन)07/14-206 श्री राघवेन्द्र नारायण, उप उद्योग निदेशक, उद्योग विभाग, बिहार, पटना को उद्योग निदेशालय, बिहार, पटना में पदस्थापित किया जाता है। श्री राघवेन्द्र नारायण अपने कार्यों के अतिरिक्त बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड, पटना में आवंटित कार्य का भी निष्पादन करेंगे। इनके वेतनादि का भुगतान उद्योग निदेशालय, बिहार, पटना से किया जायेगा। सं॰ 3(स०)/उ0स्था0(पदस्थापन)07/14-207 श्री मनोज रंजन श्रीवास्तव, परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, अरवल को स्थानान्तरित करते हुए प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, सिवान के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं॰ 3(स०)/उ0स्था0(पदस्थापन)07/14-208 श्री रंजन कुमार सिन्हा, परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, सिवान अतिरिक्त प्रभार प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, सिवान को स्थानान्तरित करते हुए प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, बक्सर के पद पर पदस्थापित किया जाता है। सं॰ 3(स०)/उ0स्था0(पदस्थापन)07/14-209 श्री सुनीत कुमार मिश्र, परियोजना प्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, वैशाली(हाजीपुर) को प्रभारी महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, वैशाली(हाजीपुर) का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है। बिहार-राज्यपाल के आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, उप-सचिव।

——— अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

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Website: http://egazette.bih.nic.in

4 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015

भागभागभागभाग----2222

(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार(cid:18)बहार----राPयराPयराPयराPयपाल और कायाKQयपाल और कायाKQयपाल और कायाKQयपाल और कायाKQयJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयमJA (cid:24)ारा िनकाले गये (cid:18)विनयम, , , , आदेशआदेशआदेशआदेश, , , , अिधअिधअिधअिधसूचनाएं और िनयम आOद।सूचनाएं और िनयम आOद।सूचनाएं और िनयम आOद।सूचनाएं और िनयम आOद।

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कृषि विभाग

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अधिसूचना

11 सितम्बर 2014

सं॰ 7/विविध-.एन0एम0एस0ए0-26/2014-676—बिहार राज्य में राष्ट्रीय संधारणीय कृषि मिशन (National Mission for Sustainable Agriculture) का कार्यान्वयन विाीय वर्ष 2014-15 से प्रारंभ किया जाना है। इसमें कुल चार घटक योजनाएँ यथा (i)Rainfed Area Development (ii) On Farm Water Management (iii) Soil Health Management & (iv) Climate Change and Sustainable Agriculture- monitoring, modeling and networking सम्मिलित है। इस योजना अन्तर्गत कृषि एवं संबंद्ध क्षेत्रों यथा उद्यान, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य,सहकारिता आदि से संबंधित कार्यक्रमों को समेकित रूप से कार्यान्वित किया जाना है।

योजना कार्यान्वयन हेतु भारत सरकार से प्राप्त मार्गदर्शिका के आलोक में योजनाओं के निर्माण, स्वीकृति, कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण हेतु राज्य एवं जिला स्तर पर कमिटी का गठन किया जाना है। मार्गदर्शिका में अंकित दिशा-निर्देश के आलोक में सरकार द्वारा उक्त योजनान्तर्गत राज्य एवं जिला स्तर पर कमिटि गठन का निर्णय लिया गया है जिसकी संरचना निम्न प्रकार से होगीः-

(क)(क)(क)(क) मार्गदर्षिका की कंडिका 5.2 के आलोक में राज्यस्तरीय कमिटी की संरचना निम्न प्रकार से होगी :-

- अध्यक्ष 1. कृृषि उत्पादन आयुक्त 2. प्रधान सचिव/सचिव, कृृषि विभाग - सदस्य 3. प्रधान सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग - सदस्य 4. प्रधान सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधान विभाग - सदस्य 5. प्रधान सचिव, वन एवं पर्यावरण विभाग - सदस्य 6. प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग - सदस्य 7. प्रधान सचिव, सहकारिता विभाग - सदस्य 8. प्रधान सचिव, लघु सिंचाई - सदस्य 9. मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, एस॰एल॰एन॰ए॰(डब्लू॰डी॰डी॰), बिहार - सदस्य 10. कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर - सदस्य 11. कुलपति, राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर - सदस्य 12. निदेशक, आई॰सी॰ए॰आर॰ - आर॰सी॰ई॰आर॰, पटना - सदस्य 13. निदेशक, चावल अनुसंधान एवं विकास संस्थान, पटना - सदस्य 14. कृृषि निदेशक 15. निदेशक उद्यान 16. निदेशक, भूमि सरंक्षण

- सदस्य सचिव - सह-सदस्य सचिव - सदस्य कृृषि उत्पादन आयुक्त की अनुपस्थिति में प्रधान सचिव/सचिव, कृषि द्वारा बैठक की अध्यक्षता किया जाएगा। राज्य स्तरीय कमिटी योजना परिचालन हेतु निर्गत मार्गदर्शिका के आलोक में राज्य स्तर पर योजना की स्वीकृृति, कार्यान्वयन एवं अनुश्रवन का कार्य करेगी तथा इसमें स्टेट स्टैडिंग टेक्नीकल कमिटि से आवश्यकता अनुसार सहायोग प्राप्त करेगी।

(ख)(ख)(ख)(ख) राज्य के योजना निर्माण एवं कार्यान्वयन में आवश्यक तकनिकी सहयोग/सुझाव प्रदान करने हेतु कृृषि निदेशक-सह-मिशन निदेशक की अघ्यक्षता में विशेषज्ञों की एक स्टेट स्टैंडिग टेक्नीकल कमिटी का गठन किया जाता है। इसमें राज्य कृृषि विश्वविद्यालयों सहित अन्य कृषि संस्थानों के विशेषज्ञ होंगे जिसका विवरण निम्न प्रकार हैः-

1. राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर। 2. बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर। 3. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पूर्वी क्षेत्र, पटना।5 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 4. बी0 आई0 एस0 ए0 पूसा, समस्तीपुर। 5. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर। 6. राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र, दरभंगा। 7. मक्का अनुसंधान निदेशालय, बेगुसराय। 8. चावल विकास निदेशालय, कृृषि मंत्रालय, भारत सरकार, पटना।

स्टेट स्टैंडिग टेक्नीकल कमिटी में राज्य के उपर्युक्त कृषि विष्वविद्यालयों/संस्थानों से संबंधित विषय के विषेषज्ञ इस योजना में आवष्यक तकनीकि सहयोग प्रदान करेंगे। इसके लिए संबंधित संस्थानों के प्रधान विशेषज्ञों को नामित कर कृषि विभाग को संसूचित करेगें।

(ग)(ग)(ग)(ग) मार्गदर्षिका के कंडिका 5.3 के आलोक में जिला स्तर पर योजना निर्माण, कार्यान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए जिला पदाधिकारी की अघ्यक्षता में जिला स्तर पर District Mission Commitee कार्य करेगी। जिसकी संरचना निम्न प्रकार होगीः-

1. जिला पदाधिकारी - अध्यक्ष 2. उप विकास आयुक्त - सदस्य 3. जिला कृषि पदाधिकारी - सदस्य सचिव 4. जिला पशुपालन पदाधिकारी - सदस्य 5. परियोजना निदेशक, आत्मा - सदस्य 6. जिला सहकारिता पदाधिकारी - सदस्य 7. जिला उद्यान पदाधिकारी - सदस्य 8. कार्यपालक अभियंता, विद्युत - सदस्य 9. कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई - सदस्य 10. जिला मत्स्य पदाधिकारी - सदस्य 11. जिला गव्य विकास पदाधिकारी - सदस्य 12. उप निदेशक (भू॰स॰)/जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी - सदस्य 13. अवर वन प्रमंडल पदाधिकारी - सदस्य 14. कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी पदाधिकारी - सदस्य 15. जिला प्रबन्धक, नाबार्ड - सदस्य 16. जिला अग्रणी बैंक प्रबन्धक - सदस्य 17. स्वयं सहायता समूह के प्रतिनिधि - सदस्य 18. उत्पादक समूह के प्रतिनिधि - सदस्य 19. एन॰जी॰ओ॰ के प्रतिनिधि - सदस्य जिला मिशन कमिटि मेें स्वयं सहायता समूह, उत्पादक समूह एवं एन॰जी॰ओ॰ के दो-दो प्रतिनिधि रखें जाऐंगे। संस्थाओं/प्रतिनिधियों का चयन जिला स्तरीय मिशन कमिटि के अध्यक्ष जिला पदाधिकारी द्वारा किया जायेगा। यह आदेश तत्कालिक प्रभाव से प्रभावी होगा। राज्य स्तरीय कमिटि की बैठक आवश्यकतानुसार आयोजित की जाएगी। स्टेट स्टैंडिग टेक्नीकल कमिटी की बैठक तीन माह में कम-से-कम एक बार आवश्य बुलाई जाएगी।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, अमृत लाल मीणा, प्रधान सचिव।

——— गृह विभाग (अभियोजन निदेशालय ——— शुद्धि-पत्र 5 जनवरी 2015 सं॰ अ॰नि॰(01) 28/2011/स्था॰-1128—विभागीय अधिसूचना संख्या 965, दिनांक 27.10.2014 के क्रमांक 11 पर अंकित श्री मो॰ शाहिद इकराम, सहायक अभियोजन पदाधिकारी के नाम के सामने स्तम्भ-4 में अंकित वर्त्तमान पदस्थापन स्थान ''जिला अभियोजन कार्यालय, बेगुसराय'' के स्थान पर ''जिला अभियोजन कार्यालय, कटिहार'' तथा क्रमांक 12 पर अंकित नाम श्री संजय कुमार कर्ण, सहायक अभियोजन पदाधिकारी के नाम के सामने स्तम्भ-4 में अंकित वर्त्तमान पदस्थापन कार्यालय ''जिला अभियोजन कार्यालय, मुजफ्फरपुर (प॰)'' के स्थान पर ''अनुमंडल अभियोजन कार्यालय मुजफ्फरपुर (प॰)'' पढ़ा जाए।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, कृष्ण मुरारी प्रसाद, अवर सचिव।6 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 सामान्य प्रशासन विभाग

——— शुद्धि-पत्र 5 जनवरी 2015 सं॰ 08/आरोप-01-06/2014-174-सा॰प्र॰—श्री प्रभात कुमार झा, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-966/11) तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, गया-सह-जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अरवल (सम्प्रति प्रभारी पदाधिकारी, जिला मध्याह्‌न भोजन योजना, सारण) के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के संचालन हेतु निर्गत संकल्प ज्ञापांक-16753, दिनांक 05.12.2014 की प्रथम कंडिका में अंकित ''जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक-165, दिनांक 05.03.2014'' के स्थान पर ''जिला पदाधिकारी, अरवल के पत्रांक-165, दिनांक 05.03.2014'' एवं द्वितीय कंडिका में अंकित ''उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, गया द्वारा मनोनीत पदाधिकारी होंगे'' के स्थान पर ''उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, अरवल द्वारा मनोनीत पदाधिकारी होंगे'' पढ़ा जाय। शेष यथावत्‌ रहेंगे।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि विभागीय संकल्प ज्ञापांक-16753, दिनांक 05.12.2014 के क्रम में इस शुद्धि-पत्र की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, अपर सचिव।

——— अधीJकअधीJकअधीJकअधीJक, , , , सिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालयसिचवालय मुिणालय,,,,

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Website: http://egazette.bih.nic.in

7

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समाहरणालय, कटिहार (स्थापना प्रशाखा) ——— आदेश 5 मई 2014 सं॰ 571—अंचल पदाधिकारी, बारसोई के पत्रांक-639, दिनांक 23.05.2013 द्वारा प्रतिवेदन प्राप्त हुआ कि श्री अरूण कुमार वैद्य, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, बारसोई, जिला कटिहार को आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के पुलिस उपाधीक्षक द्वारा दिनांक 22.05.2013 को रिष्वत लेते पकड़े जाने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। तद्‌ोपरान्त इन्हें आदेष संख्या-720/स्था॰, दिनांक 29.05.2013 द्वारा निलंबित किया गया। कारागार से छूटने के पश्चात्‌ श्री वैद्य द्वारा दिनांक 21.10.2013 को अंचल कार्यालय, बारसोई में योगदान दिया गया। उनके योगदान को स्वीकृत कर कार्यालय आदेष ज्ञापांक-1643/स्था॰, दिनांक 04.12.2013 द्वारा निलंबंन से मुक्त करते हुए बारसोई अंचल से स्थानान्तरित करते हुए मनिहारी अंचल में पदस्थापित किया गया तथा विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु अंचल पदाधिकारी, बारसोई से अनुमण्डल पदाधिकारी के माध्यम से आरोप प्रपत्र 'क' की मांग किया गया। अनुमण्डल पदाधिकारी, बारसोई के पत्र संख्या-108, दिनांक 24.01.2014 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु आरोप प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ तथा इस कार्यालय के आदेष संख्या-118/स्था॰, दिनांक 30.01.2014 द्वारा इन्हे पुनः निलंबित कर इनका मुख्यालय अंचल कार्यालय, अमदाबाद निर्धारित किया गया। विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु अपर समाहर्त्ता, कटिहार को संचालन पदाधिकारी तथा अंचल पदाधिकारी, बारसोई को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया। संचालन पदाधिकारी-सह- अपर समाहर्त्ता, कटिहार के पत्र संख्या-141, दिनांक 06.03.2014 द्वारा संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है जिसके अनुसार आरोप प्रमाणित होते हैं। श्री अरूण कुमार वैद्य, राजस्व कर्मचारी के विरूद्ध गठित आरोप, आरोपी कर्मी का स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य की संक्षिप्त विवरणी निम्नवत्‌ है :-

गठित आरोप का विवरण :- 1. दिनांक 22.05.2013 को 11ः55 बजे पूर्वाह्‌न में हल्का कचहरी रघुनाथपुर में मो0 18,000.00 रूपये रिष्वत लेते हुए पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के द्वारा आपको पकड़ा गया तथा गिरफ्तार कर पटना ले जाया गया। आपका यह कृत्य सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम 03 के विरूद्ध है। Prevention of Corruption Act 1981 के Rule 13 के तहत न्यायालय में विचाराधीन है।


  1. आपके द्वारा वर्ष 2013-14 में दिनांक 20.04.2013 को एक जिल्द लगान रसीद-बही एवं दिनांक 11.05.2013 को 05 जिल्द लगान रसीद-बही अंचल नजारत से प्राप्त किया जिसके विरूद्ध गिरफ्तारी के पूर्व 21.05.2013 तक भू-लगान वसूली की राषि अंचल नजारत में जमा नहीं किया गया। कारागार से छूटने के बाद दिनांक 09.12.2013 को एकमुष्त 80,463. 00 रूपये अंचल नजारत में जमा किया गया जिसका नाजिर रसीद संख्या 267342, दिनांक 09.12.2013 है। इस प्रकार आपके द्वारा भू-लगान की राषि का निजी स्वार्थ में उपयोग किया गया है। भू-लगान वसूली की राषि वसूल कर अत्याधिक अवधि ↩
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(cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 तक अपने पास रखना अस्थायी गबन है। यह कार्य सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 03 के विरूद्ध कदाचार की श्रेणी में आता है।

