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पटनापटनापटनापटना, , , , वृहःपवृहःपवृहःपवृहःपितितितितवारवारवारवार, , , , 5555 फरफरफरफरवर)वर)वर)वर) 2012012012015555 जल संसाधन विभाग &&&&&&& vf/klwpuk 5 tuojh 2015
सं0 22 नि0 सि0(पट0)-03-16/2010/18
सि0(पट0)-03-16/2010/18—श्री ब्रह्मदेव दूबे, सहायक अभियन्ता, जल संसाधन विभाग जब श्री ब्रह्मदेव दूबे, सहायक अभियन्ता, जल संसाधन विभाग जब पटना नगर निगम में कार्यपालक अभियन्ता के पद पर प्रतिनियुक्त थे तब उन्हें निगरानी थाना कांड सं0-54/2010 पटना नगर निगम में कार्यपालक अभियन्ता के पद पर प्रतिनियुक्त थे तब उन्हें निगरानी थाना कांड सं0-54/2010 पटना नगर निगम में कार्यपालक अभियन्ता के पद पर प्रतिनियुक्त थे तब उन्हें निगरानी थाना कांड सं0-54/2010 दिनांक 21.7.10 के प्राथमिकी अभियुक्त बनाये जाने तथा भ वन नक्शा स्वीकृति में वित्तीय अनियमितता, नियमाें का 10 के प्राथमिकी अभियुक्त बनाये जाने तथा भवन नक्शा स्वीकृति में वित्तीय अनियमितता, नियमाें का उल्लंधन, अनेकों मामले में अपार्टमेंट एक्ट 2006 का उल्लंधन करने आदि प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए उल्लंधन, अनेकों मामले में अपार्टमेंट एक्ट 2006 का उल्लंधन करने आदि प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए उल्लंधन, अनेकों मामले में अपार्टमेंट एक्ट 2006 का उल्लंधन करने आदि प्रथम दृष्टया प्रमाणित आरोपों के लिए 11 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापांक विभागीय अधिसूचना सं0-1018 दिनांक 11.8.11 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय संकल्प ज्ञापं विभागीय अधिसूचना सं0-1018 दिनांक 11 1247 दिनांक 11.10.11 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के 11 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के 11 द्वारा बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम-17 के तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षोपरान्त विभागीय तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षोपरान्त विभागीय तहत विभागीय कार्यवाही संचालित किया गया। संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन की समीक्षोपरान्त विभागीय 14 द्वारा संचालन पदाधिकारी से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन पर नगर आयुक्त, पटना नगर निगम, से प्राप्त जॅाच प्रतिवेदन पर नगर आयुक्त, पटना नगर निगम, पत्रांक 862 दिनांक 4.7.14 द्वारा संचालन पदाधिकारी 14 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जॅाच पटना से मंतव्य की मांग की गई एवं विभागीय पत्रांक 985 दिनांक 22.7.14 द्वारा संचालन पदाधिकारी के जॅाच पटना से मंतव्य की मांग की गई एवं विभागीय पत्रांक 985 दिनांक 22 प्रतिवेदन से असहमति के विन्दु पर श्री दूबे से द्वितीय कारण पृच्छा की गई। प्रतिवेदन से असहमति के विन्दु पर श्री दूबे से द्वितीय कारण पृच्छा की गई।
14 से प्राप्त मंतव्य एवं श्री दूवे से प्राप्त नगर आयुक्त, पटना नगर निगम, पटना के पत्रांक 5010 दिनांक 11.8.14 से प्राप्त मंतव्य एवं श्री दूवे से प्राप्त नगर आयुक्त, पटना नगर निगम, पटना के प
द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः- द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः- द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में निम्न तथ्य पाये गयेः-
नगर आयुक्त, पटना नगर निगम, पटना से प्राप्त प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि श्री दूवे द्वारा नगर आयुक्त, पटना नगर निगम, पटना से प्राप्त प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि श्री दूवे द्वारा 1. नगर आयुक्त, पटना नगर निगम, पटना से प्राप्त प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि श्री दूवे द्वारा स्वीकृत किये गये नक्शो में कुछ भवन अभी भी निर्माणाधीन है और इन सब भवनों में विल्डींग वायलॅाज का उल्लंधन े गये नक्शो में कुछ भवन अभी भी निर्माणाधीन है और इन सब भवनों में विल्डींग वायलॅाज का उल्लंधन े गये नक्शो में कुछ भवन अभी भी निर्माणाधीन है और इन सब भवनों में विल्डींग वायलॅाज का