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सं0 22/नि0सि0(पट0)-03-19/2009/164
न हेतु राशि की मांग भी मेरे द्वारा नहीं की गई है। 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 5555 फरफरफरफरवर) वर) वर) वर) 2015201520152015 उच्चाधिकारियों के आदेश अनुपालन हेतु कराये गये कार्य की मापी मेरे द्वारा ली गई एवं अपर प्रमण्डल पदाधिकारी द्वारा जॅाच की गई जो सही पाया गया। आरोप सं0-2. कार्य प्रारम्भ करने के पूर्व कार्यपालक अभियन्ता के पत्रांक-01 कैम्प, पटना, दिनांक 20.6.09 के आलोक में कराये जाने वाले कार्यो का प्री लेवल का जॅाच असम्बद्व प्रमण्डल (गुण नियंत्रण प्रमण्डल, अनीसाबाद, पटना) से करा लिया गया। स्थलीय स्थिति के अनुसार यह संभव था एवं कार्य में पारदर्शिता रखने एवं किसी प्रकार की अनियमितता से बचने के लिये यह आवश्यक भी था। आरोप सं0-3. संवेदकों के लिये कनीय अभियन्ता के रूप में मै सक्षम प्राधिकार नहीं था। इस संबंध में मेरे द्वारा केाई अनुशंसा भी नहीं की गई है। यह कार्य उच्चाधिकारियों द्वारा किया गया है। श्री आरत से प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा में निम्न तथ्य पाया गयाः- आरोप संख्या-1 - उक्त कार्य हेतु Specific आदेश था कि खार की मरम्मति के कार्य में ढुलाई एवं मशीन का व्यय विभाग द्वारा वहन किया जायेगा। परन्तु उक्त प्रमंडल द्वारा कुल 27,62,605/- रू0 का प्रपत्र-24 विभाग को उपलब्ध कराया गया और विभाग द्वारा इसकी स्वीकृति देते हुए इसका भुगतान भी कर दिया गया। यदि मनरेगा से इसमें श्रम अंश का भुगतान किया जाता तो विभाग को उतनी राशि की बचत हो सकती थी। अगर कार्य की आवश्यकता को देखते हुए मनरेगा से यह संभव नहीं था तो उस समय विभाग का अनुमोदन प्राप्त करना चाहिये था जिसका कोई प्रयास श्री आरत द्वारा नहीें किया गया। इससे स्पष्ट है कि विभागीय निदेश का उल्लंघन हुआ है और विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ा है। अतएव यह आरोप प्रमाणित पाया गया। आरोप संख्या-2 - कार्य में प्री लेवल और पोस्ट लेवल लिया जाना श्रेयष्कर है और इससे सही रूप से कराये गये कार्य का भुगतान होता है। चॅूकि कार्य बाढ़ अवधि में कराया गया था इसलिए नामांकन के आधार पर कार्य कराया जाना नियमानुकूल माना गया। अतएव यह आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। आरोप संख्या-3 - संवेदक के नामांकन के संबंध में बाढ़ अवधि में अधीक्षण अभियंता को शक्ति सन्निहित होती है, और इस पर अभियंता प्रमुख की स्वीकृति आवश्यक नहीं है। अतएव यह आरोप प्रमाणित नहीं पाया गया। उपरोक्त वर्णित स्थिति में विभाग द्वारा प्रमाणित आरोप संख्या-1 के लिए श्री आरत को वर्ष 2009-10 की चारित्री में निन्दन की सजा संसूचित करने का निर्णय लिया गया। अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री मनोज कुमार आरत, तत्कालीन कनीय अभियन्ता, जल पथ प्रमण्डल, एकंगरसराय (नालन्दा) सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी सिंचाई प्रमण्डल, मुरलीगंज को निम्न दंड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- (1) निन्दन वर्ष 2009-10 जिसकी प्रविष्टि वर्ष 2009-10 की चारित्री में की जायेगी।
बिहार'-राज्यपाल के आदेश से, मोहन पासवान, सरकार के अवर सचिव।
———— अधी.क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु4ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 236-571+10-ड)0ट)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in