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Bihar Gazette · Government of Bihar

Bihar Gazette, 05 February 2015

Published 05 February 2015

Type
Extra Ordinary
Identifier
in.gov.bih.gazette.2015-02-05.247
Languages
English, Hindi

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सं0 22/नि0सि0(मोति0)-08-08/2007/268

ल को इससे संबंधित कोई अभिलेख भी नहीं उपलब्ध कराया गया।0सि0(मोति0)-08-08/2007/268—श्री सुरेश राय, तत्कालीन सहायक अभियंता, ढ़ाका नहर श्री सुरेश राय, तत्कालीन सहायक अभियंता, ढ़ाका नहर नवीकरण अवर प्रमंडल, ढ़ाका सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल संख्या-1 के नवीकरण अवर प्रमंडल, ढ़ाका सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल संख्या-1 के नवीकरण अवर प्रमंडल, ढ़ाका सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी, स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमंडल संख्या-1 के विरूद्ध ढ़ाका नहर नवीकरण प्रमंडल, ढा़का अन्तर्गत वर्ष 2004 -05, 2005-06 एवं 2006-07 में कराये गये गेटों की विरूद्ध ढ़ाका नहर नवीकरण प्रमंडल, ढा़का अन्तर्गत वर्ष 2004-05, 2005-06 एवं 2006-07 में कराये गये गेटों की मरम्मति कार्य एवं लकड़ी के संधारित लेखा की जॉंच उड़नदस्ता अंचल से कराई गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॉंच मरम्मति कार्य एवं लकड़ी के संधारित लेखा की जॉंच उड़नदस्ता अंचल से कराई गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॉंच मरम्मति कार्य एवं लकड़ी के संधारित लेखा की जॉंच उड़नदस्ता अंचल से कराई गई। उड़नदस्ता से प्राप्त जॉंच प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री राय से स्पष्टीकरण की मांग की गई। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय स्तर पर की प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री राय से स्पष्टीकरण की मांग की गई। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय स्तर पर की प्रतिवेदन के समीक्षोपरान्त श्री राय से स्पष्टीकरण की मांग की गई। प्राप्त स्पष्टीकरण की समीक्षा विभागीय स्तर पर की गयी जिसमें निम्नांकित आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाया गया :- गयी जिसमें निम्नांकित आरोप प्रथम द्रष्टया प्रमाणित पाया गया :- 1. नहर के वीयर एवं गेटों की मरम्मति का स्थायी निदान न कर विभागीय शीशम की लकड़ी का प्रावधान नहर के वीयर एवं गेटों की मरम्मति का स्थायी निदान न कर विभागीय शीशम की लकड़ी का प्रावधान नहर के वीयर एवं गेटों की मरम्मति का स्थायी निदान न कर विभागीय शीशम की लकड़ी का प्रावधान प्रत्येक वर्ष खरीफ एवं रबी सिंचाई के पूर्व गेट की मरम्मति के प्राक्कलन में करते हुए लकड़ी की खपत किया गया जो प्रत्येक वर्ष खरीफ एवं रबी सिंचाई के पूर्व गेट की मरम्मति के प्राक्कलन में करते हुए लकड़ी की खपत किया प्रत्येक वर्ष खरीफ एवं रबी सिंचाई के पूर्व गेट की मरम्मति के प्राक्कलन में करते हुए लकड़ी की खपत किया कि विभागीय नियमों के प्रतिकूल है। 2. दिनांक 24.8.06 को हस्त पावती पर लकड़ी का हस्तान्तरण किया गया, जिसे थाना द्वारा जब्त कर लिया 06 को हस्त पावती पर लकड़ी का हस्तान्तरण किया गया, जिसे थाना द्वारा जब्त कर लिया 06 को हस्त पावती पर लकड़ी का हस्तान्तरण किया गया, जिसे थाना द्वारा जब्त कर लिया त लकड़ी की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को ससमय नहीं दिया गया, .06 को जब्त लकड़ी की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को ससमय नहीं दिया गया, गया, परन्तु आपके द्वारा दिनांक 24.8. साथ ही जॅाच दल को इससे संबंधित कोई अभिलेख भी नहीं उपलब्ध कराया गया। 11 द्वारा श्री राय के उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प सं0-476 दिनांक 19.4.11 द्वारा श्री राय के उक्त प्रथम द्रष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए विभागीय संकल्प सं0-476 दिनांक 19 विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय विरूद्व बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में उनके मंतव्य में आरोप सं0-01 के संबंध में कहा गया कि संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में उनके मंतव्य में आरोप सं0-01 के संबंध में कहा गया कि संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन में उनके मंतव्य में आरोप सं0-01 के संबंध में कहा गया कि नीति निर्णय लेने में श्री राय का कोई संबंध नहीं है। अतः इस आरोप के परिपेक्ष्य में कोई जवाबदेही नहीं बनता है। नीति निर्णय लेने में श्री राय का कोई संबंध नहीं है। अतः इस आरोप के परिपेक्ष्य में कोई जवाबदेही नहीं बनता है। नीति निर्णय लेने में श्री राय का कोई संबंध नहीं है। अतः इस आरोप के परिपेक्ष्य में कोई जवाबदेही नहीं