उल्लंधन किया गया है। इन कारणों से इन भवनों पर निगरानी वाद नगर आयुक्त के न्यायालय में प्रारम्भ किया गया एवं किया गया है। इन कारणों से इन भवनों पर निगरानी वाद नगर आयुक्त के न्यायालय में प्रारम्भ किया गया एवं किया गया है। इन कारणों से इन भवनों पर निगरानी वाद नगर आयुक्त के न्यायालय में प्रारम्भ किया गया एवं या है तथा कई मामलों में निगरानी वाद अभी तक लंबित है, कतिपय निगरानी वादों में अंतिम आदेश भी पारित किया गया है तथा कई मामलों में निगरानी वाद अभी तक लंबित है, कतिपय निगरानी वादों में अंतिम आदेश भी पारित किया ग जिसमें श्री दूबे की भूमिका पूर्णतः संदिग्ध है। जिन निगरानी वादों में अंतिम आदेश पारित हो चुका है, उसमें श्री दूबे की जिसमें श्री दूबे की भूमिका पूर्णतः संदिग्ध है। जिन निगरानी वादों में अंतिम आदेश पारित हो चुका है, उसमें श्री दूबे की जिसमें श्री दूबे की भूमिका पूर्णतः संदिग्ध है। जिन निगरानी वादों में अंतिम आदेश पारित हो चुका है, उसमें श्री दूबे की में पारित आदेश की छाया प्रति भूमिका प्रमाणित है। इस संदर्भ में साक्ष्य के रूप में नगर आयुक्त द्वारा कुल छः मामलों में पारित आदेश की छाया प्रति भूमिका प्रमाणित है। इस संदर्भ में साक्ष्य के रूप में नगर आयुक्त द्वारा कुल छः मामलों भी संलग्न किया गया है।
श्री दूबे से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा में पाया गया किः- श्री दूबे से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा के जवाब की समीक्षा में पाया गया किः- (i) श्री दूबे द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रथम विन्दु के संदर्भ में यह उल्लेख किया गया है कि निर्माण पूर्ण ) श्री दूबे द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रथम विन्दु के संदर्भ में यह उल्लेख किया गया है कि निर्माण पूर्ण ) श्री दूबे द्वारा द्वितीय कारण पृच्छा के प्रथम विन्दु के संदर्भ में यह उल्लेख किया गया है कि निर्माण पूर्ण Appendix L Note 3 के उल्लंधन का शा की स्वीकृति मेरे द्वारा नहीं दी गई है तब Appendix L Note 3
किये हुए किसी भी भवन के नक्शा की स्वीकृति मेरे द्वारा नहीं दी गई है तब आधार नहीं बनता है जबकि नगर आयुक्त से प्राप्त प्रतिवेदन में प्लान केस नं0-537/80 जो श्री दूबे द्वारा दिनांक 24. आधार नहीं बनता है जबकि नगर आयुक्त से प्राप्त प्रतिवेदन में प्लान केस नं0-537/80 जो श्री दूबे द्वारा दिनांक 24 आधार नहीं बनता है जबकि नगर आयुक्त से प्राप्त प्रतिवेदन में प्लान केस नं0-537/80 जो श्री दूबे द्वारा दिनांक 24 2.10 को निर्गत किया गया है, में संदर्भित भवन का निर्माण 29 वर्ष पूर्व (मूल न
10 को निर्गत किया गया है, में संदर्भित भवन का निर्माण 29 वर्ष पूर्व (मूल नक्शा की स्वीकृति 1
क्शा की स्वीकृति 1.8.80) हो चुका था2 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 5555 फरफरफरफरवर) वर) वर) वर) 2015201520152015 और श्री दूबे द्वारा जी01 के नींव पर बिना भवन तोड़े हुए बी0जी07 का निर्माण/स्वीकृति दी गई जो भवन की सुरक्षा एवं जान माल की सुरक्षा के आलोक में नहीं करनी चाहिए थी। यह स्वीकृति नवीनीकरण से आधार पर दी गई। यह स्पष्ट हो रहा है कि उक्त नक्शा को तत्कालीन नगर आयुक्त द्वारा दिनांक 30.4.09 को अनुमोदित कराया गया था और उस नक्शे पर किसी अन्य कार्यालय सहायक अथवा निर्गतकत्र्ता का हस्ताक्षर अथवा कार्यालय मोहर भी नही था। अतएव श्री दूबे का कथन सर्वथा गलत है।
(ii) नक्शाें के विचलन के संबंध में स्वीकृति के लिए आवश्यक पॅाच गुणा अर्थ दण्ड नहीं वसूलने के संबंध में श्री दूवे ने द्वितीय कारण पृच्छा में यह स्पष्ट किया है कि नगर आयुक्त का आदेश बिहार म्यूनिसिपल एक्ट 2007 के अनुकूल नहीं था और माननीय उच्च न्यायालय द्वारा इस आदेश को अवैध करार दिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि श्री दूवे ने यह माना है कि नगर आयुक्त द्वारा आदेश निर्गत था। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 10.11.12 को उक्त आदेश रद्द किया गया है अर्थात 10.11.12 के पूर्व तक उक्त आदेश प्रभावी था। वर्णित स्थिति में उक्त आदेश को वर्ष 2009-10 में निष्प्रभावी कहा जाना उचित नहीं है जिसे मान्य नहीं किया जा सकता है। अतः उस समय अर्थ दण्ड वसूल नहीं किये जाने का आरोप प्रमाणित है।
