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सं0 22 नि0 सि0 (सिवान)-11-11/2010/
ान)-11-11/2010/99—श्री रजनी रमण अनाड़ी, तत्कालीन सहायक अभियंता, गंडक श्री रजनी रमण अनाड़ी, तत्कालीन सहायक अभियंता, गंडक रूपांकण प्रमंडल संख्या-3, सिवान सम्प्रति निलंबित द्वारा दिनांक 10 00 को एक नाबालिग लड़की के साथ गंडक रूपांकण प्रमंडल संख्या-3, सिवान सम्प्रति निलंबित द्वारा दिनांक 10.05.2000 को एक नाबालिग लड़की के साथ गंडक कॉलोनी, सिवान में बलात्कार किये जाने के आरोप के विरूद्ध सिवान मुफ्फसिल थाना कांड संख्या-64/2000 दिनांक कॉलोनी, सिवान में बलात्कार किये जाने के आरोप के विरूद्ध सिवान मुफ्फसिल थाना कांड संख्या-64/2000 दिनांक कॉलोनी, सिवान में बलात्कार किये जाने के आरोप के विरूद्ध सिवान मुफ्फसिल थाना कांड संख्या-64/2000 दिनांक 2000 को भा0द0वि0 की धारा-376 दर्ज होने के कारण विभागीय आदेश ज्ञापांक 1995 दिनांक 13.07.2000 द्वारा 2000 को भा0द0वि0 की धारा-376 दर्ज होने के कारण विभागीय आदेश ज्ञापांक 1995 दिनांक 13 10.05.2000 को भा0द0वि0 की धारा-376 दर्ज होने के कारण विभागीय आदेश ज्ञापांक 1995 दिनांक 13 2007 को सत्र न्यायालय, सिवान द्वारा श्री अनाड़ी को र्गत की तिथि से निलंबित किया गया। दिनांक 24.02.2007 को सत्र न्यायालय, सिवान द्वारा श्री अनाड़ी को आदेश निर्गत की तिथि से निलंबित किया गया। दिनांक 24 2003 से दिनांक 22.07.2009 तक सात वर्षों का ासश्रम कारावास की सजा सुनाई गयी। श्री अनाड़ी दिनांक 04 सात वर्षों का ासश्रम कारावास की सजा सुनाई गयी। श्री अनाड़ी दिनांक 04.03.2003 से दिनांक 22 कारावास की सजा भुगतने के पश्चात कारागार से मुक्त हुए तथा दिनांक 10.05.2010 को विभाग में योगदान किये। कारावास की सजा भुगतने के पश्चात कारागार से मुक्त हुए तथा दिनांक 2010 को विभाग में योगदान किये। 2. उक्त आरोप के लिए श्री रजनी रमण अनाड़ी, सहायक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1413 उक्त आरोप के लिए श्री रजनी रमण अनाड़ी, सहायक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1413 उक्त आरोप के लिए श्री रजनी रमण अनाड़ी, सहायक अभियंता के विरूद्ध विभागीय संकल्प ज्ञापांक 1413 2012 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के 2012 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के दिनांक 21.12.2012 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के लित की गयी एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदन में उक्त आरोप सही तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदन में उक्त आरोप सही लित की गयी एवं संचालन पदाधिकारी द्वारा समर्पित जॉंच प्रतिवेदन में उक्त आरोप सही पाया गया।
प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी और निम्न तथ्य पाये गयेः- प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी और निम्न तथ्य पाये गयेः- प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी और निम्न तथ्य पाये गयेः- (i) राज्य के सरकारी सेवक जो आपराधिक कृत्य में संलग्न रहे हैं, उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाह ) राज्य के सरकारी सेवक जो आपराधिक कृत्य में संलग्न रहे हैं, उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही एवं ) राज्य के सरकारी सेवक जो आपराधिक कृत्य में संलग्न रहे हैं, उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाह 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 5555 फरफरफरफरवर) वर) वर) वर) 2015201520152015 (iii) विभागीय निर्णय के आलोक में विभागीय कार्यवाही के संचालन के उपरान्त श्री अनाड़ी के विरूद्ध गठित आरोप को संचालन पदाधिकारी द्वारा प्रमाणित पाया गया। 3. जॉंच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त विभागीय पत्रांक-359 दिनांक 26.03.2014 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराते हुए श्री अनाड़ी से द्वितीय कारण पृच्छा की गयी एवं श्री अनाड़ी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी और निम्न तथ्य पाये गयेः-
vkjksih inkf/kdkjh Jh jtuh je.k vukM+h dk cpko c;ku %& स्थानीय ठेकेदारों ने मुझसे बदला लेने एवं मुझे बर्बाद करने के लिए एक सुनियोजित षडयंत्र रचा, उन्होंने रूपये के बल पर एक बदचलन बालिग लड़की को खड़ा करके मुझे बलात्कार के झूठे मुकदमे में फंसा दिया, जिसके आलोक में मुझे न्यायालय में दिनांक 04.03.2003 को आत्मसमर्पण के पश्चात जेल जाना पड़ा। धनाभाव में उपरोक्त आपराधिक मुकदमों में मैं समुचित पैरवी नहीं करवा पाया। पर्याप्त चिकित्सकीय साक्ष्य नहीं रहने के बावजूद मात्र आरोपी के बयान पर मुझे दोषी करार दिया गया और संबंधित न्यायालय द्वारा मुझे सात वर्षों के कारावास की सजा सुनाई गई। न्यायालय के उपरोक्त निर्णय के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, पटना में अपील दायर करने के लिए मैंने जेल अधिकारियों के समक्ष लिखित आवेदन दिया। परन्तु मेरा अपील आवेदन माननीय उच्च न्यायाल, पटना को नहीं भेजा गया। मैं दिनांक 22.07.09 को कारा से विमुक्त हुआ। अतः मेरे आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए इस आरोप से मुक्त किया जाय।
श्री अनाड़ी से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के बचाव बयान की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गयी एवं पाया गया कि श्री अनाड़ी बचाव बयान में वही तथ्य उद्धृत किये हैं जो विभागीय कार्यवाही के दौरान संचालन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थापित किया गया है। इनके द्वारा आरोपों से संदर्भित कोई नया तथ्य का उल्लेख नहीं किया गया है। समीक्षोपरान्त श्री अनाड़ी के विरूद्ध संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप को प्रमाणित पाया गया। प्रमाणित आरोपों के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के ज्ञापांक-111/RI- 102-63A-10158 दिनांक 23.08.1963 की कंडिका-9 के आलोक में श्री रजनी रमण अनाड़ी, तत्कालीन सहायक अभियंता, गंडक रूपांकण प्रमंडल सं0-3, सिवान सम्प्रति निलंबित को 'सेवा से बर्खास्त' करने का निर्णय लिया गया है। 4. सरकार के उक्त निर्णय में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की सहमति एवं मंत्री परिषद की स्वीकृति प्राप्त है।
5. अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री रजनी रमण अनाड़ी, तत्कालीन सहायक अभियंता, गंडक रूपांकण प्रमंडल सं0-3, सिवान को निम्न दंड अधिरोपित होना संसूचित किया जाता है। ''सेवा से बर्खास्त''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, विशेष कार्य पदाधिकारी।
———— अधी-क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 230-571+10-ड)0ट)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in