बनता है। आरोप सं0-2 के मंतव्य में कहा गया कि उड़नदस्ता जॅाच प्रतिवेदन में वर्णित तथ्य कि भंडार प्रभार कनीय अभियन्ता ं कहा गया कि उड़नदस्ता जॅाच प्रतिवेदन में वर्णित तथ्य कि भंडार प्रभार कनीय अभियन्ता ं कहा गया कि उड़नदस्ता जॅाच प्रतिवेदन में वर्णित तथ्य कि भंडार प्रभार कनीय अभियन्ता श्री चन्द्र भूषण कुमार द्वारा लकड़ी का विस्तृत विवरणी एवं लेखा समर्पित नहीं किया गया के तथ्य के आलीोक में जप्त श्री चन्द्र भूषण कुमार द्वारा लकड़ी का विस्तृत विवरणी एवं लेखा समर्पित नहीं किया गया के तथ्य के आलीोक में जप्त श्री चन्द्र भूषण कुमार द्वारा लकड़ी का विस्तृत विवरणी एवं लेखा समर्पित नहीं किया गया के तथ्य के आलीोक में जप्त नके स्तर पर उच्चाधिकारियों को लिखित लकड़ी के श्रोत पर अनभिज्ञता प्रकट की गई है, यह विन्दु मान्य नहीं है। इनके स्तर पर उच्चाधिकारियों को लिखित लकड़ी के श्रोत पर अनभिज्ञता प्रकट की गई है, यह विन्दु मान्य नहीं है। इ रूप से संसूचित करना श्रेयस्कर होता, इस हद तक दायित्व निर्वहन अपेक्षित था। उड़नदस्ता जॅाच दल के निष्कर्ष रूप से संसूचित करना श्रेयस्कर होता, इस हद तक दायित्व निर्वहन अपेक्षित था। उड़नदस्ता जॅाच दल के निष्कर्ष रूप से संसूचित करना श्रेयस्कर होता, इस हद तक दायित्व निर्वहन अपेक्षित था। उड़नदस्ता जॅाच दल के निष्कर्ष 1 में अभिलेख नहीं कराने का कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं है। अतः अभिलेख उपस्थापित करने का कंडिका 4.0.1 में अभिलेख नहीं कराने का कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं है। अतः अभिलेख उपस्थापित करने का 1 में अभिलेख नहीं कराने का कोई प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज नहीं है। अतः अभिलेख उपस्थापित करने का मामला नहीं बनाता है। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त संचालन संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त संचालन संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षोपरान्त संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं0-01 को अप्रमाणित पाया गया जबकि आरोप सं0-02 जो दिनांक पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं0-01 को अप्रमाणित पाया गया जबकि आरोप सं0-02 जो दिनांक पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए आरोप सं0-01 को अप्रमाणित पाया गया जबकि आरोप सं0-02 जो दिनांक 2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 5555 फरफरफरफरवर+ वर+ वर+ वर+ 2015201520152015 24.8.06 को थाना में लकड़ी जप्ती की सूचना ससमय उच्चाधिकारियों को नहीं देने के आरोप को प्रमाणित मानते हुए उक्त प्रमाणित आरोपों के लिए श्री राय के विरूद्व विभागीय अधिसूचना सं0-704 दिनांक 9.6.14 द्वारा निम्न दण्ड संसूचित किया गयाः- (1) असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्वि पर रोक। उक्त दण्ड के विरूद्व श्री राय द्वारा अपने पत्रांक शून्य दिनांक 30.7.14 द्वारा पुनर्विलोकन अर्जी समर्पित किया गया जिसकी समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि इनके द्वारा वस्तुतः केवल यही आरोप प्रमाणित हुआ था कि इनके द्वारा लकड़ी जब्ती की लिखित सूचना उच्चाधिकारियों को ससमय नहीं दी गई थी, किन्तु इनके द्वारा मौखिक सूचना उच्चाधिकारियों को समय प्राप्त हो गई थी, तथा उच्चाधिकारियों द्वारा इस पर कार्रवाई भी की गई थी। अतएव मामले की सम्यक समीक्षोपरान्त पाया गया कि केवल अांशिक रूप से लिखित सूचना नहीं देने के लिए दोषी है। अतएव पूर्व में विभागीय अधिसूचना सं0-704 दिनांक 9.6.14 द्वारा दिये गये दण्ड अांशिक संशोधन करते हुए असंचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्वि पर रोक की जगह पर असंचयात्मक प्रभाव से एक वेतनवृद्वि पर रोक का दण्ड देने का निर्णय लिया गया। उक्त निर्णय के आलोक में श्री राय को निम्न दण्ड संसूचित किया जाता हैः- (1) एक वेतनवृद्वि पर असंचयात्मक प्रभाव से रोक।

उक्त दण्ड श्री राय, तत्कालीन सहायक अभियन्ता, ढ़ाका नहर नवीकरण अवर प्रमण्डल, ढ़ाका सम्प्रति प्राक्कलन पदाधिकारी स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्य प्रमण्डल सं0-1, जल संसाधन विभाग, दरभंगा को संसूचित किया जाता है।

बिहार-राज्यपाल के आदेश से, गजानन मिश्र, विशेष कार्य पदाधिकारी।

———— अधी.क, सिचवालय मुिणालय, (cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु4ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 247-571+10-ड+0ट+0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in

Cite this issue. Bihar Gazette, Government of Bihar, 05 February 2015. Indian Gazettes, https://egazette.servantsofknowledge.in/details/in.gov.bih.gazette.2015-02-05.247/. Archive identifier in.gov.bih.gazette.2015-02-05.247.