(iii) भू स्वामियों का स्वामित्व नहीं रहने के बाद भी एवं सरकारी भूमि पर नक्शा पारित करने के संबंध में श्री दूवे ने अंकित किया है कि ऐसा कोई मामला उनसे संबंधित नहीं है। जबकि निगरानी थाना कांड सं0-54/10 के क्रमांक 115 जो श्री दूवे को दिये गये थे, उसमें यह स्पष्ट है कि प्लाट सं0-9 को 7 एवं 8 में शामिल करते हुए नक्शा की स्वीकृति प्राप्त की गई जबकि उक्त भूमि सरकार की थी। इसी प्रकार क्रमांक 82 से संबंधित मामले में भी प्लॅाट सं0-466 पर नक्शा की स्वीकृति दी गई है जिसका कोई मालगुजारी, दाखिल खारिज अथवा सेल डीड (स्वामित्व संबंधी) अभिलेख नहीं है। इसी प्रकार निगरानी थाना कांड सं0-54/10 के क्रमांक 33 पर अंकित मामले में भी नक्शा की स्वीकृति बिना स्वामित्व भूखंड (म्यूनिसिपल सर्वे प्लॅाट सं0-66) को सम्मिलित करते हुए दी गई जबकि विल्डींग वायलॅाज के अनुसार किसी भी व्यक्ति के पास भूखंड के स्वामित्व से संबंधित कागजात/दस्तावेज होना आवश्यक है। गंगा नदी के किनारे दूजरा मोहल्ले में दुर्गा रिभर भ्यू में जल संसाधन विभाग से बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किये ही 11 तल्ला अपार्टमेंट के पुनरीक्षण की स्वीकृति दी गई है जो फ्लड प्रोटेक्शन वाल के अन्दर है उसकी चौड़ाई 11-12 फीट थी। वर्णित स्थिति में उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया।
(iv) सड़क की अपेक्षित चौड़ाई नहीं रहने के वावजूद भी नक्शा की स्वीकृति के संबंध में श्री दूवे ने कोई मामला अपने से संबंधित नहीं होने का उल्लेख किया है और किसी मामले में होने पर विभाग द्वारा समीक्षा करने की बात कही है। इस संबंध में निगरानी थाना कांड के साथ श्री दूवे को दिये गये अभिलेख के क्रमांक 115 पर उल्लिखित मामले में नगर आयुक्त के आदेश में यह स्पष्ट है कि उक्त भूमि के नक्शा प्लान केस सं0-386/90 भूखंड के समक्ष मौजूद सड़को में से चौड़ी सड़क पर फ्रन्टेज नहीं रहने के आधार पर दिनांक 04.10.93 को अस्वीकृत किया गया था जिसे पुनः श्री दूवे के द्वारा स्वीकृति प्राप्त की गई। वर्णित स्थिति में उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया।
(v) अग्निशमन अनापत्ति, भारतीय विमान पतन की अनापत्ति के संबंध में श्री दूवे ने स्पष्ट किया है कि अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया है और वह अभिलेख में संधारित है। जबकि पटना नगर निगम से प्राप्त अभिलेख के अवलोकन से स्पष्ट है कि निगरानी थाना कांड सं0-54/10 के क्रमांक 115 में भारतीय विमान पतन द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत की तिथि 27.9.10 है जबकि नक्शा की स्वीकृति की तिथि 10.06.09 है। इसी प्रकार क्रमांक 82 पर भी नक्शा की स्वीकृति 13.6.09 को है जबकि अग्निशमन की अनापत्ति 03.8.09 को है। क्रमांक 5 पर अंकित मामले में भी भवन की उचाई 23.15 मी0 है और भवन की उचाई 23 मी0 से अधिक होने पर भारतीय विमान पतन की अनापत्ति अनिवार्य ह,ै जिसकी अनदेखी करते हुए स्वीकृति प्राप्त की गई। वर्णित स्थिति में उक्त आरोप प्रमाणित पाया गया। (vi) अपार्टमेंट एक्ट 2006 के उल्लंधन के संबंध में श्री दूवे द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इसका उल्लंधन किसी भी रूप में किसी भवन में नहीं किया गया है जबकि नगर आयुक्त द्वारा निर्गत आदेश जो निगरानी थाना कांड सं0-54/10 के क्रमांक 90 से संबंधित है जिसकी प्रति श्री दूवे को दी गई थी में बिहार अपार्टमेंट एक्ट 2006 का उल्लंधन प्रमाणित है।
इस संदर्भ में नगर आयुक्त से प्राप्त प्रतिवेदन के साथ संलग्न साक्ष्य की समीक्षा में निम्न तथ्य पाया गयाः- (क) क्रमांक 115-Plan Case No P/Rajendra Nagar/P C N-B+ semi B+ G+5. 386/90 प्लान केस सं0 386/90 दिनांक 4.10.93 को अस्वीकृत किया गया था। अस्वीकृति का आधार आवेदक द्वारा वायलॅाज के अनुसार सामने का सेट वैक देने में असमर्थता बताना था। पुनः इसी मामले में दिये गये आवेदन पर तिथि 25.5.09 परन्तु संलग्न कागजातों में एक पी0 आर0 डी0 ए0 का रीसिप्ट नं0-5303 दिनांक 23.6.09 का है। अतः 23.6. 09 के पहले पुनरीक्षित आवेदन जमा नहीं हो सकता है। परन्तु प्रमण्डल बी समिति और नगर आयुक्त द्वारा पुनरीक्षित स्वीकृति की कार्रवाई 8.6.09 से 10.6.09 के दौरान है। पुनरीर्क्षित स्वीकृति दिनांक 10.6.09 का है। अतः नक्शे की स्वीकृति वैक डेट में की गई थी।