3. आपको हल्का नम्बर 02 अन्तर्गत वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 में नामान्तरण आदेष के पश्चात्‌ शुद्धि पत्र जमाबन्दी सृजन एवं लगान रसीद निर्गत करने हेतु प्राप्त कराये गये थे तथा एक सप्ताह में अनुपालन सुनिष्चित कर शुद्धि पत्रों पर जमाबन्दी दर्ज कर कार्यालय को वापस करना था किन्तु आपने ऐसा नहीं किया जो आपकी स्वेच्छाचारिता, नियमों की जानबूझ कर की गई अवहेलना है जो कदाचार की श्रेणी में आती है। संलग्न साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आपके द्वारा कार्यो को जानबूझ कर लंबित रखकार रैयतो से नाजायज राषि लेकर ही जमाबन्दी सृजन की कार्रवाई करने में रूचि रखते हैं। आरोपी का स्पष्टीकरण :- 1. आरोपी का कथन है कि उनके विरूद्ध लगाये गये रिष्वत लेने का आरोप पूर्णरूप से निराधार एवं मनगढ़ंत है, जो कि एक स्थानीय विचौलिया मो0 शमीम अख्तर, साकिन रघुनाथपुर, थाना बारसोई, जिला कटिहार द्वारा रचाया हुआ षडयंत्र है, जो पूर्व से मुझे गलत कार्य जैसे भू-हदबन्दी एवं भू-बन्दोबस्ती भूमि का नामान्तरण हेतु दबाव डालते थे। मेरे द्वारा उक्त कार्य नहीं करने के कारण पूर्व में मुझे सबक सिखाने एवं हल्का नम्बर 02 से हल्का कर्मचारी के पद से पदच्युत के उद्येष्य से साजिष कर कुछ अपराधी किस्म के व्यक्तियों के साथ में लेकर दिनांक 22.05.2013 को करीब 11ः30 बजे पूवाह्‌न में रूपये लेकर जबरदस्ती जान मारने की भय दिखाकर मेरे हाथ में देने का प्रयास किया जिसका मैने विरोध करते हुए रूपये को टेबूल पर फेंक दिया तथा उसी क्रम में बाता-बाती हो रही थी कि कुछ अज्ञात व्यक्ति कचहरी में प्रवेष किये तथा पकड़कर कहा कि मैं आर्थिक अपराध इकाई का पुलिस हूँ और मुझे कुछ कहने का अवसर नहीं दिया और मुझे गिरफ्तार कर पटना लेकर चले गये जबकि मैं सरासर निर्दोष एवं बेगुनाह हूँ मेरे द्वारा किसी प्रकार का रिष्वत नहीं लिया गया। 2. आरोपी का कथन है कि वर्ष 2013-14 में कार्यालय से कुल 05 जिल्द भू-लगान रसीद बही प्राप्त किया। उक्त रसीद बही से दिनांक 06.05.2013 से 20.05.2013 तक वसूली किया। कार्यो के अधिता के कारण 03 क एवं 03 क क का सत्यापन प्रभारी अंचल निरीक्षक से नहीं कराने के कारण वसूली की गई राषि नजारत में जमा नहीं कियाजा सका। सामान्यतः माह के अन्तिम में वसूली की गई राषि जमा किया जाता रहा है परन्तु दिनांक 22.05.2013 को गिरफ्तार होने के कारण इस माह के अन्त में वसूल की गई राषि जमा नहीं किया जा सका और कारा से मुक्त होते ही प्रभारी अंचल निरीक्षक से 03 क एवं 03 क क का सत्यापन के पश्चात्‌ मेरे द्वारा वसूली की गई राषि एक मुष्त नजारत में जमा कर दिया गया। इस प्रकार मेरे द्वारा ना ही वसूली की गई राषि का व्यक्तिगत स्वार्थ पूरा किया गया और ना ही अस्थायी गबन किया गया। 3. आरोपी का कथन है कि उनके कार्यकाल में जितने भी नामान्तरण वाद का निष्पादन कराया गया, शुद्धि पत्र के आलोक में ससमय जमाबन्दी खोलकर शुद्धि पत्र में जमाबन्दी संख्या ससमय दर्ज किया गया एवं शुद्धि पत्र की प्रति रक्षि संचिका में संधारित कर दिया गया जिसकी पूष्टि जमाबन्दी एवं शुद्धि पत्र एवं रक्षि संचिका को मंगवाकर भवदीय के द्वारा अवलोकन किया जा सकता है। जहॉ तक मुझपर शुद्धि पत्र कार्यालय को वापस करने की बात है किसी कर्मचारी के द्वारा बारसोई अंचल में वापस नहीं किया जाता रहा है। उपरोक्त तथ्यों एवं स्थितियों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए मेरे उपर लगाये गये सभी आरोपों को मनगढ़ंत एवं द्वेषपूर्ण भवना से आरोप माना जाय, जो सरासर बेबुनियाद एवं निराधार है। अतः श्रीमान्‌ से सादर अनुरोध है कि मेरे उपर लगाये गये सभी बेबुनियाद आरोपों से मुक्त करने की महती कृपा की जाय। इसके लिये मैं श्रीमान्‌ का सदा कृत्यज्ञ रहूँगा।

संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- 1. नियुक्ति प्राधिकार द्वारा संलग्न किये गये अंचलाधिकारी बारसोई के पत्र संख्या 639, दिनांक 23.05.2013 से इस बात की पूष्टि होती है कि श्री वैद्य 18000.00 रूपये रिष्वत लेते हुए पकड़े गये और आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना द्वारा पटना ले जाया गया। आरोपी के द्वारा समर्पित कारण पृच्छा दिनांक 15.02.2014 में इस बात का उल्लेख है कि एक शमीम अख्तर नाम का स्थानीय विचौलिये ने बदले की भावना से कुछ लोगों के साथ अपराधिक षडयंत्र कर उनके हाथ में रूपये देने का प्रयास किया और विरोध करने पर रूपये टेबूल पर फेक दिया। इसी क्रम में आर्थिक अपराध इकाई के पुलिस द्वारा उन्हे गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होने रिष्वत लेने की बात को अस्वीकार किया है। उपर्युक्त बात से इस बात की पुष्टि होती है कि श्री वैद्य दिनांक 22.05.2013 को आर्थिक अपराध इकाई द्वारा कथित रूप से 18000.00 रूपये के साथ गिरफ्तार किये गये । इस मामले में आरोप पत्र के साथ अन्य कागजात नियुक्ति प्राधिकार द्वारा संलग्न नहीं किया गया है। 2. आरोपी ने स्वीकार किया है कि उन्होने दिनांक 06.05.2013 से 20.05.2013 तक की लगान वसूली की राषि मो0 80,463.00 रूपये, चूंकि दिनांक 22.05.2013 को जेल जाने के कारण जमा नहीं कर पाये। जेल से छूटने के पश्चात्‌ उसने इस राषि को अंचल नजारत में जमा किया था। नियमानुसार हल्का कर्मचारी को अपने जिम्मे 500 रूपये से अधिक राजस्व वसूली की राषि नहीं रखनी है बल्कि उसे साप्ताहिक या प्रत्येक दिन राषि की मात्रा के अनुसार अंचल नजारत में जमा करना अनिवार्य है। अर्थात एक बड़ी राषि के रूप में मो0 80,463.00 रूपये को ससमय पर नहीं जमा करने के कारण निजी उपयोग में लाना अस्थायी गबन का मामला प्रमाणित होता है।

3. आरोपी ने अपने कारण पृच्छा में निष्पादित नामान्तरण वाद में निर्गत एवं प्राप्त शुद्धि पत्रों के आलोक में ससमय जमाबन्दी खोलकर एवं शुद्धि पत्रमें जमाबन्दी पत्र संख्या ससमय दर्ज कर अंचल कार्यालय को वापस किये जाने के संबंध में किसी प्रकार का उल्लेख अपने कारण पृच्छा में नहीं किया है।

इसी क्रम में साक्ष्य के तौर पर वर्ष 2012-13 के नामान्तरण वाद संख्या 623, 943, 944, 945, 947, 949,950, 951 एवं 952 में पारित आदेष एवं शुद्धि पत्र की छाया पत्र का अवलोकन किया गया जो आरोप संख्या 03 के मुख्य अंष है। संबंधित नामान्तरण अभिलेखों के आदेष फलकों के अवलोकन से यह बात स्पष्ट है कि दिनांक 20.05.2013 तक श्री वैद्य द्वारा9 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 आवष्यक कार्रवाई के पश्चात शुद्धि पत्र वापस नहीं किया गया जबकि ये शुद्धि पत्र उन्हे दिनांक 07.06.2012 को ही अंचलाधिकारी, बारसोई द्वारा प्राप्त कराया गय था। अर्थात करीब एक वर्ष तक शुद्धि पत्र पर श्री वैद्य द्वारा कार्रवाई नहीं करने का आरोप प्रमाणित है।

सम्यक समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री वैद्य के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में लगाये गये सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया है एवं उन्हे एक लापरवाह, स्वेच्छाचारी एवं Improper Behaviour With Wrongfull Intention के लिये दोषी पा कर उनके आचरण को ''Misconduct" की श्रेणी रखा है।

संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की समीक्षा के पश्चात आरोपी श्री वैद्य को बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (यथा संषोधित) के नियम 14 के खण्ड (vi) से (xi) में विनिदृष्ट शास्तियों में से कोई अधिरोपित किये जाने योग्य मानकर कार्यालय ज्ञापांक संख्या-483/स्था0, दिनांक 20.03.2014 द्वारा उन्हे पुनः अभ्यावेदन करने का अवसर प्रदान किया गया। दिनांक 11.04.2014 को समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा, अभिलेख में संलग्न कागजातों के आलोक में की गई अभ्यावेदन में उल्लिखित बातें अभिप्रमाणित तथ्य/साक्ष्य विहीन एवं पूर्व के कथन को पुनरावृति मात्र है। आरोपी ऐसा कोई ठोस साक्ष्य/तथ्य प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे कि उनपर लगाये गये आरोप प्रमाणित न हो। अस्तु मेंरा अभिमत है कि आरोपी अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति अनिष्ठावान, लापरवाह, स्वेच्छाचारी पाये गये है तथा भ्रष्ट आचरण करते हुए सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3 के प्रावधानों के प्रतिकूल कार्य किया है। इसके अतिरिक्त वे Improper Behaviour With Wrongfull Intention के लिये भी दोषी पाये गये हैं, जो कदाचार की श्रेणी में आता है।

अतः श्री अरूण कुमार वैद्य, राजस्व कर्मचारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों से पूर्णतः सहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 (यथा संषोधित-2007) के नियम 14 (11) के अनुरूप मैं प्रकाष कुमार, भा0प्र0से0, समाहर्त्ता-सह-अनुषासनिक प्राधिकार, कटिहार श्री अरूण कुमार वैद्य, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, बारसोई सम्प्रति अंचल कार्यालय, मनिहारी, जिला कटिहार को उक्त नियमावली नियम 18(6) में निहित शक्तियों के आलोक में आदेष निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्त (DISMISS) करता हूँ।

श्री अरूण कुमार वैद्य, राजस्व कर्मचारी से संबंधित विवरणी निम्न प्रकार है :-

1. नाम ः- श्री अरूण कुमार वैद्य 2. पिता का नाम ः- तालेवर वैद्य 3. पदनाम ः- राजस्व कर्मचारी 4. जन्म तिथि ः- 04.01.1968 5. नियुक्ति की तिथि ः- 30.05.2000 6. वेतनमान ः- 5200-20200, ग्रेड पे-2400 7. स्थायी पता ः- ग्राम-निझरा, पो0-सोनाली, थाना-कदवा, जिला-कटिहार आदेष का तामिला स्थायी पता पर भी सुनिष्चित कराया जाय।

आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, समार्हर्त्ता

——— 16 जून 2014 सं॰ 793—अनुमण्डल पदाधिकारी, कटिहार के पत्रांक-154/सा0, दिनांक 03.02.2014 द्वारा श्री पुष्पेष कुमार सिंह, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, बरारी के विरूद्ध आरोप प्रपत्र ''क'' प्राप्त हुआ है। श्री सिंह पर जमाबन्दी कायम करने, रसीद काटने के एवज में रिष्वत की मांग किये जाने तथा राषि नहीं देने के कारण उसे महीनों तक लटकाकर रखने, दलाल श्री विजय रविदास से रसीद भरने का काम कराने आदि गंभीर आरोप के आलोक में इस कार्यालय का आदेष 136/स्था0, दिनांक 03.02.2014 द्वारा इन्हे निलंबित करते हुए इनका मुख्यालय अंचल कार्यालय, फलका निर्धारित किया गया तथा विभागीय संचालन हेतु अनुमण्डल पदाधिकारी, कटिहार को संचालन पदाधिकारी एवं अंचल पदाधिकारी, बरारी को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया । संचालन पदाधिकारी, कटिहार के पत्रांक-569, दिनांक 26.05.2014 द्वारा संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है, जिसका सारांष निम्न प्रकार है :-

गठित आरोप का विवरण :- 1. मो0 शरीफूल हक के द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, भागलपुर को दिये गये आवेदन पत्र जिसमें उन्होने आरोप लगाया था कि अंचलाधिकारी, बरारी द्वारा नामान्तरण शुद्धि पत्र निर्गत किये जाने के पष्चात्‌ आपके द्वारा जमाबन्दी कायम करने, रसीद काटने के एवज में 50,000.00 रूपये रिष्वत की मांग की जा रही थी। आवेदक द्वारा रिष्वत नहीं दिये जाने के कारण आपने उसे महीनों तक लटका रखा। तत्‌पष्चात आपके दलाल विजय रविदास, बरारी जो रसीद भरने का काम करते थे, निगरानी विभाग द्वारा दिनांक 21.07.2013 को रंगे हाथ 30,000.00 रूपये रिष्वत की राषि एवं 31,400.00 रूपये अतिरिक्त राषि बरामद की गई, किन्तु आप फरार हो गये। इसके पष्चात्‌ दिनांक 22.07.2013 से 27.07.2013 तक तबीयत खराब हो जाने के कारण आकस्मिक अवकाष स्वीकृत कराने के उपरान्त अवकाष में चले गये। पुनः दिनांक 27.07.2013 से 04.08.2013 तक अवकाष का विस्तार आवेदन अंचलाधिकारी, बरारी को भेजा । इसके पष्चात्‌ दिनांक 05.08.2013 से रूग्न अवकाष में10 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 जाने हेतु आवेदन पत्र अंचलाधिकारी, बरारी को डाक से भेजे गये किन्तु अभी तक आप अपने कर्त्तव्य पर उपस्थित नहीं हुए हैं और न ही किसी प्रकार की सूचना भेजी है, जिसके कारण हल्का नम्बर-09 का कार्य पूर्णतः बाधित रहा। आपने अवकाष विस्तार हेतु दिये गये आवेदन पत्र के साथ किसी प्रकार का चिकित्सीय प्रमाण पत्र संलग्न नहीं किया है, इससे प्रतीत होता है कि आप (प्राथमिकी अभियुक्त) निगरानी विभाग की गिरफ्तारी से बचने हेतु फरार है। अंचल पदाघिकारी, बरारी ने पत्र संख्या-1007, दिनांक 08.08.2013 द्वारा आपसे चिकित्सा प्रमाण पत्र की मांग की, आने आज तक प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया।

2. नामान्तरण वाद संख्या-856/2012-13, 1079/2012-13, 1080/2012-13, 1081/2012-13, 1082/ 2012-13, 1083/2012-13 एवं 1084/2012-13 में अंचलाधिकारी, बरारी द्वारा दिनांक 05.03.2013 को नामान्तरण की स्वीकृति दी गई किन्तु आपने छः माह के बाद जमाबन्दी कायम कर इसकी सूचना के साथ शुद्धि पत्र कार्याल को वापस किया। इसके अतिरिक्त अनेकों मामले ऐसे हैं जिसमेुं नामान्तरण स्वीकृत करने के पष्चात्‌ भी जमाबन्दी सृजन करने में आपने विधि विरूद्ध जाकर काम किया है और छः माह से एक वर्ष की अवधि तक उसे लटकाकर रखा है ताकि प्रत्येक मामले में अपने अनुकूल वातावरण पैदा कर लेने के बाद जमाबन्दी कायम कर लगान रसीद निर्गत किया जा सके।

आरोपी का स्पष्टीकरण :- आरोपी का कथन है कि अंचल बारी में राजस्व कर्मचारी के पद पर पदस्थापित था। जिला पदाधिकारी, कटिहार के आदेष ज्ञापांक-136, दिनांक 03.02.2014 द्वारा मुझे निलंबित कर मेरे विरूद्ध विभागीय कार्यवाही चलायी जा रही है। निलंब एवं आरोपों के संबंध में मैं कहना चाहता हूँ कि-

1. बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 (यथा संषोधित) के नियम 9(1)क, ग एवं 9(6) ख के तहत मुझे निलंबित कर विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गई है। निलंबन अवधि में मेरा मुख्यालय फलका बनाया गया है, लेकिन अपनी बीमारी के कारण मैं निर्धारित मुख्यालय में अपना योगदान नहीं कर पाया हूँ। मुझे निलंबित किये जाने के पूर्व जिला प्रषासन द्वारा, बिहार सरकार द्वारा निरूपित सिद्धान्त का पालन नहीं किया गया।

2. मुझ पर ऐसा कोई आरोप नहीं है जिसमें छेड़छाड़ किये जाने की संभावना होती। स्पष्टतः उपरोक्त सरकारी निदेष के विरूद्ध मुझे निलंबित किया गया है। विदित हो कि निगरानी विभाग द्वारा दायर मुकदमें में मुझे भी नामित किया गया है, लेकिन मुझे गिरफ्तार नहीं किया गया है और जमानत का आवेदन विधिवत दायर है एवं निष्पादन हेतु लंबित है, ऐसी स्थिति में भी मुझे निलंबित नहीं किया जाना चाहिए था।

3. आरोप संख्या-01 के अनुसार एक मो0 शरफूल हक की षिकायत पर विजय रविदास नामक एक व्यक्ति को रूपये के साथ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने गिरफ्तार किया और मुझपर भी आरोप लगाया गया कि अंचलाधिकारी, बरारी द्वारा नामान्तरण शुद्धिपत्र निर्गत किये जाने के पष्चात्‌ मेरे द्वारा जमाबन्दी कायम नहीं किया गया एवं रसीद काटने के एवज में 50,000.00 रूपये की मांग की जा रही थी।