आवेदक द्वारा भारतीय विमान पतन द्वारा प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र स्थल पर उपलब्ध कराया गया जिसका निर्गत तिथि 27.9.10 है। जबकि नक्शा की स्वीकृति की तिथि 10.6.09 है। इस प्रकार भारतीय विमान पतन के बिना अनापत्ति के ही नक्शा की स्वीकृति दी गई है।3 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 5555 फरफरफरफरवर) वर) वर) वर) 2015201520152015 पुनरीक्षित स्वीकृत नक्शा मॅाल/मल्टीप्लेक्स हेतु था। परन्तु इसमें आवश्यक सेंट बैक और अन्य पहलूओं को Development Code Pertaining to shopping Mall / Multiplex permises का उल्लंधन किया गया। यह कोड नगर विकास विभाग की अधिसूचना सं0-517 दिनांक 16.6.06 है। अतः पुनरीक्षित स्वीकृति पूर्णतः गलत थी। (ख) क्रमांक-82 प्लान केस सं0- P/Rajapur/ P R N-6-572/09- (i) योजना प्रतिवेदन जिन प्लॅाट के लिए प्राप्त है-463, 467 एवं 469 (ii) समर्पित ब्लू प्रिन्ट नक्शे पर अंकित प्लॅाट 463, 467, 468 एवं 469 (iii) मालगुजारी रसीद (जिन प्लॅाट का है) 194, 197, 463, 467, 468 एवं 469 (iv) नक्शे की स्वीकृति हेतु मूल आवेदन 466 एवं 467 (जिस प्लॅाट का जिक्र है) (v) लाईसेन्सी वास्तुविद/अभियन्ता का पर्यवेक्षण-463, 467, 468 एवं 469 (vi) फार्म नं0-2 में 463, 467, 468 एवं 469 (vii) एस्ट्रक्चरल इंजीनियर के प्रमाण पत्र में 463, 467, 468 एवं 469 (viii) सीलिंग हेतु शपथ पत्र 466 एवं 467 (ix) वाद संबंधी शपथ पत्र 466 एवं 467 (x) इन्डेमनिटी बॅाण्ड 463, 466 एवं 467 (xi) डेवलपमेंट एग्रीमेंट में 463, 467, 468 एवं 469 (xii) अग्निशमन के अनापत्ति में 463, 467, 468 एवं 469 उपरोक्त से स्पष्ट है कि प्रत्येक अभिलेख में भूमि विवरण अलग अलग है जिस पर आपत्ति नहीं की गई। चूॅकि योजना प्रतिवेदन प्लॅाट सं0-463, 467 एवं 469 के लिए प्राप्त है तथा भूमि दस्तावेज इन्हीं भूखण्डों का है। अन्य जगहों (फॅार्म/शपथ पत्र) में भूखण्ड सं0-466 भी अंकित किया गया है, जिसका कोई मालगुजारी/दाखिल खारिज/सेल डीड (स्वामित्व संबंधी) नहीं है।
डेवलपमेंट एग्रीमेंट श्री पुणेश्वर सिंह एवं अन्य द्वारा निदेशक, श्री नौशाद आलम, मेसर्स नियाग्री विल्डर्स एवं डेवलपमेंट प्रा0 लि0 के साथ किया गया है, जिसमें नक्शा स्वीकृत करने, सुधारने और फॅार्म पर दस्तखत करने (पावर अॅाफ अटर्नी) का अधिकार नहीं है। परन्तु सर्वे प्लॅाट सं0-466, 467 एवं 469 हेतु नक्शे की समिति द्वारा दिनांक 13.6. 09 को अनुशंसा तथा नगर आयुक्त द्वारा दिनांक 13.6.09 को स्वीकृत किया गया है। अर्थात वगैर भू स्वामित्व के नक्शा अनुमोदित कर दिया गया।
अग्निशमन की अनापत्ति दिनांक 3.8.09 को प्राप्त हुई है जबकि नक्शे की स्वीकृति दिनांक 13.6.09 को ही दे दी गई अर्थात अग्निशमन की वगैर अनापत्ति की स्वीकृति हुई।
(ग) क्रमांक 90- Plan Case No P/Bandar Bagicha/ P C N-B+LG+G+6-765/95 वर्ष 2001 में एक भूखण्ड जो ''सहाय सदन'' नाम से जाना जाता था, पर निर्मार्णाधीन भवन पर निगरानी वाद प्रारम्भ की गई थी। श्री सहाय से श्री संजय कुमार सिन्हा भवन निर्माता, नूतन कन्स्ट्रक्शन द्वारा क्रय किया गया है जिसके उपरान्त दिनांक 5.9.08 को B+LG+G+6 (20.98 मी0) तल्ले के नक्शे की पुनरीक्षित स्वीकृति प्राप्त की गई। पुनः दिनांक 24.5.09 को B+LG+G+8 (36.60 मी0) तल्ले के नक्शे की द्वितीय पुनरीक्षित स्वीकृति प्राप्त की गई। जबकि निगरानी व्यूरो द्वारा तैयार कराये गये त्रुटियों के कंडिका 4 में यह भी उल्लेख है कि कनीय अभियन्ता का स्थल निरीक्षण दिनांक 8.6.09 को की गई थी और सहायक अभियन्ता से लेकर नगर आयुक्त तक संचिका में अनुशंसा एवं स्वीकृति दिनांक 20.5.09 से 24.5.09 की तिथि में की गई है।
इस प्रकार पुनरीक्षित नक्शे की स्वीकृति बिना प्लानिंग रिपोर्ट, बिना भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण के उचाई (23 मी0 से अधिकता वाले सामान्य भवन) के लिए अनापत्ति तथा बिना कन्डोनेशन कम्पाउडिंग की राशि जमा किये दे दी गई।