इस संबंध में मुझे कहना है कि कार्य बोझ के कारण कभी-कभी मैने किसी सामाजिक कार्यकर्त्ता से कार्य में सहयोग लिया है। वर्णित श्री विजय रविदास दो चार दिन तब सहयोग किया जब मुझे दाहिने हाथ में चोट लग गई थी। उसी अवधि में उन्हे डिक्टेषन दे कर रसीद लिखवाया। उनके पास से बरामद राषि कैसी थी, मैं नहीं जानता। मैने कभी किसी से रिष्वत की मांग नहीं की। शुद्धि पत्र निर्गत हो जाने के बावजूद जहाँ तक रसीद नहीं काटने की बात है, इस संबंध मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि उनकी जमाबन्दी का इन्द्राज मैंने पंजी 02 में कर दी थी चूँकि लगान की राषि उनके द्वारा नहीं दी गई थी, इसलिये मैंने रसीद निर्गत नहीं की। श्री रविदास की गिरफ्तारी के बाद मेरे फरार होने का कोई प्रष्न नहीं है। वास्तविकता यह है कि उक्त दिन पूर्व भूमि सुधार उप समाहर्त्ता का बिदाई समारोह था और मैं उसी में सम्मिलित होने हेतु कटिहार आया था। बाद में मुझे पता चला कि मुझे निगरानी द्वारा फंसा दिया गया है। बिदाई समारोह में भोजन करने के बाद मेरा पेट खराब हो गया और तब मैं बीमारी के कारण बिछावन पकड़ लिया। छुट्टी का आवेदन दिया। ईलाज के लिये सिल्लीगुड़ी जाना पड़ा। वहाँ के प्रख्यात चिकित्सक डॉ चांग से मैने आपरेषन कराया। अभी भी मैं पूर्ण स्वस्थ्य नहीं हूँ। लगातार ईलाज में रहने के कारण छुट्टी विस्तार आवेदन देना मेरी लाचारी है। मेरे विरूद्ध लगाया गया यह आरोप सही नहीं है कि गिरफ्तारी से बचने हेतु मैं फरार हूँ।

4. आरोप संख्या 02 के संबंध में मुझे कहना है कि वर्णित नामान्तरण वादों में नामान्तरण स्वीकृति के पष्चात भी उचित समय पर जमाबन्दी कायम कर रसीद निर्गत इसलिये निर्गत नहीं किया जा सका, क्योंकि संबंधित व्यक्ति द्वारा समय पर लगान की राषि जमा नहीं की गई। विदित हो कि नामान्तरण स्वीकृति के बाद प्रायः लोग संतुष्ट होकर चले जाते है और इत्मिनान से आकर रसीद कटाते हैं। इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। जैसे हीं प्रभावित लोग लगान की राषि लेकर आये, रसीद निर्गत कर दी गई।

5. उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होगा कि मेरे विरूद्ध लगाये गये आरोप सही नहीं है। विजय रविदास नामक सामाजिक कार्यकर्त्ता की गिरफ्तारी के बाद उक्त घटना में मुझे भी घसीटा गया। मैं पूर्णतः र्निदोष हूँ।

अतः अनुरोध है कि मेरा कारण पृच्छा स्पष्टीकरण स्वीकार करने, मुझे आरोपों से मुक्त करने, विभागीय कार्यवाही समाप्त करने एवं मुझे निलंबन से मुक्त करने की कृपा की जाय।

संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/मंतव्य :- 1. उपरोक्त स्पष्टीकरण से प्रतीत होता है कि श्री पुष्पेष कुमार सिंह, निलंबित राजस्व कर्मचारी श्री विजय रविदास नामक व्यक्ति से कार्य लिया करते थे। सरकारी नियमानुसार सरकारी कार्य किसी गैर सरकारी व्यक्ति से कार्य लेना औचित्य पूर्ण नहीं है। श्री रविदास को निगरानी विभाग के द्वारा पकड़े जाने से अबतक अपनी निर्धारित मुख्यालय में योगदान नहीं किया है। अपनी बीमारी के संबंध में अपनी चिकित्सा की छाया प्रति संलग्न नहीं किया है। बिना अवकाष स्वीकृत कराये हीं11 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 मुख्यालय से अनुपस्थित रहे। इन्होने समस्तीपुर का चिकित्सक का पूर्जा समर्पित किया है, इससे स्पष्ट है कि कटिहार के बाहर भी बिना अनुमति के मुख्यालय से फरार रहे एवं जानबूझकर मुख्यालय में उपस्थित नहीं रहे।

2. श्री सिंह के द्वारा मो0 शरीफुल हक का नामान्तरण शुद्धि पत्र निर्गत करने के पष्चात्‌ जमाबन्दी का इन्द्राज पंजी 02 में किया किन्तु लगान रसीद निर्गत नहीं किया। लगान रसीद निर्गत करने में देर इनकी विहित मंषा जाहिर करती है। उपरोक्त के आधार पर आरोप संख्या 01 एवं 02 प्रमाणित होता है। आरोपी द्वारा समर्पित कारण पृच्छा :- आरोपी का कथन है कि समाहरणालय, कटिहार के स्थापना प्रषाखा के ज्ञापांक-698/स्था0, दिनांक 30.05.2014 को श्रीमान्‌ के हस्ताक्षर से निर्गत पत्र जिसमें अनुमण्डल पदाधिकारी, कटिहार-सह-संचालन पदाधिकारी के आदेष पत्रक सहित संलग्न प्रमाणित आरोपों के लिये लिखित अभ्यावेदन देने के संबंध में 15 दिनों के अन्दर स्पष्टीकरण समर्पित करने का निदेष है, जो समय सीमा के अन्दर दिया जा रहा है। अनुमण्डल पदाधिकारी-सह-संचालन पदाधिकारी, कटिहार के द्वारा मेरे विरूद्ध आरोप प्रमाणित होने की अनुषंसा श्रीमान्‌ को भेजी गई है जिसके आधार पर हमें दण्ड अधिरोपित किये जाने का विनिष्चय किया गया है। वह विनिष्चय मेरे विरूद्ध इसलिये विनिष्चित नहीं हो सकता है कि मेरे द्वारा कार्य में देर करने की मंषा जाहिर होती है। संचालन पदाधिकारी के द्वारा जिस सत्य के तथ्यों को न्यायिक दृष्टि पत्र में अवलोकन नहीं कर आरोपित होने की अनुषंसा किये हैं, वह मेरे विस्द्ध स्थिर नहीं होता है, जिसका विवरण विनम््रता के साथ नीचे उल्लेखित कर रहा हूँ :-

प्रथम आरोप जो प्रपत्र ''क'' में उल्लिखित है कि मो0 शफीकुल हक के द्वारा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, भागलपुर को नामान्तरण शुद्धि पत्र निर्गत किये जाने के पष्चात्‌ मेरे द्वारा लटकाकर रखा गया एवं 50,000.00 रिष्वत की मांग की गई। कथित विजय रविदास रंगे हाथों पकड़ाया तथा मैं फरार हो गया। यह आरोप मेरे उपर मो0 शफीकुल हक के द्वारा षडयंत्र कर निगरानी में आवेदन देकर फंसाने का प्रयास किया गया। ऐसा इसलिये कि मो0 शफीकुल हक के द्वारा अपने हीं रिष्तेदार जो साली लगती थी उससे जमीन खरीदगी की गई, जिसके नामान्तरण करने हेतु प्रस्ताव मेरे पास लाया गया जो जमीन मेरे द्वारा स्थलीय जाँच में प्रकाष में आया कि यह विक्रेता के कब्जे में नहीं है। नामान्तरण के लिये भूमि का स्वामित्व अनिवार्य होता है। यह मुझ जैसे कनीय कर्मी को श्रीमान्‌ के सामने लिखना दृष्टिता हीं है। मैने दिनोक 18.04.2013 को इस आषय के साथ प्रस्ताव अंचलाधिकारी महोदय को दिया कि नामानतरण के लिये जमीन पर भैतिक कब्जा नहीं है, इसलिये नामान्तरण नहीं की जा सकती है जिसपर अंचल निरीक्षक के साथ अंचल अमीन सरजमीन पर जाकर नापी किये तथा 28 स्थानीय लोगों के हस्ताक्षर के साथ नजरी नक्षा लगाते हुए प्रतिवेदन दिये कि सरजमीन पर विक्रेता का दखल-कब्जा नहीं है। पुनः तत्कालीन अंचल पदाधिकारी महोदय के द्वारा विद्वान सरकारी अधिवक्ता कटिहार से विधि परामर्ष की मांग की गई जिसमें सरकारी अधिवक्ता स्पष्ट लिखे कि हल्का कर्मचारी, अंचल निरीक्षक, अंचल अमीन के रिर्पोट से स्पष्ट है कि सरजमीन पर भू-स्वामी का भैतिक कब्जा नहीं है जबकि नामान्तरण के लिये भौतिक कब्जा आवष्यक है। इस तरह मेरे द्वारा दिये गये आपत्ति प्रतिवेदन पर अपना मंतव्य देते हुए आपत्ति को कायम किये साथ हीं उन्होने यह भी लिखे कि यदि पैतृक जमीन का बंटवारा सभी भाई7बहनों के बीच बराबर-बराबर बांटा जाता है तो क्रेता-विक्रेता उसके हिस्से से अधिक की जमीन खरीदगी कर लिया यह विधि मंतव्य बहुत हीं महत्वपूर्ण है जिससे यह प्रलेक्षित होता है कि मेरे कर्त्तव्य की सही मंषा क्या है ? आपत्तिकर्त्ता के द्वारा यह भी आपत्ति लगाया गया कि माननीय सबजज, कटिहार के यहॉ अधिकार वाद संख्या-198/13 लंबित है जिसमें ये सभी आपस में बंटवारे की मांग किये हैं। इस जानकारी के बावजूद अंचल अधिकारी महोदय के द्वारा दिनांक 24.06.2013 को नामान्तरण आदेष इस आधार पर दिये कि लगान लेना आवष्यक है इस लिये क्रेता के नाम नामान्तरण किया जाता है। हमें लगान रसीद निर्धारित किये जाने का आदेष दिये। श्रीमान्‌ जमाबन्दी के मामले में सक्षम अधिकारी होते हैं यह बाद संज्ञान में होगा ही कि इस तरह नामान्तरण की प्रक्रिया में मैं कहॉ तक दोषी हूॅ। दिनांक 24.06. 2013 को दिये गये नामान्तरण आदेष के बाद मो0 शफीकुल हक के गलत कार्य मेरे द्वारा नहीं किया गया तथा वह कार्य करवाने में सफल रहा इसलिये मेरे विरूद्ध द्वेष था और वो दिनांक 09.07.2013 को निगरानी विभाग, भागलपुर के यहॉ रिष्वत लेने की बात कहकर मुझे षडयंत्र कर फसाने का प्रयास किया गया। मैं उच्चाधिकारी महोदय के आदेषानुसार जो भी आर0टी0पी0एस0 का कगजात उपलब्ध हुआ उसे अपने इन्द्राज पंजी 02 में दर्ज किया जो कि संचालन पदाधिकारी के मंतव्य में उल्लेखित है जिसके लगान रसीद कटवाने आया उसे तो रसीद काट दिया तथा जो रसीद कटाने नहीं आया उसकी रसीद बगैर राजस्व लिये कैसे काट सकता था ? इन तथ्यों की सत्यता की प्रमाणिकता के लिये मैं विधि परामर्ष सहित उपलब्ध नामान्तरण आदेष फलक की अभिप्रमाणित प्रति की छाया प्रति संलग्न कर रहा हूॅ। महती कृपा होगी कि इसकी सत्यता की भौतिक सत्यापन अंचल अभिलेख से किया जा सकता है कि जिन तथ्यों को मेरे द्वारा रखा जा रहा है उसकी सत्यता है या नहीं, इस तरह तत्कालीन अंचल अधिकारी के दिये गये दिनांक 24.06.2013 के आदेष एवं 09.07.2013 को मो0 शफीकुल हक के द्वारा दिये गये निगरानी में आवेदन के बीच मात्र एक पखवारे का समय होता है। इस दौरान इन्द्राज पंजी 02 में नाम दर्ज हो गया साथ हीं रसीद भी काट दी गई, तो मैं इसे लटका कर कैसे रखा क्या यह आरोप मेरे विरूद्ध सस्थिर होता है।

जहॉ तक 21.07.2013 को रंगे हाथों विजय रविदास के पकड़ाये जाने तथा मेरे फरार होने का प्रष्न है, श्रीमान्‌ वह दिन रविवार था। मैं तत्कालीन अंधिकारी के साथ भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार के विदाई समारोह में मौजूद था, जिसे अनेकों लोगों के द्वारा देखा गया था। मेरे निजी कार्यालय जो निगरानी विभाग के उक्त काण्ड का घटनास्थल है, वह मकान चार दिवारी से घिरा है तथा एक मात्र हीं मुख्य द्वार है। गौरतलब हो कि जिस धावा दल का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक के साथ तीन पुलिस निरीक्षक के साथ तीन सिपाही कर रहा था वहॉ से भागने में मैं कैसे सफल हो पाता ? यह भागने जैसे12 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 शब्द मुझे फंसाने का षडयंत्र है। मुझे तो लगता है कि इन लोागों की आपसी साजिष थी साथ हीं अभियुक्त के द्वारा यह नहीं कहा गया कि मेरे कहने से रिष्वत मांगी या आदान-प्रदान की। इस संबंध में मेरे पत्नी पूनम सिंह के द्वारा पुलिस महानिरीक्षक, निगरानी के साथ सभी सक्षम अधिकारी को जॉच करने के लिये आवेदन दिया गया। स्पष्ट है कि ट्रैपिंग की ब्याख्या रंगे हाथों रिष्वत लेना होता है। इस ट्रैपिंग में मैं नहीं आता हूॅ। श्रीमान्‌ स्वयं जिला के अपराधिक मामले में अभियोजन पदाधिकारी होते हैं, क्या यह मामला मेरे उपर बनता है।षरीफुल हक के मुताबिक गलत कार्य करने की षडयंत्र का षिकार होकर उक्त प्राथमिकी का सह अभियुक्त बना हूॅ जिसे समय रहते न्यायालय में सत्य साबित करने का प्रयास करूंगा। अभी सत्य पराजित होता दिख रहा है लेकिन मुझे उम्मीद है न्यायालय से सत्य की जीत होगी।

मैं तो अपने पद एवं कर्त्तव्यों का निर्वहन किया अगर मंषा गलत रहती तो मैं पूर्व में ही नियम के विरूद्ध शरीफुल हक के पक्ष में प्रतिवेदन देता। मैं भले हीं सही कार्य करने के चलते निगरानी काण्ड का अभियुक्त क्यों न बना दिया गया हूॅ। उपरोक्त तथ्यों पर संचालन पदाधिकारी-सह-अनुमण्डल पदाधिकारी महोदय कअिहार के द्वारा सूक्ष्म जॉच अंचल अभिलेख से नहीं की जा सकी, इसलिये मेरे विरूद्ध कार्रवाई की अनुषंसा की गई है।

मैं वर्ष 2010 से हीं ब्रेन टय्‌ुमर जैसे रोग से ग्रसित हूॅ, जिसका ऑपरेषन लंबे चिकित्सक के जाँच के बाद मषहुर अस्पताल सिलीगुड़ी में करवाया तथा कैंसर जैसे गंभीर रोगों के संभावनाओं से ग्रसित हूॅ जिसके चलते हृदय एवं अन्य रोग का भी ईलाज करवाना परता है। इस क्रम में अपने ष्तिेदार के यहॉ जाने के बाद तबीयत खराब हो जाने के कारण रोसरा (समस्तीपुर) में ईलाज करवाया। सभी चिकित्सा प्रमाण पत्र की छाया प्रति संलग्न है। मैं ऑपरेषन कराने की जानकारी दिनांक 04.08.2013 को अंचल अधिकारी, बरारी को निबंधित डाक से सूचित कर दिया था। इस तरह मुख्यालय जानबूझकर बिना अनुमति लिये अनुपस्थित नहीं रहा हूॅ। ऐसे गंभीर रोग का ईलाज नहीं करवाता तो मृत्यु के गाल में भी जा सकता था, इस तरह फरार नहीं हूॅ।

अतएव उपरोक्त वर्णित तथ्यों के अवलोकन एवं न्यायिक दृष्टिकोण से जॉचोपरान्त श्रीमान्‌ पायेगे कि मैं कहीं से भी पद का दुरूपयोग उचाधिकारी का आदेष न मानना एवं कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही परिलक्षित नहीं होता है। मेरी सेवा लगभग 20 वर्ष पूरी हो चुकी है। मेरे विरूद्ध कोई भी विभागीय षिकायत या आरोप अपराधिक मुकदमा नहीं हुआ है। इसलिये उपरोक्त विनिष्चय आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। मै गंभीर रूप से बीमार रहता हूॅ तथा छोटे-छोटे बच्चे की पढ़ाई के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारी भी है इसलिये मैं तथा मेरा परिवार आरोप से मुक्त करने के लिये सदा आभारी रहूॅगा। सम्यक समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी द्वारा श्री सिंह के विरूद्ध प्रपत्र 'क' में लगाये गये सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया है।

संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की समीक्षा के पश्चात आरोपी श्री सिंह को बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (यथा संषोधित) के नियम 14 के खण्ड (vi) से (xi) में विनिदृष्ट शास्तियों में से कोई अधिरोपित किये जाने योग्य मानकर कार्यालय ज्ञापांक संख्या-698/स्था0, दिनांक 30.05.2014 द्वारा उन्हे पुनः अभ्यावेदन करने का अवसर प्रदान किया गया। दिनांक 09.06.2014 को समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा, अभिलेख में संलग्न कागजातों के आलोक में की गई। अभ्यावेदन में उल्लिखित बातें अप्रमाणिक/साक्ष्य विहीन एवं पूर्व के कथन को पुनरावृति मात्र है। आरोपी ऐसा कोई ठोस साक्ष्य/तथ्य प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे कि उनपर लगाये गये आरोप प्रमाणित न हो। अस्तु मेरा अभिमत है कि आरोपी अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति अनिष्ठावान, लापरवाह एवं स्वेच्छाचारी पाये गये है तथा भ्रष्ट आचरण करते हुए सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3 के प्रावधानों के प्रतिकूल कार्य करने के दोषी पाये गये हैं।

अतः श्री पुष्पेष कुमार सिंह, राजस्व कर्मचारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों से पूर्णतः सहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 (यथा संषोधित-2007) के नियम 14 (xi) के अनुरूप मैं प्रकाष कुमार, भा0प्र0से0, समाहर्त्ता-सह-अनुषासनिक प्राधिकार, कटिहार श्री सिंह, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय, बरारी सम्प्रति मुख्यालय फलका अंचल को उक्त नियमावली नियम 18(6) में निहित शक्तियों के आलोक में आदेष निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्त (DISMISS) करता हूँ। श्री पुष्पेष कुमार सिंह, राजस्व कर्मचारी से संबंधित विवरणी निम्न प्रकार है :- 1. नाम ः- श्री पुष्पेष कुमार सिंह 1. पिता का नाम ः- बमबहादुर सिंह 2. पदनाम ः- राजस्व कर्मचारी 3. जन्म तिथि ः- 02.07.1968 4. नियुक्ति की तिथि ः- 04.08.1997 5. वेतनमान ः- 9300-34800 ग्रेड पे :- 4600 6. स्थायी पता ः- ग्राम-पंचगछिया, टोला-दुर्गापुर पो0- पंचगछिया, जिला-सहरसा। आदेष का तामिला आरोपी के स्थायी पता पर भी सुनिष्चित कराया जाय।

आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, समार्हर्त्ता।13 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015

25 जून 2014

सं॰ 860—श्री रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, राजस्व कर्मचारी अंचल कार्यालय, बरारी सम्प्रति अंचल कार्यालय, प्राणपुर को राजस्व वसूली की राषि अस्थायी गबन, स्थानान्तरण आदेष का पालन नहीं करने एवं निगरानी विभाग द्वारा दिनांक 24.02. 2010 को ट्रेप (गिरफ्तार) कर लिये जाने के कारण इन्हे निलंबित कर इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही का संचालन किया गया। संचालित विभागीय कार्यवाही में पूर्व में दिये गये दण्ड को समानुपातिक रूप से अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने के कारण आरोपी कर्मी के पक्षों की पुनः सुनवाई कर विधिसम्मत आदेष पारित करने का निदेष आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ द्वारा वाद संख्या-05/2014 द्वारा प्राप्त हुआ। प्राप्त निदेष के आलोक में इस कार्यालय का आदेष ज्ञापांक-484/स्था0 दिनांक 20.03.2014 द्वारा श्री गुप्ता के विरूद्ध पुनः सुनवाई/विभागीय कार्यवाही का संचालन हेतु अपर समाहर्त्ता, कटिहार को संचालन पदाधिकारी तथा अंचल पदाधिकारी, प्राणपुर को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया। अपर समाहर्त्ता, कटिहार के पत्रांक-332, दिनांक 05.06.2014 द्वारा संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है, जो निम्न प्रकार हैः-

आरोप संख्या-01 वित्तीय वर्ष 2009-10 में लगान वसूली मद में मो0 16,496.50 रूपये अंचल नजारत में समय पर जमा नहीं करना, जो अस्थायी गबन का मामला बनता है। आरोपी का स्पष्टीकरण :- आरोपी का कथन है कि निगरानी अण्वेषण ब्युरो द्वारा मेरी गिरफ्तारी के फलस्वरूप मुझे निलंबित किया गया था और जमानत पर मेरी रिहाई के बाद जिला पदाधिकारी, कटिहार के आदेषानुसार ज्ञापांक-683, दिनांक 02.06.2011 द्वारा मुझे निलंबन से मुक्त किया गया था। तद्‌ोपरान्त मेरे विरूद्ध विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गई और जिला पदाधिकारी, कटिहार के आदेष ज्ञापांक-1083, दिनांक 05.08.2013 द्वारा असंचयी प्रभाव से मेरी तीन वेतन वृद्धियाँ तथा निलंबन अवधि का वेतन रोक दिया गया। उपरोक्त विभागीय कार्यवाही के निर्णय से मैं संतुष्ट नहीं रहा हूँ, क्योंकि गिरफ्तारी से संबंधित मामला अभी न्यायालय में लंबित है तथा अन्य दों आरोप सही नहीं थे। संचालन पदाधिकारी द्वारा मुझे दोषी प्रमाणित नहीं किया जा सका था। वर्णित आदेष दिनांक 03.08.2013 को पारित कर दिनांक 05.08.2013 को संसूचित किया गया था और अब साढ़े सात माह बाद जिला पदाधिकारी, कटिहार द्वारा पाया गया कि दण्डादेष प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। एक जिला पदाधिकारी द्वारा निर्गत आदेष दूसरे जिला पदाधिकारी द्वारा प्रावधानों के अनुरूप नहीं माने जाने के कारण स्पष्ट नहीं हैं। श्रीमान्‌ अपीलीय न्यायालय हैं। जिला पदाधिकारी द्वारा पारित आदेष के विरूद्ध जिला पदाधिकारी की ओर से श्रीमान्‌ के समक्ष अपील दायर नहीं किया गया है बल्कि विभागीय कार्यवाही पर पुनः विचार किया जा रहा है। चूँकि यह अपीलवाद नहीं है, अतः पुनः विचार की कार्रवाई संधारित करने योग्य प्रतीत नहीं होता है। मेरे विरूद्ध आरोप संख्या 01 में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2009-10 में लगान वसूली मद में रूपये 16,496.50 रूपये मैने अंचल नजारत में जमा नहीं किया था। इसे अस्थायी गबन का मामला माना गया। उक्त राषि को छोड़कर शेष राषि मेरे भाई द्वारा जमा किया जा चुका था। मैने अपने स्पष्टीकरण में कहा था कि अचानक गिरफ्तार हो जाने के कारण मैने यह राषि जमा नहीं की थी। जमानत पर रिहा होने के बाद मैने राषि जमा कर दी। संचालन पदाधिकारी द्वारा इस बिन्दु पर मुझे आरोप मुक्त किये जाने की अनुषंसा की गई।

संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/मन्तव्य :- प्रस्तोता पदाधिकारी के मंतव्य से यह बात स्पष्ट है कि आरोपी द्वारा भू-राजस्व की वसूली की राषि माह दिसम्बर, 2009 से लगातार अंचल नजारत में जमा नहीं की गयी, बल्कि काफी अन्तराल के बाद ऐसा किया गया। साथ ही साथ निर्धारित 500 रूपये की सीमा से काफी अधिक राषि अपने पास रखते रहे हैं, जो वित्तीय अनियमितता धारित किये के पुष्ट प्रमाण है।

आरोप संख्या-02 जिला स्थापना उप समाहर्त्ता, कटिहार के ज्ञापांक-06/स्था॰, दिनांक 04.01.2010 के आलोक में श्री रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, राजस्व कर्मचारी को बरारी अंचल से प्राणपुर अंचल स्थानान्तरित किया गया था लेकिन श्री गुप्ता राजस्व कर्मचारी के द्वारा इस आदेष का अनुपालन नहीं किया गया जो वरीय पदाधिकारी के आदेष की अवहेलना का आरोप बनता है। आरोपी का स्पष्टीकरण :- आरोप संख्या 02 में कहा गया था कि मैने स्थानान्तरण आदेष का पालन नहीं किया था, जबकि स्वतः विरमित का आदेष था, इस बिन्दु पर मैने स्पष्ट किया था कि मुझसे प्रभार ग्रहण करने वाला हल्का कर्मचारी उपलब्ध नहीं था। मैने अंचल पदाधिकारी से इस हेतु अनुरोध किया था कि यदि बिना प्रभार दिये स्थानान्तरण स्थान पर चला जाता तो यह उचित नहीं होता और मुझे आरोपित किया जा सकता था। फलस्वरूप अंचल पदाधिकारी द्वारा विरमित किये जाने की प्रतीक्षा करता रहा, मैने कोई गलती नहीं की। संचालन पदाधिकारी द्वारा बिना गहराई में गये और मेरे स्पष्टीकरण पर बिना विचार कभी भी आदेष का उल्लंघन का दूस्साहस नहीं कर सकता। अंचल पदाधिकारी के पत्रांक-46/ए0, दिनांक 14.01.2010 द्वारा स्थापना को लिखा गया था कि वित्तीय वर्ष को देखते हुए तथा राजस्व संबंधी कार्यो के हित में विरमित हेतु स्थगित रखने की कृपा की जाय, यह पत्र जिला स्थापना प्रषाखा, कटिहार को लिखा गया है। संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/मन्तव्य :- श्री गुप्ता का स्थानान्तरण जिला स्थापना प्रषाखा के ज्ञापांक-6, दिनांक 04.01.2010 द्वारा बरारी अंचल से प्राणपुर अंचल किया गया था एवं दिनांक 15.01.2010 तक उन्हे नव पदस्थापित कार्यालय में योगदान देने का निदेष था अन्यथा14 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 दिनांक 16.01.2010 से स्वतः विरमित होन का आदेष था। इस निदेष का उनके द्वारा अवहेलना की जाती रही और अपने पूर्व पदस्थापित अंचल कार्यालय बरारी में यथवत बना रहे इसी अन्तराल में वे दिनांक 24.02.2010 को ट्रैप होकर जेल चले गये। आरोपी द्वारा इस आरोप के लिये अपने स्पष्टीकरण के समर्थन में कोई साधारण साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किये गये और करीब आठ माह तक किसी न किसी रूप में अपने पूर्व पद पर बने रहे।

आरोप संख्या-03 दिनांक 24.02.2010 को श्री रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, राजस्व कर्मचारी को निगरानी विभाग के द्वारा ट्रेप (गिरफ्तार) कर लिया गया था।

आरोपी का स्पष्टीकरण :- आरोप संख्या-03 मेरे गिरफ्तारी से संबंधित है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। फलस्वरूप ज्यादा कुछ नहीं कह सकता लेकिन यह कहना उचित समझता हूँ कि मुझे आरोप में फंसाकर गिरफ्तार किया गया था।

उक्त कारण पृच्छा मैं तत्काल रूप से दे रहा हूँ। पुनः पूरक समयानुसार जमा करने का आदेष श्रीमान्‌ से आदेष प्राप्त कर जमा करूंगा।

अतः अनुरोध है कि यह स्पष्टीकरण स्वीकार करने, पुर्नविचार की कार्रवाई बन्द करने की कृपा की जाय। संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/मन्तव्य :- आरोपी का स्पष्टीकरण-सह-बचाव बयान का अवलोकन किया। उनके द्वारा प्रस्तुत कागजातों का अवलोकन किया गया तथा टे्रप केष के साक्ष्यों का बयान दर्ज कराया गया। इसके अतिरिक्त प्रस्तोता पदाधिकारी-सह-अंचल पदाधिकारी, प्राणपुर द्वारा उपलब्ध कराये गये कागजातों एवं लिखित तथ्यों का भी अवलोकन किया गया। उनका कहना है कि पूर्व में विभागीय कार्रवाई के संचालन के पष्चात्‌ जिला पदाधिकारी द्वारा पारित आदेष से ही वे संतुष्ट नहीं है। पुनः आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ के पत्र संख्या-1206, दिनांक 01.03.2014 के आलोक में जिला पदाधिकारी, कटिहार द्वारा उनके ज्ञापांक-484/स्था0, दिनांक 20.03.2014 में पुनः यह विभागीय कार्यवाही संचालन का आदेष दिया गया है, जो अधिनियम के प्रावधान के अनुरूप नहीं है। अर्थात पूर्व के दण्डादेष पर पुर्नविचार करने के लिये प्रारंभ की गई है, यह कार्यवाही विधि विरूद्ध है। अपने स्पष्टीकरण की कंडिका 06 में आरोपी का कथन है कि विभागीय कार्यवाही में यह पुर्नविचार किया जा रहा है। चूंकि यह अपीलवाद नहीं है। अतः पुर्नविचार की कार्रवाई संधारित करने योग्य प्रतीत नही होता है।

जिला पदाधिकारी के आदेष ज्ञापांक-484/स्था0, दिनांक 20.03.2014 के अवलोकन से स्पष्ट है कि आरोपी के पक्षों की पुनः सुनवाई करने का निदेष उन्हे आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ द्वारा प्राप्त हुआ था, इसी पृष्ठभूमि में अधोहस्ताक्षरी को बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली, 2005, (यथा संषोधित) के नियम 17(2) अन्तर्गत संचालन पदाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है जो उक्त नियमावली के नियम 28(ग) के अन्तर्गत है।

जहाँ तक दिनांक 24.02.2010 को आरोपी श्री गुप्ता, राजस्व कर्मचारी को 1600.00 रूपये रिष्वत लेते हुए निगरानी विभाग द्वारा गिरफ्तार कर लिये जाने का आरोप है, के संबंध में जाँच से स्पष्ट है कि यह मामला निगरानी थाना काण्ड संख्या-17, दिनांक 25.02.2010 के तहत विषेष न्यायाधीष, निगरानी विभाग, पटना के न्यायालय में विचाराधीन है। इस संबंध में ट्रेप केष से संबंधित निगरानी विभाग के पदाधिकारियों को एक से अधिक बार निबंधित डाक से सूचना भेजी गई या तो वे उपस्थित नहीं हुए या जानबूझकर समय लेने से संबंधित पत्र भेजते रहे हैं जो अभिलेख में संलग्न है। किन्तु चार्जसीट अनुषंधान से संबंधित कागजात भी समर्पित नहीं किये गये।

ट्रेप केष के साक्षी श्री श्याम लाल पंडित(तत्कालीन लिपिक, प्रखंड कार्यालय, बरारी) एवं मो0 अब्बास, उप मुखिया, षिषिया पंचायत ने उपस्थित होकर अपना ब्यान दर्ज कराया। उनके ब्यान के अवलोकन से इस बात की पुष्टि हुई है कि यह घटना दिनांक 24.02.2010 के सुबह 08 से 10 बजे के बीच की है एवं कथित साक्षी श्यामलाल पंडित के सरकारी आवास में घटित हुई है। साक्ष संख्या-02 मो0 अब्बास के परीक्षण से इस बात की पुष्टि होती है कि उस तिथि, स्थल एवं समय पर निगरानी विभाग के लोग आये थे और आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी। रिष्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने के संबंध में साक्ष्यों द्वारा देखे जाने की पुष्टि नहीं की है। रिष्वत से संबंधित आरोप कर्त्ता बार-बार सूचना देने के बाद भी उपस्थित नहीं हुए। चूंकि ट्रेप केष के अनुषंधानकर्त्ता द्वारा उपस्थिति नहीं दी गई और न ही किसी तरह का ऐसा वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किया गया जिसके आधार पर इस आरोप की पुष्टि की जा सके।

उपर्युक्त समीक्षा के पष्चात्‌ आरोपसंख्या 01 एवं 02 की पुष्टि होती है। आरोपी द्वारा लगान मद की राषि के अस्थायी गबन किये जाने एवं नियुक्ति पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी, कटिहार के स्थानान्तरण आदेष का जानबूझकर अवहेलना किये जाने के आरोप प्रमाणित है। आरोपी का यह कृत कदाचार (Misconduct) की श्रेणी में प्रमाणित रूप से आते हैं।

प्रमाणित आरोपों के आलोक में कार्यालय आदेष ज्ञापांक-758/स्था0, दिनांक 06.06.2014 द्वारा श्री गुप्ता से लिखित अभ्यावेदन 15 दिनों के अन्दर देने का आदेष निर्गत किया गया।

श्री गुप्ता से प्राप्त अभ्यावेदन/निवेदन निम्न प्रकार है :- आरोप संख्या-01 :- ट्रैप के समय निगरानी विभाग द्वारा मैं जो रूपया 16,496.50 जमा करने हेतु रखा था, उसे सीज कर लेने के कारणवष मैं जमा नहीं कर सका था। जमानत पर से आने के बाद मैं उक्त राषि को जमाकर दिया हूँ। मेरे नियत में गबन करने की मंषा रहती तो मैं अभी तक उक्त राषि को जमा नहीं करता क्योंकि सरकारी राषि निगरानी द्वारा छीन लिया गया है, साथ ही उक्त राषि को छोड़कर मेरे जेल में रहते हुए मेरे बड़े भाई के द्वारा राषि जमा किया गया है जिसे प्रस्तोता पदाधिकारी के द्वारा पुष्टि की गई है। पूर्व अंचल पदाधिकारी, बरारी जो प्रस्तोता पदाधिकारी थे, मुझे इस आरोप से उनके द्वारा मुक्ति हेतु अनुषंसा किया गया है। वर्त्तमान प्रस्तोता पदाधिकारी के द्वारा गलत ढ़ंग से साक्ष्य15 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 को संचालन पदाधिकारी को समझाकर मुझपर आरोप प्रमाणित करवाया गया है, जो बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) की धार 20(2) का घोर उल्लंघन है, क्योंकि यह आरोप तब प्रमाणित होता अगर मैं रूपया जमा नहीं करता। अतः मुझे इस आरोपसे मुक्त करने की कृपा की जाय। आरोप संख्या-02 :- ज्ञापांक-06, दिनांक 04.01.2014 के द्वारा मेरा स्थानान्तरण बरारी अंचल से प्राणपुर अंचल हुआ था। मैं उस समय बरारी अंचल के हल्का संख्या-05 एवं 09 के प्रभार में था, साथ ही षिषिया पंचायत के पंचायत सचिव के प्रभार में था। अंचल पदाधिकारी के द्वारा किसी भी राजस्व कर्मचारी को प्रभार देने हेतु आदेष नहीं दिया गया। पत्रांक-46(क), दिनांक 14.01.2014 के द्वारा तत्कालीन अंचल अधिकारी, बरारी के द्वारा स्थापना उप समाहर्त्ता को मेरा स्थानान्तरण मार्च, 2010 तक रोकने हेतु लिखा गया था। साथ हीं मुझे यह भी कहा गया था कि आप अपना काम करें जिला को मैं लिख दिया हूँ आपका स्थानान्तरण रोकने हेतु। प्रभार लेने वाला कोई नहीं है। सरकारी नियमानुसार मैं अपने अंचल अधिकारी, बरारी के आदेष को मानते हुए योगदान नहीं किया। पुनः ज्ञापांक-199, दिनांक 23.02.2010 के द्वारा मुझे आदेष दिया गय कि तीन दिनों के अन्दर अपना प्रभार श्री पुष्पेष कुमार सिंह को सौंप दें। मैं अपने प्रभार देने हेतु दूसरे दिन तैयारी कर रहा था कि उस क्रम में गलत ढ़ंग से निगरानी विभाग द्वारा मुझे ट्रैप कर लिया गया।

अतः उपरोक्त साक्ष्यों एवं अंचल स्तरीय परिपाटी को मद्देनजर इस आरोप से मुक्त करने की कृपा की जाय। आरोप संख्या-03 :- माननीय संचालन पदाधिकारी के द्वारा गवाहों के बयान लेने के पष्चात्‌ एवं प्रस्तुत साक्ष्य के आलोक में आरोप पुष्टि न होने की अनुषंसा की गई है।

अतः इस आरोप से मुझे मुक्त करने की कृपा की जाय। जिला पदाधिकारी, कटिहार के ज्ञापांक-1083, दिनांक 05.

08.2013 के द्वारा मुझे दण्ड स्वरूप तीन वेतन वृद्धि रोकते हुए पूर्व विभागीय कार्यवाही को बन्द किया गया था जिसके संदर्भ में मुझे कहना है कि अनुषासनिक प्राधिकार ने संचालन पदाधिकारी और उपस्थापन पदाधिकारी के मंतव्यों पर तीन वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक संबंधी दण्ड के साथ विभागीय कार्यवाही समाप्त कर दिया है। इसके बावजूद आपके द्वारा पूर्वाग्रह एवं दुर्भावना से प्रेरित होकर बिना किसी खास आरोप से अपनी असहमति का कारण बताये अचानक दण्ड पर पुर्नविचार करना कानूनन निम्न आधार पर गलत है :-

(i) दण्ड पर पुर्नविचार संविधान के अनुच्छेद 20(2) एवं दण्ड प्रक्रिया संहिता की धार 300 का घोर उल्लंघन है। इसे पूर्वाग्रह एवं दुर्भावना से ग्रसित माना जायेगा।

(ii) अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप दण्ड समानुपातिक नहीं होने का उल्लेख करना बिल्कुल गलत है क्योंकि जब प्रपत्र ''क'' में अधिनियम की कोई चर्चा हीं नहीं की गई तो दण्ड समानुपातिक होने अथवा नहीं होने का कोई औचित्य नहीं है। इस आधार पर मुझे कोई दूसरा दण्ड देना संविधान के अनुच्छेद 20(2) एवं दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा-300 का सीधा उल्लंघन माना जायेगा। संविधान के अनुच्छेद 20(2) का हू-ब-हू उल्लेख श्रीमान्‌ के सुलभ संदर्भ हेतु मैं नीचे कर रहा हूँ :- किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिये एक बार से अधिक अभियोजित और दण्डित नहीं किया जा सकता है।

(iii) दुबारा विभागीय कार्यवाही संचालित करने का कानून में कोई प्रावधान नहीं है। उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के निम्नलिखित न्याय निर्णय में आरोपी के विरूद्ध दुबारा विभागीय कार्यवाही चलाने पर आरोपी को आरोप से मुक्त कर दिया गया है :-

(a) Union of India Vs K.D.Pandey] 2002-10- SCC-471

(b) K.R.Deb Vs Collector of Central Exercise, Shillong, AIR-1971-SC-102

(c) Suresh prasad Vs State of Bihar, 2008-02 BLJR- 1132

(d) Dwarkachand Vs State of Rajasthan, AIR-1958, RAJ- 38

(e) Alma Mukhtar Vs State of Bihar, CWJC No.-14443 of 2008

गठित आरोप के संबंध में मैं स्पष्टीकरण एवं साक्ष्य समर्पित कर रहा हूँ, तथा विनम्रता पूर्वक निवेदन करता हूँ कि मुझे सभी आरोपों से मुक्त करते हुए सेवा में रहने का अधिकार देने की कृपा की जाय। तत्कालीन जिला पदाधिकारी, कटिहार के ज्ञापांक-1083, दिनांक 05.08.2013 में संवैधानिक तरीके से दिये गये निर्णय को बरकरार रखने की कृपा की जाय।

निष्कर्ष

संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की समीक्षा के पश्चात आरोपी श्री गुप्ता को बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (यथा संषोधित) के नियम 14 में विनिदृष्ट वृहत शास्तियों में से कोई अधिरोपित किये जाने योग्य मानकर कार्यालय ज्ञापांक संख्या-758/स्था0, दिनांक 06.06.2014 द्वारा उन्हे पुनः अभ्यावेदन करने का अवसर प्रदान किया गया। दिनांक 20.06.2014 को समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा, अभिलेख में संलग्न कागजातों के आलोक में की गई। अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि वे हल्का नं0 05 एवं 09 के प्रभार में थे, साथ ही षिषिया पंचायत के पंचायत सचिव के प्रभार में भी थे। उन्होने यह भी उल्लेख किया है कि प्रभार देने हेतु तैयारी कर रहा था कि उसी क्रम में गलत ढ़ंग से निगरानी विभाग द्वारा उन्हे ट्रेप कर लिया गया। श्री गुप्ता का यह कथन सच्चाई से परे है। चूंकि ये हल्का न0 05 एवं 09 के प्रभार में थे, जो प्रखंड मुख्यालय से कई किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है, जबकि इनकी गिरफ्तारी प्रखंड कार्यालय परिसर, बरारी में बने सरकारी आवास, जो श्री श्यामलाल पंडित, लिपिक का था, से हुई है। यदि श्री गुप्ता प्रभार देने की तैयारी कर रहे थे, तो घटना के समय उन्हे हल्का कचहरी में होना चाहिए था, न कि प्रखंड कार्यालय परिसर में।16 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 अतः आरोपी द्वारा अभ्यावेदन में उल्लिखित बातें अप्रमाणिक/साक्ष्य विहीन एवं पूर्व के कथन की पुनरावृति मात्र है। आरोपी ऐसा कोई ठोस साक्ष्य/तथ्य प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे कि उनपर लगाये गये आरोप प्रमाणित न हो। अस्तु मेरा अभिमत है कि आरोपी अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति अनिष्ठावान, लापरवाह एवं स्वेच्छाचारी पाये गये है तथा भ्रष्ट आचरण करते हुए सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3 के प्रावधानों के प्रतिकूल कार्य करने के दोषी पाये गये हैं।

अतः श्री रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, राजस्व कर्मचारी, अंचल बरारी सम्प्रति अंचल प्राणपुर प्रतिनियुक्त मनसाही अंचल के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित पाये गये आरोपों से पूर्णतः सहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 (यथा संषोधित-2007) के नियम 14 (xi) के अनुरूप मैं प्रकाष कुमार, भा0प्र0से0, समाहर्त्ता-सह-अनुषासनिक प्राधिकार, कटिहार श्री गुप्ता को उक्त नियमावली नियम 18(6) में निहित शक्तियों के आलोक में आदेष निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्त (DISMISS) करता हूँ।

श्री रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, राजस्व कर्मचारी से संबंधित विवरणी निम्न प्रकार है :-

1. नाम ः- श्री रघुनाथ प्रसाद गुप्ता 2. पिता का नाम ः- स्व0 बांकेबिहारी लाल गुप्ता 3. पदनाम ः- राजस्व कर्मचारी 4. जन्म तिथि ः- 04.01.1957 5. नियुक्ति की तिथि ः- 05.04.1995 6. वेतनमान ः- 9300-34800 ग्रेड पे :- 4200 7. स्थायी पता ः- ग्राम पो0- रोषना, थाना-प्राणपुर, जिला-कटिहार।

आदेष का तामिला आरोपी के स्थायी पता पर भी सुनिष्चित कराया जाय।

आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, समार्हर्त्ता।

——— 25 जून 2014 सं॰ 859—श्री रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव, लिपिक, प्रखंड कार्यालय, प्राणपुर सम्प्रति अंचल कार्यालय, डंडखोरा को दिनांक 09.06.2009 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के कारण एवं अन्य कतिपय आरोपों के आलोक में इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही का संचालन किया गया। संचालित विभागीय कार्यवाही में पूर्व में दिये गये दण्ड को समानुपातिक रूप से अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने के कारण आरोपी कर्मी के पक्षों की पुनः सुनवाई कर विधिसम्मत आदेष पारित करने का निदेष आयुक्त, पूर्णियाँ प्रमण्डल, पूर्णियाँ द्वारा वाद संख्या-04/2014 द्वारा प्राप्त हुआ। प्राप्त निदेष के आलोक में इस कार्यालय का आदेष ज्ञापांक-570/स्था0 दिनांक 03.05. 2014 द्वारा श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध पुनः सुनवाई/विभागीय कार्यवाही का संचालन हेतु अपर समाहर्त्ता, कटिहार को संचालन पदाधिकारी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्राणपुर को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया।

अपर समाहर्त्ता, कटिहार के पत्रांक-334, दिनांक 06.06.2014 द्वारा संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है, जो निम्न प्रकार है :-

आरोप संख्या-01

श्री रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव, प्रखंड नाजिर प्राणपुर दिनांक 09.06.2009 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। आरोपी का स्पष्टीकरण :-

आरोपी द्वारा इस बिन्दु पर कोई जबाव या पक्ष नहीं रखा गया। संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/मन्तव्य :- निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना द्वारा आरोपी श्री रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव के विरूद्ध निगरानी काण्ड संख्या-65/2009, दिनांक 10.06.2009 दर्ज किया गया है। यह काण्ड सम्प्रति अनुषंधान के क्रम में है।

आरोप संख्या-02 श्री रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव, प्रखंड नाजिर प्राणपुर को गिरफ्तार हो जाने के कारण नजारत का प्रभार अनुमण्डल पदाधिकारी, कटिहार के ज्ञापांक-661, दिनांक 20.06.2009 के आदेषानुसार नियाज अहमद, अंचल निरीक्षक, प्राणपुर को दण्डाधिकारी प्रतिनियुक्त किया गया है तथा उनके समक्ष इन्भेन्ट्री लिस्ट तैयार कर प्रखंड नजारत का प्रभार श्री अंजारूल हक, सहायक, अंचल कार्यालय, प्राणपुर को दिलाया गया है। प्रभार के क्रम में पाया गया कि मो0-4,67,690.99 रूपये का अभिश्रव कम है। अभिश्रव के संबंध में श्रीवास्तव पूर्व नाजिर से इस कार्यालय के ज्ञापांक-1533, दिनांक 19.12.2009 द्वारा साक्ष्य की मांग की गयी है। इनके द्वारा कोई जबाव नहीं दिया गया है।

आरोपी का स्पष्टीकरण :- आरोपी द्वारा इस बिन्दु पर कोई जबाव या पक्ष नहीं रखा गया। प्रस्तोता पदाधिकारी का प्रतिवेदन ः- दिनांक 09.06.2009 को अन्वेषण ब्यूरो द्वारा घूस लेने के आरोप में रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन समय के नजारत का प्रभार अनुमण्डल पदाधिकारी, कटिहार के आदेषानुसार नियाज अहमद, तत्कालीन अंचल निरीक्षक-सह-दण्डाधिकारी के समक्ष जप्ती सूची तैयार कर श्री अंजारूल हक, सहायक, अंचल कार्यालय, प्राणपुर को दिलाया गया था। प्रभार के दौरान सामान्य अभिश्रव का17 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 मिलान करने पर मो0-4,67,690.99 रूपये का अभिश्रव अप्राप्त पाया गया था। यह अभिश्रव किस मद का था, यह अज्ञात है। साथ ही पंचायत निर्वाचन 2006 का अभिश्रव मो0 52,860.20 रूपये भी अप्राप्त पाया गया था, इसके अलावा श्रीवास्तव के द्वारा कल्याण छात्रवृति मद की अग्रिम जो तत्कालीन प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के नाम से मो0 69,100.00 रूपये दर्ज है का भी समायोजन नहीं किया गया है। रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव के पास सामान्य अग्रिम के रूप में मो0 1,12,619.00 रूपये समायोजन हेतु लंबित है, इस प्रकार इनके पास अभिश्रव एवं अग्रिम मद में क्रमषः 4,67,690.9952,860.2069,100. 001,12,519.00 कुल 7,02,170.19 (सात लाख दो हजार एक सौ सत्तर रूपये एवं उन्नीस पैसे) रूपये समायोजन हेतु लंबित है।

संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/मन्तव्य ः- चूंकि आरोपी द्वारा किसी प्रकार का स्पष्टीकरण एवं साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये हैं और न ही अपनी उपस्थिति ही देते हैं, इस प्रकार उक्त आरोप संख्या-02 की पुष्टि प्रस्तोता पदाधिकारी द्वारा दिये गये तथ्य एवं रोकड़ पंजी दिनांक 09.06.2009 पृष्ठ संख्या 154 की छाया प्रति एवं मूल रोकड़ पंजी के अवलोकन से होती है, जो आरोपी श्रीवास्तव के द्वारा उक्त कुल राषि 7,02,170.19 रूपये अग्रिम राषि का समायोजन नहीं कराये या सच्चाई को छिपाने हेतु इस राषि का गबन कर लिये अथवा अभिश्रवों को जानबूझ कर गायब कर दिये।

प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये साक्ष्यों से यह बात प्रमाणित है कि उन्हे प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्राणपुर द्वारा अपने पत्र संख्या-1533, दिनांक 19.12.2009 तथा 1164, दिनांक 28.06.2010 द्वारा अभिश्रव वापस करने एवं समायोजित करने हेतु सूचना भेजी गयी, किन्तु आरोपी द्वारा ली गयी अग्रिम की राषि के समायोजन की कार्रवाई नहीं की गई।

आरोप संख्या-03 श्री रतन लाल, प्रभारी कल्याण पदाधिकारी, प्राणपुर द्वारा छात्रवृति वितरण हेतु अग्रिम राषि मो0-69,000.00 रूपये का समायोजन नहीं किया गया है। श्रीवास्तव, पूर्व नाजिर से स्पष्टीकरण की मांग की गयी है, परन्तु उनके द्वारा कोई जबाव नहीं दिया गया।