आवेदन के साथ संलग्न Power of Attorney श्री संजय सहाय के द्वारा दया बिल्डर्स की ओर से दिनांक 29.01.08 को हस्ताक्षरित है जो नोटरी पब्लिक से कराई गई है। यह बिहार अर्पाटमेंट स्वामित्व अधिनियम 2006 के अनुरूप नहीं है क्योंकि कोई भी विकास एकरारनामा के तहत डेवलपर्स नियुक्त होने पर वह निबंधित होना अनिवार्य है जिसकी प्रति नक्शे की स्वीकृति की संचिका में रहना भी आवश्यक है।
जॅाच दल द्वारा प्रतिवेदित है कि वर्ष 1999 के स्वीकृत नक्शा के तहत निर्माणाधीन संरचना को वर्ष 2008 में तोड़कर नये सिरे से राफ्ट फाडण्डेसन (नींव कार्य) से कार्य प्रारम्भ किया गया, जिसकी सम्पुष्टि निगरानी अन्वेषण व्यूरो के कांड सं0-54/10 से दायर प्राथमिकी के पृ0-53 व ि119 के क्रमांक 4 फोटो सं0-5 एवं 6 से होती है। वर्तमान समय में नक्शा की स्वीकृति/पुनरीक्षण के दौरान बिल्डींग वायलॅाज के प्रावधानों के तहत समीक्षा हेतु सर्वप्रथम स्थल का प्लानिंग रिपोर्ट (नगर निगम द्वारा निर्गत) का होना नितान्त आवश्यक है, जो नक्शा के दोनों पुनरीक्षण के दौरान नहीं लिया गया है।
उक्त से स्पष्ट है कि निर्धारित प्रावधानों का उल्लंधन कर नक्शो की स्वीकृति की कार्रवाई की गई। (घ) क्रमांक-33 P/Fraser Road/ P C N-7 -294/09 व्यूरो द्वारा प्रश्नगत स्थल के म्यूनिसिपल सर्वे प्लॅाट 65 के साथ साथ म्यूनिसिपल सर्वे प्लॅाट 66 के संबंध में उल्लेख किया गया है कि आवेदकों द्वारा योजना प्रतिवेदन एवं अन्य सभी भूमि दस्तावेजों और प्लान केस की मूल4 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 5555 फरफरफरफरवर) वर) वर) वर) 2015201520152015 स्वीकृति हेतु समर्पित सभी कागजातों पर म्यूनिसिपल प्लॅाट सं0-65 का ही उल्लेख है। इस प्रकार म्यूनिसिपल प्लॅाट सं0-66 पर आवेदकों के स्वामित्व का कोई दस्तावेज नहीं होने की स्थिति में भी उक्त प्लॅाट पर ए0 सी0 प्लान्ट हेतु स्वीकृति दी गई है, जो गलत है।
23.00 मी0 से उॅचा होने के बावजूद भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण से अनापत्ति निर्माण के पूर्व निर्माण हेतु नक्शा पारित करने के पहले प्राप्त नहीं किया गया है। फिर भी नक्शे की स्वीकृति दिया जाना मानव जीवन को खतरा में डालना है।
सहायक अभियन्ता द्वारा समीक्षा में स्क्रीन (फिल्म) को आधार भी माना गया है, जबकि स्वीकृत नक्शा और प्रस्तावित नक्शें में ऐसा स्पष्ट रूप से नहीं है। अगर यह सिनेमा से संबंधित मल्टीपलेक्स है तो न्यूनतम सेट बैक का स्पष्ट रूप से उल्लंधन किया गया है।
पुनरीक्षण हेतु आवेदकों या उनके किसी प्रतिनिधि या किसी अन्य का आवेदन संबंधित संचिका में नहीं है। बिना किसी पृष्टांकन के कनीय अभियन्ता द्वारा पुनरीक्षण की स्थल मापी स्केच एवं प्रतिवेदन दिया गया है। कनीय अभियन्ता द्वारा स्केच में बीजी3 निर्मित दिखाया गया है। कनीय अभियन्ता द्वारा स्केच और प्रतिवेदन में कोई तिथि अंकित नहीं है, पर मूल स्वीकृति के मापी जो दिनांक 27.05.09 को अन्य कनीय अभियन्ता द्वारा दी गई है, उसमें उस जगह को Vacant Land दर्शाया गया है। अमीन की मापी दिनांक 27.05.09 में भी उक्त प्लॅाट को खाली दर्शाया गया है। उस जगह पर पुनरीक्षण की मापी बीजी3 Existing दिखाया गया है। चूॅकि पुनरीक्षण की स्वीकृति दिनांक 12.06.09 को दी गई है अतः इन सत्रह दिनों बीजी3 का निर्माण हो जाना संभव नहीं है।
अतएव बिना स्वामित्व के म्यूनिसिपल प्लॅाट सं0-66 को सम्मिलित कर नक्शा स्वीकृत करने एवं मॅाल मल्टीपलैक्स बिल्डींग वायलॅाज के प्रावधान के विपरीत General Commercial Building Bylaws के प्रावधानानुसार नक्शा का पुनरीक्षण करना नियमानुकूल नहीं है। इसके अतिरिक्त 23.00 मी0 से अधिक उॅचाई के प्रस्तावित निर्माण बिना ए0 ए0 आई0 का उॅचाई में स्वीकृति प्राप्त किये नक्शा की स्वीकृति, पुनरीक्षण बिल्डींग वायलॅाज सह प्रचलित प्रावधानों का घोर उल्लंधन है।
नगर आयुक्त द्वारा पे्रषित प्रतिवेदन एवं श्री दूबे द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब के आलोक में की गई समीक्षा से स्पष्ट है कि श्री दूवे द्वारा नक्शा की स्वीकृति प्रदान करने में घोर अनियमितता बरती गई है। समीक्षोपरान्त उक्त वर्णित मामलों में आरोप प्रमाणित पाये गये है। प्रमाणित आरोपों के लिए वृहद दण्ड देने के बिन्दु पर श्री दूवे से विभागीय पत्रांक 1171 दिनांक 26.08.14 द्वारा पुनः द्वितीय कारण पृच्छा की गई।