आरोपी का स्पष्टीकरण :- आरोपी द्वारा न तो अपना पक्ष रखा गया और न ही अनितम रूप से निर्धारित तिथि (05.06.2014) को उपस्थित ही हुए। इससे पूर्व भी उनके आवेदन पत्र दिनांक 21.05.2014 एवं 28.05.2014 द्वारा किये गये समय की याचना (अनुरोध) को स्वीकृत किया गया था।

प्रस्तोता पदाधिकारी का प्रतिवेदन ः- प्रस्तोता पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि सम्प्रति छात्रवृति वितरण हेतु अग्रिम राषि में मो0 69,000.00 रूपये का समायोजन श्रीवास्तव द्वारा नहीं करवाया गया है।

संचालन पदाधिकारी का प्रतिवेदन/मन्तव्य :- प्रस्तोता पदाधिकारी के प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि श्रीवास्तव द्वारा छात्रवृति वितरण हेतु अग्रिम राषि में मो0 69,000.00 रूपये का समायोजन नहीं किया गया है, जो वित्तीय अनियमितता एवं अस्थायी गबन का मामला बनता है।

आरोपी के संबंध में जाँचोपरान्त अन्तिम सार :- अभिलेख में उपलब्ध कराये गये साक्ष्यों से आरोपी पर लगाये गये आरोप संख्या-02 एवं 03 की पुष्टि होती है। ज्ञातव्य हो कि आरोपी पर पूर्व में चलाये गये विभागी कार्यवाही के क्रम में भी उन्होने लिखित रूप से दिनांक 25.03.2012 को एक आवेदन दिया था कि नवम्बर, 2011 से वेतन नहीं मिला है, वेतन मिलने पर एक मुष्त राषि जमा कर देंगे किन्तु उनके द्वारा आज तक राषि जमा नहीं किया गया और अभिश्रव को जानबूझ कर गायब कर दिया गया। मो0 7,02,170.19 रूपये के अभिश्रव गायब करने एवं निहित राषि के गबन करने में इनकी मुख्य भूमिका है।

अस्तु उपर्युक्त आरोप प्रमाणित है और इसे घोर कदाचार एवं सरकारी राषि के गबन/दुर्विनियोग/कत्तव्यहीनता एवं स्वेच्छाचारिता के श्रेणी में माना जा सकता है।

उपर्युक्त समीक्षा के पष्चात्‌ आरोप संख्या 02 एवं 03 की पुष्टि होती है। आरोपी पर लगाये गये आरोप प्रमाणित है। आरोपी का यह कृत कदाचार (Misconduct) की श्रेणी में आते हैं।

प्रमाणित आरोपों के आलोक में कार्यालय आदेष ज्ञापांक-760/स्था0, दिनांक 06.06.2014 द्वारा श्री श्रीवास्तव से लिखित अभ्यावेदन 15 दिनों के अन्दर देने का आदेष निर्गत किया गया।

श्री श्रीवास्तव से प्राप्त अभ्यावेदन/निवेदन निम्न प्रकार है :- आरोपी का कथन है कि सुनवाई हेतु तीन तिथियों में से दो तिथियों 21.05.2014 एवं 28.05.2014 को मैं संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित हुआ लेकिन अन्तिम तिथि 05.06.2014 को उपस्थित नहीं हो पाये, कारण कि जिला पदाधिकारी महोदय का दिनांक 07.06.2014 को अंचल कार्यालय का निरीक्षण कार्यक्रम निर्धारित था और मैं प्रभारी प्रधान लिपिक होने के कारण निरीक्षण की तैयारी में व्यस्त था और इसलिये अपना पक्ष नहीं रख पाये। संचालन पदाधिकारी द्वारा मेरे विरूद्ध कुछ आरोपों का गठन किया गया है। मेरा स्पष्टीकरण बिन्दुवार तीनों आरोपों के संबंध में निम्न प्रकार है :-

आरोप संख्या-01 ः- मेरे विरूद्ध निगरानी काण्ड संख्या-65/2009, दिनांक 10.06.2009 दर्ज है जिसमें मैं जमानत पर हूॅ और उक्त केष तदर्थ व्यवहार न्यायालय, पटना में वाद संख्या 25/2009 के रूप में सुनवाई के लिये लंबित है और मेरे खिलाफ न्यायालय द्वारा आरोप अब तक सिद्ध नहीं हुआ है।

आरोप संख्या-02 :- इस संबंध में कहना है कि मो0 4,67,690.99 रूपये एवं मो0 52,860.20 रूपये का अभिश्रव जिसका डी0सी0 विपत्र तैयार करने हेतु छाया प्रति कराने बस्तौल चौक ले गये थे। बस्तौल से पुनः प्रखंड कार्यालय, प्राणपुर आने के क्रम में थैली से कहीं गिर गया, जिसे काफी ढ़ूढ़ने पर भी नहीं मिला। इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी,18 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 प्राणपुर को आवेदन देकर सूचित किया गया एवं उनके आदेष एवं अनुषंसा पर घटना के बारे में प्राणपुर थाना में सनहा दर्ज किया गया जिसका सनहा नं0-207/2007 दिनांक 12.03.2007 है। अब असमायोजित अग्रिम राषि एवं अग्रिम राषि के संबंध में कहना है कि मैं उपरोक्त दोनों राषि तथा अभिश्रव की राषि समायोजन करना चाहता हूॅ परन्तु लम्बी अवधि तक निलंबित रहने एवं वेतनमान निम्नतम प्रक्रम पर आ जाने के कारण आर्थिक स्थिति दयनीय हो जाने के फलस्वरूप राषि जमा करने में असमर्थ रहा हूॅ।

अतः स्थिति पर सौहार्द पूर्वक विचार करते हुए राषि का किष्त निर्धारण कर जमा करने का निदेष देने की कृपा की जाय।

आरोप संख्या-03 :- इस संबंध में मैं अपना स्पष्टीकरण आरोप संख्या-02 में दे चुका हूॅ। उपरोक्त परिस्थिति में मेरा कहना है कि न तो जानबूझ कर उपरोक्त राषि का अभिश्रव गायब किये है और न ही उपरोक्त राषि का गबन किया हूॅ। इस संबंध में मेरे द्वारा पूर्व में भी लिखित अभ्यावेदन दिया गया है।

अतः प्रार्थना है कि मेरी स्थिति को देखते हुए उचित आदेष प्रदान करने की कृपा की जाय। इसके लिये मैं श्रीमान्‌ का सदा आभारी बना रहूॅगा।

निष्कर्ष संचालन पदाधिकारी के प्रतिवेदन की समीक्षा के पश्चात आरोपी श्री श्रीवास्तव को बिहार सरकारी सेवक(वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (यथा संषोधित) के नियम 14 में विनिदृष्ट वृहत शास्तियों में से कोई अधिरोपित किये जाने योग्य मानकर कार्यालय ज्ञापांक संख्या-760/स्था0, दिनांक 06.06.2014 द्वारा उन्हें पुनः अभ्यावेदन करने का अवसर प्रदान किया गया। आरोपी कर्मी द्वारा दिनांक 17.06.2014 को समर्पित अभ्यावेदन की समीक्षा, अभिलेख में संलग्न कागजातों के आलोक में की गई। अभ्यावेदन में उल्लेख किया गया है कि असमायोजित अग्रिम राषि मो0 4,67,690.99 रूपया एवं मो0 52,800.20 रूपया का अभिश्रव, जिसका डी0सी0 विपत्र तैयार करने हेतु छाया प्रति कराने बस्तौल चौक ले गये थे लौटते वक्त प्राणपुर आने के क्रम में थैले से कहीं गिर गया, जिसे काफी ढ़ूढ़ने पर भी नहीं मिला, आरोपी कर्मी का कथन है कि उक्त राषि का समायोजन करना चाहता हूॅ, परन्तु लम्बी अवधि तक निलंबित रहने एवं वेतनमान निम्नतम प्रक्रम पर आ जाने के कारण आर्थिक स्थिति दयनीय हो जाने के फलस्वरूप राषि जमा करने में असमर्थ रहा हूॅ। उल्लिखित बातें अप्रमाणिक/साक्ष्य विहीन एवं पूर्व के कथन को पुनरावृति मात्र है। आरोपी ऐसा कोई ठोस साक्ष्य/तथ्य प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे कि उनपर लगाये गये आरोप प्रमाणित न हो।

अस्तु मेरा अभिमत है कि उक्त घटना वर्ष 2007 में घटित हुई है, जिस समय आरोपी कर्मी न तो निलंबित थे और न ही निम्नतम वेतन प्रक्रम पर थे। करीब सात वर्ष बीत जाने के बाद भी आरोपी कर्मी द्वारा कम पाये गये अभिश्रव मद की राषि जमा नहीं करना, इस बात का द्योतक है कि उक्त राषि जमा करने में इनकी कोई रूचि नहीं रही है तथा इनकी मंषा सरकारी राषि गबन करने की है।

आरोपी अपने कर्त्तव्यों एवं दायित्वों के प्रति अनिष्ठावान, लापरवाह एवं स्वेच्छाचारी पाये गये है तथा भ्रष्ट आचरण करते हुए सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 के नियम 3 के प्रावधानों के प्रतिकूल कार्य करने के दोषी पाये गये हैं। अतः श्री रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव, लिपिक-सह-नाजिर, प्रखंड कार्यालय, प्राणपुर वर्त्तमान अंचल कार्यालय, डंडखोरा के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में प्रमाणित पाये गये आरोपों से पूर्णतः सहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 (यथा संषोधित-2007) के नियम 14 (xi) के अनुरूप मैं प्रकाष कुमार, भा0प्र0से0, जिला पदाधिकारी-सह-अनुषासनिक प्राधिकार, कटिहार श्री श्रीवास्तव को उक्त नियमावली नियम 18(6) में निहित शक्तियों के आलोक में आदेष निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्त (DISMISS) करता हूँ।

श्री रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव, लिपिक-सह-नाजिर से संबंधित विवरणी निम्न प्रकार है :-

1. नाम ः- श्री रविषंकर प्रसाद श्रीवास्तव 2. पिता का नाम ः- स्व0 लक्ष्मी प्रसाद 3. पदनाम ः- लिपिक-सह-नाजिर 4. जन्म तिथि ः- 05.07.1962 5. नियुक्ति की तिथि ः- 19.02.1994 6. वेतनमान ः- 9300-34800 ग्रेड पे :- 4200 7. स्थायी पता ः- ग्राम-बलवा, पो0- मधुवापुर, जिला-मधुबनी।

आदेष का तामिला आरोपी के स्थायी पता पर भी सुनिष्चित कराया जाय।

आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, समार्हर्त्ता।

——— 24 मई 2014 सं॰ 663—भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार के पत्रांक-899/राजस्व, दिनांक 24.07.2012 द्वारा प्रतिवेदन प्राप्त हुआ कि श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, लिपिक, अनुमण्डल राजस्व, कटिहार को आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के पुलिस उपाधीक्षक द्वारा दिनांक 24.07.2012 को रिष्वत लेते पकड़े जाने के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। तद्‌ोपरान्त इन्हें आदेष ज्ञापांक-1413/स्था॰, दिनांक 31.07.2013 द्वारा गिरफ्तारी की तिथि से निलंबित किया गया।19 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 कारागार से छूटने के पश्चात्‌ भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार के पत्रांक-1323/राजस्व, दिनांक 14.11.2012 द्वारा श्री श्रीवास्तव को दिनांक 14.11.2012 को योगदान देने की सूचना प्राप्त हुई। उनके योगदान को स्वीकृत कर कार्यालय आदेष ज्ञापांक-2166/स्था॰, दिनांक 28.11.2012 द्वारा पुनः निलंबित करते हुए इनका मुख्यालय अनुमण्डल कार्यालय, मनिहारी निर्धारित किया गया। कार्यालय आदेष संख्या-136/स्था॰, दिनांक 02.02.2013 द्वारा इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु अपर समाहर्त्ता, विभागीय जाँच, कटिहार को संचालन पदाधिकारी तथा भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया। अपर समाहर्त्ता, विभागीय जाँच-सह-संचालन पदाधिकारी के पत्र संख्या-261/भू0ह0, दिनांक 27.06.2013 द्वारा प्राप्त संचालन प्रतिवेदन के आलोक में इस कार्यालय का आदेष ज्ञापांक-1387/स्था0, दिनांक 08.10.2013 द्वारा निलंबन से मुक्त किया गया। पुनः भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार के पत्रांक-135/राजस्व, दिनांक 31.01.2014 द्वारा श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध पूरक आरोप प्रपत्र 'क' प्राप्त हुआ तथा कार्यालय आदेष ज्ञापांक-135/स्था0, दिनांक 01.02.2014 द्वारा निलंबित करते हुए इनका मुख्यालय अनुमण्डल कार्यालय, बारसोई निर्धारित किया गया तथा विभागीय कार्यवाही संचालन हेतु अपर समाहर्त्ता, कटिहार को संचालन पदाधिकारी एवं भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार को प्रस्तोता पदाधिकारी नियुक्त किया गया। अपर समाहर्त्ता, कटिहार का पत्रांक-169, दिनांक 20.03.2014 द्वारा संचालन प्रतिवेदन प्राप्त हुआ जिसके अनुसार आरोप प्रमाणित होने की पुष्टि होती है।

श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, लिपिक, अनुमण्डल राजस्व, कटिहार के विरूद्ध गठित आरोप, आरोपी कर्मी का स्पष्टीकरण एवं संचालन पदाधिकारी के मंतव्य की संक्षिप्त विवरणी निम्नवत्‌ है :-

आरोप संख्या-01 श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, लिपिक, भूमि सुधार उप समाहर्त्ता कार्यालय, कटिहार को दिनांक 24.07.2012 को आर्थिक अपराध, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा रिष्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। गठित पूरक आरोप का विवरण :- आरोप संख्या-01 निगरानी आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना द्वारा की गई छापामारी के पश्चात रिष्वत के साथ आपकी गिरफ्तारी एवं कारागार में निरूद्ध होने के उपरान्त आपके कुकृत्य की जाँच करने के पश्चात पाये गये सदृष्य विषयक (बटाईदारी वाद धारा-48 ई0बी0टी0 एक्ट) वाद संख्या-905/11-12, 600/ 09-10, 750/11-12, 594/09-10, 530/09-10, 857/11-12, 858/11-12, 826/11-12, 786/11-12, 720/11-12 एवं 694/11-12 में तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार द्वारा कुछ अभिलेखों में पारित आदेष की ''प्रतिवादी को सूचना निर्गत करें'' के पश्चात भी आपने सूचना निर्गत नहीं की और अभिलेख को अनियमित रूप से नियमित करते हुए इस बात का उल्लेख करते हुए कि ''वादी द्वारा वाद में अभिरूचि नहीं रहने के कारण वाद को खारिज किया जाता है'' लिखकर तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार से मामला को रफा-दफा करा दिया गया। उल्लेखनीय है कि सभी मामले भूस्वामियों के पक्ष में ही निष्पादित हुए और समाज के निचले पायदान में खड़े अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति /पिछड़ा वर्ग के सिकमीदार के हित को ध्वस्त कर दिया गया। इन मामलों में से अधिकांष मामलो में रिविजनल सर्वे खतियान में उनके पिता/दादा का नाम सिकमीदार दर्ज है।

उपर्युक्त अभिलेखों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि आपने तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार को समस्त पहलुओं का अवलोकन न कराते हुए बटाईदारी वाद के बटाईदार/ सिकमी खतियानदार से रिस्वत प्राप्त नहीं होने के कारण विधि विरूद्ध जा कर मामले को समाप्त करने में रूचि रखे है।

आरोपी का स्पष्टीकरण :- 01- आरोपी का कथन है कि जिला पदाधिकारी, कटिहार के आदेष ज्ञापांक-135, दिनांक 01.02.2014 द्वारा मुझे बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 (यथा संषोधित) के नियम 9(1) क, ग एवं 9(6) के तहत पुनः निलंबित करते हुए मेरा मुख्यालय अनुमण्डल कार्यालय, बारसोई निर्धारित किया गया है तथा पूरक प्रपत्र ''क'' द्वारा कुछ नये आरोप लगाये गये है। यह आरोप पत्र मुझे दिनांक 05.02.2014 के अपराह्‌न में प्राप्त कराया गया है। 02- कि आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना के पुलिस उपाधीक्षक द्वारा दिनांक 24.07.2012 को मेरी गिरफ्तारी के फलस्वरूप जिला स्थापना उप समाहर्त्ता, कटिहार के आदेष ज्ञापांक-1413, दिनांक 31.07.2013 द्वारा 24.07.2012 के प्रभाव से निलंबित किया गया था।