2. श्री दूबे द्वारा समर्पित द्वितीय कारण पृच्छा में विन्दु वार निम्न तथ्य प्रस्तुत किया गयाः- (i) Appendix L Note 3 में वर्णित है कि ''धारा-36 के अधीन नक्शा दाखिल कर नक्शे की स्वीकृति प्राप्त की जाती है। पर उसके बाद निर्माण स्वीकृत प्लॅान पर न कर बिना नोटिस दिये प्लान से विचलित कर दिया जाता है पर संशोधित नक्शा बाद में समर्पित करने पर पाया जाता है कि संशोधित नक्शा वाईलाज के अनुकूल है।'' Plan Case No-537/80 में एक बड़े भू-भाग पर छोटा सा G+1 का नक्शा वर्ष 80 में स्वीकृत था। भूस्वामी द्वारा Existing Building Bylaws के तहत पुराने भवन को तोड़ कर नए B+G+7 भवन का नक्शा स्वीकृति हेतु समर्पित किया गया था। जब भवन में Basement जोड़ा हुआ है तो पुराने Foundation पर निर्माण कैसे संभव हो सकता है।
पुनरीक्षित नक्शा स्वीकृति के बाद ही पुराने भवन को तोड़कर नए भवन की स्वीकृति दी गई है। इसमें Appendix L Note 3 के उल्लंधन का आधार नहीं बनता है।
पुनः बताया गया है कि निर्गतकत्र्ता का हस्ताक्षर एवं मुहर नहीं था। निर्गतकत्र्ता मैं ही था। यदि मेरा हस्ताक्षर नहीं था तो नक्शा निर्गत कैसे हुआ ? यह कहना सरासर गलत है। यह आरोप मुझ पर नहीं बनता है।
(ii) कारण पृच्छा का उत्तर दिनांक 4.8.14 में स्पष्ट कहा था कि तत्कालीन नगर आयुक्त द्वारा पारित आदेश (96/07) के आलोक में मेरे द्वारा अर्थदण्ड के लिए प्रस्तावित किया जाता था। परन्तु तत्कालीन नगर आयुक्त द्वारा संभवतः इस अवधारणा पर नहीं माना गया कि Building Bylaws के तहत यह मान्य नहीं है। इसका साक्ष्य संचालन पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया था।
इस तरह एक नगर आयुक्त के अवैध आदेश (96/07) जिसे माननीय पटना उच्च न्यायालय द्वारा भी अवैध करार दिया गया है को दूसरे नगर आयुक्त द्वारा नहीं माना गया तो मैं किस तरह दोषी हूॅ स्पष्ट नहीं है। अतः आरोप मुक्त करने की कृपा की जाय।
(iii) आरोप सं0-3 से पुनः इंकार करता हूॅ क्योंकि प्लान केस के भूस्वामी के नाम पूणेश्वर सिंह बताया गया है। जब भूस्वामी पूणेश्वर सिंह है तो जमीन सरकारी कैसे हुआ ? मेरे समझ से परे है।
विशेष उल्लेखनीय है कि यह आरोप/बिन्दु आरोप प्रपत्र-''क'' में अंकित नहीं था। अतएव इसका विचारण न्यायिक दृष्टिकोण से संभव ही नहीं है। तथापि जहॅा तक मुझे स्मरण है कि कनीय अभियन्ता के माध्यम से स्थल जॅाचोंपरान्त समर्पित प्रतिवेदन की समीक्षा सहायक अभियन्ता द्वारा Existing Building Bylaws के अनुसार की जाती है। भूस्वामित्व के कागजात एवं Legal Agreement संबंधी जॅाच अपर नगर आयुक्त द्वारा की जाती है तथा तकनीकी जॅाच कार्यपालक अभियन्ता द्वारा की जाती है। उसके बाद अपर नगर आयुक्त एवं कार्यपालक अभियन्ता की Joint Noting बनता है जिसपर नगर आयुक्त द्वारा अगे्रतर कार्रवाई की जाती है।5 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 5555 फरफरफरफरवर) वर) वर) वर) 2015201520152015 अतः भूसंबंधी कागजात एवं Legal Agreement की पूरी जिम्मेवारी अपर नगर आयुक्त की होती है। उनके भूल के लिए मुझे कतई जिम्मेवार नहीं ठहराया जा सकता है।
दुर्गा रिभरभ्यू का नक्शा आरोप प्रपत्र-''क'' में नहीं है। इसका विचारण न्यायिक दृष्टि से संभव नहीं है। फिर भी जहॅा तक मुझे याद है कि 11 तल्ला उॅचाई हेतु नगर निगम के निबंधित वास्तुविद से तैयार नक्शा भूस्वामी द्वारा समर्पित किया गया था जिसे वर्ष 2007 में स्थल निरीक्षणोपरान्त तदेन नगर आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह द्वारा बीजी4 के लिए स्वीकृत किया गया था एवं जल संसाधन विभाग को NOC के लिए लिखा गया था। लगभग दो साल तक छव्ब् प्राप्त नहीं होने पर पुनरीक्षण हेतु आवेदन दिया गया। नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त एवं संबंधित अभियन्ताओं से स्थल निरीक्षण में बताया गया कि बांध के भीतर सैकड़ों अन्य भवनों का नक्शा नगर निगम द्वारा स्वीकृत है तो इस भवन के साथ दोहरी नीति क्यों अपनाई जा रही है?