03- कि वर्णित गिरफ्तारी के बाद जमानत मिल जाने के फलस्वरूप मुझे 12.11.2012 को संध्या में जेल से रिहा किया गया और मैने 14.11.2012 को अपने पदस्थापन कार्यालय ( भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार) में योगदान किया। 04- कि मेरे योगदान के बाद वर्णित नियमावली के नियम 9(2) के आलोक में वरीय उप समाहर्त्ता, जिला स्थापना प्रषाखा, कटिहार के आदेष ज्ञापांक-2166/स्था0, दिनांक 28.11.2012 द्वारा मुझे पुनः निलंबित कर मुख्यालय अनुमण्डल कार्यालय, मनिहारी निर्धारित किया तथा विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गई।

05- कि विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा जाँच प्रतिवेदन समर्पित किये जाने के बाद वरीय उप समाहर्त्ता, जिला स्थापना प्रषाखा, कटिहार के आदेष ज्ञापांक-1024/स्था0, दिनांक 29.07.2013 द्वारा मुझसे द्वितीय कारण पृच्छा की गई। जाँच प्रतिवेदन में कहा गया कि आरोपी ने तो गिरफ्तारी की बात स्वीकार की है लेकिन यह भी कहा कि उन्हे झूठे एवं मनगढ़ंत आरोप पर जबरन गिरफ्तार किया गया था। प्रस्तोता पदाधिकारी द्वारा भी कहा गया था कि तथाकथित रिष्वत का पैसा फर्ष पर गिरा हुआ था। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। मैने अपना द्वितीय कारण पृच्छा दिनांक 14.08.2013 को समर्पित किया।20 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 06- कि प्रतिवेदन पर सम्यक विचारोपरान्त जिला पदाधिकारी, कटिहार के आदेष ज्ञापांक-1387, दिनांक 08.10. 2013 द्वारा मुझे निलंबन से मुक्त किया गया एवं मुकदमें में अन्तिम निर्णय होने तक विभागीय कार्यवाही स्थगित की गई। आदेष के अनुपालन में मैने जिला स्थापना कार्यालय में योगदान किया। विदित हो कि इस ज्ञापांक-1387, दिनांक 08.10. 2013 की एक प्रति आयुक्त महोदय को भी भेजी गई थी, जहाँ से कोई प्रतिकूल आदेष न होना प्रमाणित होता है कि इस आदेष से वे भी संतुष्ट रहे।

07- कि अब प्रषासनिक दृष्टिकोण से जिला पदाधिकारी के आदेष ज्ञापांक-135, दिनांक 01.02.2014 द्वारा मुझे पुनः निलंबित कर एक नया आरोप पत्र उपलब्ध कराया गया। यह स्पष्ट नहीं होता है कि अचानक ऐसा प्रषासनिक कारण क्या हो गया क्योंकि मेरे कारण न किसी विधि व्यवस्था की समस्या आयी है और न दंगा फसाद हुआ है और न मैने जनहित के विरूद्ध कुछ किया है।लगता है मुझे पुनः निलंबित करना था, इसलिए किया। पूरक प्रपत्र ''क'' में प्राप्त आरोपों पर मेरा स्पष्टीकरण निम्न प्रकार है :-

क.- वाद संख्या-205/11-12 एवं अन्य के संबंध में कहा गया है कि पदाधिकारी के इस आदेष कि प्रतिवादी को सूचना निर्गत करें, के वावजूद मैने सूचना निर्गत नहीं की। इस संबंध में मुझे कहना है कि मैने वर्ष 2009 में उपस्थापक का प्रभार लिया। सूचना निर्गत करने की व्यवस्था इस न्यायालय में यह रही है कि वाद दायर करने वाले व्यक्ति के आवेदन यानि अर्जी पर सुनवाई के बाद विपक्षी को सूचना निर्गत करने का आदेष होता है। उसके बाद वादी के द्वारा टिकट/लिफाफा एवं अर्जी की प्रति जितने पक्षकार होते हैं, उतने संख्या में दाखिल किया जाता है। तदोपरान्त सूचना निबंधित डाक से भेजा जाता रहा है। क्योंकि इस न्यायालय में प्रोसेस प्यून की व्यवस्था नहीं थी। मेरे बाद भी वैसा किया जाता रहा है। सूचना निर्गत करने के लिये वादी को लिफाफा एवं टिकट देना होता है, जो उसने नहीं की। फलस्वरूप सूचना निर्गत करना संभव नहीं था। न्यायालय में अवस्थित अन्य तमाम अभिलेखों से इसकी सम्पुष्टि की जा सकती है। इन्ही स्थितियों के आदेष फलक में पीठासीन पदाधिकारी द्वारा रूटिन वर्क में लिखा गया कि वादी द्वारा बाद में अभिरूचि नहीं रहने के कारण वाद को खारिज किया जाता है।

ख.- कि भूमि सुधार उप समाहर्त्ता द्वारा आदेष पत्रक पढ़कर ही हस्ताक्षर किया जाता है। इन अभिलेखों में तो इन अंकित आदेषों को स्वयं उन्होने ही लिखा है। मेरा हैण्डराईटिंग नहीं है। अच्छा होगा कि इसका मिलान एक वार फिर कर लिया जाय। वादी के अभिरूचि के आभाव में वाद खारिज हुआ है। वाद खारिज होने के बाद भी वाद को पुर्नजिवित करने के लिये न्यायालय में कोई आवेदन वादी की ओर से दाखिल नहीं हुआ ना ही किन्ही वरीय पदाधिकारी के पास इस आषय का कोई षिकायत हुआ है। इससे स्पष्ट है कि वादी को इन वाद में अभिरूचि नहीं रहा होगा। सभी वादों को प्रविष्टि की बिन्दु पर सुनवाई हेतु रखा गया था, जैसा कि मुझे उपलब्ध कराये गये अभिलेख आदेष फलक की छाया प्रति को देखने से पता चलता है, वाद प्रविष्टि की बिन्दु पर रखा गया है। वादी के अभिरूचि के अभाव में पीठासीन पदाधिकारी के द्वारा स्वहस्तलिखित आदेष के द्वारा वादी के अभिरूचि के अभाव में वाद खारिज हुआ है। विदित हो कि वर्णित अभिलेखों में कुछ अन्तिम आदेष उन स्थितियों का है, जब मै या तो निलंबित था या जेल में था। पुनः इसे स्पष्ट करना चाहूॅगा कि अभिलेख संख्या 905/11-12, 857/11-12, 858/11-12, 826/11-12, 786/11-12, 816/11-12 एवं 880/11-12 को मेरे निलंबन अवधि में पदाधिकारी द्वारा खारिज किया गया है। इसी प्रकार अभिलेख संख्या-750/11-12 एवं 720/11-12 को जब खारिज किया गया था, तब मै जेल में था। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि मेरे विरूद्ध जुटाये गये आरोप निराधार एवं असत्य है।

ग.- कि आरोप पत्र में वर्णित इस तथ्य, जो मुझसे संबंधित है इसका उल्लेख मैं उपर अंकित किया हूॅ। पीठासीन पदाधिकारी के आदेष पर किसी प्रकार का टिप्पणी करना मेरे पद के अनुरूप नहीं है। अन्तिम आदेष के संबंध में पीठासीन पदाधिकारी ही बता सकते है। मेरा दायित्व अभिलेख का उपस्थापन करना था तथा विपक्षी को सूचना निर्गत करने का आदेष पीठासीन पदाधिकारी के द्वारा अभिलेख में करने के बाद टिकट/लिफाफा एवं अर्जी की छाया प्रति विपक्षी की संख्या के अनुरूप प्राप्त होने पर निबंधित डाक से सूचना भेजा जाता था। पीठासीन पदाधिकारी के द्वारा प्रविष्टि की बिन्दु पर सुनवाई हेतु उक्त अभिलेखों को रखा गया परन्तु वादी ने अभिरूचि नहीं लिया, तब वाद खारिज हुआ है इसलिए बटाईदारी वाद के बटाईदार/सिकमीदार/खतियानदार से रिष्वत प्राप्त होने या न होने का कोई प्रष्न नहीं है। वाद में खारिज होने में मेरी संलिप्तता की जो बात है, पूर्णरूपेण गलत है। आरोप पत्र के अन्त में कहा गया है कि रिष्वत प्राप्त नही होने के कारण ऐसा किया गया है। इस बिन्दु पर मेरे लिये कुछ कहना उचित नहीं होगा, क्योंकि यह मुझसे संबंधित नहीं है बल्कि एक पदाधिकारी से संबंधित है।

उक्त 14 वादों में मात्र 04 वादों में खतियान की प्रति संलग्न थी जो आरोप पत्र के साथ प्राप्त कराया गया है और सभी अभिलेख अपूर्ण छाया प्रति आरोप पत्र के साथ प्राप्त कराया गया है, फिर भी आदेष के अनुपालन में कारण पृच्छा समर्पित कर रहा हूॅ।

मैने अपने सेवाकाल में कर्त्तव्यनिष्ठा एवं इमानदारी के साथ सेवा के नियमों को ध्यान में रखते हुए अपने कार्यो का निर्वहन किया है। मैने न कभी रिष्वत ली है, और न नियम विरूद्ध कार्य किया है। मेरी सेवा मात्र दो साल बची है। अतः अनुरोध है कि उपरोक्त तथ्यों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए मेरा स्प्ष्टीकरण स्वीकार करने एवं आरोप/निलंबन से मुक्त करने की कृपा की जाय। इसके लिये श्रीमान्‌ का आभारी रहूॅगा।

संचालन पदाधिकारी का मंतव्य :- संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रतिवेदित किया गया है कि पूरक आरोप पत्र की समीक्षा, श्रीवास्तव द्वारा दाखिल कारण पृच्छा, आरोपी द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर प्रस्तोता पदाधिकारी के मंतव्य का अवलोकन एवं उभय पक्ष के द्वारा किये गये बहस के पश्चात्‌ निम्नलिखित तथ्य स्पष्ट हुए है :-

21 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015

1. आरोप पत्र में वर्णित बिहार कास्तकारी अधिनियम 1948 ई0 से संबंधित वाद संख्या-905/12, 530/09-10, 826/11-12, 786/11-12, 720/11-12, 694/11-12, 600/09-10, 750/11-12, 816/11-12, 594/09-10 एवं 549/09-10 के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार द्वारा आदेष फलक में उल्लिखित आदेष ''विपक्षी को सूचना दें'' के वावजूद विपक्षी के नाम सूचना तैयार नहीं की गई और न ही उसे अभिलेख में तैयार कर हस्ताक्षर हेतु प्रस्तुत किया गया। उदाहरण स्वरूप- बटाईदार वाद संख्या (48E BT Act) 905/11-12, 530/09-10, 826/11-12, 720/11-12, 694/11-12, 600/09-10, 750/11-12, 816/11-12, 594/09-10 एवं 549/09-10 में निम्नलिखित त्रुटियॉ पायी गई हैः-

क पीठासीन पदाधिकारी (भूमि सुधार उप समाहर्त्ता, कटिहार) के आदेष विपक्षी 8 को सूचना निर्गत करें का अनुपालन अगली निर्धारित किये गये तिथियों में कभी नहीं किया गया। ये तिथियॉ 4 से 10 बार तक (4-5 सप्ताहों के अन्तराल पर) पायी गई है।

ख कई अभिलेखों का उपस्थापन निर्धारित तिथियों को नहीं किये गये बल्कि इन्हे नियमित करने के उद्देष्य से कई तिथियों के समाप्ति के पश्चात एक बार विभिन्न तिथियों का अंकन करते हुए किया गया यथा वाद संख्या 530/09-10, 826/11-12, 720/11-12, 694/11-12, 750/11-12, 816/11-12, 594/09-10 एवं 549/09-10

ग आरोप पत्र के साथ संलग्न सारे अभिलेखों के साक्ष्यों के अवलोकन से स्पष्ट है कि सारे अभिलेखों को खारिज कर दिये गये जबकि पक्ष को सूचना निर्गत ही नहीं की गई। अधिकांष मामलों में श्री श्रीवास्तव दोषी पाये गये क्योंकि उन्होने पीठासीन पदाधिकारी के द्वारा अभिलेखों में पारित आदेषों, विपक्षी को सूचना निर्गत करें का अनुपालन नहीं किया। घ आरोपी का अपने बचाव में यह कथन कि आरोपी द्वारा डाक से सूचना भेजे जाने का खर्चा नहीं दिया गया, तथ्यात्मक नहीं है क्योंकि उन्होने किसी भी अभिलेख में सूचना तैयार कर संधारित रखने एवं इस आषय का उल्लेख अभिलेख में किये जाने का प्रमाण नहीं पाये गये।

मन्तव्यः- सारे तथ्यों की विवेचना एवं आरोपों के साक्ष्यों के परीक्षण उपरान्त आरोपी पर आरोप प्रमाणित हुए हैं एवं आरोपी श्रीवास्तव स्वेच्छाचारिता, कर्त्तव्य के प्रति लापरवाही एवं वरीय अधिकारी के आदेष की बार-बार अवहेलना करने के साथ-साथ अनेकों बटाईदारी वाद खारिज कराने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करने का दोषी पाये गये है। इनके ऐसे कृत्यों से न केवल दर रैयतों के अधिकार खंडित हुए है बल्कि प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से भू स्वामियों को मदद पहुॅचाने का काम किया गया है।

आरोपी का उपर्युक्त आचरण/कृत्य कदाचार (Misconduct) की श्रेणी में परिभाषित किया जा सकता है। श्री श्रीवास्तव से इस कार्यालय का आदेष ज्ञापांक-560/स्था॰, दिनांक 29.04.2014 द्वारा 15 दिनों के अंदर द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित करने का आदेष दिया गया, परन्तु इनके द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा समर्पित न करके समय विस्तार की माँग की गई है, जिससे प्रतीत होता है कि इनकी मंषा विभागीय कार्रवाई को मात्र लम्बित रखे जाने के है एवं प्रमाणित आरोपों को गलत साबित करने के बारे में इन्हें कुछ नहीं कहना है।

आरोपी ऐसा कोई ठोस तथ्य/साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके जिससे कि उनपर लगाया गया आरोप प्रमाणित न हो। अतः श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, लिपिक, अनुमण्डल राजस्व, कटिहार के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही में संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाये गये आरोपों से सहमत होते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005(यथा संषोधित-2007) के नियम 14 के तहत निहित शक्तियों के आलोक में मैं प्रकाष कुमार, भा0प्र0से0, समाहर्त्ता, कटिहार श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, लिपिक, अनुमण्डल राजस्व, कटिहार को आदेष निर्गत की तिथि से सेवा से बर्खास्त (DISMISS) करता हूँ।

श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव से संबंधित विवरणी निम्न प्रकार है :- 1. नाम ः- श्री वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव 2. पिता का नाम ः- स्व0 बालेष्वर प्रसाद सिंह 3. पदनाम ः- लिपिक 4. जन्म तिथि ः- 22.02.1956 5. नियुक्ति की तिथि ः- 05.03.1994 6. वेतनमान ः- 9300-34800 ग्रेड पे :- 4200 7. स्थायी पता ः-ग्राम-बारीनगर, पो0-गुरूबाजार, थाना-बरारी, जिला-कटिहार

आदेश से, (ह॰)-अस्पष्ट, समार्हर्त्ता।

——— सं॰ 08/नि॰था॰-11-07/2014-12418 सा॰प्र॰ सामान्य प्रशासन विभाग ——— संकल्प 5 सितम्बर 2014 श्री वेद प्रकाश, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-89/2011, तत्कालीन अंचलाधिकारी गरखा, सारण (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के विरूद्ध —षि ऋण के वितरण में अनियमितता बरतने के लिए भारतीय दंड विधान संहिता की धारा-420, 463, 467, 471,22 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 477ए एवं 120ए के तहत प्राथमिकी दर्ज करते हुए निगरानी थाना कांड सं॰-032/1986 दर्ज किया गया था। उक्त वाद में विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर द्वारा दिनांक 12.11.2012 को न्याय निर्णय पारित किया गया जिसमें श्री वेद प्रकाश को दोषी करार देते हुए उन्हें पाँच वर्ष के सामान्य कारावास की सजा सुनाई गयी। 2. निगरानी वाद में पारित न्याय निर्णय दिनांक 12.11.2012 के आलोक में विभागीय पत्रांक-3749 दिनांक 20.03. 2014 द्वारा श्री वेद प्रकाश से इस दंड के प्रस्ताव के साथ स्पष्टीकरण की माँग की गयी कि क्यों नहीं आपका शत-प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से जब्त कर लिया जाय। उक्त आलोक में श्री प्रकाश ने अपने पत्र दिनांक 07.04.2014 द्वारा अभ्यावेदन समर्पित किया जिसमें उनके द्वारा स्पष्ट किया गया है कि माननीय विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर द्वारा दिनांक 12.11. 2012 को पारित न्याय निर्णय में उन्हें दी गयी सजा के विरूद्ध उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय, पटना में क्रिमिनल अपील (एस॰जे॰) सं॰-935/2012 दायर किया है। जिसे न्यायालय द्वारा सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया गया है। साथ ही उनेक द्वारा संदर्भित न्याय निर्णय के उपर ही असंतोष व्यक्त किया गया।