उक्त निदेश के बाद नगर आयुक्त द्वारा संभवतः नक्शा स्वीकृत किया गया। बाद में जल संसाधन विभाग द्वारा NOC दिया गया चूॅकि उक्त भूखण्ड जल संसाधन विभाग का नहीं था। अतः यह आरोप मुझ पर नहीं बनता है। (iv) गठित आरोप सं0-4 में भूखण्ड के सामने Frontage नहीं रहने के कारण नक्शा स्वीकृत करने का आरोप लगाया गया है एवं प्लान केस सं0-386/90 का संदर्भ दिया गया है एवं बताया गया है कि 04.10.93 को तदेन नगर आयुक्त द्वारा नक्शा अस्वीकृत किया गया था।
इस संबंध में कहना है कि भूस्वामी द्वारा नगर निगम के निबंधित वास्तुविद से तैयार नया नक्शा समर्पित किया गया था। नगर आयुक्त द्वारा समिति के सदस्यों एवं अन्य संबंधित अभियन्ताओं के साथ स्थल निरीक्षण में बताया गया कि 04.10.93 की स्थिति से अभी की स्थिति भिन्न है। भूखण्ड के सामने लगभग 120 फीट चौड़ा मुख्य सड़क है। नगर आयुक्त एवं अपर नगर आयुक्त द्वारा स्थल पर ही आवश्यक निर्देश दिया गया। उक्त निदेश एवं Building Bylaws के तहत सहायक अभियन्ता द्वारा समीक्षा किया गया। समिति द्वारा अपने अपने दायित्व के जॅाच के बाद नोटिंग तैयार कर अगे्रतर कार्रवाई हेतु नगर आयुक्त के पास भेजा गया एवं नगर आयुक्त द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।
उक्त आरोप निराधार एवं काल्पनिक है। मुझे आरोप मुक्त करने की कृपा की जाय।
(v) क्रमांक 115 में वर्णित भवन की उॅचाई उल्लेखित नही है। जहॅा तक मुझे याद है कि उक्त भवन की उॅचाई भारतीय विमान पतनन द्वारा निर्धारित मानक उॅचाई से कम है। अतः उक्त भवन हेतु विमान पतनन के NOC की आवश्यकता ही नहीं थी।
वैसे भी आरोप प्रपत्र-'क' में अंकित आरोपों से इतर तथ्यात्मक वर्णन एक संपुष्टीय प्रक्रिया के द्वारा ही संभव और विधिमान्य होगा। अतः यह आरोप नहीं बनता है।
क्रमांक 82 पर अंकित भूखण्ड पर पुनरीक्षण की कार्रवाई अग्निशमन द्वारा प्राप्त पूर्व No Objection Certificate के आधार पर किया गया प्रतीत होता है जो पूर्व में स्वीकृति के समय से ही संचिका में संधारित एवं भवन में प्रावधानित था।
क्रमांक 5 पर अंकित भवन की उॅचाई 23.15 मी0 बताया गया है। 23.15 मी0 रोड के किस बिन्दु से नापी गई है उल्लेख नहीं है। 15 से0मी0 (6 इंच) अंतर बताया गया है। चूॅकि नापी एक निर्धारित बिन्दु है, इसका उल्लेख आरोप में नहीं किया गया है। अतः यह आरोप भी मुझ पर नहीं बनता है एवं आरोप मुक्त करने की कृपा की जाय। (vi) Bihar Apartment Act 2006, Bihar Municipal Act 2007 में समाहित नहीं था। नगर विकास एवं आवास विभाग का पत्रांक 2359 दिनांक 22.6.07 में स्पष्ट निदेश था कि पूर्व से चल रहे Building Bylaws के तहत ही नक्शा स्वीकृति की जाय। पूर्व से Existing Building Bylaws में Apartment Act समाहित नहीं रहने के कारण सहायक अभियन्ता द्वारा नक्शे की समीक्षा की गई होगी एवं Building Bylaws के तहत रहने पर नक्शा की स्वीकृति संभवतः नगर आयुक्त द्वारा दी गई थी।
यह आरोप बिन्दु प्रपत्र-'क' में नहीं था। अतः यह विधिमान्य नहीं है। फिर भी क्रमांक 90 पर अंकित भूखण्ड के नक्शे का संदर्भ दिया गया है एवं बताया गया है कि आवेदन के साथ संलग्न Power of Attorney भूस्वामी श्री संजय सहाय के द्वारा दया विल्डर्स की ओर से हस्ताक्षर है जो नोटरी पब्लिक से कराई गई बताया गया है। इस तरह की भूस्वामित्व एवं Developement Agreement संबंधी मामले की जॅाच की जिम्मेवारी समिति के वरीय सदस्य अपर नगर आयुक्त की रहती है। इससे कार्यपालक अभियन्ता का कोई सरोकार नहीं होता है।
अतः यह आरोप मेरे अधिकार क्षेत्र से संबंधित नहीं है। आरोप मुक्त किया जाना चाहिए। 3. श्री दूवे से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब की समीक्षा सरकार के स्तर पर की गई। समीक्षा में विन्दुवार निम्न तथ्य पाया गयाः-
(i) Appendix L Note 3 के उल्लंधन से संबंधित बिन्दू में श्री दूबे द्वारा स्वीकार किया गया है कि Plan Case No-537/80 में G+1 का पूर्व निर्मित भवन को तोड़कर B+G+7 भवन निर्माण की स्वीकृति उनके द्वारा दी गई थी। किन्तु नगर आयुक्त के आदेश के अनुसार श्री दूबे, कार्यपालक अभियंता द्वारा दिनांक 24.02.2010 में हस्ताक्षरित है जिसपर मिलान करने वाले सहायक अभियंंता एवं कार्यालय सहायक का हस्ताक्षर नहीं है एवं निर्गत पंजी के अवलोकन से दिनांक 24.02.2010 की तिथि में कोई नक्शा निर्गत नहीं हुआ है। निर्गत पंजी में भी निर्गतकर्ता एवं कार्यालय सहायक के द्वारा हस्ताक्षर किया जाता है तथा मुहर लगाया जाता है। इस प्रकार दिनांक 24.02.2010 को6 (cid:1)बहार गजट (असाधारण), 5555 फरफरफरफरवर) वर) वर) वर) 2015201520152015 कोई नक्शा निर्गत नहीं हुआ है एवं यह नक्शा फर्जी है। उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में श्री दूबे का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