3. पूरे मामलें की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि माननीय विशेष न्यायालय निगरानी, मुजफ्फरपुर द्वारा दिनांक 12.11.2012 को पारित न्याय निर्णय के आलोक में श्री वेद प्रकाश का स्पष्टीकरण तार्किक नहीं है। अतः श्री प्रकाश का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है तथा उनके विरूद्ध आरोप प्रमाणित है। अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा इस प्रमाणित आरोप के लिए समीक्षोपरांत यह निर्णय लिया गया कि बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43(क एव ख) के तहत श्री प्रकाश का पूर्ण पेंशन (100 प्रतिशत) स्थायी रूप से रोक रखी जाय।

4. अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा अनुमोदित उक्त दंड प्रस्ताव पर विभागीय पत्रांक-7273, दिनांक 02.06.2014 द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग सेे परार्मश की माँग की गयी। आयोग के पत्रांक-1183 दिनांक 20.08.2014 द्वारा विभागीय दंड प्रस्ताव से सहमति व्यक्त की गयी है।

5. अतः सम्यक्‌ विचारोपरांत श्री वेद प्रकाश तत्कालीन अंचलाधिकारी गरखा, सारण (सम्प्रति सेवानिवृत्त) के पेंशन की शत प्रतिशत राशि स्थायी रूप से रोकी जाती है।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, अपर सचिव।

——— सं॰ 08/आरोप-01-123/2014-12803 सा॰प्र॰ ——— संकल्प 15 सितम्बर 2014 श्री तारा रजक, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-300/2004, तत्कालीन उपाध्यक्ष, क्षेत्रीय विकास प्राधिकार, मुजफ्फरपुर (सम्प्रति दिनांक 31.07.2008 को वार्धक्य सेवानिवृत्त) के विरूद्ध नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-1006, दिनांक 29.02.2008 द्वारा प्रतिवेदित आरोपों यथा बिना बोर्ड की अनुमति के योजनाओं की स्वी—ति देने, योजना कार्यान्वयन में अनियमितता बरतने, योजनाओं को विखंडित कर स्वी—ति देने आदि के आरोप में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9937, दिनांक 07.10.2009 द्वारा बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 बी के अन्तर्गत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। कार्यवाही के संचालन हेतु आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर को जाँच प्राधिकार नियुक्त किया गया था। 2. आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर के पत्रांक-216, दिनांक 02.05.2012 द्वारा जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया जिसमें श्री रजक के विरूद्ध गठित सभी आरोपों (1-7) को अप्रमाणित प्रतिवेदित किया गया। प्राप्त जाँच प्रतिवेदन पर विभागीय असहमति की बिन्दुओं का उल्लेख करते हुए विभागीय पत्रांक-5717, दिनांक 09.04.2013 द्वारा श्री रजक से द्वितीय कारण-पृच्छा की गयी जिसका उत्तर उनके आवेदन दिनांक 18.04.2013 द्वारा समर्पित किया गया। 3. विभागीय कार्यवाही में प्राप्त जाँच प्रतिवेदन एवं उससे विभागीय असहमति के बिन्दु तथा श्री रजक से प्राप्त द्वितीय कारण-पृच्छा उत्तर की समीक्षा के क्रम में बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) अथवा नियम-139 अन्तर्गत श्री रजक के पेंशन से कटौती के बिन्दु पर विधि विभाग से परामर्श की माँग की गयी। विधि विभाग द्वारा मंतव्य दिया गया की आरोपित पदाधिकारी पर लगाये गये आरोप दिनांक 29.03.2005 से 19.06.2005 की बीच की अवधि का है जो उनके विरूद्ध प्रारंभ की गयी विभागीय कार्यवाही की तिथि 07.10.2009 से 4 वर्ष पूर्व की घटना से संबंधित है।

4. वर्णित तथ्यों के आलोक में पूरे मामलें की अनुशासनिक प्राधिकार द्वारा समीक्षा की गयी एवं पाया गया कि श्री रजक के विरूद्ध संचालित की गयी विभागीय कार्यवाही की पूरी प्रक्रिया बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) अन्तर्गत प्रारंभ से ही कालबाधित है। अतः सम्यक्‌ विचारोपरांत इस मामलें को संचिकास्त किया जाता है।

आदेशः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, अपर सचिव।23 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 सं॰ 08/आरोप-01-731/2014-16490 सा॰प्र॰ ——— संकल्प 1 दिसम्बर 2014 निगरानी विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-7671, दिनांक 26.10.2010 द्वारा श्री विनय कुमार श्रीवास्तव, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-153/2008, तत्कालीन सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल, भागलपुर के विरूद्ध क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के अस्थायी प्रभार के दौरान वाहनों का अनियमित परमिट निर्गत करने का आरोप प्रतिवेदित किया गया है। इन आरोपों के लिए परिवहन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-3757, दिनांक 02.09.2011 द्वारा श्री श्रीवास्तव के विरूद्ध गठित आरोप प्रपत्र 'क' पर विभागीय पत्रांक-11190, दिनांक 29.09.2011 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। 2. उक्त आलोक में श्री श्रीवास्तव द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण दिनांक 02.11.2011 पर सचिव, परिवहन विभाग, बिहार, पटना से विभागीय पत्रांक-13611, दिनांक 14.12.2011 द्वारा मंतव्य की माँग की गयी। श्री श्रीवास्तव के स्पष्टीकरण पर प्रमंडलीय आयुक्त, भागलपुर द्वारा गठित मंतव्य परिवहन विभाग, बिहार, पटना के पत्रांक-2227, दिनांक 10.04.2014 द्वारा उपलब्ध कराया गया। 3. आरोपित पदाधिकारी श्री विनय कुमार श्रीवास्तव के स्पष्टीकरण एवं प्रमंडलीय आयुक्त, भागलपुर के द्वारा दिये गये मंतव्य की समीक्षा के उपरांत पाया गया है कि :-

(i) श्री श्रीवास्तव के द्वारा सचिव, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार के अस्थायी प्रभार के दौरान दो वाहन (बस सं॰-बी॰आर॰-11सी॰-1893 एवं बस बी॰आर॰-10बी॰-8380) का परमिट निर्गत किया गया। चूंकि परिचालन के मार्ग में दूसरें राज्य का छोटा अंश पड़ता था, जो कि 16 किलोमीटर से कम है, फलतः मोटर वाहन की धारा-88 के प्रावधान के तहत ऐसे मामलें अन्तर्राज्यीय परमिट की श्रेणी में नहीं आते है। अतः आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण आरोप सं॰-1 के आलोक में स्वीकार योग्य है। (ii) आरोपित पदाधिकारी द्वारा ट्रक सं॰-बी॰आर॰-10बी॰-1447 एवं बी॰आर॰-10 जी॰-1199 का अन्तर्राज्यीय परमिट निर्गत किया गया है। जिसमें से मात्र एक ट्रक सं॰- बी॰आर॰-10बी॰-1447 का परमिट बिना प्राधिकार की बैठक से अनुमोदन हुए निर्गत किया गया।

4. वर्णित प्ररिपेक्ष्य में हांलकि आरोपित आरोप सं॰-2 के आलोक में दोषी है, लेकिन श्री श्रीवास्तव की दिनांक 31. 07.2010 को हुई वार्धक्य सेवानिवृत्त के कारण बिहार पेंशन नियमावाली के नियम-43 अन्तर्गत उनके विरूद्ध कार्यवाही कालबाधित है। अतः सम्यक्‌ विचारोपरांत मामले को संचिकास्त किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, अपर सचिव।

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सं॰ 08/आरोप-01-06/2014-16753 सा॰प्र॰

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संकल्प

5 दिसम्बर 2014

चूँकि बिहार-राज्यपाल को यह विश्वास करने का कारण है कि श्री प्रभात कुमार झा, बि॰प्र॰से॰, (कोटि क्रमांक-966/11) तत्कालीन वरीय उप समाहर्त्ता, गया-सह-जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अरवल (सम्प्रति प्रभारी पदाधिकारी, जिला मध्याह्‌न भोजन योजना, सारण) के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, गया के पत्रांक-165, दिनांक 05.03.2014 द्वारा अरवल जिला में भू-अर्जन की कार्रवाई में नियम एवं प्रक्रिया का उल्लंघन करने, जिला पदाधिकारी के अनुमोदन के बिना मनमाने ढंग से निर्णय लेने तथा अनावश्यक विलम्ब करने का आरोप प्रतिवेदित किया गया, जैसा कि अनुलग्न प्रपत्र 'क' में वर्णित है जिसमें वृहद जाँच की आवश्यकता है।

2. अतः श्री झा के विरूद्ध अनुलग्न अनुबंध में अन्तर्विष्ट आरोपों की सांगोपांग जाँच, बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(2) में विहित रीति से कराने का निर्णय लिया जाता है। इस विभागीय कार्यवाही के संचालन पदाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त, मगध प्रमंडल, गया एवं उपस्थापन/प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, गया द्वारा मनोनीत पदाधिकारी होंगे।

3. श्री झा से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बचाव के संबंध में अपना पक्ष रखने हेतु, जैसा कि संचालन पदाधिकारी अनुमति दें, उनके समक्ष स्वयं उपस्थित हो।

आदेश ः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, अपर सचिव।24 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 सं॰ 08/आरोप-01-145/2014सा॰-17273 सा॰प्र॰

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संकल्प

16 दिसम्बर 2014

श्री बिन्देश्वरी प्रसाद, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-646/2008, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, चकाई, जिला-जमुई (सम्प्रति निदेशक, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, खगड़िया) के विरूद्ध जिला पदाधिकारी, जमुई के पत्रांक-124, दिनांक 23.01.2008 द्वारा उपलब्ध कराये गये आरोप प्रपत्र 'क' के आलोक मेंं विभागीय पत्रांक-2587, दिनांक 06.03.2008 द्वारा उनसे स्पष्टीकरण की माँग की गयी। श्री प्रसाद के पत्रांक-327, दिनांक 01.04.2008 द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण पर जिला पदाधिकारी, जमुई का मंतव्य अनेकों स्मार के बावजूद अप्राप्त रहा। 2. श्री प्रसाद के विरूद्ध मुख्य आरोप सुखा प्रभावित जमुई जिलें के धान की खरीफ फसलों को बचाने के लिए डीजल चालित सिंचाई स्त्रोतों हेतु डीजल अनुदान के रूप में रूपये 185000.00 (एक लाखा पचासी हजार) के वितरण की गलत सूचना प्रतिवेदित किये जाने का है। उनके द्वारा समर्पित स्पष्टीकरण में वर्णित किया गया है कि उन्हेंने नाजीर एवं प्रखंड —षि पदाधिकारी को आदेशित किया गया था कि आवश्कतानुसार पेट्रोल पंप से डीजल की आपूर्त्ति किसानों को अपने समक्ष करावें। संबंधित पंचायत के मुखिया की अनुशंसा पर प्रखंड —षि पदाधिकारी के समक्ष पेट्रोल पंप से डीजल की आपूर्त्ति किसानों को करनी थी, जिसका भुगतान पेट्रोल पंप को प्रति लीटर 10 रूपये की दर से किये जाना था। इस बीच माता की चिकित्सा हेतु वे अवकाश पर चले गये एवं अवकाश अवधि में ही उनका स्थानांतरण हो गया। उनके द्वारा सरकारी राशि का गबन अथवा दुरूपयोग नहीं किया गया है। 3. वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री बिन्देश्वरी प्रसाद के विरूद्ध गठित आरोप एवं उनसे प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा के उपरांत पाया गया है कि आरोपित पदाधिकारी का स्पष्टीकरण स्वीकार योग्य नहीं है। क्योंकि आरोपित पदाधिकारी ने बिना राशि व्यय किये ही उपयोगिता प्रमाण-पत्र समर्पित किया था। उनके पदस्थापन काल में डीजल अनुदान की राशि व्यय नहीं की गयी एवं —षकों को इसका अनुदान नहीं मिला। बिना व्यय किये उपयोगिता प्रमाण-पत्र भेजने का निर्णय गलत था तथा इस कारण योजना का लाभ लाभुकों को नहीं दिया जा सका। हॉलाकि आरोप की प्र—ति से प्रशासनिक लापरवाही परिलक्षित होता है, परन्तु आरोप सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाने अथवा गबन आदि से संबंधित नहीं है। 4. अतः सम्यक्‌ विचारोपरांत बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकारण नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के नियम-17(1) एवं नियम-19 के तहत श्री बिन्देश्वरी प्रसाद, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-646/2008, तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी, चकाई, जिला-जमुई (सम्प्रति निदेशक, लेखा प्रशासन एवं स्वनियोजन, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, खगड़िया) के विरूद्ध निम्न लिखित शास्ति अधिरोपित की जाती है :- (i) 'निन्दन' (आरोप वर्ष 2006 के प्रभाव से) (ii) प्रोन्नति पर रोक दो वर्षो के लिए (संकल्प निर्गत होने की तिथि के प्रभाव से)। आदेश ः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, अपर सचिव।

——— सं॰ 08/आरोप-01-98/2014-17538 सा॰प्र॰ ——— संकल्प 19 दिसम्बर 2014 श्री वीरेन्द्र प्रताप, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-391/2008, तत्कालीन अंचलाधिकारी, उदवन्तनगर, भोजपुर (सम्प्रति सचिव, अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम, बिहार, पटना) के विरूद्ध कार्य के प्रति लापरवाही बरतने, उच्चाधिकारी के निदेशों की अवहेलना तथा अनियमित भू-बन्दोवस्ती आदि के आरोप में विभागीय संकल्प ज्ञापांक-9749, दिनांक 30.08.2011 द्वारा विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी थी। जाँच पदाधिकारी, संयुक्त आयुक्त, विभागीय जाँच, पटना प्रमंडल, पटना का पत्रांक-628, दिनांक 02.05.2014 द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन में श्री प्रताप के विरूद्ध लगाये गये सभी आरोपों (आरोप सं॰-1 से 7) को प्रमाणित नहीं पाया गया। 2. श्री प्रताप के विरूद्ध आरोप का मुख्य विषय यह है कि अंचलाधिकारी के रूप में नियम के प्रतिकूल 9 (नौ) डिसमिल जमीन की बन्दोवस्ती हेतु प्रस्ताव दिया गया जबकि आवेदक भूमिहीन एवं सुयोग्य श्रेणी के नहीं थे। अंचलाधिकारी के इस प्रस्ताव के आलोक में भूमि सुधार उप समाहर्त्ता की अनुशंसा पर अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा बन्दोवस्ती की स्वी—ति दी गयी, जिसे जाँचोपरांत अनियमित पाते हुए बाद में रद्द कर दिया गया। 3. जाँच पदाधिकारी द्वारा समर्पित जाँच प्रतिवेदन एवं श्री प्रताप से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा के उपरांत पाया गया है कि आरोपित पदाधिकारी के स्पष्टीकरण एवं जाँच पदाधिकारी के मंतव्य से पूर्णतः सहमत नहीं हुआ जा सकता है क्योंकि :-

(i) संदर्भित भू-खण्ड/खेसरा का अधिकांश अंश पूर्व से मुसहर जाति के व्यक्तियों को बन्दोवस्त था, जिसका दखल कब्जा सही ढ़ग से नहीं दिलाये जाने के कारण भू-खण्ड पूर्व से ही विवादित था।25 (cid:18)बहार गजट, 4 फरवर(cid:15) 2015 (ii) श्री धर्मेन्द्र कुमार सिंह, जो भूमिहीन सुयोग्य श्रेणी के नहीं थे, के पक्ष में 09 (नौ) डिसमिल भूमि की बन्दोवस्ती की कार्रवाई की गयी।

(iii) अंचलाधिकारी के रूप में अभिलेख की अनुशंसा करते समय आवेदक के भूमिहीन होने के बिन्दु पर सावधानी से जाँच नहीं की गयी एवं साधन सम्पन्न व्यक्ति के पक्ष में भूमि बन्दोवस्ती की अनुशंसा की गयी।

4. वर्णित परिप्रेक्ष्य में सम्यक्‌ विचारोपरांत श्री वीरेन्द्र प्रताप, (बि॰प्र॰से॰), कोटि क्रमांक-391/2008, तत्कालीन अंचलाधिकारी, उदवन्तनगर, भोजपुर (सम्प्रति सचिव, अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम, बिहार, पटना) के विरूद्ध निम्नलिखित शास्ति अधिरोपित की जाती है - (i) निन्दन (आरोप वर्ष-1998-99)

आदेश ः- आदेश दिया जाता है कि इस संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले अंक में प्रकाशित किया जाय तथा इसकी प्रति सभी संबंधित को भेज दी जाय।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, केशव कुमार सिंह, अपर सचिव।

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Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 04 February 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-02-04.5/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-02-04.5.