(ii) नक्शों के विचलन के संबंध में स्वीकृति के लिए आवश्यक पॉंच गुुणा अर्थ दंड नहीं वसूलने के मामले में श्री दूबे द्वारा कोई नया तथ्य नहीं प्रस्तुत किया गया है। अतः श्री दूबे का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। (iii) भूस्वामियों का स्वामित्व नहीं रहने एवं बिना अनापत्ति प्राप्त किये ही नक्शा स्वीकृति कें मामले में श्री दूबे द्वारा न तो कोई प्रमाण पत्र संलग्न किया गया है और न ही ऐसा प्रमाणिक तथ्य दिया गया है जिससे उनका उत्तर स्वीकार योग्य हो सके। अतः इस बिन्दु पर भी श्री दूबे का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
(iv) भूखण्ड कें सामनेे Frontage नहीं रहने के मामले में श्री दूबे द्वारा कहा गया है कि नगर आयुक्त द्वारा समिति के सदस्यों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ स्थल निरीक्षण में बताया गया कि वर्तमान स्थिति 04.10.93 की स्थिति से भिन्न है जब नक्शा अस्वीकृत किया गया था एवं वर्तमान में 120 फीट का Frontage है। नगर आयुक्त एवं अपर नगर आयुक्त द्वारा स्थल पर ही आदेश दिया गया था। किन्तु इस संबंध में श्री दूबे द्वारा कोई अभिलेख संलग्न नहीं किया गया है जिससे उनकी बात प्रमाणित हो सके।
इस संबंध मेेंं नगर आयुक्त के आदेश प्लान केस संख्या 386/90 पर उल्लिखित है कि उक्त मामले में दिनांक 4.10.93 को सेटबैक में कमी के कारण नक्शा अस्वीकृत किया गया था। पुनः दिनांक 10.6.2009 को बैक डेटिंग कर मॉल/मल्टीप्लेक्स के नक्शे की स्वीकृति दी गई जबकि 25.5.09 को दिये गये आवेदन में एक रसीद संं0 5303 दिनांक 23.6.09 का है। इस मामले में Set back और अन्य पहलुओं का भी उल्लंघन किया गया है। इस मामले श्री दूबे को भी दोषी माना गया है।
उक्त तथ्यों के आलोक में श्री दूबे का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया।
(v) भारतीय विमान पतनन, अग्निशमन से अनापत्ति प्राप्त किये बिना भवन के नक्शे की स्वीकृति के संबंध में श्री दूबे द्वारा कोई प्रमाणक तथ्य नहीं प्रस्तुत किया गया है। नगर आयुक्त के आदेश क्रमांक 82 प्लान केस सं0 572/09 के अनुसार अग्निशमन की घटनोत्तर अनापत्ति 3.8.09 को प्राप्त की गई जिसमें श्री दूबे को भी उत्तरदायी माना गया है। श्री दूबे का उत्तर तथ्यों पर आधारित न होकर यादाश्त पर आधारित है।
भवन की उॅंचाई Stair headroom सहित 23.15 मी. होता है जिसके लिए भारतीय विमान पतनन का अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य है जिसकी अनदेखी कर नक्शे की स्वीकृति दी गई।
उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में श्री दूबे का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। (vi) Bihar Apartment Act 2006 के उल्लंघन के संबंध में श्री दूबे कहना है कि यह Act Municipal Act 2007 में समाहित नहीं था एवं पूर्व से Existing Building Bylaws में Apartment Act समाहित नहीं रहने के कारण संभवतः नक्शे की स्वीकृति नगर आयुक्त द्वारा दी गई थी। जबकि नगर आयुक्त के आदेश जो निगरानी थाना कांड सं0 54/10 के क्रमांक 90 से संबंधित है के अनुसार Bihar Apartment Act 2006 का उल्लंघन प्रमाणित है। अपने उत्तर के साक्ष्य के रूप में श्री दूबे द्वारा कोई अभिलेख संलग्न नहीं किया गया है। उक्त तथ्यों के आलोक में श्री दूबे का उत्तर स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। वर्णित तथ्यों के आलोक में श्री दूबे से प्राप्त द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब स्वीकार योग्य नहीं पाया गया। समीक्षोपरांत श्री दूबे के विरूद्ध उपरोक्त आरोप प्रमाणित पाया गया।
4. प्रमाणित आरोपों के लिए श्री दूबे के विरूद्ध निम्न दंड देने हेतु प्रस्तावित किया गयाः- '' सेवा से बर्खास्तगी ''
5. उक्त प्रस्ताव में बिहार लोक सेवा आयोग, पटना का परामर्श प्राप्त की गयी। तत्पश्चात मामले की पुनर्समीक्षा की गयी। समीक्षोपरान्त श्री दूवे के विरूद्व ''सेवा से बर्खास्तगी'' का दण्ड देने का निर्णय लिया गया। 6. उक्त दण्ड प्रस्ताव पर सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।
अतः उक्त निर्णय के आलोक में श्री ब्रह्मदेव दूवे, तत्कालीन कार्यपालक अभियन्ता, पटना नगर निगम, पटना सम्प्रति सहायक अभियन्ता (निलंबित), जल संसाधन विभाग, पटना को निम्न दण्ड दिया एवं संसूचित किया जाता हैः- '' सेवा से बर्खास्तगी ''
बिहार-राज्यपाल के आदेश से, सतीश चन्द्र झा, सरकार के अपर सचिव।
———— अधी-क, सिचवालय मुिणालय,
(cid:1)बहार, पटना (cid:13)ारा ूकािशत एवं मु3ित। (cid:1)बहार गजट (असाधारण) 256-571+10-ड)0ट)0पी0। Website: http://egazette.bih.nic.in